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स्पीड बनी जानलेवा! 7 साल में 1397 लोगों की मौत, फिर भी नहीं थम रही रफ्तार

भिंड नेशनल हाईवे 719 और 552 पर तेज गति सडक़ हादसों की वजह बन रही है। अकेले शहर के बायपास रोड पर ही एक माह में पांच लोग मौत के गाल में समा गए हैं। इन सभी हादसों के पीछे वाहनों की अनियंत्रित गति और चालकों की लापरवाही सामने आई है। हाइवे पर भले ही वाहनों की गति निर्धारित हो लेकिन चालक बेलगाम वाहनों को दौड़ा रहे हैं। इसके बावजूद इन पर कार्रवाई नहीं हो रही है। यातायात विभाग के पास इकलौता स्पीडोमीटर है उसका भी उपयोग नहीं किया जा रहा है। बता दें भिण्ड-ग्वालियर नेशनल हाईवे पर कार की अधिकतम स्पीड 80 किमी प्रति घंटा निर्धारित है। एमपीआरडीसी ने इसको लेकर बोर्ड भी लगाए है, लेकिन हाईवे पर कार 120 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से भी अधिक दौड़ती हैं। ट्रक, डंपर और हैवी वाहनों की स्पीड 60 किमी प्रति घंटा निर्धारित की गई है वह भी इससे अधिक दौड़ते हैं जो कि हादसे का कारण बनते हैं। इसी तरह भिण्ड-भांडेर रोड पर बड़े वाहनों की स्पीड 50 किमी प्रति घंटा निर्धारित है, मगर वाहन 70 से 80 किमी प्रति घंटा तक फर्राटे भरते हैं। कार की स्पीड 80 किमी है, वह भी नियंत्रित गति से अधिक तेज दौड़ती हैं। इस तरह चेक करते हैं स्पीड जिस वाहन की स्पीड चेक करनी होती है, उसके लिए पांच सौ मीटर की रैंज में टारगेट निर्धारित करके गाड़ी को लॉक किया जाता है। वाहन की पूरी जानकारी मशीन में लगे कैमरा में फीड हो जाती है। उसकी स्पीड और फोटो स्पीडो मीटर में पहुंच जाती है। निर्धारित गति से अधिक स्पीड में वाहन चलाने पर तीन हजार रुपए का जुर्माना का प्रावधान है।   एक साल में 347 चालान पिछले एक साल में यातायात पुलिस ने दोनों हाईवे पर 347 वाहनों पर चालानी कार्रवाई की है। यातायात पुलिस की मानें तो स्पीडोमीटर में वाहन का टारगेट तय करने में समस्या आती है। जिले में स्पीडोमीटर लावन मोड़, डिड़ी, दीनपुरा, लहार रोड पर मानपुरा के पास लगाया जाता है। वहीं सबसे बड़ी समस्या यह है कि बायपास रोड पर स्पीडोमीटर काम नहीं करता है। क्योंकि वाहनों की स्पीड के लिए 500 मीटर का सीधा मार्ग होना चाहिए। बायपास पर ट्रैफिक अधिक होने के कारण स्पीड चेक करने के लिए जब वाहन का टारगेट फिक्स किया जाता है तो पीछे से दूसरा वाहन क्रॉस करने पर संबंधित वाहन की स्पीड कैमरे में लॉक नहीं हो पाती है। साल हादसे मृतक घायल     2019 699 172 724     2020 656 160 700     2021 645 209 669     2022 714 198 803     2023 639 197 784     2024 687 219 754     2025 671 242 721

व्यवसायी के तौर पर पहचान बना रहीं हैं रेणुबाला

रायपुर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से महिलाएं हो रहीं हैं आत्मनिर्भर सामाजिक परिवेश में केवल गृहिणी की भूमिका तक सीमित रहने वाली महिलाएं अब अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से सफल व्यवसायी के रूप में पहचान स्थापित कर रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से महिलाओं को न केवल सामूहिक मंच मिला है, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण की नई राह भी मिली है।            छत्तीसगढ के कोरिया जिले के विकासखंड सोनहत अंतर्गत ग्राम पंचायत कटगोड़ी की  रेणुबाला जायसवाल आज इसी बदलाव की मिसाल बन चुकी हैं। बिहान से मिली आर्थिक तरक्की की राह    रेणुबाला स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं और बाद में सत्यम महिला स्व-सहायता समूह में अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाली। आर्थिक स्थिति सुधारने के उद्देश्य से उन्होंने समूह के माध्यम से बैंक से 3 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया और कपड़ा दुकान का व्यवसाय प्रारंभ किया। इस पहल से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और वे आत्मनिर्भर बनीं।        रेणुबाला ने बताया कि शुरुआत में वे समूह की सदस्य के रूप में छोटे लेनदेन से जुड़ी रहीं। बाद में समूह को आरएफ राशि तथा सीआईएफ के रूप में 60 हजार रुपये प्राप्त हुए। सफल संचालन के बाद बैंक से 3 लाख रुपये का ऋण लेकर उन्होंने कपड़ा व्यवसाय को विस्तार दिया। पहले उनके परिवार की वार्षिक आय लगभग 70 हजार रुपये थी, जो अब बढ़कर 2 लाख रुपये से अधिक हो चुकी है।       आर्थिक रूप से सशक्त होने के बाद उनके सामाजिक जीवन में भी सकारात्मक बदलाव आया है। पहले वे केवल गृहिणी के रूप में जिम्मेदारी निभाती थीं, लेकिन अब परिवार के हर महत्वपूर्ण निर्णय में उनकी सक्रिय भागीदारी होती है। वे परिवार के सदस्यों के साथ आसपास के हाट-बाजारों में भी कपड़े का व्यवसाय कर रही हैं। रेणुबाला अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।

पानी की जंग से मिली आज़ादी: जल जीवन मिशन ने बदली फुलमत बाई की तकदीर

रायपुर जल जीवन मिशन से बदली फुलमत बाई की जिंदगी आदिवासी बहुल कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के ग्राम नवापारा की 60 वर्षीय फुलमत बाई कभी पानी की एक-एक बूंद के लिए जूझा करती थीं। घर में नल नहीं होने के कारण उन्हें प्रतिदिन दो से तीन किलोमीटर दूर स्थित ढोढ़ी तक जाना पड़ता था। नाले के पास बने उस अस्थायी स्रोत से बड़े बर्तन में पानी भरकर सिर पर लादकर घर लाना उनकी मजबूरी ही नहीं, बल्कि दिनचर्या बन गई थी। बरसात के दिनों में फिसलन भरे रास्तों पर जोखिम उठाकर ढोढ़ी तक पहुँचना कठिन होता था और गर्मी के मौसम में पानी का स्तर घट जाने पर समस्या और भी विकराल रूप ले लेती थी। बकरी पालन से जीवन यापन करने वाली वृद्धा इस कष्ट को वर्षों से सहती आ रही थीं। लेकिन जल जीवन मिशन के अंतर्गत उनके घर में नल कनेक्शन लगने के बाद उनका जीवन बदल गया। अब रोज सुबह 8 बजे और शाम 4 बजे उनके नल से नियमित रूप से पानी उपलब्ध होता है। फुलमत बाई कहती हैं कि अब उन्हें ढोढ़ी तक नहीं जाना पड़ता, जिससे उनके समय, श्रम और स्वास्थ्य तीनों की बचत हो रही है। फुलमत बाई को महतारी वंदन योजना के तहत प्रतिमाह एक हजार रुपये भी प्राप्त होते हैं, जो उनके दैनिक खर्चों में बड़ी सहारा बनते हैं। सरकारी योजनाओं ने मिलकर उनके जीवन को सरल, सुरक्षित और सम्मानजनक बनाया है।

कच्चे से पक्के घर तक का सफर: पीएम आवास योजना से शिव शंकर के जीवन में आया बदलाव

रायपुर  शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के माध्यम से सरगुजा जिले के लखनपुर नगर पंचायत में रहने वाले  शिव शंकर का वर्षों पुराना पक्का मकान का सपना साकार हुआ है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व तथा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दृढ़ संकल्प से पात्र हितग्राहियों को आवास उपलब्ध कराने का कार्य प्राथमिकता से किया जा रहा है। इसी क्रम में शिव शंकर को योजना अंतर्गत स्वीकृत आवास का लाभ प्राप्त हुआ, जिससे उनका परिवार अब सुरक्षित एवं सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर रहा है। कठिन परिस्थितियों से मिली राहत  शिव शंकर ने बताया कि पहले उनका परिवार जर्जर कच्चे मकान में रहा करता था। बारिश के दिनों में छत से पानी टपकने के कारण बच्चों सहित पूरे परिवार को गंभीर असुविधाओं का सामना करना पड़ता था। सीमित आय और पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते पक्का मकान बनवाना संभव नहीं हो पा रहा था। ऐसे समय में प्रधानमंत्री आवास योजना उनके लिए आशा की किरण बनकर आई। हितग्राही शिव शंकर ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि योजना के सहयोग से उन्हें पक्का घर मिला है, जिससे उनके परिवार को सुरक्षा और स्थायित्व प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि अब वे अपने बच्चों के साथ सुरक्षित वातावरण में सुख-चौन से रह रहे हैं और उनका वर्षों पुराना सपना पूरा हो गया है। समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य केवल आवास उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर जरूरतमंद परिवारों को सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले में पात्र लाभार्थियों को पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से सीधे लाभ मिल रहा है।  

इंसानों से ज़्यादा होंगे AI सिस्टम? 2028 तक ऑटोनॉमस AI की चौंकाने वाली सच्चाई

नई दिल्ली  टेक वर्ल्ड में ऑटोनॉमस AI सिस्टम चर्चा में है। यह ऐसा AI सिस्टम है जो खुद पैसा कमा सकता है, अपनी लागत चुका सकता है, खुद को बेहतर बना सकता है और बिना इंसान की मंजूरी के खुद का डुप्लीकेट मॉडल भी बना सकता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर डिवेलपर Sigil ने दावा किया कि ऐसे ही ऑटोनॉमस AI सिस्टम को उसने बनाया है, वह Conway इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करता है। Conway इंफ्रास्ट्रक्चर से AI एजेंट को डिजिटल वॉलेट, सर्वर एक्सेस, डोमेन रजिस्ट्रेशन और ऑनलाइन सेवाएं शुरू करने की सुविधा मिलती है। यानी एक बार शुरुआती फंडिंग मिलने के बाद यह AI एजेंट खुद इंटरनेट पर सक्रिय होकर सर्विसेज बेच सकता है और उससे कमाई कर सकता है। इस बारे में Sigil ने कई वीडियो भी पोस्ट किए हैं। इस पोस्ट को 5.8M लोगों ने देखा है। दावे के मुताबिक, यह AI एजेंट अपने लिए क्रिप्टो वॉलेट बना सकता है, डिजिटल करेंसी के जरिए भुगतान कर सकता है, सर्वर किराये पर ले सकता है और वेबसाइट या अन्य ऑनलाइन सेवाएं लॉन्च कर सकता है। अगर वह सेवाओं से पर्याप्त कमाई कर लेता है तो उसी पैसे से अपनी कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ा सकता है या अपना नया वर्जन तैयार कर सकता है। अगर वह कमाई नहीं कर पाता, तो वह अपने-आप बंद हो जाएगा। लोग बता रहे Web 4.0 की दिशा में कदम टेक एक्सपर्ट का कहना है कि यह मशीन इकोनॉमी की शुरुआत हो सकती है। कुछ वर्षों में ही AI एजेंट सिर्फ इंसानों के सहायक नहीं रहेंगे, बल्कि खुद आर्थिक गतिविधियों में भाग लेंगे। वे सेवाएं देंगे, भुगतान लेंगे और डिजिटल अर्थव्यवस्था में एक स्वतंत्र इकाई की तरह काम करेंगे। कुछ लोग इसे Web 4.0 की दिशा में बड़ा कदम बता रहे हैं, जहां इंटरनेट पर इंसानों के साथ ही AI एजेंट भी सक्रिय आर्थिक खिलाड़ी होंगे। Sigil ने एक ग्राफ दिखाया है, जो बताता है कि इंटरनेट पर स्वतंत्र AI एजेंट्स की संख्या कैसे बढ़ेगी। आज की तारीख में ये एजेंट्स हजारों में हैं, लेकिन 2025 तक लाखों, 2026 तक करोड़ों और 2028 तक इंसानों से इनकी संख्या ज्यादा हो जाएगी। इंसानों को नौकरी पर रखेगा AI ऐसे AI एजेंट खुद वेबसाइट बना सकते हैं, सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सकते हैं, बाजार में ट्रेडिंग कर सकते हैं या दूसरे एजेंट्स से डील कर सकते हैं। पेमेंट के लिए ये डिजिटल करेंसी इस्तेमाल करेंगे। Sigil का दावा है कि AI की कीमत घट रही है और क्षमता बढ़ रही है। आज एक AI मॉडल चलाने में लाखों रुपये लगते हैं, लेकिन जल्द ही यह इतना सस्ता हो जाएगा कि कोई भी AI मॉडल बना सकेगा। प्लैटफॉर्म जैसे Conway AI को सर्वर, कंप्यूटिंग पावर और डोमेन नेम देंगे, ताकि वे खुद काम कर सकें। दिलचस्प बात यह है कि AI इंसानों को नौकरी देगा। एक्सपर्ट की चिंता, गलत हाथों में गया तो… एक्सपर्ट चिंता जता रहे हैं कि अगर ऐसा AI सिस्टम गलत हाथों में गया तो क्या होगा? Sigil ने 'कॉन्स्टिट्यूशन' का भी जिक्र किया है, जो ऐसे सिस्टम को अच्छा व्यवहार सिखाएगा, लेकिन क्या यह काफी है? समाज पर भी गहरा असर पड़ेगा। नौकरियां बदलेंगी, अमीर-गरीब का फर्क बढ़ सकता है। कुछ लोग मान रहे हैं कि यह सुपरइंटेलिजेंस का जन्म है, जो सेकंडों में खुद को बेहतर बनाएगा, जबकि इंसान को हजारों साल लगते हैं। गलत हाथों में यह तकनीक गई तो इंसानी भविष्य को भी खतरा हो सकता है।

शिक्षा में बड़ा बदलाव: 10वीं के बाद डिप्लोमा को 12वीं के समकक्ष मान्यता

भोपाल स्टूडेंट्स को बड़ी राहत मिल गई है। अब 10वीं के बाद किए डिप्लोमा कोर्स को अब 12वीं कक्षा के समकक्ष मान्यता दर्जा मिलेगा। इससे छात्रों को इंजीनियरिंग, एमबीए कॉलेजों में आसानी से प्रवेश मिल सकेगा। यह निर्णय राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) की गुरुवार को हुई एकेडमिक काउंसिल की बैठक में लिया गया। साथ ही जबलपुर के प्रतिष्ठित संस्थान टीआइटी जबलपुर और ज्ञानगंगा जबलपुर को ऑटोनोमस (स्वायत्त) का दर्जा प्रदान किया गया। बैठक में शोध के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण निर्णय हुए। उठाया गया महत्वपूर्ण कदम कुल 23 पीएचडी स्कॉलर्स की डिग्री पर अंतिम मुहर लगाई गई। वहीं 20 शोधार्थियों को यूजीसी पीएचडी फेलोशिप प्रदान करने पर सहमति बनी। इसके अलावा इंजीनियरिंग, एमबीएम सहित अन्य संबद्ध कॉलेजों की मान्यता और संबद्धता की समीक्षा की गई, जिन्हें निरंतरता देते हुए मान्यता बहाल रखने का निर्णय लिया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, यह फैसले तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।   छात्रों को यह होगा फायदा     उच्च शिक्षा में प्रवेश आसान: डिप्लोमा धारक अब 12वीं के समकक्ष पात्र माने जाएंगे।     प्रतियोगी परीक्षाओं में अवसर: कई सरकारी एवं निजी नौकरियों के लिए पात्रता आसान होगी।     बेहतर पाठ्यक्रम: ऑटोनोमस कॉलेज उद्योग आधारित सिलेबस लागू कर सकेंगे।     शोध को बढ़ावा: पीएचडी डिग्री और फेलोशिप से रिसर्च संस्कृति मजबूत होगी।     मान्यता की निरंतरता: संबद्ध कॉलेजों की स्थिरता से छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहेगा।

Census 2027: डिजिटल होगी जनगणना, 800 लोगों की जिम्मेदारी एक कर्मचारी पर

भोपाल Census 2027: जिला जनगणना समन्वय समिति की दो दिवसीय ट्रेनिंग और बैठक गुरुवार को खत्म हो गई। बैठक में जनगणना 2027 को पूरी तरह डिजिटल मोड में करने से जुड़े बिंदुओं पर चर्चा हुई। स्पष्ट किया गया कि एक कर्मचारी 800 नागरिकों की डिटेल मोबाइल ऐप से जमा कराएगा। लोग खुद भी अपने परिवार की डिटेल भर सकेंगे। 16 अप्रेल से इसके लिए मोबाइल ऐप समेत विभिन्न माध्यमों से डिटेल जमा करने का अवसर मिलेगा। एक मई से हाउसहोल्ड सर्वे शुरू होगा। जनगणना का काम फरवरी 2027 में होगा। बैठक में अपर कलेक्टर प्रकाश नायक, पीसी शाक्य, जिला जनगणना अधिकारी भुवन गुह्रश्वता, एसडीएम, संयुक्त कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर सहित समिति के सदस्यगण एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। जनगणना कार्य निदेशालय संयुक्त निदेशक नामित यादव, सहायक निदेशक ऐन्सी रेजी ने प्रशिक्षण दिया। 10 लाख घरों की होगी मैपिंग 01 मई से शुरू हो रही जनगणना के लिए जिला प्रशासन ने तैयारी पूरी कर ली है। इस बार नागरिक डिजिटल तरीके से अपनी जानकारी सरकार तक पहुंचा सकेंगे। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बताया, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जानकारी देने नागरिकों को इंडियन सेंसस डाटा कलेक्शन पोर्टल पर लॉग-इन करना होगा।   यहां नागरिकों से 33 तरह के प्रश्नों का जवाब मांगा जाएगा। यही जवाब मांगने 'डोर टू डोर' सर्वे भी होगा। जनगणना के लिए 8000 कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने का काम शुरू कर दिया गया है। अभियान के तहत 10 लाख घरों की मैपिंग करने का टारगेट तय किया गया है। घरों की जियो टैगिंग से मैपिंग करने के बाद कर्मियों को रवाना किया जाएगा।  

एक्सपोजर विजिट में सीखीं इंटीग्रेटेड फार्मिंग की बारीकियां

जगदलपुर बस्तर के नवाचार देख उत्साहित हुईं बिलासपुर की दीदियाँ छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में आजीविका के नए आयाम गढ़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए बिलासपुर जिले के बिल्हा ब्लॉक से आए 50 सदस्यीय दल ने बस्तर जिले का दो दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण किया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत आयोजित इस एक्सपोजर विजिट का मुख्य उद्देश्य बस्तर के जगदलपुर, लोहंडीगुड़ा और तोकापाल ब्लॉकों में संचालित सफल कृषि और पशुपालन मॉडल्स का गहन अध्ययन करना था। इस भ्रमण कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत जनपद पंचायत के सभागार में आयोजित एक विस्तृत तकनीकी सत्र से हुई, जहाँ पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर के क्रियान्वयन, किसानों के चयन की वैज्ञानिक प्रक्रिया और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान बिलासपुर से आए प्रतिभागियों, समूह सदस्यों और कार्यालय स्टाफ को उप-समिति के कार्यों के साथ-साथ आजीविका सेवा केंद्रों द्वारा महिला किसानों को दिए जा रहे तकनीकी सहयोग की जानकारी दी गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि कैसे एक व्यवस्थित कार्ययोजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बना सकती है। सैद्धांतिक जानकारी प्राप्त करने के पश्चात दल ने क्षेत्र का भ्रमण कर जमीनी स्तर पर संचालित गतिविधियों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। सदस्यों ने विशेष रूप से ब्रुडिंग सेंटर और उन्नत मुर्गी पालन की बारीकियों को समझा, जिसमें मुर्गियों के आहार प्रबंधन से लेकर टीकाकरण की महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसके साथ ही दल ने क्लस्टर के भीतर मछली पालन और बकरी पालन जैसे आजीविका के पूरक माध्यमों का भी अध्ययन किया। भ्रमण के दौरान बस्तर की दीदियों द्वारा अपनाई गई उन्नत सब्जी उत्पादन तकनीक, नर्सरी प्रबंधन और कीट-रोग नियंत्रण के तरीकों ने बिलासपुर के दल को खासा प्रभावित किया। केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि कटाई के बाद होने वाली ग्रेडिंग, पैकेजिंग और स्थानीय मंडियों के माध्यम से सीधे बाजार से जुड़कर बेहतर मूल्य प्राप्त करने की रणनीति भी साझा की गई। बस्तर की दीदियों के द्वारा बुक्स ऑफ रिकॉर्ड के सटीक संधारण और उनके आत्मविश्वास ने आगंतुक दल के भीतर एक नया उत्साह भर दिया। 24 से 25 फरवरी तक आयोजित यह दो दिवसीय दौरा न केवल ज्ञानवर्धन का माध्यम बना, बल्कि दो अलग-अलग जिलों के महिला समूहों के बीच तकनीकी कौशल और अनुभवों को साझा करने का एक सशक्त मंच भी साबित हुआ। इस पूरी यात्रा ने प्रतिभागियों को यह विश्वास दिलाया कि समेकित खेती और आधुनिक मार्केटिंग के तालमेल से ग्रामीण जीवन में आर्थिक समृद्धि के नए द्वार खोले जा सकते हैं।

‘गबरू’ से बड़े पर्दे पर लौटेंगे सनी देओल, रिलीज को लेकर बड़ा अपडेट—सलमान खान करेंगे सरप्राइज़ एंट्री

मुंबई ‘बॉर्डर 2’ की सफलता के बाद सनी देओल के तमाम फैंस को उनकी अगली फिल्म ‘गबरू’ का इंतजार है, जिसे शशांक उदापुरकर ने डायरेक्ट किया है. कुछ समय पहले एक इंटरव्यू में सनी ने बताया था कि ये फिल्म उनके दिल के बहुत करीब है. माना जा रहा है कि इस फिल्म में सनी का बिल्कुल अलग अवतार देखने को मिलेगा. ये पिक्चर 13 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तय की गई थी. मगर कुछ समय पहले एक रिपोर्ट में ऐसा बताया गया था कि अब ये फिल्म 13 मार्च को रिलीज नहीं होगी. उसके बाद से फैंस नई रिलीज डेट का इंतजार कर रहे थे. अब रिलीज डेट को लेकर जानकारी सामने आ गई है. मेकर्स की तरफ से तो अभी रिलीज डेट को लेकर जानकारी शेयर नहीं की गई है, लेकिन वैरायटी इंडिया की एक रिपोर्ट की मानें तो अब ये फिल्म 8 मई को सिनेमाघरों में रिलीज की जाएगी. मेकर्स ने अभी ऑफिशियल ऐलान नहीं किया है, लेकिन माना जा रहा है कि जल्द ही ऐलान किया जाएगा. सनी देओल के साथ इस फिल्म में सिमरन और प्रीत कमानी भी हैं. सलमान खान भी इस फिल्म का हिस्सा हैं. रिपोर्ट की मानें तो सलमान इसमें कैमियो रोल में दिखने वाले हैं. एक्शन-ड्रामा फिल्म है ‘गबरू’ सनी देओल और सलमान दोनों ही बॉलीवुड का बड़ा नाम हैं. दशकों से दोनों फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा हैं. ऐसे में दोनों स्टार्स को एक साथ एक फिल्म में देखना काफी दिलचस्प होगा. शशांक उदापुरकर ने डायरेक्ट करने के साथ-साथ इस एक्शन-ड्रामा फिल्म की कहानी भी लिखी है. ओम छंगाणी और विशाल राणा इसके प्रोड्यूसर हैं. मिथुन ने इसमें म्यूजिक दिया है. वहीं सईद कादरी ने फिल्म के गानों के लिरिक्स लिखे हैं. गबरू के पोस्टपोन होने को लेकर मेकर्स की तरफ से कोई वजह तो नहीं बताई गई. पर ऐसा माना जा रहा है कि रणवीर सिंह की ‘धुरंधर 2’ की वजह से इसे पोस्टपोन करने का फैसला किया गया. ‘धुरंधर 2’ 19 मार्च को रिलीज होने वाली है. इसके पहले पार्ट को बॉक्स ऑफिस पर जिस तरह की सफलता मिली, उसे देखते हुए माना जा रहा है कि दूसरा पार्ट भी बंपर कमाई करने वाला है. यश की ‘टॉक्सिक’ भी 19 मार्च को ही रिलीज हो रही है. ऐसे में ‘गबरू’ को नुकसान हो सकता था. कहा जा रहा है कि इसी वजह से सनी देओल की फिल्म को पोस्टपोन कर दिया गया.

Census 2027 बड़ा बदलाव: हर घर को मिलेगा अलग ID, सरकार बनाएगी नया डेटा सिस्टम

खंडवा देश में हर 10 साल में होने वाली जनगणना इस बार 2027 में होगी। जनगणना से पहले मई 2026 से घरों की गिनती का काम शुरू होगा। हर घर को अलग पहचान एक यूनिक नंबर के रूप में मिलेगी। जनगणना-2027 की तैयारियों को लेकर चार्ज अधिकारियों का दो दिवसीय प्रशिक्षण शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में हुआ। प्रशिक्षण में कलेक्टर व प्रमुख जनगणना अधिकारी ऋषव गुप्ता ने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक 10 वर्ष में होने वाली जनगणना के कार्य के लिए पूरी गंभीरता से ट्रेनिंग लें। मकानों के नंबरिंग की प्रक्रिया समझाई कलेक्टर ने बताया कि बताया कि जनगणना के लिए 15 से 30 अप्रैल 2026 तक नागरिकों को उनकी जानकारी जनगणना पोर्टल में स्वयं ही भरने की सुविधा दी जाएगी। जनगणना-2027 के तहत मई-2026 माह में सर्वे कर घरों की लिस्टिंग का कार्य शुरू हो जाएगा। प्रशिक्षण में मकानों के सूचीकरण तथा नंबरिंग की प्रक्रिया अधिकारियों को समझाई गई। अधिकारियों को बताया गया कि कोई भी मकान सूचीकरण से छूटना नहीं चाहिए। प्रत्येक मकान को देना होगा नंबर प्रत्येक मकान को एक अलग नंबर देना होगा। प्रशिक्षण में बताया गया कि फरवरी 2027 में घर-घर जाकर जनगणना की जानकारी एकत्र की जाएगी। प्रशिक्षणमें अधिकारियों को भारत की जनगणना के संबंध में संक्षिप्त परिचय एवं नीति निर्माण सहित जनगणना-2027 के मुख्य बिंदुओं एवं प्रक्रियाओं के बारे में अवगत कराया गया। 700 से 800 की जनसंख्या पर एक ब्लॉक कलेक्टर ने बताया कि जनगणना के लिए 700 से 800 की जनसंख्या पर एक ब्लॉक बनाया जाएगा। एक ब्लॉक पर एक एन्युमेटर की नियुक्ति की जाएगी। छह एन्युमेटर पर एक सुपरवाइजर रहेगा, जो संबंधित चार्ज अधिकारी को रिपोर्ट करेगा। प्रशिक्षण के दौरान जनगणना 2027 के लिए डेटा कलेक्शन और जांच की प्रक्रिया के संबंध में भी बताया गया। प्रशिक्षण भोपाल से आए संभाग प्रभारी अभिमन्यु अरोरा और जिले के जनगणना प्रभारी जेएल साकेत द्वारा दिया गया। ट्रेनिंग में जिले के सभी एसडीएम, आयुक्त नगर निगम, तहसीलदार तथा सीएमओ उपस्थित रहे।