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इंदौर में डेढ़ महीने में 150 E बसे, रफ्तार का नया दौर शुरू होगा

इंदौर  एमपी में बस यात्रियों को जल्द ही बड़ी सुविधा उपलब्ध होगी। इंदौर में नई ई बसों का संचालन डेढ़ महीने में शुरू हो जाएगा। प्रधानमंत्री ई सेवा योजना के तहत शहर को 150 ई-बसें मिलना है। इसमें से 40 बसें इंदौर आ भी चुकी हैं। खास बात यह है कि नई ई बसें आसपास के जिलों में भी जाएंगी। इन बसों का इंदौर के चारों ओर के बड़े शहरों के लिए रूट तैयार किया गया है। इस प्रकार प्रदेश के करीब एक दर्जन जिलों के बस यात्रियों की सुविधा बढ़ जाएगी। लोक परिवहन व्यवस्था चलाने वाली कंपनी एआइसीटीएसएल ई बस के संचालन के लिए दो डिपो तैयार कर रहा है, जिसे पूरा होने में समय लगेगा। इन बसों के टिकट कलेक्शन के लिए नई एजेंसी नियुक्त की जा रही है। अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड (एआईसीटीएसएल) की बोर्ड बैठक में इंदौर संभाग के परिवहन ढांचे का कायाकल्प करने वाले कई दूरगामी निर्णय लिए गए। बोर्ड के अध्यक्ष और मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमपीवायपीआईएल) के एमडी मनीष सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में तय किया गया कि एआईसीटीएसएल का कार्यक्षेत्र अब केवल इंदौर शहर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह संभाग के सभी जिलों में बस सेवाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण की मुख्य धुरी बनेगी। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के अंतर्गत इंदौर को प्रथम चरण में 150 इलेक्ट्रिक बसें प्राप्त होने जा रही हैं। इन बसों के वैज्ञानिक रख-रखाव और सुचारू संचालन के लिए अन्तरराज्यीय बस टर्मिनल (आईएसबीटी) नायता मुंडला एवं देवास नाका पर दो हाईटेक इलेक्ट्रिक बस डिपो के निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। बैठक में जानकारी दी गई कि द्वितीय चरण के लिए भी एक अतिरिक्त स्थल चिन्हित किया गया है। इसके साथ ही, इंदौर से उज्जैन, भोपाल, खरगोन, खंडवा और मांडव जैसे प्रमुख पर्यटन व व्यावसायिक केंद्रों के लिए 26 लग्जरी इंटरसिटी ई-बसें भी शीघ्र सड़क पर उतरेंगी। यात्रियों की सुविधा के लिए लास्ट माइल कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करते हुए शहर में 500 इलेक्ट्रिक साइकिलों के संचालन हेतु निविदा प्रक्रिया को स्वीकृति दी गई है। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए 64 नए ईवी चार्जिंग स्टेशन भी स्थापित किए जाएंगे। यात्रियों के अनुभव को सुखद बनाने के लिए सरवटे बस स्टैंड, एआईसीटीएसएल परिसर और नायता मुंडला में स्मार्ट टॉयलेट की सुविधा भी जल्द शुरू होगी। :: सीएनजी स्टेशन से सुदृढ़ होगी आर्थिक स्थिति :: संस्था को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिटी बस डिपो में सीएनजी ईंधन सुविधा उपलब्ध कराने हेतु अवंतिका गैस लिमिटेड के साथ अनुबंध को मंजूरी दी गई। इससे कंपनी को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक में कलेक्टर शिवम वर्मा, निगमायुक्त क्षितिज सिंघल और संभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी सम्मिलित हुए। एमडी मनीष सिंह ने निर्देश दिए कि सभी विकास परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा में पूर्ण कर आमजन को त्वरित राहत पहुँचाई जाए। मौजूदा सिस्टम में जितनी बसें अनुबंधित हैं उनके टिकट कलेक्शन का काम ऑपरटेर की टीम ही करती है और कंपनी की टीम निगरानी करती है एआइसीटीएसएल के मौजूदा सिस्टम में जितनी बसें अनुबंधित हैं उनके टिकट कलेक्शन का काम ऑपरटेर की टीम ही करती है और कंपनी की टीम निगरानी करती है। नई बसों के लिए नई एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया भोपाल से चल रही है। भोपाल से ही ऑपरेटर नियुक्त हुए हैं। कंंपनी के कार्यकारी निदेशक अर्थ जैन के मुताबिक, ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन की एजेंसी को 1 महीने में तय करेंगे। एजेंसी तय होने के बाद ही शुभारंभ होगा। बसों का संचालन दूसरे शहरों के लिए भी होगा प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के लिए मिल रही बसों के संचालन के लिए 32 रूट तय किए हैं। इंदौर से उज्जैन, खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर, सेंधवा, भोपाल, धार, मांडव, महेश्वर के बीच भी चलाया जाएगा अधिकारियों के मुताबिक, नई ई-बसों का संचालन इंदौर के साथ दूसरे शहरों के लिए भी किया जाएगा। सर्वे के बाद रूट तय किए गए हैं। जिस रूट पर बसों की कमी है, लोगों को लोक परिवहन की जरूरत है वहां बसें चलेंगी। हालांकि अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। इन बसों को इंदौर से उज्जैन, खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर, सेंधवा, भोपाल, धार, मांडव, महेश्वर के बीच भी चलाया जाएगा।

जबलपुर समेत 14 जिलों में 14 लाख घरों तक पहुंचेगी पीएनजी, पाइप लाइन बिछाई गई

जबलपुर  जबलपुर समेत 14 जिलों में पाइपलाइन से नेचुरल गैस की सप्लाई देने की तैयारी हो चुकी है। गेल इंडिया ने नागपुर से जबलपुर तक पीएनजी गैस की पाइपलाइन पहुंच गई है। इसकी टेस्टिंग भी हो गई है। शहर के भीतर गैस पाइप बिछाने का काम होना बाकी है जिसके बाद घर-घर गैस पाइप के जरिए पहुंचेगी। हालांकि इस काम में अभी एक साल का वक्त लगेगा। यह काम मेघा इन्फ्रास्टक्चर को मिला हुआ है। लाइन बिछने के बाद घरों में गैस पाइप के जरिए आएगी और लोगों को सिलेंडर के लिए लाइन नहीं लगानी पड़ेगा। फिलहाल इस पाइप लाइन से नागपुर के जेएसडब्ल्यू प्लांट में गैस सप्लाई शुरू हो रही है। जबलपुर के पास कोसमघाट में गैस प्लांट बनकर तैयार हो चुका है। गैस सिलिंडर की किल्लत के बीच बढ़ी मांग पश्चिम एशिया में मचे रहे महासंग्राम की वजह से रसोई गैस की सप्लाई चैन गड़बड़ा गई है। लोगों को पर्याप्त मात्रा में एलपीजी नहीं मिल पा रही है। गैस एजेंसी के बाहर गैस सिलिंडर के लिए कतारें लग रही हैं। ऐसे में पीएनजी लोगों के लिए बेहद सुविधाजनक होगी। मुंबई से ओडिशा के झारसुगुड़ा तक गैस की पाइपलाइन बिछाई जा रही है। ऐसा है प्रोजेक्ट राष्ट्रीय गैस ग्रिड और पीएम गतिशक्ति मास्टर प्लान के तहत गैस पाइपलाइन बिछाने का काम चल रहा है। इस परियोजना के तीन चरण में किया गया। इसमें मुंबई से नागपुर 698 किमी, नागपुर से ओडिशा के झारसुगुड़ा खंड में 692 किमी व नागपुर-जबलपुर खंड में 317 किमी लंबी पाइपलाइन बिछाई जा रही है। 7,844 करोड़ रुपये की लागत से यह काम हुआ है। 11 सौ करोड़ की लागत से जबलपुर से नागपुर के बीच 317 किमी लंबी पाइपलाइन बिछाई गई है। जबलपुर के अलावा सिवनी, छिंदवाड़ा सहित 14 जिलों के उपभोक्ताओं को इसका फायदा मिलेगा। घर-घर गैस पहुंचाने के लिए मेघा इंन्फ्रा को काम मिला है लेकिन काम बिलंब से प्रारंभ होने की वजह से इसमें समय लगेगा। सस्ती मिलेगी गैस वितरण पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा होते हुए गैस की सप्लाई होने से प्रदूषण कम होने के साथ ही मौजूदा स्थिति में गैस के दाम में 25 प्रतिशत कम हो जाएंगे। वहीं लोगों को बिजली के बिल की तरह ही गैस का बिल देना होगा। गैस की खपत के आधार पर ही बिल भुगतान करना होगा। सिलिंडर की तुलना में सस्ती     गैल इंडिया कंपनी ने कोसमघाट में गैस प्लांट बना दिया है। जेएसडब्ल्यू प्लांट नागपुर को गैस की आपूर्ति इसी पाइपलाइन से शुरू हो चुकी है। शहरी क्षेत्र में पाइपलाइन बिछाने का काम किया जा रहा है। घरों तक और सीएनजी पंप व उद्योगों के लिए गैस सप्लाई और पाइपलाइन डालने का काम निजी एजेंसियां करेंगी। जबलपुर में शहर के अंदर लगभग 45 किलोमीटर में पाइप लाइन बिछाई जानी है। यह सिलिंडर की तुलना में सस्ती मिलेगी। – अखिलेश जैन, स्वतंत्र निदेशक गेल इंडिया यह है स्थिति     नागपुर से जबलपुर के बीच 317 किमी का प्रोजेक्ट     एलपीजी के साथ ही सीएनजी और पीएनजी गैस की होगी सप्लाई     25 प्रतिशत तक कम दाम का दावा     जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी सहित 14 जिलों के उपभोक्ताओं को मिलेगा फायदा  

SIR वोटर लिस्ट में बड़ा अपडेट: 12 राज्यों में 6.08 करोड़ नाम हटे, यूपी और बंगाल में बदलाव सबसे ज्यादा

नई दिल्ली देशभर में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान के दूसरे फेज के तहत चुनाव आयोग ने 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों की अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी है। इस प्रक्रिया के बाद वोटर लिस्ट में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जिसमें कुल 6.08 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। इस अपडेट के बाद इन राज्यों में कुल मतदाताओं की संख्या घटकर लगभग 44.92 करोड़ रह गई है। चुनाव आयोग के अनुसार, SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना है, ताकि डुप्लीकेट, मृत और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जा सकें। इस प्रक्रिया में उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, राजस्थान, छत्तीसगढ़, केरल, गुजरात, मध्य प्रदेश, गोवा सहित पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप शामिल रहे। उत्तर प्रदेश और बंगाल में सबसे बड़ा बदलाव सबसे बड़ा असर उत्तर प्रदेश में देखने को मिला है, जहां मतदाता सूची से लगभग 2.04 करोड़ नाम हटाए गए हैं। इसके चलते राज्य में मतदाताओं की कुल संख्या में करीब 13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है और अब यह लगभग 13.39 करोड़ रह गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव मुख्य रूप से मृत, स्थानांतरित और दोहरी प्रविष्टियों को हटाने के कारण हुआ है। दूसरे बड़े राज्य पश्चिम बंगाल में भी मतदाता सूची में महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। यहां करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जिससे राज्य की वोटर लिस्ट पहले की तुलना में काफी छोटी हो गई है। यह राज्य पहले से ही राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जाता है, ऐसे में इस बदलाव को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। 60 करोड़ मतदाता SIR प्रक्रिया के तहत कवर हुए  चुनाव आयोग का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया देश की मतदाता सूची को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए की जा रही है। आयोग के अनुसार, पूरे देश में करीब 99 करोड़ मतदाताओं में से अब तक लगभग 60 करोड़ मतदाता SIR प्रक्रिया के तहत कवर किए जा चुके हैं, जबकि शेष राज्यों में यह अभियान अगले चरण में पूरा किया जाएगा। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर कुछ राज्यों में राजनीतिक विवाद भी देखने को मिला है। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में कुछ दलों ने मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने पर सवाल उठाते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। आने वाले समय में 17 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों में SIR प्रक्रिया शुरू की जाएगी। चुनाव आयोग का लक्ष्य है कि आगामी चुनावों से पहले देशभर की मतदाता सूची को पूरी तरह अपडेट कर लिा जाए, ताकि चुनावी प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी हो सके।  

प्रदेश में IPS तबादला सूची तैयार, 20 जिलों के SP बदलने की हो रही है योजना

भोपाल  मध्यप्रदेश में IAS अफसरों की तबादला सूची गुरुवार देर रात जारी होने के बाद अब पुलिस विभाग में बड़े फेरबदल की तैयारी तेज हो गई है। प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि IPS अधिकारियों की नई तबादला सूची भी लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और कभी भी इसका औपचारिक ऐलान किया जा सकता है। गृह विभाग की ओर से तैयार प्रस्तावित सूची में प्रदेश के करीब 20 जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) को बदले जाने की संभावना जताई जा रही है.. सूची जारी करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। सूत्रों के अनुसार, 2020 बैच के पांच आईपीएस अधिकारियों को इस तबादला सूची में बड़ा फायदा मिल सकता है। इन्हें पहली बार जिलों में एसपी की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। इससे पहले 2019 बैच के कई आईपीएस अधिकारियों को जिला स्तर पर पदस्थ किया जा चुका है। अब कोर्ट के आदेश से प्रमोशन पाकर आईपीएस बने अधिकारियों को भी महत्वपूर्ण जिलों की कमान मिलने के संकेत मिल रहे हैं। भोपाल में महिला अफसर को मिल सकती है कमान राजधानी भोपाल में भी बदलाव की अटकलें तेज हैं। वर्तमान कलेक्टर विक्रम कौशलेंद्र सिंह को बड़ी जिम्मेदारी मिलने की चर्चा है, जबकि उनकी जगह प्रियंक मिश्रा या किसी महिला आईएएस अधिकारी को कलेक्टर बनाया जा सकता है। सरकार बड़े शहरों में महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने के मूड में नजर आ रही है। कई कलेक्टर बुलाए जा सकते हैं भोपाल सूत्रों का कहना है कि कुछ जिलों के कलेक्टरों को मंत्रालय में नई जिम्मेदारी दी जा सकती है। नर्मदापुरम, बैतूल, ग्वालियर, शिवपुरी, रीवा, इंदौर, उमरिया और मैहर जैसे जिलों के कलेक्टरों को सचिवालय स्तर पर अहम दायित्व मिलने की संभावना जताई जा रही है। वहीं वल्लभ भवन में पदस्थ कुछ अधिकारियों को फील्ड में भेजने की तैयारी भी चल रही है। सचिव स्तर पर भी बदलाव संभव यह फेरबदल सिर्फ जिलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में भी बदलाव के संकेत हैं। वर्तमान सचिवों में से किसी एक का ट्रांसफर हो सकता है, वहीं नए सचिव की एंट्री की चर्चा है। अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव स्तर पर भी बदलाव से शासन के शीर्ष स्तर पर नई कार्यशैली देखने को मिल सकती है। पुलिस महकमे में भी हलचल, 20 SP बदलना तय आईएएस के साथ-साथ आईपीएस अधिकारियों में भी बड़े पैमाने पर बदलाव की तैयारी है। खंडवा, बैतूल, भिंड, धार, रीवा और झाबुआ समेत कई जिलों में एसपी बदले जा सकते हैं। इसके अलावा प्रमोशन के बाद भी एसपी पद पर जमे अधिकारियों को नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। परफॉर्मेंस के आधार पर होगा फैसला सूत्रों के अनुसार इस बार ट्रांसफर में परफॉर्मेंस सबसे बड़ा फैक्टर रहेगा। बेहतर काम करने वाले अधिकारियों को बड़े जिलों की जिम्मेदारी दी जाएगी, जबकि कमजोर प्रदर्शन वालों को बदला जा सकता है। मजबूत प्रशासन, तेज फैसले पर सरकार का फोकस मुख्यमंत्री मोहन यादव की प्राथमिकता साफ है राज्य में प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाना। इसके लिए ऐसे अधिकारियों को आगे लाया जाएगा जो योजनाओं को जमीन पर तेजी से लागू कर सकें और जनता को सीधा लाभ मिले। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि यह बहुप्रतीक्षित ट्रांसफर लिस्ट कब जारी होती है और किन जिलों में बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं। इसी बीच डीआईजी पद पर प्रमोट हो चुके कई वरिष्ठ अधिकारियों की भी नई पदस्थापना तय मानी जा रही है। इनमें खंडवा, भिंड, धार, रेल और अन्य इकाइयों में तैनात अफसर शामिल हैं, जिन्हें जल्द नई जिम्मेदारी दी जा सकती है। वहीं रीवा, भोपाल और इंदौर में पदस्थ कुछ अधिकारियों के भी स्थानांतरण की चर्चा है। इनके तबादलों के साथ ही संबंधित जिलों में नए पुलिस अधीक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि गृह विभाग स्तर पर अंतिम मंथन जारी है और सूची को अंतिम रूप दिए जाने के बाद कभी भी इसे जारी किया जा सकता है। पूरे पुलिस महकमे की नजर अब इस संभावित तबादला सूची पर टिकी हुई है।