samacharsecretary.com

फसल खराब होने पर ग्रामीणों ने मक्का प्लांट में की तोड़-फोड़

कोंडागांव. जिले के कोकोड़ी गांव में स्थित मां दंतेश्वरी मक्का प्रसंस्करण प्लांट में देर रात ग्रामीणों ने घुसकर जमकर हंगामा किया. आक्रोशित ग्रामीणों ने प्लांट परिसर में खड़ी कार, ट्रैक्टर सहित कई वाहनों में तोड़फोड़ कर दी. घटना में प्रारंभिक तौर पर 10 से 20 लाख रुपये तक के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है. सूचना मिलते ही छत्तीसगढ़ पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची. कोंडागांव के एसपी, एसडीएम सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया. एहतियातन क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है. हालांकि गांव में अभी भी तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है. अपशिष्ट जल से फसल खराब होने का आरोप ग्रामीणों का आरोप है कि मक्का प्लांट से निकलने वाला तरल अपशिष्ट (वेस्ट) उनके खेतों तक पहुंच रहा है, जिससे फसलें खराब हो रही हैं. किसानों का कहना है कि वे लंबे समय से प्रशासन को आवेदन देकर कार्रवाई की मांग कर रहे थे, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. इसी नाराजगी के चलते ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से प्लांट का घेराव कर दिया. बताया जा रहा है कि रातभर गांव के लोगों ने प्लांट को चारों ओर से घेर रखा. बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई. एक वाहन चालक को जान बचाने के लिए रातभर जंगल में छिपकर रहना पड़ा. स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कुछ समय के लिए पुलिस बल को भी पीछे हटना पड़ा. प्रबंधन की भूमिका पर उठे सवाल ग्रामीणों ने प्लांट के एमडी विनोद खन्ना पर भी सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि प्रबंधन की लापरवाही और नियमित निगरानी के अभाव में समस्या बढ़ती गई. ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्लांट प्रबंधन समय रहते शिकायतों पर ध्यान देता तो हालात इस स्तर तक नहीं पहुंचते. हालांकि, प्रबंधन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. जांच और शांति की अपील प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है. नुकसान का आकलन किया जा रहा है और प्रदूषण से जुड़े आरोपों की भी जांच की जाएगी. अधिकारियों ने ग्रामीणों से शांति बनाए रखने की अपील की है. फिलहाल, कोकोड़ी गांव में हालात तनावपूर्ण हैं और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है.

MP के ‘धन-कुबेर’ IPS अफसर: किराए से आमदनी सैलरी से ज्यादा, संपत्ति हुई सार्वजनिक

भोपाल  मध्यप्रदेश कैडर के कई आईपीएस अधिकारी अपनी सैलरी से ज्यादा कमाई किराए और संपत्तियों से कर रहे हैं। यह खुलासा केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय को सौंपे गए वार्षिक संपत्ति विवरण (Annual Property Return) से हुआ है। नियम के मुताबिक सभी आईपीएस अधिकारियों को अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा देना अनिवार्य होता है। ताजा आंकड़ों में सामने आया है कि प्रदेश के कई वरिष्ठ अधिकारी करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं और हर साल लाखों-करोड़ों रुपए किराए से कमा रहे हैं। अजय शर्मा के पास 11.65 करोड़ की संपत्ति पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन के अध्यक्ष अजय शर्मा के पास करीब 11 करोड़ 65 लाख रुपए की संपत्ति दर्ज है। उन्हें हर महीने लगभग 3 लाख 80 हजार रुपए किराया प्राप्त होता है। भोपाल और दिल्ली सहित अन्य शहरों में भी उनकी अचल संपत्तियां बताई गई हैं। उपेंद्र जैन और वरुण कपूर भी करोड़पति आईपीएस उपेंद्र जैन के पास 8 करोड़ 39 लाख रुपए की संपत्ति है। इंदौर, बड़वाह और भोपाल के टीटी नगर क्षेत्र में उनकी संपत्तियां दर्ज हैं। जेल डीजी वरुण कपूर के पास 8 करोड़ 43 लाख रुपए की अचल संपत्ति है। उन्हें हर साल करीब 5 लाख 12 हजार रुपए किराए से आय होती है। जयदीप प्रसाद और अनिल कुमार की भी बड़ी संपत्ति एडीजी, एससीआरबी जयदीप प्रसाद के पास 5 करोड़ 32 लाख रुपए की चल संपत्ति दर्ज है। रांची, हजारीबाग, भोपाल, सीहोर और गुड़गांव में उनकी संपत्तियां हैं। उन्हें हर साल करीब 74 लाख रुपए की आय इन संपत्तियों से होती है। महिला शाखा के स्पेशल डीजी अनिल कुमार के पास 4 करोड़ 81 लाख रुपए की संपत्ति बताई गई है। नियम क्या कहते हैं? केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय के नियमों के अनुसार हर आईपीएस अधिकारी को अपनी संपत्ति का पूरा ब्यौरा देना अनिवार्य है। इसी प्रक्रिया के तहत यह जानकारी सार्वजनिक रिकॉर्ड में आई है।मध्यप्रदेश में कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं और नियमित वेतन के अलावा किराए से भी बड़ी आय अर्जित कर रहे हैं। संपत्ति विवरण के खुलासे के बाद प्रशासनिक हलकों में इसको लेकर चर्चा तेज हो गई है।

2002 में अनुबंध पर लगे चालक अब नियुक्ति तिथि से ही किए जाएंगे पक्के

चंडीगढ़. परिवहन विभाग में वर्ष 2002 में अनुबंध पर लगे चालकों को अब नियुक्ति तिथि से ही पक्का किया जाएगा। प्रदेश सरकार ने 14 जनवरी का आदेश वापस ले लिया है, जिसमें सभी 347 चालकों को वर्ष 2006 से नियमित किया गया था। इन्हें पुरानी पैंशन योजना के साथ फैमिली पेंशन योजना का भी लाभ मिलेगा। परिवहन निदेशालय की ओर से इस संबंध में सभी रोडवेज महाप्रबंधकों और वरिष्ठ यांत्रिक अभियंता मंत्री कार अनुभाग एवं राजकीय केंद्रीय कर्मशाला को निर्देश जारी कर दिया गया है। इससे पहले विगत जनवरी में हरियाणा राज्य परिवहन विभाग के विभिन्न आगारों में वर्ष 2002 से संविदा आधार पर नियुक्त कार्यरत चालकों को वर्ष 2006 से नियमित किया गया था। अब उन्हें वर्ष 2002 से उनकी नियुक्ति की प्रारंभिक तिथि से ही नियमित किया जाएगा। इन चालकों की अर्हक सेवा (क्वालीफाइंग सर्विस) की गणना उनकी प्रारंभिक नियुक्ति तिथि वर्ष 2002 से की जाएगी तथा उन्हें इसके आधार पर ए.सी.पी. सहित सभी सेवा-लाभप्रदान किए जाएंगे। इन चालकों की क्वालीफाइंग सर्विस की गणना उनकी प्रारंभिक नियुक्त्ति तिथि वर्ष 2002 से की जाएगी तथा उन्हें इसके आधार पर एसीपी सहित सभी सेवा-लाभ प्रदान किए जाएंगे। सभी संबंधित चालकों को पुरानी पेंशन योजना के साथ-साथ फैमिली पेंशन योजना का लाभ भी प्रदान किया जाएगा। इन चालकों के लिए सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) का नया खाता खोला जाएगा। यह सभी लाभ दिनांक 31 अगस्त 2024 तक कल्पित (नोशनल) रूप में तथा एक सितंबर 2024 से वास्तविक रूप में प्रदान किए जाएंगे। परिवहन निदेशालय ने इस संबंध में सभी रोडवेज महाप्रबंधकों, वरिष्ठ यांत्रिक अभियंता (मंत्री कार अनुभाग) और राजकीय केंद्रीय कर्मशाला को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं। पहले जनवरी में जारी आदेश के तहत वर्ष 2002 से संविदा पर कार्यरत चालकों को 2006 से नियमित किया गया था, जिससे उनकी सेवा अवधि और पेंशन लाभ सीमित हो रहे थे। अब संशोधित निर्णय के अनुसार उनकी अर्हक सेवा (क्वालीफाइंग सर्विस) की गणना वर्ष 2002 की प्रारंभिक नियुक्ति तिथि से की जाएगी। नए आदेश के तहत चालकों को एसीपी (एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन) सहित सभी सेवा लाभ नियुक्ति तिथि से मिलेंगे।

नगर परिषद भरोसा के कर्मचारियों को भुगतान न मिलने से हो रही परेशानी

इंदौर नगर परिषद भोरासा जिला देवास मध्य प्रदेश यहां के कर्मचारी संघ के कर्मचारी गण ने बताया कि 6 महीने से अधिक समय हो गया है ! अभी तक हमारी तनख्वा आप प्राप्त है कर्मचारियों ने पूछा कि हमारी तनक अभी तक क्यों नहीं मिल पा रही है? तो जवाब में आया कि अभी तक ऊपर से तनख्वाह नहीं आई तो हम आपको कहां से दें ? यह भी प्राप्त हुआ कि उनमें से एक कर्मचारी बहुत ज्यादा परेशान होकर मुख्यमंत्री मोहन यादव जी से विनती कर रहा है कि हमारे बच्चों को स्कूल से निकाला जा रहा है और परीक्षा नजदीक आ रही है ऐसे में हमारे हमारे बच्चों का भविष्य भी अंधकार में होगा अगर हम लोगों ने स्कूल की फीस भरने में असमर्थ हैं? और इतना ही नहीं हमारे घर में किराने का सामान नहीं है कुछ कर्मचारी है बोल रहे कि इस स्थिति में हम जहर खा लेंगे उसके बाद भी तो हमें आप पैसा दोगे अगर हमें पैसा नहीं दिया तो अगला कदम वही होगा जो हमने बोला है? उसके बाद हम मरे या जिए इस से कोइ फरक नही पड़ रहा है !सुनील ठाकुर कर्मचारी नगर परिषद ने कहा कि समय रहते भुगतान करें ताकि हमारे साथ-साथ हमारे परिवार का भी भविष्य उज्जवल में हो सके कर्मचारियों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से मांग की है कि नगर परिषद भरोसा के कर्मचारियों का भुगतान अति शीघ्र कराया जाए।

भारत-पाकिस्तान हाईवोल्टेज भिड़ंत, कोलंबो में मौजूद रहेंगे BCB चीफ अमीनुल इस्लाम

ढाका बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) के प्रमुख अमीनुल इस्लाम ने कहा है कि वह भारत और पाकिस्तान के बीच रविवार को होने वाले टी20 विश्व कप मैच देखने के लिए कोलंबो में जाएंगे और उन्हें उम्मीद है कि पिछले कुछ सप्ताह से चल रहे तनावपूर्ण माहौल के बाद भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के साथ उनके संबंध सुधरेंगे। इस्लाम ने बांग्लादेश के अखबार ‘प्रथम आलो’ से कहा कि इस हाई-प्रोफाइल मैच के लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) की तरफ से निमंत्रण मिला है। उन्होंने कहा, ‘‘आईसीसी ने एक फैसला लिया है। आईसीसी के प्रमुख हितधारक ये पांच एशियाई देश हैं तथा वह चाहते हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच 15 फरवरी को होने मैच के लिए सभी पांच एशियाई देशों के प्रतिनिधि एक साथ स्टेडियम में मौजूद रहें, मैच देखें और एक-दूसरे से बात करें।’’ भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश और अफगानिस्तान एशिया के आईसीसी में महत्वपूर्ण सदस्य हैं। इस्लाम से पूछा गया कि क्या इस बैठक से बीसीसीआई के साथ उसके तनावपूर्ण संबंध खत्म करने में मदद मिलेगी, उन्होंने कहा, ‘‘‘आप इसे कुछ इसी तरह मान सकते हैं।’’ बीसीसीआई और बीसीबी के बीच विवाद तब शुरू हुआ जब भारतीय बोर्ड ने कुछ अज्ञात परिस्थितियों के चलते बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को कोलकाता नाइट राइडर्स के आईपीएल अनुबंध से बाहर करने का आदेश दिया। ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि यह कदम बांग्लादेश में हुई राजनीतिक हिंसा से प्रेरित था जिसमें हिंदुओं को निशाना बनाया गया था। बांग्लादेश ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए विश्व कप मैचों के लिए भारत आने से इनकार कर दिया। बीसीसीआई के पूर्व सचिव जय शाह की अध्यक्षता वाली आईसीसी ने बांग्लादेश की चिंताओं को खारिज कर दिया था। बांग्लादेश हालांकि अपने रुख पर कायम रहा इसके बाद उसे टूर्नामेंट से बाहर कर दिया गया और उसकी जगह स्कॉटलैंड को दे दी गई। इस्लाम ने कहा कि बोर्ड यह सुनिश्चित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन तैयार करेगा जिससे आईसीसी की तरफ से उन्हें मिले आश्वासनों को अंतिम रूप दे दिया जाए। उन्होंने कहा, ‘‘हम एक समझौता भी करेंगे। यह एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) जैसा दस्तावेज होगा, ताकि कोई अनिश्चितता न रहे। आईसीसी के साथ (समझौता ज्ञापन तैयार करने के संबंध में) चर्चा लगभग अंतिम पड़ाव पर है।’’  

महाकाल की भक्ति में सुविधा: महाशिवरात्रि पर चलेंगी तीन मेला स्पेशल ट्रेनें

उज्जैन  महाशिवरात्रि महापर्व पर बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं और सीहोर (कुबेरेश्वर धाम) जाने वाले यात्रियों के लिए रेलवे ने बड़ी राहत दी है। पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल ने यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए उज्जैन से भोपाल और संत हिरदाराम नगर के मध्य तीन जोड़ी मेला स्पेशल ट्रेनें (Special Mela Trains) चलाने का निर्णय लिया है। मंडल रेल प्रवक्ता मुकेश कुमार ने बताया कि ये ट्रेनें 13 से 23 फरवरी तक संचालित की जाएंगी। ट्रेनों का शेड्यूल -1. उज्जैन संत हिरदाराम नगर उज्जैन (09305/09306) संचालनः 13 से 22 फरवरी तक प्रतिदिन । समयः उज्जैन से सुबह 09:00 बजे चलकर दोपहर 13:30 बजे संत हिरदाराम नगर पहुंचेगी। वापसी में वहां से दोपहर 14:30 बजे चलकर शाम 19:30 बजे उज्जैन आएगी। स्टॉपेजः तराना रोड, मक्सी, बेरछा, कालीसिंध, अकोदिया, शुजालपुर, कालापीपल और सीहोर।     उज्जैन भोपाल उज्जैन (09307/09308) संचालनः 13 से 23 फरवरी तक प्रतिदिन। समयः उज्जैन से रात 21:00 बजे चलकर रात 02:10 बजे भोपाल पहुंचेगी। वापसी में भोपाल से सुबह 03:10 बजे चलकर सुबह 08:00 बजे उज्जैन आएगी। स्टॉपेजः उपरोक्त स्टेशनों के साथ संत हिरदाराम नगर पर भी ठहराव।     उज्जैन संत हिरदाराम नगर उज्जैन (09313/09314) – संचालनः 13-22 फरवरी तक रोज समयः उज्जैन से शाम 16:00 बजे चलकर रात 21:40 बजे संत हिरदाराम नगर पहुंचेगी। वापसी में रात 22:30 बजे चलकर अगले दिन रात 2 बजे उज्जैन पहुंचेगी। स्टॉपेजः तराना रोड, मक्सी, बेरछा, कालीसिंध, अकोदिया, शुजालपुर, कालापीपल और सीहोर। कोच और सुविधा रेलवे प्रशासन के अनुसार, इन मेला स्पेशल ट्रेनों में यात्रियों की सुविधा के लिए सामान्य और स्लीपर श्रेणी के कोच लगाए जाएंगे। इससे कम बजट में यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को काफी सहूलियत मिलेगी। 

महेंद्रगढ़ जिले में 15 खेलों के खुलेंगे खेलो इंडिया केंद्र

चंडीगढ़. भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) ने देश भर में 139 अतिरिक्त खेलों इंडिया केंद्रों को मंजूरी दी है। इसके तहत महेंद्रगढ़ जिले में भी विभिन्न 15 खेलों के केंद्र स्थापित किए जाएंगे। खेल विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि जिले में निम्नलिखित 15 खेल विधाओं में केंद्र स्थापित करने की योजना है। इनमें ताइक्वांडो, वुशु, कराटे, जू-जित्सु, कुराश, रोइंग, कयाकिंग और कैनोइंग, सेलिंग, शूटिंग, साइकिलिंग, जिम्नास्टिक, सेपकटकरा, इक्वेस्ट्रियन (घुड़सवारी), स्क्वैश और गोल्फ शामिल हैं। उन्होंने बताया कि केंद्रों की स्थापना के लिए उन संस्थानों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनके पास खेल के लिए पर्याप्त मैदान और आधुनिक ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध हो।

75 किलोमीटर दूर खड़ी कार का कटा टोल!

भवानीगढ़. भवानीगढ़ में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां घर के बाहर खड़ी कार से 75 km दूर स्थित जगजीतपुरा टोल प्लाजा पर 120 रुपये टोल टैक्स कट गया। कार मालिक तब हैरान रह गया जब उसके मोबाइल पर फास्टैग के जरिए रकम कटने का मैसेज आया। इस बारे में कार मालिक अनीश गर्ग निवासी नई अनाज मंडी भवानीगढ़ ने बताया कि उसकी कार नंबर P.B. 13 AL 0831 पूरा दिन घर पर ही खड़ी रही। कार मालिक अनीश गर्ग ने बताया कि वह खुद कहीं बाहर नहीं गया। इसके अलावा उसका कोई दोस्त या रिश्तेदार भी कार लेकर नहीं गया, लेकिन इसके बावजूद जगजीतपुरा टोल प्लाजा से उसके अकाउंट से 120 रुपये कट गए। जिससे वह हैरान और परेशान है। मालिक ने कहा कि उसने कभी उस टोल प्लाजा का नाम तक नहीं सुना और न ही कभी अपनी गाड़ी वहां से गुजारी है। मालिक के मुताबिक, यह घटना FASTag सिस्टम में किसी टेक्निकल गड़बड़ी या गाड़ी का नंबर गलत पढ़ने की वजह से हुई होगी। उसने इस बारे में बैंक और संबंधित अधिकारियों से शिकायत करने की तैयारी कर ली है। उसकी गाड़ी CCTV कैमरे की निगरानी में है, जिसकी फुटेज सबूत के तौर पर पेश की जाएगी। इस घटना से इलाके के लोगों में भी चिंता है। लोगों का कहना है कि अगर घर में खड़ी गाड़ियों से भी टोल काटा जाता है, तो यह एक गंभीर मामला है और संबंधित विभाग को ऐसे मामलों की जांच करनी चाहिए। लोगों ने कहा कि संबंधित अधिकारियों को मामले की जांच कर सच्चाई सामने लानी चाहिए और अगर कोई टेक्निकल खराबी है, तो उसे तुरंत ठीक किया जाना चाहिए ताकि आम लोगों को परेशानी न हो।

शासकीय उचित मूल्य की दुकान के सेल्समैन ने बायोमेट्रिक लेकर भी नहीं दिया राशन

रायपुर/आरंग. शासन की सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत योजनाओं को जमीनी स्तर पर कैसे पलीता लगाया जाता है, इसकी एक तस्वीर ग्राम पंचायत नारा में देखने को मिली है. ग्रामीणों की माने तो यहां के शासकीय उचित मूल्य की दुकान के सेल्समैन रामलाल रात्रे ने न केवल नियमों की धज्जियां उड़ाई हैं, बल्कि लगभग 300 गरीब परिवारों के मुंह से निवाला छीनकर एक बड़े भ्रष्टाचार को अंजाम दिया है. ग्रामीणों ने अपना दुखड़ा सुनाते हुए बताया कि सेल्समैन ने चालाकी से सभी हितग्राहियों के बायोमेट्रिक (अंगूठा) मशीन पर ले लिए, ताकि रिकॉर्ड में वितरण ‘सफल’ दिखाई दे. लेकिन जब राशन देने की बारी आई, तो हितग्राहियों को खाली झोला लेकर घर लौटना पड़ा. पिछले 3 महीनों से यही खेल चल रहा है. ग्रामीणों ने बताया कि सेल्समेन रामलाल रात्रे बायोमेट्रिक मशीन पर अंगूठा लगवा लेने के बाद कहते थे कि ऊपर से राशन नहीं आया है, जब आएगा तब देंगे, लेकिन महीना बीत जाने के बाद भी राशन नहीं मिलता था. ऑडिट में फूटा ‘घोटाले का फोड़ा’ ग्रामीणों की लगातार शिकायतों के बाद जब फूड इंस्पेक्टर ने दुकान का औचक निरीक्षण और स्टॉक ऑडिट किया, तो भ्रष्टाचार की परतें उखड़ती चली गईं. जांच के दौरान सेल्समैन रामलाल रात्रे डर के मारे फरार रहा, जो स्वयं उसके गुनाह की पुष्टि करता है. राशन दुकान के ताले को कटर मशीन से तोड़ा गया फिर जांच कार्यवाही शुरू हो सकी. सूत्रों के अनुसार, दिसंबर और जनवरी माह के लिए नागरिक आपूर्ति निगम ने जो आबंटन भेजा था, वह कागजों में तो बंट गया, लेकिन भौतिक रूप से गायब है. शासकीय उचित मूल्य की दुकान संख्या 442003103 में 495.94 क्विंटल चावल, 16.39 क्विंटल शक्कर और 16.22 क्विंटल नमक का आबंटन हुआ है. लेकिन हितग्राहियों को अभी तक राशन का वितरण नहीं हो पाया है. निरीक्षण के दौरान राशन दुकान में चावल ही नहीं मिला है. प्रशासन की चुप्पी और ग्रामीणों का आक्रोश हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में राशन का गबन बिना किसी ऊंचे संरक्षण के संभव नहीं है. ग्रामीण पिछले कई महीनों से दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं, लेकिन अब तक आरोपी सेल्समैन की गिरफ्तारी नहीं होना प्रशासनिक सुस्ती पर सवाल खड़े करता है. खाद्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, सेल्समैन पर आवश्यक वस्तु अधिनियम और गबन की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने की तैयारी की जा रही है. दुकान की जांच में सामने आई गड़बड़ियां निरीक्षण करने पहुंची खाद्य निरीक्षक पुष्पा चौधरी ने बताया कि हितग्राहियों की शिकायत पर ग्राम पंचायत नारा स्थित शासकीय उचित मूल्य का निरीक्षण किया गया है, जिसमें कई गड़बड़ियां सामने आई है. मौके पर कुछ हितग्राही आए थे जिनका बायोमेट्रिक लेकर उन्हें अभी तक राशन नहीं दिया गया है. अन्य हितग्राहियों की जानकारी लेते हुए बीते महीनों में राशन दुकान को आबंटित चावल, शक्कर और नमक की मात्रा का आंकलन किया जा रहा है. जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजा जाएगी, जिसके बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.

एमपी में रेलवे विस्तार पर पर्यावरण चिंता, लाखों पेड़ों की कटाई को केंद्र की हरी झंडी बाकी

इंदौर मध्यप्रदेश में महत्वाकांक्षी महू-खंडवा गेज परिवर्तन परियोजना के तहत घने जंगलों में निर्माण शुरू करने के लिए रेलवे ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से अंतिम स्वीकृति मांगी है। अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद दो जिलों में फैले घने जंगलों में बड़ी रेल लाइन के निर्माण का रास्ता साफ हो जाएगा। दरअसल, भारतीय रेलवे ने मध्य प्रदेश में महू-खंडवा लाइन का गेज बदलने का काम शुरू करने के लिए केंद्र से आखिरी मंजूरी मांगी है। इस काम में 1.24 लाख से ज्यादा पेड़ों को काटा जाएगा। एक बार केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से मंजूरी मिल जाने के बाद, दो जिलों के जंगलों में ब्रॉड गेज लाइन के लिए पेड़ों की कटाई शुरू हो जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि 156 km की ब्रॉड-गेज लाइन, आज़ादी से पहले रियासतों के समय बिछाए गए 118 km के नैरो-गेज ट्रैक की जगह लेगी.गेज बदलने का काम चल रहा है और अगले दो साल में पूरा होने की उम्मीद है.एक बयान में वेस्टर्न रेलवे के रतलाम डिवीजन के PRO मुकेश कुमार ने कहा, लगभग 90 km के महू (डॉ. अंबेडकर नगर)-ओंकारेश्वर रोड सेक्शन के बाकी गेज बदलने के काम के लिए केंद्रीय मंत्रालय से आखिरी मंज़ूरी की जरूरत है.उन्होंने कहा, “महू और मुख्त्यारा-बलवाड़ा के बीच करीब 454 हेक्टेयर जंगल की जमीन पर कंस्ट्रक्शन होगा. जमीन खरीदने के लिए, रेलवे ने पहले ही फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में 100.08 करोड़ रुपये जमा कर दिए हैं और मिनिस्ट्री से इन-प्रिंसिपल मंजूरी ले ली है.” दो साल में पूरा होगा काम अधिकारियों ने बताया कि 156 किमी की ब्रॉड-गेज लाइन, आजादी से पहले रियासतों के समय बिछाए गए 118 किमी के नैरो-गेज ट्रैक की जगह लेगी। गेज बदलने का काम चल रहा है और अगले दो साल में पूरा होने की उम्मीद है। वन विभाग को मिले 100.08 करोड़ एक बयान में वेस्टर्न रेलवे के रतलाम डिवीजन के पीआरओ मुकेश कुमार ने कहा कि लगभग 90 किमी के महू (डॉ. अंबेडकर नगर)-ओंकारेश्वर रोड सेक्शन के बाकी गेज बदलने के काम के लिए केंद्रीय मंत्रालय से आखिरी मंजूरी की जरूरत है। महू और मुख्त्यारा-बलवाड़ा के बीच 454 हेक्टेयर जंगल की जमीन पर कंस्ट्रक्शन होगा। जमीन खरीदने के लिए, रेलवे ने पहले ही वन विभाग में 100.08 करोड़ रुपए जमा कर दिए हैं और मिनिस्ट्री से इन-प्रिंसिपल मंजूरी ले ली है। मुआवजे के तौर पर लगाएंगे डबल पौधे रेलवे अधिकारियों ने कहा कि महू-खंडवा गेज कन्वर्जन से उत्तरी और दक्षिणी भारत के बीच रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी, जिससे पैसेंजर सर्विस और माल ढुलाई दोनों में सुधार होगा। वहीं वन विभाग के एक अधिकारी ने अनुमान लगाया कि इंदौर और पड़ोसी खरगोन जिलों में बाकी कंस्ट्रक्शन के लिए 1.24 लाख पेड़ काटने पड़ सकते हैं। डिपार्टमेंट ने पर्यावरण पर असर कम करने और बड़ी संख्या में पेड़ों को बचाने के लिए एक डिटेल्ड प्लान तैयार किया है। एनवायरनमेंटल नुकसान की भरपाई के लिए प्रभावित एरिया से दोगुने एरिया में मुआवजे के तौर पर पेड़ लगाए जाएंगे।