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हरियाणा में पावर कट पर जीरो टॉलरेंस, 4 घंटे से अधिक कटौती पर अफसरों पर गिरेगी गाज

चंडीगढ़. हरियाणा के बिजली मंत्री अनिल विज ने गत छह माह के दौरान बिजली आपूर्ति में आए व्यवधान की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को बिजली आपूर्ति की समय सीमा में बांध दिया है। उन्होंने निर्देश दिए कि शहरी क्षेत्रों में अधिकतम दो घंटे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में चार घंटे से अधिक बिजली आपूर्ति बाधित नहीं होनी चाहिए। इससे अधिक समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने की स्थिति में संबंधित बिजली अधिकारियों विशेष रूप से अधीक्षण अभियंता (एसई) जिम्मेदार होंगे, जिनके विरुद्ध निलंबन तक की कार्रवाई संभव होगी। लैंड रिकवरी एक्ट के तहत डिफॉल्टर बिजली उपभोक्ताओं से वसूली में ढिलाई बरतने पर विज ने कैथल, कुरुक्षेत्र, पंचकूला और यमुनानगर के बिजली अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। चंडीगढ़ में बिजली अधिकारियों की बैठक लेते हुए अनिल विज ने कहा कि राज्य में बिजली की कोई कमी नहीं है, इसलिए प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति प्रदान करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने घोषणा की कि सरकारी भवनों में सोलर सिस्टम तथा पीएम सूर्य घर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय स्थान पर आने वाले सर्कल को अवॉर्ड दिया जाएगा। बैठक में ऊर्जा विभाग की आयुक्त एवं सचिव आशिमा बराड़ तथा उत्तर और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के प्रबंध निदेशक बिक्रम सिंह की मौजूदगी में अनिल विज ने कहा कि अतिरिक्त मुख्य सचिव का पद लंबे समय से रिक्त रहने के बावजूद विभागीय कार्यों में कोई बड़ी बाधा नहीं आई है, इसके लिए अधिकारी सराहना के पात्र हैं। बिजली मंत्री ने ट्रांसफार्मरों के त्वरित प्रतिस्थापन पर बल देते हुए निर्देश दिया कि मरम्मत कार्यों के दौरान मेंटीनेंस स्टाफ के पास आवश्यक उपकरण, सुरक्षा साधन एवं ट्रांसफार्मर ट्राली उपलब्ध होनी चाहिए। आयुक्त एवं सचिव आशिमा बराड ने आश्वासन दिया कि दो दिनों के भीतर सभी कर्मचारियों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध करा दिए जाएंगे। विज ने यह भी निर्देश दिए कि भविष्य में स्थापित होने वाले सभी बिजली सबस्टेशन जलभराव वाले क्षेत्रों में न बनाए जाएं अथवा उन्हें संभावित जलस्तर से कम से कम दो फुट ऊंचाई पर स्थापित किया जाए। इसके लिए संबंधित विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना अनिवार्य होगा। सबस्टेशनों के रखरखाव एवं अपग्रेडेशन के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए। वर्षा ऋतु से पूर्व बिजली लाइनों के समीप स्थित पेड़ों की छंटाई सुनिश्चित करने के आदेश देते हुए विज ने कहा कि आंधी-तूफान के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित न हो, इसकी सभी अधिकारियों को चिंता करनी होगी। बिजली उपकरणों की खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और समन्वय बढ़ाने के लिए विज ने एक ऑनलाइन पोर्टल विकसित करने के निर्देश दिए। इस पोर्टल पर पूरे राज्य में उपयोग होने वाले उपकरणों का विवरण उपलब्ध रहेगा। बिजली चोरी के सभी मामले तीन माह में न्यायालय में होंगे पेश बिजली चोरी के मामलों की समीक्षा करते हुए अनिल विज ने निर्देश दिए कि अगले तीन माह में सभी लंबित मामलों को न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए। चालू वर्ष में 179 लोगों को बिजली चोरी के मामलों में गिरफ्तार किया गया है। वर्ष 2024-25 में 39 हजार 529 तथा 2025-26 में 56 हजार 953 एफआईआर दर्ज की गई हैं। विजिलेंस विंग ने आश्वासन दिया कि सभी मामलों को शीघ्र न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।

बिलासपुर में खाद वितरण में गड़बड़ी, दो दुकानों की 21 दिन की बिक्री पर रोक, लाइसेंस निलंबित

बिलासपुर : खाद वितरण में गड़बड़ी : दो दुकानों पर 21 दिन की बिक्री पर रोक, लाइसेंस निलंबित उर्वरक जांच में अनियमितता उजागर, दो केंद्रों के लाइसेंस निलंबित किसानों के हित में कार्रवाई : स्टॉक में गड़बड़ी पर दो खाद दुकानें सील बिलासपुर जिले के तखतपुर विकासखंड में खाद वितरण में गंभीर अनियमितता सामने आने पर कृषि विभाग की उड़नदस्ता टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच में स्टॉक और मशीन रिकॉर्ड में अंतर पाए जाने पर दो खाद दुकानों की बिक्री पर 21 दिनों के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया है।          कृषि विभाग की उड़नदस्ता टीम द्वारा तखतपुर विकासखंड में संचालित दो खाद दुकानों पर छापामार कार्रवाई करते हुए खाद वितरण में बड़ी गड़बड़ी पकड़ी गई है। जांच के दौरान दुकानों के पास मशीन और भौतिक स्टॉक में भारी अंतर पाया गया, जिसके चलते दोनों केंद्रों को 21 दिनों के लिए खाद बिक्री से प्रतिबंधित कर दिया गया है। उप संचालक कृषि पीडी हथेश्वर ने बताया कि आगामी खरीफ सीजन में किसानों को खाद, बीज और कीटनाशक की सुचारु उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा उर्वरकों की कालाबाजारी रोकने के उद्देश्य से जिला स्तर पर उड़नदस्ता दल का गठन किया गया है। इसी कड़ी में तखतपुर क्षेत्र के मेसर्स किसान सेवा केंद्र और मेसर्स अमन कृषि केंद्र का औचक निरीक्षण किया गया।          निरीक्षण के दौरान किसान सेवा केंद्र में मशीन स्टॉक में यूरिया 750 बोरी दर्ज थी, जबकि भौतिक रूप से 550 बोरी ही पाई गई। वहीं 200 बोरी स्टॉक बिना मशीन में दर्ज किए रखी गई थी। इसी तरह अमन कृषि केंद्र में मशीन रिकॉर्ड में 1679 बोरी यूरिया दर्शाई गई, जबकि मौके पर स्टॉक नहीं मिला। दोनों प्रतिष्ठानों में उर्वरक भंडारण और वितरण का निर्धारित रजिस्टर भी संधारित नहीं पाया गया। इसे उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 का उल्लंघन मानते हुए संबंधित दुकानों को कारण बताओ नोटिस जारी कर आगामी 21 दिनों के लिए विक्रय पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। कार्रवाई के दौरान कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं संबंधित अमला उपस्थित रहा। हाथेश्वर ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

80% तक मिलावट का दावा, चन्नी बोले—मिलावटखोरों पर लगे हत्या के प्रयास का मुकदमा

जालंधर. लोकसभा सदस्य एवं पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने देश में नकली डेयरी उत्पादों की बिक्री पर चिंता जताई है। चन्नी ने नकली डेयरी उत्पादों से होने वाले जान-माल के नुकसान, इसकी जांच प्रक्रिया को आसान बनाने और दोषियों के खिलाफ सख्त सजा की भी मांग की है। उन्होंने कहा, दूध माफिया यूरिया, डिटर्जेंट पाउडर और अन्य जहरीले पदार्थों के इस्तेमाल से नकली दूध बना रहे हैं। इससे देशवासी भयानक बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। चन्नी ने नकली दूध के कारण डेयरी फार्मिंग के लिए भी चिंता का समय है। उन्होंने कहा कि नकली दूध सस्ता होने के कारण असली दूध की कीमतों को भी नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि मौजूदा कानून नरम और कम जुर्माने वाला होने के कारण डेयरी माफिया का इस पर असर नहीं होता। नकली डेयरी उत्पादों से किसी की जान तक जा सकती है, जिस कारण यह एक तरह से इरादा-ए-कत्ल (हत्या के प्रयास) जैसा संगीन अपराध है। इसलिए सजा और सख्त तथा जुर्माना और बड़ा होना चाहिए। सांसद चन्नी ने कृषि, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, मत्स्य पालन और सहकारिता के लिए संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष के रूप में सुझाव देते हुए कहा कि सरकार को डेयरियों और दूध के बूथों पर तुरंत चेकिंग करने वाली मशीनें लगानी चाहिए।

पर्यटन के नक्शे पर उभरेगा लोरमी, मास्टरप्लान तैयार—जमीन विवाद निपटाने पर जोर

लोरमी. मुंगेली जिले के लोरमी की सूरत बदलने वाली है। कलेक्टर कुंंदन कुमार ने लोरमी को पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर लाने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। साथ ही विकास कार्यों में बाधा बन रहे भूमि विवादों और प्रशासनिक सुस्ती को दूर करने के लिए कलेक्टर ने स्पष्ट और कड़े निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने लोरमी में पर्यटन की अपार संभावनाओं को देखते हुए प्रभावी योजनाओं के क्रियान्वयन के निर्देश दिए हैं। बैठक में आर्किटेक्ट और अर्बन प्लानर्स के साथ चर्चा के बाद अब लोरमी में आधुनिक रिसॉर्ट्स, एडवेंचर स्पोर्ट्स और ग्रीन कॉरिडोर विकसित करने की तैयारी है। इसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना और जिले की अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है। सिर्फ कागजों पर ही नहीं, बल्कि धरातल पर भी काम दिखे, इसके लिए कलेक्टर ने लोरमी नगर पालिका क्षेत्र का औचक निरीक्षण किया। नगर उद्यान के निर्माण में बाधा बन रहे वन विभाग और नगर पालिका के वर्षों पुराने भूमि विवाद को कलेक्टर ने मौके पर ही सुलझाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विकास के काम में किसी भी विभाग की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जर्जर भवनों को ढहाने और प्रस्तावित उद्यान का काम तत्काल शुरू करने का अल्टीमेटम दे दिया गया है। शहर की खूबसूरती के साथ-साथ आम नागरिकों की सहूलियत पर भी जोर दिया गया है। कलेक्टर ने सीएमओ लोरमी को शहर की बदहाल यातायात और पार्किंग व्यवस्था सुधारने के कड़े निर्देश भी दिए हैं।

रायसेन में तीन दिवसीय राष्ट्रीय कृषि महोत्सव, रक्षामंत्री राजनाथ, सीएम यादव और शिवराज सिंह करेंगे उद्घाटन, ड्रोन तकनीक का लाइव प्रदर्शन

रायसेन  केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी एक मंच पर होंगे। वे 11 से 13 अप्रैल तक रायसेन में होने जा रहे राष्ट्रीय उन्नत कृषि महोत्सव में शामिल होंगे। महोत्सव का उद्घाटन राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव करेंगे, जबकि समापन 13 अप्रैल को नितिन गडकरी द्वारा किया जाएगा। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को भोपाल स्थित अपने आवास में रायसेन में होने वाले उन्नत कृषि महोत्सव की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि महोत्सव को हमने कर्मकांड नहीं, गंभीर प्रयास की तरह आयोजित किया है। उन्होंने कहा भारत दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता देश होते हुए भी अभी पूर्ण आत्मनिर्भर नहीं है, इसलिए अब नीति का फोकस दलहन-तिलहन के क्षेत्र और उत्पादकता बढ़ाने पर है, ताकि देश इन फसलों में भी आत्मनिर्भर बन सके। महोत्सव से एक दिन पहले शुक्रवार शाम को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। उन्होंने विभिन्न स्टॉलों और प्रदर्शन क्षेत्रों का निरीक्षण किया और कहा कि यह आयोजन किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम बनेगा। 300 से अधिक स्टॉल लगाए गए इस विशाल प्रदर्शनी में 300 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जो कृषि, बागवानी, सिंचाई, उर्वरक, बीज, कीटनाशक, कृषि यंत्रीकरण, डिजिटल खेती और फसल बीमा से जुड़ी नवीनतम तकनीकों का प्रदर्शन कर रहे हैं। आयोजन स्थल को तीन बड़े हैंगरों में बांटा गया है। पहले हैंगर में कृषि यंत्र, सिंचाई और नवाचार से संबंधित स्टॉल हैं। दूसरे हैंगर में पशुपालन, डेयरी, सहकारी संस्थाएं और ग्रामीण विकास विभाग शामिल हैं, जबकि तीसरे हैंगर में उद्घाटन समारोह, तकनीकी सत्र और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। कृषि यंत्रों का प्रदर्शन होगा महोत्सव में आधुनिक कृषि यंत्रों के साथ-साथ ड्रोन तकनीक और सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों का सीधा प्रदर्शन किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को नई तकनीकों से परिचित कराना और उन्हें अपनी खेती में अपनाने के लिए प्रेरित करना है। विभिन्न कृषि स्टार्टअप, कंपनियां और संस्थान भी अपने नवाचारों के माध्यम से किसानों को आय के नए स्रोतों की जानकारी देंगे। इस आयोजन में कृषि विज्ञान केंद्र, राज्य कृषि विश्वविद्यालय, नाबार्ड, नेफेड, पशुपालन और मत्स्य पालन विभाग जैसे कई प्रमुख संस्थान भाग ले रहे हैं। इसके अतिरिक्त, किसान उत्पादक संगठन (FPO) और MSME से जुड़े उद्यम भी अपने सफल मॉडल प्रस्तुत करेंगे, जिससे किसानों को व्यावहारिक अनुभव मिल सकेगा। महोत्सव में पशुपालन को विशेष प्राथमिकता महोत्सव में पशुपालन को विशेष प्राथमिकता दी गई है। यहां गिर, साहीवाल और थारपारकर नस्ल की गायों के साथ जमुनापारी, सिरोही और बारबरी नस्ल की बकरियों का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके अलावा कड़कनाथ मुर्गी पालन के मॉडल भी किसानों के लिए आकर्षण का केंद्र होंगे। पशु स्वास्थ्य शिविर, टीकाकरण और पोषण प्रबंधन पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन भी उपलब्ध रहेगा। मत्स्य पालन के क्षेत्र में बायोफ्लॉक, आरएएस और एक्वापोनिक्स जैसे आधुनिक मॉडल भी प्रस्तुत किए जाएंगे। साथ ही तीनों दिनों में किसानों के लिए निःशुल्क प्रशिक्षण, स्टार्टअप प्रेजेंटेशन और वैज्ञानिकों से सीधा संवाद आयोजित होगा।

प्रकृति में जनजातीयों की अटूट आस्था से जल जंगल का संरक्षण – मंत्री रामविचार नेताम

रायपुर : प्रकृति में जनजातीयों की अटूट आस्था, देवी-देवताओं के वास से जल जंगल का हो रहा संरक्षण व संवर्धन: मंत्री रामविचार नेताम कॉमन्स संवाद सम्मेलन में विशेषज्ञों ने सामुदायिक शासन पर दिया जोर छत्तीसगढ़ कॉमन्स क्विनिंग’ के समापन समारोह में शामिल हुए मंत्री नेताम रायपुर आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि देश के लगभग सभी राज्यों में जनजातीय समुदाय के लोग निवास करते हैं। उन्होंने कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार देश में 10 करोड़ से अधिक जनजातीय समुदाय हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीयों का जल, जंगल, जमीन, नदी-नालों और पहाड़ों में अटूट आस्था है। जनजातीय समुदाय पेड़ पौधों, नदी-नालों में देवी-देवताओं का वास मानते हैं और इन्ही संस्कृति और परंपराओं के कारण वनवासी समुदाय प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन में पहले पायदान पर है।  छत्तीसगढ़ कॉमन्स क्विनिंग’ के समापन समारोह में शामिल हुए मंत्री नेताम मंत्री नेताम ने आज नवा रायपुर स्थित जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित दो दिवसीय राज्य-स्तरीय संवाद सम्मेलन ’छत्तीसगढ़ कॉमन्स क्विनिंग’ के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सामुदायिक संसाधनों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए गहन मंथन हुआ है। इस मंथन में जो भी तथ्य निकलकर आएंगे उसकी उपयोगिता नीति निर्माण और जनहित में कैसी होगी इसके लिए हमारी सरकार तत्परता के साथ काम करेगी।  मंत्री नेताम कहा कि राज्य सरकार जनजातीय समुदायों के विभिन्न समस्याओं और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के लिए एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का गठन करने जा रही है। इस टास्क फोर्स की संवेदनशीलता और महत्व को देखते हुए इसकी कमान स्वयं मुख्यमंत्री संभालेंगे, जो इसके अध्यक्ष होंगे। नीतिगत निर्णयों के धरातल पर प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को मिलाकर एक विशेष कार्यान्वयन समिति भी बनाई जाएगी, जो बेहतर समन्वय सुनिश्चित करेगी । नेताम ने कहा कि पेसा (पंचायत उपबंध अधिनियम) और एफआरए (वनाधिकार अधिनियम) के क्रियान्वयन के दौरान आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों, विशेष रूप से सीमाओं के निर्धारण (डिमार्केशन ऑफ बॉउंड्रिस) जैसी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करने की बात कही। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के प्रति उत्तरदायित्व का भाव जागृत करते हुए कहा, “हम केवल इन साझा संसाधनों के उपयोगकर्ता ही नहीं, बल्कि इनके संरक्षक भी हैं, और हमारा उपभोग केवल अपनी वास्तविक आवश्यकताओं की पूर्ति तक ही सीमित होना चाहिए”। इस टास्क फोर्स का मुख्य उद्देश्य राज्य भर में जनजातीय कल्याण से जुड़ी नीतियों के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को दूर करना और समुदायों को उनके अधिकार दिलाना है । आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने कहा कि यह टास्क फोर्स विशेष रूप से पेसा और वनाधिकार अधिनियम के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगी। उन्होंने कहा कि हमारी विरासत में जनजातीय बोली, भाषा, समुदायिक नेतृत्व समृद्ध है। जल, जंगल, जमीन के संरक्षण व संवर्धन में इन जनजातीयों का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि प्रकृति के प्रति उनके ज्ञान, उनका उद्देश्य, जल जंगल से जुड़े हुए हैं। उनका रिश्ता प्रकृति से है। वे प्रकृति को मां के रूप में, देवता के रूप में पूजते हैं। उनके दैनिक क्रियाकलापों से लेकर मृत्यु तक के उत्सव प्रकृति के संरक्षण में सहायक सिद्ध होती है। प्रमुख सचिव बोरा ने कहा कि इन दो दिनों तक चले अधिवेशन में छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के 300 से अधिक प्रतिभागियों, नीति विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और ग्राम प्रमुखों ने भाग लिया। चर्चा का मुख्य केंद्र राज्य की 70 लाख एकड़ ’कॉमन्स’ भूमि (जंगल, चारागाह और जल निकाय) रही, जो ग्रामीण और जनजातीय आबादी की जीवन रेखा है। उन्होंने कहा कि पीएम जनमन योजना, धरतीआबा ग्राम उत्कर्ष अभियान, नियद नेल्ला नार जैसे विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों एवं जनजातीय समुदाय के सम्पूर्ण विकास के साथ ही प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में काम कर रहे हैं। आगे भी सामुदायिक सहयोग से बेहतर दिशा में काम किया जाएगा। प्रधान मुख्य वन संरक्षक वी. श्रीनिवास राव ने जोर दिया कि सामुदायिक सहयोग के बिना विशाल वनों और जैव विविधता की रक्षा संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य की वन नीतियां प्रतिबंधात्मक नहीं, बल्कि विनियामक हैं। मनरेगा आयुक्त तारण प्रकाश सिन्हा ने कहा कि जल संरक्षण जनजातीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने मनरेगा के माध्यम से वंचित समुदायों को जल प्रबंधन में जोड़ने पर बल दिया। रायपुर कलेक्टर गौरव सिंह ने रेखांकित किया कि जल संरक्षण कोई ’रॉकेट साइंस’ नहीं है, बल्कि यह सदियों के अनुभव से उपजा सामुदायिक ज्ञान है। संवाद सम्मेलन में यह बात उभर कर आई कि कॉमन्स केवल आर्थिक संसाधन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक आधार हैं। इस अवसर पर सोनमणि बोरा ने जनजातीय लोक गीतों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के दस्तावेजीकरण और कॉपीराइट संरक्षण के लिए एक विशेष स्टूडियो स्थापित करने की योजना साझा की। सम्मेलन में नेल्सन मंडेला पुरस्कार विजेता शेर सिंह आंचला, पद्म पांडी राम मंडावी, पद्मजगेेश्वर यादव और गौर मारिया कलाकार सुलक्ष्मी सोरी, इंदु नेताम ने भी अपने अनुभव साझा किए और संसाधनों के संरक्षण की अपील की।  कार्यक्रम को सफल बनाने में अपर संचालक संजय गौड़, टीआरटीआई की संयुक्त संचालक श्रीमती गायत्री नेताम की विशेष योगदान रही। यह कार्यक्रम आदिम जाति विकास विभाग, टीआरटीआई और फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी द्वारा प्रॉमिस ऑफ कॉमन्स पहल के तहत संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। इसमें यूएनडीपीए आईआईटी-भिलाई, बीआरएलएफ, एक्सिस बैंक फाउंडेशन और अन्य प्रमुख संस्थान सहयोगी रहे।

वृंदावन में यमुना नाव हादसा, 5 लोग अब भी लापता

वृंदावन उत्तर प्रदेश के वृंदावन में यमुना नदी में श्रद्धालुओं से भरी नाव पलटने से हुए हादसे में हुए 10 लोगों की मौत के बाद गहरे पानी में फंसी बोट को 5 घंटे के अथक प्रयासों के बाद निकाला जा सका है। हादसे के बाद चारों ओर कोहराम मचा हुआ है तस्वीरों में आप स्वयं देख सकते हैं कि किस प्रकार मध्यरात्रि के बाद तक चले सर्च ऑपरेशन अभियान के दौरान गहरे पानी में फंसी मोटर वोट को बाहर निकाला गया है. वहीं लापता हुए पांच अन्य लोगों की लिए रेस्क्यू अभी भी जारी है .सभी मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम कर उनके गतंव्य स्थान पर भेज दिया गया है. 10 मृतकों में एक ही परिवार के सात लोग बताया जा रहा है कि हादसे में मृत 10 लोगों में एक ही परिवार के सात लोग थे. मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राहत कोष से दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रूप दिए जाने की घोषणा की गई है. दलदल में फंसी मिली बोट आगरा रेंज के डीआईजी शैलेश कुमार पांडेय ने बताया कि यमुना में बोट पलटने से हुए हादसे में 10 लोगों की मौत के बाद कई घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद गहरे पानी दलदल में फंसी वोट को बाहर बाहर निकाल किया गया है उनका कहना है पांच मिसिंग लोगों की अभी भी तलाश की जा रही है उनका कहना है कि आज से सभी पहलुओं की जांच की जा रही है. 5 लोग नदी में अब भी लापता बता दें कि शुक्रवार दोपहर 2:45 बजे के करीब श्री बांके बिहार मंदिर से करीब ढाई किमी की दूरी पर स्थित केशी घाट के पास पर्यटकों से भरी मोटर बोट पोंटून पुल (पीपा पुल) से टकराने के बाद यमुना नदी में पलट गई थी. नाव में 30 से अधिक लोग सवार थे, जो नदी में गिर गए. इनमें से 10 लोगों की डूबकर मौत हो गई, जबकि 22 को बचा लिया गया. अब भी 5 लोग नदी में लापता हैं और उनकी तलाश की जा रही है.  मथुरा के जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने बताया कि नाव में सवार लोग पंजाब के लुधियाना के रहने वाले हैं. कैसे डूबी बोट? स्थानीय गोताखोर गुलाब ने इस हादसे के लिए तेज हवा को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने आजतक से बातचीत में बताया है कि,'तेज हवा चल रही थी. यमुना नदी के बीच में नाव अचानक तेज हवा से डगमगाने लगी और उसकी स्पीड भी बढ़ गई. देखते ही देखते नाव पीपा पुल (पांटून पुल) से टकराकर नदी में पलट गई और उसमें सवार सभी लोग गहरे पानी में गिर गए.'

जामा मस्जिद के पास अवैध निर्माण पर कोर्ट का स्टे खत्म, कार्रवाई जल्द

संभल यूपी के संभल में कब्रिस्तान की जमीन पर अवैध रूप से बनी दुकानों और मकानों को हटाने का रास्ता लगभग साफ हो गया है. प्रशासन की टीम ने बीते दिनों पैमाइश की थी. इसके बाद संभल सिविल कोर्ट ने प्रशासन की कार्रवाई पर स्टे लगा दिया था. उसे अब सिविल कोर्ट ने खारिज कर दिया है. इसी के साथ अब तहसीलदार कोर्ट से अवैध निर्माण को हटाने का अंतिम आदेश जारी होगा, जिसके बाद प्रशासन जल्द कब्जा हटाने की कार्रवाई कर सकता है. दरअसल, संभल की जामा मस्जिद के बराबर में स्थित कब्रिस्तान की भूमि पर कब्जा किए जाने की शिकायत एडवोकेट सुभाष चंद्र त्यागी ने डीएम को पत्र देकर की थी. इसके बाद प्रशासन ने दो दर्जन से अधिक राजस्व कर्मियों की टीम बनाकर 30 दिसंबर 2025 को उस जमीन पर बने मकानों और दुकानों की पैमाइश की थी. इस दौरान कब्रिस्तान की भूमि पर अवैध तरीके से कब्जा होने की बात सामने आई थी. इसके बाद तहसीलदार कोर्ट ने कब्जा करने वालों को नोटिस कर जवाब मांगा था, लेकिन कब्जेदारों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. मगर हाई कोर्ट से उन्हें राहत नहीं मिली. हाई कोर्ट ने कब्जा करने वालों को तहसीलदार के सामने अपना पक्ष रखने को कहा था. इसके बाद जनवरी में 18 में से 15 लोगों ने संभल सिविल कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें प्रदेश सरकार की तरफ से डीएम व तहसीलदार, नगर पालिका के अधिकारी, उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल बैंक बोर्ड के सीओ को प्रतिवादी बनाया गया था. सिविल कोर्ट में याचिका दायर करने वालों में शामिल 15 लोगों में से चार लोगों ने याचिका वापस ले ली थी. इसके बाद सिविल जज ललित कुमार ने फरवरी में मामले में सुनवाई पूरी होने तक प्रशासनिक कार्रवाई पर स्टे लगा दिया था. मार्च में अलग-अलग तारीख पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 27 मार्च को आदेश रिजर्व कर लिया था. वहीं अब 10 अप्रैल को सिविल कोर्ट ने प्रशासनिक कार्रवाई पर लगाए गए स्टे को हटा लिया है. इसी के साथ अब जामा मस्जिद के बराबर में स्थित कब्रिस्तान की भूमि पर बनीं 18 दुकानें और मकानों के अवैध निर्माण को हटाने का रास्ता साफ हो चुका है. एडवोकेट नलिन जैन का कहना है कि सिविल जज ललित कुमार ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आदेश रिजर्व कर लिया था . कब्जा करने वालों ने संभल कोर्ट को भ्रमित करते हुए जो स्टे ले लिया था, उसको निरस्त कर दिया गया है. कब्रिस्तान पर अब कोई स्टे नहीं है.

रायपुर जिले के चिंगनार गांव में जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन

रायपुर : जिले के दूरस्थ गांव चिंगनार में लगा जनसमस्या निवारण शिविर ग्रामीणों को मिला शासकीय योजनाओं का लाभ सांसद और विधायक हुए शामिल रायपुर माओवाद मुक्त बस्तर के अंदरूनी क्षेत्रों में शासन की योजनाओं की पहुंच सुलभ हो रही है और विकास कार्यों को भी गति मिल रही है।  राज्य शासन के निर्देशानुसार कोंडागांव जिले के फरसगांव विकासखंड अंतर्गत दूरस्थ ग्राम चिंगनार में शासकीय योजनाओं का लाभ ग्रामवासियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में मुख्य अतिथि के रूप में कांकेर सांसद भोजराज नाग और केशकाल विधायक नीलकंठ टेकाम शामिल हुए। सांसद और विधायक ने शासन की विभिन्न योजनाओं अंतर्गत हितग्राहियों को सामग्री का विवरण किया। इस दौरान कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना और जिला पंचायत सीईओ अविनाश भोई भी उपस्थित रहे।  ग्रामीणों को मिला शासकीय योजनाओं का लाभ सांसद नाग ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पहले माओवाद के प्रभाव से इस क्षेत्र में सड़क पुल पुलिया और आधारभूत संरचना के कार्य नहीं हो पाता था। प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के नेतृत्व में बस्तर अब माओवाद से मुक्त होने के बाद अब इन कार्यों को गति मिलेगी। केंद्र एवं राज्य सरकार महिलाओं किसानों के कल्याण के साथ  ग्रामीणों क्षेत्रों में अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाना है। इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति का विकास जरूरी है।  केशकाल विधायक ने कहा कि पहले इस क्षेत्र में माओवाद का बहुत दहशत हुआ करता था, विकास कार्य नहीं हो पा रहा था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी सोच से अब इससे मुक्ति मिली है। दूरस्थ अंचलों में सड़क पुल पुलिया और बुनियादी सुविधाओं संबंधी कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूर्ण किया जाएगा। उन्होंने वन पट्टा धारियों से कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अधिक से अधिक पेड़ लगाएं और पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दें। उन्होंने युवाओं को बेहतर भविष्य और महिलाओ के सशक्तिकरण पर जोर देते हुए शासन की योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की। जनसमस्या निवारण शिविर में ग्रामवासियों से कुल 115 प्राप्त हुए, जिसमें 49 आवेदनों का मौके पर निराकरण किया गया। शिविर के दौरान कुल 81 हितग्राहियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। आयुष्मान कार्ड के 7 तथा आधार कार्ड के 22 प्रकरणों का निराकरण किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा गोद भराई एवं अन्नप्राशन कार्यक्रम के तहत 8 हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया। इसी प्रकार विभिन्न विभागों द्वारा सामग्री वितरण के अंतर्गत राजस्व विभाग द्वारा 16 हितग्राहियों को बी-1/डिजिटल किसान किताब प्रदान की गई। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 12 जॉब कार्ड तथा 5 आवास स्वीकृत किए गए। श्रम विभाग द्वारा 11 श्रम कार्ड वितरित किए गए। शिक्षा विभाग द्वारा 24 जाति प्रमाण पत्र जारी किए गए तथा उद्यान विभाग द्वारा 3 हितग्राहियों को बागवानी किट प्रदान की गई। इस अवसर पर जनपद पंचायत अध्यक्ष मानकु राम नेताम, झाड़ू राम सलाम एवं अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों सहित जिला पंचायत सीईओ अविनाश भोई, एस डी एम अश्वन पुसाम, जनपद पंचायत सीईओ रूपेंद्र नेताम, तहसीलदार जय नाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

दुष्कर्म मामलों में कड़ा संदेश: नाबालिग पीड़िता होने पर बढ़ेगी दोषी की सजा—HC का बड़ा फैसला

चंडीगढ़. पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने बच्चों के साथ दुष्कर्म मामलों में सजा तय करने के लिए एक नया मानक प्रस्तुत किया है। कोर्ट ने कहा कि पीड़ित की उम्र जितनी कम होगी, अपराध की सजा उतनी अधिक होनी चाहिए। साथ ही, अपराधियों की संख्या बढ़ने पर सजा और कठोर होगी। मामला लुधियाना में चार साल सात महीने की बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या से जुड़ा है। आरोपित 28 वर्षीय सोनू सिंह ने बच्ची को उसके दादा की चाय की दुकान से बहला-फुसलाकर ले जाकर यह जघन्य अपराध किया था। ट्रायल कोर्ट ने उसे दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। मामला हाई कोर्ट में मौत की सजा की पुष्टि और आरोपित की अपील के रूप में पहुंचा। जस्टिस अनूप चितकारा और जस्टिस सुखविंदर कौर की खंडपीठ ने कहा कि भारत में पोक्सो मामलों में सजा तय करने के स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं हैं, जिससे फैसलों में असंगति आती है। इसी कमी को दूर करने के लिए कोर्ट ने मानक तैयार किया। इसके तहत सजा तय करने का आधार सहमति की कानूनी उम्र को माना जाएगा। जैसे-जैसे पीड़ित की उम्र इस आधार से कम होती जाएगी, सजा बढ़ती जाएगी। यदि अपराध में एक से अधिक आरोपित हों, तो सजा और कठोर होगी। कोर्ट ने पाया कि पीड़िता की उम्र पांच साल से कम थी और आरोपित अकेला था। इस आधार पर दुष्कर्म के लिए 25 साल के कठोर कारावास को कोर्ट ने उचित माना। हत्या के लिए आजीवन कारावास दिया गया, जिसमें कम से कम 50 साल तक बिना किसी रिमिशन के जेल में रहना अनिवार्य होगा। हाई कोर्ट ने सबूतों के आधार पर दोषसिद्धि बरकरार रखी लेकिन यह भी कहा कि हत्या पूर्वनियोजित नहीं थी, बल्कि दुष्कर्म के सुबूत मिटाने के लिए घबराहट में की गई थी। इसी आधार पर इसे “रेयरेस्ट आफ रेयर” की श्रेणी में न रखते हुए मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया।