samacharsecretary.com

झूठा हलफनामा देने पर हाईकोर्ट ने मेट्रो रेल के महाप्रबंधक को व्यक्तिगत किया तलब

जबलपुर. हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश मेट्रो रेल निगम लिमिटेड के महाप्रबंधक हरिओम शर्मा को निर्देश दिए हैं कि वे व्यक्तिगत रूप से हाजिर होकर यह स्पष्टीकरण दें कि उन्होंने अदालत में झूठा हलफनामा क्यों पेश किया। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने महाप्रबंधक को 23 फरवरी को उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। क्या है मामला यह मामला भोपाल मुख्य रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म क्रमांक छह के समीप चल रहे मेट्रो निर्माण कार्य के कारण उत्पन्न अवरोध एवं बैरिकेडिंग से संबंधित है। भोपाल निवासी श्रीनिवास अग्रवाल व अन्य की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि मेट्रो प्रबंधन ने फेंसिंग और बैरिकेडिंग पूरी तरह से नहीं हटाई है। इससे आवागमन में दिक्कत हो रही है। हलफनामे में कहा गया कि बैरिकेडिंग हटा दी गई है इस पर मेट्रो रेल प्रशासन की ओर से हलफनामे में कहा गया कि बैरिकेडिंग हटा दी गई है। इस पर हाई कोर्ट ने कलेक्टर से रिपोर्ट मांगी थी। कलेक्टर भोपाल द्वारा किए गए स्थल निरीक्षण के आधार पर रिपोर्ट में बताया गया कि याचिकाकर्ताओं को मात्र लगभग 3.75 फीट का संकरा मार्ग उपलब्ध कराया गया है, जो व्यवहारिक उपयोग के लिए पर्याप्त नहीं है। तीनों ओर की बैरिकेडिंग हटाई नहीं गई यह भी बताया गया कि तीनों ओर की बैरिकेडिंग हटाई नहीं गई है, जबकि महाप्रबंधक द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत शपथपत्र में यह उल्लेख किया गया था कि बैरिकेडिंग पूर्णतः हटा दी गई है।

धार में भीषण सड़क हादसा, ट्रक ड्राइवर ने कंटेनर को मारी टक्कर

धार. धार जिले के धामनोद थाना क्षेत्र में राऊ-खलघाट फोरलेन के गणपति घाट पर देर रात लगभग 3 बजे भीषण सड़क हादसा हो गया। आगे चल रहे कंटेनर में पीछे टैंकर जा घुसा। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि चालक केबिन में बुरी तरह फंस गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार ट्रक इंदौर से मुंबई की ओर जा रहा था। इसी दौरान गणपति घाट पर आगे चल रहे कंटेनर से जा टकराया। हादसे के बाद चालक भानु पिता रामप्रसाद ट्रॉले की केबिन में बुरी तरह फंस गया। वह करीब साढ़े तीन घंटे तक वहीं फंसा रहा। सुबह करीब 7.30 बजे चालक को बहार निकाला गया। इस दौरान एनएचआई के अधिकारी, 112 पुलिस, टोल एंबुलेंस, कटर मशीन और क्रेन भी मौके पर पहुंच चुकी थी। काफी प्रयासों के बावजूद चालक को बाहर निकालने में सफलता नहीं मिल रही थी। आखिरकार सीट तोड़कर सन्नी जाट ने साहस दिखाते हुए चालक को सुरक्षित बाहर निकाला। घायल चालक को तत्काल धामनोद के शासकीय अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉ. रेश्मी सोलंकी द्वारा प्राथमिक उपचार किया गया। चालक के पैर में गंभीर चोट बताया जा रहा है कि चालक के पैर में गंभीर चोट है। एक्स-रे रिपोर्ट आने के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी और आवश्यकता पड़ने पर रेफर भी किया जा सकता है। फिलहाल चालक की हालत स्थिर बताई जा रही है।

भाजपा की राष्ट्रीय टीम में दिखेंगे मध्य प्रदेश के कई चेहरे

भोपाल. भाजपा संगठन की राष्ट्रीय टीम में मध्य प्रदेश के कई चेहरे दिखाई दे सकते हैं। प्रदेश संगठन ने राज्य के ऐसे 15 नेताओं के नाम केंद्रीय नेतृत्व को भेजे हैं, जो अलग-अलग अंचलों से हैं और अभी सत्ता या संगठन के किसी पद पर नहीं हैं। भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम का गठन होना है और अन्य मोर्चे भी गठित किए जाने हैं। केंद्रीय नेतृत्व ने इस बारे में प्रदेश संगठन से सुझाव मांगे थे। युवा और महिला चेहरों को भी वरीयता वर्तमान में मध्य प्रदेश से सत्यनारायण जटिया (संसदीय बोर्ड सदस्य), ओम प्रकाश धुर्वे (राष्ट्रीय सचिव) और लाल सिंह आर्य (राष्ट्रीय अध्यक्ष, एससी मोर्चा) जैसे नेता राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। पार्टी 2029 के लोकसभा चुनाव और संगठन की मजबूती को ध्यान में रखकर अनुभवी नेताओं के साथ-साथ युवा और महिला चेहरों को भी वरीयता देना चाहती है। नड्डा की टीम मेंचार नेताओं को स्थान मिला था पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा की टीम में मध्य प्रदेश से कैलाश विजयवर्गीय सहित चार नेताओं को स्थान मिला था। उस दौरान कैलाश विजयवर्गीय राष्ट्रीय महासचिव थे। बाद में वर्ष 2023 में वह राज्य में मंत्री बना दिए गए। पार्टी नेताओं का मानना है कि चूंकि पूर्व में राष्ट्रीय संगठन में एक ही समय में मध्य प्रदेश से दो-दो महासचिव थावरचंद गहलोत और नरेंद्र सिंह तोमर रहे हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि नितिन नवीन की टीम में भी मध्य प्रदेश का प्रभाव बढ़ सकता है। इस बार भी चार से पांच नेताओं को स्थान मिलने की संभावना इस बार भी चार से पांच नेताओं को नितिन नवीन की टीम में स्थान मिलने की संभावना है। इसमें एक या दो महिलाएं भी हो सकती हैं। इसके साथ ही युवा नेताओं को भी अवसर मिल सकता है। बाकी अन्य को मोर्चा- प्रकोष्ठ में शामिल किया जा सकता है। दरअसल, मध्य प्रदेश हमेशा से ही भाजपा के लिए एक प्रयोगशाला की तरह रहा है। हिंदू महासभा हो या जनसंघ, दोनों की जड़ें मध्य प्रदेश में मजबूत रही हैं। यही कारण है कि भाजपा यहां लंबे समय से सत्ता में है। संगठन की मजबूती की दूसरी वजह यहां के कुशल संगठनकर्ता भी माने जा सकते हैं। जिनकी वजह से राष्ट्रीय संगठन के स्तर पर भी यहां के भाजपा कार्यकर्ताओं का दबदबा रहा है।

ग्वालियर मेडिकल सोल्लगे के इंटर्न छात्र को दिल का दौरा पड़ने पर बनाया ग्रीन कॉरिडोर

ग्वालियर. जीआरएमसी (GRMC) के इंटर्न छात्र को दिल का दौरा पड़ने के बाद उसकी हालत बिगड़ती जा रही थी। शनिवार रात को उसे दिल्ली ले जाने के लिए ट्रैफिक पुलिस द्वारा ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। पहले उसे एयर एंबुलेंस से ले जाया जा रहा था, लेकिन रात में एयर एंबुलेंस लैंड नहीं हो सकी। इसके चलते आपात स्थिति में रात करीब 10 बजे ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। महज 20 मिनट में ही जेएएच से पुरानी छावनी ले जाया गया। जीआरएमसी के इंटर्न छात्र शैलेंद्र को दिल का दौरा पड़ा था। ग्वालियर में वह जेएएच में भर्ती था। यहां उसकी हालत में सुधार नहीं आया। इसके चलते शनिवार दोपहर में उसे दिल्ली ले जाने का निर्णय लिया गया। रात तक एयर एंबुलेंस नहीं आ सकी एयर एंबुलेंस से संपर्क किया। जेएएच प्रबंधन द्वारा पुलिस को सूचना दी गई, जिससे एंबुलेंस को एयरपोर्ट तक पहुंचने में परेशानी न हो। जाम का सामना न करना पड़े। रात तक एयर एंबुलेंस न आ सकी। इसके बाद छात्र को सड़क मार्ग से ही ले जाने का निर्णय लिया गया। महज आधा घंटे में ही सारे इंतजाम कर लिए रात 9:30 बजे ट्रैफिक पुलिस को सूचना मिली। महज आधा घंटे में ही सारे इंतजाम कर लिए गए। तुरंत ही जेएएच से लेकर पुरानी छावनी तक सभी मार्गों पर ट्रैफिक रोक दिया गया। जेएएच से एंबुलेंस रवाना हुई। पूरे रास्ते कहीं भी एंबुलेंस नहीं फंसी। आगे पुलिस की गाड़ी चल रही थी, साथ में एंबुलेंस जा रही थी। महज 20 मिनट में जेएएच से पुरानी छावनी पहुंचा दिया गया। पुरानी छावनी में बानमोर बॉर्डर तक एंबुलेंस को छोड़ा गया। दरअसल, छात्र शैलेंद्र को हाथ में दर्द की शिकायत लेकर न्यूरोसर्जरी विभाग पहुंचे थे, जहां अचानक उन्हें सीवियर हार्ट अटैक (गंभीर हृदयाघात) आ गया। जैसे ही छात्र की तबीयत बिगड़ी, वहां मौजूद चिकित्सकों ने तत्काल प्राथमिक उपचार शुरू किया और उन्हें भर्ती कर गहन निगरानी में रखा। स्वजन दिल्ली से ग्वालियर पहुंच गए हृदय रोग विशेषज्ञ एवं विभागाध्यक्ष, कार्डियक सेंटर जया आरोग्य अस्पताल डॉ. पुनीत रस्तोगी ने बताया कि छात्र को काफी गंभीर हार्ट अटैक आया है। शैलेंद्र को हार्ट अटैक आने की सूचना मिलते ही उनके स्वजन दिल्ली से ग्वालियर पहुंच गए। छात्र की नाजुक स्थिति को देखते हुए स्वजन बेहतर इलाज के लिए दिल्ली रेफर किया गया है। युवा वर्ग में बढ़ते हार्ट अटैक ने बढ़ाई चिंता अस्पताल परिसर में एक युवा डॉक्टर के साथ हुई इस घटना ने छात्रों के बीच चिंता बढ़ा दी है। डॉक्टरों का कहना है कि हाथ में दर्द या सीने में भारीपन जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सही समय पर विशेषज्ञ के पास पहुंचकर  उपचार कराना चाहिए। शहर में दिल के दौरे के मरीज बढ़ते जा रहे हैं।

बिना टावर भी चलेगा फोन! ऐपल ला सकता है एंटीना वाला स्मार्ट कवर

एंटीना वाला फोन कवर, जी हां आपने सही सुना। लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, Apple एक नए स्मार्ट केस डेवलप करने पर विचार कर रहा है। इसमें एक बड़ा और ज्यादा एडवांस्ड एंटीना सिस्टम जोड़ जाएगा ताकि सैटेलाइट कम्युनिकेशन को काफी बेहतर बनाया जा सके। बता दें कि कंपनी ने अपने आईफोन में 2022 में सैटेलाइट के जरिए इमरजेंसी SOS फीचर लॉन्च किया था। इसके बाद अब ऐपल भविष्य में आने वाले फोन्स में कई बड़े अपग्रेड देने पर विचार कर रही है। लेटेस्ट पेटेंट से पता चलता है कि इमरजेंसी SOS फीचर में जल्द ही एक बड़ा अपग्रेड आ सकता है। इस फीचर को बेहतर बनाने के लिए नए स्मार्ट कवर का पेटेंट कराया गया है। फोन के एंटीना नहीं होते इतने पावरफुल Apple ने iPhone 14 के साथ सैटेलाइट के जरिए इमरजेंसी SOS की शुरुआत की थी। इस फीचर के साथ कंपनी ने लोगों को चौंका दिया था। यूजर्स अपने आईफोन को लो अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट की ओर पॉइंट करके इमरजेंसी सर्विस से संपर्क कर सकते हैं। लेकिन फोन के अंदर दिए गए एंटीना का सरफेस एरिया और पावर सीमित होती है, इसलिए डेटा ट्रांसमिशन भी सीमित हो जाता है। बिल्डिंग, पेड़ और जमीन के कारण सैटेलाइट के साथ कनेक्शन बनाए रखना में मुश्किल आती है। कवर बड़े ग्रुप के साथ बनाता है कनेक्शन इस समस्या को हल करने और अपनी सैटेलाइट SOS को और भी बेहतर बनाने के लिए Apple ने एक हटाने वाले कवर के लिए पेटेंट फाइल किया है। इसे फेज्ड ऐरे एंटीना के तौर पर काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह इलेक्ट्रॉनिक तरीके से सिग्नल बीम बनाने और उन्हें चलाने के लिए कई ट्रांसमीटर और रिसीवर का इस्तेमाल करता है। कवर किसी एक सैटेलाइट पर लॉक होने के बजाय बड़े ग्रुप के साथ कनेक्शन बनाए रखता है। यह आसमान में घूमते हुए सैटेलाइट के बीच आसानी से शिफ्ट हो सकता है। पेटेंट के इलस्ट्रेशन में एक फोल्ड-आउट कवर दिखाया गया है। यह आसमान की ओर पॉइंट करता है और डेडिकेटेड रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) लिंक या नियर-फील्ड कम्युनिकेशन (NFC) के जरिए iPhone के साथ सिंक होता है। ज्यादा डेटा भेजने में मिलेगी मदद केस में एक बड़ा एंटीना लगा है, जो iPhone को ज्यादा डेटा भेजने में मदद कर सकता है। इसके बाद, फोन शायद ज्यादा सैटेलाइट कनेक्टिविटी को सपोर्ट कर सकता है। यह होने वाली रुकावट को कम कर सकता है और ट्रांसमिशन की ताकत को भी बढ़ा सकता है। हालांकि, इसे कब मार्केट में लाया जाएगा या नहीं, इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है। लेकिन ये साफ है कि आईफोन कवर के साथ अगर एनटीना लगा होगा तो SOS सर्विस काफी बेहतर हो जाएगी।

राज्यसभा चुनाव में उलझी सियासत: आरजेडी का ग्राफ गिरा, लेफ्ट-उद्धव-पवार की रणनीति कमजोर

 नई दिल्ली     देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर 16 मार्च को चुनाव है, जिसे लेकर राजनीतिक दांव पेच सेट किए जाने लगे हैं. कांग्रेस और बीजेपी को पहले से ज्यादा सीटें मिलती दिख रही हैं तो क्षेत्रीय दलों के लिए यह चुनाव काफी मुश्किल भरा लग रहा है. लालू यादव की आरजेडी से लेकर शरद पवार की एनसीपी और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को एक सीट मिलती नहीं दिख रही है. वहीं बीआरएस और लेफ्ट का पूरी तरह सफाया हो रहा है.  महाराष्ट्र की 7, तमिलनाडु की 6, बिहार की 5, पश्चिम बंगाल की 5, ओडिशा की 4 और असम की 3, हरियाणा, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की 2-2 और हिमाचल प्रदेश की 1 राज्यसभा सीट के​ लिए 16 मार्च को चुनाव होने हैं. इन 37 राज्यसभा सीटों में से फिलहाल बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास 15 और कांग्रेस नेतृत्व वाले इंडिया ब्लॉक के पास 18 सीटें हैं. इसके अलावा 4 सीटें अन्य दलों के पास हैं. हालांकि, इन सीटों के लिए अब जो चुनाव हो रहे हैं, उनमें सियासी गणित बदले हुए हैं, जिसमें एनडीए को लाभ तो इंडिया ब्लॉक के घटक दलों को सियासी नुकसान हो सकता है.  कांग्रेस-बीजेपी को फायदा तो घाटा किसे?  बिहार से लेकर महाराष्ट्र, ओडिशा और तेलंगाना विधानसभा की स्थिति पहले से काफी बदल गई है, जिसका सियासी असर सीधे तौर पर राज्यसभा के चुनाव पर पड़ता नजर आ रहा है. देश के जिन राज्यों में राज्यसभा चुनाव हो रहे हैं, उसके लिहाज से देखें तो एनडीए की सीटें 15 से बढ़कर 18 होने की संभावना है तो इंडिया ब्लॉक की सीटें 18 से घटकर 14 से 15 हो सकती हैं.  राज्यसभा की इन 37 सीटों में से फिलहाल बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास 15 सीटें हैं, जिसमें बीजेपी के पास 9, जेडीयू के पास 2 , AIADMK के पास 1, आरएलएम के पास 1 और 1 सीट आरपीआई के पास है. आगामी चुनावों के बाद बीजेपी की सीटें 9 से बढ़कर 12 हो सकती हैं, तो जेडीयू और AIADMK अपनी-अपनी सीटों को बचाए रख सकती हैं. वहीं, विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक की बात करें तो चुनाव वाले 37 में से 18 राज्यसभा सीटें उसके कब्जे में हैं, जिसमें से 4 सीटें कांग्रेस के पास, 4 सीटें टीएमसी के पास, 4 सीटें डीएमके के पास और आरजेडी के पास 2 सीटें हैं. एक सीट शिवसेना (यूबीटी) और एक सीट सीपीआईएम के पास है. आगामी चुनावों के बाद कांग्रेस को एक सीट का लाभ हो सकता है तो नुकसान शरद पवार की एनसीपी से लेकर उद्धव ठाकरे और लालू यादव की पार्टी को हो सकता है. ममता बनर्जी और डीएमके अपनी सीटें बचा ले जाएंगी. चुनाव वाली 37 राज्यसभा सीटों में से 4 सीटें अन्य दलों के पास हैं, जिसमें बीजेडी के पास 2 और 1 सीट बीआरएस और 1 सीट तमिलनाडु के क्षेत्रीय दल के कब्जे में है. आगामी चुनावों के बाद बीजेडी हाफ तो बीआरएस पूरी तरह साफ हो जाएगी. इसके अलावा वामदल भी अपनी राज्यसभा सीट नहीं बचा पाएंगे?  लालू की आरजेडी क्या हो जाएगी साफ बिहार की पांच राज्यसभा सीटों पर चुनाव हो रहे हैं. विधानसभा की मौजूदा स्थिति के लिहाज से एनडीए चार सीटें आसानी से जीत लेगी और एक सीट पर सियासी मिस्ट्री उलझी हुई है. एनडीए के पास 202 विधायक तो महागठबंधन के पास 35 विधायक और 7 अन्य विधायक हैं. राज्यसभा की एक सीट के लिए 41 विधायकों का समर्थन चाहिए. ऐसे में महागठबंधन अपने दम पर एक भी सीट जीतने की स्थिति में नहीं है. इसका सीधे नुकसान आरजेडी को होता दिख रहा है.  41 वोट के लिहाज से चार राज्यसभा सीटें जीतने के लिए एनडीए को 164 विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी. इसके बाद एनडीए के पास 38 सीटें बचेंगी और पांचवी सीट जीतने के लिए उसे 3 विधायकों का अतरिक्त समर्थन चाहिए होगा. वहीं, आरजेडी, कांग्रेस और लेफ्ट दलों को मिलाकर इंडिया ब्लॉक के पास 35 विधायक हैं. ऐसे में महागठबंधन को एक सीट जीतने के लिए 6 अतरिक्त वोटों की जरूरत होगी. बिहार के राज्यसभा चुनाव में जिस तरह की सियासी मिस्ट्री बन गई है, उसके लिहाज से आरजेडी को एक सीट जीतना भी मुश्किल दिख रहा है. एनडीए सभी पांचों सीटें जीतने की कवायद में है, जिसके संकेत जेडीयू नेता अशोक चौधरी ने दे दिए हैं. विपक्ष अगर संयुक्त रूप से चुनाव लड़े तो जीत सकता है, पर AIMIM से लेकर बसपा तक का सियासी स्टैंड अलग ही राह पर दिख रहा है. ऐसे में आरजेडी का राज्यसभ चुनाव में सफाया हो सकता है, क्योंकि AIMIM अपना उम्मीदवार उतारने की बात कह रहा है.  पवार और उद्धव का पावर होगा कम महाराष्ट्र की सात राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव के बाद बदले समीकरणों ने शरद पवार और उद्धव ठाकरे की सियासी जमीन को तंग कर दिया है. महाराष्ट्र में एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 37 विधायकों के समर्थन की जरूरत है. राज्य में वर्तमान में कुल 284 विधायक हैं, जिसमें बीजेपी के पास 131, शिंदे की शिवसेना के पास 57 और अजित पवार की एनसीपी के पास 40 विधायक हैं. इस तरह एनडीए के 228 विधायक होते हैं, जिसके दम पर वह राज्य की 7 राज्यसभा सीटों में से 6 सीटें आसानी से जीत सकती है. बीजेपी को चार सीटें तो एकनाथ शिंदे और अजित पवार की पार्टी को 1-1 सीट मिल सकती हैं. दूसरी ओर शरद पवार की एनसीपी के 10, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के 20 और कांग्रेस के 16 विधायक हैं. इस तरह तीनों दल मिलकर अगर एक उम्मीदवार को जिता सकते हैं, लेकिन उन्हें 1 अतिरिक्त विधायक के समर्थन की जरूरत पड़ेगी. वहीं अगर, एनडीए अपने 7वें उम्मीदवार को जिताना चाहता है तो उसे 31 अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी. शिवसेना (यूटीबी) के नेता आदित्य ठाकरे ने राज्यसभा सीट पर दावा ठोक दिया है. उन्होंने कहा कि विधायकों की संख्या को देखते हुए, राज्यसभा की सीट पर शिवसेना का हक बनता है. महाविकास आघाड़ी में बातचीत कर आगे बढ़ेंगे, लेकिन असल दिक्कत है कि शरद पवार का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है. शरद पवार राज्यसभा में … Read more

भोपाल में एयरोसिटी समेत 621 लोकेशन पर जमीनों के 11 प्रतिशत तक बढ़ेंगे दाम

भोपाल. वित्तीय वर्ष 2026-27 की कलेक्टर गाइडलाइन का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है, जिसको लेकर शनिवार को कलेक्ट्रेट में जिला मूल्यांकन समिति की बैठक आयोजित की गई। जिसमें पंजीयन अधिकारियों ने नई कलेक्टर गाइडलाइन का प्रस्ताव रखा, जिस पर अधिकारियों व समिति के सदस्यों ने चर्चा करते हुए अपने सुझाव रखे। 11 प्रतिशत तक वृद्धि का प्रस्ताव तैयार इस बार अधिकारियों ने शहर के एयरोसिटी, कोहेफिजा, करोंद, लांबाखेड़ा, नवीबाग, मेट्रो रेल लाइन, नए औद्योगिक क्षेत्र, नए राजमार्ग के आसपास सहित करीब 621 लोकेशन पर 11 प्रतिशत तक वृद्धि का प्रस्ताव तैयार किया है। बैठक में जिला मूल्यांकन समिति के अध्यक्ष व कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह, जिला पंजीयक स्वप्नेश शर्मा, मुकेश श्रीवास्तव सहित अन्य अधिकारी व समिति के सदस्य उपस्थित थे। जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में हुईं प्रॉपर्टी की रजिस्ट्रियों का विश्लेषण किया गया तो पता चला कि एक हजार 307 लोकेशन पर अत्यधिक दरों पर दस्तावेज रजिस्टर्ड किए गए हैं। समीक्षा के दौरान पता चला कि एक ही वार्ड की आसपास की कालोनियों में दरों के अत्यधिक अंतर को देखते हुए 203 लोकेशन और पंजीयन अधिकारियों के सर्वे के आधार पर 91 लोकेशन व नए विकास के कारण 37 लोकेशन में दरों में वृद्धि प्रस्तावित की गई है। इसी तरह टीएंडसीपी से अभिन्यास स्वीकृति व आमजन सुविधा के कारण 38 लोकेशन, नए राष्ट्रीय राजमार्ग, बायपास, रिंग रोड के प्रभाव से 18 लोकेशन और नए औद्योगिक व विशेष आर्थिक क्षेत्रों की स्थापना के कारण तीन लोकेशन प्रभावित पाई गई हैं। इस तरह जिले में कुल 621 लोकेशन में दर वृद्धि का प्रस्ताव तैयार किया गया है। शहरी क्षेत्र में डेढ़ से 11 प्रतिशत तक वृद्धि प्रस्तावित जिले में कुल दो हजार 882 लोकेशन हैं, जहां पर प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त की जाती है। इनमें से शहरी क्षेत्र की कुल 551 लोकेशन पर डेढ़ से 11 प्रतिशत तक प्रॉपर्टी की दरों में वृद्धि प्रस्तावित की गई है। इनमें लांबाखेड़ा, नवीबाग, एयरोसिटी राजाभोज परियोजना, सीटीओ कालोनी, कैलाश नगर, पूजाश्री नगर, लाउखेड़ी बीडीए, हाउसिंग बोर्ड कोहेफिजा, ग्राम पलासी एवं पलासी की अन्य कालोनी, पंचवटी एलआईजी, करोंद, जनता नगर व उसके आसपास की अन्य कालोनियां, बड़बई, नरेला बाजयाफ्त, हिरनखेड़ी, घाटखेड़ी, इनायतपुर, फंदा कलां, बैरागढ़ खुमान, बेहटा, मिनाल शॉपिंग, अरेड़ी, सूखसेवनियां, ओंकारा सेवनियां, नर्मदापुरम रोड, अरेरा कालोनी, भोपाल रेलवे स्टेशन सहित अन्य शामिल हैं। जबकि नगर पालिका परिषद बैरसिया की करीब 70 लोकेशन पर भी प्रॉपर्टी की दरों में वृद्धि करने का प्रस्ताव है। इनको मिलाकर कुल 621 लोकेशन प्रस्ताव में परिलक्षित की गई हैं। मेट्रो रेल लाइन के आसपास प्रॉपर्टी होगी महंगी कलेक्टर गाइडलाइन के प्रस्ताव में उन लोकेशन को भी शामिल किया गया है, जहां पर मेट्रो रेल लाइन का काम किया जा रहा है। इनमें सुभाष नगर से एम्स तक के मेट्रो रूट में आने वाले सभी इलाकों में प्रॉपर्टी की दरों में वृद्धि प्रस्तावित है। जबकि सुभाष नगर से करोंद तक के मेट्रो रूट के बीच आने वाले इलाकों में भी प्रॉपर्टी महंगी की जाएगी। सूत्रों ने बताया कि जिन क्षेत्रों में शासन को प्रोजेक्ट लगाने या शासकीय प्रयोजन के लिए जमीन चाहिए, उन लोकेशन पर प्रॉपर्टी की दरें यथावत रखी गई हैं। औद्योगिक क्षेत्र में प्रॉपर्टी की दरों में बदलाव का सुझाव जिला मूल्यांकन समिति के सदस्य व विधायक ने सुझाव रखते हुए बताया कि गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र में प्रॉपर्टी दरों में बदलाव किया जाना चाहिए। यहां पर अधिकांश जगह पर एक समान प्रॉपर्टी की दरें हैं, जिनमें बदलाव किया जाना चाहिए। जबकि हाउसिंग बोर्ड ने अपना सुझाव रखते हुए बताया कि रविशंकर शुक्ल मार्केट में बनी इमारतों में सभी में प्रॉपर्टी की दरें एक तरह की हैं, लेकिन एक इमारत में प्रॉपर्टी की दरें अलग हैं, जिन्हें एक समान किया जाना चाहिए। नई कलेक्टर गाइडलाइन 2026-27 में प्रमुख 17 लोकेशन पर प्रस्तावित दरें लोकेशन     वर्तमान दरें (प्रति वर्ग मीटर)     प्रस्तावित दरें (प्रति वर्ग मीटर) एयरोसिटी राजाभोज परियोजना     20,000     22,000 सीटीओ कालोनी/कैलाश नगर, पूजाश्री नगर     15,000     18,000 लाउखेड़ी     12,000     15,000 बीडीए, हाउसिंग बोर्ड कोहेफिजा     45,000     50,000 ग्राम पलासी एवं पलासी की अन्य कालोनी     15,000     17,000 पंचवटी एलआईजी     10,000     12,000 लांबाखेड़ा, नवीबाग व अन्य कालोनी     10,000     12,000 पुरुषोत्तम नगर     13,000     15,000 घाटखेड़ी     3,000     4,000 झागरिया खुर्द     5,600     7,000 दामखेड़ा खुर्द की कालोनियां     16,000     20,000 सुरम्य परिसर     26,000     30,000 नर्मदा एवन्यू     16,000     20,000 सागर एवन्यू     18,000     20,000 एकतापुरी, कौशल्या कालोनी     15,800     17,000 पंत नगर     13,800     15,000 राजेंद्र नगर     12,800     16,000 इनका कहना है वित्तीय वर्ष 2026-27 की कलेक्टर गाइडलाइन का प्रारंभिक प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है, जिस पर जिला मूल्यांकन समिति की बैठक में चर्चा करने के बाद अब आम नागरिकों से सुझाव मांगे गए हैं, जिसे संपदा टू पोर्टल पर दे सकते हैं। इन सुझावों पर चर्चा के बाद प्रस्ताव को केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेज दिया जाएगा। – कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर व अध्यक्ष, जिला मूल्यांकन समिति

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शूटरों की याचिका पर सुनाया फैसला, प्रैक्टिस के लिए 1000 रायफलें दी जाएंगी

जबलपुर  भोपाल के शूटरों को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से राहत मिली है. भोपाल कलेक्टर द्वारा शूटरों को अभ्यास के लिए प्रदान किये जाने वाले कारतूसों की संख्या कम किये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. 19 फरवरी को हाईकोर्ट जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए शूटरों को एक-एक हजार कारतूस का कोटा दिये जाने के आदेश पारित किये हैं. याचिका की सुनवाई के दौरान एकलपीठ को बताया गया कि, ''केन्द्र सरकार ने राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया का लायसेंस निरस्त कर दिया है. एकलपीठ ने इस संबंध में आदेश पेश करने के निर्देश दिये हैं. याचिका पर अगली सुनवाई 23 फरवरी को तय की गयी है. भोपाल के शूटर ने दायर की थी याचिका भोपाल निवासी इब्राहिम जावेद खान सहित अन्य 3 लोगों की तरफ से याचिका दायर की गयी थी. याचिका में कहा गया था कि याचिकाकर्ता इब्राहिम जावेद खान एक मशहूर शूटर है और अन्य याचिकाकर्ता शूटर बनना चाहते हैं. उन्हें आर्म्स रूल्स, 2016 के नियमों के तहत कारतूस देने के लिए कोटा निर्धारित किया है. जिला कलेक्टर ने शूटरों को कारतूस प्रदान करने के संबंध में एक कमेटी गठित की थी. कारतूस न होने से प्रतियोगिता में शामिल होना मुश्किल कमेटी ने प्रैक्टिस के लिए एक-एक हजार कारतूस प्रदान करने के आदेश जारी किये थे. कमेटी की सिफारिश के बावजूद भी निर्धारित कोटे को घटाकर सिर्फ 500 कारतूस कर दिया है. याचिका में कहा गया था कि कलेक्टर द्वारा पारित विवादित आदेश के कारण याचिकाकर्ता आने वाले समय में आयोजित प्रतियोगिता में शामिल नहीं हो पाएंगे. प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए अभ्यास करने की आवश्यकता है और उनके पास कारतूस नहीं हैं. सरकार की तरफ से एकलपीठ को बताया गया कि, जनहित में कोटा बढ़ाने का फैसला लिया जा सकता है. जाने-माने शूटर तथा उभरते शूटर को एक हजार कारतूस दिये जायेंगे. जिससे वह आने वाली प्रतियोगिता की तैयारी कर सकें. वह बता सकें कि, सभी कारतूस ट्रेनिंग में समाप्त हो गये हैं तो उन्हें एक हजार कारतूस का कोटा रिन्यू कर दिया जायेगा. शूटरों को एक-एक हजार कारतूस का कोटा आवंटित हो एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि, ''शूटरों को एक-एक हजार कारतूस का कोटा आवंटित किया जाये. जिससे वह आने वाली प्रतियोगिता की तैयारी कर सकें. कारतूस का कोटा खत्म होने पर वह जिला कलेक्टर को रिपोर्ट करेंगे. जिला कलेक्टर कारतूस के इस्तेमाल की जांच करने के बाद अभ्यास के लिए कारतूस जारी करना सुनिश्चित करें. इसके अलावा स्पोर्ट कैटेगरी के हथियारों के इस्तेमाल के बारे में भारत सरकार की राय और खिलाड़ियों को दिये जाने वाली कारतूस की संख्या के संबंध में भी हाईकोर्ट में पेश की जाये.'' याचिका की सनुवाई के दौरान केन्द्र सरकार के अधिवक्ता की तरफ से एकलपीठ को बताया गया कि, ''राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया का लाइसेंस कैंसिल कर दिया गया है. उनके द्वारा इस संबंध में कोई आदेश पेश नहीं किया गया.'' एकलपीठ ने केन्द्र सरकार के अधिवक्ता को आदेश पेश करने के निर्देश जारी किये हैं. याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को केंद्रीय गृह विभाग को अनावेदक बनाने के निर्देश भी एकलपीठ ने जारी किये हैं. याचिकाकर्ताओं की तरफ से अधिवक्ता विशाल डेनियल ने पैरवी की.

ChatGPT का बढ़ता क्रेज: भारत में युवा इसे कोडिंग, पढ़ाई और काम में कर रहे हैं इस्तेमाल, रिपोर्ट में खुलासा

मुंबई   भारत अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के इस्तेमाल के मामले में एक नई ऊंचाई पर पहुंच गया है. ओपनएआई के नए डेटा के मुताबिक, भारत अब चैटजीपीटी का अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा मार्केट बन चुका है. भारत में चैटजीपीटी के वीकली एक्टिव यूज़र्स की संख्या 10 करोड़ से भी आगे पहुंच चुकी है. इसमें खास बात यह है कि भारतीय यूज़र्स सिर्फ एआई को आज़मा नहीं रहे, बल्कि इसे अपनी डेली-लाइफ के काम और प्रोफेशनल जरूरतों के लिए गंभीरता से इस्तेमाल भी कर रहे हैं. ओपनएआई की नई पब्लिक डेटा पहल 'OpenAI Signals' की रिपोर्ट से पता चला है कि भारत में यूज़र्स टेक्निकल टूल्स का इस्तेमाल ग्लोबल एवरेज से कहीं ज्यादा कर रहे हैं. खासतौर पर कोडिंग और डेटा एनालिसिस के मामले में भारत काफी तेजी से आगे निकल रहा है. प्लस और प्रो सब्सक्राइबर्स के बीच डेटा एनालिसिस टूल्स का इस्तेमाल ग्लोबल औसत से करीब चार गुना ज्यादा है. वहीं, कोडिंग से जुड़े के लिए Codex का इस्तेमाल लगभग तीन गुना ज्यादा देखा गया है. OpenAI के सीईओ सैम अल्टमैन ने भी आज भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के बाद अपने आधिकारिक एक्स हैंडल के जरिए यही बात कही है. ChatGPT यूज़ करने के तरीके भारत में आंकड़ा ग्लोबल तुलना मुख्य नोट्स वीकली एक्टिव यूजर्स 100 मिलियन से ज्यादा US के बाद दूसरा सबसे बड़ा सबसे तेज Codex ग्रोथ कोडिंग (Coding / Codex) 3x ज्यादा ग्लोबल मीडियन से 3 गुना तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु सबसे आगे डेटा एनालिसिस 4x ज्यादा (Plus/Pro) ग्लोबल एवरेज से 4 गुना एडवांस टूल्स में हाई यूज लर्निंग/एजुकेशन 2x ज्यादा ग्लोबल मीडियन से दोगुना युवा सबसे आगे वर्क-रिलेटेड मैसेजेस 35% ग्लोबल: 30% ड्राफ्टिंग, डिबगिंग, स्पीड-अप प्रैक्टिकल गाइडेंस (नॉन-वर्क) 35% – सेल्फ-लर्निंग, डिसीजन मेकिंग जनरल जानकारी / राइटिंग दोनों कामों के लिए 20% – बेसिक क्वेरीज और कंटेंट उम्र ग्रुप 18-24: 50% 18-34: 80% 18-24: 33% युवा (स्टूडेंट्स/अर्ली करियर)   चैटजीपीटी का सबसे एडवांस यूज़ कर रहा भारत रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय यूज़र्स कोडिंग से जुड़े सवाल भी दुनियाभर के यूजर्स की तुलना में करीब तीन गुना ज्यादा पूछ रहे हैं. वहीं, पढ़ाई और लर्निंग से जुड़े सवालों में भी भारत ग्लोबल एवरेज से लगभग दोगुना आगे है. जियोग्राफिक तौर पर देखें तो तेलंगाना, कर्नाटका और तमिलनाडु जैसे टेक हब्स में कोडिंग से जुड़ा इस्तेमाल सबसे ज्यादा देखने को मिला है. इसके अलावा भारत में लोग काम से जुड़े कामों के लिए भी चैटजीपीटी का काफी इस्तेमाल करते हैं और इसमें भी तेजी से बढ़ोतरी आई है. करीब 35% कंज्यूमर मैसेजेस सीधे काम से जुड़े होते हैं, जबकि ग्लोबल लेवल पर यह आंकड़ा लगभग 30 प्रतिशत है. ऑफिस वर्क में लोग ड्राफ्टिंग, एडिटिंग, टेक्निकल हेल्प, डिबगिंग और काम को तेज करने के लिए चैटजीपीटी पर भरोसा कर रहे हैं. भारत के यूज़र्स काम के अलावा भी चैटजीपीटी का काफी प्रैक्टिल तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं. लगभग 35% नॉन-वर्क मैसेजेस किसी न किसी तरह की प्रैक्टिकल गाइडेंस से जुड़े होते हैं. इसके अलावा करीब 20% मैसेजेस जनरल जानकारी और 20% राइटिंग से जुड़े होते हैं. इससे साफ है कि लोग सेल्फ लर्निंग, डिसीजन मेकिंग और पर्सनल प्रोडक्टिविटी के लिए एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं.     18-24: 33%    युवा (स्टूडेंट्स/अर्ली करियर) उम्र के लिहाज से देखें तो भारत में चैटजीपीटी का इस्तेमाल युवाओं के बीच सबसे ज्यादा है. 18 से 24 साल के यूज़र्स कुल मैसेजेस का लगभग आधा हिस्सा भेजते हैं. वहीं, 18 से 34 साल के यूज़र्स मिलकर करीब 80% मैसेजेस करते हैं. OpenAI के चीफ इकोनॉमिस्ट रोनी चैटर्जी का कहना है कि एआई को अपनाने की रफ्तार इतनी तेज है कि उसे मापने वाले टूल्स भी पीछे छूट रहे हैं. उनका मानना है कि OpenAI Signals भारत में एआई को लेकर चर्चा को हाइप से निकालकर डेटा के आधार पर समझने में मदद करेगा.

कश्मीर के किसानों की मांग: केसर उत्पादन गिरने के बाद सोलर पंप से हो खेती आसान

श्रीनगर कश्मीर में केसर की खेती करने वाले किसान पुलवामा जिले के पंपोर इलाके में सोलर पंप लगाने की मांग कर रहे हैं. यह सोलर पंप नेशनल केसर मिशन के तहत 2008 में लगाए गए खराब स्प्रिंकलर सिंचाई सिस्टम को चलाने के लिए है. इससे 3715 हेक्टेयर कृषि भूमि को फिर से उपयोग में लाया जा सकेगा और मसाले की पैदावार बढ़ाई जा सकेगी. नेशनल केसर मिशन के तहत कृषि विभाग ने पंपोर केसर बेल्ट और बडगाम में 2,548.75 हेक्टेयर जमीन पर स्प्रिंकलर सिंचाई सिस्टम लगाया, जिसके लिए 400.11 करोड़ रुपये खर्च करके 124 बोरवेल बनाने का प्लान बनाया गया. इस सिस्टम में पानी उठाने वाले पंप को चलाने के लिए डीजल से चलने वाले जनरेटर शामिल थे, जो केसर के खेतों में खोदे गए कुओं से स्प्रिंकलर पाइपों को पानी देते थे ताकि जरूरत पड़ने पर कंद और पौधों की सिंचाई हो सके. कृषि विभाग ने वर्तमान विधानसभा सत्र में माना कि 124 बोरवेल में से 85 किसानों को दिए गए थे, और उनमें से 77 काम नहीं कर रहे हैं, जबकि सिर्फ आठ काम कर रहे हैं – बडगाम और श्रीनगर में चार-चार. विभाग ने माना कि स्प्रिंकलर सिस्टम के अधिक ऑपरेशनल और रखरखाव खर्च ने उन्हें बेकार कर दिया है. पंपोर के चंदहारा गांव के एक युवा और शिक्षित किसान सज्जाद उल अकबर ने कहा कि उनके परिवार के पास 2 हेक्टेयर जमीन है, जिसका प्रोडक्शन 2000 में 5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से घटकर इस साल 1.5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रह गया है, और एक किलोग्राम केसर से एक किसान को करीब 2.8 लाख रुपये मिलते हैं. उन्होंने ईटीवी भारत को बताया, "बेमौसम बारिश फसल के कम उत्पादन के मुख्य कारणों में से एक है. स्प्रिंकलर सिस्टम खराब है. हम सरकार से इस सिंचाई सिस्टम को चलाने के लिए सोलर पंप लगाने की अपील कर रहे हैं, जिससे फसल का उत्पादन बढ़ सकता है." चंदहरा के एक और किसान एजाज अहमद गनई भी अकबर की बात से सहमत हैं, जिनके परिवार के पास इस इलाके में 3.5 हेक्टेयर जमीन है. गनई ने ईटीवी भारत को बताया, "हमारा उत्पादन 1996 में 5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से घटकर इस साल एक किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रह गया है. कृषि विभाग का लगाया गया स्प्रिंकलर सिस्टम खराब हो गया है क्योंकि कोई उसे चलाता या रखरखाव नहीं करता. हमने विभाग को जमीन के ग्रुप में सोलर पंप लगाने का सुझाव दिया है. किसान इसका रखरखाव और ऑपरेट करेंगे क्योंकि इसमें जनरेटर जैसे फ्यूल का इस्तेमाल नहीं करना पड़ता. यह हमारे लिए सस्ता और किफायती होगा." केसर के कंद और पौधों की समय पर सिंचाई की व्यवस्था न होने से, जो मुख्य रूप से बारिश पर निर्भर है, इसके उत्पादन में गिरावट आई. विधानसभा में पेश किए गए कृषि उत्पादन विभाग के डेटा के अनुसार, 2020-2021 में 17.33 मीट्रिक टन (MT), 2021-2022 में 14.87 एमटी, 2022-2023 में 14.94 एमटी, 2023-2024 में 23.53 एमटी और 2024-2025 में 19.58 एमटी का उत्पादन हुआ. केसर मिशन के तहत, कृषि विभाग ने कहा कि लगभग 2,598 हेक्टेयर जमीन को फिर से तैयार किया गया है, जिससे हाल के वर्षों में उत्पादकता 4.4 किलोग्राम और 6 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़ी है, जिससे कुल उत्पादन का वित्तीय मूल्य 2020-2021 में 302.35 करोड़ रुपये से बढ़कर 2022-2023 में 564.72 करोड़ रुपये और 2024-2025 में 534.53 करोड़ रुपये हो गया है. हाल के वर्षों में इस मसाले का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 4.02 किलोग्राम (2022) से 5.27 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के बीच रहा है और इस फसल के तहत कुल खेती की जमीन भी 2010 के 5705 हेक्टेयर से घटकर अब 3715 हेक्टेयर रह गई है. पंपोर इलाके के दुस्सू गांव में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कश्मीर सैफरन एंड टेक्नोलॉजी सेंटर (IIKSTC) के हेड प्रोफेसर एसए डार ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, केसर की जमीन का आवासीय क्षेत्र में बदलना, मिट्टी का खनन और समय पर सिंचाई की कमी की वजह से मसालों की पैदावार में कमी आई है. प्रोफेसर डार ने कहा कि देश में केसर की घरेलू मांग 80 एमटी है. उन्होंने कहा, "हमने अफगानिस्तान के रास्ते ईरान से 58 एमटी केसर इंपोर्ट किया. कश्मीर केसर का देश में बहुत बड़ा मार्केट है क्योंकि इसमें क्रोसिन की मात्रा अधिक होती है और इसकी गुणवत्ता अच्छी होती है. कश्मीरी केसर अमेरिका, हांगकांग, सऊदी अरब और यूरोपीय देशों में निर्यात किया जाता है. इसलिए, मांग बहुत अधिक है, हमें क्वालिटी प्रोडक्शन बनाए रखना होगा." उन्होंने कहा कि सिंचाई प्रणाली में जो खामियां केसर मिशन के तहत पूरी तरह से हासिल नहीं हुई हैं, उन्हें पूरा किया जाना चाहिए. उन्होंने ईटीवी भारत को बताया, "हम कंद की गुणवत्ता में सुधार करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. हमारा कंद उत्पादन कम है. हमें नर्सरी स्तर पर कंद का उत्पादन बढ़ाना चाहिए. इस उद्देश्य के लिए कृषि विभाग को एक परियोजना प्रस्तुत की गई है." किसान गनई ने भी शिकायत की कि कंद खरीदने के लिए सरकार एक किसान को प्रति कनाल 25000 रुपये देती है, लेकिन एक कनाल की कीमत 1.50 लाख रुपये है. पंपोर के विधायक हसनैन मसूदी ने कहा कि असल उत्पादन अब तक के सबसे निचले स्तर, लगभग 1,000 किलोग्राम पर आ गया है, जिससे किसानों और इस बिजनेस से जुड़े स्थानीय व्यापारियों को लगभग 500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. उन्होंने कहा कि केसर मिशन के तहत लगाए गए 124 बोरवेल में से एक भी चालू नहीं था. उन्होंने कहा, "प्रोसेसिंग, GI टैगिंग और मार्केटिंग के लिए स्पाइस पार्क में सिर्फ 10 किलोग्राम केसर लाया गया, जो उप्तादन में बड़ी गिरावट को साफ दिखाता है." उन्होंने केसर को फिर से उगाने के लिए तुरंत और ठोस कदम उठाने की मांग की. पुलवामा जिले के संबूरा गांव के एक और किसान जावेद अहमद ने कहा कि हाल ही में बीज बोने के मौसम में सूखे की वजह से केसर का उत्पादन कम हो रहा है. अहमद ने ईटीवी भारत को बताया, "सूखी मिट्टी की वजह से कंदों में अंकुरण नहीं हो पाता है. सरकार को स्प्रिंकलर सिंचाई सिस्टम को चालू करने के लिए मॉडर्न टेक्नोलॉजी लानी चाहिए, ताकि हम सूखे के दौरान उनका इस्तेमाल कर सकें. अगर सरकार सिंचाई में मदद करती है तो किसान इसमें दिलचस्पी … Read more