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मुख्यमंत्री ने सूरजपुर जिले में 185 करोड़ के विकास कार्यों का किया लोकार्पण-भूमिपूजन

सूरजपुर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय आज चैत्र नवरात्रि की तृतीया तिथि के पावन अवसर पर सूरजपुर जिले के विकासखण्ड ओड़गी अंतर्गत ग्राम पंचायत कुदरगढ़ पहुंचे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हमारी आस्था के केंद्र कुदरगढ़ धाम का भव्य विकास होगा। माता के आशीर्वाद से छत्तीसगढ़ निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सूरजपुर जिले में 185 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का लोकार्पण-भूमिपूजन किया। मुख्यमंत्री ने माँ कुदरगढ़ी के पावन धाम में पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना और प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व है और मैं आज माँ कुदरगढ़ी के दरबार में आया हूँ। सूरजपुर वासियों ने मुझे यह सौभाग्य दिया, इसके लिए मैं आप सभी के प्रति हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ। मुख्यमंत्री ने कहा कि चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर प्रदेश के कोने-कोने से मां कुदरगढ़ी के दर्शन के लिए पहुंचे भक्तजनों को भी मैं सादर प्रणाम करता हूँ। जब चैत्र नवरात्रि पर देवी मंदिरों में भक्तों का उत्साह देखता हूँ तो बहुत अच्छा लगता है। हमारे देवी-देवता हमारे आस्था के प्रतीक तो हैं ही, वे हमारे जीवन में उत्सव का रंग भी भरते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के इस शुभ दिन सूरजपुर जिले में 185 करोड़ रुपए के 76 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया गया है। सूरजपुरवासियों को इसके लिए मैं हार्दिक बधाई देता हूँ। इन कार्यों में 20 करोड़ रुपए के 52 कार्यों के लोकार्पण तथा 164 करोड़ रुपए के भूमिपूजन के कार्य शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन कार्यों में सड़क, भवन, पेयजल, शिक्षा, जलाशय एवं नगरीय अधोसंरचना से जुड़े निर्माण शामिल हैं। साथ ही कुदरगढ़ में सर्वसुविधायुक्त नवनिर्मित विश्रामगृह भवन का लोकार्पण भी किया गया है। लगभग 3 करोड़ 9 लाख 60 हजार रुपये की लागत से निर्मित इस आधुनिक भवन में अतिथियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि माता के आशीर्वाद से बस्तर क्षेत्र से नक्सलवाद समाप्त करने की दिशा में सरकार लगातार प्रयासरत है । कुदरगढ़ धाम में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शीघ्र ही रोपवे का निर्माण कराया जाएगा, जिससे दर्शन करना और अधिक सुगम हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि क्षेत्र में डोम, बिजली सहित सभी आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि कुदरगढ़ धाम का समग्र और सुव्यवस्थित विकास सुनिश्चित किया जा सके। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री  साय ने जिले में पोषण के प्रति जागरूकता के लिए सुपोषण रथ, आपराधिक जागरूकता रथ और यातायात जागरूकता रथ को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों के बेहतर पोषण के लिए जनजागरूकता बेहद आवश्यक है। स्वस्थ महिला और बच्चों से परिवार की खुशियां मजबूत होती हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि यातायात के नियमों के प्रति सभी को सजग होना चाहिए जिससे सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है और लाखों लोगों का जीवन बचाया जा सकता है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सूरजपुर जिले में रेडी टू ईट निर्माण कार्य के माध्यम से पोषण कार्यक्रम का संचालन बेहतर ढंग से किया जा रहा है, जिससे महिलाओं और बच्चों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने इस पहल को जिले के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने चैत्र नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पावन पर्व नई ऊर्जा और समृद्धि का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों की उन्नति के लिए निरंतर कार्य कर रही है और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उनकी आय बढ़ाने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरगुजा ओलंपिक के आयोजन से इस क्षेत्र के खिलाड़ियों को खेल का नया अवसर मिला है। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि नवरात्रि के अवसर पर माता रानी का आशीर्वाद सभी जिले वासियों पर बना रहे। सरकार महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी सेवाओं को मजबूत करते हुए महिलाओं और बच्चो को बेहतर पोषण प्रदान करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री  साय के नेतृत्व में आपके क्षेत्रों के विकास के लिए निरन्तर कार्य किया जा रहा है। इस अवसर पर वन विकास निगम के अध्यक्ष  राम सेवक पैंकरा सहित अनेक जनप्रतिनिधि, जिले के वरिष्ठ अधिकारीगण, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में भक्तजन उपस्थित थे।

बिना अनुमति खड़ी हो रहीं इमारतें: अमृतसर में निगम की भूमिका पर उठे सवाल

अमृतसर. शहर के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र आईडीएच मार्केट में अवैध निर्माण का मामला सामने आने के बाद नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बस स्टैंड के साथ लगते इस मार्केट में दुकान नंबर 14-15 के ऊपर बिना नक्शा पास कराए लगातार निर्माण कार्य जारी है, लेकिन संबंधित विभाग कार्रवाई करने की बजाय चुप्पी साधे हुए हैं। जानकारी के अनुसार, नगर निगम द्वारा नीचे की दुकानें किराए पर दी गई हैं, जबकि इनके ऊपर अवैध रूप से दो से चार मंजिल तक निर्माण कर दिया गया है। हैरानी की बात यह है कि पिछले डेढ़ महीने से निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है, लेकिन निगम का एस्टेट और एमटीपी विभाग अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा पाया। इस मामले को लेकर समाजसेवी जय गोपाल लाली ने बताया कि कार्रवाई का अधिकार होने के बावजूद एस्टेट और एमटीपी विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं, जिसके चलते अवैध निर्माण पर रोक नहीं लग पा रही। उन्होंने यह भी बताया कि इन दुकानों से जुड़े दस्तावेज वर्ष 2004 के हैं, जिनमें कई तकनीकी खामियां सामने आई हैं, जिससे पूरे मामले पर संदेह और गहरा गया है। स्थानीय व्यापारियों और आसपास के लोगों में इस मुद्दे को लेकर भारी रोष है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस अवैध निर्माण को नहीं रोका गया, तो भविष्य में यह किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। मौके की स्थिति के अनुसार, ग्राउंड फ्लोर की दुकानों के बीच से ऊपर जाने के लिए सीढ़ियां बनाई गई हैं, जो ऊपरी मंजिल तक जाती हैं। ऊपर का निर्माण होटलनुमा ढंग से किया जा रहा है, जिससे कई तरह के सुरक्षा और वैधता संबंधी सवाल खड़े हो रहे हैं। गौरतलब है कि नगर निगम का एस्टेट विभाग रोजाना शहर में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई करता है, लेकिन इस मामले में विभाग की चुप्पी लोगों के गले नहीं उतर रही। वहीं, एमटीपी विभाग के अधिकारी नरेंद्र शर्मा से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन उठाना जरूरी नहीं समझा। इस संबंध में नगर निगम कमिश्नर बिक्रमजीत सिंह शेरगिल ने कहा कि उनके पास अभी तक इस मामले को लेकर कोई औपचारिक शिकायत नहीं आई है, लेकिन वे इसकी जांच करवाएंगे। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और अवैध निर्माण को तुरंत रोका जाए।

सुशासन एवं विकास को नई गति देगा स्टेट एआई मिशन

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में सुशासन एवं विकास को नई गति देने और शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं नागरिक-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से शीघ्र ही मध्यप्रदेश स्टेट एआई मिशन प्रारंभ किया जाएगा। यह मिशन सेवाओं के संचालन और आर्थिक अवसरों के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। स्टेट एआई मिशन राज्य के एआई विजन एंड एक्शन फ्रेमवर्क पर आधारित होगा, जिसके माध्यम से व्यवस्था को प्रेडिक्टिव, प्रोएक्टिव एवं डेटा-ड्रिवन बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एआई तकनीकों का उपयोग मानवीय निगरानी (ह्यूमन-इन-द-लूप) के साथ किया जाएगा, जिससे सुरक्षा, पारदर्शिता एवं नागरिकों का विश्वास सुनिश्चित किया जा सकेगा। एआई मिशन के क्रियान्वयन से नागरिकों, विशेषकर किसानों, ग्रामीण समुदायों, युवाओं एवं वंचित वर्गों को तेज, स्मार्ट और व्यक्तिगत सेवाएँ उपलब्ध होंगी। राज्य सरकार एआई तकनीक को सुलभ एवं किफायती बनाकर समाज के सभी वर्गों तक इसके लाभ पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रेडिक्टिव गवर्नेंस को मिलेगा बढ़ावा स्टेट एआई मिशन में कृषि, स्वास्थ्य, पोषण एवं आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में संभावित जोखिमों की पूर्व पहचान संभव हो सकेगी। सभी एआई प्रणालियों में पारदर्शिता, ऑडिटेबिलिटी और प्राइवेसी संरक्षण सुनिश्चित करते हुए रिस्पॉन्सिबल एआई के सिद्धांतों को अपनाया जाएगा। साथ ही प्रशासनिक कार्यों को अधिक दक्ष बनाने के लिए अधिकारियों को ड्राफ्टिंग, विश्लेषण, डिसीजन सपोर्ट एवं डेटा मैनेजमेंट से संबंधित एआई टूल्स उपलब्ध कराए जाएंगे। एआई का उपयोग केवल पायलट परियोजनाओं तक सीमित न रहकर राज्य की प्रमुख योजनाओं में व्यापक रूप से लागू किया जाएगा। चरणबद्ध तरीके से होगा मिशन का क्रियान्वयन स्टेट एआई मिशन को चरणबद्ध रूप से लागू किया जाएगा। वर्ष 2026-27 में वर्तमान एआई पहलों का समेकन एवं आधारभूत तैयारी सुदृढ़ की जाएगी। वर्ष 2027-28 में सफल यूज़ केसेस को विभिन्न विभागों में व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा और वर्ष-2028 से एआई को शासन की स्थायी संस्थागत क्षमता के रूप में विकसित किया जाएगा। एआई तकनीक से नागरिक सेवाओं की पहुँच हुई सुदृढ़ एमपी ई-सेवा एवं संपदा 2.0 जैसे प्लेटफॉर्म से एआई आधारित पात्रता पहचान, फेस रिकग्निशन एवं रियल-टाइम ट्रैकिंग से नागरिक सेवाएँ अधिक सुलभ, पारदर्शी एवं उत्तरदायी बन रही हैं। एआई आधारित गिरदावरी प्रणाली से भूमि एवं फसल संबंधी सेवाओं में सटीकता एवं विश्वसनीयता सुनिश्चित हुई है। कृषि क्षेत्र में एआई आधारित गिरदावरी, सिप्री परियोजना, जिला स्तरीय जीआईएस प्लेटफॉर्म तथा सारा एवं उन्नति एग्रीजीआईएस से करोड़ों भू-खंडों पर फसल मैपिंग एवं उपज आकलन किया जा रहा है, जिससे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में पारदर्शिता एवं बेहतर निर्णय-निर्माण को बल मिला है। एआई से सामाजिक सशक्तिकरण को मिल रहा बढ़ावा एआई आधारित पहलों के तहत सुमन सखी कार्यक्रम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी की जा रही है।वहीं एमपी कौशल रथ एवं ज्ञानकोष के जरिए युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार अवसरों से जोड़ा जा रहा है। समग्र प्लेटफॉर्म आधारित एआई पहचान प्रणाली से पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ पारदर्शी एवं लक्षित तरीके से पहुँचाया जा रहा है। एआई क्षेत्र में कौशल विकास को मिलेगा बढ़ावा राज्य में स्टार्टअप, शैक्षणिक संस्थानों एवं इंडस्ट्री के साथ साझेदारी विकसित कर मजबूत एआई इको सिस्टम तैयार किया जाएगा। युवाओं एवं शासकीय अधिकारियों के लिए एआई स्किलिंग कार्यक्रम संचालित कर भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप मानव संसाधन तैयार किए जाएंगे। सुशासन का नया मॉडल बनेगा मध्यप्रदेश ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ के सिद्धांत पर आधारित एआई दृष्टिकोण नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं प्रभावशीलता को नई ऊँचाई प्रदान करेगा। राज्य सरकार का लक्ष्य एआई को प्रयोगशाला से निकालकर ‘पब्लिक गुड’ के रूप में अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है, जिससे समावेशी एवं उत्तरदायी विकास सुनिश्चित किया जा सके।  

टीचर्स को नहीं मिलेगी राहत: MP में समर वेकेशन में भी ड्यूटी, मई-जून में होंगी बोर्ड परीक्षाएं

भोपाल प्रदेश के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को इस साल मई माह में मिलने वाला ग्रीष्मावकाश नहीं मिल पाएगा। माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) भोपाल ने इस दौरान 10वीं व 12वीं की द्वितीय बोर्ड परीक्षा प्रस्तावित की हैं। वहीं स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी इसी दौरान निर्धारित किए हैं। ऐसे में शिक्षक इस बार मई-जून में पूरी तरह से व्यस्त रहने वाले हैं। परीक्षाओं का विस्तृत शेड्यूल और अवकाश में कटौती शिक्षक संगठनों ने इस स्थिति पर आपत्ति जताई है। दरअसल, माशिमं द्वारा 10वीं और 12वीं की द्वितीय बोर्ड परीक्षा सात मई से आयोजित की जानी हैं। जारी समय-सारिणी के अनुसार 12वीं की परीक्षा सात मई को बायोटेक्नोलॉजी विषय से शुरू होकर 25 मई तक चलेंगी, वहीं 10वीं की परीक्षा सात मई से 19 मई तक चलेंगी। इसके अलावा 5वीं और 8वीं कक्षा की पुनः परीक्षाएं मई माह में और 9वीं-11वीं की द्वितीय वार्षिक परीक्षाएं तीन जून से 13 जून तक प्रस्तावित हैं। बता दें कि पूर्व वर्षों में शिक्षकों को एक मई से नौ जून तक करीब एक माह नौ दिन का ग्रीष्मावकाश मिलता था, लेकिन इस साल पूरे एक माह का ग्रीष्मावकाश घोषित किया गया है। अब परीक्षा और प्रशिक्षण के चलते यह अवकाश लगभग समाप्त हो गया है। प्रशिक्षण व मूल्यांकन कार्यों की दोहरी जिम्मेदारी प्रशिक्षण व मूल्यांकन में लगना होगा परीक्षाओं के बीच विभाग ने मई माह में शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी निर्धारित किए हैं। ऐसे में शिक्षकों को अवकाश के दौरान भी स्कूल संबंधी कार्यों में व्यस्त रहना पड़ेगा। इसके अलावा सभी परीक्षाओं का मूल्यांकन कार्य में भी शिक्षकों को लगाया जाएगा। शिक्षक संगठन की नाराजगी और आंदोलन की चेतावनी शिक्षक संगठन ने लिखा पत्र शिक्षक संगठनों का कहना है कि अवकाश अवधि में ही सभी परीक्षाएं और कार्यक्रम रखे जा रहे हैं, जिससे शिक्षकों को मानसिक और शारीरिक विश्राम का अवसर नहीं मिल पा रहा। उन्होंने निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किए जाने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। मप्र शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष डा. क्षत्रवीर सिंह राठौर ने इस संबंध में शासन-प्रशासन को पत्र लिखकर सभी परीक्षाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम जून में कराने की मांग की है।  

भारत-पाक सीमा पर अलर्ट: घुसपैठ की कोशिश नाकाम, BSF ने मार गिराया पाक नागरिक

तरनतारन. भारत-पाक सीमा पर तैनात सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने एक बार फिर अपनी मुस्तैदी का परिचय देते हुए खेमकरण सेक्टर में घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया। देर रात भारतीय क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर जवानों ने तुरंत सतर्कता बढ़ाई और कार्रवाई करते हुए एक पाक घुसपैठिये को मार गिराया। जानकारी के अनुसार, खेमकरण सेक्टर में तैनात सीमा सुरक्षा बल की 148वीं बटालियन के जवान सीमा पर नियमित निगरानी कर रहे थे। इसी दौरान देर रात उन्हें भारतीय क्षेत्र में हलचल महसूस हुई। जवानों ने तुरंत स्थिति का आकलन करते हुए चौकसी बढ़ा दी। कुछ समय बाद उन्हें सीमा पार से एक व्यक्ति भारतीय क्षेत्र की ओर बढ़ता दिखाई दिया। जवानों की लौटने की चेतावनी को किया अनसुना  जवानों ने पहले उस व्यक्ति को रुकने और वापस लौटने की चेतावनी दी, लेकिन वह लगातार भारतीय सीमा की ओर बढ़ता रहा। चेतावनी को नजरअंदाज करते हुए उसकी गतिविधियां संदिग्ध बनी रहीं। इसके बाद जवानों ने मजबूर होकर उस पर गोली चलाई, जिसमें वह मौके पर ही ढेर हो गया।घटना के बाद जब जवानों ने मृतक की तलाशी ली तो उसके पास से पाकिस्तान की 300 रुपये की मुद्रा, एक सुई और धागे की रील बरामद हुई। हालांकि अभी तक उसकी पहचान नहीं हो सकी है। इस संबंध में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र लांबा ने बताया कि सब डिवीजन भिखीविंड के उप पुलिस अधीक्षक प्रीतिंदर सिंह मौके पर पहुंचे और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए पट्टी के सिविल अस्पताल भेज दिया गया है। शव को पहचान के लिए 72 घंटे तक शवगृह में रखा जाएगा। वहीं, सीमा सुरक्षा बल की ओर से इस घटना की जानकारी पाकिस्तान रेंजर्स को भी दे दी गई है। सुरक्षा एजेंसियां मामले की गंभीरता से जांच कर रही हैं और सीमा पर निगरानी और सख्त कर दी गई है।

मध्यप्रदेश में बेहिचक कीजिए फुल इन्वेस्टमेंट, सरकार देगी फुल सपोर्ट

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश और राजस्थान जुड़वा भाइयों की तरह हैं। दोनों राज्य मिलकर विकसित, आत्मनिर्भर और सशक्त भारत तैयार कर रहे हैं। हम सिर्फ विरासतों और विविधताओं के ही नहीं, आर्थिक दृष्टि से भी एक-दूसरे के स्वाभाविक साझेदार हैं। राजस्थान का विकसित टेक्सटाइल, जेम्स-एंड-ज्वेलरी और मध्यप्रदेश की ऑर्गेनिक कॉटन उत्पादन क्षमता, टेक्सटाइल पार्क एवं मज‍बूत मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम मिलकर एक सशक्त वैल्यू चैन तैयार कर सकते हैं। मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच पार्वती-कालीसिंध-चंबल राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। ये परियोजना दोनों राज्यों की तस्वीर और तकदीर बदलेगी। लगभग 1 लाख करोड़ रूपए की इस परियोजना में दोनों राज्यों को मात्र 5-5 प्रतिशत राशि देनी होगी। इसकी 90 प्रतिशत लागत भारत सरकार देगी। उन्होंने कहा है कि दोनों राज्यों के बीच रोटी-बेटी का संबंध रहा है और अब पानी का संबंध भी बन गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को जयपुर में आयोजित 'इन्टरेक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज इन मध्यप्रदेश' में राजस्थान के निवेशकों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर सेशन का शुभारंभ किया। उन्होंने राज्य के सभी निवासियों को हाल ही में मनाए गए राजस्थान राज्य के स्थापना दिवस (19 मार्च) और अखंड सौभाग्य के लोक-पर्व गणगौर पूजन की बधाई और मंगलकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश अभूतपूर्व प्रगति कर रहा है। राज्यों के बीच प्राकृतिक संसाधनों के बंटवारे मधुरता से पूरे हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान के व्यापारियों ने देश-दुनिया में व्यापार-व्यवसाय में अपना नाम कमाया है। धन कमाने के लिए मन और बुद्धि चाहिए। राजस्थान के व्यापारियों ने अपनी क्षमता, युक्ति-बुद्धि और योग्यता से अपना लौहा मनवाया है। हम यहां दोनों राज्यों के बीच व्यापार संबंध प्रगाढ़ करने के लिए आए हैं। वर्तमान हालातों में कई तरह की चुनौतियां हैं, साथ ही हमारे पास आगे बढ़ने के स्वर्णिम अवसर भी हैं। कुछ साल पहले तक हमारे निवेशक खाड़ी देशों में निवेश के लिए जा रहे थे, लेकिन अब वहां स्थिति तेजी से बदल गई है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में औद्योगिक क्षेत्र में नियमों-कानूनों का सरलीकरण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश आकर्षित करने के लिए 26 प्रकार की नई नीतियां लागू की हैं। अब स्पेस और एआई सेक्टर के लिए भी हम पॉलिसी लाने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश, देश के सरप्लस बिजली स्टेट्स में से एक है। अब हम देश के 'ग्रीन, क्लीन एंड सोलर एनर्जी कैपिटल' के रूप में उभर रहे हैं। इलेक्ट्रिसिटी सरप्लस राज्य बनने के बाद अब मध्यप्रदेश की बिजली से दिल्ली में मेट्रो ट्रेन संचालित हो रही है। प्रदेश में लगभग 2 रुपए 90 पैसे प्रति यूनिट दर पर घरेलू बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। औद्योगिक विकास के साथ माइनिंग सेक्टर में भी तेज गति से कार्य हो रहे हैं। मेडिकल टूरिज्म के लिए राज्य में मेडिकल कॉलेजों की संख्या तेजी से बढ़ाई जा रही है। पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल खोलने के लिए 1 रुपए में लीज पर जमीन दी जा रही है। मध्यप्रदेश दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में भी आगे बढ़ रहा है। राज्य में 5 हजार से 50 हजार क्षमता की बड़ी गौशालाएं खोलने के लिए जमीन दी जा रही है। प्रति गौमाता अनुदान भी 20 रुपए से बढ़ाकर 40 रुपए कर दिया गया है। पशुओं की नस्ल सुधार और चिकित्सा के लिए उचित प्रबंध किए गए हैं। राज्य सरकार ने स्कूली बच्चों को नि:शुल्क दूध के पैकेट बांटने के लिए योजना की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एक समय था, जब लोग कहते थे कि मध्यप्रदेश में उद्योग टिक ही नहीं सकते, किंतु आज मध्यप्रदेश भारत के सबसे तेजी से विकसित होते राज्यों में से एक है। मध्यप्रदेश की औद्योगिक विकास दर निरंतर बढ़ रही है। हमारी जीडीपी नई ऊँचाइयों को छू रही है। प्रदेश में निवेश की एक नई क्रांति आ रही है। उद्योगों की स्थापना एवं निवेश प्रोत्साहन के लिए हमने 6,104 करोड़ रूपये और इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए 1 लाख करोड़ रूपए का प्रावधान किया है। मध्यप्रदेश का 'सिंगल विंडो सिस्टम-इन्वेस्ट एमपी 3.0 पोर्टल' देश के श्रेष्ठ डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म में गिना जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश इंडस्ट्रियल प्रमोशन पॉलिसी 2025 अंतर्गत टेक्सटाइल एवं परिधान क्षेत्र को शामिल कर निवेशकों को आकर्षक इंसेंटिव प्रदान किए जा रहे हैं। अनेक प्रमुख कंपनियाँ मध्यप्रदेश में आ चुकी हैं और निवेश कर रही हैं। मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले में भारत का पहला 'मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन फॉर पॉवर एंड रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट' विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि होटल, हॉस्पिटल जैसे सेक्टर्स में बड़े निवेश पर कैपिटल सब्सिडी दी जा रही है। प्रदेश के रीवा में टाइगर सफारी और एयरपोर्ट की सौगात भी मिल चुकी है। राज्य की एविएशन पॉलिसी के अंतर्गत हवाई सेवाएं उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को प्रति फ्लाइट 15 लाख वीजीएफ दिया जा रहा है। राज्य के अंदर और राज्य के बाहर भी हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध कराई जा रही है। टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए पीएम हेली सर्विस शुरू की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि म.प्र. ने बिजली के समुचित बंटवारे के लिए उत्तरप्रदेश के साथ एक मॉडल तैयार किया है। मुरैना में प्लांट स्थापित कर 6-6 महीने बिजली उपयोग करने के लिए सहमति बनी है। पीकेसी परियोजना में दोनों राज्यों ने एक-दूसरे की बेहतरी के लिए निर्णय लिया है। सूखे क्षेत्र को पानी मिल जाए, तो लोगों की जिंदगी बदल जाती है। इसीलिए यही समय है, मध्यप्रदेश और राजस्थान देश के साथ आगे बढ़ें। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान की उद्यमशीलता और मध्यप्रदेश की संसाधन क्षमता मिलकर सेंट्रल इं‍डिया को इंडस्ट्रियल पॉवर सेंटर बना सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों से अपील करते हुए कहा कि आप देश के दिल, असीम संभावनाओं और विकास अवसरों के केंद्र से जुड़िए, बेहिचक मध्यप्रदेश में निवेश कीजिए। मध्यप्रदेश में बेहतर नीतियां, बेहतर अवसर, बेहतर इन्सेंटिव, बेहतर इकोसिस्टम, बेहतर मार्केट लिंकेज और बेहतर ग्रोथ रेट के साथ आपको हर कदम पर सरकार का फुल सपोर्ट मिलेगा। राजस्थान और मध्यप्रदेश परिवार जैसे : मंत्री  चौधरी राजस्थान सरकार में … Read more

Bihar Schools Update: नए सत्र की शुरुआत अप्रैल से, 1.33 करोड़ बच्चों को किताबों का वितरण

पटना. राज्य के सभी 70 हजार सरकारी प्रारंभिक विद्यालयों में अप्रैल से नये शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होगी। इसे ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग ने पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को एक से दस अप्रैल के बीच पाठ्य-पुस्तकों को वितरित करने का निर्देश दिया है। इससे एक करोड़ 33 लाख बच्चे लाभान्वित होंगे। बिहार राज्य पाठ्य पुस्तक प्रकाशन निगम के एक उच्च पदाधिकारी ने बताया कि सभी 38 जिलों को किताबों के सेट यानी किट उपलब्ध करा दिया गया है। ये किताबें संकुल संसाधन केंद्रों से संबंधित विद्यालयों में उपलब्ध करायी जा रही है। एक करोड़ से ज्यादा सेट तैयार प्रधान शिक्षकों या प्रधानाध्यापकों के साथ प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी बच्चों के बीच पुस्तकों के वितरण सुनिश्चित करेंगे। पुस्तकों का एक करोड़ 33 लाख 85 हजार सेट तैयार कराया गया है। शिक्षा विभाग के मुताबिक, सरकारी विद्यालयों में पहली से पांचवीं कक्षा तक नामांकित बच्चों की संख्या 83,21,515 है। सत्र के शुरूआत में ही बच्चों को मिलेगी किताबें वहीं कक्षा छह से आठ तक के नामांकित बच्चों की कुल 50,51,769 है। बच्चों की जरूरत के हिसाब से पुस्तकों का सेट तैयार कर उसे विद्यालयों तक उपलब्ध करायी जा रही है। इसके लिए संकुल संसाधन केंद्रों को समन्वयक की भूमिका दी गई है। लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि सत्र की शुरुआत में ही सभी बच्चों के पास अपनी किताबें हों ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।

अंतरराष्ट्रीय वन दिवस पर राष्ट्रीय वानिकी संवाद के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए CM योगी

अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय वानिकी संवाद के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  सीएम ने प्रकृति को “मां” मानकर संरक्षण का दिया संदेश, जनभागीदारी को बताया सफलता की कुंजी उत्तर प्रदेश में बढ़ा वनाच्छादन और पौधरोपण अभियान, 9 वर्षों में 242 करोड़ पौधे लगाए, जन आंदोलन से मिली बड़ी सफलता रामसर साइट और इको-टूरिज्म को बढ़ावा, रामसर साइट की संख्या वर्ष 2017 में एक से बढ़कर 2026 में 11 हुई लखनऊ आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण असंतुलन जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, तब वनों का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में प्रकृति के साथ हुए खिलवाड़ के दुष्परिणामों को झेल रहा है। यह स्थिति हमें आत्ममंथन के लिए मजबूर करती है कि आखिर हमारे प्रयासों में कहां कमी रह गई। भारतीय वैदिक परंपरा में प्रकृति को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। हमारे ऋषियों ने हजारों वर्ष पहले ही यह संदेश दिया था कि धरती हमारी माता है और हम उसके पुत्र हैं – ‘माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः’। ऐसे में हर व्यक्ति का यह कर्तव्य है कि अपनी “मां” यानी धरती की रक्षा करे, उसके सम्मान और संरक्षण के लिए कार्य करे और उसके साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ न होने दे। ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय वानिकी संवाद के उद्घाटन समारोह में कहीं। इस दौरान सीएम ने कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया तथा विभिन्न लोगों को सम्मानित किया। उन्होंने वन विभाग की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। इस वर्ष की थीम 'फॉरेस्ट एंड इकोनॉमिक्स' रखी गयी   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की ऋषि परंपरा ने सदैव कहा है कि दशकूपसमा वापी, दशवापीसमो ह्रदः। दशह्रदसमः पुत्रो, दशपुत्रसमो द्रुमः॥’, इसका अर्थ है कि 10 कुंओं के बराबर एक बावड़ी, 10 बावड़ियों के बराबर एक तालाब, 10 तालाबों के बराबर एक पुत्र और 10 पुत्रों के बराबर एक वृक्ष होता है। प्रकृति में वृक्ष की महत्ता सर्वोपरि मानी गयी है। वन, जीवन के आधार और प्रकृति के संतुलन का भी एक महत्वपूर्ण आयाम प्रस्तुत करता है। यदि वन है तो जल है, जल है तो वन, वन है तो वायु और वायु है तो जीवन है। जीवन की कल्पना इसके बगैर नहीं की जा सकती। ऐसे में वैश्विक दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष की थीम 'फॉरेस्ट एंड इकोनॉमिक्स' रखी गयी है, जो यह दिखाती है कि हमें पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखने, वनों से आर्थिक विकास और उससे मानव कल्याण के लिए कार्ययोजना प्रस्तुत करनी होगी। मुझे प्रसन्नता है कि पिछले नौ वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश में वनाच्छादन को बढ़ाने में सफलता मिली है। सफलता तब मिली जब हमने इसे जन आंदोलन बनाया। जब भी कोई अभियान जन आंदोलन बनता है, तो सफलता प्राप्त होती है, क्योंकि तब उसका नेतृत्व समाज करता है, सरकार और विभाग पीछे रहते हैं। वहीं, जब सरकार और विभाग आगे होते हैं और पब्लिक पीछे होती है तो परिणाम नहीं आते। हमने पिछले नौ वर्षों में जो सफलताएं प्राप्त की हैं,  उनका आधार जन आंदोलन था।  वर्ष 2017 में केवल एक रामसर साइट थी, आज 11 हैं, हमारा प्रयास 100 साइट का मुख्यमंत्री ने कहा कि वन महोत्सव के अवसर पर पहले वर्ष कुल 5.5 करोड़ पौधरोपण हो पाए थे। इसमें भी निजी नर्सरी का सहारा लेना पड़ा था। वहीं गत वर्ष वन महोत्सव के अवसर पर 37 करोड़ पौधे एक ही दिन में प्रदेश भर में लगाए गए। इस दौरान हमारे पास 50 करोड़ पौधे मौजूद थे। इस वर्ष भी हमने 35 करोड़ का लक्ष्य रखा है, जो बढ़कर 40-45 करोड़ तक पहुंच सकता है। पिछले कुछ वर्षों से उत्तर प्रदेश इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगभग 2 लाख करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर सुनिश्चित कर रहा है। इसके बावजूद प्रदेश का वनाच्छादन बढ़ना एक सुखद अनुभूति कराता है। पिछले नौ वर्ष में 242 करोड़ पौधरोपण करने में सफलता प्राप्त की गई है और अब वनाच्छादन बढ़कर लगभग 10% तक पहुंच चुका है। प्रदेश का वनाच्छादन उतना होना चाहिए जितनी देश की आबादी यूपी में रहती है। यानी इसे 16-17 फीसदी तक पहुंचाने के लिए काम करना होगा। वर्ष 2017 में हमारे पास केवल 1 रामसर साइट थी, आज इसकी संख्या बढ़कर 11 हुई है। हमारा प्रयास इसे 100 तक ले जाने का है। रामसर साइट टूरिज्म, वन्य जीवों, पक्षियों की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण साइट होती है। साथ ही वॉटर कंजर्वेशन की दृष्टि से भी इसकी भूमिका हो सकती है। हम रामसर साइट घोषित करेंगे, तो वह स्थान भू-माफियाओं के कब्जे से मुक्त रहेगा और वहां पर आसानी से संरक्षण कार्यक्रम चलाए जा सकेंगे। इस दिशा में कई प्रयास हुए हैं, जिसमें अटल, एकलव्य, त्रिवेणी, ऑक्सी और स्मृति वन आदि शामिल हैं। गंगा, यमुना और सरयू नदियों के किनारे व्यापक पौधरोपण के कार्यक्रम चल रहे हैं। एक्सप्रेस-वे और राजमार्गों के दोनों किनारों पर बड़े पैमाने पर उपयुक्त प्रजाति के पौधों के रोपण कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया है। इसके लिए हर जिले में एक नदी के पुनरोद्धार का कार्य किया गया।  दुधवा नेशनल पार्क में इको-टूरिज्म को बढ़ावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है, जहां कार्बन फाइनेंस प्रोजेक्ट के तहत कार्बन क्रेडिट के लिए कृषकों को धनराशि वितरित की गयी है। सरकार ने दुधवा नेशनल पार्क में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। कनेक्टिविटी भी बेहतर की गयी है। प्रदेश में वन आधारित 2,467 ग्रीन इकोनॉमी मॉडल उद्योग स्थापित किये गये हैं। हर व्यक्ति नेशनल पार्क में बाघ देखने जाता है। ऐसे में इनका संरक्षण हमारी जिम्मेदारी है। उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है, जहां मानव-वन्य जीव संघर्ष को आपदा की श्रेणी में रखा गया है। सीएम ने कहा कि टाइगर कभी अचानक हमला नहीं करता। मेरा जन्म जहां हुआ था, उस घर से मुश्किल से 50 मीटर दूर से जंगल प्रारंभ हो जाता था। हम लोग टाइगर को देखते थे। कभी छेड़ते नहीं थे, उसने कभी हमें नुकसान नहीं पहुंचाया। हमारे पशुओं को कभी नुकसान नहीं पहुंचाया। वहीं, अगर हम टाइगर के साथ, उसकी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करेंगे, … Read more

सीएम योगी ने अंतरराष्ट्रीय वन दिवस पर अरण्य समागम का किया शुभारंभ

मुख्यमंत्री ने वीर बच्चों को किया सम्मानित  सीएम योगी ने अंतरराष्ट्रीय वन दिवस पर अरण्य समागम का किया शुभारंभ  प्रदर्शनी का अवलोकन किया सीएम ने, उत्कृष्ट करने वाले कर्मचारियों व सामाजिक संगठनों को किया सम्मानित लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंतरराष्ट्रीय वन दिवस पर शनिवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में वीर बच्चों को सम्मानित किया। तेंदुआ के हमले से खुद को व परिवार को बचाने वाले इन बच्चों की प्रशंसा करते हुए सीएम योगी ने इन्हें समाज के लिए प्रेरक बताया। सीएम योगी ने वानिकी व वन्य जीव क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों, सामाजिक संगठनों को भी सम्मानित किया। इस अवसर पर कार्बन क्रेडिट प्रोजेक्ट के अंतर्गत दो लाभार्थी किसानों को चेक भी वितरित किए गए।  वीरता के पर्याय बने अच्छे लाल व तनु सिंह  सीएम ने बहराइच के 10 वर्षीय अच्छेलाल व प्रयागराज की तनु सिंह (18) को सम्मानित किया। अच्छेलाल 06 दिसम्बर 2025 को सायं 7 बजे अपने पिता के साथ साइकिल से खेत से वापस घर जा रहा था। इस दौरान रास्ते में अचानक गन्ने के खेत से तेंदुआ ने हमला कर दिया। तेंदुआ से मुकाबला करते हुए अच्छे लाल ने बहादुरी का परिचय देते हुए खुद को बचाया, जिससे हतोत्साहित होकर तेंदुआ भाग गया। इसी प्रकार 8 जनवरी 2026 को झूंसी क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम छिवैया में रतन सिंह के घर में अचानक तेंदुआ घुस गया। कमरे में उपस्थित तनु सिंह ने साहस और सूझ-बूझ का परिचय दिया। तनु ने अपने साथ दो छोटे बच्चों को बाहर निकाला और तेंदुआ को कमरे में बन्द कर दिया, जिससे बिना जनहानि के तेंदुआ को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। वानिकी एवं वन्य जीव क्षेत्र में विभागीय कर्मचारी भी सम्मानित मुख्यमंत्री ने वानिकी व वन्य जीव क्षेत्र में वन विभाग के कर्मचारियों को भी सम्मानित किया। सीएम के हाथों मुरादाबाद वन प्रभाग के उप क्षेत्रीय वन अधिकारी पुष्पेंद्र सिंह, हमीरपुर वन प्रभाग के वन रक्षक सुनील कुमार गौंड, रामपुर वन प्रभाग के वन रक्षक शिवम कुमार व एटा वन प्रभाग की माली रीना शर्मा को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।  वानिकी क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सामाजिक संगठनों को भी मिला सम्मान  वानिकी के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सामाजिक संगठनों को भी मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया। इस क्रम में लोकभारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री बृजेंद्र पाल सिंह व हेल्पिंग हैंड्स सेवा संस्थान झांसी के सत्येंद्र कुमार श्रीवास्तव को सम्मानित किया गया।  कार्बन क्रेडिट प्रोजेक्ट के अंतर्गत किसानों को वितरित किए चेक  मुख्यमंत्री ने कार्बन क्रेडिट प्रोजेक्ट के अंतर्गत दो लाभार्थी किसानों को चेक वितरित किए। ये चेक कुशीनगर के ईश्वर चंद और रायबरेली की सुनीता को दिए गए।  मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी का किया अवलोकन  मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम प्रारंभ होने से पहले वन विभाग द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस दौरान वन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना, वन राज्यमंत्री केपी मलिक आदि भी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री की पहल, बेमौसम बारिश से फसल नुकसान का तत्काल आकलन कर मुआवजा देने के दिए निर्देश

बेमौसम बारिश को लेकर मुख्यमंत्री की संवेदनशील पहल, फसलों के नुकसान का तत्काल आकलन कर मुआवजा सुनिश्चित करने के निर्देश जिलाधिकारियों को फील्ड में उतरने का आदेश, राहत आयुक्त को सीधा समन्वय बनाने की जिम्मेदारी किसानों को किसी भी स्थिति में न हो असुविधा, समयबद्ध ढंग से मुआवजा वितरण पर जोर लखनऊ प्रदेश में असमय वर्षा को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि किसानों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और फसलों को हुए नुकसान का त्वरित आकलन कर राहत पहुंचाना प्राथमिकता होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे स्वयं फील्ड में निकलकर स्थिति का जायजा लें और प्रभावित क्षेत्रों में फसलों को हुए नुकसान का तत्काल आकलन कराएं। उन्होंने कहा कि यह कार्य केवल कागजी न होकर वास्तविक स्थिति के आधार पर किया जाए, ताकि किसानों को सही और समय पर सहायता मिल सके। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने राहत आयुक्त को निर्देश दिया है कि वह फील्ड स्तर पर कार्य कर रहे अधिकारियों से सीधा संपर्क और समन्वय बनाए रखें। सीएम ने कहा कि सभी सूचनाएं समय पर एकत्रित कर शासन को उपलब्ध कराई जाएं, जिससे राहत कार्यों में किसी प्रकार की देरी न हो। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि फसलों को हुई क्षति का आकलन प्राप्त होते ही मुआवजे के वितरण की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि भुगतान व्यवस्था पारदर्शी और समयबद्ध हो, ताकि प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द राहत मिल सके। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और किसी भी आपदा की स्थिति में उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे संवेदनशीलता के साथ कार्य करें और यह सुनिश्चित करें कि किसी भी किसान को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।