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योगी आदित्यनाथ सिंगापुर और जापान जाएंगे, निवेश और उद्योग को बढ़ावा देने की तैयारी

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 22 फरवरी से सिंगापुर और जापान के चार दिवसीय दौरे पर रवाना होंगे। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार 23 और 24 फरवरी को सिंगापुर तथा 25 और 26 फरवरी को जापान में विभिन्न उच्चस्तरीय बैठकों और निवेशक सम्मेलनों में भाग लेंगे। राज्य सरकार का मानना है कि इन विदेशी दौरों से उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश को नई गति मिलेगी और रोजगार सृजन के अवसर बढ़ेंगे। भारतीय समुदाय से भी संवाद करेंगे राज्य में वैश्विक निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से यह मुख्यमंत्री की महत्वपूर्ण विदेश यात्रा मानी जा रही है। इससे पहले वह म्यांमार, मॉरीशस, नेपाल और रूस की यात्राएं कर चुके हैं। इस दौरे के दौरान मुख्यमंत्री दोनों देशों के प्रमुख निवेशकों के साथ बैठक करेंगे और वहां रह रहे भारतीय समुदाय से भी संवाद करेंगे। प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी शामिल मुख्यमंत्री के साथ राज्य सरकार का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी जाएगा। इसमें वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, औद्योगिक विकास मंत्री नंदगोपाल गुप्ता 'नंदी', मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद, सचिव अमित सिंह समेत कुल 18 अधिकारी शामिल रहेंगे। सिंगापुर में शहरी विकास और स्मार्ट सिटी पर जोर जापान की राजधानी टोक्यो में 'विनिर्माण, गतिशीलता और प्रौद्योगिकी के लिए जापान-उत्तर प्रदेश साझेदारी' विषय पर गोलमेज सम्मेलन आयोजित करने का प्रस्ताव है। इस सम्मेलन में ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स, रेलवे, इंजीनियरिंग, रसायन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों की अग्रणी जापानी कंपनियों के शामिल होने की संभावना है। इन्वेस्ट यूपी (Invest UP) की टीम निवेशकों के समक्ष औद्योगिक अवसंरचना, हरित हाइड्रोजन, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC), पर्यटन सर्किट, ऑटोमोबाइल सेक्टर, कौशल विकास और व्यापार सुगमता सुधारों पर विस्तृत प्रस्तुति देगी। उपमुख्यमंत्री के नेतृत्व में यूके-जर्मनी दौरा उधर 22 फरवरी को ही उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल यूनाइटेड किंगडम और जर्मनी के दौरे पर रवाना होगा। इस दल में आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के मंत्री सुनील शर्मा तथा औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहेंगे। सरकार को विशेष रूप से आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में बड़े निवेश प्रस्ताव मिलने की उम्मीद है।  

होली 2026: यूपी-बिहार रूट पर Indian Railways चलाएगी स्पेशल ट्रेनें, समय और लिस्ट जारी

 चंदौली रंगों का त्योहार होली नजदीक आ रहा है. देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोग इस त्योहार को मनाने के लिए अपने घरों का रुख करते हैं. ऐसे में भारतीय रेलवे ने भी होली स्पेशल ट्रेनों का परिचालन शुरू कर किया है.  पूर्व मध्य रेल के सीपीआरओ सरस्वती चंद्र ने बताया कि होली के अवसर पर यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ के मद्देनजर भारतीय रेलवे ने 9 जोड़ी यानी 18 होली स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला किया है. इन ट्रेनों के परिचालन से यूपी-बिहार के लोगों को होली के दौरान घर आने में काफी सहूलियत मिलेगी.  आइए देखते हैं उन ट्रेनों की लिस्ट और रूट… > गाड़ी संख्या 08439/08440 पुरी-पटना-पुरी स्पेशल: खड़गपुर-आसनसोल-झाझा के रास्ते चलने वाली गाड़ी संख्या 08439 पुरी-पटना स्पेशल 28 फरवरी से 28 मार्च, 2026 तक प्रत्येक शनिवार को पुरी से 14.55 बजे खुलकर अगले दिन 10.45 बजे पटना पहुंचेगी. वहीं, गाड़ी संख्या 08440 पटना-पुरी स्पेशल 01 से 29 मार्च, 2026 तक प्रत्येक रविवार को पटना से 13.30 बजे खुलकर अगले दिन 09.45 बजे पुरी पहुंचेगी. > गाड़ी संख्या 09031/09032 उधना-हसनपुर रोड-उधना स्पेशल: डीडीयू-पाटलिपुत्र-हाजीपुर- मुजफ्फरपुर-समस्तीपुर के रास्ते चलने वाली गाड़ी संख्या 09031 उधना-हसनपुर रोड स्पेशल 22 फरवरी से 29 मार्च, 2026 तक प्रत्येक रविवार को उधना से 11.25 बजे खुलकर अगले दिन 10.30 बजे डीडीयू, 14.15 बजे पाटलिपुत्र, 17.10 बजे मुजफ्फरपुर रुकते हुए 20.00 बजे हसनपुर रोड स्टेशन पहुंचेगी.   वहीं, गाड़ी संख्या 09032 हसनपुर रोड-उधना स्पेशल 23 फरवरी से 30 मार्च, 2026 तक प्रत्येक सोमवार को हसनपुर रोड स्टेशन से 21.45 बजे खुलकर अगले दिन 00.25 बजे मुजफ्फरपुर, 02.15 बजे पाटलिपुत्र, 05.40 बजे डीडीयू रुकते हुए तीसरे दिन 15.00 बजे उधना पहुंचेगी. > गाड़ी संख्या 07005/07006 चर्लपल्ली-रक्सौल-चर्लपल्ली स्पेशल: रांची-बोकारो-धनबाद -झाझा-बरौनी-समस्तीपुर-दरभंगा-सीतामढ़ी के रास्ते चलने वाली गाड़ी संख्या 07005 चर्लपल्ली- रक्सौल स्पेशल 23 एवं 28 फरवरी तथा 01 मार्च, 2026 को चर्लपल्ली से 22.00 बजे खुलकर तीसरेे दिन 03.50 बजे धनबाद, 10.50 बजे बरौनी, 13.33 बजे दरभंगा रुकते हुए 16.50 बजे रक्सौल पहुंचेगी. वहीं, गाड़ी संख्या 07006 रक्सौल-चर्लपल्ली स्पेशल 26 फरवरी तथा 03 एवं 04 मार्च, 2026 को रक्सौल से 03.15 बजे खुलकर 07.10 बजे दरभंगा, 09.30 बजे बरौनी, 16.00 बजे धनबाद रुकते हुए अगले दिन 19.40 बजे चर्लपल्ली पहुंचेगी. > गाड़ी संख्या 09451/09452 गांधीधाम-भागलपुर-गांधीधाम स्पेशल:  गोरखपुर-नरकटियागंज -बापूधाम मोतीहारी-मुजफ्फरपुर-बरौनी के रास्ते चलायी जा रही गाड़ी संख्या 09451/52 गांधीधाम-भागलपुर-गांधीधाम स्पेशल का परिचालन विस्तार होली स्पेशल के रूप में किया जा रहा है. गाड़ी संख्या 09451 गांधीधाम-भागलपुर स्पेशल 06 मार्च से 27 मार्च तक प्रत्येक शुक्रवार तथा गाड़ी संख्या 09452 भागलपुर-गांधीधाम स्पेशल 09 मार्च से 30 मार्च तक प्रत्येक सोमवार को अपने पुराने समय एवं ठहराव के अनुसार होली स्पेशल के रूप में परिचालित की जाएगी. > गाड़ी संख्या 03009/03010 दानकुनी-आनंद विहार-दानकुनी स्पेशल: झाझा-किउल- नवादा-गया-डीडीयू के रास्ते चलाई जाने वाली गाड़ी संख्या 03009 दानकुनी-आनंद विहार स्पेशल 28 फरवरी तथा 07 मार्च, 2026 को दानकुनी से 00.20 बजे खुलकर 07.40 बजे किउल, 09.13 बजे नवादा, 10.35 बजे गया एवं 14.00 बजे डीडीयू रुकते हुए अगले दिन 11.00 बजे आनंद विहार पहुंचेगी. वहीं, गाड़ी संख्या 03010 आनंद विहार-दानकुनी स्पेशल 01 तथा 08 मार्च, 2026 को आनंद विहार से 15.00 बजे खुलकर अगले दिन 08.40 बजे डीडीयू, 11.45 बजे गया, 13.00 बजे नवादा एवं 14.30 बजे किउल रुकते हुए 23.30 बजे दानकुनी पहुंचेगी. > गाड़ी संख्या 03435/03436 मालदा टाउन-आनंद विहार-मालदा टाउन स्पेशल: भागलपुर-किउल-नवादा-गया-डीडीयू के रास्ते चलाई जाने वाली गाड़ी संख्या 03435 मालदा टाउन-आनंद विहार स्पेशल 02, 09 तथा 16 मार्च, 2026 सोमवार को मालदा टाउन से 09.30 बजे खुलकर 15.15 बजे किउल, 16.25 बजे नवादा, 18.15 बजे गया एवं 21.40 बजे डीडीयू रुकते हुए अगले दिन 13.40 बजे आनंद विहार पहुंचेगी. वहीं, गाड़ी संख्या 03436 आनंद विहार-मालदा टाउन स्पेशल 03, 10 तथा 17 मार्च, 2026 मंगलवार को आनंद विहार से 15.35 बजे खुलकर अगले दिन 08.30 बजे डीडीयू, 11.40 बजे गया, 12.58 बजे नवादा एवं 15.20 बजे किउल रुकते हुए 22.30 बजे मालदा टाउन पहुंचेगी. > गाड़ी संख्या 03131/03132 सियालदह-गोरखपुर-सियालदह स्पेशल: किउल-बरौनी-शाहपुर पटोरी-हाजीपुर-छपरा के रास्ते चलाई जाने वाली गाड़ी संख्या 03131 सियालदह-गोरखपुर स्पेशल 26 फरवरी तथा 02 एवं 05 मार्च, 2026 को सियालदह से 23.50 बजे खुलकर अगले दिन 10.15 बजे बरौनी, 12.05 बजे हाजीपुर रुकते हुए 18.00 बजे गोरखपुर पहुंचेगी. वहीं, गाड़ी संख्या 03132 गोरखपुर-सियालदह स्पेशल 27 फरवरी तथा 03 एवं 06 मार्च, 2026 को गोरखपुर से 21.00 बजे खुलकर अगले दिन 02.20 बजे हाजीपुर, 04.20 बजे बरौनी रुकते हुए 16.20 बजे सियालदह पहुंचेगी. > गाड़ी संख्या 03525/03526 आसनसोल-गोरखपुर-आसनसोल स्पेशल: किउल-बरौनी-शाहपुर पटोरी-हाजीपुर-छपरा के रास्ते चलाई जाने वाली गाड़ी संख्या 03525 आसनसोल-गोरखपुर स्पेशल 28 फरवरी एवं 02 मार्च, 2026 को आसनसोल से 19.15 बजे खुलकर अगले दिन 00.30 बजे बरौनी, 02.30 बजे हाजीपुर रुकते हुए 09.15 बजे गोरखपुर पहुंचेगी. वहीं, गाड़ी संख्या 03526 गोरखपुर- आसनसोल स्पेशल 01 एवं 03 मार्च, 2026 को गोरखपुर से 12.15 बजे खुलकर 17.10 बजे हाजीपुर, 20.20 बजे बरौनी रुकते हुए अगले दिन 04.30 बजे आसनसोल पहुंचेगी. > गाड़ी संख्या 03527/03528 आसनसोल-गोरखपुर-आसनसोल स्पेशल किउल-बरौनी-शाहपुर पटोरी-हाजीपुर-छपरा के रास्ते चलाई जाने वाली गाड़ी संख्या 03527 आसनसोल-गोरखपुर स्पेशल 01 मार्च, 2026 को आसनसोल से 13.20 बजे खुलकर 19.15 बजे बरौनी, 21.15 बजे हाजीपुर रुकते हुए अगले दिन 03.30 बजे गोरखपुर पहुंचेगी. जबकि गाड़ी संख्या 03528 गोरखपुर-आसनसोल स्पेशल 02 मार्च, 2026 को गोरखपुर से 06.30 बजे खुलकर 11.00 बजे हाजीपुर, 13.20 बजे बरौनी रूकते हुए उसी दिन 21.00 बजे आसनसोल पहुंचेगी.

LJCC पर बड़ा आरोप: 300 से अधिक निवेशकों से करोड़ों की धोखाधड़ी, SP से लगाई गुहार

मुरैना  मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में एक और चिटफंड कंपनी कई साल चली और 300 से अधिक लोगों के डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा लेकर चंपत हो गई। अब पीड़ित अपने पैसे की वापसी के लिए चक्कर काट रहे हैं। एक दर्जन से अधिक लोग इसकी शिकायत लेकर एसपी आफिस पहुंचे, इनमें कुछ चिटफंड कंपनी के एजेंट भी थे। एफडी करवाई और मोटे ब्याज के साथ रुपये वापस कर दिए दरअसल एलजेसीसी नाम की यह चिटफंड कंपनी पांच से छह साल पहले मुरैना में आई। इस चिटफंड कंपनी की ऑफिस वनखंडी रोड पर, वनखंडी महादेव मंदिर के पास चली। लोगों को तीन साल में रकम दोगुनी करने का लालच दिया। साथ ही एफडी पर मोटा ब्याज देने का झांसा दिया। लोगों को फंसाने के लिए छह-छह महीने की एफडी करवाई और मोटे ब्याज के साथ रुपये वापस कर दिए। लोगों को फंसाने के लिए एजेंट रखे गए, जिन्हें भी मोटा मानदेय दिया गया। मोटे ब्याज और तीन साल में दोगुनी राशि के झांसे में लोग आए और 300 से अधिक लोगों ने डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा जमा कराए। कंपनी दफ्तर बंद कर गायब हो गई निवेशकों की रकम को साल 2024 में तीन साल होने थे, इसके बाद उन्हें दोगुनी राशि मिलने का भरोसा था, लेकिन इससे पहले ही यह कंपनी अपना दफ्तर बंद कर गायब हो गई। एजेंटाें के अनुसार चिटफंड कंपनी का मालिक समीर अग्रवाल है। इसके बारे में कोई नहीं जानता, बस इनका नाम सुना है। मुरैना में इस चिटफंड कंपनी का संचालक रामकुमार शर्मा उर्फ राजू सफर पुत्र पहलवान सिंह करता था, जो भिंड जिले का रहने वाला है, वह मुरैना चंबल कालोनी में रहता था। कंपनी के मैनेजर भगवान सिंह कुशवाह, अरविंद सिंह कुशवाह, राजेश कुशवाह और अरविंद त्रिपाठी थे, यह सभी लापता है। बिजली कंपनी के लाइनमैन बन गए एजेंट काशीबाबा कालोनी में रहने वाले प्रहलाद प्रजापति बिजली कंपनी में प्राइवेट लाइनमैन है, पैसा दोगुना के लालच में फंसे और करीब एक लाख रुपये खुद के जमा किए। इसके बाद मोटे कमीशन के लालल में एजेंट बन गए और 50 लोगों के आठ लाख रुपये भी मासिक किस्तों में चिटफंड कंपनी में जमा करवाए, जिन्हें लेकर चिटफंड कंपनी भाग गई। 90 लाख रुपये जमा करवाए इसी तरह अजय राठौर एजेंट बना, जिसने 100 से अधिक लोगों के 90 लाख रुपये जमा करवाए। अजय कहता है, कि जिनके पैसे जमा करवाए वह मुझसे मांगते हैं, कभी-कभी ऐसा तनाव होता है कि फांसी लगाने का मन हाेता है। अन्य एजेंट भगवती प्रजापति, विनोद रामपुरी, सतीश शाक्य, मनीष प्रजापति आदि ने भी लाखों रुपये लोगों के जमा करवाए थे।

तीन साल के इंतजार के बाद पन्ना में शुरू हुई पहली संयुक्त हीरा नीलामी

पन्ना देश की एकमात्र मशीनीकृत हीरा खदान संचालित करने वाली कंपनी की मझगवां स्थित हीरा परियोजना और उथली खदानों से प्राप्त हीरों की नीलामी पहली बार एक साथ पन्ना में होगी। बहुप्रतीक्षित नीलामी 15 से 30 मार्च के बीच नव-निर्मित हीरा कार्यालय परिसर में हो सकती है। देश की एकमात्र मशीनीकृत हीरा खदान राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी- नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) की हीरा खदान देश की एकमात्र मशीनीकृत हीरा खदान है। यहां अत्याधुनिक अयस्क प्रसंस्करण संयंत्र है। संयुक्त नीलामी के लिए नवनिर्मित हीरा कार्यालय के हॉल को तैयार किया जा रहा है। एसी की व्यवस्था पूरी हो चुकी है। फर्नीचर और अन्य आवश्यक काम अंतिम चरण में है। तीन साल बंद रहा उत्पादन 1 जनवरी 2021 को पर्यावरणीय स्वीकृति समाप्त होने सेएमपीके मझगवां हीरा खदान से खनन बंद हो गया था। लगभग तीन वर्ष तक उत्पादन ठप रहा। मार्च 2024 में पुन: खनन शुरू किया गया। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से अनुमति मिलने के बाद एनएमडीसी को दो खनन पट्टों पर खनन की मंजूरी दी गई है।

पीएफ निवेशकों के लिए खबर: EPFO ब्याज दर पर 11 दिन में फैसला होने वाला

नई दिल्ली कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO वित्त वर्ष 2026 के लिए पीएफ अकाउंट होल्डर्स के लिए ब्याज में संशोधन करके इसे बढ़ाएगा या फिर PF Interest Rate यथावत रहेंगे, इस पर ऐलान महज 11 दिन बाद होने वाला है. इसे लेकर अगले महीने की शुरुआत में 2 मार्च को समिति की अगली बैठक होगी, जिसमें पीएफ ब्याज दर को लेकर अंतिम फैसला लिए जाने की उम्मीद है.  स्थिर रह सकता है ब्याज! बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, 2 मार्च को होने वाली बैठक में PF Interest Rates पर फैसला होने की उम्मीद है.फिलहाल, पीएफ खाते पर सरकार की ओर से 8.25% का ब्याज दिया जा रहा है और ऐसे उम्मीद जताई जा रही है कि EPFO इसे इसी स्तर पर बनाए रख सकता है. अगर ऐसा होता है, तो ये लगातार तीसरी बार होगा, जब मेंबर्स को उनके भविष्य निधि जमा पर 8.25% का ही ब्याज मिलेगा. रिपोर्ट की मानें, तो EPFO ब्याज को स्थिर रखने का उद्देश्य बाजार में उतार-चढ़ाव होने पर भी ग्राहकों को स्थिर और निरंतर ब्याज दर देते रहना है. ईपीएफओ के पास इस फाइनेंशियल ईयर में 8.25% ब्याज दर बनाए रखने के लिए अपने निवेश से पर्याप्त अधिशेष होगा.  मनसुख मंडाविया करेंगे बैठक का नेतृत्व  PF Interest Rate के प्रस्ताव पर ईपीएफओ के सर्वोच्च निर्णय लेने वाले केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) द्वारा चर्चा करते हुए निर्णय लिया जाएगा. इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया करेंगे. इससे पहले सीबीटी की आखिरी बैठक बीते साल 15 अक्तूबर को हुई थी. उसमें कई बड़े ऐलान किए गए थे, जिनमें पीएफ के पैसों की निकासी को आसान आसान बनाने के उद्देश्य से कई सुधारों की घोषणा की थी. सूत्रों के अनुसार, इस बार भी बोर्ड सदस्यों के लिए लेन-देन को सरल बनाने के लिए और अधिक सुधारों पर विचार किया जा सकता है. इनमें EPFO वेबसाइट को अपग्रेड करना, विद्ड्रॉल में तेजी और क्लेम सेटलमेंट में तेजी जैसे उपाय शामिल हो सकता हैं. हालांकि, अभी तक ईपीएफओ की ओर से अगली बैठक का एजेंडा जारी नहीं किया गया है. अगले वित्त वर्ष के लिए ये अनुमान एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले सालों में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन को निवेश के नए रास्तों की तलाश करनी पड़ सकती है. मतलब साफ है कि अगर इनकम पर दबाव पड़ता है तो इससे अगले वित्तीय वर्ष से कम रिटर्न पर विचार-विमर्श देखने को मिल सकता है.  ईपीएफओ कहां-कहां करता है निवेश?  गौरतलब है कि EPFO करीब 28 लाख करोड़ रुपये के कोष मैनेज करता है. संगठन नए निवेश का 45 से 65% हिस्सा सरकारी प्रतिभूतियों (Govt Securities) में निवेश करता है. इसके अलावा करीब 20 से 45% अन्य ऋण साधनों (Debt Instruments) में निवेश किया जाता है. वहीं 5 से 15% तक एक्सचेंज-ट्रेडेड फंडों के जरिए इक्विटी में लगाया जाता है, जबकि 5% तक शॉर्ट टर्म कर्ज साधनों में निवेश किया जाता है. निवेश का यह मैनेजमेंट ईपीएफओ बैलेंस को सुरक्षा और रिटर्न के बीच संतुलन बनाने में मदद करता है, क्योंकि अधिकांश रकम अपेक्षाकृत स्थिर ऋण साधनों में ही निवेश की जाती है. इस तरह से आरक्षित कोष उन वर्षों में रिटर्न को सुचारू रखने में मददगार साबित होता है, जबकि निवेश से होने वाली इनकम कम होती है. 

कोविड के दौरान 10 लाख मजदूर परिवारों के नाम हटाए गए, 6 साल में केवल 1% को मिला 100 दिन का काम — विधानसभा में जानकारी

भोपाल  प्रदेश में मनरेगा के तहत पिछले छह वर्षों में 1 प्रतिशत मजदूरों को भी पूरे 100 दिन का रोजगार नहीं मिल पाया। यह खुलासा विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में हुआ। जवाब में सामने आया कि बड़ी संख्या में मजदूर पंजीकृत होने के बावजूद सीमित परिवारों को ही 100 दिन का काम मिला। विधानसभा में दिए गए जवाब के अनुसार वर्ष 2021 में 1 करोड़ 70 लाख से अधिक पंजीकृत मजदूरों में से केवल 1 लाख 23 हजार परिवारों को ही 100 दिन का रोजगार मिला। वर्ष 2022 में यह संख्या घटकर 63 हजार 898 परिवार, वर्ष 2023 में 40 हजार 588, वर्ष 2024 में 30 हजार 420 और वर्ष 2025 में 32 हजार 560 परिवार रह गई। आंकड़ों के आधार पर विपक्ष ने आरोप लगाया कि छह वर्षों में 1 प्रतिशत मजदूरों को भी पूरा रोजगार नहीं मिल सका। 150 दिन रोजगार का प्रावधान भी अधूरा मनरेगा के तहत वनाधिकार पट्टाधारियों को वर्ष में 150 दिन रोजगार देने का प्रावधान है, लेकिन विधानसभा में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार वर्ष 2025-26 में 24 जिलों में एक भी मजदूर को 150 दिन का रोजगार नहीं मिला। चार जिलों में मात्र एक-एक परिवार को ही 150 दिन काम दिया गया। जानकारी में बताया गया कि सबसे अधिक अलीराजपुर जिले में 112 परिवारों को 150 दिन रोजगार मिला, जबकि छिंदवाड़ा में 28, धार में 21, मंडला में 17 और दमोह में 16 परिवारों को यह लाभ मिला। आदिवासी जिला झाबुआ में 150 दिन रोजगार का आंकड़ा शून्य रहा। मजदूरी की मांग बढ़ी, रोजगार नहीं विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार कोविड काल के बाद से मजदूरी की मांग लगातार बढ़ी, लेकिन रोजगार उपलब्धता उसी अनुपात में नहीं बढ़ सकी। बड़ी संख्या में परिवारों और श्रमिकों ने काम की मांग की, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की स्थिति पर सवाल खड़े हुए हैं। जॉब कार्डधारी परिवार बढ़े, काम कम मिला प्रदेश में जॉब कार्डधारी परिवारों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन प्रति परिवार मिलने वाले कार्य दिवस घटे हैं। विपक्ष ने इसे सरकार की रोजगार नीति की विफलता बताते हुए कहा कि ग्रामीण मजदूरों को पर्याप्त काम नहीं मिल पाने के कारण पलायन की स्थिति बन रही है। ऐसे घटता गया 100 दिन रोजगार पाने वालों का आंकड़ा साल पंजीकृत मजदूर 100 दिन रोजगार पाने वाले परिवार 2021 1,70,19,681 1,23,624 2022 1,81,42,207 63,898 2023 1,69,07,207 40,588 2024 1,70,42,207 30,420 2025 1,86,57,080 32,560 150 दिन रोजगार का प्रावधान भी अधूरा मनरेगा के तहत वनाधिकार पट्टाधारियों को वर्ष में 150 दिन रोजगार देने का प्रावधान है, लेकिन 2025-26 में स्थिति कमजोर रही। जिलावार स्थिति (150 दिन रोजगार): 24 जिलों में — एक भी परिवार को नहीं मिला रोजगार 4 जिलों में — सिर्फ 1 परिवार को मिला रोजगार अलीराजपुर — 112 परिवार छिंदवाड़ा — 28 परिवार धार — 21 परिवार मंडला — 17 परिवार दमोह — 16 परिवार झाबुआ — शून्य विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में सरकार ने स्वीकार किया कि पिछले वर्षों में लाखों परिवारों और श्रमिकों के नाम जॉब कार्ड से हटाए गए, जिनमें सबसे ज्यादा नाम कोविड काल के दौरान काटे गए। कोरोना काल में सबसे ज्यादा नाम हटे विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में 10 लाख 46 हजार 786 परिवारों के 43 लाख 43 हजार 378 श्रमिकों के नाम जॉब कार्ड से हटाए गए। उस समय रोजगार की मांग सबसे अधिक थी, लेकिन बड़ी संख्या में मजदूर योजना से बाहर हो गए। वर्षवार जॉब कार्ड से हटाए गए नाम 2021: 10,46,786 परिवार — 43,43,378 श्रमिक 2022: 1,71,389 परिवार — 7,71,730 श्रमिक 2023: 5,28,579 परिवार — 20,24,552 श्रमिक 2024: 45,516 परिवार — 1,91,183 श्रमिक 2025: 25,684 परिवार — 1,23,524 श्रमिक रोजगार की मांग के बीच बाहर हुए मजदूर आंकड़ों के मुताबिक कोविड के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की मांग लगातार बढ़ी, लेकिन उसी दौरान बड़ी संख्या में लोगों के नाम जॉब कार्ड से हटाए जाने से मजदूरों को काम पाने में कठिनाई हुई। विपक्ष का आरोप कांग्रसे ने आरोप लगाया कि जब ग्रामीण मजदूरों को सबसे ज्यादा रोजगार की जरूरत थी, उसी समय नाम काटे जाने से उन्हें काम से वंचित होना पड़ा और पलायन की स्थिति बनी। विधानसभा में सामने आए इन आंकड़ों के बाद मनरेगा के क्रियान्वयन और जॉब कार्ड सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। मजदूरी की मांग भी रही ऊंची वर्ष परिवार श्रमिक 2021-22 61,66,780 1,21,95,233 2022-23 53,13,454 92,99,519 2023-24 46,99,747 76,31,549 2024-25 44,79,776 69,86,086 2025-26 42,64,414 65,47,787  

बच्चों से जुड़े अपराध में लंबी जद्दोजहद: MP में तेजी, दिल्ली में 4.5 साल लगते हैं केस सुलझाने में

भोपाल  मध्य प्रदेश में पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत दर्ज होने वाले गंभीर अपराधों के मामलों में पीड़ितों को न्याय मिलने की रफ्तार देश के कई बड़े राज्यों और महानगरों की तुलना में काफी बेहतर है। राज्यसभा में पेश किए गए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मध्यप्रदेश के फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (FTSC) में इन मामलों के ट्रायल (विचारण) में लगने वाला औसत समय राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और गुजरात जैसे राज्यों के मुकाबले काफी कम है। एमपी में 380 दिन में फैसला, दिल्ली में साढ़े 4 साल विधि और न्याय मंत्रालय द्वारा जारी 2024 के आंकड़ों के अनुसार, मध्यप्रदेश में एक पॉक्सो मामले के निपटारे में औसतन 380 दिन का समय लगता है। इसकी तुलना यदि अन्य राज्यों से की जाए, तो तस्वीर काफी चौंकाने वाली है।     दिल्ली: यहां पॉक्सो केस के ट्रायल में औसतन 1639.5 दिन (लगभग 4.5 साल) लग रहे हैं।     गुजरात: यहां न्याय मिलने में औसतन 1292.5 दिन का समय लगता है।     उत्तर प्रदेश: यहां भी ट्रायल में औसतन 861 दिन लगते हैं, जो एमपी से दोगुने से भी अधिक है। देशभर में 2.24 लाख से ज्यादा मामले लंबित मंत्रालय ने बताया कि 31 दिसंबर 2025 तक देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पॉक्सो अधिनियम के तहत कुल 2,24,572 मामले लंबित थे। इन मामलों के त्वरित निपटान के लिए वर्तमान में देश भर में 774 फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय कार्य कर रहे हैं, जिनमें 398 विशेष तौर पर केवल पॉक्सो (ई-पॉक्सो) कोर्ट हैं। चाइल्ड फ्रेंडली न्याय प्रणाली पर सरकार का फोकस सरकार पीड़ितों को सुविधाजनक माहौल देने के लिए न्यायालय परिसरों के भीतर सुभेद्य साक्षी निक्षेपण केन्द्रों (VWDC) के उपयोग को प्रोत्साहित कर रही है। इसके माध्यम से बच्चों के लिए डरावने न्यायिक वातावरण के बजाय एक 'चाइल्ड फ्रेंडली' माहौल तैयार किया जा रहा है। इसके लिए अब तक 10,000 से अधिक प्रतिभागियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। कानून व्यवस्था राज्य की जिम्मेदार मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि 'पुलिस' और 'सार्वजनिक व्यवस्था' राज्य के विषय हैं। इसलिए, कानून व्यवस्था बनाए रखने, नागरिकों की सुरक्षा और अपराधों की जांच व अभियोजन की मुख्य जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है। केंद्र सरकार महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और इसके लिए कई कदम उठा रही है। 2.45 मामले अभी भी पेंडिंग न्याय में तेजी लाने के लिए केंद्र सरकार ने फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतों और विशेष POCSO अदालतों की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की है। 31 दिसंबर 2025 तक, देश भर में 774 FTSCs और 398 e-POCSO अदालतें काम कर रही हैं। इन अदालतों ने 3.66 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया है, जबकि लगभग 2.45 लाख मामले अभी भी लंबित हैं। 22 राज्यों में 880 फास्ट ट्रैक अदालत इसके अलावा, 22 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 880 फास्ट-ट्रैक अदालतें भी चल रही हैं। ये अदालतें गंभीर अपराधों, महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों, दिव्यांगों और लंबी बीमारियों से पीड़ित लोगों से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई करती हैं। हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि मध्य प्रदेश में इन 880 अदालतों में से एक भी फास्ट-ट्रैक अदालत कार्यरत नहीं है। वहीं, उत्तर प्रदेश में 373 और महाराष्ट्र में 102 ऐसी अदालतें हैं। मध्य प्रदेश में 67 फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतें, जिनमें POCSO अदालतें भी शामिल हैं, कार्यरत हैं। अब ट्रायल को भी समझ लीजिए     ट्रायल का औसत समय: विशेष रूप से उस अवधि को दर्शाता है जो अदालत में 'ट्रायल' (विचारण) की प्रक्रिया शुरू होने से लेकर अंतिम फैसले तक लगती है।     ट्रायल की शुरुआत: कानूनी प्रक्रिया में ट्रायल तब शुरू माना जाता है, जब पुलिस अपनी जांच पूरी कर अदालत में आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल कर देती है और अदालत उस पर संज्ञान लेकर कार्यवाही शुरू करती है।     अवधि की गणना: दस्तावेजों में 'औसत विचारण समय' की गणना उन दिनों के आधार पर की गई है जो फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (FTSC) और अनन्य पॉक्सो (e-POCSO) न्यायालयों में मामले की सुनवाई चलने और फैसला आने के बीच व्यतीत हुए हैं।     केस दर्ज होने से अंतर: आमतौर पर केस दर्ज होने (FIR) और विचारण (Trial) शुरू होने के बीच 'जांच' का समय होता है। जो 380 दिन (मध्य प्रदेश के लिए) का आंकड़ा दिया गया है, वह मुख्य रूप से अदालती कार्यवाही (Trial) में लगने वाला समय है।     त्वरित निपटान का लक्ष्य: इन विशेष न्यायालयों का उद्देश्य ही यह है कि विचारण की इस अवधि को कम किया जाए ताकि पीड़ितों को वर्षों तक इंतजार न करना पड़े। मंत्री बोले- जितना जल्दी न्याय मिलेगा, तभी हम कहेंगे न्याय हुआ पॉक्सो के मामलों के जल्द निपटारे पर मप्र के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने कहा- न्याय जितने जल्दी मिले, तभी हम कह सकते हैं कि न्याय हुआ। अन्यथा जितना देरी होगी उतना अन्याय की दिशा में हम बढे़ेंगे। मप्र के लिए हमें यह संतोष है कि जो शिकायतें हुई उनका जितना जल्दी हो सके न्याय दिलाने का प्रयास किया है।

AMCA प्रोजेक्ट में बड़ा कदम! टाटा के हाथ में 5th Gen जेट बनाने की जिम्मेदारी

मुंबई  भारत ने पांचवीं पीढ़ी के देसी स्टेल्थ फाइटर जेट (5th Gen Fighter Jet) एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के लिए बड़ा कदम उठाया है. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने इस 5th जेन फाइटर जेट का प्रोटोटाइप डिजाइन करने के लिए तीन दावेदारों को शॉर्टलिस्ट किया है. इनमें टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड सबसे बड़ी दावेदार के तौर पर उभरी है, जबकि लार्सन एंड टुब्रो–भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड का कंसोर्टियम और भारत फोर्ज (BEML लिमिटेड) डेटा पैटर्न्स का संयुक्त समूह शामिल है. एएमसीए प्रोजेक्ट के तहत भारत का स्वदेशी सिंगल-सीटर, ट्विन-इंजन स्टेल्थ फाइटर जेट विकसित किया जाना है, जिसमें एडवांस्ड स्टेल्थ कोटिंग और इंटरनल वेपन बे जैसी अत्याधुनिक खूबियां होंगी. इस परियोजना के अंतर्गत 125 से अधिक फाइटर जेट तैयार किए जाने की योजना है, जिनके 2035 तक भारतीय वायुसेना में शामिल होने की उम्मीद है. इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो जाएगा, जिनके पास पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट हैं. ये विमान अमेरिका के पांचवी पीढ़ी के विमान F-35 और रूसी फिफ्थ जेन फाइटर जेट Su-57 की टक्कर के होंगे. इस 5th जेनरेशन स्टेल्थ फाइटर जेट एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) का पहला प्रोटोटाइप 2028 के आखिर तक रोल आउट होने वाला है, और पहली उड़ान 2029 में प्लान की गई है. इस प्रोजेक्ट का मकसद पांच उड़ने वाले प्रोटोटाइप डेवलप करना है, जिसका पूरा डेवलपमेंट 2034 तक पूरा होने और शुरुआती प्रोडक्शन 2035 तक होने का टारगेट है. HAL और अडाणी डिफेंस ने भी लगाई थी बोली रिपोर्ट के मुताबिक, डीआरडीओ ने अपनी एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी के जरिये जुलाई 2025 में इस परियोजना के लिए टेंडर जारी किए थे. शुरुआत में सात कंसोर्टियम ने बोली लगाई थी, जिनमें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और अडाणी डिफेंस जैसे नाम शामिल थे. शॉर्टलिस्ट किए गए दावेदारों को अब सरकार की ओर से फंडिंग सहायता मिलने की संभावना है, ताकि वे एएमसीए के प्रोटोटाइप विकसित कर सकें. इसके बाद ही उत्पादन अधिकार दिए जाएंगे. सूत्रों के हवाले से बताया कि, HAL शुरुआती स्क्रीनिंग में एक अनिवार्य दस्तावेजी मानदंड में त्रुटि के कारण बाहर हो गया. हालांकि कंपनी को बाद में लाइसेंस निर्माण के लिए बोली लगाने का अवसर मिल सकता है. HAL के सीएमडी डीके सुनील ने हाल ही में कहा था कि एएमसीए एक 10 साल की परियोजना है और भले ही उनकी कंपनी शुरुआती चरण में चयनित न हो, वह आगे लाइसेंस मैन्युफैक्चरिंग के लिए जरूर बोली लगाएगी. भारत के 5th Gen फाइटर जेट प्रोजेक्ट की खास बातें… भारत का AMCA प्रोग्राम क्या है? AMCA यानी Advanced Medium Combat Aircraft भारत का स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर जेट प्रोग्राम है, जिसे डीआरडीओ विकसित कर रहा है. AMCA की सबसे बड़ी खासियत क्या होगी? यह एक सिंगल-सीटर, ट्विन-इंजन स्टेल्थ फाइटर जेट होगा, जिसमें एडवांस्ड स्टेल्थ कोटिंग, इंटरनल वेपन बे और आधुनिक एवियोनिक्स सिस्टम शामिल होंगे. AMCA के लिए किन कंपनियों को शॉर्टलिस्ट किया गया है? डीआरडीओ ने तीन दावेदारों को शॉर्टलिस्ट किया है— टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (स्टैंडअलोन), लार्सन एंड टुब्रो और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड का कंसोर्टियम और भारत फोर्ज, बीईएमएल लिमिटेड और डेटा पैटर्न्स का संयुक्त समूह AMCA प्रोजेक्ट के तहत कितने फाइटर जेट बनाए जाएंगे? इस प्रोजेक्ट के तहत 125 से अधिक फाइटर जेट बनाए जाने की योजना है. AMCA कब तक भारतीय वायुसेना में शामिल हो सकता है? AMCA के 2035 तक भारतीय वायुसेना में शामिल होने की उम्मीद है. भारत में बनेंगे 90 राफेल जेट एएमसीए परियोजना भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण की व्यापक योजना का हिस्सा है. इसी क्रम में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने हाल ही में फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिनमें से 90 विमान भारत में बनाए जाएंगे. यह मंजूरी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के 17 से 19 फरवरी के भारत दौरे से कुछ दिन पहले दी गई. इसके अलावा, रक्षा अधिग्रहण परिषद ने नौसेना के लिए अमेरिका से छह अतिरिक्त पी-8आई समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी विमानों की खरीद को भी मंजूरी दी है. यह सभी फैसले भारत की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने और स्वदेशी रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने की दिशा में अहम माने जा रहे हैं.  

जहां दफन था पाकिस्तान का गुरूर, वहीँ भारत का ‘निस्तार’ सीना ताने खड़ा

विशाखापत्तनम  इंडियन नेवी के इतिहास में कुछ तारीखें और कुछ जगहें ऐसी हैं, जो दुश्मन के कलेजे में हमेशा खौफ पैदा करती हैं. इस साल का इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) और ‘मिलन’ एक्सरसाइज एक बार फिर उसी इतिहास को जिंदा करने जा रहा है. इस आयोजन का सबसे बड़ा संदेश विशाखापत्तनम के उस समंदर से निकल रहा है, जहां आज से ठीक 55 साल पहले पाकिस्तान की अकड़ और उसका गुरूर पीएनएस गाजी (PNS Ghazi) हमेशा के लिए दफन हो गया था. गर्व की बात यह है कि जहां गाजी की कब्र है, आज ठीक उसी जगह भारत का अपना स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल (DSV) ‘निस्तार’ सीना ताने खड़ा है. यह सिर्फ एक जहाज की मौजूदगी नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान के लिए एक ऐसा ट्रॉमा है जिसे वह कभी भूल नहीं पाएगा. 1971 की वो घटना, जब गाजी शिकार बन गया     बात 1971 की है, जब पाकिस्तान ने भारत के सबसे ताकतवर एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant) को डुबोने के लिए अपनी सबसे घातक अमेरिकी सबमरीन पीएनएस गाजी को भेजा था. पाकिस्तान को लगा था कि गाजी चुपचाप आएगी और विशाखापत्तनम के पास विक्रांत का काम तमाम कर देगी. लेकिन इंड‍ियन नेवी की रणनीति के आगे गाजी की एक न चली.     आईएनएस राजपूत ने विशाखापत्तनम के तट के पास ही गाजी को ट्रैक किया और समंदर की गहराइयों में उसे हमेशा के लिए सुला दिया. उस वक्त जब गाजी के मलबे को खोजने और समंदर के नीचे डाइविंग ऑपरेशन चलाने की बारी आई, तो यह काम नेवी के तत्कालीन आईएनएस निस्तार ने बखूबी अंजाम दिया था. आज उसी ‘निस्तार’ का आधुनिक और स्वदेशी अवतार उसी जगह मौजूद है, जो पाकिस्तान के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है. आईएनएस निस्तार यानी समंदर का बादशाह भारतीय नौसेना को 18 जुलाई 2025 को अपना पहला स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल मिला. इससे पहले नौसेना के पास ऐसे जहाजों की भारी कमी थी, लेकिन अब निस्तार और निपुण के आने से भारत इस क्षेत्र में सेल्फ-रिलायंट बन गया है. न‍िस्‍तार की खूब‍ियां ऐसी हैं, ज‍िससे इसे समंदर के बादशाह के नाम से भी जाना जाता है. ‘निस्तार’ क्यों है इतना खास?     संस्कृत में ‘निस्तार’ का अर्थ होता है ‘मुक्ति’ या ‘उद्धार’. इससे आप न‍िस्‍तार की ताकत का अंदाजा लगा सकते हैं. वैसे तो इसका मुख्य काम किसी भी सबमरीन इमरजेंसी के दौरान नौसैनिकों का रेस्क्यू करना है. लेकिन यह बहुत काम की चीज है.     यह जहाज अपने साथ डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू व्हीकल ले जाता है, जो गहरे समंदर में जाकर फंसी हुई सबमरीन से लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल सकता है. हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा बनाया गया यह जहाज लगभग 80 प्रतिशत स्वदेशी है.     निस्तार 120 मीटर लंबा और 10,000 टन वजनी है. यह 18 नॉटिकल मील प्रति घंटा की रफ्तार से सफर करता है. यह अत्याधुनिक डाइविंग उपकरणों और सबमरीन रेस्क्यू सपोर्ट सिस्टम से लैस है. विशाखापत्तनम में पाकिस्तान के लिए ‘डेथ जोन’ इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में चीन और पाकिस्तान को कभी नहीं बुलाया जाता, लेकिन भारत की यह सामरिक तैयारी उनके लिए सबसे बड़ी चेतावनी है. जिस जगह गाजी डूबा था, आज वहां सिर्फ निस्तार ही नहीं, बल्कि भारत का स्वदेशी आईएनएस विक्रांत भी मौजूद है. यह वही विक्रांत है जिसे डुबोने का सपना लेकर गाजी आया था. आज विक्रांत का नया अवतार उसी जगह खड़ा होकर दुनिया को बता रहा है कि भारत की समुद्री सीमाएं अब अभेद्य हैं. निस्तार और निपुण की जोड़ी अभेद्य नेवी के इस प्रोजेक्ट के तहत दो डाइविंग सपोर्ट वेसल तैयार किए जा रहे हैं. निस्तार के बाद अब ‘निपुण’ पर काम तेजी से चल रहा है. ये दोनों जहाज भारतीय नौसेना को दुनिया की उन चुनिंदा नौसेनाओं की कतार में खड़ा कर देंगे जिनके पास अपनी सबमरीन रेस्क्यू क्षमता है. कुल मिलाकर, विशाखापत्तनम में आईएफआर (IFR) का यह आयोजन केवल एक प्रदर्शन नहीं है. यह पाकिस्तान की उस हार का जश्न है जिसने 1971 में दक्षिण एशिया का भूगोल बदल दिया था. जहां पाकिस्तान का गुरूर दफन हुआ था, आज वहां भारत का ‘निस्तार’ खड़ा होकर नए भारत की बुलंद तस्वीर पेश कर रहा है.