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उच्च रक्तचाप के इलाज में क्रांति: वैज्ञानिकों ने खोजा रोज़ाना दवा से छुटकारा दिलाने वाला तरीका

हाई ब्लड प्रेशर दुनियाभर में तेजी से बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, इसका खतरा समय के साथ बढ़ता ही जा रहा है। विश्व स्वास्थ संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों से पता चलता है कि 2024 में दुनियाभर में 30-79 साल की उम्र के 1.4 बिलियन (140 करोड़) वयस्कों को हाइपरटेंशन की समस्या थी। ये आंकड़ा इस आयु वाले कुल लोगों का करीब 33% है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बच्चों में भी हाइपरटेंशन की दिक्कत बढ़ती जा रही है, जो कम उम्र में ही उन्हें कई प्रकार की क्रॉनिक बीमारियों का शिकार बनाने वाली हो सकती है। हाइपरटेंशन के शिकार मरीजों को डॉक्टर नियमित रूप से दवा लेते रहने की सलाह देते हैं, ताकि उन्हें ब्लड प्रेशर बढ़ने के कारण होने वाली समस्याओं जैसे हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी और आंखों की दिक्कतों से बचाया जा सके। मरीजों को जीवनभर ये दवाएं लेनी पड़ सकती हैं। ऐसे लोगों के लिए बड़ी राहत वाली खबर है। वैज्ञानिकों की टीम ने ऐसा तरीका ढूंढ लिया है जिसकी मदद से बिना दवाओं के भी आप ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रख सकते है। शोधकर्ताओं ने बीपी की दवाओं का विकल्प तलाश लिया है। बिना दवाओं के कंट्रोल हो सकेगा ब्लड प्रेशर स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, दशकों से हर दिन बिना गैप किए एक गोली खाते रहने को हाई बीपी का सबसे प्रभावी इलाज माना जाता रहा है। मरीजों को बीपी की दवाओं पर पूरी तरह निर्भर हो जाना पड़ता है। हालांकि अब ऐसे लोगों के लिए राहत वाली खबर सामने आ रही है।       शोधकर्ताओं की टीम ने एक हालिया रिपोर्ट में बताया है कि जल्द ही रोजाना बिना दवा लिए भी आप ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रख पाएंगे।     इसके लिए विकल्प के तौर पर एक इंजेक्शन की काफी चर्चा है, जिसे गोलियों की जगह साल में सिर्फ दो बार लेने से आप बीपी को कंट्रोल में रख पाएंगे।       जिलेबेसिरन नाम के इस इंजेक्शन को विशेषज्ञ भविष्य के लिए काफी असरदार उपाय के तौर पर देख रहे हैं। हाइपरटेंशन और कई गंभीर समस्याओं का कम होगा खतरा द लैंसेट जर्नल में इस इंजेक्शन से बीपी को मरीजों को होने वाले फायदों के बारे में जानकारी दी गई है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस खोज से हाइपरटेंशन को मैनेज करने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है, खासकर ऐसे समय में जब दशकों से मौजूद दवाओं के बावजूद हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों की संख्या दुनियाभर में बढ़ती ही जा रही है।     माना जा रहा है कि जिलेबेसिरन इंजेक्शन लंबे समय तक हाइपरटेंशन को कंट्रोल में रखने में मददगार हो सकती है।     इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक के साथ किडनी-आंख की समस्याओं के खतरे को कम करने में भी मदद मिल सकती है।     हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को अगर बेहतर तरीके से कंट्रोल कर लिया जाए तो इसके कारण होने वाली बीमारियों का बोझ भी स्वास्थ्य सेवाओं से कम किया जा सकता है। कैसे काम करेगी ये इंजेक्शन? इस इंजेक्शन को लेकर साझा की गई जानकारियों के मुताबिक फिलहाल ये अपने लेट-स्टेज ग्लोबल ट्रायल में हैं।  साल में दो बार लगने वाले इस इंजेक्शन से हाई बीपी को आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है।       रोश और एल्नीलम फार्मास्यूटिकल्स द्वारा विकसित जिलेबेसिरन इंजेक्शन को साल में दो बार लगवाने की जरूरत होगी।     इसमें लिवर में एंजियोटेंसिनोजेन के उत्पादन को कम करने के लिए स्मॉल इंटरफेरिंग आरएनए (siRNA) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है।     एंजियोटेंसिनोजेन एक प्रोटीन है जो ब्लड प्रेशर रेगुलेशन के लिए जरूरी है।     एंजियोटेंसिनोजेन के उत्पादन को धीमा करके यह इंजेक्शन करीब छह महीने तक ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रख सकती है।     मिड-स्टेज अच्छे नतीजों के बाद अब ये फेज 3 ट्रायल्स में है। क्या कहते हैं विशेषज्ञ? विशेषज्ञ कहते हैं, शुरुआती ट्रायल्स से पता चलता है कि ये इंजेक्शन असरदार हो सकती है, लेकिन शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि हाइपरटेंशन जिंदगी भर चलने वाली बीमारी है और ये थेरेपी अभी क्लिनिकल जांच के तहत हैं। स्टैंडर्ड इलाज यानी रोजाना ली जाने वाली दवाओं की जगह लेने के लिए ये कितनी प्रभावी है, फिलहाल दावा नहीं किया जा सकता है।    

घर के मंदिर में 5 मूर्तियां और सफाई रखने से आती है सकारात्मक ऊर्जा

हिंदू धर्म में रोजाना पूजा-पाठ करने का विशेष महत्व माना गया है। लोग मंदिर जाकर मत्था टेकते हैं और अपने घर के मंदिर में भी श्रद्धा भाव से पूजा करते हैं। घर का ये पवित्र कोना पॉजिटिव एनर्जी और मानसिक शांति का केंद्र माना जाता है। ऐसे में इसे हमेशा साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखना चाहिए। मंदिर में टूटे-फूटे सामान या बेकार की चीजें नहीं रखनी चाहिए। पूजा स्थान से जुड़े कुछ नियम भी होते हैं जिनका पालन करना जरूरी होता है। अक्सर लोग एक बात को लेकर असमंजस में रहते हैं कि घर के मंदिर में कितनी मूर्तियां होनी चाहिए? आज जानेंगे इस बारे में विस्तार से। साथ ही जानेंगे कि आखिर कौन सी मूर्तियों को हमें घर के पूजा स्थल पर नहीं रखना चाहिए? मूर्तियों को लेकर सही तरीका क्या होना चाहिए। पूजा घर में रखें सिर्फ इतनी मूर्तियां वास्तुशास्त्र और हिंदू धर्म मान्यता के अनुसार घर के मंदिर में सादगी रहें तो ये अच्छा माना जाता है। वास्तु शास्त्र के नियम के हिसाब से घर के मंदिर में बहुत ज्यादा मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। अगर सीमित संख्या में यहां मूर्तियां रखी जाए तो मन एकाग्र रहता है और ध्यान लगाकर पूजा करना भी आसान हो जाता है। आम तौर पर यहां पर 2 से 5 मूर्तियां रखना ही सही होता है। इससे मंदिर में सकारात्मक ऊर्जा भी बनी रहती है और ऐसे में आसानी से साफ-सफाई भी की जा सकती है। पूजा घर में गलती से भी ना रखें ये मूर्तियां घर के मंदिर में शांत और सौम्य रूप वाली मूर्तियां रखना ही शुभ माना जाता है। मंदिर कुछ देवताओं के उग्र या क्रोधित रूप घर में रखने की सलाह नहीं दी जाती है। घर के मंदिर में नटराज, शनि देव या फिर राहु-केतु उग्र या फिर क्रोधित रूप वाली मूर्तियां, मां काली की मूर्ति या फिर काल भैरव के उग्र स्वरूप को मंदिर में नहीं रखना चाहिए। ऐसी मूर्तियां शक्ति और तप का प्रतीक मानी जाती है। ऐसे में इन्हें घर के मंदिर में रखना सही नहीं होता है। घर में आम तौर पर शांत और सौम्य रूप वाली मूर्तियां ही रखनी चाहिए। इन मूर्तियों की एनर्जी से घर का वातावरण शांति रहता है और घर में पॉजिटिविटी बनी रहती है। रखें इन बातों का ध्यान घर के मंदिर से जुड़े कुछ और भी नियम हैं, जिनका ध्यान जरूर रखना चाहिए। सबसे पहले तो ये सुनिश्चित कर लें कि मंदिर घर के ईशान कोण में ही हो। बता दें कि वास्तु शास्त्र में ईशान कोण उत्तर-पूर्व दिशा को कहा जाता है। इस दिशा को एनर्जी का सबसे बड़ा सोर्स माना जाता है। ऐसे में यहां पर मंदिर बनाना फलदायी होता है। साथ ही ऐसी भी मान्यता है कि इसी दिशा में सभी देवी-देवता का वास होता है। इसके अलावा ये जरूर देख लें कि मंदिर में मौजूद मूर्तियों के बीच कम से कम 1-2 इंच की दूरी जरूर हो। इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि मंदिर कभी भी बेडरूम या फिर वॉशरूम के आसपास ना हो। नियम के अनुसार घर का मंदिर सीढ़ियों के ठीक नीचे भी नहीं होना चाहिए क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है। डिस्क्लेमर- इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए वास्तुशास्त्र विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

क्या आप जानते हैं? भारत के इन पांच स्थानों पर हवाई जहाज़ उड़ाना है प्रतिबंधित

नई दिल्ली  भारत में हवाई यात्रा तेजी से आधुनिक और सुरक्षित होती जा रही है, लेकिन आज भी देश में कुछ ऐसे इलाके हैं जहां प्लेन उड़ाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इन क्षेत्रों को नो फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है, यानी इनके ऊपर से किसी भी विमान को गुजरने की अनुमति नहीं होती। यs प्रतिबंध किसी तकनीकी कमी की वजह से नहीं, बल्कि सुरक्षा और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए लगाया जाता है। दरअसल, कई स्थान राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े होते हैं, कुछ जगहों पर महत्वपूर्ण सरकारी गतिविधियां चलती हैं, तो कुछ धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत अहम मानी जाती हैं। ऐसे में सरकार एयरस्पेस को नियंत्रित कर विशेष नियम लागू करती है। चाहे विमान कितने भी आधुनिक और एडवांस क्यों न हों, इन खास इलाकों के ऊपर उड़ान भरना सख्त रूप से मना है। नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान भी है। आइए आपतो बताते हैं इन जगहों के बारे में।    राष्ट्रपति भवन     देश के राष्ट्रपति का आधिकारिक निवास होने के कारण यह इलाका देश के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में गिना जाता है।     यहां बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था तैनात रहती है।      राष्ट्रपति भवन के ऊपर का एयरस्पेस विशेष रूप से प्रतिबंधित श्रेणी में आता है।     यहां किसी भी तरह की अनधिकृत हवाई गतिविधिचाहे वह ड्रोन हो, हेलीकॉप्टर या निजी विमान सख्त रूप से प्रतिबंधित है।     ये व्यवस्था राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लागू की गई है। संसद भवन      भारतीय लोकतंत्र का केंद्र होने के कारण संसद भवन के ऊपर एयरस्पेस अत्यधिक नियंत्रित रहता है।     यहां कानून निर्माण की प्रक्रिया चलती है और देश के शीर्ष नेता मौजूद रहते हैं।      सुरक्षा कारणों से इस क्षेत्र को नो-ड्रोन जोन घोषित किया गया है।      बिना अनुमति उड़ान भरना गंभीर अपराध माना जाता है और इसके लिए कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है। प्रधानमंत्री आवास     प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास भी उच्च सुरक्षा घेरे में आता है।     यहां विशेष सुरक्षा समूह (SPG) और अन्य एजेंसियां निगरानी रखती हैं।     यहां का एयरस्पेस पूरी तरह नियंत्रित रहता है और किसी भी प्रकार की निजी या व्यावसायिक उड़ान की अनुमति नहीं है।     यहां ड्रोन उड़ाना भी सख्त रूप से प्रतिबंधित है। भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र      मुंबई स्थित यह परमाणु अनुसंधान केंद्र देश की सामरिक और वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण संस्था है।     यहां परमाणु अनुसंधान और संवेदनशील परियोजनाएं संचालित होती हैं।     राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से इसके ऊपर का हवाई क्षेत्र पूरी तरह प्रतिबंधित है।     किसी भी संदिग्ध हवाई गतिविधि को तुरंत सुरक्षा एजेंसियों द्वारा रोका जाता है। तिरुमला वेंकटेश्वर मंदिर      दक्षिण भारत के इस प्रसिद्ध मंदिर में प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।     भारी भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए मंदिर परिसर और उसके ऊपर के क्षेत्र को नो-फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है।      यहां हवाई जहाज, हेलीकॉप्टर और ड्रोन उड़ाने की अनुमति नहीं है।     यह प्रतिबंध श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए लागू किया गया है।  

बिगिनर्स के लिए स्किन केयर गाइड: महंगे प्रोडक्ट्स नहीं, सही आदतें हैं ज़रूरी

आज के समय में धूल, प्रदूषण और तनाव का सबसे पहला असर हमारी त्वचा पर दिखता है। अगर आप भी अपनी स्किन का ख्याल रखना शुरू करना चाहते हैं, तो सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि स्किन केयर कोई मुश्किल काम नहीं है। एक सही रूटीन का मतलब महंगे प्रोडक्ट्स नहीं, बल्कि अपनी त्वचा की जरूरतों को समझना है। एक बेसिक स्किन केयर रूटीन को दो हिस्सों में बांटा जाता है- मॉर्निंग (AM) और नाइट (PM)। आइए जानते हैं कि अगर आप बिगिनर हैं, तो आपकी मॉर्निंग और ईवनिंग स्किन केयर रूटीन कैसी होनी चाहिए। मॉर्निंग स्किन केयर रूटीन सुबह के रूटीन का मुख्य उद्देश्य आपकी त्वचा को हाइड्रेट करना और सूरज की हानिकारक किरणों से बचाना होता है।     क्लींजिंग- सुबह उठने के बाद एक माइल्ड फेस वॉश से चेहरा धोएं। यह रात भर में त्वचा पर जमा हुए तेल और पसीने को साफ कर देता है।     मॉइस्चराइजिंग- चेहरा धोने के बाद त्वचा को हाइड्रेटेड रखना जरूरी है। अपनी स्किन टाइप (ऑयली, ड्राई या कॉम्बिनेशन) के अनुसार एक हल्का मॉइस्चराइजर लगाएं। यह त्वचा में नमी को लॉक करता है।     सनस्क्रीन- सबसे जरूरी स्टेप है। चाहे आप घर के अंदर हों या बाहर, सनस्क्रीन लगाना कभी न भूलें। यह त्वचा को समय से पहले बूढ़ा होने, झुर्रियों और टैनिंग से बचाता है। कम से कम SPF 30 वाला सनस्क्रीन जरूर लगाएं। नाइट स्किन केयर रूटीन रात का समय त्वचा की मरम्मत  के लिए होता है। रात में आपकी स्किन सेल्स खुद को रिपेयर करती हैं, इसलिए यह रूटीन बहुत जरूरी है।     डबल क्लींजिंग या डीप क्लीन- अगर आपने दिन में मेकअप या सनस्क्रीन लगाया है, तो उसे अच्छी तरह साफ करना जरूरी है। पहले क्लींजिंग मिल्क या ऑयल से चेहरा साफ करें, फिर फेस वॉश का इस्तेमाल करें।     टोनिंग- अगर आपकी स्किन ऑयली है, तो आप टोनर का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह त्वचा के pH लेवल को संतुलित करता है और पोर्स को साफ रखता है।     आई क्रीम या सीरम- अगर आपको डार्क सर्कल्स या मुहांसों जैसी समस्या है, तो रात में इनसे जुड़े ट्रीटमेंट प्रोडक्ट्स या आई क्रीम लगाएं।     मॉइस्चराइजर- रात में त्वचा को गहरे पोषण की जरूरत होती है। ऐसा मॉइश्चराइजर चुनें जिसमें हयालूरोनिक एसिड या सेरामाइड्स हों, जो रात भर आपकी त्वचा को रिपेयर कर सकें। बिगिनर्स के लिए कुछ जरूरी बातें पैच टेस्ट- कोई भी नया प्रोडक्ट पूरे चेहरे पर लगाने से पहले उसे हाथ पर लगाकर 24 घंटे तक चेक करें कि कहीं जलन तो नहीं हो रही।     धैर्य रखें- किसी भी स्किन केयर रूटीन का असर दिखने में कम से कम 4 से 6 हफ्ते का समय लगता है। इसलिए रातों-रात चमत्कार की उम्मीद न करें।     पानी पिएं- बाहर से लगाए गए प्रोडक्ट्स तभी असर करेंगे जब आपका शरीर अंदर से हाइड्रेटेड होगा। दिन भर में भरपूर पानी पिएं।     अपनी स्किन टाइप पहचानें- बिना अपनी स्किन टाइप जाने कोई भी प्रोडक्ट न खरीदें। अगर आपकी स्किन बहुत ज्यादा सेंसिटिव है, तो किसी एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।  

अब जानवर खुद बताएँगे अपनी कहानी! दिल्ली चिड़ियाघर में बाड़ों के बाहर लगे QR कोड

नई दिल्ली चिड़ियाघर में घूमने आए विजिटर्स अब वन्यजीवों के बाड़े के बाहर QR कोड वाले साइन बोर्ड से वन्यजीवों की सारी जानकारी तुरंत पढ़ सकेंगे। रेनोवेशन और विजिटर्स की सुविधा के लिए नए साइन बोर्ड बदलने के साथ पहली बार कई साइन बोर्ड लगाए जा रहे हैं। 1000 से अधिक साइन बोर्ड लगाने का काम शुरू हो चुका है। नाम के साथ लगे होंगे QR कोड 20 बीटों के 72 बाड़ों में 96 प्रजातियों के करीब 1300 वन्यजीव रह रहे हैं। नए साइन बोर्ड में उस जानवर के नाम की जानकारी के साथ QR कोड लगे होंगे। मोबाइल से कोड स्कैन करने पर जानवरों की सारी जानकारी मिल जाएगी। चिड़ियाघर के एक अधिकारी ने बताया कि इससे वाइल्डलाइफ और पर्यावरण के प्रति लोगों का रूझान बढ़ाने के उद्देश्य में सफलता मिलेगी। चिड़िया घर में लगाए जाएंगे नए बोर्ड चिड़ियाघर के ज्यादातर साइन बोर्ड बहुत पुराने हो चुके थे। कई बोर्ड में ठीक से पढ़ा भी नहीं जा पा रहा था। खतरनाक जानवर की सूचना देते हुए बाड़े की रेलिंग से दूर रहने आदि के करीब 100 वॉर्निंग साइन बोर्ड, बाड़ों में बंद जानवरों के नाम के 200 से अधिक साइन बोर्ड लगाए जाएंगे। रिक्शा स्टॉप पर भी बोर्ड बैटरी रिक्शा स्टॉप पर भी नए साइन बोर्ड लगेगे। अभी उनकी हालत बहुत ठीक नहीं है। कई जगह साइन बोर्ड नहीं है। लेकिन विजिटर को बैटरी रिक्शा लेने के लिए अब इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। चिड़ियाघर के कई रास्तों की जानकारी देते हुए भी बोर्ड लगाए जा रहे है। किस रास्ते पर किस जानवर का बाड़ा है, इसकी जानकारी भी साइन बोर्ड से दी जाएगी। इससे चिड़ियाघर घूमने आए लोगों को अपना रूट तय करने में आसानी मिलेगी। उन्हें अपनी पसंद के जानवरों को ढूंढ़ने में अब ज्यादा भटकना नहीं पड़ेगा। हाथी से बाघ तक, एक दिन के लिए भी ले सकेंगे गोद चिड़ियाघर अपने राजस्व को बढ़ाने के लिए ‘वन्यजीव गोद’ योजना में बड़े सुधार करने जा रहा है। अब आप किसी वन्यजीव को एक दिन के लिए भी गोद ले सकते हैं। तिमाही और छमाही समय तक के लिए भी गोद लिया जा सकता है। मार्च से यह योजना चालू हो रही है। इसके तहत वन्यजीव की खुराक और रखरखाव का खर्चा शामिल है। 2022 में शुरू हुई वन्यजीव गोद योजना के तहत एक साल और दो साल की अवधि के लिए वन्यजीवों को गोद लिया जा सकता था। आमदनी बढ़ाने के लिए बदला जा रहा टाइम योजना सफल नहीं रही। गिनी-चुनी बड़ी कंपनियों ने ही बामुश्किल आधा दर्जन वन्यजीवों को गोद लिया था। अफ्रीकी शंकर हाथी को भी गोद लिया गया था, जिसकी पिछले साल मौत हो चुकी है। चिड़ियाघर के डायरेक्टर डॉ संजीव कुमार ने बताया कि आमदनी बढ़ाने के लिए वन्यजीव गोद योजना की समय अवधि को बदला जा रहा है।

पिता के संघर्ष को मिला साथ – चिरायु योजना ने बचाई अंजलि की जिंदगी

रायपुर  छत्तीसगढ़ शासन की अत्यंत महत्वाकांक्षी चिरायु योजना (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) आज प्रदेश में उन मासूमों के लिए जीवनदायिनी सिद्ध हो रही है, जो आर्थिक अभाव और सूचना की कमी के कारण इलाज की राह देख रहे थे। बस्तर की जटिल भौगोलिक परिस्थितियों और सुदूर वनांचल ग्रामों में जहाँ शिक्षा और सुगम आवागमन आज भी एक चुनौती है, वहां यह योजना न केवल बीमारियों की पहचान कर रही है, बल्कि बच्चों को उनके स्वास्थ्य का अधिकार दिलाकर धरातल पर एक सुखद बदलाव ला रही है। विकासखंड बस्तर के ग्राम भोंड की 6 वर्षीय बालिका अंजलि कश्यप की कहानी इसी संकल्प की एक जीवंत मिसाल है, जो जन्मजात नाक के बाहरी ट्यूमर जैसी गंभीर समस्या से जूझ रही थी। अंजलि के परिवार पर दुखों का पहाड़ तब टूटा जब इलाज की प्रारंभिक प्रक्रिया के दौरान ही उसके पिता का निधन हो गया। इस वज्रपात के बाद शिक्षा की कमी और घर की बिगड़ती आर्थिक स्थिति ने माँ देवकी को इतना हताश कर दिया कि उन्होंने सर्जरी का विचार त्याग दिया और इलाज के लिए स्पष्ट मना कर दिया। ऐसी कठिन परिस्थिति में चिरायु टीम ने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा। डॉ. गौरव चौरसिया और डॉ. रेखा जैन के नेतृत्व में समर्पित चिकित्सा दल ने बार-बार अंजलि के घर जाकर परिवार को भावनात्मक संबल दिया और बीमारी की गंभीरता समझाते हुए उन्हें उपचार के लिए प्रेरित किया। कलेक्टर के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के समन्वय से न केवल निःशुल्क इलाज का भरोसा दिलाया गया, बल्कि दुर्गम क्षेत्र होने के बावजूद चिरायु वाहन के माध्यम से अंजलि को जिला अस्पताल महारानी जगदलपुर तक पहुँचाया गया। इस दौरान टीम ने बालिका का आयुष्मान कार्ड बनवाने में भी पूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया। अंततः 12 मई 2024 को रायपुर के नवकार हॉस्पिटल में प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. रमेश जैन द्वारा बालिका की सफल सर्जरी संपन्न की गई, जिससे अंजलि को एक नया चेहरा और नया जीवन प्राप्त हुआ। इस पूरी प्रक्रिया की सफलता में स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले का विशेष योगदान रहा। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय बसाक और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की जिला कार्यक्रम प्रबंधक सु रीना लक्ष्मी के सटीक समन्वय से योजना का लाभ समय पर सुनिश्चित हुआ। वहीं जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र प्रबंधक  शिवम पाराशर द्वारा केस की निरंतर मॉनिटरिंग और वाहन प्रबंधन किया गया, जबकि खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. नारायण सिंह नाग और बीपीएम  राजेन्द्र कुमार बघेल ने जमीनी स्तर की बाधाओं को दूर किया। आज अंजलि पूर्णतः स्वस्थ है और उसकी खिलखिलाती मुस्कान चिरायु योजना की सार्थकता का प्रमाण दे रही है। अंजलि की माँ और समस्त ग्रामीणों ने शासन की इस कल्याणकारी पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए इसे बस्तर के वनांचल में उम्मीद की एक नई किरण बताया है।

खराश से लेकर दर्द तक—गरारे से गले की हर परेशानी का समाधान

नमक के पानी से गरारे करने का तरीका बेहद पुराना है। नमक में पाए जाने वाले एंटीसेप्टिक और एंटी-बैक्टीरियल गुण गले की खराश को दूर करने के साथ-साथ काफी आराम पहुंचाता है। गले की किसी भी तरह की समस्या होने पर अक्सर गरारे करने की सलाह दी जाती है। गले में खराश या अन्य तरह की परेशानी होने पर लोग गर्म पानी से गरारे करते हैं या फिर गर्म पानी में नमक डालकर। सिर्फ नमक ही गले को आराम नहीं पहुंचाता बल्कि इसके अतिरिक्त भी कई तरह से गरारे किए जा सकते हैं। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में… पुदीने का पानी पुदीने में पाया जाने वाला मेन्थॉल न सिर्फ गले को आराम पहुंचाता है, बल्कि बंद नाक को खोलने में भी मदद करता है। इसकी एंटीसेप्टिक प्रॉपर्टीज बैक्टीरिया को दूर करने में मदद करती है। इसके इस्तेमाल के लिए एक कप उबलते पानी में दो से तीन पेपरमिंट टी बैग्स डालें या फिर पुदीने की पत्तियों का इस्तेमाल करें। अब इसे ठंडा होने दें और फिर इस गुनगुने पानी की मदद से गार्गिल करें। अदरक का पानी अगर किसी व्यक्ति को गले में खराश के साथ-साथ सूजन भी है तो उसे अदरक के पानी से गरारे करने चाहिए। दरअसल, इसके एंटी-इंफलेमेटरी गुण गले की सूजन को कम करने के साथ-साथ इंफेक्शन को दूर करके गले को आराम पहुंचाते हैं। आप चाहें तो गुनगुने पानी में अदरक का पाउडर मिलाकर गरारे करें या फिर पानी में अदरक उबालें और जब वह पानी गुनगुना रह जाए तो उससे गरारे करें।   नमक का पानी नमक के पानी से गरारे करने का तरीका बेहद पुराना है। नमक में पाए जाने वाले एंटीसेप्टिक और एंटी-बैक्टीरियल गुण गले की खराश को दूर करने के साथ-साथ काफी आराम पहुंचाता है। इसके इस्तेमाल के लिए एक गिलास गुनगुने पानी में नमक मिलाएं और फिर उस पानी से गरारे करें।   हल्दी का पानी हल्दी के औषधीय गुणों से तो हर कोई वाकिफ है। चोट लगने से लेकर कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं होने पर हल्दी का सेवन करने की सलाह दी जाती है। इसके प्रयोग के लिए एक गिलास गुनगुने पानी में चुटकीभर हल्दी मिलाएं और फिर उस पानी से गार्गिल करें। सेब का सिरका आपको शायद जानकर हैरानी हो लेकिन सेब के सिरके के पानी से गार्गिल करने पर भी गले की समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है। दरअसल, सेब के सिरके में भी एंटी-बैक्टीरियल गुण जाते हैं जो बैक्टीरिया को दूर करके गले को आराम पहुंचाते हैं। इसके लिए आधा गिलास गर्म पानी में एक चम्मच सेब का सिरका मिलाएं और दिन में दो बार गरारे करें। आपको काफी आराम महसूस होगा।  

AI-समिट 2026 में नया आविष्कार, 30 मिनट में कैंसर डिटेक्शन संभव

नई दिल्ली हेल्थ सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का असर तेजी से दिख रहा है. दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे एआई समिट में एक खास डिवाइस लोगों का ध्यान खींच रहा है. दावा किया गया है कि यह नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डिवाइस पेट से जुड़ी बीमारियों और खासतौर पर कैंसर का पता आसानी से और समय रहते लगा सकता है, जिससे मरीज को बीमारी के गंभीर होने से पहले इलाज मिल सकेगा. विप्रो की चीफ टेक्निकल ऑफिसर संध्या अरुण के मुताबिक, यह डिवाइस शुरुआती स्टेज में ही कैंसर का पता लगा लेता है. इससे मरीज को समय पर इलाज मिल सकता है और कई मामलों में सर्जरी की जरूरत ही नहीं पड़ेगी.उनका कहना है कि जल्दी पहचान ही सबसे बड़ा फायदा है, क्योंकि बीमारी जितनी जल्दी पकड़ में आ जाएगी, इलाज उतना आसान और असरदार होगा. आइए व‍िस्‍तार से जानते हैं इस ड‍िवाइस के बारे में… कैसे काम करती है मशीन? यह एआई आर्म रोबोटिक एमआरआई मशीन सबसे पहले मरीज के पेट का स्कैन करती है. स्कैन का रिजल्ट रियल-टाइम स्क्रीन पर दिखाई देता है, जिससे डॉक्टर तुरंत समझ सकते हैं कि अंदर क्या समस्या है. कैंसर का कैसे लगाएगी पता स्कैन में अगर ट्यूमर या कैंसर से जुड़ी कोई असामान्यता दिखती है, तो एआई तुरंत उसका विश्लेषण करता है और बताता है कि तस्वीर में दिख रही चीज क्या है. कंपनी का कहना है कि 30–45 मिनट में पूरा स्कैन और रिपोर्ट तैयार हो जाती है. मशीन में क्या है, क्या सिर्फ पेट होगा स्कैन? विप्रो की ओर से बताया गया कि इस एआई मशीन में चार अलग-अलग आर्म लगी हुई हैं और इनसे पूरा शरीर स्कैन हो सकेगा. एक आर्म मिड-बॉडी स्कैन के लिए है और बाकी अलग-अलग हिस्सों के लिए हैं. इससे पूरे शरीर की जांच आसानी से की जा सकती है. और क्या फायदे हैं इस मशीन के दावा किया गया कि इस मशीन से समय और लागत दोनों की बचत होगी. साथ ही यह भारत में बनी पहली AI-संचालित MRI मशीन है, जो स्कैन समय में करीब 37 फीसदी की कमी लाती है. 75 फीसदी तक हीलियम की खपत घटाती है. यानि जांच होगी तेज़, सटीक और सस्ती होगी और मरीज को जल्दी इलाज मिल सकेगा. बता दें क‍ि नई AI तकनीक से मेडिकल जांच का तरीका लगातार बदल रहा है और भविष्य में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का पता लगाना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो सकता है.

सपा की रणनीति: 15 मार्च को सभी जिलों में कांशीराम जयंती मनाकर दलित वोटों को साधेगी पार्टी

लखनऊ   सपा ने 15 मार्च को सभी जिलों में कांशीराम जयंती मनाने का फैसला किया है। पार्टी का प्रयास है कि जिलास्तर पर होने वाले इन कार्यक्रमों में दलित समाज के लोगों की ज्यादा से ज्यादा भीड़ जुटाई जाए। आयोजनों में बसपा संस्थापक कांशीराम और सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के बीच रहे रिश्तों की भी याद दिलाई जाएगी। इस संबंध में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सभी जिला व महानगर पदाधिकारियों को कांशीराम जयंती पर कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। जेएनयू के सेवानिवृत्त शिक्षक और समकालीन राजनीति के जानकार प्रो. रवि कहते हैं कि कभी यूपी में मुलायम-कांशीराम फैक्टर बहुत प्रभावी था। नब्बे के दशक में इस फैक्टर से दलितों और पिछड़ों की सामाजिक व राजनीतिक हैसियत में बड़ा बदलाव देखने को मिला।   अब दलित-पिछड़ों के गठजोड़ के इसी फैक्टर की बदौलत सपा ने यूपी की राजनीति में दखल बढ़ाने का निर्णय लिया है। सपा नेतृत्व का मानना है कि दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक (पीडीए) का फॉर्मूला उन्हें सत्ता तक पहुंचा सकता है। यही वजह है कि कांशीराम जयंती को सपा पीडीए दिवस के रूप में मनाएगी।  इसके तहत जिलों में होने वाले कार्यक्रमों के जरिये सपा याद दिलाएगी कि कांशीराम ने मंडल रिपोर्ट के समर्थन में राष्ट्रव्यापी आंदोलन खड़ा किया था। 1992 में सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के साथ समझौता कर बहुजन समाज बनाओ अभियान को तेज किया था। कांशीराम ने ही दिसंबर 1993 में मुलायम सिंह की सरकार बनवाई।

अब स्ट्रेच मार्क्स नहीं! घर पर ही अपनाएं ये घरेलू नुस्खे

प्रेग्नेंसी और वजन घटने या बढ़ने की वजह से अक्सर शरीर के कई हिस्सों पर स्ट्रेच माक्र्स हो जाते हैं। वहीं कई लोगों में हॉर्मोनल चेंजेस की वजह से भी ऐसे निशान पड़ जाते हैं। सफेद रंग के ये जिद्दी दाग यूं तो बड़ी मुश्किल से जाते हैं। पर हम आपको कुछ ऐसे घरेलू तरीके बता रहे हैं, जिससे इन निशानों से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है। पौष्टिक भोजन स्वस्थ त्वचा के लिए विटामिन सी और ई, जिंक, सिलिका और अन्य पोषक तत्वों की प्रचुरता वाला संतुलित और पौष्टिक आहार चुनें। खाने में स्ट्रॉबेरी, जामुन, पालक, गाजर, हरी बींस, साग और बादाम शामिल करें। नींबू का रस नींबू का रस एक प्राकृतिक अम्ल है, जो स्ट्रेच माक्र्स को हल्का करता है। नींबू के रस को स्ट्रेच माक्र्स पर लगाएं और 10 मिनट बाद धो लें। चीनी अपने प्राकृतिक सफेद रूप में चीनी स्ट्रेच माक्र्स हटाने का काफी कारगर उपाय है। एक चम्मच चीनी में बादाम का तेल और नींबू के रस की कुछ बूंदें मिलाकर उसे स्ट्रेच माक्र्स पर लगाने से काफी असर होता है। वनस्पति तेल से मसाज गर्भवती महिलाओं को वनस्पति तेल से मसाज करना चाहिए। इससे स्ट्रेच माक्र्स के निशान कम हो जाते हैं। एलोवेरा जेल एक कप एलोवेरा में 2 चम्मच विटामिन ई का तेल मिलाइए। इस मिश्रण को तब तक लगाइए जब तक त्वचा इसे पूरी तरह सोख न ले। रोजाना लगाने से त्वचा में फर्क महसूस होगा। कोकोआ मक्खन स्ट्रेच माक्र्स पर कोकोआ मक्खन लगाने से दाग कम होते हैं। स्ट्रेच माक्र्स वाले भागों पर दिन में दो बार कोकोआ मक्खन से मसाज करें। एक महीने में ही फर्क आएगा।