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प्रदेश में 6500 से अधिक बैंक शिकायतें, उपभोक्ताओं का सबसे ज्यादा गुस्सा इस बैंक पर

भोपाल  मध्यप्रदेश में बैंकिंग व्यवस्था और उपभोक्ताओं के बीच तालमेल बिगड़ता नजर आ रहा है। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की ताजा रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि 10 मार्च 2026 तक सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर बैंकों के खिलाफ कुल 6544 शिकायतें लंबित हैं। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआइ) से लोग सबसे ज्यादा खफा हैं जोकि शिकायतों के मामले में पहले स्थान पर है। चिंताजनक बात यह है कि आम जनता की शिकायतों को निपटाने में प्रदेश की राजधानी भोपाल ही सबसे फिसड्डी साबित हो रही है। यह आंकड़े बैंकिंग सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। जब डिजिटल इंडिया के दौर में बैंकिंग सेवाओं के सरल होने का दावा किया जा रहा है, तब हजारों लोगों का अपनी छोटी- छोटी समस्याओं के लिए मुख्यमंत्री की चौखट तक पहुंचना प्रशासन के लिए आत्ममंथन का विषय है। भोपाल के लोग सबसे ज्यादा परेशान, रीवा और ग्वालियर भी पीछे नहीं जिलों की बात करें तो भोपाल 434 लंबित शिकायतों के साथ सूची में टॉप पर है। इसके बाद रीवा (287), ग्वालियर (279) और इंदौर (241) का नंबर आता है। छोटे जिलों में अलीराजपुर सबसे बेहतर स्थिति में है, जहां मात्र 10 शिकायतें लंबित हैं। आम आदमी की सबसे बड़ी मुसीबत- खाता संचालन और सरकारी योजनाएं रिपोर्ट के मुताबिक, जनता सबसे ज्यादा परेशान अपने बैंक खाते के संचालन को लेकर है। कुल 6544 शिकायतों में से लगभग 49 फीसदी मामले (3191) केवल खाता खोलने, बंद करने या खातों को बिना सूचना होल्ड करने से संबंधित हैं। इसके साथ ही एटीएम कार्ड जारी करने, एटीएम कार्ड से राशि कटने (230 शिकायतें), आधार कार्ड लिंक/खाते में केवायसी/इ-केवायसी (337 शिकायतें), पासबुक जारी करना/पासबुक ​प्रिंटिंग एवं चेक बुक से संबंधित (113 शिकायतें), शासकीय ऋण एवं अनुदान/ब्याज अनुदान से संबंधित (1454 शिकायतें) शामिल हैं। लोकपाल में कर सकते शिकायत… आरबीआई के दिशा-निर्देशों के अनुसार, बैंकों को ग्राहक शिकायतों का निपटारा एक निश्चित समय सीमा में करना अनिवार्य है। लेकिन सीएम हेल्पलाइन का यह डेटा बताता है कि धरातल पर बैंक अधिकारियों और जनता के बीच क्युनिकेशन गैप गहराता जा रहा है। यदि आपका बैंक आपकी सुनवाई नहीं कर रहा है, तो आप सीएम हेल्पलाइन (181) के अलावा आरबीआई के लोकपाल से भी संपर्क कर सकते हैं। बैंकों में स्टाफ की कमी भी बड़ा कारण सेवानिवृत्त एसबीआइ अधिकारी हेमंत गोस्वामी बताते हैं कि काम के बोझ के कारण कई बार सेवाओं में कमी आती है। इसका एक बड़ा कारण बैंकों में स्टाफ की कमी का होना भी है। फिर भी समय-समय पर बैंककर्मी ग्राहकों का समस्या का समाधान करते रहते हैं। ग्राहकों की अपेक्षाएं और त्वरित सेवा की आशा अधिक रहती है। एमपी में बैंकिंग सेक्टर में अधिक कार्य क्षेत्र स्टेट बैंककर्मियों पर होने के कारण उनकी शिकायतेें भी अधिक हैं। किस बैंक से जनता को कितनी शिकायत? सरकारी बैंकों में शिकायतों का ग्राफ काफी ऊंचा है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआइ) 1418 शिकायतों के साथ पहले स्थान पर है। इसके बाद यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (817) और बैंक ऑफ इंडिया (746) का नंबर आता है। निजी क्षेत्र में एचडीएफसी बैंक (346) के खिलाफ सबसे अधिक मामले दर्ज हैं। अधिकारियों के स्तर पर अटकी फाइलें शिकायतों के निराकरण की सुस्ती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अधिकांश शिकायतें एल1 (रीजनल मैनेजर) और एल3 (अग्रणी जिला प्रबंधक) के स्तर पर अटकी हुई हैं। ■ एल1 स्तर पर : 2,941 मामले ■ एल2 स्तर पर : 2,446 मामले कुल लंबित शिकायतें : 6544 सबसे ज्यादा शिकायतों वाला शहर : भोपाल (434 मामले) सबसे बड़ी समस्या : बैंक खाता खोलने, बंद करने या होल्ड होने से जुड़ी (3191 मामले)

प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में पेट्रोलियम पदार्थ उपलब्ध : मंत्री राजपूत

भोपाल. खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्त संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया कि प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में पेट्रोलियम पदार्थ उपलब्ध है। प्रदेश में आवश्यक वस्तु अधिनियम के अन्तर्गत एलपीजी की कालाबाजारी रोकने के लिये निरंतर कार्यवाही की जा रही है, अभी तक 2864 स्थानों पर जांच की गई, 4283 एलपीजी सिलेण्डर जब्त किये गए तथा 11 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज कराई गई। प्रदेश के 736 रिटेल आउटलेट (पेट्रोल पंप) की जांच कराई गई है। इसमें 1 प्रकरण में एफ.आई.आर. दर्ज कराई गई है। प्रदेश के समस्त जिला आपूर्ति नियंत्रक/अधिकारी एवं ऑयल कंपनी के अधिकारियों को सतत रूप से पेट्रोल पंपों की जांच करने के निर्देश दिये गये हैं। भारत में कच्चे तेल (Crude Oil) का पर्याप्त भण्डार है देश एवं प्रदेश की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं जिससे पेट्रोलियम पदार्थों की निरंतर सप्लाई हो सके एवं सप्लाई में कोई रुकावट न आए। मध्यप्रदेश और पूरे देश में एलपीजी (LPG) पेट्रोल] डीजल] पीएनजी एवं सीएनजी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। रसोई गैस की स्थिति रसोई गैस के संबंध में प्रदेश के बॉटलिंग प्लांटों में घरेलू एवं कॉमर्शियल एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखा गया है। घरेलू गैस उपभोक्ताओं द्वारा की गई बुकिंग के विरूद्ध एलपीजी सिलेण्डर का प्रदाय निरंतर रूप से किया जा रहा है। साथ ही कॉमर्शियल उपभोक्ताओं को शासन द्वारा तय किये गये प्राथमिकता क्रम अनुसार आवंटन प्रतिशत के आधार पर कमर्शियल गैस सिलेण्डरों की सप्लाई सतत रूप से की जा रही है। घरेलू एवं कॉमर्शियल की सप्लाई में किसी प्रकार का अवरोध नहीं है। घरेलू एवं कॉमर्शियल सिलेण्डर की सप्लाई एवं वितरण सामान्य है। खाद्य मंत्री राजपूत ने भारत सरकार द्वारा निर्धारित 70% सीमा के अधीन संस्थाओं एवं प्रतिष्ठानों को तय किये गये प्राथमिकता क्रम अनुसार सप्लाई निरंतर जारी रखने के निर्देश दिये हैं। यह भी ध्यान रखा जाये कि सड़क पर कारोबार कर रहे छोटे व्यवसायी (स्ट्रीट वेण्डर) को भी उक्त अनुसार कमर्शियल सिलेण्डर प्रदाय किये जायें। ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए सभी प्लांट अतिरिक्त समय (Extended Hours) तक काम कर रहे हैं। प्रदेश के जिलों में स्थित बॉटलिंग प्लांट तथा वितरकों के पास उपलब्धता एवं प्रदाय की सतत रूप से समीक्षा की जा रही है। साथ ही माईग्रेन्ट लेबर, छात्रों आदि के लिए खाना पकाने के लिये 05kg के सिलेण्डर ऑयल कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आम जनता से अपील की गई है कि वह वैकल्पिक साधनों, जैसे इंडक्शन,सोलर कुकर, बायो गैस, गोबर धन तथा स्वसहायता समूहों द्वारा उत्पादित गो-काष्ठ का उपयोग करें। पीएनजी गैस सीजीडी संस्थाओं तथा ऑयल कंपनियों के अधिकारियों के साथ प्रतिदिन समीक्षा बैठक आयोजित की जा रही है। अपर मुख्य सचिव श्रीमती रश्मि अरूण शमी द्वारा विशेष अभियान चलाकर जिन घरों में पाईपलाईन की अधोसंरचना उपलब्ध है, एवं सप्लाई प्राप्त नहीं कर रहे है, ऐसे 1.5 लाख घरों को आगामी 03 माह में पीएनजी से कनेक्ट करने के लिये निर्देशित किया गया। इस हेतु सभी सीजीडी संस्थाएं शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में कैम्प लगायें, जिसमें जिला प्रशासन, खाद्य विभाग नगर निगम/नगर पालिका के अधिकारी, ऑयल कंपनी और सीजीडी संस्थाओं के जिला अधिकारी उपस्थित रहें। ऐसे सभी घरों एवं व्यवसाईयों की सूची सीजीडी संस्था को उपलब्ध कराई जाये। अपर मुख्य सचिव द्वारा निर्देशित किया गया कि जिन स्थानों पर पूर्व से पीएनजी की पाइप लाईन है, सर्वप्रथम उन्हें प्राथमिकता से कनेक्शन दिए जाएं। साथ ही नई पाइन लाईन डालकर कनेक्शन का कार्य भी साथ-साथ किया जाए। सीजीडी संस्थाओं द्वारा अवगत कराया गया कि उन्होंने जिला कलेक्टर्स के माध्यम से आवश्यक मैन पॉवर प्राप्त करने की कार्यवाही कर ली है तथा आगामी माहों में लक्ष्य के अनुसार नये पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध करा दिए जाएंगे। भारत सरकार के निर्देशनुसार जिन स्थानों से पीएनजी की पाइन लाईन गई है, उसके आस पास के घरेलू एवं कमर्शियल उपभोक्ता पीएनजी कनेक्शन प्राप्त कर लें क्योंकि पीएनजी कनेक्शन प्राप्त न करने की स्थिति में आगामी 03 माह में एलपीजी की सप्लाई बंद की जा सकती है। समस्त सीजीडी संस्थाओं द्वारा प्रतिदिन किये जा रहे आवेदन एवं उसके विरूद्ध दिये जा रहे पीएनजी कनेक्शन की सतत मॉनिटरिंग की जा रही है। राज्य शासन द्वारा पीएनजी कनेक्शन प्रदाय करने के लिए सीजीडी संस्थाओं को उनके आवेदन किये जाने के 24 घंटे के अंदर पाइपलाइन बिछाने की ROU स्वीकृतियां जारी की जा रही हैं। अभी तक प्राप्त सभी स्वीकृतियां जारी की जा चुकी है तथा कोई भी आवेदन शेष नहीं है। गृह विभाग के अधीन आने वाले संस्थाओं/सुधार ग़ृ़हों के साथ-साथ पुलिस, सीएपीएफ, डिफेंस इस्टेब्लिशमेंट, ऑफिसर्स कॉलोनी, सामान्य प्रशासन पूल के घरों, पुलिस मुख्यालय, पुलिस कॉलोनी, आदि में जहां से आस-पास पाईपलाईन बिछी हुई है, उनको प्राथमिकता के आधार पर पीएनजी कनेक्शन प्रदाय करने के निर्देश दिये गये हैं। प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में जहां आस-पास पाईपलाईन गई है, उन क्षेत्रों की औद्योगिक इकाईयों की पहचान की जाकर पीएनजी पर शिफ्ट करने के निर्देश सीजीडी संस्थाओं को दिये गये। कालाबाजारी के विरूद्ध कार्यवाही सीजीडी संस्थाओं को घरेलू एवं व्यावसायिक पीएनजी के आवेदनकर्ताओं को पीएनजी कनेक्शन प्राप्त करने के लिये सीजीडी संस्थाओं के कन्ट्रोल रूम नं. निम्नानुसार प्रदाय किये गये है – अवंतिका गैस लिमिटेड – इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर (9424098887) गैल गैस लिमिटेड – देवास, रायसेन, शाजापुर, सीहोर (7880001788) नवेरिया गैस लिमिटेड – धार (07292-223311) थिंक गैस – भोपाल, राजगढ़, शिवपुरी (1800-5727-107) IOCL – गुना (9425991090), मउगंज, रीवा(9424836488), अशोकनगर(9425119522), मुरैना(7223982333) BPCL – महैर, सतना, शहडोल(9424738607), सीधी, सिंगरौली(9424341954) गुजरात गैस लि. – रतलाम (7412230292) प्रदेश के उक्त शहरों में जिन स्थानों से पाईपलाईन गई है, उस पाईपलाईन के आस-पास के घरेलू एवं व्यावसायिक उपभोक्ता पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकते है। प्रदेश के अन्य जिलों में पाईपलाईन का विस्तार होने के उपरांत पीएनजी कनेक्शन प्रदाय किये जा सकेंगे।  

चित्रकूट में 500 साल से पुरानी पांडुलिपियों का हुआ खुलासा, उर्दू में है ‘कालिया मर्दन’ का अनोखा विवरण

चित्रकूट  मध्य प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण नगरी चित्रकूट में किए गए सर्वेक्षण के दौरान 500 से अधिक प्राचीन पांडुलिपियों की पहचान की गई है। इन पांडुलिपियों का अध्ययन वर्तमान में तुलसी शोध संस्थान में किया जा रहा है। यह खोज भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक इतिहास के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।  देवनागरी, संस्कृत और उर्दू में मिली पांडुलिपियां इस सर्वेक्षण में मिली पांडुलिपियों की खास बात यह है कि ये विभिन्न भाषाओं और लिपियों में लिखी गई हैं। अधिकांश पांडुलिपियां देवनागरी और संस्कृत में हैं, जबकि कुछ दुर्लभ पांडुलिपियां उर्दू भाषा में भी प्राप्त हुई हैं यह विविधता भारतीय समाज में भाषाई और सांस्कृतिक समन्वय की गहरी परंपरा को दर्शाती है। उर्दू पांडुलिपि में श्रीकृष्ण के कालिया मर्दन का वर्णन इन पांडुलिपियों में एक अत्यंत रोचक तथ्य सामने आया है। उर्दू लिपि में लिखी एक पांडुलिपि में श्रीकृष्ण द्वारा कालिया नाग के दमन, जिसे 'कालिया मर्दन' कहा जाता है, का चित्रण किया गया है। आमतौर पर यह प्रसंग संस्कृत, ब्रजभाषा या अवधी साहित्य में मिलता है, लेकिन उर्दू में इसका वर्णन भारतीय सांस्कृतिक समावेश का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है। तुलसीदास जी और भगवान गणेश का भी उल्लेख उर्दू पांडुलिपि में गोस्वामी तुलसीदास का चित्र और उल्लेख भी दर्ज है।  साथ ही भगवान गणेश का भी चित्रण इसमें देखने को मिला है। यह पांडुलिपि धार्मिक ग्रंथ “पोथी सतनाम” का हिस्सा बताई जा रही है। इसे ऐतिहासिक रूप से मुंशी नवल किशोर प्रेस द्वारा प्रकाशित किया गया था। इसमें मंगलाचरण, दोहा और चौपाई जैसे पारंपरिक काव्य रूप भी सम्मिलित हैं।  रामायण और महाभारत कालीन परंपराओं से जुड़ी सामग्री चित्रकूट में हुई खोज में तुलसी शोध संस्थान के प्रबंधक ओम प्रकाश पटेल ने बताया कि चित्रकूट क्षेत्र में रामचरितमानस की हस्तलिखित पांडुलिपियों के अंश भी सुरक्षित मिले हैं और इसके साथ ही रामायण और महाभारत कालीन परंपराओं से संबंधित देवनागरी लिपि में लिखी गई पांडुलिपियां भी आज तक संरक्षित हैं। हालांकि, इनमें से कई पांडुलिपियां आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हैं और उनका वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण व अध्ययन किया जा रहा है। 350 पांडुलिपियां संस्थान में जमा, विशेषज्ञ कर रहे अध्ययन मध्यप्रदेश संस्कृत विभाग द्वारा लगभग 350 पांडुलिपियां चित्रकूट स्थित तुलसी शोध संस्थान में जमा कराई गई हैं। यहां विशेषज्ञ इनकी भाषा, लिपि, विषयवस्तु और ऐतिहासिक महत्व को समझने में जुटे हैं। इन पांडुलिपियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति, धर्म और साहित्य के कई अनछुए पहलुओं के सामने आने की संभावना जताई जा रही है।   ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत चल रहा राष्ट्रीय अभियान केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के अंतर्गत देशभर में प्राचीन पांडुलिपियों की खोज, पहचान और दस्तावेजीकरण का अभियान 16 मार्च से प्रारंभ किया गया है। यह अभियान तीन माह तक चलेगा। अभियान से जुड़े शोधकर्ताओं ने बताया कि इसका उद्देश्य भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा को पुनः प्रकाश में लाना और उसे आम जनमानस तक पहुंचाना है। इन तीन चरणों में होगा संरक्षण और डिजिटलीकरण का कार्य सरकार द्वारा इस मिशन को तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में पांडुलिपियों की खोज, पहचान व दस्तावेजीकरण का कार्य होगा। दूसरे चरण में एकत्रित पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया जाएगा। वहीं, तीसरे चरण में विशेषज्ञों द्वारा अध्ययन, संरक्षण और अर्थ स्पष्ट करने कार्य पूर्ण होगा। तीन माह बाद इन पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में सुरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।   आम नागरिक भी कर सकते हैं योगदान संस्कृति मंत्रालय द्वारा ‘ज्ञान भारतम’ एप भी लॉन्च किया गया है, जिसके माध्यम से आम लोग भी इस अभियान में भाग ले सकते हैं। जिनके पास प्राचीन पांडुलिपियां हैं, वे एप पर लॉगिन कर उनकी फोटो, भाषा और स्थान की जानकारी अपलोड कर सकते हैं। भारतीय सांस्कृतिक समन्वय का जीवंत उदाहरण उर्दू भाषा में श्रीकृष्ण के कालिया मर्दन, तुलसीदास जी और भगवान गणेश का उल्लेख इस बात का प्रमाण है कि भारत की सांस्कृतिक विरासत केवल एक भाषा या परंपरा तक सीमित नहीं है। यह विविधता और एकता का अद्भुत संगम है, जो देश की साझा विरासत को दर्शाता है। डिजिटल रूप में भी कर सकते है इस्तेमाल भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय दिल्ली में पदस्थ चंद्रमौली त्रिपाठी ने जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने पहले चरण में ज्ञान भारतम एप को आम जनमानस के लिए खोल दिया है जिनके पास भी ऐसी पांडुलिपियां हैं, वह एप में लाागिन कर लोकेशन बताते हुए उसकी भाषा बताकर फोटो अपलोड कर सकता है और आसानी से इस एप के जरिए ज्ञान को सहेजने का काम कर सकते है और इससे लोगों को एक नया तरीका भी उपलब्ध हो गया है का  

7th Pay Commission: DA का इंतजार क्यों बढ़ा, अप्रैल के 10 दिन भी हो गए, किस वजह से फंसा मामला?

नई दिल्ली अप्रैल 2026 आधा बीतने को है लेकिन अभी तक केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए डीए बढ़ोतरी का ऐलान नहीं हुआ है. आमतौर पर हर साल मार्च के अंत या अप्रैल की शुरुआत में यह फैसला सामने आ जाता है, लेकिन इस बार देरी ने कर्मचारियों के बीच चिंता बढ़ा दी है. खासकर इसलिए क्योंकि 31 दिसंबर 2025 के बाद 7वां वेतन आयोग खत्म हो चुका है और 8वां वेतन आयोग अभी लागू नहीं हुआ है।  पिछले वर्षों के ट्रेंड को देखें तो 2025 में डीए बढ़ोतरी का ऐलान 28 मार्च को हुआ था और आदेश 2 अप्रैल को जारी हुआ था. वहीं 2024 में भी 3 अप्रैल तक आदेश जारी हो गया था. यहां तक कि कोविड के समय 2020 में भी अप्रैल में औपचारिक आदेश जारी किया गया था. ऐसे में 2026 में यह देरी असामान्य मानी जा रही है।  क्या इस बार डीए बढ़ोतरी नहीं होगी विशेषज्ञों का कहना है कि डीए बढ़ोतरी रुकने की संभावना बेहद कम है. डीए का निर्धारण महंगाई के आंकड़ों के आधार पर होता है और यह प्रक्रिया 7वें वेतन आयोग की अवधि खत्म होने के बाद भी जारी रहती है. यानी कर्मचारियों को उनका हक मिलना तय माना जा रहा है।  कितनी बढ़ सकती है डीए एआईसीपीआई इंडेक्स के आंकड़ों के आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार करीब 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है. इससे डीए 58 प्रतिशत से बढ़कर करीब 60 प्रतिशत तक पहुंच सकता है. हालांकि अंतिम फैसला सरकार की मंजूरी के बाद ही सामने आएगा।  देरी की वजह क्या है एक्सपर्ट्स के मुताबिक, देरी की सबसे बड़ी वजह प्रशासनिक प्रक्रिया हो सकती है. फाइल अप्रूवल, आंतरिक मंजूरी और फैसलों की टाइमिंग इस बार थोड़ा आगे खिसक गई है. बैंक बाजार के सीईओ अधिल शेट्टी का कहना है कि यह देरी इंटरनल प्रोसेस के कारण हो सकती है. वहीं, आईएसएफ की सुचिता दत्ता का कहना है कि संभवत: सरकार डीए बढ़ाने से पहले मंहगाई के आंकड़ों की बारीकी से समीक्षा कर रही है. कर्मा मैनेजमेंट के प्रतीक वैद्या का कहना है कि इस देरी की तुलना कोविड-19 के समय से करना ठीक नहीं है।  8वें वेतन आयोग से जुड़ी टाइमिंग सरकार फिलहाल अगले वेतन आयोग की दिशा में काम कर रही है. माना जा रहा है कि डीए बढ़ोतरी के ऐलान को इस बड़े बदलाव के साथ जोड़कर देखा जा रहा है, ताकि एक साथ व्यापक नीति का संकेत दिया जा सके।  सरकार का फिस्कल बैलेंस भी अहम महंगाई, सरकारी खर्च और बजट संतुलन को ध्यान में रखते हुए भी सरकार फैसला ले रही है. डीए बढ़ोतरी का सीधा असर लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स पर पड़ता है, इसलिए इसे सोच-समझकर तय किया जाता है।  कब तक आ सकता है ऐलान रिपोर्ट्स के मुताबिक अप्रैल के दूसरे हफ्ते से लेकर मिड अप्रैल के बीच कभी भी डीए बढ़ोतरी का ऐलान हो सकता है. यानी कर्मचारियों को ज्यादा लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।  देरी से होगा क्या नुकसान सबसे अहम बात यह है कि देरी से कर्मचारियों को कोई नुकसान नहीं होगा. डीए 1 जनवरी 2026 से लागू माना जाएगा और बीच के समय का पैसा एरियर के रूप में दिया जाएगा. यानी घोषणा चाहे देर से हो, लेकिन फायदा पूरा मिलेगा। 

अक्षय तृतीया पर प्रेमानंद महाराज ने बताया एक चीज का दान करने से भाग्य बदलने का उपाय

हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया को एक ऐसा दिन माना जाता है जिसका फल अक्षय (जिसका कभी क्षय न हो) होता है. इस साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 19 अप्रैल 2026, सोमवार को मनाई जाएगी. लोग इस दिन भारी मात्रा में सोना-चांदी और कीमती सामान खरीदते हैं, लेकिन वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज का नजरिया इससे बिल्कुल अलग है. महाराज जी कहते हैं कि संसार की वस्तुएं तो नश्वर हैं, लेकिन इस पावन तिथि पर किया गया एक विशेष कार्य आपके लोक और परलोक दोनों को सुधार सकता है।  क्या है महाराज जी के अनुसार सबसे बड़ा दान? सत्संग के दौरान महाराज जी ने कहा कि अक्षय तृतीया पर हम अन्न, जल या धन का दान तो करते ही हैं, लेकिन नामजप का दान इन सबसे ऊपर है. अगर आपकी जिह्वा से निरंतर राधा-राधा या प्रभु का नाम निकल रहा है और वह ध्वनि किसी दुखी व्यक्ति के कान में पड़ती है, तो वह उसके जीवन का अंधेरा दूर कर सकती है.  यही सबसे बड़ा दान है।  महाराज जी के बताए 3 खास उपाय.  1. मौन का सहारा लें प्रेमानंद महाराज के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन व्यर्थ की बातों और विवादों से दूर रहकर मौन धारण करना बेहद उत्तम है.  मौन रहने से ऊर्जा इकट्ठा होती है, जिसे आप भगवान की भक्ति में लगा सकते हैं।  2. बाहर के जल और भोजन का त्याग महाराज जी एक विशेष सावधानी बताते हैं, इस दिन कोशिश करें कि बाहर का पानी भी ग्रहण न करें. अपने घर में ठाकुर जी को भोग लगाएं और वही प्रसाद स्वरूप ग्रहण करें.  इससे आपकी बुद्धि और विचार शुद्ध रहते हैं।  3. नामजप की निरंतरता इस दिन आप जो भी मंत्र जपते हैं, उसका फल करोड़ों गुना होकर मिलता है. महाराज जी कहते हैं कि इस दिन जितना हो सके भगवान के नाम का कीर्तन करें, ताकि आपके आसपास का वातावरण भी सकारात्मक और भक्तिमय हो जाए।  सोना नहीं खरीद पा रहे? तो यह करें अगर आप आर्थिक कारणों से सोना या चांदी नहीं खरीद पा रहे हैं, तो महाराज जी के अनुसार निराश होने की जरूरत नहीं है. इस दिन जौ खरीदना या दान करना भी सोने के समान फल देता है.  साथ ही, मिट्टी के घड़े में जल भरकर किसी प्यासे को पिलाना भी अक्षय पुण्य की श्रेणी में आता है। .

Royal Enfield Flying Flea C6 इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल भारत में हुई लॉन्च, कीमत और रेंज जानें

मुंबई  लंबे समय के इंतजार के बाद आखिरकार, दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी Royal Enfield ने अपनी पहली इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल Royal Enfield Flying Flea C6 को भारतीय बाजार में लॉन्च कर दिया है. हालांकि इसे सिर्फ एक शहर में उतारा गया है. बता दें कि Flying Flea C6 को साल 2024 में पहली बार पेश किया गया था।  कंपनी ने इस मोटरसाइकिल को 2.79 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) की कीमत पर लॉन्च किया है. इसे 'बैटरी-एज़-ए-सर्विस' प्लान के साथ भी खरीदा जा सकता है, जिसके चलते इसकी शुरुआती कीमत घटकर 1.99 लाख रुपये हो जाती है. यह बात Royal Enfield की पहली EV को एक अनोखी स्थिति में ला खड़ा करती है. भारत में भले ही इसका कोई सीधा प्रतिद्वंद्वी न हो, लेकिन इसकी कीमत Ultraviolette F77 के काफी करीब है।  लेकिन Flying Flea C6 के मुकाबले Ultraviolette F77 कहीं ज़्यादा दमदार इलेक्ट्रिक स्पोर्ट्स बाइक है. खास बात यह है कि नई Flea C6 की बिक्री Flying Flea के खास स्टोर्स के ज़रिए की जाएगी, जिनमें से पहला स्टोर इसकी लॉन्च के साथ ही बेंगलुरु के जयनगर में खोला गया है. कंपनी ने एक बयान में बताया कि इसकी डिलीवरी मई में शुरू होगी, और इस मोटरसाइकिल को चरणबद्ध तरीके से अन्य शहरों में भी बिक्री के लिए पेश किया जाएगा।  2026 Royal Enfield Flying Flea C6 का डिजाइन नई Flea C6 का डिजाइन 1940 के दशक की मूल 'Flying Flea' मोटरसाइकिल से प्रेरित लगता है, जिसे युद्ध के मैदान के लिए तैयार किया गया था. नई Flea C6 के डिज़ाइन में बीते ज़माने की झलक साफ़ नज़र आती है. यह दिखने में बहुत ही बेहतरीन लगती है, और खासकर जब बात इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलों की हो. इसके डिज़ाइन की सबसे खास बात है, इसका 'फोर्ज्ड एल्युमिनियम गर्डर फोर्क' है, जिसके साथ एक 'आर्टिकुलेटिंग मडगार्ड' लगाया गया है।  इसके अलावा, बैटरी के लिए इस्तेमाल की गई 'फिन वाली मैग्नीशियम केसिंग' भी इसके लुक को बेहद खास बनाती हैं. नई Flea C6 के दोनों सिरों पर 19-इंच के व्हील लगाए गए हैं, जिन पर 90/90-सेक्शन के पतले Ceat टायर लगे हैं. बाइक की सीट हाइट 823 mm रखी गई है, जबकि इसका ग्राउंड क्लीयरेंस 207 mm है।  मोटरसाइकिल के टैंक वाले हिस्से में बाइक का स्टार्ट बटन और साथ ही 15-वॉट का वायरलेस फ़ोन चार्जिंग पैड लगाया गया है. मोटरसाइकिल में पीछे वाली सीट को हटाया जा सकता है, और इसके फ़ुटपेग्स को भी एडजस्ट किया जा सकता है।  2026 Royal Enfield Flying Flea C6 की टेक और सेफ्टी बाइक की रेट्रो थीम को ध्यान में रखते हुए, Flying Flea C6 में 3.5-इंच का गोल TFT टचस्क्रीन इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर दिया गया है, जिसमें गाड़ी के कई फ़ंक्शन मौजूद हैं, इस फंक्शन में एनर्जी रीजेनरेशन के अलग-अलग लेवल चुनने का विकल्प भी मिलता है. कार में वायरलेस चार्जर के अलावा, Flea C6 में 27-वॉट का USB-C चार्ज पोर्ट भी दिया गया है।  इस बाइक के साथ एक इलेक्ट्रॉनिक हैंडलबार लॉक भी मिलता है. मोटरसाइकिल में मिलने वाले सेफ्टी फीचर्स की बात करें तो नई Flea C6 के दोनों सिरों पर डिस्क ब्रेक लगाए गए हैं, जिनके साथ लीन एंगल-सेंसिंग एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS) और ट्रैक्शन कंट्रोल (TCS) जैसे फीचर्स दिए गए हैं।  2026 Royal Enfield Flying Flea C6 की बैटरी और परफॉर्मेंस बैटरी पैक की बात करें तो Flying Flea C6 के सेंटर में 3.91 kWh का बैटरी पैक मिलता है, जो एक परमानेंट मैग्नेट मोटर को पावर देती है. यह मोटर 3,500 rpm पर 20.6 bhp की अधिकतम पावर और 60 Nm का अधिकतम टॉर्क उत्पन्न करती है, जो बेल्ट ड्राइव के ज़रिए पिछले व्हील्स को पावर देते हैं. चूंकि Flea C6 का वज़न सिर्फ़ 124 kg है, इसलिए यह महज़ 3.7 सेकंड में 0 से 60 kmph की रफ़्तार पकड़ सकती है और इसकी टॉप-स्पीड 115 kmph तक पहुंच सकती है।  2026 Royal Enfield Flying Flea C6 की रेंज और चार्जिंग मोटरसाइकिल का वज़न कम होने का मतलब यह भी है कि एक तेज़ रफ़्तार वाली मोटरसाइकिल होने के बावजूद, इसकी रेंज काफ़ी अच्छी है. रेंज की बात करें तो Royal Enfield 154 km तक की रेंज (Indian Driving Cycle के अनुसार) का दावा करती है, और असल दुनिया में भी इसकी रेंज तीन अंकों में ही होनी चाहिए।  Royal Enfield ने Flying Flea C6 में 2.2 kW का ऑनबोर्ड चार्जर लगाया है, जो 16-amp के वॉल सॉकेट से जोड़ने पर मोटरसाइकिल को दो घंटे 15 मिनट में पूरी तरह चार्ज कर सकता है. कंपनी का कहना है कि 20 से 80 प्रतिशत तक चार्ज होने में बस एक घंटे से थोड़ा ज़्यादा समय लगता है, और यह मोटरसाइकिल तीन चुनने लायक चार्जिंग स्पीड – Rapid, Standard और Trickle के साथ भी आएगी। 

Mercedes-AMG GLE Coupe Performance Edition और A45 S Aero Track Edition भारत में लॉन्च, जानें कीमत

बेंगलुरु  लग्जरी कार निर्माता कंपनी Mercedes-Benz India ने भारत में दो स्पेशल एडिशन परफॉर्मेंस कार्स बाजार में उतारी हैं. कार निर्माता कंपनी ने भारत में हॉट हैच Mercedes-Benz AMG A45 4MATIC Aero Track Edition और AMG GLE 53 4MATIC Performance Edition पेश की हैं, जो AMG के शौकीनों को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं।  जर्मन लग्ज़री कार निर्माता कंपनी का दावा है कि इन कारों में AMG की खास पहचान और मोटरस्पोर्ट से प्रेरित विशिष्टता के साथ-साथ एक स्पोर्टी ड्राइविंग एक्सपीरिएंस भी मिलता है. कीमत की बात करें तो Mercedes-AMG A45 S Aero Track Edition 4MATIC+ की कीमत 87 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है, जबकि Mercedes-AMG GLE 53 Coupe Performance Edition की कीमत 1.52 करोड़ रुपये (एक्स-शोरूम) रखी गई है।  Mercedes-AMG A45 S Aero Track Edition 4MATIC+ नई Mercedes-AMG A45 S Aero Track Edition 4MATIC+ हॉट हैच, की कीमत 87 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है. यह एक स्पोर्टी फ्रंट एप्रन के साथ आती है, जिसमें एक बड़ा स्प्लिटर और हाई-ग्लॉस ब्लैक कलर के अतिरिक्त फ्लिक्स लगाए हैं. इस बाइक में हाई-ग्लॉस ब्लैक कलर का एक फिक्स्ड AMG रियर विंग भी दिया गया है।  कार में बेहतर स्टेबिलिटी के लिए इसके रियर एप्रन पर लैटरल एयरफ्लो ब्रेकअवे एज दिए गए हैं, जबकि हाई-ग्लॉस ब्लैक कलर का डिफ्यूज़र ब्लेड कार की एयरोडायनामिक दक्षता को बढ़ाने के लिए है. इसमें 19-इंच के ब्लैक अलॉय व्हील्स लगाए गए हैं. AMG पैकेज न केवल कार को एक शानदार विज़ुअल लुक देता है, बल्कि इसके फ़ंक्शनल फ़ायदों को भी बढ़ाता है।  इंजन की बात करें तो इस परफॉर्मेंस कार में 2.0-लीटर, चार-सिलेंडर वाला इंजन लगाया गया है, जो 6,750 rpm पर 415 bhp की पीक पावर और 5,000-5,250 rpm के बीच 500 Nm का अधिकतम टॉर्क उत्पन्न करता है. यह कार 270 kmph की टॉप स्पीड हासिल कर सकती है, जबकि सिर्फ 3.9 सेकंड में 0 से 100 kmph की रफ्तार पकड़ सकती है।  Mercedes-AMG GLE 53 Coupe Performance Edition वहीं, Mercedes-AMG GLE 53 Coupe Performance Edition की बात करें तो कंपनी ने इसे 1.52 करोड़ रुपये (एक्स-शोरूम) की कीमत पर उतारा है. इस कार में AMG Dynamic Plus Package मिलता है, जिसमें हाई-परफॉर्मेंस वाले पार्ट्स दिए गए हैं, जिससे इसकी स्पोर्टीनेस में साफ़ तौर पर बढ़ोतरी देखने को मिलती है. इसके अलावा, कार में AMG Active Ride Control दिया गया है, जिससे कार को ज़्यादा फुर्ती और स्टेबिलिटी मिलती है।  कंपनी इस कार में AMG हाई-परफॉर्मेंस कम्पोजिट ब्रेकिंग सिस्टम देती है, जिसमें अंदर से हवादार और छेद वाले ब्रेक डिस्क लगाए गए हैं. कार के अन्य खास फीचर्स की बात करें तो इसमें AMG परफॉर्मेंस स्टीयरिंग व्हील, MBUX इंफोटेनमेंट सिस्टम में पूरी तरह से इंटीग्रेटेड परफॉर्मेंस डेटा सिस्टम, और रियल-टाइम टेलीमेट्री (जिसमें लैप टाइम, एक्सीलरेशन, स्टीयरिंग इनपुट और ब्रेकिंग डेटा वगैरह शामिल हैं) जैसे फीचर्स मिलते हैं।  इस मॉडल मिलने वाले इंजन की बात करें तो इसमें 3.0-लीटर का सिक्स-सिलेंडर इंजन इस्तेमाल किया गया है, जिसकी मदद से यह कार सिर्फ 5.3 सेकंड में 0 से 100 kmph की रफ़्तार पकड़ सकती है, और इसकी टॉप स्पीड 250 kmph है. यह इंजन 6,100 rpm पर 429 bhp की पीक पावर और 1,800 rpm से 5,800 rpm के बीच 520 Nm का टॉर्क प्रदान करता है। 

नर्मदा में बोटिंग करते वक्त चट्टानों पर आराम करता तेंदुआ, पर्यटकों में अफरातफरी

ओंकारेश्वर  जिले की तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में  सुबह बोटिंग कर रहे पर्यटकों को नर्मदा किनारे चट्टानों पर तेंदुआ दिखाई दिए जाने के बाद हलचल मच गई। ओंकारेश्वर बांध के बैकवॉटर क्षेत्र में काजलरानी माता मंदिर के पास बोटिंग कर रहे श्रद्धालु और पर्यटकों की नजर चट्टानों के बीच आराम कर रहे तेंदुए पर पड़ी। यह दृश्य देखते ही लोगों ने अपने मोबाइल कैमरों में इसे कैद करना शुरू कर दिया।  खास बात यह रही कि लोगों की मौजूदगी और हलचल के बावजूद तेंदुआ पूरी तरह शांत नजर आया। वह कभी चट्टानों पर बैठा रहा तो कभी इधर-उधर टहलता दिखाई दिया, मानो उसे आसपास की गतिविधियों से कोई फर्क ही न पड़ रहा हो। इस घटना के वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिन्हें लोग काफी दिलचस्पी से देख रहे हैं। बता दें कि ओंकारेश्वर क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता, पहाड़ियों और शांत वातावरण के लिए पहले से ही प्रसिद्ध है। यहां नर्मदा बैकवॉटर में बोटिंग का अनुभव पर्यटकों के लिए खास आकर्षण रहता है। ऐसे में तेंदुए की मौजूदगी ने इस जगह के रोमांच को और बढ़ा दिया है। आमतौर पर तेंदुए को देखकर डर का माहौल बन जाता है लेकिन यहां मौजूद लोग इस अनोखे दृश्य को देखकर उत्साहित नजर आए और उन्होंने इसे यादगार पल के रूप में कैद किया।

इंदौर चिड़ियाघर में अंडर वॉटर टनल, 35 करोड़ में बनेगा दुबई और सिंगापुर जैसे मॉडल का निर्माण

इंदौर  इंदौर के चिड़ियाघर में पर्यटकों को जल्द ही समुद्र की गहराई का अहसास होगा क्योंकि यहां 35 करोड़ रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक एक्वेरियम का निर्माण किया जा रहा है। प्रशासन ने इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है और उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले चार से पांच महीनों के भीतर धरातल पर काम शुरू हो जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए चिड़ियाघर परिसर में ही दो एकड़ की भूमि आरक्षित कर दी गई है।  समुद्री मछलियों के लिए बनेगा विशेष खारा पानी इस एक्वेरियम में सैकड़ों प्रजातियों की समुद्री मछलियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इन मछलियों के अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए चिड़ियाघर में ही कृत्रिम रूप से समुद्री यानी खारा पानी तैयार किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार जल को खारा बनाने की इस प्रक्रिया में लगभग 45 दिन का समय लगेगा। यहां दुर्लभ प्रजातियों को रखने की योजना है ताकि दर्शकों को एक नया अनुभव मिल सके। दुबई और सिंगापुर जैसी अंडर वॉटर टनल इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत यहां बनने वाली अंडर वॉटर टनल होगी जिसे सिंगापुर और दुबई के प्रसिद्ध एक्वेरियम की तर्ज पर बनाया जाएगा। यह ग्लास टनल 20 से 50 मीटर लंबी होगी जिसमें चलते हुए पर्यटक अपने चारों ओर मछलियों को तैरते हुए देख सकेंगे। इसके साथ ही यहां एक आधुनिक टॉवर का निर्माण भी किया जाएगा और साहसिक गतिविधियों के शौकीनों के लिए स्कूबा डाइविंग की विशेष व्यवस्था भी उपलब्ध रहेगी। पीपीपी मॉडल पर आधारित निर्माण प्रक्रिया चिड़ियाघर प्रभारी नंदकिशोर पहाड़िया ने जानकारी दी कि इस पूरे प्रोजेक्ट को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी पीपीपी मॉडल के तहत पूरा किया जाएगा। विभाग का लक्ष्य है कि मानसून के बाद इसका निर्माण कार्य तेजी से शुरू कर दिया जाए। रविवार जैसे व्यस्त दिनों में जब चिड़ियाघर में दर्शकों की संख्या 25 हजार तक पहुंच जाती है, तब भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए एक्वेरियम का डिजाइन तैयार किया गया है। बच्चों के मनोरंजन और ज्ञानवर्धन के लिए भी यहां अलग से विशेष जोन बनाए जाएंगे। 

शिवराज मामा की रायसेन में बढ़ती सक्रियता, क्या विदिशा से मोहभंग या नया सियासी गणित?

रायसेन  मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक दिलचस्प हलचल देखने को मिल रही है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान का झुकाव तेजी से रायसेन की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। कभी उनकी राजनीति का केंद्र रहे विदिशा क्षेत्र से दूरी और रायसेन में बढ़ती सक्रियता ने सियासी गलियारों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है। हाल ही में आयोजित सांसद खेल महोत्सव के बाद अब रायसेन में तीन दिवसीय राष्ट्रीय कृषि मेले का आयोजन कराया जा रहा है। यह महज कार्यक्रमों की श्रृंखला नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक परिदृश्य संकेत के रूप में देखा जा रहा है। लगातार हो रहे आयोजनों से साफ है कि शिवराज सिंह चौहान का फोकस अब इस क्षेत्र पर ज्यादा केंद्रित हो रहा है। राजनीतिक जानकार इसे भविष्य की रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं। दरअसल, विदिशा में पिछले कुछ समय से भाजपा के अंदरूनी समीकरण और खींचतान की खबरें सामने आती रही हैं। स्थानीय स्तर पर बढ़ते असंतोष और गुटबाजी ने भी सियासी माहौल को प्रभावित किया है। ऐसे में रायसेन में बढ़ती सक्रियता को विदिशा से मोहभंग के रूप में भी देखा जा रहा है। हालांकि, पार्टी स्तर पर इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। इधर रायसेन में भाजपा के वरिष्ठ नेता रामपाल सिंह के साथ शिवराज सिंह चौहान की बढ़ती नजदीकियां भी जन चर्चा का विषय बनी हुई हैं। कार्यक्रमों में दोनों नेताओं की एक साथ मौजूदगी और समन्वय से यह संकेत मिल रहे हैं कि जिले में संगठनात्मक और राजनीतिक मजबूती के लिए नए समीकरण तैयार किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में डॉ चौधरी का रामपाल सिंह राजपूत के करीब आना भी कई मायनों में अहम माना जा रहा है। वहीं, वर्ष 2020 के बाद से डॉ नरोत्तम मिश्रा शेजवार (डॉ शेजवार) और शिवराज मामा के बीच बनी दूरी भी सियासी जन चर्चा का केंद्र रही है। पहले जहां दोनों के बीच मजबूत तालमेल देखने को मिलता था। वहीं अब राजनीतिक मंचों पर यह सामंजस्य पहले जैसा नजर नहीं आता। इसका सीधा असर क्षेत्रीय राजनीति पर भी पड़ रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी परिसीमन (डिलिमिटेशन) को लेकर भी बीजेपी के कद्दावर लोकप्रिय बड़े नेताओं की सक्रियता बढ़ी है। रायसेन में शिवराज मामा के लगातार हो रहे बड़े आयोजन कहीं न कहीं इस बात की ओर इशारा करते हैं कि भविष्य के चुनावी नक्शे को ध्यान में रखकर राजनीति की नई जमीन तैयार की जा रही है। यदि परिसीमन में बदलाव होता है, तो रायसेन क्षेत्र का महत्व और बढ़ सकता है। कुल मिलाकर, विदिशा से दूरी और रायसेन में बढ़ती सक्रियता को केवल संयोग नहीं माना जा सकता। यह सियासत का सोचा-समझा कदम भी हो सकता है, जिसमें सत्ता संगठन, समीकरण और भविष्य की संभावनाओं का पूरा खाका तैयार किया जा रहा है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि यह बदलाव केवल कार्यक्रमों तक सीमित रहता है या फिर मध्यप्रदेश की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत करता है।