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सीमा हैदर-सचिन के घर गूंजी किलकारी, परिवार में बढ़ी खुशियाँ — नया सदस्य हुआ शामिल

ग्रेटर नोएडा ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा में रह रही पाकिस्तान से आई महिला सीमा हैदर छठी बार मां बनी हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ग्रेटर नोएडा के निजी अस्पताल में सीमा ने बेटे को जन्म दिया। डिलीवरी के बाद जच्चा बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। मंगलवार को अस्पताल से छुट्टी होने के बाद रबूपुरा पहुंचने पर सचिन के परिजनों ने बेटे के जन्म की खुशी में मिठाई बांटी। पिछले साल सीमा ने बेटी को जन्म दिया था। जोकि करीब ग्यारह महीने की हो चुकी है। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान की रहने वाली सीमा हैदर पबजी गेम खेलने के दौरान कस्बा रबूपुरा के रहने वाले सचिन मीणा के संपर्क में आई थी। उसके बाद दोनों में प्यार हो गया और तीन साल पहले सीमा अपने चार बच्चों को लेकर नेपाल के रास्ते भारत आ गए। वह रबूपुरा में सचिन मीणा के साथ रह रही थी। इसका खुलासा होने पर सीमा हैदर के साथ सचिन मीणा व उसके पिता को भी जेल जाना पड़ा था। मामला महीनों तक मीडिया की सुर्खियों में रहा था। पिछले साल 18 मार्च को सीमा ने सचिन मीणा की बेटी को जन्म दिया था। इसके करीब ग्यारह माह बाद अब उसके बेटा पैदा हुआ है। हालांकि सचिन मीणा और उसके परिजनों ने इस संबंध में ज्यादा जानकारी देने से इनकार कर दिया। यूट्यूब पर हैं दो मिलियन सब्सक्राइबर सीमा और सचिन मीणा सोशल मीडिया पर बेहद सक्रिय हैं। दोनों यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर ब्लॉग व तरह तरह की वीडियो बनाकर डालते रहते हैं। दोनों के यूट्यूब चैनल पर दो मिलियन से अधिक सब्सक्राइबर हैं। वहीं उनके इंस्टाग्राम पर भी फॉलोवर की संख्या एक मिलियन है।

आर्थिक समीक्षा में अभ्युदय मध्य प्रदेश का विकसित भारत संकल्प

आर्थिक समीक्षा में अभ्युदय मध्य प्रदेश का विकसित भारत संकल्प  लेखक सत्येंद्र जैन,आर्थिक चिंतक। मध्यप्रदेश की विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2025-26 हेतु आर्थिक समीक्षा उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा प्रस्तुत की गयी है।आर्थिक समीक्षा में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की दूरदर्शी आर्थिक नीतियों, कार्यक्रमों का समावेश किया गया है।इन दूरदर्शी आर्थिक नीतियों द्वारा संतुलित और समावेशी विकास का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।डॉ मोहन यादव के अभ्युदय मध्यप्रदेश का उदय हो रहा है। भारत के भागीरथी,प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल एवं योग्य मार्गदर्शन में भारत को विश्व की सबसे सशक्त अर्थव्यवस्था निर्मित करने हेतु मध्यप्रदेश सर्वस्व अर्पण के भाव से योगदान दे रहा है।यही कारण है कि मप्र का भारत की जीडीपी में योगदान लगभग 3.25 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 5.8 प्रतिशत हो गया है।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने आर्थिक समृद्धि के अनेक कदम उठाये हैं।इसके सुखद परिणाम मिलना आरंभ हो गये हैं। वर्ष 2025-26 अग्रिम अनुमान में राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद GSDP प्रचलित भाव पर 16,69,750 करोड़ रूपये अनुमानित है।पिछले वर्ष 2024-25 के 15,02,428 करोड़ रुपये की तुलना में 11.14 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है। इसी प्रकार स्थिर भाव वर्ष 2011-12 के सापेक्ष जीएसडीपी 7,81,911 करोड़ रूपये अनुमानित है,।जो 8.04 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि को प्रतिबिंबित करता है। आर्थिक विस्तार केवल मूल्य वृद्धि का परिणाम नहीं,अपितु वास्तविक उत्पादन और गतिविधियों में वृद्धि का परिणाम है। राज्य में प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2011-12 में प्रचलित भाव पर 38,497 रूपये रही प्रति व्यक्ति आय वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1,69,050 रूपये हो गई है। यह आय स्तर में सुधार का परिचायक है, जो जीवन की गुणवत्ता में सकारात्मक परिवर्तन को रेखांकित करता है।वर्ष 2025-26 में प्रचलित भाव पर सकल राज्य मूल्य वर्धन जीएसवीए में प्राथमिक क्षेत्र का योगदान 43.09 प्रतिशत, द्वितीयक क्षेत्र का 19.79 प्रतिशत तथा तृतीयक क्षेत्र का 37.12 प्रतिशत रहा। इससे प्रकट होता है कि कृषि आधारित आधार को मजबूती देते हुए राज्य की अर्थव्यवस्था में उद्योग और सेवा क्षेत्रों में भी संतुलित विस्तार हुआ है। प्राथमिक क्षेत्र में वर्ष 2025-26 में कुल सकल राज्य मूल्य वर्धन 6,79,817 करोड़ रूपये रहा, जो पिछले वर्ष के 6,33,532 करोड़ रूपये की तुलना में 7.31 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है। इस क्षेत्र में फसलें 30.17 प्रतिशत भागीदारी के साथ प्रमुख घटक रहीं। पशुधन, वानिकी, खनन एवं उत्खनन का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। कृषि एवं ग्रामीण विकास के मोर्चे पर वर्ष 2024-25 में कुल फसल उत्पादन में 7.66 प्रतिशत तथा खाद्यान्न उत्पादन में 14.68 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई। उद्यानिकी क्षेत्रफल 28.39 लाख हेक्टेयर रहा है।दुग्ध उत्पादन 225.95 लाख टन तक पहुँचा है। गांवों की समृद्धि के लिए 72,975 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण तथा 40.82 लाख ग्रामीण आवासों के निर्मित होने से ग्रामीण आधार सशक्त हुआ है। द्वितीयक क्षेत्र का कुल सकल राज्य मूल्य वर्धन- GSVA वर्ष 2025-26 में 3,12,350 करोड़ रूपये रहा, जो 9.93 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। निर्माण, विनिर्माण तथा विद्युत, गैस, जलापूर्ति एवं अन्य उपयोगी सेवाओं का प्रमुख योगदान है। औद्योगिक विकास के अंतर्गत 1,028 इकाइयों को 6,125 एकड़ भूमि आवंटित की गई, जिससे ₹1.17 लाख करोड़ के प्रस्तावित निवेश और लगभग 1.7 लाख रोजगार के अवसरों का मार्ग प्रशस्त हुआ है। वर्ष 2024-25 में एमएसएमई सहायता 2,162 करोड़ रुपये रही। तृतीयक क्षेत्र ने सर्वाधिक तेज गति से वृद्धि की है। वर्ष 2025-26 में इसका कुल GSVA 5,85,588 करोड़ रूपये रहा, जो 15.80 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। व्यापार, मरम्मत, होटल एवं रेस्टोरेंट, वित्तीय सेवाएँ, रियल एस्टेट, लोक प्रशासन तथा अन्य सेवाओं का प्रमुख योगदान रहा है। पर्यटन क्षेत्र में 13.18 करोड़ पर्यटकों के आगमन से पर्यटन क्षेत्र में तीव्रता आई है। वर्ष 2025-26 में 618 करोड़ रूपये राजस्व आधिक्य, अनुमानित कर राजस्व में 13.57 प्रतिशत वृद्धि तथा ऋण-GSDP अनुपात 31.3 प्रतिशत का होना मध्यप्रदेश के वित्तीय अनुशासन में निरंतर सुधार को प्रकट करता है। नगरीय विकास के अंतर्गत अमृत 2.0 में 4,065 करोड़ रुपये का आवंटन और 1,134 परियोजनाओं की स्वीकृति दी गई है। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के अंतर्गत 8.75 लाख आवास पूर्ण हुए तथा स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में राज्य को 8 राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए। स्वास्थ्य क्षेत्र में कुल व्यय 34,112 करोड़ रुपये रहा।यह GSDP का 3 प्रतिशत है। नवंबर 2025 तक 4.42 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए गए और वर्ष 2001-03 के सापेक्ष मातृ मृत्यु दर 379 से घटकर वर्ष 2021-23 में 142 प्रति लाख हो गई। शिक्षा एवं कौशल विकास के क्षेत्र में वर्ष 2025-26 में कुल बजट का 10.37 प्रतिशत शिक्षा के लिए आवंटित किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9 प्रतिशत अधिक है। कक्षा 1-5 में ड्रॉपआउट दर शून्य रही और कक्षा 6-8 में यह घटकर 6.3 प्रतिशत रह गई। 45,668 विद्यार्थियों को 500 करोड़ रूपये की सहायता प्रदान की गई। तकनीकी शिक्षण संस्थानों की संख्या 1,625 से बढ़कर 2,070 हो गई है। महाराजा विक्रमादित्य की भाँति कुशल प्रशासक ,मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव अखंड प्रचण्ड पुरुषार्थ करते हुए अर्थव्यवस्था को सशक्त कर रहे हैं। महानतम अर्थशास्त्री चाणक्य के अनुसार- तस्मान्नित्योत्थितो राजा कुर्यादर्थानुशासनम् । अर्थस्य मूलमुत्थानमनर्थस्य विपर्ययः । अर्थात राजा प्रतिदिन उद्यमशील होकर शासन करे । अर्थ अनुशासन करे।अर्थ मूल को संवर्धित करे। चाणक्य के इस मंत्र को आत्मसात करते हुए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव अभ्युदय मध्य प्रदेश की रचना कर रहे हैं।अभ्युदय मध्य प्रदेश के सर्वागीण विकास द्वारा विकसित  भारत 2047 का संकल्प स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर हो रहा है, झलक रहा है। इति श्री।

हेट स्पीच पर SC का तीखा रुख: सिब्बल से सवाल, CJI ने किया चेतावनी भरा नोट

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने  12 'प्रतिष्ठित' व्यक्तियों द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर कड़ी आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि यह याचिका कथित हेट स्पीच के लिए केवल भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को निशाना बना रही है, जबकि अन्य दलों के नेताओं को छोड़ दिया गया है। मामला क्या है? याचिकाकर्ताओं ने संवैधानिक नैतिकता के उल्लंघन को रोकने के लिए संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्तियों और नौकरशाहों के लिए दिशा-निर्देश तय करने की मांग की थी। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पक्ष रखते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमल्या बागची की पीठ से कहा कि देश का माहौल जहरीला हो गया है और केवल सुप्रीम कोर्ट ही इसे सुधार सकता है। हालांकि, पीठ ने तुरंत यह इशारा किया कि याचिका में समस्या को उजागर करते समय चुनिंदा रूप से केवल कुछ व्यक्तियों का नाम लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियां अदालत ने याचिका के एकतरफा होने पर सवाल उठाए और कहा- यह याचिका निश्चित रूप से कुछ व्यक्तियों को निशाना बना रही है, जबकि उन अन्य लोगों को छोड़ दिया गया है जो नियमित रूप से ऐसे हेट स्पीच देते हैं। याचिकाकर्ताओं को यह आभास नहीं देना चाहिए कि वे केवल कुछ व्यक्तियों को टारगेट कर रहे हैं। CJI ने कहा कि एक निष्पक्ष और तटस्थ याचिका के साथ आएं। यह मुद्दा महत्वपूर्ण है। अंततः, सभी पक्षों की ओर से बोलने में संयम होना चाहिए। हम यह कहना चाहेंगे कि सभी राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों को संवैधानिक नैतिकता का ध्यान रखना चाहिए और अपने भाषणों में संयम बरतना चाहिए। कोई भी दिशानिर्देश सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। पीठ ने कहा कि कई राजनीतिक दल अपनी सांप्रदायिक विचारधारा के आधार पर बेशर्मी से भाषण देते हैं और खुलेआम नफरत फैलाते हैं। कोर्ट ने सिब्बल से कहा- आपने दूसरे पक्ष का एक भी उदाहरण पेश नहीं किया है। याचिका में किनका नाम था? याचिकाकर्ताओं में रूप रेखा वर्मा, मोहम्मद अदीब, हर्ष मंदर, नजीब जंग, जॉन दयाल और अशोक कुमार शर्मा शामिल थे। उन्होंने अपनी याचिका में कथित हेट स्पीच के लिए कई भाजपा नेताओं का नाम लिया था:     हिमंत बिस्वा सरमा (असम के मुख्यमंत्री)     योगी आदित्यनाथ (उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री)     देवेंद्र फडणवीस (महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री)     पुष्कर सिंह धामी (उत्तराखंड के मुख्यमंत्री)     अनंत कुमार हेगड़े (पूर्व केंद्रीय मंत्री)     गिरिराज सिंह (केंद्रीय मंत्री)     इसके अलावा कुछ नौकरशाहों की टिप्पणियों का भी जिक्र था। जस्टिस नागरत्ना ने कहा, 'राजनीतिक दलों के नेताओं को भाईचारे को बढ़ावा देना चाहिए। अदालतें आदेश पारित कर सकती हैं, लेकिन इसका असली समाधान राजनीतिक दलों और लोकतांत्रिक संस्थानों द्वारा संवैधानिक मूल्यों और नैतिकता के प्रति वफादार रहने में ही है।' उन्होंने आगे कहा, 'भाषण की उत्पत्ति विचार प्रक्रिया से होती है। क्या अदालत के आदेश से किसी व्यक्ति की विचार प्रक्रिया को बदला या प्रतिबंधित किया जा सकता है? अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का क्या होगा?' जस्टिस बागची: उन्होंने सिब्बल से कहा कि यह बहुत ही अस्पष्ट याचिका है। इसे एक लोकलुभावन कवायद बनाने के बजाय, इसे एक रचनात्मक संवैधानिक प्रयास होने दें। राजनीति का शोर-शराबा जनहित याचिका (PIL) दाखिल करने का आधार नहीं होना चाहिए। जब कपिल सिब्बल ने कहा कि वह याचिका से व्यक्तियों के सभी संदर्भ हटा देंगे, तो पीठ ने जवाब दिया कि आवश्यक संशोधन किए जाने के बाद ही वह जनहित याचिका पर सुनवाई करेगी। सिब्बल ने याचिका में संशोधन के लिए दो सप्ताह का समय मांगा है। याचिकाकर्ताओं की दो मुख्य मांगे हैं:     यह घोषणा की जाए कि संवैधानिक पदों या सार्वजनिक कार्यालयों में बैठे लोगों के सार्वजनिक भाषण संवैधानिक नैतिकता के अधीन होने चाहिए और वे दूसरों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन न करें।     संवैधानिक पदधारियों और नौकरशाहों के सार्वजनिक भाषण को नियंत्रित करने के लिए दिशानिर्देश बनाए जाएं, ताकि बिना पूर्व प्रतिबंध या सेंसरशिप के संवैधानिक नैतिकता का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

हाई कोर्ट का फैसला: पति-पत्नी जैसा व्यवहार, होटल की रातों को देखते हुए आरोपी को मिली राहत

कलकत्ता  कलकत्ता हाईकोर्ट ने बलात्कार के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि अगर शादी नहीं हो पाती है और रिश्ता में कड़वाहट आती है, तो सिर्फ इसलिए ही सहमति से बने शारीरिक संबंधों को रेप नहीं माना जा सकता। जज ने कहा कि शुरुआत से ही धोखा देने का इरादा होना चाहिए था। साथ ही कहा कि जिस तरह से महिला और पुरुष बर्ताव कर रहे थे, उससे सहमति के संकेत मिल रहे थे। क्या था मामला मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार को हाईकोर्ट ने आरोपी के खिलाफ दर्ज केस रद्द कर दिया। आरोप थे कि उसने शादी का वादा कर महिला के साथ बलात्कार किया और जबरन गर्भपात कराया है। कोर्ट ने कहा कि दोनों साथ में घूमे, रहे और पति पत्नी की तरह रहे। ऐसे में यह आपसी सहमति दिखाता है। जस्टिस चैताली चटर्जी (दास) मामले की सुनवाई कर रहीं थीं। अदालत ने क्या कहा उन्होंने कहा, 'शुरुआत से ही (संबंध बनते समय) धोखा देने या गलत इरादा होना चाहिए था, जिसके कारण महिला को यौन संबंध बनाने के लिए प्रेरित किया गया हो।' जज ने कहा है कि जिस तरह से उस पुरुष और महिला ने एक-दूसरे के साथ व्यवहार किया, वह 'साफ तौर पर आपसी सहमति और साथ को दिखाता है न कि 'धोखाधड़ी के से उकसावे या प्रलोभन' को।' जज ने कहा, 'रिश्ता… साल 2017 में शुरू हुआ और साल 2022 में खटास आने तक जारी रहा। रिश्ते के दौरान… उन्होंने शारीरिक संबंध बनाए, दीघा, पार्क स्ट्रीट, खड़गपुर और गोवा के कई होटलों में साथ रातें गुजारीं और पति-पत्नी की तरह रहे। यह भी स्वीकार किया गया है कि महिला गर्भवती हो गई थी और पीड़िता और आरोपी की सहमति से गर्भपात कराया गया था।' उन्होंने कहा, 'आरोपी के खिलाफ कोई शिकायत करने के बजाए महिला ने रिश्ता जारी रखा…। ऐसे में किसी भी बात से यह साफ नहीं होता कि वह बीते 5 या 6 सालों से किसी भी तरह की गलतफहमी में थीं।' शिकायत इस मामले में महिला साल 2017 में रिश्ते में आई थीं। उन्होंने आरोप लगाए थे कि साल 2018 में आरोपी ने उन्हें कुछ पिलाकर बलात्कार किया, लेकिन वह चुप रही क्योंकि उसने शादी का वादा किया था। इसके बाद दोनों दीघा और गोवा ट्रिप पर गए थे। साल 2020 में महिला गर्भवती हो गई थी और बाद में गर्भपात भी कराया गया। महिला ने आरोप लगाए कि वह शादी के वादे के कारण गर्भपात के लिए तैयार हुई थी। जब आरोपी ने उससे शादी करने से इनकार कर दिया, तो महिला ने 16 फरवरी 2022 में पश्चिम मिदनापुर में पुलिस शिकायत दर्ज कराई। 23 फरवरी को आरोपी को गिरफ्तार किया गया था।

स्टाइल और पावर का परफेक्ट कॉम्बिनेशन! Jawa 42 Ivory लॉन्च, Royal Enfield की बढ़ी टेंशन

 नई दिल्ली Jawa 42 Ivory Price & Features: देश की प्रमुख दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी जावा येज्डी मोटरसाइकिल ने भारतीय बाजार में अपनी मशहूर बाइक Jawa 42 के कलर लाइन-अप को अपडेट किया है. रेट्रो लुक और मॉडर्न टेक्नोलॉजी के लिए मशहूर बाइक Jawa 42 अब एक नए रंग के साथ पेश की गई है. कंपनी ने इस बाइक को अब आइवरी शेड में लॉन्च किया है, जो बाइक को एक अलग और प्रीमियम लुक देता है. यह नया रंग उन ग्राहकों को ध्यान में रखकर लाया गया है, जो क्लासिक स्टाइल के साथ एक्सक्लूसिव फील चाहते हैं. जावा 42 के नए आइवरी कलर वेरिएंट की कीमत कीमत 1.85 लाख (एक्स-शोरूम) रुपये रखी गई है. यह अब इस मॉडल का सबसे महंगा कलर वेरिएंट बन गया है. इससे पहले ड्यूल-चैनल एबीएस और अलॉय व्हील वाला वेरिएंट 1.83 लाख रुपये तक जाता था. नई कीमत के साथ यह वेरिएंट सीधे तौर पर प्रीमियम ग्राहकों को टारगेट करता है. डिजाइन में क्या है खास पेस्टल आइवरी शेड बाइक के फ्रंट फेंडर, हेडलैंप कवर, फ्यूल टैंक, साइड पैनल और रियर फेंडर पर दिया गया है. टैंक पर बड़े और बोल्ड अक्षरों में ‘Forty Two’ लिखा गया है, जबकि साइड पैनल पर ‘42’ का नंबर दिया गया है. यह डिटेल्स इसे बाकी कलर वेरिएंट्स से अलग बनाती हैं. इंजन और अन्य पार्ट्स को ब्लैक पेंट से फिनिश किया गया है, जिससे बाइक को फैक्ट्री कस्टम जैसा लुक मिलता है. मैकेनिकल तौर पर नई आइवरी जावा 42 में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इसमें 294.7 सीसी का लिक्विड-कूल्ड इंजन मिलता है. जो 27 बीएचपी की पावर और 26.84 न्यूटर मीटर (Nm) का टॉर्क जेनरेट करता है. इंजन के साथ छह-स्पीड गियरबॉक्स दिया गया है, जिसमें असिस्ट और स्लिपर क्लच की सुविधा भी मिलती है. बाइक डबल क्रैडल फ्रेम पर बनी है और इसमें आगे टेलिस्कोपिक फोर्क तथा पीछे ट्विन शॉक एब्जॉर्बर दिए गए हैं. हाई-स्पेक वेरिएंट में अलॉय व्हील मिलते हैं, जबकि ग्राहक वायर-स्पोक रिम्स का विकल्प भी चुन सकते हैं. वारंटी और सर्विस सपोर्ट Jawa Yezdi की ओनरशिप एश्योरेंस प्रोग्राम के तहत जावा 42 के साथ 4 साल या 50,000 किलोमीटर की स्टैंडर्ड वारंटी दी जाती है. इसके अलावा ग्राहक कुछ और पैसे खर्च कर एक्सटेंडेड वारंटी भी ले सकते हैं. जिसके बाद कुल वारंटी 6 साल तक की हो जाएगी. इसके अलावा बाइक पर 8 साल तक की रोडसाइड असिस्टेंस और 5 साल तक का एएमसी पैकेज भी उपलब्ध है, जो पूरे देश में लागू होता है.  

सुप्रीम कोर्ट ने तय किया बड़ा अंतर: सलवार खोलना नहीं है रेप की कोशिश, HC का आदेश रद्द

 इलाहाबाद यौन अपराधों के मामलों में संवेदनशीलता और कानूनी व्याख्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और नजीर पेश करने वाला फैसला सुनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक बेहद विवादित फैसले को पलटते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी महिला को गलत नीयत से पकड़ना और उसकी सलवार का नाड़ा खोलना महज 'छेड़छाड़' या 'रेप की तैयारी' नहीं, बल्कि सीधे तौर पर 'रेप का प्रयास' (Attempt to Rape) है। अदालत ने कहा कि ऐसे कृत्य को कम गंभीर अपराध मानकर आरोपी को हल्की सजा देना न्याय की भावना के खिलाफ है। इस फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के मार्च 2025 के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें कोर्ट ने इसे केवल महिला की लज्जा भंग करने का मामला माना था। क्या है पूरा मामला? मामला काफी गंभीर था, जिसमें आरोपियों ने महिला के साथ न केवल अश्लील हरकतें कीं बल्कि उसके कपड़े उतारने का प्रयास भी किया। हालांकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में एक अजीबोगरीब तर्क देते हुए इसे 'रेप का प्रयास' मानने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट का मानना था कि यह कृत्य 'रेप की तैयारी' के अंतर्गत आता है, जिसके लिए सजा कम होती है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद आक्रोश फैल गया था। महिला अधिकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की थी। सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान हाईकोर्ट के इस विवादास्पद फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया। यह कदम एनजीओ 'वी द वुमन' की संस्थापक और वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता द्वारा लिखे गए एक पत्र के बाद उठाया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट की एक विशेष बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के साथ-साथ न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया शामिल थे, ने इस मामले की सुनवाई की। SC की तीखी टिप्पणी और फैसला सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सिरे से खारिज करते हुए आरोपियों के खिलाफ पोक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत 'रेप के प्रयास' के मूल और सख्त आरोपों को बहाल कर दिया है। फैसला सुनाते हुए CJI सूर्यकांत ने न्यायिक संवेदनशीलता पर जोर दिया। अदालत ने कहा कि जब कोई न्यायाधीश यौन अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहा हो, तो उसे मामले की तथ्यात्मक हकीकत और पीड़िता की कमजोरियों के प्रति विचारशील होना चाहिए। बेंच ने अपनी टिप्पणी में कहा, "कोई भी जज या किसी भी अदालत का फैसला तब तक पूर्ण न्याय नहीं कर सकता, जब तक कि वह मुकदमे के तथ्यों की वास्तविकताओं और अदालत का रुख करने वाली पीड़िता की कमजोरियों के प्रति विचारशील न हो।" अदालत ने यह भी साफ किया कि न्यायाधीशों का प्रयास न केवल संवैधानिक और कानूनी सिद्धांतों के ठोस अनुप्रयोग पर आधारित होना चाहिए, बल्कि उसमें करुणा और सहानुभूति का भाव भी होना चाहिए। इन स्तंभों के अभाव में न्यायिक संस्थान अपने महत्वपूर्ण कर्तव्यों का निर्वहन ठीक से नहीं कर पाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने केवल इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को पलटने तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि भविष्य के लिए एक व्यापक सुधार का खाका भी खींचा है। कोर्ट ने कहा कि यौन अपराधों के मामलों में जजों को अधिक संवेदनशील होने की जरूरत है। इसके लिए, सर्वोच्च न्यायालय ने नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी के निदेशक और पूर्व जस्टिस अनिरुद्ध बोस से विशेषज्ञों की एक समिति गठित करने का अनुरोध किया है। यह समिति यौन अपराधों और अन्य संवेदनशील मामलों में न्यायाधीशों के लिए 'संवेदनशीलता और करुणा' विकसित करने हेतु दिशा-निर्देश तैयार करेगी। अदालत ने यह विशेष निर्देश दिया कि ये दिशा-निर्देश सरल भाषा में होने चाहिए, न कि विदेशी अदालतों के जटिल कानूनी शब्दों से भरे हुए।

2027 में उत्तर प्रदेश में फिर बनेगी भाजपा नेतृत्व की डबल इंजन सरकारः योगी आदित्यनाथ

श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए आगे आएं अखिलेशः मुख्यमंत्री  2027 में उत्तर प्रदेश में फिर बनेगी भाजपा नेतृत्व की डबल इंजन सरकारः योगी आदित्यनाथ  लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव को श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए आगे आने की सलाह दी है। इटावा में निर्माणाधीन केदारेश्वर मंदिर के संभावित निमंत्रण पर उन्होंने कहा कि यदि अखिलेश यादव शुद्ध नीयत से यह मंदिर बनवाते तो मैं अवश्य जाता, लेकिन नीयत साफ नहीं है। फिर भी मैं उनको बधाई दूंगा कि देर आए-दुरुस्त आए, आखिर मंदिर बनवा रहे हैं। अब वह श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए भी आगे आएं, लोग प्रशंसा करेंगे। मुख्यमंत्री मंगलवार को एक निजी चैनल के कॉन्क्लेव में बोल रहे थे। इस मौके पर सीएम योगी ने साफ शब्दों में ऐलान किया कि 2022 से अधिक सीटें पाकर 2027 में डबल इंजन की भाजपा सरकार फिर सत्ता में आएगी। 2027 में फिर बनेगी भाजपा नेतृत्व की सरकार   सीएम योगी ने कहा कि 2027 को लेकर कोई शक नहीं है। 2022 से अधिक सीट मिलेंगी और 2027 में फिर भाजपा नेतृत्व की डबल इंजन सरकार बनेगी। डबल इंजन सरकार ने यूपी को ट्रिपल-टी (टेक्नोलॉजी, ट्रस्ट व ट्रांसफॉर्मेशन) से जोड़ा है और वह 2027 में धूम-धड़ाके के साथ फिर से आएगी। कांग्रेस व राजद की जो दुर्गति बिहार में हुई है, 2027 में वही दुर्गति कांग्रेस व सपा की उत्तर प्रदेश में तय है। सीएम ने मीडियाकर्मियों से कहा कि आप सभी 75 जनपदों, 403 विधानसभा क्षेत्रों में जाइए, आम जनता वर्तमान सरकार की वकालत करती नजर आएगी।  राममंदिर के साथ रामराज्य की वास्तविक अवधारणा को धरातल पर उतारा एक प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी को उसकी पहचान वापस दिलाना सबसे बड़ा अचीवमेंट है। यूपी का नौजवान अब पहचान का मोहताज नहीं। किसान खुशहाल है और श्रमिक स्वावलंबन के साथ अपने जनपद-क्षेत्र में रोजगार प्राप्त कर रहा है। महिलाएं सुरक्षित हैं और  यूपी आर्थिक उन्नति के नित नए सोपान प्राप्त कर रहा है। यही रामराज्य है। बिना भेदभाव हर तबके को उसका हक प्राप्त हो रहा है। भगवान राम की जन्मभूमि पर राममंदिर का निर्माण रामराज्य की अवधारणा पर ही आधारित है। हम केवल मंदिर बना देते और यह बदलाव करके नहीं दिखाते तो यह भगवान राम की अवज्ञा होती। हम लोगों ने रामराज्य की वास्तविक अवधारणा को धरातल पर उतारने का कार्य किया। यह डबल इंजन सरकार की ताकत है, जो कहा है, वह करके दिखाया है। आगे भी जो कहेंगे, करके दिखाएंगे। महाराज सुहेलदेव का विरोध और गाजी का मेला लगाते हैं सपाई सीएम योगी ने कहा कि सोमनाथ मंदिर को अपवित्र करने वाले और अयोध्या में श्रीराम मंदिर पर पहला आतंकी हमला करने वाले गाजी को उसके पापों की सजा महाराज सुहेलदेव ने दी थी। लेकिन सपा के लोग महाराज सुहेलदेव का गुणगान करने के बजाय गाजी का नाम लेते हैं, उसका मेला लगाते हैं। ये लोग महाराज सुहेलदेव के स्मारक का विरोध करते हैं। हमें गर्व है कि भाजपा सरकार ने बहराइच में महाराज सुहेलदेव का भव्य स्मारक और आजमगढ़ में महाराज सुहेलदेव विश्वविद्यालय का निर्माण किया। परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीडीए) के चेयरमैन हैं अखिलेश  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा के पीडीए को अवसरवाद का दूसरा नमूना बताया। बोले कि पीडीए मतलब परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी। यह एक परिवार के विकास के लिए गठित अवसरवादी अथॉरिटी है जिसके चेयरमैन अखिलेश, शिवपाल सीईओ और रामगोपाल यादव वाइस चेयरमैन होंगे। उनके पास महाभारत के सारे रिश्ते हैं, बाकी अन्य भाई-भतीजों को भी इसमें स्थान मिलेगा।  देश राहुल गांधी को और प्रदेश अखिलेश यादव को गंभीरता से नहीं लेता  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिसकी जैसी दृष्टि, वैसी सृष्टि। इन लोगों को कोई नहीं समझा सकता, इनकी दृष्टि देश व प्रदेश के लिए हमेशा नकारात्मक रही है। राहुल गांधी को देश और अखिलेश यादव को यूपी गंभीरता से नहीं लेता। कांग्रेस किसी को भी नेता प्रतिपक्ष बना सकती थी। सोनिया जी का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, इसलिए परिवारवादी पार्टी ने राहुल जी को नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी सौंप दी। जब जहाज डूबता है तो कैप्टन भी वही व्यक्ति बनता है, जो उसे आसानी से डुबो सके, इसलिए राहुल जी को कैप्टन बनाया गया।  अखिलेश संघ की शाखाओं में जाएंगे तो जल्दी जागना सीख जाएंगे मुख्यमंत्री ने कहा कि अखिलेश यादव को संघ की शाखाओं में जाकर सामान्य आचार व नियमों की जानकारी लेनी चाहिए। अखिलेश यादव 12 बजे सोकर उठते हैं, वे संघ की शाखा में जाएंगे तो जल्दी जगने की आदत हो जाएगी। समय पर जागेंगे तो यह उनके हित में होगा और जिस पारिवारिक पार्टी को लेकर चल रहे हैं, उसका भी नाम बना रहेगा। सीएम योगी ने वंदे मातरम के जिक्र पर कहा कि यह राष्ट्रगीत है, यह आजादी का मंत्र रहा है। इस गीत को गाते-गाते क्रांतिकारियों ने फांसी के फंदे को चूमने में संकोच नहीं किया। राष्ट्र प्रतीकों का अपमान संविधान निर्माताओं, बाबा साहेब व क्रांतिकारियों का अपमान है। राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान व तिरंगा का अपमान राष्ट्रद्रोह है, जिसे भारत स्वीकार नहीं करेगा।  बुलडोजर व ब्रह्मोस एक-दूसरे के पूरक  सीएम योगी ने कहा कि बुलडोजर और ब्रह्मोस एक-दूसरे के पूरक हैं। बुलडोजर यूपी की स्ट्रेंथ का प्रतीक है। हम इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ देश के सबसे बड़े और सबसे ज्यादा एक्सप्रेसवे के नेटवर्क को यूपी में स्थापित कर सकते हैं। यूपी की जनता जिसकी अपेक्षा कर रही थी, बुलडोजर उस माफिया प्रवृत्ति को कुचल सकता है। ब्रह्मोस जैसे सेक्टर में भी यूपी में बड़े निवेश हो रहे हैं। यह भारत की सामरिक शक्ति का प्रतीक है। किसी ने भारत की आन, बान और शान को लेकर गुस्ताखी करने का प्रयास किया तो दुश्मन को उसके ठिकाने पर जाकर मारेंगे। ‘भाग्य नगर’ से भयभीत होकर अनर्गल प्रलाप कर रहे ओवैसी  सीएम योगी ने ओवैसी को भी आड़े हाथ लिया। बोले कि यूपी की जनता व डबल इंजन सरकार ने श्रीराम जन्मभूमि के माध्यम से संदेश दे दिया है। यूपी के बाद भाजपा अब हैदराबाद की तरफ ही रुख करेगी। ओवैसी की पीड़ा इस बात को लेकर है कि कहीं हैदराबाद को भाग्य नगर न बना दिया जाए। भाग्य नगर से भयभीत होकर वे अनर्गल प्रलाप कर रहे … Read more

81 मेडिकल कॉलेजों के साथ ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज’ विजन को दी गति

इंफ्रास्ट्रक्चर, मेडिकल शिक्षा और सेवाओं के विस्तार से तंदरुस्त हुआ प्रदेश 81 मेडिकल कॉलेजों के साथ ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज’ विजन को दी गति एमबीबीएस और पीजी सीटों में ऐतिहासिक वृद्धि, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता में हुआ सुधार जिला अस्पतालों का आधुनिकीकरण और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का किया विस्तार लखनऊ  प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में पिछले नौ वर्षों के दौरान व्यापक और संरचनात्मक परिवर्तन आया है। योगी सरकार ने स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने, मेडिकल शिक्षा का विस्तार करने और ग्रामीण क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने को प्राथमिकता दी है। नये अस्पतालों के निर्माण, पुराने अस्पतालों के कायाकल्प और मेडिकल कॉलेजों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि ने तस्वीर को बदल दिया है। अब 81 मेडिकल कॉलेज हो रहे संचालित वर्ष 2017 तक प्रदेश में कुल 36 सरकारी मेडिकल कॉलेज संचालित थे। वर्तमान में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 81 हो चुकी है। योगी सरकार वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज के विजन के अनुरूप मेडिकल कॉलेज की स्थापना कर रही है। वहीं एमबीबीएस सीटों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2017 में जहां लगभग 4,690 एमबीबीएस सीटें थीं, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 12,700 हो चुकी है। पीजी सीटों में भी दोगुने से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है जिससे विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता में सुधार हुआ है। प्रदेश के 75 जिलों में जिला अस्पतालों का आधुनिकीकरण किया गया है। कई अस्पतालों में आईसीयू, एनआईसीयू, डायलिसिस यूनिट, ट्रॉमा सेंटर और आधुनिक पैथोलॉजी लैब की स्थापना की गई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है। योगी सरकार 1,500 से अधिक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों को क्रियाशील चुकी है। इनमें मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, जांच और गैरसंचारी रोगों की स्क्रीनिंग जैसी सेवाएं उपलब्ध हैं। डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड और टेलीमेडिसिन सेवाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों को विशेषज्ञ परामर्श से जोड़ा गया है। 200 से अधिक नई पैथोलॉजी और डायग्नोस्टिक यूनिट स्थापित प्रदेश में ‘आरोग्य मंदिर’ की अवधारणा के तहत स्वास्थ्य सेवाओं को समग्र रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके तहत आयुष पद्धति, योग, प्राकृतिक चिकित्सा और एलोपैथिक सेवाओं का समन्वय किया जा रहा है। कई जिलों में आयुष अस्पतालों और वेलनेस सेंटर का निर्माण कराया गया है। योगी सरकार ने आयुष विश्वविद्यालय की स्थापना की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं, जिससे पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को संस्थागत मजबूती मिल रही है। वर्ष 2017 में जहां सीमित जिलों में ही अत्याधुनिक लैब की सुविधा उपलब्ध थी, वहीं अब सभी जिलों में आरटी-पीसीआर लैब, ब्लड बैंक और डिजिटल एक्स-रे जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। कोविड-19 काल में विकसित की गई लैब क्षमता को स्थायी रूप से सुदृढ़ किया गया है। पिछले नौ वर्षों में 200 से अधिक नई पैथोलॉजी और डायग्नोस्टिक यूनिट स्थापित की गई है। इससे जांच की संख्या और गुणवत्ता दोनों में सुधार हुआ है, और मरीजों को निजी लैब पर निर्भरता कम करनी पड़ी है। चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य और आयुष विभाग को दिए लगभग 55 हजार करोड़ योगी सरकार ने 108 और 102 एम्बुलेंस सेवाओं के बेड़े में उल्लेखनीय वृद्धि की है। वर्तमान में प्रदेश में 4,000 से अधिक एम्बुलेंस संचालित हैं, जिनमें एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस भी शामिल हैं। गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए विशेष एम्बुलेंस सेवाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में बजट आवंटन में भी निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में चिकित्सा शिक्षा, आयुष एवं स्वास्थ्य विभाग के लिए 55 ,000 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है। इसमें स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के लिए 37,956 करोड़ रुपये, चिकित्सा शिक्षा के लिए 14997 करोड़ रुपये और आयुष विभाग को 2867 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसका बड़ा हिस्सा ढांचागत विकास, चिकित्सा उपकरणों की खरीद, मानव संसाधन की भर्ती और मेडिकल कॉलेजों के निर्माण पर व्यय किया जाएगा।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वास्थ्य क्षेत्र को ‘सेवा और सुशासन’ का प्रमुख आधार बताया है। उन्होंने नियमित रूप से निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों की समीक्षा की है और समयबद्ध कार्य पूर्ण कराने के निर्देश दिए हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान ऑक्सीजन प्लांट, बेड क्षमता और आईसीयू सुविधाओं में जो बढ़ोत्तरी की गई, उसे स्थायी रूप से मजबूत किया गया है। मुख्यमंत्री का लक्ष्य है कि प्रदेश को मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया जाए, ताकि मरीजों को इलाज के लिए अन्य राज्यों पर निर्भर न रहना पड़े। विशेषज्ञ की राय बीते नौ सालों में प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में जो संरचनात्मक बदलाव हुए हैं, वे केवल संख्या वृद्धि तक सीमित नहीं हैं। यह गुणवत्ता और पहुंच दोनों स्तरों पर प्रभावी हैं। मेडिकल कॉलेजों और एमबीबीएस सीटों में बढ़ोत्तरी से आने वाले वर्षों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता मजबूत होगी। जिला अस्पतालों के आधुनिकीकरण, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर और डिजिटल हेल्थ सेवाओं ने ग्रामीण और शहरी अंतर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डायग्नोस्टिक सुविधाओं और एम्बुलेंस नेटवर्क के विस्तार से समयबद्ध उपचार संभव हुआ है। निरंतर बढ़ते बजट प्रावधान से स्पष्ट है कि राज्य सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र को दीर्घकालिक निवेश और आत्मनिर्भरता के मॉडल के रूप में विकसित कर रही है। अनुराग पटेल, पूर्व आईएएस, उत्तर प्रदेश

वकील की बेहतरीन बहस का असर! सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के आरोपी को दी आज़ादी

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने छह वर्षीय सौतेली बेटी की हत्या के आरोपी व्यक्ति की दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा को  रद्द कर दिया। शीर्ष अदालत ने 'जांच में गड़बड़ी' और अभियोजन पक्ष द्वारा परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी सीरीज स्थापित करने में विफलता का हवाला देते हुए यह आदेश सुनाया। न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाली वकील अंकिता शर्मा की तारीफ की। कोर्ट ने 'सटीक तैयारी' और जांच में आई बड़ी बाधाओं के बावजूद "कुशलतापूर्वक और उत्साह के साथ" मामले की पैरवी करने के लिए प्रशंसा की। वकील की तारीफ पीठ ने कहा, 'हम सरकारी वकील की सराहना करना चाहेंगे, जिन्होंने हमारे अवलोकन के लिए संपूर्ण अभिलेखों-मूल भाषा और उनके अनुवाद सहित का संकलन तैयार करने का प्रयास किया।' पुलिस पर उठाए सवाल हालांकि, शीर्ष अदालत ने छत्तीसगढ़ पुलिस की 'गड़बड़ जांच' की कड़ी आलोचना की। जिसके कारण छह साल की बच्ची की हत्या के मामले में कई सवालों के जवाब नहीं मिल पाए, जहां असली अपराधी बिना सजा के बच गए और उसके सौतेले पिता को 'महज अनुमानों' के आधार पर जेल में डाल दिया गया। फैसला लिखने वाले न्यायमूर्ति चंद्रन ने कहा, 'हम इस बात से चकित हैं कि यदि जांच वकील की तैयारी के आधे स्तर की भी होती, तो उस बेचारी बच्ची के लापता होने और मृत्यु को लेकर रहस्य सुलझ सकता था। हम अपीलकर्ता के वरिष्ठ वकील द्वारा जांच के लचर रुख को प्रभावी ढंग से उजागर करने के प्रयासों की भी सराहना करते हैं।' अपील को किया स्वीकार फैसले में रोहित जांगड़े की अपील को स्वीकार कर लिया गया, जिन्हें छत्तीसगढ़ की एक निचली अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद जेल में डाल दिया गया था। निचली अदालत के फैसले को उच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा था। यह मामला छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में अक्टूबर 2018 का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पांच अक्टूबर 2018 को रोहित जांगड़े और उनकी दूसरी पत्नी के बीच झगड़ा हुआ था। इसके बाद पत्नी अपने माता-पिता के घर चली गई। क्या था मामला आरोप था कि जांगडे अपनी सौतेली बेटी को मोटरसाइकिल पर बिठाकर ले गया। बच्ची लापता हो गई, लेकिन औपचारिक शिकायत 11 अक्टूबर को दर्ज कराई गई। उच्चतम न्यायालय ने मामले की पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की कड़ी आलोचना की। अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी को 13 अक्टूबर, 2018 को गिरफ्तार किया गया था।

भोपाल मेट्रो को वित्तीय सहारा: दो नए रूटों के लिए बजट मिलने की संभावना, पिछली बार मिली थी बड़ी मंजूरी

भोपाल भोपाल में मेट्रो के 2 रूट पर काम चल रहा है। ऑरेंज लाइन के फेज-2 का रूट सुभाषनगर से करोंद के बीच है, जबकि ब्लू लाइन भदभदा से रत्नागिरी तक गुजरेगी। इन दोनों रूट के लिए बजट का प्रावधान हो सकता है। पिछले बजट में भोपाल को 425 करोड़ रुपए मिले थे। बजट से कई सड़कों के निर्माण को लेकर भी बजट मिलने की उम्मीद है। पिछली बार 41 सड़कें और 3 फ्लाईओवर मंजूर किए गए थे। वहीं, शहर के लगभग हर इलाके और ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों के निर्माण के लिए टोकन राशि बजट में रखी गई थी। इनकी अनुमानित लागत 447.21 करोड़ रुपए थी। पिछले बजट में शैतान सिंह तिराहे से कोलार मेन रोड को जोड़ने वाली सड़क और बावड़िया के प्रस्तावित नए आरओबी की एप्रोच रोड बनाने का प्रावधान था। हालांकि, एक साल में यह काम नहीं हो सका है। बजट से भोपाल में खेल और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों को लेकर भी उम्मीदें हैं। पिछले बजटों में इन दोनों ही विभागों को लेकर बजट मिला था।