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ड्रग्स के खिलाफ बड़ी कार्रवाई: 50 किग्रा गांजा के साथ दो आरोपी पकड़ाए, कड़ियों की तलाश जारी

धमतरी एण्टी क्राइम एण्ड साइबर यूनिट तथा थाना सिविल लाईन पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए कार से गांजा की तस्करी करते दो तस्करों को पकड़ने में कामयाबी पाई है. तस्करों के पास से 50.94 किलोग्राम गांजा के साथ 2 लाख रुपए नगदी, कार और मोबाइल सहित कुल 32,67,000 रुपए का माल जब्त किया है. जानकारी के अनुसार, एण्टी क्राइम एण्ड साइबर यूनिट की टीम को 14 फरवरी को मुखबिर से सूचना मिली की सिविल लाइन थाना क्षेत्रांतर्गत केनाल रोड स्थित दुर्गा मंच के पीछे खाली मैदान में एक चारपहिया वाहन में सवार दो व्यक्ति अवैध रूप से गांजा रखकर बिक्री के उद्देश्य से ग्राहक का इंतजार कर रहे हैं. सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस उपायुक्त (क्राइम एण्ड साइबर) स्मृतिक राजनाला एवं पुलिस उपायुक्त (सेंट्रल जोन) उमेश प्रसाद गुप्ता द्वारा अधीनस्थ अधिकारियों एवं प्रभारियों को सूचना की तस्दीक कर आरोपियों को मादक पदार्थ सहित गिरफ्तार करने के लिए आवश्यक दिशा निर्देश दिए. वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में एण्टी क्राइम एण्ड साइबर यूनिट तथा थाना सिविल लाइन पुलिस की संयुक्त टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर वाहन में सवार दो लोगों से पूछताछ की. जिस पर कार में बैठे लोगों ने अपना परिचय हृषिकेश उर्फ ऋषिकेश उर्फ ऋषि सरोज एवं हिमांशु दामले बताया. टीम के सदस्यों द्वारा वाहन की तलाशी लेने पर वाहन में अलग – अलग पैकेटों में गांजा रखा होना पाया गया. आरोपियों के कब्जे से कुल 50 किलो 94 ग्राम गांजा, नगदी रकम 2 लाख रूपये, 2 मोबाइल फोन, टोयोटा कार सहित लगभग 32,67,000 रूपये जप्त कर आरोपियों के विरूद्ध थाना सिविल लाईन में अपराध क्रमांक 88/26 धारा 20(सी), 29 नारकोटिक एक्ट का अपराध पंजीबद्ध कर कार्यवाही की गई.

टेकऑफ के तुरंत बाद डगमगाया CM मोहन यादव का हेलीकॉप्टर, बाल-बाल टला हादसा

खंडवा मध्य प्रदेश के खंडवा में मुख्यमंत्री मोहन यादव के हेलीकॉप्टर की उड़ान के दौरान कुल पल के लिए तब लोगों की सांसें थम गईं जब टेक ऑफ के तुरंत बाद यह आगे बढ़ने की बजाए पीछे हटने लगा। इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। इस घटना के दौरान मौके पर मौजूद लोग सीएम की सुरक्षा को लेकर चिंतित हो गए थे। यह घटना हाल ही में तब हुई जब CM मोहन यादव खंडवा जिले के पंधाना में लाड़ली बहना योजना के कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। खंडवा के पंधाना में उड़ान भरने के दौरान अचानक मुख्यमंत्री मोहन यादव का हेलीकॉप्टर आगे जाने के बजाय पीछे और नीचे की ओर झुकने लगा। यह सीन देखकर वहां मौजूद लोग और सुरक्षाकर्मी घबरा गए लेकिन पायलट ने सूझबूझ से हेलीकॉप्टर को संभाल लिया। आखिरकार हेलीकॉप्टर सुरक्षित रूप से हवा में संतुलित कर जब आगे अपने सफर के लिए रवाना हुआ तो लोगों ने राहत की सांस ली।

पंजाब में गरीब परिवारों को घर बनाना होगा मुश्किल

समराला. पंजाब के भट्ठा मालिकों ने गुजरात के कांडला पोर्ट पर कब्ज़ा हटाने के लिए केंद्रीय मंत्री को एक मेमोरेंडम दिया है, उनका आरोप है कि वे कोयला माफी से नाखुश हैं। भट्ठा मालिकों का कहना है कि पंजाब के भट्ठा मालिक पहले से ही महंगाई की वजह से अपना बिज़नेस चलाने में बड़ी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं और अब कोयला माफिया की वजह से उनके बिज़नेस पर फिर से ताला लगने का खतरा मंडरा रहा है। यह नई समस्या गुजरात के कांडला बंदरगाह पर वहां के कोयला माफिया का कब्ज़ा है। इस कोयला माफिया ने कांडला पोर्ट से पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के भट्ठों को कोयले की सप्लाई रोक दी है, जिसकी वजह से इन राज्यों में ईंट के भट्ठे पिछले 15 दिनों से पूरी तरह से बंद पड़े हैं। इस संबंध में भट्ठा एसोसिएशन लुधियाना की एक मीटिंग प्रधान अश्वनी शर्मा की अध्यक्षता में बुलाई गई। इसमें ऑल इंडिया भट्ठा एसोसिएशन के प्रधान ओम वीर सिंह का धन्यवाद किया गया, जिन्होंने भारत सरकार के कोयला मंत्री से मीटिंग की और उन्हें इस समस्या के बारे में बताया। डेलीगेशन ने कोयला मंत्री को बताया कि कोल माफिया ने मनमाने ढंग से एक कोयले के ट्राले की कीमत 2 लाख रुपये बढ़ा दी है, जो सरासर धक्केशाही है। इससे ईंटें गरीब और मिडिल क्लास परिवारों की पहुंच से दूर हो जाएंगी और उनके लिए घर बनाना बहुत मुश्किल हो जाएगा। कोयला मंत्री ने डेलीगेशन को भरोसा दिलाया कि इस मुद्दे पर रिव्यू किया जाएगा और जल्द से जल्द इसका हल निकाला जाएगा। दिल्ली में बुलाई गई मीटिंग में पंजाब के प्रधान हरमेश सोही हरियाणा, उत्तर प्रदेश द्वारा सांझे तौर पर कहा कि अगर भारत सरकार ने कोल माफिया पर नकेल नहीं कसी तो सभी बिजनेस बंद होने की कगार पर आ जाएंगे, जो सही नहीं होगा। इस मौके पर लाडी कटानी, बब्बू साहनेवाल, हरदीप सोखी जनरल सेक्रेटरी, केवल कृष्ण अरोड़ा, सरबजीत ढिल्लों, प्रितपाल पनेसर, इंद्रजीत मुल्लांपुर, अवतार सिंह मान, हरतेज गरचा, हरपाल सिंह खन्ना, कुलदीप खुल्लर, विनोद खन्ना, कुलवीत पुरी, रविंदर पुरी और अमित घुंगराना ने भी मांग पत्र देने गए डेलीगेशन का पुरजोर समर्थन किया। 

भोपाल में महाशिवरात्रि का अनूठा आयोजन, किन्नर शंकराचार्य का अभिषेक और 60 किन्नरों की घर वापसी

 भोपाल महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर राजधानी भोपाल में आयोजित किन्नर धर्म सम्मेलन में एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया। इस भव्य आयोजन में हिमांगी सखी को देश की पहली किन्नर शंकराचार्य के रूप में घोषित कर उनका पट्टाभिषेक किया गया। पुष्कर पीठ से संभालेंगी कमान किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास की उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यह ऐतिहासिक घोषणा की गई। हिमांगी सखी राजस्थान के पुष्कर पीठ को देश की पहली किन्नर शंकराचार्य पीठ के रूप में संभालेंगी। मूल रूप से मुंबई निवासी हिमांगी सखी 'मां वैष्णो किन्नर अखाड़ा' की प्रमुख हैं और वे पहली किन्नर भागवत कथा वाचक भी हैं। 60 किन्नरों की हिंदू धर्म में वापसी सम्मेलन के दौरान एक बड़ा दावा किया गया कि विभिन्न कारणों से धर्म परिवर्तन कर चुके 60 किन्नरों की 'घर वापसी' कराई गई है। आयोजकों ने बताया कि मुस्लिम धर्म अपना चुके इन किन्नरों ने शुद्धिकरण की प्रक्रिया के बाद पुनः हिंदू धर्म स्वीकार किया है। नए जगद्गुरु और महामंडलेश्वरों की नियुक्ति सम्मेलन में किन्नर समुदाय के धार्मिक नेतृत्व को मजबूती देने के लिए महत्वपूर्ण नियुक्तियां भी की गईं…     घोषित जगद्गुरु: काजल ठाकुर (भोपाल), तनीषा (राजस्थान), संजना (भोपाल), संचिता (महाराष्ट्र)।     घोषित महामंडलेश्वर: सरिता भार्गव, मंजू, पलपल, रानी ठाकुर, सागर। यह सम्मेलन किन्नर समुदाय के भीतर चल रहे गद्दी विवाद और धर्म परिवर्तन के आरोपों के बीच आयोजित किया गया, जिसे काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पंजाब में आउटसोर्स कर्मचारियों को हाई कोर्ट ने रेगुलर करने के दिए आदेश

चंडीगढ़. पंजाब में सालों से आउटसोर्स बेसिस पर काम कर रहे चौकीदारों को बड़ी राहत देते हुए पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को उन्हें रेगुलर करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि लंबे समय से लगातार सर्विस के बावजूद कर्मचारियों को अस्थायी दर्जे पर रखना अनुचित लेबर प्रथा है और यह संविधान के बराबरी के सिद्धांत के खिलाफ है। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने मनक सिंह और अन्य समेत कई पटीशनों पर एक साथ सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि 15 अक्टूबर, 2020 के ऑर्डर के जरिए कर्मचारियों को रेगुलर करने की मांग को खारिज करना कानून की नजर में टिकने लायक नहीं है। आखिरी ऑर्डर में कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित डिपार्टमेंट को ऑर्डर की कॉपी मिलने के 6 हफ्ते के अंदर सभी पटीशनर्स को रेगुलर करने का निर्देश दिया। अगर तय समय में ऑर्डर का पालन नहीं किया जाता है, तो कर्मचारी अपने आप रेगुलर माने जाएंगे। कोर्ट ने कहा कि कर्मचारियों के पिछले सर्विस पीरियड को भी गणना में शामिल किया जाए और उन्हें सभी संबंधित सर्विस लाभ दिए जाएं। यह फैसला राज्य में आउटसोर्स और अस्थायी कर्मचारियों के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे ऐसे ही हालात में काम कर रहे दूसरे कर्मचारियों को भी कानूनी राहत मिलने का रास्ता खुल सकता है। पटीशनर्स ने कोर्ट को बताया कि वे 2008 से अलग-अलग डिपार्टमेंट्स में चौकीदार के तौर पर काम कर रहे हैं और असली कंट्रोल डिपार्टमेंट के पास है, जबकि उन्हें एक ठेकेदार जरिए नियुक्त दिखाया गया है। उन्होंने बराबर काम के लिए बराबर सैलरी, मिनिमम उजरत और नियमत करने की मांग करते हुए कहा कि उनसे भी उतना ही काम लिया जाता है जितना रेगुलर कर्मचारियों से लिया जाता है। डिपार्टमेंट कॉन्ट्रैक्टर को हर कर्मचारी के हिसाब से करीब 14,000 रुपये देता था लेकिन कर्मचारियों को इससे बहुत कम सैलरी मिलती थी, जिससे वे कम से कम तनख्वाह से भी नीचे रह गए थे। इस स्थिति को गलत बताते हुए कोर्ट ने बराबर काम के लिए 'बराबर काम के लिए बराबर सैलरी' पर सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का ज़िक्र किया और कहा कि एक आदर्श नियोक्ता के तौर पर राज्य कर्मचारियों के अधिकारों को नजरअंदाज नहीं कर सकता। हाई कोर्ट ने कहा कि जब कर्मचारी लंबे समय से लगातार सर्विस दे रहे हैं और उनका काम स्थायी है, तो उन्हें बस आउटसोर्स करना या अस्थायी कैटेगरी में रखना संविधान के अनुछेद 14, 16 और 21 की भावना के खिलाफ है। कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकारी डिपार्टमेंट सालों तक अस्थायी लेबर लेने के बाद उन्हें रेगुलर करने से मना नहीं कर सकते हैं। 

राइजिंग स्टार्स एशिया कप में भारत ए का जलवा, पाकिस्तान ए पर आसान जीत

नई दिल्ली महिला राइजिंग स्टार्स एशिया कप 2026 के ग्रुप ए के छठे मैच में भारत ए महिला ने पाकिस्तान ए महिला को बुरी तरह हराया। बैंकॉक में खेले गए मुकाबले में भारत ने 8 विकेट से शानदार जीत दर्ज की। भारत ए महिला टीम ने रविवार को महिला एशिया कप 2026 राइजिंग स्टार्स के छठे मुकाबले में पाकिस्तान को 59 गेंदे शेष रहते आठ विकेट से रौंद दिया। दिनेश वृंदा ने नाबाद 55 रन की दमदार पारी खेली। पाकिस्तान ए महिला टीम पहले बल्लेबाजी करते हुए 18.5 ओवर में 93 रन ही बना सकी। इसके जवाब में भारत ए महिला टीम ने वृंदा दिनेश की बेहतरीन बैटिंग की बदौलत 11वें ओवर में ही मुकाबला अपने नाम कर लिया। भारत ने 10.1 ओवर में दो विकेट खोकर 97 रन बनाए। दिनेश वृंदा को उनके इस प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। पाकिस्तान ए महिला टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। बल्लेबाजी करने उतरी पाकिस्तान की टीम भारतीय गेंदबाजी आक्रमण के आगे अधिक देर तक सामना नहीं कर सकी और 18.5 ओवर में 93 रन के स्कोर पर सिमट गई। शवाल जुल्फिकार (23), गुल रुख (21) और अनोशा नासिर 17 रन बनाकर आउट हुईं। शेष आठ बल्लेबाज दहाई आंकड़े तक भी नहीं पहुंच सकीं। भारत ए महिला टीम के लिए साइमा ठाकोर, राधा यादव और प्रेमा रावत ने दो-दो विकेट लिये। जिंतिमनी कलिता, मिन्नू मनी ने एक-एक बल्लेबाज को आउट किया। इसके बाद बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं हुई और उसे पहले ही ओवर में हुमैरा काजी (शून्य) के रूप में पहली ही गेंद पर झटका लगा। तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने आयी अनुष्का शर्मा ने दिनेश वृंदा साथ पारी को संभाला और दूसरे विकेट के लिए 79 रन जोड़े। नौंवें ओवर में मोमिना रियासत ने अनुष्का शर्मा (24) को आउटकर पवेलियन भेज दिया। भारत ए महिला टीम ने 10.1 ओवर में दो विकेट पर 97 रन बनाकर मुकाबला आठ विकेट से अपने नाम किया। दिनेश वृंदा ने 29 गेंदों में 12 चौके लगाते हुए नाबाद 55 रनों की पारी खेली। तेजल हसबनीस 12 रन बनाकर नाबाद रही। पाकिस्तान के लिए वाहिदा अख्तर और मोमिना रियासत ने एक-एक बल्लेबाज को आउट किया।  

जेलेंस्की का तंज- ‘हंगरी के प्रधानमंत्री केवल पेट बढ़ा रहे हैं’

वाशिंगटन. रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को लगभग तीन साल पूरे हो गए हैं। जेलेंस्की लगातार यूरोपीय देशों को रूस के प्रति आगाह करते हुए अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए चेतावनी देते नजर आ रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने चेतावनी नजर अंदाज करने के लिए हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन पर तीखा हमला बोला है। जेलेंस्की ने कहा कि विक्टर क्षेत्रीय सुरक्षा पर ध्यान देने की बजाय घरेलू राजनीति को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। 'वह केवल अपना पेट बढ़ा रहे हैं, सेना नहीं।' जेलेंस्की का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब हंगरी की तरफ से यूक्रेन की मदद करने की अनिच्छा व्यक्त की गई है। तीन साल से जारी यूक्रेन और रूस के युद्ध ने यूरोपीय संघ के देशों के भीतर भी कलह को बढ़ा दिया है। ज्यादातर देश रूस के खिलाफ यूक्रेन को राहत पैकेज देने और मॉस्को पर प्रतिबंध का समर्थन करते हैं, लेकिन हंगरी बार-बार इन उपायों को किसी न किसी वजह से या बातचीत के बहाने से धीमा करता हुआ नजर आता है। हंगरी लगातार इस युद्ध को आगे न बढ़ाने के लिए भी चेतावनी देता हुआ नजर आता है। दरअसल, विक्टर ओर्बन को रूसी राष्ट्रपति पुतिन का करीबी माना जाता है, जिसकी वजह से उन्हें कीव समेत कई यूरोपीय देशों से आलोचना का सामना करना पड़ता है। यूक्रेन युद्ध में किसके साथ हंगरी? हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन ने शुरुआत से ही यूरोपीय देशों द्वारा यूक्रेन को दिए जा रहे अतिरिक्त फंडिंग का विरोध किया है। इतना ही नहीं उन्होंने सीधे हथियारों की आपूर्ति का भी विरोध किया है। ओर्बान ने हंगरी के हथियारों को यूक्रेन को देने से इनकार करते हुए कहा था कि बुडापेस्ट को अपनी आर्थिक स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा को ज्यादा प्राथमिकता देनी है। इसके अलावा उन्होंने पश्चिमी यूक्रेन में रहने वाले हंगेरियाई मूल के लोगों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार को लेकर भी यूक्रेनी सरकार पर सवाल उठाया था। हालांकि, यूक्रेन और हंगरी के बीच यह खींचतान पिछले काफी समय से चली आ रही है। हालिया विवाद उस समय सामने आया, जब यूरोपीय संघ के देशों की तरफ से यूक्रेन के लिए एक दीर्घकालिक सुरक्षा गारंटी और रूस के ऊपर आर्थिक प्रतिबंधों पर विचार कर रहे हैं। हंगरी ने इन प्रस्तावों का खुले तौर पर विरोध किया है। गौरलतब है कि रूस और यूक्रेन युद्ध पिछले तीन साल से जारी है। अमेरिका समेत तमाम देश इसे खत्म करवाने के लिए कोशिश कर चुके हैं, लेकिन यह बदस्तूर जारी है। दोनों देशों की तरफ से कई लाख सैनिक इस युद्ध में अपनी जान गंवा चुके हैं। युद्ध के पहले यूक्रेन जिस नाटो की सदस्यता लेने की जिद किए बैठा था, अब वह भी उससे दूर जा चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा साफ कह दिया गया है कि यूक्रेन को नाटो की सदस्यता नहीं मिलेगी। अभी रूस और यूक्रेन के बीच में विवाद जमीन को लेकर फंसा हुआ है। रूस युद्ध में कब्जाई जमीन को छोड़ने के लिए राजी नहीं है, ऐसे में युद्ध लगातार जारी है।

मेहनत और जज़्बे की मिसाल: मुंगेली की सुप्रिया का भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में चयन

बिलासपुर मुंगेली जिले के ग्राम टेढ़ाधौरा की रहने वाली सुप्रिया ठाकुर का चयन भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट पद के लिए हुआ है. सुप्रिया का चयन SSC (W) Tech-66 Entry के माध्यम से हुआ है. उन्हें 17 एसएसबी बोर्ड, बेंगलुरु से रिकमेंडेशन मिला है. खास बात यह है कि सुप्रिया ने इलेक्ट्रॉनिक्स वैकेंसी में ऑल इंडिया रैंक-4 हासिल कर देशभर में शानदार प्रदर्शन किया है. सुप्रिया ने अपनी स्कूली शिक्षा सेंट जोसेफ कॉन्वेंट हायर सेकेंड्री स्कूल, तारबहार, बिलासपुर से पूरी की. इसके बाद उन्होंने चौकसे इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग की. सुप्रिया एनसीसी ‘C’ सर्टिफिकेट भी प्राप्त कर चुकी हैं, और इसी दौरान उन्हें भारतीय सेना का एक्सपोजर मिला, जिससे उनके भीतर देशसेवा का सपना और मजबूत हुआ. सुप्रिया ने बताया कि बचपन से ही उनके मन में सेना में ऑफिसर बनकर देश की सेवा करने की इच्छा थी. इस सफलता में उनके माता-पिता और भाई का बड़ा योगदान रहा, जिन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया. सुप्रिया के पिता वैदेही शरण सिंह श्रीनेत और माता संतोषी सिंह श्रीनेत हैं. परिवार मूल रूप से मुंगेली जिले के ग्राम टेढ़ाधौरा का निवासी है, जबकि सुप्रिया की पढ़ाई बिलासपुर में हुई. सुप्रिया की इस उपलब्धि पर पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है. वहीं उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने भी सुप्रिया ठाकुर को भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट पद पर चयनित होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं. मुंगेली की यह बेटी अब ट्रेनिंग एकेडमी में प्रशिक्षण प्राप्त कर भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में देशसेवा का संकल्प पूरा करेंगी. उन्होंने यह साबित कर दिया है कि मेहनत, लगन और सपने बड़े हों, तो गांव से निकलकर भी देश की शान बना जा सकता है.

ट्रंप के नोबेल शांति पुरस्कार का एपस्टीन फाइलों में भी जिक्र

वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनका नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर दिखाया गया प्रेम दुनिया में किसी से छिपा नहीं है। ट्रंप ने हर तरीके से प्रयास करके आखिरकार वेनेजुएला की मचाडो से नोबेल शांति पुरस्कार ले ही लिया। इन सब के बीच अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी की जा रही एपस्टीन फाइल्स में भी डोनाल्ड ट्रंप के नोबेल पुरस्कार के प्रति प्रेम का जिक्र किया गया है। यहां पर एक ईमेल में एपस्टीन ट्रंप के सहयोगी को लिखता है कि डोनाल्ड को अगर इस बात का पता चलेगा कि नोबेल समिति का चेयरमैन यहां रुका हुआ है तो उसका सिर फट जाएगा। अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी की गई बदनाम फाइनेंशर जेफ्री एपस्टीन की फाइलों में सामने आया है कि उसने नोबेल शांति पुरस्कार समिति के चैयरमेन रहे थॉरबोर्न यागलैंड के साथ अपने संबंधों के जरिए बिल गेट्स और स्टीव बैनन जैसे कई प्रभावशाली लोगों के साथ दोस्ती की थी। गौरतलब है कि यागलैंड 2009 से लेकर 2015 तक नोबेल समिति के प्रमुख रहे थे। फाइल्स से मिली जानकारी के मुताबिक यागलैंड से एपस्टीन की मुलाकात करवाने वाले नॉर्वेजियन राजनयिक थे, जो कि इजरायल और फिलिस्तीन के बीच ओसलो अकॉर्ड साइन करवाने के लिए जाने जाते हैं। यॉगलैंड का कई बार जिक्र यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी फाइलों में यागलैंड का नाम कई हजार बार सामने आता है। हालांकि अभी तक जितनी भी फाइलें सामने आई हैं, उसमें पुरस्कार के लिए किसी के नाम पर लॉबिंग की बात सामने नहीं आई है, लेकिन इतना साफ है कि एपस्टीन ने यागलैंड से अपनी दोस्ती के चलते कई बड़े नामों से अपनी दोस्ती मजबूत की। रिपोर्ट्स के मुताबिक एपस्टीन ने एक मेल में इस बात की जानकारी दी है कि 2010 में उसने यागलैंड को न्यूयॉर्क और पेरिस स्थिति अपनी संपत्तियों में ठहरने की मदद की थी। डोनाल्ड ट्रंप के करीबी को किया मैसेज यागलैंड का जिक्र करते हुए एपस्टीन ने 2018 में डोनाल्ड ट्रंप के सहयोगी स्टीव बैनन को भी एक मेल किया था, जिसमें उसने ट्रंप के शांति पुरस्कार के प्रति प्रेम का जिक्र किया था। एक मेल में एपस्टीन ने लिखा, "डोनाल्ड का सिर फट जाएगा अगर उसे पता चले कि तुम अब उस व्यक्ति के दोस्त हो जो सोमवार को नोबेल शांति पुरस्कार का फैसला करेगा।” कई लोगों को नोबेल समिति के अध्यक्ष के नाम पर फंसाने की कोशिश एपस्टीन ने यागलैंड के नाम पर कई लोगों के साथ दोस्ती स्थापित करने की कोशिश की थी। एपस्टीन ने यागलैंड का नाम लेकर वाइट हाउस की पूर्व कानूनी सलाहकार कैथी रूमलर को भी एक मेल भेजा था, जिसमें उसने लिखा, "नोबेल शांति पुरस्कार के प्रमुख मिलने के लिए आ रहे हैं, क्या आप जुड़ना चाहेंगी?" इसके अलावा एपस्टीन ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी लैरी समर्स को भी मेल किया था, जिसमें उसने लिखा, “नोबेल शांति पुरस्कार के प्रमुख मेरे यहां ठहरे हुए हैं, अगर आपकी रुचि हो।”2014 में एपस्टीन ने बिल गेट्स को लिखे एक ईमेल में बताया कि यागलैंड को काउंसिल ऑफ यूरोप के प्रमुख के रूप में दोबारा चुना गया है। इसके जवाब में गेट्स ने लिखा, “मेरा ख्याल है कि उनकी शांति पुरस्कार समिति की भूमिका भी अब अनिश्चित होगी?” गौरतलब है कि यागलैंड के नोबेल पुरस्कार समिति के अध्यक्ष के तौर पर रहते 2009 में बराक ओबामा और 2012 में यूरोपीय संघ को नोबेल शांति पुरस्कार मिला था। एपस्टीन फाइ्ल्स में नाम आने के बाद यागलैंड को ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। इसके बाद नार्वे की आर्थिक अपराध इकाई इन मामलों की जांच कर रही है।

मादुरो को पकड़ने के लिए अमेरिका ने AI का किया था इस्तेमाल

वाशिंगटन. अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के लिए एआई का इस्तेमाल किया था। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया है। एंथ्रॉपिक पहला एआई मॉडल डेवलपर था जो गुप्त संचालन के लिए पेंटागन में इस्तेमाल किया गया। सेना द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल, एआई कंपनियों के लिए बड़ी साख बढ़ाने वाला माना जाता है। हालांकि एंथ्रॉपिक के दिशा-निर्देशों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि हिंसा को बढ़ावा देने, हथियार विकसित करने या निगरानी करने में इसका इस्तेमाल न किया जाए। इसके बावजूद इस ऑपरेशन में उपयोग किया गया। गौरतलब है कि मादुरो और उनकी पत्नी को कराकस से गिरफ्तार किया गया था। इस ऑपरेशन कई जगहों पर बमबारी के बाद अंजाम दिया गया। एंथ्रॉपिक के प्रवक्ता ने बताया कि ‘क्लॉड का कोई भी इस्तेमाल, चाहे वह निजी क्षेत्र में हो या सरकार द्वारा हो, हमारी नीतियों के अनुसार होना चाहिए। हमारी नीतियां स्पष्ट हैं कि क्लॉड का उपयोग कैसे किया जा सकता है। हम अपने साझेदारों के साथ मिलकर अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए काम करते हैं।’ क्लॉड को तैनात किया गया क्योंकि पेंटागन द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों की डेटा कंपनी पेलान्टिर टेक्नोलॉजीज का एंथ्रॉपिक के साथ साझेदारी है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक क्लॉड के उपयोग को लेकर एंथ्रॉपिक की चिंताओं के बाद अमेरिकी अधिकारी बड़ा फैसला ले सकते हैं। एंथ्रॉपिक के बयान के बाद अमेरिकी अधिकारी 200 मिलियन डॉलर तक के अनुबंध रद्द करने पर विचार कर रहे हैं। एंथ्रॉपिक के चीफ एग्जीक्यूटिव डारिओ अमोडेई ने कहाकि एआई के इस्तेमाल में नियम-निर्देशों का सख्ती से पालन होना चाहिए। ताकि एआई से किसी तरह का नुकसान न हो। एंथ्रॉपिक कंपनी के अधिकारियों द्वारा जारी बयानों ने पेंटागन के साथ कांट्रैक्ट की राह में बाधा खड़ी कर दी है। रक्षा सचिव पीट हेगसेठ ने जनवरी में कहा था कि पेंटागन उन एआई मॉडल्स के साथ कोलैबोरेट नहीं करेगा, जो युद्ध लड़ने की अनुमति नहीं देते। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने एंथ्रॉपिक की चर्चाओं का हवाला देते हुए यह बात कही थी। एंथ्रॉपिक ने पिछली गर्मियों में 200 मिलियन डॉलर की डील साइन की थी। बता दें कि कई एआई कंपनियां अमेरिकी सेना के लिए कस्टम टूल बना रही हैं। इनमें से कई अनक्लासीफाइड नेटवर्क्स पर उपलब्ध हैं। यह आमतौर पर सैन्य प्रशासन के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। एंथ्रोपिक एकमात्र ऐसी कंपनी है जो थर्ड पार्टी के जरिए क्लासीफाइड सेटिंग्स में उपलब्ध है। लेकिन सरकार अभी भी कंपनी की यूजर पाॉलिसी के तहत बंधी हुई है।