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खामेनेई के बेटे मोजतबा बने ईरान के नए सुप्रीम लीडर

नई दिल्ली. अमेरिका और इजरायल के खिलाफ छिड़ी भीषण जंग के बीच ईरान ने अपना सर्वोच्च नेता चुन लिया है। अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद अब उनके बेटे मोजतबा खामेनेई यह जिम्मेदारी संभालेंगे। सोमवार को ईरान की तरफ से यह ऐलान होते ही पूरी दुनिया में कोहराम मच गया है। अब इस बात को लेकर चर्चाएं तेज हैं कि आखिर इस युद्ध को लेकर मोजतबा का रुख क्या होगा और वह अमेरिका और इजरायल के साथ-साथ देश के लोगों में उठे असंतोष की भावना का जवाब कैसे देंगे। इससे पहले ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की रमजान के महीने में मौत होने के बाद देश की सत्ता की बागडोर को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं। खामेनेई के उत्तराधिकारी के रूप में सबसे प्रमुख नाम उनके बेटे मोजतबा खामेनेई का ही था, जिन्हें लंबे समय से ईरान की सत्ता व्यवस्था के भीतर प्रभावशाली व्यक्ति माना जाता है। कौन हैं मोजतबा खामेनेई? मोजतबा खामेनेई को अपेक्षाकृत मध्य-स्तरीय धर्मगुरु माना जाता है और उन्हें 2022 में ही अयातुल्ला की उपाधि दी गई थी, जो सर्वोच्च नेता बनने के लिए आवश्यक मानी जाती है। इसीलिए कई विश्लेषकों ने इसे उन्हें अली खामेनेई के उत्तराधिकारी के रूप में तैयार किए जाने का संकेत माना था। मोजतबा ने अपने अधिकतर राजनीतिक जीवन में कोई औपचारिक सरकारी पद नहीं संभाला, लेकिन वह सर्वोच्च नेता के कार्यालय के भीतर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। उन्हें अक्सर सत्ता के गलियारों में प्रभावशाली 'पावर ब्रोकर' और 'गेटकीपर' के रूप में देखा जाता रहा है। बताया जाता है कि 17 वर्ष की उम्र में उन्होंने ईरान-इराक युद्ध में संक्षिप्त रूप से हिस्सा लिया था। हालांकि उन्हें व्यापक सार्वजनिक पहचान 1990 के दशक के आखिर में मिली, जब उनके पिता अली खामेनेई की सर्वोच्च नेता के रूप में स्थिति मजबूत हो चुकी थी। 2019 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने मोजतबा खामेनेई पर प्रतिबंध लगाए थे और आरोप लगाया था कि वे बिना किसी औपचारिक सरकारी पद के भी सर्वोच्च नेता की ओर से प्रभावी भूमिका निभा रहे थे। आईआरजीसी से करीबी समय के साथ उनकी पहचान दो प्रमुख पहलुओं से जुड़ी रही है। पहला, ईरान की सुरक्षा व्यवस्था, विशेष रूप से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) और उससे जुड़े कट्टरपंथी नेटवर्क के साथ उनके करीबी संबंध। दूसरा, सुधारवादी राजनीति और पश्चिमी देशों के साथ करीबी संबंधों के प्रति उनका कड़ा विरोध। आलोचक उन्हें 2009 के विवादित राष्ट्रपति चुनाव के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों के दमन से भी जोड़ते हैं। माना जाता है कि उन्होंने ईरान के सरकारी प्रसारण संगठन पर भी गहरा प्रभाव बनाए रखा, जिससे उन्हें देश के सूचना तंत्र और सरकारी विमर्श के एक हिस्से पर अप्रत्यक्ष नियंत्रण मिला। कैसे होगी ईरान की नीति? विशेषज्ञों का मानना है कि मोजतबा खामेनेई के सर्वोच्च नेता बनने पर ईरान की नीतियों में बड़े बदलाव की संभावना कम है। माना जाता है कि उनके नेतृत्व में देश की राजनीति में सुरक्षा संस्थानों, खासकर आईआरजीसी का प्रभाव और मजबूत हो सकता है। विश्लेषकों के अनुसार घरेलू स्तर पर विरोध प्रदर्शनों के प्रति सख्त रुख अपनाया जा सकता है, जबकि विदेश नीति में पश्चिमी देशों के साथ बातचीत मुख्य रूप से रणनीतिक जरूरतों के आधार पर ही की जा सकती है। कुल मिलाकर, उनके नेतृत्व में ईरान की नीति रणनीतिक रूप से व्यावहारिक रह सकती है। खामेनेई की नियुक्ति इस बात का भी इशारा है कि ईरान किसी भी हाल में अमेरिकी मांगों के आगे नहीं झुकेगा और वह अपने पिता के सख्त रवैये को जारी रखेंगे, यानी इस्लाम और अमेरिका विरोधी विदेश नीति को सबसे ऊपर रखना। वहीं 28 फरवरी के हमलों में अपने पिता, मां और पत्नी को खोने वाले मोजतबा बदला लेने की कोशिशें भी कर सकते हैं। युद्ध फिलहाल जारी रहेगा।

राम मंदिर में नव वर्ष समारोह: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु श्रमिकों और कर्मचारियों को करेंगी सम्मानित

अयोध्या भगवान श्रीराम की नगरी में नव संवत्सर (नव वर्ष) पर ऐतिहासिक आयोजन होने वाला है. समारोह को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हई हैं. राम मंदिर परिसर में आयोजित होने वाले इस विशेष समारोह की मुख्य अतिथि भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु होंगी. वे मंदिर में अनुष्ठान के बाद श्रमिक और कर्मचारियों को सम्मानित भी करेंगी. बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति राम मंदिर परिसर में लगभग चार घंटे तक रहेंगी. वे मंदिर के दूसरे तल पर श्रीराम यंत्र और श्रीराम नाम मंदिर की स्थापना भी करेंगी. विशेष बात ये है कि मंदिर समिति ने पहली बार किसी बड़े कार्यक्रम के दौरान दर्शन सुचारु रखने की योजना बनाई है. जानकारी के मुताबिक 19 मार्च को सुबह 9 बजे से अनुष्ठानों की शुरुआत होगी. दक्षिण भारत, काशी और अयोध्या के 51 वैदिक आचार्य अनुष्ठानों को संपन्न कराएंगे. काशी के आचार्य पद्मभूषण पंडित गणेश्वर शास्त्री के नेतृत्व में समस्त अनुष्ठान होंगे. कार्यक्रम की व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं. सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही अतिथियों के स्वागत, बैठने की व्यवस्था, पार्किंग और आवागमन की सुचारु व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. ट्रस्ट के मुताबिक श्रीराम यंत्र की स्थापना के साथ मंदिर के दूसरे तल की धार्मिक गतिविधियों को नई आध्यात्मिक ऊर्जा मिलेगी. यह यंत्र श्रीराम की शक्ति, मर्यादा और राष्ट्र चेतना का प्रतीक माना जाता है. राष्ट्रपति की उपस्थिति से यह आयोजन राष्ट्रीय महत्व का स्वरूप ग्रहण करेगा. हिंदू नववर्ष के शुभारंभ अवसर पर 19 मार्च को प्रस्तावित नव संवत्सर समारोह की तैयारियों को लेकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बैठक भी की थी. जिसमें आयोजन की रूपरेखा, अतिथियों की व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, स्वच्छता और यातायात प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की गई थी.

राज्यसभा में भड़के नड्डा- वहीं बैठे रहोगे और घटते चले जाओगे

नई दिल्ली. संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण सोमवार से शुरू हो रहा है। पहले ही दिन दो बड़े घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं। इनमें लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और विदेश मंत्री एस जयशंकर का पश्चिम एशिया के हालात पर बयान है। माना जा रहा है कि वैश्विक उथल-पुथल के बीच होने जा रहे सत्र के दूसरे चरण के भी हंगामेदार रहने के आसार हैं। खबर है कि भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने अपने सांसदों को तीनों दिनों के लिए व्हिप जारी कर दिया है। केंद्रीय संसदीय मंत्री किरेन रिजिजू ने जहां सत्तापक्ष की तरफ से चर्चा में हिस्सा लेने वाली सदस्यों के साथ बैठक की, वहीं कांग्रेस ने भी बैठक कर रणनीति पर चर्चा की थी। कहा जा रहा है कि बिरला के खिलाफ लाए जा रहे प्रस्ताव पर 10 घंटे चर्चा हो सकती है। संसदीय सूत्र बताते हैं कि विपक्ष के 118 सांसदों ने प्रस्ताव के समर्थन में नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। नोटिस पर तृणमूल कांग्रेस ने हस्ताक्षर नहीं किए थे, पर नए घटनाक्रम में टीएमसी ने भी प्रस्ताव का समर्थन करने का निर्णय लिया है। एनसीपी (शरद पवार) ने भी अभी तक अपना रुख साफ नहीं किया है, पर माना जा रहा है कि एनसीपी (एसपी) विपक्षी दलों के खिलाफ नहीं जाएगी। विपक्ष पर भड़के नड्डा, ओछी राजनीति के लगाए आरोप विदेश मंत्री एस जयशंकर की तरफ से पश्चिम एशिया पर बयान दिए जाने के दौरान विपक्ष वॉक आउट कर गया। इसपर सत्ता पक्ष के नेता जगत प्रकाश नड्डा ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर, बजट भाषण, वक्फ बिल पर जेपीसी रिपोर्ट समेत कई मामलों का जिक्र कर कहा कि जब भी जवाब की बारी आती है, तो विपक्ष वॉक आउट कर जाता है। उन्होंने कहा, 'इनका कोई इंटरेस्ट भारत के लोगों के विकास में नहीं है, इनका कोई इंटरेस्ट विकसित भारत में नहीं है, कोई इंटरेस्ट आत्मनिर्भर भारत में नहीं है। कोई इंटरेस्ट देश आगे बढ़े इसमें नहीं है। इनका इंटरेस्ट ओछी राजनीति को आगे बढ़ाना है।

टी 20 विश्वकप जीतने पर CM साय भारतीय क्रिकेट टीम को दी बधाई

टी-20 विश्व कप के फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड को 96 रनों से करारी शिकस्त देते हुए तीसरी बार वर्ल्ड चैंपियन का खिताब अपने नाम कर लिया है। भारतीय टीम की इस जीत पर पूरे देश में खुशी का माहौल है और क्रिकेट टीम को जमकर सराहा जा रहा है। इस बीच मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, डिप्टी सीएम विजय शर्मा, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समेत अन्य नेताओं ने खुशी जताते हुए भारतीय टीम को बधाई दी है। सीएम विष्णुदेव साय ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा- विश्वविजेता भारत हमारा! शाबाश टीम इंडिया! 140 करोड़ भारतीयों को आप पर गर्व है। टी20 विश्वकप के फाइनल मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए टीम इंडिया के हमारे धुरंधरों ने एक बार फिर विश्व कप का खिताब जीतकर हर भारतवासी को गौरवान्वित किया है। इस जीत के साथ ही भारत यह खिताब 3 बार जीतने वाला पहला देश बन गया है। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर पूरी टीम को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। हमारा तिरंगा यूँ ही विश्व मंच पर शान से लहराता रहे और भारत का गौरव निरंतर बढ़ता रहे। जय हिन्द! वंदे मातरम्!! विश्वविजेता भारत हमारा! 🇮🇳 शाबाश #TeamIndia! 140 करोड़ भारतीयों को आप पर गर्व है। टी20 विश्वकप के फाइनल मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए #TeamIndia के हमारे धुरंधरों ने एक बार फिर विश्व कप का खिताब जीतकर हर भारतवासी को गौरवान्वित किया है। इस जीत के साथ ही भारत यह खिताब 3… pic.twitter.com/UBypsGH5TG— Vishnu Deo Sai (@vishnudsai) March 8, 2026 भारतीय क्रिकेट टीम ने विश्व कप जीतते हुए पूरे देश को किया गौरवान्वित – विजय शर्मा डिप्टी सीएम एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा- विश्व विजेता भारत! आईसीसी T20 वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले में न्यूज़ीलैंड को पराजित कर भारतीय क्रिकेट टीम ने विश्व कप जीतते हुए पूरे देश को गौरवान्वित किया है। यह ऐतिहासिक जीत खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत, समर्पण और अटूट संकल्प का प्रतिफल है। भारतीय टीम के सभी प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को इस शानदार उपलब्धि के लिए हृदय से बधाई एवं समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं। भारत माता की जय! जय हिंद! विश्व विजेता भारत! 🇮🇳🏆 आईसीसी T20 वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले में न्यूज़ीलैंड को पराजित कर भारतीय क्रिकेट टीम ने विश्व कप जीतते हुए पूरे देश को गौरवान्वित किया है। यह ऐतिहासिक जीत खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत, समर्पण और अटूट संकल्प का प्रतिफल है। भारतीय टीम के सभी प्रतिभाशाली…— Vijay sharma (@vijaysharmacg) March 8, 2026 T20 विश्व कप तीसरी बार जीतकर भारतीय क्रिकेट टीम ने भारत का परचम लहराया – ओपी चौधरी वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा- नरेंद्र मोदी स्टेडियम में बढ़ी भारत की आन-बान-शान… आईसीसी T20 विश्व कप तीसरी बार जीतकर भारतीय क्रिकेट टीम ने भारत का परचम लहराया। सैमसन, ईशान और अभिषेक की अर्धशतकीय पारियों, बुमराह और अक्षर पटेल की शानदार गेंदबाजी, ईशान का लाजवाब क्षेत्ररक्षण तथा जाबांज खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन से सूर्य एंड कंपनी ने खिताब जीता। विश्व विजेता भारतीय क्रिकेट टीम के समस्त खिलाड़ियों को इस ऐतिहासिक जीत पर हार्दिक बधाई एवं अभिनंदन। जय हिंद नरेंद्र मोदी स्टेडियम में बढ़ी भारत की आन-बान-शान… आईसीसी T20 विश्व कप तीसरी बार जीतकर भारतीय क्रिकेट टीम ने भारत का परचम लहराया। सैमसन, ईशान और अभिषेक की अर्धशतकीय पारियों, बुमराह और अक्षर पटेल की शानदार गेंदबाजी, ईशान का लाजवाब क्षेत्ररक्षण तथा जाबांज खिलाड़ियों के शानदार… pic.twitter.com/cqRMnk6Rya— OP Choudhary (@OPChoudhary_Ind) March 8, 2026 इंडिया-इंडिया….हर तरफ़ एक ही शोर! …एक बार फिर भारत बना विश्व विजेता – पूर्व CM भूपेश बघेल इंडिया-इंडिया….हर तरफ़ एक ही शोर! …एक बार फिर भारत बना विश्व विजेता!! T-20 क्रिकेट पुरुष वर्ल्ड कप में तीसरी बार विश्व विजेता बनने पर सभी देशवासियों को खूब बधाई. भारतीय क्रिकेट टीम के प्रत्येक खिलाड़ी और समस्त स्टाफ को हम सब सलाम करते हैं. आपने हमें फिर से गौरव का यह क्षण दिया है. शानदार बल्लेबाजी, फिर शानदार गेंदबाज़ी और क्षेत्ररक्षण में नियंत्रण से आपने यह ऐतिहासिक सफलता हाशिल की है. 2007, 2024, 2026 की जीत के बाद यह सिलसिला बरकरार रहे. हाँ! हम हैं विश्व विजेता!! 🏏इंडिया-इंडिया….हर तरफ़ एक ही शोर!🎉🎊 …एक बार फिर भारत बना विश्व विजेता!!🇮🇳 T-20 क्रिकेट पुरुष वर्ल्ड कप में तीसरी बार विश्व विजेता बनने पर सभी देशवासियों को खूब बधाई. भारतीय क्रिकेट टीम के प्रत्येक खिलाड़ी और समस्त स्टाफ को हम सब सलाम करते हैं. आपने हमें फिर से गौरव का यह…— Bhupesh Baghel (@bhupeshbaghel) March 8, 2026

छत्तीसगढ़ में व्यापारियों को 31 मार्च तक ट्रेड लाइसेंस लेना अनिवार्य

कोंडागांव. जिले के फरसगांव नगर पंचायत क्षेत्र में अब बिना ट्रेड लाइसेंस व्यापार करना मुश्किल होने वाला है। प्रशासन ने व्यापारिक व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। छत्तीसगढ़ व्यापार अनुपालन नियम 2025 लागू होने के बाद अब छोटे गुमटी संचालकों से लेकर बड़े प्रतिष्ठानों तक सभी के लिए ट्रेड लाइसेंस अनिवार्य कर दिया गया है। नगर पंचायत प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि 31 मार्च तक लाइसेंस नहीं लेने वाले व्यापारियों पर 25 से 50 प्रतिशत तक आर्थिक दंड लगाया जाएगा। मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने बताया कि शासन के निर्देश के तहत नगरीय निकाय क्षेत्र में संचालित हर व्यवसाय को अब नगर पंचायत की अनुज्ञप्ति के दायरे में लाना अनिवार्य है। व्यापारियों की सुविधा के लिए आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया गया है और राजस्व शाखा के माध्यम से दस्तावेज जमा करने की व्यवस्था की गई है। प्रशासन का कहना है कि समय सीमा के बाद नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इंदौर में तेज रफ्तार स्कार्पियो की टक्कर से युवक की मौत और दूसरा गंभीर घायल

इंदौर. सेहरी के बाद घर के बाहर खड़े दो युवकों को स्कार्पियों चालक कुचलकर फरार हो गया। एक युवक ने अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। लोगों ने कार चालक को पकड़ने का प्रयास किया, मगर वह चकमा देकर धार रोड की ओर भाग गया। छत्रीपुरा पुलिस ने मर्ग कायम किया है। टक्कर मारने वाली गाड़ी का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार घटना तड़के करीब चार बजे की सिलावटपुरा (गणेश मंदिर के समीप) की है। टाटपट्टी बाखल निवासी 19 वर्षीय तनवीर पुत्र सरताज मंसूरी की मौत हुई है। 22 वर्षीय फैजान पुत्र शरीफ मंसूरी गंभीर रूप से घायल हो गया है। प्रत्यक्षदर्शी इमरान के अनुसार तनवीर और फैजान सेहरी के बाद घर से बाहर निकले थे। दोनों नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद जाने वाले थे। पेट पर चढ़ गया पहिया फैजान स्कूटर पर बैठा था और तनवीर उससे बात कर रहा था। तभी नर्सिंग बाजार की तरफ से तेज रफ्तार में स्कार्पियो आई और दोनों को टक्कर मार दी। गंभीर अवस्था में घायल फैजान और तनवीर को निजी अस्पताल में भर्ती किया गया मगर तनवीर की दोपहर को मौत हो गई। उसके पेट पर वाहन का पहिया चढ़ा था। हवा में उछले और दूर जाकर गिरे युवक घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। तनवीर खड़ा है और फैजान स्कूटर पर बैठा हुआ है। तेज रफ्तार में आए वाहन ने ऐसी टक्कर मारी कि दोनों हवा में उछले और दूर जाकर गिरे। आवाज सुनकर लोग दौड़े, मगर वाहन चालक फरार हो गया। इमरान और इरफान ने कार का पीछा किया तो वह गंगवाल बस स्टैंड की ओर चला गया। होटल शिवानी के पास से स्कार्पियो मोड़ी और महूनाका से फूटी कोठी चौराहा जा पहुंचा। इसके बाद वह चंदननगर होकर धार रोड चला गया। अंधेरा होने के कारण उसके नंबर नहीं देख पाए। पुलिस के अनुसार अन्य स्थानों से भी सीसीटीवी फुटेज निकाले जा रहे हैं। कार में तीन व्यक्ति बैठे हुए थे।

ईरान की इस हरकत से आगबबूला हुआ सऊदी अरब

ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद ईरान ने बीते 10 दिनों से खाड़ी देशों पर लगातार हमले किए हैं। इन हमलों में ना सिर्फ अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया गया है, बल्कि ईरान ने सऊदी अरब और अन्य देशों के अन्य तेल और रिहायशी ठिकानों पर भी मिसाइलें बरसाई हैं। वहीं खाड़ी देशों ने अब तक संयम से काम लेते हुए दोनों पक्षों से बातचीत की अपील की है। हालांकि अब इन देशों के सब्र का बांध टूटता नजर आ रहा है। रविवार को अपने तेल ठिकानों और एक रिहायशी इलाके पर हुए हमलों की कड़ी निंदा करते हुए सऊदी अरब ने ईरान को चेतावनी दे दी है। सऊदी अरब ने सोमवार को ईरान को आगाह किया है कि अगर वह अरब देशों पर हमले करता रहा तो उसे अब तक का 'सबसे बड़ा नुकसान' उठाना पड़ेगा। सऊदी अरब का यह बयान उस नए ड्रोन हमले के बाद आया, जिसमें उसके बड़े शायबा तेल क्षेत्र को निशाना बनाया गया था। सऊदी अरब ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन द्वारा शनिवार को दिए गए इस बयान को भी खारिज कर दिया कि ईरान ने खाड़ी अरब देशों पर अपने हमले रोक दिए हैं। भविष्य में संबंधों पर गंभीर असर पड़ेगा- सऊदी सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "देश इस बात की पुष्टि करता है कि ईरानी पक्ष ने इस बयान पर अमल नहीं किया, ना तो राष्ट्रपति के भाषण के दौरान और ना ही उसके बाद। ईरान ने बिना किसी ठोस वजह के अपना आक्रमण जारी रखा है।" बयान में आगे कहा गया कि ईरानी हमले का मतलब है तनाव में और वृद्धि, जिसका वर्तमान और भविष्य में संबंधों पर गंभीर असर पड़ेगा। UAE ने किया अटैक वहीं संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने ईरान पर हमला बोल दिया है। UAE ने अपने पहले हमले में ईरान के एक विलवणीकरण संयंत्र पर हमला किया है। यह अमीरात और ईरान के बीच शत्रुता में एक अहम वृद्धि का संकेत है। अगर इस हमले की पुष्टि हो जाती है, तो यह हमला ना केवल फारस की खाड़ी के एक और देश को ईरान के साथ सीधे सैन्य संघर्ष में शामिल करेगा, बल्कि ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों के खिलाफ अबू धाबी का पहला जवाबी हमला भी होगा। ईरानी अधिकारियों और उसके सरकारी मीडिया के अनुसार, केशम द्वीप पर स्थित एक विलवणीकरण संयंत्र पर कथित तौर पर रात भर में हमला किया गया, जिससे आसपास के लगभग 30 गांवों में पानी की आपूर्ति बाधित हो गई। ईरान के हमले जारी इस बीच ईरान ने अपने पड़ोसी मुल्कों को रविवार को भी निशाना बनाया। कुवैत के सैन्य अधिकारियों के अनुसार, ईरानी ड्रोनों ने कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के ईंधन टैंकों को निशाना बनाया। कुवैती वायु रक्षा प्रणालियों ने कई ड्रोनों को मार गिराया, लेकिन मलबे गिरने से हवाई अड्डे के टर्मिनल को आंशिक नुकसान पहुँचा है। इसके अलावा, कुवैत सिटी स्थित 'पब्लिक इंस्टीट्यूशन फॉर सोशल सिक्योरिटी' की बहुमंजिला इमारत में भी ईरानी ड्रोन हमले के बाद भीषण आग लग गई। कुवैती सेना ने बताया कि पिछले 48 घंटों में उन्होंने 12 ड्रोनों और 14 मिसाइलों को सफलतापूर्वक गिरा दिया है।

MP में राज्य अधिवक्ता परिषद चुनाव की 12 मई को होगी वोटिंग

इंदौर. राज्य अधिवक्ता परिषद के पांच वर्ष में एक बार होने वाले चुनाव के लिए अधिसूचना जारी हो गई है। इसके मुताबिक 12 मई को पूरे प्रदेश में एक साथ मतदान होगा। मतगणना 16 जून से शुरू होगी। कार्यकारिणी सदस्य के 25 में से सात पद इस बार महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ पांच पद के लिए ही चुनाव होगा। शेष दो पदों पर मनोनयन किया जाएगा। प्रदेशभर के लगभग 87 हजार वकील इस चुनाव में हिस्सा लेंगे। राज्य अधिवक्ता परिषद के लिए प्रारंभिक मतदाता सूची 16 मार्च को जारी कर दी जाएगी। 24 मार्च तक इस प्रारंभिक मतदाता सूची को लेकर दावे-आपत्तियां प्रस्तुत किए जा सकेंगे। एक अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची जारी हो जाएगी। सिर्फ उन्हीं वकीलों को मतदान का अधिकार प्राप्त होगा, जिन्होंने प्रविधानों के तहत अपना सत्यापन करवा लिया है। नामांकन फार्म जमा करने के लिए प्रत्याशियों को तीन दिन मिलेंगे। मतपेटियों को जबलपुर भेजा जाता है 8, 9 और 10 अप्रैल को नामांकन फार्म जमा कराया जा सकेगा। 15 और 16 अप्रैल को नामांकन फार्म की जांच होगी। 20 से 22 अप्रैल शाम चार बजे तक नाम वापस लिया जा सकेगा। 22 अप्रैल को शाम पांच बजे प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी कर दी जाएगी। मतदान के बाद सभी मतपेटियों को सीलबंद कर जबलपुर भेजा जाता है। वहां 16 जून से मतगणना शुरू होगी। सामान्यत: राज्य अधिवक्ता परिषद के चुनाव की मतगणना दो माह लगभग चलती है। बढ़ेगी महिलाओं की हिस्सेदारी इस बार राज्य अधिवक्ता परिषद में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ना तय है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस बार 25 में से सात पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। राज्य अधिवक्ता परिषद की निवृत्तमान कार्यकारिणी के 25 सदस्यों में से सिर्फ एक महिला थी, लेकिन इस बार यह संख्या सात गुना बढ़ जाएगी। आसान नहीं होगा चुनाव पिछले चुनाव के मुकाबले इस चुनाव में प्रत्याशियों के लिए चुनौती मुश्किल होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि इस बार पुरुषों प्रत्याशियों के लिए 25 नहीं बल्कि सिर्फ 18 पद होंगे। एक अनुमान के मुताबिक प्रथम वरीयता के 2500 मत लाने वाले प्रत्याशी खुद को सुरक्षित मान सकते हैं। इंदौर से दो दर्जन से ज्यादा मैदान में चुनाव के लिए नामांकन का काम भले ही अब तक शुरू नहीं हुआ, लेकिन संभावित प्रत्याशियों ने प्रचार शुरू कर दिया है। यह प्रचार सोशल मीडिया के साथ-साथ प्रत्यक्ष भी चल रहा है। संभावित प्रत्याशी वकीलों के कार्यालय और घर तक पहुंचकर खुद प्रथम वरीयता का मत देने की गुहार लगा रहे हैं। इस बार राज्य अधिवक्ता परिषद में अकेले इंदौर से 30 से ज्यादा प्रत्याशी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। इनमें वर्तमान कार्यकारिणी के पांच सदस्य शामिल हैं।

नवा रायपुर तहसील बनाने अधिसूचना जारी, 39 गांवों के लोगों नहीं लगाएंगे शहर के चक्कर

रायपुर. नवा रायपुर के रहवासियों के लिए सुकून भरी खबर है. अब उन्हें जमीन, मुआवजा या राजस्व संबंधित कामों के लिए बार-बार रायपुर शहर या आसपास की तहसीलों में नहीं जाना पड़ेगा. राज्य सरकार ने नवा रायपुर को तहसील बनाने की अधिसूचना जारी कर दी है. नवा रायपुर के साथ अब रायपुर जिले में रायपुर, मंदिर हसौद अभनपुर, धरसींवा, तिल्दा-नेवरा भी नई तहसील होगी. अभी तक वहां के गांवों के लोगों को राजस्व और प्रशासन संबंधित कामों के लिए रायपुर समेत आसपास के तहसीलों में जाना पड़ता था. लेकिन अब वहां के लोग वहीं की नई तहसील में अपने काम निपटा सकेंगे. राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने नई तहसील बनाने की अधिसूचना जारी की है. इससे पहले नई तहसील की सीमाओं को लेकर दावा-आपत्ति मंगाई गई थी. इसमें कुछ ही आपत्तियां मिली थी, जिनका निराकरण कर दिया गया है. नई तहसील में इन गांवों को किया शामिल राजस्व निरीक्षक मंडल के 20 पटवारी हल्के में कुल 39 ग्रामों को शामिल किया गया है. इसमें फ्लौद – परसदा 20, पलौद 21, रीको, सेंध 21, चींचा 23, बरौंदा, 23, रमचंडी 23, कयाबांधा 24, झांझ 24, नवागांव 24, खपरी 24, कुहेरा 25, राखी 25, कोटनी 26, कोटराभाटा 26, तांदुल 26, मंदिर हसौद – छतौना 22, नवागांव 15, केंद्री- केंद्री 13, परसठ्ठी 13, निमोरा 14, उपरवारा 15, तूता 15, केंद्री 16, झांकी 16, खंडवा 18, भेलवाडीह 18, पचेड़ा 19, तोरला चेरिया 1, पाँता 1, बंजारी 1, तेंदुआ 1, कुरूं 2 सेरीखेड़ी में सेरीखेड़ी 16. नकटी 16, टेमरी 39, धरमपुरा 39, बनरसी 40, रायपुर 18, कांदुल माना 51 शामिल हैं. रहवासियों को होंगे फायदे नए तहसील के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र के लोगों को राजस्व प्रशासनिक कामों के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा. इससे समय के साथ पैसे भी बचेंगे. जमीन नामांतरण, खसरा सुधार, बटांकन, डायवर्सन समेत अन्य संबंधित काम में तेजी आएगी. मूल निवासी, जाति, आय समेत कोई भी प्रमाण-पत्र बनाने लोगों को फायदा मिलेगा. सरकारी कामों के लिए लंबी दूरी तय कर जिला मुख्यालय या बड़ी तहसील नहीं जाना पड़ेगा. इसके साथ प्रशासन की उपस्थिति से इलाकों में सुरक्षा कानून व्यवस्था पहले से और बेहतर होती है.

नर्क से भी भयावह था हिटलर का यह कैंप, हजारों बेगुनाहों की मौत की डरावनी कहानी

दाचाऊ एडोल्फ हिटलर ने नाजी जर्मनी में अपने राज के दौरान यहूदियों समेत लाखों लोगों को मौत के घाट उतारा। इस इतिहास से तो हर कोई परिचित है, लेकिन क्या आपको मालूम है कि हिटलर की क्रूरताओं के किस्सों में मार्च का महीना काफी अहम है। ये वही महीना है, जब हिटलर ने नाजी कैंपों की नींव रखना शुरू किया था, जो आगे चलकर यहूदियों समेत उन तमाम लोगों की मौत की वजह बनें, जिन्हें सरकार नापसंद करती थी। इसी महीने हिटलर ने पहले 'जहन्नुम' यानी नाजी कैंप की नींव रखी थी, जिसे दाचाऊ कैंप के तौर पर जाना जाता है। दाचाऊ कैंप का इतिहास इतना दर्दनाक है, जिसे जानकर लोगों की रूह कांप जाती है। क्या बच्चे, क्या बूढ़े, क्या महिलाएं और जवान, हिटलर जिसको भी नापसंद करता था, उन्हें कैंपों में ठेल दिया जाता था, जहां उनकी जिंदगी जहन्नुम से कम ना थी। एडोल्फ हिटलर ने जनवरी 1933 में नाजी जर्मनी की कमान संभाली और इसी साल मार्च में दाचाऊ कंसन्ट्रेशन कैंप खोला गया। ये कैंप दक्षिणी जर्मनी के दाचाऊ शहर में स्थित था। वैसे तो इस कैंप को राजनीतिक बंदियों के लिए बनाया गया था, लेकिन फिर यहां यहूदियों को कैद किया जाने लगा। दाचाऊ कैंप में क्या होता था? नेशनल म्यूजिम के मुताबिक, शुरुआत में यहां उन राजनीतिक बंदियों को कैद किया गया, जो हिटलर की नीतियों के खिलाफ थे। यहां कैद किए जाने वाले ज्यादातर लोग समाजवादी और कम्युनिस्ट थे। मगर नाजी सरकार का इरादा तो कुछ और ही था। राजनीतिक कैदियों के बाद नंबर आया कलाकारों, बुद्धिजीवियों, शारीरिक और मानसिक रूप से विकलांगों, रोमानी लोगों और समलैंगिकों का, जिन्हें नाजी सरकार हीन भावना से देखती थी। फिर यहां यहूदियों को भी कैद किया जाने लगा। इस कैंप को चलाने का जिम्मा हिलमार वैकरले को मिला हुआ था, जो नाजी अर्धसैनिक संगठन SS का एक अधिकारी था। कैंप में कैद किए गए लोगों के साथ अमानवीय व्यवहार होता था। इसका अंदाजा कुछ यूं लगाया जा सकता है कि हिटलर ने एक फरमान जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि कैंप के अंदर जर्मनी का कानून लागू नहीं होगा। इसका मतलब था कि कैदियों के साथ मारपीट की जाए या उन्हें मौत के घाट उतारा जाए, ऐसा करने पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। इससे कैंप के नाजी अधिकारियों को अपने मनमुताबिक सजा देने का अधिकार मिल गया। हिलमार वैकरले के बाद कैंप का जिम्मा थियोडोर आइके के पास आ गया, जिसने यहां वो बर्बरता फैलाई, जो रूह कंपा देती है। सबसे पहले थियोडोर आइके ने एक रेगुलेशन जारी किया, जिसमें ये बताया गया कि कैंप किस तरह चलेगा। इसके तहत अगर कोई कैदी छोटी सी भी गलती कर देता था, तो उसकी बेहरमी से पिटाई होती थी। अगर किसी ने यहां से भागने की हिम्मत की या फिर उसकी राजनीतिक विचारधारा सरकार के खिलाफ है, तो फिर उसे तुरंत मौत के घाट उतार दिया जाता था। कैदियों को खुद का बचाव करने या अपने साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार के खिलाफ बोलने की आजादी नहीं थी। अगर कोई कुछ कहता, तो उसे पहले पीटा जाता और फिर उसकी हत्या कर दी जाती। थियोडोर आइके ने यहां पर जो रेगुलेशन बनाई थी, उसको एक ब्लूप्रिंट के तौर पर देखा गया। इसके बाद जितने भी नाजी कैंप बनाए गए, वहां इसी आधार पर सजा देने का प्रावधान किया गया। यहां कैद किए लोगों को समय पर खाना नहीं मिलता था। उनसे कई-कई घंटों तक काम करवाया जाता था। जब 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत हुई, तो दाचाऊ में कैद किए गए लोगों से हथियार और अन्य चीजें बनवाई जाने लगीं। इसके अलावा हजारों ऐसे कैदी भी थे, जिनके ऊपर नाजी वैज्ञानिक और डॉक्टर मेडिकल एक्सपेरिमेंट किया करते थे। दाचाऊ में कितने लोग मारे गए थे? यूएस होलोकॉस्ट मेमोरियल म्यूजिम के अनुसार, 1940 तक दाचाऊ एक कंसन्ट्रेशन कैंप का रूप धारण कर चुका था, जहां के हालात बेहद क्रूर और भीड़भाड़ भरे थे। इसे लगभग 6,000 बंदियों को रखने के लिए डिजाइन किया गया था, लेकिन आबादी लगातार बढ़ती रही और 1944 तक लगभग 30,000 कैदियों को शिविर में ठूंस दिया गया। द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत में, हिटलर को यह विश्वास हो गया कि जर्मनी और नाजियों द्वारा कब्जा किए गए देशों में यहूदियों की दैनिक गतिविधियों पर बैन लगाने भर से 'यहूदी समस्या' का समाधान नहीं होगा। उस लगने लगा कि ये समस्या तभी सुलझेगी, जब सारे यहूदियों का सफाया कर दिया जाए। इसके बाद 1941 से लेकर 1944 तक जहां हजारों यहूदियों और उन लोगों को भेजा जाने लगा, जिन्हें सरकार पसंद नहीं करती थी। फिर यहां उन्हें जहरीली गैस देकर मारने का सिलसिला शुरू हुआ। 1933 से 1945 तक दाचाऊ के हजारों कैदी बीमारी, कुपोषण और अत्यधिक काम की वजह से जान गंवा बैठे। कैंप के नियमों के उल्लंघन के लिए हजारों लोगों को फांसी दे दी गई। 1942 में इस कैंप में बैरक एक्स का निर्माण शुरू हुआ, जो एक श्मशानगृह था और इसमें शवों को जलाने के लिए इस्तेमाल होने वाली चार बड़ी भट्टियां शामिल थीं। नाजियों ने दाचाऊ के कैदियों पर खूब मेडिकल एक्सपेरिमेंट भी किए। उदाहरण के लिए, नाजी वैज्ञानिक ये पता लगाना चाहते थे कि क्या बर्फीले पानी में डूबे व्यक्ति को जीवित किया जा सकता है। इस संभावना का पता लगाने के लिए कैदियों को बर्फीले पानी में डुबोकर परीक्षण किया जाता था। उन्हें घंटों तक बर्फीले पानी से भरे टैंकों में जबरन डुबोया जाता था। इस दौरान भी कैदी मारे जाते रहे। यहां कैद हुए लोगों को आजादी तब मिली, जब 29 अप्रैल 1945 को अमेरिकी सेना ने दाचाऊ कैंप पर अपना कंट्रोल जमाया। 1933 से लेकर 1945 तक यहां 2 लाख से ज्यादा कैदियों को रखा गया था, जिसमें से हजारों ने अपनी जान गंवाई।