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ई-रिक्शा व ऑटो में जेवर चोरी करने वाला महिला गैंग पकड़ा गया

लखनऊ ऑटो, टेंपो और ई रिक्शा यात्रियों को उलझाकर जेवर चोरी व टप्पेबाजी करने वाले महिला गैंग का खुलासा करते हुए कृष्णानगर पुलिस ने तीन महिलाओं और एक पुरुष को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से चोरी की गई सोने की चेन, एक अंगूठी और पायल बरामद की गई है। डीसीपी दक्षिणी अमित आनंद ने बताया कि कृष्णानगर इलाके में नवंबर 2025 से बीते मार्च माह के बीच टप्पेबाजी की तीन घटनाएं घटी थीं। इस मामले में कृष्णानगर पुलिस की एक टीम को आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगाया गया था। पुलिस टीम ने घटनास्थल और उसके आसपास लगे 600 से 700 सीसीटीवी कैमरों को चेक किया और वारदात को अंजाम देने वाले गैंग का पता लगाते हुए मंगलवार को डूडा कॉलोनी आशाराम बापू मार्ग मानसनगर से दुबग्गा सीतापुर बाईपास झुग्गी झोपड़ी निवासी शेषकला, उसके पति दयालाल, पूजा और गौरी देवी को गिरफ्तार किया। शेषकला, दयालाल और पूजा मूल रूप से नागपुर के रहने वाले हैं, जबकि आरोपी गौरी देवी बिहार के आरा की निवासी है। महिला दरोगा ने सादे कपड़े में एक हफ्ते तक रेकी की एसीपी कृष्णानगर रजनीश वर्मा ने बताया कि इस गैंग का पकड़ने में कृष्णानगर थाने पर तैनात महिला दरोगा सिद्धि मिश्रा की सबसे अहम भूमिका रही। फुटेज मिलने के बाद उन्होंने सादे कपड़े में कई दिनों में घूम-घूम कर गैंग के बारे में पता किया। इसके बाद उन्होंने गैंग के निवास स्थान की पूरी रेकी कर जानकारी जुटाई और फिर पुलिस ने इस गैंग पकड़ा। एसीपी ने बताया कि शेषकला इस गैंग की लीडर है और पहले से उनके खिलाफ बख्शी का ताला, मड़ियांव, हरदोई, नाका में चोरी के कई मामले दर्ज हैं। उल्टी करने के बहाने या पिन चुभोकर वारदात को देते थे अंजाम एसीपी ने बताया कि पूछताछ में पकड़े गए आरोपियों ने बताया कि वह लोग ऑटो, टेंपो और ई रिक्शा में सफर करने वाले ऐसे वृद्धों को शिकार बनाते थे जो जेवर पहने होते थे। आरोपी महिलाएं उसी वाहन में सवार तो जाते थे, जिसमें पीड़ित बैठते थे। सफर के दौरान आरोपी महिलाएं उल्टी करने या पीड़ित को सेफ्टी पिन चुभोकर उनको उलझा कर जेवर चोरी कर लेते थे। आरोपी नागपुर से ट्रेन से लखनऊ व अन्य शहरों में जाकर इलाज के नाम पर या फेरी लगाने के बहाने से भीड़भाड़ वाले इलाके में वारदात को अंजाम देते थे। बार-बार पता बदले देते थे आरोपी पूछताछ में पुलिस को इस बात का पता चला है कि पुलिस से बचने के लिए आरोपी न सिर्फ अपना ठिकाना बदलते थे, बल्कि आधार कार्ड पर भी पता बदलवा लेते थे। ऐसे में इनको ट्रेस करना पुलिस के लिए मुश्किल होता था।  

Haryana Police Update: 22 HPS अधिकारियों का IPS में प्रमोशन तय, मुख्य सचिव ने दी हरी झंडी

चंडीगढ़. हरियाणा पुलिस सेवा के 22 अफसरों को जल्द ही आईपीएस.में प्रमोशन का तोहफा मिल जाएगा। इसके लिए सरकार स्तर पर कवायद तेज हो गई है। इस बार प्रमोशन की डीपीसी संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) मुख्यालय के बजाए चंडीगढ़ में हो सकती है। बताया गया कि मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने खराब स्वास्थ्य कारणों से दिल्ली की मीटिंग में शामिल नहीं होने का अनुरोध आयोग से किया था। जिस पर आयोग ने चंडीगढ़ में मीटिंग करने की अपनी सहमति दे दी है। दरअसल डीपीसी में मुख्य सचिव की मौजूदगी जरूरी होती है। सूत्रों की माने, तो इसी सप्ताह डीपीसी की बैठक हो सकती है। मीटिंग में आयोग की ओर से सचिव सहित कुछ नामित सदस्य आते हैं। जिसमें मुख्य सचिव और एसीएस होम सुधीर राजपाल मौजूद रहेंगे। IPS बनने का इन अफसरों को मौका महीनों पहले मुख्य सचिव की ओर से 22 अफसरों को इंटेग्रिटी सर्टीफिकेट जारी किए गए थे। इनमें मुकेश कुमार, ध्यान सिंह पुनिया, धर्मवीर सिंह, चलजिंद्र सिंह, जयबीर सिंह, कुशाल सिंह, राजकुमार वालिया, ताहिर हुसैन, नरेंद्र सिंह, रविंद्र कुमार, राजेश कुमार, ममता खर्ब, रविंद्र विजय सिंह, सिद्वार्थ ढांडा, करण गोयल, संदीप कुमार, पूनम, भारती डबास, अमित दहिया, ऊषा देवी और जितेंद्र गहलावत सहित शामिल हैं।

Census Training Update: अंबेडकर जयंती में शामिल होने वालों को राहत, री-ट्रेनिंग का मौका

बिलासपुर. कलेक्टर एवं जिले के प्रमुख जनगणना अधिकारी संजय अग्रवाल ने 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर जनगणना प्रशिक्षण में शामिल प्रशिक्षार्थियों को बड़ी राहत दी है. कार्यक्रम में भाग लेने के कारण अनुपस्थित रहने वालों को अनुपस्थित नहीं माना जाएगा. उनका प्रशिक्षण बाद में पूरा कर लिया जाएगा. गौरतलब है कि भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती 14 अप्रैल को पूरे देश में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाती है, जिसमें बड़ी संख्या में शासकीय अधिकारी एवं कर्मचारी भी शामिल होते हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने निर्णय लिया है कि 14 अप्रैल 2026 को आयोजित जनगणना प्रशिक्षण में यदि कोई प्रशिक्षार्थी अंबेडकर जयंती के कार्यक्रमों में भाग लेने के कारण अनुपस्थित रहता है, तो उसे अनुपस्थित की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा. उन्होंने स्पष्ट किया है कि ऐसे सभी प्रशिक्षार्थियों का प्रशिक्षण बाद में किसी अन्य उपयुक्त जनगणना बैच के साथ पूर्ण कराया जाएगा, ताकि उनके प्रशिक्षण और जनगणना कार्य में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो. इससे अधिकारी-कर्मचारियों को जहां राष्ट्रीय महापुरुष की जयंती में सहभागिता का अवसर मिल सकेगा वहीं शासकीय कार्य भी प्रभावित नहीं होगी.

डॉ. अम्बेडकर ने संविधान के रूप में हमें दिया लोकतंत्र का सबसे बड़ा ग्रंथ: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

संविधान निर्माता होने के साथ नए भारत के निर्माता भी हैं बाबा साहेब : मुख्यमंत्री डॉ. यादव डॉ. अम्बेडकर ने संविधान के रूप में हमें दिया लोकतंत्र का सबसे बड़ा ग्रंथ नारी सशक्तिकरण के साहसी और प्रबल समर्थक थे बाबा साहेब न्यूनतम मजदूरी, कम्पनी लॉ, महिला श्रमिकों के अधिकार हैं बाबा साहेब की देन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भीम जन्मभूमि (महू) पहुंचकर बाबा साहेब को अर्पित की पुष्पांजलि महू मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आज भारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जन्मभूमि पर उनकी जयंती धूमधाम से मनाई जा रही है। बाबा साहेब एक ऐसे युग दृष्टा थे, जिन्होंने एक हजार साल की गुलामी की कठिनाइयों को दूर करने और समाज के अंदर समानता के भाव को विकसित करने के लिए लड़ाई लड़ी थी। बाबा साहेब के योगदान से हम सभी गौरवान्वित होते हैं। हमें उनके बनाए संविधान के अनुसार ही चलना चाहिए। इससे श्रेष्ठ संविधान और कोई नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डॉ. अम्बेडकर द्वारा महिला समानता और सशक्तिकरण के लिए किए गए प्रयासों और उनके योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने बहनों को पिता की संपत्ति में अधिकार दिलाने, तलाक के समय मुआवजा और मातृत्व अवकाश दिलाने के लिए सराहनीय कार्य किया। उन्होंने हमें माताओं-बहनों के लिए 'समान काम-समान वेतन' का दूरदृष्टि पूर्ण विचार दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को इंदौर के डॉ. अम्बेडकर नगर (महू) में डॉ. अम्बेडकर की जन्मभूमि परिसर में आयोजित जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। लोकसभा और विधानसभा में सुनिश्चित होगा 33 प्रतिशत आरक्षण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बाबा साहेब महिला सशक्तिकरण के साहसी और प्रबल समर्थक थे। महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के लिए बाबा साहेब ने अपनी कुर्सी तक छोड़ दी थी। न्यूनतम मजदूरी, कंपनी लॉ और महिला श्रमिकों को अधिकार हमें बाबा साहेब की ही देन है। केन्द्र सरकार संविधान निर्माता डॉ. अम्बेडकर के आदर्शों पर चलते हुए महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए 21वीं सदी का सबसे बड़ा निर्णय लेने जा रही है। आने वाले दिनों में लोकसभा में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को पूर्ण रूप से लागू करने पर चर्चा होगी, इससे माताओं-बहनों को लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के कल्याण के लिए डॉ. अम्बेडकर ने जो किया, इसके लिए देश उन्हें सदैव स्मरण करता रहेगा। बाबा साहेब ने अपने जीवन के प्रत्येक क्षण भारत माता की आराधना करते हुए समाज को आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भीम जन्मभूमि पर आज होली-दीवाली जैसा माहौल है। बाबा साहेब के जीवन से जुड़े सभी 5 पड़ावों को हमारी सरकार ने पंचतीर्थ के रूप में विकसित किया है। जातिगत असमानता को खत्म करने के लिए अंतर्जातीय विवाह करने पर नवदम्पत्तियों को हमारी सरकार प्रोत्साहन राशि के रूप में 2 लाख रुपए दे रही है। अनुसूचित जाति-जनजाति के कल्याण के लिए सरकार ने सालाना बजट का एक तिहाई हिस्सा इन्हें समर्पित किया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अनिल गजभिये और डॉ. सत्यभान मेश्राम द्वारा डॉ. अम्बेडकर के जीवन पर लिखी पुस्तक 'बाबा साहेब की दृष्टि में सामाजिक न्याय' का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने डॉ. सुदीप भगतदीप, डॉ. संदेश माधवराव, स्व. निशांत कायरे, डॉ. मीना गजभिये सहित 5 समाजेसवियों को 'भीमरत्न अवॉर्ड 2026' से सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में मौजूद सर्वजनों को 'बाबा साहेब अमर रहे' का नारा उद्घोष कराया। महू विधायक एवं पूर्व मंत्री सुऊषा ठाकुर ने कहा कि आज बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर की जयंती पर हम उनके दिखाए मार्ग पर चलने का प्रयास करें। यही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। हम सब मिलकर संकल्प लें कि जीवन में कभी हिंसा, चोरी, नशा और कोई गलत काम नहीं करेंगे। बाबा साहेब समाज में आमूल-चूल परिवर्तन के लिए कटिबद्ध थे। नारी शक्ति की समानता के उनके विचारों के आधार पर देश की संसद में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के माध्यम से विधानसभा और लोकसभा की 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का निर्णय होने जा रहा है। वरिष्ठ विचारक आलोक कुमार ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर बेहद उच्च शिक्षित व्यक्तित्व थे, फिर भी उनके साथ तत्कालीन समाज में भेदभाव हुआ। जब संविधान लिखने की बारी आई, तो महात्मा गांधी जी ने पं. जवाहरलाल नेहरू को सुझाव दिया था कि संविधान की ड्राफ्टिंग कमेटी का अध्यक्ष बनने के लिए एक ही व्यक्ति योग्य है और वह डॉ. भीमराव अम्बेडकर ही हैं। संविधान की ड्राफ्टिंग कमेटी के चेयरमैन की जिम्मेदारी डॉ. अम्बेडकर को उनकी योग्यता के कारण ही मिली थी। उन्होंने कहा कि डॉ. अम्बेडकर ने समाज को बंधुता और भाईचारा दिया। उन्होंने समानता का संकल्प किया था। भारतीय संविधान की धारा 17 में लिखा गया कि अस्पृश्यता (छुआछूत) को समाप्त किया जाता है और समाज के एक बड़े वंचित वर्ग को इस अन्याय से मुक्ति मिली थी। छुआछूत और भेदभाव भारतीय संस्कृति का कभी भी आधार नहीं रहा। हम सभी को भारत के संविधान में उल्लेखित नियमों/उपनियमों का पालन करना चाहिए। सभी को समान मानते हुए देश के विकास के लिए काम करने की आवश्यकता है। समाज के हर वर्ग को सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से समृद्ध बनाना है। कार्यक्रम को अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर, स्थानीय धम्म संस्था के अध्यक्ष धम्मदीप महाथेरो एवं अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अनुयायियों संग सहभोज कर दिया समरसता का संदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत रत्न डॉ. बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर जन्मस्थली स्मारक स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से आए अनुयायियों के साथ सहभोज कर सामाजिक समरसता का प्रेरक संदेश दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर देशभर से पधारे श्रद्धालुओं के साथ पंक्तिबद्ध बैठकर सह भोज किया। उन्होंने कहा कि बाबा साहब अंबेडकर का जीवन हमें समानता, भाईचारे और सामाजिक न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अंबेडकर जयंती केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि समाज में समरसता और एकता को सुदृढ़ करने का अवसर है। इस प्रकार का सहभोज समाज में भेदभाव मिटाने और आपसी सद्भाव को बढ़ावा देने का … Read more

एमपी बोर्ड के 10वीं और 12वीं रिजल्ट का इंतजार खत्म, कुछ घंटों में मोहन यादव करेंगे घोषणा

भोपाल   माध्यमिक शिक्षा मंडल की कक्षा 10वीं और कक्षा 12वीं के छात्र-छात्राओं का रिजल्ट का इंतजार कुछ घंटों में खत्म होने जा रहा है. एमपी बोर्ड की दोनों ही परीक्षाओं का रिजल्ट 15 अप्रेल को सुबह 11 बजे जारी किया जाएगा. प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 10वीं और 12वीं का रिजल्ट एक साथ जारी करेंगे. छात्र अपना रिजल्ट एमपी बोर्ड की बेवसाइट पर भी देख सकेंगे. इसके अलावा मोबाइल ऐप पर भी रिजल्ट को देखा जा सकेगा।  मोबाइल ऐप से देख सकेंगे रिजल्ट छात्र अपना रिजल्ट डिजिलॉकर के जरिए भी देख सकेंगे. इसके अलावा छात्र एमपी बोर्ड की मोबाइल ऐप पर जाकर भी रिजल्ट देख सकेंगे. इसके लिए स्टूडेंट्स को गूगल प्ले स्टोर से एमपी बोर्ड का मोबाइल ऐप एमपीबीएसई या फिर एमपी मोबाइल ऐप डाउनलोड करना होगा. इसके बाद 'नो योर रिजल्ट' पर सिलेक्ट कर अपना रोल नंबर और आवेदन क्रमांक डालना होगा. इसे डालते ही रिजल्ट सामने होगा।  16 लाख स्टूडेंट्स बैठे थे एमपी बोर्ड परीक्षा में 16 लाख स्टूडेंट्स बैठे थे परीक्षा में एमपी बोर्ड की परीक्षा में प्रदेश में 16 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया था. इसमें करीबन 9 लाख 7 हजार स्टूडेंट्स कक्षा 10वीं में बैठे थे, जबकि 7 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स ने 12वीं कक्षा की परीक्षा दी थी. परीक्षा के लिए प्रदेशभर में 3856 एग्जाम सेंटर बनाए गए थे. दोनों ही परीक्षाएं फरवरी माह में शुरू हुई थीं. बारहवीं की 10 फरवरी से 7 मार्च तक परीक्षाएं चली थीं, जबकि कक्षा 10वीं की 13 फरवरी से 6 मार्च तक परीक्षा चली थीं।  रिजल्ट बेहतर आने की उम्मीद इस बार एमपी बोर्ड का रिजल्ट 2025 के मुकाबले 21 दिन पहले जारी होने जा रहा है. 2025 में 6 मई को एमपी बोर्ड का रिजल्ट जारी किया गया था. एमपी बोर्ड का रिजल्ट इस बार पिछले साल के मुकाबले कुछ बेहतर आने के संकेत मिल रहे हैं. हालांकि, बोर्ड के रिजल्ट में उतार-चढ़ावा आता रहा है।  एमपी बोर्ड का रिजल्ट और पिछले कुछ सालों के आंकड़े     साल 2025 में कक्षा 10वीं का रिजल्ट 76.22 फीसदी और 12वीं का 74.48 फीसदी रहा था.     साल 2024 में कक्षा 10वीं का रिजल्ट 58.10 फीसदी और 12वीं का 64.49 फीसदी रहा था.     साल 2023 में कक्षा 10वीं का रिजल्ट 63.29 फीसदी और 12वीं का 55.28 फीसदी रहा था.     mpbse मोबाइल ऐप या mpmobile ऐप के जरिए भी रिजल्ट देखा जा सकता है। कैसे चेक करें रिजल्ट?     सबसे पहले एमपी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं     होमपेज पर कक्षा 10वीं या 12वीं का रिजल्ट लिंक दिखाई देगा, उस पर क्लिक करें      अब आपके सामने लॉगिन पेज खुलेगा, जिसमें रजिस्ट्रेशन नंबर और जन्मतिथि जैसी जानकारी भरकर लॉगिन करें      इसके बाद आपका रिजल्ट स्क्रीन पर दिखेगा     भविष्य के लिए रिजल्ट का प्रिंटआउट जरूर निकाल लें  

‘जुमांजी: ओपन वर्ल्ड’ का ऐलान, 25 दिसंबर को रिलीज होगी फिल्म

‘जुमांजी’ के तीसरे पार्ट की घोषणा लॉस एंजेलिस में नहीं, बल्कि लास वेगास में हुए सोनी के सिनेामकॉन इवेंट के दौरान की गई, जहां फिल्म की पहली झलक और ट्रेलर भी दिखाया गया। इस खास मौके पर केविन हार्ट, ड्वेन जॉनसन और जैक ब्लैक खुद मौजूद थे। जानिए क्या होगा ‘जुमांजी’ के तीसरे पार्ट का ऑफिशियल टाइटल। क्या होगा मूवी का नाम? केविन हार्ट, ड्वेन जॉनसन और जैक ब्लैक स्टारर इस फिल्म का नाम ‘जुमांजी: ओपन वर्ल्ड’ होगा। फिल्म 25 दिसंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इसमें कैरन गिलन भी अहम भूमिका निभाती नजर आएंगी। फिल्म का निर्देशन जेक कसडन ने किया है, जबकि इसे मैट टोलमैक, ड्वेन जॉनसन, डेनी गार्सिया, हीराम गार्सिया और जेक कसडन ने मिलकर प्रोड्यूस किया है। फिल्म की कहानी जेफ पिंकनर और स्कॉट रोसेनबर्ग ने लिखी है, जो पहले भी इस सीरीज के पार्ट्स लिख चुके हैं।

सीमित प्रतियोगिता परीक्षा से होगी पदोन्नति, नई नियमावली 2026 जारी

रांची  झारखंड सरकार ने चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों के लिए बड़ा फैसला लिया है. अब राज्य में कार्यरत हजारों ग्रुप ‘घ’ कर्मियों को ग्रुप ‘ग’ के पदों पर प्रोन्नति का अवसर मिलेगा. इस निर्णय से लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों में खुशी की लहर है. यह कदम कर्मचारियों के करियर विकास और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. किन पदों पर मिलेगी प्रोन्नति नए प्रावधान के तहत चतुर्थ वर्गीय कर्मियों को निम्न वर्गीय लिपिक (एलडीसी) के पद पर प्रोन्नत किया जाएगा. वहीं, सचिवालय में कार्यरत कर्मचारियों को कनीय सचिवालय सहायक के पद पर पदोन्नति का लाभ मिलेगा. इससे कर्मचारियों को बेहतर जिम्मेदारी और कार्यक्षेत्र मिलेगा. साथ ही, उनके वेतन और पद की गरिमा में भी वृद्धि होगी. सीमित प्रतियोगिता परीक्षा से होगा चयन सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह पदोन्नति सीमित प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से दी जाएगी. यह परीक्षा पूरी तरह से ऑनलाइन आयोजित होगी, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके. कुल रिक्त पदों के 15 प्रतिशत हिस्से पर इस परीक्षा के जरिए प्रोन्नति दी जाएगी. इससे योग्य और सक्षम कर्मचारियों को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा. नई नियमावली 2026 जारी कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने ‘सीमित प्रतियोगिता ऑनलाइन परीक्षा नियमावली 2026’ जारी कर दी है. इस नियमावली में प्रोन्नति से संबंधित सभी दिशा-निर्देश और पात्रता मानदंड तय किए गए हैं. साथ ही परीक्षा के पैटर्न और प्रक्रिया की भी स्पष्ट जानकारी दी गई है, ताकि उम्मीदवार पहले से तैयारी कर सकें. शैक्षणिक योग्यता क्या होगी प्रोन्नति के लिए अलग-अलग पदों के अनुसार शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की गई है. कनीय सचिवालय सहायक बनने के लिए किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से स्नातक की डिग्री अनिवार्य होगी. वहीं, समाहरणालय और अन्य कार्यालयों में कनीय लिपिक के पद के लिए इंटरमीडिएट या 10+2 पास होना जरूरी होगा. इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पदोन्नति के बाद कर्मचारी जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभा सकें. कर्मचारियों को मिलेगा करियर ग्रोथ का अवसर इस फैसले से चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों को अपने करियर में आगे बढ़ने का सुनहरा अवसर मिलेगा. लंबे समय से एक ही पद पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए यह निर्णय उत्साहवर्धक साबित होगा. इससे न केवल उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि प्रशासनिक कार्यों में भी सुधार आएगा. पारदर्शिता और दक्षता पर जोर ऑनलाइन परीक्षा और स्पष्ट नियमावली के जरिए सरकार ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने पर जोर दिया है. इससे भ्रष्टाचार और पक्षपात की संभावनाएं कम होंगी. साथ ही योग्य कर्मचारियों को उनके प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा, जो राज्य की प्रशासनिक दक्षता को और मजबूत करेगा.

लुधियाना में पति की हैवानियत: पत्नी के प्राइवेट पार्ट में डाली बीयर की बोतल, बेडरूम के हिडन कैमरे में कैद हुई दरिंदगी

लुधियाना पंजाब के लुधियाना से एक बेहद शर्मनाक और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक पति पर अपनी पत्नी के साथ कई सालों तक जबरदस्ती अवैध  संबंध बनाने का आरोप लगा है. पीड़िता ने बताया कि वह कई सालों तक इस अत्याचार को सहती रही है. लेकिन जब पति की इस दरिंदगी से परेशान हो कर उसने इसका विरोध करना शुरू किया तो पति ने उसे मारपीट कर घर से बाहर निकाल दिया।  महिला ने कहा कि जब भी वह घर के खर्च और बच्चों की स्कूल फीस के लिए पैसे मांगती थी, तो उसका पति उसे मजबूर करता था कि वह उसकी बात माने. इस तरह वह अपने आर्थिक जरूरतों का फायदा उठाकर लगातार शोषण करता था।  महिला ने पुलिस से क्या कहा? महिला ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसकी शादी करीब 18 साल पहले हुई थी. शुरुआती कुछ वर्षों तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन वर्ष 2013 के बाद पति के व्यवहार में अचानक बदलाव आने लगा. वह उसे जबरन अप्राकृतिक संबंध बनाने के लिए मजबूर करने लगा और विरोध करने पर शारीरिक हिंसा करता था. पीड़िता ने समाज और अपने दो बेटों के भविष्य को देखते हुए लंबे समय तक यह सब सहन किया, लेकिन अत्याचार लगातार बढ़ते ही गए।  पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि उसका पति उसकी मजबूरी का फायदा उठाता था. जब भी वह घर के खर्च या बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसे मांगती, तो आरोपी अपनी घिनौनी शर्तें सामने रखता. इनकार करने पर उसे बेरहमी से पीटा जाता था. हालात इतने बिगड़ गए कि 6 अप्रैल की रात को आरोपी ने नशे की हालत में अपनी पत्नी के साथ बर्बरता की हद पार कर दी. उसने मारपीट करने के साथ-साथ महिला के निजी अंगों में बीयर की बोतल डाल दी. दर्द से तड़पती महिला की चीखें भी उसे नहीं रोक सकीं।  महिला ने जुटाए सबूत लंबे समय से जारी इस अत्याचार से तंग आकर महिला ने साहस दिखाया और सबूत जुटाने का फैसला किया. उसने अपने कमरे में पर्दे के पीछे मोबाइल कैमरा छिपाकर पति की करतूतों को रिकॉर्ड कर लिया. यह कदम उसके लिए निर्णायक साबित हुआ. अगले दिन, जब आरोपी ने उसे घर से बाहर निकाल दिया तो वह घायल अवस्था में अपने मायके पहुंची. वहां से अस्पताल में इलाज कराने के बाद उसने थाना दुगरी में शिकायत दर्ज कराई।  पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू की और आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया. उसे अदालत में पेश कर दो दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है. साथ ही, पीड़िता की मेडिकल जांच की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है. यह मामला समाज में घरेलू हिंसा और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर एक गंभीर सवाल खड़ा करता है।  विरोध करने पर बढ़ी क्रूरता पीड़िता के मुताबिक, पति ने हैवानियत की सारी हदें तब पार कर दीं, जब उसने अपनी पत्नी के प्राइवेट पार्ट में बीयर की खाली बोतल डाल दी. पति ने बोतल को लगभग एक मिनट तक उसके प्राइवेट पार्ट में डाले रखा. पत्नी चीखती रही लेकिन बेरहम आदमी को बिल्कुल तरस नहीं आया।  आखिरकार जब महिला यह सब सहन नहीं कर पाई, तो उसने इसके खिलाफ विरोध करना शुरू कर दिया. इसके बाद आरोपी पति ने उसे बुरी तरह पीटा और घर से बाहर निकाल दिया. जख्मी हालत में महिला अपने छोटे बेटे के साथ अपने माता-पिता के घर गई, जहां उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।  पुलिस में दर्ज कराई शिकायत  इस घटना के बाद पीड़िता ने दुगरी पुलिस स्टेशन में अपने पति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हमला और बलात्कार की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है।  महिला ने पुलिस को बताया कि उसके पास पति द्वारा किए गए अत्याचारों के कुछ वीडियो भी हैं, जिन्हें वह सबूत के तौर पर जमा कराएगी जिससे उसके पति की हरकतों का पर्दाफाश होगा।  शादी के बाद से ही जारी था अत्याचार पीड़िता ने पुलिस को अपनी शिकायत में कहा कि उसकी शादी साल 2008 में हुई थी और शादी के पहले दिन से ही उसका पति उसे शारीरिक और मानसिक तौर पर परेशान कर रहा था. उसने यह भी आरोप लगाया कि साल 2013 से पति उसकी मर्जी के खिलाफ उसके साथ अवैध सबंध बनाता रहा. जब वह इनकार करती थी तो वह उसे पीटता था. पीड़िता बार-बार मना करती रही लेकिन वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आया। 

BCCI का बड़ा फैसला: IPL 2026 शेड्यूल में चुनाव की वजह से हुआ बदलाव

मुंबई   IPL 2026 के बीच भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) ने लीग के कार्यक्रम में बड़ा बदलाव किया है. बोर्ड ने घोषणा की है कि गुजरात टाइटन्स (GT) और चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के बीच 26 अप्रैल और 21 मई को होने वाले दो मैचों के स्थान को बदल दिया गया है।  IPL 2026 के शेड्यूल में बड़ा बदलाव नए शेड्यूल के अनुसार गुजरात टाइटंस और सुपर किंग्स के बीच पहले 26 अप्रैल को अहमदाबाद में खेला जाने वाला दोपहर का मैच अब चेन्नई के एमए ​​चिदंबरम स्टेडियम में होगा. यह दोपहर 3:30 बजे से खेला जाएगा. जबकि 21 मई को इन्हीं दोनों टीमों के बीच चेन्नई में शाम को होने वाला मैच अब अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में स्थानांतरित कर दिया गया है और यह मैच शाम में शुरू होगा।  शेड्यूल में बदलाव की वजह बीसीसीआई ने इसकी वजह अहमदाबाद और गुजरात के अन्य इलाकों में 26 अप्रैल को होने वाले नगर निगम चुनाव को बताया है. बीसीसीआई ने विज्ञप्ति में कहा, 'अहमदाबाद और गुजरात के दूसरे हिस्सों में 26 अप्रैल 2026 को होने वाले नगर पालिका चुनावों को देखते हुए यह बदलाव जरूरी हो गया है।  अहमदाबाद के अलावा, सूरत, वडोदरा, राजकोट, भावनगर, जामनगर, करमसद-आनंद, गांधीधाम, नाडियाड, नवसारी, पोरबंदर, मेहसाणा, मोरबी, वापी और सुरेंद्रनगर में भी नगर निगम चुनाव होंगे. वोटों की गिनती 28 अप्रैल को होगी।  IPL 2026 में CSK और GT के प्रेदर्शन पर एक नजर इस सीजन भी चेन्नई सुपर किंग्स की शुरुआत पिछले सीजन जैसी ही रही. वो अब तक 4 मैच में से केवल एक मैच में ही जीत हासिल कर सके हैं, जबकि तीम मैच में उन्हें लगातार हार का सामना करना पड़ा. जिसकी वजह से वो अंक तालिका में 9वें नंबर पर हैं. पिछले सीजन भी वो 10वें नंबर पर रहे थे. उनका अगला मैच केकेआर से है, जो 14 अप्रैल को चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेला जाएगा।  वहीं गुजरात टाइटंस की भी शुरुआत अच्छी नहीं रही, लेकिन वो 4 मैच में दो जीत और दो हार के साथ अंक तालिका में छठें नंबर पर हैं. उकना अगला मैच 17 अप्रैल को केकेआर से है। 

बच्चों के नाम बदलने की पहल, शिक्षा विभाग ने तैयार की 3000 नामों की लिस्ट

जयपुर राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले उन हजारों छात्र-छात्राओं के लिए बड़ी खबर है, जिन्हें अपने अजीबोगरीब नाम या सरनेम की वजह से अक्सर शर्मिंदगी झेलनी पड़ती थी. शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की पहल पर शिक्षा विभाग ने 'सार्थक नाम अभियान' की पूरी तैयारी कर ली है. विभाग का मानना है कि नाम केवल एक पहचान नहीं, बल्कि बच्चे के आत्मविश्वास का आधार होता है. इसी सोच के साथ अब उन बच्चों के नाम और उपनाम बदले जाएंगे जो सुनने में नकारात्मक या अर्थहीन लगते हैं. विभाग ने तैयार की 3 हजार 'सार्थक' नामों की लिस्ट इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने कड़ी मशक्कत के बाद लगभग 3000 सार्थक और गौरवपूर्ण नामों की एक आधिकारिक लिस्ट तैयार की है. इस लिस्ट में बालिकाओं के लिए 1529 और बालकों के लिए 1409 बेहतरीन नाम शामिल किए गए हैं. खास बात यह है कि ये नाम बच्चों की राशि और उनके अर्थ के साथ दिए गए हैं, ताकि अभिभावक अपनी पसंद और विश्वास के अनुसार सही नाम का चुनाव कर सकें. शिक्षा मंत्री का कहना है कि अक्सर जानकारी के अभाव में बच्चों के नाम 'कजोड़मल', 'शेरू' या 'घीसा' जैसे रख दिए जाते हैं, जिससे बड़े होने पर उन्हें समाज में अजीब लगता है. विभाग अब इन नामों की जगह सम्मानजनक विकल्प दे रहा है. इस अभियान का एक अहम पहलू बच्चों के सरनेम में बदलाव करना भी है. सरकार ने उन उपनामों को बदलने का सुझाव दिया है जो आज के दौर में गरिमापूर्ण नहीं माने जाते. शिक्षा मंत्री ने निर्देश दिए हैं कि इन पुराने उपनामों की जगह 'वाल्मीकि' या अन्य सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और सम्मानजनक शब्दों का प्रयोग किया जाना चाहिए. इससे न केवल बच्चों की सामाजिक छवि बेहतर होगी, बल्कि उनमें जातिगत हीन भावना को खत्म करने में भी मदद मिलेगी. शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि यह अभियान पूरी तरह से स्वैच्छिक है और किसी पर भी नाम बदलने का दबाव नहीं बनाया जाएगा. चयन के लिए पेरेंट्स की लिखित सहमति जरूरी स्कूलों में होने वाली एसएमसी (SMC) और पीटीएम (PTM) बैठकों के दौरान शिक्षक उन बच्चों की पहचान करेंगे जिनके नाम सुधारने की जरूरत है. इसके बाद विभाग द्वारा सुझाई गई लिस्ट अभिभावकों को दिखाई जाएगी. यदि माता-पिता अपने बच्चे का नाम या सरनेम बदलने के लिए तैयार होते हैं, तो उनकी लिखित सहमति मिलने के बाद ही सरकारी दस्तावेजों, शाला दर्पण पोर्टल और यूडीआईएसई प्लस पर नाम बदला जाएगा. यह प्रक्रिया फिलहाल कक्षा 1 से 9 तक के विद्यार्थियों के लिए ही लागू की गई है. विरोध के स्वर: नाम जरूरी या सुविधाओं में सुधार? जहां सरकार इसे बच्चों के व्यक्तित्व विकास के लिए एक क्रांतिकारी कदम बता रही है, वहीं कुछ संगठनों ने इसकी प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं. संयुक्त अभिभावक संघ और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार को बच्चों के नाम बदलने के बजाय निजी स्कूलों की मनमानी फीस रोकने, स्कूलों के जर्जर ढांचे को सुधारने और शिक्षकों की कमी दूर करने जैसे बुनियादी मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए. उनका तर्क है कि नाम बदलना केवल एक प्रतीकात्मक बदलाव है, जबकि शिक्षा का असली सुधार धरातल पर सुविधाओं को बढ़ाने से होगा.