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ग्वालियर में बहू की प्रताड़ना से तंग आकर बुजुर्ग ने की थी आत्महत्या

ग्वालियर. शहर के थाटीपुर क्षेत्र में 95 वर्षीय बुजुर्ग की आत्महत्या के मामले में बड़ा राजफाश हुआ है। बुजुर्ग अपनी बड़ी बहू से प्रताड़ित थे। सुसाइड नोट में बहू पर गंभीर आरोप लगाए हैं। यह तक लिखा है-वह प्रताड़ित करती है, मारपीट भी करती है। अब जीने की स्थिति नहीं रही, इसलिए जान दे रहा हूं। पुलिस ने सुसाइड नोट जब्त कर लिया है। सुसाइड नोट की जांच हैंड राइटिंग एक्सपर्ट से होगी। इसके बाद ही इस मामले में एफआइआर होगी। थाटीपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत नेहरू कॉलोनी में रहने वाले 95 वर्षीय रामाधार गुप्ता डेयरी संचालक थे। कुछ समय से उनकी डेयरी बेटा सुरेश चंद्र गुप्ता संभाल रहा है। बीती रात रामाधार ने खुद को लाइसेंसी बंदूक से गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस को सुसाइड नोट मिला था, जिसमें आत्महत्या की वजह लिखी थी। सुसाइड नोट में बड़ी बहू द्वारा दिन-रात प्रताड़ित किए जाने की बात लिखी है। पुलिस ने शनिवार को शव का पोस्टमार्टम कराया। इसके बाद शव स्वजन के सुपुर्द कर दिया। पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है। सुसाइड नोट के अंश… मैं रामाधार अपनी बड़ी बहू की प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर रहा हूं। बड़ी बहू द्वारा प्रताड़ित किया गया है, जिसके कारण यह कदम उठा रहा हूं। बड़ी बहू सुनीता बहुत परेशान करती है। यह परेशानी इतनी बढ़ गई है, अब मुझसे झिल नहीं रही है। मैं इस कारण ही आत्महत्या कर रहा हूं। बहुत कुछ सह चुका हूं, लेकिन अब यह सब झिल नहीं रहा है। उम्र 95 वर्ष हो चुकी है। सुनीता से कई बार कहा- मेरी उम्र अब मरने लायक है। ऐसे में कहां जाऊंगा। मेरी मौत का मामला सुनीता पर जरूर दर्ज किया जाए। मेरी छोटी बहू ख्याल रखती है। बड़ी बहू द्वारा प्रताड़ित किए जाने की बात लिखी बुजुर्ग की आत्महत्या के मामले की जांच जारी है। सुसाइड नोट में बड़ी बहू द्वारा प्रताड़ित किए जाने की बात लिखी है। इसकी जांच कराई जा रही है। अभी मर्ग कायम किया है। जांच के बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी। – विपेंद्र सिंह चौहान थाना प्रभारी, थाटीपुर।

इंदौर में नई ‘नेटम’ तकनीक से बनेगा छोटा गणपति मेट्रो स्टेशन

इंदौर. छोटा गणपति भूमिगत मेट्रो स्टेशन के निर्माण का रास्ता अब साफ हो गया है। मेट्रो के अन्य सभी भूमिगत स्टेशन में इसके निर्माण की तकनीक अलग रहेगी। यह न्यू आस्ट्रियन टनलिंग मैथ (नेटम) तकनीक से होगा। ओपन कट के बजाए इस तकनीक से निर्माण करने पर मल्हागंज क्षेत्र के 142 आवासीय व व्यावसायिक इमारतें बच जाएंगी यानी इन्हें नहीं तोड़ना पड़ेगा। गौरतलब है कि मल्हारगंज क्षेत्र में भवनों को तोड़े जाने की नौबत आने के कारण यहां के रहवासी पिछले कुछ महीनों से विरोध जता रहे थे। नौ फरवरी को इस संबंध में गांधी नगर स्थित मेट्रो डिपो कार्यालय में बैठक हुई। इसमें नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व विधायक सत्यनारायण सत्तन और छोटा गणपति क्षेत्र के नागरिक भी शामिल हुए। मेट्रो के अधिकारियों ने सभी को छोटा गणपति मेट्रो स्टेशन की निर्माण की तकनीक बदलने के बाद उससे आवासीय व व्यावसायिक भवनों के प्रभावित न होने की जानकारी दी थी। इसके बाद शुक्रवार को भी मेट्रो के अधिकारियों ने स्थानीय लोगों को भूमिगत स्टेशन की तकनीक के बारे में बताया। रंगपंचमी के बाद शुरू होगा निर्माण एयरपोर्ट से रीगल तक सात भूमिगत मेट्रो स्टेशन प्रस्तावित हैं। इनमें रीगल व छोटा गणपति मेट्रो स्टेशन का निर्माण कार्य अभी शुरू नहीं हो सका है। शेष के लिए बोरिंग मशीनों के माध्यम से पाइलिंग का कार्य पूर्ण किया जा चुका है। छोटा गणपति मेट्रो स्टेशन के निर्माण पर रहवासियों के विरोध के कारण निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हुआ था। शनिवार को हुई बैठक में मंत्री विजयवर्गीय ने मेट्रो के अधिकारियों को जल्द से जल्द इस स्टेशन का निर्माण कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। मेट्रो प्रबंधन रंगपंचमी के बाद इस स्टेशन का निर्माण कार्य शुरू करेगा। इस तरह तैयार होगा छोटा गणपति स्टेशन जियोटेक्नीकल इन्वेस्टिगेशन में प्रस्तावित भूमिगत मेट्रो स्टेशन की जमीन के 38 मीटर (लगभग 125 फीट) गहराई में कठोर चट्टानें मिली हैं। इस वजह से यह स्टेशन ज्यादा गहराई में बनेगा। मेट्रो के अन्य भूमिगत स्टेशन 18 से 22 मीटर गहराई पर बन रहे हैं। 146 मीटर होगी स्टेशन की लंबाई पूर्व में स्टेशन का निर्माण ओपन कट पद्धति से 190 मीटर की लंबाई में प्रस्तावित था। इससे निर्माण क्षेत्र में 142 निजी आवासीय एवं व्यावसायिक मकान टूट रहे थे। अब स्टेशन की लंबाई 146 मीटर होगी। 142 भवन नहीं तोड़े जाएंगे। निगम का गार्डन व मल्हारगंज थाना टूटेगा इस भूमिगत स्टेशन के निर्माण के लिए मल्हारगंज क्षेत्र में बने नगर निगम के दो उद्यान उनकी बीच की 22 मीटर चौड़ी सड़क पर खोदाई होगी। यहां निगम की बनी 12 दुकानें, मल्हारगंज पुलिस स्टेशन, छह पुलिस क्वार्टर तोड़े जाएंगे। प्रवेश निकास गेट के लिए लाल अस्पताल की 0.09 हेक्टेयर आंशिक भूमि ली जाएगी। भूमिगत निर्माण की तकनीकों में यह है अंतर ओपन कट तकनीक: भूमिगत स्टेशन के लिए जमीन के ऊपर 146 से 190 मीटर लंबाई वाले हिस्से 300 से ज्यादा पिलर बोरिंग मशीन के माध्यम से जमीन की गहराई 18 से 22 मीटर तक तैयार किए जाते हैं। इसके बाद जमीन की ऊपरी सतह से स्टेशन की गहराई तक मिट्टी की खोदाई कर मेट्रो स्टेशन का निर्माण किया जाता है। नेटम तकनीक: स्टेशन के लिए जमीन के ऊपर कम जगह मिलने पर 80 मीटर लंबाई छोटा कट लगाकर जमीन में जहां कठोर चट्टानें मिलती हैं, उस गहराई तक पहुंचते हैं। उसके बाद जमीन की गहराई में कंट्रोल ब्लास्टिंग के माध्यम से अंडर ग्राउंड स्टेशन निर्माण के लिए जमीन के दोनों ओर लगभग 35-35 मीटर लंबाई में खोदाई कर विस्तार किया जाता है। इस तरह स्टेशन बनता है। सबसे छोटा होगा स्टेशन लेकिन गहराई में तीन मंजिला बनेगा वर्तमान में एयरपोर्ट से रीगल तक प्रस्तावित सात भूमिगत मेट्रो स्टेशन में से छोटा गणपति स्टेशन सबसे छोटा होगा। अन्य भूमिगत स्टेशन 190 मीटर लंबाई में बन रहे हैं। यह 146 मीटर में तैयार होगा। अन्य भूमिगत स्टेशन जमीन में नीचे दो मंजिला बनेंगे, जबकि यह स्टेशन जमीन के नीचे तीन मंजिला होगा। कवि सत्तन ने प्रस्तावित स्टेशन की मौजूदा स्थिति को इस तरह काव्य भाव से समझाया न किसी की गटर जाएगी, न किसी की शटर जाएगी, नीचे से मेट्रो निकल जाएगी। सब सुरक्षित रहेंगे, जो लोग भयग्रस्त थे वो निश्चिंत रहें…। इस तरह बनी सहमति 9 फरवरी: मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व विधायक सत्यनारायण सत्तन व मल्हारगंज के स्थानीय लोगों के साथ मेट्रो के अधिकारियों की बैठक हुई। 13 फरवरी: मल्हारगंज क्षेत्र के व्यापारी व रहवासियों के साथ बड़ा गणपति स्थित मेट्रो के आफिस में बैठक हुई और उन्हें तकनीक समझाई गई।

कोलंबो में महामुकाबले को लेकर अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था, परिंदा भी नहीं मार सकेगा पर

कोलंबो भारत और पाकिस्तान के बीच रविवार को टी20 विश्व कप 2026 का महामुकाबला कोलंबो में खेला जाएगा। इस मैच के लिए श्रीलंका की राजधानी में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, कड़े पहरे के बीच परिंदा भी पर नहीं मार सकेगा। विशेष ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था लागू कोलंबो के आर. प्रेमदासा स्टेडियम में होने वाले इस हाई-वोल्टेज मुकाबले को लेकर श्रीलंका पुलिस ने विशेष ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की घोषणा की है। पुलिस प्रवक्ता एफ. टी. वूटलर ने शनिवार को बताया कि मैच के आयोजन को देखते हुए किसी भी तरह की चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी। पाकिस्तान ने किया था बहिष्कार का एलान भारत और पाकिस्तान के बीच यह मुकाबला उस समय हो रहा है, जब पिछले कुछ हफ्तों से अनिश्चितता का माहौल बना हुआ था। पाकिस्तान की ओर से बांग्लादेश के समर्थन में मैच के बहिष्कार की घोषणा के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। मामले को सुलझाने के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी), बांग्लादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका के बीच कई दौर की बातचीत हुई। श्रीलंका सरकार ने की पहल और मामले को सुलझाने में निभाई भूमिका श्रीलंका सरकार ने भी संभावित आर्थिक नुकसान को देखते हुए पाकिस्तान से रुख बदलने की अपील की थी। राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ से बातचीत कर टीम को कोलंबो भेजने का आग्रह किया था, ताकि टूर्नामेंट के सह-मेजबान के रूप में श्रीलंका की तैयारियों पर असर न पड़े।

बिना परमिट दौड़ रही बसों पर लगेगा ब्रेक, 16 फरवरी से स्पेशल ड्राइव शुरू

इंदौर मध्य प्रदेश की सड़कों पर नियमों का उल्लंघन कर मनमाने तरीके से चल रही बसों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। बिना परमिट या निर्धारित रूट का पालन न करने वाले बस ऑपरेटरों पर परिवहन विभाग शिकंजा कसने जा रहा है। नए परिवहन आयुक्त उमेश जोगा के पदभार ग्रहण करने के बाद विभाग ने सख्त रुख अपनाया है और 16 फरवरी से प्रदेशव्यापी विशेष जांच अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर जैसे प्रमुख शहरों में परमिट उल्लंघन की बढ़ती शिकायतों ने विभाग की चिंता बढ़ा दी है, जिसके चलते विस्तृत डेटा विश्लेषण भी किया जा रहा है। इंदौर में भी विशेष अभियान चलाकर बसों की जांच की जाएगी। पिछले वर्ष भी परिवहन कार्यालय इंदौर ने बसों की लगातार जांच का अभियान चलाया था, जिसमें लगभग 400 बसों पर कार्रवाई की गई थी।   नियमों का उल्लंघन जारी हालांकि, पूरे साल चले अभियान के बावजूद नियमों का उल्लंघन जारी रहा है। अब एक बार फिर बड़े पैमाने पर जांच की जाएगी। इंदौर से विभिन्न रूटों पर प्रतिदिन लगभग एक हजार बसों का संचालन होता है। इन बसों में निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए परिवहन विभाग विशेष अभियान शुरू करेगा। जांच के दौरान बसों में कमियां पाए जाने पर जब्ती के साथ ही जुर्माने की कार्रवाई की जाती है। लगातार की जा रही कार्रवाई के कारण बस संचालक अपनी बसों की कमियों को दूर कर लेते हैं, जिससे हादसों पर अंकुश लगता है। इसी को ध्यान में रखते हुए परिवहन विभाग जांच अभियान को पुनः शुरू करने जा रहा है। स्लीपर बसों पर भी कार्रवाई की गई है, जिसमें फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम, आपातकालीन द्वार और ड्राइवर केबिन में नियमों के विरुद्ध पार्टीशन को लेकर कार्रवाई की गई है।

रेल यात्रियों को बड़ी राहत: जनरल कोच की घंटे-घंटे सफाई, AI पकड़ेगा गंदगी

 नई दिल्ली रेल मंत्री ने रेलवे रिफॉर्म प्लान 2026 के तहत 52 हफ्तों में 52 सुधार लागू करने की घोषणा की है। शनिवार को उन्होंने बताया पहले चरण में ट्रेनों की साफ-सफाई को प्राथमिकता दी जाएगी और इसके लिए सभी कोच में व्यापक सफाई अभियान चलाया जाएगा। हर जोन की 4 से 5 ट्रेनों को शामिल किया जाएगा रेल मंत्री के मुताबिक, इस योजना की शुरुआती चरण में हर जोन की 4 से 5 ट्रेनों को शामिल किया जाएगा। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से लंबी दूरी की करीब 80 ट्रेनों के एसी कोचों के साथ साथ जनरल कोचों में भी सफाई व्यवस्था लागू की जाएगी। इस दौरान टॉयलेट, डस्टबिन और कोच की सफाई के साथ किसी भी तकनीकी या मैकेनिकल समस्या की भी जांच की जाएगी। एआई आधारित तस्वीरें कंट्रोल रूम में भेजी जाएंगी पीक आवर में सफाई व्यवस्था मजबूत करने के लिए अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती की जाएगी। साथ ही सफाई की निगरानी के लिए तकनीक का इस्तेमाल होगा। रेल मंत्री ने बताया कि एआई आधारित तस्वीरें कंट्रोल रूम में भेजी जाएंगी, जिससे रियल टाइम मॉनिटरिंग हो सकेगी। सफाई मानकों में कमी मिलने पर संबंधित वेंडर पर कार्रवाई की जाएगी, जबकि बेहतर प्रदर्शन करने वाले वेंडरों को ही आगे कॉन्ट्रैक्ट दिए जाएंगे। यात्रियों के किराए में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं रेल मंत्री ने कहा कि,इस व्यवस्था के लागू होने से रेलवे पर अतिरिक्त खर्च आएगा, लेकिन यात्रियों के किराए में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। जरूरत के मुताबिक रेलवे अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति भी करेगा। लंबी दूरी गाड़ियों के सभी कोच में हर घंटे साफ सफाई होगी। स्टाफ उतरकर जनरल कोच की सफाई करेगा इस अभियान के तहत एक इंटीग्रेटेड सिस्टम भी लगाया जाएगा। जिससे कोच की सफाई व्यवस्था को बेहतर तरीके से मॉनिटर किया जा सकेगा। अगर जनरल कोच कनेक्ट नहीं होगा तो स्टाफ उतरकर जनरल कोच की सफाई करेगा। इसके लिए रूट आधारित टीमें तैनात की जाएगी, जो तय रूट पर लगातार काम करेंगी।

मौसम की मार से बिगड़ रही सेहत, इंदौर के अस्पतालों में रोज पहुंच रहे सैकड़ों मरीज

इंदौर मौसम में लगातार हो रहे बदलाव का असर अब लोगों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। दिन में तेज धूप और गर्मी बढ़ी जबकि रात में ठंडक के कारण शरीर का संतुलन बिगड़ रहा है। इसका सीधा असर वायरल फीवर के रूप में सामने आ रहा है। एमवाय अस्पताल में ही एक दिन में करीब एक हजार मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। शहर के शासकीय और निजी अस्पतालों में बुखार, सर्दी-खांसी, गले में खराश और बदन दर्द की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि इस समय मौसम का उतार-चढ़ाव संक्रमण के लिए अनुकूल माहौल बना रहा है। दिन में पसीना और रात में ठंडी हवा चलने से लोग जल्दी बीमार पड़ रहे हैं। खासतौर पर वे लोग ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, जो देर रात तक बाहर रहते हैं या ठंड-गर्मी के बीच लापरवाही बरतते हैं।   शादियों का सीजन भी बढ़ा रहा खतरा इन दिनों शादी समारोह का सीजन चल रहा है। देर रात तक कार्यक्रमों में शामिल होना, ठंडी चीजें खाना, नींद पूरी न होना और भीड़भाड़ में समय बिताने से भी वायरल संक्रमण फैलने की बड़ी वजह सामने आई है। डाक्टरों के अनुसार कई लोग हल्का बुखार या सर्दी होने के बाद भी इसे नजरअंदाज कर रहे हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो रही है। संक्रमण परिवार के अन्य लोगों तक भी फैल रहा है। गंभीर बीमारियों वाले मरीजों के लिए ज्यादा जोखिम शुगर, बीपी, कैंसर, ह्दय रोग, लिवर, अस्थमा, गर्भवती महिलाओं और किडनी से संबंधित बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए यह मौसम ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है। वायरल फीवर होने पर इन बीमारियों से पीड़ित मरीजों की रिकवरी धीमी हो जाती है। कई बार उनकी स्थिति बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती तक कराना पड़ रहा है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के कारण संक्रमण का असर ज्यादा समय तक बना रहता है। बच्चों और बुजुर्गों पर ज्यादा असर डॉक्टरों के अनुसार छोटे बच्चों और बुजुर्गों में भी वायरल फीवर के मामले बढ़ रहे हैं। तापमान में अचानक बदलाव से उनकी इम्युनिटी जल्दी प्रभावित होती है, जिससे बुखार और खांसी लंबे समय तक बनी रहती है। ऐसे में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। बचाव ही सबसे बड़ा इलाज इस मौसम में हल्के गर्म कपड़े साथ रखना, ठंडी चीजों से परहेज करना और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सावधानी बरतना जरूरी है। संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, फल-सब्जियां और भरपूर नींद शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं।

जर्जर शास्त्री ब्रिज को अलविदा! इंदौर में 140 करोड़ की लागत से बनेगा नया ब्रिज

इंदौर 72 साल पुराना लालबहादुर शास्त्री ब्रिज तोड़कर इसके स्थान पर रेलवे 140 करोड़ रुपये खर्च कर नया ब्रिज बनाएगा। नए ब्रिज की चौड़ाई वर्तमान के मुकाबले डेढ़ गुना और ऊंचाई दो मीटर अधिक होगी। शुक्रवार को नगर निगम, मेट्रो और रेलवे के अधिकारियों ने शास्त्री ब्रिज का दौरा किया। देर शाम सांसद शंकर लालवानी ने अधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने बताया कि ब्रिज निर्माण की लागत तो रेलवे वहन करेगा, लेकिन सीवेज, पानी की लाइन, बिजली के पोल इत्यादि मूलभूत सुविधाएं नगर निगम जुटाएगा। सांसद के अनुसार नया ब्रिज संभागायुक्त कार्यालय के पास से शुरू होकर खादीवाला पेट्रोल पंप के पास खत्म होगा। वर्तमान के मुकाबले इसकी लंबाई 38 मीटर अधिक होगी।   रेलवे तीसरा ट्रैक बिछा सकेगा आमतौर पर जब भी किसी रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) को दोबारा बनाना होता है तो खर्च स्थानीय निकाय को वहन करना होता है, लेकिन नया शास्त्री ब्रिज बनने से रेलवे इंदौर से लक्ष्मीबाई नगर तक तीसरा ट्रैक बिछा सकेगा और प्लेटफार्म की लंबाई भी बढ़ जाएगी, यही वजह है कि रेलवे इस आरओबी को दोबारा बनाने का खर्चा वहन करने को तैयार हो गया है। शास्त्री ब्रिज की बिगड़ती स्थिति और इस पर यातायात के बढ़ते दबाव को देखते हुए सांसद शंकर लालवानी ने पिछले दिनों रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से चर्चा की थी। इसके बाद रेलवे इस ब्रिज का खर्चा वहन करने के लिए सैद्धांतिक रूप से तैयार हो गया। शुक्रवार को नगर निगम, मेट्रो और रेलवे के अधिकारियों के शास्त्री ब्रिज के संयुक्त दौरे में इस बात का आकलन किया गया कि नया ब्रिज बनाने की स्थिति में किन-किन सीवेज लाइन, पानी की लाइन और बिजली के पोल की शिफ्टिंग करनी होगी और इस पर कितना खर्चा आएगा। नगर निगम अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर ने बताया कि निगम के इंजीनियरों ने रेलवे के इंजीनियरों को लाइनों की ड्राइंग दे दी है। जल्द ही निगम आर्थिक आकलन तैयार कर लेगा। 12 जनवरी 1953 को हुआ था शुरू वर्तमान शास्त्री ब्रिज का लोकार्पण 12 जनवरी 1953 को हुआ था। तत्कालीन परिवहन मंत्री लालबहादुर शास्त्री ने इसे लोकार्पित किया था। यह ब्रिज पिछले 72 वर्ष से पूर्व और पश्चिम इंदौर को जोड़ने के लिए रीढ़ की हड्डी बना हुआ है। टूटने पर आएगी आवागमन की परेशानी इस ब्रिज से शहर के लगभग सभी मुख्य बाजार सीधे-सीधे जुड़े हैं। शास्त्री ब्रिज के टूटने से आवागमन की भारी परेशानी आएगी। एमजी रोड पर मेट्रो अंडर ग्राउंड प्रस्तावित है, इसलिए इस प्रोजेक्ट में कोई विशेष दिक्कत नहीं आएगी। पिछले दिनों चूहों ने कुतर दिया था वर्ष 1953 में जब यह ब्रिज शुरू हुआ था उस वक्त यह मध्य भारत का पहला टू-टू लेन रेलवे ओवरब्रिज था। हाल ही में शास्त्री ब्रिज को चूहों ने कुतर दिया था। इस वजह से बड़ा गड्ढा हो गया था। जीर्ण-शीर्ण हो चुका है रखरखाव के अभाव में शास्त्री ब्रिज जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुका है। हालांकि रेलवे ने इसे अब तक अनफिट घोषित नहीं किया है। टेंडर में लगेंगे छह माह, 15 माह में होगा निर्माण रेलवे सूत्रों के मुताबिक प्रस्तावित ब्रिज के लिए सर्वे, डिजाइन और ड्राइंग तैयार कर टेंडर होने में कम से कम छह माह लगेंगे। टेंडर तय होने के बाद रेलवे ने इस ब्रिज को 15 माह में तैयार करने का लक्ष्य रखा है।  

डॉक्टरों और छात्रों के लिए खास पहल: AIIMS Bhopal में आर्ट थैरेपी से मिलेगा स्ट्रेस से राहत

भोपाल चिकित्सा और पढ़ाई के तनावपूर्ण माहौल के बीच एम्स भोपाल ने अपने संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों के लिए एक पहल की है। संस्थान का हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर आगामी 16 से 18 फरवरी तक 'पेपर माचे' कला पर कार्यशाला आयोजित करेगा। लोगों को तनावमुक्त करना है टारगेट इसका उद्देश्य केवल कला सिखाना नहीं, बल्कि 'आर्ट थैरेपी' के माध्यम से संस्थान से जुड़े लोगों को तनावमुक्त वातावरण और मानसिक शांति प्रदान करना है। 'पेपर माचे' एक ऐसी प्राचीन विधा है, जिसमें पुराने अखबारों, गोंद और पानी के मिश्रण का उपयोग कर आकर्षक मूर्तियां, मुखौटे और सजावटी वस्तुएं बनाई जाती हैं।   एम्स प्रशासन का मानना है कि जब हाथ किसी सृजनात्मक कार्य में व्यस्त होते हैं, तो मस्तिष्क को गहरा विश्राम मिलता है। यह कार्यशाला प्रतिभागियों को अपनी छिपी हुई प्रतिभा को पहचानने और दैनिक भागदौड़ से इतर कुछ नया रचने का अवसर देगी। एम्स भोपाल इन दिनों अपने कर्मचारियों और छात्रों के समग्र स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दे रहा है। संस्थान के अनुसार एक स्वस्थ चिकित्सक या कर्मचारी ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दे सकता है। इसी सोच के साथ इस रचनात्मक गतिविधि को डिजाइन किया गया है। कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा पेपर माचे की बारीकियां सिखाई जाएंगी, जिससे प्रतिभागी शून्य लागत में घर की रद्दी से खूबसूरत कृतियां बनाना सीख सकेंगे।

रेलवे का बड़ा अपडेट: अब भोपाल-खजुराहो और आरकेएमपी-आधारताल ट्रेनों में मिलेगा प्रीमियम सफर का अनुभव

भोपाल यात्रियों की सुविधा और सुरक्षित सफर को ध्यान में रखते हुए रेल प्रशासन ने बड़ा निर्णय लिया है। गाड़ी संख्या 22163/22164 भोपाल-खजराहो महामना एक्सप्रेस तथा 22187/22188 रानी कमलापति-आधारताल एक्सप्रेस के पारंपरिक आईसीएफ कोचों को अब आधुनिक एलएचबी कोचों में परिवर्तित किया जा रहा है। भोपाल-खजुराहो-भोपाल महामना एक्सप्रेस आज से तथा रानी कमलापति–आधारताल–रानी कमलापति एक्सप्रेस 16 फरवरी से एलएचबी रैक के साथ संचालित होगी। एलएचबी कोच पारंपरिक आईसीएफ कोचों की तुलना में अधिक सुरक्षित, आरामदायक और तेज गति के अनुकूल माने जाते हैं। इन कोचों में झटके कम लगते हैं और दुर्घटना की स्थिति में एंटी-टेलिस्कोपिक डिजाइन यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाता है।   दोनों ट्रेनों की संशोधित कोच संरचना में दो एसी चेयरकार, दो थर्ड एसी, नो द्वितीय श्रेणी, छह सामान्य श्रेणी, एक एसएलआरडी और एक जनरेटर कार सहित कुल 21 कोच शामिल रहेंगे। रेल प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा से पूर्व कोच संरचना और आरक्षण स्थिति की जानकारी अवश्य जांच लें, ताकि सफर सुगम और सुविधाजनक रहे।

मतदाता सूची अपडेट: MP में लाखों नए नाम शामिल, एक लाख हटेंगे; 21 फरवरी को अंतिम सूची जारी

भोपाल मध्य प्रदेश में मतदाता सूची के शुद्धीकरण के लिए चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) के अंतर्गत प्राप्त 95 प्रतिशत दावे-आपत्तियों का निराकरण कर लिया गया है। एक करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम, उपनाम और आयु में कुछ त्रुटियां थीं, जिन्हें सुधरवाया गया है। वहीं, जिन साढ़े चार लाख मतदाताओं ने अधूरे गणना पत्रक जमा किए थे, उनकी भी सुनवाई कर ली गई है। मतदाता सूची में करीब आठ लाख नए नाम जुड़ेंगे और एक लाख हटेंगे। यह प्रक्रिया शनिवार को पूरी करने के बाद अब 21 फरवरी को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि प्रारूप मतदाता सूची के आधार पर हुए दावे-आपत्ति का निराकरण जिलों में कराया गया है। जो भी आवेदन प्राप्त हुए उनका परीक्षण रजिस्ट्रीकरण अधिकारी ने कराया है।   एसआईआर में जिनके गणना पत्रक अधूरे थे, उन्हें नोटिस देकर शिविर में बुलाया गया और यदि दस्तावेज पूरे थे तो उनके पक्ष में आदेश पारित किए गए। इसी तरह साफ्टवेयर ने जिन त्रुटियों को पकड़ा था, उन्हें भी दूर कराया गया है। उल्लेखनीय है कि चुनाव आयोग ने केवल शाब्दिक या आयु गणना की त्रुटि के कारण जिन मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए थे, उनके नाम सूची से नहीं हटाने के लिए कहा था। वहीं, कांग्रेस, भाजपा सहित अन्य दलों के प्रतिनिधियों द्वारा जो शिकायतें की गई थीं, उनका भी निराकरण करवाया गया है। यदि नाम नही जुड़ा तो आगे भी विकल्प – यदि किसी पात्र मतदाता का नाम किसी भी कारण से इस सूची में शामिल नहीं हो पाता है तो ऐसा नहीं है कि उसका नाम आगे शामिल नहीं होगा। यह एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है। वह फार्म छह भरकर अपना नाम जुड़वा सकेगा। इसी तरह नाम, पता आदि जानकारी में संशोधन भी फार्म आठ के माध्यम से हो सकेगा। सूची प्रकाशन के बाद सत्यापन कराएगी कांग्रेस उधर, कांग्रेस ने तय किया है कि 21 फरवरी को मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद कांग्रेस बूथवार सूची का सत्यापन कराएगी। इसमें पार्टी की ओर से जो आपत्तियां की गई थीं, उनका निराकरण नहीं हुआ तो फिर चुनाव आयोग को शिकायत की जाएगी।