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सेमीफाइनल से पहले Sam Curran का बयान वायरल, कहा- वानखेड़े में भारत को देंगे कड़ी टक्कर

मुंबई टी20 वर्ल्ड कप 2026 में मेजबान भारत के खिलाफ सेमीफाइनल से पहले इंग्लैंड के सैम करन ने कहा कि दोनों टीमें एक-दूसरे के खिलाफ इतना खेल चुकी हैं कि कुछ छिपाने के लिए नहीं है लेकिन उन्हें अपनी टीम से बेहतरीन प्रदर्शन की उम्मीद है। इंग्लैंड ने 2022 में भारत को सेमीफाइनल में दस विकेट से हराने के बाद खिताब जीता था जबकि भारत ने 2024 में इंग्लैंड को 78 रन से हराने के बाद खिताब जीता था। 'हम भारतीय खिलाड़ियों के साथ बहुत…' ऑलराउंडर करन ने मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में इंग्लैंड के अभ्यास सत्र से पहले कहा, ''इस मैदान पर हम काफी खेल चुके हैं लिहाजा कुछ छिपा नहीं है।'' उन्होंने कहा ,''हमारे पास अभ्यास के लिए दो दिन का समय है जिससे हालात के अनुकूल ढलने में मदद मिलेगी। इन स्टेडियमों में हम इतना खेल चुके हैं कि अलग-अलग हालात की आदत हो गई है। हम भारतीय खिलाड़ियों के साथ बहुत खेलते हैं तो कुछ भी छिपा नहीं है।'' इंग्लैंड का इस टूर्नामेंट में प्रदर्शन उतार चढ़ाव भरा रहा है जिसने नेपाल को बमुश्किल चार रन से हराया। सुपर आठ में पाकिस्तान को दो विकेट से मात दी। 'वानखेड़े स्टेडियम को खामोश करेगा इंग्लैंड' करन ने कहा, ''पिछला प्रदर्शन अब मायने नहीं रखता। यह विश्व कप सेमीफाइनल है और हम इसमें अपना परफेक्ट खेल दिखाएंगे।'' वानखेड़े स्टेडियम पर भारत के समर्थकों का शोर रहेगा लेकिन करन को पता है कि उन्हें खामोश कैसे करना है। उन्होंने कहा, ''यह शानदार स्टेडियम है। मुझे यकीन है कि गुरुवार की रात यह स्टेडियम खामोश रहेगा। भारतीय टीम शानदार है लेकिन हमारे अधिकांश खिलाड़ियों ने उसके खिलाफ और आईपीएल में खेला है। हम किसी चीज से भयभीत नहीं हैं और दोनों टीमें सेमीफाइनल की चुनौती को लेकर रोमांचित होंगी।'' 'वानखेड़े में खेलना आसान नहीं होता है' भारत ने रविवार को वेस्टइंडीज को पांच विकेट से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। संजू सैमसन ने कोलकाता में वेस्टइंडीज के खिलाफ 'संकटमोचक' की भूमिका निभाते हुए नाबाद 97 रन बनाए। वेस्टइंडीज ने 196 रन का लक्ष्य दिया था। खचाखच भरे ईडन गार्डंस पर भारत के फॉर्म में चल रहे सभी बल्लेबाज नाकाम रहे लेकिन संजू ने अपने करियर की सबसे यादगार पारी खेलकर वेस्टइंडीज के जीत के अश्वमेधी अभियान में नकेल कसी। मैच के बाद भारत के हेड कोच गौतम गंभीर ने इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल को लेकर कहा, ''इंग्लैंड एक विश्वस्तरीय टीम हैं। उनके पास कई बेहतरीन खिलाड़ी भी हैं और हम सभी जानते हैं कि वानखेड़े में खेलना आसान नहीं होता है। उम्मीद है कि हम अच्छा प्रदर्शन करेंगे।''

मोहन सरकार की आदिवासी वोटरों पर नजर, बड़वानी बैठक से निकाय चुनाव की रणनीति का इशारा

भोपाल  सोमवार को बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में हुई प्रदेश की पहली किसान कैबिनेट बैठक को मोहन सरकार का आदिवासी वोटर पर सीधा फोकस माना जा रहा है। 2027 के निकाय चुनाव और 2028 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा सरकार ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जनजातीय बहुल जिले बड़वानी के नागलवाड़ी में पहली किसान कैबिनेट आयोजित की। यह बैठक भीलट देव मंदिर परिसर में टेंट-तंबू में हुई और मंत्रिमंडल ने आदिवासी संस्कृति के प्रमुख पर्व भगोरिया में भी सहभागिता की। इसने बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम किसानों के साथ-साथ आदिवासी वोट बैंक को साधने की रणनीति का हिस्सा है। आदिवासी वर्ग पर परंपरागत रूप से कांग्रेस की मजबूत पकड़ मानी जाती रही है, लेकिन पिछले एक दशक में भाजपा ने इस वर्ग में अपना आधार बढ़ाया है।  47 विस सीटें एसटी के लिए आरक्षित प्रदेश की कुल 230 विधानसभा सीटों में से 47 सीटें अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए आरक्षित हैं। 2023 के चुनाव में भाजपा ने 24 और कांग्रेस ने 22 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि रतलाम जिले की सैलाना सीट पर भारत आदिवासी पार्टी को सफलता मिली। मालवा–निमाड़ अंचल में आदिवासी वर्ग की 22 सीटें हैं, जहां कांग्रेस ने 11, भाजपा ने 10 और एक भारत आदिवासी पार्टी ने जीत दर्ज की। यह क्षेत्र आदिवासी राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है।  22% आबादी, 84 सीटों पर असर प्रदेश की कुल आबादी में लगभग 22 प्रतिशत हिस्सा आदिवासी समुदाय का है। 47 सीटें आरक्षित होने के बावजूद यह वर्ग करीब 80 से अधिक सीटों पर जीत-हार तय करने की स्थिति में माना जाता है।  2023 में कांग्रेस ने दिखाई मजबूती  2018 के चुनाव में कांग्रेस ने 30 आदिवासी सीटें जीतकर भाजपा को बड़ा झटका दिया था, जबकि भाजपा 16 सीटों तक सीमित रह गई थी। मालवा–निमाड़ में भी भाजपा को 22 सीटों में से केवल 6 सीटें मिली थीं। वहीं, 2023 में भाजपा ने वापसी करते हुए 24 सीटें जीतींं। हालांकि, इस चुनाव में कांग्रेस 66 सीटों पर सिमट गई, इसके बावजूद  उसने आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित 22 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं, मालवा निमाड़ में दोनों ही पार्टियों ने आधी आधी सीटों पर जीत दर्ज की।  आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित प्रदेश की सीटों का गणित  – 2013 में आरक्षित 47 सीटों में से 31 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की। कांग्रेस को 15 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा, वहीं एक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी जीता। वहीं, मालवा निमाण की 22 सीटों में से 15 भाजपा, 6 कांग्रेस और 1 सीट निर्दलीय को मिली।  – 2018 में आरक्षित 47 सीटों में से 16 सीटों पर भाजपा सिमट गई। वहीं, कांग्रेस ने 30 सीटों पर जीत दर्ज की। एक सीट निर्दलीय के खाते में गई। वहीं, मालवा-निर्माण की 22 सीटों में से 6 भाजपा, 15 कांग्रेस और एक सीट निर्दलीय के खाते में गई।  – 2023 में आरक्षित 47 सीटों में से 24 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की। वहीं, कांग्रेस ने 22 सीटों पर जीत दर्ज की। एक सीट पर निर्दलीय के खाते में आई। वहीं, मालवा- निर्माण की 22 सीटों में से 11 पर कांग्रेस, 10 पर भाजपा और एक सीट पर भारत आदिवासी पार्टी ने जीत दर्ज की।  2027 में सेमीफाइनल और 2028 में फाइनल बता दें, अगले दो साल मोहन सरकार के लिए अग्नि परीक्षा के हैं, इसलिए अब उसे तमाम वो काम करके दिखाना होंगे, जिनका वादा भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में किया है। इनमें सबसे बड़ा वादा लाडली बहना योजना में शामिल बहनों को हर माह 3000 रुपये देने का है। अभी इसकी आधी राशि दी जा रही है। अगले तीन साल में इसे दोगुना करना है। यदि भाजपा यह करने में सफल रही तो 2027 के निकाय चुनाव और इसके बाद 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव में उसकी सत्ता में वापसी की राह कोई नहीं रोक सकेगा।  आदिवासी किसानों को आखिर क्या मिला नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि दो दशक से सत्ता में काबिज भाजपा सरकार ने 'कृषक कल्याण वर्ष 2026' के अंतर्गत भोपाल से करीब 350 किलोमीटर दूर आदिवासी बहुल बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में पहली "कृषि कैबिनेट" की बैठक आयोजित की। दावा किया गया था कि इससे किसानों को सीधा फायदा पहुंचेगा और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए नई योजनाए लाई जाएंगी, ताकि आय दोगुनी हो सके। लेकिन बड़वानी और निमाड़ क्षेत्र के किसानों को आखिर क्या मिला?   

मालवा-निमाड़ बना सियासी केंद्र, आदिवासियों के बीच आधार मजबूत करने में जुटी भाजपा

भोपाल आदिवासी बहुल बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में कैबिनेट की बैठक कर भाजपा ने यह संदेश दे दिया है कि वह आदिवासियों में पार्टी के आधार को और मजबूत करना चाहती है। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने मालवा- निमाड़ से इसकी शुरुआत कर यह भी बता दिया है कि इसके केंद्र में मालवा- निमाड़ अंचल रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कैबिनेट को मंत्रालय के बंद कमरों से निकालकर सीधे आदिवासी अंचल और खेतों के बीच ले जाकर यह स्पष्ट कर दिया है कि उसकी प्राथमिकता ग्रामीण और किसान मतदाता हैं। बैठक के अलावा आदिवासियों की आस्था के केंद्र भीलट देव मंदिर में कैबिनेट के सदस्यों द्वारा माथा टेकना इस समुदाय को भावनात्मक रूप से पार्टी से जोड़ने का प्रयास भी रहा। बता दें, आदिवासी मतदाताओं के झुकाव से ही मध्य प्रदेश में सरकार बनती है। इन दिनों नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी आदिवासियों को साधने के लिए निरंतर प्रवास कर रहे हैं। मालवा-निमाड़ अंचल में कांग्रेस के 12, भाजपा के आठ और एक सीट पर भारतीय आदिवासी पार्टी (बीएपी) का विधायक है। इस संख्या को देखते हुए भी भाजपा को यहां विशेष प्रयास करने की आवश्यकता है। मिशन-2028 की तैयारी  भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनाव यानी मिशन 2028 की तैयारी नागलवाड़ी में कैबिनेट कर आरंभ कर दी है। उसका पहला लक्ष्य आदिवासी वर्ग का भरोसा जीतना है। दरअसल, वर्ष 2013 तक भाजपा के पास प्रदेश की कुल 47 एसटी आरक्षित सीटों में से दो- तिहाई सीटें हुआ करती थी लेकिन वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का जनाधार खिसक गया था। खासतौर से आदिवासी वर्ग ने भाजपा का साथ छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया था। इस कारण प्रदेश में कमल नाथ सरकार बन गई थी। वर्ष 2018 में राज्य की 47 एसटी आरक्षित सीटों में से भाजपा केवल 16 सीटें जीत पाई थी, जबकि कांग्रेस ने 30 सीटों पर कब्जा किया था। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव की तुलना में यह भाजपा के लिए 15 सीटों का बड़ा नुकसान था। हालांकि भाजपा को कुल वोट शेयर (41.6%) कांग्रेस (41.5%) से थोड़ा अधिक मिला था, लेकिन आदिवासी अंचल में सीटों के नुकसान ने उसे बहुमत से दूर कर दिया। वर्ष 2018 के झटके के बाद भाजपा ने अपनी रणनीति बदली, जिसके परिणाम 2023 के चुनावों में दिखे। पार्टी ने एसटी सीटों पर अपनी संख्या 16 से बढ़ाकर 24 कर ली। यही कारण है कि नागलवाड़ी जैसी बैठकें केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि गहरी सुधारात्मक रणनीति का हिस्सा हैं। 'प्रयोगधर्मी' नेता की पहचान बना रहे डॉ. मोहन यादव नागलवाड़ी में आयोजित बैठक को 'कृषि कैबिनेट' नाम भी दिया गया। इससे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की राजनीतिक छवि में सुधार और मजबूती आने की पूरी संभावना है। इसके पीछे कई रणनीतिक कारण हैं। कैबिनेट को सुदूर गांव तक ले जाना डॉ. मोहन यादव को एक इनोवेटिव और 'आउट ऑफ द बॉक्स' सोचने वाले मुख्यमंत्री के रूप में स्थापित करता है। यह छवि उन्हें पिछली सरकारों के पारंपरिक ढर्रे से अलग करती है। मुख्यमंत्री का आदिवासी अंचल में जाकर उन्हीं के बीच बैठना और भीलट देव जैसे स्थानीय लोक-देवताओं को सम्मान देना, उन्हें आदिवासियों के बीच 'अपना व्यक्ति' के रूप में प्रस्तुत करता है। यह छवि 2018 के 'आदिवासी विरोधी यानी एंटी-ट्राइबल' नैरेटिव को काटने में मददगार होगी। एक ही बैठक में 27,746 करोड़ रुपये के भारी-भरकम प्रस्तावों को मंजूरी देना उन्हें एक अच्छा प्रशासक के रूप में प्रस्तुत करता है। इससे यह संदेश जाता है कि वह केवल घोषणाएं नहीं करते, बल्कि बजट का प्रविधान भी साथ रखते हैं। भाजपा की मौजूदा सक्रियता बताती है कि वह 21 प्रतिशत आदिवासी आबादी के महत्व को समझ चुकी है और इसे लेकर वर्ष 2028 में किसी भी प्रकार की जोखिम नहीं लेना चाहती।  

वाणिज्य एवं उद्योग और श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने प्रदेशवासियों को दी होली पर्व की बधाई

रायपुर वाणिज्य एवं उद्योग और श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने रंगों के पर्व होली पर प्रदेश वासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी है। उन्होंने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि आप सभी के जीवन में होली का यह पर्व सुख, समृद्धि और खुशहाली लेकर आए। केबिनेट मंत्री देवांगन ने कहा कि संवेदनशील मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर राज्य सरकार द्वारा अपने वायदे के अनुरूप होली त्योहार के पहले प्रदेश के 25.28 लाख किसानों को कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत 10,324 करोड़ रूपए की आदान सहायता राशि उनके बैंक के खातों में अंतरित की है। होली त्योहार में किसानों का उत्साह दोगुना हो गया है।     केबिनेट मंत्री देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा श्रमिकों एवं उनके परिजनों की बेहतरी के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रह हैं। इन योजनाओं के माध्यम से श्रमिक की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए डीबीटी के जरिए छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निमार्ण कर्मकार कल्याण मण्डल द्वारा हितग्राहियों को अब तक लगभग 800 करोड़ रूपए की आर्थिक मदद दी जा चुकी है।          केबिनेट मंत्री देवांगन ने आगे कहा कि रंगों का यह त्योहार हमारे जीवन में उमंग, उत्साह और सौहार्द्र का संचार करता है। उन्होंने कहा कि होली केवल रंगों का त्यौहार नही बल्कि सामाजिक समरसता भाईचारे और भारतीय परम्पराओं की जीवंत अभिव्यक्ति का पर्व है। आइए, हम सभी मिलकर प्रेम, भाईचारे और सद्भाव के रंगों से अपने समाज को और भी अधिक रंगीन बनाएं।

Holi 2026 Celebration: राहा के साथ रंगों में डूबे रणबीर कपूर, नेहा धूपिया ने सोहा अली खान संग मनाया त्योहार

मुंबई मुंबई में आज यानी 3 मार्च को मनाया जा रहा है। स्टार्स होली के रंग में पूरी तरह से रंगे नजर आ रहे हैं। रणबीर कपूर से लेकर सोहा अली खान, नेहा धूपिया ने अपने बच्चों संग होली मनाई। स्टार्स के होली सेलिब्रेशन के वीडियोज भी सामने आने शुरू हो गए हैं। इस वक्त पूरे देश में हर कोई होली के खुमार में है। ऐसे में भला बॉलीवुड स्टार्स कहां पीछे रहने वाले हैं। एक तरफ जहां कई शहरों में होली 4 मार्च को मनाई जाएगी। वहीं, मुंबई में आज यानी 3 मार्च को मनाया जा रहा है। स्टार्स होली के रंग में पूरी तरह से रंगे नजर आ रहे हैं। रणबीर कपूर से लेकर सोहा अली खान, नेहा धूपिया ने अपने बच्चों संग होली मनाई। स्टार्स के होली सेलिब्रेशन के वीडियोज भी सामने आने शुरू हो गए हैं, जिन्हें फैंस काफी पसंद कर रहे हैं। पापा संग राहा ने खेली होली रणबीर कपूर को अक्सर उनकी बेटी राहा संग क्वालिटी टाइम एंजॉय करते देखा जाता है। ऐसे में होली पर रणबीर राहा संग रंग कैसे न खेलते। रणबीर कपूर का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह दोस्तों के साथ सड़क पर रंग खेलते दिखे। इसके बाद वीडियो में रणबीर अपने घर के अंदर जाते नजर आए। रणबीर ने बेटी राहा के साथ होली खेली। यही नहीं, पापाराजी को देख रणबीर ने उनकी ओर हाथ हिलाया और फिर उनसे हाथ मिलाने के लिए भी रुके। इस वीडियो में रणबीर की गोद में राहा भी नजर आ रही है। नेहा धूपिया ने सोहा संग मनाई होली होली सेलिब्रेशन का एक और वीडियो सामने आया है। सोहा अली खान और नेहा धूपिया ने एक साथ होली मनाई। इस दौरान वीडियो में आप देख सकते हैं कि सोहा अपनी बेटी इनाया को रंग लगाती हैं। इसके बाद नेहा भी बच्चों संग रंग देखती दिखाई देती हैं। साथ में अंगद बेदी और कुणाल खेमू भी थे। वहीं, कई टीवी स्टार्स भी होली के रंगें नजर आए। इनके कई वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं। राम बन पर्दे पर छाएंगे रणबीर कपूर रणबीर कपूर के वर्कफ्रंट की बात करें तो वह इन दिनों अपनी मोस्ट अवेटेड फिल्म 'रामायण पार्ट 1' में बिजी हैं। इस फिल्म का निर्देशन नितेश तिवारी ने किया है। इस पौराणिक महाकाव्य बेस्ड फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम का किरदार निभाएंगे। ये फिल्म दिवाली 2026 को रिलीज होने वाली है। मूवी में साई पल्लवी माता सीता के रूप में नजर आएंगी, वहीं यश रावण का किरदार निभाने जा रहे हैं। रामायण में सनी देओल भगवान हनुमान के रूप में नजर आएंगे और खबर है कि एआर रहमान ने इसमें संगीत दिया है। इन फिल्मों के साथ भी मचाएंगे धमाल रामायण के अलावा, रणबीर की संजय लीला भंसाली के डायरेक्शन में बन रही पीरियड रोमांटिक ड्रामा फिल्म 'लव एंड वॉर' में नजर आएंगे। इस मूवी में उनके साथ आलिया भट्ट और विक्की कौशल भी हैं। रणबीर कपूर की अपकमिंग फिल्मों में 'एनिमल' की सीक्वल 'एनिमल पार्क' और 'ब्रह्मास्त्र 2' जैसी फिल्में भी शामिल हैं।  

भोपाल प्रशासन अलर्ट: होली पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, 108 एंबुलेंस रहेगी ऑन स्टैंडबाय

भोपाल होली और रंगपंचमी के उल्लास के बीच किसी भी अप्रिय स्थिति या चिकित्सीय आपातकाल से निपटने के लिए राजधानी का स्वास्थ्य अमला पूरी तरह अलर्ट हो गया है। शहर के प्रमुख अस्पतालों के साथ-साथ हर थाना क्षेत्र और भीड़भाड़ वाले इलाकों में 108 एंबुलेंस की विशेष तैनाती की गई है। सीएमएचओ ने सभी अस्पतालों को आकस्मिक चिकित्सा व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रखने के निर्देश जारी किए हैं। थाना क्षेत्रों और प्रमुख केंद्रों पर एंबुलेंस की तैनाती 108 एंबुलेंस सेवा के सीनियर मैनेजर तरुण सिंह परिहार ने बताया कि एम्स, हमीदिया, जेपी अस्पताल, काटजू अस्पताल और बैरागढ़ जैसे प्रमुख केंद्रों के साथ-साथ शहर के सभी 22 थाना क्षेत्रों में एंबुलेंस तैनात रहेगी। ये वाहन जीवन रक्षक उपकरणों और प्रशिक्षित स्टाफ (ईएमटी) से सुसज्जित होंगे, ताकि सड़क दुर्घटना, आगजनी या विवाद की स्थिति में तुरंत सहायता मिल सके। 104 हेल्पलाइन से घर बैठे लें डॉक्टरी सलाह त्योहार के दौरान यदि किसी को सामान्य स्वास्थ्य समस्या होती है, तो उसे अस्पताल जाने की जरूरत नहीं है। प्रदेश सरकार की 104 हेल्थ हेल्पलाइन सुबह आठ से रात आठ बजे तक सक्रिय रहेगी। इसके माध्यम से अनुभवी डॉक्टरों से मुफ्त परामर्श, मानसिक तनाव की स्थिति में काउंसलिंग और नजदीकी ब्लड बैंक या अस्पताल की जानकारी ली जा सकती है। सेहतमंद होली के लिए विशेषज्ञों की सलाह सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने बताया कि शहरवासी केमिकल युक्त रंगों से बचें। रंगों में लेड ऑक्साइड और कॉपर सल्फेट जैसे तत्व होते हैं, जो आंखों और त्वचा को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। रंग खेलने से पहले शरीर पर तेल या मॉइस्चराइजर लगाएं और पूरी बांह के कपड़े पहनें। शराब या अन्य नशीले पदार्थों के सेवन से दूर रहें। आंखों में धुंधलापन, खुजली या सांस लेने में दिक्कत होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। यहाँ उपलब्ध रहेगी तुरंत सहायता प्रमुख केंद्र – एम्स भोपाल, जेपी अस्पताल, हमीदिया, आनंद नगर, कोलार, बैरागढ़। थाना क्षेत्र – एमपी नगर, हबीबगंज, टीटी नगर, अशोका गार्डन, निशातपुरा सहित जिले के सभी ग्रामीण व शहरी थाना क्षेत्र। आपातकालीन नंबर – 108 (एंबुलेंस), 104 (स्वास्थ्य परामर्श)।

प्रभास–प्रशांत नील की जोड़ी फिर मचाएगी इतिहास, ‘सालार 2’ की शूटिंग पर आया सबसे बड़ा अपडेट

हैदराबाद, होम्बले फिल्म्स के निर्माता विजय किरागंदूर ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि कर दी है कि प्रभास अभिनीत ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘सालार’ के दूसरे भाग की शूटिंग जल्द ही शुरू होने वाली है। एक हालिया इंटरव्यू में किरागंदूर ने बताया कि ‘सालार 2’ एक बेहद विशाल और भव्य परियोजना होने जा रही है, जिसके लिए टीम पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने खुलासा किया कि पहले भाग ‘सीजफायर’ की वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस और ओटीटी पर मिली अपार सफलता के बाद प्रशंसकों में सीक्वल को लेकर जबरदस्त उत्साह है। मेकर्स को लगातार फैंस के संदेश मिल रहे थे, जिसे देखते हुए अब प्री-प्रोडक्शन का काम अंतिम चरण में है। निर्माता ने निर्देशक प्रशांत नील की तारीफ करते हुए कहा कि वे आज के दौर के सबसे बेहतरीन निर्देशकों में से एक हैं जो अपनी कला के प्रति बेहद ईमानदार हैं। किरागंदूर के अनुसार, प्रशांत नील खुद के सबसे बड़े आलोचक हैं और वे दूसरे भाग को पहले से कहीं अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। गौरतलब है कि ‘सालार 1’ में पारंपरिक लिप-सिंक गाने नहीं होने के बावजूद दर्शकों ने इसकी डार्क एक्शन और गहरी कहानी को खूब पसंद किया था। सीक्वल में खानसार की सत्ता की जंग और प्रभास-पृथ्वीराज सुकुमारन के बीच के टकराव को और भी बड़े स्तर पर दिखाया जाएगा। होम्बले फिल्म्स न केवल ‘सालार 2’ बल्कि भारतीय कहानियों को वैश्विक मंच पर ले जाने के व्यापक दृष्टिकोण पर भी काम कर रहा है। विजय किरागंदूर ने बताया कि उनका उद्देश्य कन्नड़ या किसी एक भाषाई सिनेमा तक सीमित नहीं है, बल्कि वे कांतारा और केजीएफ जैसी सांस्कृतिक रूप से समृद्ध कहानियों को लैटिन अमेरिका और स्पेन जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचाना चाहते हैं। ‘सालार 2’ इसी रणनीति का हिस्सा है जिसे एक ग्लोबल इंडियन मूवी के तौर पर पेश किया जाएगा। फिल्म की शूटिंग डेट्स और कास्टिंग को लेकर अन्य बड़े खुलासे आने वाले कुछ हफ्तों में किए जा सकते हैं।  

त्वरित कार्रवाई से बचीं दो घायलों की ज़िंदगियाँ, सड़क दुर्घटना में गंभीर घायलों को समय पर पहुँचाया अस्पताल

भोपाल  मऊगंज जिले के थाना मऊगंज क्षेत्र में डायल-112 जवानों की त्वरित, सजग एवं संवेदनशील कार्यवाही से सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए एक पुरुष एवं एक महिला को समय पर उपचार उपलब्ध कराया गया। संकट की इस घड़ी में डायल-112 टीम ने जिस तत्परता और जिम्मेदारी का परिचय दिया, वह सेवा एवं कर्तव्यनिष्ठा की सराहनीय मिसाल है। 02 मार्च को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम, डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना मऊगंज क्षेत्र अंतर्गत मऊगंज बाईपास के पास एक मोटर साइकिल को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी है, जिससे मोटर साइकिल सवार पुरुष एवं एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गए हैं और तत्काल पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए थाना मऊगंज में तैनात डायल-112 एफआरव्ही वाहन को तुरंत मौके के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्टाफ आरक्षक श्री रजनीश यादव एवं पायलट श्री प्रवेश चतुर्वेदी शीघ्र घटनास्थल पर पहुँचे और स्थिति का त्वरित आकलन करते हुए राहत एवं बचाव कार्य प्रारंभ किया। दुर्घटना में मोटर साइकिल सवार पुरुष एवं साथ में बैठी महिला घायल अवस्था में पाए गए। डायल-112 जवानों ने बिना समय गंवाए दोनों घायलों को एफआरव्ही वाहन की सहायता से सुरक्षित रूप से सिविल चिकित्सालय मऊगंज पहुँचाया, जहाँ उनका तत्काल उपचार प्रारंभ कराया गया। डायल-112 की इस त्वरित, संवेदनशील एवं समर्पित कार्यवाही के कारण घायलों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध हो सकी, जिससे संभावित गंभीर परिणामों को टाला जा सका। डायल 112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना सिद्ध करती है कि मध्यप्रदेश पुलिस हर आपात स्थिति में आमजन की सुरक्षा और जीवन रक्षा के लिए सदैव तत्पर, सजग और समर्पित है।  

आस्था या चमत्कार? अंबिकापुर में अंगारों पर नंगे पांव चलकर मनाई जाती है होली

अंबिकापुर होली पर्व पर जहां एक ओर रंगों की मस्ती छाई रहती है, वहीं सरगुजा अंचल के ग्रामीण इलाकों में सदियों पुरानी परंपराएं आज भी जीवंत हैं। अंबिकापुर से लगे दरिमा थाना क्षेत्र के ग्राम करजी में होली की रात एक ऐसी अनोखी परंपरा निभाई जाती है, जो लोगों को आश्चर्य में डाल देती है। यहां होलिका दहन के तुरंत बाद ग्रामीण दहकते अंगारों पर नंगे पांव चलते हैं और हैरानी की बात यह कि उनके पैरों में फफोले तक नहीं पड़ते। ग्रामीण इसे देवी की कृपा और अटूट आस्था का परिणाम मानते हैं। वर्षों पुरानी परंपरा का निर्वहन और अटूट विश्वास वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को देखने के लिए आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग करजी पहुंचते हैं। इस वर्ष भी सोमवार की रात यहां वर्षों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन किया गया। विधिविधान से होलिका दहन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति रही। होलिका दहन के बाद अंगारों पर लोग चले। हर वर्ष होलिका दहन के बाद जब लकड़ियां जलकर अंगारों में बदल जाती हैं, तब अंगारों की परत बिछाई जाती है। इसके बाद गांव के पुरुष श्रद्धापूर्वक नंगे पांव उन पर चलते हैं। जनजातीय संस्कृति में निशानेबाजी और लोकगीतों का उल्लास ग्रामीणों का विश्वास है कि सच्ची श्रद्धा रखने वालों को कोई हानि नहीं होती। अंगारों पर चलने के बाद भी किसी के पैरों में जलन या छाले नहीं पड़ते। यह दृश्य देर रात तक लोगों की आस्था का केंद्र बना रहता है। सरगुजा अंचल की जनजातीय होली केवल अंगारों पर चलने तक सीमित नहीं है। कोड़ाकू जनजाति में होली की जली सेमर की ठूंठ पर लगभग 50 मीटर दूरी से पत्थर और तीर-धनुष से निशाना लगाने की परंपरा भी है। सफल प्रतिभागी को पुरस्कार स्वरूप महुआ के दो पेड़ दिए जाते हैं। फागुन मास में एक माह तक ‘होरी’ गीत गूंजते रहते हैं। झांझ, मंजीरा और मांदर की थाप पर पूरा गांव रंग और रस में डूबा रहता है।  

राज्यसभा रेस में नितिन नवीन, बंगाल पर फोकस बढ़ा; BJP ने जारी की 8 कैंडिडेट की लिस्ट

नई दिल्ली भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन राज्यसभा के सांसद बनेंगे। पार्टी ने उन्हें बिहार में होने वाले चुनाव में उतारा है, जहां उनका जीतना तय माना जा रहा है। इसके अलावा बिहार से शिवेश कुमार को भी राज्यसभा का टिकट दिया गया है। बंगाल से राहुल सिन्हा भी राज्यसभा जाएंगे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन राज्यसभा के सांसद बनेंगे। पार्टी ने उन्हें बिहार में होने वाले चुनाव में उतारा है, जहां उनका जीतना तय माना जा रहा है। इसके अलावा बिहार से शिवेश कुमार को भी राज्यसभा का टिकट दिया गया है। भाजपा ने पश्चिम बंगाल से अपने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा को उम्मीदवार बनाया है तो वहीं छत्तीसगढ़ से लक्ष्मी वर्मा राज्यसभा जाएंगी। इस तरह पार्टी ने कुल 9 उम्मीदवारों की लिस्ट एक साथ जारी की है। नितिन नवीन बिहार सरकार में मंत्री थे, जब उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था। अब उन्होंने विधायकी की बजाय राज्यसभा की राह चुनी है। असम की दो राज्यसभा सीटों के लिए सूबे के पथ निर्माण मंत्री जोगेन मोहन और विधायक तेराश गोवाला को उम्मीदवार बनाया गया है। ओडिशा से पार्टी ने मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल सामल को कैंडिडेट बनाया है तो वहीं सुजीत कुमार को फिर से मौका दिया गया है। हरियाणा से संजय भाटिया को राज्यसभा भेजा जाएगा, जो पहले लोकसभा के सांसद रहे हैं। वहीं शिवेश कुमार बिहार भाजपा के महामंत्री हैं। उन्हें भी मौका मिला है। पूरी लिस्ट को देखें तो भाजपा ने ज्यादातर ऐसे लोगों को मौका दिया है, जो संगठन में काम कर रहे हैं। इसके अलावा असम से दो नेताओं को राज्यसभा भेजा है। साफ है कि अब पार्टी उनकी सेवाएं राज्य की बजाय केंद्रीय राजनीति में भी लेना चाहती है। पश्चिम बंगाल में अप्रैल-मई में ही चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में राहुल सिन्हा को राज्यसभा भेजने का फैसला अहम माना जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि वह कायस्थ समाज से आते हैं, जिसकी बड़ी आबादी पश्चिम बंगाल में है। इस वर्ग का बड़ा हिस्सा अब तक टीएमसी को वोट डालता रहा है, लेकिन भाजपा उन्हें लुभाने की कोशिश में जुटी है। यहां तक कि जब नितिन नबीन अध्यक्ष बनाए गए तो उन्हें लेकर भी यही कहा गया था कि पार्टी ने बंगाल चुनाव को साधने के लिए यह फैसला लिया है। इसके अलावा राहुल सिन्हा पार्टी के पुराने नेता हैं और मुश्किल वक्त में राज्य में संगठन खड़ा करने के लिए भी मेहनत से काम किया है। बिहार में रोचक हुआ मुकाबला, NDA ने उतारा है पांचवां कैंडिडेट बता दें कि बिहार में एनडीए ने पांचवां कैंडिडेट राज्यसभा में खड़ा कर दिया है। उसके पास अपने दम पर 4 कैंडिडेट जिताने का बहुमत है, लेकिन पांचवां कैंडिडेट उपेंद्र कुशवाहा को उतारकर उसने मुकाबला रोचक कर दिया है। बता दें कि बिहार से जेडीयू ने नीतीश कुमार के बेटे निशांत को राजनीति में उतारने का फैसला लिया है। उन्हें राजनीति में लाने के लिए लंबे समय से कोशिशें होती रही हैं और अब जेडीयू की रणनीति सफल होती दिख रही है।