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31 जिलों की महिलाओं ने किया पांच हजार करोड़ का दूध का कारोबार

योगी सरकार में ग्रामीण महिलाओं ने बनाया रिकॉर्ड, 10 लाख लीटर रोज कर रहीं दूध का संग्रहण उत्तर प्रदेश राज्य आजीविका मिशन बन रहा तरक्की का आधार स्तंभ प्रदेश के छह हजार से ज्यादा गांवों की महिलाओं ने की अभूतपूर्व तरक्की लखनऊ उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश करते हुए दुग्ध उत्पादन और संग्रहण के क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया है। योगी सरकार की योजनाओं और उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश की लाखों महिलाएं आज आर्थिक सशक्तीकरण की मजबूत आधारशिला बन चुकीं हैं। प्रदेश के 31 जिलों में सक्रिय महिला समूहों ने प्रतिदिन करीब 10 लाख लीटर दूध का संग्रहण कर न सिर्फ उत्पादन बढ़ाया है, बल्कि करीब 5000 करोड़ रुपये का विशाल कारोबार भी किया है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिली है और महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। छह हजार से अधिक गांवों की महिलाएं इस अभियान से जुड़कर अभूतपूर्व प्रगति कर रही हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संगठित होकर ये महिलाएं दुग्ध संग्रहण, प्रोसेसिंग और विपणन तक की पूरी प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ीं यह मॉडल न सिर्फ महिलाओं को रोजगार दे रहा है, बल्कि उन्हें उद्यमी के रूप में स्थापित कर रहा है। इससे गांवों में पलायन कम होने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां भी तेज हो रही हैं। योगी सरकार की योजनाओं, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता के सहारे ग्रामीण महिलाओं का यह नेटवर्क आने वाले समय में प्रदेश को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखता है। उत्तर प्रदेश में राज्य आजीविका मिशन तरक्की का आधार स्तंभ बन रहा है। प्रदेश के छह हजार से ज्यादा गांवों की महिलाओं ने दुग्ध संग्रहण के जरिए अभूतपूर्व तरक्की की है। विभिन्न जिलों में संभाली कमान प्रदेश में विभिन्न महिला संचालित मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियां (एमपीसीएल) इस बदलाव की धुरी बनी हुई हैं। बुंदेलखंड क्षेत्र में ‘बलिनी एमपीसीएल’ बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, जालौन, झांसी, ललितपुर और महोबा जिलों में कार्यरत है। पूर्वांचल में ‘काशी एमपीसीएल’ बलिया, चंदौली, गाजीपुर, मिर्जापुर, संत रविदास नगर, सोनभद्र और वाराणसी में सक्रिय है। सामर्थ्य एमपीसीएल प्रतापगढ़, रायबरेली, सुल्तानपुर, अयोध्या, फतेहपुर, अमेठी और कानपुर नगर में महिलाओं को सशक्त बना रही है। गोरखपुर मंडल में ‘श्री बाबा गोरखनाथ कृपा एमपीसीएल’ देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर और महाराजगंज जिलों में काम कर रही है। तराई क्षेत्र में ‘सृजन एमपीसीएल’ बरेली, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, शाहजहांपुर, सीतापुर और रामपुर में नई संभावनाएं गढ़ रही है।

यूपी में 125 ग्रामीण स्टेडियमों का निर्माण कराया जा चुका है, 39 स्टेडियम निर्माणाधीन – गिरीश चंद्र यादव

ग्रामीण स्टेडियम, युवा सहभागिता और खेल प्रोत्साहन से संवर रहा युवाओं का भविष्य – गिरीश चंद्र यादव, युवा कल्याण एवं खेल मंत्री युवक और महिला मंगल दलों का गठन कर प्रदेश के युवाओं को राष्ट्र निर्माण की गतिविधियों से जोड़ा जा रहा – गिरीश चंद्र यादव “माय भारत” पोर्टल पर 19 लाख युवा पंजीकृत, “युवा साथी” पोर्टल पर 12 लाख युवाओं को मिली सरकारी योजनाओं की जानकारी – गिरीश चंद्र यादव लखनऊ प्रदेश सरकार में युवा कल्याण एवं खेल राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), गिरीश चंद्र यादव ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश में युवाओं के शारीरिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के मुताबिक प्रदेश सरकार खेल अवसंरचना के विस्तार, युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और उन्हें सकारात्मक दिशा देने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल कर रही है। इससे प्रदेश के युवाओं के विकास के साथ-साथ खेल जगत में उत्तर प्रदेश की उपलब्धियों को बढ़ाना सुनिश्चित होगा।   खेल मंत्री ने योगी सरकार की प्रत्येक विकास खंड में मिनी स्टेडियम/ग्रामीण स्टेडियम के निर्माण की महत्वाकांक्षी योजना के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि इसके तहत प्रदेश में अब तक 125 ग्रामीण स्टेडियमों का निर्माण कराया जा चुका है, साथ ही 8 विकास खंडों में दो-दो स्टेडियम भी बनाए गए हैं, जिससे स्थानीय युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं मिल सकें। वर्तमान में ग्रामीण स्टेडियम निर्माण की 39 परियोजनाओं में कार्य प्रगति पर है। वित्तीय वर्ष 2023-24 से इन स्टेडियमों के सुचारु संचालन के लिए खेल उपकरणों की खरीद हेतु हर वर्ष स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही युवाओं को प्रशिक्षण देने के लिए आउटसोर्सिंग के माध्यम से खेल प्रशिक्षकों की तैनाती भी की जा रही है। मंत्री ने बताया कि प्रदेश के युवाओं को सामाजिक और राष्ट्रीय गतिविधियों से जोड़ने के लिए सरकार द्वारा व्यापक स्तर पर युवक एवं महिला मंगल दलों का गठन किया गया है। प्रदेश की 57,695 ग्राम पंचायतों में अब तक 53,760 युवक मंगल दल और 52,354 महिला मंगल दल गठित किए जा चुके हैं। इन दलों को खेल गतिविधियों से जोड़कर राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा में लाने का कार्य किया जा रहा है। अब तक 96,000 मंगल दलों को खेल प्रोत्साहन सामग्री उपलब्ध कराई जा चुकी है और शेष को भी जल्द सामग्री प्रदान करने की प्रक्रिया जारी है। युवा कल्याण एवं खेल मंत्री ने बताया कि खेलों में युवाओं की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में विधायक खेल स्पर्धा और संसदीय क्षेत्रों में सांसद खेल स्पर्धा आयोजित की गई, जिसमें प्रदेश के 3 लाख से अधिक युवाओं ने हिस्सा लिया। साथ ही दिल्ली में आयोजित 29वें राष्ट्रीय युवा उत्सव में उत्तर प्रदेश के 79 युवाओं के दल ने भाग लिया, जबकि 28वें राष्ट्रीय युवा उत्सव में राज्य को कहानी लेखन, कविता लेखन और पेंटिंग में स्वर्ण पदक प्राप्त हुआ। युवा उत्सव के 29वें आयोजन में लोकनृत्य टीम ने तृतीय स्थान हासिल किया। मंत्री ने बताया कि “माय भारत” पोर्टल पर अब तक 19 लाख से अधिक युवाओं का पंजीकरण कराया जा चुका है, जिसके माध्यम से प्रदेश के युवा स्वच्छता, पौधरोपण, नशामुक्ति और रक्तदान जैसी रचनात्मक गतिविधियों में भाग ले रहे हैं। इसके अलावा “युवा साथी” पोर्टल पर 12 लाख से अधिक युवाओं को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध करायी जा चुकी है। उत्कृष्ट कार्य करने वाले युवाओं और मंगल दलों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रत्येक वर्ष ‘राज्य स्तरीय विवेकानन्द यूथ अवार्ड’ प्रदान किया जाता है। प्रेस कॉफ्रेंस के समापन में मंत्री ने दोहराया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप प्रदेश सरकार युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसके लिए सभी तरह के संभव प्रयास किये जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश की प्रतिभाओं का परचम पुस्तिका का किया लोकार्पण

वर्ष 2025 की यूपीएससी में चयनित अभ्यर्थी वर्ष 2047 के विकसित और आत्मनिर्भर भारत के हैं शिल्पकार इन युवाओं के कंधों पर प्रदेश के करोड़ों नागरिकों के कल्याण और विकास का है दायित्व अभ्यर्थियों को ट्राफी भेंट कर किया गया सम्मानित   भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) परीक्षा की सफलता में मध्यप्रदेश की बढ़ती उपस्थिति हम सबके लिए गौरव का विषय है। प्रदेश की माटी से 61 सिलेक्शन बदलते मध्यप्रदेश की तस्वीर हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यूपीएससी-2025 की परीक्षा में चयनित सभी अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह आपके संकल्प और सामर्थय का सम्मान है। चयनित अभ्‍यर्थी वर्ष-2047 के विकसित और आत्मनिर्भर भारत के शिल्पकार हैं। जब भारत अपनी आजादी के 100 वर्ष मना रहा होगा, तब आप प्रशासन के शिखर पर होंगे। आपका एक-एक निर्णय, एक-एक नवाचार, विकसित और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की नीव रखेगा। नियति ने आप सबको महत्वपूर्ण दायित्व के लिए चुना है। सफलता अपने साथ दायित्व लेकर आती है। आपके कंधों पर मध्यप्रदेश के करोड़ों नागरिकों के कल्याण और विकास का दायित्व है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव संघ लोक सेवा आयोग 2025 में चयनित अभ्यर्थियों से संवाद और उनके सम्मान के लिए कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। चयनित अभ्यर्थियों पर केंद्रित लघु फिल्म का हुआ प्रदर्शन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चयनित अभ्यर्थियों पर केंद्रित "मध्यप्रदेश की प्रतिभाओं का परचम" पुस्तिका के डिजिटल वर्जन का रिमोट के माध्यम से लोकार्पण किया। चयनित अभ्यर्थियों पर केंद्रित लघु फिल्म का इस अवसर पर प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चयनित अभ्यर्थियों को ट्रॉफी भेंट कर उनका सम्मान किया। अभ्यर्थियों का चिंतनशील, संवेदनशील और परिश्रमी होना उन्हें सफल बनाने के साथ-साथ प्रदेश की प्रगति का स्तंभ बनेगा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चयनित युवाओं के लिए दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में प्रशासनिक सेवा में आना सौभाग्यशाली अवसर है। लोकतंत्र की खूबसूरती है कि राजनीतिक क्षेत्र में चुनाव के आधार पर हर 5 वर्ष में जनप्रतिनिधियों की परीक्षा होती है। यह लोकतंत्र की ही विशेषता है कि इसमें देश की जनता के विश्वास के आधार पर व्यक्ति सर्वोच्च पद पर पहुंच सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज 23 मार्च को वीर सपूत भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू का शहीद दिवस है। उन शहीदों ने हमें स्वराज्य दिया था। इस धरती को विकसित और आत्मनिर्भर बनाते हुए सुराज की स्थापना अब हमारी जिम्मेदारी है। सिविल सेवा में चयन परिवार के साथ समाज की बेहतरी और सेवा के लिए संकल्प की पूर्ति का अवसर देता है। हमारा प्रयास हो कि हम दूसरों के सुख – दुख में सहभागी बन सकें। कई ऐसे भी उदाहरण रहे हैं, जिन्होंने अच्छे रैंक के साथ यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की, लेकिन फील्ड पर वह व्यवस्थाओं को सही तरीके से लागू नहीं करा पाए। आपका चिंतनशील, संवेदनशील और परिश्रमी होना आपको सफल बनाने के साथ-साथ प्रदेश की प्रगति का स्तंभ बनेगा। अंत्योदय, नवाचार, ईमानदारी और सत्य निष्ठा से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश को आगे बढ़ाने का समय है। मानवीय कार्यों के आधार पर देश की दुनिया में विशिष्ट पहचान है। चयनित अभ्यर्थी अपने सेवाकाल में अंत्योदय, नवाचार, ईमानदारी और सत्य निष्ठा से कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए आत्मनिर्भर भारत के शिल्पकार बनें। उन्होंने सभी अभ्यर्थियों से जीवन पर्यंत पढ़ने और सीखने की ललक बनाए रखने का आहवान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 173वीं रैंक प्राप्त पूर्णत: दृष्टिहीनता की चुनौतियों से घिरे श्री अक्षत बल्दवा की सराहना करते हुए कहा कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो तो कोई भी शारीरिक अक्षमता सपनों के आड़े नहीं आ सकती। सोहागपुर और सिरोंज जैसे छोटे शहरों के अभ्यर्थियों का भी हुआ चयन अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा श्री अनुपम राजन ने कहा कि सिविल सेवा परीक्षा में इस वर्ष देशभर से कुल 958 अभ्यर्थी चयनित हुए। इनमें मध्यप्रदेश के 61 प्रतियोगी शामिल हैं। देश की प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता अर्जित करने वाले हमारे 22 अभ्यर्थी ऐसे हैं, जिन्होंने शासकीय स्कूल – कॉलेज से पढ़ाई की है। प्रदेश के सोहागपुर और सिरोंज जैसे छोटे शहरों से आने वाले अभ्यर्थियों का भी चयन हुआ है। यह सिविल सेवा के प्रति राज्य के युवाओं में बढ़ते रुझान को दर्शाता है। अब यह धारणा धीरे-धीरे समाप्त हो रही है कि सिविल सेवा में चयन के लिए राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक संस्थानों अथवा दिल्ली या इंदौर जैसे शहरों में जाकर ही तैयारी करनी होगी। इस अवसर पर अखिल भारतीय स्तर पर 5वीं रैंक प्राप्त श्री ईशान भटनागर और 260वीं रैंक प्राप्त सुश्री प्राची चौहान ने अपने अनुभव साझा किए। श्री भटनागर ने बताया कि गवर्नेंस संवैधानिक मूल्यों को धरातल पर लाने का सही तरीका होता है, यही मेरी प्रेरणा रही। उन्होंने कहा कि प्रशासन के माध्यम से जमीनी स्तर पर काम करते हुए संविधान की मूल भावना के अनुरूप लोगों को न्याय दिलाया जा सकता है। ये सेवा आम आदमी के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाने का प्रभावी माध्यम हो सकती है। सुश्री प्राची चौहान ने कहा कि धैर्य और ईमानदारी से किया गया प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व ने प्रदेश की बेटियों को संबल प्रदान किया है।

ईरान की नई साजिश? एक्स-RAW अधिकारी की चेतावनी—मिसाइल से भी घातक हमला तैयार

ईरान पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच युद्ध अब एक नए और खतरनाक चरण में पहुंच गया है। यह संघर्ष केवल मिसाइल हमलों या एयर स्ट्राइक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह प्रॉक्सी वॉर और हाइब्रिड वॉरफेयर में बदलता दिख रहा है। अपने अधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर पूर्व RAW एजेंट व NSG कमांडो लकी बिष्ट ने एक वीडियो में   "हाइब्रिड वॉर" को लेकर चेतावनी जारी की है।  हाइब्रिड वॉर: बदलता युद्ध का चेहरा यह जंग अब “अनरिस्ट्रिक्टेड वॉरफेयर” यानी हर क्षेत्र में फैलती लड़ाई बनती जा रही है।  साइबर हमले (बैंकिंग, बिजली, डेटा सिस्टम), तेल और गैस सप्लाई पर हमले (जैसे होर्मुज संकट),  प्रॉक्सी ग्रुप्स के जरिए हमले,  प्रचार और मनोवैज्ञानिक युद्ध शामिल हैं। कैसे शुरू हुई यह जंग? यह युद्ध 28 फरवरी 2026 को तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इजराइल ने संयुक्त सैन्य अभियान चलाकर ईरान के ठिकानों और नेतृत्व को निशाना बनाया।इसके जवाब में ईरान ने इजराइल पर मिसाइल हमले किए और खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। इसके लिए ईरान ने अपने प्रॉक्सी नेटवर्क को सक्रिय किया। अब यह संघर्ष मल्टी-फ्रंट वॉर बन चुका है, जिसमें लेबनान, खाड़ी देश और समुद्री मार्ग भी शामिल हो चुके हैं। प्रॉक्सी वॉर: ईरान की सबसे बड़ी ताकत ईरान लंबे समय से सीधे युद्ध के बजाय “प्रॉक्सी रणनीति” अपनाता रहा है। इसमें वह क्षेत्रीय संगठनों (जैसे लेबनान, इराक, यमन के समूह) के जरिए हमला करता है और अपने विरोधियों को कई मोर्चों पर उलझाए रखता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह रणनीति ईरान को कम संसाधनों में भी बड़े देशों को चुनौती देने की ताकत देती है।  ईरान की पहले की प्रॉक्सी वॉर रणनीति (इतिहास) रहा है।  लेबनान-हिजबुल्लाह     हिजबुल्लाह को ईरान का सबसे मजबूत प्रॉक्सी माना जाता है     इजराइल के खिलाफ कई बार संघर्ष में इस्तेमाल इराक-शिया मिलिशिया     इराक में कई शिया समूह ईरान समर्थित माने जाते हैं     अमेरिकी ठिकानों पर हमलों में इनकी भूमिका बताई जाती रही है यमन-हूती विद्रोही     हूती आंदोलन को ईरान का समर्थन मिलता रहा है     सऊदी अरब और खाड़ी देशों पर हमले सीरिया-असद सरकार समर्थन     सीरिया में ईरान ने सरकार का समर्थन किया     वहां भी प्रॉक्सी और मिलिशिया नेटवर्क सक्रिय रहे इन उदाहरणों से साफ है कि ईरान सीधे युद्ध से ज्यादा “अप्रत्यक्ष युद्ध” में माहिर रहा है। स्लीपर सेल और छिपे नेटवर्क का डर जैसे-जैसे युद्ध बढ़ रहा है, “स्लीपर सेल” यानी छिपे नेटवर्क की चर्चा भी तेज हो रही है। हालांकि अभी तक अमेरिका या यूरोप में बड़े पैमाने पर ऐसे नेटवर्क के सक्रिय होने का ठोस प्रमाण नहीं है लेकिन सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि  अगर युद्ध लंबा चला, तो छोटे स्तर के हमले या गुप्त नेटवर्क सक्रिय हो सकते हैं और यह खतरा पारंपरिक युद्ध से ज्यादा अप्रत्याशित होता है हाइब्रिड वॉर: बदलता युद्ध का चेहरा यह जंग अब “अनरिस्ट्रिक्टेड वॉरफेयर” यानी हर क्षेत्र में फैलती लड़ाई बनती जा रही है।  साइबर हमले (बैंकिंग, बिजली, डेटा सिस्टम), तेल और गैस सप्लाई पर हमले (जैसे होर्मुज संकट),  प्रॉक्सी ग्रुप्स के जरिए हमले,  प्रचार और मनोवैज्ञानिक युद्ध शामिल हैं।  तेल और होर्मुज: जंग का सबसे बड़ा दांव इस युद्ध का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है। ईरान ने इस रास्ते को बाधित किया  और अमेरिका ने इसे खोलने की चेतावनी दी है। इस जंग के कारण तेल और गैस सप्लाई पर असर पड़ेगा, वैश्विक अर्थव्यवस्था में अस्थिरता आएगी।यह संकट 1970 के दशक के तेल संकट जैसा बड़ा आर्थिक झटका दे सकता है।

नॉर्थ कोरिया की कमान दोबारा Kim Jong-un के हाथ, Vladimir Putin का खास संदेश

सोल रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन को राज्य मामलों के आयोग का अध्यक्ष पुनः चुने जाने पर बधाई दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के रिश्तों का भविष्य उज्जवल होगा। क्रेमलिन ने सोमवार को यह जानकारी दी। नॉर्थ की कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी के मुताबिक, रविवार को हुए सुप्रीम पीपल्स असेंबली के पहले सत्र में किम को आयोग के सबसे ऊंचे पद पर फिर से नियुक्त किया गया। 2016 में देश की टॉप पॉलिसी गाइडेंस बॉडी के तौर पर कमीशन बनने के बाद से यह उनका लगातार तीसरा कार्यकाल है। क्रेमलिन के टेलीग्राम चैनल पर पोस्ट किए गए एक मैसेज में पुतिन ने कहा, "प्रिय कॉमरेड किम जोंग उन, डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया के स्टेट अफेयर्स के चेयरमैन के तौर पर आपके पुनः चुने जाने पर मेरी दिल से बधाई स्वीकार करें।" उन्होंने आगे कहा, "रूस हमारे देशों के बीच दोस्ताना, सहयोगी रिश्तों को मजबूत करने में आपके निजी योगदान को बहुत महत्व देता है। हम स्वाभाविक रूप से मॉस्को और प्योंगयांग के बीच बड़ी स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप को और बढ़ाने के लिए अपना करीबी सहयोग जारी रखेंगे। यह बेशक हमारे दोनों देशों के बुनियादी हितों को पूरा करता है।" रूस और नॉर्थ कोरिया हाल के वर्षों में अपने रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़े हैं। 2024 में एक रक्षा संधि की। न्यूज एजेंसी ने बताया कि नॉर्थ कोरिया ने यूक्रेन के खिलाफ अपनी लड़ाई में रूस का साथ देने के लिए सेना भी भेजी। इससे पहले, नॉर्थ कोरिया के लीडर किम जोंग-उन को पिछले महीने हुई रूलिंग पार्टी कांग्रेस के बाद सुप्रीम पीपल्स असेंबली (एसपीए) के पहले सेशन में 'स्टेट अफेयर्स कमीशन' का प्रेसिडेंट फिर से नियुक्त किया गया, यह जानकारी सरकारी मीडिया ने दी। कोरियन सेंट्रल न्यू एजेंसी (केसीएनए) ने बताया कि किम को 15वें एसपीए के पहले सत्र के पहले दिन स्टेट अफेयर्स कमीशन का प्रेसिडेंट फिर से अपॉइंट किया गया। केसीएनए के मुताबिक, बैठक के दौरान, जो योंग-वोन, जिन्हें किम के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक माना जाता है, को भी एसपीए स्टैंडिंग कमेटी का चेयरमैन चुना गया, जो संसद का सबसे बड़ा पद है, और उन्होंने चोई रयोंग-हे की जगह ली। नॉर्थ कोरिया आमतौर पर पार्टी कांग्रेस के बाद रबर-स्टैम्प पार्लियामेंट का एक सत्र बुलाता है ताकि कांग्रेस में लिए गए फैसलों को लागू करने के लिए जरूरी कानून बनाए जा सकें। यह नियुक्ति रविवार को एसपीए के पहले सत्र में की गई, जो इसके 15वें टर्म की पहली स्टेट अफेयर्स एक्टिविटी थी। प्रीमियर पाक थाए-सोंग ने अपना पद बरकरार रखा, जबकि पूर्व प्रीमियर किम टोक-हुन को पहला वाइस प्रीमियर नियुक्त किया गया, यह पद हाल ही में हुई बैठक में बनाया गया था। इस फेरबदल में, जो को स्टेट अफेयर्स कमीशन का उपाध्यक्ष भी नियुक्त किया गया, जबकि किम की ताकतवर बहन किम यो-जोंग को आयोग के सदस्य के पद से हटा दिया गया। किम की ताकतवर बहन, किम यो जोंग, देश की सबसे बड़ी लीडरशिप बॉडी, स्टेट अफेयर्स कमीशन के सदस्यों की केसीएनए लिस्ट से गायब थीं, जिस पर वह 2021 से काबिज थीं। उत्तर कोरिया के तीसरी पीढ़ी के नेता के तौर पर, किम ने 2011 में अपने पिता के निधन के बाद से न्यूक्लियर हथियारों से लैस देश पर शासन किया है। देश की स्थापना 1948 में उनके दादा, किम इल सुंग ने की थी।

311.95 करोड़ की मदद से वंचित रहा केरल, केंद्र ने आवेदन न करने पर उठाए सवाल

नई दिल्ली केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केरल द्वारा राष्ट्रीय आपदा न्यूनीकरण कोष के तहत 311.95 करोड़ रुपये हासिल करने के लिए आवेदन नहीं किए जाने का उल्लेख करते हुए सोमवार को लोकसभा में कहा कि केंद्रीय अनुदानों के लिए मंजूरी मिलना एक बात है और राज्यों द्वारा उस राशि को प्राप्त करने के लिए आवेदन करना दूसरी बात है। केंद्र सरकार की ओर से केरल का अनुदान लंबित रहने संबंधी कांग्रेस सदस्य मणिकम टैगोर के पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए सीतारमण ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य को उपयोगिता प्रमाणपत्र देना होता है ताकि आगे की राशि उसे जारी की जा सके। सीतारमण ने कहा कि उदाहरण के लिए केरल से संबंधित एक विषय था जिसमें आवंटन किए जाने के बावजूद केरल सरकार ने राशि प्राप्त नहीं की। उन्होंने कहा कि केरल को राष्ट्रीय आपदा न्यूनीकरण कोष के तहत 311.95 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी, जिसमें वायनाड के भूस्खलन प्रभावित इलाकों में जोखिम प्रबंधन की परियोजना के लिए 72 करोड़ रुपये शामिल हैं। सीतारमण ने कहा, ''जिन 311.95 करोड़ रुपये के लिए स्वीकृति दी गई, उसमें एक भी पैसा जारी नहीं किया गया है। मैं इस राशि को तभी जारी करूंगी जब राज्य इसके लिए आवेदन करेगा, मांगेगा। इसलिए मंजूरी देना एक बात है, उसके लिए आवेदन करना और मांगना दूसरी बात है।'' केरल में वायनाड आपदा प्रबंधन के लिए वित्तीय सहायता के संबंध में केंद्र और राज्य सरकार के बीच कुछ गतिरोध की स्थिति है। केरल में अगले महीने विधानसभा चुनाव होने हैं।

लखपति दीदी: 18 हजार से अधिक महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर, गांवों की अर्थव्यवस्था को दे रहीं मजबूती

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में प्रभावी पहल की जा रही है। इसी कड़ी में जशपुर जिले में ‘लखपति दीदी’ अभियान ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है, जहां 18 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बनकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। प्राकृतिक सौंदर्य से समृद्ध जशपुर की महिलाएं अब खेती, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और लघु उद्यमों के माध्यम से न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे गांव की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं। गांव-गांव में सक्रिय कृषि सखियां और पशु सखियां किसानों तक आधुनिक तकनीक और उन्नत कृषि पद्धतियों की जानकारी पहुंचाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ कर रही हैं। जिले में वर्तमान में 12 हजार 808 स्व-सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे 1 लाख 37 हजार 912 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। सामूहिक प्रयासों से ये महिलाएं आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही हैं। राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2024 से 2027 तक जशपुर जिले में 30 हजार 877 ‘लखपति दीदी’ तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इनमें से अब तक 18 हजार 218 महिलाएं लखपति बन चुकी हैं, जबकि शेष महिलाओं को भी आगामी वर्षों में इस श्रेणी में लाने के लिए सतत प्रयास किए जा रहे हैं। महिलाओं को आजीविका से जोड़ने के लिए ‘बिहान’ योजना के माध्यम से व्यापक सहयोग प्रदान किया जा रहा है। इसके तहत लगभग 14 करोड़ रुपये मुद्रा लोन, 76 करोड़ रुपये बैंक लिंकेज और 13 करोड़ रुपये सामुदायिक निवेश निधि के रूप में सहायता दी गई है। साथ ही लगभग 70 हजार महिलाओं को कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और उद्यानिकी गतिविधियों से जोड़ने की पहल की जा रही है। इसके अतिरिक्त करीब 8500 संभावित लखपति दीदियों को विभिन्न आजीविका गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया गया है और उनकी आय में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए निगरानी भी की जा रही है। महिलाएं डेयरी, बकरी पालन, पोल्ट्री और फूड प्रोसेसिंग जैसे व्यवसायों के माध्यम से अपनी आय बढ़ा रही हैं। उल्लेखनीय है कि महिलाओं को नई तकनीकों और नवाचारों से जोड़ने के उद्देश्य से 23 से 25 मार्च 2026 तक कृषि महाविद्यालय, कुनकुरी में ‘कृषि क्रांति एक्सपो 2.0’ का आयोजन किया जा रहा है, जो महिलाओं के लिए नए अवसरों का द्वार खोल रहा है। जशपुर की यह पहल दर्शाती है कि जब महिलाएं सशक्त होती हैं, तो परिवार, गांव और पूरे राज्य की प्रगति सुनिश्चित होती है।  

हेल्थ और बच्चों का भविष्य साथ-साथ: रेडक्रॉस का डबल प्लान, हरियाणा में किफायती लैब शुरू

चंडीगढ़ हरियाणा में आमजन को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। हरियाणा रेडक्रास सोसायटी ने राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत क्लीनिकल लैब स्थापित करने का निर्णय लिया है। इन लैब्स में लोगों को बेहद रियायती दरों पर विभिन्न मेडिकल जांच सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। सोसायटी के वाइस चेयरमैन अंकुश मिगलानी ने चंडीगढ़ में जानकारी देते हुए बताया कि सिविल अस्पतालों में आमजन को कम लागत पर गुणवत्तापूर्ण जांच सुविधा देने के उद्देश्य से जिला स्तर पर लैब खोलने का फैसला लिया गया है। इस पहल से खासकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही, रेडक्रास सोसायटी ने जूनियर रेडक्रास कैंप से जुड़ी गतिविधियों को भी मजबूत करने का निर्णय लिया है। कैंप के लिए मिलने वाली राशि को सीधे बच्चों की सुविधाओं और उनके विकास पर खर्च किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में 13 जिलों के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें संबंधित जिलों का दौरा करेंगी, जूनियर रेडक्रास कैंप की गतिविधियों का निरीक्षण करेंगी और बच्चों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी आवश्यकताओं और सुझावों को समझेंगी। इस पहल को स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

रंधावा केस में केंद्र सख्त, अमित शाह ने दिया ऑफर- सांसदों की सहमति पर CBI को सौंपी जाएगी जांच

नई दिल्ली पंजाब के वेयरहाउस डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (DM) गगनदीप सिंह रंधावा की आत्महत्या का मामला अब लोकसभा तक पहुँच गया है। पंजाब सरकार के मंत्री लालजीत भुल्लर पर प्रताड़ना के गंभीर आरोपों के बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस मामले में CBI जांच के साफ संदेश दिए हैं। संसद में गूँजा मुद्दा, शाह बोले सोमवार को कांग्रेस सांसद गुरजीत औजला ने लोकसभा में रंधावा की मौत का मुद्दा उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा- "यह पंजाब राज्य का विषय है, लेकिन अगर पंजाब के सभी सांसद मुझे इस मामले में लिखित अनुरोध देते हैं, तो मैं तुरंत यह केस CBI को ट्रांसफर करने के निर्देश दे दूंगा।"

प्रदेश में हवाई पट्टियों के विकास से सुदृढ़ हो रही क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी

भोपाल मध्यप्रदेश में क्षेत्रीय हवाई संपर्क को सुदृढ़ बनाने और दूरस्थ जिलों को हवाई सेवाओं से जोड़ने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा हवाई पट्टियों के विकास एवं विस्तार के लिए सुनियोजित प्रयास किए जा रहे हैं। इससे प्रदेश में पर्यटन, औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा। प्रदेश के प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों को हवाई मार्ग से जोड़ने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इसके लिए मध्यप्रदेश सिविल एविएशन पॉलिसी-2025 लागू की गई है, जिसका उद्देश्य विमानन अधोसंरचना का विकास कर हवाई सेवाओं का विस्तार करना है। प्रदेश की 11 हवाई पट्टियों – सिवनी, सागर, गुना, रतलाम, उज्जैन, बिरवा (बालाघाट), उमरिया, छिंदवाड़ा, मंदसौर, नीमच और शिवपुरी को उड़ान प्रशिक्षण और अन्य विमानन गतिविधियों के संचालन के लिए निजी संस्थाओं को उपयोग के लिए दिए जाने की पहल की गई है। इस पहल से विमानन क्षेत्र में युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। साथ ही हवाई पट्टियों का बेहतर संधारण एवं अनुरक्षण भी सुनिश्चित होगा। प्रदेश में क्षेत्रीय हवाई संपर्क को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश वायु संपर्कता नीति-2018 भी लागू की गई है। इस नीति में चयनित एयरलाइंस को प्रदेश के विभिन्न शहरों के बीच उड़ान सेवाएँ प्रारंभ करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। केंद्र सरकार की रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम (आरसीएस) में भी प्रदेश में हवाई अधोसंरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। वर्ष 2024-25 में दतिया हवाई पट्टी के विकास एवं विस्तार के लिए इसे भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को सौंपा गया। दतिया एयरपोर्ट प्रदेश का 8वाँ हवाई अड्डा है, जहाँ से छोटे यात्री विमानों का संचालन प्रारंभ किया जा चुका है। इसी क्रम में वर्ष 2025-26 में शिवपुरी एवं उज्जैन की हवाई पट्टियों के विकास और विस्तार के लिए भी भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन हवाई पट्टियों को उन्नत कर क्षेत्रीय हवाई अड्डों के रूप में विकसित करने और नियमित विमान सेवाओं के संचालन योग्य बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही वर्तमान में प्रगति पर है। प्रदेश में हवाई अधोसंरचना के इस विस्तार से न केवल हवाई संपर्क सुदृढ़ होगा, बल्कि पर्यटन, उद्योग और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।