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फ्यूल संकट की अफवाह से हड़कंप: रतलाम में भारी भीड़ और विवाद, बंद करने पड़े पेट्रोल पंप

रतलाम एलपीजी गैस संकट के बाद अब शहर में पेट्रोल और डीजल को लेकर अफवाहों ने माहौल गरमा दिया है। सोमवार रात से ही पेट्रोल पंपों पर अचानक भीड़ बढ़ गई, जिससे कई पंपों का स्टॉक समाप्त हो गया और अधिकांश पंप समय से पहले बंद करने पड़े। इसके चलते मंगलवार को हालात और बिगड़ गए। टैंकरों की सप्लाई और अफवाहों का असर बताया जा रहा है कि ऑयल कंपनियों के डिपो द्वारा एडवांस में टैंकर नहीं छोड़े जाने की स्थिति भी सामने आई। इसी बीच पेट्रोल-डीजल की कमी की अफवाह फैलते ही लोगों ने बड़ी संख्या में पंपों का रुख किया। परिणामस्वरूप कई स्थानों पर लंबी कतारें लग गईं और पेट्रोल भरवाने को लेकर विवाद की स्थिति भी बनी। स्टॉक खत्म होने से बंद हुए कई पंप सोमवार रात बंद हुए पेट्रोल पंप मंगलवार को डिपो से सप्लाई मिलने के बाद दोबारा शुरू तो हुए, लेकिन दिनभर भीड़ का दबाव बना रहा। शहर के लगभग 10 से 12 पेट्रोल पंपों पर यही स्थिति देखने को मिली। जिले में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध इस संबंध में जिला आपूर्ति अधिकारी आनंद गोले ने स्पष्ट किया कि जिले में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। ऑयल कंपनियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार 24 मार्च की स्थिति में जिले के 184 पेट्रोल पंपों पर 13 लाख 26 हजार लीटर पेट्रोल और 16 लाख 16 हजार लीटर डीजल उपलब्ध है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे संयम बनाए रखें और पेट्रोल-डीजल को लेकर सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से फैल रही भ्रामक खबरों पर विश्वास न करें।  

राज्यसभा चुनाव के बाद हरियाणा कांग्रेस में विवाद, राहुल गांधी ने निशाना साधा उन विधायकों पर जिन्होंने नौ वोट खराब किए

चंडीगढ़  हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस सभी दलों के निशाने पर है। चुनाव में पांच विधायकों द्वारा क्रास वोटिंग करने और चार विधायकों की वोट रद होने के बाद जहां कांग्रेस में जबरदस्त तरीके से गुटबाजी बढ़ी है, वहीं इनेलो काफी हद तक भाजपा की बी टीम होने के कांग्रेस के आरोपों को खारिज करने में सफल साबित हुई है। कांग्रेस में गुटबाजी की स्थिति यह है कि सभी धड़े एक दूसरे पर खुलकर सवाल उठा रहे हैं। इस गुटबाजी के बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह के पूर्व सांसद बेटे बृजेंद्र सिंह की सद्भावना यात्रा का सिलसिला नहीं थमा है। बृजेंद्र सिंह ने चुनाव से पहले भी कांग्रेस विधायकों को क्रास वोटिंग नहीं करने की नसीहत दी थी। साथ ही कहा था कि यदि क्रास वोटिंग हुई तो आरोपित विधायकों की खैर नहीं, क्योंकि राज्यसभा चुनाव से सीधे तौर पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई है। राहुल गांधी ने कर्मवीर बौद्ध को कांग्रेस का उम्मीदवार बनाया था। यह बात सही है कि कर्मवीर बौद्ध को न तो भूपेंद्र सिंह हुड्डा पसंद करते थे और न ही कांग्रेस का कोई विधायक उनके नाम को पचा पा रहा था, लेकिन कहीं न कहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को यह आभास था कि अगर कर्मवीर बौद्ध चुनाव हार गए तो उनके राजनीतिक भविष्य के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। अपने राजनीतिक भविष्य की चिंता के वशीभूत ही सही, कर्मवीर बौद्ध को कांग्रेस नेता चुनाव जिताने में कामयाब हो गए, लेकिन उनकी जीत भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल से मात्र 0.44 प्रतिशत मतों से हुई है, जो बहुत बढ़िया स्थिति नहीं है। कांग्रेस के 37 विधायकों में से कर्मवीर बौद्ध को सिर्फ 28 वोट मिले, जबकि पांच वोट क्रास हो गए और चार वोट रद हो गए। कांग्रेस नेता अपनी झेंप मिटाने के लिए बार-बार दावा कर रहे हैं कि सिर्फ पांच नेताओं ने क्रास वोट की है, जबकि जिन चार कांग्रेस विधायकों की वोट रद हुई है, वह पता नहीं किया जा सकता, मगर सच्चाई यह है कि कांग्रेस के नौ वोट खराब हुए हैं अथवा खराब किए गए हैं। हरियाणा भाजपा के अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली ने स्पष्ट दावा किया है कि सतीश नांदल के संपर्क में 12 कांग्रेस विधायक थे। कांग्रेस के जिस तरह से नौ वोट खराब हुए हैं, उससे मोहन लाल बडौली का दावा सही प्रतीत हो रहा है। हुड्डा गुट के लिए अगर संतोषजनक है तो वह ये कि जिन पांच कांग्रेस विधायकों ने वोट क्रास की है, उसमें दो कुमारी सैलजा गुट की विधायक हैं। हाल ही में एक कार्यक्रम में कुमारी सैलजा ने नारायणगढ़ की विधायक शैली चौधरी के पति रामकिशन गुर्जर की अनदेखी कर स्पष्ट संदेश दे दिया कि राहुल गांधी के उम्मीदवार को हराने की कोशिश करने वाला कोई विधायक उनका अपना नहीं हो सकता। लेकिन हुड्डा गुट को हाईकमान के समक्ष यह कहने का मौका मिल गया है कि सैलजा गुट के विधायकों ने भी गड़बड़ की है, जबकि सैलजा गुट के पास हुड्डा गुट के बारे में हाईकमान के समक्ष कहने के लिए उनसे ज्यादा तथ्य मौजूद हैं। हरियाणा में पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह पिछले कई माह से सद्भाव यात्रा निकाल रहे हैं। कांग्रेस प्रभारी बीके हरिप्रसाद और प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह हालांकि बृजेंद्र सिंह यात्रा को सिरे से खारिज कर चुके थे, लेकिन राहुल गांधी ने बृजेंद्र सिंह की पीठ पर हाथ धरा तो सब चुप्पी साध गए। अपनी यात्रा के बाद से अब तक राहुल गांधी मुलाकात व बातचीत के लिए बृजेंद्र सिंह को तीन बार दिल्ली बुला चुके हैं। बृजेंद्र सिंह की यात्रा अप्रैल-मई तक संचालित होगी। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि यदि राज्य में हुड्डा व सैलजा गुट की लड़ाई इसी तरह से चलती रही और कांग्रेस आपसी फूट का शिकार रही तो आने वाले समय में राहुल गांधी की ओर से बृजेंद्र सिंह को कांग्रेस के बड़े चेहरे के रूप में स्थापित किया जा सकता है।  

प्रशासन का बड़ा एक्शन: मेडिकल कॉलेज भूमि से हटाए गए कब्जे, अतिक्रमणकारियों ने किया हंगामा और पथराव

अंबिकापुर शहर के गंगापुर में मेडिकल कॉलेज के लिए आवंटित 7 एकड़ जमीन पर लंबे समय से अवैध कब्जे के खिलाफ जिला प्रशासन ने आज सुबह सख्त कार्रवाई की। इस दौरान 37 कब्जाधारियों के मकानों को बुलडोजर से ध्वस्त किया गया। कार्रवाई के समय कुछ अतिक्रमणकारियों ने विरोध किया और प्रशासनिक अमले पर पथराव भी किया, जिससे मौके पर कुछ समय के लिये तनाव की स्थिति बन गई थी, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस बल ने स्थिति को नियंत्रित किया। जानकारी के अनुसार, जमीन पर लंबे समय से मकान बनाया था। कई बार नोटिस देने के बावजूद कब्जा हटाने में विफल रहने पर प्रशासन ने यह कार्रवाई की। मौके पर एसडीएम फागेश सिन्हा, तहसीलदार उमेश बाज और एएसपी अमोलक सिंह के नेतृत्व में प्रशासनिक और पुलिस टीम मौजूद रही। नगर निगम की टीम बुलडोजर के साथ पहुंची और पहले कार्रवाई से पहले लोगों को अपना सामान हटाने का समय दिया गया, जिसके बाद मकानों को ध्वस्त करना शुरू किया गया। प्रशासन ने बताया कि कब्जाधारियों को पहले भी बेदखली नोटिस जारी किए गए थे और मामला हाई कोर्ट तक गया था। अदालत से राहत न मिलने के बाद 2025 में फिर से बेदखली आदेश जारी किया गया। एसडीएम फागेश सिन्हा ने बताया कि कब्जाधारियों ने वन अधिकार पट्टे के फर्जी दस्तावेज पेश किए थे। जांच में कलेक्टर और डीएफओ के हस्ताक्षर फर्जी पाए गए। इस मामले में अलग से एफआईआर दर्ज करने की तैयारी की जा रही है।

धधकी राइस मिल, आग बुझाने के लिए टीम और ग्रामीणों की कड़ी मशक्कत

कवर्धा जिले के हरिनछपरा स्थित जनता राइस मिल में आज अचानक भीषण आग लगने से इलाके में हड़कंप मच गया। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंची फ़ायर ब्रिगेड की टीम ने आग पर काबू पाने के प्रयास शुरू कर दिए है। स्थानीय लोग भी घटना स्थल पर जुटकर आग पर नियंत्रण पाने में मदद कर रहे है। घटना का एक वीडियों भी सामने आया है जो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, आग की वजह का अभी पता नहीं चल सका है और किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। मौके पर फ़ायर ब्रिगेड की टीम और स्थानीय लोगों का प्रयास जारी है और वे आग को पूरी तरह से बुझाने में जुटे हुए हैं। प्रशासन ने भी सुरक्षा के मद्देनज़र आसपास के इलाके को खाली कराने की तैयारी शुरू कर दी है। यह घटना व्यापारिक क्षेत्र और स्थानीय लोगों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है, और अधिकारियों ने कहा है कि जल्द ही आग लगने के कारणों का पता लगाया जाएगा।

पीएनजी वाले घरों में अब एलपीजी सिलिंडर नहीं चलेगा, सरकार ने जारी किए सरेंडर के आदेश

चंडीगढ़  हरियाणा में अब रसोई गैस की व्यवस्था पूरी तरह बदलने जा रही है। सरकार ने साफ कर दिया है कि जिन घरों तक पाइप नेचुरल गैस यानी पीएनजी पहुंच चुकी है, वहां अब एलपीजी सिलिंडर नहीं चलेगा। यानी एक ही घर में दो तरह की गैस रखने का दौर अब खत्म होगा। सोमवार को मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक के बाद ये सख्त फैसले लिए गए हैं। इसमें राज्य में एलपीजी और पीएनजी की स्थिति की समीक्षा करते हुए यह तय किया गया कि जहां पीएनजी उपलब्ध है, वहां के उपभोक्ताओं को उसी पर शिफ्ट करना होगा। भले ही वे पीएनजी को न चाहते हों लेकिन फिर भी उन्हें पीएनजी ही लेनी होगी।  बैठक में निर्णय लिया गया है कि पीएनजी कनेक्शन होने के बावजूद एलपीजी कनेक्शन रखना अब गैरकानूनी माना जाएगा। ऐसे सभी उपभोक्ताओं को तुरंत अपना सिलिंडर कनेक्शन सरेंडर करना होगा। आदेश में यह भी स्पष्ट है कि इसके बाद कोई भी उपभोक्ता सरकारी तेल कंपनियों से गैस सिलिंडर की रिफिल यानी भरवा नहीं ले सकेगा। सबसे सख्त प्रावधान ये है कि अगर किसी इलाके में पीएनजी की सुविधा उपलब्ध है और उपभोक्ता इसे लेने से इनकार करता है, तो उसका एलपीजी कनेक्शन ही सस्पेंड कर दिया जाएगा। यानी अब विकल्प की गुंजाइश लगभग खत्म कर दी गई है। जिन घरों में पीएनजी मीटर पहले ही लगाए जा चुके हैं, वहां तुरंत प्रभाव से एलपीजी सप्लाई बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि एक ही घर में दोहरी गैस व्यवस्था पूरी तरह खत्म हो जाए। अफसरों को सख्ती से आदेश करवाने होंगे लागू- राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी उपायुक्तों, जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रकों और सिटी गैस कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि इस फैसले को जमीनी स्तर पर सख्ती से लागू कराया जाए। साथ ही पीएनजी पाइपलाइन बिछाने में आ रही अड़चनों जैसे रोड कटिंग और राइट ऑफ वे को भी तुरंत दूर करने को कहा गया है। ताकि गैस कंपनी शहर की सड़कों पर अपनी पाइपलाइन बिछा सकें और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पीएनजी के कनेक्शन पहुंच सकें। सरकार का दावा है कि पीएनजी ज्यादा सुरक्षित, सस्ती और सुविधाजनक है। इससे सिलिंडर ढुलाई, गैस खत्म होने और ब्लैक मार्केटिंग जैसी समस्याएं खत्म होंगी। अधिकारी के अनुसार सरकार की ओर से ये आदेश मिले हैं। इनको धरातल पर सख्ती से लागू कराया जाएगा। जहां पीएनजी की पाइपलाइन हैं वहां के उपभोक्ताओं को पीएनजी कनेक्शन ही लेना होगा। जिनके कनेक्शन चल रहे हैं उन्हें अपना एलपीजी सिलिंडर सरेंडर करना होगा। पाइपलाइन बिछाने के लिए सरकार की ओर से नगर निगम और एचएसवीपी को भी निर्देश जारी किए हैं। -मुकेश कुमार, डीएफएससी, करनाल।

कश्मीर केस में बड़ा फैसला: आसिया अंद्राबी को उम्रकैद, सहयोगियों पर भी कड़ी सजा

नई दिल्ली दिल्ली की एक अदालत ने कश्मीर की अलगाववादी नेता और दुख्तरान-ए-मिल्लत की प्रमुख आसिया अंद्राबी को उम्रकैद और उसकी दो सहयोगियों सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन को 30-30 साल की सजा सुनाई है। तीनों आरोपियों को जनवरी में UAPA (गैरकानूनी गतिविधियों निवारण अधिनियम) के तहत दोषी ठहराया गया था। दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चंदर जीत सिंह ने सजा पर दलीलें पूरी होने के बाद अंद्राबी पर यह फैसला सुनाया। इससे पहले इस साल जनवरी में केस का फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा था कि आसिया अंद्राबी और उसकी दो अन्य सहयोगियों ने कश्मीर को भारत से अलग करने की साजिश रची थी। कोर्ट ने 14 जनवरी को अंद्राबी, फहमीदा और नसरीन को UAPA की धारा 20 (आतंकवादी गिरोह या आतंकवादी संगठन का सदस्य होने पर सजा), 38 (आतंकवादी संगठन की सदस्यता से जुड़ा अपराध) और 39 (आतंकवादी संगठन का समर्थन करना) के तहत दोषी ठहराया था।

चंडीगढ़ हाईकोर्ट में बंदरों का बढ़ता खतरा, वकील ने पार्किंग से लेकर कोर्ट रूम तक सुरक्षा बढ़ाने की अपील की

चंडीगढ़  पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट परिसर में बंदरों का आतंक बढ़ गया है। इसको लेकर एक एडवोकेट ने प्रशासन का ध्यान खींचा है। एडवोकेट नितिन सचदेवा ने हाई कोर्ट प्रशासन को ईमेल भेजकर सुरक्षा बढ़ाने और तुरंत कार्रवाई करने की मांग की है। एडवोकेट नितिन सचदेवा ने अपने पत्र में कहा कि हाल के दिनों में हाई कोर्ट परिसर में बंदरों का आतंक काफी बढ़ गया है, जिससे वकीलों, कोर्ट स्टाफ, वादियों और आम लोगों की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। पार्किंग से लेकर कोर्ट रूम तक बढ़ा खतरा पत्र में बताया गया है कि बंदर खासतौर पर पार्किंग एरिया में खड़े वाहनों को नुकसान पहुंचा रहे हैं और बैग व फाइल लेकर आने-जाने वाले लोगों पर हमला कर रहे हैं। वहीं कोर्ट रूम की ओर जाने वाले गलियारों में भी बंदरों की मौजूदगी के कारण फाइलों के आवागमन में बाधा और लोगों में दहशत का माहौल बन रहा है। हाईकोर्ट की कैंटीन और खुले स्थान भी अब असुरक्षित हो गए हैं, जहां बंदर लोगों के हाथों से खाने-पीने का सामान छीन रहे हैं और कई बार हमला भी कर रहे हैं। पत्र में ये सुझाव बताए गए एडवोकेट ने समस्या के समाधान के लिए कुछ आसान सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा कि बंदरों को पकड़कर दूसरी जगह छोड़ा जाए। साथ ही लंगूर की आवाज निकालने वाले या बंदरों को संभालने वाले लोगों को तैनात किया जाए। इसके अलावा पार्किंग, एंट्री-एग्जिट, कैंटीन और गलियारों में बंदरों को रोकने के लिए जरूरी इंतजाम करने की भी मांग की गई है। पत्र में यह भी कहा गया है कि हाई कोर्ट आने वाले लोगों को बंदरों को खाना न देने के लिए जागरूक किया जाए, ताकि इस समस्या को कम किया जा सके।  

SC का बड़ा फैसला: हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म छोड़ने पर छिन सकता है अनुसूचित जाति का दर्जा

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक फैसले में साफ कर दिया है कि हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा नहीं मिल सकता. कोर्ट ने कहा कि धर्म परिवर्तन के बाद अनुसूचित जाति का दर्जा स्वतः समाप्त हो जाता है और ऐसे व्यक्ति को SC/ST अत्याचार निवारण कानून का संरक्षण भी नहीं मिलेगा. कोर्ट ने स्पष्ट करते हुए कहा कि ईसाई बने व्यक्ति को SC/ST एक्ट का लाभ नहीं मिलेगा।  दरअसल, आंध्र प्रदेश के रहने वाले एक पादरी चिंथाडा आनंद ने SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया था. उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ लोगों ने उन्हें जाति के नाम पर गाली दी, मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी. जबकि आरोपी पक्ष ने कहना था कि आनंद ईसाई धर्म अपनाकर पादरी बन गए हैं, इसलिए उन्हें SC का दर्जा नहीं मिल सकता।  आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने इस दलील को सही माना और FIR रद्द कर दी. हाईकोर्ट ने कहा कि ईसाई धर्म अपनाने और सक्रिय रूप से उसका पालन करने वाले व्यक्ति को SC का दर्जा बरकरार नहीं रहता, भले ही उसके पास पुराना SC प्रमाणपत्र क्यों न हो।  आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के इसी फैसले को आनंद ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. इस पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति पी.के. मिश्रा और एन.वी. अंजारिया की पीठ ने हाईकोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया, जिसमें कहा गया है कि ईसाई धर्म अपनाने और सक्रिय रूप से उसका पालन करने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति समुदाय के सदस्य के रूप में मान्यता नहीं दी जा सकती।  स्वत: खत्म हो जाएगा SC का दर्जा सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि आनंद पिछले एक दशक से रविवार की प्रार्थनाएं आयोजित कर रहे थे और घटना के समय भी वे ईसाई धर्म का पालन कर रहे थे, जिससे उनका एससी दर्जा स्वतः ही खत्म हो गया।  कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को पूरी तरह से सही ठहराते हुए कहा कि वर्तमान मामले में याचिकाकर्ता ये नहीं कह रहा है कि इस मामले में याचिकाकर्ता का ये दावा नहीं है कि उसने ईसाई धर्म से अपने मूल धर्म में पुनः धर्मांतरण किया है या उसे मादिगा समुदाय में पुनः स्वीकार कर लिया गया है. इससे ये सिद्ध होता है कि अपीलकर्ता ईसाई धर्म का पालन करता रहा है और एक दशक से अधिक वक्त से पादरी के रूप में कार्यरत है जो गांव के घरों में नियमित रूप से रविवार की प्रार्थनाएं आयोजित करता है।  'घटना के वक्त नहीं थे SC का कानूनन हिस्सा' कोर्ट ने आगे कहा, 'घटना के वक्त भी वह प्रार्थना सभा चला रहा था. इन तथ्यों से कोई संदेह नहीं रह जाता कि घटना के दिन वह ईसाई धर्म का अनुयायी था. इसलिए घटना की तारीख पर वह कानूनन अनुसूचित जाति का हिस्सा नहीं था और इसलिए उसे SC/ST एक्ट का लाभ नहीं मिल सकता।  सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला उन सभी मामलों पर लागू होगा, जहां अनुसूचित जाति के व्यक्ति ने हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म छोड़कर ईसाई या किसी अन्य धर्म को अपना लिया है. कोर्ट ने साफ किया कि SC का दर्जा केवल हिंदू, सिख और बौद्ध तक ही सीमित है। 

26 और 29 मार्च को दो नए मौसम सिस्टम एक्टिव, रीवा-सागर में बूंदाबांदी, आंधी-बारिश का अलर्ट

भोपाल   मध्यप्रदेश में मौसम के कई रंग एक साथ देखने को मिल रहे हैं. कहीं चिलचिलाती धूप ने पसीने छुड़ा दिए हैं, तो कहीं बादलों के डेरे ने तापमान में गिरावट दर्ज की है. मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में एक बार फिर ‘वेस्टर्न डिस्टर्बेंस’ एक्टिव हो रहा है, जिसका असर ग्वालियर, चंबल, रीवा और सागर संभाग में देखने को मिलेगा. बीते दिन सोमवार को उज्जैन, सागर और ग्वालियर-चंबल संभाग में साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम की वजह से आसमान में बादल छाए रहे. इसका सीधा असर पारे पर पड़ा और ग्वालियर में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे लुढ़क गया. हालांकि प्रदेश के बाकी हिस्सों में गर्मी का तीखा असर बरकरार रहा. वहीं 26 और 29 मार्च को उत्तर-पश्चिमी भारत में दो नए सिस्टम एक्टिव हो रहे है. जिसके चलते आंधी-बारिश का अलर्ट है. 26 और 27 मार्च को इन जिलों में बारिश के आसार फिलहाल 26 और 27 मार्च को प्रदेश के कई हिस्सों में तेज आंधी के साथ बारिश होने की संभावना है. जबकि 29 मार्च को एक और नया सिस्टम एक्टिव होगा, जिसका मतलब है कि अप्रैल की शुरुआत भी गरज-चमक और बौछारों के साथ हो सकती है. बहरहाल एक तरफ बारिश का अलर्ट है, तो दूसरी तरफ सूरज के तेवर भी कड़े हैं. सोमवार को प्रदेश के कई शहरों में भीषण गर्मी दर्ज की गई. जहां प्रदेश में सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान नर्मदापुरम में 37.7° सेल्सियस, रायसेन में 37.6°, रतलाम में 37.2°, खरगोन 36.0°, खजुराहो और नरसिंहपुर 36.0° और धार में 35.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. 24 घंटे में कई जिलों में बारिश और बादल पिछले 24 घंटे में प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश दर्ज की गई। रीवा में 3 मिमी बारिश और सागर में 1 मिमी बारिश दर्ज की गई। ग्वालियर-चंबल संभाग समेत कई जिलों में बादल छाए रहे। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह बदलाव साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम की वजह से हुआ है, जिसके कारण उत्तरी मध्य प्रदेश में मौसम अपेक्षाकृत ठंडा रहा। ग्वालियर में दिन का तापमान 30 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया, जबकि बाकी हिस्सों में गर्मी का असर जारी रहा। 26 मार्च से फिर सक्रिय होगा नया सिस्टम मौसम विभाग के अनुसार 26 मार्च को उत्तर-पश्चिम भारत में नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा। इसका असर दो दिनों तक मध्य प्रदेश के कई जिलों में देखने को मिलेगा। इस सिस्टम के कारण तेज हवाएं, गरज-चमक के साथ बारिश और बादल छाए रहने की संभावना जताई जा रही है। इसके बाद 29 मार्च को भी एक नया सिस्टम सक्रिय हो सकता है, जिससे मार्च के आखिरी दिनों में मौसम अस्थिर बना रहेगा। 26 मार्च को इन जिलों में बारिश के आसार ग्वालियर, भिंड, दतिया, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, पन्ना, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज और सीधी. 27 मार्च को इन जिलों में बारिश के आसार पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, अनूपपुर और शहडोल. इस तरह रहा बड़े शहरों अधिकतम तापमान  भोपाल में 34.2°C इंदौर में 34.9°C जबलपुर में 34.2°C ग्वालियर में 29.2°C उज्जैन में 35.0°C बड़े शहरों का न्यूनतम तापमान भोपाल में 17.0°C इंदौर में 18.2°C जबलपुर में 17.3°C ग्वालियर में 17.5°C उज्जैन में 16.3°C

कलेक्टर ने जनदर्शन में सुनी आमलोगों की समस्याएं, अधिकारियों को त्वरित कार्यवाही के दिए निर्देश

  बिलासपुर जिला कार्यालय में आयोजित साप्ताहिक जनदर्शन में आज कलेक्टर संजय अग्रवाल ने भी लोगों की समस्याएं सुनी। शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों से आए सैकड़ों लोगों ने कलेक्टर से मिलकर निजी एवं सामुदायिक शिकायत संबंधी आवेदन दिया। कलेक्टर ने अधिकांश मामलों में मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इस दौरान नगर निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे एवं जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल ने भी लोगों की समस्याएं सुनी।         जनदर्शन में ग्राम कछार के सुरेश कुमार बंजारे ने आवेदन देकर बताया कि गांव के ही राधेश्याम द्वारा घर के सामने गली में दीवार खड़ी कर रास्ता संकीर्ण कर दिया गया है, जिससे आवागमन के लिए काफी परेशानी हो रही है। कलेक्टर ने एसडीओ को प्रकरण भेजते हुए परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। बिलासपुर की उत्तरा यादव के द्वारा विधवा पेंशन का लाभ दिलाने की मांग कलेक्टर के समक्ष रखी गई। इस संबंध में संयुक्त संचालक समाज कल्याण विभाग को जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। ग्राम जरोंधा निवासी परमानंद कौशिक ने कलेक्टर से मुलाकात कर आवेदन दिया कि उनकी निजी भूमि पर गांव के ही गोपाल मेहर द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर दीवार खड़ी कर दी गई है और रास्ते में कीचड़युक्त पानी बहाकर आवागमन में बाधा उत्पन्न कर रहा है। इससे खेती-किसानी के कार्यों में भारी परेशानी हो रही है।  उन्होंने बताया कि इस संबंध में पहले भी शिकायत की जा चुकी है और न्यायालय से कब्जा हटाने का आदेश भी मिला था, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने प्रशासन से पुनः हस्तक्षेप कर अवैध कब्जा हटाने की मांग की है। देवरीखुर्द निवासी पुरुषोत्तम दास ने प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना के तहत स्वामित्व कार्ड जारी करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि वे पिछले 50 वर्षों से निवास कर रहे हैं और उनकी पत्नी के नाम पर पट्टा भी है, लेकिन अब तक उन्हें स्वामित्व कार्ड नहीं मिला है। उन्होंने प्रशासन से शीघ्र कार्ड जारी करने की अपील की है ताकि उन्हें अपने अधिकारों का लाभ मिल सके। कलेक्टर ने एसडीओ मस्तुरी को मामले पर उचित कार्यवाही के निर्देश दिए।           सकरी तहसील अंतर्गत ग्राम चिचिरदा निवासी धनीराम कौशि ने कलेक्टर को दिए आवेदन में बताया कि उन्होंने अपनी भूमि के सीमांकन के लिए आवेदन किया था। तहसीलदार द्वारा राजस्व निरीक्षक को सीमांकन करने का आदेश भी जारी किया गया, लेकिन आज तक सीमांकन नहीं किया गया है। इससे उन्हें लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कलेक्टर ने एसडीओ तखतपुर को प्रकरण की जांच कर निराकरण करने के निर्देश दिए है। बिल्हा ब्लॉक के ग्राम नगपुरा निवासी रूचि नेताम ने बताया कि उन्होंने जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए वर्ष 2024-25 में आवेदन किया था। काफी समय बीत जाने के बाद भी प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ। दस्तावेज की कमी के अभाव में उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारी को मामले को सौंपा।