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वॉट्सऐप जैसा फीचर अब जीमेल में, एक क्लिक में काम हो जाएगा, यूज करने का तरीका जानें

 नई दिल्ली गूगल ने एक बड़ा ऐलान किया है, जिसमें जीमेल यूजर्स को एंड टू एंड एनक्रिप्शन का सपोर्ट मिलेगा. यह सपोर्ट एंड्रॉयड और आईओएस दोनों ऑपरेटिंग सिस्टम पर मिलेगा. एंड टू एंड एनक्रिप्शन की सुविधा इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप पर भी मिलता है।  एक बार अपडेट मिलने के बाद यूजर्स को सेंसटिव ईमेल भेजने के लिए सिक्योरिटी लेयर के लिए अलग से सॉफ्टवेयर या एक्सटेंशन की जरूरत नहीं होगी. ईमेल सुरक्षित तरीके से रिसीवर तक पहुंच जाएगा।  एंड टू एंड एनक्रिप्शन क्या होता है?  एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, असल में एक तरह का डिजिटल सिक्योरिटी लॉक सिस्टम है. इस टेक्नोलॉजी का यूज करने पर डेटा भेजने वाले और रिसीव करने वाले के अलावा अन्य कोई शख्स ईमेल या मैसेज को बीच में डिकोड नहीं कर पाएगा।  सीधे शब्दों में समझें तो आप किसी बक्से को भेजते हैं, जिसमें सोना-चांदी है. ऐसे लोग उसमें ताला लगा देते हैं और चाबी सिर्फ रिसीवर के पास है. एंड टू एंड एनक्रिप्शन कुछ ऐसे ही काम करता है।  गूगल ने जीमेल के एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन सपोर्ट को एंड्रॉयड और आईओएस डिवाइस तक एक्सपेंशन का ऐलान किया है. एक बार अपडेट मिलने के बाद यूजर्स अब सीधे Gmail मोबाइल ऐप की मदद से एन्क्रिप्टेड ईमेल लिख, भेज और पढ़ सकेंगे।  इन यूजर्स को मिलेगी सुविधा  एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन गूगल वर्क स्पेस के एंटरप्राइज यूजर्स को मिलेगी, जिनके पास क्लाइंट-साइड एनक्रिप्शन कैपिबिलटीज है. इसके लिए पहले एडमिन कंसोल के जरिए एंड्रॉयड और आईओएस सपोर्ट को एक्टिवेट करना होगा, उसके बाद ही यूजर्स इसका एक्सेस कर पाएंगे।  गूगल बता चुका है कि अपडेट रैपिड रिलीज और शेड्यूल रिलीज दोनों डोमेन के लिए लाइव हो चुका है. एक बार मोबाइल पर एंड टू एंड इनक्रिप्शन की सुविधा मिलने के बाद यूजर्स कहीं से भी सुरक्षित तरीके से एक्सेस कर पाएंगे. पहले एन्क्रिप्टेड ईमेल के लिए डेस्कटॉप या थर्ड-पार्टी टूल्स की जरूरत होती थी। 

शादी सीजन में ग्वालियर में विंटेज कारों का किराया बढ़ा, 11 हजार से 35 हजार तक पहुंचा

ग्वालियर शहर में शादी सीजन शुरू होते ही बारात के अंदाज में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां पहले दूल्हे पारंपरिक घोड़ी पर सवार होकर बारात लेकर निकलते थे। अब उनकी जगह ओपन रूफ, कन्वर्टिबल और रॉयल लुक वाली विंटेज कारों ने ले ली है। आधुनिक दौर में शादी को खास और यादगार बनाने की चाहत ने इस ट्रेंड को तेजी से बढ़ावा दिया है। खासकर युवा दूल्हे अब शाही अंदाज में एंट्री करना पसंद कर रहे हैं, जिससे उनकी बारात मेहमानों के बीच आकर्षण का केंद्र बन रही है। सोशल मीडिया ट्रेंड से बढ़ी मांग वेडिंग इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि सोशल मीडिया का इस ट्रेंड को बढ़ाने में बड़ा योगदान है। आजकल प्री-वेडिंग शूट, सिनेमैटिक वीडियोग्राफी और रील्स का चलन बढ़ गया है। ऐसे में ओपन रूफ और कन्वर्टिबल कारें फोटो और वीडियो में रॉयल फील देती हैं। यही कारण है कि दूल्हे अब स्टाइलिश और क्लासिक एंट्री के लिए विंटेज कारों को प्राथमिकता दे रहे हैं। सजावट से बनती है खास पहचान विंटेज कारों को फूलों, एलईडी लाइट्स, रिबन और थीम डेकोरेशन से सजाया जाता है, जिससे उनका लुक और भी आकर्षक हो जाता है। कई परिवार दूल्हा-दुल्हन की ग्रैंड एंट्री, जयमाला स्टेज और फोटोशूट के लिए अलग से पैकेज भी बुक कर रहे हैं। इससे शादी का पूरा माहौल शाही और भव्य नजर आता है। 11 हजार से 35 हजार तक किराया शहर के वेडिंग कारोबारियों के अनुसार, विंटेज कारों का किराया 11 हजार रुपये से शुरू होकर 35 हजार रुपये तक पहुंच जाता है। किराया कार के मॉडल, ब्रांड, समय, सजावट और उपयोग के आधार पर तय होता है। ओपन रूफ और कन्वर्टिबल कारों का चार्ज सामान्य कारों की तुलना में अधिक होता है। वहीं पीक सीजन में एडवांस बुकिंग के चलते कीमतों में और बढ़ोतरी हो जाती है। शहर से बाहर अलग पैकेज अगर बारात शहर से बाहर या रिसॉर्ट वेडिंग में जानी हो, तो किराया अलग से तय किया जाता है। दूरी, समय और लोकेशन के आधार पर अतिरिक्त शुल्क लिया जाता है। ड्राइवर चार्ज, फ्यूल, नाइट स्टे और टाइम एक्सटेंशन जैसी सुविधाएं भी इसमें शामिल होती हैं। डेस्टिनेशन वेडिंग में भी बढ़ी मांग इस बार शादी सीजन में विंटेज कारें सिर्फ शहर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डेस्टिनेशन वेडिंग और आउटडोर रिसेप्शन में भी पहली पसंद बन रही हैं। शाही एंट्री के इस ट्रेंड ने बारात के पारंपरिक अंदाज को पूरी तरह बदल दिया है।

यूपी में 1098 हेल्पलाइन बनी बच्चों की रक्षक: 2025-26 में 26 हजार मामलों का निस्तारण, हजारों बच्चे घर लौटे

लखनऊ योगी सरकार में महिला एवं बाल कल्याण के क्षेत्र में तेजी से काम किया जा रहा है। खासतौर पर गुमशुदा बच्चों की तलाश और उनकी सुरक्षित वापसी को लेकर योगी सरकार का अभियान लगातार असर दिखा रहा है। शुक्रवार को महिला कल्याण निदेशालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, चाइल्ड हेल्पलाइन के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2025-26 में करीब 26 हजार से ज्यादा शिकायतों का निस्तारण किया गया है। ये आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि सरकार इस दिशा में लगातार गंभीरता से प्रयत्नशील है। गुमशुदा बच्चों के लिए 1098 हेल्पलाइन काफी कारगर प्रदेश में महिला कल्याण निदेशालय के मिशन वात्सल्य योजना के अंतर्गत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 का संचालन किया जा रहा है। चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 एक इमरजेंसी सेवा है, जो 24×7 काम करती है। इसके माध्यम से संकट में फंसे बच्चों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जाती है। यहां 18 साल से कम उम्र के गुमशुदा बच्चों-किशोरों की शिकायतें दर्ज की जाती हैं। इस संबंध में यूपी चाइल्ड हेल्पलाइन कंट्रोल रूम की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 में गुमशुदा या खोए हुए बच्चों की कुल 28,945 शिकायतें दर्ज की गई थी। 26 हजार से ज्यादा शिकायतों का हो चुका निस्तारण कंट्रोल रूम के आंकड़ों के मुताबिक, जिसमें से करीब 26,239 शिकायतों का निस्तारण कर दिया गया है। जबकि 2,706 मामलों में अभी भी कार्रवाई जारी है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि योगी सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से काम कर रही है। वहीं सरकार के प्रयासों का असर जमीनी स्तर पर भी दिख रहा है। बांदा जिले की रहने वाली एक महिला का 6 वर्षीय बेटा 2015 में चित्रकूट परिक्रमा के दौरान लापता हो गया था। तमाम प्रयास के बावजूद बेटे की तलाश नहीं हो पाई थी। लेकिन चाइल्ड हेल्पलाइन और पुलिस के समन्वय से करीब 10 साल बाद उसको खोज निकाला गया और उसे उसकी मां को सौंप दिया गया था। बच्चों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता योगी सरकार में सिर्फ गुमशुदगी ही नहीं, बल्कि बाल शोषण के मामलों में भी हेल्पलाइन 1098 सक्रिय भूमिका निभा रही है। इसी तरह एटा जिले में एक बच्चे को बाल श्रम और शारीरिक उत्पीड़न से मुक्त कराकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। काउंसिलिंग और इलाज के बाद उसे उसके माता-पिता को सौप दिया गया था। इस तरह प्रदेश की योगी सरकार में बच्चों की सुरक्षा भी प्राथमिकता में शामिल है। चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के जरिए न सिर्फ शिकायतों का त्वरित निस्तारण हो रहा है, बल्कि बच्चों को नया जीवन भी मिल रहा है।

रायपुर : मधुमक्खी पालन – कम लागत में ज्यादा मुनाफे का एक बेहतरीन विकल्प

रायपुर : मधुमक्खी पालन: कम लागत में ज्यादा मुनाफे का बेहतर विकल्प राष्ट्रीय बागवानी मिशन से किसानों को मिल रहा प्रोत्साहन, बढ़ रही आय और रोजगार के अवसर रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें वैकल्पिक आजीविका से जोड़ने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में राष्ट्रीय बागवानी मिशन एवं राज्य योजना के अंतर्गत मधुमक्खी पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। जशपुर जिले में इस योजना के तहत 20 किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को मधुमक्खी पालन के लिए आवश्यक संसाधनों पर अनुदान दिया जा रहा है, जिसमें मधुमक्खी पेटी (बी बॉक्स) सहित कॉलोनी के लिए 1600 रुपये, मधुमक्खी छत्ता हेतु 800 रुपये तथा मधु निष्कासन यंत्र के लिए 8000 रुपये की सहायता शामिल है। इस पहल से किसान कम लागत में अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। फसल उत्पादन बढ़ाने में अहम भूमिका मधुमक्खियां केवल शहद उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि परागण के माध्यम से फसलों की पैदावार बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। सरसों, आम, लीची, अमरूद, सूरजमुखी, धनिया एवं विभिन्न सब्जी फसलों में मधुमक्खियों द्वारा परागण से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। इससे कृषि अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनती है। स्वरोजगार का सशक्त माध्यम मधुमक्खी पालन ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार का एक प्रभावी साधन बनकर उभर रहा है। प्रशिक्षण लेकर कोई भी व्यक्ति इस व्यवसाय को आसानी से शुरू कर सकता है। शहद, मोम और रॉयल जेली जैसे उत्पादों की बाजार में अच्छी मांग होने से आय के स्थायी स्रोत विकसित हो रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मधुमक्खियां जैव विविधता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मधुमक्खियों की संख्या में कमी आ रही है, जो पर्यावरण के लिए चिंता का विषय है। ऐसे में मधुमक्खी-अनुकूल खेती को बढ़ावा देना आवश्यक है। कम निवेश, अधिक लाभ मधुमक्खी पालन कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाला व्यवसाय है। एक मधुमक्खी बॉक्स से वर्ष में कई बार शहद उत्पादन किया जा सकता है। वैज्ञानिक तकनीकों, उचित प्रबंधन और मौसम के अनुसार देखभाल करने से किसान बेहतर उत्पादन और अधिक आय प्राप्त कर सकते हैं। यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

राज्यसभा चुनाव में 4 सीटों पर हो सकता है चुनाव, 4 मई को होगी सियासी ताकतों की परीक्षा

भोपाल   मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। फिलहाल राज्य से तीन सीटें खाली होना तय है, लेकिन परिस्थितियां ऐसी बन रही हैं कि यह संख्या चार तक पहुंच सकती है। इसका पूरा दारोमदार तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों पर टिका है। तीन सीटें तय, चौथी पर सस्पेंस मध्य प्रदेश से वर्तमान में दिग्विजय सिंह, सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन की राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं। इनका कार्यकाल 9 अप्रैल को पूरा हो चुका है। लेकिन अब नजरें एल मुरुगन पर टिकी हैं, जो फिलहाल मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं और केंद्र में राज्य मंत्री भी हैं। यदि वे तमिलनाडु विधानसभा चुनाव जीत जाते हैं, तो उनकी राज्यसभा सीट भी खाली हो जाएगी जिससे कुल सीटों की संख्या चार हो सकती है। तमिलनाडु चुनाव से जुड़ा गणित एल मुरुगन इस बार तमिलनाडु की अविनाशी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। राज्य में 23 अप्रैल 2026 को मतदान होगा और 4 मई को नतीजे घोषित किए जाएंगे। 4 मई की तारीख इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि उसी दिन यह तय होगा कि मध्य प्रदेश में तीन सीटों पर चुनाव होगा या चार पर। यदि मुरुगन जीतते हैं, तो उन्हें विधायक पद के कारण राज्यसभा सीट छोड़नी पड़ेगी।  मुरुगन का राजनीतिक सफर एल मुरुगन भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं।     साल 2021 में उन्हें केंद्र सरकार में मंत्री बनाया गया और उसी दौरान वे मध्य प्रदेश से राज्यसभा पहुंचे।     वे सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं।     इससे पहले वे मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय में भी राज्य मंत्री रह चुके हैं। हालांकि, विधानसभा और लोकसभा चुनावों में उनका रिकॉर्ड मिश्रित रहा है। वे पहले भी कई चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन जीत हासिल नहीं कर पाए। अब एक बार फिर वे अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। भाजपा की रणनीति और संभावनाएं अगर एल मुरुगन चुनाव जीतते हैं, तो संभावना है कि भाजपा उन्हें दक्षिण भारत, खासकर तमिलनाडु में संगठन मजबूत करने की बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है। ऐसी स्थिति में मध्य प्रदेश से राज्यसभा की चौथी सीट खाली होगी, जिसका कार्यकाल 2030 तक है। यह भाजपा के लिए एक अतिरिक्त अवसर भी बन सकता है। राजनीतिक समीकरणों पर असर इस पूरे घटनाक्रम का असर न सिर्फ मध्य प्रदेश बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है। राज्यसभा सीटों की संख्या बढ़ने या घटने से दलों के बीच संतुलन बदल सकता है। अब सबकी नजर 4 मई पर टिकी है, जब यह साफ होगा कि मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव का गणित क्या रूप लेता है।

नारी शक्ति वंदन: हौसलों की उड़ान, गांव की पहली बहू मीनाक्षी ने भरी हवाई जहाज़ की उड़ान

भोपाल  गुना जिले के बमोरी ब्लॉक की श्रीमती मीनाक्षी फराक्टे आज ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। राजमाता स्व-सहायता समूह की सदस्य और शिवाजी राज सीएलएफ से जुड़ी श्रीमती मीनाक्षी उन्नत आजीविका प्रोसेसिंग केंद्र की सेंटर इंचार्ज हैं। उनका यह सफर केवल एक महिला की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, संघर्ष और संकल्प की जीवंत मिसाल है। स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें दिल्ली में आयोजित एआई समिट में शामिल होने हवाई जहाज़ में बैठने का अवसर मिला। यह अवसर प्राप्त करने वाली वह गांव की पहली बहू हैं। श्रीमती मीनाक्षी बताती हैं कि उनके प्रोसेसिंग केंद्र में किसान दीदियों से कच्चा माल खरीदा जाता है, फिर उसे प्रोसेस कर बाजार तक पहुंचाया जाता है। उनके साथ जुड़ी समूह की महिलाएं अलग-अलग माध्यमों से कभी घर-घर जाकर, कभी दुकानों पर, तो कभी आंगनवाड़ी और स्कूलों में चल रहे मध्याह्न भोजन कार्यक्रमों के जरिए बिक्री करती हैं। लेकिन यह राह आसान नहीं थी। जब मीनाक्षी और उनकी साथी महिलाएं पहली बार दुकानों पर अपने उत्पाद बेचने गईं, तो लोगों को विश्वास ही नहीं होता था कि महिलाएं भी सफल मार्केटिंग कर सकती हैं। दुकानदार अक्सर सवाल करते—“क्या आप लोग समय पर सामान पहुंचा पाएंगी? क्या इतनी जिम्मेदारी निभा पाएंगी? एक महिला होने से उन पर संदेह भी किया जाता था। कई बार एक ही दुकान पर दो से चार बार जाना पड़ता, बार-बार समझाना पड़ता, भरोसा दिलाना पड़ता कि वे भी गुणवत्तापूर्ण सामान समय पर दे सकती हैं। हर दिन नई चुनौतियां सामने आती थीं, लेकिन मीनाक्षी और उनकी समूह की दीदियों ने कभी हार नहीं मानी। वे लगातार हर दुकान, हर घर तक पहुंचीं और अपने काम से लोगों का भरोसा जीता। आज वही मेहनत रंग लाई है। पिछले दो वर्षों में उनकी यूनिट 70 लाख रुपये की बिक्री कर चुकी है, जिसमें अकेले मीनाक्षी ने 25 से 30 लाख रुपये तक की बिक्री की है। जो आय पहले केवल 5 हजार रुपये थी, वह आज बढ़कर 25 हजार रुपये प्रतिमाह हो गई है। श्रीमती मीनाक्षी कहती हैं कि मार्केटिंग उतनी कठिन नहीं है, जितनी हम सोचते हैं। बस पहला कदम बढ़ाना पड़ता है। जब तक हम खुद अनुभव नहीं करेंगे, तब तक डर बना रहेगा। लेकिन एक बार शुरुआत कर दी, तो हम सब कुछ कर सकते हैं। उनकी उपलब्धियां यहीं नहीं रुकीं। दिल्ली में आयोजित एआई समिट में शामिल होने के लिए श्रीमती मीनाक्षी पहली बार फ्लाइट से यात्रा कर चुकी हैं। वे गर्व से कहती हैं कि वे अपने गांव की पहली बहू हैं, जिसने हवाई जहाज में सफर किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए श्रीमती मीनाक्षी कहती हैं कि आज उन्हें जो मंच मिला है, वह इसी समर्थन का परिणाम है। उनकी कहानी बताती है कि यदि हौसले बुलंद हों, तो गांव की महिलाएं भी आसमान छू सकती हैं।  

बस्तर के दुर्गम गांवों तक बारहमासी पक्की सड़कों का जाल बिछने से आवाजाही हुई सुगम

रायपुर : बस्तर में बदलाव की नई बयार, माओवाद के साये से निकलकर कोलेंग वनांचल में बदली तस्वीर बस्तर के दुर्गम गांवों तक बारहमासी पक्की सड़कों का जाल बिछने से आवाजाही हुई सुगम रायपुर बस्तर का वह सुदूर वनांचल, जहाँ कभी सन्नाटा और दहशत का पहरा था, आज वहां खुशहाली की नई इबारत लिखी जा रही है। बस्तर जिले के दरभा विकासखंड का कोलेंग क्षेत्र, जो दशकों तक माओवादी गतिविधियों के कारण विकास की दौड़ में पिछड़ गया था, अब अपनी एक नई पहचान गढ़ रहा है। मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसता यह इलाका अब सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं से लैस होकर विकास की मुख्यधारा में मजबूती से कदम रख चुका है। कभी जो गाँव के लोग बुनियादी सुविधाओं और शासकीय योजनाओं से महरूम थे, वे अब सीधे शासन-प्रशासन के संपर्क में हैं, साथ ही लाभान्वित होकर विकास में सहभागिता निभा रहे हैं।         एक समय था जब बारिश के दिनों में कोलेंग और उसके आसपास के गाँव टापू बन जाते थे और ग्रामीणों को आवागमन के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ती थी, लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। जगदलपुर से लेकर कोलेंग, चांदामेटा, छिंदगुर, काचीरास, सरगीपाल और कान्दानार जैसे दुर्गम गांवों तक बारहमासी पक्की सड़कों का जाल बिछ जाने से न केवल आवाजाही सुगम हुई है, बल्कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी आपातकालीन सेवाएं भी अब ग्रामीणों की पहुंच में हैं। कोलेंग के सरपंच श्री लालूराम नाग इस बदलाव को ऐतिहासिक मानते हुए कहते हैं कि पहले यह क्षेत्र पूरी तरह कटा हुआ था, लेकिन माओवाद की समस्या कम होने और शासन की सक्रियता से ग्रामीणों के जीवन स्तर में क्रांतिकारी सुधार आया है।         सड़क और संचार सुविधाओं के इस विस्तार ने छिंदगुर जैसे गांवों को सीधे जिला मुख्यालय से जोड़ दिया है, जिसे सरपंच श्री सुकमन नाग सरकार की अंतिम छोर तक विकास पहुंचाने की प्रतिबद्धता का परिणाम बताते हैं। कनेक्टिविटी बेहतर होने का सबसे बड़ा लाभ ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति पर पड़ा है, क्योंकि अब वे अपनी वनोपज और कृषि उत्पादों को सीधे मंडियों तक ले जा पा रहे हैं। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि हुई है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं। कभी उपेक्षा का शिकार रहा यह वनांचल क्षेत्र आज अपनी पुरानी पहचान को पीछे छोड़ते हुए विकास की रौशनी से जगमगा रहा है और खुशहाली की एक नई उम्मीद जगा रहा है।

भोपाल से मुंबई के लिए एयर इंडिया एक्सप्रेस की नई उड़ान, 1 जुलाई से होगी शुरुआत

भोपाल  भोपाल के राजा भोज इंटरनेशनल एयरपोर्ट से फिलहाल इंटरनेशनल कनेक्टविटी मिलने की दूर तक कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है। समर सीजन के बाद मानसून एवं विंटर सीजन में भी एयर इंडिया एवं इंडिगो एयरलाइंस ने डायरेक्टर जनरल सिविल एविएशन से किसी प्रकार की स्लॉट बुकिंग नहीं की है। इससे पहले उम्मीद की जा रही थी कि इंडिगो एयरलाइंस इंदौर के देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट से दुबई के लिए डायरेक्ट जाने वाली उड़ान को भोपाल से कनेक्टविटी दे सकती है। इस बीच एयर इंडिया एक्सप्रेस ने भोपाल के हवाई यात्रियों को राहत की खबर दी है। 1 जुलाई से एयर इंडिया एक्सप्रेस मुंबई के लिए नई उड़ान शुरू करने जा रहा है। एअर इंडिया एक्सप्रेस भोपाल से तीसरे ऑपरेटर के रूप में अपनी उड़ानें शुरू करने जा रही है। कंपनी ने पहली उड़ान के साथ अपना फ़्लाइट ऑपरेशन शुरू करने का निर्णय लिया है। पिछले सीजन में बेंगलुरु का स्लॉट भी लिया था भोपाल एयरपोर्ट पर पिछले समर शेड्यूल में भी कंपनी ने दो उड़ानों के साथ बेस स्टेशन की सहमति दी थी। स्लॉट भी ले लिए लेकिन उड़ानें प्रारंभ नहीं कीं। इस बार उड़ानों के शेड्यूल जारी कर दिए हैं। पिछले सीजन में बेंगलुरु का स्लॉट भी लिया था लेकिन उड़ान प्रारंभ नहीं की। अब कंपनी ने अपनी पहली मुंबई उड़ान एक जुलाई से शुरू करने की सहमति एयरपोर्ट अथॉरिटी को दी। कंपनी ने इसका शेड्यूल भी जारी कर दिया है। कंपनी इस रूट पर बोइंग विमान का संचालन करेगी। उड़ान सप्ताह के सभी सात दिन संचालित होगी। कंपनी ने पिछले समर शेड्यूल में दो उड़ानों के साथ भोपाल में अपना बेस स्टेशन शुरू करने की सहमति दी थी, लेकिन स्लॉट लेने के बावजूद उड़ानें प्रारंभ नहीं कीं एयरपोर्ट अधिकारियों के अनुसार एक जुलाई से कंपनी इस रूट पर उड़ान शुरू करेगी। कंपनी ने पिछले समर शेड्यूल में दो उड़ानों के साथ भोपाल में अपना बेस स्टेशन शुरू करने की सहमति दी थी, लेकिन स्लॉट लेने के बावजूद कंपनी ने उड़ानें प्रारंभ नहीं कीं। मुंबई से भोपाल शाम 07.10 बजे पहुंचेगी, भोपाल से शाम 07.50 बजे मुंबई के लिए टेकऑफ प्रस्तावित उड़ान मुंबई से भोपाल शाम 07.10 बजे पहुंचेगी। भोपाल से शाम 07.50 बजे मुंबई के लिए टेकऑफ करेगी। एअर इंडिया एक्सप्रेस समर सीजन के बीच में ही भोपाल से बेंगलुरु तक भी उड़ान शुरू कर सकता है। पिछले सीजन में कंपनी ने बेंगलुरु का स्लॉट लिया था लेकिन उड़ान प्रारंभ नहीं की।

कोर्ट का आदेश: लिव-इन में यौन शोषण, 10 साल की सजा, शारीरिक संबंध बनाना है गंभीर अपराध

इंदौर  मध्य प्रदेश की इंदौर जिला अदालत ने लिव-इन रिलेशनशिप और विवाह के झूठे वादे से जुड़े एक गंभीर मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पीड़िता को शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण करने वाले दोषी को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी है। फैसले के दौरान न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि विवाह का प्रलोभन देकर संबंध बनाना एक गंभीर सामाजिक अपराध है, जिसमें अपराधियों को कड़ा सबक मिलना अनिवार्य है। विवाह का झांसा देकर बनाया संबंध आरोपी ने विवाह का आश्वासन देकर पीड़िता के साथ करीब तीन माह तक शारीरिक संबंध बनाए। 25 जून 2022 तक दोनों साथ रहे। इसके बाद आरोपी जबलपुर चला गया। जब पीड़िता ने उससे संपर्क किया तो उसने बताया कि उसकी सगाई पहले से तय है और वह विवाह नहीं कर सकता। परिजनों से संपर्क करने पर भी विवाह से इंकार कर दिया गया। एफआईआर के बाद कार्रवाई धोखा मिलने के बाद पीड़िता ने आजाद नगर थाना में आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी पाया। 10 अप्रैल को उसे 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। मामले में शासन की ओर से पैरवी एजीपी जयंत दुबे ने की। क्या था पूरा मामला? यह मामला साल 2021 से शुरू हुआ था। मूल रूप से जबलपुर की रहने वाली पीड़िता इंदौर में एक पार्टी के दौरान आरोपी के संपर्क में आई थी।     संपर्क और सहायता: सितंबर 2021 में पीड़िता इंदौर शिफ्ट हुई। जब आरोपी ने नौकरी की तलाश की बात कही, तो पीड़िता ने उसे अपनी जान-पहचान से एक फैक्ट्री में काम दिलवाया।     लिव-इन और वादा: मार्च 2022 में जब पीड़िता इंदौर छोड़ने वाली थी, तब आरोपी ने उसे रुकने के लिए मनाया और साथ में रहने लगा। आरोप है कि उसने शादी का वादा कर करीब तीन महीने तक पीड़िता का यौन शोषण किया।     धोखाधड़ी का खुलासा: जून 2022 में आरोपी अचानक जबलपुर चला गया। जब पीड़िता ने शादी का दबाव बनाया, तो उसने खुलासा किया कि उसकी सगाई कहीं और हो चुकी है। कानूनी कार्रवाई और सजा पीड़िता ने हिम्मत दिखाते हुए आजाद नगर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। कोर्ट में अभियोजन पक्ष की ओर से एजीपी जयंत दुबे ने ठोस पैरवी की। गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने माना कि आरोपी की मंशा शुरू से ही धोखाधड़ी की थी। 10 अप्रैल को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए दोषी को जेल भेज दिया।

लाड़ली बहनों को मिलेगा 1500 रुपये का तोहफा, सीएम मोहन आज ट्रांसफर करेंगे 35वीं किस्त

आष्टा मध्यप्रदेश की बहनों के लिए बड़ी खबर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज 12 अप्रैल को सीहोर जिले के आष्टा में आयोजित कार्यक्रम में लाड़ली बहना योजना की 35वीं किस्त जारी करेंगे। इस बार प्रदेश की 1.25 करोड़ से ज्यादा महिलाओं के खाते में सीधे 1500 रुपए ट्रांसफर किए जाएंगे। मुख्यमंत्री द्वारा कई महत्वपूर्ण कार्यों का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया जाएगा। इसमें 115 करोड़ रुपए के लोकार्पण के काम शामिल हैं। इसमें सांदीपनि विद्यालय भवन निर्माण (आष्टा), पार्वती नदी पर घाट निर्माण, जावर में नेवज नदी का पुनरुद्धार, मेहतवाड़ा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सिद्दीगंज में उपतहसील भवन, आष्टा में राजस्व कार्यालय और आष्टा-शुजालपुर रोड पर पुल का लोकार्पण किया जाएगा।  वहीं, मुख्यमंत्री 69 करोड़ रुपए के कार्यों का भूमिपूजन भी करेंगे। इसमें स्कूल भवन निर्माण, पुलिस आवास निर्माण, इछावर में छात्रावास निर्माण, सड़कें और सामुदायिक भवन, अमृत 2.0 योजना के तहत पेयजल परियोजना शामिल हैं। आष्टा शहर में भी विकास कार्य किए जाएंगे, जिनमें आरसीसी नाला निर्माण, सड़क चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण, सब्जी मंडी का विकास और पांडू शिला क्षेत्र का सुंदरीकरण शामिल है।  बता दें कि लाड़ली बहना योजना में पहले महिलाओं को 1250 रुपए की राशि दी जा रही थी, जिसे बढ़ाकर अब 1500 रुपए प्रति माह कर दिया गया है। इस योजना से प्रदेश की 1.25 करोड़ महिलाएं लाभ ले रही हैं। यह योजना महिलाओं के लिए बड़ी मदद साबित हो रही है। हर महीने मिलने वाली राशि से महिलाएं घर खर्च के साथ-साथ छोटी बचत और रोजगार के अवसर भी तलाश पा रही हैं। सरकार का कहना है कि आने वाले समय में महिलाओं को रोजगार और कौशल विकास से भी जोड़ा जाएगा।  आष्टा में सुंदरीकरण भी आष्टा में पपनाश नदी से भोपाल नाका तक आरसीसी नाला निर्माण होगा। सड़क चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण का काम भी शुरू होगा। वार्ड 14 में सब्जी मंडी विकास और वार्ड 3 में पांडू शिला के पास सौंदर्यीकरण कार्य भी शुरू होगा। 1.25 करोड़ महिलाओं को मिलेंगे 1500 रुपए इस किस्त में प्रत्येक पात्र महिला के खाते में 1500 रुपए ट्रांसफर किए जाएंगे। नवंबर माह से मासिक सहायता में 250 रुपए की बढ़ोतरी के बाद यह राशि 1250 से बढ़कर 1500 रुपए हो गई थी। प्रदेश में 1.25 करोड़ से अधिक महिलाएं इस योजना का लाभ ले रही हैं। मुख्यमंत्री ने हाल ही में बताया कि लाड़ली बहना योजना के तहत अब तक महिलाओं के खातों में 52 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि ट्रांसफर हो चुकी है। केवल 34वीं किस्त में करीब 1836 करोड़ रुपए दिए गए थे। 60 साल से ऊपर की महिलाओं को हटाया जाएगा इस बार एक अहम बदलाव भी होगा। अप्रैल में होने वाले नए सत्यापन के बाद जिन महिलाओं की उम्र 60 साल से अधिक हो चुकी होगी, उन्हें लाड़ली बहना योजना की सूची से हटाया जा सकता है। ऐसी महिलाओं को वृद्धावस्था पेंशन योजना (सरकारी योजना) में शामिल किया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि यह बदलाव पात्रता नियमों के अनुरूप है। आधार लिंक और ई-केवाईसी जरूरी 35वीं किस्त का लाभ पाने के लिए कुछ जरूरी शर्तें हैं। बैंक खाते का आधार से लिंक होना अनिवार्य है। साथ ही डीबीटी (Direct Benefit Transfer) सक्रिय होनी चाहिए और ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए। जिन महिलाओं ने ये काम अभी तक नहीं किए हैं, वे जल्द से जल्द अपनी नजदीकी बैंक शाखा या सीएससी (CSC) केंद्र पर जाकर इसे पूरा करें। ऐसे चेक करें भुगतान की स्थिति किस्त आई या नहीं, यह जानना अब बेहद आसान है। लाभार्थी महिलाएं योजना की आधिकारिक वेबसाइट cmladlibahna.mp.gov.in पर जाएं। वहां "आवेदन एवं भुगतान की स्थिति" का विकल्प चुनें। अपना आवेदन नंबर या समग्र आईडी डालें। ओटीपी (OTP) वेरिफिकेशन के बाद भुगतान की पूरी जानकारी स्क्रीन पर आ जाएगी। महिलाएं मजबूर नहीं, मजबूत बनी हैं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस योजना से प्रदेश की बहनें अब आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। वे घरेलू जरूरतें पूरी करने के साथ-साथ रोजगार और स्वरोजगार के नए रास्ते भी खोज रही हैं। सरकार आने वाले समय में इन महिलाओं को कौशल विकास और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में भी काम करेगी। यह खबर क्यों जरूरी है लाड़ली बहना योजना मध्यप्रदेश की 1.25 करोड़ से ज्यादा महिलाओं की आर्थिक जीवन रेखा बन चुकी है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 15(3) राज्य को महिलाओं के उत्थान के लिए विशेष प्रावधान करने का अधिकार देता है। यह योजना उसी भावना का व्यावहारिक रूप है। हर महीने 1500 रुपए मिलने से ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों की महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता मिलती है। 60 साल के बाद वृद्धावस्था पेंशन में स्थानांतरण की जानकारी भी जरूरी है ताकि कोई महिला लाभ से वंचित न रहे।