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जेवर एयरपोर्ट के लोकार्पण की तैयारियां अंतिम चरण में, व्यवस्थाएं पूरी तरह चाक-चौबंद

जेवर एयरपोर्ट के लोकार्पण की तैयारियां अंतिम चरण में, सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद सुरक्षा, ट्रैफिक, पार्किंग और निगरानी व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट 28 मार्च को पीएम मोदी करेंगे जेवर एयरपोर्ट का लोकार्पण योगी सरकार की पहल से साकार हुई परियोजना गौतमबुद्धनगर  नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 28 मार्च को होने वाले लोकार्पण कार्यक्रम को लेकर तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच गईं हैं। पीएम मोदी द्वारा सम्पन्न होने वाले उद्घाटन कार्यक्रम को लेकर जिला प्रशासन पूरी मुस्तैदी से व्यवस्था को अमली जामा पहनने में जुट गया है। सभी विभागों को सौंपे गए दायित्वों पर तेजी से काम पूरा किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सक्रिय भूमिका और लगातार प्रयासों से यह महत्वाकांक्षी परियोजना मूर्त रूप लेने जा रही है। सीएम योगी के विजन के चलते यह प्रोजेक्ट प्रदेश के विकास का बड़ा प्रतीक बनकर उभर रहा है। सभी व्यवस्थाओं को दिया जा रहा अंतिम रूप जिला प्रशासन द्वारा पूर्व में की गई समीक्षा के बाद सभी विभाग अपनी जिम्मेदारियों को अंतिम रूप देने में लग गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, पार्किंग, मार्ग संचालन, चिकित्सा सुविधा, अग्निशमन, विद्युत आपूर्ति, साफ-सफाई, पेयजल, बैरिकेडिंग, साइनेज और पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम सहित सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सीसीटीवी कैमरों से हो रही निगरानी कार्यक्रम स्थल, हेलीपैड, पार्किंग और आगमन-प्रस्थान मार्गों को पूरी तरह व्यवस्थित किया जा चुका है, वहीं ट्रैफिक सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी बढ़ाई गई है और कंट्रोल रूम से लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। वीवीआईपी, जनप्रतिनिधियों, उद्यमियों, अधिकारियों और आमजन की संभावित बड़ी संख्या को देखते हुए साफ-सफाई, पेयजल और प्रकाश व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। सीएम योगी स्वयं ले रहे पल-पल का अपडेट प्रदेश सरकार द्वारा इस प्रोजेक्ट को निवेश, रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के नए केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को गति देगा। प्रशासनिक स्तर पर लगातार निगरानी के साथ यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि यह ऐतिहासिक लोकार्पण कार्यक्रम पूरी तरह सुव्यवस्थित और सफलतापूर्वक संपन्न हो। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं पल-पल का अपडेट ले रहे हैं। हाल ही में उन्होंने एयरपोर्ट का निरीक्षण कर सभी तैयारियों का जायजा लिया और अधिकारियों को उचित दिशा निर्देश भी प्रदान किए।

पंचगव्य से यूपी में खड़ा होगा विशाल ऑर्गेनिक बाजार

गोशालाएं बनेंगी अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन पंचगव्य से यूपी में खड़ा होगा विशाल ऑर्गेनिक बाजार बायोगैस प्लांट स्थापित कर तैयार की जाएगी बायो सीएनजी आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर और आईआईटी खड़गपुर पासआउट छात्र की हाईटेक टेक्नोलॉजी का होगा गोशालाओं में इस्तेमाल 100 से ज्यादा गो उत्पादों के जरिए तैयार की जाएगी मार्केट, बड़े पैमाने पर मिलेगा रोजगार योगी सरकार का बड़ा कदम : प्रदेश के छोटे पशुपालकों को भी होगी बड़ी कमाई लखनऊ  उत्तर प्रदेश जल्द ही देश का बड़ा आधुनिक 'टेक्नोलॉजी बेस्ड गोसंरक्षण मॉडल स्टेट'  बनकर उभरने वाला है। प्रदेश की गोशालाओं को अब सिर्फ पशुओं के आश्रय तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार का बड़ा केंद्र बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गो सेवा आयोग ने 'पंचगव्य वैल्यू चेन' (गोमूत्र, गोबर, दूध, दही और घी) पर काम करते हुए 100 से ज्यादा उत्पाद तैयार कर एक विशाल ऑर्गेनिक मार्केट तैयार करने का खाका खींच लिया है। इसमें आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर और आईआईटी खड़गपुर पासआउट छात्र की हाईटेक टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इसी से बायोगैस प्लांट स्थापित कर बायो-सीएनजी तैयार की जाएगी। योगी सरकार के इस बड़े कदम का लाभ प्रदेश के छोटे पशुपालकों को भी होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गोसंरक्षण के विजन को जमीन पर उतारने के लिए देश के शीर्ष आईआईटी संस्थानों के विशेषज्ञ भी सहयोग कर रहे हैं। इस महत्वाकांक्षी योजना का पहला प्रयोग जालौन जिले की गोशालाओं से शुरू किया जा रहा है। यहां बायोगैस प्लांट स्थापित कर जैविक खाद, बायो-सीएनजी और अन्य पंचगव्य उत्पाद तैयार किए जाएंगे। जालौन का यह पायलट प्रोजेक्ट सफल होने पर इस हाईटेक मॉडल को पूरे प्रदेश की गोशालाओं में लागू किया जाएगा। गोशालाओं को पूरी तरह स्वावलंबी और व्यावसायिक रूप से सक्षम बनाने के लिए आईआईटी दिल्ली के प्रो. वीके विजय विशेष सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि टेक्निकल टीम गांवों में जाकर स्किल ट्रेनिंग देगी। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में बायोगैस प्लांट के सुचारू संचालन के लिए स्थानीय लोगों को विशेष रूप से तैयार किया जाएगा।  उत्पादों को तैयार करने से लेकर उसकी ब्रांडिंग और बिक्री तक मदद करेगी टीम वहीं, सॉफ्टवेयर कंपनी से करोड़ों का पैकेज छोड़कर आए आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्र यशराज और उनकी टीम इन उत्पादों को तैयार करने से लेकर उसकी ब्रांडिंग और बिक्री तक मदद करेगी। योगी सरकार के इस बड़े कदम का लाभ प्रदेश के छोटे पशुपालकों को भी होगा। पंचगव्य के जरिए बनाए गए उनके उत्पादों का बाजार में बेहतर मूल्य मिलेगा। इसके साथ ही गांव-गांव स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार भी मिलेगा। आधुनिक मॉडल के दोहरे फायदे गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार इस आधुनिक मॉडल के दोहरे फायदे होंगे। एक ओर जहां गोवंश का सुरक्षित संरक्षण होगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय युवाओं और छोटे किसानों के लिए रोजगार व अतिरिक्त आय के नए द्वार खुलेंगे। तकनीक और परंपरा का यह संगम गांवों में आजीविका का एक बिल्कुल नया और स्थायी मॉडल पेश करने जा रहा है। योजना की महत्वपूर्ण बातें गोमूत्र, गोबर, दूध, दही और घी से तैयार होंगे 100 से अधिक ऑर्गेनिक उत्पाद। पहले चरण में जालौन की गोशालाओं को बनाया जा रहा है हाईटेक और स्वावलंबी। बायोगैस प्लांट चलाने और उत्पाद बनाने के लिए आईआईटी विशेषज्ञ दे रहे ट्रेनिंग। गोसंरक्षण के साथ-साथ छोटे पशुपालकों और स्थानीय युवाओं की आय बढ़ाने का सीधा जरिया।

कौशल विकास से बढ़ेगी आर्थिक रफ्तार, ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य पर योगी सरकार का जोर

कौशल विकास से तेज होगी आर्थिक रफ्तार, ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य पर योगी सरकार का फोकस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में उद्योग आधारित प्रशिक्षण और आईटीआई सशक्तीकरण पर जोर युवाओं को रोजगारोन्मुख कौशल योगी सरकार की प्राथमिकता लखनऊ  उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को गति देने के लिए योगी सरकार कौशल विकास को केंद्र में रखकर तेजी से काम कर रही है। इसी क्रम में व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश सचिवालय में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभागीय योजनाओं की प्रगति और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी योजनाओं का समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए, ताकि प्रदेश के युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार के अवसर मिल सकें। उन्होंने कहा कि योगी सरकार का फोकस युवाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए उन्हें उद्योगों की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षित करना है। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के सशक्तीकरण को लेकर बैठक में विशेष जोर दिया गया। टाटा टेक्नोलॉजीज के सहयोग से आधुनिक प्रशिक्षण मॉडल विकसित करने और उद्योग आधारित स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि प्रशिक्षण की गुणवत्ता को उद्योगों की मांग के अनुरूप बनाना समय की जरूरत है, जिससे युवाओं को सीधे रोजगार से जोड़ा जा सके। इसके साथ ही डेलॉइट के प्रतिनिधियों ने बदलते औद्योगिक परिदृश्य, नई तकनीकों और भविष्य उन्मुख कौशल पर विस्तृत प्रस्तुति दी। इसमें बताया गया कि आने वाले समय में टेक्नोलॉजी आधारित स्किल्स की मांग तेजी से बढ़ेगी, जिसके लिए प्रशिक्षण प्रणाली को अपडेट करना जरूरी है। मंत्री ने कहा कि कौशल विकास को नई दिशा देकर प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना ही प्रदेश की आर्थिक प्रगति की कुंजी है। उन्होंने अधिकारियों को नवाचार, तकनीकी उन्नयन और उद्योगों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने दोहराया कि योगी सरकार युवाओं को सशक्त बनाने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

योगी सरकार के प्रयासों से स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और डिजिटल सेवाओं में अभूतपूर्व प्रगति

नव निर्माण के 9 वर्ष: गुड गवर्नेंस से बदली यूपी की तस्वीर, ‘ईज ऑफ लिविंग’ में हुआ बड़ा सुधार योगी सरकार के प्रयासों से स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और डिजिटल सेवाओं में अभूतपूर्व प्रगति पेंशन, आवास, मुफ्त राशन, मेडिकल कॉलेज, स्किल डेवलपमेंट और डिजिटल सुविधाओं के आंकड़े बता रहे बदलाव की पूरी कहानी हर व्यक्ति तक पहुंचीं बुनियादी सुविधाएं, डिजिटल सेवाओं से समय व श्रम में हुई भारी कमी शिक्षा व स्वास्थ्य के लिए अब नहीं रही प्रदेशवासियों को यूपी से बाहर जाने की जरूरत लखनऊ उत्तर प्रदेश में बीते नौ वर्षों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सुशासन (गुड गवर्नेंस) को केंद्र में रखकर ‘ईज ऑफ लिविंग’ को मजबूत करने की दिशा में व्यापक काम हुआ है। योजनाओं की प्रगति और उपलब्ध आंकड़े इस बदलाव की स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। सरकार के द्वारा किए गए इन सभी प्रयासों का समेकित प्रभाव यह है कि उत्तर प्रदेश में अब स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के लिए लोगों को बाहर जाने की आवश्यकता कम हुई है। योजनाओं की ठोस प्रगति और पारदर्शी क्रियान्वयन ने प्रदेश को ‘ईज ऑफ लिविंग’ के मामले में एक नए स्तर पर पहुंचाया है, जिससे उत्तर प्रदेश एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित राज्य के रूप में तेजी से उभर रहा है। स्वास्थ्य क्षेत्र में वर्ष 2017 के बाद बड़ा विस्तार देखने को मिला है। जहां पहले सीमित संसाधन और अव्यवस्थित ढांचा था, वहीं अब सरकारी मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 81 हो गई है। ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज’ के तहत हर जिले में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने का कार्य तेजी से चल रहा है। प्रदेश में वर्तमान में 13,600 एमबीबीएस और 6,866 पीजी सीटों पर प्रवेश हो रहा है। आयुष्मान भारत योजना के तहत 5.64 करोड़ लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड प्रदान किए गए हैं, जिससे उन्हें 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के अंतर्गत 1.32 लाख से अधिक विद्यालयों में 19 बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं। डीबीटी के माध्यम से 1.30 करोड़ से अधिक छात्रों को यूनिफॉर्म, जूते, बैग आदि के लिए धनराशि सीधे खातों में भेजी गई है। साथ ही डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देते हुए हजारों स्कूलों में स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब स्थापित की गई हैं। कौशल विकास के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (UPSDM) के तहत करीब 26 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। वहीं ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) योजना से कारीगरों और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ा गया है। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं ने करोड़ों लोगों के जीवन को स्थिरता दी है। वर्तमान में 67.50 लाख वृद्धजन, 26.81 लाख निराश्रित महिलाएं और 11.57 लाख दिव्यांगजन पेंशन का लाभ ले रहे हैं। पेंशन राशि को 300 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये प्रतिमाह किया गया है और अप्रैल 2026 से इसे 1500 रुपये करने का निर्णय लिया गया है। पिछले नौ वर्षों में 62 लाख से अधिक आवास गरीबों को उपलब्ध कराए गए हैं। वहीं 15 करोड़ लोगों को मुफ्त खाद्यान्न वितरण से खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत 1.86 करोड़ परिवारों को निशुल्क गैस कनेक्शन दिए गए हैं। डीबीटी के माध्यम से 31 विभागों की 191 योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाया जा रहा है।  महिला सशक्तीकरण की दिशा में भी ठोस परिणाम सामने आए हैं। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत 26.81 लाख बेटियां, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से 60 लाख माताएं लाभान्वित हुई हैं। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत 5.20 लाख से अधिक बेटियों के विवाह संपन्न कराए गए हैं। ग्रामीण आजीविका मिशन से 1.06 करोड़ महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं, जबकि 18.55 लाख महिलाएं ‘लखपति’ श्रेणी में पहुंच चुकीं हैं। डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव हुआ है। ई-साथी ऐप पर 24 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं। 2066 ग्राम पंचायतों में ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी दी गई है, जबकि प्रोजेक्ट गंगा के तहत 20 लाख घरों तक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाने का कार्य जारी है। इससे करीब 10 हजार रोजगार अवसर भी सृजित हुए हैं।

योगी सरकार का बड़ा निर्णय: रामनवमी पर दो दिन का अवकाश

योगी सरकार का बड़ा फैसला, रामनवमी पर दो दिन का अवकाश 26 के साथ अब 27 मार्च को भी रहेगी छुट्टी प्रदेशभर के मंदिरों में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए लिया फैसला लखनऊ रामनवमी के अवसर पर प्रदेश सरकार ने बड़ा निर्णय लेते हुए अवकाश को एक दिन और बढ़ा दिया है। अब 26 मार्च के साथ-साथ 27 मार्च को भी सार्वजनिक अवकाश रहेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह फैसला प्रदेशभर के मंदिरों में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए लिया है। लगातार दो दिन की छुट्टी से श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना और दर्शन में सुविधा मिलेगी। साथ ही व्यवस्थाओं को भी बेहतर ढंग से संभाला जा सकेगा। प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर रामनवमी के दौरान हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार भी अयोध्या समेत प्रदेशभर में मंदिरों में भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए अवकाश बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। अतिरिक्त अवकाश से यातायात को सुव्यवस्थित करने में मिलेगी मदद प्रदेश सरकार के इस कदम को आस्था के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है। अतिरिक्त अवकाश से यातायात, सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित करने में भी मदद मिलेगी। प्रदेश सरकार पहले ही 26 मार्च को अवकाश घोषित कर चुकी थी, जिसे अब बढ़ाकर 27 मार्च तक कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन में प्रेस की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण

उज्जैन की दुनिया में विशिष्ट पहचान बनाने में प्रेस की भूमिका महत्वपूर्ण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री का उज्जैन प्रेस क्लब में जन्मदिन पर भव्य स्वागत हुआ उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का उज्जैन प्रेस क्लब में पहुंचने पर पत्रकार साथियों के द्वारा जोरदार स्वागत किया गया और जन्मदिन की बधाइयां दी गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रेस क्लब के साथियों के साथ जन्मदिन मनाते हुए कहा कि हमारे लिए यह गौरव की बात है कि एनसीआर के बाद देश का सबसे बड़ा मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र इंदौर और उसके आसपास के जिले मिलकर बना रहे हैं। मेट्रोपोलिटन व्यवस्था बनाने के लिए सभी नागरिकों का सहयोग बहुत महत्वपूर्ण होता है। सरकार वह सभी आधारभूत संरचनाओं निर्मित कर रही है जो आवश्यक है। आने वाले समय में मालवा की पहचान दुनिया के सबसे बड़े मेट्रोपोलिन क्षेत्र के रूप में स्थापित होगी। इसके लिए मध्यप्रदेश सरकार लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन शहर अब मेट्रो शहर के रूप में परिवर्तित हो गया है। प्रदेश और देश मे हमारी पहचान भी बदल रही हैं और देश में अब उज्जैन जिला एक प्रमुख स्थान रख रहा है। सारी दुनिया हमारी ओर देख रही है। सिंहस्थ 2028 का भव्य आयोजन हमारे लिए एक परम कर्तव्य है। पूरी दुनिया को उज्जैन के महत्व को बताने और उसको सही आधुनिक नवीन रूप में प्रदर्शित करने के लिए प्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसमें आप सभी का सहयोग सदैव मिलता रहा है। उज्जैन प्रेस क्लब का आधुनिक भवन बने इसके लिए यह यदि उज्जैन प्रेस क्लब प्रस्ताव देता है तो उसे पर विचार किया जाएगा। इस अवसर पर प्रेस क्लब के अध्यक्ष श्री नंदलाल यादव कार्यकारी अध्यक्ष श्री विशाल हाडा और इसके साथ प्रेस कार्यकारिणी के सदस्य और पत्रकार बंधु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।  

उज्जयिनी आस्था से बढ़कर, अब उत्कर्ष की दिशा में आगे बढ़ेगा उज्जैन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

उज्जयिनी आस्था से आगे अब बनेगी उत्कर्ष की नगरी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मेडिसिटी से बनेगी नई पहचान उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पुराकाल से धर्म और संस्कृति की राजधानी रही उज्जयिनी अब विकास के नए आयाम गढ़ रही है। उज्जयिनी अब केवल श्रद्धा और आध्यात्म का ही केंद्र नही, उत्कर्ष, आधुनिकता और समग्र विकास की नगरी बनने की ओर अग्रसर है। हम उज्जैन को स्वास्थ्य उपचार, अधोसंरचना विकास और सांस्कृतिक वैभव के संगम के रूप में विकसित करने के लिए संकल्पित प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को कालिदास अकादमी में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने उज्जैन जिले में आयोजित नि:शुल्क जांच एवं उपचार शिविर के समापन समारोह में सहभागिता कर उज्जैन के समग्र विकास को लेकर सरकार की प्राथमिकताएं बताईं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि उज्जैन में प्रस्तावित मेडिसिटी परियोजना शहर की पहचान को नई दिशा देगी। अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से युक्त यह मेडिसिटी न केवल उज्जैन बल्कि पूरे मालवा-निमाड़ क्षेत्र के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र बनेगी। इससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि आगामी सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए सभी प्रकार के विकास कार्यों को तेज़ी से पूरा किया जा रहा है। उज्जैन की सभी दिशाओं में जरूरत के अनुसार 8 लेन, 6 लेन और 4 लेन सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। पेयजल, स्वच्छता, परिवहन और अन्य बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर और सुव्यवस्थित अनुभव मिल सके। उज्जैन में हुए नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस प्रकार के नवाचार समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। सरकार जनकल्याण के ऐसे प्रयासों को निरंतर बढ़ावा देगी। हम इसे व्यापक स्तर पर लागू करने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि उज्जयिनी अब विकास, स्वास्थ्य, आध्यात्म और आधुनिकता का उभरता हुआ केंद्र बन रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हृदय जांच अभियान के लिए जिला प्रशासन को बधाई दी। उन्होंने कहा कि कोविड के बाद हार्ट अटैक की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। इन पीड़ितों में 15 से लेकर 30 साल की आयु के लोग अधिक हैं। सबसे अधिक मौतें हार्ट अटैक से हो रही है, यह आंकड़े अत्यंत कष्टकारी एवं सचेत करने वाले हैं। इस चुनौती का समाधान खोजने के लिए इंदौर, उज्जैन और आसपास के मेडिकल कॉलेज और अस्पताल एक साथ आए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभियान में लगीं उज्जैन जिले की करीब 5000 आशा कार्यकर्ताओं को 2-2 हजार की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की और बहनों का आभार मानकर अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज जन्म दिवस के अवसर पर पहले किसान और अब आम नागरिकों की स्वास्थ्य की चिंता करते हुए सेवा की संकल्प की पूर्ति की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पहले हृदय की बीमारी होने पर अधिकांश मरीज इलाज के लिए गुजरात जाते थे। लेकिन अब आयुष्मान भारत योजना शुरू होने के बाद उन्हें सही समय पर मध्यप्रदेश में ही उचित इलाज मिल रहा है। हृदय की बीमारियों के संदर्भ में उज्जैन में हुआ यह अभिनव प्रयास बेहद सफल रहा है। आज एक संकल्प की सिद्ध हुई है। उज्जैन जिले की धरती से एक अनोखा मॉडल बना है। अब इसे उज्जैन संभाग के शेष 6 जिलों में भी लागू किया जाएगा। उसके बाद यह अभियान प्रदेश स्तर पर क्रियान्वित होगा। आज हम सभी को यह संकल्प लेने की आवश्यकता है कि हृदय संबंधी जांच एवं बीमारियों के इलाज के लिए लोगों को प्रेरित करें। अगर किसी के साथ आर्थिक तंगी है तो राज्य सरकार मदद के लिए पूरी तरह से साथ खड़ी है। इस अवसर पर प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने भी अपने विचार व्‍यक्‍त किए और मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव को जन्‍म दिवस की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में बताया गया कि विगत 02 माह में 104 विभिन्‍न स्‍थानों पर जांच शिविर लगाए गए। इनमें 26 हजार विभिन्‍न प्रकार की जांचें की गईं और 48 लोगों की सफलता पूर्वक बाईपास सर्जरी की गई। कार्यक्रम में संजय अग्रवाल, राजेश धाकड़, रवि सोलंकी, प्रदीप उपाध्याय,राय सिंह सेंधव, सत्यनारायण खोईवाल, पूर्व मंत्री पारस जैन, रूप पमनानी,राजेन्द्र भारती, सम्राट विक्रमादित्य विश्विद्यालय कुलगुरु अर्पण भारद्वाज उपस्थित रहे।  

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शुरुआत छत्तीसगढ़ से होना ऐतिहासिक – केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया

छत्तीसगढ़ में जनजातीय शक्ति का खेल महाकुंभ: देश के प्रथम ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026’ का भव्य शुभारंभ खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शुरुआत छत्तीसगढ़ से होना ऐतिहासिक – केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया खेल प्रतिभाओं को नया आसमान देने सरकार प्रतिबद्ध — मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रायपुर, बस्तर और सरगुजा बने राष्ट्रीय खेल संगम के केंद्र देशभर से 9 खेल विधाओं में 30 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लगभग 2500 खिलाड़ी ले रहे हिस्सा रायपुर  छत्तीसगढ़ की धरती  एक ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनी, जब राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज ग्राउंड में देश के प्रथम ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026’ का भव्य शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस राष्ट्रीय आयोजन की आधिकारिक घोषणा करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और खेल अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। इस गरिमामयी अवसर पर केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। यह खेल महाकुंभ 25 मार्च से 3 अप्रैल तक रायपुर के साथ-साथ बस्तर और सरगुजा में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देशभर के 30 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों से लगभग 2500 खिलाड़ी 9 खेल विधाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। कार्यक्रम में हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिर्की और ओलंपिक पदक विजेता सुसाइखोम मीराबाई चानू की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गौरव प्रदान किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए सौभाग्य का विषय है कि प्रभु श्रीराम के ननिहाल में देश के पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का आयोजन हो रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया का छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता की ओर से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राज्य में खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। बस्तर ओलंपिक में 4 लाख तथा सरगुजा ओलंपिक में साढ़े तीन लाख लोगों की भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि जनजातीय समाज में खेलों के प्रति गहरी रुचि है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि आत्मसमर्पित नक्सली भी ‘नुआबाट’ (नई राह) के माध्यम से मुख्यधारा में लौटकर इन आयोजनों में सहभागी बने—जो परिवर्तन और विश्वास का प्रतीक है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार में खेलों को लेकर उत्साह और प्रयास दोनों दोगुने हैं। राज्य सरकार ने ‘मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन’ की शुरुआत की है, जिसके अंतर्गत खेल अधोसंरचना निर्माण और प्रतिभाओं के चिन्हांकन के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि रायपुर और बिलासपुर में खेलो इंडिया के तहत रेजिडेंशियल अकादमियां संचालित हैं, जबकि जशपुर, रायगढ़ और रायपुर में इंटीग्रेटेड स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जा रहा है। राज्य सरकार ने खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए ओलंपिक में चयनित खिलाड़ियों को 21 लाख रुपए, स्वर्ण पदक विजेताओं को 3 करोड़, रजत पदक विजेताओं को 2 करोड़ और कांस्य पदक विजेताओं को 1 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि निर्धारित की है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नवा रायपुर में स्थित देश के दूसरे सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम का नामकरण जनजातीय नायक शहीद वीर नारायण सिंह के नाम पर किया गया है, जो राज्य के गौरव और प्रेरणा के प्रतीक हैं। जनजातीय संस्कृति, इतिहास और गौरव से जुड़ा आयोजन मुख्यमंत्री ने देशभर से आए खिलाड़ियों का स्वागत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ न केवल प्रभु श्रीराम का ननिहाल है, बल्कि यह जनजातीय शौर्य और बलिदान की भूमि भी है। उन्होंने शहीद वीर नारायण सिंह, गेंद सिंह और गुण्डाधुर जैसे नायकों का उल्लेख करते हुए बताया कि नवा रायपुर में उनके सम्मान में म्यूजियम बनाया गया है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया है। उन्होंने खिलाड़ियों से इस म्यूजियम का अवलोकन करने का आग्रह भी किया। केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शुरुआत छत्तीसगढ़ से होना ऐतिहासिक है और आने वाले वर्षों में भी यह श्रृंखला जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि एक संतुलित जीवन शैली है।उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेल संस्कृति के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘फिट इंडिया’ और ‘खेलो इंडिया’ जैसे अभियानों ने खेलों को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि देश की 65 प्रतिशत से अधिक युवा आबादी में अपार क्षमता है और अब खेल प्रतिभाएं केवल शहरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जनजातीय क्षेत्रों से भी उभर रही हैं।  उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि नवरात्रि के पावन अवसर पर भगवान राम के ननिहाल में इस आयोजन का शुभारंभ होना अत्यंत शुभ संयोग है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय समाज ने सदैव देश को वीरता और परिश्रम की प्रेरणा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में खेलों को नई दिशा मिल रही है और ‘ट्राइबल गेम्स’ इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि यह आयोजन ऐतिहासिक है और देशभर से आए खिलाड़ियों के स्वागत के लिए पूरा छत्तीसगढ़ उत्साहित है। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जनजातीय प्रतिभाओं को विश्व मंच तक ले जाने का सशक्त माध्यम बनेगा और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा किए जा रहे प्रयासों का लाभ प्रदेश के खिलाड़ियों को मिलेगा। इस अवसर पर संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक सुनील सोनी, अनुज शर्मा, मोतीलाल साहू, पुरंदर मिश्रा, इंद्र कुमार साव, महापौर श्रीमती मीनल चौबे, मुख्य सचिव विकासशील सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण,  बड़ी संख्या में खेल प्रेमी और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

शराब दुकानों के ठेके का 8वां चरण शुरू, अब एकल दुकान के लिए भी आवेदन कर सकते हैं: प्रदेश में नया बदलाव

भोपाल  मध्य प्रदेश में नई आबकारी नीति के तहत शराब दुकानों का आवंटन किया जा रहा है। इसके अंतर्गत सात चरणों के ई-टेंडर एवं ई-टेंडर-कम-ऑक्शन पूरे होने के बाद शेष बची कम्पोजिट मदिरा दुकानों के लिए आठवें चरण में टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे। इसके लिए प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। मदिरा दुकान के ठेका निष्पादन के आठवें चरण में दुकानों के समूह के साथ-साथ एकल दुकान के लिए भी ऑफर प्रस्तुत किए जा सकेंगे। ई-टेंडर के आठवें चरण के लिए निर्धारित कार्यक्रम में संशोधन किया गया है। आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना के अनुसार, ई-टेंडर के आठवें चरण के लिए ऑनलाइन टेंडर फॉर्म डाउनलोड और सबमिट करने की तिथि 25 मार्च 2026 दोपहर 4 बजे से 27 मार्च दोपहर 12 बजे तक निर्धारित की गई है। आठवें चरण के ई-टेंडर खोलने की जानें डेट आठवें चरण के ई-टेंडर प्रपत्र खोलने की तिथि 27 मार्च रहेगी, जिसमें दोपहर 12 बजे से प्रपत्र खोले जाएंगे। ई-टेंडर-कम-ऑक्शन के तहत ऑक्शन का समय 27 मार्च को दोपहर 4:30 बजे से 5:30 बजे तक निर्धारित है। ई-टेंडर खोलने का समय 27 मार्च को दोपहर 4 बजे से रहेगा। हालांकि, यदि संबंधित समूह का ऑक्शन जारी रहता है तो प्रक्रिया बाद में पूरी की जाएगी। ई-टेंडर खोलने की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद ही जिला समिति द्वारा ई-टेंडर के माध्यम से निराकरण किया जाएगा। आठवें चरण में ऑफसेट प्राइस रिजर्व प्राइस के केवल 15 प्रतिशत नीचे तक ही स्वीकार्य होगा। आबकारी विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, सातवें चरण में जो समूह बनाए गए हैं, उन्हें आठवें चरण में यथावत रखा जाएगा। हालांकि, यदि राजस्व बढ़ने की संभावना रहती है तो इसमें बदलाव किया जा सकता है और समूहों का पुनर्गठन भी किया जा सकता है।

जल गंगा संवर्धन अभियान – 2026: जनभागीदारी से पुनर्जीवित हो रहे प्राचीन जल स्रोत

जल गंगा संवर्धन अभियान – 2026: जनभागीदारी से पुनर्जीवित हो रहे प्राचीन जल स्रोत सागर संभाग में फलीभूत हो रहा जल गंगा संवर्धन अभियान तालाबों, नदियों और बावड़ियों के संरक्षण का संकल्प बन रहा जन-आंदोलन भोपाल  सागर संभाग में जल संरक्षण और संवर्धन की दिशा में 'जल गंगा संवर्धन अभियान' धरातल पर फलीभूत होने लगा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप सागर संभाग के सभी जिलों में प्राचीन तालाबों, नदियों, पोखरों और बावड़ियों को पुनर्जीवित करने के लिए चलाए गए पिछले वर्षों के अभियान के सुखद और अपेक्षित परिणाम सामने आए हैं। इसी कड़ी में इस वर्ष भी 19 मार्च, 2026 से संभाग के प्रत्येक जिले में इस अभियान का उत्साहपूर्ण शुभारंभ किया गया है। जनभागीदारी की अनूठी मिसाल जल गंगा संवर्धन अभियान की सबसे बड़ी विशेषता 'जनभागीदारी' रही है। सागर संभाग के हजारों नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, पंचायत पदाधिकारियों और शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों ने कंधे से कंधा मिलाकर इस पुनीत कार्य में अपना सहयोग दे रहे हैं। श्रमदान के माध्यम से प्राचीन जल स्रोतों की गाद निकालने, साफ-सफाई करने और उनके मूल स्वरूप को लौटाने का कार्य निरंतर जारी है। इस अभियान के तहत सागर जिले में नगर पालिका खुरई के तालाब घाट की सफाई के साथ इस वर्ष का आगाज हुआ। संभागीय मुख्यालय पर ऐतिहासिक लाखा बंजारा झील के चकराघाट पर जल पूजन और सफाई कार्यक्रम आयोजित किए गए, वहीं खुरई की अम्मावाड़ी झील को भी स्वच्छ किया गया। छतरपुर जिले में तालाबों का कायाकल्प और ''जल महोत्सव'' आयोजित छतरपुर जिले में विधायक श्रीमती ललिता यादव और जिला प्रशासन के नेतृत्व में सांतरी तलैया से स्वच्छता कार्य शुरू किया गया। जनपद नौगांव की ग्राम पंचायत विकौरा और लवकुशनगर के छठी बम्होरी में तालाबों का कायाकल्प किया जा रहा है। इसी प्रकार निवाड़ी जिले के ग्राम काछीपुरा में विधायक अनिल जैन के नेतृत्व में 'जल महोत्सव 2026' के तहत भव्य जल रैली निकाली गई और ग्रामीणों को जल शपथ दिलाई गई। पन्ना और टीकमगढ़ जिले में नवांकुर संस्थाओं की पहल पन्ना और टीकमगढ़ जिलों में मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के माध्यम से नवांकुर संस्थाओं ने कमान संभाली है। पन्ना के ग्राम बड़ागांव स्थित मिढ़ासन नदी के उद्गम स्थल 'महरा धाम' की सफाई की गई, तो वहीं टीकमगढ़ के गंगासागर तालाब और अचर्रा में गाद निकालने का कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। दमोह जिले में जनभागीदारी से मजबूत हुआ ''जल गंगा संवर्धन अभियान'' दमोह जिले में भी जल गंगा संवर्धन अभियान को विकास कार्यों से जोड़ा गया है। पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्यमंत्री लखन पटेल ने ग्राम रजवांस में तालाब की साफ-सफाई में श्रमदान किया। इस अवसर पर क्षेत्र के विकास के लिए सामुदायिक भवनों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन भी किया गया। साथ ही जल निगम की परियोजनाओं के माध्यम से ग्रामीणों को जल सुरक्षा और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जा रहा है। 'जल गंगा संवर्धन अभियान' केवल जल स्रोतों की सफाई का जरिया नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक महा-संकल्प है। सागर संभाग के हर जिले से आ रही सकारात्मक खबरें इस बात का प्रमाण हैं कि जब समाज और सरकार मिलकर प्रयास करते हैं, तो प्रकृति का संरक्षण सहज और प्रभावी हो जाता है।