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टॉक्सिक में यश के साथ कियारा की जोड़ी, डायरेक्टर ने बताया क्यों किया गया चुनाव

मुंबई  बॉलीवुड एक्ट्रेस कियारा आडवाणी इन दिनों टॉक ऑफ द टाउन बन चुकी हैं. हाल ही में एक इवेंट के दौरान उनका नया लुक वायरल हुआ है. कियारा अपनी बेटी सरायाह मल्होत्रा की मां बनने के बाद, एक बार फिर छा गई हैं. एक्ट्रेस जल्द 'टॉक्सिक' से भी बड़े पर्दे पर नजर आने वाली हैं, जिसमें वो 'केजीएफ' वाले यश संग रोमांस करेंगी।  कियारा ने पहली बार एक कन्नड़ फिल्म में काम किया है, जो इंग्लिश में भी साथ शूट हुई है. ये एक पैन-इंडिया फिल्म है जो देशभर में अलग-अलग भाषाओं में रिलीज होगी. कियारा को भी इस फिल्म से काफी फायदा मिलने वाला है. हाल ही में 'टॉक्सिक' की डायरेक्टर गीतू मोहनदास ने अपनी फिल्म में एक्ट्रेस को कास्ट करने पर बात की।  कियारा में क्या है खासियत? गीतू मोहनदास ने गलाटा प्लस को बताया कि कियारा उनकी फिल्म के लिए पहली और आखिरी पसंद थीं. उन्हें एक्ट्रेस की स्क्रीन प्रेजेंस काफी लुभाती है. कियारा बड़े पर्दे पर उन्हें एक इंसान का एहसास दिलाती हैं. गीतू का कहना है, 'कियारा ने जो किरदार निभाया है नादिया, वो एक साथ नाजुक और बहुत ताकतवर दोनों का एहसास लेकर चलती है. इसलिए शुरू से ही वो मेरी पहली और आखिरी पसंद थीं. उनकी जो स्क्रीन प्रेजेंस है, वो मुझे बहुत इंसानी और सच्ची लगती है. कभी-कभी सिनेमा लॉजिक से नहीं, बल्कि बस एक फीलिंग से शुरू होता है. और कियारा को कास्ट करना ठीक वैसी ही फीलिंग थी।  गीतू ने आगे कियारा के डेडिकेशन को भी सराहा. उनका कहना है कि एक्ट्रेस अपने किरदार में काफी पहले ढल जाती थीं, जो तारीफ के काबिल बात है. डायरेक्टर ने कहा, 'उनकी मेहनत सिर्फ दिखावा नहीं होती थी. वो शांत, डिसिप्लिन और दिल से सच्ची हैं. वो सिर्फ डायरेक्शन को नहीं सुनती थीं, बल्कि किरदार के इमोशन्स को बनाने में खुद भी साथ देती थीं. कैमरा शुरू होने से बहुत पहले ही वो उस किरदार के साथ अपने मन में रह चुकी होती हैं. लेकिन जो चीज उन्हें सबसे अलग बनाती है, वो है उनकी सीखने की चाह. उसकी वजह से फिल्म बनाना एक तरफा डायरेक्शन नहीं, बल्कि दोनों तरफ की बातचीत जैसा हो जाता है।  फिल्म 'टॉक्सिक' में कियारा के अलावा हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया, नयनतारा और रुक्मिणी वसंत जैसी एक्ट्रेसेज भी शामिल हैं. ये फिल्म 4 जून 2026 को वर्ल्डवाइड थिएटर्स में रिलीज होने वाली है। 

श्रीधाम एक्सप्रेस को एलएचबी रैक से मिलेगा नया रिवamp, स्पीड बढ़ने के साथ यात्रियों को मिलेगी और सुविधा

जबलपुर  जबलपुर-हजरत निजामुद्दीन के बीच संचालित होने वाली श्रीधाम एक्सप्रेस की यात्रा जल्द ही और आरामदायक बनेगी। ट्रेन को 30 मई से लिंक हाफमैन बुश (एलएचबी) रैक से दौड़ाने का निर्णय किया गया है। एलएचबी कोच पारंपरिक (आईसीएफ) कोचों की तुलना में अधिक सुविधाजनक एवं सुरक्षित होते हैं। ये वजन में भी हल्के होते हैं। उच्च गति पर संचालन की क्षमता होती है। एलएचबी कोच की नई संरचना और स्वरूप यात्रियों को अधिक सुखद और सुविधाजनक यात्रा अनुभव प्रदान करते हैं। नए रेक से ट्रेन की गति औसतन 20 किलोमीटर प्रतिघंटा तक बढ़ेगी। चाल में वृद्धि की संभावना को ध्यान में रखकर ट्रेन को दिल्ली पहुंचाने की भी मंशा है। दिल्ली पहुंचाने में लेती है सबसे ज्यादा समय जबलपुर-हजरत निजामुद्दीन के बीच एक साप्ताहिक और चार ट्रेन प्रतिदिन संचालित होती हैं। इनमें दिल्ली पहुंचाने में सबसे ज्यादा समय (लगभग 18.30 घंटा) श्रीधाम एक्सप्रेस लेती है। यह ट्रेन इटारसी-भोपाल-बीना के रास्ते संचालित होने के कारण कटनी-सागर-बीना मार्ग के अपेक्षाकृत लगभग 130 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करती है। जबलपुर से दिल्ली के बीच सीधे चलने वाली अन्य ट्रेनों के अपेक्षाकृत यात्रा में औसतन साढ़े पांच से साढ़े छह घंटे का अतिरिक्त समय लगाती है। जिसके चलते ट्रेन दोपहर में दिल्ली पहुंचती है। सुपरफास्ट धीमी चाल यात्रियों को परेशान करती है। अब 22 कोच होंगे, स्लीपर के दो कोच घटेंगे श्रीधाम एक्सप्रेस (12192/91) का संचालन पश्चिम मध्य रेल करता है। वर्तमान में ट्रेन का 24 कोच का आइसीएफ रैक है। इसे एलएचबी रैक से परिवर्तित करने के साथ ही ट्रेन का कोच कांबिनेशन बदल जाएगा। थर्ड एसी के एक कोच की एसी इकोनामी कोच लेगा। दो स्लीपर कोच भी कम होंगे। 22 कोच के एलएचबी रेक में एक वातानुकूलित प्रथम श्रेणी, दो वातानुकूलित द्वितीय, पांच वातानुकूलित तृतीय, एक वातानुकूलित तृतीय इकोनॉमी, सात स्लीपर, चार सामान्य श्रेणी के कोच, एक एसएलआरडी एवं एक जनरेटर कार रहेंगे।

1 अप्रैल से लागू होगा नया नियम, डिजिटल पेमेंट के लिए करना होगा यह काम

मुंबई  मॉल या स्थानीय दुकान पर बहुत से लोग पेमेंट करने के लिए डिजिटल ट्रांजैक्शन या UPI का सहारा लेते हैं. अब डिजिटल ट्रांजैक्शन को लेकर एक नियम बदलने जा रहा है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आदेश के बाद बैंकों को टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) लागू करना होगा. सितंबर 2025 में जारी किए गए आदेश में 1 अप्रैल 2026 डेडलाइन लगी रखी है।  1 अप्रैल 2026 के बाद से ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के लिए सिर्फ एक वन टाइम पासवर्ड (OTP) पर निर्भर रहना काफी नहीं होगा. सभी ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के लिए कम से कम दो अलग और इंडिपेंडेंट वेरिफिकेशन फैक्टर से वेरिफाई करना होगा. क्रेडिट कार्ड में पहले से टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन पहले से लागू है. ये जानकारी मीडिया रिपोर्ट से मिली है।  ये होंगे ऑथेंटिकेशन के तरीके      पर्सनल आइडेंटिफिकेशन नंबर (PIN)     बायोमेट्रिक जैसे फिंगरप्रिंट या फेस रिकग्निशन     बैंकिंग ऐप के अंदर जनरेट होने वाले वर्चुअल टोकन     SMS आधारित OTP  इन्हें उदाहरण के रूप में समझें तो पेमेंट के लिए दो काम करने पड़ेंगे.     OTP + PIN (स्टैटिक)     बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन + डिवाइस बाइंडिंग     टोकन आधारित ऑथेंटिकेशन + पासवर्ड जैसे किसी दुकान से सामान खरीदा और पेमेंट के लिए उसको अपना डेबिट कार्ड दिया. इसके बाद जैसे ही सेल्स पर्सन पॉइंट ऑफ सेल (POS) से स्वाइप करेगा, उसके बाद यूजर्स को पिन एंटर करने के साथ अब OTP भी देना होगा. अब ऑनलाइन ट्रांजैक्शन को दो तरह से ऑथेंटिकेट करना होगा।  अब 1 अप्रैल के बाद से हर एक ट्रांजैक्शन के लिए कम से कम दो तरीकों से ऑथेंटिकेट करना होगा. ऐसे में साइबर साइबर ठगों पर लगाम लगेगी और अनऑथराइज्ड ट्रांजैक्शन पर लगाम लगेगी।  साइबर ठगों पर लगाम लगाने की कोशिश  साइबर ठगी के ऐसे बहुत से केस हैं, जहां विक्टिम के पर्सनल मोबाइल पर आने वाले बैंक ओटीपी को साइबर ठगों ने चालाकी से हासिल कर लिया. फिर उनके बैंक खाते को खाली कर डाला. फिशिंग स्कैम, सिम स्कैम और बहुत से स्कैम हाल के दिनों में बढ़े हैं।  इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन पर भी लागू होगा नियम RBI के दिशा-निर्देश में यह  साफ किया गया है कि 1 अक्टूबर 2026 तक इंटरनेशनल कार्ड-नॉट-प्रेजेंट ट्रांजैक्शन पर भी इसी तरह के ऑथेंटिकेशन नियम लागू किए जाएंगे। 

MP वित्त विभाग की नई गाइडलाइन: बाबू और अफसर को 10 दिन में फाइलें निपटाने का आदेश

भोपाल  मुख्यमंत्री और मंत्रियों द्वारा समय-समय पर जो घोषणाएं की जाती हैं या मुख्यमंत्री या मुख्य सचिव मानिट (समयसीमा) के जो मामले होते हैं, उन सभी से जुड़ी फाइलें वित्त विभाग में कोई भी अधिकारी एक समयसीमा से अधिक रोककर नहीं रख सकेगा। अधिकतम दस दिनों में फाइलों का निपटारा करके आगे बढ़ानी होंगी। इसके लिए वित्त विभाग ने अपने अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए मार्गदर्शिका तैयार की है। इसमें सबके दायित्व को स्पष्ट किया गया है ताकि किसी भी स्तर पर कोई असमंजस की स्थिति ना रहे। विभागीय अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री, सांसद, विधायक, केंद्रीय मंत्री सहित विशेष व्यक्तियों से प्राप्त होने वाले पत्रों को तुरंत कार्रवाई करना होगा। इसका रिकॉर्ड भी तैयार किया जाएगा। कैबिनेट की बैठक में रखे जाने वाले विषयों की संक्षेपिका तैयार करना, विभागीय अभिमत समय पर देना, विभिन्न आयोगों से प्राप्त होने वाले प्रतिवेदन व अनुशंसाओं पर कार्रवाई सुनिश्चित करने, समितियों की बैठक समय पर संपन्न करवाना, अवकाश, पेंशन, सामान्य भविष्य निधि से जुड़े मामलों का समयावधि में प्रस्तुतीकरण सुनिश्चित करवाना अपर सचिव और उपसचिव का दायित्व होगा। इसके साथ ही फाइलों के निपटारे की समय सीमा भी स्पष्ट कर दी गई है। इसमें मंत्री परिषद को भेजे जाने वाले प्रकरण, नई योजना के करणप्रकरण में 10 दिन, चिकित्सा की प्रतिपूर्ति के मामलों में अधिकतम पांच दिन, बजट राशि से संबंधित प्रतिबंध में पांच दिन, आहरण सीमा बीस प्रतिशत की कटौती, विदेश यात्रा की अनुमति की फाइल पांच दिन, मंत्री से जुड़ी नस्ती और अनुपूरक बजट के प्रस्ताव की फाइल को तीन दिन में आगे बढ़ाना होगा। मनमाना पर्यवेक्षण शुल्क नहीं ले सकेंगे वहीं, वित्त विभाग में निर्माण कार्यों पर लिए जाने वाले पर्यवेक्षण शुल्क को लेकर भी नई व्यवस्था बना दी है, जो एक अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी। 10 करोड़ रुपये से कम लागत वाले निर्माण कार्य की एजेंसी विभाग है तो तकनीकी स्वीकृति पर पर्यवेक्षण शुल्क शून्य रहेगा। जबकि, निर्माण एजेंसी शासन की कोई संस्था है तो यह एक प्रतिशत रहेगा। 10 करोड रुपये से अधिक के निर्माण कार्य में एजेंसी शासन होने पर पर्यवेक्षण शुल्क तीन प्रतिशत और अन्य संस्था होने पर छह प्रतिशत की दर से लिया जाएगा।

एमपी में सख्त कार्रवाई का दौर, 8 कलेक्टर और 7 एसपी निलंबित, सीएम ने लापरवाह अफसरों पर की कार्रवाई

भोपाल  मुख्यमंत्री मोहन यादव की सख्त प्रशासनिक शैली के चलते सवा दो साल में आठ कलेक्टर और सात एसपी को पद से हटाया। उनकी कार्रवाई का में तीन बड़े फैक्टर उभरकर सामने आए हैं। इसमें कानून-व्यवस्था में चूक, भ्रष्टाचार/रिश्वत और प्रशासनिक लापरवाही शामिल हैं। प्रशासनिक लापरवाही सीएम को बिलकुल पसंद नहीं है, इसलिए ऐसे अफसरों पर तुरंत कार्रवाई की गई। यहीं नहीं सीएम ने जनता से बदसलूकी, भ्रष्टाचार के मामले सामने आते ही तुरंत एक्शन लिया है। इसके माध्यम से सीएम ने कड़ा संदेश देने की कोशिश की हैं।  प्रशासनिक ढिलाई पर सख्त एक्शन के कुछ मामले मुख्यमंत्री के एक्शन के सबसे ज्यादा मामले ऐसे रहे, जहां प्रशासनिक लापरवाही या जिम्मेदारी निभाने में ढिलाई सामने आई। हाल ही में सीधी कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी पर दफ्तर में नियमित नहीं बैठने और जनसमस्याओं की अनदेखी के आरोप लगे, जिसके बाद उन्हें हटा दिया गया।  वहीं, अगस्त 2024 में सागर दीवार हादसे में 9 बच्चे की मौत के बाद कलेक्टर दीपक आर्य, एसपी अभिषेक तिवारी और एसडीएम संदीप सिंह को हटाया गया। जनवरी 2026 में इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी कांड में निगमायुक्त दिलीप यादव और अपर आयुक्त रोहित सोनिया को हटाया गया। दिसंबर 2023 गुना बस हादसे में 13 लोगों की मौत के बाद कलेक्टर तरुण राठी, एसपी विजय कुमार खत्री और परिवहन आयुक्त संजय कुमार झा पर कार्रवाई हुई। दिसंबर 2023 में ही हरदा पटाखा फैक्ट्री ब्लॉस्ट मामले में एसपी संजीव कुमार कंचन और कलेक्टर ऋषि गर्ग को हटाया गया। उक्त  मामलों से पता चलता है कि लापरवाही से जुड़ी घटनाओं और मामलों में मोहन सरकार ने सबसे अधिक कड़ा रुख अपनाया और कार्रवाई की। जिन मामलों में जनहानि हुई, उनमें तो संबंधित अधिकारियों को बिलकुल नहीं बख्शा गया।  हिंसा होने या कानून-व्यवस्था बिगड़ने पर भी नपे राज्य में जिन मामलों में कानून-व्यवस्था बिगड़ी या हिंसक घटनाएं हुईं, वहां सबसे तेज और कड़ी कार्रवाई देखने को मिली। मार्च 2025 में मऊगंज के गड़रा हत्याकांड विवाद के दौरान युवक सनी द्विवेदी की हत्या और पुलिस टीम पर हमले में एएसआई रामगोविंद गौतम की मौत के बाद कलेक्टर अजय श्रीवास्तव और एसपी रसना ठाकुर को हटा दिया गया। इसी तरह जून 2024 में सिवनी में 50 से अधिक गोवंश की हत्या के बाद तनावपूर्ण हालात बने। इसके बाद कलेक्टर क्षितिज सिंघल और एसपी राकेश कुमार सिंह पर भी कार्रवाई हुई। इससे साफ है कि जहां भी कानून व्यवस्था बिगड़ी और जनसभावनाएं प्रभावित हुई, वहां सीधे शीर्ष अधिकारियों पर गाज गिरी।   भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की झलक दिखी भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में भी सरकार का रुख सबसे सख्त नजर आया है, जहां सीधे अधिकारियों को हटाने की कार्रवाई की गई। इसी माह गुना के हवाला रिश्वत कांड में गुजरात के व्यापारी से एक करोड़ रुपये जब्त करने के बाद 20 लाख रुपये लेकर छोड़ देने के आरोप में एसपी अंकित सोनी को हटा दिया गया। वहीं, थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मी भी सस्पेंड हुए। जनवरी 2026 अशोकनगर के आनंदपुर साहिब ट्रस्ट मामले में रिश्वत के आरोपों के चलते कलेक्टर आदित्य सिंह को पद से हटाया गया। यह कार्रवाई बिना किसी औपचारिक शिकायत के आधार पर की गई। भ्रष्टाचार के मामलों में सरकार ने बिना किसी जांच के त्वरित और कड़ा फैसला लिया। विवादित मामलों में भी अफसरों पर गाज गिरी प्रदेश में अधिकारियों के व्यवहार और व्यक्तिगत विवाद भी कार्रवाई के कारण बने और उन्हें पदों से हटाया गया। इससे पता चलता है कि सार्वजनिक व्यवहार और छवि भी अब प्रशासनिक जिम्मेदारी का हिस्सा मानी जा रही हैं। शाजापुर कलेक्टर किशोर कान्याल को उनकाे एक बैठक में ड्राइवर से औकात पूछने वाला वीडियो वायरल होने के बाद हटाया गया।  जून 2025 कटनी एसपी अभिजीत रंजन को सीएसपी और उनके परिवार की शिकायतों के बाद पुलिस मुख्यालय अटैच किया गया। भाजपा विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह से हुए सार्वजनिक विवाद के बाद सितंबर 2025 में भिंड कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव को हटा दिया गया। 

मां शारदा मंदिर मैहर: 9 दिनों में 10 लाख भक्तों ने किए दर्शन, चौथे दिन रही भीड़ सबसे ज्यादा

 मैहर चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर मां शारदा धाम में इस वर्ष आस्था का अभूतपूर्व जनसैलाब देखने को मिला। नवरात्रि के पहले दिन से लेकर महानवमी तक नौ दिनों में देशभर से लगभग 10 लाख श्रद्धालुओं ने माता के दरबार में शीश नवाकर आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर परिसर में भक्तों की सबसे ज्यादा भीड़ चौथे दिन रही।  किस दिन कितने भक्त मंदिर पहुंचे:      पहले दिन: करीब 90 हजार श्रद्धालु     दूसरे दिन: 85 हजार     तीसरे दिन: 1 लाख 30 हजार से अधिक     चौथे दिन: 1 लाख 53 हजार 505     पांचवें दिन: 1 लाख 35 हजार 991     छठे दिन: 78 हजार 838     सातवें दिन: 1 लाख 11 हजार 689     आठवें दिन: 92 हजार 324     नवमी (महानवमी): 97 हजार 202 नवरात्रि मेले के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। सुरक्षा के लिए  2 एडिशनल एसपी, 8 डीएसपी, 10 इंस्पेक्टर, 15 सब-इंस्पेक्टर और लगभग 560 पुलिस जवान पूरे मेला क्षेत्र में तैनात रहे। 125 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए और 2 ड्रोन के माध्यम से भीड़ और गतिविधियों पर निगरानी रखी गई। 16 कार्यपालिक मजिस्ट्रेट तैनात किए गए और कई मेडिकल टीमें सक्रिय रहीं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल उपचार की व्यवस्था हो सके। मंदिर में  19 से 27 मार्च तक वीआईपी दर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया, जिससे आम श्रद्धालुओं को बिना भेदभाव के दर्शन का अवसर मिल सका। 

iPhone 18 Pro और 18 Pro Max में मिलेगा ये खास फीचर, जानें पहली बार क्या होगा नया

मुंबई  Apple के आईफोन की पॉपुलैरिटी किसी से छिपी नहीं है. कंपनी अब iPhone 18 सीरीज को अनवील करेगी, जिसके बाद कंपनी iPhone 18 Pro और 18 Pro Max को भी लॉन्च करेगी. इसके लिए कंपनी हर साल सितंबर में इवेंट आयोजित करती है और इस बार सितंबर में लॉन्चिंग की उम्मीद है।  हाल ही के दिनों में iPhone 18 Pro और 18 Pro Max को लेकर ढेरों लीक्स और जानकारियां सामने आई हैं. हालांकि कंपनी की तरफ से किसी भी जानकारी की कोई ऑफिशियल जानकारी नहीं दी गई है।  iPhone 18 Pro सीरीज का डिजाइन  अपकमिंग iPhone सीरीज के डिजाइन लैंग्वेज में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं किया जाएगा. कंपनी आगे भी एल्युमिनियम फ्रेम का यूज करना जारी रखेगी. साथ ही कंपनी एक नया कलर वेरिएंट लॉन्च कर सकती है. अपकमिंग डिवाइस की थिकनेस 8.8mm तक पहंच सकती है।  डिस्प्ले की बात करें तो फ्रंट पर ऐपल डाइनैमिक आइलैंड को रिमूव करने की जगह उसका साइज घटाया जा सकता है. ऐसा करने से यूजर्स को ज्यादा बड़ा डिस्प्ले मिलेगा।  iPhone 18 Pro max में 6.9 इंच का OLED डिस्प्ले पैनल दिया जा सकता है, जिसके अंदर प्रो-मोसश सपोर्ट और 120hz का रिफ्रेश रेट्स मिलेगा।  A20 Pro चिपसेट का यूज किया जाएगा  ऐपल अपकमिंग आईफोन सीरीज में  A20 Pro चिपसेट का यूज करेगी, जिसको 2 नैनोमीटर (2nm) प्रोसेस पर तैयार किया जा सकता है. आने वाले डिवाइस में परफॉर्मेंस से लेकर बैटरी एफिसिएंसी को बेहतर किया जा सकता है।  मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आने वाले दिनों में लॉन्च होने वाले iPhone 18 Pro और 18 Pro Max में 5,100mAh से 5,200mAh तक की बैटरी का यूज किया जा सकता है।  बेहतर होगा कैमरा  iPhone 18 और 18 Pro सीरीज के अंदर लॉन्च होने वाले डिवाइस को लेकर बताया गया है कि इसके कैमरा सेंसर बेहतर होंगे.  मेन सेंसर में वेरिएबल अपर्चर को दिया जा सकता है, जिसमें ज्यादा बेहतर कंट्रोल भी मिलेगा. कंपनी सैमसंग द्वारा तैयार किए गए नए सेंसर टेक्नोलॉजी का यूज करेगी।  iPhone 18 Pro सीरीज कब होगी लॉन्च  iPhone 18 और iPhone 18 Pro सीरीज की लॉन्चिंग टाइम लाइन को लेकर अभी तक कंपनी ने कोई ऑफिशियल जानकारी शेयर नहीं की है. लेकिन हर साल की तरह ही इस साल भी कंपनी न्यू आईफोन सीरीज को सितंबर में लॉन्च कर सकती है।   

इंदौर के चौराहे पर 23 मीटर की ऊंचाई पर लटका 400 टन लोहा, इंजीनियरिंग की अनोखी मिसाल

इंदौर   इंदौर के लवकुश चौराहे पर बन रहे डबल डेकर फ्लाईओवर के निर्माण में एक अहम उपलब्धि हासिल की गई है। यहां शहर की सबसे लंबी 65 मीटर की स्टील गर्डर को सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है। करीब 400 टन वजनी इस विशाल गर्डर को जमीन से 23 मीटर ऊंचाई पर लगाने की जटिल प्रक्रिया करीब 12 घंटे तक चली। इस गर्डर के जुड़ने से शहर में यातायात को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।  तीन विंच मशीनों की मदद से पूरा हुआ चुनौतीपूर्ण काम लवकुश चौराहे पर बो स्ट्रिंग स्पान के निर्माण के दौरान इस भारी गर्डर को हवा में ही जोड़ा गया। इसे सही जगह तक लाने के लिए तीन विंच मशीनों का इस्तेमाल किया गया। इनमें से दो मशीनों से गर्डर को आगे की ओर खींचा गया, जबकि एक मशीन को पीछे से संतुलन बनाए रखने और रोकने के लिए लगाया गया था। अब जैक पुश तकनीक के जरिए इसे दूसरी तरफ के बो स्ट्रिंग स्पान पर ले जाने की तैयारी की जा रही है। पहली गर्डर का काम पूरा होने के बाद अब दूसरी स्टील गर्डर के निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इंदौर विकास प्राधिकरण बना रहा भव्य फ्लाईओवर इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा लवकुश चौराहे पर कुल 1452 मीटर लंबा डबल डेकर फ्लाईओवर बनाया जा रहा है। इस परियोजना में 19 सेगमेंटल स्पान, 4 कंपोजिट गर्डर स्पान और एक खास बो स्ट्रिंग स्पान शामिल है। जिस बो स्ट्रिंग स्पान पर यह गर्डर रखी गई है, उसकी लंबाई 65 मीटर है और यहां ऐसी दो स्टील गर्डर लगाई जानी हैं। पहली गर्डर का निर्माण कार्य पूरा कर उसे तय स्थान पर स्थापित कर दिया गया है। रात भर चली गर्डर लगाने की प्रक्रिया गर्डर को स्थापित करने की प्रक्रिया गुरुवार रात 11 बजे शुरू हुई, जो शुक्रवार सुबह 11 बजे पूरी हुई। गर्डर को खींचकर सही जगह तक लाने में ही करीब 5 घंटे लगे। पुलिंग शुरू करने से पहले गर्डर को रीले पर चढ़ाया गया और उसके संतुलन की पूरी जांच की गई। सुरक्षा के लिहाज से इस दौरान नीचे से गुजरने वाले यातायात को पूरी तरह बंद कर दिया गया, ताकि कोई हादसा न हो। शहर का सबसे ऊंचा फ्लाईओवर पॉइंट बना आकर्षण यह 400 टन वजनी गर्डर जिस बो स्ट्रिंग पर रखी गई है, उसकी ऊंचाई 23 मीटर है, जो इंदौर के सभी फ्लाईओवर में सबसे ज्यादा है। इस फ्लाईओवर की खास बात यह है कि इसके नीचे से मेट्रो और एक अन्य फ्लाईओवर गुजर रहा है। इसी वजह से गर्डर को ऊंचाई पर ही जोड़ना पड़ा। इस जटिल काम के लिए 900 टन की कुल क्षमता वाली दो क्रेन का इस्तेमाल किया गया, जिसमें एक 600 टन और दूसरी 300 टन की क्रेन शामिल थी। इन्हीं क्रेन की मदद से भारी एंगल और निर्माण सामग्री को 23 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचाया गया। 

8वें वेतन आयोग का बड़ा ऐलान: कब होगा लागू, सैलरी में कितनी बढ़ेगी वृद्धि?

 नई दिल्‍ली 8वें वेतन आयोग को लेकर सरकार ने एक बड़ा अपडेट जारी किया है. लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए सरकार ने 8वें वेतन आयोग को लेकर कुछ स्‍पष्‍टता दी है, लेकिन अभी पूरी जानकारी उपलब्‍ध नहीं है. संसद में सरकार ने बताया है कि कबतक आठवां वेतन आयोग लागू हो सकता है।  वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि सरकार ने 3 नवंबर, 2025 को औपचारिक रूप से 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की स्थापना की. उन्होंने आगे कहा कि आयोग को केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों की सैलरी, भत्ते और पेंशन पर अपनी सिफारिशें रिपोर्ट पेश करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है।  उन्‍होंने 8वें वेतन आयोग कब लागू होगा? सवाल का जवाब देते हुए कहा कि यह तभी पता चल पाएगा, जब रिपोर्ट पेश की जाएगी और उसे एक्‍सेप्‍ट किया जाएगा. इसके बाद तय हो सकेगा कि इस आयोग को कब से लागू किया जाए? खैर अभी आयोग इसपर रिपोर्ट तैयार कर रहा है।  8वें वेतन आयोग पर फीडबैक  जानकारी के मुताबिक, 8वें वेतन आयोग को लेकर आयोग एक तरह से काम नहीं कर रहा है. यह अलग-अलग कैटेगरी से एक्टिव तरीके से सुझाव पाने की कोशिश कर रहा है. माईगॉव पोर्टल पर 18 तरह के सवाल अपलोड किए गए हैं. मंत्रालयों, विभागों, राज्य सरकारों, कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, यूनियनों, शिक्षाविदों और यहां तक ​​कि लोगों से भी फीडबैक मांगा गया है. फीडबैक देने का लास्‍ट डेट 31 मार्च 2026 है और सिर्फ ऑनलाइन तरीके से ही फीडबैक लिया जाएगा।  कब होगा सैलरी में इजाफा?  सैलरी को लेकर कहा गया है कि 8वां वेतन आयोग लागू होने में भले ही देरी हो जाए, लेकिन 1 जनवरी 2026 से ही इसे प्रभावी माना जाएगा. हालांकि कर्मचारियों तक इसका लाभ पहुंचने में ज्‍यादा समय लग सकता है. जेनजेडसीएफओ के संस्थापक सीए मनीष मिश्रा ने संभावित देरी की वजह बताई है।  उनका कहना है कि यह सच है कि कागजों पर 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होने वाला है, लेकिन व्यवहार में बढ़ी हुई सैलरी संभवतः कर्मचारियों के बैंक खातों में 2026 के अंत तक या वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान ही पहुंचेगी, ठीक वैसे ही जैसे पिछले वेतन आयोगों के बाद देरी हुई थी।  कर्मचारियों को मिलेगी बकाया राशि  उन्‍होंने यह भी बताया कि 8वें वेतन आयो के तहत बकाया भुगतान की भी संभावना है. संशोधित वेतन का भुगतान भले ही बाद में किया जाएग, लेकिन इसका कैलकुलेशन 1 जनवरी 2026 से की जाएगी. इसी दिन 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल समाप्‍त हो रहा है।  कितनी बढ़ जाएगी सैलरी?  वेतन बढ़ोतरी की बात करें तो अभी तक कोई अधिकारिक जानकारी इसे लेकर नहीं आई है, लेकिन शुरुआती अनुमानों से बढ़ोतरी का संकेत मिलता है. कर्मा मैनेजमेंट ग्लोबल कंसल्टिंग सॉल्यूशंस के मैनेजिंग डायरेक्‍टर और मुख्य विजन अधिकारी प्रतीक वैद्य ने कहा कि उम्‍मीद पिछले रुझानों और वर्तमान आर्थिक के हिसाब से दिख रही हैं।  उन्‍होंने कहा कि सैलरी बढ़ोतरी के दो फैक्‍टर नजर आ रहे हैं, जिसमें पूर्व आयोग का कार्य और आज की अर्थव्‍यवस्‍था शामिल हैं. 6वें वेतन आयोग के तहत करीब 40 फीसदी सैलरी बढ़ी थी, जबकि 7वें वेतन आयोग के तहत 23 से 25 फीसदी के आपास बढ़ोतरी देखी गई थी, जिसमें 2.57 फिटमेंट फैक्‍टर है. इसी बात पर 8वां वेतन आयोग के तहत भी सैलरी निर्भर करती है।  एक्‍सपर्ट ने कहा कि यह सिर्फ अनुमान है, अंतिम फैसला कई आंकड़ों पर निर्भर करता है. उन्‍होंने समझाया कि 8वें आयोग के लिए ज्‍यादातर अनुमानां में 20 से 35 फीसदी की बढ़ोतरी की बात कही गई है, जिसमें फिटमेंट फैक्‍टर 2.4 से 3 के बीच और बेसिक सैलरी शामिल है. लेकिन अंतिम आंकड़ा अगले 12 से 18 महीनों में महंगाई, टैक्‍स की उपलब्‍धता और राजनीतिक इच्‍छा पर निर्भर करता है। 

डीप-टेक नवाचार और स्टार्टअप को मिलेगा बढ़ावा संकल्प से समाधान” कार्यक्रम में भी होंगे शामिल

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार आज  को इंदौर में विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इस दौरान वे सिंहासा आईटी पार्क में स्थापित “लॉन्चपैड : इन्क्यूबेशन एवं इनोवेशन सेंटर” का शुभारंभ करेंगे, दशहरा मैदान में आयोजित “संकल्प से समाधान अभियान” कार्यक्रम में भाग लेंगे और अमृत 2.0 योजना में विभिन्न जल आपूर्ति परियोजनाओं का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण भी करेंगे। प्रदेश में डीप-टेक नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र होगा सुदृढ़ सिंहासा आईटी पार्क में स्थापित “लॉन्चपैड : इन्क्यूबेशन एवं इनोवेशन सेंटर” की स्थापना आईआईटीआई दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन (आईआईटी इंदौर का टेक्नोलॉजी ट्रांसलेशन एवं रिसर्च पार्क) तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) के संयुक्त सहयोग से की गई है। इस केंद्र का उद्देश्य डीप-टेक नवाचार को प्रोत्साहित करना, उच्च प्रभाव वाले स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना, उन्नत विनिर्माण तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में प्रदेश को सशक्त बनाना और उद्योग एवं अकादमिक जगत के बीच सहयोग को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव लॉन्चपैड सेंटर का अवलोकन करेंगे तथा यहां संचालित नवाचार एवं स्टार्टअप गतिविधियों की जानकारी भी प्राप्त करेंगे। यह केंद्र मध्यप्रदेश को डीप-टेक नवाचार आधारित विकास एवं उद्यमिता का अग्रणी केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। “संकल्प से समाधान” अभियान से मजबूत हुआ जनविश्वास मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दशहरा मैदान में “संकल्प से समाधान अभियान” के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर हितलाभ वितरण करेंगे। प्रदेश में 12 जनवरी से 31 मार्च 2026 तक संचालित इस अभियान के अंतर्गत इंदौर जिले में 1 लाख 44 हजार 912 आवेदनों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया। अभियान चार चरणों में संचालित हुआ, जिसमें ग्राम पंचायत से लेकर जिला स्तर तक शिविर आयोजित कर विभिन्न विभागों की 100 से अधिक सेवाओं को शामिल किया गया।समस्याओं का मौके पर समाधान सुनिश्चित होने से शासन के प्रति आमजन का विश्वास और अधिक सुदृढ़ हुआ है। अमृत 2.0 के तहत जल आपूर्ति को मिलेगी मजबूती मुख्यमंत्री अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत नर्मदा जल प्रदाय योजना के चौथे चरण का भूमि-पूजन करेंगे। इस परियोजना से शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप सुदृढ़ किया जाएगा तथा वर्ष 2040 तक की बढ़ती आबादी की मांग को पूरा करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगी। पैकेज–2 : पाइपलाइन एवं टनल निर्माण पैकेज–2 के अंतर्गत वांचू पॉइंट से राऊ सर्कल तक लगभग 39 किलोमीटर लंबी 2235 मिमी व्यास की पाइपलाइन बिछाई जाएगी। साथ ही लगभग 2870 मीटर लंबाई में आधुनिक तकनीक से टनल निर्माण किया जाएगा तथा राऊ सर्कल पर क्लोरीनेशन सिस्टम स्थापित कर जल की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी।इस पैकेज की लागत लगभग 448.23 करोड़ रुपये है तथा कार्य 30 माह में पूर्ण किया जाएगा। पैकेज–3 : ओवरहेड टैंक एवं वितरण नेटवर्क पैकेज–3 के अंतर्गत 20 नए ओवरहेड टैंक (15 से 35 लाख लीटर क्षमता) बनाए जाएंगे तथा 29 मौजूदा टैंकों का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। इसके साथ ही लगभग 27.4 किमी फीडर पाइपलाइन, 4.7 किमी ग्रेविटी मेन लाइन और 685 किमी वितरण लाइन बिछाई जाएगी।लगभग 1.26 लाख घरेलू जल कनेक्शन तथा 1.08 लाख से अधिक वाटर मीटर स्थापित किए जाएंगे, जिससे 24×7 जल प्रदाय सुनिश्चित होगा। इस पैकेज की लागत लगभग 410.50 करोड़ रुपये है और इसे 36 माह में पूर्ण किया जाएगा। पैकेज–4 : विस्तारित जल वितरण प्रणाली पैकेज–4 के अंतर्गत 20 नए ओवरहेड टैंक एवं 46 मौजूदा टैंकों का उन्नयन किया जाएगा। साथ ही 25.82 किमी फीडर लाइन और 892 किमी वितरण पाइपलाइन बिछाई जाएगी।इस पैकेज के माध्यम से लगभग 1.21 लाख नए घरेलू कनेक्शन और 1.62 लाख से अधिक वाटर मीटर लगाए जाएंगे, जिससे जल वितरण प्रणाली को और अधिक स्मार्ट एवं प्रभावी बनाया जाएगा। इस कार्य की लागत लगभग 497.23 करोड़ रुपये है तथा इसे 36 माह में पूर्ण किया जाएगा। सिरपुर एसटीपी : स्वच्छता और जल पुनः उपयोग की दिशा में बड़ी पहल मुख्यमंत्री सिरपुर क्षेत्र में 20 एमएलडी क्षमता के अत्याधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का लोकार्पण करेंगे। लगभग 62.72 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस परियोजना के अंतर्गत 10 प्रमुख सीवर आउटफॉल को ट्रैप कर अशोधित सीवेज को सीधे तालाब में जाने से रोका गया है। परियोजना में 8.5 किमी सीवर लाइन, 5 किमी ट्रीटेड वाटर रीयूज लाइन तथा 0.5 एमएल क्षमता का ओवरहेड टैंक स्थापित किया गया है। इसके माध्यम से उपचारित जल का उपयोग शहर के लगभग 25 उद्यानों, हरित क्षेत्रों एवं अन्य कार्यों में किया जाएगा।