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टेक जगत में हलचल: एपल के खास इवेंट में हो सकते हैं बड़े लॉन्च

नई दिल्ली एपल एक खास और स्पेशल इवेंट का आयोजन करने वाला है, इस इवेंट में आप लोगों के लिए कई नए प्रोडक्ट्स लॉन्च किए जा सकते हैं. इवेंट के दौरान सस्ते iPhone 17e, नए कम कीमत वाले Macbook, iPad प्रोडक्ट्स की जानकारी मिल सकती है. ऐसा लगता है कि कंपनी स्पेशल Apple एक्सपीरियंस पर फोकस करते हुए एक स्पेशल गैदरिंग कर रही है, इसलिए हो सकता है कि ऑनलाइन इवेंट होस्ट करते या बड़ी घोषणा न की जाए. कंपनी इन डिवाइस को न्यूयॉर्क शहर और दुनिया के दूसरे हिस्सों में कुछ खास लोगों को दिखा सकती है. 9to5Mac और कुछ और सोर्स की रिपोर्ट में इस इवेंट के इनवाइट का जिक्र किया गया है. दावा किया गया है कि Apple iPhone 17e, बजट MacBook, M5 Pro MacBook Pro और कुछ iPad मॉडल्स के अपग्रेड की घोषणा हो सकती है. ये प्रोडक्ट खीचेंगा सबका ध्यान बजट MacBook हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचेगा, उम्मीद है कि मैकबुक का सस्ता मॉडल iPhone 16e की तरह नहीं होगा और लाखों लोगों के लिए ये एक मजबूत ऑप्शन बनेगा. यहां आईफोन 16ई का जिक्र इसलिए किया गया है क्योंकि 16ई लोगों को कुछ खास पसंद नहीं आया है. Apple ने iPhone को कई लोगों के लिए आकर्षक बना दिया है. बजट MacBook की भारत में कीमत लगभग 60,000 हजार रुपए ($599) हो सकती है. अर्फोडेबल मैकबुक मॉडल को ए18 प्रो बायोनिक चिपसेट के साथ लॉन्च किया जा सकता है. इस डिवाइस में 12.9 इंच एलसीडी डिस्प्ले दी जा सकती है और इस मॉडल को ब्लू, येलो और पिंक कलर ऑप्शन्स में ग्राहकों के लिए उतारा जा सकता है. M5 MacBook Pro वर्जन में हार्डवेयर अपग्रेड होने की संभावना है लेकिन फिलहाल इस मॉडल के अगले महीने लॉन्च को लेकर किसी भी तरह का कोई संकेत नहीं मिला है.

लखपति दीदी की प्रेरक कहानी: स्व-सहायता समूह से जुड़कर प्रीति पटेल बनी आत्मनिर्भर

रायपुर शासन की महत्वाकांक्षी ग्रामीण आजीविका मिशन योजना ने आज गांव-गांव की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है। ऐसी ही प्रेरक मिसाल बेमेतरा जिला की  ग्राम धोबानी खुर्द की श्रीमती प्रीति पटेल हैं, जिन्होंने स्व-सहायता समूह से जुड़कर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ की, बल्कि आत्मनिर्भरता की नई पहचान भी बनाई। आज वे “लखपति दीदी” के रूप में जानी जाती हैं और अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं। स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद बदली जिंदगी             श्रीमती प्रीति पटेल बताती हैं कि पूर्व में उनकी आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर थी और परिवार का भरण- पोषण करना कठिन हो रहा था। 01 जून 2018 को वे लक्ष्मी स्व-सहायता समूह से जुड़ीं, जिसके बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत हुई। समूह से जुड़ने के पश्चात उन्हें सामुदायिक निवेश निधि (CIF) के रूप में 60 हजार रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इसके साथ ही बैंक से ऋण लेकर उन्होंने सब्जी उत्पादन एवं बड़ी (पापड़-बड़ी) निर्माण का कार्य प्रारंभ किया। नियमित आय आरंभ होने से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में तेजी से सुधार हुआ। स्वरोजगार से बढ़ी आय, अन्य महिलाओं को भी कर रहीं प्रेरित          प्रीति पटेल ने समूह की सहायता और शासन की योजनाओं के सहयोग से सब्जी उत्पादन के साथ-साथ बकरी पालन एवं गाय पालन का कार्य भी प्रारंभ की। आज वे एक सक्रिय सदस्य के रूप में गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार अपनाने और स्व-सहायता समूह से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनकी वार्षिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और वे आत्मविश्वास के साथ आर्थिक निर्णय लेने में सक्षम हुई हैं। शासन की योजनाओं से मिला संबल              राज्य शासन द्वारा संचालित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन तथा लखपति दीदी अभियान के अंतर्गत महिलाओं को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण एवं विपणन सहयोग प्रदान किया जा रहा है। इन योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना तथा उनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक करना है। प्रीति पटेल ने इन योजनाओं का लाभ उठाकर अपने जीवन की दिशा बदल दी। आवास योजना से मिला पक्का घर             प्रीति पटेल को शासन की आवास योजना का भी लाभ प्राप्त हुआ। बैंक ऋण एवं शासकीय सहायता से उन्होंने अपना पक्का घर बनवाया। वे बताती हैं कि पहले वे कच्चे मकान में रहती थीं, किंतु आज उनके पास स्वयं का पक्का घर है। यह परिवर्तन उनके आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान में वृद्धि का प्रतीक है। महिला सशक्तिकरण की प्रेरक मिसाल              प्रीति पटेल की सफलता यह दर्शाती है कि यदि महिलाएं संगठित होकर स्व-सहायता समूह से जुड़ें और शासन की योजनाओं का लाभ उठाएं, तो वे आर्थिक रूप से सशक्त बनकर अपने परिवार और समाज की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। उनकी यह यात्रा ग्रामीण महिलाओं के लिए आशा, आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास की प्रेरक स्रोत है।

रायपुर : ग्राफ्टेड बैगन से 16 लाख रूपए की आमदनी

रायपुर  रायपुर : ग्राफ्टेड बैगन से 16 लाख रूपए की आमदनी किसान वैज्ञानिक पद्धति, उन्नत बीज और सही मार्गदर्शन के साथ खेती करें, तो कम भूमि में भी अधिक उत्पादन और बेहतर लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इसी कड़ी में मुंगेली जिले के पथरिया विकासखंड के ग्राम करही के किसान चिंतामणि बंजारे ने नवाचार और आधुनिक तकनीक को अपनाकर खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाया है। उन्होंने परंपरागत सब्जी खेती से आगे बढ़ते हुए उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में 10 एकड़ क्षेत्र में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती कर लगभग 1100 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। इस उत्पादन से उन्हें करीब 16 लाख रुपये की आमदनी हुई है।   कृषक चिंतामणी ने बताया कि सामान्य फसल की तुलना में ग्राफ्टेड बैगन में लागत अपेक्षाकृत कम आती है, जबकि उत्पादन अधिक मिलता है, परिणामस्वरूप आय दो से तीन गुना तक बढ़ जाती है। ग्राफ्टेड बैंगन की विशेषता इसकी मजबूत जड़ प्रणाली, रोग प्रतिरोधक क्षमता और अधिक उत्पादन है। पहले वे सामान्य सब्जियों की खेती करते थे, जिसमें लाभ सीमित और जोखिम अधिक था। किंतु उद्यान विभाग के प्रोत्साहन, तकनीकी सलाह और उन्नत पौध सामग्री के उपयोग ने उनकी खेती की दिशा ही बदल दी। उचित सिंचाई प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग और नियमित देखभाल से फसल की गुणवत्ता बेहतर रही, जिससे बाजार में उन्हें अच्छा मूल्य प्राप्त हुआ। आज वे आर्थिक रूप से सशक्त हुए हैं, बल्कि अन्य किसानों को भी उन्नत तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। ग्राफ्टेड बैंगन की खेती ने उनके परिवार की आय बढ़ाने के साथ-साथ गांव में आधुनिक कृषि की नई सोच को भी प्रोत्साहित किया है।

एक्सीडेंट पीड़ितों के लिए बड़ी राहत, ‘PM RAHAT’ में 0 रुपये का बिल और 1.5 लाख तक कवर

नई दिल्ली PM RAHAT Scheme: सड़क हादसे भारत में हर साल हजारों परिवारों की जिंदगी बदल देते हैं. कई बार हादसा जानलेवा इसलिए बन जाता है, क्योंकि घायल को समय पर अस्पताल नहीं मिल पाता या इलाज से पहले पैसों की बात आ जाती है. इसी बड़ी समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने PM RAHAT योजना को मंजूरी दे दी है. इस योजना का मकसद साफ है, सड़क हादसे के शिकार लोगों को बिना किसी देरी और बिना पैसे की चिंता के सही और उचित समय पर इलाज मिल सके.  क्या है PM RAHAT योजना PM RAHAT यानी रोड एक्सीडेंट विक्टिम हॉस्पिटलाइजेशन एंड एश्योर्ड ट्रीटमेंट स्कीम. इसके तहत सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को दुर्घटना की तारीख से 7 दिन तक कैशलेस इलाज (Cashless Treatment) की सुविधा मिलेगी. इलाज पर अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का खर्च सरकार की तरफ से कवर किया जाएगा. मरीज की जेब से एक रुपया भी नहीं लिया जाएगा. स्वास्थ्य आंकड़े बताते हैं कि, अगर घायल को पहले एक घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो सड़क हादसों में होने वाली करीब आधी मौतों पर लगाम लगाई जा सकती हैं. इस समय को गोल्डन आवर कहा जाता है. अक्सर अस्पताल में भर्ती होने में देरी इसलिए होती है, क्योंकि पैसे और पेमेंट को लेकर असमंजस रहता है. PM RAHAT योजना इसी समस्या को खत्म करने की कोशिश है. योजना में एक और बड़ी दिक्कत को माना गया है. हादसे के बाद आसपास मौजूद लोग कानूनी झंझट के डर से मदद करने से कतराते हैं. PM RAHAT में ऐसे मददगारों को राहवीर या गुड समैरिटन कहा गया है. इसका मतलब है कि जो व्यक्ति घायल की मदद करेगा, उसे कानूनी परेशानियों से डरने की जरूरत नहीं होगी. न उसे किसी कानूनी पचड़े में पड़ना होगा और न ही उसके जेब से पैसे खर्च होंगे. 112 पर कॉल, सीधे मदद हादसे के समय पीड़ित खुद, कोई राहगीर या मौके पर मौजूद कोई भी व्यक्ति 112 नंबर पर कॉल कर सकता है. इस कॉल के जरिए नजदीकी तय अस्पताल की जानकारी मिलेगी और एंबुलेंस बुलाई जा सकेगी. यह पूरा सिस्टम इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम से जुड़ा है, जिससे पुलिस, एंबुलेंस और अस्पताल आपस में तालमेल से काम कर सकें. योजना के तहत सभी तरह की सड़कों पर हादसे में घायल लोग कवर होंगे. चाहे वो किसी भी शहर की कोई भी सड़क होग. अगर चोट गंभीर नहीं है, तो 24 घंटे तक का स्टेबलाइजेशन इलाज मिलेगा. अगर जान को खतरा है, तो यह समय 48 घंटे तक बढ़ जाएगा. दोनों ही हालात में 7 दिन तक का पूरा इलाज कवर रहेगा. पुलिस की पुष्टि तय समय सीमा में डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए जरूरी होगी. डिजिटल सिस्टम से होगा पूरा काम PM RAHAT योजना दो मौजूदा सरकारी डिजिटल सिस्टम पर बेस्ड है. एक सिस्टम हादसे की पूरी जानकारी दर्ज करता है और दूसरा इलाज और भुगतान से जुड़ा काम संभालता है. पहला है इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट यानी eDAR, जिसे केंद्रीय सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ऑपरेट करता है और दूसरा सिस्टम है ट्रांजैक्शन मैनेजमेंट सिस्टम TMS 2.0, जिसकी जिम्मेदारी नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के पास है. इन दोनों सिस्टम का मकसद यह है कि एक्सीडेंट की सूचना मिलते ही पूरी जानकारी एक ही लाइन में आगे बढ़े.  हादसे की रिपोर्ट, अस्पताल में भर्ती, इलाज, क्लेम डालना और फिर अस्पताल को पेमेंट, सब कुछ इसी डिजिटल सिस्टम के जरिए किया जाए, ताकि इलाज में देरी न हो और किसी को बार बार दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें. अस्पतालों को इलाज का पैसा मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड से मिलेगा. अगर हादसे में शामिल वाहन का बीमा है, तो पेमेंट बीमा कंपनियों के फंड से होगा. हिट एंड रन या बिना बीमा वाले मामलों में केंद्र सरकार बजट से पैसा देगी. क्लेम मंजूर होने के बाद 10 दिन के भीतर अस्पताल को भुगतान करने का वादा किया गया है. अगर योजना से जुड़ी कोई शिकायत होती है, तो उसका निपटारा जिला सड़क सुरक्षा समिति के तहत किया जाएगा. इसकी जिम्मेदारी जिला कलेक्टर या जिला मजिस्ट्रेट के स्तर पर होगी. इससे लोगों को अलग से किसी दफ्तर के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. PM RAHAT योजना में परिवहन, स्वास्थ्य, बीमा और पुलिस विभाग को एक साथ लाया गया है. इसका असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अस्पताल कितनी संख्या में जुड़ते हैं, 112 नंबर कितनी तेजी से काम करता है और पुलिस के कन्फर्मेशन में इलाज में देरी तो नहीं होती. जिला स्तर पर ये प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ती है और इसे कैसे लागू किया जाता है. आने वाले समय में साफ हो जाएगा कि यह योजना सड़क हादसों में जान बचाने में कितनी कारगर साबित होती है.

प्लेयर्स ऑक्शन का बिग डे: 12 मार्च को तय होगा 63 पाकिस्तानी खिलाड़ियों का भविष्य

नई दिल्ली इंग्लैंड की क्रिकेट लीग द हंड्रेड की नीलामी के लिए पाकिस्तान के 63 खिलाड़ियों ने अपना नाम रजिस्टर करवाया है। इसमें टी20 के कप्तान सलमान अली आगा के साथ ही शाहीन अफरीदी, सैम अयूब और उस्मान तारिक जैसे नाम शामिल हैं। लीग के ऑक्शन में 710 खिलाड़ी शामिल होंगे। भारत को छोड़कर अन्य सभी देशों के खिलाड़ियों ने ऑक्शन के लिए अपना नाम दिया है। पाकिस्तानी खिलाड़ी को इग्नोर करेंगी 6 फ्रेंचाइजी द हंड्रेड की 8 में से 6 फ्रेंचाइजी के मालिकों का कनेक्शन भारत से है। इसमें लंदन स्पिरिट, एमआई ओवल, मैनचेस्टर सुपरजायंट्स, सदर्न ब्रेव, सनराइजर्स लीड्स और वेल्श फायर शामिल हैं। इंग्लिश मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार भारत से कनेक्शन वाले फ्रेंचाइजी पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर बोली नहीं लगाएंगे। बीबीसी की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है- अगले महीने होने वाली हंड्रेड नीलामी के लिए भारत से मालिक पाकिस्तानी क्रिकेटरों को लेने पर विचार नहीं कर रही है। शाहीन अफरीदी, सैम अयूब, सलमान आगा और उस्मान खान के साथ ही ऑक्शन में रजिस्टर करने वाले टॉप खिलाड़ियों में शादाब खान, हारिस रऊफ, मुहम्मद नवाज, नसीम शाह शामिल हैं। इनके बेस प्राइस 1,00,000 पाउंड स्टर्लिंग यानी करीब 1.22 करोड़ रुपये हैं। अबरार अहमद, मुहम्मद आमिर, जमान खान, उस्मान तारिक ने अपने बेस प्राइस 75 हजार पाउंट स्टर्लिंग रखी है। फहीम अशरफ, शाहिबजादा फरहान, उसामा मीर, इमाद वसीम, अब्बास अफरीदी, अफाक अफरीदी और आसिफ अफरीदी 50 हजार पाउंड स्टर्लिंग कैटेगरी में हैं। 12 मार्च को होगा ऑक्शन का आयोजन द हंड्रेड के लिए खिलाड़ियों की नीलामी 12 मार्च को होनी है। पुरुष द हंड्रेड में एक फ्रेंचाइजी 16 से 18 खिलाड़ी रख सकती है। वहीं महिलाओं की टूर्नामेंट में 15 खिलाड़ी एक फ्रेंचाइजी रख सकती है। द हंड्रेड अपने तरह का एक फॉर्मेट है। इसमें एक टीम को 100 गेंद खेलने के लिए ही मिलती हैं। 2021 में इसकी शुरुआत हुई थी। पिछले सीजन पाकिस्तान के तीन ही खिलाड़ियों ने इस टूर्नामेंट में हिस्सा लिया था।

अब दिल बोलेगा पहले: एआई तकनीक बताएगी हार्ट अटैक का संकेत समय रहते

नई दिल्ली हृदय रोग-हार्ट अटैक हर साल दुनियाभर में लाखों लोगों की मौत का कारण बन रहा है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) की रिपोर्ट के मुताबिक अकेले साल 2023 में, कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों (सीवीडी) की वजह से दुनिया भर में लगभग 19.2 मिलियन (1.92 करोड़) लोगों की मौत हो गई, इसमें इस्केमिक हार्ट डिजीज के कारण 24 करोड़ लोग प्रभावित हुए। भारतीय आबादी में भी हृदय रोगों की समस्याएं तेजी से बढ़ती जा रही हैं, जिसको लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार चिंता जताते रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं,  भारत में स्थिति और भी चिंताजनक है, यहां तेजी से बदलती जीवनशैली, तनाव, गड़बड़ खानपान, मोटापा, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसे कारक हृदय रोगों के खतरे को बढ़ा रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि कई मामलों में हार्ट अटैक अचानक होता है और मरीज को पहले से कोई स्पष्ट चेतावनी नहीं मिलती। अच्छी खबर ये है कि आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) ऐसे मामलों में नई उम्मीद बनकर उभर रहा है।  हार्ट अटैक के जोखिमों का पहले से अनुमान लगाने में एआई को मददगार माना जा रहा है। साइलेंट हार्ट अटैक का पता लगाने वाला एआई टूल अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट्स में हमने बताया है कि गर्भधारण को आसान बनाने के साथ, कैंसर जैसी बीमारियों का पता लगाने तक के लिए एआई को तैयार किया जा रहा है। इसी क्रम में अब विशेषज्ञों की टीम एक ऐसे एआई टूल के बारे में जानकारी दी है जो इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी) के जरिए दिल के सिग्नल रिकॉर्ड करने में मदद करता है।     एआई एल्गोरिदम उन पैटर्न को एनालाइज करते हैं जिससे पता चल सकता है कि कहीं आपको पहले से कोई साइलेंट हार्ट अटैक तो नहीं हुआ है?     एक छोटा इलेक्ट्रॉनिक पैड ईसीजी के जरिए पिछले अटैक का पता लगा सकता है, इसे मोबाइल फोन पर एआई से जोड़ा जा सकता है।     इस डिवाइस और एआई टूल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसकी मदद से डॉक्टरों को ऐसे मरीजों का पता लगाने में मदद मिल सकती है जो पहले साइलेंट हार्ट अटैक का शिकार रहे चुके हैं।     ऐसे मरीजों का समय पर इलाज करके दूसरी बार हार्ट को रोकने और जान बचाने में मदद मिल सकती है। साइलेंट हार्ट अटैक होता है खतरनाक साइलेंट हार्ट अटैक या साइलेंट मायोकार्डियल इन्फार्क्शन हृदय की गंभीर समस्या मानी जाती है। इसमें रोगी को दिल का दौरा तो पड़ता है पर उसे लक्षण महससूस नहीं होते।     इस तरह के हार्ट अटैक में सीने में तेज, हाथों में दर्द या सांस फूलने जैसे आम चेतावनी के संकेत नहीं दिखते हैं।     जिन लोगों को ये होते हैं, उनमें से अधिकतर लोग मेडिकल मदद नहीं लेते, जिससे दिल की मांसपेशियों को होने वाला नुकसान समय के साथ चुपचाप बढ़ता रहता है।     इससे भविष्य में हार्ट फेलियर, हार्ट अटैक से जान जाने का खतरा काफी बढ़ जाता है।     उम्रदराज लोगों, डायबिटीज के शिकार, हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल वाले मरीजों में साइलेंट मायोकार्डियल इन्फार्क्शन का खतरा अधिक देखा जाता रहा है। कैंसर के मरीजों में हार्ट अटैक का पता लगाने वाला टूल हृदय रोग और हार्ट अटैक के बढ़ते जोखिमों के बीच एआई टेक्नोलॉजी को गेम-चेंजर के तौर पर देखा जा रहा है। एआई और दिल की बीमारियों के खतरे को कम करने की दिशा में एक अन्य खोज में यूके स्थित लीसेस्टर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके कैंसर मरीजों में सेकेंडरी हार्ट अटैक के खतरे का पता लगाने के लिए एक नया टूल बनाया है।     कमजोर कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम की वजह से कैंसर के  मरीजों में  हार्ट अटैक का खतरा अधिक रहता है।     अब तक, डॉक्टरों के पास ऐसे मरीजों के इलाज में गाइड करने के लिए कोई स्टैंडर्ड टूल नहीं था     अब विशेषज्ञों ने पहले से ही खतरे को बताने वाला मॉडल विकसित किया है, जो खास तौर पर उन कैंसर मरीजों के लिए मददगार हो सकता है जिनमें दिल की बीमारियों का जोखिम ज्यादा होता है।     ONCO-ACS नाम का यह टूल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके कैंसर से जुड़े फैक्टर्स को स्टैंडर्ड क्लिनिकल डेटा के साथ मिलाकर छह महीने के अंदर कार्डियक घटना का अनुमान लगा सकता है। जन्मजात हृदय रोगा वाल बच्चों के लिए एआई टूल एक अन्य खोज में  माउंट सिनाई क्राविस चिल्ड्रन्स हार्ट सेंटर के शोधकर्ताओ ने ऐसा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल विकसित करने के बारे में जानकारी दी है, जो जन्मजात हृदय रोग के शिकार बच्चों के लिए मददगार साबित हो सकती है।     कई अन्य संस्थानों के साथ मिलकर विशषज्ञों ने जो टूल तैयार किया है वह  टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट वाले मरीजों में हार्ट की समस्या, हार्ट डैमेज का पता लगाने में मदद कर सकती है।     टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट का पता अक्सर जन्म के तुरंत बाद चल जाता है। इसके कारण आपके बच्चे की त्वचा नीली या ग्रे दिख सकती है। स्टेथोस्कोप से बच्चे के दिल की धड़कन सुनते समय फुसफुसाहट जैसी आवाज (हार्ट मर्मर) आती है।     यह टूल स्टैंडर्ड इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी) को एनालाइज कर सकता है ताकि जोखिमों का पता लगाया जा सके। आमतौर पर इस खतरे का पता लगाने के लिए कार्डियक एमआरआई की जरूरत होती है।  

Nothing का डबल सरप्राइज़: 5 मार्च को Phone 4a और 4a Pro की होगी एंट्री

नई दिल्ली लंदन बेस्ड टेक ब्रांड नथिंग मार्च में अपने दो नए स्मार्टफोन को भारत में लॉन्च करने जा रहा है. कंपनी के सीईओ कार्ल पेई ने खुद सोशल मीडिया पर 5 मार्च की तारीख का ऐलान किया है. माना जा रहा है कि इस इवेंट में Nothing Phone 4a और Phone 4a Pro लॉन्च किए जा सकते हैं. इसके साथ ही कंपनी नए ओवर-ईयर हेडफोन भी पेश कर सकती है. चलिए जानते हैं इनकी डिटेल्स के बारे में… Carl Pei ने X पर पोस्ट करते हुए 5 मार्च को लॉन्च इवेंट की घोषणा की. खास बात यह रही कि यह इवेंट 4 मार्च को होने वाले Apple के स्पेशल एक्सपीरियंस के ठीक अगले दिन रखा गया है. एपल का इवेंट लंदन, न्यूयॉर्क और शंघाई में आयोजित होगा, जबकि नथिंग ने डिजिटल अंदाज में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है. नथिंग का न्योता काफी अलग और बोल्ड स्टाइल में सामने आया है. एपल के मिनिमलिस्ट इनवाइट पर पंक-रॉक अंदाज में गुलाबी ग्रैफिटी स्टाइल ओवरले किया गया, जिसमें 5 मार्च की नई तारीख लिखी गई. यह अंदाज साफ बताता है कि कंपनी खुद को परंपरागत ब्रांड्स से अलग और युवा सोच के करीब रखना चाहती है. Nothing Phone 4a सीरीज से क्या उम्मीद? कंपनी ने आधिकारिक तौर पर डिवाइस की जानकारी नहीं दी है, लेकिन हालिया टीजर और लीक से संकेत मिल रहे हैं कि Nothing Phone 4a और Nothing Phone 4a Pro लॉन्च हो सकते हैं. दोनों फोन में UFS 3.1 स्टोरेज मिलने की बात कही जा रही है, जिससे डेटा स्पीड बेहतर हो सकती है. इसके अलावा बैटरी पिछले मॉडल की तुलना में थोड़ी बड़ी हो सकती है, जिससे बैकअप बेहतर मिलने की उम्मीद है. कंपनी इन फोन्स को 8GB रैम और 128GB स्टोरेज वेरिएंट में लॉन्च कर सकती है. स्टैंडर्ड मॉडल ब्लैक और व्हाइट रंग में आ सकता है, जबकि Pro वेरिएंट ब्लैक और सिल्वर ऑप्शन में उपलब्ध हो सकता है. Snapdragon पावर और Geekbench परफॉर्मेंस रिपोर्ट्स के मुताबिक, Nothing Phone 4a Pro में क्वालकॉम का नया Snapdragon 7s Gen 4 चिपसेट दिया जा सकता है. यह प्रोसेसर मिड-रेंज सेगमेंट में दमदार परफॉर्मेंस के लिए जाना जाता है. हाल ही में यह मॉडल गीकबेंच पर भी देखा गया, जहां इसके स्कोर ने ध्यान खींचा. गीकबेंच टेस्ट में डिवाइस ने सिंगल प्रिसिजन टेस्ट में 707, हाफ प्रिसिजन में 1,077 और क्वांटाइज्ड टेस्ट में 1,265 अंक हासिल किए. ये आंकड़े बताते हैं कि फोन डेली यूज, मल्टीटास्किंग और गेमिंग के लिहाज से मजबूत साबित हो सकता है. हालांकि असली परफॉर्मेंस लॉन्च के बाद ही साफ होगी. Nothing Headphone (a) से ऑडियो मार्केट पर नजर स्मार्टफोन के अलावा कंपनी नए ओवर-ईयर हेडफोन भी पेश कर सकती है, जिन्हें Nothing Headphone (a) नाम दिया जा सकता है. यह कदम कंपनी की ऑडियो कैटेगरी में विस्तार की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. पिछले मॉडल Nothing Headphone 1 को अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी, जिसके बाद कंपनी इस सेगमेंट में और मजबूती से उतरना चाहती है. रिपोर्ट्स के अनुसार, Nothing 2026 तक और भी ओवर-ईयर हेडफोन लॉन्च करने की योजना बना रही है. ऐसे में 5 मार्च का इवेंट केवल स्मार्टफोन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह कंपनी के इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है.

बच्चों के खराब या टूटे खिलौने रखना हो सकता है अशुभ, दान करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की हर छोटी-बड़ी वस्तु सकारात्मक या नकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। बच्चों के खिलौने, जो उनके बचपन का अहम हिस्सा होते हैं और जिनसे उनकी भावनाएं जुड़ी होती हैं, वास्तु की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने गए हैं। अक्सर हम बच्चों के पुराने या टूटे हुए खिलौनों को स्टोर रूम में भर देते हैं या बिना सोचे-समझे किसी को दान कर देते हैं। वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि खिलौनों का सही रखरखाव न केवल बच्चे के मानसिक विकास को प्रभावित करता है, बल्कि घर की सुख-शांति पर भी असर डालता है। आइए जानते हैं टूटे हुए खिलौनों से जुड़े वास्तु नियम और दान करने से पहले ध्यान रखने योग्य बातें। वास्तु शास्त्र में कबाड़ या टूटी हुई वस्तुओं को राहु और शनि की नकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है। विकास में बाधा: टूटे हुए खिलौने बच्चे की रचनात्मकता और विकास में अवरोध पैदा करते हैं। यह उनके स्वभाव में चिड़चिड़ापन और एकाग्रता की कमी ला सकते हैं। मानसिक तनाव: खिलौने खुशी का प्रतीक हैं। जब वे टूट जाते हैं, तो वे खंडित ऊर्जा उत्सर्जित करते हैं, जिससे घर के सदस्यों के बीच तनाव बढ़ सकता है। दुर्घटना का भय: वास्तु के अलावा, सुरक्षा की दृष्टि से भी टूटे खिलौने खतरनाक होते हैं। इनके नुकीले हिस्से बच्चे को चोट पहुंचा सकते हैं। क्या करें टूटे हुए खिलौनों का ? यदि खिलौना थोड़ा बहुत टूटा है और उसे ठीक किया जा सकता है, तो उसे तुरंत ठीक करवाएं। यदि वह ठीक होने की स्थिति में नहीं है, तो उसे घर से बाहर निकाल देना ही बेहतर है। अक्सर लोग टूटे खिलौनों को यह सोचकर स्टोर रूम या पलंग के नीचे रख देते हैं कि 'बाद में देखेंगे'। यह घर में भारीपन और नकारात्मकता लाता है।  टूटे हुए रिमोट कंट्रोल कार या रोबोट वास्तु में दोष पैदा करते हैं। इन्हें कबाड़ में दे देना चाहिए या रीसायकल करना चाहिए।

जांजगीर का रहस्यमयी विष्णु मंदिर, कलचुरी काल की अमर धरोहर

रायपुर जांजगीर का रहस्यमयी विष्णु मंदिर, कलचुरी काल की अमर धरोहर छत्तीसगढ़ के जांजगीर नगर में स्थित विष्णु मंदिर, जिसे स्थानीय रूप से ‘नकटा मंदिर’ भी कहा जाता है, प्रदेश की महत्वपूर्ण पुरातात्विक एवं सांस्कृतिक धरोहरों में गिना जाता है। महानदी अंचल की ऐतिहासिक भूमि पर निर्मित यह मंदिर अपनी अधूरी संरचना के कारण सदियों से जिज्ञासा और आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। कलचुरी काल की स्थापत्य विरासत इतिहासकारों के अनुसार इस मंदिर का निर्माण 11वीं-12वीं शताब्दी में कलचुरी शासकों के काल में प्रारंभ हुआ था। उस समय छत्तीसगढ़ क्षेत्र कला, स्थापत्य और धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था। मंदिर की संरचना नागर शैली में निर्मित है, जिसमें ऊँचा शिखर, अलंकृत गर्भगृह तथा सुसज्जित मंडप की परिकल्पना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। हालांकि निर्माण कार्य किसी अज्ञात कारण से अधूरा रह गया, किंतु जो संरचना आज विद्यमान है, वह उस युग की समृद्ध कला और स्थापत्य कौशल का जीवंत प्रमाण प्रस्तुत करती है। अद्वितीय शिल्पकला और सूक्ष्म नक्काशी मंदिर की दीवारों, स्तंभों और आधार भागों पर की गई बारीक नक्काशी अत्यंत आकर्षक है। इनमें विभिन्न पौराणिक प्रसंग, देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ, गंधर्व, अप्सराएँ और अलंकारिक रूपांकन उकेरे गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मूर्तियों के अनुपात, भाव-भंगिमा और अलंकरण शैली से तत्कालीन शिल्पियों की उच्च कोटि की दक्षता का परिचय मिलता है। प्रत्येक आकृति मानो किसी कथा का दृश्य रूपांतरण हो, जो भारतीय धर्म और संस्कृति की गहराई को अभिव्यक्त करता है। अधूरापन: रहस्य और किंवदंती मंदिर के अधूरे रह जाने को लेकर कई मत प्रचलित हैं। कुछ इतिहासकार इसे राजनीतिक अस्थिरता या सत्ता परिवर्तन से जोड़ते हैं, जबकि स्थानीय लोककथाओं में इसे दैवीय संकेत या अलौकिक कारणों से संबंधित बताया जाता है। यद्यपि सटीक कारणों का स्पष्ट प्रमाण उपलब्ध नहीं है, किंतु यही अधूरापन इस मंदिर को विशिष्ट पहचान प्रदान करता है। यह अधूरी रचना भी पूर्ण सौंदर्य का अनुभव कराती है और दर्शकों को इतिहास के उस कालखंड में ले जाती है, जब कला और आस्था का अद्भुत संगम हुआ करता था। आस्था और पर्यटन का प्रमुख केंद्र आज यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का स्थल होने के साथ-साथ पर्यटकों और शोधकर्ताओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान में इस मंदिर का विशेष स्थान है। पुरातात्विक महत्व के कारण इसे संरक्षित स्मारक के रूप में देखा जाता है और प्रदेश के पर्यटन मानचित्र पर भी यह महत्वपूर्ण पड़ाव है। मंदिर परिसर में खड़े होकर ऐसा प्रतीत होता है मानो समय ठहर गया हो और पत्थरों में इतिहास बोल रहा हो। विरासत जो अधूरी होकर भी पूर्ण है जांजगीर का विष्णु मंदिर यह संदेश देता है कि विरासत केवल पूर्ण संरचनाओं में ही नहीं, बल्कि अधूरी कहानियों में भी जीवित रहती है। इसकी भव्यता, शिल्प और रहस्य आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते रहेंगे। अधूरा होकर भी यह मंदिर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना में पूर्ण रूप से प्रतिष्ठित है, और यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।

राज्यसभा चुनाव की तैयारी तेज: महाराष्ट्र में 7 सीटों पर 16 मार्च को वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूल

 मुंबई महाराष्ट्र में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, क्योंकि राज्य से सात राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव की अधिसूचना बुधवार को जारी कर दी गई है। सदस्यों के चुनाव के लिए 16 मार्च को होगा। इस बात की जानकारी रिटर्निंग ऑफिसर विलास अठवाले ने दी। उन्होंने बताया कि नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 5 मार्च है। इसके बाद 6 मार्च को नामांकनों की जांच (स्क्रूटनी) होगी और 9 मार्च तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकते हैं। बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य इस चुनाव में मतदान करेंगे। राज्य से सात राज्यसभा सांसदों की अवधि अप्रैल में समाप्त हो रही है, जिसमें एनसीपी प्रमुख शरद पवार भी शामिल हैं। अभी तक पवार ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि वे पुनः उम्मीदवार होंगे या नहीं। ऐसे में यदि आवश्यकता हुई, तो 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक विधान भवन में मतदान होगा और उसके बाद मतगणना की जाएगी। राज्यसभा का चुनाव कैसे होता है? राज्यसभा के सदस्य का चुनाव उस राज्य की विधानसभा के चुने हुए विधायक करते हैं, जिस राज्य से वह उम्मीदवार है। राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया लोकसभा और विधानसभा चुनाव से काफी अलग है, क्योंकि इस सदन के लिए मतदान सीधे जनता नहीं करती, बल्कि जनता के द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि करते हैं। राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल छह साल का होता है। राज्यसभा चुनावों के नतीजों के लिए एक फॉर्मूला भी तय किया गया है। जीतने के लिए कितने वोट की जरूरत? गौरतलब है कि महाराष्ट्र के फॉर्मूला के हिसाब से यहां किसी उम्मीदवार को जिताने के लिए कम से कम 37 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। विधानसभा के मौजूदा संख्याबल के मुताबिक सत्ताधारी गठबंधन सात में छह सीटों  पर आसानी से जीत दर्ज कर सकता है। विपक्ष एकजुट नहीं होता तो सातवें उम्मीदवार के लिए मुकाबला रोचक हो सकता है।   राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन में मिलकर काम करने का संकल्प लिया भारत निर्वाचन आयोग और राज्य चुनाव आयोगों का राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन मंगलवार 24 फरवरी 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में संपन्न हुआ। यह सम्मेलन 27 वर्षों के बाद आयोजित किया गया था और इसमें 30 राज्यों के राज्य चुनाव आयोगों ने भाग लिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में हुए इस सम्मेलन में चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी भी उपस्थित रहे। सम्मेलन में राज्य चुनाव आयुक्तों ने इस आयोजन की सराहना की और इसे सफल बताया। सभी ने हर साल ऐसे राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन आयोजित करने का संकल्प लिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में सभी ने राष्ट्रीय घोषणा 2026 को अपनाया। घोषणा में जोर दिया गया कि शुद्ध मतदाता सूची तैयार करना लोकतंत्र की मजबूत नींव है और चुनावों का पारदर्शी तथा सुचारू संचालन लोकतांत्रिक संस्थाओं को और मजबूत बनाता है।