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विजयपुर के विधायक मुकेश मल्होत्रा, HC ने दिए अपने ही फैसले पर स्टे

श्योपुर  मध्य प्रदेश का श्योपुर विधानसभा क्षेत्र में बीते 2-3 दिनों से चर्चाओं में बना हुआ है. इसकी वजह है, सोमवार यानि 9 मार्च को हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ का सुनाया गया फैसला. जहां कोर्ट ने विजयपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर फैसला सुनाते हुए बीजेपी के हारे हुए प्रत्याशी रामनिवास रावत को विधायक घोषित किया था, जबकि कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा की विधायकी शून्य की थी. वहीं हाईकोर्ट ने राज्यसभा सांसद विवेक तंखा की याचिका पर संज्ञान लेते हुए अपने ही फैसले पर 15 दिन का स्टे लगा दिया है. जिसके बाद कांग्रेस अब सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी। अपने ही फैसले पर हाईकोर्ट ने लगाया स्टे विजयपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर ग्वालियर हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद विवेक तंखा ने तुरंत कोर्ट का रूख किया. जहां विवेक तंखा की याचिका पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने अपने ही फैसले को 15 दिन के लिए स्थगित कर दिया है. जिसका मतलब है कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट में अपील करके स्थगन आदेश प्राप्त करने का मौका दिया गया है. यह स्थगन RP एक्ट के प्रावधान अनुसार दिया गया है. यानि तब तक मुकेश मल्होत्रा विजयपुर से कांग्रेस विधायक रहेंगे. जस्टिस एसजी अहलूवालिया ने मुकेश मल्होत्रा ​​की इस दलील पर सहमति जताई कि अगर फैसले के असर और अमल पर रोक नहीं लगाई गई तो उन्हें भारी नुकसान होगा. उन्होंने कहा कि "फैसले के असर और अमल पर 15 दिनों के लिए रोक लगाने की अर्ज़ी न्याय के हित में है, ताकि प्रतिवादी मुकेश मल्होत्रा ​​सुप्रीम कोर्ट से रोक का आदेश ले सकें। जीतू पटवारी ने बताया लोकतांत्रिक लड़ाई जीतू पटवारी ने कहा कि हम लोकतांत्रिक तरीके से फिर से कांग्रेस का विधायक बनवाएंगे. कांग्रेस अध्यक्ष ने इसे लोकतंत्र बचाने की इस लड़ाई बताया है. उन्होंने कहा कि हम राज्यसभा सांसद के साथ मजबूती से लगे हुए हैं. साथ ही कहा कि बीजेपी दलित, आदिवासी और आरक्षण विरोधी है. बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट में विवेक तंखा और अभिषेक मनु संघवी मामले की पैरवी करेंगे। क्या है मुकेश मल्होत्रा और रामनिवास का पूरा मामला दरअसल, विजयपुर विधानसभा सीट पर कांग्रेस के मुकेश मल्होत्रा को जीत मिली थी, जबकि बीजेपी रामनिवास रावत को हार का सामना करना पड़ा था. हार के बाद रामनिवास रावत ने हाईकोर्ट में मुकेश मल्होत्रा के खिलाफ याचिका लगाई थी, जिसमें दावा किया गया था कि कांग्रेस विधायक ने आपराधिक जानकारी छिपाई है. मामले में सोमवार को ग्वालियर हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए मुकेश मल्होत्रा द्वारा आपराधिक जानकारी छिपाने की बात सही पाई गई, जिसके बाद कोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा की विधायकी शून्य कर दी और रामनिवास रावत को विधायक घोषित किया।

सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी: नक्सली ठिकाने से 3.61 करोड़ नकद, 1 किलो सोना और 101 घातक हथियार बरामद

जगदलपुर बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में आज नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता मिली। दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के 108 नक्सली कैडरों ने आत्मसमर्पण किया। इनमें 44 महिला और 64 पुरुष नक्सली शामिल हैं, जिन पर 3.29 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। नक्सलियों के 101 घातक हथियार बरामद यह आत्मसमर्पण पुणे मारगेम पुनर्वास से पुनर्जीवन पहल के तहत हुआ। कार्यक्रम राज्य के डीजीपी अरुण देव गौतम और एडीजी विवेकानंद सिन्हा की मौजूदगी में हुआ। बस्तर आईजी सुंदरराज पी सहित सीआरपीएफ, बीएसएफ और जिला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। इस दौरान नक्सलियों द्वारा जमा किए गए हथियारों और अन्य सामग्री की प्रदर्शनी लगाई गई। अधिकारियों ने 101 घातक हथियार बरामद होने की जानकारी दी। करोड़ों रुपये के हथियार समेत नगद मिला इन हथियारों में एके 47, इंसास, एलएमजी और बीजीएल शामिल थे। नक्सल इतिहास में पहली बार 3.61 करोड़ रुपये नकद और 1.64 करोड़ रुपये मूल्य का एक किलो सोना बरामद किया गया। इसे अब तक के नक्सल विरोधी अभियानों में सबसे बड़ी डंप बरामदगी माना जा रहा है। यह सभी सामग्री बस्तर रेंज के विभिन्न जिलों से बरामद की गई थी। इनमें बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, नारायणपुर, कांकेर, कोंडागांव और बस्तर जिले शामिल हैं। बरामद किए गए सभी डंप और सामग्री को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया गया। यह प्रदर्शन जगदलपुर स्थित रेंज मुख्यालय में आयोजित आत्मसमर्पण कार्यक्रम के दौरान हुआ। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह सामग्री अलग-अलग अभियानों में मिली थी। इसमें 101 घातक हथियार और बड़ी मात्रा में नकदी व सोना शामिल था। अधिकारियों का कहना है कि सरकार की पुनर्वास नीति प्रभावी साबित हो रही है। लगातार चल रहे सुरक्षा अभियानों के कारण नक्सली मुख्यधारा में लौट रहे हैं। बड़ी संख्या में नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज में वापसी की है। यह आत्मसमर्पण बस्तर में शांति और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल क्षेत्र में स्थिरता लाने में सहायक होगी।

मुर्गी फार्म से लगभग 80 हजार से अधिक का मासिक आय कर रहे है अर्जित

रायपुर महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम एम.के. बाहरा की जय माँ लक्ष्मी महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाएं आज राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रही हैं। आजीविका मिशन 150 के द्वितीय चरण के अंतर्गत समूह द्वारा स्थापित 10,000 चूजों की क्षमता वाले एयर कंडीशनर मुर्गी फार्म का शुभारम्भ जिला स्काउट गाइड के अध्यक्ष  एतराम साहू एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  हेमंत नंदनवार के द्वारा किया गया। समूह की अध्यक्ष युगेश्वरी साहू बताती है कि समूह की सदस्य महिलाएं पहले मुख्य रूप से खेती-मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करती थीं। उनके पास आय का स्थायी साधन और पर्याप्त संसाधन नहीं थे, जिसके कारण उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़ने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगा। समूह की सभी सदस्याओं ने मिलकर आजीविका गतिविधियों की शुरुआत की और धीरे-धीरे अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाया। युगेश्वरी बताती है कि समूह को एनआरएलएम के तहत 15 हजार रुपये की चक्रीय निधि प्राप्त हुई, जिससे उन्होंने छोटे स्तर पर मुर्गी फार्म की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) से 60 हजार रुपये प्राप्त किए तथा बैंक लिंकेज के माध्यम से 1 लाख रुपये का ऋण लिया। व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने क्रमशः 2 लाख रुपये और 5 लाख रुपये का उद्यम ऋण भी प्राप्त किया। आजीविका को और विस्तारित करने के उद्देश्य से समूह ने बैंक से 10 लाख रुपये का ऋण लेकर आधुनिक एसी मुर्गी फार्म की स्थापना की। इस कार्य में अध्यक्ष युगेश्वरी साहू के पति सुरेश साहू के मार्गदर्शन का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। आज इस मुर्गी फार्म से समूह को लगभग 80 से 90 हजार रुपये तक मासिक आय प्राप्त हो रही है। इससे समूह की महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में काफी सुधार आया है। इस व्यवसाय के माध्यम से समूह की सदस्याएं आत्मनिर्भर बनी है। साथ ही अन्य सदस्यों को भी रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। बढ़ी हुई आय से वे अपने परिवार के पालन-पोषण, स्वास्थ्य, बच्चों की उच्च शिक्षा तथा जीवन स्तर को बेहतर बनाने में सक्षम हो रही हैं। समूह की सदस्याओं का कहना है कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्हें आजीविका शुरू करने का साहस, प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग मिला है। वे इस व्यवसाय को और आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही हैं तथा राज्य शासन एवं बिहान योजना के प्रति आभार व्यक्त की हैं।

Project Dhadkan की बड़ी सफलता: बिलासपुर की पीहू का सफल ऑपरेशन, अब पूरी तरह स्वस्थ

रायपुर. छत्तीसगढ़ में प्रोजेक्ट धड़कन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शुरू किया गया प्रमुख स्वास्थ्य अभियान है। इसका उद्देश्य एक से 18 वर्ष तक के बच्चों में जन्मजात हृदय रोग की निःशुल्क पहचान, परामर्श और सफल ऑपरेशन (इलाज) सुनिश्चित करना है। यह पहल राज्य भर में हजारों बच्चों के लिए वरदान साबित हो रही है। प्रोजेक्ट धड़कन के तहत पीहू सफल उपचार के बाद वह पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी रही है। पीहू के माता-पिता ने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार जताया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जिला प्रशासन रायपुर की पहल प्रोजेक्ट धड़कन के तहत बिलासपुर की पीहू को नया जीवन मिला है। प्रोजेक्ट धड़कन के अंतर्गत संचालित स्वास्थ्य सेवाओं से बिलासपुर के ग्राम भोजपुरी में रहने वाली  11 वर्षीय पीहू कराके की हृदय संबंधी समस्या का इलाज किया गया। पीहू लंबे समय से हृदय संबंधी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रही थी। कक्षा छठवीं में पढ़ने वाली पीहू के हृदय में समस्या होने के कारण उसे खेल-कूद और अन्य शारीरिक गतिविधियों में कठिनाई होती थी। इसी बीच जिला प्रशासन रायपुर द्वारा पुलिस विभाग के कर्मचारियों एवं उनके परिवारों के लिए आयोजित ‘प्रोजेक्ट छांव’ के अंतर्गत स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया गया। पीहू के पिता पुलिस विभाग में कार्यरत हैं और जगदलपुर में सेवाएं दे रहे हैं।  इस शिविर में माता पिता  द्वारा पीहू की भी जांच  कराई गई। ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ की विशेषज्ञ टीम ने पीहू के हृदय की जांच की। प्रारंभिक जांच के बाद पीहू को आगे के उपचार के लिए सत्य साईं हॉस्पिटल, नवा रायपुर भेजा गया। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा विस्तृत जांच के बाद एक सप्ताह के भीतर उसका सफल ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद पीहू को स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और अब वह बिलासपुर में अपने घर पर सामान्य जीवन जी रही है। पीहू पूरी तरह स्वस्थ है और पहले की तरह पढ़ाई-लिखाई में मन लगा रही है। साथ ही वह अपनी बहनों और दादी के साथ कैरम और अन्य खेलों का भी आनंद ले रही है। पीहू की माता इंद्राणी कारके ने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ की मदद से उनकी बेटी का समय पर इलाज संभव हो सका और अब वह स्वस्थ जीवन जी पा रही है। प्रोजेक्ट धड़कन की पहल न केवल जरूरतमंद बच्चों को समय पर उपचार उपलब्ध करा रही है, बल्कि उनके परिवारों के लिए भी नई उम्मीद और विश्वास का संचार कर रही है।

गैस सिलिंडर नहीं मिला तो भड़के लोग, लंबा इंतजार करने के बाद डीएम आवास पर किया हंगामा

मुज्जफरपुर मुजफ्फरपुर में घरेलू गैस नहीं मिलने से नाराज उपभोक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। गुरुवार को कई उपभोक्ता खाली गैस सिलिंडर लेकर जिलाधिकारी सुब्रत सेन के आवास और समाहरणालय परिसर पहुंच गए। इस दौरान लोगों ने गैस एजेंसी के वितरक पर मनमानी और कालाबाजारी करने का आरोप लगाते हुए जमकर नाराजगी जताई। उपभोक्ताओं का कहना है कि जिला प्रशासन लगातार यह कह रहा है कि जिले में गैस की कोई कमी नहीं है, लेकिन एजेंसियों की मनमानी के कारण लोगों को समय पर सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है। उनका आरोप है कि तीन-चार दिन पहले नंबर लगाने के बावजूद उन्हें गैस नहीं दी जा रही है और बार-बार एजेंसी से लौटा दिया जा रहा है। गुरुवार की सुबह से ही कई उपभोक्ता एजेंसी पर लाइन में लगे हुए थे। घंटों इंतजार के बाद भी जब सिलिंडर नहीं मिला तो लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने एजेंसी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। आक्रोशित उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि एजेंसी द्वारा गैस सिलिंडर ब्लैक में बेचे जा रहे हैं और वास्तविक उपभोक्ताओं को परेशान किया जा रहा है। जब एजेंसी स्तर पर समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उपभोक्ता अपनी शिकायत लेकर जिला समाहरणालय पहुंच गए, ताकि वरीय अधिकारियों को स्थिति से अवगत कराया जा सके। स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि शहर की ईडन गैस सिलिंडर एजेंसी के वितरक द्वारा लगातार उपभोक्ताओं को परेशान किया जा रहा है। कई दिनों पहले नंबर लगने के बावजूद जब वे गैस लेने पहुंचते हैं तो उन्हें वापस लौटा दिया जाता है। उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो उनके घरों में चूल्हा कैसे जलेगा। उपभोक्ता राजकुमार ने बताया कि वे कई दिनों से घरेलू गैस के लिए भटक रहे हैं। उनका आरोप है कि एजेंसी वाले सिलेंडर ब्लैक में बेच रहे हैं और उपभोक्ताओं को गैस नहीं दी जा रही है। इसी शिकायत को लेकर वे डीएम के पास पहुंचे हैं। वहीं, पूरे मामले पर एडीएम पूर्वी तुषार कुमार ने कहा कि जिले में गैस का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए टोल-फ्री नंबर भी जारी किया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर शिकायत दर्ज कराई जा सके। उन्होंने कहा कि कालाबाजारी पर प्रशासन की नजर है और शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। गैस वितरण ओटीपी और फर्स्ट-कम-फर्स्ट-सर्व के आधार पर किया जा रहा है तथा किसी भी उपभोक्ता को लौटने नहीं दिया जाएगा।

NEET UG 2026 अपडेट: आवेदन में करेक्शन की सुविधा, MBBS सीटों के लिए रिकॉर्ड 22.60 लाख फॉर्म

पटना. नीट यूजी 2026 के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया समाप्त हो गई है। इस बार देशभर से करीब 22 लाख 60 हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। इस परीक्षा के माध्यम से देश के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस समेत अन्य मेडिकल कोर्स में दाखिला होगा। कुल मिलाकर लगभग 1 लाख 29 हजार एमबीबीएस सीटों पर प्रवेश के लिए परीक्षा आयोजित की जाएगी। बड़ी संख्या में आवेदन आने से इस बार भी प्रतियोगिता काफी कड़ी रहने की उम्मीद है। 824 मेडिकल कॉलेजों में मिलेगा MBBS में दाखिला नीट यूजी के माध्यम से देश के करीब 824 मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस सीटों पर नामांकन होगा। इन कॉलेजों में सरकारी और निजी दोनों संस्थान शामिल हैं। हर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने के लक्ष्य के साथ इस परीक्षा में शामिल होते हैं। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया खत्म होने के बाद अब छात्रों को आवेदन फॉर्म में सुधार करने का मौका दिया जा रहा है। 12 से 14 मार्च तक खुलेगी करेक्शन विंडो नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने आवेदन फॉर्म में सुधार के लिए करेक्शन विंडो खोलने की घोषणा की है। छात्र 12 मार्च से 14 मार्च की रात 11:50 बजे तक अपने फॉर्म में बदलाव कर सकते हैं। इसके बाद किसी भी प्रकार का संशोधन संभव नहीं होगा। अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड के जरिए लॉग इन कर सुधार कर सकेंगे। इन जानकारियों में किया जा सकेगा बदलाव करेक्शन विंडो के दौरान छात्र अपनी व्यक्तिगत जानकारी, शैक्षणिक योग्यता और परीक्षा शहर से जुड़ी जानकारी में बदलाव कर सकते हैं। इसके अलावा माता-पिता का नाम, योग्यता, श्रेणी और परीक्षा केंद्र से संबंधित कुछ अन्य विवरण भी संशोधित किए जा सकेंगे। हालांकि छात्रों को यह ध्यान रखना होगा कि सभी बदलाव सावधानीपूर्वक करें। श्रेणी बदलने पर देना पड़ सकता है शुल्क श्रेणी में बदलाव करने पर कुछ मामलों में अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है। यदि कोई छात्र आरक्षित से अनारक्षित श्रेणी में बदलाव करता है तो उसे अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। लेकिन अनारक्षित से आरक्षित श्रेणी में बदलाव करने पर फीस का अंतर देना पड़ेगा। इसी तरह ओबीसी या ईडब्ल्यूएस से अन्य श्रेणी में बदलाव पर 100 से 700 रुपये तक का शुल्क लग सकता है। सुधार का मिलेगा केवल एक अवसर एनटीए ने स्पष्ट किया है कि आवेदन फॉर्म में सुधार का मौका केवल एक बार ही दिया जाएगा। इसलिए अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे फॉर्म में बदलाव करते समय सभी जानकारियों की सावधानीपूर्वक जांच करें। निर्धारित समय के बाद किसी भी प्रकार का संशोधन स्वीकार नहीं किया जाएगा। इससे छात्रों को भविष्य में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

UPSC इंटरव्यू मार्क्स पर घमासान: पंजाब विधानसभा में उठा मामला, जांच रिपोर्ट तलब

चंडीगढ़ स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने ग्यासपुरा से सभी तथ्य व आंकड़े उपलब्ध करवाने को कहा। स्पीकर ने कहा कि यह काफी गंभीर मसला प्रतीत हो रहा है, लिहाजा क्रमिक विभाग को निर्देशित किया जाएगा कि वे यूपीएससी से संपर्क करे। इस दौरान पायल सीट से आप विधायक मनविंदर सिंह ग्यासपुरा ने यूपीएससी पर दलित प्रत्याशियों को इंटरव्यू में देने वाले नंबरों में हेरफेर करने का आरोप लगाते हुए कुछ प्रत्याशियों के आंकड़े सदन में प्रस्तुत किए। स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने ग्यासपुरा से सभी तथ्य व आंकड़े उपलब्ध करवाने को कहा। स्पीकर ने कहा कि यह काफी गंभीर मसला प्रतीत हो रहा है, लिहाजा क्रमिक विभाग को निर्देशित किया जाएगा कि वे यूपीएससी से संपर्क करे और पिछले 10 वर्षों का ब्रेकअप ले ताकि यह देखा जा सके कि दलित बच्चों ने परीक्षा में कितने अंक लिए हैं और इंटरव्यू में उन्हें कितने अंक मिले हैं।विधायक ग्यासपुरा ने कहा कि यह दलित समुदाय के बच्चों को आगे न बढ़ने देने की विकृत सोच है जिसे उन्होंने सदन में आंकड़ों और तथ्यों समेत उजागर किया है। विधायक ने पेश किए आंकड़े सदन में विधायक ग्यासपुरा ने दो प्रत्याशियों के अंकों को बिना उनका नाम रखा। उन्होंने बताया कि एक दलित अभ्यर्थी ने लिखित परीक्षा में 766 अंक लिए मगर उसे इंटरव्यू में 112 अंक दिए गए। इसके बाद उसका मेरिट रैंक 878 बन गया। उसी परीक्षा में सामान्य छात्र ने 725 अंक लिए मगर इंटरव्यू में उसे 194 अंक मिले। इसके बाद उसकी मेरिट 879 पहुंच गई। एक अन्य मामले में एससी और सामान्य दोनों अभ्यर्थियों ने लिखित परीक्षा में 821-821 अंक हासिल किए। इंटरव्यू में सामान्य अभ्यर्थी को 210 अंक मिले और इससे उसकी मेरिट 1031 पहुंच गई। वे टॉप 10 रैंकिंग में आ गया जबकि एससी अभ्यर्थी को इंटरव्यू में 124 अंक मिले और वे 945 मेरिट रैंक पर रुक गया। आस्था जैन का विवाद भी उठाया पिछले साल सामान्य अभ्यर्थी कैटेगरी में 186 रैंक लेकर आईपीएस बनी आस्था जैन से जुड़ा नया विवाद भी सदन में उठाया गया। विधायक ने बताया कि यह अभ्यर्थी पहले सामान्य वर्ग से आईपीएस बनीं और अब आर्थिक रूप से कमजोर (ईडब्ल्यूएस) का सर्टिफिकेट लगाकर यूपीएससी की परीक्षा अच्छे रैंक से फिर पास कर ली। विधायक ग्यासपुरा ने बताया कि इस तरह चलता रहा तो दलित बच्चों को आगे बढ़ने का मौका कभी नहीं मिलेगा।

यामी गौतम का रोमांटिक अंदाज़, आदित्य धर के बर्थडे पर शेयर कीं यादगार तस्वीरें

मुंबई,  ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ और ‘धुरंधर’ जैसी दमदार फिल्में बनाने वाले मशहूर निर्देशक आदित्य धर गुरुवार को अपना जन्मदिन मना रहे हैं। इस खास मौके पर उनकी पत्नी और अभिनेत्री यामी गौतम ने जन्मदिन की बधाई दी। यामी गौतम ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर आदित्यधर के साथ तस्वीरें शेयर कीं। पहली तस्वीर में दोनों रेगिस्तान में रेत के टीलों के बीच खड़े हैं, तो दूसरी तस्वीर में दोनों सेल्फी लेते दिख रहे हैं। यामी ने पोस्ट कर लिखा, “काश मेरे पास इतने शब्द होते कि मैं बता पाती कि तुम मेरे लिए कितने खास हो। मेरे प्रिय आदित्य, जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं, आदित्य।” यामी गौतम और आदित्य धर ने एक-दूसरे-दूसरे को तीन साल तक डेट करने के बाद 4 जून 2021 ‘कोइंटिमेट वेडिंग’ की, जिसमें सिर्फ परिवार के लोग शामिल हुए। उन्होंने हिमाचल प्रदेश में अपने पैतृक घर पर पारंपरिक तरीके से शादी की थी। बता दें कि दोनों की पहली मुलाकात फिल्म ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ के सेट पर हुई थी, जिसमें आदित्य धर निर्देशक थे और और अभिनेत्री मुख्य भूमिका में थी। दोनों के बीच दोस्ती हुई और फिर वह प्यार में बदल गई। दोनों का एक बेटा है, जिसका नाम वेदविद है। आदित्य धर एक जाने-माने फिल्ममेकर हैं। उन्होंने इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स में बीटेक करने के बाद रेडियो जॉकी के तौर पर करियर की शुरुआत की। इसके बाद स्क्रीनराइटर के तौर पर काम किया। आक्रोश और तेज जैसी फिल्मों के वह लेखक रह चुके हैं। इसके बाद उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने का मन बनाया। पहले तो वो फिल्मों के लिए गाने लिखा करते थे। उन्होंने हाल-ए-दिल, काबुल एक्सप्रेस और डैडी कूल जैसी फिल्मों के लिए गाने लिखे थे। गाने लिखने के साथ ही उन्होंने स्क्रीनराइटिंग भी शुरू कर दी थी। इसके बाद आदित्य ने 2019 में फिल्म ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ रिलीज की थी। इस फिल्म ने उन्हें काफी लोकप्रियता दी थी। साथ ही, इस फिल्म के लिए आदित्य को नेशनल अवॉर्ड से भी नवाजा गया। इसके बाद निर्देशक ने साल 2025 में धुरंधर रिलीज की, जिसने बॉक्स ऑफिस में जोरदार सफलता के साथ वर्ल्डवाइड लोकप्रियता हासिल की।  

छत्तीसगढ़ में बिजली बिल बकाया वालों के लिए मौका: भुगतान पर मिलेगी बड़ी छूट

रायपुर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज गुरुवार को रायपुर स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय में मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 का शुभारंभ किया। इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ सरकार बिजली बिल भुगतान पर भारी छुट दी है। योजना के तहत 29 लाख उपभोक्ता लाभान्वित होंगे। लगभग 75% तक बिजली बिल माफ किया जाएगा। मामले में बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कोरोना काल के समय आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से बहुत से लोग बिजली बिल नहीं भर पाए थे। जिस वजह से उनका बिजली बिल धीरे-धीरे करके बढ़ते चल गया। सरकार ऐसे लोगों को राहत देने के लिए मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के तहत उन्हें छूट देगी। यदि उपभोक्ता की बिजली बिल राशि अधिक है और उसे वह भुगतान नहीं कर पता है तो उसे किस्तों में भी पटाने की सुविधा दी जाएगी। इस योजना का लाभ 29 जून 2026 तक दिया जाएगा। बिजली बिल का भुगतान करने के लिए उपभोक्ताओं को विभाग वेबसाइट पर पंजीयन करना होगा।

जीवाजी विश्वविद्यालय में परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए सेवानिवृत्त IAS-IPS अधिकारी लगाएंगे उड़नदस्ता

ग्वालियर  ग्वालियर-चंबल अंचल लंबे समय तक परीक्षाओं में नकल की घटनाओं के लिए बदनाम रहा है। हालांकि स्कूली परीक्षाओं में लगातार सख्ती के कारण नकल पर काफी हद तक नियंत्रण पाया गया है, लेकिन विश्वविद्यालय स्तर की परीक्षाओं में अभी भी नकल के मामले सामने आते रहते हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए जीवाजी विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक अभिनव पहल शुरू करने का निर्णय लिया है। विश्वविद्यालय अब स्नातक परीक्षाओं के दौरान नकल रोकने के लिए सेवानिवृत्त आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की सेवाएं लेने जा रहा है। इन अधिकारियों को उड़नदस्तों में शामिल कर परीक्षा केंद्रों की निगरानी कराई जाएगी, जिससे नकल पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके। 26 मार्च से शुरू होने वाली परीक्षाओं में लागू होगी व्यवस्था विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार यह नई व्यवस्था 26 मार्च से शुरू होने वाली स्नातक परीक्षाओं में लागू की जाएगी। इसके लिए ग्वालियर-चंबल अंचल में रहने वाले सेवानिवृत्त प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की सूची तैयार कर ली गई है। उनसे अनुमति लेने की प्रक्रिया भी जारी है। विश्वविद्यालय का मानना है कि प्रशासनिक अनुभव रखने वाले अधिकारियों की मौजूदगी से परीक्षा केंद्रों पर अनुशासन और पारदर्शिता बढ़ेगी। चार सेवानिवृत्त अधिकारियों ने दी सहमति अब तक चार सेवानिवृत्त आईएएस और आईपीएस अधिकारियों ने उड़नदस्ते में शामिल होने के लिए सहमति दे दी है। इसके अलावा करीब 10 अन्य सेवानिवृत्त प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के नाम भी सूची में शामिल किए गए हैं। आईएएस (सेवानिवृत्त) विनोद शर्मा का कहना है कि उड़नदस्तों में अनुभवी अधिकारियों की मौजूदगी एक सकारात्मक पहल है। इससे न केवल उड़नदस्तों को मजबूती मिलेगी, बल्कि परीक्षा केंद्रों पर सख्ती भी बढ़ेगी और नकल की घटनाओं पर अंकुश लगेगा। मुरैना और भिंड में बढ़ेगी विशेष सख्ती विश्वविद्यालय प्रशासन के इस फैसले के पीछे मुरैना और भिंड जिलों में पहले सामने आती रही नकल की घटनाओं को प्रमुख कारण माना जा रहा है। इन क्षेत्रों में उड़नदस्तों की विशेष निगरानी रखी जाएगी। माना जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर जान-पहचान और मेलजोल के कारण कभी-कभी विश्वविद्यालय के अधिकारी अपेक्षित सख्ती नहीं कर पाते, जिससे नकल की घटनाएं सामने आती हैं। साथ ही सूचनाएं लीक होने का भी खतरा बना रहता है। कुलसचिव और कुलगुरु ने बताया सकारात्मक कदम जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. राजीव मिश्रा के अनुसार उड़नदस्ते में बदलाव का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है और कुलगुरु से अनुमति की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासन और पुलिस के सेवानिवृत्त अधिकारियों की सहायता लेने से परीक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी। वहीं कुलगुरु प्रो. राजकुमार आचार्य ने भी इसे सकारात्मक पहल बताते हुए कहा कि इस प्रस्ताव को सहमति दी जाएगी और आगामी परीक्षाओं में इसे लागू किया जाएगा।