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क्यूबा में अमेरिकी ड्रोन की गतिविधि: 6 घंटे तक समुद्री तट पर चक्कर लगाता रहा सबसे महंगा ड्रोन, क्या होगा ‘ऑपरेशन मादुरो’?

  नई दिल्ली अमेरिकी नौसेना का एक एडवांस्ड सर्विलांस ड्रोन MQ-4C ट्राइटन छह घंटे तक क्यूबा के पूरे दक्षिणी तट पर चक्कर लगाता रहा. यह ड्रोन जैक्सनविले से उड़ा था. इसने क्यूबा के दक्षिणी तट की पूरी लंबाई को स्कैन किया, सैंटियागो डी क्यूबा के पास 2 घंटे तक घूमता रहा. फिर हवाना के आसपास 2 घंटे चक्कर लगाने के बाद वापस लौट गया।  फ्लाइट ट्रैकर्स का कहना है कि उन्होंने पहले कभी इस ड्रोन को क्यूबा के इतने करीब नहीं देखा था. आमतौर पर यह ड्रोन युद्ध वाले इलाकों जैसे ब्लैक सी, पर्सियन गल्फ और भूमध्य सागर में दिखता है. इस उड़ान का समय और रूट दोनों ही बहुत अहम हैं।  MQ-4C ट्राइटन अमेरिकी नौसेना का सबसे एडवांस्ड अनमैन्ड एरियल व्हीकल (UAV) है. एक ड्रोन की कीमत करीब 2000 करोड़ रुपये है. यह बहुत ऊंचाई पर उड़ सकता है. लंबे समय तक हवा में रह सकता है. बड़े क्षेत्र की निगरानी कर सकता है. यह ड्रोन रडार, कैमरा और इलेक्ट्रॉनिक सेंसर्स से लैस है जो जमीन और समुद्र पर हर गतिविधि को ट्रैक कर सकता है. इस बार यह ड्रोन क्यूबा के पूरे दक्षिणी तट को करीब से स्कैन करते हुए हवाना तक पहुंचा. इतनी करीबी निगरानी पहले कभी नहीं देखी गई।  ट्रंप का बयान और पेंटागन की तैयारियां इस ड्रोन के उड़ान का समय बहुत संदिग्ध है. हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि उन्हें क्यूबा को किसी न किसी रूप में लेने का सम्मान मिलेगा. पेंटागन चुपचाप क्यूबा में संभावित ऑपरेशन की प्लानिंग तेज कर रहा है. इसी बीच अमेरिका ने क्यूबा की तेल आपूर्ति को भी रोक दिया है, जिससे क्यूबा की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है. दस साल बाद पहली बार एक अमेरिकी डेलिगेशन हवाना पहुंचा है. ये सब घटनाएं एक साथ हो रही हैं, जिससे क्यूबा में चिंता बढ़ गई है।  सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह वही MQ-4C ट्राइटन ड्रोन है जो पिछले बार जैक्सनविले से उड़ान भरकर वेनेजुएला के पास 10 घंटे की रेकी मिशन पर गया था. उस उड़ान के ठीक तीन महीने बाद अमेरिका ने काराकास पर छापा मारा और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ लिया।  अब ठीक उसी तरह का ड्रोन क्यूबा के आसपास 6 घंटे तक निगरानी कर रहा है. कई विशेषज्ञ इसे वेनेजुएला पैटर्न कह रहे हैं. क्यूबा को इस बात पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।  क्यूबा पर अमेरिका क्यों नजर गड़ा रहा है? क्यूबा लंबे समय से अमेरिका के लिए एक पुराना मुद्दा रहा है. ट्रंप प्रशासन क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार को कमजोर करना चाहता है. तेल आपूर्ति रोकना, ड्रोन से निगरानी बढ़ाना और डेलिगेशन भेजना – ये सभी कदम क्यूबा पर दबाव बनाने के लिए लग रहे हैं।  अमेरिका क्यूबा को लोकतंत्र की ओर लाना चाहता है, लेकिन क्यूबा इसे अपना आंतरिक मामला मानता है. अगर अमेरिका कोई सैन्य कार्रवाई करता है तो यह पूरे लैटिन अमेरिका में बड़ा तनाव पैदा कर सकता है. फिलहाल स्थिति बहुत संवेदनशील है. अमेरिकी ड्रोन की उड़ान साफ संकेत दे रही है कि पेंटागन क्यूबा पर नजर रखे हुए है।  ट्रंप का बयान और वेनेजुएला वाली पुरानी घटना को देखते हुए क्यूबा सरकार को सतर्क रहना होगा. क्यूबा के नेता अभी चुप हैं, लेकिन अंदरूनी स्तर पर तैयारी जरूर चल रही होगी. दुनिया इस बात पर नजर रखे हुए है कि क्या ट्रंप प्रशासन क्यूबा के खिलाफ कोई बड़ा कदम उठाता है या फिर बातचीत के जरिए मामला सुलझता है.

गोंडा-अयोध्या यात्रा होगी सरल: 114 पीपों से बना ढेमवाघाट पुल तैयार

 गोंडा चार साल से गोंडा व अयोध्या के बीच मुसीबत बने ढेमवाघाट पर पीपा पुल बनकर तैयार हो गया है। नदी के बीच में 114 पीपों से दो पुल बनाए गए हैं, जिनमें एक पुल से यात्री गोंडा से अयोध्या जा सकेेंगे जबकि, दूसरे पुल यात्री अयोध्या से गोंडा जिले में प्रवेश कर सकेंगे। इससे गोंडा व अयोध्या जिले की माझा क्षेत्र की करीब 50 हजार आबादी को आवागमन में सहूलियत मिलेगी। तरबगंज की लाइफाइलन कहे जाने वाले ढेमवाघाट पुल का निर्माण वर्ष 2016 में हुआ था। 120 करोड़ की लागत से सरयू नदी पर बना 1132 मीटर लंबा पुल अयोध्या के सोहावल स्थित लखनऊ हाईवे से नवाबगंज को जोड़ रहा था, जो 2022 में सरयू नदी में उफान से कटान की चपेट में आ गया। पहले पुल को जोड़ रही डेढ़ किलोमीटर लंबी सड़क (एप्रोच मार्ग) कटी,जिसके बाद पुल पर आवागमन बंद हो गया। वर्ष 2024 में नदी फिर तेवर में आई तो ढेमवाघाट को जोड़ने वाली अन्य प्रमुख सड़कें भी कट गईं। 2023 में इसके पुनर्निर्माण के लिए पीडब्ल्यूडी ने 42 करोड़ रुपये मांगा, जो शासन में स्वीकृत नहीं हुआ। यही नहीं, बचा 150 मीटर हिस्सा भी बह गया। चार वर्षों से क्षतिग्रस्त सड़क के पुनर्निर्माण में नदी का रुख अड़ंगा बना है। बनने पर भी यह कैसे सुरक्षित रहेगा। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की इस समस्या का उत्तर खोज रही है, लेकिन वह निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाई है। एप्रोच मार्ग कट जाने से गोंडा के नवाबगंज अन्य क्षेत्रों के चार पहिया वाहनों को अयोध्या होते हुए फैजाबाद जाना पड़ता था जबकि अयोध्या के सोहावल समेत अन्य लोगों को नवाबगंज व अयोध्या होते हुए आना जाना पड़ता है। कैसरगंज सांसद करन भूषण सिंह ने मुख्यमंत्री से पीपा पुल निर्माण की मांग की थी। इसके बाद दो करोड़ 16 लाख रुपये से 400 मीटर लंबे पुल बनाने की स्वीकृति शासन ने दी थी, जो अब बन गया है। लोक निर्माण खंड द्वितीय के प्रभारी अधिशासी अभियंता पीके त्रिपाठी ने बताया कि ढेमवाघाट पर पुल निर्माण पूरा हो गया है,जो गोंडा के साथ अयोध्या के लोगों के आवागमन को आसान बनाएगा।

पंजाब शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए शेड्यूल जारी: शिक्षा विभाग ने दी 26 अप्रैल की हरी झंडी

चंडीगढ़. पंजाब राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने का सपना देख रहे उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। शिक्षा विभाग ने पंजाब शिक्षक पात्रता परीक्षा (P-TET) के आयोजन के लिए 26 अप्रैल की तारीख तय की है। लंबे समय से इस परीक्षा का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए अब अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने का समय आ गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा का आयोजन राज्य भर के विभिन्न केंद्रों पर पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाएगा। प्रवेश पत्र और परीक्षा केंद्र का विवरण परीक्षा के सफल संचालन के लिए विभाग द्वारा सभी जरूरी प्रबंध पूरे कर लिए गए हैं। उम्मीदवार आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से अपने रोल नंबर और परीक्षा केंद्र की स्थिति देख सकते हैं। विभाग ने निर्देश दिए हैं कि अभ्यर्थी परीक्षा शुरू होने से कम से कम एक घंटा पहले निर्धारित केंद्र पर पहुँचें। प्रवेश पत्र के बिना किसी भी स्थिति में परीक्षा हॉल में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही, पहचान पत्र के रूप में आधार कार्ड या अन्य वैध दस्तावेज ले जाना अनिवार्य है। परीक्षा के दौरान सुरक्षा और पारदर्शिता शिक्षा विभाग ने नकल रहित परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। सभी केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी रहेगी और जैमर की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। परीक्षा केंद्रों के आसपास धारा 144 लागू करने और बाहरी हस्तक्षेप को रोकने के लिए पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। किसी भी प्रकार की अनुचित गतिविधि में संलिप्त पाए जाने वाले उम्मीदवारों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी गई है। भविष्य के शिक्षकों के लिए बड़ी उम्मीद P-TET परीक्षा पंजाब की शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता सुधार की दिशा में एक अहम कदम है। इस परीक्षा को पास करने वाले अभ्यर्थी राज्य के विभिन्न सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के लिए पात्र हो जाएंगे। पिछले कुछ समय से रुकी हुई भर्ती प्रक्रियाओं के बाद, इस परीक्षा के आयोजन से युवाओं में रोजगार की नई उम्मीद जगी है। शिक्षा विशेषज्ञों ने उम्मीदवारों को सलाह दी है कि वे अंतिम समय में पुनरावृत्ति पर ध्यान दें और परीक्षा के दौरान समय प्रबंधन का विशेष ख्याल रखें।  

MP सरकार का बड़ा कदम: किसानों के लिए आई खुशखबरी, तुरंत जानिए नया फैसला

भोपाल  मध्यप्रदेश के किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्य सरकार ने गेहूं उपार्जन के लिए स्लॉट बुकिंग की अंतिम तारीख 6 दिन बढ़ाकर अब 30 अप्रैल 2026 कर दी है। पहले यह अवधि 24 अप्रैल तक निर्धारित थी। सरकार के इस फैसले से उन किसानों को राहत मिलेगी, जो अब तक अपनी उपज बेचने के लिए स्लॉट बुक नहीं करा पाए थे। इसके साथ ही सरकार ने स्लॉट बुकिंग की क्षमता भी बढ़ा दी है। अब किसान एक बार में 1000 क्विंटल की जगह 1500 क्विंटल तक गेहूं विक्रय के लिए स्लॉट बुक कर सकेंगे। इससे बड़े किसानों और अधिक उत्पादन करने वालों को सीधा फायदा मिलेगा। प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीदी का कार्य तेजी से जारी है। अब तक 1 लाख 30 हजार 655 किसानों से 57 लाख 13 हजार 640 क्विंटल गेहूं खरीदा जा चुका है। इसके बदले किसानों के बैंक खातों में 355 करोड़ 3 लाख रुपए की राशि भी ट्रांसफर की जा चुकी है। वहीं, 4 लाख 22 हजार 848 किसानों ने 1 करोड़ 82 लाख 96 हजार 810 क्विंटल गेहूं विक्रय के लिए स्लॉट बुक करा लिया है। किसानों की सुविधा के लिए प्रदेशभर में 3171 उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं, जहां छायादार बैठने की व्यवस्था, पेयजल, बारदाना, तौल कांटे, सिलाई मशीन, कंप्यूटर, इंटरनेट और गुणवत्ता जांच उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। सरकार वर्ष 2026-27 में किसानों से 2585 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य और 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस सहित कुल 2625 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीद रही है। उपार्जन के लिए जूट बारदानों के साथ पीपी और एचडीपी बैग की भी पर्याप्त व्यवस्था की गई है। इस वर्ष रिकॉर्ड 19 लाख 4 हजार किसानों ने गेहूं उपार्जन के लिए पंजीयन कराया है, जो पिछले साल की तुलना में 3 लाख 60 हजार अधिक है। पिछले वर्ष लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था, जबकि इस बार सरकार ने 78 लाख मीट्रिक टन उपार्जन का लक्ष्य रखा है। सरकार का कहना है कि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए खरीदी केंद्रों पर सभी जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं, ताकि समर्थन मूल्य का लाभ समय पर हर पात्र किसान तक पहुंच सके।

सुक्खू सरकार का बड़ा यू-टर्न, हिमाचल में सीएम और विधायकों का वेतन रहेगा पहले जैसा

शिमला हिमाचल सरकार की ओर से मुख्यमंत्री, मंत्री, विधानसभा स्पीकर और विधायकों के वेतन में कटौती करने का फैसला लागू हो गया है. सुक्खू सरकार ने वेतन कटौती के फैसले को लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है. बजट भाषण में आर्थिक संकट को देखते हुए सीएम ने वेतन कटौती का फैसला लिया था. सीएम के मासिक वेतन में 50 प्रतिशत, मंत्रियों के 30 और विधायकों के वेतन में 20 फीसदी की कटौती का ऐलान किया गया था।  किसका कितना कटने वाला प्रदेश की गंभीर आर्थिक स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री के वेतन का 50 प्रतिशत, मंत्रियों के वेतन का 30 प्रतिशत और विधायकों के वेतन का 30 प्रतिशत अस्थाई रूप से रोकने का फैसला किया गया था. आगामी 6 महीनों के लिए पूरा वेतन देने पर रोक लगाई गई है. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा था कि पिछली सरकारों के समय वेतन और पेंशन से जुड़ी देनदारियां बढ़कर करीब 13,000 करोड़ रुपए तक पहुंच गई थीं।  ग्रेड-1 और ग्रेड-2 के अधिकारियों के वेतन कटौती का फैसला लिया था वापस अभी कुछ दिन पहले ही सुक्खू सरकार ने ग्रेड-1 और ग्रेड-2 के अधिकारियों के वेतन कटौती के फैसले पर आंशिक तौर पर यू-टर्न लिया था. किन्नौर के रिकॉन्गपिओ में हिमाचल दिवस पर सीएम सुक्खू ने बड़ा ऐलान किया था और घोषणा की थी कि प्रदेश में क्लास-1 और क्लास 2 अफसरों की सैलरी में अब कटौती नहीं की जाएगी. गौर रहे कि बजट के दौरान सरकार ने छह महीने के लिए सैलरी में कटौती का ऐलान किया था।  छह महीने बाद वापस दरअसल, हिमाचल प्रदेश के बजट सत्र के दौरान 21 मार्च को बजट पेश किया गया था और सीएम सुक्खू ने ऐलान किया था कि प्रदेश में क्लास-व और क्लास-2 समेत अन्य श्रेणी के कर्मचारियों की सैलरी में छह महीने के लिए 20 से 50 फीसदी तक की कटौती की जाएगी. हालांकि, छह महीने के बाद सरकार काटा गया वेतन कर्मचारियों  को लौटा देगी। 

PSEB का बड़ा विजन: ‘क्रिएटर्स, नॉट कंज्यूमर्स’ मंत्र के साथ संपन्न हुआ दो दिवसीय नेशनल AI सम्मेलन

चंडीगढ़.  पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) ने चंडीगढ़ स्थित सीआईआई उत्तरी क्षेत्र मुख्यालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन का सफल आयोजन किया। इस कार्यक्रम का समापन गूगल और इंटेल द्वारा आयोजित व्यावहारिक कार्यशालाओं के साथ हुआ, जिसने पंजाब की शिक्षा प्रणाली में एआई को गहराई से जोड़ने की दिशा में एक निर्णायक कदम उठाया। इस सम्मेलन ने नीति निर्माताओं, शिक्षकों और तकनीकी विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर कक्षाओं में एआई के जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग का मार्ग प्रशस्त किया। छात्रों के लिए 'निर्माता' बनने का विजन PSEB के चेयरमैन डॉ. अमरपाल सिंह ने एआई के नैतिक उपयोग पर विशेष बल देते हुए कहा कि तकनीक का उपयोग सीखने की गुणवत्ता बढ़ाने और छात्रों की समस्या समाधान कौशल को विकसित करने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने छात्रों को प्रेरित किया कि वे तकनीक के केवल उपभोक्ता बनकर न रहें, बल्कि इसके निर्माता बनें। डिजिटल युग में एआई उपकरणों को सही मित्र की तरह चुनने की सलाह देते हुए उन्होंने स्पष्ट कानूनी और नैतिक ढांचे के भीतर सीखने की प्रक्रियाओं को मजबूत करने का आह्वान किया। गूगल और इंटेल की विशेष कार्यशालाएं सम्मेलन के दौरान गूगल के सत्रों ने शिक्षा में एआई की परिवर्तनकारी भूमिका और जागरूकता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया। इसके साथ ही, इंटेल द्वारा 'कार्यस्थल पर एआई' विषय पर आयोजित कार्यशाला में 112 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। इस सत्र में डेटा गोपनीयता और संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए सरकारी ढांचे के भीतर एआई उपकरणों को प्रभावी ढंग से तैनात करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। नेतृत्व और अकादमिक अखंडता पर चर्चा स्कूल प्रमुखों के लिए आईकेजी पीटीयू द्वारा आयोजित 'स्कूल लीडर्स के लिए एआई' कार्यशाला में एआई उपकरणों को संस्थागत प्रबंधन में शामिल करने के तरीकों पर चर्चा की गई। इसमें एआई-जनित सामग्री की पहचान करने और एआई-सक्षम वातावरण में अकादमिक अखंडता बनाए रखने की चुनौतियों पर प्रकाश डाला गया। नीव एआई (Neeev AI) द्वारा संचालित छात्र-केंद्रित कार्यशाला ने युवाओं को एआई अनुप्रयोगों के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया और उन्हें भविष्य के करियर विकल्पों के लिए प्रेरित किया। भविष्य की डिजिटल चुनौतियों की तैयारी चेयरमैन ने उल्लेख किया कि इस सम्मेलन के माध्यम से छात्रों को एआई तकनीक के निर्माण की जटिल प्रक्रियाओं और इसके पीछे आवश्यक कौशल सेट के बारे में गहराई से बताया गया। पंजाब के छात्रों ने इस उभरती तकनीक के प्रति जबरदस्त जिज्ञासा और अनुकूलन क्षमता दिखाई है। यह पहल न केवल छात्रों के तकनीकी ज्ञान को बढ़ाएगी, बल्कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के साथ-साथ एक सुरक्षित और नवाचार-आधारित डिजिटल भविष्य का निर्माण करने में भी सक्षम बनाएगी।

उज्जैन के इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव, सिंहस्थ के लिए 2,451 करोड़ से पीने के पानी से सीवरेज तक सब होगा चकाचक

उज्जैन  बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन को वैश्विक स्तर के धार्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए सरकार ने मास्टर प्लान तैयार कर लिया है। इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा शिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाना और घाटों का विस्तार करना है। इसके लिए ₹2,698 करोड़ की भारी-भरकम राशि आवंटित की गई है, जो नदी के जीर्णोद्धार और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर खर्च होगी। गंदे पानी से मिलेगी मुक्ति शिप्रा में मिलने वाले कान्ह नदी के प्रदूषित पानी को रोकने के लिए ₹919 करोड़ का क्लोज्ड-डक्ट डायवर्जन प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। इसके तहत 30 किलोमीटर लंबी नहर और टनल प्रणाली बनाई जाएगी। इसके अलावा, ₹614 करोड़ के सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी प्रोजेक्ट के जरिए 51 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी का भंडारण और विनियमन किया जाएगा, जिससे नदी में जल स्तर बना रहे। 2.5 करोड़ श्रद्धालुओं के लिए बन रहे हैं नए घाट आगामी सिंहस्थ और प्रमुख स्नान पर्वों को देखते हुए घाटों का अभूतपूर्व विस्तार किया जा रहा है। ₹778 करोड़ की लागत से 29.21 किलोमीटर नए घाट विकसित किए जाएंगे। वहीं, पुराने 9 किलोमीटर के घाटों को अपग्रेड किया जा रहा है ताकि भीड़ के दिनों में एक साथ 2.5 करोड़ श्रद्धालु सुरक्षित रूप से स्नान कर सकें। मेडिकल कॉलेज और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का तोहफा केवल नदी ही नहीं, बल्कि शहर के ढांचे को भी आधुनिक बनाया जा रहा है: स्वास्थ्य: ₹592 करोड़ की लागत से 500 बेड का मेडिकल कॉलेज बनेगा। पर्यटन और व्यापार: ₹284 करोड़ से यूनिटी मॉल और पर्यटन सर्किट, उज्जैन-ओंकारेश्वर-महेश्वर-मांडू का विकास। शहरी सुविधाएं: ₹2,451 करोड़ पेयजल, सीवरेज और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए। इसमें 250 MLD का ट्रीटमेंट प्लांट और 700 किमी लंबा पाइपलाइन नेटवर्क शामिल है।

जापान के वैज्ञानिकों का चमत्कार: मामूली लोहा से अरबों रुपये बचाने का तरीका, पेट्रोल-डीजल की समस्या का हल

नई दिल्ली  दुनियाभर में क्लीन एनर्जी की तलाश तेज हो रही है. हाइड्रोजन को भविष्य का सबसे साफ ईंधन माना जाता है. अभी तक हाइड्रोजन बनाने की प्रक्रिया काफी महंगी और जटिल रही है. लेकिन जापान के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा तरीका खोज निकाला है जो यकीन करने में भी मुश्किल लगता है. उन्होंने सिर्फ लोहे के आयन और अल्ट्रावायलेट (UV) रोशनी की मदद से हाइड्रोजन तैयार कर ली है. रिपोर्ट के अनुसार, क्यूशू यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग के एसोसिएट प्रोफेसर ताकाहिरो मात्सुमोतो और उनकी टीम एक रिसर्च कर रही थी. उनका मकसद सस्ते तत्वों से कैटलिस्ट यानी उत्प्रेरक तैयार करना था. इसी दौरान एक कंट्रोल एक्सपेरिमेंट में उन्होंने मेथेनॉल, आयरन आयन और सोडियम हाइड्रोक्साइड को मिलाया. जब इस घोल पर अल्ट्रावायलेट लाइट डाली गई, तो जो हुआ उसने सबको हैरान कर दिया. इस मिश्रण से बड़ी मात्रा में हाइड्रोजन गैस निकलने लगी।  मात्सुमोतो कहते हैं, ‘शुरुआत में तो इस पर यकीन करना ही मुश्किल था.‘ उन्होंने इसे एक सुखद इत्तेफाक बताया जिसने विज्ञान की नई राह खोल दी।  हाइड्रोजन उत्पादन की यह नई तकनीक इतनी खास क्यों है? आजकल ज्यादातर हाइड्रोजन फॉसिल फ्यूल यानी जीवाश्म ईंधन से बनाई जाती है. इससे पर्यावरण पर बुरा असर पड़ता है. हाइड्रोजन को मेथेनॉल जैसे अल्कोहल से भी निकाला जा सकता है, लेकिन इसके लिए बहुत महंगे और दुर्लभ मेटल्स वाले कैटलिस्ट की जरूरत पड़ती है. लोहा पृथ्वी पर सबसे ज्यादा पाया जाने वाला और सस्ता मेटल है. इस नई रिसर्च में लोहे का इस्तेमाल करके उसी रफ्तार से हाइड्रोजन बनाई गई, जितनी महंगे कैटलिस्ट से बनती है. वैज्ञानिकों ने पाया कि इसकी हाइड्रोजन उत्पादन दर 921 मिलीमोल प्रति घंटा प्रति ग्राम कैटलिस्ट रही, जो अब तक के सबसे बेहतरीन सिस्टम के बराबर है।  क्या सिर्फ मेथेनॉल से ही हाइड्रोजन बनाई जा सकती है? इस रिसर्च की सबसे बड़ी खूबी इसकी वर्सेटिलिटी है. वैज्ञानिकों ने टेस्ट किया और पाया कि यह तरीका सिर्फ मेथेनॉल तक सीमित नहीं है. इससे एथेनॉल और प्रोपेनॉल जैसे दूसरे अल्कोहल से भी हाइड्रोजन निकाली जा सकती है. इसके अलावा, बायोमास से जुड़ी चीजों जैसे ग्लूकोज, स्टार्च और सेल्युलोज से भी हाइड्रोजन बनाने में सफलता मिली है. हालांकि, अभी ग्लूकोज जैसी चीजों के साथ इसकी परफॉर्मेंस थोड़ी कम है, लेकिन भविष्य में इसे बेहतर बनाने की पूरी गुंजाइश है. यह तकनीक कचरे से ऊर्जा बनाने की दिशा में भी बड़ा कदम साबित हो सकती है।  क्या इस पूरी प्रक्रिया में कोई बड़ी चुनौती भी है? हर बड़ी खोज के साथ कुछ सवाल भी जुड़े होते हैं. मात्सुमोतो की टीम का कहना है कि वे अभी तक इस पूरी रिएक्शन के सटीक मैकेनिज्म को नहीं समझ पाए हैं. यानी यह प्रक्रिया अंदरूनी तौर पर कैसे काम करती है, इसकी बारीकियां पता लगाना बाकी है. इसके अलावा अन्य पदार्थों के साथ इसकी एफिशिएंसी को बढ़ाना भी एक चुनौती है. फिर भी, यह तकनीक इतनी सरल है कि इसे कोई भी दोहरा सकता है. प्रोफेसर मात्सुमोतो कहते हैं कि वह चाहते हैं कि बच्चे भी इसे ट्राई करें ताकि वे साइंस की तरफ आकर्षित हों।  भविष्य की क्लीन एनर्जी के लिए यह कितना बड़ा बदलाव है? हाइड्रोजन का इस्तेमाल जब ईंधन के तौर पर होता है, तो कार्बन डाइऑक्साइड नहीं निकलती. यह सिर्फ पानी की भाप छोड़ता है. अगर इस नई और सस्ती विधि को बड़े पैमाने पर लागू किया गया, तो हाइड्रोजन कार और पावर प्लांट्स को चलाना बहुत सस्ता हो जाएगा. लोहे जैसे सस्ते मेटल और रोशनी का इस्तेमाल सस्टेनेबिलिटी की दिशा में मील का पत्थर है. आने वाले समय में ऑप्टिमाइजेशन के जरिए इस तकनीक को और बेहतर बनाया जाएगा. यह खोज हमें फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता कम करने और ग्लोबल वार्मिंग से लड़ने में बड़ी मदद दे सकती है। 

रायपुर:महतारी वंदन योजना से पहाड़ी कोरवा परिवारों की तकदीर बदल रही है

रायपुर : महतारी वंदन योजना से संवर रही पहाड़ी कोरवा परिवारों की तकदीर बकरी पालन बना आजीविका का सशक्त माध्यम, मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार रायपुर प्रदेश सरकार की फ्लैगशिप ’महतारी वंदन योजना’ प्रदेश की महिलाओं के लिए न केवल आर्थिक संबल, बल्कि स्वावलंबन का नया आधार बन रही है। विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा समुदाय की श्रीमती करियो के जीवन में आई खुशहाली लेकर आई है। अम्बिकापुर विकासखण्ड के ग्राम रामनगर की रहने वाली श्रीमती करियो ने योजना से प्राप्त सहायता राशि का सदुपयोग कर न केवल अपना भविष्य संवारा है, बल्कि अपने पूरे परिवार की स्थिति को बेहतर बनाया है। योजना की राशि को बनाया आत्मनिर्भरता माध्यम श्रीमती करियो बताती हैं कि पहले उनके परिवार की आर्थिक स्थिति चुनौतीपूर्ण थी। दैनिक खर्चों के लिए उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ता था। महतारी वंदन योजना के लागू होने के बाद, जब उनके खाते में राशि आनी शुरू हुई, तो उन्होंने इसे घरेलू खर्चों में लगाने के बजाय निवेश का रास्ता चुना। उन्होंने इस राशि को सहेज कर बकरियां खरीदीं और पशुपालन शुरू किया। बकरी पालन से मिली आर्थिक मजबूती अपनी सफलता साझा करते हुए श्रीमती करियो ने बताया कि मैंने योजना के पैसों से बकरियां खरीदीं और साल भर उनकी देखभाल की। अब मेरे पास छह बकरियां हैं। बकरियां समय-समय पर बच्चे देती हैं, जिससे उनकी संख्या बढ़ती जा रही है। अब मुझे इनसे निरंतर लाभ मिल रहा है और मैंने अपना गुजारा इन्हीं के माध्यम से सुरक्षित कर लिया है। परिवार की खुशहाली और बेहतर खान-पान आर्थिक स्थिति सुधरने से श्रीमती करियो अब अपने पति और नाती-पोतों की बेहतर देखभाल कर पा रही हैं। वे कहती हैं कि पहले और अब के जीवन में बड़ बड़ा बदलाव आ गया है। अब घर में अच्छा खान-पान है और बच्चों का भविष्य सुरक्षित हुआ है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, यह सब सरकार की मदद से संभव हो पाया है, वरना हमारे लिए यह सब सोच पाना भी कठिन था। योजना के लिए जताया आभार अपनी और अपने परिवार की बदलती तस्वीर देख श्रीमती करियो ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना ने उन्हें समाज में सम्मान से जीने का अवसर दिया है। उनके अनुसार, यह योजना ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों की महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

13 राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी होंगे IAS, सूची जारी; गैर-राप्रसे अधिकारियों के लिए निराशा

भोपाल  मध्य प्रदेश में बहुत जल्द राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) अधिकारियों को एक बड़ी सौगात मिल सकती है। दरअसल मध्य प्रदेश में राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) के अधिकारियों को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में पदोन्नत करने के लिए प्रक्रिया तेज हो गई है और आने वाले समय में इन अधिकारियो को ये तोहफा मिल सकता है। 13 राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारियों को IAS पद पर पदोन्नति मिलने के आसार दरअसल मध्य प्रदेश में जल्द ही 13 राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारियों को आईएएस पद पर पदोन्नति मिल सकती है लेकिन इस बार भी गैर-राप्रसे अधिकारियों को मायूसी ही मिलेगी। दरअसल गैर-राप्रसे अधिकारियों को इस बार भी मौका नहीं मिलने की खबर है। जिससे  इस  मामले का काफी चर्चा हो रही है । राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारियों को भारतीय प्रशासनिक सेवा में पदोन्नति देने के लिए जल्द ही विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक आयोजित होगी, जिसमें 13 पदों पर चयन किया जाएगा लेकिन इसमें Non-SAS अधिकारियों को पदोन्नति का मौका नहीं मिलेगा। राप्रसे संघ (SAS)  के विरोध के चलते Non-SAS अधिकारियों प्रक्रिया से बाहर दरअसल राप्रसे संघ के विरोध के चलते यह प्रक्रिया केवल SAS अधिकारियों तक ही सीमित हो गई है। जानकारी के अनुसार, 13 पदों के लिए कुल 39 अधिकारियों के नामों पर विचार किया जाएगा।  इसी आधार पर सूची को तैयार करके आगे की प्रक्रिया के लिए भेजा गया है। इन 39 नामों में से 13 नामों पर लगेगी मुहर IAS अवार्ड के लिए होने वाली DPC में जिन 39 नामों पर विचान मंथन होगा वो इस तरह से हैं.. इच्छित गढ़पाले, जयेंद्र कुमार विजयावत, डॉ. अभय सिंह खरारी, रजनीश कसेरा, एकता जायसवाल, हृदयेश कुमार श्रीवास्तव, लता शरणागत, महीप किशोर तेजस्वी, मिलिंद कुमार नागदेवे, राज कुमार खत्री, कृष्ण कुमार रावत, प्रियंका गोयल, अभिषेक दुबे, नरोत्तम प्रसाद भार्गव, निधि सिंह राजपूत, निमिषा जायसवाल, संदीप कुमार सोनी, रिंकिश कुमार वैश्य, माया अवस्थी, भूपेंद्र कुमार गोयल, मनोज मालवीय, कमल चंद्र नगर, मिनिषा पांडेय, इला तिवारी, सपना एम. लोवंशी, नीता राठौर, शैलेंद्र सिंह सोलंकी, रानी पासी, रंजना देवड़ा, माधवी नागेंद्र, वर्षा सोलंकी,विवेक कुमार रघुवंशी, प्रदीप जैन, अखिलेश कुमार जैन, विशाल चौहान, मेहताब सिंह गुर्जर, अतेंद्र सिंह गुर्जर सुरभि तिवारी और वंदना मेहरा है।  लिहाजा GAD  ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है और अब नजरें DPC बैठक पर टिकी हैं। इसमें ही 39 नामों में से 13 अधिकारियों को IAS बनने का अवसर मिलेगा। इस बार भी गैर-राप्रसे अधिकारियों को दिल छोटा करके रहना पड़ेगा।