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पानी पहुंचा तो आई मुस्कान, ठरकपुर में विकास की नई कहानी

रायपुर जल जीवन मिशन से मुंगेली जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर ग्राम ठरकपुर में हर घर नल, हर घर जल का सपना साकार हुआ है। मिशन के अंतर्गत ठरकपुर में पाइपलाइन बिछाकर प्रत्येक घर को नल कनेक्शन प्रदान किया गया है। इसके बाद से गांव में न केवल पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है, बल्कि पानी की गुणवत्ता और नियमितता भी बेहतर हुई है। अब गांव के हर घर में स्वच्छ पेयजल पहुंच रहा है। इसने ठरकपुर की कहानी बदल गई है। कभी पेयजल संकट से जूझने वाले ठरकपुर की तस्वीर आज पूरी तरह बदल चुकी है। एक समय था जब पानी के लिए हैंडपंपों पर लंबी कतारें, मटकों और बाल्टियों के साथ ग्रामीणों की भीड़ तथा गर्मी के दिनों में गांव में जल संकट होता था। पहले पूरा गांव पेयजल के लिए 8 हैंडपंपों के भरोसे था। गर्मियों में जलस्तर गिरने से ये हैंडपंप अक्सर जवाब दे जाते थे, जिससे ग्रामीणों विशेषकर महिलाओं को दूर-दराज के जल स्रोतों से पानी लाने मजबूर होना पड़ता था। ठरकपुर की श्रीमती गंगा यादव बताती हैं कि पहले छोटे बच्चों को घर पर छोड़कर दूर हैंडपंप से पानी लाना पड़ता था। गर्मी में बहुत परेशानी होती थी। अब घर में नल लग गया है, भरपूर पानी मिल रहा है और जीवन आसान हो गया है। नल जल योजना से महिलाओं की मेहनत और समय की बचत हो रही है, जिसे अब वे परिवार, बच्चों की देखभाल और अन्य रचनात्मक कार्यों में लगा पा रही हैं, इससे वहां की महिलाओं के चेहरे में मुस्कान आई है। ठरकपुर में जल जीवन मिशन केवल पानी की व्यवस्था नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, सुविधा और सम्मान का माध्यम बनकर आया है। स्वच्छ जल से बीमारियों में कमी आई है और ग्रामीणों का जीवन स्तर बेहतर हुआ है।

यूपी चुनाव 2027 की जंग शुरू, BJP vs सपा—किसका प्लान पड़ेगा भारी?

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर अब सरगर्मी बढ़ने लगी है। भारतीय जनता पार्टी ने वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीति तैयार की है। इसके तहत 15 दलित महापुरुषों का कैलेंडर तैयार कराया गया है। इनकी जयंती-पूण्यतिथि के बहाने इस समाज के लोगों से सालों भर मुलाकात का कार्यक्रम तैयार किया गया है। इनमें कांशीराम से लेकर संत रविदास तक शामिल हैं। पहले ही भाजपा ने मायावती पर सीधे हमले से परहेज किया है। पार्टी किसी भी दलित महापुरुष और नेता से सीधे उलझती नहीं दिख रही है। यह संदेश जमीन तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। दरअसल, अखिलेश यादव की पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक यानी पीडीए पॉलिटिक्स की काट के तौर पर रणनीति को तैयार किया जा रहा है। योगी आदित्यनाथ सरकार भी समाज के हर वर्ग तक सरकार की योजनाओं के पहुंचाए जाने की जानकारी पहुंचाने की रणनीति में जुटी है। दलित वोट बैंक है जरूरी यूपी की राजनीति में सत्ता की सीढ़ी चढ़ने के लिए दलित वोट बैंक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ अखिलेश यादव यादव, गैर यादव पिछड़ा यानी पीडीए पॉलिटिक्स के जरिए प्रदेश की सत्ता में एक बार फिर वापसी की कोशिशों में जुटे हुए हैं। दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी का प्रयास कर रही है। इसको लेकर पार्टी की ओर से रणनीति को तैयार किया जा रहा है। इसमें दलित वोट बैंक को अहम माना जा रहा है।हाल के वर्षों में दलित वोट बैंक में बिखराव होता दिखा है। वर्ष 2014 से 2019 तक के चुनावों में प्रदेश में मोदी लहर और भाजपा के उफान के बाद भी बहुजन समाज पार्टी दलित वोट बैंक पर कब्जा जमाती दिखी थी। करीब 20 फीसदी के वोट बैंक पर मायावती का कब्जा दिखता रहा था। हालांकि, यूपी चुनाव 2022 के बाद से दलित वोट बैंक छिटकना शुरू हुआ। लोकसभा चुनाव 2024 में मायावती का वोट प्रतिशत प्रदेश में 10 फीसदी के आसपास सिमटता दिखा है। यूपी चुनाव 2022 में योगी-मोदी सरकार की नीतियों, कोरोना काल में अन्न योजना के प्रभाव ने दलित वोट बैंक के एक बड़े हिस्से को भाजपा से जोड़ा। ऐसे में सॉलिड गैर-यादव ओबीसी वोट बैंक में भटकाव से अधिक असर पार्टी को नहीं हुआ। हालांकि, लोकसभा चुनाव में संविधान बदलने के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाकर और पीडीए पॉलिटिक्स के जरिए बसपा से छिटकने वाले दलित वोट के एक बड़े हिस्से को पार्टी के साथ जोड़ने में अखिलेश यादव कामयाब रहे। 2027 के लिए डी पॉलिटिक्स यूपी चुनाव 2027 के लिए भाजपा ने अब दलित पॉलिटिक्स पर जोर देना शुरू कर दिया है। लोकसभा चुनाव में छिटके दलित वोटरों को साधने की रणनीति तैयार की जा रही है। भाजपा ने इसके लिए नए सिरे से सोशल इंजीनियरिंग शुरू कर दी है। पार्टी की रणनीति के केंद्र में दलित महापुरुष, उनकी विरासत और समाज के लोगों से लगातार संवाद है। इस संवाद के जरिए समाज के निचले हिस्से तक पार्टी अपने संदेश और कार्यों को पहुंचाने की तैयारी में है। बीजेपी ने इसके लिए कांशीराम, संत रविदास, संत गाडगे, डॉ. भीमराव अंबेडकर, ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले, उदा देवी, झलकारी बाई, वीरा पासी, लखन पासी, रमाबाई अंबेडकर और अहिल्याबाई होल्कर जैसी करीब 15 दलित और वंचित समाज के महापुरुषों का एक वार्षिक कैलेंडर तैयार किया है। इन महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि पर प्रदेश भर में कार्यक्रमों की श्रृंखला तैयार की गई है। लगातार संपर्क पर जोर बीजेपी नेताओं का कहना है कि समाज के लोगों से लगातार संपर्क पर जोर दिया जा रहा है। अगर हमारे कार्यकर्ता समाज के लोगों से मिलेंगे। उनकी सुख-दुख सुनेंगे। उसको लेकर काम करेंगे तो निश्चित तौर पर स्थिति को फिर से बहाल किया जा सकेगा। भाजपा इन वोटरों के दरवाजे पर बार- बार दस्तक देकर इन्हें फिर से भाजपा के पाले में लाने की कवायद में जुट गई है। लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा 2017 के 62 सीटों के आंकड़े से घटकर 33 पर आ गई थी। रिजर्व सीटों पर पार्टी का प्रदर्शन खराब हुआ। इसके बाद रणनीति में बदलाव होता दिख रहा है।

क्या सुबह देखे गए सपने होते हैं सच? जानिए ब्रह्म मुहूर्त से उनका गहरा संबंध

अक्सर कहा जाता है कि सुबह का सपना सच होता है. हम में से कई लोगों ने बचपन से ही बड़े-बुजुर्गों से यह बात सुनी है. लेकिन क्या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक तर्क है या यह महज एक लोक मान्यता है? विशेषकर ब्रह्म मुहूर्त में देखे गए सपनों को लेकर भारतीय संस्कृति और ज्योतिष शास्त्र में बहुत महत्व दिया गया है. आइए स्वप्न शास्त्र के अनुसार जानते हैं सुबह के सपनों का क्या मतलब है और इनके पीछे छिपा रहस्य क्या है. क्या होता है ब्रह्म मुहूर्त? हिंदू धर्म में ब्रह्म मुहूर्त को दिन का सबसे पवित्र समय माना गया है. यह समय सूर्योदय से लगभग 1 घंटा 36 मिनट पहले शुरू होता है. मान्यता है कि इस दौरान वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा सबसे अधिक होती है और मन शांत एवं निर्मल रहता है. इसलिए इस समय पूजा-पाठ, ध्यान और जप करना बेहद शुभ माना गया है. क्यों खास होते हैं सुबह के सपने? ज्योतिष और स्वप्न शास्त्र के अनुसार, रात के आखिरी पहर यानी ब्रह्म मुहूर्त में देखे गए सपने ज्यादा प्रभावी माने जाते हैं. इसके पीछे कुछ कारण बताए गए हैं. इस समय मन गहरी नींद से हल्की अवस्था में आ जाता है. अवचेतन मन सक्रिय रहता है. आसपास का वातावरण शांत और ऊर्जा से भरपूर होता है. इसी वजह से इस समय देखे गए सपने भविष्य के संकेत माने जाते हैं. शुभ सपनों के संकेत स्वप्न शास्त्र के अनुसार, अगर ब्रह्म मुहूर्त में ये चीजें दिखें तो इसे शुभ माना जाता है.     मंदिर, देवी-देवता या भगवान का दर्शन     साफ पानी या नदी में स्नान     फूल, दीपक या उजाला     सफेद वस्त्र पहने लोग ऐसे सपने सुख, सफलता और शुभ समाचार का संकेत देते हैं. अशुभ सपनों का क्या मतलब? अगर सुबह के समय बुरे या डरावने सपने आएं, जैसे गिरना, रोना, अंधेरा या तूफान, झगड़ा तो इस तरह के सपनों को मानसिक तनाव या आने वाली चुनौती का संकेत माना जाता है. क्या हर सपना सच होता है? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त में देखा गया सपना कुछ ही दिनों में फल दे सकता है. लेकिन आधुनिक विज्ञान इसे मन की कल्पना और मानसिक स्थिति से जोड़कर देखता है. इसलिए हर सपना सच हो, यह जरूरी नहीं है. क्या करें अगर सुबह सपना याद रहे?     भगवान का स्मरण करें.     सकारात्मक रहें और किसी भी डर को मन में न बसने दें.  

टेलरिंग के व्यवसाय में पूजा देवांगन को मिला मजबूत आधार

रायपुर कोरबा जिले की रहने वाली पूजा देवांगन आज आत्मनिर्भरता और नारी सशक्तिकरण की एक प्रेरणादायी मिसाल बन चुकी हैं। सिलाई-कढ़ाई के क्षेत्र में आगे बढ़ने की उनकी इच्छा ने उन्हें लाईवलीहुड कॉलेज कोरबा तक पहुँचाया, जहाँ से उनके जीवन में महत्वपूर्ण परिवर्तन की शुरुआत हुई। उन्होंने सबसे पहले टेलर दर्जी के बेसिक प्रशिक्षण में हिस्सा लिया। यह उनके लिए वह पहला अवसर था, जिसने आगे उनकी प्रगति को गति दी। सात दिवस का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें चार हजार रुपये की स्टाइपेंड राशि और एक लाख रुपये तक का बिना गारंटर लोन प्राप्त हुआ, जिसके सहारे उन्होंने अपने छोटे व्यवसाय के काम को आगे बढ़ाना शुरू किया। अपने कौशल को और निखारने के उद्देश्य से पूजा ने आगे एडवांस टेलर दर्जी प्रशिक्षण में प्रवेश लिया। पंद्रह दिवसीय इस प्रशिक्षण ने उन्हें आधुनिक तकनीकों, नए तरीकों से डिज़ाइन तैयार करने और उन्नत उपकरणों के उपयोग की विस्तृत जानकारी प्रदान की। इस दौरान उन्हें प्रतिदिन पाँच सौ रुपये के मान से कुल साढ़े सात हजार रुपये स्टाइपेंड और एक हजार रुपये यात्रा भत्ता भी मिला। साथ ही उन्हें दो लाख रुपये तक का बिना गारंटर ऋण स्वीकृत होने का लाभ भी प्राप्त हुआ, जिससे उनके बढ़ते व्यवसाय को मजबूत आधार मिला। धीरे-धीरे पूजा ने अपने हुनर को कार्य में बदलना शुरू किया और घर पर ही सिलाई का काम शुरू कर दिया। उनके परिश्रम, प्रशिक्षण से मिले आत्मविश्वास और वित्तीय सहायता ने मिलकर उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाया। आज पूजा अपने परिवार की मजबूती का आधार हैं और अपने व्यवसाय को विस्तार देने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। उनका यह सफर अनेक महिलाओं के लिए भी प्रेरणादायी है कि अवसर, दृढ़ इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन मिल जाए तो हर महिला आत्मनिर्भर बन सकती है और अपने सपनों को साकार कर सकती है।

गर्मियों में पहली बार AC चलाएं तो जरूर करें ये 5 काम

इस बार मौसम ने बहुत जल्द तेवर तीखे कर लिए हैं। आधा फरवरी खत्म ही हुआ है कि दोपहर गर्म महसूस होने लगी है। ऐसा ही चलता रहा, तो कुछ ही दिनों में लोगों को एयर कंडीशनर शुरू करने पड़ेंगे। आप भी ऐसा करें, तो ध्यान रखें कि सीजन की शुरुआत में पहली बार AC ऑन करते समय 5 काम जरूर कर लेने चाहिए। ऐसा न करने पर स्विच ऑन करते ही एयर कंडीशनर में कोई खराबी आ सकती है और कोई न कोई बड़ा खर्चा आपके गले पड़ सकता है। पहली बार AC शुरू करने से पहले उसकी हार्ड या सॉफ्ट सर्विस, कंडेंसर और आउटडोर यूनिट की जांच, ड्रेन पाइप और लीकेज की जांच, वोल्टेज और स्टेबलाइजर सेटअप करना और सही मोड का ध्यान रखना जरूरी होता है। हार्ड या कम से कम सॉफ्ट सर्विस कर लें AC को गर्मियों में पहली बार शुरू करने से पहले सर्विस जरूर करवा लें। किसी वजह से अगर हार्ड सर्विस में देरी हो रही हो तो खुद सॉफ्ट सर्विस कर लें। बता दें कि हार्ड सर्विस टेक्नीशियन जरूरी टूल्स के साथ करते हैं। वहीं सॉफ्ट सर्विस में आप फिल्टर की सफाई, एक खराब टूथब्रश और पानी से कॉइल की सफाई और संभव हो, तो तेज पानी की धार से विडों AC की पीछे से और स्पलिट एसी के आउटडोर युनिट की सफाई कर सकते हैं। कंडेंसर और आउटडोर यूनिट को चेक करें अगर आपके घर में स्पलिट एयर कंडीशनर है, तो उसके कंडेंसर और आउटडोर यूनिट को चेक कर लें। कंडेंसर आउटडोर यूनिट के पीछे मौजूद जाली को कहते हैं, तो कि लंबे समय से बंद पड़े-पड़े धूल-मिट्टी से ब्लॉक हो जाती है। उसे तेज पानी की धार से धो लें। इसके अलावा देखें कि आउटडोर यूनिट सामने या आसपास कम से कम 2-3 फीट तक कोई रुकावट न हो। AC स्विच ऑन करने के बाद गौर करें कि आउटडोर फैन या कंप्रेसर से तेज खड़कड़ाहट की आवाज तो नहीं आ रही है? ड्रेन पाइप और लीकेज की जांच लंबे समय से AC बंद होता है, तो उसमें गंदगी इकट्ठा होने के चलते लीकेज की समस्या आ सकती है। ऐसे में स्प्लिट AC को पहली बार ऑन करने से पहले उसके ड्रेन पाइप को चेक कर लें। स्टेबलाइजर सेटअप करें AC को ऑन करने से पहले चेक करें कि स्टेबलाइजर ठीक से काम कर रहा है या नहीं। इसके अलावा AC के प्लग को भी चेक करें कि कहीं भी तार कटी न हो और न ही AC का प्लग ढीला हो। अगर आप स्टेबलाइजर से जुड़ी AC की तारों को खोलकर उन्हें नए सिरे से कस दें, तो स्टेबलाइजर से जुड़ी कोई समस्या आने की गुंजाइश कम हो जाती है। शुरू में फैन मोड पर चलाएं AC AC को पहली बार शुरू करते समय उसे फैन मोड पर शुरू करें। ऐसे में हो सकता है कि AC के अंदर से कुछ गंदगी बारह आए (अगर AC हार्ड सर्वस नहीं हुआ है, तो) साथ ही अगर AC में किसी तरह की समस्या होगी, तो वह भी फैन मोड पर बिना कंप्रेसर के ऑन हुए पता चल जाएगी। जिससे कंप्रेसर तक खराबी नहीं पहुंच पाती।

विदेशी मेहमानों ने बढ़ाई गिधवा टैंक की शान, मल्लार्ड के आगमन से खिला पर्यटन

रायपुर छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध पक्षी विहार क्षेत्र गिधवा टैंक में इस वर्ष अक्टूबर 2025 में एक खास प्रवासी मेहमान ने दस्तक दी। यह मेहमान है सुंदर और आकर्षक जलपक्षी मल्लार्ड बत्तख, जिसने पहली बार यहां अपना आगमन दर्ज कराया।        लंबी प्रवासी यात्रा पूरी कर आई यह मल्लार्ड गिधवा टैंक के शांत और स्वच्छ वातावरण में सहज रूप से बस गई। यहां उपलब्ध सुरक्षित आवास, भरपूर जल और प्राकृतिक भोजन ने उसे रुकने के लिए अनुकूल माहौल दिया। धीरे-धीरे वह अन्य स्थानीय और प्रवासी पक्षियों के साथ घुल-मिल गई और क्षेत्र का हिस्सा बन गई। गिधवा टैंक अपनी समृद्ध जैव-विविधता और पक्षी प्रेमियों के लिए विशेष पहचान रखता है। मल्लार्ड के आगमन से यह क्षेत्र और भी आकर्षण का केंद्र बन गया है। पक्षी प्रेमी और प्रकृति पर्यवेक्षक इस दुर्लभ अतिथि को देखने और उसके व्यवहार का अध्ययन करने के लिए उत्साहित हैं।       यह इस बात का प्रमाण है कि राज्य में जलाशयों के संरक्षण, स्वच्छता और पर्यावरण सुरक्षा के लिए किए जा रहे प्रयास सफल हो रहे हैं। सुरक्षित और अनुकूल वातावरण मिलने पर प्रवासी पक्षी यहां रुकना पसंद कर रहे हैं। स्थानीय प्रशासन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभागों द्वारा निरंतर संरक्षण कार्य, जनजागरूकता और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के कारण गिधवा टैंक आज प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित आश्रय बन चुका है।        मल्लार्ड का यह आगमन न केवल क्षेत्र की प्राकृतिक समृद्धि को दर्शाता है, बल्कि छत्तीसगढ़ की पारिस्थितिक महत्वता को भी उजागर करता है। यह कहानी बताती है कि जब संरक्षण और संवर्धन के प्रयास लगातार किए जाते हैं, तो प्रकृति भी सकारात्मक परिणाम देती है।

टीबी को न्योता दे रही कमजोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता, पहचानें शुरुआती लक्षण और करें बचाव

सर्दी-खांसी हो या बुखार, कुछ लोग इसे मामूली मानकर लंबे समय तक अनदेखा करते रहते हैं, या फिर कुछ एंटीवायरल दवाओं या घरेलू उपाय से इसे ठीक करने का प्रयास करते हैं। उक्त समस्याओं के साथ अगर अचानक वजन में कमी आ जाए या भूख कम लगे, तो देर किए बगैर विशेषज्ञ से परामर्श करना चाहिए। डॉ. राकेश कुमार, एडि. प्रोफेसर, सेंटर फार कम्युनिटी मेडिसिन, एम्स, नई दिल्ली बताते हैं कि ये सभी टीबी के लक्षण हो सकते हैं। जागरूकता नहीं होने के कारण ही आज टीबी की समस्या तमाम प्रयासों के बावजूद कम नहीं हो रही है। दरअसल, वैश्विक स्तर पर टीबी को 2030 तक और भारत में वर्ष 2025 तक खत्म करने का लक्ष्य रखा गया था, पर बीते कुछ समय से अनेक जगहों पर टीबी मरीजों  की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, टीबी ऐसा संक्रामक रोग है जो दुनियाभर में होने वाली मौत के 10 शीर्ष कारणों में शामिल है। समझें टीबी के जोखिम को टीबी का संक्रमण बड़ी आबादी में हो सकता है, पर वह बीमारी में बदल जाए जरूरी नहीं। प्रतिरोधक क्षमता अच्छी है तो शरीर संक्रमण के खिलाफ कार्य करता है और बीमारी से बचाता है। इसलिए, टीबी का कारण कमजोर प्रतिरोधी क्षमता ही है। यह पोषण की कमी का परिणाम है। मधुमेह, एचआइवी ग्रस्त लोगों में टीबी संक्रमण का जोखिम अधिक रहता है। कितने हैं प्रकार वयस्कों में दो प्रकार के टीबी होतें हैं- पल्मोनरी व एक्स-पल्मोनरी। पल्मोनरी में फेफड़े में संक्रमण होता है। इसके लक्षण खांसी व बुखार हैं। संक्रमण बढ़ने पर वजन में कमी आने लगती है। वहीं, एक्स-पल्मोनरी में फेफड़े के अलावा अन्य अंगों जैसे, हड्डी, पेट, लिंफ नोडस, दिमाग आदि में टीबी हो सकता है। पोषण का रखें ध्यान पोषण की कमी भारत में टीबी के बड़े कारणों में से एक है। खराब खानपान व जीवनशैली से शुगर की शिकायत हो सकती है। यह भी शरीर में पोषण की कमी कर सकता है और आपकी प्रतिरोधी शक्ति कम होने लगती है। इससे टीबी का संक्रमण होना आसान हो जाता है और पर्याप्त ध्यान न दें तो यह जानलेवा भी हो सकता है। बता दें कि यदि खानपान सही है तो टीबी की आशंका कम हो सकती है। इसके अलावा, अल्कोहल व तंबाकू से भी दूरी बनाने का प्रयास करना चाहिए। दो घंटे में रिपोर्ट बच्चों में पहचान कम होती है। जांच में लापरवाही, समाज में टीबी को लेकर गलत धारणाएं इलाज में बड़ी अवरोधक हैं। आज इसका निदान आसान है। दो घंटे में टीबी की रिपोर्ट मिल जाती है व इलाज शुरू कर सकते हैं। कोर्स पूरा करें टीबी के मरीजों के उपचार के लिए प्राय: एंटीबायोटिक दी जाती है। कई मरीजों में देखा गया है कि वे दवा का कोर्स इसलिए भी पूरा नहीं करते क्योंकि दवा लंबे समय तक लेना पड़ता है। कुछ लोग आर्थिक कारण या इसके परिणामों से अनभिज्ञ रहने के कारण दवा बीच में ही छोड़ देते हैं। इससे इलाज और कठिन हो सकता है। दवा प्रतिरोधी होने से इलाज कठिन और अधिक महंगा हो सकता है। ये हैं मुख्य लक्षण     लगातार 2-3 सप्ताह तक खांसी     कभी-कभी कफ में खून आना।     बुखार आना और यह रात में बढ़ जाना।     रात में पसीना आना।     लगातार थकान व कमजोरी     सांस में तकलीफ, सीने में दर्द आदि। बचाव के उपाय     संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क से बचें।     खांसते या छींकते समय रुमाल या टिश्यू पेपर रखें ताकि बैक्टीरिया न फैले।     भीड़ में मास्क का प्रयोग करें।     बच्चों को बीसीजी का टीका लगवाएं।     संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम व पर्याप्त नींद सुनिश्चित करें।     लक्षण दिखें तो इलाज में देरी न करें।  

सड़क दुर्घटनाओं में पीएम राहत योजना से मिलेगी डेढ़ लाख तक की मुफ्त चिकित्सा सुविधा, जबलपुर के 92 अस्पताल होंगे शामिल

जबलपुर  सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को अब सरकारी और निजी अस्पतालों में तुरंत और मुफ्त इलाज मिलेगा. एक्सीडेंट के बाद तुरंत अस्पताल पहुंचने पर शुरुआती डेढ़ लाख का खर्चा सरकार वहन करेगी. यह खर्च प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत दिया जाएगा. इलाज सरकार के द्वारा सूचीबद्ध अस्पतालों में ही होगा. जबलपुर में 92 अस्पतालों को इम्पैनल किया गया |  मरीज की जान बचाना पहली प्राथमिकता एक्सीडेंट होने के बाद शुरुआती समय किसी भी मरीज को बचाने में सबसे महत्वपूर्ण होता है. यदि एक्सीडेंट के तुरंत बाद इलाज शुरू हो जाए तो मरीज को बचाया जा सकता है. लेकिन ऐसा नहीं हो पता क्योंकि निजी अस्पताल इस बात से डरते हैं कि यदि उन्होंने इलाज शुरू कर दिया तो इसका बिल कौन देगा. कई बार मरीज की कोई जानकारी नहीं होती तो वहीं दूसरी समस्या पुलिस की ओर से होती है कि जब तक पुलिस जांच ना कर ले तब तक इलाज शुरू नहीं हो पाता. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा |  एक्सीडेंट में घायल व्यक्तियों के लिए पीएम राहत योजना जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने बताया कि "इन्हीं समस्याओं को खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पीएम राहत योजना शुरू की गई है. इसके तहत एक्सीडेंट के तुरंत बाद जब एंबुलेंस से कोई मरीज किसी अस्पताल पहुंचेगा तो इसी शुरुआती गोल्डन ऑवर में अस्पताल को मरीज को इलाज देना होगा. एक्सीडेंट के मामले में शुरुआती डेढ़ लाख का खर्चा सरकार उठाएगी. इलाज कैशलेस होगा |  जबलपुर के 92 अस्पताल शामिल इस योजना में सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों को भी शामिल किया गया है. जबलपुर में ऐसे 92 अस्पतालों को इम्पैनल किया गया है, जहां एक्सीडेंट के तुरंत बाद घायल का इलाज शुरू हो जाएगा. इसमें किसी को भी इस बात की चिंता नहीं करनी होगी कि इसका पैसा कौन देगा. कलेक्टर राघवेंद्र सिंह का कहना है कि "भले ही घायल आयुष्मान कार्ड धारी है या नहीं है, इसका भी इस योजना पर कोई असर नहीं पड़ेगा और यह पैसा पीएम राहत के माध्यम से भुगतान करवाया जाएगा |  पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन कलेक्टर राघवेंद्र सिंह का कहना है कि "यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी ताकि पुलिस को भी इस मामले की जानकारी हो और यदि पुलिस को कोई कार्रवाई करनी है तो वह भी साथ में होती रहे लेकिन किसी भी स्थिति में घायल का इलाज नहीं रुकेगा |  कलेक्टर राघवेंद्र सिंह का कहना है कि "रोड एक्सीडेंट के मामले में वाहनों का इंश्योरेंस होता है और शासन जो पैसा खर्च करेगा वह पैसा इंश्योरेंस के माध्यम से वसूला जाएगा. वहीं कुछ ऐसे वाहन जिनका बीमा नहीं होता है और यदि वे एक्सीडेंट करते हैं तो इलाज का खर्च राज्य सरकार उठाएगी लेकिन इसकी वसूली का काम शासन का होगा |  घायलों के लिए अच्छा कदम जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने बताया कि "यह बहुत ही अच्छा कदम है आम आदमी को यदि इसकी जानकारी होगी तो बहुत सारे घायलों को बचाया जा सकता है. क्योंकि एक्सीडेंट के मामले में अक्सर लोग मरीजों की मदद करने में डरते हैं कई बार पुलिस परेशान करती है तो कई बार लोगों के पास मदद करने लायक पैसा नहीं होता यदि यह दोनों ही सहूलियत हो जाए तो सड़क पर मरने वालों की संख्या घट सकती है |     

मेहनत, हुनर और आत्मनिर्भरता – रेबेका की सफलता ने लिखी नई कहानी

रायपुर बहुआयामी व्यवसाय से संवरा जीवन, रेबेका बनीं ‘लखपति दीदी’राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित एक गरीबी उन्मूलन परियोजना है। यह योजना स्वरोजगार को बढ़ावा देने और ग्रामीण गरीबों को संगठित करने पर केंद्रित है। इस कार्यक्रम का मूल विचार गरीबों को स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) में संगठित करना और उन्हें स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाना है।     बलरामपुर जिले के ग्राम पंचायत चिलमा की  रेबेका ने आत्मविश्वास, मेहनत और समूह की ताकत से अपनी जिंदगी की दिशा बदल दी है। कभी मजदूरी पर निर्भर उनका परिवार सीमित आय के कारण आर्थिक तंगी से जूझता था, लेकिन आज वही रेबेका बहुआयामी व्यवसाय के जरिए सालाना लगभग 1 लाख 71 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं और क्षेत्र में ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचानी जा रही हैं।          रेबेका ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत स्वयं शक्ति महिला स्व-सहायता समूह से जुड़कर नई शुरुआत की। समूह के माध्यम से उन्हें नियमित बचत, आंतरिक ऋण और स्वरोजगार संबंधी प्रशिक्षण की जानकारी मिली। उन्होंने समूह से ऋण लेकर बागवानी, बकरी पालन, मुर्गी पालन, किराना दुकान संचालन तथा कृषि कार्य जैसे विविध व्यवसाय शुरू किए।         बहुआयामी आजीविका मॉडल अपनाने से उनकी आय के कई स्रोत बने, जिससे आमदनी स्थिर और सतत हुई। आय में वृद्धि के साथ परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है। अब वे बच्चों की शिक्षा, बेहतर पोषण और घर की आवश्यकताओं की पूर्ति सहजता से कर पा रही हैं।       रेबेका बताती हैं कि बिहान से जुड़ने के बाद उन्हें न केवल आर्थिक सहयोग मिला, बल्कि आत्मविश्वास और प्रबंधन कौशल भी विकसित हुआ। आज वे आत्मनिर्भर बनकर अन्य महिलाओं को भी स्वयं सहायता समूह से जुड़कर स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

कबीरधाम में उज्ज्वला 3.0 का असर, 1339 घरों में जले स्वच्छ ईंधन के चूल्हे

रायपुर स्वच्छ रसोई केवल सुविधा नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन और सम्मानजनक जीवनशैली की पहचान है। पारंपरिक चूल्हों के धुएँ से जूझ रही महिलाओं को राहत देने के लिए संचालित उज्ज्वला योजना 3.0 आज गरीब और ग्रामीण परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रही है। इस योजना के माध्यम से महिलाओं को धुएँ से मुक्ति, बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षित रसोई का लाभ मिल रहा है। कबीरधाम जिला में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना 3.0 के तहत 1339 नए गैस कनेक्शन पात्र हितग्राहियों को प्रदान किए गए हैं। इन कनेक्शनों से उन परिवारों को सबसे अधिक राहत मिली है, जो अब तक लकड़ी, उपले या कोयले से खाना बनाने को मजबूर थे। गैस कनेक्शन मिलने से महिलाओं को धुएँ से मुक्ति मिली है और रसोई का काम भी पहले से आसान व सुरक्षित हो गया है। यह योजना प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गरीब परिवारों की महिलाओं को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। योजना के माध्यम से न केवल स्वास्थ्य की रक्षा हो रही है, बल्कि महिलाओं का समय भी बच रहा है, जिसे वे अब बच्चों की पढ़ाई, स्वरोजगार या अन्य उपयोगी कार्यों में लगा पा रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में उज्ज्वला योजना ने सामाजिक बदलाव भी लाया है। पहले जहां महिलाओं को ईंधन के लिए जंगलों में घंटों भटकना पड़ता था, वहीं अब घर बैठे सुरक्षित और स्वच्छ ईंधन उपलब्ध है। इससे महिलाओं की सुरक्षा भी बढ़ी है और जीवन स्तर में सुधार आया है। उज्ज्वला योजना 3.0 के तहत दिए गए ये नए कनेक्शन केवल गैस सिलेंडर नहीं, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य, सम्मान और सुविधाजनक जीवन की ओर बढ़ाया गया एक महत्वपूर्ण कदम हैं। यह योजना वास्तव में महिलाओं के सशक्तिकरण और स्वच्छ भारत के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उज्ज्वला योजना पात्रता के नए मापदंड उज्जवला योजना 3.0 के संबंध में ऐसे सभी व्यक्ति पात्रता होंगे जो 10 हजार रूपये प्रति माह से कम आय अर्जित करते हो, व्यावसायिक कर का भुगतान ना करते हो, आयकर का भुगतान ना करते हो, परिवार का कोई सदस्य शासकीय सेवा में ना हो, पंजीकृत गैर कृषि उद्यम वाला परिवार ना हो, 50,000 रूपये से अधिक की क्रेडिट सीमा वाला किसान क्रेडिट कार्ड धारित ना हो, एक सिंचाई उपकरण के साथ 2.5 एकड़ से अधिक सिंचित भूमि का स्वामी ना हो, दो या अधिक फसल मौसमों के लिए 5 एकड़ या इससे अधिक सिंचित भूमिस्वामी धारक ना हो, कम से कम एक सिंचाई उपकरण के साथ कम से कम 7.5 एकड़ या इससे अधिक भूमि का स्वमी ना हो, 30 वर्ग मीटर से अधिक कारपेट एरिया (चटाई क्षेत्रफल) वाले घर का स्वामी ना हो (किसी भी सरकारी योजना से प्राप्त घर को छोड़कर), मोटर चालित 3/4 पहिया वाहन, मछली पकड़ने वाली नाव का स्वामी ना हो, यंत्रीकृत 3/4 पहिया कृषि उपकरण का स्वामी ना हो, पूर्व से एल.पी.जी. कनेक्शनधारी ना हो।