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नीतीश कुमार जाएंगे राज्यसभा, बिहार के नए सीएम के लिए गूंजा निशांत कुमार का नाम

पटना बिहार की सियासत में एक नया नाम तेजी से उभरता दिख रहा है. वह नाम है निशांत कुमार है. अब ये सिर्फ चर्चा नहीं, बल्कि अब ये खुले मंच पर है. मांग उठ रही है कि निशांत कुमार को बिहार का मुख्‍यमंत्री बनाया जाए. सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जब विधान परिषद के अतिथि निवास का उद्घाटन करने पहुंचे, तो वहां का माहौल अचानक सियासी संदेश में बदल गया. उनके सामने ही ‘निशांत कुमार जिंदाबाद’ और ‘बिहार के सीएम निशांत कुमार जिंदाबाद’ के नारे गूंजने लगे. सत्ता के गलियारों में नया संकेत! सबसे दिलचस्प बात यह रही कि इन नारों को न तो रोका गया और न ही किसी तरह की नाराजगी दिखाई दी. खुद नीतीश कुमार शांत रहे, हाथ जोड़कर अभिवादन किया और आगे बढ़ गए. दरअसल, नीतीश कुमार के सामने ही “निशांत कुमार जिंदाबाद” और “बिहार के सीएम निशांत कुमार जिंदाबाद” के नारे गूंजने लगे. इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिल्कुल शांत नजर आए. उन्होंने लोगों को हाथ जोड़कर अभिवादन किया और आगे बढ़ते रहे. गर्म हो सकती है राजनीति जानकारों की मानें तो यह नारेबाजी भी बिहार की आगे की राजनीति को गर्म करने के लिए काफी है. दरअसल, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा जाने वाले हैं. 10 अप्रैल को वह राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण करेंगे. उसके बाद वह बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे. नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बिहार के सीएम की कुर्सी पर बीजेपी का मुख्यमंत्री बैठेगा, ऐसा फिलहाल तय माना जा रहा है. असल में, यह नारे इसी वजह से लगाए जा रहे हैं. जेडीयू के कार्यकर्ताओं की मांग है कि बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार बैठें. ऐसे में बीजेपी और जेडीयू के कार्यकर्ताओं की यह चाह अब बिहार की राजनीति का नया अखाड़ा बनने वाली है. … पर CM कुर्सी अब भी दूर! बिहार में बीजेपी कार्यकर्ता और शीर्ष नेतृत्व लगभग 10 वर्षों से सीएम की कुर्सी पर अपना मुख्यमंत्री बनाने की कोशिश में हैं. इसी सपने को पूरा करने के लिए बिहार में नीतीश कुमार के सबसे करीबी कहे जाने वाले बीजेपी के डिप्टी सीएम स्वर्गीय सुशील कुमार मोदी को डिप्टी सीएम को रिप्‍लेस कर दिया गया. सीएम की कुर्सी की राह तैयार करने के लिए रेणु देवी और तारकिशोर प्रसाद को डिप्‍टी सीएम बनाया गया. रेणु देवी और तारकिशोर प्रसाद को भी बदलकर सीएम नीतीश को चुनौती दे सकने वाले चेहरों को आगे किया गया. विजय सिन्‍हा और सम्राट चौधरी को डिप्‍टी सीएम बनाया गया। बावजूद बीजेपी अपने इस प्रयास में सीधे-सीधे अब तक सफल नहीं हो सकी है। डिप्टी CM बदलते रहे बिहार में सीएम की कुर्सी की राह बनाने के लिए नीतीश कुमार के साथ रेणु देवी और तारकिशोर प्रसाद को डिप्टी सीएम बनाया गया. इसी कड़ी में रेणु देवी और तारकिशोर प्रसाद को हटाकर, सीएम नीतीश को चुनौती दे सकने वाले विजय सिन्हा और सम्राट चौधरी को डिप्टी सीएम बनाया गया. बावजूद इसके, बीजेपी अपने इस प्रयास में सीधे-सीधे अब तक सफल नहीं हो सकी है. अब ट्रांजिशन मोड में बिहार मगर अब नीतीश कुमार 75 साल के हो गए हैं. उम्र का असर उनके स्वास्थ्य पर भी दिख रहा है. ऐसे में अब वह राज्यसभा जाने की तैयारी में हैं. लेकिन इस बीच बिहार एक ट्रांजिशन मोड में है. अब देखने वाली बात यह होगी कि यह बदलाव का दौर बिहार की राजनीति पर क्या असर डालता है. राजनीतिक जानकार रमाकांत चंदन का मानना है कि यदि मुख्यमंत्री की गद्दी पर निशांत को काबिज करने की मांग तेज हुई, तो यह बीजेपी और जेडीयू के रिश्तों पर असर डाल सकता है. गेमचेंजर बनेगा नारा या बिगाड़ेगा गणित? अब देखने वाली बात यह होगी कि ‘बिहार के सीएम निशांत कुमार जिंदाबाद’ का जो नारा नीतीश कुमार के सामने लगाया गया, वो गेमचेंजर साबित होता है या NDA का गणित बिगाड़ देता है. जेडीयू कार्यकर्ताओं ने आज खुलकर अपनी उस मांग को नीतीश कुमार के सामने जाहिर कर दी, इसके लिए अभी दो दिन पहले ही पार्टी कार्यालय में पोस्टर लगाए गए थे. इन पोस्टरों में निशांत कुमार को सीएम बनाने की मांग रखी गई थी. यह भी कहा गया कि बिहार के विकास को लेकर जो संकल्प है, उसे निशांत कुमार पूरा करने के लिए तैयार हैं. ऐसे में अब देखने वाली बात यह होगी कि बीजेपी और जेडीयू के कार्यकर्ताओं की यह मांग बिहार की राजनीति को किस करवट ले जाती है.

महतारी वंदन की 26वीं किश्त जारी, 68.48 लाख महिलाओं के खाते में ट्रांसफर हुए 641.62 करोड़ रूपए

रायपुर.  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य की महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक  सशक्तिकरण के लिए संचालित महतारी वंदन योजना की 26वीं किश्त की राशि आज जारी की गई। इसके जारी होते ही हितग्राही महिलाओं के मोबाईल में खुशियों के नोटिफिकेशन की घंटी बज उठी। इस योजना के तहत राज्य की 68 लाख 48 हजार 899 महिलाओं को 641 करोड़ 62 लाख 92 हजार रूपए उनके बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए। लाभान्वित हितग्राहियों में 7773 महिलाएं नियद नेल्ला नार के योजना के गांवों की रहने वाली है।  छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी जी की गारंटी को पूरा करने के लिए और महिलाओं की बेहतरी के लिए यह योजना मार्च 2024 में शुरू की गई थी। तब से लेकर अब तक हर महीने हितग्राही महिलाओं को एक-एक हजार रूपए की सहायता राशि नियमित रूप से दी जा रही है। इस योजना के तहत अब तक हितग्राही महिलाओं को 16,881 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है।  गौरतलब है कि इस योजना के अंतर्गत हितग्राही महिलाओं के केवाईसी पूरा किए जाने का काम भी तेजी से कराया जा रहा है। केवाईसी के अद्यतन की यह प्रक्रिया ई-गवर्नेस सर्विसेस इंडिया लिमिटेड के माध्यम से 3 अप्रैल से शुरू की गई है, जो 30 जून तक चलेगी। व्हीएलई द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम पंचायत भवन में तथा शहरी क्षेत्र में वार्ड कार्यालय में केवाईसी अद्यतन का कार्य हो रहा है। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने महतारी वंदन योजना की ऐसी हितग्राही महिलाओं से जिनका ई-केवाईसी नहीं हुआ है, उनसे तत्काल ई-केवाईसी कराने की अपील की है ताकि योजना की सहायता राशि बिना किसी व्यवधान के उनके खाते में पहुंच सके।  महिला एवं बाल विकास विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार महतारी वंदन योजना के हितग्राहियों की संख्या 68,94,633 है, जिसमें से केवाईसी हेतु लंबित हितग्राहियों को छोड़कर 68,48,899 हितग्राहियों को 26वीं किश्त का भुगतान किया गया है।

काशी की पावन धरा पर हुआ उज्जैनी के शौर्य का सूर्योदय

भोपाल.  भारतीय इतिहास के पन्नों पर कुछ क्षण ऐसे अंकित होते हैं, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बन जाते हैं। अप्रैल 2026 की शुरुआत में धर्म नगरी वाराणसी के क्षितिज पर एक ऐसा ही स्वर्णिम अध्याय लिखा गया। बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी और बाबा महाकाल की नगरी अवंतिका (उज्जैन) का जब आध्यात्मिक संगम हुआ, तो 'विक्रमोत्सव-2026' के माध्यम से एक नया सांस्कृतिक इतिहास रचा गया। मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग के अंतर्गत महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा आयोजित 3 दिवसीय महानाट्य 'सम्राट विक्रमादित्य' महज़ एक कलात्मक प्रस्तुति नहीं थी, बल्कि यह भारत के गौरव को पुनर्स्थापित करने का एक शंखनाद था। वाराणसी के बी.एल.डब्ल्यू. मैदान में 3 से 5 अप्रैल तक चले इस आयोजन ने न केवल दर्शकों का मन मोहा, बल्कि सुशासन, न्याय और पराक्रम की उस गाथा को जीवंत कर दिया, जो सदियों से हमारे रक्त में प्रवाहित है। ऐतिहासिक शुभारंभ: सुशासन के 2 सारथियों का संगम इस भव्य महानाट्य का शुभारंभ एक ऐतिहासिक दृश्य के साथ हुआ, जब मंच पर सुशासन के 2 आधुनिक ध्वजवाहक—मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ—एक साथ उपस्थित हुए। यह उपस्थिति इस बात का प्रमाण थी कि आज का भारत अपनी जड़ों की ओर लौट रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संबोधन में सम्राट विक्रमादित्य को 'सुशासन का वैश्विक नायक' बताते हुए कहा कि विक्रमादित्य का जीवन राष्ट्र प्रेम, न्यायप्रियता और प्रजा-वात्सल्य का सर्वोच्च उदाहरण है। उन्होंने रेखांकित किया कि आज की युवा पीढ़ी को यह बताने की आवश्यकता है कि भारत के पास एक ऐसा शासक था, जिसके न्याय के सामने काल भी नतमस्तक था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान राम-लक्ष्मण और कृष्ण-बलराम की दिव्य जोड़ियों के साथ सम्राट विक्रमादित्य और उनके भाई राजा भर्तृहरि की जोड़ी का उल्लेख कर भारतीय भ्रातृ-प्रेम और त्याग की परंपरा को नई ऊँचाई दी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस आयोजन को 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' के संकल्प की सिद्धि बताया। उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य का उत्तर प्रदेश से गहरा नाता है। सम्राट विक्रमादित्य ने ही आज से दो हजार वर्ष पूर्व अयोध्या की खोज की थी और भगवान राम के भव्य मंदिर का निर्माण करवाया था। उ.प्र. के मुख्यमंत्री योगी ने सम्राट विक्रमादित्य के नाथ संप्रदाय से जुड़ाव और चुनार के किले में उनकी साधना का उल्लेख कर दोनों राज्यों के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को नई गहराई प्रदान की। 'माँ गंगा से नर्मदा तक': पर्यटन और संस्कृति का नवीन सेतु महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य के तीन दिवसीय आयोजन की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच हुआ ऐतिहासिक समझौता (MoU) रहा। "माँ गंगा से नर्मदा तक" थीम पर आधारित इस पहल का उद्देश्य काशी विश्वनाथ और महाकालेश्वर के बीच एक अभेद्य सांस्कृतिक गलियारा बनाना है। यह समझौता केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों राज्यों के बीच पर्यटन के नए द्वार खोलेगा। इसके माध्यम से उत्तर प्रदेश के श्रद्धालु मध्यप्रदेश के आध्यात्मिक केंद्रों की ओर आकर्षित होंगे और मध्य प्रदेश के नागरिक काशी की महिमा से सीधे जुड़ेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन का हिस्सा बताया, जिसमें केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना जैसी विकास योजनाओं के साथ-साथ सांस्कृतिक जुड़ाव को भी प्राथमिकता दी गई है। महानाट्य: कला और तकनीक का अद्भुत समन्वय वाराणसी के में जब महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य का मंचन शुरू हुआ, तो लगा मानो काल का पहिया 2 हजार साल पीछे घूम गया हो। उज्जैन के 200 से अधिक कलाकारों ने अपनी प्रतिभा से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सजीव युद्ध के दृश्य, गगनभेदी जयघोष, और न्याय के सिंहासन (बत्तीसी) की महिमा ने 80 हजार से अधिक प्रत्यक्ष दर्शकों को अपनी सीटों से बांधे रखा। मंच पर जब 'जय महाकाल' और 'हर-हर महादेव' के उद्घोष हुआ, तो पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। कलाकारों के संवादों में वह ओज था, जिसने युवाओं के भीतर राष्ट्रवाद की भावना से ओतप्रोत कर दिया। यह महानाट्य लोकरंजन के साथ-साथ लोक-शिक्षण का भी एक सशक्त माध्यम बना। डिजिटल गूँज: 50 लाख से अधिक की अभूतपूर्व पहुँच आधुनिक युग में किसी भी आयोजन की सफलता उसकी 'रीच' (पहुँच) से मापी जाती है। जनसंपर्क की दृष्टि से 'विक्रमोत्सव वाराणसी' ने नए कीर्तिमान स्थापित किए। डिजिटल रीच: सोशल मीडिया और ऑनलाइन माध्यमों से इस आयोजन की पहुँच 51 लाख से अधिक लोगों तक रही। सोशल मीडिया ट्रेंड: 'विक्रमोत्सव वाराणसी' और 'सम्राट विक्रमादित्य' जैसे हैशटैग माइक्रोब्लॉगिंग साइट 'एक्स' (X) पर घंटों तक नेशनल टॉप ट्रेंड में रहे। जनभागीदारी: वाराणसी के विभिन्न मार्गों पर निकाली गई लोक कला यात्राओं ने 15 हजार से अधिक नागरिकों को सीधे जोड़ा। प्रदर्शनी के माध्यम से 20 हजार से अधिक लोगों ने भारतीय ज्ञान परंपरा का अवलोकन किया। काल गणना का भारतीय विज्ञान: विक्रमादित्य वैदिक घड़ी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उ.प्र. के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बाबा विश्वनाथ मंदिर के लिये 'विक्रमादित्य वैदिक घड़ी' भेंट की। यह घड़ी केवल समय बताने का यंत्र नहीं है, बल्कि यह हमारे ऋषियों की सूक्ष्म गणना और भारतीय पंचांग की शुद्धता का प्रतीक है। काशी विश्वनाथ मंदिर प्रांगण में इस घड़ी की स्थापना यह संदेश देती है कि भारत अब पश्चिम के 'ग्रीनविच' के बजाय अपने स्वयं के काल-बोध से दुनिया को दिशा दिखाएगा। योगी आदित्यनाथ ने इस घड़ी की प्रशंसा करते हुए इसे 'भारत की प्राचीन वैज्ञानिक समृद्धि का जीवंत प्रतीक' बताया। मध्यप्रदेश का सांस्कृतिक वैभव और पेवेलियन आयोजन स्थल पर स्थापित 'मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड' का पेवेलियन काशीवासियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। यहाँ आधुनिक तकनीक और प्राचीन कला का अनूठा संगम देखा गया। वी.आर. बॉक्स: वर्चुअल रियलिटी के माध्यम से आगंतुकों ने वाराणसी में बैठे-बैठे खजुराहो के मंदिरों, सांची के स्तूपों और ओरछा की भव्यता का अनुभव किया। प्रदर्शनी: 'आर्ष भारत' प्रदर्शनी के माध्यम से भारतीय ऋषि-वैज्ञानिकों के योगदान को दर्शाया गया। इसमें शिव पुराण, चौरासी महादेव और सम्राट विक्रमादित्य के अयोध्या से संबंध को लेकर जो साक्ष्य प्रस्तुत किए गए, वे नई पीढ़ी के लिए ज्ञान का खजाना साबित हुए। हस्तशिल्प और कला: बुंदेलखंडी पेंटिंग्स, जनजातीय कला और मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध हैंडलूम-हैंडीक्राफ्ट के स्टॉल्स पर सैलानियों की भारी भीड़ उमड़ी। 'माँ की रसोई': स्वाद का आध्यात्मिक सफर किसी भी उत्सव की पूर्णता भोजन से होती है। 'माँ की रसोई' के तहत मध्यप्रदेश के … Read more

जमशेदपुर में नई पहल, बुके के बजाय किताब और पौधों से होगा स्वागत और फिजूलखर्ची पर लगेगी रोक

जमशेदपुर जमशेदपुर स्थित मानगो नगर निगम की नवनिर्वाचित मेयर सुधा गुप्ता ने पदभार ग्रहण करते ही सादगी और सेवा की अनूठी मिसाल पेश की है. सोमवार को उन्होंने नगर निगम के उप नगर आयुक्त कृष्ण कुमार को पत्र लिखकर अपनी सभी सरकारी सुविधाओं में कटौती करने का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि वह नगर निगम में सुविधाओं का लाभ लेने नहीं, बल्कि जनता की सेवा करने आई हैं. तत्काल प्रभाव से वापस ली जाएं गाड़ी मेयर सुधा गुप्ता ने अपने पत्र में कहा है कि उनके लिए आवंटित सरकारी गाड़ी को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए. उन्होंने घोषणा की है कि वह जनसेवा का कार्य अपने प्राइवेट गाड़ी से ही करेंगी. इसके अलावा, उन्होंने निगम के कार्यक्रमों में फिजूलखर्ची रोकने के लिए गुलदस्ता परिपाटी को खत्म करने को कहा है. अब अतिथियों का स्वागत बुके के बजाय पौधे या किताब देकर किया जाएगा. मेयर ने मानदेय का किया परित्याग मेयर पद के लिए मिलने वाले मासिक मानदेय को सुधा गुप्ता ने स्वेच्छा से त्याग दिया है. यह राशि अब मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा होगी. उन्होंने अपने पत्र में कार्यालय के लिए किसी विशेष सजावट या अतिरिक्त फंड के खर्च पर रोक लगाने की बात कही है. उन्होंने सादगीपूर्ण कार्यस्थल की इच्छा जतायी है. उन्होंने कहा है कि टैक्स पेयर्स के पैसे का दुरुपयोग किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. मेयर ने निगम के सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे भी इसी सेवा भाव के साथ कार्य करें और जनहित को प्राथमिकता दें. फिजूलखर्ची की निगम में जगह नहीं: सुधा गुप्ता उन्होंने कहा कि मैं इस पद पर सेवा भाव से कार्य करने आई हूं न कि सुविधाओं का लाभ लेने के लिए. जनता के पैसे का एक-एक पाई सिर्फ विकास कार्यों में खर्च होना चाहिए. दिखावे और फिजूलखर्ची की निगम में कोई जगह नहीं होगी.

हरपाल सिंह चीमा का बयान-टैक्स चोरी पर कड़ी कार्रवाई, करोड़ों की वसूली और भारी जुर्माना

पंजाब में टैक्स चोरी पर सख्ती, 1137 करोड़ वसूली, 1383 करोड़ जुर्माना; चीमा बोले प्रवर्तन में बड़ा बदलाव चंडीगढ़. पंजाब सरकार की टैक्स चोरी के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति को दोहराते हुए, वित्त, योजना, आबकारी और कर मंत्री हरपाल चीमा ने आज यहां घोषणा की कि पंजाब सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रवर्तन के क्षेत्र में रिकॉर्ड परिणाम हासिल किए हैं, जो खुफिया जानकारी आधारित कार्रवाई और राजस्व सुरक्षा की दिशा में एक निर्णायक बदलाव को दर्शाते हैं। कारगुजारी का विवरण देते हुए वित्त मंत्री ने कहा, “स्टेट इंटेलिजेंस एंड प्रिवेंटिव यूनिट्स की लक्षित और खुफिया जानकारी आधारित कार्रवाई के कारण राज्य के कर विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 1,383.11 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाया। इसमें से 1,137.85 करोड़ रुपये की वसूली पहले ही की जा चुकी है, जो प्रवर्तन की दक्षता और राजस्व संग्रह में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।” इस सफलता की आधारशिला के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “निरीक्षण आधारित प्रवर्तन ने मुख्य भूमिका निभाई, जिसमें 1,215.95 करोड़ रुपये का जुर्माना और 972.15 करोड़ रुपये की वास्तविक वसूली शामिल है। इसके अलावा, सड़क चेकिंग अभियानों ने 165.71 करोड़ रुपये का योगदान दिया। यह प्रदर्शन वित्तीय वर्ष 2024-25 की तुलना में कई गुना सुधार को दर्शाता है। वर्ष 2024-25 में निरीक्षण प्रवर्तन के तहत 147.28 करोड़ रुपये का जुर्माना और 41.53 करोड़ रुपये की वसूली हुई थी, जबकि सड़क चेकिंग से 157.14 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे। वर्ष 2025-26 में यह उल्लेखनीय वृद्धि राज्य की जांच, प्रवर्तन और वास्तविक राजस्व संग्रह क्षमता में बड़े बदलाव को उजागर करती है।” एक साल में 8 एफआईआर दर्ज, 15 गिरफ्तारियां हुईं धोखेबाज नेटवर्करों पर सख्ती का उल्लेख करते हुए वित्त मंत्री ने कहा, “कर विभाग ने वर्ष भर में 8 एफआईआर दर्ज कीं और 15 गिरफ्तारियां कीं। दो प्रमुख मामलों में सात व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आई और 385 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी लेन-देन का पर्दाफाश हुआ। इन लक्षित कार्रवाइयों से बिना वास्तविक आपूर्ति के फर्जी इनवॉइस जारी करने वाली फर्मों द्वारा 69.57 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी उजागर हुई।” उन्होंने आगे कहा, “माल की अवैध ढुलाई और फर्जी बिलिंग नेटवर्क के खिलाफ बठिंडा, मंडी गोबिंदगढ़, लुधियाना और चंडीगढ़ में अन्य एफआईआर दर्ज की गईं। एक महत्वपूर्ण कार्रवाई में 9 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट पास करने के आरोप में लुधियाना के एक संचालक को गिरफ्तार किया गया।” 1,579 संदिग्ध डीलरों की पहचान हुई उन्होंने बताया, “विभाग के आधुनिक खुफिया नेटवर्क ने कई बड़े खुलासे किए, जिनमें लुधियाना में सोने के लेन-देन में 900 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग, मोहाली, खरड़ और कोटकपूरा में कोयले के अवैध लेन-देन में 226 करोड़ रुपये, और लुधियाना व मंडी गोबिंदगढ़ में सक्रिय 423 करोड़ रुपये के फर्जी बिलिंग नेटवर्क शामिल हैं। इसके अलावा, जांच के दौरान ‘पेट पूजा ऐप’ से जुड़े 200 करोड़ रुपये के घोटाले का भी पर्दाफाश हुआ, जो आधुनिक टैक्स चोरी नेटवर्क की जटिलता और व्यापकता को दर्शाता है।” वेरिफिकेशन अभियानों के बारे में उन्होंने कहा, “केंद्रित जांच के दौरान 1,579 संदिग्ध डीलरों की पहचान की गई। कड़ी जांच के बाद इनमें से 922 इकाइयों का अस्तित्व ही नहीं पाया गया और केंद्र सरकार के साथ समन्वय कर उनकी पंजीकरण रद्द कर दी गई।” आईटीसी नियंत्रण उपायों पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “मजबूत नियंत्रण उपायों के चलते 244.82 करोड़ रुपये को सक्रिय रूप से ब्लॉक किया गया और 206.64 करोड़ रुपये की रिकवरी सुनिश्चित की गई। इन कदमों से अतिरिक्त 19.08 करोड़ रुपये की नकद वसूली के साथ कुल 451.46 करोड़ रुपये राज्य के खजाने में सुरक्षित किए गए।” एक दिन में 141 वाहन किए गए जब्त फील्ड प्रवर्तन में तेजी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “मंडी गोबिंदगढ़ और लुधियाना में एक साथ चलाए गए विशेष अभियान के दौरान एक ही दिन में रिकॉर्ड 141 वाहनों को जब्त किया गया। विभाग ने आयरन एंड स्टील, सीमेंट, ऑटो पार्ट्स, तंबाकू और धातु जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखते हुए रेलवे स्टेशनों और प्रमुख ट्रांजिट पॉइंट्स पर भी प्रवर्तन मजबूत किया।” संस्थागत और तकनीकी दक्षता को सफलता का श्रेय देते हुए उन्होंने कहा, “स्टेट इंटेलिजेंस एंड प्रिवेंटिव यूनिट, टैक्स इंटेलिजेंस यूनिट और ‘बिल लाओ इनाम पाओ’ योजना की भूमिका महत्वपूर्ण रही। आधुनिक डेटा विश्लेषण, रियल-टाइम ई-वे बिल ट्रैकिंग, सतत खुफिया जानकारी और नए डिजिटल प्रवर्तन पोर्टल्स ने इस सफलता में अहम योगदान दिया है। इन तकनीकी सुधारों ने जमीनी स्तर पर तेज और समन्वित कार्रवाई को संभव बनाया है।” चीमा ने कहा, “वित्तीय वर्ष 2025-26 का प्रदर्शन पंजाब में कर अनुपालन और राजस्व संग्रह को मजबूत करने की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम है। धोखाधड़ी नेटवर्क को समाप्त करने, ईमानदार व्यापारिक प्रथाओं को बढ़ावा देने, करदाताओं के हितों की रक्षा करने और राज्य के राजस्व को सुरक्षित रखने के लिए ऐसी कार्रवाई आगे भी और तेज गति से जारी रहेगी।”

रेल मार्ग से दुर्लभ प्रजाति के वन्यजीवों की तस्करी का बड़ा नेटवर्क एक्सपोज

भोपाल.  स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स, भोपाल ने ट्रेन के प्रथम श्रेणी एसी कोच से दुर्लभ और प्रतिबंधित प्रजाति के वन्यजीवों की तस्करी में शामिल एक संगठित गिरोह के सरगना रविन्द्र उर्फ रमन कश्यप को उत्तर प्रदेश एसटीएफ की सहायता से लखनऊ से गिरफ्तार किया है। आरोपी लंबे समय से फरार था और उस पर इनाम घोषित किया गया था। वह पिछले दो महीनों से लगातार अपनी लोकेशन बदलकर जांच एजेंसियों को चकमा दे रहा था। आरोपी को विशेष न्यायालय में पेश कर वन विभाग की रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। मामले की जांच जारी है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव), मध्यप्रदेश के निर्देशन में मुखबिर से प्राप्त सूचना के आधार पर ट्रेन नं. 19322, पटना–इंदौर एक्सप्रेस के एसी फर्स्ट कोच में स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स, भोपाल, रेलवे सुरक्षा बल और वनमंडल भोपाल की संयुक्त टीम ने विगत 3 फरवरी को कार्रवाई की थी। कार्रवाई में संत हिरदाराम नगर स्टेशन से आरोपी अजय सिंह राजपूत को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 311 जीवित दुर्लभ एवं प्रतिबंधित प्रजाति के कछुए बरामद किए गए थे। इस संबंध में 3 फरवरी 2026 को वन अपराध प्रकरण पंजीबद्ध किया गया था। प्रकरण की जांच के दौरान वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर प्रदेश के नीमच, मंदसौर, रतलाम, इंदौर, देवास, उज्जैन, नागदा और शाजापुर सहित उत्तर प्रदेश के लखनऊ में एक साथ छापामार कार्रवाई की गई। पकड़े गये आरोपियों से पूछताछ में गिरोह के सरगना के रूप में रविन्द्र उर्फ रमन कश्यप का नाम सामने आया। जांच में सामने आया कि यह संगठित गिरोह रेल मार्ग के जरिए लंबे समय से दुर्लभ प्रजाति के जलीय वन्यजीवों की तस्करी में लिप्त था। गिरोह में पेट शॉप संचालक, पेट पैरेंट, डॉग ब्रीडर और रेल के एसी फर्स्ट कोच के अटेंडेंट भी शामिल थे। इस मामले में मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों से अब तक सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जांच जारी है। कार्रवाई के दौरान चार अलग-अलग प्रजातियों के कुल 313 जीवित दुर्लभ एवं प्रतिबंधित कछुए—इंडियन टेंट टर्टल, इंडियन रूफ्ड टर्टल, क्राउनड रिवर टर्टल और स्टार टॉर्टोइस—बरामद किए गए। इसके अलावा रोज-रिंग्ड पैराकीट प्रजाति के दो तोते भी जब्त किए गए। आरोपियों के पास से एक मोटरसाइकिल और सात मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं।  

रिश्तों की कड़वाहट हुई खत्म, नोएडा में परिवार के साथ रह रहे ज्योति और आलोक मौर्या

प्रयागराज यूपी की पीसीएस अधिकारी ज्योति मौर्या और उनके पति आलोक मौर्या के बीच विवाद याद है न, अब इस विवाद का सुखद अंत हो गया है। दोनों के बीच करीब ढाई साल तक चले विवाद में समझौता हो गया है। दोनों एकसाथ रहने को तैयार हो गए हैं। आलोक मौर्य UPPCS के साक्षात्कार तक पहुंचे मिल रही जानकारी के मुताबिक, ढाई साल बाद दोनों में समझौता हो गया है और दोनों साथ रह रहे हैं। ज्योति मौर्या का प्रमोशन हो गया है और वह इस समय नोएडा में पोस्टेड है। वहीं, आलोक मौर्य अपना और परिवार का भविष्य संवारने में जुट गए हैं। साथ ही वह प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। इस बार आलोक यूपीपीसीएस के साक्षात्कार तक पहुंचे थे, लेकिन वह अंतिम सूची से बार हो गए थे। ज्योति मौर्या और आलोक मौर्य की 2010 में हुई शादी ज्योति मौर्या और आलोक मौर्या की शादी 2010 में हुई थी। शादी के बाद शुरुआत में कुछ दिनों तक सबकुछ सामान्य रहा। इस बीच 2015 में ज्योति मौर्या का चयन पीसीएस में हो गया। एसडीएम के रूप में जिम्मेदारी संभाली। एसडीएम बनने के बाद ज्योति मौर्या और आलोक मौर्या के रिश्तों में दरार आनी शुरू हो गई। जहां ज्योति मौर्या एसडीएम के पद पर काम कर रही थीं तो वहीं आलोक पंचायती राज विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में काम कर रहे थे। ढाई साल बाद विवाद खत्म आलोक मौर्या ने दावा किया था कि उन्होंने अपनी पत्नी की पढ़ाई में पूरी सहायता की, लेकिन एसडीएम बनने के बाद ही उन्हें नजरअंदाज करना शुरू कर दिया। दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर कई गंभीर आरोप लगाए। करीब ढाई साल तक चले विवाद के बाद अब दोनों एकसाथ आ गए हैं। बताया जा रहा है कि परिवार और करीबी लोगों की पहल के बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई। अंतत: दोनों एकसाथ आने के लिए राजी हो गए। दोनों इस समय नोएडा में परिवार के साथ रह रहे हैं।  

बिजली बिल समाधान योजना बनी संजीवनी, धमतरी के परिवारों को मिली आर्थिक राहत

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा शुरू की गई मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026 प्रदेश के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए संजीवनी साबित हो रही है। धमतरी जिले में इस योजना का व्यापक असर देखने को मिल रहा है, जहाँ हजारों उपभोक्ता वर्षों पुराने बिजली बिल के बोझ से मुक्त होकर विकास की मुख्यधारा में लौट रहे हैं। संकट में सहारा- विशाल परिवार की बदली किस्मत धमतरी निवासी बी. एस. विशाल के परिवार के लिए बिजली का बकाया बिल एक मानसिक तनाव बन चुका था। सीमित आय और पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते बिल की राशि बढ़ती गई, जिससे बिजली कटने का डर हमेशा बना रहता था। जब शासन की समाधान योजना की घोषणा हुई, तो उनके पुत्र डेनियल विशाल ने विभागीय शिविर में संपर्क किया। मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026  की प्रक्रिया इतनी सरल थी कि उन्हें जल्द ही योजना का लाभ मिला। डेनियल ने बताया कि बकाया मूल राशि में भारी छूट और सरचार्ज की शत-प्रतिशत माफी ने हमारे परिवार को नई शुरुआत करने का मौका दिया है। अब हम नियमित रूप से बिल चुकाने की स्थिति में हैं। यह योजना हम जैसे आम लोगों के लिए मुख्यमंत्री का बड़ा उपहार है। धमतरी जिले में योजना की शानदार सफलता विद्युत विभाग द्वारा जारी ताजा आँकड़ों के अनुसार, जिले में योजना को लेकर जबरदस्त उत्साह है। इस योजना के लिए अब तक 4,652 पात्र उपभोक्ताओं की पहचान की जा चुकी है। इसमें से 4,115 उपभोक्ताओं ने ऑफलाइन माध्यम से आवेदन की प्रक्रिया पूरी कर ली है। आवेदन के बाद  537 परिवारों को पहले ही बकाया मुक्त कर प्रत्यक्ष लाभ दिया जा चुका है। किसे, कितना और कैसे मिलेगा लाभ योजना की रूपरेखा इस तरह तैयार की गई है कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक इसका फायदा पहुँचे। गरीबी रेखा से नीचे के उपभोक्ता को बकाया मूल राशि पर अधिकतम 75 प्रतिशत तक की भारी छूट दिया जा रहा है। इसी तरह घरेलू एवं कृषि उपभोक्ता को मूल बकाया राशि में 50 प्रतिशत तक की राहत दिया जा रहा है। सभी पात्र श्रेणियों के लिए लेट पेमेंट सरचार्ज (अधिभार) को 100 प्रतिशत माफ कर दिया गया है। उपभोक्ता को केवल 10 प्रतिशत प्रारंभिक राशि जमा करनी होगी, जिसके बाद शेष राशि को वह अपनी सुविधा अनुसार निर्धारित किस्तों में जमा कर सकता है। 30 जून तक सुनहरा अवसर यह योजना 12 मार्च 2026 से शुरू होकर 30 जून 2026 तक प्रभावी रहेगी। विद्युत विभाग द्वारा गांव-गांव और वार्डों में विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति जानकारी के अभाव में छूट न जाए। जनसंपर्क माध्यमों और स्थानीय मुनादी के जरिए भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जनहित की दिशा में एक बड़ा कदम मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना केवल एक वित्तीय रियायत नहीं है, बल्कि यह सुशासन की उस सोच का प्रतीक है जहाँ सरकार अपने नागरिकों की बुनियादी समस्याओं को संवेदनशीलता से हल करती है। इस पहल से न केवल बिजली विभाग के राजस्व में सुधार होगा, बल्कि प्रदेश के हजारों घरों में फिर से खुशहाली की रोशनी फैलेगी।

नोएडा अथॉरिटी का 10274 करोड़ का बजट पास, न्यू नोएडा के किसानों को मिलेगा यमुना अथॉरिटी के बराबर मुआवजा

नोएडा  गौतमबुद्ध नगर जिले में नोएडा अथॉरिटी की बोर्ड बैठक सोमवार को संपन्न हुई। इस बैठक में सेक्टर-150 स्थित स्पोर्ट्स सिटी एससी-2 प्लॉट (300 एकड़) के संशोधित लेआउट प्लान को नोएडा अथॉरिटी की बोर्ड बैठक में मंजूरी। इससे 40 हजार फ्लैट बायर्स के फंसे हुए फ्लैटों के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।  अब निर्माण शुरू हो सकेगा। 2022 में नोएडा अथॉरिटी ने स्पोर्ट्स सिटी का लेआउट प्लान निरस्त कर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नोएडा अथॉरिटी के बैठक में संशोधित लेआउट प्लान को मंजूरी दी गई है। 9000 करोड़ के घोटाले में स्पोर्ट्स सिटी में सीबीआई और ईडी की जांच चल रही है। इसके अलावा भी नोएडा में फंसी हुई दो अन्य स्पोर्ट्स सिटी के रुके हुए निर्माण से रोक हट गई है। सुप्रीम कोर्ट के इस रिजॉल्यूशन प्लान को बाकी दो स्पोर्ट्स सिटी को रिवाइव करने के लिए भी लागू किया जाएगा। नोएडा अथॉरिटी फैसले     न्यू नोएडा में किसानों को दिया जाने वाला मुआवजा दर तय, किसानों को जमीन अधिग्रहण के दौरान मुआवजा यमुना अथॉरिटी के बराबर 4300 की दर से दिया जाएगा।     आगामी वित्त वर्ष के लिए नोएडा अथॉरिटी के विकास कार्यों के लिए 10274 करोड़ का बजट मंजूर किया गया। पिछले साल की अपेक्षा और बजट बढ़ा है।     मिक्स लैंड यूज पॉलिसी को बोर्ड ने स्वीकार कर लिया है। 10 प्रतिशत का कंवर्जन चार्ज देकर लैंड यूज चेंज कराया जा सकेगा।     दलित प्रेरणा स्थल की मरम्मत कराने के लिए 92 करोड़ का बजट बोर्ड ने मंजूर किया।     अग्निशमन विभाग को मशीनें खरीदने के लिए 154 करोड़ का बजट नोएडा अथॉरिटी ने पास किया है। बोर्ड ने हरी झंडी दे दी है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया गीता भारती का विमोचन

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समत्व भवन में पंडित मुस्तफा आरिफ उज्जैन की पुस्तक 'गीता भारती' का विमोचन किया। इस पुस्तक में भगवद गीता के श्लोक 'हिन्दी मुक्तक' के रूप में लिखकर संकलित किए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लेखक को इस काव्य सृजन के लिए बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को पंडित मुस्तफा आरिफ ने इस पुस्तक की रचना के बारे में बताया कि जहां धर्म है, वहां कर्म सर्वोपरि है। इसी कारण सभी धर्म- प्रधान हैं। कुरान शरीफ की 6666 आयतों पर 10 हजार हिंदी पद रचने के बाद परमात्मा-प्रदत्त सदबुद्धि ने उन्हें कर्म- आधारित धर्म ग्रंथों की ओर मोड़ा है। श्रीमद भगवद्गीता के कर्म-दर्शन ने उन्हें गहराई से प्रेरित किया। उनकी लेखनी परमात्मा की कृपा से गीतामय होकर शोध-यात्रा पर निकली, जिसकी परिणति श्रीमद भगवद्गीता के 700 संस्कृत श्लोकों पर 786 हिंदी मुक्तकों में हुई। पं. आरिफ ने बताया कि यह ग्रंथ सनातन हिंदू दर्शन को आत्मसात करने का अभिनव अनुभव रहा है, जो भारत की संस्कृति और अनेकता में एकता की परम्परा को जन-जन तक पहुंचाने की प्रेरणा देता है। पुस्तक में गीता के गहन संदेश- कर्मयोग, भक्तियोग, ज्ञानयोग और मोक्ष को 786 भावपूर्ण हिंदी मुक्तकों में बांधा गया है। यह हिंदी मुक्तक जीवन की जटिलताओं में स्पष्ट करते हैं। मुक्तकों के प्रत्येक छंद सरल भाषा में रचे गए हैं, जिससे साधारण व्यक्ति गीता का सार समझ सके। पं. आरिफ का विश्वास है कि हिंदू और इस्लामी ग्रंथों में कई समानताएं हैं, जैसे दोनों ईश्वरीय प्रेरणा पर जोर देते हैं। इन ग्रंथों का अध्ययन शोध की भी अनंत संभावनाएं खोलने में सहायक है। भारत के विश्व गुरू होने के जो आधार हैं, वे भी अध्ययन के फलस्वरूप स्पष्ट होते हैं।