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महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष के विवाद में ओवैसी बोले- ‘टीपू सुल्तान की अंगूठी पर लिखा था राम’

नई दिल्ली. महाराष्ट्र में कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने 18वीं सदी के सुल्तान टीपू सुल्तान की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से कर दी थी। इसको लेकर विवाद गहराता ही जा रहा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सपकाल की टिप्पणी को शर्मनाक करार दिया तो वहीं AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी पर करारा हमला किया है। उन्होंने कहा कि टीपू सुल्तान हिंदू-मुस्लिम एकता के मिसाल थे। अंग्रेजों के खिलाफ लड़े टीपू- ओवैसी ओवैसी ने कहा, 1799 में टीपू सुल्तान की शहादत हुई। अंग्रेजों से लड़कर टीपू की शहादत हुई। टीपू ने जेल में बैठकर तुम्हारे वीर (वीर सावरकर) की तरह अंग्रेजों को लव लेचर नहीं लिखा। टीपू सुल्तान अपने मुल्क को अंग्रेजों से आजाद कराने के लिए शहीद हो गया। अंग्रेजों को टीपू से इतना डर था कि डेढ़ घंटे तक टीपू की लाश पड़ी रही, अंग्रेजों के फौज के घेरों में लाश थी लेकिन डर रहे थे कि शेर उठ गया तो क्या होगा। जाकर देखा तो टीपू का शरीर गर्म था। अंगूठी पर लिखा था राम उन्होंने कहा, देवेंद्र फडणवीस साहब, क्या यह बात सच नहीं है कि टीपू के पास से जो अंगूठी निकली उसपर राम लिखा हुआ था। 2014 में बर्सानिया में इसकी नीलामी हुई थी। क्या यह बात झूठ है कि एपीजे अब्दुल कलाम ने अपनी किताब विंग्स ऑफ फायर ने लिखा, कि रॉकेट टेक्नॉलजी के जरिए टीपू के ख्वाबों को पूरा कर रहे हैं। एपीजे अब्दुल कलाम तो आपके लिए ज्यादा आदर्श हैं। महात्मा गांधी ने भी किया था जिक्र ओवैसी ने कहा, यह भी ना मानो तो गांधी को तो मानते होगे। उन्होंने अपनी मैगजीन 'यंग एज' में लिखा कि टीपू सुल्तान हिंदू मुस्लिम एकता के समर्थक थे। श्रृंगेरी मठ से फौज ने सोने की मूर्ति उठा ली तब टीपू सुल्तान ने इसका निर्माण करवाया। टीपू सुल्तान बादशाह था। हर बादशाह को सिर्फ अपनी ताकत से मतलब रहता था। लेकिन तथ्यों को गलत तरीके से पेश नहीं कनरा चाहिए। टीपू सुल्तान की फौज के कमांडर अप्पाजी राम थे। उनके सलाहकार कृष्णा राव थे। बीजेपी केवल नफरत पैदा करना चाहती है। भारत की पहली संविधान की किताब में टीपू की फोटो है। बता दें कि बुलढाणा में सपकाल ने मालेगांव महानगर पालिका की उप-महापौर निहाल अहमद के कार्यालय में टीपू सुल्तान का चित्र लगाए जाने को लेकर हुए विवाद पर बात की, जिसका क्षेत्र के शिवसेना पार्षदों और हिंदू संगठनों ने विरोध किया था। इसके बाद देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि यह तुलना निंदनीय है और कांग्रेस नेता को खुद पर शर्म आनी चाहिए। उन्होंने नागपुर में संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "महाराष्ट्र इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। सपकाल को छत्रपति शिवाजी महाराज की तुलना टीपू सुल्तान से करने के लिए माफी मांगनी चाहिए। कांग्रेस को इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए और उसके सहयोगी दलों को सपकाल की टिप्पणी पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।"

CM साय ने महाशिवरात्रि पर श्री सत्यनारायण बाबा धाम में की पूजा-अर्चना

रायगढ़/रायपुर. महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय अपनी धर्मपत्नी कौशल्या साय के साथ रायगढ़ प्रवास के दौरान देर रात एक बजे ग्राम कोसमनारा स्थित श्री श्री 108 श्री सत्यनारायण बाबा धाम पहुंचे. उन्होंने भगवान भोलेनाथ एवं श्री श्री 108 श्री सत्यनारायण बाबा की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पूरे प्रदेश वासियों को महाशिवरात्रि पर्व की बधाई एवं शुभकामनाएं दी. इस दौरान मुख्यमंत्री साय ने जिला खनिज न्यास मद के अंतर्गत 1 करोड़ 20 लाख रुपए की लागत से विभिन्न विकास कार्यों का विधिवत शिलान्यास किया. प्रस्तावित कार्यों में मुख्य भवन के सामने ग्रेनाइट फर्श सहित शेड निर्माण, आगंतुकों के विश्राम एवं भोजन के लिए शेड निर्माण, शौचालय परिसर भवन का निर्माण तथा पार्किंग क्षेत्र के लिए सीमेंट कांक्रीट सड़क निर्माण शामिल हैं. उन्होंने इन कार्यों के लिए क्षेत्रवासियों को बधाई देते हुए कहा कि इससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि कोसमनारा स्थित यह धाम श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र है. यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा समाज को सकारात्मक दिशा और आत्मबल प्रदान करती है. उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार गुरुजनों के आशीर्वाद और जनता के विश्वास के साथ जनकल्याण के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ रही है. उल्लेखनीय है कि रायगढ़ जिला मुख्यालय से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित यह धाम वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है. बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां श्री श्री 108 श्री सत्यनारायण बाबा एवं भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. स्थानीय जनश्रुति के अनुसार, श्री श्री 108 श्री सत्यनारायण बाबा वर्ष 1998 से कठोर तपस्या में लीन हैं. वर्ष 2003 में उन्हें ‘श्री श्री 108’ की उपाधि प्राप्त हुई, जिसके बाद धाम की ख्याति और अधिक बढ़ी. बताया जाता है कि बाबा ने पत्थरों को एकत्र कर शिवलिंग का स्वरूप निर्मित किया और उसी स्थान को अपनी तपोभूमि बनाया. वर्षा, ग्रीष्म और शीत—तीनों ऋतुओं में खुले स्थान पर रहकर भगवान भोलेनाथ की साधना करना उनकी तपस्या की विशेष पहचान बन चुकी है. इस अवसर पर महापौर जीवर्धन चौहान, नगर निगम सभापति डिग्रीलाल साहू, स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, सरपंच, गणमान्य नागरिक, कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित थे.

मासूम बच्चियों को डायल 112 के जवानों ने परिजनों से मिलाया

ऑटो से उतरने के बाद मां से बिछड़ गई थी एक और तीन साल की बच्चियां भोपाल सागर जिले के थाना मोतीनगर क्षेत्र में डायल-112 जवानों की सतर्कता, मानवीय संवेदनशीलता और त्वरित कार्यवाही ने दो मासूम बच्चियों को सुरक्षित उनके माता-पिता से मिलाया है। सड़क पर लावारिस अवस्था में भटकती लगभग 1 वर्ष एवं 3 वर्ष आयु की दो बच्चियों को सुरक्षित संरक्षण में लेकर, डायल-112 टीम ने जिस धैर्य, समझदारी और जिम्मेदारी के साथ कार्य किया, वह सेवा और करुणा का अनुकरणीय उदाहरण है।  जानकारी के अनुसार इस संबंध में राज्य स्तरीय डायल-112 कंट्रोल रूम भोपाल को सूचना प्राप्त हुई, जिसके तत्काल बाद थाना मोतीनगर क्षेत्र में तैनात एफआरव्ही वाहन को मौके के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्टाफ आरक्षक अभय विनोदिया एवं पायलट अनिकेत दुबे ने मौके पर पहुंचकर दोनों मासूम बच्चियों को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। टीम द्वारा अत्यंत संवेदनशीलता, धैर्य और अपनत्व के साथ बच्चियों से संवाद किया गया।जिसके परिणामस्वरूप 3 वर्षीय बच्ची ने अपने परिजन का नाम बताया। इस जानकारी के आधार पर डायल-112 टीम ने आसपास के क्षेत्र में सक्रियता से पूछताछ करते हुए परिजनों की तलाश प्रारंभ की। लगातार प्रयासों और सतर्क खोज के बाद बच्चियों के माता-पिता का पता लगाया और उन्हें तत्काल मौके पर बुलाया। पूछताछ में परिजनों ने बताया कि बच्चियां अपनी माता के साथ थीं, लेकिन ऑटो में पर्स छूट जाने के कारण वे उसे लेने पीछे चली गई।इसी दौरान बच्चियां ठेले वाले के पास खड़ी रहीं और मां को तलाशते हुए आगे निकल गईं, जिससे वे एक-दूसरे से बिछड़ गईं। जवानों ने पहचान एवं सत्यापन उपरांत दोनों बच्चियों को सुरक्षित उनके माता-पिता के सुपुर्द किया। डायल 112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना संदेश देती है कि मध्यप्रदेश पुलिस केवल कानून-व्यवस्था की प्रहरी नहीं, बल्कि हर संकट में आमजन की सुरक्षा, संवेदनशीलता और भरोसे की मजबूत ढाल है।

एपस्टीन फाइल्स को लेकर भाजपा ने कपिल सिब्बल और राहुल गांधी को घेरा

नई दिल्ली. अमेरिका के बदनाम फाइनेंशर और यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी फाइल्स ने भारत में भी राजनैतिक बवाल मचाया हुआ है। कांग्रेस की तरफ से पहले केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के ऊपर हमला किया गया, अब भाजपा ने भी पलटवार करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल पर निशाना साधा है। भाजपा ने राहुल गांधी से जवाब देने की मांग करते हुए दावा किया कि कपिल सिब्बल को एक ऐसे कार्यक्रम के दौरान पुरस्कार मिला था, जिसे यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन ने फंड किया था। कपिल सिब्बल से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस दावे के बकवास बताकर खारिज कर दिया। कांग्रेस की तरफ से प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इन आरोपों पर जवाब दिया। मीडिया से बात करते हुए पवन खेड़ा ने कहा कि उस समय सिब्बल केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री थे। उन्हें ''शिक्षा में वैश्विक सहयोग के प्रति उनके दृढ़ समर्थन' के लिए समारोह में पुरस्कार दिया गया था। खेड़ा ने कहा, ''इसका जेफ्री एप्स्टीन से कोई संबंध नहीं है।'' दरअसल यह पूरा मामला उस वक्त शुरू हुआ, जब भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक पोस्ट करते हुए कपिल सिब्बल पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, "2010 में, जेफ्री एप्स्टीन द्वारा कथित तौर पर वित्त पोषित एक पुरस्कार कांग्रेस के (तत्कालीन) वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल को मिला था। सिब्बल को लंबे समय से गांधी परिवार के करीबी के रूप में देखा जाता रहा है।'' भंडारी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की विदेश इकाई के प्रमुख सैम पित्रोदा भी ''उसी गुट'' से जुड़े हुए थे। 2010 में, जेफ्री एप्स्टीन द्वारा कथित तौर पर वित्त पोषित एक पुरस्कार कांग्रेस के (तत्कालीन) वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल को मिला था। सिब्बल को लंबे समय से गांधी परिवार के करीबी के रूप में देखा जाता रहा है।'' उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की विदेश इकाई के प्रमुख सैम पित्रोदा भी ''उसी गुट'' से जुड़े हुए थे। आपको बता दें, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल 2022 तक कांग्रेस में शामिल थे। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी, वर्तमान में वह समाजवादी पार्टी के समर्थन से राज्यसभा के सांसद हैं। एपस्टीन फाइल्स में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम सामने आने पर कांग्रेस लगातार हमलावर बनी हुई है। कांग्रेस की तरफ से पवन खेड़ा ने पुरी पर हमला बोलते हुए कहा था कि वह लगातार झूठ बोल रहे हैं, ऐसे व्यक्ति को पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है, उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। हालांकि, केंद्रीय मंत्री ने इस मामले पर अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि उनकी काम के सिलसिले में एपस्टीन से जान-पहचान थी, उसके अपराधों से उनका कोई लेना-देना नहीं।

अमेरिका में लापता हुए भारतीय छात्र साकेत श्रीनिवासैया का 6 दिन बाद मिला शव

वाशिंगटन. अमेरिका के बर्कली में लापता हुए भारतीय छात्र का 6 दिन बाद शव पाया गया है। 22 साल के साकेत श्रीनिवासैया यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया में पोस्ट ग्रैजुएशन के छात्र थे और वह अचानक 9 फरवरी को लापता हो गए थे। सैन फ्रांसिस्को में भारतीय कॉन्सुलेट ने उनके शव के पाए जाने की पुष्टि की है। मिशन की तरफ से कहा गया. हमें बेहद दुख है कि पुलिस ने बताया है कि साकेत श्रीनिवासैया की मौत हो गई है और उनका शव पाया गया है। हम साकेत के परिवार वालों के लिए संवेदना व्यक्त करते हैं। भारतीय मिशन ने कहा, हम साकेत के परिवार की हर संभव मदद करने को तैयार हैं। स्थानीय प्रशासन के साथ तालमेल के जरिए हम साकेत के पार्थिव शरीर को भारत भिजवाने का प्रबंध कर रहेहैं। हमारा कार्यालय परिवार के साथ सीधे संपर्क में है और सभी औपचारिकताओं के लिए भी हम परिवार के साथ खड़े हैं। कहां से लापता हो गए थे साकेत? जानकारी के मुताबिक साकेत आखिरी बार बर्कली हिल्स इलाके में देखे गए थे। वह अंजा लेक के पास गए थे। स्थानीय मीडिया के मुताबिक उनका पासपोर्ट और लैपटॉप पास में ही पाया गया है। कर्नाटक के रहने वाले श्रीनिवासैया ने आईआईटी मद्रास से बीडटेक किया था और आगे की पढ़ाई के लिए वह अमेरिका गए थे। 2025 में ही उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया में ऐडमिशन लिया था। 13 फरवरी को कर्नाटक सरकार की मुख्य सचिव ने विदेश सचिव विक्रम मिसरी को पत्र लिखा था। इसमें कहा गया है कि साकेत के परिवार से मिली जानकारी के अनुसार, बर्कले पुलिस विभाग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराए जाने के बावजूद उसका कोई पता नहीं चल सका है। स्थिति की गंभीरता और राज्य में रह रहे उनके परिवार की बढ़ती चिंता को देखते हुए, शालिनी ने विदेश मंत्रालय से इस मामले में हस्तक्षेप और सहायता का अनुरोध किया था। रूममेट ने क्या बताया साकेत के रूममेट ने ही सबसे पहले उनके गायब होने की बात सोशल मीडिया पर बताई थी और पुलिस से मदद मांगी थी। साकेत के कमरे में साथ रहने वाले बिनीत सिंह ने कहा कि इस घटना से यहां रहने वाला हर भारतीय स्तब्ध है। उन्होंने कहा, हम प्रशासन के साथ मिलकर साकेत के परिवार को इमर्जेंसी वीजा पर अमेरिका बुलाने का प्रयास कर रहे हैं। बिनीत ने कहा कि 9 फरवरी को लापता होने से पहले साकेत ज्यादा कुछ खाते-पीते नहीं थे। वह अकसर चिप्स खाकर ही रह जाते थे। हालांकि इसके अलावा उनके चहरे पर कोई तनाव नहीं दिखता था। उन्होंने कहा कि 21 जनवरी को भी श्रीनिवासैया ने उन्हें झील के किनारे बुलाया था और कहा था वह बहुत आलसी हो गए हैं और कुछ करने का मन नहीं करता है। बाथरोब पहनकर पहुंच गए थे क्लास साकेत के रूममेट ने बताया कि आखिरी बार उनके बीच बात तब हुई थी जब वह बाथरोब पहनकर क्लास चले गए थे। वापस आने पर मैंने पूछा कि उन्होंने ऐसा क्यों किया। इसपर साकेत ने जवाब दिया, मुझे किसी की परवाह नहीं है। इसके बाद दोनों हंसने लगे थे।

बेंगलुरु में बस से तेज रफ्तार कार टकराने से 5 लोगों की मौत

बेंगलुरु. बेंगलुरु के जिंदल फ्लाईओवर के पास देर रात भयानक सड़क दुर्घटना में 5 लोगों की मौत हो गई। तेज रफ्तार से आ रही कार अनियंत्रित होकर पहले रोड डिवाइडर से टकराई और फिर पलटते हुए सामने से आ रही कर्नाटक स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (KSRTC) बस से जोरदार भिड़ंत कर दी। यह दुर्घटना लगभग 11:30 बजे के करीब हुई, जब रात का ट्रैफिक थोड़ा कम था, लेकिन तेज रफ्तार के चलते हादसा हो गया। दुर्घटना स्थल पर मौजूद पुलिस अधिकारियों के अनुसार, विपरीत दिशा में आ रही बस में कुल लगभग 40 से अधिक यात्री सवार थे, लेकिन कार की गंभीर टक्कर के कारण मौके पर पांच लोगों की मौत हुई और कई बस सवार यात्रियों को मामूली चोटें आईं। मृतकों की पहचान अभी तक पूरी तरह से नहीं हो पाई है, लेकिन शुरुआती घटनाओं के अनुसार उनमें से कुछ डोड्डाबल्लापुर के निवासी युवा थे। पुलिस ने बताया कि हादसे की प्राथमिक वजह तेज गति और नियंत्रण खो देना माना जा रहा है। घायलों का चल रहा इलाज कर्नाटक पुलिस ने घटनास्थल पर फैली तबाही को देखकर कहा कि यह दुर्घटना एक चेतावनी है कि सड़कों पर और वाहन चालकों के लिए गति नियंत्रण कितना महत्वपूर्ण है। बेंगलुरु पुलिस और आपातकालीन सेवाएं तेजी से मौके पर पहुंचीं और घायल यात्रियों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया। साथ ही मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और आगे की पहचान व परिवार को सूचना देने का कार्य जारी है। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि कार चालक ने डिवाइडर से टकराने के बाद नियंत्रण खो दिया, जिससे वाहन पलट गया और बस से आमने-सामने की टक्कर हुई। बढ़ते सड़क हादसों का क्या कारण इस हादसे ने सड़क सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। विशेषज्ञों और यातायात पुलिस ने कहा है कि अगर गति नियमों का पालन, सीट बेल्ट जैसे सुरक्षा उपायों और सड़क स्थितियों का ध्यान रखा जाए तो ऐसे भयावह हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है। राज्य भर में तेजी से बढ़ते वाहनों और बढ़ती गति के कारण सड़क दुर्घटनाएं एक अहम समस्या बन रही हैं। इसलिए सार्वजनिक जागरूकता और कड़ाई से नियमों के पालन की आवश्यकता और भी बढ़ गई है।

इंदौर में आईईटी में रैगिंग के लिए उकसाने वाले प्रथम वर्ष के चार विद्यार्थी होंगे निष्कासित

इंदौर. इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) ने रैगिंग को लेकर रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसमें प्रथम वर्ष के चार विद्यार्थियों पर सख्त कार्रवाई की गई है। इन्हें सीनियर को रैगिंग दिए जाने को लेकर सहपाठियों पर दबाव बनाने का दोषी पाया गया है। एंटी रैगिंग कमेटी (एआरसी) ने चार विद्यार्थियों को कोर्स से बाहर करने का फैसला लिया है। रिपोर्ट में निष्कासन की अनुशंसा की गई है। जबकि 11 विद्यार्थियों को हॉस्टल से बाहर कर दिया गया है। इन पर अर्थदंड भी लगाया गया है। रैगिंग की रिपोर्ट कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई को भेज दी गई। करीब दो सप्ताह पहले प्रथम वर्ष के कुछ विद्यार्थियों ने रैगिंग की शिकायत दर्ज कराई थी। बताया गया था कि डी हॉस्टल में कुछ छात्र जूनियर्स पर दबाव बनाते हैं। आरोप था कि उन्हें सीनियर्स के पास जाकर जबरन परिचय देने के लिए उकसाया जाता है। इतना ही नहीं, सिगरेट पीने के लिए भी मजबूर किया जाता है। बैच आउट कर दिया जाता है इन्कार करने पर विद्यार्थियों को ‘बैच आउट’ कर दिया जाता है। 'बैच आउट' यानी ऐसे विद्यार्थियों को सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों से दूर रखा जाता है। उन्हें सीनियर्स के सामने सिर झुकाकर और हाथ जोड़कर बात करने को कहा जाता है। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए संस्थान ने तुरंत जांच शुरू कर दी। शिकायत के अलावा एंटी रैगिंग कमेटी ने ऑडियो रिकॉर्डिंग की भी जांच की। इसमें प्रथम वर्ष के कुछ विद्यार्थी अपने सहपाठियों को रैगिंग देने के लिए उकसाते हुए पाए गए। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ द्वितीय वर्ष के विद्यार्थी भी इस पूरे मामले में शामिल थे। करीब दो सप्ताह की जांच के बाद कमेटी ने करीब 15 विद्यार्थियों को दोषी पाया। इनमें से चार प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों पर गंभीर आरोप साबित हुए। कमेटी ने इन्हें बीटेक कोर्स से बाहर करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई को भेज दी गई है। अगले सप्ताह इस मुद्दे पर बैठक बुलाई गई है, जिसमें अंतिम फैसला लिया जाएगा। जुर्माना भी लगाया बीटेक के प्रथम व द्वितीय वर्ष के आठ विद्यार्थी ऐसे हैं, जो रैगिंग का समर्थन करते हैं। इन पर भी कमेटी ने सख्त कार्रवाई की है। भले ही इन्हें कोर्स से बाहर नहीं किया गया है, मगर इन विद्यार्थियों को हॉस्टल से निष्कासित कर दिया गया है। साथ ही दस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। नोटिस मिलने के सात दिनों के भीतर विद्यार्थियों को अर्थदंड की राशि जमा करना है। समयावधि निकलने के बाद विद्यार्थियों पर अर्थदंड के साथ ही जुर्माना भी लगाया जाएगा। प्रतिदिन 100 रुपये रखा गया है। तीन विद्यार्थियों को पूर्व में भी रैगिंग में शामिल होना पाया गया था। इन पर दस हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया है और कैम्पस प्लेसमेंट की गतिविधियों से बाहर कर दिया गया है। यूजीसी को भी भेजी रिपोर्ट आईईटी के निदेशक डॉ. प्रतोष बसंल का कहना है कि रैगिंग को लेकर कमेटी ने रिपोर्ट तैयार की है। चार विद्यार्थियों को कोर्स से बाहर करने की अनुशंसा की है। कुछ विद्यार्थियों को हॉस्टल और प्लेसमेंट से बाहर किया गया है। कुलगुरु और यूजीसी को रिपोर्ट भेज दी गई है। विश्वविद्यालय के अब फैसले के बाद कार्रवाई की जाएगी।

पावरफुल शख्सियतें और नाबालिग लड़कियां: एपस्टीन के घातक काले कारनामों का पर्दाफाश

आईलैंड  जेफरी एपस्टीन का प्राइवेट आईलैंड लिटिल सेंट जेम्स कैरिबियन सागर में स्थित है, जो अमेरिकी वर्जिन द्वीप समूह में सेंट थॉमस के दक्षिण-पूर्व में है। यह लगभग 72 एकड़ का छोटा आईलैंड है, जिसे एपस्टीन ने 1998 में करीब 80 लाख डॉलर में खरीदा था। यहां सफेद रेत के समुद्र तट, नारियल के पेड़, नीले रंग की छत वाले भवन, स्विमिंग पूल, हेलीकॉप्टर लैंडिंग पैड, मुख्य विला, गेस्ट कॉटेज और डॉक जैसी सुविधाएं थीं। 2010 तक एपस्टीन ने द्वीप का बड़े पैमाने पर नवीनीकरण किया, जिसमें नई विलाएं, स्टोन केबिन और एक रहस्यमयी नीले-सफेद धारीदार भवन शामिल था, जिसे कुछ लोग टेम्पल कहते हैं। यह द्वीप अलग-थलग होने के कारण गोपनीय गतिविधियों के लिए सही माना जाता था, जहां नाव या हेलीकॉप्टर से ही पहुंचा जा सकता था। इस द्वीप पर एपस्टीन और उनकी सहयोगी घिस्लेन मैक्सवेल पर नाबालिग लड़कियों और महिलाओं के साथ यौन शोषण और मानव तस्करी के गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़ितों के बयानों के अनुसार, यहां दुनिया भर से 12 साल की उम्र की लड़कियों को लाया जाता था, जिन्हें अमीर और प्रभावशाली लोगों को शेयर किया जाता था। वर्जीनिया गिफ्रे जैसी पीड़िताओं ने अपनी किताब में बताया कि उन्हें अपमान, मारपीट और बलात्कार का सामना करना पड़ा। 15 साल की लड़की ने कथित तौर पर द्वीप से भागने के लिए दो मील तैरकर सेंट थॉमस पहुंचने की कोशिश की। ईमेल और दस्तावेजों में स्वीट यंग कोकोनट्स जैसे संकेत और लिटिल गर्ल का जिक्र मिला है, जो यौन शोषण की ओर इशारा करते हैं। कई पीड़ितों ने बताया कि उन्हें छुट्टी के बहाने लाया गया लेकिन वे यौन हिंसा का शिकार बनीं। किन लोगों के नाम आए सामने एपस्टीन फाइल्स में अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से जारी लाखों पन्नों के दस्तावेजों में द्वीप के ब्लूप्रिंट, फोटो, लॉगबुक और यात्रा रिकॉर्ड शामिल हैं। इनमें डोनाल्ड ट्रंप, व्लादिमीर पुतिन, प्रिंस एंड्र्यू, मार्क जुकरबर्ग, वुडी एलन जैसे कई बड़े नामों का जिक्र है। हालांकि, नाम आने से दोष सिद्ध नहीं होता और कई ने किसी गलत संबंध से इनकार किया है। फाइल्स में एपस्टीन की संपत्तियों से बरामद सीडी, फोटो और अन्य सबूतों की सूची भी है। एपस्टीन 2008 में बाल यौन अपराधों के लिए दोषी ठहराए गए थे और 2019 में सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोपों में गिरफ्तार हुए, लेकिन जेल में उनकी मौत हो गई, जिसे सुसाइड बताया गया। कई सवालों के जवाब बाकी हाल के वर्षों में द्वीप को 2023 में 6 करोड़ डॉलर में बेच दिया गया है और नए मालिक स्टीफन डेकोफ इसे एक लग्जरी रिसॉर्ट में बदलने की योजना बना रहे हैं, ताकि इसकी कुख्यात इतिहास को मिटाया जा सके। एपस्टीन फाइल्स की रिलीज से कई सवालों के जवाब अभी बाकी हैं और पीड़ितों की आवाज को न्याय मिलने की उम्मीद बनी हुई है। यह मामला शक्ति, धन और गोपनीयता के दुरुपयोग की एक दुखद मिसाल बन चुका है।

शिवपुरी में वकील संजय सक्सेना की हत्या के तीन आरोपी शॉर्ट एनकाउंटर में गिरफ्तार

शिवपुरी. शिवपुरी जिले में करैरा में कोर्ट जाते समय वकील संजय सक्सेना को गोली मारकर उनकी हत्या करने वाले शूटरों गोलू पुत्र अरविंद रावत, पपेंद्र पुत्र हरदास रावत, जहीर पुत्र रफीक को पुलिस ने अलसुबह हुए शॉर्ट एनकांउटर में गिरफ्तार कर लिया है। इस एनकाउंटर में पपेन्द्र को दो गोली लगने की जानकारी सामने आई है। करैरा में शनिवार सुबह करीब 11 बजे बदमाशों ने 57 वर्षीय वकील संजय कुमार सक्सेना की गोली मारकर हत्या कर दी थी। वह निचली बस्ती से गुर्जर दरवाजे होते हुए जंगल के सुनसान रास्ते से बाइक पर सवार होकर न्यायालय जा रहे थे। जिस तरह से घटना को अंजाम दिया गया है, उसे देखकर यह अंदेशा है कि बदमाशों ने पहले उनके आने-जाने के रास्ते की रैकी की थी और इसके बाद घात लगाकर उनके सीने में गोली उतार दी। करीब से मारी गई गोली पुलिस का मानना है कि आरोपियों ने वकील को रोककर बहुत करीब से उन्हें गोली मारी। स्वजन के आरोपों के आधार पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया था। अभिभाषक संघ ने भी दो दिन में आरोपितों की गिरफ्तारी न होने पर सोमवार से न्यायालय में काम बंद कर हड़ताल की चेतावनी दी थी। शाम करीब सात बजे पुलिस में अंतिम संस्कार किया गया। दूरी कम हो जाए इसलिए जंगल के रास्ते से जाते थे कोर्ट बताया जा रहा है कि एडवोकेट संजय सक्सेना अगर रोड वाले रास्ते से कोर्ट जाते तो उन्हें करीब आठ किमी की दूरी घर से कोर्ट जाने के लिए तय करनी पड़ती थी। वहीं जंगल वाले सुनसान रास्ते से महज चार किमी की दूरी तय करने पर वह कोर्ट पहुंच जाते थे। यही कारण था कि वह जंगल वाले सुनसान रास्ते का प्रयोग कोर्ट जाने में करते थे। इसी का लाभ हत्यारों ने उठाया।

बेटे के इलाज के नाम पर फर्जी डॉक्टर ने की 1.59 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी

शहडोल. शहडोल जिले के ब्यौहारी थाना क्षेत्र से ऑनलाइन ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बेटे के इलाज के लिए डॉक्टर का नंबर गूगल पर सर्च करना एक परिवार को भारी पड़ गया। ठगों ने डॉक्टर बनकर बात की और उपचार के नाम पर एक ऐप डाउनलोड कराकर शिक्षक की पत्नी से एक लाख उनसठ हजार रुपये की ठगी कर ली। अब पीड़ित परिवार पैसे वापस दिलाने की मांग को लेकर पुलिस प्रशासन से गुहार लगा रहा है। जानकारी के अनुसार, ब्यौहारी निवासी शिक्षक शिवेश कुमार सिंह के छोटे बेटे का इलाज नागपुर में चल रहा है। बेटे की तबीयत खराब होने पर उसकी मां आरती सिंह डॉक्टर से अपाइंटमेंट लेने के लिए गूगल पर नंबर सर्च कर रही थीं, इसी दौरान उनका कॉल असली डॉक्टर के बजाय साइबर ठगों के पास पहुंच गया। ठगों ने खुद को डॉक्टर का स्टाफ बताते हुए विश्वास में लिया और एक मोबाइल ऐप डाउनलोड करने को कहा। खाते से रकम निकालना शुरू कर दी महिला ने जैसे ही ऐप डाउनलोड किया, ठगों ने चरणबद्ध तरीके से उनके खाते से रकम निकालनी शुरू कर दी। पहले दो बार में 50-50 हजार रुपये और फिर एक बार में 59 हजार रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। इस तरह कुल एक लाख 59 हजार रुपये की ठगी हो गई। महिला की छोटी सी गलती के चलते न सिर्फ मेहनत की कमाई चली गई, बल्कि डॉक्टर का अपाइंटमेंट भी नहीं मिल सका। अब शिक्षक पिता अपने बीमार बेटे के इलाज और ठगी के शिकार हुए पैसे की वापसी के लिए करीब 100 किलोमीटर का सफर तय कर जिला मुख्यालय में पुलिस अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। इस मामले में एडिशनल एसपी ने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई है। महिला द्वारा डॉक्टर का नंबर गूगल पर सर्च किया गया था, जो ठगों के पास कनेक्ट हो गया। फिलहाल मामले की साइबर सेल के माध्यम से जांच कर उचित कार्रवाई की जा रही है।