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मध्य प्रदेश में 200 गांवों का एरियल सर्वे शुरू, जमीन का मिलेगा पक्का मालिकाना अधिकार

भोपाल मध्यप्रदेश के भोपाल जिले के 200 गांव में प्रशासन हवाई सर्वे करेगा। घर और निर्माणों पर फोकस होगा। हर मकान-दुकान, निर्माण की चतुर्सीमा को नापकर उसे रिकॉर्ड में लिया जाएगा। इससे गांवों में विकास योजनाओं में मदद मिलने के साथ ही घरों का मालिकाना हक देने की दिशा में भी काम बढ़ेगा। महाराष्ट्र, यूपी समेत दक्षिण भारत के राज्यों में इसी तरह ड्रोन से हवाई सर्वे कर हर घर की मैपिंग की गई है। अब भोपाल में भी ऐसा होगा। गौरतलब है कि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में अगले एक साल में 700 करोड़ रुपए की बड़ी राशि खर्च होना है। गांवों की मैपिंग के आधार पर इस राशि को खर्च करने की योजना में मदद मिलेगी। जनगणना में मददगार पहले चरण में मकान का सूचीकरण होना है। ग्रामीण क्षेत्र में हवाई सर्वे से मकानों के सीमांकन से सूचीकरण में मदद मिलेगी। उनके पास जियो टैगिंग मैपिंग का रिकॉर्ड होगा। उन्हें सिर्फ एक बार फिजिकल वेरिफिकेशन कर ओके करने से काम बन जाएगा।   मेट्रोपोलिटन रीजन के लिए निकलेगी जमीन प्रशासनिक अफसरों के अनुसार मेट्रोपोलिटन रीजन को लेकर अभी डीपीआर तय हो रही है। भोपाल समेत आसपास के पांच शहरों को इसमें शामिल किया है। ये सर्वे भोपाल के बाद संबंधित जिलों में भी होगा। इससे जमीन की वास्तविक उपलब्धता व मकान निर्माण की स्थिति सामने आएगी।   दो चरणों में होगी जनगणनाजनगणना 2027 का कार्य दो चरणों में किया जाएगा। प्रथम चरण के अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य अप्रैल से सितंबर 2026 के मध्य, राज्य शासन द्वारा निर्धारित 30 दिवस की अवधि में संपन्न किया जाएगा। द्वितीय चरण अंतर्गत जनसंख्या की गणना का कार्य नौ से 28 फरवरी 2027 की अवधि में किया जाएगा। जनगणना 2027 के लिए संदर्भ तिथि एक मार्च 2027 की रात्रि 12 बजे होगी।

जंग की मार आम लोगों पर: ईरान-इजराइल तनाव से भारत में कपड़ों की कीमतें बढ़ने के आसार

बुरहानपुर ईरान-इजराइल युद्ध(Iran-Israel War) का असर अब बुरहानपुर के प्रमुख कपड़ा उद्योग पर पड़ने लगा है। यहां सबसे अधिक 20-23 और 50-60 काउंट के यार्न से कपड़ा उत्पादन होता है और इन्हीं दोनों यार्न के भाव पर 10 रुपए तक तेजी आई है। इससे डिमांड में भी कमी आ गई है। ऐसे में युद्ध लंबा खिंचा तो इसका असर कपड़ों की कीमतों पर भी पड़ेगा। वहीं युद्ध के कारण पंजाब और कोयंबटूर से आने वाले यार्न के सप्लाई पर भी असर पड़ा है। बुरहानपुर देशभर में कपड़ा उत्पादन के लिए जाना जाता है। यहां हर दिन दस गाड़ी यानी 2.5 लाख किलो तक यार्न की आवक होती है। व्यापारियों ने कहा कि कोविड के बाद जो हालात बने थे, वैसे तो नहीं हैं, लेकिन यार्न के भाव में अचानक वृद्धि हो गई है। पहले 20-23 नंबर का यार्न 105-108 था, जो अब 112 रुपए किलो तक हो गया है। वहीं 50 से 60 नंबर का यार्न 180-200 से बढ़कर 190-210 रुपए किलो तक पहुंच गया है। इससे नए यार्न की डिमांड में कमी आई है। फिलहाल कपड़ा उत्पादन पर असर नहीं हुआ है, लेकिन हालत नहीं सुधरे तो कपड़ा भी महंगा होगा। यह है मुख्य कारण यार्न कारोबारी अशोक अग्रवाल बताते हैं कि यह युद्ध(Iran-Israel War) का साइड इफेक्ट है। कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के कारण पॉलिएस्टर यार्न और सिंथेटिक फाइबर के दाम बढ़ गए हैं, जिसका सीधा असर टेक्सटाइल उद्योग पर पड़ा है। कच्चे माल की लागत में वृद्धि का कारण यह है कि पॉलिएस्टर धागा पेट्रोकेमिकल से बनता है, जो कच्चे तेल का एक उत्पाद है। तेल की कीमतें बढ़ने से इसके मुख्य कच्चे माल जैसे प्यूरीफाइड टेरेफ्थेलिक एसिड और मोनोएथिलीन ग्लाइकॉल महंगे हो गए हैं। शिपिंग और लॉजिस्टिक्स में भी रुकावट आई है। तनाव के कारण जहाजों को दूसरे लंबे रूट से जाना पड़ रहा है, जिससे माल ढुलाई का खर्च बढ़ गया है।   यहां से आता है यार्न यार्न के भाव बढ़ने का एक कारण देशभर में सरकारी यार्न की एनटीसी मिलें बंद होना भी है। बुरहानपुर में यार्न की आवक कोयंबटूर, महाराष्ट्र व पंजाब से हो रही है, जिससे बुरहानपुर में कैमरिक का कपड़ा बनता है। कच्चा माल तैयार होने के बाद इसे बाहर सप्लाई किया जाता है। अभी जो यार्न के दाम बढ़े हैं, उससे बुरहानपुर में 60 फीसदी लूमों पर यही कपड़ा तैयार होता है।   युद्ध लंबा चला तो आएगा संकट युद्ध शुरू होने के बाद से इसका असर दिखने लगा है। एलपीजी गैस महंगी हो गई है। घरेलू गैस पर 60 और व्यावसायिक गैस 115 रुपए तक महंगी हो गई है। अब युद्ध लंबा चलता है तो बुरहानपुर के कपड़ा उत्पादन पर भी असर आएगा। फिलहाल 50 फीसदी कपड़ा इसी यार्न से बनता है। इसमें मुख्य रूप से गमछा तैयार होता है। यार्न के भाव तो बढ़ गए हैं, लेकिन कपड़े के भाव में अभी कोई तेजी नहीं आई है।

घर खरीदना होगा महंगा! भोपाल में कलेक्टर गाइडलाइन बढ़ाने की तैयारी, 20–100% तक इजाफे का प्रस्ताव

भोपाल भोपाल में आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए तैयार की गई कलेक्टर गाइडलाइन में कई क्षेत्रों में प्रॉपर्टी की कीमतों में भारी वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया है। शहर की करीब 500 से अधिक लोकेशन पर जमीन और प्रॉपर्टी के दामों में 50 से 100 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की तैयारी की गई है। हालांकि नई गाइडलाइन में लोकेशन की संख्या घटाकर 2,175 कर दी गई है, जबकि वर्तमान गाइडलाइन में 2,881 लोकेशन शामिल थीं। कई क्षेत्रों में सरकारी परियोजनाओं के कारण कीमतों में वृद्धि प्रस्तावित नहीं की गई है। 706 लोकेशन कम की गईं नई कलेक्टर गाइडलाइन में कुल 706 लोकेशन कम कर दी गई हैं। पहले जहां 2,881 लोकेशन शामिल थीं, वहीं अब केवल 2,175 लोकेशन को ही गाइडलाइन में रखा गया है। अधिकारियों के अनुसार कई क्षेत्रों में सरकारी परियोजनाएं शुरू होने के कारण वहां किसी प्रकार की वृद्धि प्रस्तावित नहीं की गई है। कई इलाकों में 20 से 100 प्रतिशत तक बढ़ोतरी कलेक्टर गाइडलाइन के प्रस्ताव के अनुसार शहर के कई प्रमुख क्षेत्रों में प्रॉपर्टी के दामों में बड़ी वृद्धि की तैयारी है। करोंद, पलासी, गांधीनगर, बैरागढ़, परवलिया सड़क, अयोध्या बायपास, आनंद नगर, रातीबड़, नीलबड़ और कोलार सहित कई क्षेत्रों में जमीन की कीमतों में 20 से 100 प्रतिशत तक वृद्धि प्रस्तावित की गई है। इसके अलावा रायसेन रोड, विदिशा रोड, बैरसिया रोड, नर्मदापुरम रोड, भोपाल-इंदौर रोड, भोपाल बायपास, बंगरसिया, 11 मील और कटारा हिल्स जैसे क्षेत्रों में भी कीमतों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया है। 621 लोकेशन पर 11 प्रतिशत वृद्धि का दावा पंजीयन और राजस्व अधिकारियों ने प्रस्ताव में 621 लोकेशन पर औसतन 11 प्रतिशत वृद्धि का दावा किया है। हालांकि जब यह प्रस्ताव पोर्टल पर अपलोड हुआ तो कई क्षेत्रों में इससे कहीं अधिक वृद्धि का प्रस्ताव सामने आया। अभी तक नहीं आई आपत्ति कलेक्टर गाइडलाइन का प्रस्ताव दो दिन पहले ही आम लोगों के लिए पोर्टल पर अपलोड किया गया है। जानकारी के अभाव में अब तक इस पर एक भी ऑनलाइन आपत्ति दर्ज नहीं हुई है। अगर, इसी तरह कोई आपत्ति नहीं आती है, तो अधिकतम वृद्धि वाले प्रस्ताव को केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेज दिया जाएगा। सर्वर ठप होने से रजिस्ट्री में परेशानी प्रॉपर्टी की कीमतों में संभावित वृद्धि को देखते हुए लोग जल्दी रजिस्ट्री कराने के लिए पंजीयन कार्यालय पहुंच रहे हैं। हालांकि सोमवार को सर्वर ठप होने के कारण कई लोगों को रजिस्ट्री के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।

फैंस का इंतजार खत्म! 12 मार्च तक आएगा आईपीएल के शुरुआती 20 दिनों का कार्यक्रम

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) 12 मार्च तक इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 के शुरुआती 20 दिनों का शेड्यूल जारी करेगा। यह जानकारी बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने दी है। आईपीएल का 19वां सीजन 28 मार्च से 31 मई के बीच खेला जाना है। देवजीत सैकिया ने मंगलवार को आईएएनएस से कहा, "हम 12 मार्च तक आईपीएल 2026 का शेड्यूल जारी करने की योजना बना रहे हैं। फिलहाल, हम आईपीएल के पहले 20 दिनों का शेड्यूल जारी करने जा रहे हैं।" ऐसा समझा जा रहा है कि बीसीसीआई पश्चिम बंगाल, असम और तमिलनाडु में होने वाले विधानसभा चुनावों के साथ किसी भी तरह के टकराव की स्थिति से बचना चाहता है। ऐसे में टूर्नामेंट के शेष मुकाबलों का शेड्यूल बाद में जारी किया जाएगा। इसके बावजूद, टीमों ने अपने प्री-सीजन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। पांच बार की चैंपियन चेन्नई सुपर किंग्स ने 1 मार्च को नवलूर स्थित अपने हाई-परफॉर्मेंस सेंटर में अभ्यास शुरू कर दिया है। वहीं, मौजूदा चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने 10 फरवरी को नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में एक छोटा-सा तैयारी शिविर आयोजित किया था, जबकि 2022 की चैंपियन गुजरात टाइटंस ने नाथद्वारा के मिराज इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में दो बार अभ्यास सत्र आयोजित किए थे। पंजाब किंग्स ने फरवरी की शुरुआत में अबू धाबी में अभ्यास किया था। फिलहाल टीम के खिलाड़ी धर्मशाला में अभ्यास शिविर में हिस्सा ले रहे हैं। सनराइजर्स हैदराबाद ने 1 मार्च को अपने घरेलू खिलाड़ियों के साथ अपना शिविर शुरू किया था। पांच बार की विजेता मुंबई इंडियंस भी आगामी सीजन के लिए अपना अभ्यास शुरू कर चुकी है। कोलकाता नाइट राइडर्स 18 मार्च को अपना प्री-सीजन शिविर शुरू करेगी, जबकि राजस्थान रॉयल्स के 15 मार्च से जयपुर में एक अभ्यास शिविर के लिए इकट्ठा होने की उम्मीद है। दिल्ली कैपिटल्स ने हाल ही में हैदराबाद में एक शिविर आयोजित किया था। अब इस टीम के दिल्ली में भी एक शिविर आयोजित करने की उम्मीद है। इस बीच लखनऊ सुपर जायंट्स ने लखनऊ में एक तैयारी सत्र आयोजित किया था।

भोपाल एयरपोर्ट 24×7 ऑपरेशन के लिए तैयार, लेकिन समर सीजन में भी लेट नाइट उड़ानों पर सस्पेंस

भोपाल इस माह के अंत से लागू हो रहे समर शेड्यूल में एक भी लेट नाइट उड़ान शामिल नहीं हो सकी है। एयरपोर्ट अथारिटी ने एयरलाइंस कंपनियों को टाइम लिमिट से हटकर 24 घंटे में किसी भी समय स्लाट देने की पेशकश की है। इसके बावजूद एयरलाइंस कंपनियां रुचि नहीं दिखा रही हैं। फिलहाल लेट नाइट उड़ान के रूप में केवल पुणे रूट पर एक उड़ान है। एयर कनेक्टिविटी बढ़ाने के उद्देश्य से लंबे समय से दिल्ली, मुंबई, कोलकात्ता एयरपोर्ट्स की तरह 24 घंटे उड़ान संचालन को बढ़ावा दे रही हैं, लेकिन एयरलाइंस कंपनियां इसमें रूचि नहीं ले रही हैं। राजा भोज एयरपोर्ट पिछले डेढ़ साल से 24 घंटे खुल रहा है। इस अवधि में इंडिगो ने ही एक स्थाई पुणे उड़ान प्रारंभ की। कुछ समय के लिए मुंबई उड़ान प्रारंभ हुई फिर बंद हो गई। भोपाल से बेंगलुरू के लिए लंबे अर्से से लेट नाइट उड़ान की जरूरत महसूस की जा रही है। इस रूट पर दो नियमित उड़ाने हैं इसके बावजूद सस्ते टिकट नहीं मिलते। लेट नाइट उड़ानों से यह लाभ लेट नाइट उड़ानों में आमतौर पर सस्ते किराये में सीटों की बुकिंग होती है। एयरलाइंस कंपनियां देर रात को विमान पार्किंग में खड़े करने के बजाय ऐसे रूट पर इनका संचालन करती हैं जहां से 70 प्रतिशत से अधिक पैंसेजर लोड मिल सके। भोपाल से पुणे के बीच 80 प्रतिशत बुकिंग हो रही है। यदि बेंगलुरु, मुंबई एवं दिल्ली तक देर रात की उड़ानें प्रारंभ हो जाएं तो यात्रियों को बड़ी राहत मिल सकती है। दिल्ली बंद, नवी मुंबई शुरू होगी 29 मार्च से लागू हो रहे समर शेड्यूल में भोपाल से केवल नवी मुंबई तक एक उड़ान प्रारंभ हो रही है। मुंबई की एक उड़ान बंद होने का प्रस्ताव है। एयर इंडिया की मार्निंग उड़ान भी एक माह के लिए बंद हो रही है। गोवा एवं अहमदाबाद उड़ान भी बंद करने का प्रस्ताव है। यानि पहली बार समर सीजन में भोपाल से एयर कनेक्टिविटी बढ़ने के बजाय कम होने जा रही है। मिड सीजन में बढ़ेंगी उड़ानें समर शेड्यूल करीब छह माह लागू रहता है। मिड सीजन में कुछ नए रूट भोपाल से जुड़ेंगे। एयर इंडिया ने तकनीकी कारण से दिल्ली उड़ान एक माह के लिए बंद करने का निर्णय लिया है। अगले दो-तीन माह में एयर कनेक्टिविटी बढ़ेगी। लेट नाइट उड़ानें शुरू कराने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।

मध्य प्रदेश में ‘VB G-RAMJI’ लागू करने की तैयारी, राज्य सरकार अपने नियमों से करेगी शुरुआत

भोपाल मनरेगा की जगह शुरू होने जा रही विकसित भारत-रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) के लिए गारंटी वीबी जी रामजी योजना प्रदेश में इसी वर्ष अक्टूबर-नवंबर से प्रारंभ हो सकती है। इसके लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तैयारियों में जुटा है। तैयारियों के संबंध में मंगलवार-बुधवार को दिल्ली में बैठक होने जा रही है, जिसमें सभी राज्यों से तैयारियों के संबंध में पूछा जाएगा। पंचायतों के बारे में जानकारी भी साझा की जाएगी, जिससे केंद्र सरकार राज्य को अनुदान के संबंध में नीति बना सके। अधिसूचना के बाद राज्य सरकार बनाएगी अपने नियम बता दें कि वीबी जी रामजी विधेयक संसद से पारित हो गया है। इसकी अधिसूचना अप्रैल या मई में जारी हो सकती है। इसके बाद राज्य सरकार अपने नियम बनाएगी, जो विधानसभा से पारित होंगे। इसमें लगभग छह माह का समय लगेगा। यह भी बता दें कि योजना में राज्य सरकारों को विकल्प दिया गया है कि वह केंद्र के नियम उसी रूप में स्वीकार कर लें या अपने अनुसार बदलाव कर लें। हर राज्य की परिस्थितियां अलग-अलग हैं।   स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर होगा नियमों में बदलाव उदाहरण के तौर पर शहरी और ग्रामीण क्षेत्र, श्रमिकों की संख्या, मनरेगा के अंतर्गत हुए काम, विकास कार्यों को लेकर राज्य सरकार की प्राथमिकता आदि। इन आधारों पर राज्य सरकार नियमों में कुछ परिवर्तन कर सकती है। विधानसभा से पारित होने के बाद इसे अमल में लाया जाएगा। अधिसूचना जारी होने के बाद सबसे पहले संबंधित अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। उन्हें बताया जाएगा कि मनरेगा से नई योजना किस तरह अलग है, कौन से नए काम शामिल किए गए हैं और सामाजिक अंकेक्षण किस तरह से किया जाना है।   काम के आधार पर तीन श्रेणियों में बंटेंगी पंचायतें अगले चरण में पंचायतों को तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा। पहली वह पंचायतें जिनमें मनरेगा में कम काम हुआ है, उन्हें प्राथमिकता में रखकर वहां अधिक काम कराया जाएगा। इसके बाद मध्यम स्तर की ग्राम पंचायतें और तीसरी ऐसी पंचायतें होंगी जिन पर बहुत अधिक काम हो चुका है, वहां अब ज्यादा काम की आवश्यकता नहीं है। इस तरह सभी जगह समान रूप से विकास होगा। मनरेगा में कुछ ग्राम पंचायतों में बहुत अधिक तो कुछ में बहुत कम काम हुआ है।

उत्तर भारत में गर्मी का कहर शुरू: राजस्थान से चली गर्म हवाओं ने MP, दिल्ली-UP को तपाया

नई दिल्ली राजस्थान से आ रही गर्म हवाओं का असर अब पूरे मध्य भारत में दिखने लगा है। मध्य प्रदेश के अधिकांश जिलों में तापमान तेजी से बढ़ा है और कई जगहों पर यह सामान्य से 4 से 6 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल प्रदेश में मौसम शुष्क रहने के आसार हैं और अगले एक सप्ताह तक तेज धूप और गर्म हवाओं का असर बना रह सकता है। दिल्ली में भी तापमान बढ़ने लगा है। मंगलवार को राजधानी में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है, जबकि न्यूनतम तापमान 24 डिग्री के करीब रहेगा। हालांकि शहर की हवा की गुणवत्ता खराब बनी हुई है। एयर क्वालिटी इंडेक्स 326 दर्ज किया गया, जो Severe श्रेणी में आता है।   UP में मौसम का बदला मिजाज उत्तर प्रदेश में भी मौसम तेजी से करवट ले रहा है। आगरा, झांसी और बांदा जैसे जिलों में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। वहीं मेरठ, हापुड़ और कासगंज में सुबह हल्की धुंध और कोहरा भी देखने को मिला। मध्यप्रदेश में बढ़ी गर्मी प्रदेश में सबसे अधिक तापमान रतलाम में दर्ज किया गया, जहां पारा 39.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो सामान्य से 6.4 डिग्री अधिक है। पचमढ़ी को छोड़कर प्रदेश के अधिकांश संभागों में अधिकतम तापमान 35 से 38 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया। दिन में तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लोगों को गर्मी का तीखा असर महसूस होने लगा है। ट्रफ सिस्टम का असर, कहीं हल्की बारिश संभव मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस समय बिहार से मराठवाड़ा तक एक ट्रफ लाइन झारखंड, छत्तीसगढ़ और विदर्भ के ऊपर से गुजर रही है। इसके प्रभाव से मध्य प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में कहीं-कहीं हल्की बारिश या बादल छाने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा मध्य क्षोभमंडल में पश्चिमी हवाओं के साथ एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है और जम्मू-कश्मीर के ऊपर उपोष्ण पश्चिमी जेट स्ट्रीम भी बह रही है। प्रमुख शहरों का तापमान भोपाल – अधिकतम 36.8°C, न्यूनतम 15°C इंदौर – अधिकतम 36.4°C, न्यूनतम 15.5°C ग्वालियर – अधिकतम 37.2°C, न्यूनतम 18.2°C जबलपुर – अधिकतम 36°C, न्यूनतम 17°C राजस्थान में मार्च में ही हीटवेव राजस्थान में गर्मी ने मार्च की शुरुआत में ही अपने तेवर दिखा दिए हैं। बाड़मेर में तापमान 40.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश का सबसे अधिक रहा। वहीं जयपुर में पारा 37.8 डिग्री तक पहुंच गया है। मौसम विभाग ने जैसलमेर और बाड़मेर सहित चार जिलों में 10-11 मार्च के लिए हीटवेव का येलो अलर्ट जारी किया है। जल्दी क्यों बढ़ रही गर्मी मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि फरवरी में उत्तर और मध्य भारत में सामान्य से कम बारिश हुई। इसके कारण आसमान साफ रहा और सूर्य की किरणें सीधे जमीन तक पहुंचने लगीं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ गया। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले तीन-चार दिनों में तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है। 15 मार्च के बाद पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने पर कुछ जगहों पर हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना भी है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- आपूर्ति में नहीं है कोई परेशानी, उपलब्ध हैं आपूर्ति के सभी संसाधन

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में आपूर्ति व्यवस्था में कहीं किसी प्रकार की कोई कठिनाई नहीं है। सरकार के पास पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति संसाधन उपलब्ध हैं। किसी को भी खाद्य पदार्थ, गैस या तेल आपूर्ति के लिए परेशान या पैनिक होने की आवश्यकता नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे प्रदेश में बेहतर से बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार परिस्थितियों पर गहनता से नजर बनाए हुए हैं। केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में देश के साथ मध्यप्रदेश में भी कहीं कोई आपूर्ति संबंधित दिक्कत नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में खाड़ी देशों में उपजी विषम परिस्थितियों के मद्देनजर मध्यप्रदेश में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विश्व और देश के समक्ष उपजी परिस्थितियों और संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए मध्यप्रदेश में बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि तीन सदस्यीय मंत्री और अधिकारियों की समिति प्रदेश की आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी करेगी और आपूर्ति बहाल रखने के लिए सभी कदम उठाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खाड़ी देशों में रह रहे या वर्क वीजा पर गए या पर्यटन के लिए गए भारतीय नागरिकों, विशेषकर मध्यप्रदेश के निवासियों की स्वदेश वापसी के लिए मध्यप्रदेश सरकार लगातार केंद्र सरकार के सम्पर्क में है। राज्य सरकार से हेल्पलाइन के जरिए अब तक 255 लोगों ने संपर्क किया है, जिनकी सकुशल स्वदेश वापसी के लिए प्रयास तेज किए जा रहे हैं। बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल, सभी मंत्रीगण सहित प्रभारी मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण रश्मि अरूण शमी, सचिव परिवहन एवं आयुक्त जनसम्पर्क मनीष सिंह एवं अन्य विभागीय अधिकारी भी उपस्थित थे।  

बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत: फरवरी में 6,13,877 लोगों को बिल में 3.68 करोड़ से ज्यादा की रियायत

भोपाल  मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं को दिन के टैरिफ में 20 प्रतिशत की छूट प्रदान की जा रही है। स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं के लिए यह सभी छूट अथवा प्रोत्साहन की गणना सरकारी सब्सिडी (यदि कोई हो) को छोड़कर की जा रही है। मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने स्मार्ट मीटरिंग पहल के अंतर्गत, माह फरवरी 2026 के दौरान कुल 6, 13, 877 उपभोक्ताओं को उनके मासिक विद्युत बिल में टाइम ऑफ डे (ToD) छूट का लाभ प्रदान किया है, इसकी कुल राशि 3 करोड़, 68 लाख 01 हजार रूपए है। स्‍मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को उनकी खपत के आधार पर ये छूट दी गई है। कंपनी ने बताया कि स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं के लिए जिसमें घरेलू, गैर घरेलू, सार्वजनिक जल कार्य और स्ट्रीट लाइट और निम्‍नदाब औद्योगिक उपभोक्‍ताओं के लिए सोलर ऑवर सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक की अवधि के दौरान उपभोग की गई ऊर्जा के लिए ऊर्जा प्रभार की सामान्य दर पर 20 प्रतिशत की छूट 10 किलोवाट तक स्वीकृत लोड / अनुबंध मांग वाले उपभोक्‍ताओं को ही दी जा रही है। स्मार्ट मीटर के फायदे स्मार्ट मीटर ऊर्जा की खपत को ट्रैक करने और ऊर्जा की बचत करने में मदद करता है। बिजली की खपत को सटीक रूप से मापता है, जिससे बिल में कोई गलती नहीं होती। ऐप के जरिए मोबाइल पर रियल-टाइम डेटा देखकर ऊर्जा की खपत को नियंत्रित कर सकते हैं। ऊर्जा की गुणवत्ता के बारे में जानकारी मिलती है, जिससे ऊर्जा की खपत को बेहतर बना सकते हैं। ऊर्जा की खपत को ऑनलाइन ट्रैक करने और नियंत्रित करने की सुविधा मिलती है। ऊर्जा की खपत को कम करने से पर्यावरण पर पड़ने वाला दुष्प्रभाव कम होता है। ऊर्जा की खपत को नियंत्रित करने और ऊर्जा की बचत करने में मदद कर सकता है।