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बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के अंतर्गत महिला बाल विकास विभाग की नई पहल

‘सरस्वती अभियान’ से शिक्षा की मुख्यधारा में पुन: आएगी शाला त्यागी बालिकाएँ बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के अंतर्गत महिला बाल विकास विभाग की नई पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव 10 मार्च को भोपाल में करेंगे ‘सरस्वती अभियान’ का शुभारंभ भोपाल  प्रदेश में शाला त्यागी बालिकाओं को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग ने बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ योजनांतर्गत ‘सरस्वती अभियान’ की शुरुआत की है। इस नवाचार के माध्यम से वे बालिकाएँ जो किसी सामाजिक, पारिवारिक या आर्थिक कारण से विद्यालय छोड़ चुकी हैं, उन्हें फिर से शिक्षा से जोड़कर आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने का प्रयास किया जाएगा। राज्य स्तर पर इस अभियान को नई दिशा देने के लिए 10 मार्च को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शामिल होंगे। कार्यक्रम में शाला त्यागी बालिकाओं को पुनः शिक्षा से जोड़ने के लिए विभाग की कार्य योजना और नवाचारों की जानकारी भी दी जाएगी। अभियान में राज्य ओपन स्कूल प्रणाली के माध्यम से बालिकाओं को कक्षा 8वीं, 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में शामिल होने का अवसर दिया जाएगा। उन्हें अध्ययन सामग्री, मार्गदर्शन, संपर्क कक्षाएँ और मेंटोरिंग की सुविधा भी प्रदान की जाएगी, ताकि वे अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें और आगे की शिक्षा या रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकें। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार प्रदेश में बड़ी संख्या में बालिकाएँ कक्षा 8वीं, 10वीं या 12वीं से पहले ही विद्यालय छोड़ देती हैं। शिक्षा छूटने के बाद उन्हें पढ़ाई जारी रखने का अवसर नहीं मिल पाता, जिससे उनकी शिक्षा अधूरी रह जाती है और उनके भविष्य के अवसर सीमित हो जाते हैं। ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में यह समस्या अधिक गंभीर रूप में सामने आती है। चुनौती को ध्यान में रखते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा शुरू किए जा रहे सरस्वती अभियान के अंतर्गत शाला त्यागी बालिकाओं की पहचान के लिए सर्वेक्षण किया जाएगा, उन्हें राज्य ओपन स्कूल में नामांकित किया जाएगा। परीक्षा की तैयारी के लिए अध्ययन सामग्री और शैक्षणिक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही मेंटोरिंग और काउंसलिंग के माध्यम से बालिकाओं को परीक्षा में सफल होने के लिए निरंतर सहयोग दिया जाएगा। अभियान के तहत परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली बालिकाओं को प्रमाण-पत्र प्रदान कर आगे की शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य न केवल बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ना है, बल्कि उनमें आत्मविश्वास और आत्मसम्मान का विकास करना भी है। अभियान बालिका शिक्षा की दर बढ़ाने, ड्रॉप-आउट दर कम करने और महिला सशक्तिकरण को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को रोकने में भी यह अभियान प्रभावी साबित हो सकता है। सरस्वती अभियान के माध्यम से शिक्षा से वंचित बालिकाओं को नया अवसर मिलेगा और वे न केवल अपने जीवन को बेहतर बना सकेंगी, बल्कि परिवार और समाज के विकास में भी सक्रिय भूमिका निभा सकेंगी।  

OPS पर फिर गरमाई बहस: 8वें वेतन आयोग में क्या बहाल होगी पुरानी पेंशन योजना?

नई दिल्ली केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए पेंशन सुधार को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही कर्मचारी संगठनों ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) को पूरी तरह बहाल करने की मांग दोबारा उठाई है। कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि नई प्रणालियों में पेंशन की निश्चितता नहीं है, इसलिए सरकार को कर्मचारियों की पुरानी व्यवस्था वापस लानी चाहिए। क्या है डिटेल कर्मचारी संगठनों केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और श्रमिकों का परिसंघ और अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी संघ (AIDEF) ने इस संबंध में अपनी मांगें राष्ट्रीय परिषद-संयुक्त परामर्श तंत्र (NC-JCM) की स्टाफ साइड की ड्राफ्टिंग कमेटी को सौंप दी हैं। यूनियनों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि नेंशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और हाल ही में लाई गई यूनिफाइड पेंशन सिस्टम (UPS) दोनों को खत्म कर फिर से OPS लागू किया जाए। दरअसल, UPS को लेकर कर्मचारियों की प्रतिक्रिया उम्मीद से काफी कम रही है। सरकार ने संसद में जानकारी दी थी कि 30 नवंबर 2025 तक सिर्फ 1,22,123 केंद्रीय कर्मचारियों ने ही UPS को चुना है। इसमें नए भर्ती कर्मचारी, मौजूदा कर्मचारी और कुछ सेवानिवृत्त कर्मचारी भी शामिल हैं। जबकि कुल पात्र कर्मचारियों की संख्या लगभग 23 से 25 लाख मानी जाती है। यानी कुल कर्मचारियों में से केवल 4–5% ने ही UPS को अपनाया है। यूनियन नेताओं ने क्या कहा यूनियन नेताओं का कहना है कि यह कम संख्या इस बात का संकेत है कि कर्मचारियों को नई पेंशन व्यवस्था पर भरोसा नहीं है। उनका तर्क है कि OPS में कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद अंतिम वेतन का करीब 50% पेंशन और उस पर महंगाई भत्ता (DA) भी मिलता था। जबकि NPS में पेंशन बाजार के रिटर्न पर निर्भर करती है, जिससे भविष्य की आय अनिश्चित हो जाती है। हालांकि सरकार का रुख अब तक साफ रहा है। सरकार का कहना है कि OPS को दोबारा लागू करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार के मुताबिक NPS लंबी अवधि में सरकारी खजाने पर पड़ने वाले पेंशन के भारी बोझ को संतुलित करने के लिए जरूरी है। इसी कारण NPS को पूरी तरह खत्म करने के बजाय सरकार ने बीच का रास्ता निकालते हुए UPS का विकल्प दिया, जिसमें न्यूनतम पेंशन का कुछ भरोसा दिया गया है। सबसे बड़ा पेंशन का मुद्दा अब जब 8वें वेतन आयोग की चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं, तो माना जा रहा है कि पेंशन का मुद्दा सबसे बड़ा विवादित विषय बन सकता है। कर्मचारी संगठन इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की तैयारी में हैं, जबकि सरकार वित्तीय संतुलन का हवाला दे रही है। ऐसे में आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि वेतन आयोग की सिफारिशों में पेंशन व्यवस्था को लेकर क्या बड़ा बदलाव सामने आता है।

हरियाणा: बीजेपी नेता के बेटे एकांश ढुल बने यूपीएससी के थर्ड टॉपर, पिछली बार मिला था 295वां रैंक

चंडीगढ़  यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (यूपीएसई) की तरफ से सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट जारी कर दिया गया है. हरियाणा के भाजपा नेता के बेटे एकांश ढुल का देश भर में तीसरा रैंक हासिल किया है।जानकारी के अनुसार, भाजपा नेता कृष्ण ढुल के बेटे एकांश ढुल पहले भी दो बार यूपीएससी में चयनित हो चुके हैं और लगातार उन्होंने तीसरी बार चयन हुआ है। पंचकूला के सेक्टर-12 के रहने वाले भाजपा नेता कृष्ण ढुल के बेटे एकांश ने पिछली बार 2025 में यूपीएएसपी एग्जाम में 295वीं रैंक हासिल की है. वहीं, 2024 में एकांश ने 342वीं रैंक हासिल किया था. हालांकि, अब उन्होंने लंबी छलांग लगाते हुए अब तीसरा रैंक हासिल किया है।  2024 में एकांश ने 342वीं रैंक हासिल किया था. हालांकि, अब उन्होंने लंबी छलांग लगाते हुए अब तीसरा रैंक हासिल किया है। गौर रहे कि एकांश ढुल ने चंडीगढ़ के भवन विद्यालय सेक्टर-27 से 10वीं और सेंट कबीर स्कूल सेक्टर-26 से 12वीं की पढ़ाई की थी और फिर इसके बाद श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स दिल्ली से बीए ऑनर्स की पढ़ाई पूरी की है और दिल्ली में कोचिंग भी ली थी. वह लगातार यूपीएएसी का एग्जाम दे रहे थे और थर्ड टॉपर बने हैं. उधऱ, सीएम नायब सिंह सैनी ने एकांश ढुल के पिता कृष्ण ढुल को फोन पर बधाई दी. इस दौरान सीएम ने एकांश ढुल की मां से भी फोन पर बात की और कहा कि वह घर आकर बेटे को बधाई दें. एकांश ढुल के पिता कृष्ण ढुल ने सीएम से कहा कि आपके भतीजे ने हरियाणा का नाम रौशन किया है. आपकी सरकार ने बिना खर्ची और पर्ची के बिना नौकरियां मिल रही हैं। कौन हैं एकांश के पिता कृष्ण ढुल गौरतलब है कि कांश के पिता कृष्ण ढुल भाजपा के वरिष्ठ नेता है और माता निर्मल ढुल राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल सेक्टर-19 पंचकूला में बतौर प्रिंसिपल हैं. कृष्ण ढुल हरियाणा राज्य चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के पूर्व जनरल सेक्रेटरी भी रहे हैं और अभी भाजपा प्रवक्ता हैं. इसके अलावा, हरियाणा आर्चरी एसोशिएसन के अध्यक्ष भी हैं।

किसानों की खुशहाली को मिला बल, अंतर राशि से शिक्षा और आवास कार्य को सहारा

रायपुर  कृषक उन्नति योजना से सशक्त हो रहे अन्नदाता मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ऐसी प्रभावी नीतियों को अमल में लाया है, जिनसे अन्नदाताओं के जीवन में स्थायी और व्यापक परिवर्तन दिखाई दे रहे हैं। इन पहलों ने न केवल किसानों की आय और आत्मविश्वास को सुदृढ़ किया है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति और मजबूती प्रदान की है। सुशासन की प्रतिबद्धता को साकार करते हुए कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में धान विक्रय करने वाले किसानों को अंतर राशि का एकमुश्त भुगतान किया गया है।      मुख्यमंत्री साय की मंशा के अनुरूप यह सुनिश्चित किया गया कि होली पर्व से पूर्व किसानों के खातों में राशि अंतरित की जाए, ताकि वे अपने परिवार के साथ त्यौहार हर्षोल्लास और सम्मान के साथ मना सकें। शासन के इस संवेदनशील निर्णय से कोरबा जिले के किसानों में विशेष उत्साह का माहौल है।      कोरबा जिले के ग्राम दादरखुर्द निवासी कृषक शैलेन्द्र कुमार थवाईत ने इस वर्ष लगभग 32 क्विंटल धान का विक्रय किया, जिसके एवज में उन्हें 23 हजार 392 रुपये की अंतर राशि प्राप्त हुई। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार का यह निर्णय किसानों के हित में है और सही समय पर मिली राशि से उन्हें बड़ी राहत मिली है। वे इस राशि का उपयोग बच्चों की शिक्षा तथा उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने में करेंगे, जिससे उत्पादन क्षमता और आय दोनों में वृद्धि होगी।      इसी प्रकार ग्राम कल्दामार के कृषक जिमी राठिया ने कहा कि होली से पूर्व राशि प्राप्त होना उनके लिए किसी उपहार से कम नहीं है। उन्होंने बताया कि प्राप्त धनराशि का उपयोग घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति तथा प्रधानमंत्री आवास के निर्माण कार्य में किया जाएगा। शासन द्वारा समयबद्ध भुगतान किए जाने को उन्होंने किसानों के प्रति संवेदनशीलता का प्रतीक बताया।      कृषकों ने उन्होंने मुख्यमंत्री साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ शासन के इस संवेदनशील और समयबद्ध निर्णय से किसानों के जीवन में स्थिरता और सुरक्षा की भावना बढ़ी है।  सरकार का यह प्रयास किसानों की समृद्धि ही प्रदेश की समग्र प्रगति का आधार है।

बिहान योजना से मिली नई उड़ान, जानकी बनीं सफल महिला उद्यमी

रायपुर : महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल जानकी बिहान योजना से मिली नई उड़ान, जानकी बनीं सफल महिला उद्यमी बिहान योजना :सरकारी योजनाओं के सहारे जानकी ने बदली अपनी और गांव की तस्वीर रायपुर जब महिलाएं सशक्त होती हैं, तो वे अद्भुत काम कर सकती हैं। वे शिक्षा प्राप्त कर सकती हैं, किसी भी क्षेत्र में काम कर सकती हैं और अपने लिए निर्णय ले सकती हैं। इससे न केवल उन्हें लाभ होता है, बल्कि परिवार और समुदाय भी मजबूत होते हैं। महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसालें यह दर्शाती हैं कि शिक्षा, दृढ़ संकल्प और आर्थिक स्वतंत्रता से महिलाएं न केवल अपना भाग्य बदल सकती हैं, बल्कि समाज में भी क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकती हैं।               धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड के ग्राम खर्रा की निवासी जानकी की सफलता की कहानी आज महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल बन चुकी है। कभी एक साधारण गृहिणी के रूप में खेती-बाड़ी में परिवार का सहयोग करने वाली जानकी आज एक सफल व्यवसायी के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। उनकी इस उपलब्धि के पीछे ग्रामीण आजीविका मिशन की ‘बिहान’ योजना से मिला मार्गदर्शन और उनकी निरंतर मेहनत है।       जानकी ने जय मां गायत्री महिला स्व-सहायता समूह से जुड़कर आर्थिक गतिविधियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। समूह के माध्यम से उन्हें बचत, बैंकिंग और स्व-रोजगार के अवसरों के बारे में जागरूकता मिली। इसके बाद उन्होंने सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) से प्राप्त ऋण की सहायता से कपड़ा व्यवसाय की शुरुआत की। मेहनत और ग्राहकों के विश्वास से उनका व्यवसाय धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया।       समूह के बैंक लिंकेज के माध्यम से अतिरिक्त ऋण प्राप्त कर उन्होंने अपने व्यवसाय का विस्तार करते हुए फैंसी स्टोर की शुरुआत की। इसके बाद मुद्रा योजना के तहत ऋण लेकर उन्होंने जूते-चप्पल की दुकान भी खोल ली। वर्तमान में उनके व्यवसाय में कपड़े, फैंसी सामग्री और जूते-चप्पल की बिक्री होती है, जिससे उन्हें हर माह अच्छी आमदनी प्राप्त हो रही है और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।       जानकी केवल स्वयं ही आत्मनिर्भर नहीं बनीं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन गई हैं। वे खेती-बाड़ी समूह की अध्यक्ष, ग्राम संगठन (वीओ) की अध्यक्ष तथा बीआरसी सदस्य के रूप में सक्रिय भूमिका निभाते हुए महिलाओं को बचत, स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनके प्रयासों से गांव की कई महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी कर रही हैं।      जानकी की सफलता यह दर्शाती है कि यदि महिलाओं को सही अवसर, प्रशिक्षण और सहयोग मिले तो वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार सकती हैं, बल्कि पूरे समाज में सकारात्मक बदलाव की मजबूत मिसाल भी बन सकती हैं।

नेचर कैंप मड हाउस से बढ़ेगा ईको-टूरिज्म, स्थानीय लोगों के लिए खुलेंगे रोजगार के अवसर

रायपुर नेचर कैंप मड हाउस से स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में बारनवापारा अभ्यारण्य के पास स्थित देवपुर रेंज में ईको-पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नए नेचर कैंप मड हाउस (मिट्टी के घर) शुरू किए गए हैं। ये घर पारंपरिक तरीके से मिट्टी और प्राकृतिक सामग्रियों से बने हैं, जो सैलानियों को प्रकृति के करीब रहने का अनूठा और शांत अनुभव प्रदान करते हैं।  नेचर कैंप मड हाउस से स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार           बलौदाबाजार वनमंडल के देवपुर वन परिक्षेत्र में ईको-पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘नेचर कैंप मड हाउस’ का शुभारंभ किया गया। यह पहल वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पाण्डे के विशेष प्रयासों से शुरू की गई है। इससे स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे। गौरतलब है कि नेचर कैंप मड हाउस को प्राकृतिक संसाधनों और पारंपरिक शैली से तैयार किया गया है। यहां आने वाले पर्यटकों को प्रकृति के करीब रहने का अनूठा अनुभव मिलेगा। इस पहल का उद्देश्य पर्यावरण अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देना और स्थानीय लोगों की आय के स्थायी साधन विकसित करना है। इस परियोजना के संचालन में स्थानीय वन प्रबंधन समिति और स्व-सहायता समूहों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।               इसी क्रम में बारनवापारा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के पर्यटन ग्राम में एक आधुनिक रिसेप्शन भवन का भी शुभारंभ किया गया। पर्यटन विभाग की ओर से यहां पर मड हाउस मॉडल बनाए गए हैं। इन मड हाउस में ठहरने वालों को प्रकृति और ग्रामीण परिवेश का पूरा आनंद मिलेए इसकी व्यवस्था की गई है। बारनवापारा में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक रिसेप्शन भवन भी बनाए गए हैं। इन तमाम सुविधाओं और व्यवस्थाओं से स्थानीय लोगों की आय में वृद्धि होगी, उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा, बेरोजगारी भी कम होगी।               इस नए कैंप को स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक निर्माण शैली के साथ तैयार किया गया है। मिट्टी, लकड़ी और प्राकृतिक सामग्री से बने मड हाउस पर्यावरण के अनुकूल हैं। आसपास के जंगल के साथ पूरी तरह घुलते.मिलते नजर आने वाले ये मड हाउस पर्यटकों को आकर्षित करेंगे। वन विभाग का उद्देश्य है, कि पर्यटन हो लेकिन प्रकृति पर दबाव कम से कम पड़े। इस केंद्र के माध्यम से आने वाले पर्यटकों को अभ्यारण्य की जैव विविधता, वन्यजीवों और प्राकृतिक विरासत की जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने बताया कि वन मंत्री केदार कश्यप की मंशा के अनुरूप वन विभाग ऐसे विकास कार्यों को प्राथमिकता दे रहा है, जिनमें वन संरक्षण और स्थानीय विकास का संतुलन बना रहे।               इस अवसर पर वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर सहित विभागीय अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। यह पहल देवपुर क्षेत्र को ईको-पर्यटन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

गावस्कर ने की अक्षर पटेल की जमकर तारीफ, बोले– भारत के महान खिलाड़ियों में शामिल होने की राह पर

नई दिल्ली पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर का मानना ​​है कि अक्षर पटेल क्रिकेट के हर विभाग में अपने शानदार कौशल और क्रिकेट की बहुत अच्छी समझ रखने के कारण भारत के महानतम खिलाड़ियों में से एक बनने की राह पर हैं। इसकी एक बानगी इंग्लैंड के खिलाफ टी20 विश्व कप सेमीफाइनल में देखने को मिली जिसमें उन्होंने अपनी शानदार फील्डिंग से प्रभावित किया। अक्षर पटेल ने खेल के दो अलग-अलग लेकिन महत्वपूर्ण चरणों में खतरनाक हैरी ब्रूक और विल जैक्स को आउट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अक्षर ने कवर पोजीशन से 24 मीटर पीछे दौड़कर शानदार कैच लेकर ब्रूक को पवेलियन भेजा। इसके बाद अर्शदीप सिंह की वाइड फुल टॉस गेंद को जैक्स ने डीप पॉइंट की ओर खेला। अक्षर ने अपनी बाईं ओर दौड़कर गेंद को लपका लेकिन सीमा रेखा पर संतुलन नहीं बना पाने के कारण उन्होंने उसे शिवम दुबे की तरफ उछाल दिया। गावस्कर ने स्टार स्पोर्ट्स पर कहा, ‘अक्षर ने ब्रूक का जो कैच लिया वह अविश्वसनीय था। ब्रूक मैच का रुख बदल सकते हैं और उनका विकेट हासिल करने का हर मौका भुनाना चाहिए। अक्षर ने वही किया। वह 24 मीटर दौड़े, गेंद पर नजर रखी, खुद पर नियंत्रण बनाए रखा और कैच लपक लिया। अविश्वसनीय।’ उन्होंने कहा, ‘विल जैक्स को आउट करने में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई। (जैकब) बेथेल और जैक्स की साझेदारी मैच को इंग्लैंड के पक्ष में कर रही थी। लेकिन अक्षर अपनी बाईं ओर दौड़े, गेंद पकड़ी और चतुराई दिखाकर उसे शिवम दुबे के पास पहुंचा दिया। इससे उनकी क्रिकेट की समझ और अच्छी सूझबूझ का पता चलता है।’ गावस्कर ने कहा, ‘शीर्ष स्तर पर आपकी सूझबूझ और जज्बा ही महान खिलाड़ियों को अन्य खिलाड़ियों से अलग करता है। अपनी बल्लेबाजी और गेंदबाजी के दम पर अक्षर भारत के महान खिलाड़ियों में से एक बनने जा रहे हैं।’ गावस्कर ने कहा कि रवींद्र जडेजा के टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद अक्षर ने उनकी जगह को अच्छी तरह से भर दिया है। इस पूर्व सलामी बल्लेबाज ने कहा, ‘उनसे पहले हमारे पास रवींद्र जडेजा थे और अक्षर उनकी कमी को बखूबी पूरा कर रहे हैं। उनकी गेंदबाजी में थोड़ा और निखार की जरूरत है। अनुभव के साथ यह आ जाएगा। उनकी लाइन, लेंथ और गति में निरंतर सुधार हो रहा है।’ गावस्कर ने इसके अलावा जसप्रीत बुमराह की तारीफ करते हुए कहा, ‘जसप्रीत बुमराह जैसे तेज गेंदबाज सदियों में एक बार पैदा होते हैं। वह सभी प्रारूप में खेलते हैं। इसलिए चाहे टेस्ट मैच हो या वनडे या फिर टी20 आप उन्हें गेंद दे दीजिए और वह अपना काम बखूबी निभाएंगे।’

तेन्दूपत्ता संग्राहकों को साप्ताहिक खरीदी के तीसरे दिन किया जाएगा भुगतान

रायपुर तेन्दूपत्ता संग्रहण से पहले शाखा-कर्तन कार्य के लिए कार्यशाला तेन्दूपत्ता की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ाने के लिए संग्रहण (मार्च-अप्रैल) से पहले फरवरी-मार्च में वैज्ञानिक तरीके से शाखा-कर्तन किया जाता है। इस प्रक्रिया में झाड़ियों की कटाई-छंटाई की जाती है, जिससे नई कोमल पत्तियां (फड़) निकलती हैं, जो बीड़ी उद्योग के लिए उच्च गुणवत्ता वाली होती हैं।              वनमंडलाधिकारी कोरिया ने कहा कि छत्तीसगढ़ में तेन्दूपत्ता को हरा सोना कहा जाता है। यह कार्य ऐसे समय में होता है जब ग्रामीण और संग्राहकों के पास अन्य रोजगार कम होते हैं, इसलिए यह उनके लिए आय का महत्वपूर्ण साधन बनता है। उन्होंने निर्देश दिए कि तेन्दूपत्ता खरीदी का भुगतान साप्ताहिक खरीदी के तीसरे दिन तक अनिवार्य रूप से किया जाए, ताकि संग्राहकों को समय पर लाभ मिल सके। कोरिया वनमंडल अंतर्गत जिला लघु वनोपज सहकारी यूनियन मर्यादित बैकुंठपुर द्वारा तेन्दूपत्ता संग्रहण कार्य से पहले शाखा-कर्तन (बूटा कटाई) के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला बैकुंठपुर स्थित गेज रोपणी परिसर में आयोजित की गई। इसमें कोरिया वनमंडल के अंतर्गत आने वाली 17 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के 16 इकाइयों के फड़मुंशी, प्रबंधक, पोषक अधिकारी, फड़ अभिरक्षक सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए।  तेन्दूपत्ता संग्रहण से पहले शाखा-कर्तन कार्य के लिए कार्यशाला             परिक्षेत्र अधिकारी सोनहत जिला कोरिया वनमंडल ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार तेन्दूपत्ता संग्रहण से पहले शाखा-कर्तन का कार्य कराया जाता है, जिससे बेहतर गुणवत्ता का पत्ता प्राप्त हो सके। यह कार्य प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के माध्यम से मार्च के प्रथम और द्वितीय सप्ताह में अनिवार्य रूप से पूरा किया जाएगा। साथ ही फड़मुंशी और फड़ अभिरक्षकों को उनके कर्तव्यों और जिम्मेदारियों की जानकारी भी दी गई। शाखा-कर्तन कार्य के लिए निर्धारित राशि के अनुसार 70 रुपये प्रति मानक बोरा भुगतान किया जाएगा, जिसका भुगतान समिति के पोषक अधिकारी और प्रबंधक द्वारा संयुक्त रूप से कार्य पूरा होने के तुरंत बाद किया जाएगा। परिक्षेत्र अधिकारी देवगढ़ ने तेन्दूपत्ता बूटा कटाई की तकनीकी जानकारी देते हुए फड़ों के चयन, शाखा-कर्तन की प्रक्रिया, तेन्दूपत्ता तोड़ाई, गड्डी बांधने तथा संग्रहण केंद्र में खरीदी की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया। प्राथमिक वनोपज सहकारी समिति पटना के प्रबंधक ने भी तेन्दूपत्ता संग्रहण से लेकर क्रेता को पत्ता सुपुर्द करने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी। कार्यक्रम में जिला यूनियन कोरिया के अध्यक्ष ने अधिकारियों और कर्मचारियों को उच्च गुणवत्ता का तेन्दूपत्ता संग्रहित करने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर परिक्षेत्र अधिकारी सोनहत अजीत सिंह ने कोरिया वनमंडल की गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 के तेन्दूपत्ता सीजन के लिए वनमंडल की सभी लॉट अग्रिम निवर्तन में पहले ही विक्रय हो चुकी हैं इस अवसर पर उप प्रबंध संचालक अखिलेश मिश्रा, तकनीकी अधिकारी सी.पी. पटेल सहित वनमंडल के अधिकारी-कर्मचारी, फड़ अभिरक्षक, फड़मुंशी, समिति के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, अग्रिम क्रेता के प्रतिनिधि और स्व.सहायता समूहों के सदस्य उपस्थित रहे।

सारस संरक्षण को नई उड़ान: मैनपुरी और इटावा में विकसित होगा सारस सर्किट

लखनऊ योगी सरकार प्रदेश के राजकीय पक्षी सारस (क्रेन) के संरक्षण और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए सारस सर्किट की स्थापना कर रही है। सारस सर्किट का विकास प्रदेश के मैनपुरी और इटावा जिलों के वेटलैंड्स में किया जा रहा है, जिसके तहत मैनपुरी के किर्थुआ, सहस, कुर्रा जरावां, सौज एवं समन के साथ इटावा के सरसई नावर और परौली रामायण वेटलैंड एरिया में सारस सर्किट विकसित किया जा रहा है। सारस सर्किट में सारस पक्षी के संरक्षण के साथ इको-टूरिज्म की गतिविधियों को भी शामिल किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य सारस पक्षी और वेटलैंड्स संरक्षण के साथ स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा देना है। यह स्थानीय लोगों को आय के अवसर उपलब्ध करवाएगा और सारस पक्षी और वेटलैंड्स के संरक्षण के लिए भी प्रेरित करेगा। इन परियोजनाओं का विकास ईको-टूरिज्म विकास बोर्ड के माध्यम से प्रदेश का वन विभाग कर रहा है। दुनिया में सबसे लंबी उड़ान के लिए जाना जाने वाला सारस पक्षी, उत्तर प्रदेश का राजकीय पक्षी है। इसका आवास और प्रजनन क्षेत्र विशेषतौर पर राज्य के मैनपुरी, इटावा, एटा, अलीगढ़ की वेटलैड्स में है। जिसे ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार सारस पक्षी के संरक्षण के लिए सारस सर्किट का विकास कर रही है। जहां प्रदेश का वन विभाग, यूपी ईको टूरिज्म विकास बोर्ड के माध्यम से क्षेत्र के उथले जलाशयों, तालाबों और अन्य वेटलैड्स को संरक्षित कर सारस पक्षी के अनुकूल बनाने का प्रयास कर रहा है। साथ ही क्षेत्र में ईको टूरिज्म की गतिविधियों को भी विकसित किया जा रहा है। इस क्रम में मैनपुरी और इटावा जिलों के सारस सर्किट में प्रवेश द्वार, व्यू पॉइंट, डेक एवं बोटिंग स्पॉट, बटरफ्लाई गार्डन, सोलर साइट लाइटिंग, इंटरप्रिटेशन सेंटर, पार्किंग जैसी सुविधाओं का विकास किया जाएगा। साथ ही, सारस सर्किट में पर्यटकों की सुविधा के लिए सूचना केंद्र, ईको-टॉयलेट ब्लॉक, पार्किंग, इंटरैक्टिव साइनेज, फूड कियोस्क और ओडीओपी व स्मृति चिन्ह की दुकानें भी विकसित की जाएंगी। ये सुविधाएं पर्यटकों को सारस के प्राकृतिक आवास को देखने और समझने का अवसर प्रदान करेंगी। योगी सरकार की यह पहल न केवल सारस (क्रेन) और अन्य पक्षियों जैसे ग्रे हेरॉन, ओपन-बिल्ड स्टॉर्क आदि की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, बल्कि क्षेत्र के वेटलैंड्स के संरक्षण को भी बढ़ावा देगी। यह इन क्षेत्रों में भू-जल स्तर में वृद्धि के साथ ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों को कम करने और सतत विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगा। साथ ही, इन क्षेत्रों में इको-टूरिज्म की गतिविधियों के विकास से स्थानीय समुदाय के लोगों को आय और रोजगार के अवसर मिलेंगे। इससे स्थानीय लोगों और घूमने के लिए आने वाले पर्यटकों में भी पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता में बढ़ोतरी होगी। सारस पक्षी को उसके प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षा और संरक्षण प्रदान कर योगी सरकार क्षेत्र की जैव विविधता को संजोने का अनूठा प्रयास कर रही है। ये परियोजनाएं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सतत विकास की अवधारणा को सफल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

त्योहार पर भी कर्तव्य निभाते रहे वनकर्मी, होली पर जंगलों की सुरक्षा में तैनात

रायपुर सोनाखान के जंगलों में लगी आग पर पाया काबू वन केवल हमारी प्रकृति की सुंदरता नहीं बढ़ाते, बल्कि जलवायु संतुलन, जैव विविधता और जीवन के लिए आवश्यक संसाधन भी प्रदान करते हैं। छत्तीसगढ़ के जंगलों की सुरक्षा और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए वन विभाग लगातार सतर्कता के साथ कार्य कर रहा है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्री अरुण कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में वन अग्नि प्रबंधन को लेकर प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं।            होली के त्यौहार के दौरान भी वन विभाग की टीम पूरी मुस्तैदी से अपने दायित्वों का निर्वहन करती रही। जब पूरा प्रदेश होली के उत्सव में व्यस्त था, उस समय वनकर्मी जंगलों को आग से बचाने के लिए फील्ड में तैनात रहे। बीती रात बलौदाबाजार वनमंडल के सोनाखान परिक्षेत्र अंतर्गत कसडोल-कोठारी मार्ग पर देवतराई और पौड़ी के बीच जंगल में आग लगने की सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और आग बुझाने की कार्रवाई शुरू की।        स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वनमंडलाधिकारी श्री धम्मशील गणवीर स्वयं मौके पर पहुंचे और टीम का नेतृत्व करते हुए आग पर काबू पाया। स्थानीय रेंज अधिकारी और बीट प्रभारियों ने फायर लाइन बनाकर, फायर बीटर और अन्य संसाधनों की मदद से आग को फैलने से रोक दिया। वनमंडलाधिकारी ने मौके पर मौजूद वनकर्मियों का उत्साह बढ़ाते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। वन विभाग का उद्देश्य बेहतर प्रबंधन, जागरूकता और जनसहभागिता के माध्यम से वनों को आग से सुरक्षित रखना और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करना है।