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ऑपरेशन क्लीन: मध्यप्रदेश में वाहन चोरी करने वाले बदमाशों पर पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई

भोपाल प्रदेश में वाहन चोरी की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण हेतु विभिन्न जिलों की पुलिस द्वारा निरंतर एवं समन्वित कार्रवाई की गई है। तकनीकी विश्लेषण, सीसीटीवी फुटेज, मुखबिर तंत्र तथा त्वरित फील्ड रिस्पॉन्स के आधार पर पुलिस ने 53 दोपहिया वाहन बरामद किए है। प्रमुख कार्यवाहियां खरगोन खरगोन पुलिस ने अंतरजिला मोटरसाइकिल चोर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 03 आरोपी एवं 01 विधि विरुद्ध बालक को अभिरक्षा में लेकर कुल 13 मोटरसाइकिलें (कीमत लगभग 6 लाख 50 हजार रुपए) जप्त कीं है। इसके अतिरिक्त एक अन्य कार्रवाई में शातिर वाहन चोर को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 06 मोटरसाइकिलें (कीमत लगभग 3 लाख रुपए) बरामद की गईं। इस प्रकार पुलिस ने इन दोनों कार्रवाइयों में कुल 19 मोटरसाइकिले बरामद की है। पन्‍ना शाहनगर थाना क्षेत्र में पुलिस ने सक्रिय चोर गिरोह का खुलासा करते हुए मुख्य आरोपी एवं खरीदार सहित 03 आरोपियों को गिरफ्तार कर पन्ना, कटनी, छतरपुर एवं अनूपपुर जिलों से चोरी की गई कुल 11 मोटरसाइकिलें (कीमत लगभग 6 लाख रुपए ) बरामद की है। इस कार्रवाई से अंतरजिला वाहन चोरी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। इसके अतिरिक्त अमानगंज थाना क्षेत्र में पुलिस ने सूचना के 24 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर लगभग 60 हजार रुपए कीमत की 01 मोटरसाइकिल जप्त की है। इस प्रकार पुलिस ने कुल 12 मोटरसाइकिलें जब्त की है। छतरपुर थाना कोतवाली पुलिस ने विभिन्न स्थानों से 06 मोटरसाइकिल चोरी करने वाले 02 आरोपियों को गिरफ्तार कर चोरी के वाहन बरामद किए है। ग्वालियर जिले में वाहन चोरी के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए थाना डबरा सिटी पुलिस टीम ने एक शातिर वाहन चोर को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से चोरी की 03 मोटरसाइकिलें बरामद कीं। इसके अतिरिक्त पूर्व कार्रवाई में भी एक आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 02 मोटरसाइकिलें जप्त की गई थीं। इस प्रकार डबरा सिटी पुलिस द्वारा कुल 05 मोटरसाइकिलें बरामद की गईं। इंदौर शहर में जोन-3 क्षेत्रांतर्गत थाना हीरानगर पुलिस ने दो-पहिया वाहन चोरी करने वाले शातिर आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से कुल 05 वाहन (कीमत लगभग 5 लाख रुपए) बरामद किए। वहीं जोन-1 थाना एरोड्रम पुलिस ने 24 घंटे के भीतर वाहन चोर को गिरफ्तार कर जुपिटर स्कूटर (कीमत 40 हजार रुपए) जप्त किया। इस प्रकार दोनों कार्यवाहियों में पुलिस ने 6 मोटरसाइकिलें जब्त की है। श्‍योपुर कोतवाली पुलिस ने रामद्वारा मैरिज गार्डन से चोरी हुई मोटरसाइकिल के मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए शातिर चोर को गिरफ्तार किया। आरोपी के कब्जे से लगभग 60 हजार रुपए कीमत की 01 मोटरसाइकिल बरामद कर विधि अनुसार कार्रवाई की गई। कटनी जिले के थाना रीठी पुलिस ने मोटरसाइकिल चोरी के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर चोरी की मोटरसाइकिल बरामद की। वहीं थाना कोतवाली पुलिस ने अलग कार्रवाई में मोटरसाइकिल चोर को गिरफ्तार कर चोरी का वाहन जप्त किया। दोनों कार्रवाइयों में पुलिस ने 02 मोटरसाइकिलें जब्त की है। दतिया थाना कोतवाली पुलिस ने पुरानी कचहरी क्षेत्र से चोरी गई मोटरसाइकिल को बरामद करते हुए चोरी का वाहन खरीदने वाले आरोपी को गिरफ्तार किया। विदिशा थाना सिविल लाइन पुलिस ने मोटरसाइकिल चोरी के मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर 1 लाख 05 हजार रुपए कीमत की मोटरसाइकिल बरामद की है। प्रदेशभर में की गई इन संगठित एवं सतत कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश पुलिस वाहन चोरी की घटनाओं के विरुद्ध पूर्ण गंभीरता एवं रणनीतिक दृष्टिकोण के साथ कार्य कर रही है। आमजन से अपील है कि वाहन पार्क करते समय सुरक्षा उपायों का पालन करें एवं किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें।  

CBSE फिजिक्स परीक्षा में गड़बड़ी का आरोप, ‘संतुलन’ सवाल पर हाईकोर्ट पहुंचा मामला

नई दिल्ली देशभर में बोर्ड परीक्षाओं के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है जिसने लाखों विद्यार्थियों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। शिक्षक प्रशांत किराड ने सीबीएसई के खिलाफ जनहित याचिका दायर की है। आरोप है कि परीक्षा के अलग अलग प्रश्नपत्रों की कठिनाई का स्तर समान नहीं रखा गया, जिससे छात्रों के साथ न्याय नहीं हुआ और उनके अंक उनकी मेहनत से ज्यादा किस्मत पर निर्भर हो गए। शिक्षक का कहना है कि कुछ विद्यार्थियों को अपेक्षाकृत आसान प्रश्नपत्र मिले, जबकि अन्य को ऐसे प्रश्न हल करने पड़े जिनका स्तर प्रतियोगी परीक्षाओं जैसा बताया जा रहा है। इससे छात्रों में असमानता की भावना पैदा हुई है और पूरे परीक्षा तंत्र की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। क्या है पूरा मामला रिपोर्ट के मुताबिक, दायर की गई जनहित याचिका में कहा गया है कि वर्षों से बोर्ड अलग अलग प्रश्नपत्र तैयार करता रहा है ताकि नकल जैसी समस्याओं पर रोक लगाई जा सके। लेकिन इस बार प्रश्नपत्रों के बीच कठिनाई का अंतर असामान्य रूप से ज्यादा बताया जा रहा है। आरोप है कि कुछ प्रश्नपत्र सीधे और पाठ्यपुस्तक आधारित थे, जबकि अन्य में अवधारणात्मक और गहराई वाले प्रश्न अधिक थे, जिनके लिए अतिरिक्त तैयारी की जरूरत पड़ी। याचिका में यह भी मांग की गई है कि बोर्ड इस विषय पर आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करे और यह बताए कि प्रश्नपत्रों के स्तर को संतुलित रखने के लिए कौन सी प्रक्रिया अपनाई गई थी। कई विद्यार्थियों का कहना है कि उन्होंने पूरे वर्ष नियमित पढ़ाई की, लेकिन परीक्षा कक्ष में उन्हें अपेक्षा से कहीं कठिन प्रश्न मिले। दूसरी ओर, कुछ छात्रों को सरल प्रश्न मिलने की बातें सामने आईं। इस स्थिति ने छात्रों के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या समान परीक्षा में भी सभी को समान अवसर मिला। अभिभावकों का भी कहना है कि यदि एक ही विषय की परीक्षा में कठिनाई का स्तर अलग अलग रहा, तो परिणाम वास्तविक योग्यता को नहीं दर्शा पाएंगे। इससे आगे की पढ़ाई और प्रवेश प्रक्रियाओं पर भी असर पड़ सकता है। ग्रेस मार्क और नरम मूल्यांकन की मांग विवाद बढ़ने के साथ ही शिक्षक ने मांग की है कि कठिन प्रश्नपत्र हल करने वाले विद्यार्थियों को ग्रेस मार्क दिए जाएं या उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की जांच अधिक उदारता से की जाए। कुछ लोग पुनर्परीक्षा की मांग भी उठा रहे हैं, हालांकि इस पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। परीक्षा ढांचे में हाल के बदलाव भी बने चर्चा का कारण हाल के वर्षों में वरिष्ठ कक्षाओं की परीक्षाओं में रटने के बजाय समझ और प्रयोग पर आधारित प्रश्नों की संख्या बढ़ाई गई है। अब प्रश्नों का बड़ा हिस्सा ऐसा होता है जिसमें विद्यार्थियों को अवधारणाओं को वास्तविक जीवन की स्थितियों में लागू करना पड़ता है। इस बदलाव का उद्देश्य विद्यार्थियों में तर्क शक्ति, विश्लेषण क्षमता और विषय की गहरी समझ विकसित करना बताया गया है। हालांकि कई शिक्षकों का कहना है कि बदलाव सही दिशा में है, लेकिन प्रश्नपत्र तैयार करते समय संतुलन बनाए रखना उतना ही जरूरी है, ताकि सभी छात्रों के लिए परीक्षा का अनुभव समान रहे। पहले भी उठ चुके हैं ऐसे सवाल बताया जा रहा है कि इससे पहले भी एक अन्य कक्षा की परीक्षा को लेकर इसी तरह की शिकायतें सामने आई थीं। उस समय भी कुछ प्रश्नपत्र अपेक्षाकृत आसान बताए गए थे, जबकि अन्य को ज्यादा चुनौतीपूर्ण माना गया। उस घटना ने भी छात्रों के बीच बहस छेड़ दी थी, लेकिन इस बार मामला न्यायालय तक पहुंच गया है, जिससे इसकी गंभीरता बढ़ गई है। सामाजिक माध्यमों पर छात्रों की आवाज सामाजिक माध्यमों पर बड़ी संख्या में विद्यार्थी अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। कई छात्र लिख रहे हैं कि परीक्षा के बाद जब उन्होंने अन्य साथियों से प्रश्नों की तुलना की, तो उन्हें कठिनाई के स्तर में स्पष्ट अंतर महसूस हुआ। कुछ छात्रों ने इसे मानसिक दबाव बढ़ाने वाला बताया, क्योंकि परीक्षा के बाद भी उन्हें अपने प्रदर्शन का सही अंदाजा नहीं लग पाया। आगे क्या हो सकता है अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि शिक्षा बोर्ड इस मामले में क्या जवाब देता है और क्या किसी तरह का सुधारात्मक कदम उठाया जाएगा। यदि जांच में कठिनाई स्तर का अंतर साबित होता है, तो मूल्यांकन प्रक्रिया में बदलाव, अनुग्रह अंक या अन्य उपायों पर विचार किया जा सकता है।

राज्य सरकार औद्योगिक एवं उभरते क्षेत्रों में नई ऊँचाइयाँ तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के औद्योगिक विकास में मालवा का अपना विशिष्ट महत्व है। मालवा क्षेत्र की अनुकूल जलवायु और भौगोलिक स्थिति उद्योगों के लिए अत्यंत उपयुक्त है। दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों तक 8-लेन एक्सप्रेस-वे से दूरी कम होने से यातायात और लॉजिस्टिक्स की सुविधाएं सुदृढ़ हुई हैं। प्रदेश सरकार द्वारा नए प्रोजेक्ट्स के माध्यम से परिवहन और आधारभूत संरचना को और मजबूत किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इंदौर में पीथमपुर औद्योगिक संगठन द्वारा पीथमपुर इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव एवं पुस्तक विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में उद्योग, महिला, किसान और गरीब—हर वर्ग के विकास की बयार देश में बह रही है। विभिन्न वैश्विक संगठनों के साथ व्यापारिक समझौते और नई ट्रेड डील्स के माध्यम से भारत निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर होकर विश्व पटल पर अपना परचम लहरा रहा है। देश व्यापार और वाणिज्य के स्वर्णिम काल की ओर बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। उद्योगों का दायरा निरंतर विस्तारित किया जा रहा है, जिससे औद्योगिक विकास की अवधारणा केवल पीथमपुर तक सीमित न रहकर पूरे प्रदेश और देश में नए आयाम स्थापित करे। हमारी सरकार प्रदेश को औद्योगिक क्षेत्र में नई ऊँचाइयों तक पहुंचाने तथा अंतरिक्ष जैसे उभरते क्षेत्रों में भी संभावनाओं को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि एमपीआईडीसी के माध्यम से इंडस्ट्रियल बेल्ट के समग्र विकास के प्रयास प्रदेश को नई उपलब्धियां प्रदान करेंगे। ये प्रयास मध्यप्रदेश को औद्योगिक रूप से फ्रेंडली प्रदेश बनाने में कारगर सिद्ध होंगे और उद्यमशीलता के विकास को नई दिशा देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डॉ. गौतम कोठारी ने साहित्य की साधना के माध्यम से पीथमपुर की 40 वर्षों की भावपूर्ण यात्रा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया है। वर्ष 1983-84 के दशक में जब मूलभूत सुविधाओं का अभाव था, तब भी पीथमपुर की औद्योगिक बेल्ट ने संघर्ष, परिश्रम, धैर्य और नवाचार के बल पर अपनी पहचान स्थापित की। आज फार्मास्युटिकल से लेकर ऑटोमोबाइल तक हर क्षेत्र में पीथमपुर ने देश और प्रदेश में विशिष्ट स्थान बनाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने चार्टर्ड अकाउंटेंसी के क्षेत्र में समर्पित Institute of Chartered Accountants of India (ICAI) भवन की स्थापना की सराहना करते हुए कहा कि यह भवन वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और पेशेवर उत्कृष्टता को नई मजबूती प्रदान कर रहा हैं । 40 वर्षों की विकास यात्रा पर आधारित स्मारक ग्रंथ का विमोचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र की 40 वर्षों की विकास यात्रा पर आधारित पीथमपुर औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष डॉ. गौतम कोठारी द्वारा लिखित स्मारक ग्रंथ “Pithampur: Zero to Zenith – A Journey of 40 Years” का विमोचन किया। यह ग्रंथ पीथमपुर की औद्योगिक उत्कर्ष गाथा, उपलब्धियों एवं क्रमिक विकास का विस्तृत दस्तावेज प्रस्तुत करता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का सम्मान पीथमपुर औद्योगिक संगठन द्वारा प्रदेश के औद्योगिक विकास को गति प्रदान करने एवं निवेश संवर्धन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों हेतु मुख्यमंत्री डॉ. यादव का सम्मान किया गया। इस अवसर पर संगठन के पदाधिकारियों ने शॉल श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर प्रदेश के औद्योगिक विकास में उनके नेतृत्व एवं प्रतिबद्धता के लिए साधुवाद दिया गया। ‘एंकर्स ऑफ इंडस्ट्रियल एक्सीलेंस’ सम्मान प्रदान प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई दिशा देने एवं निवेश प्रोत्साहन हेतु किए गए प्रभावी प्रयासों के लिए “एंकर्स ऑफ इंडस्ट्रियल एक्सीलेंस” सम्मान प्रदान किया गया। विशेष रूप से पीथमपुर औद्योगिक संगठन (PAS) के संस्थापक सदस्यों—वर्ष 1980 के मध्य से 1990 के मध्य तक—के 40 अग्रणी उद्योगपतियों को उनके दूरदर्शी नेतृत्व एवं औद्योगिक नगरी की सुदृढ़ नींव रखने में योगदान हेतु सम्मानित किया गया। ‘मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास गान प्रदर्शित कार्यक्रम के दौरान मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास का गान का औपचारिक प्रदर्शन किया गया। यह प्रेरक गान पीथमपुर औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष डॉ. गौतम कोठारी द्वारा निर्मित है, जो प्रदेश के औद्योगिक विकास की प्रेरणादायी तस्वीर प्रस्तुत करता है। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री महिला एवं बाल विकास विभाग श्रीमती सावित्री ठाकुर, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद इंदौर शंकर लालवानी, महापौर इंदौर नगर निगम पुष्यमित्र भार्गव एवं प्रदेश के उद्योग जगत, निवेशकों, नीति-निर्माताओं एवं गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।  

ईरान में युवा विद्रोह तेज, अमेरिका विवाद के बीच Gen Z ने खोला मोर्चा

ईरान ईरान में हुए बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों को क्रूर दमन के बाद कुचल दिया गया था, जिसमें हजारों लोगों की मौत हुई। अब 40वें दिन (चेहलम) पर शनिवार को छात्रों ( Gen Z) ने फिर से सड़कों और विश्वविद्यालयों में उतरकर मौलवी शासन के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया। रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान के शरीफ प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, अमीर कबीर और बेहेश्ती जैसे प्रमुख कैंपसों में सैकड़ों छात्रों ने 'तानाशाह मुर्दाबाद', 'खामेनेई मुर्दाबाद', 'हत्यारा नेता' और 'बी शराफ' (शर्मनाक) जैसे नारे लगाए। ये प्रदर्शन दिसंबर 2025 से शुरू हुए आर्थिक संकट, महंगाई और असंतोष से उपजे बड़े आंदोलन की निरंतरता हैं, जो जनवरी 2026 में चरम पर पहुंचे थे। सुरक्षा बलों और बसिज मिलिशिया ने इन नए प्रदर्शनों को भी बलपूर्वक दबाने की कोशिश की, जिससे झड़पें हुईं और घायलों की खबरें आईं। वायरल हो रहे वीडियो सोशल मीडिया पर हो रहे वीडियो में तेहरान के प्रमुख इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय में भारी भीड़ को एक भरे हुए इलाके में आपस में भिड़ते हुए देखा जा सकता है। कथित तौर पर लोगों को फारसी में बी शराफ यानी शर्मनाक चिल्लाते हुए सुना गया। ईरान इंटरनेशनल द्वारा साझा किए गए फुटेज में तेहरान के शरीफ प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में सरकार विरोधी नारे लगाते हुए बड़ी भीड़ दिखाई दी। समाचार एजेंसी ने बताया कि प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) से जुड़ी अर्धसैनिक इकाइयों को भेजा गया, जिसके कारण विरोध प्रदर्शनों को बलपूर्वक कुचल दिया गया। बाद में फार्स समाचार एजेंसी ने विश्वविद्यालय में हुई झड़पों में घायलों की सूचना दी। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, एक वीडियो में कथित तौर पर शरीफ विश्वविद्यालय में प्रदर्शनकारियों की कतारें दिखाई दे रही हैं, जो सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को 'हत्यारा नेता' बताकर उनकी निंदा कर रहे हैं और ईरान के अपदस्थ शाह के निर्वासित पुत्र रजा पहलवी से नया सम्राट बनने का आग्रह कर रहे हैं। मानवाधिकार समूह HAALVSH द्वारा जारी वीडियो के अनुसार, तेहरान में बेहेश्ती और अमीर कबीर विश्वविद्यालयों तथा पूर्वोत्तर में मशहद विश्वविद्यालय में भी प्रदर्शनों की खबरें आईं। देश के पश्चिमी शहर अब्दानन में, जो विरोध प्रदर्शनों का गढ़ माना जाता है, मानवाधिकार समूह हेंगाव और सोशल मीडिया पोस्ट के अनुसार, एक कार्यकर्ता शिक्षक की गिरफ्तारी के बाद प्रदर्शनकारियों ने 'खामेनेई मुर्दाबाद' और 'तानाशाह मुर्दाबाद' के नारे लगाए। ईरान में विरोध प्रदर्शन और अमेरिका के साथ तनाव आर्थिक दबाव के लंबे दौर के कारण दिसंबर में अशांति शुरू हुई, लेकिन यह बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों में बदल गई, जिसे सुरक्षा बलों ने हिंसक कार्रवाई से दबा दिया। धार्मिक नेतृत्व का कहना है कि 3000 से अधिक लोग मारे गए, लेकिन उनका दावा है कि हिंसा ईरान के दुश्मनों द्वारा किए गए 'आतंकवादी कृत्यों' का परिणाम थी। हालांकि, अमेरिका स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी (एचआरएएनए) ने इस दमनकारी कार्रवाई में 7000 से अधिक लोगों की मौत हुई है, जिनमें से अधिकांश प्रदर्शनकारी थे, हालांकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। वहीं, ईरानी अधिकारियों ने पहले प्रदर्शनकारियों की आर्थिक चिंताओं की वैधता को स्वीकार किया, लेकिन जैसे ही प्रदर्शन खुले तौर पर सरकार के खिलाफ हो गए, उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वियों, संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल पर 'दंगों' को भड़काने का आरोप लगाया। इस कार्रवाई के चलते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई की धमकी दी, हालांकि बाद में उनका ध्यान ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर केंद्रित हो गया, जिससे पश्चिमी सरकारों को डर है कि इसका उद्देश्य बम बनाना है। अमेरिका और ईरान ने हाल ही में ओमान की मध्यस्थता में संभावित समझौते पर बातचीत फिर से शुरू की है, लेकिन वाशिंगटन ने क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति भी बढ़ा दी है, और दो विमानवाहक पोत, जेट और हथियार भेजे हैं।

ड्रोन, एआई, स्मार्ट सिंचाई और डिजिटल मार्केटिंग को बढ़ावा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि युवा, कृषि क्षेत्र में नवाचार और तकनीक के साथ आगे आएंगे तो मध्यप्रदेश न केवल खाद्यान्न उत्पादन में बल्कि कृषि आधारित उद्योगों, जैविक उत्पादों और एग्री-एक्सपोर्ट में भी देश में अग्रणी स्थान प्राप्त करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इंदौर के बास्केटबाल कॉम्पलेक्स में एक निजी मीडिया संस्थान द्वारा आयोजित “किसान कल्याण की बात युवाओं के साथ” कार्यक्रम में रूबरू हुए। साथ ही युवाओं और विशेषज्ञ किसानों से संवाद किया। कार्यक्रम का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में युवाओं की भूमिका को सशक्त बनाना, किसान कल्याण की नीतियों पर संवाद स्थापित करना, आधुनिक खेती और तकनीक को बढ़ावा देना रहा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा, किसान, कृषि वैज्ञानिक एवं उद्यमी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संवाद कार्यक्रम में प्रश्नों के जवाब में कहा कि मध्यप्रदेश कृषि के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है और राज्य को देश का अग्रणी कृषि राज्य बनाने की दिशा में सरकार प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। यह वर्ष कृषि और किसानों को समर्पित कर किसान कल्याण वर्ष मनाया जा रहा है। कार्यक्रम में युवा किसान और कृषि क्षेत्र से जुड़े युवा प्रतिनिधियों ने कृषि क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर मुख्यमंत्री से सीधे संवाद भी किया। इस दौरान रोबोट द्वारा भी मुख्यमंत्री जी से कृषि विकास को लेकर प्रश्न किया गया। इसका जवाब देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवाओं से कहा कि यदि वे नई तकनीक, ड्रोन, जैविक खेती, फूड प्रोसेसिंग और कृषि आधारित उद्योगों से जुड़ेंगे, तो न केवल अपनी आय बढ़ा सकेंगे बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाएंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कृषि में युवाओं की भागीदारी से उत्पादन, गुणवत्ता और निर्यात में वृद्धि संभव है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों और युवाओं के हित में विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है, जिनका लाभ लेकर युवा आत्मनिर्भर बन सकते हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नई तकनीकों—जैसे ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कृषि प्रबंधन, स्मार्ट सिंचाई प्रणाली और डिजिटल मार्केटिंग के माध्यम से कृषि को आधुनिक स्वरूप दिया जा रहा है। भावांतर योजना के तहत किसानों को समर्थन मूल्य के अंतर की राशि प्रदाय की जा रही है। सरकार द्वारा कृषि स्टार्टअप को प्रोत्साहन, प्रशिक्षण कार्यक्रम, सब्सिडी योजनाएं तथा किसान उत्पादक संगठनों को सशक्त बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर मिल सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए फसल बीमा, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी, कृषि यंत्रीकरण, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना और निर्यात को बढ़ावा देने जैसे कदम उठा रही है। प्रदेश ने गेहूं, सोयाबीन, चना और अन्य फसलों के उत्पादन में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने बताया कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, नर्मदा परियोजनाओं के माध्यम से जल उपलब्धता बढ़ाने, माइक्रो इरिगेशन को प्रोत्साहन, जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा फसल विविधीकरण जैसी पहलों से किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित की जा रही है। प्रदेश में बिजली की सरप्लस उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। किसानों को 24 घंटे बिजली प्रदाय की जा रही है। सोलर पंप पर सब्सिडी दी जा रही है, जिससे प्रदेश में लगातार सिंचाई के रकबे में वृद्धि हो रही है। आज मध्यप्रदेश में सिंचाई का रकबा 55 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है, जिसे वर्ष 2028 तक 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि कृषि अब केवल जीविकोपार्जन का साधन नहीं, बल्कि नवाचार, स्टार्टअप और मूल्य संवर्धन के माध्यम से आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार बन रही है। आज कृषि केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आधुनिक तकनीक, नवाचार और स्टार्टअप के माध्यम से तेजी से विकसित हो रहा क्षेत्र है। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आधुनिक एवं नवाचार आधारित खेती करने वाले प्रगतिशील किसानों का सम्मान भी किया। प्रारंभ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फीता काटकर “किसान कल्याण की बात युवाओं के साथ” कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम स्थल पर युवाओं द्वारा लगायी गई कृषि आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया और सराहना की। इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, सांसद शंकर लालवानी, विधायक राकेश गोलू शुक्ला, रमेश मेंदोला, श्रीमती मालिनी गौड़ और महेन्द्र हार्डिया, सुमित मिश्रा सहित संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर शिवम वर्मा, आयोजक राजेश राठौर राज राठौर भी मौजूद थे।  

विकास की रफ्तार तेज: मेरठ मेट्रो-नमो भारत प्रोजेक्ट को सीएम योगी ने कहा ऐतिहासिक कदम

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली-मेरठ के बीच 'नमो भारत' रैपिड रेल और मेरठ मेट्रो कॉरिडोर के शुभारंभ को नए उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा का स्वर्णिम अध्याय बताया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेरठ दौरे को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "नए उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा में आज एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्रांतिधरा मेरठ में 'मेरठ मेट्रो' और 'नमो भारत' ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर 'नए उत्तर प्रदेश' की विकास यात्रा को गति प्रदान करेंगे। साथ ही आधुनिक कनेक्टिविटी के साक्षी बन रहे जनपद मेरठ को लगभग 12,930 करोड़ रुपए की अलग-अलग विकास और लोक-कल्याणकारी परियोजनाओं की सौगात प्रदान करेंगे।" प्रधानमंत्री का उत्तर प्रदेश आगमन पर उनका स्वागत करते हुए सीएम योगी ने 'एक्स' पोस्ट में लिखा, "प्रधानमंत्री मोदी 82 किमी लंबे दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर को राष्ट्र को समर्पित करते हुए आरआरटीएस के शेष खंडों का उद्घाटन करेंगे। यह कदम एकीकृत शहरी और क्षेत्रीय परिवहन के लिए नई मिसाल स्थापित करेगा।" भाजपा के राज्यसभा सांसद संजय सेठ ने भी प्रधानमंत्री मोदी के मेरठ आगमन पर उनका स्वागत किया है। उन्होंने 'एक्स' पोस्ट में लिखा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 फरवरी को 82 किमी लंबे दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत रैपिड रेल कॉरिडोर का लोकार्पण और मेरठ मेट्रो कॉरिडोर का शुभारंभ करेंगे। इस ऐतिहासिक पहल से दिल्ली-मेरठ के बीच यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी व क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण, व्यापार, निवेश और रोजगार अवसरों को नई गति मिलेगी।" इससे पहले, मेरठ दौरे को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने 'एक्स' पोस्ट में लिखा, "उत्तर प्रदेश समेत देशभर में रेल कनेक्टिविटी के तेज विस्तार के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। इसी दिशा में रविवार को दोपहर करीब 12:30 बजे मेरठ में देश की सबसे तेज मेरठ मेट्रो और नमो भारत ट्रेन के उद्घाटन का सौभाग्य मिलेगा। इसके बाद नमो भारत रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के दूसरे खंडों के शुभारंभ के साथ ही दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर को राष्ट्र को समर्पित करूंगा। इस दौरान कई विकास परियोजनाओं को शुरू करने का भी सुअवसर मिलेगा।"

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुचौहान से मुलाकात कर जाना स्वास्थ्य का हाल

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज इंदौर स्थित सीएचएल हॉस्पिटल पहुँचे, जहाँ उन्होंने उपचाररत सुबिंदु चौहान से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चिकित्सकों से उपचार की प्रगति के संबंध में चर्चा की और बेहतर से बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुबिंदु चौहान के परिजन से भी भेंट कर उन्हें हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पीड़ित परिवार के साथ है और उपचार में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी। 

एमपी ट्रांसको में ‘जीरो एक्सीडेंट पॉलिसी’ बनी कार्य संस्कृति

भोपाल मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने ‘जीरो एक्सीडेंट पॉलिसी’ को अपनी कार्य संस्कृति का अभिन्न अंग बनाया है। सभी सबस्टेशनों एवं ट्रांसमिशन लाइनों पर मेंटेनेंस कार्य से पूर्व सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल का अनिवार्य पालन सुनिश्चित किये जाने की पहल की गई है। मेंटेनेंस कार्य प्रारंभ करने से पहले संबंधित तकनीकी स्टाफ द्वारा सिंगल लाइन डायग्राम तैयार कर संभावित जोखिमों का आकलन किया जाता है तथा टीम को आवश्यक तकनीकी जानकारी प्रदान की जाती है। साथ ही ‘पेप टॉक’ के माध्यम से सुरक्षा मानकों, लाइव उपकरणों की स्थिति, कार्य क्षेत्र की संवेदनशीलता और आवश्यक सावधानियों पर विस्तार से चर्चा की जाती है, जिससे प्रत्येक कर्मचारी पूर्ण सजगता और आत्मविश्वास के साथ कार्य कर सके। कार्य के दौरान मोबाइल का उपयोग वर्जित कार्य के दौरान एकाग्रता बनाए रखने के उद्देश्य से मोबाइल फोन कंट्रोल रूम शिफ्ट इंचार्ज अथवा संबंधित सुपरवाइजर के पास सुरक्षित रूप से जमा कराए जाते हैं। कार्य प्रारंभ से पूर्व संबंधित क्षेत्र को विधिवत अर्थिंग से जोड़ने तथा सुरक्षा मानकों की दोहरी पुष्टि की व्यवस्था भी अनिवार्य रूप से की जा रही है। इसके अतिरिक्त, मेंटेनेंस टीम के लीडर को रोटेशन मे बदलने की अभिनव पहल से कर्मचारियों में नेतृत्व क्षमता, उत्तरदायित्व बोध एवं टीम भावना का विकास हो रहा है। कंपनी का यह प्रयास न केवल दुर्घटनाओं की संभावना को न्यूनतम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि सुरक्षित और जिम्मेदार कार्य संस्कृति को भी सुदृढ़ कर रहा है।  

भोपाल में कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के जिला अध्यक्षों के इंटरव्यू संपन्न, जल्द होगी नियुक्ति

भोपाल  मध्य प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के जिला अध्यक्षों के चयन हेतु साक्षात्कार राजधानी भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में 20 एवं 21 फरवरी को आयोजित किए गए। इन साक्षात्कारों में प्रदेश भर से लगभग ढाई सौ से अधिक कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और अपने-अपने जिलों के प्रतिनिधित्व के लिए आवेदन प्रस्तुत किए। साक्षात्कार प्रक्रिया में प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश प्रतिनिधि तथा उत्तर प्रदेश के पूर्व विधायक और एससी विभाग के प्रदेश प्रभारी भगवती प्रसाद चौधरी विशेष रूप से शामिल रहे। पैनल ने सभी अभ्यर्थियों से संगठनात्मक अनुभव, सामाजिक कार्य, दलित समाज के मुद्दों पर कार्य तथा पार्टी के प्रति प्रतिबद्धता से जुड़े प्रश्न पूछे। अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने जानकारी देते हुए बताया कि चयन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद जल्द ही पीसीसी अध्यक्ष जीतू पटवारी से विस्तृत चर्चा की जाएगी। इसके पश्चात विभाग के प्रदेश प्रभारी श्री चौधरी से विमर्श कर तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम की अनुशंसा के आधार पर मध्य प्रदेश के सभी जिलों में अनुसूचित जाति विभाग के जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया संगठन को मजबूत करने तथा जमीनी स्तर पर दलित समाज की आवाज़ को प्रभावी ढंग से उठाने के उद्देश्य से की जा रही है। नए पदाधिकारियों के चयन से संगठनात्मक गतिविधियों को गति मिलेगी और पार्टी की नीतियों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी।

इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री करेंगे सम्मानित

लखनऊ उप्र दुग्धशाला विकास विभाग की ओर से सोमवार को गोधन समागम-2026 का आयोजन किया जाएगा। इसमें वित्तीय वर्ष 2024-25 के गोकुल पुरस्कार के लिए 63 एवं नंद बाबा पुरस्कार के लिए चयनित 49 लाभार्थियों को पुरस्कृत किया जाएगा। साथ ही निराश्रित गोवंश के संरक्षण में उत्कृष्ट कार्य करने वाली गोशालाओं को भी सम्मानित किया जाएगा। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के मार्स सभागार में दुग्ध विकास, पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह पुरस्कार प्रदान करेंगे।  दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी के.जी. ने बताया कि गोधन समागम-2026 में गोकुल एवं नंद बाबा पुरस्कार के चयनित लाभार्थी तथा प्रदेश सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को गोपालन से संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा स्वदेशी नस्ल के गोपालन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गोपालन से सम्बन्धित विषयों पर विचार-विमर्श एवं जानकारी दी जायेगी। प्रथम सत्र में गोधन प्रदर्शनी, नंद बाबा व गोकुल पुरस्कार वितरण, दुग्ध उत्पादन की तकनीकों पर प्रस्तुतिकरण, उत्कृष्ट निराश्रित गोआश्रय स्थलों, गोशालाओं को सम्मानपत्र तथा डी०बी०टी० के जरिए पुरस्कार धनराशि का वितरण किया जाएगा।  द्वितीय सत्र में गोआधारित अर्थव्यवस्था पर गोपालकों की संगोष्ठी, पशु आहार, हरे चारे, पशु पोषण पर चर्चा, गोवंश आश्रय स्थलों को उत्पादक व स्वावलंबी बनाने के लिए प्रस्तुतिकरण, स्वदेशी गौपालन पर चर्चा, गोपालन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था से सुदृढ़ीकरण पर प्रस्तुतिकरण, नस्ल सुधार, पशु पोषण तथा पशु स्वास्थ्य व उचित देखभाल आदि पर प्रस्तुतिकरण किया जाएगा। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव, पशुधन, दुग्ध एवं मत्स्य विकास मुकेश मेश्राम, प्रबंध निदेशक पीसीडीएफ वैभव श्रीवास्तव भी उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञ, उद्यमी, किसान एवं पशुपालक भी प्रतिभाग करेंगे। समागम में सम्बन्धित विषय विशेषज्ञों द्वारा स्वदेशी नस्ल के गौ-पालन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण से संबंधित विषयों पर गहन विचार-विमर्श एवं अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की जाएंगी।