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हज यात्रियों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी,निजी स्तर पर कुर्बानी और खाना बनाने पर रोक, ‘नुसुक मसार’ पोर्टल हुआ अनिवार्य

रांची   मुकद्दस हज यात्रा पर जाने वाले जायरीनों के लिए इस बार सफर की राह काफी अलग और हाइटेक नजर आएगी. 20-21 अप्रैल से विधिवत शुरू होने वाली इस यात्रा के लिए हज कमेटी ऑफ इंडिया ने नए और कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं. मदरसा फैजुल उलूम से हज यात्रा पर जाने वाले आजमीन ए हज की उड़ान 20-21 को होगी. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, विशेषकर ईरान और इजरायल के बीच जारी टकराव को देखते हुए भारत सरकार ने “हज यात्रा 2026” को पूरी तरह डिजिटल और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने का निर्णय लिया है. इस बार पूरी व्यवस्था को सेंट्रलाइज्ड कर दिया गया है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर पल-पल की नजर रखी जा सके. हज कमेटी ने सभी को निर्देश दिया है कि वे अपने स्मार्ट बैंड को हमेशा चार्ज रखें और यात्रा के दौरान इसे अनिवार्य रूप से पहनें. एआइ बैंड: यात्रियों के लिए बनेगा सुरक्षा कवच इस बार हज यात्रियों को पारंपरिक सुविधाओं के साथ-साथ अत्याधुनिक एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) तकनीक से लैस “स्मार्ट बैंड” दिया जाएगा. यह डिवाइस प्रत्येक यात्री के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करेगी. इस बैंड में एक विशेष ‘इमरजेंसी बटन’ दिया गया है. यदि कोई यात्री भीड़ में खो जाता है या अचानक उसकी तबीयत खराब होती है, तो इस बटन को दबाते ही कंट्रोल रूम को तुरंत अलर्ट मिल जाएगा. इससे रिस्पॉन्स टीम बेहद कम समय में जायरीन तक पहुंच सकेगी. लोकेशन और हेल्थ मॉनिटरिंग की सुविधा यह स्मार्ट बैंड यात्रियों की रियल-टाइम लोकेशन ट्रैक करेगा. हज के दौरान भारी भीड़ में अक्सर लोग अपने समूह से बिछड़ जाते हैं, जिसे अब इस तकनीक की मदद से तुरंत ढूंढा जा सकेगा. साथ ही यह डिवाइस यात्रियों के ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट और ऑक्सीजन लेवल जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मानकों की भी निगरानी करेगा. तबीयत बिगड़ने की स्थिति में मेडिकल टीम को पहले ही सूचना मिल जाएगी, जिससे समय रहते उपचार शुरू किया जा सके. निजी स्तर पर कुर्बानी और खाना बनाने पर रोक व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव कुर्बानी को लेकर किया गया है. अब कोई भी हाजी निजी स्तर पर बाजार से जानवर खरीदकर कुर्बानी नहीं दे सकेगा. सऊदी अरब सरकार ने ‘फोटो वाली ठगी’ और गंदगी को रोकने के लिए ‘नुसुक मसार पोर्टल’ अनिवार्य कर दिया है. अब केवल आधिकारिक ‘अदाही प्रोजेक्ट’ के माध्यम से ही ऑनलाइन बुकिंग होगी. इसके अलावा, कैंपों में आग लगने के खतरे को देखते हुए खुद खाना बनाने पर पाबंदी लगा दी गई है. यात्रियों को अपने साथ कम से कम 3000 सऊदी रियाल रखना अनिवार्य होगा, जो उनके भोजन और अन्य निजी खर्चों के लिए तय किया गया है. किस्त जमा करने की डेडलाइन समाप्त हज मास्टर ट्रेनर हाजी युसूफ के अनुसार, तीसरी और अंतिम किस्त (17,290 रुपये) जमा करने की अंतिम तिथि 6 अप्रैल 2026 थी, जो अब समाप्त हो चुकी है. हज यात्रा का कुल खर्च लगभग 3.52 लाख रुपये निर्धारित है. जिन यात्रियों ने समय पर भुगतान पूरा कर लिया है, उन्हीं का फ्लाइट कन्फर्मेशन बहाल रहेगा. एम्बारकेशन प्वाइंट पर 24 घंटे पूर्व रिपोर्टिंग अनिवार्य झारखंड राज्य हज समिति ने हज 2026 के चयनित जायरीनों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं. हज कमेटी ऑफ इंडिया के सर्कुलर नंबर 34 के आलोक में जारी इन निर्देशों के अनुसार, इस बार यात्रियों को अपना मूल पासपोर्ट किसी कार्यालय में जमा करने के बजाय स्वयं अपने पास सुरक्षित रखना होगा. एम्बारकेशन प्वाइंट (प्रस्थान स्थल) पर रिपोर्टिंग के समय मूल पासपोर्ट प्रस्तुत करने पर ही यात्रा दस्तावेज जारी किए जाएंगे. पासपोर्ट की वैधता 31 दिसंबर 2026 तक होनी चाहिए और उसमें कम से कम दो खाली पेज होने अनिवार्य हैं. स्मार्ट वॉच और हज किट के लिए नियम तय सभी हज यात्रियों को एम्बारकेशन प्वाइंट से ही ‘हज किट’ प्रदान की जाएगी, जिसमें आईडी कार्ड, वीजा और एआई तकनीक से लैस स्मार्ट वॉच शामिल होगी. कवर हेड अपनी टीम के सभी सदस्यों की किट प्राप्त कर सकता है. यदि कोई अन्य व्यक्ति किट लेने जाता है, तो उसे अपना मूल आधार कार्ड और हस्ताक्षरित प्राधिकरण पत्र (अनेक्सचर-1) दिखाना होगा. यात्रियों को अपनी फ्लाइट बुकिंग की पुष्टि ‘हज सुविधा ऐप’ या पोर्टल के माध्यम से करनी होगी और उसकी रसीद सुरक्षित रखनी होगी. हज सुविधा ऐप इंस्टॉल करना अनिवार्य कार्यपालक पदाधिकारी आफताब अहमद ने बताया कि सभी यात्रियों के लिए मोबाइल में ‘हज सुविधा ऐप’ इंस्टॉल करना अनिवार्य कर दिया गया है. जिला खादिमुल हुज्जाज और ट्रेनर्स को निर्देश दिया गया है कि वे अपने जिलों के यात्रियों को यह ऐप डाउनलोड कराएं और इसकी सूची राज्य समिति को उपलब्ध कराएं. प्रस्थान स्थल पर यात्रियों को कम से कम 24 घंटे पहले रिपोर्ट करना होगा, जबकि सीधे एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को 6 घंटे पहले पहुंचना अनिवार्य होगा. आधिकारिक ‘नुसुक मसार’ पोर्टल के माध्यम से ही अदाई प्रोजेक्ट का हिस्सा बनना होगा. यात्रियों को चेक लिस्ट के अनुसार मूल पासपोर्ट, स्वास्थ्य कार्ड, टीकाकरण प्रमाण पत्र, भुगतान रसीद और हस्ताक्षरित फ्लाइट कन्फर्मेशन रसीद अपने साथ रखनी होगी. किसी भी प्रकार की त्रुटि होने पर यात्री तुरंत राज्य हज समिति से संपर्क कर सकते हैं.

सरिस्का टाइगर रिजर्व, बाघों की सुरक्षा के लिए बनेगा नया STR-2 प्रभाग और बढ़ेगा दायरा

जयपुर  राजस्थान की राजधानी जयपुर और इसके आसपास के जंगलों की तस्वीर अब बदलने वाली है। वन्यजीवों की सुरक्षा को और अधिक पुख्ता करने और प्रशासनिक कामकाज में तेजी लाने के लिए वन विभाग ने एक व्यापक पुनर्गठन योजना तैयार की है। इस मास्टरप्लान के तहत जयपुर के मशहूर वन्यजीव पर्यटन स्थलों को मिलाकर एक स्वतंत्र वन प्रभाग बनाने का प्रस्ताव है, जिससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि लेपर्ड और अन्य वन्यजीवों की निगरानी भी अधिक विशेषज्ञता के साथ हो सकेगी। झालाना और नाहरगढ़ का नया 'प्रशासनिक अवतार' प्रस्ताव के अनुसार, जयपुर के गौरव झालाना लेपर्ड रिजर्व, नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क, नाहरगढ़ वन्यजीव अभयारण्य और हाथी गांव को एक साथ जोड़कर एक स्वतंत्र वन प्रभाग बनाया जाएगा। इस प्रभाग की कमान भारतीय वन सेवा के एक समर्पित अधिकारी के हाथों में होगी। 200 वर्ग किलोमीटर से अधिक फैले इस क्षेत्र में वन्यजीव प्रबंधन, रेस्क्यू ऑपरेशन और पर्यटन प्रशासन की जिम्मेदारी इसी प्रभाग की होगी। झालाना और हाथी गांव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन के नक्शे पर आ चुके हैं। एक अलग प्रभाग होने से यहां आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और लेपर्ड के आवास की सुरक्षा अधिक वैज्ञानिक तरीके से हो पाएगी। सरिस्का टाइगर रिजर्व का होगा विस्तार एक अन्य महत्वपूर्ण बदलाव सरिस्का टाइगर रिजर्व को लेकर है। बाघों की बढ़ती संख्या और उनके मूवमेंट को देखते हुए बीलवाड़ी, विराट नगर, थानागाजी और अजबगढ़ के कुछ हिस्सों को मिलाकर एक नया STR-2 प्रभाग बनाने की तैयारी है। अधिकारियों के मुताबिक, सरिस्का के बाघ अक्सर इन क्षेत्रों में निकल आते हैं। इन्हें एक समर्पित यूनिट के तहत लाने से बाघों की ट्रैकिंग आसान होगी और यह क्षेत्र सरिस्का के लिए एक मजबूत 'बफर जोन' का काम करेगा। अवैध खनन पर लगेगी लगाम योजना के तहत दौसा, बांदीकुई, जमवारामगढ़ और रायसर रेंजों को जयपुर वन्यजीव प्रभाग से अलग कर एक नई प्रशासनिक इकाई बनाने का भी सुझाव है। इन क्षेत्रों में पहले अवैध खनन की शिकायतें आती रही हैं। नई इकाई बनने से वन विभाग की टीम अधिक केंद्रित होकर निगरानी कर सकेगी और त्वरित कार्रवाई संभव होगी। 12 से अधिक नई वन रेंज पुनर्गठन की इस लहर में नए प्रस्तावित जिलों में एक दर्जन से अधिक नई वन रेंज बनाने की भी परिकल्पना की गई है। प्रत्येक रेंज की जिम्मेदारी और कार्यक्षेत्र स्पष्ट रूप से परिभाषित होंगे। यह योजना काफी हद तक पूरी हो चुकी है और अब केवल औपचारिक सरकारी मंज़ूरी का इंतजार है।  

जयपुर मेट्रो, प्रहलादपुरा से टोडी मोड़ तक बनेगा 41 KM लंबा कॉरिडोर और बनेंगे 36 नए स्टेशन

जयपुर  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जयपुर मेट्रो के दूसरे चरण (Phase-2) को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। जयपुर मेट्रों के दूसरे चरण में 13037.66 करोड़ रुपए खर्च होंगे। यह परियोजना उत्तर से दक्षिण जयपुर को आपस में जोड़ते हुए शहर की तस्वीर बदल देगी।जयपुर मेट्रो के दूसरे चरण में प्रहलादपुरा से टोडी मोड़ तक 41 किलोमीटर लंबा उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर बनेगा। इस रूट पर कुल 36 स्टेशन बनाए जाएंगे, जो शहर के सबसे व्यस्त इलाकों को कवर करेंगे। इस परियोजना को केंद्र और राजस्थान सरकार के फिफटी-फिफटी भागीदारी वाले संयुक्त उद्यम के रूप में राजस्थान मेट्रो रेल निगम लिमिटेड (RMRCL) पूरा करेगी। जयपुर मेट्रो फेज-2 : इन इलाकों को कवर करेगा कैबिनेट के एक बयान के अनुसार, जयपुर मेट्रो फेज-2 में मेट्रो प्रहलादपुरा से टोडी मोड़ तक दौड़ेगी। फेज-2 में बनने वाला कॉरिडोर सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र, वीकेआईए, जयपुर हवाई अड्डा, टोंक रोड, एसएमएस अस्पताल और स्टेडियम, अंबाबारी और विद्याधर नगर जैसे व्यस्त इलाकों को जोड़ेगा। यहां 36 स्टेशन बनेंगे। इसमें एयरपोर्ट के क्षेत्र में अंडरग्राउंड स्टेशन भी शामिल हैं। यहां इंटरचेंज की भी सुविधा होगी। इसे पहले से चल रहे फेज-1 मेट्रो से जोड़ा जाएगा। इससे पूरे शहर में एक एकीकृत और निरंतर मेट्रो नेटवर्क सुनिश्चित होगा। जयपुर मेट्रो पहले फेज में कहां से कहां तक चलती है? जयपुर में पहले चरण के तहत मेट्रो मानसरोवर से बड़ी चौपर तक, पूर्व-पश्चिम गलियारे पर 11.64 किमी की दूरी तय करती है। इसमें 11 स्टेशन हैं। यह प्रणाली जयपुर के महत्वपूर्ण आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों को केंद्रीय व्यापारिक जिले से जोड़ती है, जो हेरिटेज वॉल सिटी का हिस्सा है। उत्तर-दक्षिण अक्ष पर नियोजित जयपुर मेट्रो का दूसरा चरण मौजूदा गलियारे का पूरक होगा और पूरे शहर में मेट्रो कनेक्टिविटी हो जाएगी। इससे शहर में लगने वाले ट्रैफिक जाम में काफी कमी आएगी। और शहरी में आवागमन में सुधार होगा। जयपुर मेट्रो में हर दिन लगभग 60 हजार यात्री करते हैं सफर वर्तमान में, जयपुर मेट्रो के पहले चरण में प्रतिदिन औसतन लगभग 60 हजार यात्री यात्रा करते हैं। जयपुर मेट्रो पहले चरण में 11.64 किमी के छोटा रूट पर दौड़ रही है। दूसरे चरण के चालू होने के साथ, मेट्रो नेटवर्क में यात्रियों की संख्या में कई गुना वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे जयपुर में सार्वजनिक परिवहन की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी। मेट्रो का काम सितंबर 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य कैबिनेट के बयान के अनुसार, मेट्रो रेल नीति, 2017 के अनुसार, केंद्र और राजस्थान सरकार से इक्विटी समर्थन, ऋण और बहुपक्षीय वित्तपोषण के माध्यम से वित्तपोषण की संरचना की गई है। परियोजना का वित्तपोषण मेट्रो रेल नीति-2017 के तहत केंद्र और राज्य सरकार की इक्विटी, ऋण और बहुपक्षीय फंडिंग के माध्यम से किया जाएगा। सरकार ने इसे सितंबर 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

भारत पेट्रोलियम की नई सुविधा: 5KG गैस सिलेंडर कनेक्शन हुआ आसान

यमुना नगर. विश्व में युद्ध के हालात के बीच देश भर में गैस को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं, कोई गैस की कमी बता रहा है तो कोई अनियमित सप्लाई बता रहा है। इसी बीच भारत पेट्रोलियम ने एक नई शुरुआत करके उन सब चर्चाओं पर विराम लगा दिया है। विभिन्न फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूर, फास्ट फूड की रेहड़ी लगाने वाले लोगों को पिछले कुछ दिनों से गैस की दिक्कत आने लगी थी। उसी के चलते भारत पैट्रोलियम 5 किलो सिलेंडर कनेक्शन की ऐसी योजना लेकर आया है जिससे इन सभी वर्गों को भारी लाभ हो रहा है। 5 किलो सिलेंडर का नया कनेक्शन लेने के लिए सिर्फ आधार कार्ड चाहिए। 5 मिनट में कनेक्शन मिल जाएगा और इसकी सिक्योरिटी भी मात्र एक हजार पर रखी गई है, जबकि ₹600 सिलेंडर भराई का है। विद्या भारत गैस एजेंसी के मालिक प्रवेश कुमार का कहना है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत सरकार और भारत पेट्रोलियम के आभारी हैं, जो ऐसे हालत में यह स्कीम लाए हैं, जिससे फैक्ट्री में काम करने वाले, फास्ट फूड की रेडी लगाने वालों को भारी लाभ हो रहा है। लोगों ने इसके लिए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,भारत सरकार का धन्यवाद करते हुए कहा कि सरकार की इस योजना से उन्हें अब गैस को लेकर किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं है।

नया सिलेबस, गुरुग्राम के स्कूलों में अब एनसीईआरटी की किताबों से होगी पढ़ाई

गुरुग्राम  हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड (एचबीएसई) ने कक्षा दसवीं से बारहवीं तक कई विषयों की पाठ्यपुस्तकें बदल दी है। इस फैसले के बाद गुरुग्राम के सरकारी और निजी स्कूलों को निर्देश जारी दिए गए हैं कि वे नए सत्र से तय की गई किताबों को ही लागू करें। बोर्ड का मानना है कि इससे बच्चों को एक समान और बेहतर शिक्षा सामग्री मिल सकेगी और पढ़ाई का स्तर भी सुधरेगा। बोर्ड का कहना है कि इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य छात्रों को एक समान, गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा सामग्री उपलब्ध कराना है, ताकि उनकी पढ़ाई का स्तर बेहतर हो सके और वे राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए भी बेहतर तरीके से तैयार हो सकें। बदलाव के तहत पंजाबी विषय में नई किताबें जोड़ी गई हैं, जबकि शारीरिक शिक्षा हेल्थ एंड फिजिकल एजुकेशन और ललित कला फाइन आर्ट्स के लिए एनसीईआरटी की किताबों को लागू किया गया है। इससे छात्रों को राष्ट्रीय स्तर के पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ने का मौका मिलेगा। वहीं 11वीं और 12वीं के सैन्य विज्ञान विषय में भी बदलाव किया गया है। वर्जन पाठ्यपुस्तकों में बदलाव छात्रों को बेहतर और अपडेटेड कंटेंट उपलब्ध कराने के लिए किया गया है। इससे न केवल पढ़ाई का स्तर सुधरेगा, बल्कि सभी स्कूलों में एकरूपता भी आएगी।- इंदू बोकन, जिला शिक्षा अधिकारी  

बिलासपुर में खास मुलाकात: तेंदुलकर परिवार ने गांव पहुंचकर जानी लोगों की समस्याएं

लोरमी. क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले महान भारतीय बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का परिवार शनिवार को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले स्थित अचानकमार टाइगर रिजर्व (ATR) के सुदूर वनांचल ग्राम बम्हनी पहुँचा। इस दौरान सचिन तेंदुलकर की पत्नी डॉ. अंजली तेंदुलकर, बेटी सारा तेंदुलकर और बहू सानिया चंडोक तेंदुलकर ने ग्रामीणों से मुलाकात की और क्षेत्र में संचालित शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। मुंगेली जिले के घने जंगलों में बसे इस आदिवासी ग्राम में तेंदुलकर परिवार के पहुँचते ही उत्सुकता और खुशी का माहौल बन गया। स्थानीय महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पुष्प गुच्छ भेंट कर अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया। इस एक दिवसीय दौरे का मुख्य उद्देश्य जनस्वास्थ्य और बच्चों की शिक्षा की जमीनी स्थिति को समझना रहा। क्षेत्र में गनियारी जनस्वास्थ्य समिति द्वारा निःशुल्क शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ संचालित की जा रही हैं। तेंदुलकर परिवार इसी समिति के कार्यों का अवलोकन करने और जमीनी हकीकत जानने के लिए चिकित्सकों की टीम के साथ यहाँ पहुँचा था। दौरे के दौरान डॉ. अंजली तेंदुलकर और सारा तेंदुलकर ने फुलवारी केंद्र का निरीक्षण किया। साथ ही उन्होंने बालवाड़ी पहुँचकर आदिवासी बच्चों से मुलाकात की और उनके रहन-सहन, खान-पान एवं वन क्षेत्र में शिक्षा के स्तर को लेकर स्थानीय समिति के सदस्यों से विस्तार से चर्चा की। तेंदुलकर परिवार की इस यात्रा ने न केवल ग्रामीणों में उत्साह बढ़ाया, बल्कि क्षेत्र में चल रही शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है।

बेमौसम बारिश ने किसानों का चैन छीना, संबल के रूप में खड़ी है सरकार: सीएम योगी

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के कई जनपदों में निरंतर हो रही बारिश पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मौसम विपरीत है, ऐसे में प्रशासनिक अधिकारी निरंतर किसानों के सम्पर्क में रहें। बेमौसम बारिश ने किसानों का चैन छीन लिया है, लेकिन सरकार संबल के रूप में खड़ी है। उन्हें परेशानी नहीं होने दी जाएगी।  सीएम ने मंगलवार को फिर हुई असमय बारिश से किसानों को होने वाली परेशानी के बारे में जिलाधिकारियों से रिपोर्ट मांगी। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी स्वयं किसानों के पास पहुंचें और मातहतों को भी फील्ड में रखें। फसलों के नुकसान का आकलन कराने के साथ समयबद्ध ढंग से मुआवजा दिलाएं। हर हाल में प्रयास करें कि आपदा का असर किसानों पर न्यूनतम हो। जनहानि, पशुहानि, घायलों व प्रभावितों को निश्चित समय में मुआवजा दिलाना सुनिश्चित करें। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने का निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व, कृषि विभाग व बीमा कंपनी फसल नुकसान का तत्काल संयुक्त सर्वे कराकर शासन को अवगत कराएं, जिससे किसानों को तत्काल मुआवजा दिलाया जा सके।  मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि निरंतर फील्ड में रहें, वस्तुस्थिति का जायजा लें और प्रभावित क्षेत्रों में फसलों को हुए नुकसान का वास्तविक आकलन कराएं, जिससे किसानों को समय पर उचित सहायता मिल सके। मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव (कृषि) व राहत आयुक्त को निर्देश दिया कि फील्ड में कार्यरत अधिकारियों से सीधा संपर्क करें और समन्वय बनाएं। सभी सूचनाएं समय पर एकत्र कर शासन को उपलब्ध कराई जाए, जिससे राहत कार्य भी समय से हो सके।

विद्युत विभाग को झटका, बस्ती उपभोक्ता आयोग ने 3 दिन में कनेक्शन जोड़ने का दिया आदेश

लखनऊ उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में एक उपभोक्ता को उपभोक्ता आयोग से बड़ी राहत मिली है। बस्ती जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश अमरजीत वर्मा, सदस्य अजय प्रकाश सिंह की पीठ ने विद्युत विभाग के एक मामले में आदेश देते हुए कहा है कि बिना उपभोक्ता की सहमति से स्मार्ट मीटर नहीं लगाया जा सकता है। न्यायाधीश ने मैनेजिंग डायरेक्टर उत्तर प्रदेश पॉवर कॉरपोरेशन को पत्र लिख कर उपभोक्ता आयोग में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने को कहा है। न्यायालय के समक्ष रामगोपाल बनाम उपखंड अधिकारी विद्युत का मामला सुनवाई के लिए प्रस्तुत हुआ। इस मामले में परिवाद दाखिल करते समय ही रामगोपाल की तरफ से उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 38 उप धारा 8 के तहत स्थगन प्रार्थना पत्र दिया गया था। आयोग ने अपने शक्तियों का प्रयोग कर स्थगन आदेश जारी किया था। दौरान मुकदमा उपभोक्ता का कनेक्शन न काटे जाने का भी आदेश दिया गया था। परंतु 27 मार्च को मनमाने तरीके से कनेक्शन काट दिया गया। अदालत में उपस्थित होकर विद्युत विभाग की तरफ से कहा गया कि परिवादी के घर पर स्मार्ट मीटर लगाया गया था। बैलेंस नहीं होने पर स्मार्ट मीटर में बिजली स्वतः कट जाती है। तीन दिनों में कनेक्शन जोड़कर कोर्ट को सूचित करने का आदेश न्यायालय ने दोनों पक्ष की सुनने के बाद कहा कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47 की उप धारा 5 में जो व्यवस्था दी गई है। उसके अनुसार उपभोक्ता की सहमति के बिना उसके परिसर में स्मार्ट मीटर नहीं लगाया जा सकता है। आयोग ने तीन दिनों में विद्युत कनेक्शन जोड़कर अदालत को सूचित करने का आदेश दिया है। सोमवार को नियामक ने प्रीपेड मीटर अनिवार्य नहीं का जारी किया था गाइडलाइन बता दें कि इससे पहले उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष ने सोमवार को कानपुर में महत्वपूर्ण गाइडलाइन की है। नियामक आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि स्मार्ट मीटर लगाना अनिवार्य है, लेकिन मीटर को प्रीपेड करने से पहले उपभोक्ता की सहमति जरूरी है। आयोग ने यह भी कहा है कि अगर उपभोक्ता प्रीपेड मीटर नहीं लगवाना चाहता है तो उसका स्मार्ट मीटर पोस्टपेड ही रहने दिया जाए। इसके लिए उन्होंने भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय के मीटरिंग रेग्युलेशन में एक अप्रैल 2026 को हुए संशोधन का हवाला दिया। नियामक आयोग सोमवार को बृजेंद्र स्वरूप पार्क स्थित द स्पोर्ट्स हब (टीएसएच) में बिजली कंपनियों की टैरिफ दरों में 25 प्रतिशत बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर जनसुनवाई कर रहा था। आयोग ने कहा कि सभी डिस्कॉम की जनसुनवाई पूरी होने के बाद दरों में बदलाव के प्रस्ताव पर फैसला लिया जाएगा।  

नक्सल पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पित 40 माओवादियों को आजीविकामूलक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा

उत्तर बस्तर कांकेर : विशेष लेख : कभी बंदूक थामकर हिंसा करने वाले माओवादी अब सीख रहे हुनर नक्सल पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पित 40 माओवादियों को आजीविकामूलक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा मुख्यधारा में लौटे नक्सलियों के शिक्षा पर भी विशेष ध्यान  उत्तर बस्तर कांकेर जिन हाथों ने कभी बंदूक थामकर हिंसा की मार्ग अपनाया  था, अब वहीं हाथ अपने हुनर का कमाल दिखा रहे हैं। भानुप्रतापपुर के पास ग्राम चौगेल के पुनर्वास केन्द्र में प्रशिक्षण प्राप्त आत्मसमर्पित नक्सलियों द्वारा हुनर दिखाते हुए काष्ठ कला से नेम प्लेट, छत्तीसगढ़ शासन का ‘लोगो’, ग्राम पंचायतों के लिए बोर्ड, बच्चों के लिए की-रिंग सहित अन्य सजावटी सामग्री तैयार की जा रही है, साथ ही कपड़े का थैला, कार्यालयों के लिए बस्ता भी तैयार किया जा रहा है। सरकार द्वारा घोषित नक्सल पुनर्वास नीति के तहत कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन कांकेर द्वारा आत्मसमर्पित नक्सलियों को कुशल और दक्ष बनाने का सार्थक प्रयास किया जा रहा है। यहां पर उन्हें काष्ठशिल्प के साथ ही इलेक्ट्रिशियन, ड्रायविंग, सिलाई, राजमिस्त्री जैसे पाठ्यक्रमों का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। कभी नक्सली गतिविधियों में संलिप्त रहे युवक-युवतियॉ अब विभिन्न व्यवसाय में दक्ष हो रहे हैं, ताकि वे समाज की मुख्यधारा में शामिल होने के बाद आजीविकामूलक गतिविधियों से जुड़कर सम्मानपूर्वक जीवन निर्वाह कर सकें। चौगेल कैंप बना कौशल प्रशिक्षण केंद्र वर्षों से लाल आतंक के साए में हिंसा का दंश झेल रहा बस्तर संभाग अब विकास की ओर आगे बढ़ रहा है। शासन द्वारा नक्सल मुक्त बस्तर घोषित किया जा चुका है। हिंसा की राह त्यागकर मुख्यधारा में लौटे नक्सलियों को सरकार कौशल विकास का प्रशिक्षण दे रही है, ताकि वे सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर सकें। आत्मसमर्पित नक्सलियों को पुनर्वास नीति-2025 के अंतर्गत भानुप्रतापपुर विकासखंड के पास ग्राम चौगेल (मुल्ला) कैम्प में विभिन्न सृजनात्मक और रोजगारमूलक गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कभी बीएसएफ का कैम्प रहा चौगेल (मुल्ला) का यह कैम्प अब हुनर सिखाने वाला गढ़ बन चुका है। यहां पर जिला प्रशासन द्वारा मुख्यधारा में लौटे 40 आत्मसमर्पित माओवादियों को अलग-अलग पाठयक्रमों जैसे- काष्ठ शिल्प, इलेक्ट्रिशियन, सिलाई, ड्राइविंग, राजमिस्त्री इत्यादि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, साथ ही उनकी शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दी जा रही है। पढ़ने के लिए पाठ्य सामग्री, पुस्तकें, पेन-पेंसिल दिए गए हैं तथा पढ़ाने के लिए योग्य शिक्षकों की व्यवस्था भी की गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा आत्मसमर्पित नक्सलियों का नियमित रूप से स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यकतानुसार दवाईयां भी दी जाती हैं। कैम्प में मनोरंजनात्मक गतिविधियां जैसे कैरम, वाद्य यंत्र, विभिन्न प्रकार के खेल भी आयोजित किया जाता है। चौगेल पुनर्वास केंद्र में राजमिस्त्री, इलेक्ट्रिशियन, वाहन चालक के साथ ही कांकेर में घुड़सवारी का भी प्रशिक्षण दिया जा चुका है। वर्तमान में सिलाई मशीन, काष्ठ शिल्प एवं असिस्टेंट इलेक्ट्रिशियन का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। स्वरोजगार के लिए सशक्त बनाने हेतु कृषि विभाग, मत्स्य पालन विभाग, उद्यानिकी, पशुधन विकास विभाग के साथ ‘बिहान’ के द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन भी किया गया है।  प्रशिक्षण उपरांत नियोजन करने वाला पहला जिला बना कांकेर पुनर्वास केंद्र में प्रशिक्षण उपरांत नक्सली पीड़ित एवं आत्मसमर्पित नक्सलियों को रोजगार से जोड़ने वाला कांकेर पहला जिला बन चुका है। कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने अपने हाथों से तीन नक्सली पीड़ित और एक आत्मसमर्पित नक्सली को निजी क्षेत्र में नौकरी के लिए नियुक्ति पत्र सौंपा, इनमें पुनर्वासित सगनूराम आंचला एवं नक्सल पीड़ित रोशन नेताम, बीरसिंह मंडावी और संजय नेताम शामिल थे। इन सभी को निजी फर्म का नियुक्ति पत्र प्रदान किया गया, जहां उन्हें 15 हजार रूपए प्रतिमाह मानदेय और अन्य प्रकार की वित्तीय सुविधाएं प्राप्त होंगी। इन्होंने चौगेल कैम्प में असिस्टेंट इलेक्ट्रिशियन का प्रशिक्षण प्राप्त किया था तथा उन्हें निजी क्षेत्र में नियोजित किया गया है। मुख्यधारा में लौटकर प्रशिक्षण के उपरांत रोजगार प्रदान करने के मामले में उत्तर बस्तर कांकेर पहला जिला है। निजी क्षेत्र में नौकरी मिलने पर खुशी व्यक्त करते हुए माओवाद पीड़ित श्री बीरसिंह मंडावी ने कहा कि ग्राम मुल्ला (चौगेल) के कैम्प में पुनर्जीवन मिला है, जहां निःशुल्क प्रशिक्षण देकर उन्हें कुशल एवं पारंगत बनाया गया, वहीं प्रशिक्षण के बाद जिला प्रशासन द्वारा रोजगार भी उपलब्ध कराया जा रहा है। 

Amazon में फिर से छटनी की संभावना, 14,000 कर्मचारियों का भविष्य संकट में

 नई दिल्ली अमेरिकी की कंपनी अमेजन एक बार फिर बड़े पैमाने पर छंटनी की प्लानिंग कर रही है. खबरों के मुताबिक, कंपनी विभिन्न डिपार्टमेंट में 14,000 तक नौकरियां कम करने और कुछ चुनिंदा टीमों को बंद करने की योजना बना रही है. एशिया बिजनेस आउटलुक की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह छटनी दुनियाभर में की जा सकती है. इसका असर खासतौर पर अमेजन वेब सर्विसेज (AWS), रिटेल और एचआर (HR) विभाग पर पड़ सकता है. इसमें मिड-लेवल मैनेजर और ऑफिस में काम करने वाले कर्मचारियों (व्हाइट-कॉलर जॉब) के प्रभावित होने की ज्यादा संभावना है।  अगर कंपनी यह कदम उठाती है, तो एक साल से भी कम समय में यह अमेजन की तीसरी बड़ी छंटनी होगी. इससे पहले कंपनी ने इस साल जनवरी में करीब 16,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला था, जबकि 2025 के अंत तक भी लगभग 14,000 पदों में कटौती की जा चुकी है।  छटनी करने वाली अकेली कंपनी नहीं  हाल ही में कर्मचारियों की छटनी करने वाली और संख्या कम करने वाली कंपनी अमेजन अकेली नहीं है. बता दें कि कुछ ही दिन पहले, ओरेकल ने सुबह 6 बजे ईमेल भेजकर दुनियाभर में लगभग 30,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया. प्रभावित 30,000 कर्मचारियों में से 12,000 भारतीय कर्मचारी बताए जा रहे हैं. माइक्रोसॉफ्ट, टीसीएस और एक्सेंचर जैसी अन्य कंपनियों ने भी हजारों कर्मचारियों की छंटनी की है. खबरों के मुताबिक, मेटा भी अपने कर्मचारियों की संख्या में 15,000 तक की कटौती करने की योजना बना रही है।  क्या इससे ज्यादा छटनी करेगा अमेजन?  सोशल मीडिया प्लेजफॉर्म एक्स पर ब्लाइंट अकाउंट के नाम से एक पोस्ट शेयर किया गया है जिसमें अमेजन में बड़े पैमाने पर छंटनी की आशंका जताई गई है. अमेजन में काम करने का दावा करने वाले एक यूजर ने लिखा कि मई में छंटनी की अफवाहें सुनी हैं… सुना है कि 10,000 से अधिक लोगों की छंटनी हो सकती है. इस खबर से अमेजन के कर्मचारियों में चिंता बढ़ गई है. इसे लेकर एक यूजर ने लिखा कि मैं पहले से ही इस नौकरी को लेकर बहुत तनाव और चिंता में हूं और इस खबर के बाद समझ नहीं पा रहा हूं कि क्या करूं… क्या मुझे दूसरी नौकरी ढूंढनी चाहिए? रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि कुछ कर्मचारी इस बात से नाराज हैं कि छंटनी तय करने के लिए किन मानकों का इस्तेमाल किया जा रहा है, यह साफ नहीं है. यानी प्रदर्शन के आधार पर फैसले लिए जा रहे हैं, लेकिन उसके नियम स्पष्ट नहीं है. इस कारण कर्मचारियों के बीच चिंता और असमंजस और बढ़ गया है।  चीन की टीम हो सकती है बंद वहीं, इस दौरान कई टीमें की बंद होने की भी खबर है. माना जा रहा है कि यह छंटनी कंपनी की बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) में ज्यादा निवेश करना और कंपनी की संरचना को पहले से ज्यादा सरल और व्यवस्थित बनाना शामिल है. एंथ्रोपिक और ओपनएआई जैसी एआई कंपनियों में निवेश बढ़ाने के तहत अमेजन डेटा सेंटर्स पर 125 बिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च करने की योजना बना रहा है. इससे पहले अमेजन के सीईओ एंडी जेसी ने कहा था कि जनरेटिव एआई और एआई एजेंट कंपनी में कुछ भूमिकाओं की आवश्यकता को कम कर सकते हैं।