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इकाना में भिड़ंत: पंत बनाम गिल, किसका रहेगा पलड़ा भारी?

लखनऊ रविवार को भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी इकाना क्रिकेट स्टेडियम में गुजरात टाइटंस (जीटी) की मेजबानी करेगी। इंडियन प्रीमियर लीग 2026 के 19वें मैच में एलएसजी की टीम जीत की हैट्रिक लगाना चाहेगी। एलएसजी को इस सीजन अपने पहले मुकाबले में दिल्ली कैपिटल्स के विरुद्ध 6 विकेट से हार का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ मैच 5 विकेट से अपने नाम किया। अपने तीसरे मैच में कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ इस टीम ने 3 विकेट से जीत दर्ज की। गुजरात का कैसा रहा है प्रदर्शन दूसरी ओर, जीटी को अपने पहले मैच में पंजाब किंग्स के विरुद्ध 3 विकेट से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद अगले मैच को राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ 6 रन से गंवाया। हालांकि, दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ 1 रन के करीबी अंतर से जीत दर्ज करते हुए गुजरात टाइटंस अपना खाता खोलने में कामयाब रही। अरुण जेटली स्टेडियम में दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ मिली शानदार जीत गुजरात टाइटंस के लिए एक टर्निंग प्वाइंट साबित हो सकती है। शुभमन गिल की कप्तानी में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वे लखनऊ में होने वाले अगले मुकाबले में इस लय को बरकरार रख पाते हैं या नहीं? हेड टू हेड में कैसा है दोनों टीमों का रिकॉर्ड हेड-टू-हेड रिकॉर्ड के मामले में गुजरात टाइटंस का लखनऊ सुपर जायंट्स पर थोड़ा पलड़ा भारी है। दोनों टीमों के बीच अब तक 7 मैच खेले गए हैं, जिनमें से गुजरात टाइटंस ने चार जीते, जबकि लखनऊ सुपर जायंट्स को तीन मुकाबलों में जीत मिली है। दोनों टीमों का स्क्वाड गुजरात टाइटंस की टीम: शुभमन गिल (कप्तान), जोस बटलर (विकेटकीपर), कुमार कुशाग्र, ग्लेन फिलिप्स, राशिद खान, मानव सुथार, निशांत सिंधु, वाशिंगटन सुंदर, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, कगिसो रबाडा, रविश्रीनिवासन साई किशोर, जयंत यादव, ईशांत शर्मा, अशोक शर्मा, जेसन होल्डर, टॉम बैंटन, ल्यूक वुड, साई सुदर्शन, राहुल तेवतिया, अरशद खान, अनुज रावत, कुलवंत खेजरोलिया, गुरनूर बरार, एम शाहरुख खान। लखनऊ सुपर जाइंट्स की टीम: ऋषभ पंत (कप्तान), मिशेल मार्श, एडेन मार्कराम, हिम्मत सिंह, मैथ्यू ब्रीत्जके, मुकुल चौधरी, अक्षत रघुवंशी, जोश इंग्लिस, निकोलस पूरन, अब्दुल समद, शाहबाज अहमद, अर्शिन कुलकर्णी, आयुष बडोनी, मोहम्मद शमी, अवेश खान, एम. सिद्धार्थ, दिग्वेश सिंह, आकाश सिंह, प्रिंस यादव, अर्जुन तेंदुलकर, एनरिक नॉर्टजे, नमन तिवारी, मयंक यादव, मोहसिन खान।  

US-ईरान शांति वार्ता क्यों टूटी? परमाणु हथियार बना सबसे बड़ा रोड़ा

नई दिल्ली पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही उच्च स्तरीय शांति वार्ता 21 घंटे तक चली सघन चर्चा के बाद भी बेनतीजा रही। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर ऐसी कौन सी बात हुई, जिसके कारण शांति वार्ता छोड़कर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस वहां से निकल गए। दरअसल, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस समझौते के विफल होने की वजह ईरान ने परमाणु हथियारों से जुड़ी अनिवार्य शर्तों को न मानना बता रहे हैं, तो वहीं ईरान ने अमेरिका पर अतार्किक और बेतुकी मांगें थोपने का आरोप लगाया है। क्यों विफल हुई शांतिवार्ता? पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में 21 घंटे तक चली बातचीत के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस ने विस्तार से चर्चा करने और सार्वजनिक रूप से बातचीत करने से इनकार कर दिया, लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि मुख्य विवाद परमाणु हथियारों पर था। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने कहा कि यह ईरान के लिए बुरी खबर है और उनकी टीम अंतिम और सर्वोत्तम प्रस्ताव पेश करने के बाद वार्ता खत्म कर दी है। कैसे बिगड़ी बात? शांति वार्ता के दौरान अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस ने कहा, "हमें एक सकारात्मक प्रतिबद्धता देखने की जरूरत है कि वे परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं करेंगे और न ही ऐसे उपकरण हासिल करने की कोशिश करेंगे जो उन्हें जल्दी से परमाणु हथियार प्राप्त करने में सक्षम बना सकें। वेंस ने तया कि यही लक्ष्य अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का भी है और यही वे बातचीत के माध्यम से हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। वेंस ने एक अलंकारिक प्रश्न पूछा कि क्या ईरानियों में दीर्घकाल में परमाणु हथियार विकसित न करने की इच्छाशक्ति है? जिसका ईरानियों ने सीधा सा जवाब 'नहीं' में दिया। शनिवार को इस्लामाबाद में चली शांति वार्ता के दौरान ईरान की जब्त संपत्तियों पर चर्चा हुई, इस बारे में एक पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए वैंस ने कहा कि इस पर और कई अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन हम ऐसी स्थिति तक नहीं पहुंच सके जहां ईरानी हमारी शर्तों को स्वीकार करने के लिए तैयार हों। ईरान ने अमेरिका की बेतूकी मांगो की आलोचना की ईरान ने मध्य पूर्व में युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से इस्लामाबाद में चल रही वार्ता में गतिरोध के लिए अमेरिका की बेतूकी मांगो को जिम्मेदार ठहराया है। ईरानी सरकारी प्रसारक आईआरआईबी ने बताया, "ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने ईरानी जनता के राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए 21 घंटे तक लगातार और गहन बातचीत की। ईरानी प्रतिनिधिमंडल की विभिन्न पहलों के बावजूद, अमेरिकी पक्ष की अनुचित मांगों ने बातचीत की प्रगति को रोक दिया। इस प्रकार बातचीत समाप्त हो गई।"  

21 घंटे चली बातचीत फेल: US-ईरान में नहीं बनी सहमति, पाकिस्तान ने निभाई मध्यस्थ की भूमिका

नई दिल्ली अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग को रोकने के लिए पाकिस्तान ने मध्यस्थता का रोल निभाया. इस्लामाबाद में शांति वार्ता का आयोजन किया गया. हालांकि, ये बातचीत बेनतीजा साबित हुई. इसके बावजूद पाकिस्तान अपनी पीठ थपथपाने से पीछे नहीं हट रहा है. विदेश मंत्री इशाक डार ने बातचीत में शामिल होने के लिए अमेरिका और ईरान का आभार जताया है. शांति वार्ता के बाद इशाक डार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान अपने बयान में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इन शांति वार्ताओं की मेजबानी करके सम्मानित महसूस कर रहा है. डार ने कहा, 'हम इस्लामाबाद में शांति वार्ता आयोजित करने के लिए ईरान और अमेरिका का शुक्रिया अदा करते हैं. ये न सिर्फ मिडिल-ईस्ट बल्कि पूरी दुनिया की स्थिरता के लिए एक अच्छा संकेत है.' पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने इस दौरान उम्मीद जताई कि दोनों पक्ष भविष्य में भी सीजफायर पर समझौतों को जारी रखेंगे. उन्होंने शांति के लिए पाकिस्तान की कोशिशें जारी रहने का भरोसा भी दिलाया. उन्होंने आगे बताया कि इस पूरी शांति वार्ता के पीछे पाकिस्तान के थल सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की अहम भूमिका रही. उन्होंने कहा, 'आसिम मुनीर ने सीजफायर करने के लिए कई दौर की वार्ताओं में मदद की.' बता दें कि इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटों तक बातचीत का दौर चला. इस दौरान दोनों पक्षों के बीच कई मुद्दों पर सहमति भी बनी. लेकिन परमाणु हथियार और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच बात नहीं बन पाई. क्यों फेल हुई शांति वार्ता? अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि वो बातचीत की नीयत से वार्ता में शामिल हुए थे. लेकिन ईरान अमेरिका का शर्तें मानने पर राजी नहीं है. ऐसे में वेंस अब अपनी टीम के साथ इस्लामाबाद से अमेरिका के लिए रवाना हो गए हैं. वहीं, ईरानी मीडिया का दावा है कि अमेरिका अपनी शर्तो में बहुत कुछ मांग रहा था.

योगी सरकार की पारदर्शी भर्ती से चयनित 491 महिला कॉन्स्टेबल, वाराणसी पुलिस लाइन से करेंगी सेवा शुरू

वाराणसी शिव की नगरी काशी की पुलिस लाइन में 491 महिला आरक्षी प्रशिक्षण ले रही हैं। योगी सरकार की पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया से चयनित इन बहादुर बेटियों के कंधों पर अब कानून-व्यवस्था और सुरक्षा का दायित्व होगा। वाराणसी पुलिस लाइन में  महिला कांस्टेबलों का कठोर प्रशिक्षण पूरा होने वाला है। 20 अप्रैल को पासिंग आउट परेड के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस को वाराणसी आरटीसी में प्रशिक्षित 491 महिला आरक्षी और मिल जाएंगी। मिशन शक्ति अभियान के तहत ये नारी शक्ति न केवल अपराधियों के छक्के छुड़ायेंगी,  बल्कि समाज में महिलाओं को सशक्त बनाने में भी अग्रणी भूमिका निभाएंगी। योगी सरकार प्रशिक्षु  महिला आरक्षियों के रहने खाने के साथ ही उन्हें इनडोर और आउटडोर प्रशिक्षण भी दिला रही है।  योगी सरकार की निष्पक्ष भर्ती के तहत पुरुषों के साथ ही बड़ी संख्या में महिलाओं को भी पुलिस सेवा में प्रवेश मिला है। मिशन शक्ति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी योजना है, जो महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन पर केंद्रित है। मिशन शक्ति, पिंक बूथ और हेल्पलाइन नंबर 1090 जैसी सुविधाओं के साथ अब ये प्रशिक्षु महिला कांस्टेबल ट्रेनिंग पूरा करने के बाद सुरक्षा का जिम्मा उठाएंगी। इन्हें 9 माह की ट्रेनिंग में इनडोर और आउटडोर प्रशिक्षण दिया गया है।  पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने बताया कि प्रशिक्षु महिला आरक्षियों को फिजिकल ट्रेनिंग के साथ ही पुलिसिंग के सभी गुण सिखाए गए हैं। इसमें सोशल पुलिसिंग, आधुनिक तकनीक से किये जा रहे अपराधों के रोकथाम, हथियार संचालन, सीसीटीएनएस, साइबर क्राइम, फॉरेंसिक साइंस, फॉरेंसिक  मेडिसिन, भारतीय पुलिस का इतिहास यूपी के संदर्भ में, पुलिस संगठन, अंतर विभागीय समन्वय, पुलिस कार्यप्रणाली एवं अनुशासन, अपराध शास्त्र एवं अपराध नियंत्रण, विवेचना, पुलिस अभियोजन, पुलिस रेगुलेशन, सुरक्षा, लोक व्यवस्था एवं बंदोबस्त, आपदा प्रबंधन, यातायात प्रबंधन, पुलिस रेडियो दूरसंचार प्रणाली, गार्ड ड्यूटी, बंदी एस्कॉर्ट, हवालात ड्यूटी को लेकर प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा  भारतीय संविधान, आरक्षी के कर्तव्य, भारतीय संविधान, मानवाधिकारों की अवधारणा एवं महत्व, लैंगिक संवेदनशीलता का मतलब और महत्व, महिला पुलिस एवं पुलिस कार्य में उनकी भूमिका, महिला पुलिस कर्मियों से व्यवहार, पुलिस कार्य में नैतिकता और जवाबदेही आदि के विषय में बताया गया। इसके अलावा आरक्षियों को श्रमदान, योगासन, खेल, वर्दी पहनने, पदवार अधिकारियों की वर्दी पहचानना और सैल्यूट के तरीके आदि के बारे में भी सिखाया जा रहा है।   वर्जन प्रशिक्षु महिला आरक्षी पुलिस लाइन के 12 मंजिला भवन व अन्य बैरकों में रह रहीं हैं। जहां बंक बेड, आरओ वाटर कूलर, कैंटीन और कूलर आदि की व्यवस्था है। पुलिस लाइन में ही बैंक के एटीएम हैं। यहां जवानों के पौष्टिक खाने के लिए मेस भी चल रही है।  डॉ. ईशान सोनी, अपर पुलिस उपायुक्त/सहायक पुलिस आयुक्त पुलिस लाइन ट्रेनिंग के दौरान महिला कांस्टेबल को सॉफ्ट स्किल, दंगा नियंत्रण, शस्त्र चलाना और कानून की बारीकियों आदि से दक्ष किया गया है। इनकी परीक्षा चल रही है। 20 अप्रैल को पासिंग आउट परेड होगी। इसके बाद सभी प्रशिक्षु आरक्षी बन कर सेवा करेंगी। मोहित अग्रवाल, पुलिस आयुक्त, वाराणसी महिला आरक्षियों की जुबानी पुलिस की वर्दी में मिशन शक्ति की सिपाही बनकर हर महिला को सुरक्षित महसूस कराएँगे। योगी जी की सरकार ने हमें अवसर दिया, अब हम समाज की सेवा और सुरक्षा में पूरा योगदान देंगे। नीतू गौतम “हम केवल पुलिस कर्मी नहीं, समाज में बदलाव की प्रतिनिधि बनना चाहती हैं। महिला आरक्षी कानून की रक्षा के साथ-साथ महिलाओं की आवाज़ बनेंगी। महिला सशक्तीकरण के संकल्प को समाज के हर तबके तक पहुंचाएंगे।  कविता यादव योगी सरकार महिला सशक्तीकरण और नौकरी का वादा पूरा कर रही है। 81000 भर्ती की घोषणा से तैयारी कर रहे युवाओं को भी मौका मिलेगा।  रोशनी देवी प्रयागराज के फूलपुर की मुंशी बुजुर्ग गांव की पहली बेटी हूँ, जो पुलिस विभाग में भर्ती हुई है। अब गांव की अन्य बेटियां भी पुलिस भर्ती प्रक्रिया के बारे में पूछतीं हैं। पारदर्शी भर्ती ने हमें पैरों पर खड़ा होने का मौका दिया है।   सोनाली

नक्सल प्रभावित बीजापुर में विकास का मॉडल: 5 लाख मानव दिवस, रोजगार-राशन-आवास से बदली जिंदगी

रायपुर लंबे समय तक नक्सल प्रभाव के कारण विकास से अछूते रहे बीजापुर जिले के अंदरूनी क्षेत्रों में अब बदलाव की बयार स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। नियद नेल्लानार योजना और मनरेगा के संयुक्त प्रयासों से उन गांवों तक विकास की पहुंच बनी है, जहां दशकों तक नक्सल प्रभाव के कारण बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच पाई थीं। अब इन क्षेत्रों में रोजगार, आवास, पेयजल, शिक्षा और आजीविका के अवसरों का विस्तार हो रहा है, जिससे लोगों के जीवन में ठोस परिवर्तन दिखाई दे रहा है। बीजापुर जिले में नियद नेल्लानार योजना के तहत 42 सुरक्षा कैम्पों के माध्यम से 67 ग्राम पंचायतों के 224 गांवों को शामिल किया गया है। इस पहल में मनरेगा की सक्रिय भागीदारी से स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और आधारभूत ढांचे के निर्माण को गति मिली है, जिससे ग्रामीणों को अपने ही गांव में काम और अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। 16 हजार से अधिक परिवारों को रोजगार का सहारा इन ग्रामों में अब तक 16,671 जॉब कार्ड पंजीकृत किए गए हैं, जिनमें से 7,271 नए जॉब कार्ड बनाए गए हैं। इससे हजारों परिवारों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध हो रहा है। विशेष रूप से नक्सल प्रभावित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है। इसमें 966 आत्मसमर्पित नक्सली, 178 घायल पीड़ित परिवार और 477 मृतक नक्सल पीड़ित परिवारों के जॉब कार्ड बनाकर उन्हें मनरेगा योजना से जोड़ा गया है, जिससे उन्हें स्थायी आजीविका का आधार मिल रहा है। पहली बार दिखा विकास का व्यापक असर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत नियद नेल्लानार क्षेत्रों में 1,744 विकास कार्य कराए गए हैं, जिनके माध्यम से 5 लाख से अधिक मानव दिवस सृजित हुए हैं। इन कार्यों के जरिए न केवल स्थानीय स्तर पर ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार मिला है, बल्कि पलायन में भी कमी आई है और ग्रामीणों का शासन के प्रति विश्वास भी मजबूत हुआ है। आजीविका डबरी बन रही आय का सशक्त जरिया नियद नेल्लानार क्षेत्र में 372 आजीविका डबरी की स्वीकृति देकर ग्रामीणों को आजीविकामूलक गतिविधियों से जोड़ने की पहल की गई है। जनपद पंचायत भैरमगढ़ के नियद नेल्लानार अंतर्गत ग्राम पंचायत बेलनार, जहां कभी नक्सली दहशत के कारण ग्रामीण गांव छोड़कर विस्थापित होने पर मजबूर थे, अब पुनः जीवन की मुख्यधारा में लौट आया है। नियद नेल्लानार योजना में शामिल होने के बाद ग्रामीण अपने गांव लौट आए हैं। उनके आजीविका संवर्धन के लिए महात्मा गांधी नरेगा योजनांतर्गत वर्ष 2025-26 में हितग्राही श्री सहदेव कोरसा, श्री लखु और श्री सुदरू कोरसा की आजीविका डबरी पूर्ण हो चुकी हैं। इन डबरियों में मत्स्य पालन एवं हॉर्टिकल्चर विभाग से अभिसरण के माध्यम से मछली पालन एवं सब्जी उत्पादन का कार्य प्रस्तावित है। 2977 परिवारों को मिला पक्का आवास नियद नेल्लानार क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत आवास निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है। इस योजना के तहत कुल 2,977 हितग्राहियों को आवास स्वीकृति प्रदान की गई है, जिनमें से अब तक 690 हितग्राहियों के पक्के आवास बनकर तैयार हो चुके हैं। इन आवासों में अब परिवार सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं। गांव-गांव में बदलाव की सजीव तस्वीर जनपद पंचायत बीजापुर के नियद नेल्लानार अंतर्गत ग्राम दुगाली में मनरेगा से निर्मित कुआं अब 100 से अधिक ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा बन गया है। दुर्गम भौगोलिक स्थिति के कारण जहां बोरिंग संभव नहीं थी, वहां यह कुआं स्थायी समाधान बनकर उभरा है। इससे ग्रामीणों को सुलभ पेयजल के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार भी मिला है। ग्राम पालनार में, जहां पहले प्रशासन की पहुंच नहीं थी, आज पंचायत भवन, आंगनबाड़ी और गौठान निर्माण कार्य जारी हैं, जिसमें वर्तमान में 200 से अधिक श्रमिक कार्यरत हैं। कावड़गांव में 50 वर्षों के भय और अलगाव के बाद अब 100 प्रतिशत ग्रामीण श्रमिकों को जॉब कार्ड वितरित किए जा चुके हैं। साथ ही इस गांव में सड़क, बिजली, पेयजल, स्कूल और मोबाइल टॉवर जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंच चुकी हैं। सावनार (तोड़का पंचायत) में 9.35 लाख रुपए की लागत से बने आंगनबाड़ी भवन से 40–45 बच्चों को नियमित शिक्षा और पोषण मिल रहा है। पुसुकोण्टा (उसूर) में 11.69 लाख रुपए की लागत से निर्मित आंगनबाड़ी भवन ने बच्चों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया है। धरमारम और तोड़का क्षेत्र में उचित मूल्य दुकानों के निर्माण से अब ग्रामीणों को गांव में ही राशन मिल रहा है। ग्राम बांगोली में, जहां पहले 18 किलोमीटर दूर जाकर राशन लाना पड़ता था, अब 524 परिवारों को गांव में ही यह सुविधा उपलब्ध हो रही है। युवाओं का कौशल विकास और आत्मनिर्भरता पुनर्वासित आत्मसमर्पित नक्सलियों एवं स्थानीय युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से राजमिस्त्री प्रशिक्षण प्रदान किया गया है, जिससे वे निर्माण कार्यों में रोजगार प्राप्त कर रहे हैं और अपने जीवन को नई दिशा दे रहे हैं। नियद नेल्लानार योजना और मनरेगा के प्रभावी अभिसरण से बीजापुर के अंदरूनी गांवों में अब विकास ने गति पकड़ ली है। रोजगार, बुनियादी ढांचे और शासन के प्रति बढ़ते विश्वास के साथ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी व्यापक और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है, जो विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में एक मजबूत कदम है। बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से बस्तर में समृद्धि की नई राह : मुख्यमंत्री श्री साय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर के जिन गांवों तक कभी विकास की पहुंच नहीं थी, वहां आज नियद नेल्लानार योजना और प्रधानमंत्री आवास जैसी योजनाओं के माध्यम से नई उम्मीद और आत्मविश्वास का संचार हुआ है। हमारी सरकार का स्पष्ट विश्वास है कि जब विकास, रोजगार और बुनियादी सुविधाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती हैं, तब ही स्थायी शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। इन क्षेत्रों में रोजगार सृजन, सुरक्षित आवास, पेयजल, शिक्षा और आजीविका के अवसरों के विस्तार से न केवल लोगों का जीवन स्तर बेहतर हुआ है, बल्कि शासन के प्रति विश्वास भी मजबूत हुआ है। यह परिवर्तन इस बात का प्रमाण है कि संवेदनशील नीतियों, समन्वित प्रयासों और जनभागीदारी से सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी सकारात्मक बदलाव संभव है – और हम इस बदलाव को और गति देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

भूकंप से दहशत: डोडा के बाद महाराष्ट्र के हिंगोली तक महसूस हुए झटके

 डोडा जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में रविवार तड़के भूकंप के झटके महसूस किए गए.  रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 4.6 मापी गई.  नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, भूकंप सुबह 04:32 बजे आया. राहत की बात यह है कि अभी तक कहीं से भी जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है. भूकंप के बाद स्थानीय प्रशासन अलर्ट हो गया है. पुलिस और राहत टीमें हालात पर नजर बनाए हुए हैं.  प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, लेकिन सतर्क जरूर रहें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सूचना दें. 1 मार्च को भी आया था भूकंप डोडा में भूकंप के झटके महसूस करना कोई नई बात नहीं है. इससे पहले 1 मार्च 2026 को भी यहां 4.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था. हालांकि उस समय भी कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ था, लेकिन लोगों में दहशत फैल गई थी. महाराष्ट्र में भी महसूस हुए थे भूकंप के झटके महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र स्थित हिंगोली जिले के कुछ हिस्सों में शनिवार को भूकंप के झटके महसूस किए गए.  रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.7 मापी गई. इसके साथ ही पड़ोसी जिलों नांदेड़ और परभणी के भी कुछ हिस्सों में भूकंप के झटके महसूस किए गए. हिंगोली के जिलाधिकारी राहुल गुप्ता ने बताया कि पांगरा शिंदे गांव के कुछ हिस्सों में भूकंप का असर देखने को मिला है.  यहां कुछ घरों और सामुदायिक केंद्रो की दीवारों में दरार देखने को मिली हैं.  हालांकि किसी प्रकार की जान-माल का नुकसान नहीं हुआ. वहीं, नादेड़ जिला अधिकारी ने बताया कि भूकंप की तीव्रता 4.7 मापी गई थी.  नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी की एक रीडिंग का हवाला देते हुए कहा कि भूकंप शनिवार सुबह 8.45 बजे दर्ज किया गया. भूकंप का केंद्र हिंगोली जिले की वसमत तहसील के शिरली गांव में भूमि से करीब 10 किलोमीटर की गहराई में था.  

धार्मिक अपमान पर कड़ी सजा की तैयारी: पंजाब में उम्रकैद और भारी जुर्माने वाला कानून जल्द

चंडीगढ़. पंजाब कैबिनेट ने 'श्री जगतगुरु ग्रंथ साहिब जी सत्कार (संशोधन) विधेयक’ 2026 को मंजूरी दे दी है, जिसे 13 अप्रैल को बुलाए जा रहे विधानसभा के विशेष सत्र में पेश किया जाएगा। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य धार्मिक ग्रंथों के सम्मान को सुनिश्चित करना और बेअदबी जैसे संवेदनशील मामलों में कड़ी कानूनी कार्रवाई को लागू करना है। नए संशोधन के तहत सजा के प्रावधानों को काफी सख्त किया गया है। अब ऐसे मामलों में कम से कम 10 साल की सजा और अधिकतम उम्रकैद (लाइफ इम्प्रिजनमेंट) का प्रावधान रखा गया है। इसके साथ ही आर्थिक दंड को भी बढ़ाया गया है, जिसमें न्यूनतम 5 लाख रुपये और अधिकतम 25 लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकेगा। कैबिनेट ने यह भी तय किया है कि इन मामलों की जांच को और मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए डीएसपी (डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस) स्तर के अधिकारी से कम रैंक का कोई भी अधिकारी जांच नहीं करेगा। साथ ही आरोपित द्वारा मानसिक अस्थिरता का हवाला देकर बचने की कोशिशों को भी सख्ती से परखा जाएगा। इसके अलावा, कानून में परिभाषाओं को स्पष्ट किया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की कानूनी अस्पष्टता न रहे। गांवों के विकास को लेकर फैसला इसके बाद कैबिनेट ने गांवों के विकास को लेकर भी बड़ा फैसला लिया। राज्य के 11,500 से अधिक गांवों में करीब 3 लाख स्ट्रीट लाइटें लगाने की योजना को मंजूरी दी गई है। इस योजना के तहत औसतन हर गांव में कम से कम 27 स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएंगी। इस प्रोजेक्ट में खर्च की हिस्सेदारी को भी बदला गया है। पहले जहां 70 प्रतिशत खर्च ग्राम पंचायतों द्वारा और 30 प्रतिशत सरकार द्वारा वहन किया जाता था, अब इसे उलट कर 70 प्रतिशत खर्च पंजाब सरकार और 30 प्रतिशत ग्राम पंचायतें वहन करेंगी। इस योजना पर करीब 380 करोड़ रुपये राज्य सरकार और लगभग 170 करोड़ रुपये पंचायतों द्वारा खर्च किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे गांवों में रोशनी बढ़ेगी, सुरक्षा बेहतर होगी और छोटे-मोटे अपराधों पर भी अंकुश लगेगा। खेलों के क्षेत्र में अहम निर्णय खेलों के क्षेत्र में भी कैबिनेट ने अहम निर्णय लिया है। पंजाब को पहली बार एशियन हॉकी चैंपियनशिप की मेजबानी का मौका मिलेगा। इसके लिए हॉकी इंडिया के साथ करीब 11 करोड़ रुपये का एग्रीमेंट किया जाएगा, जबकि पूरे आयोजन के लिए लगभग 35.40 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट जालंधर के प्रमुख हॉकी मैदानों में आयोजित किया जाएगा, जहां भारत सहित एशिया की शीर्ष टीमें भाग लेंगी। सरकार का मानना है कि इससे पंजाब की खेल विरासत को नई पहचान मिलेगी और युवाओं को हॉकी की ओर प्रेरणा मिलेगी। कुल मिलाकर, कैबिनेट के ये फैसले कानून व्यवस्था को मजबूत करने, ग्रामीण बुनियादी ढांचे को सुधारने और खेलों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।

झुर्रियों से बचाव के लिए खाएं ये 5 सुपरफूड्स, त्वचा रहेगी जवान

बढ़ती उम्र के साथ त्वचा पर झुर्रियां और फाइन लाइंस आना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है लेकिन हमारी खराब जीवनशैली और खान-पान इसे समय से पहले ही न्योता दे देते हैं. अगर आप भी महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स और ट्रीटमेंट्स के बजाय प्राकृतिक तरीके से अपनी त्वचा को जवां और चमकदार बनाए रखना चाहते हैं तो इसका हल आपके किचन में ही छिपा है. समय से पहले आने लगा है बुढ़ापा? खाएं ये फूड्स सही पोषण न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है बल्कि त्वचा के कोलेजन को बढ़ाकर झुर्रियों को दूर रखने में भी मदद करता है. यहां हम आपको ऐसे 5 सुपरफूड्स की जानकारी दे रहे हैं जो आपकी त्वचा को लंबे समय तक जवान बनाए रखने में मदद करते हैं. 1. पपीता पपीता एंटीऑक्सीडेंट्स और पपेन नामक एंजाइम से भरपूर होता है. यह मृत कोशिकाओं को हटाने और त्वचा में लचीलापन (Elasticity) लाने में मदद करता है. इसके नियमित सेवन से फाइन लाइंस कम होती हैं. 2. ब्लूबेरी और जामुन बेरीज विटामिन C और एंथोसायनिन का बेहतरीन स्रोत हैं. ये त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों और प्रदूषण से होने वाले डैमेज से बचाती हैं, जिससे त्वचा ढीली नहीं पड़ती. 3. नट्स और सीड्स बादाम, अखरोट और अलसी के बीजों में ओमेगा-3 फैटी एसिड और विटामिन E पाया जाता है. ये तत्व त्वचा की नमी को बरकरार रखते हैं और प्राकृतिक चमक प्रदान करते हैं, जिससे झुर्रियां जल्दी नहीं आतीं. 4. पालक और हरी सब्जियां पालक में क्लोरोफिल, विटामिन C और आयरन भरपूर मात्रा में होता है. यह शरीर में कोलेजन उत्पादन को बढ़ाता है, जो त्वचा को टाइट रखने और झुर्रियों को रोकने के लिए सबसे जरूरी प्रोटीन है. 5. एवोकाडो एवोकाडो में हेल्दी फैट्स और विटामिन A होता है. यह त्वचा की गहराई से मरम्मत करता है और स्किन सेल्स को पोषण देता है जिससे चेहरा फ्रेश और यंग दिखता है.

जमीन-जायदाद से जुड़े काम क्यों अटकते हैं, जानें ज्योतिषीय कारण और उपाय

कई लोग ऐसे होते हैं जो सालों से एक ही परेशानी में फंसे रहते हैं-प्रॉपर्टी लेने की कोशिश करते हैं, लेकिन हर बार कोई न कोई रुकावट आ जाती है. कभी पैसा अटक जाता है, कभी डील टूट जाती है, तो कभी कानूनी झंझट सामने आ जाता है, अगर आप भी इसी दौर से गुजर रहे हैं, तो ये खबर आपके लिए है. ज्योतिष और पारंपरिक मान्यताओं में ऐसे कई आसान उपाय बताए गए हैं, जो जिंदगी में अटके कामों को आगे बढ़ाने में मदद कर सकते हैं. खासकर प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों में कुछ छोटे-छोटे टोटके भी असर दिखा सकते हैं. हाल ही में एक ऐसा ही आसान उपाय चर्चा में है, जिसे लोग अपनाकर फायदा मिलने का दावा कर रहे हैं. क्यों अटकती है प्रॉपर्टी की डील? प्रॉपर्टी से जुड़ी परेशानियां सिर्फ पैसों की वजह से नहीं होतीं. कई बार ग्रह-नक्षत्र भी इसमें भूमिका निभाते हैं. खासकर मंगल ग्रह को जमीन-जायदाद का कारक माना जाता है, अगर आपकी कुंडली में मंगल कमजोर है या दोषपूर्ण स्थिति में है, तो प्रॉपर्टी से जुड़े काम बार-बार अटक सकते हैं. कई लोगों के साथ ऐसा होता है कि सब कुछ तय होने के बाद भी आखिरी समय में डील रुक जाती है. जैसे भोपाल के रहने वाले एक व्यक्ति बताते हैं कि उन्होंने तीन बार घर खरीदने की कोशिश की, लेकिन हर बार कोई न कोई समस्या आ गई-कभी बैंक लोन रुका, कभी कागजों में दिक्कत. आसान उपाय जो बदल सकता है स्थिति शनिवार की रात करें ये खास उपाय ज्योतिष के अनुसार, एक बेहद सरल उपाय अपनाकर इस समस्या को कम किया जा सकता है. इसके लिए आपको “मोलश्री” के फूल लेने हैं. ये फूल शांति और सकारात्मक ऊर्जा से जुड़े माने जाते हैं. शनिवार की रात सोते समय इन फूलों को अपने तकिए के नीचे रख लें. ऐसा खासतौर पर शनिवार को करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इस दिन का संबंध शनि और कर्म से होता है. कैसे करता है असर? माना जाता है कि ये उपाय आपके जीवन में चल रही नकारात्मक ऊर्जा को कम करता है. खासकर मंगल से जुड़े दोषों को शांत करने में मदद मिलती है. जब मंगल संतुलित होता है, तो जमीन-जायदाद से जुड़े काम धीरे-धीरे बनने लगते हैं. लोगों के अनुभव क्या कहते हैं? हालांकि ये पूरी तरह आस्था पर आधारित उपाय है, लेकिन कई लोग इसे अपनाकर सकारात्मक बदलाव महसूस करने की बात कहते हैं. कुछ लोगों का कहना है कि लंबे समय से रुकी डील अचानक आगे बढ़ गई, तो कुछ को नई प्रॉपर्टी के मौके मिलने लगे. इंदौर की एक महिला बताती हैं कि उन्होंने यह उपाय लगातार 3 शनिवार तक किया, जिसके बाद उनकी रुकी हुई प्लॉट की रजिस्ट्री पूरी हो गई. उनके मुताबिक, पहले जहां हर बार कोई बाधा आ जाती थी, वहीं इस बार सब कुछ आसानी से हो गया. ध्यान रखने वाली बातें सिर्फ उपाय पर निर्भर न रहें यह समझना जरूरी है कि ये उपाय आपकी कोशिशों का विकल्प नहीं है, अगर आप प्रॉपर्टी खरीदना चाहते हैं, तो सही प्लानिंग, कागजी जांच और फाइनेंशियल तैयारी बेहद जरूरी है. सकारात्मक सोच भी जरूरी उपाय के साथ-साथ आपका नजरिया भी मायने रखता है, अगर आप लगातार नकारात्मक सोचेंगे, तो उसका असर आपके फैसलों पर भी पड़ेगा. क्या सच में काम करता है ये उपाय? इस सवाल का कोई वैज्ञानिक जवाब नहीं है, लेकिन आस्था और विश्वास का असर कई बार मानसिक रूप से मजबूत बनाता है. जब आप किसी उपाय को पूरे विश्वास के साथ करते हैं, तो आपका आत्मविश्वास बढ़ता है और आप बेहतर फैसले ले पाते हैं. प्रॉपर्टी से जुड़ी परेशानियां आम हैं, लेकिन अगर बार-बार रुकावट आ रही है, तो थोड़ा अलग सोचने में हर्ज नहीं है. मोलश्री के फूल वाला यह आसान उपाय न सिर्फ करने में सरल है, बल्कि कई लोगों के अनुभव इसे आजमाने लायक बनाते हैं. हालांकि, इसे अपनाने के साथ अपनी मेहनत और समझदारी को भी साथ रखना जरूरी है.

CM Dashboard Ranking: हमीरपुर अव्वल, बरेली दूसरे और रामपुर तीसरे स्थान पर, यूपी में विकास को मिली रफ्तार

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पिछले नौ वर्षों से समग्र विकास की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। इस दौरान प्रदेश में न केवल बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है, बल्कि समाज के हर वर्ग का उत्थान भी सुनिश्चित किया जा रहा है। सीएम योगी के सपनों को साकार करने में सीएम डैशबोर्ड अपनी अहम भूमिका निभा रहा है। सीएम डैशबोर्ड से जनसुनवाई, जन कल्याणकारी योजनाओं और राजस्व कार्यों की लगातार निगरानी की जा रही है, जिससे जिलों को बेहतर प्रशासनिक मानक स्थापित करने में मदद मिल रही है। इसी कड़ी में सीएम डैशबोर्ड की मार्च की रिपोर्ट में प्रदेशभर में हमीरपुर ने बेहरीन प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान प्राप्त किया है जबकि बरेली ने दूसरा और रामपुर ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है।  49 विभागों के 110 कार्यक्रमों की हर माह सीएम डैशबोर्ड से की जाती है समीक्षा सीएम डैशबोर्ड द्वारा हर माह जिलों के राजस्व कार्यों, विकास कार्यों और कानून-व्यवस्था पर रिपोर्ट जारी की जाती है। डैशबोर्ड द्वारा प्रदेशभर के जिलों में 49 विभागों के 110 कार्यक्रमों की विभिन्न मानकों के आधार पर समीक्षा की जाती है। इसके बाद जिलों की रैंकिंग जारी की जाती है। सीएम डैशबोर्ड की मार्च माह की रिपोर्ट के अनुसार हमीरपुर ने प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। वहीं बरेली जिले ने दूसरा स्थान प्राप्त किया है जबकि रामपुर ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है। जिलाधिकारी रामपुर अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि सीएम डैशबोर्ड की रिपोर्ट उन जिलों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करती है, जिन्होंने प्रशासनिक दक्षता, विकास कार्यों और राजस्व प्रबंधन में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। टॉप फाइव जिलों में मैनपुरी और हरदोई ने बनाई जगह डीएम ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप रामपुर में विकास कार्यों को गुणवत्तापूर्ण समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। यही वजह है कि रामपुर पिछले कई माह से मुख्यमंत्री डैशबोर्ड की रिपोर्ट में टॉप टेन जिलों में अपने जगह बनाए हुए है। वहीं, हमीरपुर ने विकास एवं राजस्व कार्यों की संयुक्त रैंकिंग में 10 में से 9.55 अंक प्राप्त किए हैं। इसी तरह बरेली ने 9.54 अंक हासिल किये हैं। सीएम डैशबोर्ड रिपोर्ट के अनुसार रामपुर ने 10 में से 9.51 अंक प्राप्त किये हैं। इसी तरह मैनपुरी चौथे और हरदोई पांचवे पायदान पर है। वहीं टॉप टेन जिलों में शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, जालौन, सोनभद्र और कौशांबी ने जगह बनाई है।