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सेवा से सियासत तक: पंजाब में रिटायर्ड अफसरों की बढ़ती दखल, राजनीति में हलचल

चंडीगढ़. पंजाब में प्रशासनिक और पुलिस सेवाओं में लंबे समय तक काम करने वाले अधिकारी अब तेजी से सक्रिय राजनीति का रुख कर रहे हैं। कभी सरकारी नीतियों को लागू करने वाले ये नौकरशाह अब विभिन्न राजनीतिक दलों के मंच से उन्हीं नीतियों को बनाने और दिशा देने में भूमिका निभा रहे हैं। इससे राज्य की राजनीति में अनुभव का नया आयाम जुड़ा है, वहीं निष्पक्षता और नीति निर्माण पर प्रभाव को लेकर बहस भी गहराती जा रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इन अधिकारियों के पास जमीनी अनुभव, प्रशासनिक समझ और सिस्टम की गहरी जानकारी होती है, जिसका लाभ राजनीतिक दल उठाना चाहते हैं। यही कारण है कि लगभग हर प्रमुख दल—चाहे वह आम आदमी पार्टी हो, कांग्रेस, भाजपा या शिअद—पूर्व अधिकारियों को अपने साथ जोड़ रहा है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इससे सेवा के दौरान लिए गए निर्णयों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। पूर्व आईपीएस जो राजनीतिक पार्टियों में शामिल हुए – कुंवर विजय प्रताप सिंह : आम आदमी पार्टी मोहम्मद मुस्तफा : कांग्रेस पीएस गिल : भाजपा एसएस विर्क : भाजपा गुरविंदर सिंह ढिल्लों : कांग्रेस पूर्व आईएएस जो राजनीति में गए – एसएस चन्नी : भाजपा परमपाल कौर : भाजपा डीएस गुरू : अकाली दल सोम प्रकाश : भाजपा आरएस कलेर : शिअद तेजिंदर पाल सिद्धू : शिअद जगमोहन राजू : भाजपा डा. अमर सिंह : कांग्रेस कुलदीप वैद्य : कांग्रेस बलविंदर सिंह : कांग्रेस आईएफएस तरणजीत संधू : भाजपा पीसीएस बलकार सिंह : आम आदमी पार्टी सेवानिवृत जज जस्टिस निर्मल सिंह : शिअद राजनीति को प्रशासनिक अनुभव की जरूरत राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह रुझान आने वाले समय में और तेज हो सकता है, क्योंकि दलों को ऐसे चेहरों की जरूरत है जो प्रशासनिक अनुभव के साथ-साथ जनता के मुद्दों की समझ भी रखते हों। फिलहाल, यह साफ है कि सेवा से सियासत तक का यह सफर पंजाब की राजनीति को नई दिशा दे रहा है।

राजस्थान रॉयल्स की पहचान बन चुके थे संजू सैमसन, उनके जाने से टीम कमजोर: फाफ डुप्लेसी

नई दिल्ली दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान फाफ डुप्लेसी का मानना है कि जिस तरह से महेंद्र सिंह धोनी चेन्नई सुपर किंग्स और विराट कोहली रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के पर्याय बन चुके हैं, इसी तरह से संजू सैमसन को राजस्थान रॉयल्स का चेहरा माना जा सकता था। फाफ ने कहा कि आरआर से संजू का जाना टीम के लिए बहुत बड़ा नुकसान है। सैमसन राजस्थान रॉयल्स की तरफ से दो कार्यकाल में 11 सत्र में खेले। वह इस टीम के सबसे सफल खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने रॉयल्स की तरफ से सर्वाधिक मैच खेलने के अलावा सर्वाधिक रन भी बनाए हैं। इस बार इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में वह चेन्नई सुपर किंग्स की तरफ से खेलेंगे।   डुप्लेसी ने जिओ हॉटस्टार से कहा, ‘अगर हम आईपीएल की टीमों पर गौर करें तो अधिकतर टीमों के पास कोई एक ऐसा खिलाड़ी रहा है जो लंबे समय तक फ्रेंचाइजी का चेहरा रहा जैसे रोहित शर्मा, महेंद्र सिंह धोनी और विराट कोहली। मैं संजू सैमसन को राजस्थान रॉयल्स के लिए उसी तरह का खिलाड़ी मानता हूं।’ उन्होंने कहा, ‘भले ही वह नई पीढ़ी के खिलाड़ी हैं, लेकिन वह उस फ्रेंचाइजी का चेहरा बन गए थे। जब मैं राजस्थान रॉयल्स के बारे में सोचता हूं, तो मुझे संजू सैमसन याद आते हैं। इसलिए मुझे लगता है कि उनका किसी अन्य टीम से जुड़ना प्रशंसकों, आईपीएल और टूर्नामेंट के लिए बहुत बड़ा झटका है, क्योंकि उन्होंने वहां बहुत बड़ी भूमिका निभाई है।’ डुप्लेसी ने कहा कि सैमसन के जाने से राजस्थान रॉयल्स के शीर्ष क्रम के बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल पर अतिरिक्त जिम्मेदारी आ जाएगी। सैमसन की मौजूदगी में जायसवाल अपना स्वाभाविक खेल खेलते थे लेकिन अब उन पर अधिक जिम्मेदारी आ गई है। उन्होंने कहा, ‘संजू की मौजूदगी में यशस्वी जायसवाल को अपना नैसर्गिक खेल खेलने का मौका मिलता था क्योंकि दूसरे छोर से संजू लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा था। अब ऐसा नहीं होगा और उन पर अधिक जिम्मेदारी होगी। उस तरह के बल्लेबाज के लिए यह महत्वपूर्ण होता है कि वह जिम्मेदारी के बारे में नहीं सोचें। इसलिए यह सत्र उनके लिए सीखने की एक प्रक्रिया होगी।’ पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज लक्ष्मीपति बालाजी ने कहा कि राजस्थान रॉयल्स के रियान पराग को कप्तान नियुक्त करने के फैसले से उन्हें हैरानी हुई जबकि टीम में जायसवाल, ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा और इंग्लैंड के सैम कुरेन जैसे अधिक अनुभवी खिलाड़ी मौजूद थे। उन्होंने कहा, ‘मुझे इस फैसले से थोड़ी हैरानी हुई क्योंकि उसके पास यशस्वी जायसवाल, रविंद्र जडेजा जैसे भारतीय खिलाड़ी और सैम कुरेन के रूप में विदेशी खिलाड़ी है जो कप्तानी कर सकते थे। इसलिए मुझे यह एक तरह का जुआ लगता है।’ बालाजी ने कहा कि ऐसे में टीम के मुख्य कोच और क्रिकेट निदेशक कुमार संगकारा की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा, ‘आईपीएल में कप्तानी सिर्फ मैदान पर फैसले लेने की क्षमता तक सीमित नहीं है बल्कि यह खिलाड़ियों को एकजुट रखने से भी जुड़ा है। इसलिए मुझे लगता है यह एक दोधारी तलवार है। कुमार संगकारा से निश्चित रूप से बहुत मदद मिलेगी।’ किशोर बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के बारे में बालाजी ने कहा कि प्रतिद्वंद्वी टीमों ने शायद उनकी कमजोरियों की पहचान कर ली होगी, लेकिन इस 14 वर्षीय खिलाड़ी के लिए यह साबित करने का एक बड़ा अवसर है कि आईपीएल में पिछले साल का उनका प्रदर्शन महज संयोग नहीं था। उन्होंने कहा, ‘हमने पिछले सत्र में वैभव सूर्यवंशी की प्रतिभा देखी है। उन्होंने गुजरात टाइटंस के खिलाफ बहुत अच्छे गेंदबाजी आक्रमण के सामने शतक बनाया था। लेकिन दूसरा साल किसी भी खिलाड़ी के लिए हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है।’ बालाजी ने कहा, ‘यहीं पर कुमार संगकारा का मार्गदर्शन काम आएगा। विपक्षी टीमों ने निश्चित रूप से उनकी कुछ कमजोरियों की पहचान कर ली होगी। उनके पास अपने प्रदर्शन में निरंतरता बनाए रखने का यह शानदार अवसर होगा।’  

भर्ती अभ्यर्थियों के लिए राहत: जॉइनिंग के बाद खाली पद वेटिंग लिस्ट से भरे जाएंगे

बिलासपुर. पुलिस आरक्षक भर्ती मामले में हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि चयनित अभ्यर्थियों की जॉइनिंग के बाद खाली रह जाने वाले पदों को वेटिंग लिस्ट से भरा जाए. कोर्ट ने साफ कहा कि सभी विज्ञापित पद केवल जारी चयन सूची से भर पाना संभव नहीं है. दरअसल, वर्ष 2024 में पुलिस विभाग द्वारा करीब 5967 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था. याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया कि कई अभ्यर्थियों ने एक से अधिक जिलों से आवेदन किया और मेरिट में आने पर उन्हें कई जिलों की चयन सूची में शामिल कर लिया गया. इससे वास्तविक रूप से पद खाली रह जाने की स्थिति बन रही है. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि चयन सूची में 5948 अभ्यर्थियों के नाम प्रकाशित किए गए हैं, लेकिन यह संभव है कि एक ही अभ्यर्थी एक से अधिक जिलों में चयनित हो. ऐसे में जब वह किसी एक जिले में जॉइन करेगा, तो बाकी जिलों के पद रिक्त हो जाएंगे. इन रिक्त पदों को बाद में वेटिंग लिस्ट से भरा जाएगा. मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू की सिंगल बेंच ने कहा कि वर्तमान स्थिति में यह स्पष्ट है कि सभी पद चयन सूची से नहीं भर पाएंगे. इसलिए राज्य सरकार को निर्देशित किया जाता है कि चयनित उम्मीदवारों की जॉइनिंग के बाद बचे हुए पदों को नियमों के तहत वेटिंग लिस्ट के अभ्यर्थियों से भरे. कोर्ट ने याचिका का निराकरण करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखते हुए रिक्त पदों को जल्द भरने की कार्रवाई की जाए. 

चांदी में आई बड़ी गिरावट, सोने में भी मंदी, क्या आर्थिक संकट का संकेत है?

 नई दिल्ली शेयर बाजार में भारी गिरावट के बीच गुरुवार को सोने-चांदी की कीमतें भी धाराशायी हो गईं हैं. MCX पर चांदी की कीमतों में 5 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखी जा रही है. सोना भी करीब 2.50 फीसदी तक फिसल गया है। गुरुवार दोपहर साढ़े 12 बजे अचानक चांदी की कीमतें टूटने लगीं, और देखते ही देखते 12000 रुपये प्रति किलो सस्ती हो गई. जबकि सोने के भाव में करीब 4500 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट आई है। दरअसल, मिडिल ईस्ट का संकट गहाराता जा रहा है, पहले ईरान के तेल इंफ्रा पर अमेरिका ने हमला किया, अब बदले में ईरान ने भी कतर से बड़े ऑयल रिफाइनरी प्लांट पर हमला कर दिया है. जिससे भारी नुकसान का अनुमान  लगाया जा रहा है. इस बीच कच्चे तेल क्रूड ऑयल की कीमत बढ़कर 113 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। चांदी में बड़ी गिरावट के पीछे ये कारण सोने-चांदी में गिरावट के कई कारण हैं. लेकिन मुख्यतौर पर अमेरिका का एक फैसला है. बुधवार को अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला लिया, फेडरल रिजर्व ने संकेत दिए कि इस साल अब ब्याज दरों में कटौती की संभावना सीमित है. फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने कहा कि ग्लोबल तनाव के चलते आर्थिक स्थिति काफी खराब है, इस फैसले के बाद ग्लोबल मार्केट में सोने-चांदी की जमकर पिटाई हुई। बता दें, पिछले करीब दो साल से सोने-चांदी में एकतरफा रैली देखी गई थी. 29 जनवरी 2026 को चांदी (Silver) की कीमत रिकॉर्ड 4.20 लाख रुपये प्रति किलो पहुंच गई थी. लेकिन उसके बाद लगातार गिरावट देखने को मिल रही है. 2 फरवरी 2026 चांदी की कीमत गिरकर 2.25 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी. इसके पीछे मुनाफावसूली कारण थे। युद्ध के बीच सोने-चांदी में भी बिकवाली हावी  लेकिन अब एक बार फिर चांदी इसी कीमत के आसपास पहुंच गई है. चांदी अब 29 जनवरी की हाई से करीब 1.90 लाख रुपये प्रति किलो सस्ती हो चुकी है. फिलहाल चांदी की कीमत MCX पर 2.35 लाख प्रति किलो के आसपास बनी हुई है. जबकि सोना गुरुवार को ट्रेड के दौरान 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे से फिसल गया है। बता दें, अक्सर ये देखा गया है कि ग्लोबल संकट के दौरान खासकर जब युद्ध चल रहा हो तो निवशक ऐसे माहौल में सोने-चांदी को सुरक्षित निवेश मानते हैं, लेकिन इस बार थोड़ी उल्टी तस्वीर देखने को मिल रही है।

धर्मांतरण कानून पर बड़ा फैसला: छत्तीसगढ़ में बिल पास, जानें अन्य राज्यों से कितना अलग

रायपुर. छत्तीसगढ़ बहुप्रतीक्षित विधेयक आखिरकार विधानसभा में पारित किया गया। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज सदन में भारी गहमागहमी देखने को मिली। गृह मंत्री विजय शर्मा ने राज्य में धर्मांतरण पर रोक लगाने के उद्देश्य से ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026’ सदन के पटल पर रखा। विधेयक पेश होते ही विपक्ष ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया और इसे जल्दबाजी में उठाया गया कदम करार दिया। क्या है छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण विधेयक? छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण स्वातंत्रय विधेयक 2026 के फॉर्मेट का अनुमोदन किया गया है. इस विधेयक का उद्देश्य छत्तीसगढ़ में एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन के लिए बल प्रयोग, प्रलोभन, कपटपूर्ण नीति और साधनों पर सही तरीके से रोक लगाना है. अब अगर छत्तीसगढ़ में रहने वाले किसी व्यक्ति को कोई दूसरा इंसान जबरन दबाव डालकर धर्म परिवर्तन करवाता है, तो उसे दोषी मानते हुए उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. अगर नियम के बाहर कोई व्यक्ति धर्म बदलता है, तो उसे कानूनी मान्यता नहीं मिलेगी. विधेयक साफ तौर पर यह कहता है कि धर्म परिवर्तन किसी भी व्यक्ति की इच्छा से होना चाहिए. दबाव या लालच से नहीं. छत्तीसगढ़ में पहले से ही धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1968 लागू है, जो 1 नवंबर, 2000 को अस्तित्व में आया था. सार्वजनिक की जाएगी धर्मांतरण की जानकारी छत्तीसगढ़ में नए धर्मांतरण विधेयक के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिला मजिस्ट्रेट को पूर्व सूचना देनी होगी. प्रस्तावित धर्मांतरण की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी और 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का नियम होगा. विधेयक में प्रलोभन, प्रपीड़न, दुर्व्यपदेशन, सामूहिक धर्मांतरण और डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण जैसे शब्दों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा. जबरन धर्मांतरण करवाने पर है सजा का प्रावधान     कानून में अवैध धर्मांतरण के मामलों के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया गया है. अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपए का जुर्माना हो सकता है.     यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित है, तो सजा 10 से 20 साल तक की जेल और कम से कम 10 लाख रुपए का जुर्माना हो सकता है.     सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में सजा और कठोर होगी, जिसमें 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपए जुर्माना का प्रावधान किया गया है.     विधेयक के तहत आने वाले अपराध संज्ञेय और गैर जमानती होंगे. मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालय में की जाएगी. सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य धार्मिक स्वतंत्रता को सीमित करना नहीं बल्कि अवैध तरीकों से होने वाले धर्मांतरण को रोकना है. दूसरे राज्यों से कैसे अलग है छत्तीसगढ़ का कानून छत्तीसगढ़ से पहले उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, हरियाणा, झारखंड, अरुणाचल प्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों में धर्म बदलने के खिलाफ कानून मौजूद हैं. सभी राज्यों में लगभग कानून एक जैसा ही है, लेकिन उसकी सजा और जुर्माने में अंतर है. जबकि छत्तीसगढ़ में आदिवासियों की एक बड़ी आबादी है और उन क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया गया है. इसके अलावा सामूहिक धर्मांतरण ना हो इस पर जोर दिया गया है और सख्त सजा का प्रावधान किया गया है. छत्तीसगढ़ में धर्म परिवर्तन की आईं खबरें छत्तीसगढ़ के बस्तर और जशपुर क्षेत्र में कई बार आदिवासियों को ईसाई धर्म में परिवर्तन की खबरें आई थीं. कई बार ऐसा भी पता चला है कि आदिवासियों और धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों के बीच भी विवाद हुआ था. अब धर्मांतरण विधेयक के बाद ऐसे मामलों में रोक लगने की उम्मीद होगी. छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण को लेकर पिछले कुछ महीनों में कई FIR भी दर्ज हुई हैं और पुलिस को शिकायत भी मिली है. उपमुख्यमंत्री ने कही ये बात धर्मांतरण विधेयक पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 1968 का धर्म स्वतंत्र विधेयक लागू है. अब परिस्थितियां बदल गई हैं, तो नई परिस्थितियों के तहत धर्म स्वतंत्र विधेयक लाया गया है.

असम BJP की लिस्ट आई, प्रद्युत कांग्रेस छोड़ दिसपुर से, CM हिमंता जालुकबारी से लड़ेंगे चुनाव

 दिसपुर असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है. बीजेपी की इस सूची में कुल 88 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की गई है। बीजेपी की इस पहली लिस्ट में सबसे बड़ा नाम मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का है. वो अपनी पारंपरिक सीट जालुकबारी से ही चुनाव मैदान में उतरेंगे. कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए प्रद्युत को दिसपुर से टिकट दिया गया है। बीजेपी ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में अपने मजबूत चेहरों को मौका दिया है. गुवाहाटी और उसके आसपास की सीटों पर खास ध्यान दिया गया है। गोलकगंज से अश्विनी राय सरकार, धुबरी से उत्तम प्रसाद और मंदिया से बदल चंद्र आर्य को टिकट मिला है. गोआलपाड़ा वेस्ट से पबित्र राभा और दुधनाई से टंकेश्वर राभा को उम्मीदवार बनाया गया है. बिरसिंह-जरुआ से माधवी दास और अभयापुरी से भूपेन राय चुनावी मैदान में होंगे. वहीं, भोवानिपुर-सोरभोग सीट से रंजीत कुमार दास को उम्मीदवार बनाया गया है यहां देखें असम बीजेपी कैंडिडेट की लिस्ट नलबाड़ी: जयंत मल्ला बरुआ तिहू: चंद्रमोहन पटवारी रंगिया: भवेश कलिता कमलपुर: दिगंत कलिता गुवाहाटी सेंट्रल: विजय कुमार गुप्ता न्यू गुवाहाटी: दिप्लू रंजन शर्मा पलासबाड़ी: हिमांशु शेखर बैश्य बरखेरी: नारायण डेका चमरिया: ज्योत्सना कलिता बता दें कि असम में बीजेपी ने असम गण परिषद (AGP) और बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट (BPF) के साथ गठबंधन किया है. राज्य की 126 विधानसभा सीटों में से बीजेपी 89 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी. वहीं, 26 सीटों पर AGP और 11 सीटों पर BPF चुनाव लड़ेगी। चुनाव प्रचार में जुटेंगे पीएम मोदी और अमित शाह असम विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अप्रैल के पहले हफ्ते में राज्य के दौरे पर रहेंगे, जहां वो 1 अप्रैल, 3 अप्रैल और 6 अप्रैल को तीन बड़ी जनसभाओं को संबोधित करेंगे. प्रधानमंत्री के साथ-साथ गृह मंत्री अमित शाह भी राज्य में चुनाव प्रचार की कमान संभालेंगे. वो असम के कई इलाकों में चुनावी रैलियां करेंगे।

कार्तिक परिवार में खुशियों की दस्तक, दीपिका पल्लीकल ने बेटी को दिया जन्म, नाम भी आया सामने

नई दिल्ली पूर्व भारतीय क्रिकेटर दिनेश कार्तिक एक बार फिर पिता बन गए हैं। उनकी पत्नी दीपिका पल्लीकल ने बेटी को जन्म दिया है। दीपिका मशहूर स्क्वैश खिलाड़ी हैं। दोनों ने तीसरे बच्चे का स्वागत किया। 2021 में उनके जुड़वां बच्चे हुए। कार्तिक और पल्लीकल 2021 में जुड़वां बेटों के पिता बने थे, जिनका नाम कबीर और जियान है। कपल ने बेटी का नाम का खुलास कर दिया है। उन्होंने बेटी का नाम राहा रखा है। कार्तिक ने गुरुवार (19 मार्च) को फैंस के साथ गुड न्यूज शेयर की। कार्तिक ने इंस्टाग्राम पर शेयर की गई पोस्ट में बताया, ''दिल में दुआओं और शब्दों से परे शुक्रिया के साथ हम खुशी-खुशी अपनी प्यारी बच्ची का इस दुनिया में स्वागत करते हैं। कबीर और जियान अपनी छोटी बहन राहा पल्लीकल कार्तिक को परिचित कराते हुए बहुत खुश हैं। प्यार, दीपिका और दिनेश।'' कार्तिक-पल्लीकल ने 2015 में शादी की 40 वर्षीय कार्तिक की पोस्ट पर फैंस के जमकर रिएक्शन आ रहे हैं। कई बड़े क्रिकेटर ने भी उन्हें बेटी के जन्म पर शुभकामनाएं दीं। स्टार बल्लेबाज विराट कोहली ने कमेंट बॉक्स में हार्ट इमोजी शेयर की। पूर्व सलामी बल्लेबाज शिखर धवन ने लिखा, ‘’बधाई हो भाई।'' ऑलराउंडर अक्षर पटेल ने कमेंट किया, ‘’शुभकामनाएं अन्ना।'' कार्तिक रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) के मेंटोर हैं। फ्रेंचाइजी ने कार्तिक को बधाई हुए लिखा, ‘’राहा के लिए ढेर सारा प्यार और एक छोटी सी आरसीबी जर्सी भेज रहे।'' बता दें कि कार्तिक और पल्लीकल साल 2015 में शादी के बंधन में बंधे थे। दोनो ने पारंपरिक हिंदू और ईसाई रीति-रिवाजों से शादी रचाई थी। पल्लीकल ईसाई हैं। 6 IPL टीमों के लिए खेले दिनेश कार्तिक कार्तिक क्रिकेट से रिटायरमेंट के बाद कोचिंग और कमेंट्री की दुनिया में आ गए हैं। उन्होंने भारत के लिए 26 टेस्ट, 94 वनडे और 60 टी20 इंटरनेशनल मैच खेले। उन्होंने आखिरी इंटरनेशनल मैच 2022 में खेला था। वह इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में 267 मैचों में मैदान पर उतरे। उन्होंने आईपीएल में आरसीबी और कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेकआर) समेत 6 टीमों के प्रतिनिधित्व किया। वहीं, दीपिका देश की सबसे सम्मानित एथलीटों में से एक हैं। वह कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं। दीपिका ऐसा करने वाली पहली भारतीय पद्म श्री से सम्मानित दीपिक स्क्वैश की महिला वर्ल्ड रैंकिंग में टॉप-10 में रह चुकी हैं। वह टॉप-10 रैंकिंग में जगह बनाने वाली भारत की पहली महिला स्क्वैश खिलाड़ी हैं। उन्होंने आखिरी बार अक्टूबर 2023 में हांग्जो एशियन गेम्स में हिस्सा लिया था, जहां उन्होंने मिक्स्ड डबल्स में गोल्ड मेडल जीता। 2022 की शुरुआत में मैटरनिटी लीव से लौटने के बाद उन्होंने सफल वापसी की वर्ल्ड डबल्स स्क्वैश चैंपियनशिप में दो टाइटल जीते। उन्होंने 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता।

दुलारचंद मर्डर केस: बाहुबली अनंत सिंह को 4 महीने बाद मिली जमानत

 पटना पटना हाईकोर्ट ने गुरुवार 19 मार्च 2026 को जेडीयू के बाहुबली विधायक अनंत सिंह को दुलारचंद यादव हत्या मामले में जमानत दे दी है. अनंत सिंह पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान हुए इस हत्याकांड के आरोप में पटना की बेऊर जेल में बंद थे। कोर्ट ने बाहुबली विधायक की जमानत याचिका को स्वीकार करते हुए उन्हें रिहा करने का आदेश दिया. हत्याकांड से जुड़ा यह मामला अक्टूबर 2025 का है, जब मोकामा में चुनावी प्रचार के दौरान जन सुराज पार्टी के समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद पुलिस ने अनंत सिंह को मुख्य आरोपी मानते हुए गिरफ्तार किया था. इससे पहले निचली अदालतों ने उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं, लेकिन अब हाईकोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद वे जल्द ही जेल से बाहर आएंगे। क्या है पूरा मामला? 30 अक्टूबर 2025 को मोकामा के घोसवरी थाना क्षेत्र के बसावनचक में दुलारचंद यादव की हत्या हुई थी. दुलारचंद यादव आरजेडी नेता रहे थे और मोकामा से जनसुराज के प्रत्याशी के लिए प्रचार कर रहे थे. हत्या का आरोप अनंत सिंह पर लगाया गया था। चुनावी प्रक्रिया के बीच ही 1 नंवबर की रात अनंत सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था. इसके बाद, 2 नवंबर को कोर्ट में पेश करने के बाद बेऊर जेल में डाला गया था. करीब साढ़े 4 महीने बाद अनंत सिंह को जमानत मिली है। अनंत सिंह ने जेल में रहते हुए मोकामा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत भी हासिल की. अनंत सिंह 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव में वोटिंग के विधानसभा पहुंचे थे और इस दौरान कहा था कि वो जल्द ही जेल से बाहर आएंगे। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले के बाद अनंत सिंह ने भी ऐलान कर दिया है कि वे आगे अब चुनाव नहीं लड़ेंगे. मोकामा से आगे उनके बड़े बेटे चुनाव लड़ेंगे।

पं. कुंजीलाल दुबे का विधानसभा अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल अविस्मरणीय: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

पं. कुंजीलाल दुबे का विधानसभा अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल भुलाया नहीं जा सकता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने तीन बार विधानसभा अध्यक्ष रहे स्व. पं. दुबे की 130वीं जन्म जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित कर दी श्रद्धांजलि भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्व. पं. कुंजीलाल दुबे तीन बार मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष रहे। विधानसभा अध्यक्ष के रूप में उन्होंने हिन्दी भाषा को प्रतिष्ठित स्थान दिलाने में बड़ा योगदान दिया। स्व. पं. दुबे के विधानसभा अध्यक्षीय कार्यकाल की सुदीर्घ सेवाओं और संसदीय परम्पराओं को और भी समृद्ध बनाने में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को स्व. पं. कुंजीलाल दुबे की 130वीं जन्म जयंती के अवसर पर मध्यप्रदेश विधानसभा भवन परिसर में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व. पं. दुबे की समाजोन्मुखी सेवाओं के लिए वर्ष 1964 में इन्हें पद्मभूषण की उपाधि विभूषित किया गया। विद्या और ज्ञान के क्षेत्र में की गई सेवाओं और उपलब्धियों के लिए स्व. पं. दुबे को 1965 में एलएलडी की उपाधि दी गई, वहीं 1967 में विक्रम विश्वविद्यालय ने इन्हें डी-लिट की उपाधि प्रदान की थी। वे सदैव हमारी स्मृतियों में बने रहेंगे। म.प्र. विधानसभा के भूतपूर्व अध्यक्ष स्व. पं. कुंजीलाल दुबे का जन्म 19 मार्च 1896 को वर्तमान नरसिंहपुर जिले के ग्राम आमगांव में हुआ था। वकालत के पेशे से एक सुघड़ राजनीतिज्ञ के रूप स्थापित होकर स्व. पं. दुबे प्रथम विधानसभा (1956-57), द्वितीय विधानसभा (1957-62) एवं तृतीय विधानसभा (1962-67) में कुल तीन बार मप्र विधानसभा अध्यक्ष के रूप में सेवारत रहे। पुष्पांजलि कार्यक्रम में म.प्र. विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, विधायक भगवानदास सबनानी, प्रमुख सचिव विधानसभा अरविन्द शर्मा तथा भूतपूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. पं. दुबे के परिजन सहित विधानसभा के अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित थे।