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योगी सरकार में यूपी बन रहा देश का टैलेंट पावरहाउस

स्कूल से यूपीएससी तक नई उड़ान, योगी सरकार में ‘टैलेंट हब’ बना उत्तर प्रदेश  योगी सरकार में यूपी बन रहा देश का टैलेंट पावरहाउस  2017 के बाद संरचनात्मक सुधारों, डिजिटल हस्तक्षेप और अवसरों के विस्तार से बदली तस्वीर  छोटे जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों तक दिख रहा असर – मेरठ, गोरखपुर, कानपुर, मुजफ्फरनगर, रायबरेली, मिर्जापुर, फतेहपुर, गाजीपुर, अंबेडकरनगर, कौशांबी जैसे जिलों से भी बड़ी संख्या में सफल हुए उम्मीदवार – यूपीएससी से लेकर एनईईटी-जेईई तक बढ़ी पकड़, समाज के अंतिम पायदान तक अवसरों का विस्तार – वर्ष 2021 में श्रुति शर्मा, 2023 में आदित्य श्रीवास्तव और 2024 में शक्ति दुबे ने पाई यूपीएससी में ऑल इंडिया रैंक वन लखनऊ  उत्तर प्रदेश अब केवल जनसंख्या का सबसे बड़ा राज्य नहीं, बल्कि शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में देश का उभरता हुआ टैलेंट पावरहाउस बन चुका है। स्कूलों की मजबूत होती बुनियाद से लेकर यूपीएससी, एनईईटी और जेईई जैसी राष्ट्रीय परीक्षाओं में लगातार बढ़ती सफलता यह दर्शा रही है कि प्रदेश में शिक्षा अब पढ़ाई के साथ-साथ परिणाम और प्रतिस्पर्धा केंद्रित मॉडल में बदल चुकी है। वर्ष 2017 के बाद योगी सरकार के संरचनात्मक सुधारों, डिजिटल हस्तक्षेप और अवसरों के विस्तार ने इस परिवर्तन को गति दी है। स्कूलों के आधारभूत ढांचे, शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल संसाधनों, छात्रवृत्ति और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मार्गदर्शन जैसे क्षेत्रों में हुए ठोस सुधारों ने शिक्षा व्यवस्था को जमीनी स्तर से बदल दिया है। 2017 से 2026: सुधार, विस्तार और परिणाम से बनी नई शैक्षिक संस्कृति वर्ष 2017 से 2026 के बीच उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन एक सतत और योजनाबद्ध प्रक्रिया के रूप में उभरकर सामने आया है। 2017 में अनुशासन और पारदर्शिता को केंद्र में रखकर सुधारों की नींव रखी गई, जिसे 2018 में इंफ्रास्ट्रक्चर सुदृढ़ीकरण और कायाकल्प अभियानों ने जमीनी मजबूती दी। 2019 से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का दायरा व्यापक हुआ, जबकि 2020 में कोविड काल ने डिजिटल शिक्षा की आवश्यकता और उसकी भूमिका को निर्णायक बना दिया। इसके बाद 2021 से 2024 तक यूपीएससी, पीसीएस, बैंकिंग, रक्षा तथा एनईईटी-जेईई जैसी परीक्षाओं में उत्तर प्रदेश की निरंतर और मजबूत उपस्थिति ने इस बदलाव को परिणामों के रूप में स्थापित किया। 2025 में छात्रवृत्ति, कोचिंग सहायता और उच्च शिक्षा सुधारों का प्रभाव और स्पष्ट हुआ, जबकि 2026 तक इन सभी प्रयासों का संचयी प्रभाव एक ऐसी नई शैक्षिक संस्कृति के रूप में सामने आया, जिसमें अवसरों का विस्तार, गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धा तीनों का संतुलित विकास दिखाई देता है। मजबूत बुनियाद से बदली तस्वीर ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से सरकारी विद्यालयों में शौचालय, पेयजल, बिजली, फर्नीचर और पुस्तकालय जैसी मूलभूत सुविधाओं को सुदृढ़ किया गया, जिससे प्रारंभिक शिक्षा का स्तर बेहतर हुआ और छात्रों की उपस्थिति तथा सीखने की गुणवत्ता में सुधार आया। इसके साथ ही डिजिटल शिक्षा और मॉनिटरिंग सिस्टम ने शिक्षा को पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाया है। अब छात्रों की प्रगति का आकलन डेटा के आधार पर किया जा रहा है, जिससे जवाबदेही और गुणवत्ता दोनों में वृद्धि हुई है। राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में बढ़ती पकड़ उत्तर प्रदेश के छात्रों ने हाल के वर्षों में यूपीएससी सहित विभिन्न राष्ट्रीय परीक्षाओं में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। वर्ष 2021 में श्रुति शर्मा, 2023 में आदित्य श्रीवास्तव और 2024 में शक्ति दुबे ने यूपीएससी परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक-1 प्राप्त कर प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया। इसके साथ ही यूपीपीएससी, एसएससी, बैंकिंग, रेलवे, रक्षा सेवाओं के साथ-साथ एनईईटी और जेईई जैसी परीक्षाओं में भी प्रदेश के छात्र लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। छोटे जिलों से उभर रही नई प्रतिभा जहां पहले सफलता प्रयागराज, लखनऊ और वाराणसी जैसे शहरों तक सीमित थी, वहीं अब मेरठ, गोरखपुर, कानपुर, मुजफ्फरनगर, रायबरेली, मिर्जापुर, फतेहपुर, गाजीपुर, अंबेडकरनगर और कौशांबी जैसे जिलों से भी बड़ी संख्या में सफल उम्मीदवार सामने आ रहे हैं। यह बदलाव दर्शाता है कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की प्रतिभा भी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच रही है। समाज के अंतिम पायदान पर हर वर्ग तक पहुंचा अवसर मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली छात्रों को निःशुल्क कोचिंग, मार्गदर्शन और मेंटोरशिप दी जा रही है, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर समाज के अंतिम पायदान तक पहुंचा है। उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार से छात्रों को राज्य के भीतर ही बेहतर अवसर मिल रहे हैं, जिससे प्रतिभा का स्थानीय स्तर पर संरक्षण भी सुनिश्चित हुआ है।

राजधानी में 24 से 26 अप्रैल तक राष्ट्र कवि दिनकर की कालजयी रचना रश्मिरथी पर कार्यक्रम आयोजित किये जायेगे

राजधानी में 24 से 26 अप्रैल तक राष्ट्र कवि दिनकर की कालजयी रचना रश्मिरथी पर कार्यक्रम आयोजित किये जायेगे इसी श्रृंखला में भारत रत्न अटल बिहारी बाजपेयी, बाल गंगाधर तिलक, स्वामी विवेकानन्द के जीवन संवाद तथा कविताओं पर आधारित नृत्य नाटिकाएं प्रस्तुत की जायेगी-जयवीर सिंह यह आयोजन महापुरूषांे के कृतित्व एवं व्यक्तित्व से युवा पीढ़ी को जोड़ने  का एक प्रयास-शाही लखनऊ राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर की पुण्य तिथि के अवसर पर उनकी कालजयी रचना रश्मिरथी के 75 वर्ष पूरा होने पर राजधानी लखनऊ में भव्य रश्मिरथी पर्व का आयोजन 24 से 26 अप्रैल, 2026 तक इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में किया जा रहा है। इस तीन दिवसीय आयोजन के दौरान साहित्य, विरासत और राष्ट्र चेतना का अनूठा संगम दर्शकों को देखने को मिलेगा।  यह जानकारी प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री जयवीर सिंह ने आज मीडिया सेंटर लोकभवन मंे आयोजित एक प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान दी। इस अवसर पर कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही भी उपस्थित थे। पर्यटन मंत्री ने कहा कि इस रश्मिरथी के साथ-साथ स्वामी विवेकानन्द, बाल गंगाधर तिलक और भारत रत्न अटल बिहारी बाजपेयी जी के कृतित्व एवं व्यक्तित्व तथा काव्य पर आधारित नाट्य का मंचन एवं नृत्य नाटिकायंे प्रस्तुत की जायेगी। श्री जयवीर सिंह ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य युवा पीढ़ी को राष्ट्र नायकों, लेखकों तथा साहित्यकारों के कृतित्व एवं व्यक्तित्व से जोड़ना है। इसके साथ राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को स्मरण करते हुए उनको श्रद्धांजली भी देना है। लखनऊ में आयोेेेेजित आयोजन मंे जनपद मऊ निवासी तथा मुम्बई के प्रख्यात रंगकर्मी मुजीब खान के नेतृत्व में नाटक का मंचन किया जायेगा। शिमला की प्रसिद्ध कत्थक कलाकार पूनम शर्मा के निर्देशन में अटल स्वरांजलि नामक संगीतमय नृत्य नाटिका प्रस्तुत की जायेगी, जो अटल जी की प्रसिद्ध कविताओं पर आधारित होगी।  राष्ट्र कवि दिनकर की रचनाएं आजादी के दौरान भारतीयों के मन में जोश और स्वाभिमान का संचार करती थी, उनकी ओजस्वी वाणी ने देशवासियों को आजादी के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी। स्वतंत्रता के बाद भी राज्यसभा सदस्य के रूप में अपनी सेवायें दी तथा अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज को नई ऊर्जा और दिशा प्रदान की। उनकी प्रमुख रचनाओं में रश्मिरथी, हुंकार, कुरूक्षेत्र, उर्वशी, परशुराम की प्रतिक्षा और संस्कृत के चार अध्याय आदि शामिल हैं।  यह आयोजन न केवल दिनकर जी की साहित्यिक विरासत को सम्मान देने का अवसर है, बल्कि नई पीढ़ी को उनके विचारों और मूल्यों से जोड़ने का एक प्रयास है। उन्होंने कहा कि रश्मिरथी पर्व के जरिए समाज में राष्ट्र चेतना, स्वाभिमान और अपने सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता लाना है। इसके साथ ही विद्यालयों के बच्चों को भी जोड़ा जायेगा। नाटक के दौरान मीडिया बन्धुओं के लिए सीट आरक्षित की जायेगी। नाट्य मंचन के माध्यम से गांव देहात, विश्वविद्यालय के छात्रों तक राष्ट्र नायकांे के बारे में संदेश पहुंचाने का प्रयास किया जायेगा। कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि राष्ट्र कवि दिनकर के व्यक्तित्व को नये सिरे से समझने की जरूरत है। उन्होंने समाज सुधारक के रूप में भी कार्य किया। इसके साथ साहित्य साधना के माध्यम से देशवासियों में आजादी के लिए हुंकार भरी। उन्होंने कहा कि लखनऊ में आयोजित इस कार्यक्रम की श्रृंखला में और भी महापुरूषों के जीवन पर मंचन होगा। इसके साथ ही विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने का प्रयास किया जायेगा। अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य श्री अमृत अभिजात ने आयोजन के महत्व एवं पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मा0 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने महापुरूषों के योगदान पर नृत्य नाटिकाओं का मंचन करने का आदेश दिया था। इसी कड़ी में राष्ट्र कवि दिनकर के जीवन एवं रचनाओं पर आधारित कार्यक्रम का आयोजन करने का निर्णय लिया।  

आरटीई: शत-प्रतिशत नामांकन लक्ष्य पूरा करने के लिए योगी सरकार ने 25 अप्रैल तक दिए सख्त निर्देश

आरटीई: शत-प्रतिशत नामांकन को लेकर योगी सरकार सख्त, 25 अप्रैल तक हर हाल में लक्ष्य पूरा करने के निर्देश 1,95,740 आवंटनों के सापेक्ष अब तक मात्र 1,08,866 बच्चों के प्रवेश पर सख्त हुई योगी सरकार – महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने सभी जिलाधिकारियों और बीएसए को 25 अप्रैल तक हर हाल में सभी पात्र बच्चों का नामांकन सुनिश्चित कराने के दिये निर्देश – लापरवाही या शिथिलता पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी, जिम्मेदार अधिकारी सीधे जवाबदेही में होंगे लखनऊ  शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के अंतर्गत वर्ष 2026-27 में आवंटित गरीब बच्चों का शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित कराने के लिए योगी सरकार अब एक्शन मोड में आ गई है। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा मोनिका रानी ने सभी जिलाधिकारियों और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को स्पष्ट और कड़े निर्देश जारी करते हुए कहा है कि 25 अप्रैल 2026 तक हर हाल में सभी पात्र बच्चों का नामांकन सुनिश्चित किया जाए, इसमें किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आरटीई के अंतर्गत 1,95,740 आवंटनों के सापेक्ष अब तक मात्र 1,08,866 बच्चों का ही प्रवेश कराया जा सका है, जिस पर सरकार ने कड़ा संज्ञान लिया है। शेष बच्चों के नामांकन को लेकर अब फील्ड स्तर पर तेज और निर्णायक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। निर्देश में कहा गया है कि जिन बच्चों का अब तक प्रवेश नहीं हुआ है, उनकी सूची तैयार कर तत्काल प्रभाव से नामांकन कराया जाए। संबंधित विद्यालयों से समन्वय स्थापित कर प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी न होने दी जाए। योगी सरकार ने इस पूरे अभियान की सख्त मॉनिटरिंग के निर्देश देते हुए जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को प्रतिदिन प्रगति की समीक्षा करने को कहा है। समयबद्ध लक्ष्य हासिल करने के लिए अधिकारियों को पूरी जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा। सरकार ने साफ कर दिया है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या शिथिलता मिलने पर कड़ी कार्रवाई तय है और जिम्मेदार सीधे कार्रवाई की जद में आएंगे।

विश्व पृथ्वी दिवस पर INTACH की राष्ट्रीय पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित

विश्व पृथ्वी दिवस पर INTACH की राष्ट्रीय पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित ला मार्टिनियर कॉलेज में जीवन का वृक्ष थीम पर 85 छात्रों ने दिखाई रचनात्मकता प्रकृति संरक्षण का संदेश देकर युवा पीढ़ी को बनाया पर्यावरण का प्रहरी लखनऊ  विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर INTACH लखनऊ चैप्टर द्वारा अखिल भारतीय पोस्टर प्रतियोगिता जीवन का वृक्ष के शहरी चरण का आयोजन ला मार्टिनियर कॉलेज में किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य कक्षा 7 से 9 तक के छात्रों में भारत की समृद्ध प्राकृतिक विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाना, पर्यावरण संरक्षण की भावना विकसित करना तथा रचनात्मक प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना था। कार्यक्रम में शहर के विभिन्न प्रमुख विद्यालयों के छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। छात्रों को पर्यावरण संरक्षण के महत्व से कराया गया अवगत कार्यक्रम की शुरुआत प्रकृति एवं विरासत भ्रमण से हुई, जिसका नेतृत्व जाने-माने विशेषज्ञ मोहम्मद अहसन (पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक उत्तर प्रदेश) तथा ए.के. श्रीवास्तव (रेलवे के पूर्व एजीएम एवं लखनऊ के प्रसिद्ध इतिहासकार) ने किया। इस दौरान छात्रों को प्रकृति, पेड़-पौधों और पर्यावरण संरक्षण के महत्व से अवगत कराया गया। मोहम्मद अहसन ने अपने संबोधन में कहा कि पृथ्वी को सुरक्षित रखने के लिए हर नागरिक को जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने विद्यार्थियों से पेड़ लगाने, जल संरक्षण करने और जैव विविधता बचाने का संकल्प लेने का आह्वान किया। प्रमुख विद्यालयों के छात्रों ने की भागीदारी भ्रमण के बाद पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें शहर भर के प्रमुख विद्यालयों के छात्रों ने भागीदारी की। इनमें सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल, सिटी मॉन्टेसरी स्कूल की विभिन्न शाखाएं, आर्मी पब्लिक स्कूल, स्टडी हॉल स्कूल, लखनऊ पब्लिक कॉलेज, राजकुमार अकादमी, मॉडर्न अकादमी, विद्यास्थली कनार इंटर कॉलेज, जागृति लोरेटो विद्यालय, होर्नर कॉलेज और ला मार्टिनियर कॉलेज सहित कई संस्थान शामिल रहे। प्रतियोगिता में लगभग 85 छात्रों ने हिस्सा लिया। छात्रों ने प्रस्तुत किया शानदार चित्रांकन  छात्रों ने अपने पोस्टरों में क्षेत्र के मूल पेड़ों और झाड़ियों को केंद्र में रखते हुए शानदार चित्रांकन प्रस्तुत किया। किसी ने पत्तियों और फूलों की संरचना दिखाई तो किसी ने फलों, छाल और उनसे जुड़े जीव-जंतुओं का चित्रण किया। कई पोस्टरों में पक्षियों, तितलियों, मधुमक्खियों और अन्य जीवों के माध्यम से प्रकृति के संतुलन को दर्शाया गया। हर पोस्टर के साथ प्रभावशाली नारे भी लिखे गए, जिनमें पर्यावरण बचाने का संदेश प्रमुखता से उभरा। 200 शब्दों का लेख भी किया प्रस्तुत विशेष बात यह रही कि प्रत्येक प्रतिभागी ने अपने पोस्टर के साथ 200 शब्दों का लेख भी प्रस्तुत किया। इसमें संबंधित पौधे की विशेषताएं, उपयोगिता, पारिस्थितिक महत्व और संरक्षण की आवश्यकता पर विस्तार से जानकारी दी गई। इससे विद्यार्थियों में शोध, लेखन और जागरूकता का समन्वय देखने को मिला। प्रतियोगिता के पोस्टरों का मूल्यांकन अब अखिल भारतीय स्तर पर किया जाएगा। इसमें 100 क्षेत्रीय विजेताओं और 10 राष्ट्रीय विजेताओं की घोषणा बाद में की जाएगी।

डिजिटल ट्रैकिंग से परिषदीय शिक्षा में बदलाव, 67 हजार स्कूल जुड़े स्टूडेंट रिपोर्ट कार्ड सिस्टम से

डिजिटल ट्रैकिंग से बदली परिषदीय शिक्षा की तस्वीर, स्टूडेंट रिपोर्ट कार्ड सिस्टम से जुड़े 67 हजार स्कूल योगी सरकार की सख्त मॉनिटरिंग का असर, रिपोर्ट कार्ड डाउनलोड में तेज रफ्तार बागपत, गाजियाबाद, सहारनपुर और सिद्धार्थनगर ने हासिल की 100 प्रतिशत उपलब्धि 01 लाख 06 हजार से अधिक विद्यालयों का हुआ आकलन, 63 प्रतिशत विद्यालयों ने अपनाया डिजिटल मूल्यांकन रियल-टाइम रिपोर्ट कार्ड से बढ़ी जवाबदेही, डेटा आधारित शिक्षा मॉडल की ओर बड़ा कदम परिषदीय शिक्षा अब पारंपरिक ढांचे से आगे, डिजिटल और परिणाम आधारित मॉडल की ओर अग्रसर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था ‘डिजिटल गवर्नेंस’ और ‘रिजल्ट आधारित मॉनिटरिंग’ के नए मानक स्थापित कर रही योगी सरकार लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की परिषदीय शिक्षा व्यवस्था तेजी से डिजिटल, पारदर्शी और परिणामोन्मुख मॉडल की ओर बढ़ रही है। निपुण विद्यालय मूल्यांकन के अंतर्गत प्रदेश के 01 लाख 06 हजार से अधिक विद्यालयों का आकलन किया गया, जिनमें से 67 हजार 200 (21 अप्रैल तक) से अधिक विद्यालयों ने विद्यार्थियों के रिपोर्ट कार्ड डाउनलोड कर नई डिजिटल व्यवस्था को अपनाया है। यह कुल का लगभग 63 प्रतिशत है, जो राज्य में डिजिटल शिक्षा की तेजी से बढ़ती स्वीकार्यता को पुष्ट कर रहा है। यह उपलब्धि बेसिक शिक्षा विभाग की तकनीकी प्रगति का मजबूत संकेत हैं। शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता स्थापित करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है। डिजिटल रिपोर्ट कार्ड डाउनलोड सिस्टम के माध्यम से अब छात्रों की प्रगति का आकलन अधिक सटीक और त्वरित तरीके से संभव हो रहा है, जिससे अभिभावकों और शिक्षकों के बीच संवाद भी सशक्त हुआ है। अभिभावकों को घर बैठे बच्चों की प्रगति की पूरी जानकारी डिजिटल रिपोर्ट कार्ड प्रणाली के अन्तर्गत अब विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन को पूरी तरह तकनीकी प्लेटफॉर्म पर दर्ज और साझा किया जा रहा है, जिससे पारंपरिक कागजी प्रक्रिया की जगह पारदर्शी, तेज और प्रभावी व्यवस्था विकसित हुई है। इस प्रणाली में छात्रों के अंक, ग्रेड, उपस्थिति और समग्र प्रगति का डेटा ऑनलाइन उपलब्ध रहता है, जिसे अभिभावक कभी भी देख सकते हैं। इससे विद्यालयों और बेसिक शिक्षा विभाग को वास्तविक समय में मूल्यांकन और निगरानी करने में सुविधा भी मिल रही है। 'डिजिटल गवर्नेंस’ और ‘रिजल्ट आधारित मॉनिटरिंग’ के नए मानक स्थापित कर रही है योगी सरकार योगी सरकार के नेतृत्व में प्रदेश की परिषदीय शिक्षा व्यवस्था ‘डिजिटल गवर्नेंस’ और ‘रिजल्ट आधारित मॉनिटरिंग’ के नए मानक स्थापित कर रही है। तकनीक के व्यापक उपयोग पर विशेष जोर का ही परिणाम है कि विद्यालयों में डिजिटल प्लेटफॉर्म की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ी है। शिक्षा अब डेटा-आधारित और परिणामोन्मुखी बन रही है। रिपोर्ट कार्ड डाउनलोड में टॉप प्रदर्शन करने वाले जनपद स्टूडेंट रिपोर्ट कार्ड डाउनलोड के मामले में कई जनपदों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। बागपत, गाजियाबाद, सहारनपुर और सिद्धार्थनगर ने 100 प्रतिशत उपलब्धि हासिल कर शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। इसके अलावा संत कबीर नगर (97%), फिरोजाबाद (94%), फतेहपुर (94%), अंबेडकर नगर (93%), चंदौली (91%) और मऊ (90%) ने भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले अन्य जनपद जालौन (88%), कुशीनगर (87%), कानपुर देहात (86%), गौतम बुद्ध नगर (86%), कासगंज (85%), पीलीभीत (84%), अमेठी (84%), गोंडा (83%), एटा (82%), सुल्तानपुर और हापुड़ (81%) ने उपलब्धि हासिल की है।

इनर व्हील क्लब ऑफ भोपाल हिल्स में हुआ डिस्ट्रिक्ट चेयरमैन (डीसी) का विजिट और फेलोशिप मीटिंग

भोपाल इनर व्हील क्लब ऑफ भोपाल हिल्स में ऑफिशियल डिस्ट्रिक्ट चेयरमैन (डीसी) विजिट एवं फेलोशिप मीटिंग के रूप में सम्पन्न गया हुआ, जिसमें सेवा, नेतृत्व एवं सामाजिक प्रतिबद्धता की भावना को सशक्त रूप से अभिव्यक्त किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डिस्ट्रिक्ट चेयरमैन विभा सिंह जी रहीं, जिनकी गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष ऊंचाई प्रदान की। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुआ, जिसने पूरे वातावरण को सकारात्मक ऊर्जा एवं आध्यात्मिकता से भर दिया। इस अवसर पर क्लब की प्रेसिडेंट रश्मि गुप्ता जी ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत करते हुए क्लब की गतिविधियों एवं उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। तत्पश्चात सेक्रेटरी काव्या वाधवानी जी, एडिटर पूनम गर्ग जी एवं आईएसओ स्मिता पागनीस जी द्वारा वर्ष भर की गतिविधियों की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण क्लब के प्रथम बुलेटिन “इनर स्पार्क” का विमोचन रहा, जिसका मुख्य अतिथि विभा सिंह जी द्वारा विमोचन किया गया। इस उपलब्धि ने क्लब की रचनात्मकता एवं सक्रियता को एक नई पहचान दी। मुख्य अतिथि विभा सिंह जी ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में सेवा, मित्रता एवं नेतृत्व के मूल्यों को अपनाने पर जोर दिया तथा क्लब के प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम में विभिन्न इनर व्हील क्लब्स के पदाधिकारियों एवं गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही

राज्यपाल मंगु भाई पटेल बोले: ‘विकसित भारत’ के लिए कौशल, उद्यमिता और शिक्षा में निरंतर सुधार की आवश्यकता

भोपाल में 5वां समर्थ भारत कॉन्क्लेव संपन्न ‘ विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कौशल, उद्यमिता और शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर प्रयास जरूरी : राज्यपाल मंगु भाई पटेल  राज्यपाल मंगु भाई पटेल की मौजूदगी में आईसेक्ट समूह के 40 वर्षों की उपलब्धियों पर जोर, एआई साक्षरता और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए कई पहल   भोपाल  राजधानी भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर (मिंटो हॉल) में आयोजित 5वां समर्थ भारत कॉन्क्लेव 2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। “रीइमेजिनिंग इम्पैक्ट: एआई-ड्रिवन स्किलिंग, फाइनेंशियल इंक्लूजन एवं सोशल एंटरप्राइज फॉर विकसित भारत” थीम पर आधारित इस कॉन्क्लेव में प्रदेश के महामहिम राज्यपाल मंगु भाई पटेल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। मंच पर रबींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे, स्कोप ग्लोबल स्किल यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी, रबींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. रवि प्रकाश दुबे, स्कोप ग्लोबल स्किल यूनिवर्सिटी के कुलगुरु डॉ. विजय सिंह, प्रो चांसलर डॉ. अदिति चतुर्वेदी वत्स तथा वाधवानी फाउंडेशन के संस्थापक कर्नल संतोष भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अदिति चतुर्वेदी वत्स ने किया। इसके पश्चात महामहिम राज्यपाल का स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया।  महामहिम राज्यपाल मंगु भाई पटेल ने आईसेक्ट समूह के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि एआई के क्षेत्र में ‘कौशल रथ’ जैसी पहल बच्चों में तकनीकी साक्षरता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने सामाजिक और पर्यावरणीय संरक्षण के साथ नवाचारों की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि गरीबों के जीवन में खुशहाली लाने और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कौशल, उद्यमिता और शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने स्किल इंडिया, खेलो इंडिया और स्वच्छ भारत जैसे अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि डिजिटल और तकनीकी सहयोग से देश एक मजबूत इकोसिस्टम की ओर बढ़ रहा है। इससे पहले कॉन्क्लेव की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने बताया कि आईसेक्ट पिछले 40 वर्षों से शिक्षा, कौशल, समावेशन और अवसर के क्षेत्र में कार्य कर रहा है और अब “आईसेक्ट इंडिया” के रूप में पैन इंडिया नेटवर्क के साथ-साथ अफ्रीका, मिडिल ईस्ट और जर्मनी तक अपनी पहुंच बना चुका है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत की दिशा में आईसेक्ट की भूमिका निरंतर बढ़ रही है और सीएसआर के माध्यम से साझेदार संस्थाओं के साथ मिलकर सामाजिक-आर्थिक प्रभाव को सशक्त किया जा रहा है। रबींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय का अटल इन्क्यूबेशन सेंटर देश के शीर्ष 5 केंद्रों में शामिल है। अपने संबोधन में संतोष चौबे ने कहा कि उनके संस्थान में भारतीय पारंपरिक मूल्यों को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ा जा रहा है। उन्होंने बताया कि अब संस्थान का फोकस कंप्यूटर साक्षरता से आगे बढ़कर एआई मिशन पर केंद्रित है, जिसके तहत एआई आधारित कोर्स, शॉर्ट टर्म प्रोग्राम और शैक्षणिक यात्राएं शुरू की गई हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एआई मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार के साथ मिलकर इस दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान आईसेक्ट पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म प्रदर्शित की गई। साथ ही आईसेक्ट एवं स्कोप ग्लोबल स्किल यूनिवर्सिटी की वार्षिक रिपोर्ट, कौशल रथ पर आधारित रिपोर्ट तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर हिंदी में प्रकाशित पुस्तक का विमोचन कर उन्हें महामहिम राज्यपाल को भेंट किया गया। कॉन्क्लेव में उत्कृष्ट कार्य के लिए आईसेक्ट केंद्र से जुड़े प्रेम सिंह गुंदीया और सुस्वाति त्रिवेदी को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण एमओयू भी हस्ताक्षरित हुए, जिनमें स्कोप ग्लोबल स्किल यूनिवर्सिटी और रिलायंस एनीमेशन, वाधवानी फाउंडेशन और आईसेक्ट, नेक्स्ट वेव टेक्नोलॉजी तथा एचसीएल टेक के साथ साझेदारी शामिल रही। सत्र के अंत में स्कोप ग्लोबल स्किल यूनिवर्सिटी के कुलगुरु डॉ. विजय सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम  का दूसरा सत्र 'नॉलेज सेशन' का रहा जिसमें विभिन्न अतिथियों सहित आईसेक्ट प्रतिनिधियों ने 'विकसित भारत के लिये एआई' विषय पर पैनल डिस्कशन में अपने महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किये। इंडिया एआई असिस्टेंट मैनेजर देवव्रत वैष्ण्व ने कहा कि हम 570 डाटा सेंटर खोल रहे हैं। और यह सारे टायर 2 और टियर तीन शहरों में खोले जाएंगे। बच्चे यहां से डाटा संबंधी कोर्स कर सकेंगे और यह सारे कोर्स 3 साल तक फ्री रहेंगे। HCL head tech गायत्री धर्मराज ने कहा कि एआई के कारण किसी की जॉब नहीं जाएगी। एआई वर्कर को और बेहतर बनाएगा। यह काम में और गुणवत्ता का भी सुधार करेगा। सभी को एआई को रोजमर्रा के काम में अपनाने की जरूरत है। नेक्स्ट वेव के वरिष्ठ नायडू ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का जो सपना है वह युवाओं के द्वारा भागीदारी करने से ही संपन्न होगा और इसमें युवा जितने जल्दी एआई को अपनाएगा उतना ही भारत विकसित होगा। आईसेक्ट निदेशक अभिषेक पंडित ने इस मौके पर कहा कि आईसेक्ट एआई मिशन के माध्यम से ग्रामीण बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। आज बहुत सारे बच्चे एआई के माध्यम से अपनी शिक्षा पूरी कर पा रहे हैं और इसमें आईसेक्ट बहुत बड़ी भूमिका निभा रहा है। आईसेक्ट लर्न के जीएम मनोज त्रिपाठी ने एआई लिटरेसी मिशन के बारे में प्रेजेंटेशन दिया और बताया कि आईसेक्ट स्किल्ड कोर्सेज और फैकल्टी डेवलपमेंट ट्रेनिंग के माध्यम से एआई द्वारा सुविधा उपलब्ध करा रहा है। सेशन के अंतर्गत 'वोकेशनल एजुकेशन प्रोग्राम इन स्कूल एनुअल रिपोर्ट आफ लद्दाख, मेघालय, झारखंड, यूपी, बिहार', 'इम्पैक्ट रिपोर्ट आन राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम नेशनल हेल्थ मिशन', 'आईसेक्ट इम्पैक्ट रिपोर्ट आन इम्पिलटेशन आफ यूनिसेफ पासपोर्ट टू अर्निंग प्रोग्राम' का लोकार्पण भी किया गया। इस दौरान बहुत सारे प्रोजेक्ट में रोजगार प्राप्त करने वाले कैंडिडेट को आफर लेटर भी प्रदान किये गये। नॉलेज सेशन का संचालन एजीयू निदेशक डॉ. अदिति चतुर्वेदी वत्स ने किया। तीसरे सत्र “को-क्रिएटिंग इम्पैक्ट: द पावर ऑफ कोलैबोरेटिव सीएसआर” में विभिन्न कॉर्पोरेट और शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने सहयोगात्मक प्रयासों के जरिए सामाजिक प्रभाव बढ़ाने पर जोर दिया। सत्र में जेनपैक्ट की वाइस प्रेसिडेंट सुरचना चुघ, वाधवानी फाउंडेशन से कर्नल संतोष, एनएसडीसी की प्रतिनिधि सुबरकत उल निसा, पॉलीकैब फाउंडेशन के मैनेजर अभिजीत झाल्टे और आईसेक्ट के ईवीपी अरविंद चतुर्वेदी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर आईसेक्ट और जेनपैक्ट के बीच स्किल बिल्ड प्रोग्राम के लिए एमओयू का आदान-प्रदान किया गया। समापन सत्र के प्रमुख अतिथियों में संतोष … Read more

योगी सरकार का कदम: मद्यनिषेध विभाग को मिला नया बल, संगठित तरीके से नशामुक्ति अभियान को मिली गति

योगी सरकार में मद्यनिषेध विभाग को नई ताकत, संगठित ढांचे से तेज हुआ नशामुक्ति अभियान 7 क्षेत्रीय मुख्यालयों से 75 जिलों तक पहुंचा जनजागरण, समाजोत्थान मिशन को मिली रफ्तार लखनऊ उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के नेतृत्व में मद्यनिषेध विभाग को अधिक संगठित, सक्रिय और जनकेंद्रित स्वरूप देने की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। प्रदेश में नशे की प्रवृत्ति, शराब सेवन और मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों को चुनौती मानते हुए सरकार ने विभागीय ढांचे को मजबूत किया है। साथ ही जनजागरूकता अभियानों को गांव से शहर तक विस्तार दिया गया है। परिणामस्वरूप मद्यनिषेध विभाग केवल औपचारिक प्रशासनिक इकाई न रहकर समाज में चेतना जगाने वाला प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। युवाओं, महिलाओं और ग्रामीण परिवारों को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता कार्यक्रम, संवाद अभियान, रैलियां और सामाजिक सहभागिता आधारित गतिविधियां लगातार चलाई जा रही हैं, जिससे प्रदेश में नशामुक्त समाज की अवधारणा को मजबूती मिल रही है। नशे के दुष्प्रभावों से जागरूक कर रही सरकार  योगी सरकार के कार्यकाल में विभाग द्वारा विद्यालयों, महाविद्यालयों, ग्राम पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों, युवा मंचों और सामाजिक संगठनों के माध्यम से व्यापक जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। वहीं नुक्कड़ नाटक, रैली, शपथ अभियान, पोस्टर प्रतियोगिता, सेमिनार और जनसंवाद कार्यक्रमों के जरिए युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य समाज को नशे की बुराइयों से बचाकर स्वस्थ और सक्षम बनाना है। इसी कारण मद्यनिषेध विभाग को सामाजिक उत्थान से जोड़कर देखा जा रहा है। महिलाओं, युवाओं और ग्रामीण परिवारों को नशे के दुष्प्रभावों से जागरूक करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रदेश में स्थापित 7 क्षेत्रीय मुख्यालय  मद्यनिषेध विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान समय में विभाग के 7 क्षेत्रीय मुख्यालय स्थापित हैं, जिनमें लखनऊ, आगरा, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, मेरठ और मुरादाबाद शामिल हैं। इन क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से 75 जनपदों में मद्यनिषेध संबंधी योजनाओं, जागरूकता कार्यक्रमों और प्रचार अभियानों का संचालन किया जा रहा है। यह सुव्यवस्थित नेटवर्क प्रदेश के हर हिस्से तक सरकार की नशामुक्ति नीति पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मुख्यालय स्तर पर तैनात हैं राज्य मद्यनिषेध अधिकारी अधिकारियों ने बताया कि विभागीय कार्यों के संचालन के लिए 7 क्षेत्रीय मद्यनिषेध एवं समाजोत्थान अधिकारी, 6 उप क्षेत्रीय अधिकारी, 27 जिला मद्यनिषेध एवं समाजोत्थान अधिकारी तथा 7 प्राविधिक पर्यवेक्षक तैनात हैं। इनके साथ कार्यालयी स्टाफ, वाहन चालक और सहायक कर्मचारियों की भी व्यवस्था की गई है, जिससे विभागीय योजनाओं का क्रियान्वयन तेजी से हो सके। मुख्यालय स्तर पर भी राज्य मद्यनिषेध अधिकारी, उप राज्य मद्यनिषेध अधिकारी, लेखाकार, लिपिक वर्ग और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति कर प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत किया गया है। इससे योजनाओं की निगरानी, बजट प्रबंधन, समीक्षा और फील्ड स्तर तक निर्देशों के प्रभावी पालन में मदद मिली है।

लखनऊ में 24 अप्रैल को आयोजित होगी ‘जोनल कान्फ्रेन्स-2026’

लखनऊ में 24 अप्रैल को आयोजित होगी 'जोनल कान्फ्रेन्स-2026' केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में जुटेंगे कई राज्यों के कृषि मंत्री उत्तर प्रदेश समेत उत्तर भारत के राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल लखनऊ लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी स्थित 'द सेंट्रम होटल' में आगामी 24 अप्रैल, 2026 को 'जोनल कान्फ्रेन्स-2026' का आयोजन किया जाना है। इस सम्मेलन की अध्यक्षता भारत सरकार के माननीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री द्वारा की जाएगी। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा करना और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है। इस जोनल कान्फ्रेन्स में उत्तर प्रदेश के साथ-साथ उत्तराखण्ड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के माननीय कृषि मंत्रीगण प्रतिभाग करेंगे। इसके अतिरिक्त केन्द्र शासित प्रदेश चण्डीगढ़ एवं लद्दाख के प्रशासक तथा भारत सरकार के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी इस सम्मेलन का हिस्सा बनेंगे। यह कार्यक्रम 24 अप्रैल को सुबह 9:30 बजे से प्रारम्भ होकर सायं 7:30 बजे तक प्रस्तावित है। पूरे दिन चलने वाले इस आयोजन में विभिन्न सत्रों के माध्यम से कृषि विकास और किसानों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं और चुनौतियों पर विस्तार से संवाद किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान प्रेस कान्फ्रेन्स और मीडिया ब्रीफिंग के माध्यम से महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी भी साझा की जाएगी।

सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट का कारण: US से जापान तक आर्थिक भूचाल, क्रूड $100 तक पहुंचा

मुंबई  जिसका डर था वही हुआ, भारतीय शेयर बाजार खुलते ही क्रैश (Stock Market Crash) हो गया. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स अपने पिछले बंद के मुकाबले ओपनिंग के साथ ही 800 अंक से ज्यादा फिसल गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी इंडेक्स 200 अंक से ज्यादा का गोता लगा गया. होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका-ईरान में टेंशन के साथ ही क्रूड ऑयल की कीमतों में आए उछाल ने एक बार फिर बाजार का सेंटीमेंट बिगाड़ दिया है. विदेशों से भी सेंसेक्स-निफ्टी के लिए रेड सिग्नल मिल रहे थे।  सेंसेक्स ने लगाया तगड़ा गोता  BSE Sensex ने गुरुवार को शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत होने के साथ अपने पिछले बंद 78,516 की तुलना में फिसलकर 77,983 के लेवल पर शुरुआत की. इसके कुछ ही मिनटों में इंडेक्स की गिरावट तेज होती चली गई और सेंसेक्स 823 अंक फिसलकर 77,693 पर कारोबार करता नजर आया।  न सिर्फ सेंसेक्स, बल्कि NSE Nifty भी ऐसी ही चाल के साथ आगे बढ़ता दिखा. 50 शेयरों वाला ये इंडेक्स अपने पिछले बंद 24,378 की तुलना में गिरावट लेकर 24,202 के स्तर पर खुला और फिर फिसलते हुए 24,134 के लेवल पर आ गया।  विदेशों से मिल रहे थे खराब सिग्नल  कमजोर ग्लोबल संकेतों के चलते पहले से ही शेयर बाजार में गिरावट की आशंका जताई जा रही थी. बीते कारोबारी दिन जहां अमेरिका शेयर मार्केट रेड जोन में बंद हुए थे, तो वहीं गुरुवार को खुलने के साथ ही एशियाई बाजार बिखरे हुए नजर आए थे।  जापान का निक्केई इंडेक्स खुलने के साथ ही फिसल गया और खबर लिखे जाने तक 650 अंक की गिरावट लेकर 58,952 पर ट्रेड कर रहा था. इसके अलावा हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स करीब 300 अंक की गिरावट लेकर 25,889 पर कारोबार करता नजर आ रहा था. अन्य एशियाई शेयर बाजारों में साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स करीब 1 फीसदी फिसला था।  Crude Price से सहमा बाजार  शेयर मार्केट में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे का एक बड़ा कारण अमेरिका-ईरान तनाव के बीच क्रूड ऑयल की कीमतों में अचानक आया बड़ा उछाल भी है, जिसने न सिर्फ भारत, बल्कि दुनियाभर के शेयर बाजारों का सेंटीमेंट खराब किया है।  दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक बार फिर से कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर के पार निकल गई है. Brent Crude Price करीब 8 फीसदी उछलकर 104 डॉलर प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा था।  सबसे ज्यादा बिखरे ये शेयर शुरुआती कारोबार में करीब 1095 शेयरों की शुरुआत गिरावट के साथ रेड जोन में हुई थी और निफ्टी पर इंटरग्लोब एविएशन, SBI लाइफ इंश्योरेंस, एशियन पेंट्स, M&M के शेयर तगड़ी गिरावट में नजर आए थे।  खबर लिखे जाने तक Tech Mahindra Share (2.60%), M&M Share (2.20%), Eternal Share (2.15%) फिसलकर ट्रेड कर रहा था. इसके अलावा मिडकैप कैटेगरी में शामिल Ashok Leyland Share (3.10%), Dixon Tech Share (2%) की गिरावट में नजर आया।  US से जापान तक भूचाल विदेशों से मिल रहे हैं. दरअसल, अमेरिका से लेकर जापान तक दुनियाभर के शेयर बाजारों में भूचाल देखने को मिल रहा है. US Stock Market बुधवार को रेड जोन में बंद हुए, तो एशियाई बाजारों में से अधिकतर में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है।  Japan Nikkei 600 अंक से ज्यादा, जबकि Hongkong HangSeng करीब 300 अंक टूटा दिखाई दे रहा है. इस बीत भारतीय शेयर बाजार के लिए प्रमुख संकेतक माना जाने वाला गिफ्ट निफ्टी (Gift Nifty) भी गिरावट में ट्रेड कर रहा है, जो सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट का संकेत दे रहा है।  गौरतलब है कि बीते कारोबारी दिन बुधवार को शेयर बाजार में दिनभर गिरावट देखने को मिली थी. बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स अपने पिछले बंद 79,273 की तुलना में 756 अंकों की गिरावट लेकर 78,516 पर क्लोज हुआ था, तो वहीं एनएसई का निफ्टी भी दिनभर टूटने के बाद अंत में 198 अंक फिसलकर 24,378 पर बंद हुआ था।  Gift Nifty दे रहा ये संकेत  जहां एशियाई शेयर बाजार भारतीय शेयर बाजार में भगदड़ के संकेत दे रहे हैं, तो वहीं गिफ्ट निफ्टी से भी रेड सिग्नल मिल रहे हैं. दरअसल, Gift Nifty ओपनिंग के साथ ही गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है. खबर लिखे जाने तक भारतीय शेयर मार्केट के लिए संकेतक माना जाने वाला गिफ्ट निफ्टी 170 अंक की गिरावट में कारोबार कर रहा था।  क्रूड की कीमतों ने बढ़ाई टेंशन  अमेरिका और ईरान युद्ध में भले ही सीजफायर हो गया हो, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दोनों में अभी भी टेंशन बरकरार है. ईरान होर्मुज खोलने को तैयार नहीं, तो अमेरिका की ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी जारी है. इस टेंशन के चलते कच्चे तेल की कीमतों में फिर से उछाल देखने को मिला है और Brent Crude Price 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है. इससे शेयर बाजारों में दबाव बढ़ा है।