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मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना: BPL परिवारों को मूल बकाया में छूट, जल्द उठाएं लाभ

गरियाबंद. जिले के 56,102 बीपीएल बिजली कनेक्शनधारकों पर कुल 43 करोड़ रुपये का बकाया है, जिनके पास राहत पाने का सुनहरा मौका है। दरअसल, बकायादार बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना शुरू की है। योजना के तहत निर्धारित समय में पंजीयन कर अंतर की राशि का भुगतान करने पर जिले के बकायादार उपभोक्ताओं को कुल 36.50 करोड़ रुपये की छूट मिलेगी। इसका मतलब यह है कि बीपीएल कनेक्शनधारकों को केवल 6 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा। योजना का सबसे अधिक लाभ देवभोग, झाखरपारा और गोहरापदर वितरण केंद्र के ग्रामीणों को मिलेगा। सरकार की ओर से जारी विवरण के अनुसार, योजना से निष्क्रिय बीपीएल उपभोक्ताओं को मूल बकाया में 75 प्रतिशत और अधिभार में 100 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। वहीं, घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को मूल बकाया में अधिकतम 50 प्रतिशत और अधिभार में 100 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी। बचत राशि का भुगतान अधिकतम 6 किस्तों में किया जा सकेगा, लेकिन किस्तों में छूट का प्रतिशत कम होता जाएगा। विभाग के कार्यपालन अभियंता हेमंत ठाकुर ने बताया कि भुगतान की अंतिम तिथि 30 जून 2026 तक है। पंजीयन के लिए केवल बीपी और मोबाइल नंबर की आवश्यकता होगी। इसे ‘मोर बिजली’ एप या नजदीकी बिजली स्टेशन पर कराया जा सकता है। जागरूकता बढ़ाने के लिए विभाग प्रत्येक वितरण केंद्र क्षेत्र में साप्ताहिक बाजार और बड़े गांवों में शिविर आयोजित करेगा। साथ ही, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पंचायत प्रतिनिधियों से अपील की गई है कि वे ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित करें। देवभोग में सर्वाधिक उपभोक्ता जिले के 12 वितरण केंद्रों में सबसे अधिक 14,715 बीपीएल उपभोक्ता देवभोग केंद्र में हैं। सहायक अभियंता हेमंत कुमार नागवंशी के अनुसार, इन पर 12.93 करोड़ रुपये का बकाया है। तय समय में 1.69 करोड़ रुपये का भुगतान करने पर उन्हें सीधे 11.23 करोड़ रुपये की छूट मिलेगी। झाखरपारा वितरण केंद्र में 7,818 उपभोक्ताओं पर 6.85 करोड़ रुपये का बकाया है, जिनमें केवल 92 लाख रुपये का भुगतान करने पर 5.93 करोड़ रुपये की छूट मिलेगी। अधिकांश बकायादार कनेक्शनधारकों ने बिजली मीटर लगाने के बाद एक बार भी बिल का भुगतान नहीं किया है। योजना के अनुसार, उन्हें अधिकतम 30 यूनिट प्रति माह खपत की छूट दी गई थी, लेकिन इससे अधिक खपत पर बिल का भुगतान नहीं किया गया। बीपीएल कनेक्शन मूल रूप से बुनियादी घरेलू सुविधाओं के लिए दिए जाते हैं, लेकिन कई कनेक्शन पर पंखा, कूलर और सबमर्सिबल पंप का भी इस्तेमाल हुआ। जिले के किन इलाकों में BPL कनेक्शन को मिलेगी कितनी छूट ? गोहरापदर: 7,940 उपभोक्ता, 1 करोड़ रुपये भुगतान पर 6.12 करोड़ छूट। अमलीदपर: 7,215 उपभोक्ता, 86 लाख भुगतान पर 5.24 करोड़ छूट। बिन्द्रानवागढ़: 3,291 उपभोक्ता, 35 लाख भुगतान पर 2.31 करोड़ छूट। मैनपुर: 3,365 उपभोक्ता, 31 लाख भुगतान पर 1.75 करोड़ छूट। मड़ेली: 3,178 उपभोक्ता, 23 लाख भुगतान पर 1.31 करोड़ छूट। रसेला: 2,896 उपभोक्ता, 24 लाख भुगतान पर 1.27 करोड़ छूट। छुरा: 1,907 उपभोक्ता, 12 लाख भुगतान पर 54 लाख छूट। पाण्डुका: 933 उपभोक्ता, 1.86 करोड़ भुगतान पर 6.95 करोड़ छूट। गरियाबंद ग्रामीण: 2,103 उपभोक्ता, 13 लाख भुगतान पर 5.7 करोड़ छूट। नहीं चुकाया बिल तो प्रीपेड योजना लागू होते ही कट जाएगा कनेक्शन ? गौरतलब है कि मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना सीमित समय के लिए है। इसके बाद प्रीपेड स्कीम लागू की जाएगी, जिसमें बकायादार कनेक्शनधारक वंचित रह सकते हैं। इसलिए लाभ पाने के लिए समय रहते पंजीयन कर योजना का लाभ उठाना ही फायदेमंद रहेगा।

RBSE 10th Result जारी होने वाला है, तुरंत चेक करें सबसे तेज अपडेट यहां

जयपुर राजस्थान बोर्ड 10वीं रिजल्ट बहुत जल्द आधिकारिक वेबसाइट rajeduboard.rajasthan.gov.in पर जारी कर दिया जाएगा। इस बार बोर्ड सेकेंडरी यानी 10वीं का रिजल्ट मार्च माह में ही जारी कर इतिहास रचने की तैयारी में है। बोर्ड सचिव गजेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा है कि राजस्थान बोर्ड 10वीं का परिणाम 20 मार्च तक घोषित करने की तैयारी है। आंसरशीट चेक करने का काम अपने अंतिम चरण में हैं। जल्द ही रिजल्ट को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। अवकाश के दिन भी कॉपियां चेक की जा रही हैं। राजस्थान बोर्ड ने 10वीं की परीक्षाएं फरवरी माह से ही शुरू करवा दी थीं। इतिहास में कभी भी इतनी जल्दी राजस्थान बोर्ड ने परिणाम जारी नहीं किया। दरअसल इस बार राजस्थान सरकार 1 अप्रैल से नया शैक्षणिक सत्र शुरू करना चाहती है और अगले साल से 10वीं की बोर्ड परीक्षा साल में दो बार आयोजित होगी। पहली परीक्षा फरवरी और दूसरी परीक्षा मई में होगी। बच्चों की पढ़ाई समय से शुरू हो सके, इसके लिए राजस्थान बोर्ड मार्च माह में ही 10वीं का परिणाम जारी करने की तैयारी में है। ऐसे में कुछ दिनों में 10 लाख स्टूडेंट्स का परिणाम का इंतजार खत्म होने वाला है। बोर्ड सचिव ने बताया कि सरकार की मंशा के अनुसार परिणाम जल्द जारी करने की तैयारी की जा रही है, ताकि विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई की योजना बनाने में समय मिल सके। आरबीएसई 10वीं परीक्षा के लिए 1068078 स्टूडेंट्स परीक्षा के लिए पंजीकृत थे। 12वीं में 909087, प्रवेशिका परीक्षा में 7811 और वरिष्ठ उपाध्याय परीक्षा में 4122 परीक्षार्थी पंजीकृत थे। वर्तमान में लगभग 30 हजार 915 शिक्षक उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य में लगे हुए हैं। बोर्ड का प्रयास है कि सभी प्रक्रियाएं पूर्ण कर 20 मार्च तक परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया जाए। आरबीएसई 10वीं रिजल्ट 2026 यहां कर सकेंगे चेक, Direct Link RBSE Rajasthan Board 10th Result 2026 FAQs : राजस्थान बोर्ड 10वीं रिजल्ट पर अकसर पूछे जाने वाले प्रश्न RBSE 10th Result 2026: वेबसाइट पर कैसे चेक करे राजस्थान बोर्ड 10वीं का परिणाम – सबसे पहले rajeduboard.rajasthan.gov.in पर जाएं। – Secondary Exam Result 2026 के लिंक पर क्लिक करें। – रिजल्ट पेज खुलने पर अपना रोल नंबर डालें। सब्मिट करें। – आपका रिजल्ट स्क्रीन पर आ जाएगा। इसका प्रिंट आउट लेना न भूलें। RBSE 10th Result 2026 – SMS से कैसे चेक करें राजस्थान बोर्ड 10वीं के स्टूडेंट्स अपना रिजल्ट बोर्ड की वेबसाइट rajeduboard.rajasthan.gov.in के अलावा लाइव हिन्दुस्तान www.livehindustan.com पर भी चेक कर सकते हैं। अगर आप चाहते हैं कि रिजल्ट जारी होते ही आपके मोबाइल पर SMS आए तो इसके लिए आप www.livehindustan.com/career/results/rajasthan-board-10th-result पर जाकर रजिस्ट्रेशन करवाएं। जानें कैसे कराएं रजिस्ट्रेशन स्टेप 1- www.livehindustan.com/career/results/rajasthan-board-10th-result पर जाएं। स्टेप 2 – अपना रोल नंबर, ईमेल, फोन नंबर आदि डिटेल्स भरें। सब्मिट करें। स्टेप 3- रिजल्ट आते ही आपके मोबाइल पर रिजल्ट का SMS आएगा। स्टेप 4 – SMS में दिए गए लिंक पर क्लिक कर आप अपना परिणाम चेक कर सकेंगे। सबसे पहले राजस्थान बोर्ड 10वीं Live Hindustan पर देख सकेंगे, जानें कैसे RBSE 10th Result 2026 कब आएगा? राजस्थान बोर्ड 10वीं का रिजल्ट 20 मार्च तक जारी होने की उम्मीद है। RBSE 10th Result 2026 कहां देखें? राजस्थान बोर्ड 10वीं का रिजल्ट rajeduboard.rajasthan.gov.in और https://www.livehindustan.com/career/results/rajasthan-board-10th-result पर चेक किया जा सकेगा। RBSE 10th Result देखने के लिए क्या चाहिए? राजस्थान बोर्ड 10वीं रिजल्ट रोल नंबर डालकर चेक कर सकेंगे। विद्यार्थियों का रोल नंबर उनके एडमिट कार्ड में दिया गया होगा। राजस्थान बोर्ड 10वीं में पास होने के लिए कितने मार्क्स चाहिए? राजस्थान बोर्ड 10वीं 12वीं की परीक्षा देने वाले स्टूडेंट्स को पास होने के लिए हर विषय में कम से कम 33 फीसदी अंक हासिल करने होते हैं। एग्रीगेट मार्क्स भी कम से कम 33 प्रतिशत होने चाहिए। राजस्थान बोर्ड परीक्षा में 1 या 2 विषयों में 33 से कम अंक आने पर स्टूडेंट्स को सप्लीमेंट्री परीक्षा देने का मौका मिलेगा।

भविष्य की जंग के लिए तैयारी: पंजाब को मिली Military Robotics University की हरी झंडी

चंडीगढ़. भविष्य की जंग अब बंदूक और टैंकों से नहीं, बल्कि रोबोटिक्स, ड्रोन और साइबर सिस्टम्स से लड़ी जाएगी—इसी बदलते दौर को ध्यान में रखते हुए पंजाब सरकार मिलिट्री रोबोटिक्स यूनिवर्सिटी” के जरिए युवाओं को हाई-टेक स्पेशलाइजेशन देने की तैयारी में है। प्रस्तावित श्री गुरु तेग बहादुर वर्ल्ड क्लास यूनिवर्सिटी को इसी सोच के साथ विकसित किया जा रहा है, जहां पढ़ाई के साथ-साथ रिसर्च, इनोवेशन और इंडस्ट्री कनेक्शन पर खास जोर रहेगा। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि यह यूनिवर्सिटी पारंपरिक शिक्षा माडल से अलग होगी और सीधे भविष्य की जरूरतों से जुड़ी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया, “यूनिवर्सिटी का फोकस केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रिसर्च और इंडस्ट्री कनेक्शन पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि छात्र वास्तविक परिस्थितियों और आधुनिक तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें। बैंस ने कहा की रक्षा क्षेत्र तेजी से बदल रहा है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आटोमेशन और डेटा आधारित सिस्टम्स की भूमिका बढ़ती जा रही है। निजी कंपनियां भी ड्रोन, मिसाइल सिस्टम और एडवांस डिफेंस टेक्नोलाजी में निवेश कर रही हैं, ऐसे में युवाओं को इन क्षेत्रों में प्रशिक्षित करना समय की जरूरत है। हाई-टेक कोर्स बनेंगे पहचान इस यूनिवर्सिटी की सबसे बड़ी खासियत इसके स्पेशलाइज्ड कोर्स होंगे, जो सीधे भविष्य की युद्ध तकनीक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े होंगे। इनमें एमटेक इन मिलिट्री रोबोटिक्स, बीटेक और एमटेक इन एआई, बीटेक इन ड्रोन यूएवी इंजीनियरिंग, एमटेक इन रडार सिस्टम्स और डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स, बीटेक इन साइबर सिक्योरिटी, एमटेक इन साइबर वॉरफेयर और नेशनल सिक्योरिटी जैसे कोर्स शामिल किए जा रहे हैं। इसके अलावा स्पेस टेक्नोलॉजी, सैटेलाइट इंजीनियरिंग, सेमीकंडक्टर और चिप डिजाइन, क्वांटम टेक्नोलॉजी और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में भी डिग्री प्रोग्राम शुरू किए जाएंगे। काउंटर-टेररिज्म, सीमा सुरक्षा और रणनीतिक अध्ययन जैसे विषयों को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा, जिससे छात्रों को तकनीकी के साथ-साथ सुरक्षा और रणनीति की गहरी समझ मिल सके। रिसर्च, इनोवेशन और इंडस्ट्री का त्रिकोण यूनिवर्सिटी को केवल शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि एक इनोवेशन हब के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां अत्याधुनिक रिसर्च सेंटर स्थापित होंगे, जहां एआई, ड्रोन टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी, क्वांटम सिस्टम्स और डिफेंस एप्लिकेशंस पर शोध किया जाएगा। डिफेंस और टेक्नोलॉजी सेक्टर की कंपनियों के साथ साझेदारी कर छात्रों को लाइव प्रोजेक्ट्स, इंटर्नशिप और स्टार्टअप सपोर्ट दिया जाएगा। इससे छात्र पढ़ाई के दौरान ही इंडस्ट्री एक्सपोजर हासिल करेंगे और नए इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा। सरकार का मानना है कि यह यूनिवर्सिटी पंजाब को केवल शिक्षा के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि डिफेंस और हाई-टेक रिसर्च के केंद्र के रूप में स्थापित करेगी। आने वाले समय में यह संस्थान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छात्रों और रिसर्चर्स को आकर्षित कर सकता है। सीमा राज्य के लिए रणनीतिक महत्व पंजाब की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए इस यूनिवर्सिटी का महत्व और बढ़ जाता है। बैंस ने कहा कि सीमावर्ती राज्य होने के कारण यहां साइबर सिक्योरिटी, आंतरिक सुरक्षा और काउंटर-टेररिज्म जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञों की जरूरत अधिक है। यह संस्थान इन जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा। सरकार का अनुमान है कि इस पहल से न केवल उच्च शिक्षा का स्तर बढ़ेगा, बल्कि युवाओं के लिए नए रोजगार और स्टार्टअप के अवसर भी पैदा होंगे। तकनीकी और रक्षा क्षेत्र में प्रशिक्षित युवाओं की मांग को देखते हुए यह यूनिवर्सिटी रोजगार सृजन का बड़ा केंद्र बन सकती है। कुल मिलाकर, “मिलिट्री रोबोटिक्स यूनिवर्सिटी” के रूप में विकसित हो रहा यह प्रोजेक्ट पंजाब के युवाओं को भविष्य की जंग के लिए तैयार करने के साथ-साथ राज्य को टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के नए नक्शे पर स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।

किसानों से लेकर सोलर योजना तक, हर मोर्चे पर तेजी के निर्देश : संजय अग्रवाल

वित्तीय वर्ष की अंतिम दौड़ : 15 दिन में लक्ष्य पूरा करने कलेक्टर के सख्त निर्देश किसानों से लेकर सोलर योजना तक, हर मोर्चे पर तेजी के निर्देश : संजय अग्रवाल टीएल बैठक में सख्त संदेश: समय पर काम, तभी बेहतर एसीआर : कलेक्टर बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल की अध्यक्षता में आयोजित टीएल (समय-सीमा) बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के शेष लक्ष्य पूर्ति  की विभागवार गहन समीक्षा की गई। कलेक्टर ने कहा कि वित्तीय वर्ष के समापन में अब मात्र दो सप्ताह शेष हैं, ऐसे में सभी विभाग युद्धस्तर पर कार्य करते हुए लक्ष्य प्राप्ति सुनिश्चित करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिकारियों की एसीआर (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) कार्य प्रदर्शन और लक्ष्य पूर्ति के आधार पर ही लिखी जाएगी।            बैठक में वन भूमि अधिकार के तहत लगभग 3 हजार तैयार पट्टों के शीघ्र वितरण के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को हर साल मिलने वाली 6 हजार रुपये की सहायता को महत्वपूर्ण बताते हुए सभी पात्र किसानों का ई-केवाईसी पूर्ण कराने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देशित किया कि मृत किसानों के वारिसों को भी योजना का लाभ दिलाने हेतु उनका नाम रिकॉर्ड दर्ज किया जाए। वर्तमान में जिले के 25 से 30 हजार किसान अभी भी सम्मान निधि योजना से वंचित हैं।        कलेक्टर ने बताया कि इस वर्ष लगभग 5 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गर्मी धान का रकबा कम हुआ है। इस क्षेत्र में वैकल्पिक एवं लाभकारी फसलों को बढ़ावा देने, किसानों को आदान सहायता उपलब्ध कराने और उन्हें प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए बताया गया कि जिले में अब तक 2,692 सोलर प्लांट स्थापित हो चुके हैं, जबकि 7 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। योजना को गति देने के लिए कलेक्टर ने संबंधित विभागों और हाउसिंग सोसाइटियों की संयुक्त बैठक बुधवार को आयोजित करने के निर्देश दिए।         शिक्षा विभाग को निर्देशित किया गया कि सभी स्कूलों में बालिकाओं के लिए पृथक शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। जहां यह सुविधा नहीं है, वहां सर्वे कर नए निर्माण के प्रस्ताव भेजे जाएं तथा पुराने जर्जर शौचालयों की मरम्मत कराई जाए। पीएचई विभाग द्वारा जानकारी दी गई कि 635 हैंडपंपों का जलस्तर नीचे चला गया है, जिनमें राइजिंग पाइप बढ़ाने का कार्य जारी है। कलेक्टर ने निर्माण विभागों को सूखे तालाबों की गहराई बढ़ाने हेतु मिट्टी-मुरूम निकालने के प्रस्ताव शीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए, ताकि जल संग्रहण क्षमता बढ़ाई जा सके।      इसके साथ ही निर्माण एजेंसियों को स्वीकृत कार्यों में तेजी लाने, सड़कों का निर्माण  चौड़ाई में करने तथा अर्जित भूमि का 15 दिनों के भीतर शासन के पक्ष में नाम पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने यह भी कहा कि माननीय हाई कोर्ट के निर्देशों और निर्णयों का समय-सीमा में पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि अवमानना की स्थिति उत्पन्न न हो। बैठक में मुख्यमंत्री जनदर्शन, सीएम की घोषणा, पीएम पोर्टल, विभिन्न आयोगों और वरिष्ठ कार्यालयों से प्राप्त पत्रों के निराकरण की समीक्षा की गई। बैठक में निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल सहित जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

सुप्रीम कोर्ट वकील का बड़ा दावा: मोनालिसा को सीरिया भेजने की तैयारी, खरगोन में किया खुलासा

खरगोन  सुप्रीम कोर्ट की वकील और अपने फायरब्रांड बयानों के लिए चर्चित नाजिया इलाही खान ने मोनालिसा और फरमान खान की शादी को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। शाम खरगोन में पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह विवाह कानूनी रूप से सही नहीं है और इसमें हिन्दू मैरिज एक्ट का उल्लंघन किया गया है। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि मोनालिसा को सीरिया भेजने की तैयारी है। हिंदू परंपराओं का दुरुपयोग हुआ नाजिया इलाही खान ने कहा कि इस शादी में हिंदू परंपराओं का दुरुपयोग किया गया है और उनका मजाक उड़ाया गया है। उन्होंने कहा कि यदि फरमान खुद को अभी भी मुसलमान बता रहा है तो वह हिंदू रीति-रिवाजों के तहत मंदिर में विवाह कैसे कर सकता है। उनके अनुसार हिंदू मैरिज एक्ट के तहत विवाह के लिए दोनों पक्षों का हिंदू होना आवश्यक है, इसलिए यह विवाह कानूनी रूप से संदिग्ध प्रतीत होता है। लव जिहाद करार दिया उन्होंने इस पूरे मामले को सुनियोजित लव जिहाद करार देते हुए कहा कि इसमें प्रतिबंधित संगठन पीएफआई और इस्लामी कट्टरपंथ की मिलीभगत की आशंका है। नाजिया ने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके। सख्त कानूनी प्रावधान की मांग की नाजिया इलाही खान ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अपील करते हुए कहा कि बीएनएसकी धारा 69 लव जिहाद जैसे मामलों से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए अलग और सख्त कानूनी प्रावधान बनाए जाने चाहिए ताकि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हो सके। मोनालिसा को सीरिया भेजने की तैयारी उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के मजबूत नेटवर्क के कारण केरल इस तरह की घटनाओं के लिए अनुकूल स्थान बन गया है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें मिली जानकारी के अनुसार मोनालिसा का जो तत्काल पासपोर्ट बनाया गया है, वह उसे सीरिया भेजने की किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है। नाजिया ने कहा कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए देश की सुरक्षा एजेंसियों को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए और पूरे प्रकरण की जांच कर सच्चाई सामने लानी चाहिए।  

सरकार का बड़ा फैसला: धर्म स्वातंत्र्य विधेयक लौटाकर नए संशोधनों के साथ सर्वसम्मति से पारित

रायपुर. विधानसभा बजट सत्र के दौरान मंगलवार को गृह मंत्री विजय शर्मा ने राज्यपाल द्वारा लौटाए गए छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य (संशोधन) विधेयक, 2006 पर विचार का प्रस्ताव प्रस्तुत किया. विचार के उपरांत आसंदी ने सरकार को विधेयक वापस लेने की अनुमति दी. विधानसभा में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य (संशोधन) विधेयक, 2006 को वापस लेने के अलावा राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026 के पुर्नस्थापन प्रस्ताव प्रस्तुत किया. जिसे विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित किया. इसके साथ मंत्री ओपी चौधरी ने छत्तीसगढ़ नगर एवं ग्राम निवेश (संशोधन) विधेयक, 2026 के पुर्नस्थापन का प्रस्ताव और छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल (संशोधन) विधेयक, 2026 के पुर्नस्थापन प्रस्ताव प्रस्तुत किया. विधानसभा में दोनों प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ. एक के बाद एक प्रस्तुत किए गए प्रस्तावों के स्वीकार होने के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के विभागों से सम्बंधित अनुदान मांगों पर चर्चा शुरू हुआ. विपक्ष ने चर्चा में भाग नहीं लिया. क्या है छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण विधेयक? छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण स्वातंत्रय विधेयक 2026 के फॉर्मेट का अनुमोदन किया गया है. इस विधेयक का उद्देश्य छत्तीसगढ़ में एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन के लिए बल प्रयोग, प्रलोभन, कपटपूर्ण नीति और साधनों पर सही तरीके से रोक लगाना है. अब अगर छत्तीसगढ़ में रहने वाले किसी व्यक्ति को कोई दूसरा इंसान जबरन दबाव डालकर धर्म परिवर्तन करवाता है, तो उसे दोषी मानते हुए उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. अगर नियम के बाहर कोई व्यक्ति धर्म बदलता है, तो उसे कानूनी मान्यता नहीं मिलेगी. विधेयक साफ तौर पर यह कहता है कि धर्म परिवर्तन किसी भी व्यक्ति की इच्छा से होना चाहिए. दबाव या लालच से नहीं. छत्तीसगढ़ में पहले से ही धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1968 लागू है, जो 1 नवंबर, 2000 को अस्तित्व में आया था. सार्वजनिक की जाएगी धर्मांतरण की जानकारी छत्तीसगढ़ में नए धर्मांतरण विधेयक के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिला मजिस्ट्रेट को पूर्व सूचना देनी होगी. प्रस्तावित धर्मांतरण की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी और 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का नियम होगा. विधेयक में प्रलोभन, प्रपीड़न, दुर्व्यपदेशन, सामूहिक धर्मांतरण और डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण जैसे शब्दों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा.     जबरन धर्मांतरण करवाने पर है सजा का प्रावधान     कानून में अवैध धर्मांतरण के मामलों के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया गया है. अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपए का जुर्माना हो सकता है.     यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित है, तो सजा 10 से 20 साल तक की जेल और कम से कम 10 लाख रुपए का जुर्माना हो सकता है.     सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में सजा और कठोर होगी, जिसमें 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपए जुर्माना का प्रावधान किया गया है.     विधेयक के तहत आने वाले अपराध संज्ञेय और गैर जमानती होंगे. मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालय में की जाएगी. सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य धार्मिक स्वतंत्रता को सीमित करना नहीं बल्कि अवैध तरीकों से होने वाले धर्मांतरण को रोकना है. दूसरे राज्यों से कैसे अलग है छत्तीसगढ़ का कानून छत्तीसगढ़ से पहले उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, हरियाणा, झारखंड, अरुणाचल प्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों में धर्म बदलने के खिलाफ कानून मौजूद हैं. सभी राज्यों में लगभग कानून एक जैसा ही है, लेकिन उसकी सजा और जुर्माने में अंतर है. जबकि छत्तीसगढ़ में आदिवासियों की एक बड़ी आबादी है और उन क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया गया है. इसके अलावा सामूहिक धर्मांतरण ना हो इस पर जोर दिया गया है और सख्त सजा का प्रावधान किया गया है. छत्तीसगढ़ में धर्म परिवर्तन की आईं खबरें छत्तीसगढ़ के बस्तर और जशपुर क्षेत्र में कई बार आदिवासियों को ईसाई धर्म में परिवर्तन की खबरें आई थीं. कई बार ऐसा भी पता चला है कि आदिवासियों और धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों के बीच भी विवाद हुआ था. अब धर्मांतरण विधेयक के बाद ऐसे मामलों में रोक लगने की उम्मीद होगी. छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण को लेकर पिछले कुछ महीनों में कई FIR भी दर्ज हुई हैं और पुलिस को शिकायत भी मिली है. उपमुख्यमंत्री ने कही ये बात धर्मांतरण विधेयक पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 1968 का धर्म स्वतंत्र विधेयक लागू है. अब परिस्थितियां बदल गई हैं, तो नई परिस्थितियों के तहत धर्म स्वतंत्र विधेयक लाया गया है.

रसोई में जूते-चप्पल पहनना सही या गलत? वास्तु शास्त्र की चेतावनी जानें

भारतीय संस्कृति में रसोईघर को घर का सबसे पवित्र हिस्सा माना जाता है। आखिर क्यों हमारे बड़े-बुजुर्ग हमेशा रसोई में चप्पल ले जाने से मना करते थे और वास्तु शास्त्र इस बारे में क्या चेतावनी देता है। किचन सिर्फ खाना पकाने की जगह नहीं है, बल्कि यहां धन और धान्य की देवी मां अन्नपूर्णा का वास होता है। जब हम बाहर से गंदे जूते-चप्पल पहनकर किचन में जाते हैं, तो हम अनजाने में देवी का अपमान कर रहे होते हैं। प्राचीन वास्तु ग्रंथों जैसे 'वास्तु राजवल्लभ' और 'समरांगण सूत्रधार' में घर के दो हिस्सों को हमेशा सबसे शुद्ध रखने पर जोर दिया गया है- पहला पूजा घर और दूसरा रसोईघर। वास्तु शास्त्र के अनुसार, जूते-चप्पलों के साथ राहु और केतु (नकारात्मक ऊर्जा) का प्रभाव जुड़ा होता है। जब यह नकारात्मक ऊर्जा किचन में पहुंचती है, तो खाने के जरिए पूरे परिवार के शरीर में प्रवेश कर जाती है। इससे घर में बीमारियां बढ़ती हैं, बेवजह के झगड़े होते हैं और घर की बरकत (धन) रुक जाती है। वैज्ञानिक नजरिया क्या है? अगर धार्मिक नजरिए से हटकर देखें, तो भी यह आदत बहुत नुकसानदायक है। हमारे जूतों में बाहर की सड़कों की गंदगी, कीटाणु और बैक्टीरिया चिपके होते हैं। जब वही चप्पलें किचन में जाती हैं, तो वह गंदगी हमारे खाने तक पहुंच सकती है, जिससे परिवार का स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। अगर पहनना मजबूरी हो तो क्या करें? कई बार सर्दियों के मौसम में फर्श बहुत ठंडा होता है या किसी को जोड़ों के दर्द (Medical Issue) की वजह से चप्पल पहनना जरूरी होता है। ऐसे में वास्तु का एक आसान सा उपाय है:     अपने किचन के लिए एक अलग, साफ 'कपड़े या ऊन की चप्पल' रखें।     इस चप्पल को पहनकर घर के बाहर या बाथरूम में बिल्कुल न जाएं।     किचन में देवी अन्नपूर्णा और अग्नि देव का वास होता है, अशुद्ध पैरों से वहां जाना उनका सीधा अपमान है।     बाहर की चप्पलें किचन में ले जाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, जिससे आर्थिक तंगी (पैसे की कमी) आ सकती है।  

धार-खंडवा पुलिस ने नकली इनकम टैक्स अधिकारी बनकर डकैती करने वाले गिरोह का किया भंडाफोड़

धार एवं खंडवा जिले की संयुक्त पुलिस टीम ने नकली इनकम टैक्स अधिकारी बनकर डकैती करने वाले गिरोह का किया पर्दाफाश 48 घंटे में मुख्य आरोपी सहित 8 आरोपियों को किया गिरफ्तार 1करोड़ 35लाख रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त धार /खंडवा धार एवं खंडवा जिलों में नकली इनकम टैक्स अधिकारी बनकर डकैती की सनसनीखेज घटना का धार और खंडवा की संयुक्त पुलिस टीमों ने 48 घंटे के भीतर खुलासा करते हुए मुख्य आरोपी सहित 8 आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। आरोपियों से पुलिस ने घटना में लूटे गए सोने के आभूषण, नगदी तथा वारदात में प्रयुक्त वाहन सहित लगभग1 करोड़ 35 लाख 57 हजार रुपयेकीमत की संपत्ति जब्तकी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार दिनांक 13 मार्चको फरियादी ने थाना बाग में रिपोर्ट दर्ज कराई कि सुबह लगभग 9:30 बजे कुछ अज्ञात बदमाश नकली इनकम टैक्स अधिकारी बनकर उसके घर पहुंचे, उसे बंधक बनाकर घर में फर्जी रेड डालते हुए सोने के आभूषण और नगदी लूटकर फरार हो गए। इस संबंध में थाना बाग में बीएनएस के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की गई। टीम द्वारा जांच के दौरान सामने आया कि इसी तरह की एक वारदात 12 मार्चको ग्राम पामाखेड़ी थाना नर्मदानगर जिला खंडवा में भी की गई थी। घटना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस महानिरीक्षक इंदौर ग्रामीण जोन  अनुराग, उप महानिरीक्षक इंदौर ग्रामीण जोन  मनोज कुमार सिंहऔर उप महानिरीक्षक खरगौन  सिद्धार्थ बहुगुणा केनिर्देशन मेंखंडवा पुलिस से समन्वय स्थापित कर घटना में प्रयुक्त वाहन के सीसीटीवी फुटेज प्राप्त किए गए तथा धार और खंडवा की संयुक्त टीमों का गठन कर आरोपियों की तलाश शुरू की गई। पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह पहले सुनियोजित तरीके से मकानों की रेकी कर मकान की लोकेशन, परिवार की स्थिति, घर में वाहन एवं संपत्ति होने की संभावना सहित अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाते थे। इसके बाद योजनाबद्ध तरीके से स्वयं को आयकर विभाग का अधिकारी बताकर घरों में प्रवेश कर डरा-धमकाकर डकैती की वारदात को अंजाम देता था।जांच में यह भी सामने आया कि 12 मार्च को खंडवा जिले में हुई घटना तथा 13 मार्च को हुई दूसरी घटना में समान तरीके से ब्लैक स्कॉर्पियो वाहन का उपयोग किया गया था। पुलिस को इस वाहन की सूचना पूर्व में ही प्राप्त हो गई थी, जिससे दोनों घटनाओं के बीच संबंध स्थापित हुआ। पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए आसपास के थानाक्षेत्रों और सीमावर्ती जिलों में नाकाबंदी और घेराबंदी की। पुलिस की सक्रियता की जानकारी मिलने पर आरोपी डकैती का सामान लेकर भागते समय काले रंग की स्कॉर्पियो वाहन को सुनसान जंगल में छोड़कर अन्य वाहन से फरार हो गए।पुलिस को स्कॉर्पियो वाहन की तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों से वाहन का मालिक शहजाद पिता रोशन खान निवासी बैरछा होना पाया गया, जो इस पूरी वारदात का मास्टरमाइंड निकला। गाड़ी में पुलिस की वर्दी भी बरामद हुई है। इसके बाद संयुक्त पुलिस टीमों ने संभावित ठिकानों पर दबिश देकर आरोपियों की पहचान सुनिश्चित कर ली गई है। इसमें से 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लूट की गई संपत्ति बरामद की।पुलिस द्वारा पूछताछ करने पर उन्होंने खंडवा जिले की घटना को कारित करना भी स्वीकार किया। पूछताछ में गिरोह के मुख्य सदस्यों के रूप में संजय शर्मा, नसीर, रणजीत एवं शहजाद के नाम सामने आए हैं, जिनके विरुद्ध पूर्व में भी आपराधिक रिकॉर्ड पाया गया है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि धार की घटना में कुल 14 तथा खंडवा की घटना में 16 आरोपी शामिल थे, जिनमें से 10 आरोपी दोनों घटनाओं में समान रूप से शामिल थे।जबकि कुछ आरोपी स्थानीय स्तर पर वाहन एवं अन्य सहयोग उपलब्ध कराने वाले हैं। गिरफ्तार आरोपियों में आबिद पिता मुबारिक शाह, अय्यूब शाह पिता निजामुद्दीन शाह, दिनेश पिता रुखड़िया, दिलीप पिता रामचंद्र अहिरवार, शहजाद पिता रोशन खान, रमेश पिता गजरिया मोरी, राजा उर्फ अब्दुल गफ्फार पिता अब्दुल हमीद खान तथा नरसिंह पिता भलिया बघेल शामिल हैं। आरोपियों ने अपने अन्य फरार साथियों के साथ मिलकर उक्‍त घटना एवं खंडवा जिले में उक्त वारदातों को अंजाम देना स्वीकार किया है।पुलिस द्वारा आरोपियों से प्रदेश के अन्य जिलों में इस प्रकार की घटनाओं के संबंध में भी गहन पूछताछ की जा रही है, जिससे अन्य वारदातों के खुलासे की संभावना है।  

3.5 करोड़ के चेक बाउंस मामले में विधायक अनमोल गगन मान के पति को सजा, दो पार्टनर भी शामिल

लुधियाना   पंजाब से बड़ी खबर सामने आ रही है। दरअसल,  डेराबस्सी की अदालत ने करोड़ों रुपये के चेक बाउंस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए खरड़ से विधायक अनमोल गगन मान के पति शाहबाज सिंह सोही समेत 3 लोगों को दोषी करार दिया है। अदालत ने तीनों को दो-दो साल की सजा और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह मामला करीब साढ़े 3 करोड़ रुपए के चेक बाउंस से जुड़ा हुआ है। जानकारी के अनुसार करीब सात साल तक चली सुनवाई के बाद ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास परनीत कौर की अदालत ने यह फैसला सुनाया। दोषियों में शाहबाज सिंह सोही (हाल निवासी चंडीगढ़, मूल रूप से जीरकपुर), जतिंदर सिंह नोनी और नछत्तर सिंह शामिल हैं। हालांकि फैसला सुनाए जाने के बाद तीनों ने मौके पर ही जमानत राशि भरकर जमानत ले ली। 2018 में हुई थी ​शिकायत 30 नवंबर 2018 को यह याचिका जीरकपुर के सरपंच और पार्षद रहे जसपाल सिंह के छोटे भाई कमलजीत सिंह ने दर्ज करवाई थी। शिकायत में खरड़ एमएलए अनमोल गगन मान के पति शाहबाज सिंह साही, जतिंदर सिंह, नश्तर सिंह को आरोपी बनाया था। याचिका के अनुसार, तीनों आरोपी मेसर्स प्लेटिनम स्मार्ट बिल्डर्स में पार्टनर थे और राजपुरा में सिल्वर सिटी नाम से प्रोजेक्ट बनाने की योजना बना रहे थे। आरोप है कि उन्होंने शिकायतकर्ता को प्रोजेक्ट में कुछ प्लॉट देने का वादा करके निवेश के लिए तैयार किया। कमर्शियल प्लॉट का सौदा किया शिकायतकर्ता के अनुसार उसने आरोपियों के साथ कुल 22950 वर्ग-गज के कई रेजिडेंशियल प्लॉट्स और 515 वर्ग गज के कुछ कमर्शियल प्लॉट का सौदा किया। इसके बदले में आरोपियों को 18 दिसंबर 2017 को 7 करोड़ रुपए का चेक देकर फुल पेमेंट कर दी। लेकिन आरोपियों ने जनवरी 2018 में 3 करोड़ रुपए का चेक देकर सौदा रद्द कर दिया। फिर प्रोजेक्ट डेवलप करने के नाम पर 25 लाख रुपए और फिर 1.5 करोड़ रुपए कमलजीत से और ले लिए। अदालत ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर दिया निर्णय लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने शिकायतकर्ता पक्ष के तर्कों को मजबूत मानते हुए तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया और उन्हें सजा सुनाई। शिकायतकर्ता के वकील भारत जोशी ने बताया कि कोर्ट ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट, 1881 की धारा 138 के तहत तीनों आरोपियों को सजा सुनाई है। कोर्ट ने कहा कि अगर इस केस में कोई आरोपी पहले भी जेल जा चुका है, तो सजा कम कर दी जाएगी। 2 साल पहले हुई थी अनमोल गगन की शादी गौरतलब है कि पूर्व विधायक अनमोल गगन मान की दो साल पहले शादी हुई थी। उनकी शादी में मुख्यमंत्री भगवंत मान सहित कई हस्ति​यों ने शिरकत की थी। पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री से भी कई कलाकर अनमोल गगन को बधाई देने पहुंचे थे। 2020 में जॉइन की थी आम आदमी पार्टी अनमोल गगन मान ने 2020 में आम आदमी पार्टी जॉइन की थी। वह 2022 के विधानसभा चुनाव में खरड़ सीट पर अकाली दल के रणजीत सिंह गिल को 37 हजार 718 वोट से हराकर MLA बनीं। इसके बाद उन्हें मंत्री बनाया गया था। हालांकि सितंबर 2024 में मंत्रिमंडल में हुए फेरबदल के बाद उन्हें मंत्री पद से हटा दिया गया था। क्या है मामला  मामले की शुरुआत 2018 में हुई थी, जब शिकायतकर्ता कमलजीत सिंह कामा (जीरकपुर के पूर्व सरपंच जसपाल सिंह के भाई) ने अदालत में शिकायत दर्ज करवाई थी। आरोप है कि ‘मेसर्स प्लेटिनम स्मार्ट बिल्डकॉन’ नामक कंपनी के तीनों पार्टनरों ने राजपुरा में एक हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए करोड़ों रुपये के प्लॉट बेचने का सौदा किया था। सौदा पूरा न होने के बावजूद उन्होंने शिकायतकर्ता को साढ़े तीन करोड़ रुपये का चेक दिया, जो बाद में बाउंस हो गया। शिकायतकर्ता पक्ष के वकील भारत जोशी के अनुसार लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने शिकायतकर्ता के पक्ष को मजबूत मानते हुए यह फैसला सुनाया। वहीं कमलजीत सिंह कामा ने कहा कि आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से ठगी की और उन्हें सजा मिलने के बाद ही उन्हें न्याय मिला है। 

स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का त्याग और बलिदान देश की अमूल्य धरोहर: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का त्याग और बलिदान देश की अमूल्य धरोहर: मुख्यमंत्री  साय रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय कक्ष में छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संस्था के प्रतिनिधि मंडल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री को 23 मार्च को बेमेतरा जिले में आयोजित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार सम्मान समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री  साय ने आमंत्रण के लिए संस्था के पदाधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का योगदान देश के इतिहास में अमूल्य है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिवारों का सम्मान करना हम सभी का दायित्व है। यह केवल कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को देशभक्ति, समर्पण और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देने का भी सशक्त माध्यम है।उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में राष्ट्रीय मूल्यों को सुदृढ़ करते हैं और स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली इतिहास को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ रजककार विकास बोर्ड के अध्यक्ष  प्रहलाद रजक, संस्था के अध्यक्ष डॉ. शिरीष शर्मा, डॉ. शिवेन्द्र त्रिपाठी,  ललित मिश्रा,  विनायक दीवान सहित अन्य प्रतिनिधि उपस्थित थे।