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1 लाख 60 हजार के करीब पहुंची 24 कैरेट गोल्ड की कीमत, चांदी भी महंगी – देखें नए रेट

नई दिल्ली मंगलवार, 24 फरवरी 2026 को सोना-चांदी के रेट्स में बढ़ोतरी देखने को मिली है. इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार सोमवार, 23 फरवरी को 22 कैरेट सोने का भाव ₹144930 प्रति 10 ग्राम था, जो आज ₹146105 प्रति 10 ग्राम पहुंच गया है. वहीं, सोमवार की तुलना में चांदी (999, प्रति 1 किलो) की कीमत भी आज 2 हजार 400 से ज्यादा महंगी हुई है. Gold-Silver Price Today 24 February 2026: सोना-चांदी का लेटेस्ट रेट   शुद्धता सोमवार शाम का रेट मंगलवार सुबह का रेट जानें कितना महंगा? सोना (प्रति 10 ग्राम) 999 (24 कैरेट) 158220 159503 ₹1283 महंगा सोना (प्रति 10 ग्राम) 995 (23 कैरेट) 157586 158864 ₹1278 महंगा सोना (प्रति 10 ग्राम) 916 (22 कैरेट) 144930 146105 ₹1175 महंगा सोना (प्रति 10 ग्राम) 750 (18 कैरेट) 118665 119627 ₹962 महंगा सोना (प्रति 10 ग्राम) 585 (14 कैरेट) 92559 93309 ₹750 महंगा चांदी (प्रति 1 किलो) 999 264075 266535 ₹2460 महंगी जानें सोमवार को सोने का भाव (999 शुद्धता) सुबह का रेट: ₹158428 प्रति 10 ग्राम शाम का रेट: ₹158220 प्रति 10 ग्राम जानें सोमवार को चांदी का भाव (999 शुद्धता) सुबह का रेट: ₹265550 प्रति किलो शाम का रेट: ₹264075 प्रति किलो इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी किए गए दाम पूरे देश में मान्य होते हैं, लेकिन इनमें जीएसटी शामिल नहीं होता है. गहने खरीदते समय सोने या चांदी की कीमत टैक्स समेत होने के कारण अधिक होती है. IBJA की ओर से केंद्र सरकार द्वारा घोषित भाव शनिवार, रविवार और केंद्र सरकार की छुट्टियों पर जारी नहीं किए जाते हैं.

साउथ अफ्रीका से हार के बाद टीम इंडिया में दो अहम बदलाव, सेमीफाइनल का गणित उलझा

 नई दिल्ली आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया को रविवार को साउथ अफ्रीका ने 76 रनों से करारी शिकस्त दी. सुपर-8 में इस करारी हार के बाद टीम की जमकर आलोचना हो रही है. आलोचना का कारण हार से ज्यादा टीम के इंटेंट को लेकर है. क्योंकि 8 नंबर तक की बल्लेबाजी वाली टीम 111 के स्कोर पर ढेर हो गई.  किसी भी बल्लेबाज ने संघर्ष नहीं दिखाया. खासकर बाएं हाथ के बल्लेबाज ऑफ स्पिन के सामने पूरी तरह असहज नजर आए. इस हार के बाद अब टीम में बड़े बदलाव की मांग भी उठ रही है. भारत का अगला मैच 26 फरवरी को जिम्बाब्वे के खिलाफ है. कहा जा रहा है कि इस मैच में दो बदलाव हो सकते हैं. अक्षर पटेल को वापस लाने की मांग पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज पार्थिव पटेल समेत कई पूर्व क्रिकेटरों ने टीम में बदलाव की मांग की है. सबसे ज्यादा चर्चा अक्षर पटेल को लेकर हो रही है, जिन्हें पिछले दो मैचों में मौका नहीं मिला. पार्थिव पटेल का मानना है कि अक्षर पटेल को टीम में वापस लाना चाहिए. उन्होंने कहा कि अक्षर दबाव में अहम पारियां खेलने की क्षमता रखते हैं और गेंदबाजी में भी किफायती साबित होते हैं. उनका कहना है कि मैच-अप की रणनीति अपनी जगह है, लेकिन अक्षर जैसा ऑलराउंडर टीम संतुलन के लिए जरूरी है. अभिषेक शर्मा पर खतरा पार्थिव पटेल ने सलामी बल्लेबाजी पर भी सवाल उठाए. अभिषेक शर्मा लगातार चौथे मैच में नाकाम रहे हैं. ऐसे में उन्हें बाहर किया जा सकता है. उन्होंने संकेत दिए कि चेन्नई में होने वाले मुकाबले में संजू सैमसन को मौका मिल सकता है. उनके अनुसार बाएं हाथ के बल्लेबाजों को ऑफ स्पिन के खिलाफ परेशानी हो रही है, इसलिए टीम प्रबंधन बदलाव पर विचार कर सकता है. भारत की ओर से ईशान किशन सबसे सफल बल्लेबाज रहे हैं. उन्होंने अब तक 177 रन बनाए हैं, हालांकि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वह खाता नहीं खोल सके. बिगाड़ा टीम इंडिया का खेल, उलझ गया सेमीफाइनल का गणित  आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप में सुपर-8 का रोमांच जारी है. मैच दर मैच सेमीफाइनल की जंग और पेचीदा होती जा रही है. रविवार को साउथ अफ्रीका ने टीम इंडिया को करारी शिकस्त दी. इसके बाद वेस्टइंडीज ने सोमवार को जिम्बाब्वे के खिलाफ बड़ी जीत हासिल की. वेस्टइंडीज की इस महाजीत ने सेमीफाइनल के गणित को और उलझा दिया है. अब भारत की सेमीफाइनल में पहुंचने की राह और मुश्किल हो गई है. आइए इसका पूरा इक्वेशन समझते हैं… पहले अंक तालिका का हाल जान लीजिए इस जीत के साथ ही सुपर-8 के ग्रुप 1 में वेस्टइंडीज की टीम टॉप पर आ गई है. दो अंक के साथ ही वेस्टइंडीज का रन रेट +5.350 का हो गया है. वहीं, दूसरे नंबर पर साउथ अफ्रीका है जिसका नेट रन रेट दो अंकों के साथ +3.800 का है. अब तीसरे पायदान पर भारत है जिसके पास अंक नहीं है लेकिन उसका नेट रन रेट (-3.800) जिम्बाब्वे (-5.350) से बेहतर है.  अब आगे क्या… वेस्टइंडीज की इस जीत और जिम्बाब्वे की हार से अब वेस्टइंडीज का पलड़ा भारी हो गया है. वहीं, जिम्बाब्वे की हालत खराब हो गई है. वेस्टइंडीज के अब दो मैच भारत और साउथ अफ्रीका से हैं. वहीं, जिम्बाब्वे को साउथ अफ्रीका और भारत से खेलना है. अगर वेस्टइंडीज अपने आगे के दो मैच में से एक मैच जीतता है और एक हारता है तो भी उसके सेमीफाइनल में पहुंचने की उम्मीद जिंदा रहेगी. कारण है उसका सबसे बेहतर नेट रन रेट. वहीं, भारत और साउथ अफ्रीका भी अगर दोनों मैच जीतते हैं तो फिर 3 टीमें होंगी जिनके पास 6 अंक होंगे. यानी फैसला नेट रन रेट से ही होगा.  भारत कैसे करेगा क्वालिफाई अगर भारत को सेमीफाइनल में जगह बनानी है तो गणित बिलकुल साफ है. भारत अपने दोनों मैच बेहतर अंतर से जीते. साथ ही वो दुआ करे की साउथ अफ्रीका भी अपने सारे मैच जीते. अगर साउथ अफ्रीका और भारत दोनों अपने बाकी के दो-दो मैच जीतते हैं तो मतलब वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे के पास केवल 2-2 अंक ही बचेंगे. ऐसे में भारत और साउथ अफ्रीका इस ग्रुप से सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई कर जाएगा. लेकिन अगर साउथ अफ्रीका अपना एक मैच हारती है तो फिर फैसला नेट रन रेट से ही होगा और वहां भारत के लिए मुश्किल बढ़ सकती है. क्योंकि मौजूदा समय में भारत का नेट रन रेट वेस्टइंडीज और साउथ अफ्रीका दोनों से ही बेहद खराब स्थिति में है. अब वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे मैच के बारे में जानें… आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप का 44वां मैच सोमवार को जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज के बीच खेला गया. मुकाबले में टॉस जीतकर जिम्बाब्वे ने पहले गेंदबाजी का फैसला लिया था. वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने तूफानी बैटिंग की और 254 रन ठोक डाले. इसके जवाब में उतरी जिम्बाब्वे की टीम महज 147 रन ही बना सकी और 18वें ओवर में ऑलआउट हो गई.    अब भारत का अगला मुकाबला 26 फरवरी को जिम्बाब्वे के खिलाफ है. यह मैच टीम इंडिया के लिए करो या मरो जैसा हो सकता है, क्योंकि सेमीफाइनल की दौड़ में बने रहने के लिए जीत बेहद जरूरी है.

उज्जैन में ऐतिहासिक ग्रामीण डाक सेवक सम्मेलन, 7500 सेवकों की होगी उपस्थिति

उज्जैन मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित कार्तिक मेला ग्राउंड पर मंगलवार शाम 5 बजे ग्रामीण डाक सेवक सम्मेलन आयोजित होगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सीएम डॉ. मोहन यादव होंगे और अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया करेंगे। सम्मेलन में 7 हजार ग्रामीण डाक सेवक (जीडीसी) शामिल होंगे। सम्मेलन का उद्देश्य ग्रामीण डाक सेवकों के समर्पण और सेवा को सम्मानित करना है। ये ग्रामीण क्षेत्रों में इंडिया पोस्ट की रीड़ हैं। लोगों को जोडऩे और ग्रामीण भारत में डाक, बैंकिंग और बीमा सेवाओं का विस्तार करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश परिमंडल के विभिन्न संभागों से करीब 7 हजार ग्रामीण डाक सेवक शामिल होंगे। ग्रामीण डाक सेवा समुदाय से बातचीत करेंगे केंद्रीय मंत्री सिंधिया केंद्रीय संचार मंत्री सिंधिया ग्रामीण डाक सेवा समुदाय के साथ बातचीत करेंगे। आधुनिक और नागरिक केंद्रित डाक नेटवर्क के लिए अपना दृष्टिकोण बताएंगे और उन्हें ग्रामीण समुदायों की सरकारी और वित्तीय सेवाएं प्रदान करते विभाग को लाभ की स्थिति तक लाने में उनकी भूमिका को और मजबूत करने के लिए प्रेरित करेंगे। सिंधिया करेंगे सम्मानित सिंधिया डाक और पार्सल वितरण, नए बचत खाते खोलने, डाक जीवन बीमा (पीएलआई) और ग्रामीण डाक जीवन बीमा (आरपीएलआई) पॉलिसी खरीदने, ग्रामीण क्षेत्रों में लाभार्थियों को सीधे भुगतान जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट और सर्वश्रेष्ठ कार्य निष्पादन करने वाले ग्रामीण डाक सेवकों को सम्मानित करेंगे। इंडिया पोस्ट को सशक्त बनाने निभाएगा अहम किरदार बताया जा रहा है कि, ये सम्मेलन ग्रामीण भारत में सार्वजनिक सेवा वितरण के प्रवेश द्वार के रूप में इंडिया पोस्ट को सशक्त बनाने, प्रत्येक डाकघर को नागरिक-केंद्रित सेवाओं के केंद्र में बदलने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए उत्प्रेरक के रूप में भूमिका निभाने को सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।

मौसम की सटीक भविष्यवाणी के लिए AI बना गेमचेंजर, डॉ. रविचंद्रन का बड़ा दावा

 नई दिल्ली मौसम विज्ञान में एक बड़ा बदलाव आने वाला है. पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन ने  AI इम्पैक्ट समिट 2026 में कहा कि पारंपरिक भौतिकी आधारित मॉडलों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के साथ मिलाकर ही जलवायु की बढ़ती अनिश्चितताओं से निपटा जा सकता है. नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट 2026 में 'जलवायु extremes को संभालने और टिकाऊ सिस्टम बनाने के लिए AI का उपयोग' टॉपिक पर एक पैनल डिस्कशन के दौरान उन्होंने बताया कि पुराने मॉडल बड़े इलाकों के मौसम की भविष्यवाणी में माहिर हैं, लेकिन आज के मौसम में छोटे-छोटे स्थानीय बदलाव और समय के साथ होने वाले उतार-चढ़ाव को समझने के लिए AI जरूरी है. हाथी और चींटी की दिलचस्प मिसाल पेश की डॉ. रविचंद्रन ने वैज्ञानिकों के सामने आने वाली चुनौती को एक मजेदार उदाहरण से समझाया. उन्होंने कहा, "पहले हमें सिर्फ 'हाथी' को ट्रैक करना पड़ता था, यानी बड़े पैमाने के मौसम सिस्टम. लेकिन अब जलवायु परिवर्तन की वजह से हमें उस हाथी पर बैठी 'चींटी' को भी देखना है. हमें बड़े स्थान की गति और छोटे-छोटे स्थानीय समय के बदलाव दोनों को समझना होगा. उनका मतलब था कि भौतिकी के मॉडल बड़े स्तर पर अच्छा काम करते हैं, लेकिन AI छोटे स्तर पर, समय के साथ होने वाले बदलावों को बेहतर तरीके से पकड़ लेता है. खासकर बादल फटने (cloudburst) जैसी घटनाओं की भविष्यवाणी अभी बहुत मुश्किल है. दोनों को मिलाकर ही सटीक पूर्वानुमान संभव होगा. इसके लिए कई पहलुओं पर काम करना होगा. मॉडल में कमियां कम करें उन्होंने कहा कि पुराने मॉडल में कई धारणाएं होती हैं, जिनसे गलतियां बढ़ती हैं. AI इन गलतियों को कम कर सकता है और शुरुआती हालात को बेहतर बना सकता है. 150 साल पुराना डेटा खोलें भारत मौसम विभाग (IMD) के पास 150 साल का बहुत बड़ा डेटा है।.डॉ. रविचंद्रन ने कहा कि इसे युवा शोधकर्ताओं और अलग-अलग क्षेत्र के विशेषज्ञों के लिए खोल देना चाहिए. छोटे स्तर पर पूर्वानुमान AI की मदद से बड़े मॉडल को 1 किलोमीटर तक छोटा करके स्थानीय स्तर पर सटीक मौसम बता सकते हैं. यह लोगों की सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा बदलाव होगा.  उन्होंने कहा कि AI पर भरोसा तभी बनेगा जब उसकी जांच-पड़ताल अच्छे से हो. सार्वजनिक सुरक्षा के लिए AI के नतीजों को सही साबित करना बहुत जरूरी है. इसके लिए सभी क्षेत्रों को साथ मिलकर काम करना होगा. डॉ. रविचंद्रन ने कहा कि अब सिर्फ एक विभाग या एक तरीके से सोचना बंद करना होगा. हमें जीव विज्ञान के विशेषज्ञ, डेटा साइंटिस्ट और कई क्षेत्रों के शोधकर्ताओं को साथ लाना होगा. अलग-अलग नजरिए से डेटा देखने से ही जलवायु के प्रति मजबूत भारत बन सकता है. बता दें कि यह पैनल डिस्कशन इंडियन AI रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (IAIRO), अत्रिया यूनिवर्सिटी, C-DAC, IITM/MoES और लोकनीति ने आयोजित की थी इसमें डॉ. रविचंद्रन के अलावा इंजी. मनीष भारद्वाज (राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सचिव), डॉ. शिवकुमार कल्याणरमण (अनुसंधान राष्ट्रीय फाउंडेशन के CEO), प्रो. अमित शेठ (IAIRO के संस्थापक निदेशक और यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ कैरोलिना के प्रोफेसर, डॉ. प्रफुल चंद्रा (अत्रिया यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और डीन रिसर्च), डॉ. कार्तिक काशीनाथ (NVIDIA, अमेरिका के डिस्टिंग्विश्ड साइंटिस्ट), प्रो. देव नियोगी (यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास एट ऑस्टिन के प्रोफेसर), संदीप सिंघल (अवाना कैपिटल के सीनियर एडवाइजर) और डॉ. अक्षरा कागिनलकर (अत्रिया यूनिवर्सिटी में क्लाइमेट चेंज सेंटर की प्रोफेसर) शामिल थे.

चंद्र ग्रहण के दौरान इन बातों का रखें खास ध्यान, भूलकर भी न करें ये काम

धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहण को बहुत महत्वपूर्ण समय माना गया है. हर साल सूर्य और चंद्रमा को ग्रहण लगता है. ग्रहण का समय अशुभ माना गया है. सूर्य ग्रहण अमावस्या तो चंद्र ग्रहण पूर्णिमा तिथि को लगता है. इस साल फाल्गुन माह की अमावस्या तिथि पर सूर्य को ग्रहण लगा था. ये ग्रहण भारत में नजर नहीं आया था. ऐसे में सूर्य ग्रहण का सूतक काल भी देश में नहीं माना गया था. अब फाल्गुन माह में ही चंद्र ग्रहण लगले जा रहा है. इस साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा 03 मार्च को है. इसी दिन चंद्र ग्रहण लगेगा. ये साल का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण होगा. इस ग्रहण की अवधि 03 घंटे 27 मिनट होगी. ये ग्रहण सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में लगेगा. ये ग्रहण भारत में दिखाई देगा. ऐसे में इसका सूतक काल भी माना जााएगा. चंद्र ग्रहण के विशेष नियम धर्म शास्त्रों में बताए गए हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस दौरान क्या करना और क्या नहीं करना चाहिए? चंद्र ग्रहण 2026 का समय     चंद्र ग्रहण की शुरुआत दोपहर में 03 बजकर 20 मिनट पर होगी.     ये चंद्र ग्रहण शाम को 06 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. चंद्र ग्रहण का सूतक काल चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण लगने से 09 घंटे पहले लग जाता है. ऐसे में साल के पहले चंद्र ग्रहण का सूतक भारत में सुबह 06 बजकर 20 मिनट से शुरू हो जाएगा. फिर शाम को ग्रहण खत्म होने के साथ ही 06 बजकर 47 मिनट पर सूतक काल भी समाप्त हो जाएगा. चंद्र ग्रहण के दौरान क्या करें? चंद्र ग्रहण का सूतक काल शुरू होने से पहले भगवान के मंदिर को परदे से ढंक दें. सूतक के दौरान अपने ईष्टदेव के मंत्रों का जाप करते रहें. सूतक शुरू होने से पहले खाने की चीजों में तुलसी के पत्ते डाल दें, जिससे भोजन बाद में खा सकें. ग्रहण के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन विशेष रूप से करें. चंद्र ग्रहण के दौरान क्या न करें? ग्रहण के सूतक काल के दौरान किसी भी तरह की पूजा-पाठ न करें. चंद्र ग्रहण के समय में घर से बाहर नहीं निकलें. न नंगी आंखों से ग्रहण को देखें. सूतक काल के दौरान भोजन न बनाएं और खाएं. चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं भूलकर भी घर से न निकलें. सूतक काल में बिस्तर पर न लेटें और सोएं.

उच्च शिक्षित उम्मीदवार भी फिजिकल टेस्ट में शामिल, आरक्षक भर्ती का नया दौर

ग्वालियर मध्य प्रदेश में पुलिस आरक्षक भर्ती प्रक्रिया का दूसरा चरण शुरू हो गया है। लिखित परीक्षा के बाद अब शारीरिक प्रवीणता परीक्षा (पीईटी) सोमवार से प्रारंभ हो चुकी है। प्रदेश भर में इसके लिए 10 केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें ग्वालियर का 14वीं बटालियन एसएएफ ग्राउंड भी शामिल है। इस केंद्र पर कुल 5600 अभ्यर्थियों को फिजिकल परीक्षा के लिए बुलाया गया है। इस दौरान जो खास बात देखने को मिली कि 12 पास आरक्षक पद के लिए ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट और टेक्निकल साक्षरता का ज्ञान रखने वाले अभ्यर्थी भी पहुंच रहे हैं। भर्ती प्रक्रिया के तहत प्रतिदिन 200 अभ्यर्थियों को बुलाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, 23 फरवरी से शुरू हुई यह शारीरिक दक्षता परीक्षा 14 मार्च तक चलेगी। तिथि निर्धारित दूसरा मौका नहीं ग्वालियर रेंज के डीआईजी अमित सांघी ने बताया कि ग्वालियर केंद्र पर 5 हजार से अधिक अभ्यर्थियों को बुलाया गया है। सोमवार और मंगलवार को 200-200 अभ्यर्थियों को परीक्षा के लिए बुलाया गया, जबकि इसके बाद प्रतिदिन 400 अभ्यर्थियों की शारीरिक प्रवीणता परीक्षा आयोजित की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी अभ्यर्थी को निर्धारित तिथि और समय में कोई बदलाव या रियायत नहीं दी जाएगी। समय से चूकने पर दूसरा मौका नहीं मिलेगा। बहन ग्रेजुऐशन कर रही है फिजिकल परीक्षा में शामिल होने के लिए न केवल ग्वालियर बल्कि आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में अभ्यर्थी पहुंच रहे हैं। अशोकनगर से आए गिर्राज रघुवंशी अपनी बहन के साथ केंद्र पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि उनकी बहन लिखित परीक्षा उत्तीर्ण कर चुकी है और अब शारीरिक परीक्षा देने आई है। वह बीए प्रथम वर्ष की छात्रा है। गिर्राज सुबह 5 बजे ही बहन के साथ ग्राउंड पहुंच गए थे और बाहर इंतजार करते नजर आए। यूपीएससी की तैयारी कर रही है बहन इसी तरह गुना से आए अरविंद अपनी बहन के साथ परीक्षा केंद्र पहुंचे। उन्होंने बताया कि उनकी बहन बीएससी पास है, एमएससी कर रही है और साथ ही यूपीएससी की तैयारी भी कर रही है। लिखित परीक्षा पास करने के बाद उसे ग्वालियर केंद्र पर फिजिकल टेस्ट के लिए बुलाया गया है। भर्ती के लिए न्यूनतम पात्रता 12वीं पास निर्धारित की गई है, लेकिन बड़ी संख्या में स्नातक और परास्नातक अभ्यर्थी भी परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, यहां आने वाले अधिकांश अभ्यर्थी बीए, बीएससी, एमए और बीटेक जैसे उच्च शिक्षित युवा हैं, जो पुलिस सेवा में करियर बनाने के लिए प्रयासरत हैं।

चार्ज खत्म ही नहीं होता? 10001mAh बैटरी वाले Realme P4 Power ने टेस्टिंग में किया हैरान

नई दिल्ली कोई फोन कितना पावरफुल हो सकता है, यह मुझे Realme P4 Power ने बता द‍िया। जब डिवाइस लॉन्‍च हुई थी तो सबसे ज्‍यादा चर्चा इसकी बैटरी की रही। 10001mAh के साथ यह भारत का सबसे बड़ी बैटरी वाला फोन है। मैंने भी इसकी बैटरी को जमकर टेस्‍ट किया। मेरी टेस्टिंग में यह लगातार 49 घंटे और 44 मिनटों तक टिका रहा। यह मेरे ल‍िए चौंकाने वाला था। आजतक किसी भी स्‍मार्टफोन की बैटरी मेरे र‍िव्‍यू में इतनी देर नहीं चली है। लेकिन फोन खरीदते वक्‍त क्‍या सिर्फ बैटरी ही देखी जाए? बाकी मामलों में कैसा है Realme P4 Power, आइए जानते हैं।  कैसे किया बैटरी टेस्‍ट Realme P4 Power की बैटरी को टेस्‍ट करने से पहले मैंने फोन को फुल चार्ज कर लिया था। चार्जिंग में रहते हुए ही मैंने फोन की ब्राइटनैस को 50% पर सेट कर दिया। वॉल्‍यूम जीरो कर दिया और बैटरी पावर सेविंग मोड को बंद कर दिया। मैंने Youtube पर एक ऑनलाइन वीड‍ियो न‍िकाला जो 100 घंटों का था। उसे मैंने अधि‍कतम रेजॉलूशन पर सेट किया और ऑनलाइन वीडियो प्‍ले कर दिया। अब मैं फोन को चार्जिंग से हटा चुका था। मेरे तय किए गए सभी पैरामीटर्स के साथ यूट्यूब वीड‍ियो पूरे दो दिनों तक नॉनस्‍टॉप चलता रहा। पहले 24 घंटों में बैटरी 47% बच गई थी। कुल मिलाकर फोन 49 घंटे और 44 मिनटों बाद स्‍व‍िच्‍ड ऑफ हुआ। बैटरी कितनी दमदार? Realme P4 Power की बैटरी पर मुझे जरा भी शक नहीं है। अगर ऑनलाइन स्‍ट्रीमिंग में यह फोन दो दिनों से ज्‍यादा चल सकता है तो निश्‍चित रूप से डाउनलोडेड वीड‍ियाे के साथ इसकी बैटरी और भी लंबी चलेगी। इसके अलावा मैंने इस बैटरी को रोजाना इस्‍तेमाल में भी परखा। मैं एक एवरेज यूजर हूं जो दिन में 5 से 6 घंटे मोबाइल पर व्‍यस्‍त रहता है। एक बार फुल होने के बाद इसने मुझे ढाई दिन का बैकअप दिया। अगर आप हैवी यूजर हैं यानी गेमिंग वगैरह अध‍िक करते हैं, तब भी फोन की बैटरी आराम से दो दिन चल जाएगी। कितनी देर में चार्ज होता है फोन? यह फोन 80W की अल्‍ट्रा चार्जिंग को सपोर्ट करता है। मेरी टेस्टिंग के दौरान यह लगभग दो घंटे में फुल चार्ज हुआ। मुझे पर्सनली ऐसा लगता है कि अगर कंपनी सबसे बड़ी बैटरी दे रही है तो उसे चार्जिंग भी सबसे ज्‍यादा देनी चाहिए थी। तब यह फोन अपनी बैटरी और चार्जिंग पावर से ‘सोने पे सुहागा’ हो जाता। ड‍िजाइन और डिस्‍प्‍ले यह फोन तीन कलर्स- ट्रांस सिल्‍वर, ट्रांस ऑरेंज और ट्रांस ब्‍लू में आता है। फोन का डिजाइन नीचे से क्‍लीन और डिसेंट और टॉप में जालीदार पैटर्न लिए हुए है। कंपनी ने इसे गेमिंग टच देने की कोशिश की है। 219 ग्राम वजन के साथ मैं इसे बहुत भारी नहीं कहूंगा, क्‍योंकि इसमें बहुत बड़ी बैटरी है। वजन कंट्रोल करने के लिए कंपनी ने बैक और साइड फ्रेम में प्‍लास्टिक इस्‍तेमाल किया है। हालांकि यह सस्‍ता या चीप टाइप नहीं दिखता है। फोन में 6.7 इंच का एमोलेड डिस्‍प्‍ले है। यह फुल एचडी प्‍लस रेजॉलूशन ऑफर करता है। 144 हर्त्‍ज रिफ्रेश रेट के साथ यह गेमर्स के ल‍िए भी आइडल चॉइस लगता है। मुझे फोन के डिस्‍प्‍ले कलर्स, कॉन्‍ट्रास्‍ट और शार्पनेस डिसेंट लगी। फोन में कंटेंट स्‍ट्रीम करने का अनुभव भी शानदार रहा। मेरी आंखें इसके कलर्स के साथ जल्‍दी एडजस्‍ट हो गई थीं। परफॉर्मेंस मीडि‍याटेक डाइमेंसिटी 7400 अल्‍ट्रा 5G चिपसेट से पावर्ड मेरी यूनिट में 12GB रैम थी। टेस्टिंग के दौरान इसने मुझे स्‍मूथ परफॉर्मेंस दी। ऐप्‍स तेजी से ओपन और बंद हो रहे थे। मल्‍टीटास्‍क‍िंग में भी लैग या हैंग जैसी रुकावट नहीं आई। हालांकि बहुत अधिक हैवी गेमिंग पर कुछेक फ्रेम जरूर ड्रॉप हुए, लेकिन इतना तो चलता है। ओवरऑल परफॉर्मेंस में यह फोन न‍िराश नहीं करेगा। डेली काम आप बिना अटके कर पाएंगे। UFS 3.1 के साथ फाइल ट्रांसफर भी स्‍मूथ होता है। कैमरा कैमरा वह पॉइंट है जहां में रियलमी पी4 पावर को ओके-ओके कहूंगा। इसका 50MP का मेन बैक कैमरा डेली यूज में ठीक फोटो लेता है। 8MP का अल्‍ट्रावाइड कैमरा भी र‍िजल्‍ट दे जाता है। 16MP के सेल्‍फी कैमरे से पसंद आने वाली फोटो क्‍ल‍िक होती हैं लेकिन कोई वाव फैक्‍टर इसके कैमरों में नहीं है। टेलीफोटो लेंस या पेरिस्‍कोप कैमरा जैसी चीजें नहीं हैं। फ्रंट कैमरा में 4K वीड‍ियो रिकॉर्डिंग नहीं मिलती, जो मुझे इस फोन की बड़ी कमी लगी। अगर आप कैमरा लवर हैं और अच्‍छे कैमरा वाला फोन तलाश रहे हैं तो आपको Realme P4 पावर की जगह कुछ और ढूंढना चाहिए।

घूसखोर पंडित पर विवाद: वैभव पाठक ने दायर किया परिवाद, नेटफ्लिक्स समेत कई पर कानूनी कार्रवाई

जबलपुर मनोज बाजपेयी की फिल्म ‘घूसखोर पंडत' को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा. नाम बदलने के बाद भी मामला अदालत तक पहुंच चुका है और अब इससे जुड़ी कानूनी कार्रवाई और सख्त हो गई है. जबलपुर जिला न्यायालय ने परिवाद पर सुनवाई करते हुए फिल्म के निर्माता‑निर्देशक नीरज पांडे के साथ‑साथ Netflix के कई शीर्ष अधिकारियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं. समाज के एक वर्ग की भावना आहत होने का आरोप लगाते हुए परिवादी ने इस मामले को गंभीर सांस्कृतिक और सामाजिक मुद्दा बताया है. अदालत में दर्ज हुआ परिवादी का बयान जबलपुर के प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी पंकज सविता की अदालत में सोमवार को परिवादी वैभव पाठक का बयान दर्ज किया गया. उन्होंने फिल्म के विवादित शीर्षक का विरोध करते हुए इसे ब्राह्मण समुदाय की गरिमा पर प्रहार बताया. अदालत ने बयान सुनने के बाद फिल्म के निर्माता‑निर्देशक सहित Netflix के संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए. Netflix के शीर्ष अधिकारियों को नोटिस नोटिस जिन लोगों को भेजा गया है, उनमें Netflix (USA) के अध्यक्ष रीड हेस्टिंग्स, सह‑मुख्य कार्यकारी अधिकारी टेड सरंदास, मुख्य सामग्री अधिकारी बेला बजरिया और Netflix इंडिया की उपाध्यक्ष मोनिका शेरगिल शामिल हैं. अदालत ने इन सभी से इस मामले में जवाब माँगने के निर्देश दिए हैं. परिवाद में रीड हेस्टिंग्स (अध्यक्ष, नेटफ्लिक्स यूएसए), टेड सरंदास (सह-मुख्य कार्यकारी अधिकारी, नेटफ्लिक्स यूएसए), बेला बजरिया (मुख्य सामग्री अधिकारी, नेटफ्लिक्स यूएसए) और नेटफ्लिक्स की भारतीय वितरक मोनिका शेरगिल को भी पक्षकार बनाया गया है। अभियुक्तों के विरुद्ध नोटिस जारी करने का आदेश सोमवार को जेएमएफसी न्यायालय ने परिवादी के बयान दर्ज करने के बाद प्राथमिक दृष्टया आपराधिक मानहानि का मामला पाते हुए पांचों प्रस्तावित अभियुक्तों के विरुद्ध नोटिस जारी करने का आदेश पारित किया। न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी पंकज सविता ने यह आदेश परिवादी पं. वैभव पाठक के शपथ-पत्र और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर दिया। परिवादी पं. वैभव पाठक (मध्य प्रदेश प्रगतिशील ब्राह्मण महासभा के सक्रिय सदस्य) ने अदालत को बताया कि फिल्म के शीर्षक में प्रयुक्त शब्दों से ब्राह्मण समुदाय की सामाजिक गरिमा को ठेस पहुंची है। उनका कहना है कि ‘पंडित’ शब्द भारतीय संस्कृति में विद्या, वैदुष्य और धार्मिक पवित्रता का प्रतीक रहा है, ऐसे में इसे ‘घूसखोर’ जैसे शब्द के साथ जोड़ना पूरे समुदाय की छवि को धूमिल करने का प्रयास है। प्रचार-प्रसार से हुई सामाजिक क्षति परिवादी की ओर से अधिवक्ता असीम त्रिवेदी ने तर्क रखा कि भले ही सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद फिल्म का शीर्षक बदला जा रहा हो, लेकिन पहले किए गए व्यापक प्रचार-प्रसार से जो सामाजिक क्षति हुई है, वह अपरिवर्तनीय है। इसलिए संबंधित व्यक्तियों को विधि सम्मत जवाबदेह ठहराया जाना आवश्यक है। पंडित शब्द को नकारात्मक विशेषण के साथ जोड़ा पं. वैभव पाठक ने अदालत के समक्ष कहा कि यह मामला केवल एक फिल्म के शीर्षक का नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक अस्मिता का प्रश्न है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ‘पंडित’ उपाधि को जवाहरलाल नेहरू और अटल बिहारी वाजपेयी जैसी विभूतियों ने गौरवान्वित किया है, ऐसे शब्द को नकारात्मक विशेषण के साथ जोड़ना भारतीय परंपरा का अपमान है। अब इस मामले में नोटिस जारी होने के बाद सभी पक्षों को अदालत में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना होगा। प्रकरण की अगली सुनवाई की तिथि शीघ्र निर्धारित की जाएगी। परिवादी की दलील: भावनाएं आहत  परिवादी की ओर से अधिवक्ता असीम त्रिवेदी ने अदालत में कहा कि भले ही शीर्षक बदलने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन फिल्म के पहले किए गए प्रचार‑प्रसार ने समाज के एक बड़े वर्ग को चोट पहुंचाई है. उनका कहना है कि इससे ब्राह्मण समुदाय की प्रतिष्ठा को नुकसान हुआ है, जो केवल नाम बदल देने से भरपाई नहीं हो सकता. "पंडित" शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति परिवाद में यह भी तर्क दिया गया कि “पंडित” शब्द भारतीय संस्कृति में विद्वता, ज्ञान और धार्मिक प्रतिष्ठा से जुड़ा है. इसे “घूसखोर” जैसे नकारात्मक शब्द के साथ जोड़ना न केवल एक काल्पनिक चरित्र का चित्रण है, बल्कि पूरे समुदाय की सामाजिक छवि को प्रभावित करता है. परिवादी ने यह भी कहा कि यह मामला सिर्फ एक शीर्षक का नहीं, बल्कि सामाजिक पहचान और सम्मान से जुड़ा प्रश्न है. राष्ट्रीय हस्तियों का उल्लेख भी आया सामने याचिका में कहा गया कि “पंडित” शब्द को देश की प्रमुख हस्तियों पंडित जवाहरलाल नेहरू और पंडित अटल बिहारी वाजपेयी ने सम्मान दिया है. ऐसे में इस शब्द को विवादित संदर्भ से जोड़ना भारतीय परंपरा और मूल्यों के खिलाफ है. अदालत जल्द ही इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख निर्धारित करेगी. नोटिस जारी होने के बाद अब फिल्म निर्माताओं और Netflix की ओर से जवाब दर्ज होने की प्रतीक्षा की जा रही है.  

हरियाणा सदन में एक लाख लोगों की पेंशन कटने को CM सैनी ने बताया विपक्ष का भ्रम

पंचकूला. हरियाणा विधानसभा के सत्र के दौरान पिछले डेढ़ साल में काटी गई बुढ़ापा पेंशन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। कांग्रेस विधायक शीशपाल केहरवाला द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में मंत्री कृष्ण बेदी ने पेंशन से जुड़ी जानकारी सदन को दी। पेंशन के आंकड़ों को लेकर सदन में भारी हंगामा हुआ, जिसके बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को खुद मोर्चा संभालना पड़ा। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पेंशन कटने की गलत अफवाह फैलाना पाप है। उन्होंने कांग्रेस शासन काल की याद दिलाते हुए कहा कि कांग्रेस के समय बुजुर्गों को 6-6 महीने तक पेंशन के लिए भटकना पड़ता था। लेकिन आज हमारी सरकार में बुजुर्गों को घर बैठे सम्मानपूर्वक पेंशन मिल रही है और मोबाइल पर सीधा मैसेज आता है। बुजुर्गों का सम्मान सर्वोपरि सीएम सैनी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का जिक्र करते हुए कहा कि बीजेपी सरकार बुजुर्गों को पिता समान मानती है। उन्होंने आयुष्मान योजना के तहत 70 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों के मुफ्त इलाज की सुविधा को ऐतिहासिक कदम बताया। विनेश फोगाट की प्रतिक्रिया विनेश फौगाट ने रामराय गांव में नेशनल ओर इंटरनेशनल प्लेयर्स की सुविधा के लिए स्विमिंग पूल नहीं होने का मुद्दा उठाया तो खेल मंत्री से हुई बहस। कांग्रेस विधायक विनेश ने कहा कि प्लेयर्स की समस्याओं को लेकर मंत्री जी को बार-बार कॉल करती हूं लेकिन यह फोन ही नहीं उठाते। खेल मंत्री ने कहा की पॉलिसी के अनुसार वहां स्विमिंग पुल बनाना व्याहारिक नहीं है।

पंजाब में सीमावर्ती किसानों को सरकारी जमीन पर मुआवजे का मिलेगा हक

चंडीगढ़/फाजिल्का. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने किसानों के लिए एक और ऐतिहासिक फैसला लिया है। पंजाब कैबिनेट ने सरकारी जमीनों पर खेती करने वाले किसानों को मुआवजा देने पर मुहर लगाई है। विधायक जगदीप कंबोज गोल्डी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि अब बॉर्डर पट्टी की कच्ची जमीनों वाले किसान भी खुशहाल होंगे। विधायक जगदीप कंबोज गोल्डी ने कहा कि कच्ची जमीनों वाले किसान पिछले कई वर्षों से इन जमीनों पर खेती कर अपना गुजारा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्र जिला फाजिल्का में जब भी बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा आती थी, तो अन्य किसानों को तो सरकार से मुआवजा मिल जाता था, लेकिन जमीनें ''कच्ची'' होने के कारण इन क्षेत्रों के किसानों को मुआवजा नहीं मिल पाता था। अब पंजाब सरकार ने पहल करते हुए इन किसानों को भी मुआवजे के दायरे में लाने का फैसला किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और पूरी कैबिनेट का आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने बॉर्डर पट्टी के किसानों के लिए यह सराहनीय निर्णय लिया है। किसानों को मुबारकबाद देते हुए विधायक ने कहा कि वर्तमान सरकार किसानों के हितों के लिए लगातार कार्यशील है। उन्होंने कहा कि किसान भाइयों को अब घबराने की जरूरत नहीं है, वे मेहनत और लगन से इन जमीनों पर खेती करें और अपनी आर्थिक स्थिति बेहतर बनाएं। उन्होंने आश्वस्त किया कि अगर भविष्य में कोई प्राकृतिक आपदा आती है, तो ये किसान सरकार द्वारा घोषित मुआवजे के दायरे में आएंगे और उन्हें उनका बनता हक दिया जाएगा।