samacharsecretary.com

मुख्यमंत्री ने अफसरों को दिया निर्देशः किसानों से संवाद बनाएं, फसलों के नुकसान का आकलन कराएं और उन्हें मुआवजा दिलाएं

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के कई जनपदों में बुधवार को हुई बारिश से परेशान किसानों का हाल जाना। उन्होंने असमय बारिश के कारण किसानों को होने वाली परेशानी के बारे में जिलाधिकारियों से रिपोर्ट मांगी। अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने का निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मौसम की मार झेलने वाले किसानों को परेशानी न हो, किसान हित सरकार की प्राथमिकता है। किसानों की बर्बाद हुई फसल के नुकसान का आकलन कर संपूर्ण जानकारी एकत्र करें और उन्हें जल्द से जल्द राहत दिलाएं। सीएम योगी ने निर्देश दिया कि राजस्व, कृषि विभाग व बीमा कंपनी फसल नुकसान का तत्काल संयुक्त सर्वे कराकर शासन को अवगत कराएं, जिससे किसानों को तत्काल मुआवजा दिलाया जा सके।  मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार हर आपदा-विपदा में प्रदेशवासियों के साथ निरंतर खड़ी है। विगत दिनों हुई बारिश से भी किसानों की फसल प्रभावित हुई थी, इससे नुकसान होने वाली फसल का मुआवजा दिलाया जा रहा है। बुधवार को होने वाली बारिश के कारण भी फसल को जो नुकसान हुआ है, उसका भी जल्द से जल्द आकलन करा लिया जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसानों के हित में संवेदनशीलता के साथ कार्य करें और सुनिश्चित करें कि किसानों को कोई परेशानी न हो। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि फील्ड में रहकर वस्तुस्थिति का जायजा लें और प्रभावित क्षेत्रों में फसलों को हुए नुकसान का वास्तविक आकलन कराएं, जिससे किसानों को समय पर उचित सहायता मिल सके। मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव (कृषि) व राहत आयुक्त से कहा कि फील्ड में कार्यरत अधिकारियों से सीधा संपर्क करें और समन्वय बनाएं। सभी सूचनाएं समय पर एकत्र कर शासन को उपलब्ध कराई जाए, जिससे राहत कार्य भी समय से हो सके।  मुख्यमंत्री ने कहा कि फसलों को हुई क्षति का आकलन प्राप्त होते ही मुआवजा वितरण की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए। भुगतान व्यवस्था समयबद्ध ढंग से हो, ताकि मौसम की मार से प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द राहत मिल सके।

लखनऊ के मैदान पर टॉस बनेगा बॉस, 175 प्लस का औसत स्कोर, बल्लेबाजों और स्पिनरों के बीच होगी कांटे की टक्कर

 लखनऊ लखनऊ में आज आईपीएल 2026 का पांचवां लीग मैच LSG और DC के बीच खेला जाएगा। इस मैदान की पिच रिपोर्ट क्या कहती है? किसे फायदा मिलेगा और किसके लिए दिन खराब हो सकता है?  इकाना में आज गेंदबाजों की लगेगी लंका या बल्लेबाज मांगेंगे पानी आईपीएल के 2026 के सीजन का कारवां आज लखनऊ पहुंचने वाला है। अभी तक बेंगलुरु, मुंबई, गुवाहटी और न्यू चंडीगढ़ में मुकाबले खेले गए हैं। दो मुकाबले हाई स्कोरिंग रहे हैं, जबकि एक मुकाबला लो स्कोरिंग और एक मुकाबला 160 प्लस रन वाला रहा है। लखनऊ में पिच का मिजाज कैसा रहने वाला है? क्या बल्लेबाज रन बरसाएंगे या फिर गेंदबाज कहर बरपाएंगे? इसके बारे में आप जान लीजिए। लखनऊ सुपर जायंट्स के सामने आज दिल्ली कैपिटल्स होगी। दोनों का इस सीजन ये पहला-पहला मैच है। लखनऊ के भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी इकना इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में आईपीएल के अभी तक 22 मुकाबले खेले गए हैं। इनमें से 9 मैचों में उन टीमों को जीत मिली है, जिन्होंने पहले बल्लेबाजी की है, जबकि 12 मैचों में दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने वाली टीम जीती है। हालांकि, टॉस का अंतर यहां पर बहुत ज्यादा है। टॉस जीतने वाली टीमों ने 14 मुकाबले जीते हैं और हारने वाली टीमों को सिर्फ 7 मैचों में जीत मिली है। एक मुकाबला बेनतीजा रहा है। पहले बल्लेबाजी करते हुए औसत स्कोर यहां 175 से ज्यादा का है, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि ये हाई स्कोरिंग क्रिकेट ग्राउंड है। 235 रन भी यहां बन चुके हैं, जबकि सबसे छोटा स्कोर यहां 108 है, जो मेजबान लखनऊ सुपर जायंट्स के नाम है। हालांकि, 180 या इससे ज्यादा रनों की रन चेज यहां आईपीएल में अभी तक नहीं हुई है। विकेटों के लिहाज से देखें तो 28.14 का औसत और 8.79 की इकॉनमी यहां गेंदबाजों की रहती है। विकेट भले ही गिरते हैं, लेकिन रन भी खूब बनते हैं। ऐसे में लखनऊ सुपर जायंट्स और दिल्ली कैपिटल्स के बीच जो मुकाबला होगा, वह भी हाई स्कोरिंग होगा, क्योंकि दोनों के पास तूफानी बल्लेबाज हैं। स्पिनरों को यहां अच्छी खासी मदद मिलती है।  

पखवाडेभर में 31 हजार से अधिक रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं का निर्माण

रायपुर मोर गाँव,मोर पानी अभियान ने हासिल की ऐतिहासिक उपलब्धि मोर गांव,मोर पानी महाभियान  अंतर्गत बलौदा बाजार भाटापारा जिले में जल संरक्षण को जन-आंदोलन का स्वरूप देते हुए अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की गई है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत निर्मित आवासों में केवल 15 दिन में 31,066 रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं का निर्माण पूर्ण कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया गया है। यह उपलब्धि  व्यापक जनजागरूकता, सामुदायिक सहभागिता एवं श्रमदान का मिसाल बन गया है। जनभागीदारी बना जन आंदोलन – कलेक्टर कुलदीप शर्मा के मार्गदर्शन एवं सीईओ जिला पंचायत सु दिव्या अग्रवाल के नेतृत्व में मोर गांव, मोर पानी महाभियान 2.0 की शुरुआत जिले में 13 मार्च 2026 से की गई है। इस अभियान के सफल संचालन हेतु तिथिवार कार्यक्रम तय किये गए है। इस उपलब्धि से जल संरक्षण के प्रति जिले की सामूहिक प्रतिबद्धता, जनसहभागिता और सशक्त नेतृत्व परिलक्षित होता है।ग्रामीणों ने स्वयं आगे बढ़कर श्रमदान किया जिससे अभियान ने एक जन-आंदोलन का रूप ले लिया। प्रत्येक पीएम आवास की औसत साइज लगभग 300 वर्ग फीट है। इनमे  निर्मित रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं वर्षा जल को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। अनुमानतः प्रत्येक वर्षा ऋतु में इन संरचनाओं के माध्यम से हजारों लीटर पानी का संग्रहण संभव होगा, जिससे भूजल स्तर में वृद्धि, जल संकट में कमी तथा स्थायी जल प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा। वर्तमान के साथ भविष्य भी सुरक्षित – इस पहल से न केवल वर्तमान जल आवश्यकताओं की पूर्ति होगी, बल्कि भविष्य के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में भी यह एक ठोस कदम है। मोर गांव,मोर पानी अभियान ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब प्रशासन और आमजन एक साथ मिलकर संकल्प लेते हैं तो असंभव भी संभव हो जाता है। प्रशासन की अपील –  जिला प्रशासन द्वारा सभी नागरिकों से अपील की गई है कि वे इस जन-आंदोलन से जुड़कर अपने घरों एवं गांवों में अधिक से अधिक जल संरक्षण संरचनाएं बनाएं तथा 'हर घर जल संचय' के लक्ष्य को साकार करने में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

मुख्यमंत्री का निर्देश फार्मर रजिस्ट्री के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर लगेंगे विशेष शिविर

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में फार्मर रजिस्ट्री को व्यापक स्तर पर लागू करने के निर्देश देते हुए कहा कि सभी किसानों का पंजीकरण प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिया कि यथाशीघ्र प्रत्येक ग्राम पंचायत में विशेष शिविर आयोजित कर किसानों को फार्मर रजिस्ट्री से जोड़ा जाए, ताकि कोई भी पात्र किसान इस व्यवस्था से वंचित न रहे।  मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार फार्मर रजिस्ट्री को कृषि क्षेत्र में एकीकृत लाभ वितरण प्रणाली के रूप में विकसित कर रही है। इसके अंतर्गत कृषि विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों की सभी लाभार्थीपरक योजनाओं को फार्मर रजिस्ट्री से जोड़ा जा रहा है, जिससे किसान को विभिन्न योजनाओं का लाभ एक ही पहचान के आधार पर सरल और व्यवस्थित तरीके से प्राप्त हो सके। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना सहित अन्य योजनाओं में यदि लाभार्थियों के नाम या अभिलेखों में कोई त्रुटि अथवा असंगति है तो उसे आधार से लिंक कर प्राथमिकता के आधार पर संशोधित किया जाए। साथ ही प्रत्येक पात्र किसान का किसान पहचान पत्र बनवाना सुनिश्चित किया जाए, जिससे योजनाओं के लाभ वितरण में किसी प्रकार की बाधा न आए और पात्रता का सत्यापन सुगम हो सके।  मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि विभाग अपनी सभी योजनाओं को फार्मर रजिस्ट्री से जोड़ने के लिए आवश्यक तकनीकी व्यवस्था निर्धारित समयसीमा में तैयार करे और विभागीय पोर्टल को 01 मई 2026 तक पूर्ण रूप से क्रियाशील बनाया जाए। इसके माध्यम से लाभार्थियों के चयन और लाभ वितरण की प्रक्रिया को डिजिटल एवं एकीकृत रूप में संचालित किया जा सकेगा।  उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि उद्यान, पशुपालन, मत्स्य, सहकारिता एवं लघु सिंचाई जैसे सहयोगी विभाग भी अपनी योजनाओं में किसान पहचान पत्र के उपयोग के लिए कृषि विभाग के साथ समन्वय स्थापित करें और 31 मई 2026 तक आवश्यक तैयारियां पूरी कर लें, ताकि सभी विभागों में एक समान व्यवस्था लागू हो सके।  मुख्यमंत्री ने कहा कि फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से किसानों को योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी और लाभ प्राप्त करने में अनावश्यक जटिलताएं समाप्त होंगी। इससे संसाधनों का लक्षित उपयोग संभव होगा तथा विशेष परिस्थितियों में आवश्यक कृषि इनपुट का वितरण अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा।  उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था के लागू होने से योजनाओं का लाभ पारदर्शी ढंग से किसानों तक पहुंचेगा और एक ही लाभार्थी को बार-बार लाभ मिलने की स्थिति की समीक्षा भी सहज रूप से की जा सकेगी। मुख्यमंत्री ने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि इस कार्य को गंभीरता से लेते हुए समयसीमा के भीतर पूर्ण करें और इसकी नियमित निगरानी सुनिश्चित करें।

निर्मला सप्रे का हाई कोर्ट में बयान: मैं कांग्रेस में हूं, 9 अप्रैल को स्पीकर के सामने रखेंगे नेता प्रतिपक्ष सिंघार अपना पक्ष

 जबलपुर  हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष मंगलवार को बीना विधायक निर्मला सप्रे के विरुद्ध नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की याचिका पर सुनवाई हुई। मामले में उस समय नया मोड़ आया जब हाई कोर्ट के पूछने पर निर्मला सप्रे की ओर से दावा किया गया कि वे अभी भी कांग्रेस पार्टी में हैं। अब इस मामले में याचिकाकर्ता उमंग सिंघार को विधानसभा स्पीकर के सामने नौ अप्रैल को अपना पक्ष रखना है। सिंघार की याचिका पर विस अध्यक्ष ने निर्णय क्यों नहीं लिया इसके मद्देनजर कोर्ट ने मामले पर अगली सुनवाई 20 अप्रैल को नियत की है। सप्रे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय अग्रवाल ने पक्ष रखा। विगत सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा था कि 16 माह बीतने के बावजूद सिंघार की याचिका पर विधानसभा अध्यक्ष ने निर्णय क्यों नहीं लिया। विधायक निर्मला सप्रे का निर्वाचन शून्य करने की मांग की है उल्लेखनीय है कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने यह याचिका दायर की है। सिंघार ने कांग्रेस की बीना से विधायक निर्मला सप्रे का निर्वाचन शून्य करने की मांग की है। याचिकाकर्ता के अनुसार 30 जून 2024 को उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष तोमर के समक्ष इस मामले में याचिका दायर की थी। लेकिन निर्धारित 90 दिन के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की गई। लिहाजा, हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई। विधायक पर पार्टी विरोधी गतिविधि का आरोप लगाया गया है कांग्रेस ने अपनी ही पार्टी की विधायक पर पार्टी विरोधी गतिविधि का आरोप लगाया गया है। लोकसभा चुनाव के दौरान पांच मई, 2024 को राहतगढ़ में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यक्रम में मंच पर पहुंची थीं। याचिकाकर्ता का कहना है कि कांग्रेस विधायक सप्रे भाजपा में शामिल हो चुकी हैं।  

आईएएस तबादला सूची में भारी उलटफेर, रिया डाबी को सीएमओ में एंट्री, तो बहन टीना डाबी का घटा सियासी कद

जयपुर राजस्थान में आईएएस तबादला सूची में सीएमओ में 7 नए आईएएस को एंट्री मिली है। इसके साथ ही सीएमओ में अब आईएएस की संख्या बढ़कर 11 हो चुकी है। सीएमओ में इतनी बड़ी संख्या में आईएएस की तैनाती राजस्थान में पहली बार देखने को मिली है। इसमें जूनियर अफसरों में रजत यादव, अक्षत कुमार सिंह, गरीमा नरूला, रीया डाबी, अमीता शर्मा शामिल है। इनके अलावा जितेंद्र कुमार सोनी, उत्सव कौशल और मुकुल शर्मा को भी सीएमओ में लगाया है। इस लिस्ट के साथ अब यह भी लगभग तय हो गया है कि जल्द ही आरएएस तबादला सूची भी आएगी जिसमें सीएमओ में तैनात आरएएस अफसरों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है क्योंकि अब यहां इनका काम आईएएस अफसरों के जिम्मे किया जा रहा है। क्या सीएस को नहीं मिला पसंद का असर? लिस्ट में किसकी चली इसे लेकर सबसे ज्यादा चर्चा है। जानकार सूत्रों का कहना है कि यह लिस्ट पूरी तरह सीएमओ के शीर्ष अफसरों की है। जानकार सूत्रों सीएस वी श्रीनिवासन ने अपने ऑफिस के लिए आईएएस अफसर जुनैद पीपी को मांग रखा था। इसके लिए दिसंबर में नोटशीट भी चलाई गई थी। लेकिन जुनैद पीपी को इस तबादला सूची में छोटे जिले सलुंबर में कलेक्टर लगा दिया गया। कुछ नाम पहले से चर्चाओं में थे लिस्ट में कुछ नाम ऐसे हैं जिन्हें लेकर एक साल पहले से चर्चाएं थीं। जयपुर कलेक्टर से सीएम सचिव लगाए गए जितेंद्र सोनी के तबादले को लेकर साल भर से चर्चाएं थीं कि वे सीएमओ आ रहे हैं। हालांकि वे सचिव रैंक में आ चुके हैं और कलेक्टर का पद सचिव के लिए जूनियर रैंक वाला होता है। इसलिए उनका तबादला तय था। संदेश नायक जयपुर कलेक्टर लगाए गए हैं, उनके सीएमओ से बाहर जाने की चर्चाएं भी काफी पहले से चल रहीं थीं। आरएएस और अन्य सेवाओं से बने आईएएस खाली हाथ पिछले साल आरएएस और अन्य सेवाओं से आईएएस बने 16 अफसरों को इस लिस्ट में कोई खास तवज्जो नहीं मिली है। उम्मीद की जा रही थी कि इनमें से एक-आध असफसर को कलेक्टर की पोस्ट मिलेगी। लेकिन इनमें से एक भी अफसर को कलेक्टरशिप नहीं मिली है। टीना डाबी को छोटा जिला आईएएस टीना डाबी और उनकी बहन रिया डाबी का नाम भी इस लिस्ट में है। टीना डाबी को बाड़मेर जैसे बॉर्डर जिले से हटाकर टोंक का कलेक्टर बनाया गया है। सियासी भाषा में इसे कद घटना कहा जाता है। हालांकि बाड़मेर में उनके काम को लेकर तारीफ हुई थी लेकिन शोशल मीडिया पर रीलबाजी को लेकर काफी विवादों में भी रहीं थीं। उनकी बहन रिया डाबी को सीएमओ में एंट्री मिली है। रिया को सीएम का ओएसडी लगाया गया है।     

हाथापाई की नौबत से दोस्ताना मुलाकात तक, पंत ने खत्म कराया राणा-राठी विवाद, लखनऊ-दिल्ली मैच से पहले बदला माहौल

दिल्ली इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के इतिहास में कुछ मौके ऐसे आए, जब मैदान पर तीखी नोक-झोंक और विवाद देखने को मिले. कीरोन पोलार्ड vs मिचेल स्टार्क का विवाद हो या महेंद्र सिंह धोनी का मैदान पर अंपायर से भिड़ना या फिर गौतम गंभीर और विराट कोहली के बीच टकराव- ये सभी पल आज भी फैन्स को याद हैं. हालांकि अब आईपीएल का माहौल पहले से ज्यादा शांत और प्रोफेशनल नजर आता है. पिछले साल अगस्त में दिल्ली प्रीमियर लीग (DPL) में दिग्वेश राठी और नीतीश राणा के बीच हुए विवाद ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं. तब दोनों खिलाड़ियों के बीच जमकर बहस हुई थी और मामला हाथापाई तक पहुंचने वाला था. उस विवाद के बाद नीतीश राणा पर मैच फीस का 50 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया था. जबकि दिग्वेश राठी की 80 फीसदी मैच फीस काटी गई थी. इसी वजह से लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) और दिल्ली कैपिटल्स (DC) के बीच 1 मार्च को निर्धारित आईपीएल 2026 के मुकाबले से पहले जब दोनों खिलाड़ी आमने-सामने आए, तो फैन्स को फिर से टकराव की उम्मीद थी. हालांकि, मुकाबले से पहले ही पूरा मामला शांत हो गया. ऋषभ पंत बने पीसमेकर कैमरों में कैद हुआ कि लखनऊ सुपर जायंट्स के स्पिनर राठी और दिल्ली कैपिटल्स के बैटर नीतीश राणा बातचीत कर रहे थे. इसी दौरान लखनऊ के कप्तान ऋषभ ने पहल करते हुए दोनों को बुलाया और विवाद खत्म करने को कहा. पंत ने दिग्वेश राठी से कहा, 'तू कहां जा रहा है? बस हो गया.' वहीं नीतीश राणा ने भी मजाकिया अंदाज में कहा, 'फिर तो मुझे तेरे साथ बैठना पड़ेगा.' इस दौरान कुलदीप यादव भी बातचीत में शामिल हुए और माहौल को हल्का बना दिया. उन्होंने मजाक में कहा, 'बहुत ज्ञान दे दिया.' इसके बाद पंत और कुलदीप के बीच दोस्ताना अंदाज भी देखने को मिला. अब भले ही मैदान पर पहले की तरह गरमागरमी कम हो गई हो, लेकिन ऐसे छोटे-छोटे मोमेंट्स आईपीएल को और दिलचस्प जरूर बना रहे हैं. पिछले सीजन में लखनऊ सुपर जायंट्स और दिल्ली कैपिटल्स का प्रदर्शन औसत रहा था और इस बार दोनों टीमें नई शुरुआत करना चाहेंगी.

स्वास्थ्य सेवाओं में तेजी पर जोर, मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बताई सरकार की प्राथमिकता

रायपुर 9 नवीन ‘108 संजीवनी एक्सप्रेस’ एम्बुलेंस को दिखाई हरी झंडी छत्तीसगढ़ सरकार की महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने आज सूरजपुर ज़िले में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए 9 अत्याधुनिक ‘108 संजीवनी एक्सप्रेस’ एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।  जिला चिकित्सालय सूरजपुर से शुरू की गई यह सेवा अब दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तक त्वरित आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराएगी। इस अवसर पर मंत्री  राजवाड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण एवं शीघ्र स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सूरजपुर की बेटी होने के नाते यह मेरे लिए गौरव का क्षण है कि मैं अपने ज़िलेवासियों को यह जीवनरक्षक सुविधा समर्पित कर रही हूँ। 9 नवीन ‘108 संजीवनी एक्सप्रेस’ एम्बुलेंस को दिखाई हरी झंडी उन्होंने कहा कि ये एम्बुलेंस केवल वाहन नहीं, बल्कि जीवन बचाने वाली महत्वपूर्ण कड़ी हैं। सरकार का उद्देश्य है कि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाली माताएँ, बहनें और बच्चों को आपातकालीन स्थिति में समय पर उपचार मिल सके और ‘गोल्डन ऑवर’ में चिकित्सा सहायता सुनिश्चित हो। मंत्री  राजवाड़े ने यह भी कहा कि एम्बुलेंस संचालन एजेंसी के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर सेवाओं की गुणवत्ता एवं प्रतिक्रिया समय (Response Time) में निरंतर सुधार किया जाएगा। उन्होंने स्वयं इन सेवाओं की नियमित निगरानी करने की बात कही, ताकि पारदर्शिता और प्रभावशीलता बनी रहे। ज़िले में आवंटित 9 एम्बुलेंसों में से 2 को जिला चिकित्सालय सूरजपुर में स्थायी रूप से तैनात किया गया है, जबकि शेष एम्बुलेंसों को विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में रणनीतिक रूप से तैनात किया गया है, जिससे ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक त्वरित चिकित्सा सहायता सुनिश्चित हो सके।

राजधानी लखनऊ में हरित ऊर्जा को मिलेगा बढ़ावा, 110 वार्डों में शत-प्रतिशत कूड़ा संग्रहण व सस्टेनेबल सिटी मॉडल की दिशा में बड़ा कदम

लखनऊ राजधानी लखनऊ में कूड़ा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़, आधुनिक एवं पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में बुधवार 1 अप्रैल को अहम पहल होने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रातः 11 बजे अपने सरकारी आवास 5 कालिदास मार्ग से 250 इलेक्ट्रिक एवं सीएनजी वाहनों का लोकार्पण (फ्लैग ऑफ) करेंगे। यह पहल हरित ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 110 वार्डों में शत-प्रतिशत कूड़ा प्रबंधन का लक्ष्य नगर निगम लखनऊ द्वारा शहर के सभी 110 वार्डों में घरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों एवं कार्यालयों से निकलने वाले कूड़े का शत-प्रतिशत एकत्रीकरण, परिवहन और प्रोसेसिंग सुनिश्चित करने के लिए व्यापक व्यवस्था लागू की गई है। इस कार्य का संचालन चयनित संस्थाओं के माध्यम से किया जा रहा है, जिसकी प्रतिदिन निगरानी भी सुनिश्चित की जाती है। नगर निगम के कमांड एवं कंट्रोल रूम से कूड़ा उठान कार्य का सीधा प्रसारण देखा जा सकता है। साथ ही नागरिकों की सुविधा के लिए कंट्रोल रूम नंबर 1533 एवं टोल फ्री नंबर 18001234999 और 1800206172 पर शिकायत दर्ज कराकर त्वरित समाधान भी सुनिश्चित किया जा रहा है। हरित ऊर्जा से प्रदूषण नियंत्रण पर फोकस नगर निगम द्वारा कूड़ा एकत्रीकरण में डीजल चालित वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर इलेक्ट्रिक एवं सीएनजी वाहनों को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे न केवल वायु प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि शहर में स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण भी सुनिश्चित होगा। यह नीति सतत विकास के सिद्धांतों के अनुरूप है और कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी लाने की दिशा में प्रभावी कदम मानी जा रही है। ई-वाहनों का बढ़ता बेड़ा और आधुनिक सफाई व्यवस्था वर्तमान में लखनऊ में 981 इलेक्ट्रिक एवं 169 सीएनजी वाहनों के माध्यम से कूड़ा एकत्रीकरण कार्य किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, शहर की प्रमुख सड़कों की सफाई 50 से अधिक मैकेनाइज्ड रोड स्वीपिंग मशीनों (ई-वाहनों) के माध्यम से प्रतिदिन कराई जा रही है। नए 250 वाहनों के जुड़ने से कूड़ा प्रबंधन प्रणाली को और अधिक गति और मजबूती मिलने की उम्मीद है। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से मिलेगा संचालन को बल ई-वाहनों के सुचारु संचालन के लिए शहर में 13 स्थानों पर 520 चार्जिंग प्वाइंट स्थापित किए गए हैं। इससे न केवल वाहनों की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि भविष्य में और अधिक ई-वाहनों के संचालन के लिए भी आधार तैयार होगा। रोजगार सृजन और ‘वेस्ट टू वेल्थ’ को बढ़ावा इस पूरी व्यवस्था से प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से लगभग 10,000 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। साथ ही सर्कुलर इकोनॉमी को ध्यान में रखते हुए ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की अवधारणा को भी मजबूती मिल रही है, जिससे कूड़े को संसाधन के रूप में उपयोग करने की दिशा में कार्य हो रहा है। स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद नगर निगम द्वारा उठाए जा रहे इन कदमों से न केवल शहर को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने में मदद मिलेगी, बल्कि आगामी स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर प्रदर्शन की संभावना भी बढ़ेगी। यह पहल लखनऊ को एक आदर्श ‘सस्टेनेबल अर्बन मॉडल’ के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

हाईकोर्ट का निर्णय: दूसरे राज्य के सर्टिफिकेट पर आरक्षण नहीं, कोर्ट ने कहा- जाति जन्म से निर्धारित होती है

 ग्वालियर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने आरक्षण पर एक अहम फैसला दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी अन्य राज्य से जारी ओबीसी OBC जाति प्रमाणपत्र के आधार पर मध्यप्रदेश में आरक्षण का लाभ नहीं लिया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि जाति का निर्धारण जन्म के आधार पर होगा , विवाह या​ निवास परिवर्तन से नहीं। इसी के साथ हाईकोर्ट ने दूसरे राज्य का ओबीसी प्रमाणपत्र अमान्य करते हुए याचिका भी खारिज कर दी। कोर्ट ने यह भी कहा कि विवाह के आधार पर भी किसी महिला को अपने पति की जाति का आरक्षण लाभ नहीं मिल सकता। कोर्ट ने बताया कि यह मुद्दा पहले ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्पष्ट किया जा चुका है। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जालौन जिले की निवासी अर्चना दांगी ने याचिका दायर कर अपनी उम्मीदवारी निरस्त किए जाने को चुनौती दी थी। उन्होंने उच्च माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा-2018 उत्तीर्ण की थी, लेकिन दस्तावेज सत्यापन के दौरान चयन इस आधार पर निरस्त कर दिया गया कि उनका ओबीसी प्रमाणपत्र उत्तर प्रदेश का है। याचिकाकर्ता का तर्क था कि दांगी जाति उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश दोनों राज्यों में ओबीसी श्रेणी में शामिल है। साथ ही उन्होंने यह भी दलील दी कि विवाह के बाद वे मध्यप्रदेश की निवासी हो गई हैं, इसलिए उन्हें यहां आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। वहीं राज्य शासन की ओर से कहा गया कि जाति का निर्धारण जन्म के आधार पर होता है, न कि विवाह या निवास परिवर्तन से। साथ ही, दूसरे राज्य से जारी प्रमाणपत्र मध्यप्रदेश में मान्य नहीं होता। आरक्षण का आधार सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ापन कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि विवाह के बाद महिला अपने पति की जाति का सामाजिक रूप से हिस्सा बन सकती है, लेकिन उसे आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकता, क्योंकि आरक्षण का आधार सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ापन है, जो जन्म से निर्धारित होता है। इन्हीं आधारों पर हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि संबंधित अधिकारियों का निर्णय सही और विधिसम्मत है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुकी यह मुद्दा कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि यह मुद्दा पहले ही सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न न्यायालयों द्वारा स्पष्ट किया जा चुका है। न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि कोई भी व्यक्ति एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने पर अपनी जाति की आरक्षण स्थिति साथ नहीं ले जा सकता, भले ही वह जाति दोनों राज्यों में समान नाम से सूचीबद्ध है।