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मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बड़ा ऐलान: 10वीं-12वीं बोर्ड विद्यार्थियों को मिलेगा द्वितीय अवसर परीक्षा

10वीं-12वीं बोर्ड के विद्यार्थियों को द्वितीय अवसर परीक्षा का मिलेगा मौका : मुख्यमंत्री डॉ. यादव अनुपस्थित, अनुत्तीर्ण और अंक सुधारने के इच्छुक विद्यार्थी ले सकेंगे लाभ 22 अप्रैल तक किया जा सकेगा आवेदन 7 से 25 मई तक आयोजित होगी परीक्षा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व और स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में किए गए नवाचारों के परिणामस्वरूप प्रदेश के बच्चों ने माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं एवं 12वीं की बोर्ड परीक्षा में शानदार प्रदर्शन किया है। शासकीय स्तर पर की गई पहल के साथ-साथ यह उपलब्धि विद्यार्थियों और शिक्षकों की कड़ी मेहनत का प्रमाण भी है। इस वर्ष किसी भी छात्र का परीक्षाफल पूरक घोषित नहीं किया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत अब विद्यार्थियों के लिए द्वितीय परीक्षा आयोजित की जा रही है। जो विद्यार्थी अनुपस्थित रहे, अनुत्तीर्ण हुए या अंक सुधारना चाहते हैं, वे निराश न हों, सरकार उनके साथ खड़ी है। "द्वितीय अवसर परीक्षा" 7 से 25 मई तक आयोजित होगी। राज्य सरकार द्वारा विद्यार्थियों को पिछली बार से अधिक परिश्रम और बेहतर करने के लिए एक मौका और दिया गया है। अनुत्तीर्ण हुए बच्चों के माता-पिता को ऐसे मौके पर अपने बच्चे के साथ खड़े होने और उन्हें हौसला देने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्हें बताया जा रहा है कि आज की असफलता से निराश होने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है। जीवन की राह में छोटी-मोटी असफलताएं हमें और अधिक मजबूत बनाने के लिए आती है। गिरकर संभलने वाला ही असली विजेता कहलाता है। माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित की जा रही द्वितीय अवसर परीक्षा में ऐसे छात्र जो मंडल की प्रथम परीक्षा में एक या अधिक विषयों में अनुपस्थित/अनुत्तीर्ण रहे हों, सम्मिलित हो सकेंगे। ऐसे परीक्षार्थी जो किसी विषय में उत्तीर्ण हो गए हों, वे भी अंक सुधारने के लिए द्वितीय अवसर परीक्षा में सम्मिलित हो सकते हैं। परीक्षार्थियों का प्रथम एवं द्वितीय अवसर में से जो भी श्रेष्ठ परिणाम होगा, वह अंतिम रूप से मान्य रहेगा। प्रायोगिक विषयों में किसी छात्र को प्रायोगिक और आंतरिक परीक्षा के केवल अनुत्तीर्ण भाग में शामिल होने की पात्रता होगी। द्वितीय अवसर परीक्षा में परीक्षार्थी को विषय परिवर्तन की अनुमति नहीं होगी। द्वितीय अवसर परीक्षा में शामिल होने के लिए ऑनलाइन आवेदन 22 अप्रैल रात 12 बजे तक एम.पी. ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भरे जा सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू करने वाले देश का पहला राज्य बना है। प्रदेश में प्राइमरी स्तर पर 'ड्रॉप आउट रेट' शून्य (Zero) हो गया है। प्रदेश में 369 सर्वसुविधायुक्त सांदीपनी विद्यालय और 730 पीएम स्कूल, शालेय शिक्षा की गुणवत्ता में क्रांतिकारी बदलाव ला रहे हैं। शिक्षा के लिए बजट में 36 हज़ार 730 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है, जो पिछले वर्ष से 11% अधिक है। यह निवेश अगली पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए है। निजी स्कूलों में पढ़ने वाले आर्थिक रूप से कमजोर 8 लाख 50 हज़ार से अधिक बच्चों की फीस राज्य सरकार भर रही है, ताकि कोई भी बच्चा संसाधनों की कमी के कारण पीछे न रहे।  

भोपाल मेट्रोपॉलिटन का विस्तार: 12,098 स्क्वायर किमी में 6 जिलों के 2510 गांव शामिल, नोटिफिकेशन जारी

 भोपाल  भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया का दायरा 12,098 वर्ग किलोमीटर का होगा। इसमें छह जिलों के 2510 गांवों को शामिल किया है। भूमि के क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे कम हिस्सा नर्मदापुरम का है तो भोपाल से अधिक सीहोर और राजगढ़ का क्षेत्र रखा गया है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। भोपाल मेट्रोपॉलिटन की अधिसूचना जारी होने के साथ ही अब प्रतिनियुक्ति पर अधिकारी और कर्मचारियों को लिया जाएगा। छह जिलों में तहसीलवार गांवों की जारी की गई अधिसूचना में भोपाल जिले में बैरसिया तहसील के 210 गांव, हुजूर तहसील के 257 गांव और कोलार तहसील के 60 गांव शामिल किए गए हैं। इसी तरह सीहोर जिले में आठ तहसील आष्टा, बुधनी, दोराहा, इच्छावर, जावर, श्यामपुर, रेहटी व सीहोर। रायसेन जिले में तीन तहसील गौहरगंज, रायसेन, सुल्तानपुर। राजगढ़ में सात तहसील ब्यावरा, खुजनेर, नरसिंहगढ़, पचोर, राजगढ़, सारंगपुर, सुठालिया। विदिशा में दो तहसील गुलाबगंज और विदिशा। नर्मदापुरम में पांच तहसील दोलारिया, होशंगाबाद गांव, इटारसी, माखन नगर, नर्मदापुरम शामिल की गई है। बता दें कि मध्य प्रदेश मेट्रोपॉलिटन रीजन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट 2025 को मई 2025 में कैबिनेट की मंजूरी मिली और अगस्त 2025 में विधानसभा से इसे पारित किया गया। किस जिले में कितनी तहसीलें अब भोपाल में वहीं, रायसेन जिले की बात करें तो इससे 3 तहसीलें जिनमें गौहरगंज, रायसेन, सुल्तानपुर रहेंगी। इसके अलावा, राजगढ़ जिले में 7 तहसीलें, जिनमें ब्यावरा, खुजनेर, नरसिंहगढ़, पचोर, राजगढ़, सारंगपुर, सुठालिया। विदिशा में दो तहसील गुलाबगंज और विदिशा। नर्मदापुरम में 5 तहसील दोलारिया, होशंगाबाद गांव, इटारसी, माखन नगर, नर्मदापुरम को शामिल किया गया है। मेट्रोपॉलिटन रीजन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट को 2025 में मिली मंजूरी आपको बता दें कि, मध्य प्रदेश मेट्रोपॉलिटन रीजन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट 2025 को मई 2025 में मोहन कैबिनेट की मंजूरी मिली थी और अगस्त 2025 में विधानसभा से इसे पारित किया गया था। क्षेत्रफल के हिसाब से किस जिले से कितना क्षेत्र जिला — क्षेत्र (वर्ग किमी) — प्रतिशत -सीहोर– 3302 — 50.46% -राजगढ़ — 2812– 46.61% -रायसेन– 2422– 28.57% -भोपाल — 2275– 82.25% -विदिशा– 804– 11.01% -नर्मदापुरम — 480 — 7.16% मुंबई से बड़े क्षेत्र में भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन का विस्तार भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन देश की आर्थिक मुंबई से भी बड़े इलाके में डेवलप किया जा रहा है, जिसमें राजधानी भोपाल और इसके पड़ोसी जिले रायसेन, सीहोर, विदिशा, राजगढ़ और नर्मदापुरम की कुल 12 हजार वर्गकिमी जमीन पर मेट्रोपॉलिटन रीजन का विस्तार किया जाएगा। अगर क्षेत्रफल की बात करें तो भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन का एरिया 12,098 वर्ग किमी में फैला रहेगा तो वहीं मुंबई मेट्रोपॉलिटन सिटी 6,300 वर्गकिमी में फैली रहेगी। मेट्रोपॉलिटन रीजन में ये इलाके रहेंगे मेट्रोपॉलिटन रीजन का भोपाल केंद्र बिंदु रहेगा, यानी राजधानी भोपाल ही सेंटर पॉइंट होगा, जिसमें भोपाल की हुजूर, बैरसिया, कोलार तहसील मेट्रोपॉलिटन रीजन में शामिल हुई है. इसके साथ ही सीहोर जिले की इछावर, आष्टा, सीहोर श्यामपुर, जावर को भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन का हिस्सा बनाया गया है. इसके साथ ही विदिशा जिले की ग्यारसपुर, गुलाबगंज और विदिशा तहसील को इस रीजन में जगह मिली है। राजगढ़ की नरसिंहगढ़, जीरापुर, ब्यावरा, पिछोर, खुजनेर तहसील को शामिल किया गया है। जबकि नर्मदापुरम की होशंगाबाद गांव, इटारसी, माखन नगर, नर्मदापुरम को जोड़ा है। इसके अलावा रायसेन जिले की औबेदुल्लागंज और रायसेन तहसील को जगह मिली है।

लाड़ली बहनों के लिए सरकार का बड़ा ऐलान, मिलेगा यह खास तोहफा, पूरी डिटेल जानें

भोपाल मध्यप्रदेश की लाड़ली बहनों के लिए मोहन सरकार एक और बड़ी सौगात की तैयारी में है। अब केवल हर महीने आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि महिलाओं को स्थायी रोजगार से जोड़ने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया जा रहा है। सरकार की नई योजना के तहत इच्छुक लाड़ली बहनों को गाय-भैंस पालन के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी, ताकि वे डेयरी व्यवसाय से जुड़कर अपनी आय बढ़ा सकें। सूत्रों के मुताबिक, योजना की शुरुआत गोवर्धन पूजा से की जा सकती है। इस योजना के तहत सभी महिलाओं के लिए पशुपालन अनिवार्य नहीं होगा, बल्कि खेती-किसानी और पशुपालन में रुचि रखने वाली महिलाएं ही इसका लाभ ले सकेंगी। सरकार पशुधन खरीदने के लिए आर्थिक मदद देगी, जिससे महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें। फिलहाल प्रदेश की करीब 1.25 करोड़ लाड़ली बहनों को हर महीने 1500 रुपए की राशि दी जा रही है, जिस पर सरकार को लगभग 1836 करोड़ रुपए का मासिक भार उठाना पड़ रहा है। विपक्ष लगातार इस राशि को अपर्याप्त बताते हुए 3000 रुपए प्रतिमाह देने के वादे की याद दिला रहा है। सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि भविष्य में इस राशि को बढ़ाकर 3000 रुपए तक ले जाने की योजना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कहना है कि सरकार का उद्देश्य केवल नकद सहायता देना नहीं, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। इसी सोच के तहत नवंबर 2026 से महिलाओं को विभिन्न आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के नए विकल्प तलाशे जा रहे हैं। महिला आधारित योजनाओं की समीक्षा के लिए सरकार ने मंत्री निर्मला भूरिया की अध्यक्षता में एक समिति भी बनाई है। इस समिति में मंत्री कृष्णा गौर, प्रतिमा बागरी, राधा सिंह और संपतिया उइके को शामिल किया गया है। समिति इस बात पर काम कर रही है कि महिलाओं को मासिक किस्त के बजाय एकमुश्त सहायता देकर स्थायी काम-धंधे से कैसे जोड़ा जाए, ताकि उनकी आमदनी कई गुना बढ़ सके। सरकार योजना का नाम बदलने पर भी विचार कर रही है। संभावना है कि इसे प्रदेश की किसी ऐसी वीरांगना के नाम पर रखा जाए, जिन्होंने समाज और जनकल्याण के लिए साहसिक कार्य किए हों। हाल ही में नर्मदापुरम के सिवनी मालवा में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा था कि प्रदेश की 1.25 करोड़ से अधिक लाड़ली बहनों को अब तक 55 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की सहायता दी जा चुकी है। योजना शुरू होने से अब तक प्रति बहन 40,500 रुपए से अधिक राशि सीधे बैंक खातों में पहुंच चुकी है। सीएम ने भरोसा दिलाया कि बहनों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। सरकार आगे भी हरसंभव मदद करेगी और योजना को और मजबूत बनाया जाएगा।

अब एथेनॉल से चलेगा चूल्हा, LPG सिलेंडर के महंगे दामों से मिलेगी आज़ादी

नई दिल्‍ली भारत में रसोई गैस (LPG) की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई में आने वाली बाधाएं अक्सर होटल, रेस्टोरेंट और बड़े संस्थानों के लिए सिरदर्द बनी रहती हैं. लेकिन अब इस संकट का एक स्वदेशी और टिकाऊ समाधान निकालने की दिशा में प्रयास तेज हो गए हैं. मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार अब कमर्शियल कुकिंग के लिए एथेनॉल (Ethanol) का इस्तेमाल करने पर गंभीरता से विचार कर रही है।  यदि यह योजना जमीन पर उतरती है तो आने वाले समय में कमर्शियल किचन से एलपीजी सिलेंडरों की निर्भरता काफी हद तक कम हो सकती है. लगभग 1,000 करोड़ लीटर अतिरिक्त एथेनॉल क्षमता को कुकिंग के लिए यूज में लाने की योजना है. आने वाले हफ्तों में इस पर एक विस्तृत व्हाइट पेपर अंतर-मंत्रालयी पैनल के सामने पेश किया जा सकता है।  एलपीजी से सस्‍ता है एथेनॉल एथेनॉल, खासकर हाइड्रस एथेनॉल कमर्शियल एलपीजी के मुकाबले सस्ता पड़ सकता है. इसमें लगभग 95% एथेनॉल और थोड़ा पानी होता है. इस वजह से इसे अतिरिक्त डीहाइड्रेशन प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ता और इसकी लागत कम रहती है. कमर्शियल एलपीजी की कीमत लगभग ₹103 प्रति किलोग्राम है, जबकि हाइड्रस एथेनॉल करीब ₹70 प्रति किलोग्राम पड़ता है. हालांकि, एथेनॉल की कैलोरिफिक वैल्यू यानी ऊर्जा क्षमता एलपीजी से कम होती है. इसका मतलब है कि एथेनॉल की ज्यादा मात्रा की जरूरत पड़ती है।  किससे बनता है एथेनॉल? भारत में एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और टूटे हुए चावल से बनता है. इसका इस्‍तेमाल एक बायोफ्यूल के रूप में किया जाता है. भारत में अब एथेनॉल युक्‍त पेट्रोल की बिक्री होती है. कुकिंग के लिए इस्तेमाल होने वाला एथेनॉल मिश्रण ईंधन वाले एथेनॉल से अलग होता है और सस्ता भी है।  क्‍या है सरकार की योजना? एक सूत्र ने बताया कि सरकार की योजना शुरुआत में व्‍यावसायिक संस्‍थानों जैसे होटल, एयरपोर्ट और रेस्टोरेंट में एथेनॉल का इस्‍तेमाल खाना बनाने में करने की है. अमेरिका ईरान-युद्ध की वजह से एलपीजी आयात बाधित हुआ है और इस वजह से घरेलू बाजार में एलपीजी की उपलब्धता कम हुई है. ऑयल मार्केटिंग कंपनियां घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दे रही हैं, जिससे होटल और रेस्टोरेंट जैसे कमर्शियल संस्थानों को कम एलपीजी की आपूर्ति हो रही है।  कमर्शियल कुकिंग के लिए एथेनॉल (Ethanol) के इस्तेमाल के प्रस्ताव को एक अंतर-मंत्रालयी पैनल के सामने रखा जाएगा. इस पैनल में पेट्रोलियम, सड़क परिवहन, भारी उद्योग और खाद्य मंत्रालय के अधिकारी शा‍मिल हैं. यही पैनल एथेनॉल से जुड़े नीतिगत फैसले लेता है. सूत्रों के अनुसार, उद्योग के प्रतिनिधियों ने ट्रायल शुरू करने और सरकार के साथ मिलकर सुरक्षा व तकनीकी मानक विकसित करने की इच्‍छा जताई है. इसके लिए एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। 

कैबिनेट मंत्री मोहिंदर भगत ने डिफेंस सर्विसेज वेलफेयर डिपार्टमेंट के कामों की प्रोग्रेस का किया रिव्यू

चंडीगढ़. पंजाब के डिफेंस सर्विसेज वेलफेयर मिनिस्टर श्री मोहिंदर भगत ने शुक्रवार शाम पंजाब सेक्रेटेरिएट में डिफेंस सर्विसेज वेलफेयर डिपार्टमेंट के कामों की प्रोग्रेस का रिव्यू करने के लिए टॉप अधिकारियों के साथ एक खास मीटिंग की। इस मौके पर डिफेंस सर्विसेज वेलफेयर डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी सुमेर सिंह गुर्जर, डायरेक्टर भूपिंदर सिंह ढिल्लों (रिटायर्ड) खास तौर पर मौजूद थे। मीटिंग के दौरान, अधिकारियों ने मंत्री को बताया कि एक्स-सर्विसमैन और उनके परिवारों से जुड़े मामलों में काफी प्रोग्रेस हुई है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग युद्धों के दौरान शहीद हुए ज़्यादातर सैनिकों के परिवारों को पंजाब सरकार ने पहले ही मुआवजा दे दिया है। इसके अलावा, बाकी मामलों और उनकी मौजूदा स्थिति पर भी डिटेल में चर्चा की गई। अधिकारियों ने कहा कि खाली पोस्ट भरने के लिए भी तेज़ी से कार्रवाई की जा रही है। इस मौके पर डिपार्टमेंट के बजट और दूसरे ज़रूरी मुद्दों पर भी चर्चा हुई। कैबिनेट मंत्री मोहिंदर भगत ने डिफेंस सर्विसेज़ वेलफेयर डिपार्टमेंट के कामों की प्रोग्रेस का रिव्यू किया, पंजाब सरकार एक्स-सर्विसमैन और उनके परिवारों की भलाई के लिए कमिटेड है कैबिनेट मंत्री मोहिंदर भगत ने डिफेंस सर्विसेज़ वेलफेयर डिपार्टमेंट के कामों की प्रोग्रेस का रिव्यू किया, मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए, मंत्री श्री भगत ने अधिकारियों को एक्स-सर्विसमैन और उनके परिवारों से जुड़े सभी मामलों को प्रायोरिटी के आधार पर लेने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार देश की रक्षा करते हुए अपनी जान कुर्बान करने वाले बहादुर सैनिकों का पूरा सम्मान और सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार एक्स-सर्विसमैन और उनके परिवारों की भलाई के लिए पूरी तरह से कमिटेड है और उन्हें हर मुमकिन मदद देने की लगातार कोशिश की जा रही है।