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रीवा में एयरबस जैसे बड़े विमान की लैंडिंग, 2300 मीटर रनवे बनाने के लिए 140 एकड़ भूमि का अधिग्रहण, 340 करोड़ मुआवजा

रीवा रीवा एयरपोर्ट पर भविष्य में एयरबस (Airbus A320) जैसे 150 से 180 सीटर बड़े विमानों की लैंडिंग कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके लिए रनवे की लंबाई 1800 मीटर से बढ़ाकर 2300 मीटर की जाएगी और 140 एकड़ अतिरिक्त जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा।  140 एकड़ जमीन का होगा अधिग्रहण, रिपोर्ट भोपाल भेजी रीवा एयरपोर्ट का तेजी से विस्तार किया जा रहा है, जिसके बाद इसे 'हवाई हब' के रूप में विकसित करने की योजना है। एयरपोर्ट विस्तार के लिए करीब 140 एकड़ अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। प्रशासन द्वारा जमीन के सीमांकन का कार्य पूरा कर रिपोर्ट भोपाल भेज दी गई है। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने बताया कि इस परियोजना से लगभग 830 किसान प्रभावित होंगे, जिन्हें सरकार द्वारा 340 करोड़ रुपए का मुआवजा देने की प्रक्रिया चल रही है। नियमित विमान सेवा शुरू होने के बाद पांच माह में रीवा में 20,000 लोगों ने हवाई सफर किया। जिससे यह बात स्पष्ट हो गई है कि रीवा में हवाई यात्रा को लेकर काफी पोटेंशियल है। जिस वजह से सरकार ने भी रीवा एयरपोर्ट का विस्तार करने पर सहमति जताई है। 2300 मीटर होगा रनवे, अभी सिर्फ ATR-72 की होती है लैंडिंग वर्तमान में रीवा एयरपोर्ट का रनवे लगभग 1800 मीटर लंबा है। यह रनवे अभी केवल ATR-72 जैसे छोटे विमानों के लिए ही उपयुक्त है और अब तक यहां ऐसे ही विमान संचालित होते रहे हैं। प्रस्तावित विस्तार के तहत रनवे की लंबाई 1800 मीटर से बढ़ाकर करीब 2300 मीटर की जाएगी। रनवे के इस विस्तार के बाद Airbus A320 जैसे 150 से 180 सीट क्षमता वाले बड़े विमान भी रीवा एयरपोर्ट पर आसानी से उतर सकेंगे। मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु के लिए शुरू होंगी सीधी उड़ानें एयरपोर्ट के रनवे का विस्तार होने और बड़े विमानों की लैंडिंग की सुविधा मिलने के बाद रीवा से देश के प्रमुख शहरों के लिए सीधी हवाई सेवाएं शुरू होने की संभावना है। भविष्य में यहां से मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु के लिए सीधी उड़ानें शुरू की जा सकती हैं। इन महानगरों से सीधी कनेक्टिविटी होने से न केवल रीवा बल्कि पूरे विंध्य क्षेत्र की यातायात सुविधा मजबूत होगी। साथ ही इससे क्षेत्र में व्यापार, निवेश और पर्यटन को भी नया बढ़ावा मिलेगा।

बुंदेलखंड से पलायन को रोकने के लिए इकोनॉमिक कॉरिडोर, लखनऊ से इंदौर तक बनेगा

सागर  लंबे समय से प्रगति के पथ पर सरपट दौड़ने का इंतजार कर रहे बुंदेलखंड की तस्वीर और तकदीर बदलने वाली है. बुंदेलखंड प्रगति पथ के नाम से प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर अब बुंदेलखंड को औद्योगिक विकास की पटरी पर तेज रफ्तार में दौड़ने की तैयारी कर रहा है. खास बात यह है कि बुंदेलखंड प्रगति पथ का फायदा मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश दोनों मिलने जा रहा है।  ये कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के झांसी, ललितपुर, सागर से होते हुए औद्योगिक नगरी देवास से कनेक्ट होने जा रहा है. प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर बुंदेलखंड मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, देवास जैसे औद्योगिक शहरों से जुड़ेगा तो उत्तर प्रदेश के कानपुर और लखनऊ से जुड़ जाएगा।  एक्सप्रेसवे की तर्ज पर होगा तैयार प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर को एक्सप्रेसवे की भांति तैयार किया जाना है. ये ऐसा प्रस्तावित औद्योगिक गलियारा है, जो मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के औद्योगिक शहरों को बुंदेलखंड के जरिए जोड़ेगा. इस औद्योगिक गलियारे से मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश का बुंदेलखंड इंदौर, भोपाल, देवास, कानपुर, लखनऊ और वाराणसी जैसे शहरों से जुड़ जाएगा. इसका फायदा दोनों राज्यों में फैले बुंदेलखंड यानि उत्तरप्रदेश के साथ जिलों और मध्यप्रदेश के 6 जिलों को होगा।  बुंदेलखंड कृषि प्रधान इलाका है और औद्योगिक विकास में पीछे जाने के कारण पलायन यहां की मजबूरी है. लेकिन यह एक्सप्रेसवे बुंदेलखंड की नई तस्वीर गढ़ेगा. इस एक्सप्रेसवे के कारण औद्योगिक विकास होगा और लोगों को रोजगार के लिए पलायन नहीं करना पड़ेगा।  330 किमी लंबा एक्सप्रेस वे होगा बुंदेलखंड विकास पथ बुंदेलखंड विकास पथ मध्यप्रदेश का प्रस्तावित इकानामिक कॉरिडोर है. ये करीब 330 किमी लंबा एक्सप्रेसवे है. इसको डिजाइन करने का उद्देश्य पिछड़े बुंदेलखंड क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है. इसको ऐसा डिजाइन किया गया है कि सागर के जरिए ये झांसी-ललितपुर-देवास-सागर को जोड़कर मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड को दोनों राज्यों के प्रमुख औद्योगिक शहरों से कनेक्टिविटी है। बदलेगी बुंदेलखंड की की तस्वीर पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह कहते है "बुंदेलखंड प्रगति पथ प्रस्तावित है. फिलहाल शुरुआती सर्वे और अध्ययन चल रहा है. यह प्रोजेक्ट मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों से दोनो राज्यों के बुंदेलखंड को कनेक्ट करेगा. सागर, टीकमगढ़, पन्ना और छतरपुर की औद्योगिक प्रगति का आधार बनेगा. पर्यटन और व्यापार में गति आएगी. मालवा और बुंदेलखंड के बीच परिवहन को रफ्तार देगा।  

UP बोर्ड कक्षा 10वीं और 12वीं के 53 लाख छात्रों का रिजल्ट आज शाम 4 बजे घोषित होगा

लखनऊ  उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) 10वीं और 12वीं कक्षा का रिजल्ट आज 23 अप्रैल को शाम 4 बजे जारी करेगा. रिजल्ट घोषित होने के बाद परीक्षा में शामिल छात्र आधिकारिक वेबसाइट – upsmp.edu और upresults.nic.in पर जाकर अपना परिणाम देख और मार्कशीट डाउनलोड कर सकेंगे. इसके लिए छात्रों को अपने लॉगिन डिटेल्स जैसे रोल नंबर आदि दर्ज करने होंगे।  आज खत्म हो जाएगा 53 लाख छात्रों का इंतजार एशिया के सबसे बड़े बोर्ड में शामिल यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं का रिजल्ट आज , शाम 4 बजे जारी करेगा. रिजल्ट यूपी बोर्ड मुख्यालय से घोषित किया जाएगा. इस साल बोर्ड परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च के बीच कराई गई थीं और इन्हें केवल 15 कार्य दिवसों में पूरा कर लिया गया. इस साल कक्षा 10वीं-12वीं की परीक्षा में कुल 53 लाख 37 हजार 778 छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे, जिनमें हाईस्कूल के 27 लाख 61 हजार 696 और इंटरमीडिएट के 25 लाख 76 हजार 82 विद्यार्थी थे. वहीं, परीक्षा को नकलविहीन, निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए बोर्ड ने सख्त इंतजाम किए थे. इसके अलावा, इस बार पूरे प्रदेश में 8033 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे।  52 लाख छात्रों का आज  होगा इंतजार खत्म  यूपी बोर्ड के 52 लाख से ज्यादा छात्र रिजल्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. पहले ऐसे कहा जा रहा था कि  रिजल्ट 25 अप्रैल को जारी होगा, लेकिन बोर्ड की ओर से आधिकारिक तारीख का ऐलान कर दिया गया है. रिजल्ट के साथ ही बोर्ड टॉपर्स की लिस्ट भी जारी कर सकता है. सचिव भगवती सिंह की तरफ से रिजल्ट की तारीख बताई गई है. पिछले साल के रिजल्ट की बात करें तो हाई स्कूल में 90.11 प्रतिशत छात्र पास हुए, वहीं इंटरमीडिएट परीक्षा में 81.15 फीसदी छात्रों ने बाजी मारी।  फेल होने पर परेशान न हो छात्र  यदि कोई छात्र एक या दो विषयों में न्यूनतम 33% अंक प्राप्त करने में विफल रहता है, तो उसे घबराने की जरूरत नहीं है. यूपी बोर्ड ऐसे छात्रों के लिए कंपार्टमेंट परीक्षा का आयोजन करेगा. इसकी सूचना रिजल्ट घोषित होने के तुरंत बाद दी जाएगी. इसके अलावा, छात्र अपनी कॉपियों की स्क्रूटनी के लिए भी ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।  डिजीलॉकर पर मिलेगा रिजल्ट  यूपी बोर्ड इस साल भी छात्रों को डिजिलॉकर के माध्यम से डिजिटल मार्कशीट उपलब्ध कराएगा. छात्र अपना आधार नंबर और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर उपयोग कर डिजिलॉकर अकाउंट बना सकते हैं. रिजल्ट के कुछ घंटों बाद ही डिजिटल मार्कशीट वहां अपलोड कर दी जाएगी, जो कि भविष्य के एडमिशन और अन्य सरकारी कार्यों के लिए पूरी तरह से वैध मानी जाएगी।  UP Board 10th-12th Result 2026: कहां देख सकेंगे यूपी बोर्ड कक्षा 10वीं-12वीं रिजल्ट? यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं के नतीजे जारी होने के बाद छात्र अपना रिजल्ट ऑनलाइन आसानी से देख सकेंगे. इसके लिए बोर्ड ने कई आधिकारिक वेबसाइट उपलब्ध कराई हैं, जहां से छात्र बिना किसी परेशानी के अपना परिणाम चेक कर सकते हैं. रिजल्ट देखने के लिए छात्र इन वेबसाइट्स का इस्तेमाल कर सकते हैं: – upmsp.edu.in – upresults.nic.in – results.upmsp.edu.in – results.digilocker.gov.in UP Board 10th-12th Result 2026: कैसे चेक करें यूपी बोर्ड 10वीं-12वीं रिजल्ट 2026? UP Board 10th-12th Result 2026 LIVE: अगर आप यूपी बोर्ड का रिजल्ट देखना चाहते हैं, तो ये आसान स्टेप्स फॉलो करें: 1. सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट upmsp.edu.in पर जाएं।  2. वेबसाइट के होमपेज पर आपको 10वीं (हाईस्कूल) और 12वीं (इंटरमीडिएट) रिजल्ट 2026 का लिंक दिखाई देगा, उस पर क्लिक करें।  3. इसके बाद एक नया पेज खुलेगा, जहां आपको अपना रोल नंबर भरना होगा. रोल नंबर डालने के बाद सबमिट बटन पर क्लिक करें।  4. जैसे ही आप सबमिट करेंगे, आपका रिजल्ट स्क्रीन पर आ जाएगा।  5. अब आप अपनी मार्कशीट को ध्यान से देख सकते हैं, उसे डाउनलोड कर लें और भविष्य के लिए उसका प्रिंट आउट भी निकालकर रख लें। 

अमरनाथ यात्रा 2026 रजिस्ट्रेशन के लिए सरल तरीका, 5 आसान स्टेप्स से करें रजिस्ट्रेशन

भोपाल  इस बार अमरनाथ यात्रा की शुरुआत तीन जुलाई से होगी। हिमालय की गुफा में विराजमान बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए भक्तों के अपार उत्साह है। इसके कारण 20 जुलाई तक की ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन फुल हो चुके हैं। कोई ओंकारेश्वर तो कोई खंडवा पहुंचकर रजिस्ट्रेशन कराने का प्रयास किया। इस बार तो हालात ये बने की ग्रुप के सभी सदस्यों को दर्शन के लिए एक समान तारीख तक नहीं मिल रही है। रजिस्ट्रेशन कराने के लिए लंबी-लंबी लाइनें लग रही है। लोग कैसे भी करके रजिस्ट्रेशन कराना चाह रहे है। 26 जुलाई तक फुल रजिस्ट्रेशन अमरनाथ यात्री मनोज शंखपाल व जयंत मुंशी ने बताया कि इस बार भक्तों में उत्साह ज्यादा है। बुरहानपुर से 3 हजार से अधिक भक्त इस बार यात्रा पर जा रहे हैं, जबकि यह आंकड़ा प्रति वर्ष 1500 के करीब रहता है। इस बार रजिस्ट्रेंशन संˆख्या अधिक हो गई। ऑनलाइन में बालटाल से 20 जुलाई और पहलगाम से 26 जुलाई तक फुल चल रहा है। हमने ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए 200 से अधिक भक्तों की डाक जšम्मू श्रीनगर श्राइन बोर्ड ऑफिस भेजी है। कई भक्त भी मनचाही तिथि के लिए जšम्मू या श्रीनगर पहुंचकर तत्काल पंजीयन का विकल्प चुन रहे हैं। पहलगाम और बालटाल के मार्ग से होने वाली इस यात्रा के लिए आएफआइडी कार्ड अनिवार्य है। कैसे कराएं अमरनाथ यात्रा का रजिस्ट्रेशन तरीका: आप ऑनलाइन (वेबसाइट/ऐप) और ऑफलाइन (बैंक शाखाएं) दोनों तरीके से रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। फीस: लगभग 150 से 220 प्रति व्यक्ति। जरूरी डॉक्यूमेंट्स : आधार कार्ड, वैध मेडिकल सर्टिफिकेट (CHC – अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाण पत्र), और फोटो। ऐज लिमिट: 13 साल से कम और 70 साल से अधिक उम्र के व्यक्ति, और 6 सप्ताह से अधिक की गर्भवती महिलाओं को अनुमति नहीं है। यात्रा मार्ग: बालटाल (Baltal) और पहलगाम (Pahalgam)। ऐसे करें ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन -SASB की वेबसाइट jksasb.nic.in पर जाएं। -'Online Services' > 'Register' पर क्लिक करें। -फॉर्म भरें, रूट और तारीख चुनें। -फोटो और मेडिकल सर्टिफिकेट अपलोड करें। -फीस का भुगतान करें और परमिट डाउनलोड करें। केदारनाथ यात्रा भी शुरू 12 ज्योतिर्लिंग में से एक केदारनाथ धाम व देश के चारधाम में शामिल बद्रीनाथ धाम के लिए भी उत्साह है। यहां पर गंगोत्री, यमुनोत्री के दर्शन का भी महत्व है। अक्षय तृतीय से यात्रा की शुरुआत हो गई। आंकड़े एक नजर में -15 अप्रेल से शुरू हुए रजिस्ट्रेशन -28 अगस्त को राखी पर होगा समापन -03 हजार के करीब संभावित यात्री जाएंगे अमरनाथ यात्रा पर

भोपाल मेट्रो के लिए 80 एकड़ जमीन की आवश्यकता, भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को किया गया तेज

भोपाल   भोपाल मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए 80 एकड़ जमीन तुरंत चाहिए। इसके लिए कलेक्टर प्रियंक मिश्रा तत्काल आदेश जारी करते हुए एक्सचेंज स्टेशन के लिए आरा मशीरों को शिफ्ट करने को कहा है। साथ ही भूमि अधिग्रहण से जुड़े प्रकरणों को तेजी से निराकृत करने के भी निर्देश दिए। धारा 19 के अंतर्गत भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने एमआइडीसी, वन एवं राजस्व विभाग केअधिकारियों को भी निर्देशित किया कि मेट्रो निर्माण से प्रभावित आरा मशीनो के स्थानांतरण की कार्रवाई जल्द पूरी करें। सभी एसडीएम को मिशन मोड में काम करने का कहा गया। उन्होंने चिन्हित भूमि का सीमांकन कर कंपनी को सौंपने के भी निर्देश दिए। जहां कहीं मेट्रो में भूमि संबंधी विवाद उत्पन्न हो, वहां प्रकरण को कलेक्टर के संज्ञान में लाकर उसका त्वरित समाधान कराने का कहा है। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर भूमि संबंधी कोई विवाद नहीं है, वहां मेट्रो कंपनी काम शुरू करे। ऑरेंज लाइन का चल रहा काम गौरतलब है कि भोपाल मेट्रो परियोजना के अंतर्गत ऑरेंज लाइन (प्रायोरिटी कॉरिडोर) सुभाष नगर से केन्द्रीय विद्यालय बोर्ड ऑफिस चौराहा होते हुए एम्स तक विकसित की जा रही है। इसके अतिरिक्त ब्लू लाइन रूट भदभदा डिपो चौराहा, जवाहर चौक, रोशनपुरा, कुशाभाऊ ठाकरे हॉल, लाल परेड मैदान, पुल बोगदा, प्रभात चौराहा, गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया, जेके रोड, इंद्रपुरी, पिपलानी और रत्नागिरी तिराहा तक प्रस्तावित है। बैठक में अपर कलेक्टर सुमित पांडे, मेट्रो मंडल प्रबंधक, नगर निगम के अपर आयुक्त सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं एसडीएम उपस्थित थे। 3.36 किमी की अंडरग्राउंड लाइन वहीं दूसरी ओर मेट्रो प्रोजेक्ट के तहत 3.36 किमी लंबाई की अंडरग्राउंड लाइन बनाना तय है। ऐशबाग से डीआइजी बंगला, सिंधी कॉलोनी तक भोपाल स्टेशन व नादरा बस स्टैंड होते हुए काम होगा। इसे पूरा करने शुरुआत में तीन से चार माह का लक्ष्य तय किया था। इसके लिए तीन मशीनों से काम शुरू करना था, लेकिन अभी एक मशीन ही उतारी गई। दो अन्य उतारनी बाकी है। इस कॉरिडोर में दो अंडरग्राउंड स्टेशन बनाए जा रहे हैं। जिनकी लंबाई करीब 180-180 मीटर होगी। टीबीएम से बनी सुरंग 3.39 किमी तक जाएगी। इसके बाद बड़ा बाग के पास नादरा स्टेशन के आगे 143 मीटर स्लोप के जरिए मेट्रो फिर जमीन के ऊपर आ जाएगी। तेज होगा काम प्रोजेक्ट से जुड़े इंजीनियर्स के अनुसार, जून से मानसूनी हलचल शुरू होने के बाद गहराई में काम करना कठिन होगा। इस दौरान अन्य काम पूरे किए जाएंगे। टनल का काम फिर अक्टूबर से ही शुरू होगा। यानी तीन माह में पूरा होने वाला काम 8 से 9 माह में पूरा होगा।

किराए के मकान में रहने के लिए बतानी होगी वजह, 2027 की जनगणना में गड़बड़ी करने वालों के लिए नया प्रावधान

भोपाल  भोपाल में जनगणना 2027 के तहत अभी पंद्रह दिन स्वगणना की प्रक्रिया की जा रही है। एक मई से हर घर पहुंचकर मकान सूचीकरण की प्रक्रिया शुरू होगी। इसमें सबसे महत्वपूर्ण किराएदारों की डिटेल जुटाना है। किराए के मकान में रहने की वजह भी पूछी जाएगी। किराएदार किस तरह के घर में रह रहे हैं, फार्म में इसकी जानकारी देनी होगी। किराए के मकान के नाम पर गड़बड़ी करनेवालों के लिए जनगणना 2027 में यह बड़ा प्रावधान किया गया है। स्वगणना के साथ ही एक मई से शुरू होने वाली प्रगणकों द्वारा गणना में कोई गलत जानकारी दी तो जुर्माने के साथ सजा भी हो सकती है। प्रशासन के सामने किराएदारों की वास्तविक डिटेल निकालना बड़ी चुनौती है। इसलिए प्रगणकों को किराएदारी वाले मकान को लेकर विशेष सतर्कता के साथ काम करने के लिए कहा गया है। इस बीच स्व गणना की गति बढ़ाने की कोशिश भी की जा रही है। प्रशासन की ओर से इसके लिए लोगों को जागरूक करने का कहा गया है। उन किराएदारों की अलग से लिस्टिंग होगी, जिनके पास खुद का मकान : मकान सूचीकरण के तहत उन किराएदारों की अलग से लिस्टिंग होगी, जिनके पास शहर में या अन्य कहीं खुद का मकान है और वे यहां किराए से रह रहे हैं। इसकी वजह भी पूछी जाएगी। आगामी समय में इस तरह की स्थितियों को लेकर सरकार कोई योजना बना सकती है। खुद का मकान होने के बाद भी लोग किराए से रह रहे हैं तो कारण पता लगाए जाएंगे। प्रशासन को आशंका, परिवार का घर, किराएदार न दर्ज करवा दें: प्रशासन को ये आशंका है कि एक ही घर में कई परिवार रह रहे हों, वहां कुछ खुद को किराएदार के तौर पर दर्ज न करवा दें। सरकार की आवासीय योजनाओं का लाभ लेने की मंशा इसमें शामिल हो सकता है। ऐसे में अतिरिक्त पूछताछ करने के लिए कहा जा रहा है। प्रशासन की ओर से स्व गणना की गति बढ़ाने के लिए भी लोगों को जागरूक करने का कहा प्रशासन की ओर से स्व गणना की गति बढ़ाने के लिए भी लोगों को जागरूक करने का कहा जा रहा है। अभी स्वगणना में भोपाल प्रदेशभर में तीसरे नंबर पर है। अब भी प्रगणकों के साथ सुपरवाइजर्स को लगातार अपडेट देकर जनगणना के तौर तरीकों के बारे में बताया जा रहा उप जिला जनगणना अधिकारी भुवन गुप्ता बताते हैंं कि जनगणना 2027 को लेकर प्रशिक्षण दिया गया। अब भी प्रगणकों के साथ सुपरवाइजर्स को लगातार अपडेट देकर जनगणना के तौर तरीकों के बारे में बताया जा रहा है।

E85 पेट्रोल आ रहा है भारत में, गाड़ियों में 85% एथेनॉल का होगा इस्तेमाल, तैयारी जोरों पर

  नई दिल्ली E85 Blended Petrol: पश्चिमी एशिया में युद्ध का तनाव है, तेल महंगा है, दुनिया भर ही निगाहें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर टिकी हैं. सबको बस एक फिकर है अगले पल क्या होगा. इसी बीच अब देश के पेट्रोल की कहानी में बड़ा ट्विस्ट आने वाला है. अभी तक E20 फ्यूल (20% एथेनॉल वाला पेट्रोल) की चर्चा हो रही थी, लेकिन अब सीधा E85 की तैयारी हो रही है. मतलब पेट्रोल में पेट्रोल कम और एथेनॉल ज्यादा. या यूं कहें कि, भारत में अब गाड़ी फ्यूल पर नहीं बल्कि शराब पर दौड़ेगी. सरकार अब ऐसा फ्यूल लाने की तैयारी में है, जो कारों को चलाएगा भी और देश की तेल पर निर्भरता भी घटाएगा. सवाल ये है कि क्या आपकी गाड़ी इस नए बदलाव के लिए तैयार है? आइये विस्तार से जानते हैं पूरा मामला-  सरकार जल्द जारी करेगी ड्राफ्ट  ET की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार बहुत जल्द E85 फ्यूल को लेकर ड्राफ्ट नियम जारी कर सकती है. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि, इस पर सरकार के भीतर सहमति बन चुकी है और मार्केट लेवल पर भी तैयारी शुरू हो गई है. शुरुआती टेस्टिंग भी की जा चुकी है, जिससे यह साफ है कि योजना अब जमीन पर उतरने के काफी करीब है।  रिपोर्ट्स के मुताबिक E85 को एक अलग फ्यूल ग्रेड के रूप में पेश किया जाएगा. यह मौजूदा E20 पेट्रोल से अलग होगा. अभी E20 में एथेनॉल की मात्रा लगभग 27% तक जा सकती है, जबकि E85 में यह सीधे 85% तक होगी।  तेल संकट के बीच बड़ी तैयारी पूरी दुनिया इस समय तेल संकट का सामना कर रही है, खासकर मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण स्थिति और गंभीर हो गई है. भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% तेल आयात करता है, ऐसे में E85 जैसे फ्यूल से आयात पर निर्भरता कम करने की कोशिश की जा रही है. सरकार पहले ही दावा कर चुकी है कि, पिछले एक दशक से एथेनॉल ब्लेंडिंग के चलते भारत करोड़ों बैरल कम तेल मंगा रहा है।  पीएम नरेंद्र मोदी ने मार्च में अपने एक बयान में कहा था कि, "एक दशक पहले तक पेट्रोल में केवल 1-2% तक एथेनॉल ब्लेंडिंग करते थें. लेकिन अब हम पेट्रोल में 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग कर रहे हैं, जिसके कारण सालाना करीब साढ़े 4 करोड़ बैरल कम पेट्रोल इंपोर्ट करना पड़ रहा है।  एथेनॉल क्यों है खास एथेनॉल देश में ही गन्ना, मक्का और अनाज से बनाया जाता है. यह एक रिन्यूएबल फ्यूल है और पेट्रोल के मुकाबले कम प्रदूषण फैलाता है. यही वजह है कि सरकार इसे बढ़ावा दे रही है. केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी फ्लेक्स-फ्यूल कार का इस्तेमाल कर चुके हैं और उन्होंने 100% एथेनॉल पर चलने वाली कार को देश को दिखाया था. वो लगातार वाहन निर्माता कंपनियों को फ्लेक्स फ्यूल इंजन वाले वाहनों के निर्माण पर जोर देते रहे हैं।  E85 के लिए चाहिए खास इंजन E85 फ्यूल का इस्तेमाल हर गाड़ी में नहीं किया जा सकता. इसके लिए खास तरह के इंजन यानी फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल (FFV) की जरूरत होती है. सामान्य पेट्रोल इंजन में अगर E85 इस्तेमाल किया जाए तो इससे इंजन के पार्ट्स खराब हो सकते हैं, परफॉर्मेंस गिर सकती है और गाड़ी स्टार्ट होने में भी दिक्कत आ सकती है।  इतना ही नहीं, E85 फ्यूल के लिए पेट्रोल पंप पर अलग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा. इसके लिए अलग नोजल और स्टोरेज सिस्टम की जरूरत होगी, ताकि E20 और E85 दोनों को अलग-अलग रखा जा सके. क्योंकि E85 फ्यूल के बाजार में आने से पहले इससे चलने वाले वाहनों का बाजार में होना जरूरी है. ऐसे में सरकार E20 फ्यूल की बिक्री तत्काल नहीं बंद करेगी, बल्कि इसे फेज्ड मैनर में हटाया जाएगा।  कब से चल रही है तैयारी भारत में एथेनॉल ब्लेंडिंग की योजना करीब एक दशक से चल रही है. नीति आयोग ने 2021 में अपनी रोडमैप रिपोर्ट में E85 का जिक्र किया था. इसके अलावा 2016 में ही E85 और E100 फ्यूल के लिए नोटिफिकेशन जारी किया जा चुका था. 2022 में सरकार ने E5 से लेकर E85 तक के फ्यूल पर चलने वाले वाहनों के टेस्ट नियम भी तय किए थे।  E85 फ्यूल से देश को कई फायदे मिल सकते हैं. इससे कच्चे तेल का आयात कम होगा, प्रदूषण घटेगा और किसानों को भी फायदा मिलेगा क्योंकि एथेनॉल की मांग बढ़ेगी. हालांकि चुनौतियां भी कम नहीं हैं. फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की माइलेज थोड़ा कम हो सकता है. वाहन निर्माता कंपनियों को तेजी से नए इंजन तैयार करने होंगे और तेल कंपनियों को नए इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करना पड़ेगा. साथ ही ग्राहकों को भी सही जानकारी देना जरूरी होगा ताकि वे गलती से E85 फ्यूल को सामान्य गाड़ियों में इस्तेमाल न करें।  कुल मिलाकर, E85 फ्यूल भारत के ऑटो और एनर्जी सेक्टर में एक बड़ा बदलाव लाएगा, लेकिन इसके सफलता पूर्वक लागू होने के लिए सरकार, कंपनियों और आम लोगों सभी की तैयारी जरूरी होगी।   

महीने में 2 बार सैलरी मिलेगी, सरकार का नया कदम, जानें पूरी जानकारी और गणित

काठमांडू  खर्च बढ़ाने और देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए नेपाल की नई बालेंद्र शाह सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की सैलरी को लेकर बड़ा फैसला किया है. ताजा जानकारी के मुताबिक हर सरकारी कर्मियों को अब से हर दो हफ्ते में सैलरी दी जाएगी।  फाइनेंस मिनिस्ट्री के सूत्रों ने इस संबंध में  बताया कि मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस ने  इस बारे में फ़ैसला लिया और जरूरी इंतजाम करने के लिए फाइनेंशियल कंट्रोलर जनरल ऑफिस को एक लेटर भेजा है. नए नियम के अनुसार, कर्मचारियों की मौजूदा महीने की सैलरी को दो हिस्सों में बांटा जाएगा और हर दो हफ्ते में इसे दिया जाएगा. फाइनेंस मिनिस्ट्री ने पहले ही संबंधित अधिकारियों को सरकारी कर्मचारियों को हर 15 दिन में सैलरी बांटने का निर्देश दिया है।  वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस कदम का मकसद यह पक्का करना है कि कर्मचारियों को समय पर पेमेंट मिले, जिससे खर्च बढ़ेगा और इकॉनमी में नई जान आएगी. कंट्रोलर जनरल के ऑफिस के एक अधिकारी ने इस बात को कन्फर्म किया है कि मंत्रालय से एक सर्कुलर मिला है और यह फैसला जल्द ही लागू किया जाएगा।  सिलसिलेवार समझें सैलरी का पूरा गणित     भारत के पड़ोसी देश नेपाल में अब से हर सरकारी कर्मचारियों को 15-15 दिन सैलरी दी जाएगी.     इसका मतलब महीने की सैलरी को दो हिस्सों में बांटा जाएगा.     इसके पीछे सरकार का उद्देश्य देश की इकॉनमी को मजबूत करना है.     इसके पीछे मार्केट खर्च को बढ़ाने की कोशिश भी है.     कानूनी बदलाव की भी जरूरत हो सकती है.  अब जानते हैं सरकार ने क्यों लिया यह फैसला     काफी समय से नेपाल की अर्थव्यवस्था काफी धीमी चल रही है.     नेपाल की नई सरकार का मानना है कि महीने में दो बार सैलरी मिलने से लोगों के पास पैसा जल्दी-जल्दी पहुंचेगा और वे लोग इसे खर्च भी करेंगे.     खर्च बढ़ने से बाजार में सामानों की डिमांड बढ़ेगी।      रुपयों का फ्लो तेजी से होगा.     इससे इकॉनमी की स्थिति सुधरेगी. यह भी जानें पहले सैलरी महीने में एक बार आती थी. नए नियम के मुताबिक अब हर 15 दिन पर सैलरी आया करेगी. ऐसे समझिए, जैसे नेपाल में किसी सरकारी कर्मचारी की महीने की सैलरी 50 हजार है, तो 15-15 दिन पर उसे 25-25 हजार रुपये मिलेंगे।  अन्य देशों में भी लागू है सैलरी का यह नियम नेपाल ऐसा पहला देश नहीं है, जहां हर 15 दिन पर सैलरी मिला करेगी. अन्य देशों जैसे- अमेरिका में भी हर सरकारी कर्मचारी को हफ्ते में 2 बार सैलरी दी जाती है. इसके अलावा कनाडा में भी सैलरी का यह नियम लागू है. यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom) में भी कुछ सेक्टर्स में हर 15 दिन में सैलरी दी जाती है. वहीं, मैक्सिको में भी यह नियम फॉलो किया जाता है। 

माता वैष्‍णो देवी में चांदी के चढ़ावे का खेल, ₹520 करोड़ फिसले, कैंसर का खतरा भी सामने आया

कटरा   माता वैष्‍णो देवी के दरबार में चढ़ने वाली चांदी में बड़ा खेल हो गया है. इस खेल की वजह से माता वैष्‍णो देवी श्राइन बोर्ड के हाथ 520 करोड़ रुपए आते-आते रह गए है. इतना ही नहीं, चांदी के इस खेल के बीच एक ऐसी साजिश भी खुलासा हुआ है, जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जुड़ा हुआ है. दरअसल, बीते दिनों माता के दरबार में श्रद्धालुओं की तरफ से चढ़ाई गई चांदी को गलाने के लिए सरकारी टकसाल में भेजा गया था।  श्राइन बोर्ड की तरफ से भेजी गई चांदी करीब 20 टन रही होगी. वहीं इस चांदी को लेकर सरकारी टकसाल से जो खबर सामने आई, वह सभी को चौंकाने के लिए काफी थी. टकसाल की तरह से श्राइम बोर्ड को बताया गया कि उनकी तरफ से भेजी गई 20 टन चांदी में से करीब 5 से 6 फीसदी ही चांदी है. बाकी कैडमियम, लोहा और जिंक जैसे धातु हैं. बोर्ड को अनुमान था कि इस 20 टन चांदी से उन्‍हें करीब 550 करोड़ रुपए मिलेंगे. लेकिन, असल में चांदी सिर्फ 30 करोड़ की ही निकली।  चांदी के सिक्‍कों में मिली कैंसर देने वाली धातु     इस मामले की जांच में यह भी सामने आया कि इन नकली चांदी के सिक्‍कों को बनाने के लिए जिन धातुओं का इस्‍तेमाल किया गया था, उसमें एक धातु ऐसी थी जो कैंसर जैसी बीमारी पैदा कर सकती है।      दरअसल, माता वैष्‍णो देवी के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु दरबार में चढ़ाने के लिए अपने साथ चांदी के छत्र या सिक्‍के लेकर आते हैं. माना जा रहा है ये नकली चांदी के सिक्‍के श्रद्धालुओं ने यात्रा मार्ग या कटरा स्थित दुकानों से खरीदे थे।      टकसाल में चांदी को गलाते समय पता चला कि इन सिक्‍कों को कैडियम, जिंक और आयरन मिलाकर बनाए गए थे. इसमें चांदी तो सिर्फ नाम मात्र की थी. टकसाल में 550 करोड़ रुपए की चांदी में सिर्फ 30 करोड़ रुपए की ही चांदी निकली।      कैडमियम चांदी जैसी दिखने वाली एक जहरीली औद्योगिक धातु है, जो बिल्‍कुल चांदी की तरह दिखती है. वहीं सिक्‍कों में आयरन का इस्‍तेमाल वजन बढ़ाने के लिए किया जाता था. वहीं, जिंक का इस्‍तेमाल लागत को कम करने के लिए किया जाता है।      कैडमियम एक कैंसर पैदा करने वाला पदार्थ है, जिस पर ब्‍यूरो ऑफ इंडियन स्‍टैंडर्ड (बीआईएस) ने पूरी तरह से रोक लगा रखी है. कैडमियम को पिघलाने पर जहरीला धुआं निकलता है, जो फेफड़ों और किडनी के लिए नुकसान दायक है।      सेहत को होने वाले नुकसान को देखते हुए टकसाल ने इस चढ़ावे वाली चांदी को पिघलाने से मना कर दिया था. टकसाल स्‍टाफ ने ज्‍यादा चांदी वाले टुकड़ों को हाथ से अलग करने में लगभग तीन महीने का समय लगा था।  धोखाधड़ी से बचने के लिए श्रद्धालु किन बातों का ध्‍यान रख सकते हैं? चांदी की शुद्धता के लिए बीआईएस ने 999 और 925 कोड निर्धारित किया है. इसके अलावा 6 अंकों वाला एचयूआईडी नंबर भी चांदी में दर्ज होता है. आप एचयूआईडी कोड को बीआईएस के ‘BIS Care App’ में डालकर ज्‍वैलर की जानकारी और शुद्धता के बारे में जानक सकते हैं. इसके अलावा, किसी तरह की धोखाधड़ी से बचने के लिए छत्र और सिक्कों को केवल कटरा, अर्धकुंवारी या भवन में स्थित श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की आधिकारिक दुकानों से ही खरीदें। 

एमपी में दुकानों का डिजिटल वेरिफिकेशन, हॉकर्स कॉर्नर की जियो टैगिंग से खाद्य लाइसेंस मिलेगा

भोपाल  एमपी में अब दुकानों का डिजिटल वेरिफिकेशन होगा। सड़क किनारे से लेकर हॉकर्स कॉर्नर व बड़े भवनों में खानपान की दुकानों की जियो टैगिंग होगी। उसके बाद ही खाद्य लाइसेंस मिल पाएगा। खाद्य एवं सुरक्षा ने नए नियम लागू किए हैं जिसकी भोपाल जिले में शुरुआत हो रही है। इसमें मौके पर मौजूद दुकान का ही लाइसेंस मिल पाएगा। दुकानदार को भी लाइसेंस के लिए कार्यालयों में भटकना नहीं होगा। प्रशासन को पता होगा कि जिले में किस लोकेशन पर किस तरह की दुकान है, जिससे दुकानों की निगरानी मजबूत होगी। एक क्लिक में फूड सेफ़्टी एंड स्टैंडर्ड के पोर्टल से डिटेल मिल जाएगी। ऐसे समझें स्थिति: खाद्य प्रतिष्ठान के डिजिटल सत्यापन और जियो- टैगिंग का सीधा मतलब तकनीक के जरिए आपकी दुकान या फैक्ट्री की लोकेशन और अस्तित्व को सुनिश्चित करना है। जब खाद्य सुरक्षा अधिकारी आपके प्रतिष्ठान का निरीक्षण करेंगे, तो वे ऐप से दुकान की फोटो खींचेंगे। उसके साथ जगह की सटीक लोकेशन अपने आप सिस्टम में सेव हो जाएगी। ऐसे मिलेगा लाभ पहले कई बार लोग कागजों पर दुकान दिखाकर लाइसेंस ले लेते थे, जबकि मौके पर कोई दुकान होती ही नहीं थी। जियो- टैगिंग से यह सुनिश्चित होगा कि लाइसेंस उसी पते के लिए दिया गया है, जहां वास्तव में काम हो रहा है। इससे यह साबित होगा कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी वास्तव में आपकी दुकान पर जांच के लिए पहुंचा था, क्योंकि ऐप तभी काम करेगा, जब अधिकारी उस लोकेशन के आसपास होगा। सरकार के पास एक डिजिटल मैप तैयार होगा कि शहर के किस इलाके में कितने रेस्टोरेंट, डेयरी या राशन की दुकानें हैं। आपको भौतिक रूप से दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं होती, सब कुछ स्कैन करके अपलोड होता है। आधार कार्ड के जरिए व्यापारी का डिजिटल सत्यापन किया जाता है। खाद्य सुरक्षा को डिजिटली व हाईटेक तौर तरीकों से बेहतर करने की कोशिश भोपाल के खाद्य सुरक्षा विभाग के जिला अधिकारी पंकज श्रीवास्तव बताते हैं कि खाद्य सुरक्षा को डिजिटली व हाईटेक तौर तरीकों से बेहतर करने की कोशिश है। इसके लिए लगातार काम किया जा रहा है। ऐप भी तभी काम करेगा जब विभागीय अधिकारी दुकान के आसपास होगा खाद्य सुरक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार इस कदम से दुकानों के नाम पर होता फर्जीवाड़ा रुक जाएगा। बिना दुकान के भी लाइसेंस ले लेेने पर अंकुश लगेगा, जियो- टैगिंग से हर हाल में केवल वास्तविक दुकानदारों को ही लाइसेंस मिल सकेगा। पहले पते में दिए मौके पर कई बार कोई दुकान ही नहीं होती थी। अब दुकान के पते पर उपस्थित होने पर ही लाइसेंस सुनिश्चित होगा। ऐप भी तभी काम करेगा जब विभागीय अधिकारी दुकान के आसपास होगा।