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नशे में किया खतरनाक कमेंट, उमा भारती के परिवार को धमकी देने वाला युवक पकड़ा गया

टीकमगढ़ पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती की बहू और जिला पंचायत अध्यक्ष उमिता राहुल सिंह लोधी को इंटरनेट मीडिया पर हाइड्रोजन बम से उड़ाने की धमकी देने वाले आरोपित को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपित की पहचान अर्जुन चढ़ार निवासी खरगापुर के रूप में हुई है। एसडीओपी राहुल कटरे ने बताया कि 22 फरवरी को जीडब्ल्यू बृजेंद्र कुशवाहा नामक एक फेसबुक प्रोफाइल से जिपं अध्यक्ष उमिता सिंह की पोस्ट पर लिखा था हमारे पास हाइड्रोजन बम है, हम बनाना जानते हैं। नेताओं को हम खुद ही मारेंगे। इस कमेंट में जिला पंचायत अध्यक्ष और उनके पति, पूर्व मंत्री राहुल सिंह लोधी को जान से मारने की सीधी धमकी दी गई थी। साक्ष्य मिटाने के लिए तोड़ा मोबाइल पुलिस पूछताछ में आरोपित अर्जुन चढ़ार ने बताया कि घटना वाले दिन उसने अत्यधिक शराब का सेवन कर रखा था। नशे की हालत में वीडियो देखते समय अचानक जिपं अध्यक्ष की आइडी सामने आने पर उसने बोलकर यह कमेंट कर दिया था। मामला तूल पकड़ते ही घबरा गया और उसने साक्ष्य मिटाने के लिए अपना आठ साल पुराना मोबाइल तोड़कर फेंक दिया। सिम निकालकर दूसरे मोबाइल में भी डाली, लेकिन साइबर सेल ने आइएमइआइ नंबर और तकनीकी विश्लेषण के जरिए उसे खरगापुर से दबोच लिया।  

धान की अंतर राशि को लेकर कांग्रेस पर बरसे साव, राज्यसभा प्रत्याशी और असम चुनाव पर कसा तंज

रायपुर छत्तीसगढ़ में धान की अंतर राशि को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने जहां इसे को किसानों के साथ 'प्रति एकड़ 3000 रुपए का चूना' करार दिया, वहीं प्रदेश के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने पलटवार करते हुए कांग्रेस पर किसानों को ठगने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी ने अपने कार्यकाल में किसानों से किए वादे पूरे नहीं किए, उसे इस मुद्दे पर बोलने का नैतिक अधिकार नहीं है। डिप्टी सीएम साव ने कहा कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में किसानों को दो साल का बोनस देने का वादा किया था, लेकिन वह पूरा नहीं किया। इसके विपरीत राज्य सरकार ने कृषक उन्नति योजना के तहत धान खरीदी के बाद अंतर की पूरी राशि एकमुश्त किसानों के खातों में जारी की है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने जो कहा, वह करके दिखाया है। राज्यसभा प्रत्याशी चयन को लेकर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। छत्तीसगढ़ से भाजपा प्रत्याशी के नाम पर चल रही अटकलों के बीच अरुण साव ने कहा कि पार्टी में चयन की प्रक्रिया जारी है और तय समय पर नाम की घोषणा तथा नामांकन किया जाएगा। स्थानीय प्रत्याशी की मांग के सवाल पर उन्होंने कांग्रेस पर अन्याय करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा योग्य और सक्रिय कार्यकर्ता को अवसर देती है तथा अंतिम निर्णय पार्टी का पार्लियामेंट्री बोर्ड करता है। असम में चुनावी जिम्मेदारी मिलने पर भी उन्होंने अपनी भूमिका स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि पार्टी के निर्देशानुसार वे असम में संगठनात्मक कार्य कर रहे हैं और उन्हें लखीमपुर क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहां स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर चुनावी रणनीति पर काम किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि असम में भाजपा ऐतिहासिक प्रदर्शन करेगी।

बुधवार को थमेगा कामकाज: पंजाब सरकार ने घोषित की छुट्टी, शैक्षणिक संस्थान रहेंगे बंद

चंडीगढ़ पंजाब में कल यानी 4 मार्च को सरकारी अवकाश घोषित किया गया है। यह घोषणा होली के त्योहार के अवसर पर की गई है। होली, जो रंगों, खुशियों और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक मानी जाती है, पूरे भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है। यह त्योहार न केवल सर्दियों के अंत और बसंत ऋतु के आगमन का स्वागत करता है, बल्कि आपसी मतभेद भुलाकर एक-दूसरे को रंग लगाकर गले मिलने और भाईचारे को बढ़ावा देने का संदेश भी देता है। इस पावन और रंगों के पर्व के मद्देनज़र 4 मार्च (बुधवार) को पूरे राज्य में सरकारी अवकाश रहेगा। इस दिन पंजाब सरकार के सभी कार्यालय, बोर्ड, निगम और शैक्षणिक संस्थान (सरकारी व निजी स्कूल-कॉलेज) पूर्णतः बंद रहेंगे। यह अवकाश नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत घोषित किया गया है, जिसके चलते बैंकों में भी इस दिन कामकाज नहीं होगा। धार्मिक कैलेंडर के अनुसार फाल्गुन माह की पूर्णिमा 2 मार्च से शुरू होकर 3 मार्च तक रहेगी। इस वर्ष होलिका दहन 3 मार्च की शाम को किया जाएगा, जबकि रंगों वाली होली 4 मार्च को मनाई जाएगी।  

बिहार मौसम अपडेट: होली के बाद गर्मी का असर, जानिए आज किस जिले में ठंड का अहसास

पटना मार्च की शुरुआत हो चुकी है लेकिन अब भी बिहार के कई जिलों में लोग कंबल ओढ़ रहे हैं। न्यूनतम तापमान भी 12 से 15 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। बिहार के मधेपुरा, सहररसा, मधुबनी, समस्तीपुर, सीवान, वैशाली, शेखपुरा, गया, बक्सर, भागलुपर और पूर्णिया का तापमान 15 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। होली तक ऐसा ही मौसम रहेगा। सुबह और रात गुलाबी ठंड का एहसास होगा। हालांकि, पटना समेत कुछ जिलों में गर्मी का भी एहसास हो रहा है। कई जिलों का अधिकतम तापमान 30 डिग्री से अधिक रिकॉर्ड किया जा रहा है। होली के बाद पटना में गर्मी और बढ़ेगी। अधिकतम तापमन 33 डिग्री तक जाने के आसार हैं। मार्च से मई तक कैसा रहेगा मौसम? इधर, मौसम विज्ञान केंद्र ने स्पष्ट कह दिया है कि मार्च से लेकर मई तक इस बार अधिक गर्मी लगेगी। मौसम विज्ञान केंद्र के प्रमुख आशीष कुमार ने कहा कि मार्च से मई तक 2026 की बिहार के अधिकांश भागों में अधिकतम तापमान और न्यूतनत सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। दिन और रात दोनों समय तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। इससे गर्मी का प्रभाव अधिक महसूस होगा। अप्रैल और मई माह में ही बिहार के कई जिलों में हीटवेव की घटनाएं हो सकती है। शहरी क्षेत्रों में हीट आईलैंड प्रभाव के कारण तापमान अधिक हो सकता है। मौसम विज्ञान केंद्र के प्रमुख आशीष कुमार ने कहा कि राज्य सरकार से अपील है कि वह हीट एक्शन प्लान लागू करें। आम लोग दोपहर के समय अनावश्यक बाहर निकलने से बचें।    पिछले 24 घंटे में कहां का तापमान कितना रहा? मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, बिहार में पिछले 24 घंटों के दौरान मौसम पूरी तरह शुष्क बना रहा और कहीं भी वर्षा दर्ज नहीं की गई। राज्य में अधिकतम तापमान 28.9 डिग्री सेल्सियस से 33.6 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। अधिकांश स्थानों पर अधिकतम तापमान में कोई विशेष परिवर्तन नहीं देखा गया। वहीं न्यूनतम तापमान 12.7 डिग्री सेल्सियस से 20.8 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। तीन मार्च को बिहार में न्यूनतम तापमान सबसे कम 12.7 डिग्री सेल्सियस मधेपुरा और सहरसा में दर्ज किया गया। वहीं किशनगंज में 17.4 डिग्री सेल्सियस, अरवल में 17.5 डिग्री सेल्सियस, मोतिहारी में 17.5 डिग्री सेल्सियस, मुजफ्फरपुर में 17.2 डिग्री सेल्सियस, औरंगाबाद में 14.2 डिग्री सेल्सियस, मधुबनी में 14.2 डिग्री सेल्सियस, सुपौल में 16.6 डिग्री सेल्सियस, वाल्मीकिनगर में 16 डिग्री सेल्सियस, ज़िरादेई में 13.5 डिग्री सेल्सियस, समस्तीपुर में 13.8 डिग्री सेल्सियस, वैशाली में 15 डिग्री सेल्सियस, पटना में 18.2 डिग्री सेल्सियस, जहानाबाद में 16.8 डिग्री सेल्सियस, नालंदा (राजगीर) में 17.9 डिग्री सेल्सियस, शेखपुरा में 15 डिग्री सेल्सियस, गया में 15 डिग्री सेल्सियस, बक्सर में 15 डिग्री सेल्सियस, मुंगेर में 15.6 डिग्री सेल्सियस, भागलपुर में 14.7 डिग्री सेल्सियस, सबौर में 12.8 डिग्री सेल्सियस, पूर्णिया में 15.3 डिग्री सेल्सियस, कटिहार में 17.6 डिग्री सेल्सियस, फारबिसगंज में 18.2 डिग्री सेल्सियस तथा छपरा में 20.8 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया। अगले तीन दिनों तक कैसा रहेगा मौसम? मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक अगले सात दिनों तक प्रदेश में मौसम शुष्क बने रहने की संभावना है। अधिकतम तापमान में अगले दो से तीन दिनों तक विशेष बदलाव नहीं होगा, लेकिन इसके बाद तीन दिनों के दौरान दो से चार डिग्री सेल्सियस तक क्रमिक वृद्धि होने की संभावना है। इसी तरह न्यूनतम तापमान में भी अगले दो से तीन दिनों तक स्थिरता रहेगी, जबकि उसके बाद दो से चार  डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी का अनुमान है। ऐसे में आने वाले दिनों में दिन और रात दोनों के तापमान में बढ़ोतरी से गर्मी का असर धीरे-धीरे बढ़ सकता है। पटना में सात मार्च तक कैसा रहेगा मौसम? मौसम विज्ञान केंद्र, पटना के पूर्वानुमान के अनुसार, तीन से सात मार्च तक राजधानी पटना में मौसम साफ रहने की संभावना है। इस दौरान अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस से बढ़कर 33 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। 3 मार्च को अधिकतम 31 डिग्री और न्यूनतम 18 डिग्री रहने का अनुमान है, वहीं 4 मार्च को अधिकतम 32 डिग्री और न्यूनतम 18 डिग्री रहेगा। 5, 6 और 7 मार्च को अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने तथा न्यूनतम तापमान क्रमशः 19, 19 और 20 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। इस अवधि में सूर्योदय लगभग 6:11 बजे से 6:07 बजे के बीच और सूर्यास्त 5:52 बजे से 5:55 बजे के बीच होगा। कुल मिलाकर पटना में अगले पांच दिनों तक धूप खिली रहेगी और दिन में गर्मी का अहसास बढ़ेगा।

पुनर्वास केंद्र पहुंचे अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ, सुविधाओं और योजनाओं की समीक्षा

रायपुर अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ ने पुनर्वास केंद्र का किया निरीक्षण अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ ने आज मंगलवार को कोंडागांव जिले के प्रवास के दौरान देव खरगांव स्थित पुनर्वास केंद्र का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पुनर्वासित व्यक्तियों से संवाद कर उनकी दैनिक गतिविधियों एवं व्यवस्थाओं की जानकारी ली। साथ ही केंद्र में संचालित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों का अवलोकन किया। उन्होंने पुनर्वास केंद्र के व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए प्रशिक्षण के साथ-साथ उनकी शिक्षा पर भी विशेष ध्यान देने को कहा ताकि पुनर्वासित व्यक्तियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके। साथ ही उन्होंने कृषि संबंधी स्वरोजगार पर विशेष ध्यान देने को कहा और सुबह शाम नियमित प्रार्थना कराने के भी निर्देश दिए। इस अवसर पर कलेक्टरमती नूपुर राशि पन्ना एवं पुलिस अधीक्षक पंकज चंद्रा ने पुनर्वासित व्यक्तियों को शासन की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रदान की जा रही सुविधाओं की जानकारी दी। इस मौके पर 01 पुनर्वासित व्यक्ति को नियुक्ति पत्र प्रदान किया और 01 व्यक्ति को स्मार्टफोन भी प्रदाय किया। साथ ही सभी को प्रेरणा लेने हेतु प्रेरित किया।  गारमेंट फैक्ट्री का भी किया अवलोकन अपर मुख्य सचिव पिंगुआ ने जिला मुख्यालय स्थित कोंडानार गारमेंट फैक्ट्री का निरीक्षण कर वहां संचालित आजीविका गतिविधियों का अवलोकन किया तथा प्रबंधन से विस्तृत जानकारी प्राप्त की।  इस अवसर पर एसडीएम अजय उरांव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रूपेश दांडे, डीएसपी सतीश भार्गव तथा केंद्र प्रभारी पुनेश्वर वर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

मिडिल ईस्ट तनाव का भारत पर असर: ईंधन महंगा, बंदरगाहों पर अटका चावल का बड़ा स्टॉक

ईरान   ईरान-इजरायल युद्ध के बाद पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बिगड़ गए हैं। Strait of Hormuz में बढ़ते खतरे और जहाजों की आवाजाही पर असर ने वैश्विक सप्लाई चेन को झटका दिया है। कच्चे तेल और नेचुरल गैस की आपूर्ति पर दबाव के साथ-साथ भारत का बासमती चावल निर्यात भी गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। समंदर और बंदरगाहों पर अटका लाखों टन चावल ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के मुताबिक, भारत से खाड़ी देशों को भेजा गया करीब 4 से 6 लाख टन बासमती चावल ट्रांजिट में, भारतीय बंदरगाहों पर या गंतव्य देशों के पोर्ट पर फंसा हुआ है। आम तौर पर खाड़ी देशों तक चावल पहुंचने में करीब 40 दिन लगते हैं लेकिन मौजूदा संकट ने इस पूरी प्रक्रिया को बाधित कर दिया है। 5-6 हजार करोड़ रुपए दांव पर फंसे हुए कंसाइनमेंट की अनुमानित वैल्यू 5,000 से 6,000 करोड़ रुपए बताई जा रही है। शिपिंग कंपनियों के बीमा कवर रद्द होने और जोखिम बढ़ने से कंटेनर फ्रेट दरें दोगुनी से ज्यादा हो गई हैं। ऐसे में निर्यातकों ने नई बुकिंग और पैकिंग का काम रोक दिया है और पहले से किए गए अनुबंधों को प्राथमिकता दी जा रही है। 70% निर्यात खाड़ी पर निर्भर भारत हर साल करीब 60 लाख टन से अधिक बासमती चावल निर्यात करता है, जिसमें से लगभग 70% हिस्सा खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब, ईरान और यूएई को जाता है। वित्त वर्ष 2024-25 में कुल 60.65 लाख टन बासमती का निर्यात हुआ, जिसकी कीमत 50,312 करोड़ रुपए (5.94 अरब डॉलर) रही।   फोर्स मेज्योर क्लॉज का सहारा? ट्रेड सूत्रों के अनुसार, यदि हालात लंबे समय तक बने रहते हैं तो कुछ निर्यातक 'फोर्स मेज्योर' क्लॉज का सहारा ले सकते हैं। यह प्रावधान युद्ध या प्राकृतिक आपदा जैसी अप्रत्याशित परिस्थितियों में अनुबंध की शर्तों से अस्थायी राहत देता है। क्या भारत में सस्ता होगा बासमती? रिकॉर्ड पैदावार के बीच मांग घटने से बासमती की कीमतों में पहले ही करीब 6% की गिरावट आ चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्यात बाधित रहा तो घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ने से दाम और नीचे आ सकते हैं। हालांकि ट्रेडर्स का कहना है कि मिडिल ईस्ट में बासमती एक जरूरी खाद्य वस्तु है और भारतीय चावल का वास्तविक विकल्प नहीं है। जैसे ही हालात सामान्य होंगे, खाड़ी देशों से मांग दोबारा तेजी पकड़ सकती है। फिलहाल निर्यातक 'वेट एंड वॉच' की रणनीति अपना रहे हैं।

पुल हादसे के बाद सख्त कार्रवाई: घोघरी नदी प्रोजेक्ट के तीन इंजीनियर निलंबित

गोपालगंज बिहार के गोपालगंज जिले में निर्माण कार्यों में लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार के खिलाफ राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सिधवलिया प्रखंड के सलेमपुर घाट पर घोघरी नदी पर बन रहे निर्माणाधीन पुल के एक हिस्से के ढह जाने की घटना को गंभीरता से लेते हुए ग्रामीण कार्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर तीन इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। क्या है पूरा मामला? सिधवलिया प्रखंड के सलेमपुर घाट पर घोघरी नदी के ऊपर बन रहे पुल का एक हिस्सा कुछ दिन पूर्व अचानक भरभराकर गिर गया। यह पुल क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए आवागमन का एक महत्वपूर्ण साधन बनने वाला था। निर्माण कार्य जारी रहने के दौरान ही संरचना के ढह जाने से गुणवत्ता और तकनीकी मानकों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। गनीमत रही कि हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों ने निर्माण एजेंसी और विभागीय अधिकारियों पर घटिया सामग्री के इस्तेमाल और निगरानी में लापरवाही का आरोप लगाया। जांच के बाद निलंबन पुल गिरने की सूचना मिलते ही ग्रामीण कार्य विभाग मुख्यालय ने मामले का संज्ञान लिया और उच्चस्तरीय जांच टीम गठित की। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में निर्माण के दौरान तकनीकी मानकों की अनदेखी और पर्यवेक्षण में गंभीर लापरवाही सामने आई। विभागीय आदेश के अनुसार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता और कनीय अभियंता को निलंबित कर दिया गया है। तीनों अधिकारियों पर नियमित मॉनिटरिंग नहीं करने और गुणवत्ता नियंत्रण में विफल रहने का आरोप है। ठेकेदार पर भी कार्रवाई की तैयारी विभागीय सूत्रों के मुताबिक, निर्माण कार्य में लगी संवेदक एजेंसी के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एजेंसी को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। साथ ही उसे ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया पर भी विचार किया जा रहा है। सलेमपुर और आसपास के दर्जनों गांवों के लोग इस पुल के निर्माण का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। पुल गिरने से जहां सरकारी धन की बर्बादी हुई है, वहीं क्षेत्र का संपर्क मार्ग भी बाधित हो गया है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की न्यायिक जांच और निर्धारित समयसीमा में मजबूत पुल निर्माण की मांग की है। सरकार का सख्त संदेश हाल के महीनों में बिहार के विभिन्न जिलों में पुलों के क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं सामने आने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। गोपालगंज की यह कार्रवाई अन्य जिलों के लिए भी एक सख्त संदेश मानी जा रही है कि भ्रष्टाचार और तकनीकी शिथिलता पर कठोर कार्रवाई तय है।

JDU में नई पीढ़ी की दस्तक: Nitish Kumar के बेटे निशांत को मिल सकता है बड़ा पद

नई दिल्ली जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के वरिष्ठ नेता एवं मंत्री श्रवण कुमार ने मंगलवार को कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का राजनीति में आना तय हो चुका है और पार्टी जल्द ही इसकी औपचारिक घोषणा करेगी। मंत्री ने कहा कि निशांत कुमार को पार्टी में "बड़ी जिम्मेदारी" दी जाएगी। उन्होंने कहा, "अब यह स्पष्ट है और अंतिम रूप दे दिया गया है कि निशांत कुमार सक्रिय राजनीति में शामिल होंगे। पार्टी एक-दो दिन में इसकी औपचारिक घोषणा करेगी। पार्टी कार्यकर्ता कई वर्षों से निशांत के राजनीति में आने की मांग कर रहे थे। अब होली से पहले इस फैसले के कारण कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह है।" एक-दो दिन में हो जाएगा फैसला मंत्री ने कहा, "उन्हें पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी। उन्हें क्या जिम्मेदारी दी जाएगी, इसका फैसला एक-दो दिन में हो जाएगा।" जब उनसे पूछा गया कि क्या निशांत को राज्यसभा भेजा जा सकता है तो कुमार ने कहा, "कुछ भी हो सकता है।" एक दशक से अधिक समय से राज्य मंत्रिमंडल में मंत्री रहे श्रवण कुमार मुख्यमंत्री के बेहद करीबी माने जाते हैं।  

वोकल फॉर लोकल का स्वप्न हो रहा है साकार

भोपाल मध्यप्रदेश की अनेक शिल्प कलाओं और कृषि, उद्यानिकी उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर "जीआई टैग" प्राप्त होना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वोकल फॉर लोकल के स्वप्न को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के उन्नत किसानों, खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों, शिल्पकारों और उन्हें प्रोत्साहित करने वाले विभागों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है। इन्हें मिल चुका है जीआई टैग बैतूल जिले की पारंपरिक शिल्प कला भरेवा कला को यह राष्ट्रीय पहचान मिली है। क्राफ्ट विलेज टिगरिया की भरेवा व कला को जीआई टैग मिला है। राष्ट्रपतिमती द्रौपदी मुर्मु ने हाल ही में (दिसंबर 2025 में) भरेवा शिल्प के कलाकार बलदेव वाघमारे को राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार से भी सम्मानित किया। बैतूल के अलावा छतरपुर जिले के खजुराहो के स्टोन क्राफ्ट, छतरपुर जिले के ही पारंपरिक काष्ठ शिल्प, ग्वालियर के पत्थर शिल्प, ग्वालियर की पेपर मैश कला जीआई टैग प्राप्त करने में सफल रही है। प्रदेश के अन्य जीआई टैग उत्पाद इस प्रकार हैं: चंदेरी साड़ी, महेश्वरी साड़ी और फैब्रिक, धार का बाग प्रिंट, इंदौर के लेदर के खिलौने, दतिया और टीकमगढ़ के बेल मेटल वेयर, उज्जैन का बटीक प्रिंट, जबलपुर का संगमरमर शिल्प, डिंडोरी की गोंड पेंटिंग, वारासिवनी की हैंडलूम साड़ी, ग्वालियर की ज्यामितीय पैटर्न की कालीन, पन्ना का हीरा, डिंडोरी का लोहा शिल्प, बालाघाट का चिन्नौर चावल, रीवा का सुंदरजा आम, सीहोर और विदिशा का शरबती गेहूं, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश का संयुक्त रूप से महोबा देशावरी पान, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा क्षेत्र का नागपुरी संतरा, झाबुआ जिले का कड़कनाथ मुर्गा, रतलाम का सेव, मुरैना की गजक, बुंदेलखंड क्षेत्र का कठिया गेहूं और जावरा का लहसुन शामिल है। मध्यप्रदेश के अन्य अनेक उत्पाद भी जीआई टैग प्राप्त होने की श्रृंखला में शीघ्र शामिल होंगे। इसके लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार के स्तर पर विभिन्न संस्थाओं द्वारा आवश्यक प्रयास किये जा रहे हैं। वर्ष 2024 और 2025 में विशेष उपलब्धि मध्यप्रदेश में वर्ष 2024 में बुंदेलखंड के कठिया गेहूं और रतलाम जिले के जावरा के लहसुन को जीआई टैग प्राप्त हुआ। इसी तरह वर्ष 2025 में प्रदेश के पांच उत्पाद को जीआई टैग मिला। इनमें छतरपुर जिले के खजुराहो का स्टोन क्राफ्ट, छतरपुर का ही पारंपरिक फर्नीचर, बैतूल का भरेवा मेटल क्राफ्ट, ग्वालियर का पत्थर शिल्प और ग्वालियर का ही पेपर मैश क्राफ्ट शामिल है। जीआई टैग प्रदान करने का कार्य उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में है। पंजीकरण की प्रक्रिया के बाद जीआई टैग की वैधता 10 वर्ष के लिए होती है, जिसे नवीनीकरण का लाभ भी मिलता है। जीआई टैग भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री अर्थात (ज्योग्राफिकल इंडिकेशंस रजिस्ट्री) केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा प्रदान किया जाता है। किसी उत्पाद की प्रामाणिकता की दृष्टि से जीआई टैग मिलना बहुत महत्व रखता है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2004 में दार्जिलिंग की चाय को भारत के प्रथम जीआई टैग प्राप्त होने का गौरव मिला था।  

हर क्षेत्र में उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता के किए जा रहे हैं समेकित प्रयास

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्वस्थ प्रदेश ही समृद्ध प्रदेश की आधारशिला है। स्वास्थ्य अधोसंरचना के व्यापक विस्तार, गुणवत्तापूर्ण उपचार सुविधाओं की उपलब्धता और चिकित्सा शिक्षा के सुदृढ़ीकरण के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में सुनियोजित प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का प्रत्येक नागरिक, चाहे वह शहरी क्षेत्र में निवास करता हो या दूरस्थ ग्रामीण अंचल में, उसे समयबद्ध और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध हों। स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कुल 23 हजार 747 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान है, जो राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। राज्य सरकार का संकल्प है कि स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित मानव संसाधन और सुदृढ़ अधोसंरचना के माध्यम से नए आयाम दिए जाएँ। प्रदेश को सशक्त, स्वस्थ और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की दिशा में तेजी से अग्रसर करने लिए सतत और सशक्त प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत 4,600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, रोग नियंत्रण और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थापना एवं संचालन के लिए 1,934 करोड़ रुपये तथा उप स्वास्थ्य केन्द्रों के लिए 782 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। सामुदायिक, उप एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के भवन निर्माण के लिए 580 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और बेहतर होगी। आशा कार्यकर्ताओं को अतिरिक्त प्रोत्साहन के लिये 550 करोड़ रुपये तथा मुख्यमंत्री श्रमिक सेवा प्रसूति सहायता योजना के लिए 750 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं, जिससे जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। अस्पतालों एवं चिकित्सा महाविद्यालयों का विस्तार प्रदेश में विगत दो वर्षों में पाँच नए शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय प्रारंभ किए गए हैं। एमबीबीएस सीटों की संख्या 2,275 से बढ़कर 2,850 तथा स्नातकोत्तर सीटें 1,262 से बढ़कर 1,468 हो गई हैं। इंदौर, रीवा एवं सतना के चिकित्सा महाविद्यालयों के उन्नयन के साथ ही भोपाल, इंदौर, रीवा, जबलपुर, सागर एवं ग्वालियर में उन्नत चिकित्सा सुविधाएँ विकसित की गई हैं। पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए धार, बैतूल, पन्ना और कटनी में एलओए जारी किया जा चुका है। अन्य 9 जिलों में प्रक्रिया प्रगतिरत है। चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध चिकित्सालयों के लिए 3,056 करोड़ रुपये और जिला एवं सिविल अस्पतालों के लिए 2,049 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अस्पतालों एवं औषधालयों के भवन निर्माण के लिये 527 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। नवीन चिकित्सा महाविद्यालयों के निर्माण (राज्य सहायित) के लिए 580 करोड़ रुपये तथा चिकित्सा महाविद्यालयों में उन्नयन कार्यों के लिए 650 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही नवीन नर्सिंग कॉलेजों के निर्माण के लिए 80 करोड़ रुपये एवं पी.जी. पाठ्यक्रमों के सुदृढ़ीकरण हेतु 79 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। आयुष्मान योजना क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश शीर्ष पर प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) के तहत प्रदेश में 4 करोड़ 46 लाख से अधिक आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं। 70 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों के लिए आयुष्मान वय वंदना योजना के अंतर्गत 15 लाख 48 हजार कार्ड बनाकर मध्यप्रदेश शीर्ष पर है। इस योजना से 1,118 शासकीय एवं 720 निजी चिकित्सालय संबद्ध हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में आयुष्मान भारत योजना के लिए 2,139 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त नॉन-एसईसीसी हितग्राहियों के लिए 863 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। विशेष कार्यक्रम एवं अधोसंरचना मिशन बहुउद्देशीय रोग नियंत्रण कार्यक्रम के लिए 408 करोड़ रुपये तथा प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के अंतर्गत 401 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना अंतर्गत सुपरस्पेशलिटी अस्पताल स्थापना के लिए 148 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। प्रदेश में डिजिटल स्वास्थ्य पहल को भी निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा है। वर्तमान में 55 जिला चिकित्सालय, 158 सिविल चिकित्सालय, 348 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, 1,442 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तथा 10,256 उप स्वास्थ्य केन्द्रों में कुल 48 हजार बिस्तर उपलब्ध हैं। मैहर, मऊगंज एवं पांढुर्णा में नए जिला चिकित्सालयों की स्थापना की कार्यवाही प्रचलन में है। उच्च जोखिम वाले दूरस्थ क्षेत्रों में निवासरत गर्भवती महिलाओं के लिए 228 बर्थ वेटिंग रूम स्थापित किए गए हैं, जो मातृ मृत्यु दर में कमी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। चिकित्सा शिक्षा एवं मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण प्रदेश में 3,850 चिकित्सक पदों एवं 1,256 नर्सिंग अधिकारी पदों पर भर्ती की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। परिचारिकाओं के प्रशिक्षण के लिए 67 करोड़ रुपये तथा एएनएम एवं हेल्थ विजिटर्स को परिवार कल्याण प्रशिक्षण हेतु 60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार भारतीय चिकित्सा पद्धति को भी बढ़ावा दे रही है। प्रदेश में 8 नवीन आयुर्वेद महाविद्यालय सह चिकित्सालय स्थापित किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर है। अधोसंरचना विस्तार, चिकित्सा शिक्षा सुदृढ़ीकरण, मानव संसाधन भर्ती और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य सुलभ, किफायती और सर्वसमावेशी स्वास्थ्य व्यवस्था स्थापित कर आत्मनिर्भर, सशक्त एवं स्वस्थ मध्यप्रदेश का निर्माण करना है।