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रणवीर सिंह की धुरंधर 2 ने एक हफ्ते में कमाए 1100 करोड़ और अब निशाने पर आमिर खान की दंगल

फिल्मी लवर्स के बीच इस वक्त हर किसी की जुबान पर धुरंधर 2 (Dhurandhar 2) है। रणवीर सिंह की स्पाई थ्रिलर ने दुनियाभर में इतनी हलचल पैदा कर दी है बॉलीवुड से साउथ स्टार्स तारीफ करने से खुद को रोक नहीं पा रहे हैं आदित्य धर के निर्देशन में बनी धुरंधर 2 की करण जौहर से लेकर अल्लू अर्जुन तक ने तारीफ की। इस फिल्म की सफलता से हर कोई हैरान है। धुरंधर 2 ने कमाई के मामले में एनिमल, जवान, पठान और पुष्पा 2 जैसी फिल्मों को भी पछाड़ दिया है। धुरंधर 2 को लेकर क्या बोले आमिर खान अब आमिर खान ने भी धुरंधर 2 की सफलता के बारे में बात की है। हाल ही में 'मिस्टर परफेक्शनिस्ट' दिल्ली में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने धुरंधर 2 का जिक्र किया। एक्टर ने बताया कि अभी तक उन्होंने फिल्म नहीं देखी है, लेकिन वह तारीफें सुन रहे हैं। अभी तक मैंने फिल्म नहीं देखी है लेकिन मैं फिल्म की तारीफें सुन रहा हूं। धुरंधर 1 और धुरंधर 2 दोनों ही फिल्मों ने जबरदस्त प्रदर्शन किया है और मेरी तरफ से पूरी टीम को बहुत-बहुत शुभकामनाएं। क्या आमिर खान की फिल्म का रिकॉर्ड तोड़ेगी धुरंधर 2? आमिर खान की फिल्म दंगल दुनियाभर में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म है जिसने वर्ल्डवाइड 2000 करोड़ का कारोबार किया था। 10 साल बाद भी अभी तक कोई भी आमिर की फिल्म का रिकॉर्ड नहीं तोड़ पाई है, लेकिन शायद धुरंधर 2 को लेकर उम्मीद है कि यह ऐसा कर सकती है। एक हफ्ते में धुरंधर 2 का वर्ल्डवाइड कलेक्शन 1100 करोड़ के पार चला गया है। अब देखते हैं कि रणवीर सिंह की फिल्म, दंगल का रिकॉर्ड तोड़ पाती है या नहीं।आदित्य धर के निर्देशन में बनी धुरंधर 2 में रणवीर सिंह, आर माधवन, अर्जुन रामपाल, संजय दत्त, राकेश बेदी और सारा अर्जुन अहम भूमिकाओं में हैं।

लोकार्पण यात्रियों के लिए बड़ी सौगात: इंदौर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल-1 का उद्घाटन आज

इंदौर इंदौर के देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट पर रविवार को टर्मिनल-1 और अन्य सुविधाओं का लोकार्पण नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू द्वारा वर्चुअल रूप से किया जाएगा। इसके साथ ही एयरपोर्ट पर दो टर्मिनल की सुविधा यात्रियों को मिलने लगेगी और वर्तमान टर्मिनल पर यात्री दबाव भी कम होगा। हालांकि टर्मिनल-1 से उड़ानों की शुरुआत अप्रैल से होगी और यहां से छोटे विमानों का संचालन किया जाएगा। सस्ती दरों पर मिलेगी सुविधा इंदौर एयरपोर्ट पर यात्रियों को चाय, नाश्ते और पानी की बोतल पर अधिक खर्च नहीं करना पड़ेगा। रविवार से उड़ान कैफे की शुरुआत होने जा रही है, जहां 10 रुपये में चाय, 20 रुपये में पोहा और 10 रुपये में पानी की बोतल मिलेगी। इसके लिए पहले यात्रियों को 100 से 300 रुपये तक चुकाने पड़ते थे। लाइब्रेरी और अन्य सुविधाएं भी शुरू टर्मिनल-2 में यात्रियों के लिए लाइब्रेरी शुरू की जा रही है, जहां विभिन्न लेखकों की किताबें पढ़ी जा सकेंगी। यात्री इन किताबों को उड़ान के दौरान भी साथ ले जा सकेंगे और अपने गंतव्य एयरपोर्ट पर जमा कर सकेंगे। यात्रियों को मिलेगा बेहतर अनुभव साथ ही इंटरनेट सुविधा और प्रतीक्षा क्षेत्र की सौगात भी यात्रियों को मिलेगी, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सकेगी। स्व सहायता समूह को मिलेगा अवसर स्व सहायता समूह द्वारा अपना स्टाल भी टर्मिनल में शुरू किया जा रहा है, जिससे स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा। यात्रियों को फायदा होगा सांसद शंकर लालवानी का कहना है कि टर्मिनल-1 और अन्य सुविधाओं का लोकार्पण 29 मार्च को उड्डयन मंत्री द्वारा किया जाएगा। इन सुविधाओं के शुरू होने से यात्रियों को फायदा होगा और एयरपोर्ट की यात्री क्षमता में भी विस्तार होगा।

पटेल मार्केट में आग का तांडव: इंदौर में कई दुकानें और क्लिनिक जलकर राख

इंदौर तेजाजी नगर थाना के समीप पटेल मार्केट में शनिवार सुबह आग लग गई। आग इतनी भीषण थी कि रेस्त्रा सहित मेडिकल शाप और क्लिनिक जल गया। घटना से क्षेत्र में अफरा तफरी मच गई। पुलिस और फायर ब्रिगेड ने घंटों की मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण किया। पुलिस आग लगने के कारणों की जांच कर रही है। टीआई देवेंद्र मरकाम के अनुसार घटना शनिवार सुबह लगभग 11 बजे की है। मेन रोड़ पर पटेल मार्केट बना हुआ है। मनदीप राठौर के रेस्त्रां(गणेश रेस्टोरेंट) से आग की शुरुआत हुई थी। लोगों ने आग बुझाने की कोशिश की मगर रेस्त्रां का सामान जल गया और आग तेजी से बढ़ने लगी। धुएं का गुबार 5 किलो मीटर दूर से दिखाई देने लगा था। आने जाने वाले वाहनों की लंबी कतार लग गई थी। सूचना पर पुलिस और फायरकर्मी पहुंच गए। आग ने डाॅक्टर आशीष राठौर का क्लिनिक और प्रशांत कुमार की मेडिकल शाॅप को भी चपेट में ले लिया। पुलिस ने एहतियात के तौर पर कुछ दुकानों को खाली भी करवा दिया। करीब 2 घंटे बाद आग पर नियंत्रण कर लिया गया। फायरकर्मियों के अनुसार करीब 30 हजार लीटर पानी से आग बुझाई है। आग संभवत: शार्ट सर्किट से लगना बताई जा रही है। तीन दिन में तीन बड़ी घटना गर्मियों में आग की घटनाएं बढ़ रही है। बुधवार को धार रोड़ पर सूफा बैकरी में आग लगी थी। यहां गैस की टंकी में भी ब्लास्ट हो गया था। शुक्रवार तड़के खजूरी बाजार में पांचोली स्टेशनरी में आग लग गई।  

एसजीपीसी का 1487 करोड़ का बजट पास, शिक्षा, धर्म प्रचार और सेवा के क्षेत्र पर जोर

 अमृतसर   शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1487.41 करोड़ रुपये का बजट जयकारों की गूंज के बीच पास कर दिया। तेजा सिंह समुंदरी हाल में आयोजित जनरल इजलास के दौरान इस बजट पर विस्तार से चर्चा की गई और अंत में सर्वसम्मति से इसे मंजूरी दे दी गई। कमेटी के जनरल सेक्रेटरी शेर सिंह मंडवाला ने बजट पेश करते हुए बताया कि इस बार का बजट पिछले वर्ष की तुलना में 100.94 करोड़ रुपये अधिक है। उन्होंने कहा कि कुल बजट में 7.28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो कमेटी की गतिविधियों के विस्तार और बढ़ती जरूरतों को दर्शाता है। बजट में धर्म प्रचार, शिक्षा और सेवा कार्यों को प्राथमिकता दी गई है। श्रद्धालुओं को अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर गुरुद्वारों के प्रबंधन को और बेहतर बनाने के साथ-साथ श्रद्धालुओं को अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत विभिन्न गुरुद्वारों के आसपास सरायों के निर्माण और विस्तार, लंगर व्यवस्था को मजबूत करने तथा धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा शैक्षणिक संस्थानों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। कमेटी द्वारा संचालित स्कूलों और कॉलेजों में सुविधाओं के विस्तार, शिक्षण स्तर को बेहतर बनाने और विद्यार्थियों को अधिक अवसर प्रदान करने के लिए बजट में अलग से प्रावधान रखा गया है। बजट में बहस ना होने पर विरोध अमृतसर में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के बजट इजलास के दौरान बहस न करवाए जाने को लेकर विवाद सामने आया। इजलास के बीच सदस्य बलविंदर सिंह बैंस ने विरोध जताते हुए सभा छोड़ दी। बाहर आकर उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बजट जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर खुली चर्चा होनी चाहिए थी, लेकिन सदस्यों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताते हुए पारदर्शिता पर सवाल उठाए। बैंस ने कहा कि संगत के हित में हर प्रस्ताव पर विस्तृत विचार-विमर्श जरूरी है, ताकि फैसले संतुलित और जिम्मेदार तरीके से लिए जा सकें।

मोदी-ट्रंप कॉल की पुष्टि, मस्क के बयान को सरकार ने किया खारिज

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच 24 मार्च को हुई बातचीत में कोई तीसरा व्यक्ति शामिल नहीं था, भारतीय विदेश मंत्रालय ने यह साफ कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने शनिवार को कहा, 'हमने इस खबर को देखा है। 24 मार्च को हुई टेलीफोन बातचीत केवल पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई थी। जैसा कि पहले कहा गया था, इसमें पश्चिम एशिया की स्थिति पर विचारों का आदान-प्रदान करने का अवसर मिला।' इससे पहले, न्यूयॉर्क टाइम्स ने अमेरिका के अज्ञात अधिकारियों के हवाले से खबर दी कि मंगलवार को ट्रंप और मोदी की फोन पर हुई बातचीत में एलन मस्क भी शामिल हुए थे। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच दो देशों के प्रमुखों के बीच हुई बातचीत में सरकार के इतर किसी नागरिक का मौजूद होना असामान्य है। खबर में कहा गया कि अरबपति कारोबारी एलन मस्क के इस बातचीत में शामिल होने की 2 अमेरिकी अधिकारियों की ओर से पुष्टि की गई। इससे संकेत मिलता है कि दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति मस्क के राष्ट्रपति ट्रंप के साथ संबंध फिर बेहतर हो गए हैं। मस्क के सरकार से पिछले साल बाहर निकलने के बाद उनके व ट्रंप के संबंधों में खटास आ गई थी। मस्क को सरकार में कर्मचारियों की संख्या में कटौती करने का काम सौंपा गया था। खबर में कहा गया कि यह स्पष्ट नहीं है कि एलन मस्क इस बातचीत में शामिल क्यों थे या उन्होंने इस दौरान कोई बात की थी या नहीं। पश्चिम एशिया में 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच यह पहली बातचीत रही। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने होर्मुज स्ट्रेट को खुला, सुरक्षित और सुलभ बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह विश्व में शांति, स्थिरता और आर्थिक खुशहाली के लिए अहम है।  

iPhone में कैसे काम करता है लॉकडाउन मोड और क्या यह वाकई स्पाइवेयर से सुरक्षित है

ऐपल ने आईफोन के एक फीचर को इतना मजबूत बताया है कि कोई हैकर्स इसे पार नहीं कर पाएंगे। Techcrunch की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगर किसी आईफोन में Lockdown Mode ऑन होता है तो कोई भी यहां तक की सरकारी स्तर के बेहद एडवांस स्पाइवेयर भी उसे हैक नहीं कर सकते हैं। कंपनी ने कन्फर्म किया है कि उसे एक भी ऐसा मामला देखने को नहीं मिला है, जिसमें लॉकडाउन मोड पर चल रहे किसी iPhone या अन्य Apple डिवाइस की सुरक्षा में कोई हैकर सेंध लगा पाया हो। TechCrunch की रिपोर्ट के अनुसार, ऐपल की प्रवक्ता सारा ओ'रूर्क (Sarah O’Rourke) ने बताया कि उन्हें लॉकडाउन मोड वाले किसी भी ऐप डिवाइस पर किसी भी तरह के 'मर्सिनरी स्पाइवेयर' हमले की कोई जानकारी नहीं है। लेकिन इस फीचर के कुछ नुकसान भी होते हैं। लॉकडाउन मोड चालू होने पर आपका डिवाइस सामान्य रूप से काम नहीं करेगा। कुछ ऐप्स, वेबसाइट्स और सुविधाएं सुरक्षा कारणों की वजह से सीमित कर दी जाएंगी। साइबर हमले से बचाता है फीचर बता दें कि ऐपल ने 2022 में लॉकडाउन मोड लॉन्च किया था। यह फीचर खास तौर पर ज्यादा जोखिम वाले यूजर्स जैसे पत्रकार, एक्टिविस्ट और अधिकारी को एडवांस्ड सर्विलांस टूल्स से बचाने के लिए डिजाइन किया गया था। लॉकडाउन मोड डिवाइस के कुछ ऐसे फंक्शन को सख्ती से रोक देता है, जिनका गलत इस्तेमाल अक्सर हमलावर करते हैं। यह मैसेज अटैचमेंट को सीमित करता है, कुछ वेब टेक्नोलॉजी को बंद कर देता है और अनजान सोर्स से आने वाले इनविटेशन या कनेक्शन को ब्लॉक कर देता है। इससे साबइर हमले की गुंजाइश काफी हद तक कम हो जाती है। एक साथ सब डिवाइस पर नहीं होगा चालू Lockdown Mode को अपने iPhone, iPad और Mac के लिए अलग-अलग चालू करना होगा। जब आप अपने आईफोन के लिए Lockdown Mode चालू करते हैं, तो यह अपने आप आपकी पेयर की गई ऐपल वॉच के लिए भी चालू हो जाता है। जब आप अपने किसी एक डिवाइस के लिए इसे चालू करते हैं, तो आपको अपने दूसरे सपोर्टेड ऐपल डिवाइस के लिए भी इसे चालू करने के प्रॉम्प्ट मिलते हैं। इसके ऑन होते ही किसी ऐप या फीचर के सीमित होने पर आपको नोटिफिकेशन मिल सकते हैं। Safari में एक बैनर यह बताता है कि Lockdown Mode चालू है। ऐसे कर सकते हैं चालू लॉकडाउन मोड ऑन करने के लिए आपको सबसे पहले आईफोन की सेटिंग में जाना होगा।उसके बाद अब प्राइवेसी और सिक्योरिटी पर क्लिक करें।   फिर आपको स्क्रॉल डाउन करके नीचे आना है। यहां सबसे नीचे लॉकडाउन मोड का ऑप्शन मिलेगा।  आम यूजर्स के लिए नहीं है फीचर ऐपल का लॉकडाउन मोड असल में एक डिजिटल कर्फ्यू की तरह का करता है। यह सुरक्षा को तो मजबूत कर देता है, लेकिन आपसे आपके फोन की कई सुविधाएं छीन लेता है। कई ऐप्स और फीचर्स को सीमित कर देता है। इस कारण यह फीचर आम यूजर के लिए नहीं है बल्कि उन लोगों के लिए ज्यादा उपयोगी है, जिनको खतरनाक स्पाइवेयर का खतरा हो।

मार्च के अंत में सक्रिय हुआ नया वेदर सिस्टम और राजस्थान के कई संभागों में 50 किमी की रफ्तार से चलेंगी तेज हवाएं

राजस्थान राजस्थान में पश्चिमी विक्षोभ के असर से मौसम बदला है। कई जिलों में बारिश, आंधी और तेज हवाएं चल रही हैं। इससे गर्मी से राहत मिली, लेकिन गेहूं-सरसों जैसी रबी फसलों पर नुकसान का खतरा बढ़ गया है। राजस्थान में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। फरवरी और मार्च की शुरुआत में जहां तेज धूप और शुष्क हवाओं ने लोगों को परेशान कर रखा था, वहीं अब उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभों ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है। पिछले कुछ दिनों से प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर जारी है। इससे गर्मी से राहत जरूर मिली है, लेकिन किसानों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। रबी फसलों पर बढ़ा खतरा 12 मार्च के बाद लगातार सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभों के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि यह बदलाव आमजन के लिए राहत लेकर आया है, लेकिन खेतों में पककर तैयार खड़ी रबी फसलें जैसे गेहूं और सरसों अब जोखिम में हैं। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। तापमान का हाल बीते 24 घंटों में हल्की बारिश का असर देखने को मिला। इस दौरान कोटा प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 38.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं सिरोही में न्यूनतम तापमान 17.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जिससे वहां अपेक्षाकृत ठंडक महसूस की गई। अन्य प्रमुख शहरों में भी तापमान सामान्य से नीचे दर्ज किया गया, जिसमें जयपुर, अजमेर, बीकानेर, जोधपुर और उदयपुर जैसे शहर शामिल हैं। अगले 48 घंटे अहम मौसम केंद्र जयपुर के अनुसार 28 से 30 मार्च के बीच एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहेगा। इसके प्रभाव से राज्य के कई हिस्सों में आंधी और बारिश की संभावना है। मौसम विभाग के अनुमानों के अनुसार 28 मार्च को  जोधपुर, बीकानेर संभाग और शेखावाटी क्षेत्र में दोपहर बाद आंधी और हल्की बारिश हो सकती है। वहीं 29 से 30 मार्च तक जोधपुर, बीकानेर, अजमेर, जयपुर, भरतपुर, उदयपुर और कोटा संभाग में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं। राहत और चुनौती साथ-साथ मौसम में आई इस नरमी ने जहां गर्मी से राहत दी है, वहीं किसानों के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण बन गया है। आने वाले दिनों में मौसम का रुख फसलों की स्थिति तय करेगा।

दुनिया के सामने आई सच्चाई: भारत के दुश्मनों को पनाह देता पाकिस्तान

इस्लामाबाद पाकिस्तान अभी भी भारत के खिलाफ सक्रिय आतंकवादी समूहों का गढ़ बना हुआ है। अमेरिकी कांग्रेस रिसर्च सर्विस (CRS) की हालिया रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि पाकिस्तान में कई प्रमुख आतंकवादी संगठन सक्रिय हैं, जो जम्मू-कश्मीर और भारत पर केंद्रित हैं। इस रिपोर्ट में एक परेशान करने वाला संदेश है- भारत, विशेषकर केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर को निशाना बनाने वाले आतंकी संगठन पाकिस्तानी धरती से बेखौफ और बिना किसी रोक-टोक के अपनी गतिविधियां चला रहे हैं। 25 मार्च को जारी CRS की 'इन फोकस' रिपोर्ट में 15 आतंकी संगठनों का विस्तार से वर्णन किया गया है। इनमें से कई गुटों को अमेरिका द्वारा 'विदेशी आतंकवादी संगठन' (FTO) घोषित किया जा चुका है। रिपोर्ट में 'भारत और कश्मीर-केंद्रित आतंकी समूहों' से लगातार बने हुए खतरों की ओर इशारा किया गया है। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं-     लश्कर-ए-तैयबा (LeT)     जैश-ए-मोहम्मद (JeM)     हरकत-उल जिहाद इस्लामी (HUJI)     हरकत उल-मुजाहिदीन (HuM)     हिज्बुल मुजाहिदीन (HM) प्रमुख आतंकी संगठनों की स्थिति लश्कर-ए-तैयबा (LeT): 1980 के दशक के अंत में बने इस संगठन को 2001 में FTO घोषित किया गया था। यह अभी भी पाकिस्तान के पंजाब और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थित है। रिपोर्ट के अनुसार, 'वर्तमान में जेल में बंद हाफिज सईद के नेतृत्व वाले इस गुट ने प्रतिबंधों से बचने के लिए अपना नाम बदलकर 'जमात-उद-दावा' कर लिया है।' इसके पास 'कई हजार लड़ाके' हैं और इसी संगठन ने 2008 के मुंबई हमलों की साजिश रची थी, जिसमें 166 लोग मारे गए थे। जैश-ए-मोहम्मद (JeM): साल 2000 में मसूद अजहर द्वारा स्थापित इस गुट को भी 2001 में FTO घोषित किया गया था। इसने 2001 के भारतीय संसद हमले में लश्कर का साथ दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, जैश के पास लगभग 500 हथियारबंद आतंकी हैं जो भारत, अफगानिस्तान और पाकिस्तान में काम करते हैं। इस संगठन का मुख्य उद्देश्य भारतीय केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान में 'मिलाना' है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 'जैश ने खुले तौर पर अमेरिका के खिलाफ युद्ध की घोषणा की हुई है।' हिज्बुल मुजाहिदीन (HM): 1989 में बने इस कश्मीर-केंद्रित समूह को 2017 में अमेरिका ने आतंकी संगठन घोषित किया था। इसके पास लगभग 1500 कैडर (आतंकी) हैं जो 'कश्मीर की आजादी या जम्मू-कश्मीर के पाकिस्तान में विलय' की मांग करते हैं। ये समूह अल-कायदा और भारतीय उपमहाद्वीप में इसके सहयोगी संगठन (AQIS) जैसे वैश्विक संगठनों के साथ मिलकर काम करते हैं। पाकिस्तान की विफलता और मदरसों की भूमिका रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि पाकिस्तान आतंकी गुटों को खत्म करने में नाकाम रहा है। हवाई हमलों और लाखों 'खुफिया-आधारित ऑपरेशनों' सहित कई बड़े सैन्य अभियान, अमेरिकी और संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित इन आतंकवादी समूहों को हराने में विफल रहे हैं। 2014 के 'नेशनल एक्शन प्लान' का उद्देश्य भी इन गुटों को खत्म करना था, लेकिन ये आज भी मौजूद हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, पाकिस्तान ने 2023 में आतंकवादी गतिविधियों को रोकने के लिए "कुछ कदम" उठाए थे, लेकिन वहां के मदरसे अभी भी ऐसे सिद्धांत पढ़ा रहे हैं जो "हिंसक चरमपंथी विचारधारा को बढ़ावा" दे सकते हैं। पीड़ित भी और समर्थक भी: पाकिस्तान का दोहरा चरित्र दक्षिण एशिया विशेषज्ञ के. एलन क्रोनस्टेड द्वारा तैयार की गई यह CRS रिपोर्ट पाकिस्तान को 'पीड़ित और समर्थक' दोनों के रूप में चित्रित करती है। एक तरफ जहां इस्लामाबाद खुद घरेलू हिंसा (अशांत बलूचिस्तान प्रांत में अलगाववाद और खैबर पख्तूनख्वा में बिगड़ते हालात) से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ यह उन आतंकी नेटवर्कों की मेजबानी कर रहा है जो लंबे समय से भारत को निशाना बनाते आए हैं। रिपोर्ट में पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी और अन्य गुटों को पांच व्यापक, और अक्सर आपस में जुड़े हुए, वर्गों में बांटा गया है।     वैश्विक स्तर पर सक्रिय     अफगानिस्तान-केंद्रित     भारत और कश्मीर-केंद्रित     घरेलू स्तर पर सक्रिय     सांप्रदायिक (शिया-विरोधी) भारत का रुख पाकिस्तान की इन गुटों को पूरी तरह से खत्म करने में अक्षमता या अनिच्छा के कारण पड़ोसियों के साथ उसका तनाव बना हुआ है। भारत लगातार इस बात पर कायम है कि स्थायी शांति के लिए सीमा पार आतंकवाद पर लगाम लगाना बेहद जरूरी है। पाकिस्तानी धरती पर मौजूद आतंकी ढांचे के बारे में अमेरिका के इस ताज़ा आकलन ने भारत के इस रुख को और मजबूती दी है।  

एशिया के मैनचेस्टर में कच्चे माल की भारी किल्लत के साथ ही रेड सी रूट महंगा होने से करोड़ों के ऑर्डर अटके

राजस्थान राजस्थान की कपड़ा नगरी भीलवाड़ा, जिसे एशिया का मैनचेस्टर कहा जाता है, इन दिनों गंभीर संकट से जूझ रही है. ईरान-इजरायल युद्ध का सीधा असर यहां की करीब 80 से 90 हजार करोड़ की टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर दिखने लगा है. करीब 100 साल पुरानी इस इंडस्ट्री में पहली बार इतने खराब हालात बने हैं. उद्योगपतियों के पास अब सिर्फ एक से दो सप्ताह का कच्चा माल ही बचा है, जिससे उत्पादन पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है. महंगा हुआ कच्चा माल, बढ़ी उत्पादन लागत भीलवाड़ा में करीब 400 वीविंग यूनिट्स और 18 स्पिनिंग मिल्स हैं, जहां हर साल लगभग 125 करोड़ मीटर कपड़ा तैयार होता है. यहां का सालाना कारोबार करीब 25 हजार करोड़ रुपये का है. लेकिन युद्ध के कारण पॉलिएस्टर फाइबर, केमिकल और गैस की सप्लाई बाधित हो गई है. रेड सी रूट महंगा होने से कंटेनर फ्रेट 2 से 2.5 गुना तक बढ़ गया है, जिससे यार्न की कीमतें 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं. कपड़े की लागत प्रति मीटर 12 से 14 रुपये तक बढ़ चुकी है. गैस संकट से प्रोसेस हाउस ठप होने की कगार पर भीलवाड़ा सहित पाली, बालोतरा और बाड़मेर के प्रोसेस हाउस गैस की कमी से बुरी तरह प्रभावित हैं. एक प्रोसेस हाउस में रोजाना करीब 250 किलो गैस की जरूरत होती है, जबकि कुल खपत 3 लाख किलो प्रतिदिन है. गैस की कमी के चलते 25 से ज्यादा प्रोसेस हाउस का काम लगभग ठप हो चुका है और आगे 80 प्रतिशत वीविंग यूनिट्स बंद होने का खतरा है. निर्यात पर भी पड़ा असर, हजारों करोड़ के ऑर्डर अटके मिडिल ईस्ट और यूरोप में निर्यात पर भी युद्ध का असर साफ दिख रहा है. करीब 5 हजार करोड़ रुपये के ऑर्डर अटक गए हैं, जबकि 800 से 1000 करोड़ रुपये का कारोबार पहले ही प्रभावित हो चुका है. हर साल अप्रैल से जून के बीच 5 से 6 करोड़ मीटर कपड़ा मिडिल ईस्ट भेजा जाता है, जो अब संकट में है. वहीं भेजे गए माल का भुगतान भी अटका हुआ है. लाखों लोगों की रोजी-रोटी पर खतरा राजस्थान में 1800 से अधिक टेक्सटाइल यूनिट्स में करीब 18 से 20 लाख लोग काम करते हैं. भीलवाड़ा की 100 से ज्यादा यूनिट्स अब शिफ्ट कम करने की तैयारी में हैं. अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो बड़े पैमाने पर रोजगार पर असर पड़ सकता है.

ग्रीन एनेस्थीसिया: सिम्स में इलाज के साथ पर्यावरण संरक्षण की नई पहल

रायपुर छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर में स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देते हुए “ग्रीन एनेस्थीसिया” की पहल की जा रही है। इस पहल के तहत मरीजों को सुरक्षित उपचार प्रदान करने के साथ-साथ पर्यावरण और चिकित्सकों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ऑपरेशन थिएटर में उपयोग होने वाली एनेस्थीसिया गैसों के दुष्प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से सिम्स द्वारा आधुनिक और पर्यावरण हितैषी तकनीकों को अपनाया जा रहा है। एनेस्थीसिया गैसें: पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा सर्जरी के दौरान उपयोग की जाने वाली गैसें, जैसे डेसफ्लुरेन और नाइट्रस ऑक्साइड, ग्रीनहाउस गैसों के रूप में जानी जाती हैं। इनका प्रभाव कार्बन डाइऑक्साइड से कई गुना अधिक होता है और ये लंबे समय तक वातावरण में बनी रहती हैं। हर वर्ष बड़ी संख्या में होने वाली सर्जरी से निकलने वाली ये गैसें ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। चिकित्सकों पर भी पड़ता है प्रभाव एनेस्थीसिया का प्रभाव केवल मरीज तक सीमित नहीं रहता। जहां एक मरीज को ऑपरेशन के दौरान एक बार एनेस्थीसिया दिया जाता है, वहीं एनेस्थीसिया विशेषज्ञ चिकित्सक दिनभर में 10 से 12 घंटे तक लगातार कई मरीजों को एनेस्थीसिया प्रदान करते हैं। इस दौरान वे बार-बार इन गैसों के संपर्क में आते हैं, जिससे लंबे समय में उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना रहती है। ऐसे में ग्रीन एनेस्थीसिया चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। क्या है ग्रीन एनेस्थीसिया ग्रीन एनेस्थीसिया एक ऐसी पद्धति है, जिसमें मरीज को सुरक्षित बेहोशी देने के साथ-साथ पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को कम किया जाता है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनाना है। सिम्स में अपनाए जा रहे प्रमुख उपाय सिम्स में इस दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं— टी.आई.वी.ए. (Total Intravenous Anesthesia) इस तकनीक में प्रोपोफोल, मिडाज़ोलम आदि दवाओं को इंट्रावेनस (रक्त शिरा द्वारा) दिया जाता है, जो बेहद प्रभावी एवं सुरक्षित माना जाता है। इससे गैसों के उपयोग में कमी आती है और पर्यावरण पर दुष्प्रभाव भी कम होता है। लो फ्लो एनेस्थीसिया तकनीक कम मात्रा में गैस देकर भी सुरक्षित एनेस्थीसिया दिया जाता है, जिससे गैस की खपत और प्रदूषण दोनों में कमी आती है। आधुनिक उपकरणों का उपयोग नई तकनीकों के माध्यम से गैस लीकेज को नियंत्रित कर ऑपरेशन थिएटर के बाहर प्रदूषण को कम किया जा रहा है। किफायती और प्रभावी प्रणाली यह पद्धति पर्यावरण के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी लाभकारी (Cost Effective) साबित हो रही है। निश्चेतना में उपयोग होने वाली गैसों का अत्यधिक प्रयोग ग्लोबल वार्मिंग और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। ग्रीन एनेस्थीसिया के माध्यम से इन दुष्प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सिम्स इस दिशा में निरंतर प्रयासरत है। ग्रीन एनेस्थीसिया सिम्स की एक सराहनीय और दूरदर्शी पहल है, जो यह दर्शाती है कि बेहतर इलाज के साथ पर्यावरण और मानव दोनों की सुरक्षा संभव है। यह प्रयास भविष्य में अन्य चिकित्सा संस्थानों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा।