samacharsecretary.com

24 को लखनऊ में होगा उत्तर जोन का क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन

लखनऊ.  उत्तर जोन खेती का प्राण है। कृषि क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने अनेक सकारात्मक कदम उठाए हैं। यूपी के इस कदम के कारण केंद्रीय किसान कल्याण मंत्रालय के तत्वावधान में 24 अप्रैल (शुक्रवार) को सेंट्रम होटल में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन (उत्तर जोन) होगा। इसमें 9 राज्यों (उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पंजाब व दिल्ली) के कृषि मंत्री, उद्यान मंत्री, प्रमुख सचिव, निदेशक, एफपीओ, प्रगतिशील किसान, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक, भारत सरकार के अधिकारी आदि रहेंगे। उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी व रामनाथ ठाकुर भी सम्मिलित होंगे।  यह जानकारी कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने दी। श्री शाही ने गुरुवार को लोकभवन में पत्रकारों से बातचीत में आयोजन के संबंध में विस्तृत जानकारी दी।   उन्होंने बताया कि इसमें कृषि ऋण, किसान क्रेडिट कार्ड, एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड की प्रगति, राज्यों के किसानों, केंद्र के स्टार्टअप, एफपीओ, नाबार्ड, बैंकों, मिल मालिकों, प्रसंस्करण इकाइयों, बागवानी की संभावनाओं, दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की प्रगति, बीज एजेंसियों, खरीद एजेंसियों, सिंचाई कंपनियों, राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन आदि पर चर्चा व समीक्षा भी होगी।  अपने बेहतर कार्यों के बारे में प्रस्तुतिकरण देंगे अन्य राज्य कृषि मंत्री ने बताया कि किसानों के कल्याण व आमदनी को लेकर विभिन्न राज्यों ने बेहतर कार्य किया है। वे अपने कार्यों का प्रस्तुतिकरण देकर अन्य राज्यों को भी अवगत कराएंगे। उत्तर प्रदेश के अंदर गन्ने के साथ इंटरक्रॉपिंग शुरू कराई गई है। इसके साथ ही धान की सीधी बोआई (डीएसआर) विधि को लेकर भी प्रस्तुतिकरण होगा। भारत सरकार ने सर्वोत्तम पद्धति मानते हुए इसे किसानों के हित का भी बताया है। वहीं पंजाब सरकार ने धान के फसल विविधीकरण की पद्धति, हिमाचल व उत्तराखंड ने बागवानी के क्षेत्र में विशेष पद्धति अपनाई है। इसके साथ ही कृषि के क्षेत्र में अन्य राज्यों के विभिन्न सकारात्मक कार्यों की भी जानकारी आदान-प्रदान होगी।  किसानों को सामर्थ्यवान बनाने पर भी होगी विस्तृत चर्चा सम्मेलन में नकली कीटनाशकों, उर्वरकों की कालाबाजारी पर नियंत्रण, प्रभावी वितरण, इसके विकल्पों को बढ़ावा देने, संतुलित उपयोग, रासायनिक फर्टिलाइजर की जगह पर अल्टरनेटिव फर्टिलाइजर के प्रयोग को लेकर भी पर विस्तृत चर्चा व समीक्षा भी होगी। सम्मेलन में उत्तर जोन के लिए आगे क्या पॉलिसी बनाई जाए और इसके जरिए किसानों को कैसे सामर्थ्यवान व आर्थिक रूप से सक्षम बनाया जा सके, इस पर भी चर्चा होगी।  यूरिया की खपत कम कराने के लिए लगभग 40 हजार कुंतल ढेंचे का बीज कराएंगे उपलब्ध कृषि मंत्री ने एक सवाल के जवाब में बताया कि उत्तर प्रदेश में उर्वरक की कोई समस्या नहीं है। उत्तर प्रदेश में 20 लाख मीट्रिक टन से अधिक फर्टिलाइजर है। इसमें साढ़े 11 लाख एमटी यूरिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने तय किया है कि लगभग 40 हजार कुंतल ढेंचे का बीज किसानों को उपलब्ध कराएगी, जिससे यूरिया की 20 प्रतिशत खपत कम होगी।

अवैध निर्माण पर कड़ा वार: Punjab में कॉलोनियों पर चला बुलडोज़र, प्रशासन अलर्ट

गुरदासपुर. पंजाब सरकार की गाइडलाइन और एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (जनरल) गुरसिमरन सिंह ढिल्लों के आदेशों के बाद, PAPRA एक्ट 1995 के तहत समय-समय पर अनधिकृत कॉलोनियों को नोटिस जारी किए गए और उन्हें समय-समय पर डिमोलिश किया गया। आज एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (जनरल) गुरसिमरन सिंह ढिल्लों के आदेशों के बाद ड्यूटी मजिस्ट्रेट रूपिंदर कौर की देखरेख में डिस्ट्रिक्ट टाउन प्लानर रितेश गोयनका, असिस्टेंट टाउन प्लानर पुनीत डिगरा, असिस्टेंट टाउन प्लानर प्रभजोत सिंह और जिला प्रशासन/रेगुलेटरी टीम की ओर से बड़ी कार्रवाई करते हुए गांव राजूवाल में PAPRA एक्ट 1995 का उल्लंघन करके बनाई गई अनधिकृत कॉलोनी को डिमोलिश किया गया। इस बारे में जानकारी देते हुए एडिशनल डिप्टी कमिश्नर गुरसिमरन सिंह ढिल्लों ने बताया कि भविष्य में होने वाले डेवलपमेंट को कंट्रोल करने के लिए, गांव राजूवाल में बनी अनधिकृत कॉलोनियों को PAPRA एक्ट-1995 के तहत नोटिस जारी कर तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई है, क्योंकि अनधिकृत कॉलोनियों के मालिक सरकारी निर्देशों को नजरअंदाज़ करके सरकारी नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि PAPRA एक्ट-1995 के अमेंडमेंट 2024 के अनुसार, अनधिकृत कॉलोनी काटने वाले व्यक्ति को 5 से 10 साल की जेल और 25 लाख से 5 करोड़ तक का जुर्माना हो सकता है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा रेगुलेटरी विंग समय-समय पर गुरदासपुर जिले में बन रही अनधिकृत कॉलोनियों और कंस्ट्रक्शन की जांच कर रहा है। इसके साथ ही काम रोकने के लिए संबंधित एक्ट के तहत नोटिस जारी कर रहा है और संबंधित पुलिस स्टेशन अफसर को आगे की कानूनी कार्रवाई करने के लिए कह रहा है। इस मौके पर उन्होंने आम लोगों से अपील की कि वे ऐसी गैर-कानूनी कॉलोनियों में प्लॉट न खरीदें जो सरकार से मंजूर न हों और किसी भी कॉलोनी में प्लॉट खरीदने से पहले सरकार की मंजूरी जरूर लें ताकि प्रॉपर्टी को नुकसान न हो और उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो। इसके अलावा उन्होंने कहा कि PUDA एरिया में 19 मार्च 2018 से पहले जो भी अनधिकृत कॉलोनियां अप्लाई की गई हैं, वे कॉलोनाइजर जरूरी डॉक्यूमेंट जमा करके तुरंत अपनी कॉलोनियों को रेगुलर करवा लें, नहीं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर कोई भी कॉलोनाइजर/प्रमोटर डिपार्टमेंट की मंजूरी लिए बिना कोई कंस्ट्रक्शन करता है, तो उसके खिलाफ नियमों के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी।

स्किन ग्राफ्टिंग से मरीज के पलक का सफल पुनर्निर्माण

रायपुर.  छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर में एक बार फिर जटिल चिकित्सा प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए डॉक्टरों की टीम ने 22 वर्षीय युवक को नई दृष्टि और सामान्य जीवन की ओर लौटने का अवसर प्रदान किया है। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुई आंख की निचली पलक का सफल ऑपरेशन कर मरीज को बड़ी राहत मिली है। दिसंबर 2025 की दुर्घटना के बाद बढ़ी थी परेशानी प्राप्त जानकारी के अनुसार, युवक दिसंबर 2025 को एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गया था। हादसे में उसकी आंख की निचली पलक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिससे वह अपनी आंख पूरी तरह बंद नहीं कर पा रहा था। प्रारंभिक उपचार के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ, जिसके बाद वह सिम्स के नेत्र रोग विभाग पहुंचा। विशेषज्ञों ने किया सर्जरी का निर्णय नेत्र विशेषज्ञों द्वारा गहन जांच के बाद सर्जरी का निर्णय लिया गया। ऑपरेशन के दौरान पलक पर बने पुराने कठोर निशान (स्कार टिश्यू) को सावधानीपूर्वक हटाया गया। इसके बाद पलक की संरचना को पुनः सामान्य करने के लिए उन्नत स्किन ग्राफ्टिंग तकनीक का उपयोग किया गया। जटिल सर्जरी के बाद तेजी से सुधार सर्जरी अत्यंत जटिल थी, क्योंकि ग्राफ्ट का आकार बड़ा था। इसके बावजूद विशेषज्ञों ने सफलतापूर्वक स्किन ग्राफ्ट का प्रत्यारोपण कर पलक और गाल के हिस्से का पुनर्निर्माण किया। ऑपरेशन के बाद मरीज की आंख की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और अब वह सामान्य रूप से देख पा रहा है। पलक भी पूरी तरह से बंद हो रही है, जिससे चेहरे की विकृति दूर हो गई है। इन विशेषज्ञों की टीम ने निभाई अहम भूमिका इस सफल सर्जरी में डॉ. सुचिता सिंह, डॉ. प्रभा सोनवानी, डॉ. कौमल देवांगन, डॉ. विनोद ताम्कनंद, डॉ. डेलीना नेल्सन, डॉ. संजय चौधरी एवं डॉ. अनिकेत सहित नर्सिंग स्टाफ सिस्टर संदीप कौर तथा नेत्र, सर्जरी एवं निश्चेतना विभाग की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मरीज व परिजनों ने जताया आभार अस्पताल प्रशासन के अनुसार सर्जरी पूरी तरह सफल रही है। मरीज की पलक सामान्य स्थिति में लौट आई है और आंख की कार्यक्षमता भी बहाल हो गई है। चेहरे की विकृति समाप्त होने से मरीज और उसके परिजनों ने राहत की सांस ली तथा सिम्स के चिकित्सकों के प्रति आभार व्यक्त किया। सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि “सिम्स में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर निरंतर बेहतर हो रहा है। हमारे विशेषज्ञ चिकित्सक जटिल से जटिल मामलों में भी उत्कृष्ट परिणाम दे रहे हैं। यह उपलब्धि संस्थान की आधुनिक सुविधाओं और डॉक्टरों की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।” चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि “इस प्रकार की जटिल सर्जरी का सफल निष्पादन हमारी टीम की समन्वित कार्यप्रणाली और विशेषज्ञता को दर्शाता है। सिम्स में अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से उच्च गुणवत्ता की चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे मरीजों को बेहतर उपचार यहीं मिल रहा है।” सरकारी संस्थान में विश्वस्तरीय उपचार का उदाहरण इस सफल सर्जरी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सरकारी अस्पतालों में भी अत्याधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता के बल पर जटिल से जटिल बीमारियों का विश्वस्तरीय उपचार संभव है।

मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी लक्ष्य 78 से बढ़कर 100 लाख मीट्रिक टन हुआ

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा मध्यप्रदेश के लिए विपणन वर्ष 2026-27 में गेहूं खरीदी के लक्ष्य में 22 लाख मीट्रिक टन की महत्वपूर्ण वृद्धि की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस वृद्धि के साथ अब मध्यप्रदेश का कुल गेहूं खरीदी लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 100 लाख मीट्रिक टन निर्धारित किया गया है। यह निर्णय राज्य में किसानों से अधिक मात्रा में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गेहूँ खरीदी के लक्ष्य में वृद्धि के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार माना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह निर्णय किसानों के हित में एक बड़ा कदम है, जिससे उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने के साथ ही राज्य में खाद्यान्न प्रबंधन व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी। यह निर्णय किसानों के परिश्रम का सम्मान है और उन्हें उचित मूल्य दिलाने की दिशा में सशक्त कदम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान वैश्विक चुनौतियों के बावजूद हमारी सरकार किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है। गेहूँ खरीदी चरणबद्ध तरीके से पहले छोटे किसानों से, फिर मध्यम और बाद में बड़े किसानों से की जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस संबंध में केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रहलाद जोशी को प्रस्ताव भेजा था।  

Amit Jogi को बड़ी राहत: Supreme Court of India ने CBI जवाब तक सरेंडर टाला

रायपुर. एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी हत्याकांड मामले में अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए सीबीआई का जवाब आने तक सरेंडर पर रोक लगाई है. छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी के बेटे अमित जोगी ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी. बता दें कि एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी हत्याकांड मामले में दो अप्रैल को हाई कोर्ट ने जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जोगी) सुप्रीमो अमित जोगी को दोषी ठहराते हुए 3 हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया था. इस पर अमित जोगी ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. राम अवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने लल्लूराम डॉट कॉम ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर टू में आज इस मामले में सुनवाई हुई. कोर्ट ने सीबीआई, स्टेट और उन्हें (सतीश जग्गी) तो नोटिस जारी किया है. सीबीआई का जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई शुरू होगी. 2007 में निचली अदालत ने किया बरी एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी की साल 2003 में हुई हत्या के मामले में निचली अदालत ने 2007 में 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, लेकिन सबूतों का अभाव बताते हुए अमित जोगी को बरी कर दिया था. इस फैसले को पीड़ित के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. सुप्रीम कोर्ट ने मामले को नए सिरे से विचार करने के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेज दिया था. हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए अमित जोगी को दोषी माना और दोषी करार देते हुए 3 हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया था. 2004 में सीबीआई ने शुरू की जांच सतीश जग्गी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी और उनके बेटे अमित जोगी पर जग्गी हत्याकांड का आरोप लगाया था. केस की जांच साल 2004 में सीबीआई को सौंपी गई थी. सीबीआई ने जांच के बाद करीब 11 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें 31 लोगों को आरोपी बनाया गया. मई 2007 में स्पेशल कोर्ट ने 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई. दो लोग सरकारी गवाह बन गए, जबकि सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया गया था.

‘हिन्दू तो हिन्दू है, किसी भी मंदिर में जा सकता है’; जस्टिस नागरत्ना का अहम बयान

तिरुवनंतपुरम केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश और धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे से जुड़े ऐतिहासिक मामले में सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की संविधान पीठ में आज (गुरुवार, 23 अप्रैल को) आठवें दिन भी सुनवाई जारी है। सुनवाई के दौरान आज जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि, “एक हिंदू आखिरकार तो हिंदू ही है और वह किसी भी मंदिर में जा सकता है।” दरअसल, मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली ये संविधान पीठ इस बात पर विचार कर रही है कि क्या धार्मिक संप्रदाय अपने विशिष्ट रीति-रिवाजों के आधार पर दूसरों को मंदिर में प्रवेश से रोक सकते हैं। इस पीठ में CJI सूर्यकांत के अलावा जस्टिस बी.वी. नागरत्ना, जस्टिस एम.एम. सुंदरेश, जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, जस्टिस अरविंद कुमार, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले, जस्टिस आर. महादेवन और जस्टिस जॉयमाल्या बागची शामिल हैं। संविधान पीठ न्यायिक समीक्षा के दायरे, अनुच्छेद 25 , 26 और अनुच्छेद 14 के बीच संतुलन ,'संवैधानिक नैतिकता' की भूमिका और धार्मिक मामलों में जनहित याचिकाओं की स्वीकार्यता से संबंधित प्रमुख सवालों की जांच कर रही है। हिंदू समाज को एकजुट होना चाहिए सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि हिंदू समाज को एकजुट होना चाहिए और मंदिरों को संप्रदाय की रेखाओं पर एकदूसरों को बाहर नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा अलगाव अंततः संप्रदाय को ही कमजोर करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि दक्षिण भारत में भले ही पूजा के विभिन्न रूप (जैसे शैव या वैष्णव) प्रचलित हों और वे संरक्षित हों, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि एक हिंदू दूसरे संप्रदाय के मंदिर में नहीं जा सकता। एक हिंदू, आखिरकार हिंदू ही होता है जस्टिस नागरत्ना ने आगे कहा, “कोई भी हिंदू किसी भी मंदिर में जा सकता है। एक तरीका है 'संप्रदाय'… मंदिर शैव, वैष्णव या श्री वैष्णव पूजा पद्धति का पालन करता है। कम से कम दक्षिण भारत में तो ऐसा ही होता है। ये ही वहाँ की प्रचलित प्रथाएँ हैं। इसलिए, इसे एक 'संप्रदाय' कहा जाता है। अब, अगर पूजा की पद्धति शैव प्रकार की है, तो वैष्णव संप्रदाय के लोग यह नहीं कह सकते कि इसे वैष्णव पद्धति के अनुसार ही होना चाहिए; क्योंकि उन दोनों पूजा पद्धतियों में अंतर होता है… इसलिए, पूजा के उस विशिष्ट स्वरूप को संरक्षण प्राप्त है। इसका किसी 'संगठन' के होने या न होने से कोई लेना-देना नहीं है। ऐसा होना जरूरी नहीं है। एक हिंदू, आखिरकार हिंदू ही होता है। वह किसी भी मंदिर में जा सकता है।” 'व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी' और व्यक्तिगत विचार सुनवाई के दौरान एक रोचक मोड़ तब आया जब वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल ने कांग्रेस नेता शशि थरूर के एक लेख का हवाला दिया। इस पर जस्टिस नागरत्ना ने सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा कि ज्ञान और ज्ञान के स्रोतों का स्वागत है, लेकिन "व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी" से नहीं। मुख्य न्यायाधीश ने भी इस पर सहमति जताते हुए कहा कि अदालत सभी प्रतिष्ठित व्यक्तियों का सम्मान करती है, लेकिन "व्यक्तिगत राय केवल व्यक्तिगत राय होती है।" सामाजिक सुधार में राज्य की भूमिका न्यायालय ने सामाजिक सुधारों के संदर्भ में राज्य की शक्ति पर भी चर्चा की। पीठ ने टिप्पणी की कि राज्य कोई अजनबी या विदेशी संस्था नहीं है, बल्कि वह लोगों की इच्छा का प्रतिनिधित्व करता है। अगर जनता किसी सामाजिक बुराई को सुधारना चाहती है, तो राज्य के पास उस शक्ति का प्रयोग करने का अधिकार है। जस्टिस नागरत्ना ने आगे कहा कि अनुच्छेद 25(2)(b) के तहत सामाजिक सुधार के लिए बनाया गया कानून धार्मिक संप्रदाय के अधिकारों पर प्रभावी हो सकता है। संविधान पीठ के सामने प्रमुख कानूनी प्रश्न क्या हैं? इस नौ सदस्यीय संविधान पीठ के सामने सात मुख्य प्रश्न हैं, जिनमें शामिल हैं: -संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का दायरा क्या है? -अनुच्छेद 25 (व्यक्तिगत अधिकार) और अनुच्छेद 26 (धार्मिक संप्रदायों के अधिकार) के बीच क्या संबंध है? -क्या 'नैतिकता' शब्द में 'संवैधानिक नैतिकता' भी शामिल है? -क्या कोई व्यक्ति जो उस संप्रदाय का हिस्सा नहीं है, जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से उसकी प्रथाओं को चुनौती दे सकता है? -संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत किसी धार्मिक प्रथा की न्यायिक समीक्षा का दायरा और विस्तार क्या है? -संविधान के अनुच्छेद 25 (2) (b) में प्रयुक्त अभिव्यक्ति "हिंदुओं के वर्ग" का क्या अर्थ है? दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं कर सकते वरिष्ठ अधिवक्ता कृष्णन वेणुगोपाल ने इस मामले के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इस फैसले का असर देश के लगभग 1.5 अरब लोगों पर पड़ेगा और दुनिया भर के संवैधानिक विद्वान इसकी समीक्षा करेंगे। उन्होंने धर्म के मामलों में राज्य के बढ़ते हस्तक्षेप पर भी चिंता व्यक्त की। फिलहाल सुनवाई जारी है और इसका परिणाम भारत में धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच संतुलन को नई दिशा देगा। बुधवार को शीर्ष अदालत ने कहा था कि धार्मिक विश्वासों और प्रथाओं से उत्पन्न होने वाले मुद्दों पर निर्णय देते समय सामाजिक सुधार के नाम पर धर्म को खोखला नहीं किया जा सकता है लेकिन न्यायालय ने यह संकेत भी दिया कि वह ऐसी प्रथाओं से संबंधित जनहित याचिकाओं के लिए अपने दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं कर सकता।

मध्यप्रदेश पुलिस की बड़ी कार्रवाई, SIT और STF ने भोपाल में सक्रिय नेटवर्क का किया पर्दाफाश

मध्यप्रदेश पुलिस की बड़ी कार्रवाई, SIT–STF ने भोपाल में सक्रिय नेटवर्क का किया पर्दाफाश व्हाट्सएप कॉल से फिरौती मांगने वाला संगठित गिरोह ध्वस्त, मास्टरमाइंड आनंद मिश्रा गिरफ्तार सहित तीन आरोपी गिरफ्तार भोपाल  पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा द्वारा प्रदेश में संगठित अपराधों की प्रभावी रोकथाम एवं अपराधियों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही सुनिश्चित करने हेतु पूर्व में विशेष अनुसंधान दल (SIT) का गठन किया गया था। इसी के परिप्रेक्ष्य में SIT एवं STF द्वारा समन्वित रूप से यह कार्यवाही की गई है। भोपाल के थाना कोलार रोड क्षेत्र में व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से फिरौती मांगने एवं फरियादी के घर की रेकी कर वीडियो बनाकर धमकाने वाले एक संगठित गिरोह का सफलतापूर्वक भंडाफोड़ किया है। विशेष जांच दल (SIT) एवं विशेष कार्य बल (STF), भोपाल की संयुक्त एवं समन्वित कार्रवाई में गिरोह के तीन प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। प्रकरण में आरोपी द्वारा फरियादी को व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से फिरौती की मांग की गई तथा भय का वातावरण निर्मित करने हेतु उसके निवास की गुप्त रूप से रेकी कर वीडियो तैयार कर उसे भेजा गया। इस प्रकार की सुनियोजित आपराधिक गतिविधि को गंभीरता से लेते हुए पुलिस द्वारा तकनीकी विश्लेषण, डिजिटल साक्ष्यों के संकलन एवं सतत निगरानी के आधार पर त्वरित कार्रवाई की गई। जांच के दौरान दिनांक 16 अप्रैल 2026 को रेकी कर वीडियो बनाने वाले आरोपी निर्मल तिवारी (निवासी जिला बांदा, उत्तरप्रदेश) को गिरफ्तार किया गया। विस्तृत पूछताछ में यह तथ्य सामने आया कि उक्त आपराधिक कृत्य के लिए उसे गिरोह के मुख्य आरोपी आनंद मिश्रा (निवासी जिला बांदा, उत्तरप्रदेश) द्वारा आर्थिक सहायता प्रदान की गई तथा पूरी योजना के संबंध में निर्देशित किया गया था। निर्मल तिवारी की गिरफ्तारी के उपरांत मुख्य आरोपी आनंद मिश्रा गिरफ्तारी से बचने के उद्देश्य से नेपाल भागने की फिराक में था, जिसे एसआईटी एवं एसटीएफ की टीम द्वारा त्वरित एवं सटीक कार्रवाई करते हुए दिनांक 20 अप्रैल 2026 को गिरफ्तार कर लिया गया। प्रकरण में एक अन्य आरोपी जे.पी. डारा (निवासी जिला बीकानेर, राजस्थान) की भूमिका भी महत्वपूर्ण पाई गई, जो गिरोह के सदस्यों को समय-समय पर अपराध के क्रियान्वयन हेतु आवश्यक संसाधन एवं वित्तीय सहायता उपलब्ध कराता था। उक्त आरोपी को भी गिरफ्तार कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है, जिससे गिरोह के अन्य नेटवर्क एवं गतिविधियों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होने की संभावना है। यह उल्लेखनीय कार्रवाई अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक डी. श्रीनिवास वर्मा, उप पुलिस महानिरीक्षक राहुल कुमार लोढ़ा, पुलिस अधीक्षक एसटीएफ भोपाल राजेश सिंह भदौरिया, पुलिस अधीक्षक एसटीएफ नवीन कुमार चौधरी तथा पुलिस अधीक्षक एटीएस वैभव श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में संपन्न की गई। कार्रवाई में उप पुलिस अधीक्षक श्रीमती योगिता साटनकर के नेतृत्व में निरीक्षक आशीष चौधरी, उपनिरीक्षक मनोज यादव, उपनिरीक्षक अमित शर्मा, उपनिरीक्षक सुनील रघुवंशी सहित एसआईटी एवं एसटीएफ के अधिकारी/कर्मचारियों की सक्रिय एवं सराहनीय भूमिका रही। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा संगठित अपराधों के विरुद्ध कठोर, त्वरित एवं तकनीक-आधारित कार्रवाई निरंतर जारी है। आमजन की सुरक्षा एवं विश्वास बनाए रखना पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने समीक्षा बैठक में 31 मई तक नाला-नालियों और ड्रेनेज की सफाई के दिए हैं निर्देश

रायपुर.  नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने वर्षा ऋतु के पहले नगरीय निकायों में नाले व नालियों की सफाई तथा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए आवश्यक व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने संचालनालय से परिपत्र जारी कर सभी निकायों को जलभराव रोकने, बाढ़ की स्थिति में आपदा प्रबंधन तथा बरसात में संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए आवश्यक कार्यवाही करने को कहा है।  उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने विगत 20-21 अप्रैल को नगर निगमों, नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों के कार्यों की समीक्षा के दौरान आगामी 31 मई तक बड़े नाला-नालियों और ड्रेनेज की सफाई के काम पूर्ण करने के साथ ही बरसात में जल भराव रोकने जरूरी उपाय करने के निर्देश दिए थे। बैठक में उन्होंने कहा कि जून के पहले सप्ताह में राज्य स्तरीय टीम निकायों में इसका भौतिक निरीक्षण करेंगी। कार्य संतोषजनक नहीं मिलने पर स्वास्थ्य अधिकारी और इंजीनियर पर कार्रवाई की जाएगी।  नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी नगर निगमों के आयुक्तों तथा नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को जारी परिपत्र में कहा है कि वर्षा ऋतु में बारिश के पानी के निकासी के लिए निर्मित नालियों की समय पूर्व समुचित सफाई न होने तथा पानी निकासी के रास्तों के अवरोधों को दूर नहीं करने के कारण आकस्मिक वर्षा से बाढ़ की स्थिति निर्मित हो जाती है। इन स्थितियों से बचाव के लिए वर्षा ऋतु के पहले सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर लेवें।  विभाग ने इसके लिए शहरों के मुख्य मार्गों के साथ-साथ गलियों व चौराहों की अच्छी साफ-सफाई कराने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने सभी नाले व नालियों की पूर्ण एवं नियमित रूप से अंतिम छोर तक गहराई से साफ-सफाई कराने के साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि नदी या अन्य जलस्रोत किसी भी प्रकार से प्रदूषित न हों। पानी के बहाव में निरंतरता के लिए निर्माणाधीन नाले व नालियों में पानी बहाव के रास्ते में से निर्माण सामग्रियों को हटाने तथा नाले-नालियों में निर्मित कच्चे एवं पक्के अतिक्रमित अवरोधों को हटाने के भी निर्देश दिए गए हैं। नगरीय प्रशासन विभाग ने बरसात के पहले बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित कर आवश्यक अमले, टूल, मशीन आदि के साथ नोडल अधिकारी की नियुक्ति करने को कहा है। विभाग ने बाढ़ नियंत्रण कक्षों के 24 घंटे कार्यरत रहना सुनिश्चित करने के साथ ही इसके दूरभाष नम्बर आदि का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के भी निर्देश दिए हैं। निचली बस्तियों, बाढ़ संभावित क्षेत्रों व प्रभावितों का चिन्हांकन कर प्रभावितों के लिए सुरक्षित स्थलों को भी चिन्हित करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने बाढ़ की स्थिति में प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है। अन्य क्षेत्रों में भी बाढ़ के दौरान एवं बाढ़ के प्रभाव के समाप्त होने पर संक्रामक बीमारियों की आशंका बनी रहती है। इन स्थितियों में संबंधित विभागों को तत्परता से इसकी सूचना देने को कहा गया है। विभाग ने वर्षा ऋतु के पहले पेड़ों में लगे सभी साइन-बोर्डों, विज्ञापनों, किसी भी प्रकार के अन्य बोर्ड या साइनेज, बिजली वायर, हाईटेंशन लाइन या अन्य सामग्रियों को हटाने के निर्देश सभी निकायों को दिए हैं।

भोपाल हिल्स इनर व्हील क्लब की फेलोशिप मीटिंग सम्पन्न, सेवा और नेतृत्व पर जोर

भोपाल. इनर व्हील क्लब ऑफ भोपाल हिल्स में ऑफिशियल डिस्ट्रिक्ट चेयरमैन (डीसी) विजिट एवं फेलोशिप मीटिंग के रूप में सम्पन्न गया हुआ, जिसमें सेवा, नेतृत्व एवं सामाजिक प्रतिबद्धता की भावना को सशक्त रूप से अभिव्यक्त किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डिस्ट्रिक्ट चेयरमैन विभा सिंह जी रहीं, जिनकी गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष ऊंचाई प्रदान की। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुआ, जिसने पूरे वातावरण को सकारात्मक ऊर्जा एवं आध्यात्मिकता से भर दिया। इस अवसर पर क्लब की प्रेसिडेंट रश्मि गुप्ता जी ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत करते हुए क्लब की गतिविधियों एवं उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। तत्पश्चात सेक्रेटरी काव्या वाधवानी जी, एडिटर पूनम गर्ग जी एवं आईएसओ स्मिता पागनीस जी द्वारा वर्ष भर की गतिविधियों की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण क्लब के प्रथम बुलेटिन “इनर स्पार्क” का विमोचन रहा, जिसका मुख्य अतिथि विभा सिंह जी द्वारा विमोचन किया गया। इस उपलब्धि ने क्लब की रचनात्मकता एवं सक्रियता को एक नई पहचान दी। मुख्य अतिथि विभा सिंह ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में सेवा, मित्रता एवं नेतृत्व के मूल्यों को अपनाने पर जोर दिया तथा क्लब के प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम में विभिन्न इनर व्हील क्लब्स के पदाधिकारियों एवं गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही

FASTag फ्रॉड में सावधानी बरतें, NHAI की चेतावनी: छोटी गलती भी पड़ सकती है महंगी

नई दिल्ली FASTag ऐनुअल पास को लेकर बड़ा फ्रॉड हो रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए नैशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने पब्लिक एडवाइजरी जारी की है। फास्टैग ऐनुअल पास से जुड़ा यह स्कैम फर्जी वेबसाइट्स के जरिए किया जा रहा है। इसमें जालसाज यूजर्स को ऑफिशियल प्लेटफार्म्स जैसे दिखने वाले फर्जी पोर्टल्स पर पेमेंट करने के लिए कहते हैं। चिंता की बात यह है कि ये फर्जी वेबसाइट्स पेड एडवर्टाइजमेंट और सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन की ट्रिक्स से गूगल जैसे सर्च इंजन के रिजल्ट्स में टॉप पर आती हैं। अथॉरिटी ने यूजर्स से फाइनेंशियल लॉस से बचने के लिए FASTag से जुड़ी सर्विसेज के लिए केवल वेरिफाइड चैनल्स पर ही भरोसा करने की सलाह दी है। यूजर्स को नहीं मिलता कोई कन्फर्मेशन इन वेबसाइट्स पर पहुंचने पर यूजर्स से मोबाइल नंबर, वीइकल रेजिस्ट्रेशन इन्फर्मेशन और पेमेंट क्रीडेंशियल्स जैसी सेंसिटिव इन्फर्मेशन को एंटर करने के लिए कहा जाता है। हालांकि, इंटरफेस देखने में असली लगता है, लेकिन पेमेंट स्कैमर्स के अकाउंट में चला जाता है। कई मामलों में यूजर्स को या तो कोई कन्फर्मेशन नहीं मिलता या उन्हें नकली रसीद पकड़ा दी जाती हैं और उनके पास कोई वैलिड FASTag नहीं रह जाता। असली और नकली वेबसाइट्स को पहचान पाना मुश्किल इससे पहले यह चेतावनी गृह मंत्रालय के Indian Cyber Crime Coordination Centre ने जारी की थी। अधिकारियों ने बताया कि कैसे जालसाज नैशनल हाइवे यूजर्स को निशाना बनाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का तेजी से गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। सलाह में इस बात पर जोर दिया गया है कि ये स्कैम अधिक सोफिस्टिकेटेड होते जा रहे हैं, जिससे यूजर्स के लिए पहली नजर में असली और नकली वेबसाइट्स के बीच अंतर कर पाना मुश्किल हो गया है। FASTag धोखाधड़ी से खुद के ऐसे रखें सेफ NHAI ने यूजर्स को ऐसी धोखाधड़ी से सेफ रहने के लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखने की सलाह दी है, जिसमें सबसे पहला FASTag ऐनुअल पास सर्विस का यूज हमेशा Rajmargyatra ऐप जैसे ऑफिशियल सोर्स से करना है। इसके अलावा आप नीचे बताई गई बातों को भी ध्यान में रखें: – ऑनलाइन स्रच करते समय स्पॉन्सर्ड लिंक या अनजान एडवर्टाइजमेंट पर क्लिक करने से बचें। – कोई भी पर्सनल या पेमेंट डीटेल एंटर करने से पहले वेबसाइट URL की दोबारा जांच करें। – OTP, कार्ड डीटेल या लॉगिन क्रिडेंशियल जैसे सेंसिटिव इन्फर्मेशन कभी भी शेयर न करें। – अगर कोई वेबसाइट संदिग्ध लगे या गैर-जरूरी परमिशन मांगे, तो तुरंत उस वेबसाइट को बंद कर दें।