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अक्षय तृतीया पर प्रेमानंद महाराज ने बताया एक चीज का दान करने से भाग्य बदलने का उपाय

हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया को एक ऐसा दिन माना जाता है जिसका फल अक्षय (जिसका कभी क्षय न हो) होता है. इस साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 19 अप्रैल 2026, सोमवार को मनाई जाएगी. लोग इस दिन भारी मात्रा में सोना-चांदी और कीमती सामान खरीदते हैं, लेकिन वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज का नजरिया इससे बिल्कुल अलग है. महाराज जी कहते हैं कि संसार की वस्तुएं तो नश्वर हैं, लेकिन इस पावन तिथि पर किया गया एक विशेष कार्य आपके लोक और परलोक दोनों को सुधार सकता है।  क्या है महाराज जी के अनुसार सबसे बड़ा दान? सत्संग के दौरान महाराज जी ने कहा कि अक्षय तृतीया पर हम अन्न, जल या धन का दान तो करते ही हैं, लेकिन नामजप का दान इन सबसे ऊपर है. अगर आपकी जिह्वा से निरंतर राधा-राधा या प्रभु का नाम निकल रहा है और वह ध्वनि किसी दुखी व्यक्ति के कान में पड़ती है, तो वह उसके जीवन का अंधेरा दूर कर सकती है.  यही सबसे बड़ा दान है।  महाराज जी के बताए 3 खास उपाय.  1. मौन का सहारा लें प्रेमानंद महाराज के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन व्यर्थ की बातों और विवादों से दूर रहकर मौन धारण करना बेहद उत्तम है.  मौन रहने से ऊर्जा इकट्ठा होती है, जिसे आप भगवान की भक्ति में लगा सकते हैं।  2. बाहर के जल और भोजन का त्याग महाराज जी एक विशेष सावधानी बताते हैं, इस दिन कोशिश करें कि बाहर का पानी भी ग्रहण न करें. अपने घर में ठाकुर जी को भोग लगाएं और वही प्रसाद स्वरूप ग्रहण करें.  इससे आपकी बुद्धि और विचार शुद्ध रहते हैं।  3. नामजप की निरंतरता इस दिन आप जो भी मंत्र जपते हैं, उसका फल करोड़ों गुना होकर मिलता है. महाराज जी कहते हैं कि इस दिन जितना हो सके भगवान के नाम का कीर्तन करें, ताकि आपके आसपास का वातावरण भी सकारात्मक और भक्तिमय हो जाए।  सोना नहीं खरीद पा रहे? तो यह करें अगर आप आर्थिक कारणों से सोना या चांदी नहीं खरीद पा रहे हैं, तो महाराज जी के अनुसार निराश होने की जरूरत नहीं है. इस दिन जौ खरीदना या दान करना भी सोने के समान फल देता है.  साथ ही, मिट्टी के घड़े में जल भरकर किसी प्यासे को पिलाना भी अक्षय पुण्य की श्रेणी में आता है। .

Royal Enfield Flying Flea C6 इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल भारत में हुई लॉन्च, कीमत और रेंज जानें

मुंबई  लंबे समय के इंतजार के बाद आखिरकार, दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी Royal Enfield ने अपनी पहली इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल Royal Enfield Flying Flea C6 को भारतीय बाजार में लॉन्च कर दिया है. हालांकि इसे सिर्फ एक शहर में उतारा गया है. बता दें कि Flying Flea C6 को साल 2024 में पहली बार पेश किया गया था।  कंपनी ने इस मोटरसाइकिल को 2.79 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) की कीमत पर लॉन्च किया है. इसे 'बैटरी-एज़-ए-सर्विस' प्लान के साथ भी खरीदा जा सकता है, जिसके चलते इसकी शुरुआती कीमत घटकर 1.99 लाख रुपये हो जाती है. यह बात Royal Enfield की पहली EV को एक अनोखी स्थिति में ला खड़ा करती है. भारत में भले ही इसका कोई सीधा प्रतिद्वंद्वी न हो, लेकिन इसकी कीमत Ultraviolette F77 के काफी करीब है।  लेकिन Flying Flea C6 के मुकाबले Ultraviolette F77 कहीं ज़्यादा दमदार इलेक्ट्रिक स्पोर्ट्स बाइक है. खास बात यह है कि नई Flea C6 की बिक्री Flying Flea के खास स्टोर्स के ज़रिए की जाएगी, जिनमें से पहला स्टोर इसकी लॉन्च के साथ ही बेंगलुरु के जयनगर में खोला गया है. कंपनी ने एक बयान में बताया कि इसकी डिलीवरी मई में शुरू होगी, और इस मोटरसाइकिल को चरणबद्ध तरीके से अन्य शहरों में भी बिक्री के लिए पेश किया जाएगा।  2026 Royal Enfield Flying Flea C6 का डिजाइन नई Flea C6 का डिजाइन 1940 के दशक की मूल 'Flying Flea' मोटरसाइकिल से प्रेरित लगता है, जिसे युद्ध के मैदान के लिए तैयार किया गया था. नई Flea C6 के डिज़ाइन में बीते ज़माने की झलक साफ़ नज़र आती है. यह दिखने में बहुत ही बेहतरीन लगती है, और खासकर जब बात इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलों की हो. इसके डिज़ाइन की सबसे खास बात है, इसका 'फोर्ज्ड एल्युमिनियम गर्डर फोर्क' है, जिसके साथ एक 'आर्टिकुलेटिंग मडगार्ड' लगाया गया है।  इसके अलावा, बैटरी के लिए इस्तेमाल की गई 'फिन वाली मैग्नीशियम केसिंग' भी इसके लुक को बेहद खास बनाती हैं. नई Flea C6 के दोनों सिरों पर 19-इंच के व्हील लगाए गए हैं, जिन पर 90/90-सेक्शन के पतले Ceat टायर लगे हैं. बाइक की सीट हाइट 823 mm रखी गई है, जबकि इसका ग्राउंड क्लीयरेंस 207 mm है।  मोटरसाइकिल के टैंक वाले हिस्से में बाइक का स्टार्ट बटन और साथ ही 15-वॉट का वायरलेस फ़ोन चार्जिंग पैड लगाया गया है. मोटरसाइकिल में पीछे वाली सीट को हटाया जा सकता है, और इसके फ़ुटपेग्स को भी एडजस्ट किया जा सकता है।  2026 Royal Enfield Flying Flea C6 की टेक और सेफ्टी बाइक की रेट्रो थीम को ध्यान में रखते हुए, Flying Flea C6 में 3.5-इंच का गोल TFT टचस्क्रीन इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर दिया गया है, जिसमें गाड़ी के कई फ़ंक्शन मौजूद हैं, इस फंक्शन में एनर्जी रीजेनरेशन के अलग-अलग लेवल चुनने का विकल्प भी मिलता है. कार में वायरलेस चार्जर के अलावा, Flea C6 में 27-वॉट का USB-C चार्ज पोर्ट भी दिया गया है।  इस बाइक के साथ एक इलेक्ट्रॉनिक हैंडलबार लॉक भी मिलता है. मोटरसाइकिल में मिलने वाले सेफ्टी फीचर्स की बात करें तो नई Flea C6 के दोनों सिरों पर डिस्क ब्रेक लगाए गए हैं, जिनके साथ लीन एंगल-सेंसिंग एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS) और ट्रैक्शन कंट्रोल (TCS) जैसे फीचर्स दिए गए हैं।  2026 Royal Enfield Flying Flea C6 की बैटरी और परफॉर्मेंस बैटरी पैक की बात करें तो Flying Flea C6 के सेंटर में 3.91 kWh का बैटरी पैक मिलता है, जो एक परमानेंट मैग्नेट मोटर को पावर देती है. यह मोटर 3,500 rpm पर 20.6 bhp की अधिकतम पावर और 60 Nm का अधिकतम टॉर्क उत्पन्न करती है, जो बेल्ट ड्राइव के ज़रिए पिछले व्हील्स को पावर देते हैं. चूंकि Flea C6 का वज़न सिर्फ़ 124 kg है, इसलिए यह महज़ 3.7 सेकंड में 0 से 60 kmph की रफ़्तार पकड़ सकती है और इसकी टॉप-स्पीड 115 kmph तक पहुंच सकती है।  2026 Royal Enfield Flying Flea C6 की रेंज और चार्जिंग मोटरसाइकिल का वज़न कम होने का मतलब यह भी है कि एक तेज़ रफ़्तार वाली मोटरसाइकिल होने के बावजूद, इसकी रेंज काफ़ी अच्छी है. रेंज की बात करें तो Royal Enfield 154 km तक की रेंज (Indian Driving Cycle के अनुसार) का दावा करती है, और असल दुनिया में भी इसकी रेंज तीन अंकों में ही होनी चाहिए।  Royal Enfield ने Flying Flea C6 में 2.2 kW का ऑनबोर्ड चार्जर लगाया है, जो 16-amp के वॉल सॉकेट से जोड़ने पर मोटरसाइकिल को दो घंटे 15 मिनट में पूरी तरह चार्ज कर सकता है. कंपनी का कहना है कि 20 से 80 प्रतिशत तक चार्ज होने में बस एक घंटे से थोड़ा ज़्यादा समय लगता है, और यह मोटरसाइकिल तीन चुनने लायक चार्जिंग स्पीड – Rapid, Standard और Trickle के साथ भी आएगी। 

Mercedes-AMG GLE Coupe Performance Edition और A45 S Aero Track Edition भारत में लॉन्च, जानें कीमत

बेंगलुरु  लग्जरी कार निर्माता कंपनी Mercedes-Benz India ने भारत में दो स्पेशल एडिशन परफॉर्मेंस कार्स बाजार में उतारी हैं. कार निर्माता कंपनी ने भारत में हॉट हैच Mercedes-Benz AMG A45 4MATIC Aero Track Edition और AMG GLE 53 4MATIC Performance Edition पेश की हैं, जो AMG के शौकीनों को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं।  जर्मन लग्ज़री कार निर्माता कंपनी का दावा है कि इन कारों में AMG की खास पहचान और मोटरस्पोर्ट से प्रेरित विशिष्टता के साथ-साथ एक स्पोर्टी ड्राइविंग एक्सपीरिएंस भी मिलता है. कीमत की बात करें तो Mercedes-AMG A45 S Aero Track Edition 4MATIC+ की कीमत 87 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है, जबकि Mercedes-AMG GLE 53 Coupe Performance Edition की कीमत 1.52 करोड़ रुपये (एक्स-शोरूम) रखी गई है।  Mercedes-AMG A45 S Aero Track Edition 4MATIC+ नई Mercedes-AMG A45 S Aero Track Edition 4MATIC+ हॉट हैच, की कीमत 87 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है. यह एक स्पोर्टी फ्रंट एप्रन के साथ आती है, जिसमें एक बड़ा स्प्लिटर और हाई-ग्लॉस ब्लैक कलर के अतिरिक्त फ्लिक्स लगाए हैं. इस बाइक में हाई-ग्लॉस ब्लैक कलर का एक फिक्स्ड AMG रियर विंग भी दिया गया है।  कार में बेहतर स्टेबिलिटी के लिए इसके रियर एप्रन पर लैटरल एयरफ्लो ब्रेकअवे एज दिए गए हैं, जबकि हाई-ग्लॉस ब्लैक कलर का डिफ्यूज़र ब्लेड कार की एयरोडायनामिक दक्षता को बढ़ाने के लिए है. इसमें 19-इंच के ब्लैक अलॉय व्हील्स लगाए गए हैं. AMG पैकेज न केवल कार को एक शानदार विज़ुअल लुक देता है, बल्कि इसके फ़ंक्शनल फ़ायदों को भी बढ़ाता है।  इंजन की बात करें तो इस परफॉर्मेंस कार में 2.0-लीटर, चार-सिलेंडर वाला इंजन लगाया गया है, जो 6,750 rpm पर 415 bhp की पीक पावर और 5,000-5,250 rpm के बीच 500 Nm का अधिकतम टॉर्क उत्पन्न करता है. यह कार 270 kmph की टॉप स्पीड हासिल कर सकती है, जबकि सिर्फ 3.9 सेकंड में 0 से 100 kmph की रफ्तार पकड़ सकती है।  Mercedes-AMG GLE 53 Coupe Performance Edition वहीं, Mercedes-AMG GLE 53 Coupe Performance Edition की बात करें तो कंपनी ने इसे 1.52 करोड़ रुपये (एक्स-शोरूम) की कीमत पर उतारा है. इस कार में AMG Dynamic Plus Package मिलता है, जिसमें हाई-परफॉर्मेंस वाले पार्ट्स दिए गए हैं, जिससे इसकी स्पोर्टीनेस में साफ़ तौर पर बढ़ोतरी देखने को मिलती है. इसके अलावा, कार में AMG Active Ride Control दिया गया है, जिससे कार को ज़्यादा फुर्ती और स्टेबिलिटी मिलती है।  कंपनी इस कार में AMG हाई-परफॉर्मेंस कम्पोजिट ब्रेकिंग सिस्टम देती है, जिसमें अंदर से हवादार और छेद वाले ब्रेक डिस्क लगाए गए हैं. कार के अन्य खास फीचर्स की बात करें तो इसमें AMG परफॉर्मेंस स्टीयरिंग व्हील, MBUX इंफोटेनमेंट सिस्टम में पूरी तरह से इंटीग्रेटेड परफॉर्मेंस डेटा सिस्टम, और रियल-टाइम टेलीमेट्री (जिसमें लैप टाइम, एक्सीलरेशन, स्टीयरिंग इनपुट और ब्रेकिंग डेटा वगैरह शामिल हैं) जैसे फीचर्स मिलते हैं।  इस मॉडल मिलने वाले इंजन की बात करें तो इसमें 3.0-लीटर का सिक्स-सिलेंडर इंजन इस्तेमाल किया गया है, जिसकी मदद से यह कार सिर्फ 5.3 सेकंड में 0 से 100 kmph की रफ़्तार पकड़ सकती है, और इसकी टॉप स्पीड 250 kmph है. यह इंजन 6,100 rpm पर 429 bhp की पीक पावर और 1,800 rpm से 5,800 rpm के बीच 520 Nm का टॉर्क प्रदान करता है। 

नर्मदा में बोटिंग करते वक्त चट्टानों पर आराम करता तेंदुआ, पर्यटकों में अफरातफरी

ओंकारेश्वर  जिले की तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में  सुबह बोटिंग कर रहे पर्यटकों को नर्मदा किनारे चट्टानों पर तेंदुआ दिखाई दिए जाने के बाद हलचल मच गई। ओंकारेश्वर बांध के बैकवॉटर क्षेत्र में काजलरानी माता मंदिर के पास बोटिंग कर रहे श्रद्धालु और पर्यटकों की नजर चट्टानों के बीच आराम कर रहे तेंदुए पर पड़ी। यह दृश्य देखते ही लोगों ने अपने मोबाइल कैमरों में इसे कैद करना शुरू कर दिया।  खास बात यह रही कि लोगों की मौजूदगी और हलचल के बावजूद तेंदुआ पूरी तरह शांत नजर आया। वह कभी चट्टानों पर बैठा रहा तो कभी इधर-उधर टहलता दिखाई दिया, मानो उसे आसपास की गतिविधियों से कोई फर्क ही न पड़ रहा हो। इस घटना के वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिन्हें लोग काफी दिलचस्पी से देख रहे हैं। बता दें कि ओंकारेश्वर क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता, पहाड़ियों और शांत वातावरण के लिए पहले से ही प्रसिद्ध है। यहां नर्मदा बैकवॉटर में बोटिंग का अनुभव पर्यटकों के लिए खास आकर्षण रहता है। ऐसे में तेंदुए की मौजूदगी ने इस जगह के रोमांच को और बढ़ा दिया है। आमतौर पर तेंदुए को देखकर डर का माहौल बन जाता है लेकिन यहां मौजूद लोग इस अनोखे दृश्य को देखकर उत्साहित नजर आए और उन्होंने इसे यादगार पल के रूप में कैद किया।

इंदौर चिड़ियाघर में अंडर वॉटर टनल, 35 करोड़ में बनेगा दुबई और सिंगापुर जैसे मॉडल का निर्माण

इंदौर  इंदौर के चिड़ियाघर में पर्यटकों को जल्द ही समुद्र की गहराई का अहसास होगा क्योंकि यहां 35 करोड़ रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक एक्वेरियम का निर्माण किया जा रहा है। प्रशासन ने इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है और उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले चार से पांच महीनों के भीतर धरातल पर काम शुरू हो जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए चिड़ियाघर परिसर में ही दो एकड़ की भूमि आरक्षित कर दी गई है।  समुद्री मछलियों के लिए बनेगा विशेष खारा पानी इस एक्वेरियम में सैकड़ों प्रजातियों की समुद्री मछलियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इन मछलियों के अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए चिड़ियाघर में ही कृत्रिम रूप से समुद्री यानी खारा पानी तैयार किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार जल को खारा बनाने की इस प्रक्रिया में लगभग 45 दिन का समय लगेगा। यहां दुर्लभ प्रजातियों को रखने की योजना है ताकि दर्शकों को एक नया अनुभव मिल सके। दुबई और सिंगापुर जैसी अंडर वॉटर टनल इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत यहां बनने वाली अंडर वॉटर टनल होगी जिसे सिंगापुर और दुबई के प्रसिद्ध एक्वेरियम की तर्ज पर बनाया जाएगा। यह ग्लास टनल 20 से 50 मीटर लंबी होगी जिसमें चलते हुए पर्यटक अपने चारों ओर मछलियों को तैरते हुए देख सकेंगे। इसके साथ ही यहां एक आधुनिक टॉवर का निर्माण भी किया जाएगा और साहसिक गतिविधियों के शौकीनों के लिए स्कूबा डाइविंग की विशेष व्यवस्था भी उपलब्ध रहेगी। पीपीपी मॉडल पर आधारित निर्माण प्रक्रिया चिड़ियाघर प्रभारी नंदकिशोर पहाड़िया ने जानकारी दी कि इस पूरे प्रोजेक्ट को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी पीपीपी मॉडल के तहत पूरा किया जाएगा। विभाग का लक्ष्य है कि मानसून के बाद इसका निर्माण कार्य तेजी से शुरू कर दिया जाए। रविवार जैसे व्यस्त दिनों में जब चिड़ियाघर में दर्शकों की संख्या 25 हजार तक पहुंच जाती है, तब भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए एक्वेरियम का डिजाइन तैयार किया गया है। बच्चों के मनोरंजन और ज्ञानवर्धन के लिए भी यहां अलग से विशेष जोन बनाए जाएंगे। 

शिवराज मामा की रायसेन में बढ़ती सक्रियता, क्या विदिशा से मोहभंग या नया सियासी गणित?

रायसेन  मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक दिलचस्प हलचल देखने को मिल रही है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान का झुकाव तेजी से रायसेन की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। कभी उनकी राजनीति का केंद्र रहे विदिशा क्षेत्र से दूरी और रायसेन में बढ़ती सक्रियता ने सियासी गलियारों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है। हाल ही में आयोजित सांसद खेल महोत्सव के बाद अब रायसेन में तीन दिवसीय राष्ट्रीय कृषि मेले का आयोजन कराया जा रहा है। यह महज कार्यक्रमों की श्रृंखला नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक परिदृश्य संकेत के रूप में देखा जा रहा है। लगातार हो रहे आयोजनों से साफ है कि शिवराज सिंह चौहान का फोकस अब इस क्षेत्र पर ज्यादा केंद्रित हो रहा है। राजनीतिक जानकार इसे भविष्य की रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं। दरअसल, विदिशा में पिछले कुछ समय से भाजपा के अंदरूनी समीकरण और खींचतान की खबरें सामने आती रही हैं। स्थानीय स्तर पर बढ़ते असंतोष और गुटबाजी ने भी सियासी माहौल को प्रभावित किया है। ऐसे में रायसेन में बढ़ती सक्रियता को विदिशा से मोहभंग के रूप में भी देखा जा रहा है। हालांकि, पार्टी स्तर पर इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। इधर रायसेन में भाजपा के वरिष्ठ नेता रामपाल सिंह के साथ शिवराज सिंह चौहान की बढ़ती नजदीकियां भी जन चर्चा का विषय बनी हुई हैं। कार्यक्रमों में दोनों नेताओं की एक साथ मौजूदगी और समन्वय से यह संकेत मिल रहे हैं कि जिले में संगठनात्मक और राजनीतिक मजबूती के लिए नए समीकरण तैयार किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में डॉ चौधरी का रामपाल सिंह राजपूत के करीब आना भी कई मायनों में अहम माना जा रहा है। वहीं, वर्ष 2020 के बाद से डॉ नरोत्तम मिश्रा शेजवार (डॉ शेजवार) और शिवराज मामा के बीच बनी दूरी भी सियासी जन चर्चा का केंद्र रही है। पहले जहां दोनों के बीच मजबूत तालमेल देखने को मिलता था। वहीं अब राजनीतिक मंचों पर यह सामंजस्य पहले जैसा नजर नहीं आता। इसका सीधा असर क्षेत्रीय राजनीति पर भी पड़ रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी परिसीमन (डिलिमिटेशन) को लेकर भी बीजेपी के कद्दावर लोकप्रिय बड़े नेताओं की सक्रियता बढ़ी है। रायसेन में शिवराज मामा के लगातार हो रहे बड़े आयोजन कहीं न कहीं इस बात की ओर इशारा करते हैं कि भविष्य के चुनावी नक्शे को ध्यान में रखकर राजनीति की नई जमीन तैयार की जा रही है। यदि परिसीमन में बदलाव होता है, तो रायसेन क्षेत्र का महत्व और बढ़ सकता है। कुल मिलाकर, विदिशा से दूरी और रायसेन में बढ़ती सक्रियता को केवल संयोग नहीं माना जा सकता। यह सियासत का सोचा-समझा कदम भी हो सकता है, जिसमें सत्ता संगठन, समीकरण और भविष्य की संभावनाओं का पूरा खाका तैयार किया जा रहा है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि यह बदलाव केवल कार्यक्रमों तक सीमित रहता है या फिर मध्यप्रदेश की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत करता है।

एमपी बोर्ड 10वीं, 12वीं रिजल्ट जल्द ही, यहां पाएं Direct Link सबसे पहले

भोपाल  मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (MPBSE) से 10वीं और 12वीं कक्षा की परीक्षा दे चुके छात्र अपने परीक्षा परिणाम का इंतजार कर रहे हैं। इस साल तकरीबन 16 लाख से अधिक छात्रों ने एमपी बोर्ड की परीक्षा दी थी। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा 2026 का परिणाम 15 से 20 अप्रैल के बीच जारी किया जाएगा। दोनों कक्षा का रिजल्ट बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट mpbse.nic.in और mpresults.nic.in पर जारी होगा। एमपी बोर्ड रिजल्ट 2026 के लिए 10वीं-12वीं कक्षा के छात्रों का रिजल्ट का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। बोर्ड किसी भी समय एमपी बोर्ड रिजल्ट 2026 जारी होने की तारीख और समय की घोषणा कर सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एमपी बोर्ड का रिजल्ट 15 अप्रैल से 20 अप्रैल 2026 के बीच घोषित हो सकता है। बोर्ड दोपहर 1 बजे या 4 बजे के बीच प्रेस कॉन्फ्रेंस में रिजल्ट घोषित करता है। इसके तुरंत बाद आधिकारिक वेबसाइट mpbse.nic.in और mpresults.nic.in पर एमपी बोर्ड के रिजल्ट का लिंक एक्टिव कर दिया जाता है। एमपी बोर्ड रिजल्ट कैसे चेक करें?     एमपी बोर्ड 10वीं, 12वीं रिजल्ट 2026 चेक करने के लिए मध्य प्रदेश बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट mpresults.nic.in या mpbse.nic.in पर विजिट करें।     ‘HSC (10th)’ या ‘HSSC (12th)’ रिजल्ट 2026 के लिंक पर क्लिक करें।     9 अंकों का अपना रोल नंबर और 8 अंकों का एप्लीकेशन नंबर डालें।     ‘Submit’ बटन दबाएं और मार्कशीट आपकी स्क्रीन पर होगी। फेल या कम नंबर हैं तो क्या करें? एमपी बोर्ड के छात्र अगर रिजल्ट से संतुष्ट नहीं हैं या एक-दो विषय में पास नहीं हो पाए हैं, तब भी आपको घबराने की जरूरत नहीं है। अपना साल बचाने के लिए अब भी आपके पास 2 विकल्प रहेंगे। एमपी सरकार की यह मशहूर ‘रुक जाना नहीं’ योजना के जरिए बोर्ड परीक्षा में फेल होने वाले छात्र इसी साल दोबारा परीक्षा देकर अपना साल बचा सकते हैं। 1 या 2 विषयों में फेल स्टूडेंट्स एमपी बोर्ड कंपार्टमेंट परीक्षा देकर अपनी मार्कशीट सुधार सकते हैं। नंबर से असंतुष्ट हैं, तो कॉपी दोबारा चेक कराएं रिजल्ट के 15 दिनों के अंदर ‘MP Online’ पोर्टल पर जाकर ‘री-टोटलिंग’ या ‘कॉपी की फोटोकॉपी’ के लिए आवेदन करें। इसके लिए प्रति विषय एक निर्धारित शुल्क (लगभग 200-500 रुपये) देना होता है। एमपी बोर्ड सप्लीमेंट्री/कंपार्टमेंट परीक्षा कब होगी? एमपी बोर्ड कंपार्टमेंट परीक्षाएं आमतौर पर जून 2026 में आयोजित की जाती हैं। इसके फॉर्म रिजल्ट आने के एक हफ्ते बाद ही भरना शुरू हो जाते हैं। एमपी बोर्ड कंपार्टमेंट परीक्षा का परिणाम जुलाई के अंत तक आ जाता है। इससे छात्रों के लिए कॉलेज में प्रवेश ले पाना आसान हो जाता है। SMS से भी देख सकेंगे स्कोर इंटरनेट न होने पर छात्र SMS के जरिए भी अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं. इसके लिए MPBSE10 रोल नंबर या MPBSE12 रोल नंबर लिखकर 56263 पर भेजना होगा. रिजल्ट आपके मोबाइल स्क्रीन पर फ्लैश हो जाएगा.    स्ट्रीम-वाइज नतीजे होंगे जारी कक्षा 12वीं के साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स तीनों स्ट्रीम के नतीजे एक साथ पोर्टल पर लाइव होंगे. इस बार छात्राओं का प्रदर्शन छात्रों से बेहतर रहने का अनुमान लगाया जा रहा है. तकनीकी खामियों से बचने के लिए बोर्ड ने अतिरिक्त सर्वर की व्यवस्था की है.   स्कोरकार्ड कैसे डाउनलोड करें? 10वीं के छात्र रिजल्ट जारी होते ही mpbse.nic.in पर जाएं. 'Exam Results' टैब पर क्लिक करें और अपना रोल नंबर दर्ज करें. मार्कशीट की प्रोविजनल कॉपी तुरंत डाउनलोड की जा सकेगी. ओरिजिनल मार्कशीट स्कूल से प्राप्त करनी होगी.    टॉपर्स को मिलेगा सम्मान मुख्यमंत्री मेधावी छात्र योजना के तहत इस बार भी टॉपर्स को प्रोत्साहित किया जाएगा. बोर्ड सूत्रों का कहना है कि 10वीं और 12वीं की स्टेट मेरिट लिस्ट तैयार हो चुकी है. परिणाम घोषित होने के बाद टॉप-10 छात्रों की सूची सार्वजनिक की जाएगी.

भारत का सूरज बनने की राह, यूरेनियम के लिए अब नहीं होगी विदेशों पर निर्भरता; अमेरिका-चीन की चिंता बढ़ी

बेंगलुरु  सौ बात की एक बात ये कि ईरान युद्ध और चुनाव की ख़बरों में ज़्यादातर लोगों का ऐसी ख़बर पर ध्यान नहीं गया जो शायद देश की कई सालों की सबसे बड़ी ख़बर है. कल्पक्कम रिएक्टर में क्या हुआ? बहुत आसान हिंदी में समझाते हैं. भारत का अपना परमाणु बिजली बनाने वाला फ़ास्ट ब्रीडर रीऐक्टर क्रिटिकल हो गया. पब्लिक को ये साइंस का इतना जटिल मामला लगता है कि उससे हुआ क्या है वो पता ही नहीं चलता. तो ज़्यादा कॉम्प्लेक्स चीज़ों में ना भी जाएं तो मोटे तौर पर ख़बर ये हैं कि ये समझ लो कि एक तरह से भारतीय वैज्ञानिकों ने ऐसा रास्ता खोल दिया कि आगे चल कर हम सालों-साल तक अपनी बिजली बना सकते हैं जितनी भी देश को चाहिए. ये ऐसा कमाल है जो दुनिया की बड़ी-बड़ी महाशक्तियां नहीं कर पा रही हैं।  तो ज़्यादा साइंस में ना जाते हुए इसकी बेसिक चीज़ को समझें तो ये समझिये कि परमाणु रिएक्टर को समझ लीजिए कि एक तरह की परमाणु भट्टी है जिसमें बिजली बनाई जाती है. भट्टी वैसी नहीं जैसी दूसरी भट्टियां होती हैं, सिर्फ़ समझने के लिए उसको हम भट्टी कह रहे हैं. ये तो पब्लिक अब काफ़ी समझ ही गई है कि परमाणु कार्यक्रम पर दुनिया भर में इतना कंट्रोल इसलिए रहता है क्योंकि परमाणु तकनीक से बेतहाशा ऊर्जा बनती है. उससे परमाणु बम भी बना सकते हैं और बिजली भी बना सकते हैं. ईरान यही तो कह रहा है कि वो तो परमाणु कार्यक्रम चलाएगा क्योंकि उसको उससे बिजली बनानी है. अमेरिका और इज़रायल कह रहे हैं कि वो परमाणु कार्यक्रम से बिजली बनाने की आड़ में असल में परमाणु बम बनाना चाहता है. तो वो तो ख़ैर वहां की बात रही ।  हम बात कर रहे हैं अपने परमाणु कार्यक्रम की. तो परमाणु रिएक्टर में क्या होता है कि ईंधन डालते हैं और ईंधन से बिजली बनती है. ईंधन क्या होता है परमाणु रिएक्टर में? ईंधन होता है यूरेनियम नाम का तत्व. यूरेनियम डालते हैं तो अंदर बिजली बनती है और प्लूटोनियम नाम का कचरा निकलता है. दिक़्क़त क्या है कि भारत में यूरेनियम है नहीं. बहुत थोड़ा है. तो यूरेनियम दूसरे देशों से लेना पड़ता है. और वो कोई आसान काम नहीं क्योंकि परमाणु कार्यक्रमों पर कई कंट्रोल वैसे ही लगे हुए हैं. भारत ने अमेरिका के साथ नयूक्लियर डील भी की थी कि उससे कुछ आसानी हो यूरेनियम मिलने में. क्योंकि देश को अगर विकसित बनाना है तो जो सबसे ज़रूरी चीज़ चाहिए वो है बिजली. हम पानी से बिजली बना रहे हैं, कोयले से बनाते हैं, अब सोलर बिजली भी बन रही है, हवा से भी बनती है पवनचक्कियों से ।  सारा खेल यूरेनियम का लेकिन परमाणु बिजली भी चाहिए. उसमें यूरेनियम का चक्कर है. यूरेनियम हमारे पास है नहीं. लेकिन भारत के एक और रेडियोऐक्टिव तत्व है जिसको परमाणु रिएक्टर में इस्तेमाल कर सकते हैं, वो तत्व है थोरियम. लेकिन थोरियम से चलने वाले रिएक्टर पर दुनिया में ज़्यादा रिसर्च ही नहीं हो पाई. मतलब तकनीक परफ़ेक्ट नहीं हो पाई है थोरियम से बिजली बनाने की. तो अभी की स्थिति ये हैं कि यूरेनियम से बिजली बनती है और कचरे में प्लूटोनियम निकलता है. प्लूटोनियम भी रेडियोऐक्टिव कचरा होता है इसलिए उसको बहुत ही एहतियात से नष्ट करना पड़ता है. लेकिन एक तकनीक ये होती है कि प्लूटोनियम से ही बिजली बना दें तो? यानी यूरेनियम से जो कचरा निकला फिर उस कचरे से ही बिजली बना दें. यानी कचरे को ही ईंधन बना दें. और फिर जो बिजली बने और फिर उससे जो कचरा निकले उससे फिर बिजली बना दे. फिर जो कचरा निकले उस कचरे से बिजली बना दें. फिर कचरा निकले तो उससे बिजली बना दें. मतलब एक चेन ही बन जाए. जब तक कचरा पूरा इस्तेमाल नहीं हो जाता तब तक ईंधन डालना ही ना पड़े. थ्योरी में तो ये कर सकते हैं. लेकिन कई देश लगे हुए थे कोई उस तरह से कर नहीं पा रहा था. कुछ देश सफल हुए भी लेकिन भारत अपनी तकनीक से लगा हुआ था कि ये कर लें तो फिर तो थोड़े से ही ईंधन से काम चल जाएगा ।  कल्पक्कम भारत का सबसे आधुनिक न्यूक्लियर रिएक्टर है. कल्पक्कम है तमिलनाडु में चेन्नई के पास. वहाँ भारत का सबसे आधुनिक न्यूक्लियर रिएक्टर है, जिसका नाम है PFBR, प्रोटोटाइप फ़ास्ट ब्रीडर रिएक्टर. ये 500 MW बिजली बनाने वाला रिएक्टर है. इसे भारतीय वैज्ञानिकों ने पूरी तरह खुद डिजाइन किया और बनाया है. 6 अप्रैल 2026 को रात 8:25 बजे ये रिएक्टर ‘क्रिटिकल’ हो गया. क्रिटिकल मतलब क्या? मतलब वही कमाल कर दिखाया वैज्ञानिकों ने जिसकी हम बात कर रहे थे. कि ईंधन के कचरे को ही ईंधन बनाने में सफल हो गए. क्रिटिकल होने का मतलब है कि अब न्यूक्लियर रिऐक्शन खुद-ब-खुद चलने लगा है. यानी अब रिएक्टर ऐसे ख़ुद-ब-ख़ुद बिजली बनाने की तरफ एक क़दम और करीब पहुंच गया है. अब समझिए ये क्यों इतना बड़ा काम है।  भारत का न्यूक्लियर कार्यक्रम तीन चरणों का भारत का न्यूक्लियर कार्यक्रम तीन चरणों का है. इसे डॉ. होमी भाभा ने बनाया था. पहले चरण में हमारे पुराने रिएक्टर यूरेनियम से बिजली बनाते हैं. इसमें कुछ प्लूटोनियम नाम का पदार्थ बन जाता है, जो कचरा है उनका. दूसरा चरण अब शुरू हो रहा है और ये कल्पक्कम वाला रिऐक्टर उसका हिस्सा है. ये रिऐक्टर उसी प्लूटोनियम वेस्ट को ईंधन की तरह इस्तेमाल करता है. इसलिए ऐसे रिऐक्टर को ‘ब्रीडर’ कहते हैं. क्योंकि ये बिजली भी बनाता है और बिजली बनाने वाला और ईंधन भी बनाता है. और सबसे बड़ी बात ये कि ये जो कचरे से ईंधन बनाता है वो जितना ईंधन डालो उससे ज़्यादा ईंधन बना कर देता है. और साथ में बिजली भी बनाता है. मतलब इसका परीक्षाण सफल तो हो गया अब जब इसको पूरी तैयार कर लिया जाएगा तो एक बार ईंधन डालो, फिर ये खुद अपना ईंधन बढ़ाता रहेगा. इससे देश का कुल ईंधन स्टॉक बढ़ता ही चला जाएगा. ये दूसरा चरण है. इसके बाद आएगा तीसरा चरण. भविष्य में।  भारत में थोरियम समुद्र के किनारे ढेर सारा पड़ा उसमें क्या है कि भारत में थोरियम नाम का पदार्थ समुद्र के किनारे ढेर सारा … Read more

अमरनाथ यात्रा के लिए 15 अप्रैल से एडवांस रजिस्ट्रेशन शुरू, 554 बैंक ब्रांच में होगी सुविधा उपलब्ध

 भोपाल  अमरनाथ यात्रा के लिए इस साल एडवांस रजिस्ट्रेशन 15 अप्रैल से शुरू होने जा रहा है। श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड (SASB) ने तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए देशभर में 554 निर्धारित बैंक शाखाओं में रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था की है। अधिकारियों के अनुसार, यात्रा के लिए पंजीकरण और परमिट जारी करने की प्रक्रिया ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर की जाएगी। हालांकि, प्रत्येक बैंक शाखा में हर मार्ग के लिए प्रतिदिन एक तय कोटा निर्धारित किया गया है। जिसे पूरा होने के बाद उस दिन के लिए रजिस्ट्रेशन बंद कर दिया जाएगा। केवल 13 से 70 वर्ष की आयु के श्रद्धालु ही इस पवित्र यात्रा के लिए पात्र होंगे। इसके अलावा, छह सप्ताह से अधिक की गर्भवती महिलाओं को यात्रा करने की अनुमति नहीं दी गई है। कब से कब तक चलेगी यात्रा इस साल अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 9 अगस्त तक चलेगी। कुल 38 दिनों तक चलने वाली इस यात्रा के लिए हर साल लाखों श्रद्धालु पवित्र गुफा में भगवान शिव के हिमलिंग के दर्शन करने पहुंचते हैं। इस बार भी यात्रा को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के अनुसार, यात्रा में भाग लेने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 15 अप्रैल 2026 से शुरू हो रही है। ऑनलाइन और ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन आवेदन Shri Amarnathji Yatra app और आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से किया जा सकेगा। इसके लिए मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी के जरिए OTP सत्यापन अनिवार्य होगा। साथ ही, 8 अप्रैल 2026 या उसके बाद जारी किया गया अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाण पत्र (CHC) और पासपोर्ट साइज फोटो अपलोड करना होगा। ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन 15 अप्रैल से देशभर की अधिकृत बैंक शाखाओं में शुरू होगा। प्रति व्यक्ति 150 रुपये शुल्क लिया जाएगा। अमरनाथ यात्रा के प्रमुख मार्ग अमरनाथ यात्रा दो मुख्य मार्गों से पूरी की जाती है। पहलगाम मार्ग: लगभग 46 किलोमीटर लंबा पारंपरिक रास्ता, जो अपेक्षाकृत आसान और धीरे-धीरे चढ़ाई वाला है। बालटाल मार्ग: लगभग 14 किलोमीटर लंबा लेकिन अधिक खड़ी चढ़ाई वाला रास्ता, जो कम समय में यात्रा पूरी करने वालों के लिए उपयुक्त है। सुरक्षा और सुविधाओं पर विशेष ध्यान यात्रा के दौरान प्रशासन द्वारा विभिन्न पड़ावों पर टेंट, आवास, भोजन और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम और मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOPs) लागू रहेंगी। अधिकारियों ने श्रद्धालुओं को सलाह दी है कि वे कठिन मौसम परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पूरी तैयारी के साथ यात्रा करें। ऊंचाई और ठंड को देखते हुए उचित कपड़े, दवाइयां और शारीरिक फिटनेस बेहद जरूरी है। 550 से ज्यादा बैंक शाखाओं में होगा रजिस्ट्रेशन श्रद्धालु 15 अप्रैल से देशभर की 550 से अधिक अधिकृत बैंक शाखाओं में जाकर अमरनाथ यात्रा के लिए पंजीकरण करा सकते हैं. इससे लोगों को रजिस्ट्रेशन कराने में आसानी होगी. इस व्यवस्था का मकसद यह है कि देश के अलग‑अलग हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं को पंजीकरण कराने में आसानी हो और वे अपने घर के पास ही रजिस्ट्रेशन पूरा कर सकें।  पहले आओ, पहले पाओ श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने साफ किया है कि रजिस्ट्रेशन पूरी तरह पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर होगा. यात्रा के हर रास्ते के लिए रोज की एक तय संख्या होगी यानी हर दिन सीमित संख्या में ही यात्रियों को अनुमति दी जाएगी. इससे भीड़ को कंट्रोल करने और यात्रा को ज्यादा सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी।  कब से कब तक चलेगी यात्रा इस साल अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 9 अगस्त तक चलेगी. इस यात्रा के लिए हर साल लाखों श्रद्धालु पवित्र गुफा में भगवान शिव के हिमलिंग के दर्शन करने पहुंचते हैं. इस बार भी यात्रा को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं. श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के अनुसार, यात्रा में भाग लेने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा. रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 15 अप्रैल, 2026 से शुरू जो जाएगी। 

अमेरिका की नई योजना: 50 साल पुराना फौजी भर्ती सिस्टम अब होगा बदलने

वाशिंगटन अमेरिका अपने फौजी भर्ती के सिस्टम में एक बड़ा बदलाव करने जा रहा है. यह बदलाव दशकों में पहली बार हो रहा है और इसे वियतनाम युद्ध के बाद सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है।  अभी तक अमेरिका में 18 से 25 साल के हर लड़के को खुद जाकर एक सरकारी सूची में अपना नाम दर्ज कराना पड़ता था. इसे 'सेलेक्टिव सर्विस सिस्टम' में रजिस्ट्रेशन कहते हैं. लेकिन अब सरकार इस पूरी प्रोसेस को बदलने जा रही है. नए नियम के तहत यह रजिस्ट्रेशन अपने आप हो जाएगी, यानी लड़के को खुद कुछ नहीं करना होगा, सरकार खुद उसका नाम दर्ज कर लेगी. यह बदलाव दिसंबर 2026 तक लागू हो सकता है।  सेलेक्टिव सर्विस सिस्टम क्या होता है और यह क्यों जरूरी है? सेलेक्टिव सर्विस सिस्टम एक अमेरिकी सरकारी व्यवस्था है. इसका सीधा मतलब है एक ऐसी सूची जिसमें उन लड़कों के नाम होते हैं जिन्हें जरूरत पड़ने पर फौज में बुलाया जा सकता है।  अमेरिका में अभी फौज में जाना जरूरी नहीं है, यानी कोई जबरदस्ती नहीं है. लेकिन अगर कभी देश पर बड़ा संकट आए और फौज को बहुत ज्यादा जवानों की जरूरत पड़े, तो सरकार इसी सूची से लोगों को बुला सकती है. इसे 'ड्राफ्ट' कहते हैं।  अमेरिका ने आखिरी बार ड्राफ्ट वियतनाम युद्ध के दौरान लागू किया था, जो करीब 50 साल पहले की बात है. उसके बाद से अमेरिका ने कभी किसी को जबरदस्ती फौज में नहीं बुलाया. लेकिन सूची बनाने का काम जारी रहा।  अभी का नियम यह है कि 18 साल का होने के 30 दिन के अंदर हर लड़के को खुद जाकर इस सूची में नाम दर्ज कराना होता है. अगर कोई ऐसा नहीं करता तो यह कानूनी जुर्म है. इसके लिए जुर्माना, जेल और सरकारी नौकरियों और सुविधाओं से भी हाथ धोना पड़ सकता है।  नया बदलाव क्या है और कैसे काम करेगा नए नियम के तहत अब यह रजिस्ट्रेशन अपने आप होगी. सरकार खुद अपने पास मौजूद डेटा का इस्तेमाल करके योग्य लड़कों के नाम सूची में दर्ज कर लेगी।  यह बदलाव अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस ने 2026 के राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकरण अधिनियम में मंजूरी दी है. इस कानून में कहा गया है कि सरकार के अलग-अलग विभागों के पास जो डेटा है, जैसे कि पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस या दूसरे सरकारी रिकॉर्ड, उसे आपस में जोड़कर सीधे सेलेक्टिव सर्विस की सूची में नाम डाले जाएं।  कुछ अमेरिकी राज्यों में पहले से ही ऐसा होता है जहां ड्राइविंग लाइसेंस बनवाते वक्त सेलेक्टिव सर्विस में रजिस्ट्रेशन अपने आप हो जाती है. लेकिन अब यह पूरे देश में एक जैसा होगा. सेलेक्टिव सर्विस सिस्टम का कहना है कि यह बदलाव दिसंबर 2026 तक लागू हो जाएगा।  यह बदलाव अभी क्यों हो रहा है? यह सवाल जरूरी है कि आखिर अमेरिका को अभी यह बदलाव क्यों करना पड़ रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह है दुनिया में बढ़ता तनाव. इस वक्त पश्चिम एशिया यानी मिडिल ईस्ट में हालात बहुत गंभीर हैं. अमेरिका और ईरान के बीच टकराव चल रहा है. ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत अमेरिका पहले से ईरान पर हमले कर चुका है।  ऐसे माहौल में अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता है कि अगर कभी बड़े पैमाने पर फौज की जरूरत पड़े तो उसके पास एक पूरी और सटीक सूची हो।  पुराने सिस्टम में एक बड़ी दिक्कत यह थी कि कई लड़के खुद रजिस्ट्रेशन नहीं कराते थे, चाहे लापरवाही से या जानबूझकर. इससे सूची अधूरी रहती थी. नए सिस्टम से यह समस्या खत्म हो जाएगी क्योंकि रजिस्ट्रेशन अपने आप होगी।  इसका मतलब क्या है, क्या अमेरिका फिर से जबरदस्ती फौज भर्ती करेगा यह साफ कर देना जरूरी है कि इस बदलाव का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका अभी किसी को जबरदस्ती फौज में भर्ती करेगा. अमेरिकी फौज अभी भी पूरी तरह स्वेच्छा पर आधारित है, यानी जो चाहे वो जाए. ड्राफ्ट यानी जबरदस्ती भर्ती तभी होती है जब कांग्रेस इसकी अनुमति दे और राष्ट्रपति इस पर दस्तखत करें. अभी ऐसा कोई आदेश नहीं है।  यह बदलाव सिर्फ तैयारी है, एहतियात है. सरकार चाहती है कि अगर कभी ऐसी नौबत आए तो सूची पहले से तैयार हो और कोई नाम छूटे नहीं।  लेकिन इस बदलाव ने अमेरिका में एक बड़ी बहस जरूर छेड़ दी है. कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह आने वाले किसी बड़े युद्ध की तैयारी का संकेत है. दुनिया में जिस तरह का माहौल है, उसे देखते हुए यह बदलाव सिर्फ एक कागजी काम नहीं लग रहा।