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सरकार ने असमय बारिश से प्रभावित गेहूं पर दी राहत, पूरे प्रदेश में शिथिल मानकों के साथ होगी खरीद

लखनऊ. असमय हुई बारिश से प्रभावित गेहूं की फसल को देखते हुए सरकार ने किसानों को बड़ी राहत दी है। रबी विपणन सत्र 2026-27 के लिए गेहूं की खरीद अब शिथिल मानकों के साथ की जाएगी। इसका उद्देश्य किसानों को नुकसान से बचाना और उन्हें मजबूरी में कम दाम पर फसल बेचने से रोकना है। सरकार के निर्णय के अनुसार, अब प्रदेश में लस्टर लॉस (चमक में कमी) वाले गेहूं की स्वीकार्य सीमा को बढ़ाकर 70 प्रतिशत तक कर दिया गया है। वहीं सिकुड़े और टूटे दाने की सीमा, जो पहले 6 प्रतिशत थी, उसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक कर दिया गया है। इससे बारिश के कारण गुणवत्ता प्रभावित होने के बावजूद किसानों का गेहूं खरीदा जा सकेगा। अलग से भंडारण और राज्य में ही उपयोग शिथिल मानकों के तहत खरीदे गए गेहूं को सामान्य गेहूं से अलग रखा जाएगा और उसका अलग लेखा-जोखा होगा। इस गेहूं का उपयोग केवल उत्तर प्रदेश के भीतर ही किया जाएगा, ताकि गुणवत्ता प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके। भंडारण की जिम्मेदारी राज्य सरकार पर सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस तरह खरीदे गए गेहूं के भंडारण के दौरान यदि गुणवत्ता में कोई गिरावट होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। साथ ही, ऐसे गेहूं के स्टॉक को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित किया जाएगा। इस फैसले से प्रदेश के लाखों किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनकी फसल हाल की बारिश से प्रभावित हुई है। सरकार का यह कदम किसानों के हितों की सुरक्षा और कृषि क्षेत्र को स्थिर बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

एमपी में कर्मचारियों को मिलेगा भत्ता और वेतन वृद्धि, हाईकोर्ट ने सरकार की अपील खारिज की

भोपाल  मध्यप्रदेश में लाखों संविदा व आउटसोर्स कर्मियों के भत्तों व वेतन वृद्धि की राह खुल गई है। कर्मचारियों के नियमितीकरण मामले में मप्र हाईकोर्ट ने सरकार की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने राज्य सरकार की उस अपील पर स्थगन देने से इनकार कर दिया, जिसमें सिंगल बेंच द्वारा संविदा कर्मियों के पक्ष में दिए गए निर्णय को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि यह बड़े वर्ग के भविष्य से जुड़ा मसला है, इसलिए इस पर स्थगन नहीं दिया जाएगा। इसके साथ ही संविदा व आउटसोर्स कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान देने का हाईकोर्ट द्वारा दिया गया आदेश प्रभावी बना रहेगा। इस संबंध में कोर्ट ने सरकार को सिंगल बेंच के निर्णय का पालन करने के निर्देश दिए हैं। सिंगल बेंच ने 9 अप्रेल को कहा था कि 10 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके संविदा कर्मचारियों को सामान्य प्रशासन विभाग की 7 अक्टूबर 2016 की नीति का लाभ दिया जाए हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल धगट की सिंगल बेंच ने 9 अप्रेल को कहा था कि 10 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके संविदा कर्मचारियों को सामान्य प्रशासन विभाग की 7 अक्टूबर 2016 की नीति का लाभ दिया जाए। जिस प्रकार दैनिक वेतन भोगियों को विनियमित किया गया और उन्हें वेतनमान, भत्ते व वार्षिक वेतन वृद्धि दी गई, वही लाभ अब संविदा कर्मियों को भी दिया जाएगा। जबलपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के इस निर्णय के खिलाफ राज्य सरकार ने अपील की थी। अधिवकता ओपी द्विवेदी ने बताया कि कोर्ट ने 9 अप्रेल को उनके मामले में दिए गए निर्णय को उचित ठहराते हुए प्रदेश सरकार की अपील निरस्त कर दी। जबलपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने अपने पुराने आदेश पर स्थगन देने से साफ इंकार कर दिया जिसमें संविदा कर्मचारियों को स्थायी कर्मी के रूप में वर्गीकृत किया गया था। इसी के साथ 5 लाख से ज्यादा संविदा और आउटसोर्स, अंशकालिक कर्मियों को  वार्षिक वेतन वृद्धि के लाभ के लिए रास्ता क्लियर हाईकोर्ट में मप्र सरकार की अपील खारिज हो जाने से मप्र के संविदा कर्मियों को खासी राहत मिली है। इसी के साथ 5 लाख से ज्यादा संविदा और आउटसोर्स, अंशकालिक कर्मियों को वार्षिक वेतन वृद्धि के लाभ के लिए रास्ता क्लियर हुआ है। हालांकि हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सिंगल बेंच के समक्ष नए दस्तावेज पेश करने की छूट दी है लेकिन तब तक संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण और न्यूनतम वेतनमान के संबंध में दिया गया पुराना आदेश प्रभावी रहेगा।

करने की इच्छाशक्ति हो तो लाया जा सकता है व्यापक परिवर्तन : मुख्यमंत्री

लिगेसी वेस्ट का निस्तारण कर बनाए गए ईको पार्क और नौसढ़-मलौनी फोरलेन सड़क जनता को समर्पित किया सीएम ने गोरखपुर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब नीयत साफ हो तो नियति बदलने में देर नहीं लगती है। करने की दृढ़ इच्छाशक्ति हो और नीयत भी उसी के अनुरूप हो तो परिस्थितियां बदलती हुई दिखाई देती हैं। गोरखपुर में नौ वर्षों के अंदर आया विकासपरक परिवर्तन इसका प्रमाण है। सीएम योगी गुरुवार पूर्वाह्न राप्ती नदी के एकला बंधा पर लिगेसी वेस्ट का निस्तारण कर बनाए गए ईको पार्क, नौसढ़-मलौनी फोरलेन सड़क सहित विकास की 1055 करोड़ रुपये की लागत वाली 497 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करने के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने स्वच्छता टूलकिट और कैलेंडर का अनावरण कर स्वच्छ स्कूल अभियान का भी शुभारंभ किया। एकला बंधे पर आयोजित लोकार्पण-शिलान्यास समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ अच्छा करने की इच्छाशक्ति हो तो बहुत कुछ परिवर्तन लाया जा सकता है। उन्होंने एकला बंधा पर ईको पार्क के रूप में हुए नए कायाकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि वाराणसी या लखनऊ की तरफ से गोरखपुर प्रवेश करते ही सबसे पहला मुकाबला कचरे से होता था। बहुत भद्दा और बहुत बुरा लगता था। पर, करने की इच्छाशक्ति से धीरे-धीरे परिवर्तन होता गया। उन्होंने कहा कि आज से 30-35 वर्ष पहले, आज जहां ट्रांसपोर्टनगर बना है, पहले गोरखपुर का सारा कचरा वही डंप होता था। नगर निगम ने उसका समाधान किया तो आज वहां ट्रांसपोर्टनगर है, बेहतरीन मार्केट और गोरखपुर की मंडी है। ट्रांसपोर्टनगर बन जाने के बाद कचरा एकला बंधा पर गिराया जाने लगा। इसका परिणाम हुआ, वायु प्रदूषण, जमीन में जहर, नदी प्रदूषण और भूजल स्तर पर भी प्रभाव। इसके चलते एनजीटी भी जुर्माना लगाती थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि नीयत से नियति को बदला गया और बेहतरीन ईको पार्क तैयार हो गया। गोरखपुर शहर के प्रवेश द्वार पर कचरे को कंचन में बदल दिया नगर निगम ने ईको पार्क के विकास के लिए नगर निगम की पूरी टीम की तारीफ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नगर निगम ने गोरखपुर शहर के प्रवेश द्वार पर कचरे को कंचन में बदलने का काम किया है। 2.26 लाख मीट्रिक टन कचरे का निस्तारण कर बनाया गया ईको पार्क पूरे परिवार के लिए पिकनिक स्पॉट और बेहतरीन पर्यटन स्थल बन गया है। यहां पर बच्चों के खेलने के लिए पार्क है। योग और ध्यान की क्रिया के लिए व्यक्ति यहां आराम से बैठ सकता है। उन्होंने कहा कि यह जो परिवर्तन आया है, वह गोरखपुर के विकास का मजबूत विश्वास और यहां की टीम के दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। गोरखपुर में हुआ हर क्षेत्र में बदलाव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इच्छा शक्ति और साफ नीयत के कारण बीते नौ वर्षों में गोरखपुर में हर क्षेत्र में बदलाव हुआ है। गोरखपुर ने रोड कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य, स्वच्छता, शिक्षा, खेल, उद्योग, रोजगार सहित हरेक क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। पहले जहां खेलने की सुविधा नहीं थी, आज गोरखपुर में कई मिनी स्टेडियम बने हैं। गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में एक इंटरनेशनल स्टेडियम का निर्माण हो रहा है। गोरखपुर में एम्स और बीआरडी मेडिकल कॉलेज चिकित्सा के उत्कृष्ट केंद्र बने हैं। यहां चार विश्वविद्यालय है। गोरखपुर में खाद कारखाना भी चल गया है और पिपराइच में चीनी में मिल भी लग गई है। इतना ही नहीं, दक्षिणांचल सहित जिले में बाढ़ की समस्या का भी तेजी से समाधान हो रहा है। नौसढ़-मलौनी फोरलेन सड़क से और सुगम होगा आवागमन सीएम योगी ने ईको पार्क के सामने से नौसढ़-मलौनी फोरलेन सड़क को नौसढ़ की जाम की समस्या का समाधान करने का माध्यम बताते हुए कहा कि करीब तीन किमी लंबे इस फोरलेन से लखनऊ और वाराणसी मार्ग पर आने जाने के लिए आवागमन और भी सुगम हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर नगर में जहां पहले पानी भरता था, आज वहां बेहतर नालियां है। जहां पहले अंधेरा था, आज वहां एलइडी स्ट्रीट लाइट की रोशनी है। जहां लोगों के सामने पेयजल की समस्या थी, वहां आज शुद्ध पेयजल की उपलब्धता हुई है। उन्होंने कहा कि एक समय था जब बिजली नहीं मिलती थी। अब इस एकला तटबंध पर जो भी बिजली जलेगी, वह सोलर एनर्जी होगी। इसके लिए सोलर पैनल लगाए गए हैं। यह भी नेट जीरो के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में किया गया एक बेहतरीन प्रयास है। यहां पर जो सिटी फॉरेस्ट लगाया गया है, यह अपने आप में पूरे क्षेत्र को अत्यंत हरियाली से युक्त करके प्रदूषण से मुक्त करने में बड़ी भूमिका का निर्वहन करेगा। जहां पहले समस्या थी, आज वहां पर गोरखपुर महानगर ने समाधान दिया है। सेफ और स्मार्ट सिटी को लेकर सभी नगर निगमों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा सीएम योगी ने कहा कि आज जो भी यूपी में आता है, उसको प्रदेश के अंदर कुछ बदलाव देखने को मिलता है। सेफ और स्मार्ट सिटी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन है और इसी के अनुरूप प्रदेश के सभी नगर निगम स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के साथ आगे बढ़ रहे हैं। आज प्रदेश में सीएम ग्रिड के तहत स्मार्ट सड़कें बन रही हैं। सभी वार्डों में ग्रीन बेल्ट एंड मिनी फॉरेस्टेशन के कार्य को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और पार्कों के सुंदरीकरण का कार्य हो रहा है। मलिन बस्तियों का विकास किया जा रहा है। खुली नालियों को बेहतरीन तरीके से ढकने का काम किया जा रहा है। समुचित जल निकासी के प्रबंध किए जा रहे हैं। स्कूली बच्चों के माध्यम से घर-घर पहुंचेगा स्वच्छता का संदेश लोकार्पण-शिलान्यास समारोह के मंच से स्वच्छ स्कूल अभियान का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर को 7 स्टार गार्बेज फ्री सिटी बनाने और स्वच्छ सर्वेक्षण में टॉप 3 में लाने के लिए स्कूली बच्चों के विशेष अभियान की शुरुआत की जा रही है। इसमें शामिल एक लाख से अधिक बच्चों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश घर-घर पहुंचेगा। बच्चों को आरआरआर (रिड्यूस, रियूज, रिसाइकिल) के बारे में बताया जाएगा। वेस्ट टू आर्ट, निबंध और रील्स प्रतियोगिताओं के माध्यम से भी स्वच्छता के संदेश का विस्तार होगा। उन्होंने कहा कि इस अभियान से 2000 से अधिक शिक्षकों और 1000 से ज्यादा अनुभवी अभिभावकों को … Read more

Ambala में BJP का नया समीकरण: पुराने-नए चेहरों का मिश्रण, बाहरी प्रत्याशियों को भी टिकट

अंबाला शहर. लंबे इंतजार के बाद वीरवार सुबह जैसे ही भाजपा ने 20 वार्डों के अपने पार्षद उम्मीदवारों की सूची जारी की, शहर की सियासत में हलचल तेज हो गई। यह सूची सिर्फ नामों का एलान नहीं, बल्कि उस राजनीतिक प्रयोग का खाका है जिसमें वफादारी से ज्यादा विजय क्षमता को तवज्जो दी गई है। इस बार का चुनाव सीधे-सीधे भाजपा बनाम कांग्रेस का मुकाबला जरूर दिख रहा है, लेकिन असल कहानी इससे कहीं ज्यादा पेचीदा है। वजह टिकट वितरण में पुराने चेहरों की वापसी, विपक्ष से आए नेताओं को मौका और नए चेहरों पर जोखिम भरा भरोसा। भाजपा की सूची में जिन्हें उम्मीदवार बनाया गया है उनमें 11 ने पिछला चुनाव लड़ा था। इनमें से दो हार गए थे। 9 जितने वालों में एक कांग्रेस और एक हरियाणा जनचेतना पार्टी जोकि भाजपा में विलय हो गई और शेष 7 भाजपाई ही थे। अब जब भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतार दिए हैं, तो सियासत का फोकस टिकट से हटकर टक्कर पर आ गया है। हर वार्ड में समीकरण अलग हैं कहीं जातीय गणित, कहीं व्यक्तिगत पकड़, तो कहीं विकास के मुद्दे चुनाव की दिशा तय करेंगे। इस बार का चुनाव एक तरह से हाइब्रिड माडल बन गया है जहां पुराने नेता, नए चेहरे और दल-बदल की राजनीति एक साथ मैदान में है। पुराने सिपाहियों पर भरोसा, लेकिन पूरी तरह नहीं…. भाजपा ने पिछले चुनाव में जीत दर्ज करने सातों चेहरों को दोबारा मैदान में उतारकर यह संकेत दिया है कि पार्टी अपने विनिंग काम्बिनेशन को पूरी तरह छोड़ने के मूड में नहीं है। मन्नी आनंद, अर्चना छिब्बर, मोनिका मल, मीना ढिंगरा, शोभा पूनिया, हितेष जैन और प्रीति सूद के पति दिनेश सूद, जैसे नाम फिर से टिकट पाकर यह साबित करते हैं कि पार्टी को अपने पुराने प्रदर्शन पर भरोसा है। लेकिन दिलचस्प यह है कि दो जीतने वाले चेहरों को किनारे कर नए समीकरण बनाए गए यहीं से राजनीति का असली खेल शुरू होता है। दल-बदलुओं पर दांव या मजबूरी… इस सूची का सबसे बड़ा संदेश है दल बदलने वालों के लिए भाजपा के दरवाजे खुले हैं। कांग्रेस से आए राजेश मेहता, हरियाणा जनचेतना और हरियाणा डेमोक्रेटिक मोर्चों से जुड़े चेहरे, अब भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। यह रणनीति साफ करती है कि भाजपा इस बार वोट बैंक इंपोर्ट करने की कोशिश कर रही है।यानी जहां संगठन कमजोर है, वहां विपक्ष के मजबूत चेहरों को शामिल कर सीधे मुकाबले को अपने पक्ष में मोड़ने की तैयारी है। दोधारी तलवार, पुरानों को टिकट ने मिलने से बेचैनी लेकिन भाजपा का यह दांव दोधारी तलवार भी है स्थानीय कार्यकर्ताओं में असंतोष और बगावत का खतरा भी उतना ही बड़ा है। पांच पूर्व पार्षदों को टिकट नहीं मिली। इनमें से एक ने तो खुद नामांकन नहीं भरा था, एक ने नामांकन भरा था लेकिन चुनाव नहीं लड़ने की बात भी खुद ही कह दी थी। तीन ऐसे हैं जिन्होंने टिकट मांगी थी लेकिन नहीं मिली। इनमें से एक भाजपा का सबसे पुराना चेहरा भी शामिल है जबकि दो चेहरे हरियाणा जनचेतना से चुनाव जीतने वाले पूर्व पार्षद हैं। लेकिन इनके बदले भाजपा ने इसी पार्टी से जुड़े बाद और अब भाजपा का हिस्सा बने दो अन्य उम्मीदवारों को टिकट देकर संतुलन भी साधने का काम किया है। परिवारवाद की सॉफ्ट एंट्री सूची में कुछ ऐसे नाम भी हैं जो सीधे तौर पर नहीं, लेकिन रिश्तों के जरिए राजनीति में उतर रहे हैं। शिवानी सूद और दिनेश सूद, गुरप्रीत साहनी जैसे उदाहरण बताते हैं कि पार्टी अब फैमिली कनेक्शन को भी चुनावी पूंजी मान रही है। यह ट्रेंड बताता है कि स्थानीय पहचान और नेटवर्क को प्राथमिकता दी जा रही है, चाहे उम्मीदवार खुद पहली बार मैदान में क्यों न हो। गुटबाजी की झलक भी साफ टिकट वितरण में अलग-अलग गुटों का संतुलन भी नजर आता है। कार्तिकेय शर्मा गुट से जुड़े दो उम्मीदवारों को टिकट मिलना इस बात का संकेत है कि पार्टी ने अंदरूनी समीकरणों को साधने की कोशिश की है। यह संतुलन फिलहाल कागज पर तो ठीक दिखता है, लेकिन चुनावी मैदान में यही गुटबाजी कभी-कभी सबसे बड़ी कमजोरी बन जाती है। नए चेहरों पर रिस्क फैक्टर करीब 9 नए चेहरों को टिकट देकर भाजपा ने यह भी साफ कर दिया है कि वह सिर्फ पुराने फार्मूले पर निर्भर नहीं रहना चाहती। विशाल राणा, वरखा सहोता, वरिंद्र नाथ, गुरविंद्र सिंह, कविता सैनी, कमल अग्रवाल, बीनू गर्ग, सपना रानी, राजकुमार गुप्ता उम्मीदवारों को मौका देकर पार्टी ने फ्रेश फेस का कार्ड भी खेला है। लेकिन सवाल यह है कि क्या ये नए चेहरे जमीन पर उतनी ही मजबूती दिखा पाएंगे, जितनी उम्मीद पार्टी कर रही है?

बच्चों के लिए सरकार का बड़ा फैसला: Punjab में 2.36 लाख से अधिक को फायदा, करोड़ों रुपये रिलीज

चंडीगढ़. सोशल सिक्योरिटी, महिला और बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि पंजाब सरकार आश्रित और आश्रित बच्चों के कल्याण और सर्वांगीण विकास को खास प्राथमिकता दे रही है। इसी सिलसिले में, पंजाब सरकार ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के दौरान मार्च महीने के लिए 35.50 करोड़ रुपये की फाइनेंशियल मदद जारी की है, जिससे राज्य भर के 2.36 लाख से ज़्यादा ज़रूरतमंद बच्चों को इस स्कीम का सीधा फायदा मिला है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने इस स्कीम को असरदार तरीके से लागू करने के लिए फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के दौरान 432.78 करोड़ रुपये का बजट भी रखा है, ताकि राज्य के ज़्यादा से ज़्यादा आश्रित बच्चों को लगातार फाइनेंशियल मदद दी जा सके। इस बारे में और जानकारी देते हुए डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि इस स्कीम के तहत लाखों आश्रित बच्चों को फायदा मिल रहा है। उन्होंने कहा कि इस फाइनेंशियल मदद का मकसद बच्चों की पढ़ाई, सेहत और पूरा विकास पक्का करना है ताकि कोई भी बच्चा पैसे की तंगी की वजह से अपने भविष्य से दूर न रहे। मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की लीडरशिप में पंजाब सरकार लोगों के हक में और इंसानियत वाली स्कीमें लागू कर रही है। उन्होंने कहा कि आश्रित बच्चों को फाइनेंशियल मदद देना सिर्फ एक भलाई की स्कीम नहीं है, बल्कि इन बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने की दिशा में एक सेंसिटिव और ज़रूरी कदम है। उन्होंने आगे कहा कि इस स्कीम के तहत वे बच्चे कवर होते हैं जिनकी उम्र 21 साल से कम है और जिनके माता-पिता गुज़र चुके हैं, लापता हैं या परिवार की देखभाल करने में शारीरिक या मानसिक रूप से असमर्थ हैं। इस स्कीम के तहत दी जा रही फाइनेंशियल मदद ऐसे बच्चों की पढ़ाई जारी रखने और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने में मदद करती है। डॉ. बलजीत कौर ने दोहराया कि पंजाब सरकार सोशल सिक्योरिटी स्कीमों को और मज़बूत करने और समाज के कमज़ोर तबके के हर बच्चे की देखभाल, सुरक्षा और पूरे विकास को पक्का करने के लिए कमिटेड है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार का मकसद एक सुरक्षित, सबको साथ लेकर चलने वाला और आगे बढ़ने वाला पंजाब बनाना है, जहाँ हर बच्चे को आगे बढ़ने और अपना भविष्य बनाने के बराबर मौके मिलें।

किसी की भी जमीन पर न होने पाए दबंगों का कब्जा : सीएम योगी

गोरखपुर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि जमीन से जुड़े विवादों का निस्तारण विशेष टीम गठित करके किया जाए। जमीन का मालिकाना हक उसके वास्तविक स्वामी के पास ही होना चाहिए। किसी व्यक्ति की जमीन पर यदि दबंगों ने कब्जा किया है तो जमीन को कब्जामुक्त कराने के साथ दोषियों को कानूनी सबक सिखाया जाए। किसी जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले बख्शे न जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि सरकार किसी के भी साथ अन्याय नहीं होने देने और हर व्यक्ति के जीवन में खुशहाली लाने को संकल्पित है। सीएम योगी गुरुवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन में लोगों की समस्याएं सुन रहे थे। मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार के बाहर कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक वह खुद पहुंचे और एक-एक करके सबकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान करीब 200 लोगों से मुलाकात कर उन्होंने सबको आश्वस्त किया कि किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। सबके प्रार्थना पत्रों को संबंधित अधिकारियों को संदर्भित करते हुए त्वरित और संतुष्टिपरक निस्तारण का निर्देश देने के साथ सीएम ने लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार हर पीड़ित की समस्या का समाधान कराने के लिए दृढ़ संकल्पित है। जनता दर्शन में भूमि विवाद के मामलों में उन्होंने अफसरों से कहा कि विशेष टीम लगाकर ऐसे मामलों को शीघ्रता से निस्तारित किया जाए। मुख्यमंत्री के समक्ष जनता दर्शन में कई लोग इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लेकर पहुंचे थे। सीएम योगी ने उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार इलाज के लिए भरपूर मदद करेगी। उनके प्रार्थना पत्रों को अधिकारियों को हस्तगत करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इलाज से जुड़ी इस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूर्ण करा कर शासन में उपलब्ध कराया जाए। पुलिस से जुड़े मामलों को उन्होंने पूरी पारदर्शिता व निष्पक्षता के साथ निस्तारित करने का निर्देश देते हुए कहा कि किसी के साथ भी अन्याय नहीं होना चाहिए। हर पीड़ित के साथ संवेदनशील व्यवहार अपनाते हुए उसकी मदद की जाए।

एनएमडीसी के शीर्ष नेतृत्व ने दंतेवाड़ा के पंचायत प्रमुखों से मुलाकात की, जल, बिजली और सड़कों पर कार्रवाई का दिलाया भरोसा

छत्तीसगढ़   समावेशी विकास की दिशा में एक सक्रिय कदम के रूप में, एनएमडीसी लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक श्री अमिताभ मुखर्जी ने वरिष्ठ नेतृत्व के साथ दंतेवाड़ा में एनएमडीसी की परियोजनाओं के आसपास के गांवों के पंचायत प्रमुखों के साथ एक बैठक की। बातचीत में जमीनी स्तर की समस्याओं को दूर करने और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया। गुमीयापाल, समालवार, कालेपाल, चोलनार, कदम्पाल, हिरोली, बेनपाल, कोडेनार, मदकामिरस और कुट्रेम गांवों सहित एक दर्जन से अधिक सरपंचों और उनके प्रतिनिधियों ने पेयजल, सड़क संपर्क, स्वास्थ्य देखभाल, स्ट्रीट लाइटिंग, खेल सुविधाओं और समग्र ग्रामीण बुनियादी ढांचे से संबंधित रोजमर्रा की चुनौतियों के बारे में बात की। बैठक में श्री कृष्ण कुमार ठाकुर, निदेशक (कार्मिक) के साथ-साथ परियोजना के वरिष्ठ अधिकारी के. श्रीधर कोडाली, मुख्य महाप्रबंधक (खनन), बचेली कॉम्प्लेक्स और श्री रबीन्द्र नारायण, अधिशासी निदेशक, किरंदुल कॉम्प्लेक्स शामिल हुए।सभा को संबोधित करते हुए सीएमडी ने इस बात पर बल दिया कि एनएमडीसी न केवल एक प्रमुख खनन संगठन बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र के एक जिम्मेदार उद्यम की भी भूमिका निभा रहा है जो क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने को समृद्ध करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कंपनी की ताकत उन समुदायों के विश्वास में निहित है जिनकी वह सेवा करती है, और उनकी चिंताएं एनएमडीसी के कार्यों का मार्गदर्शन करती हैं। साथ ही, समुदायों की प्रगति एनएमडीसी की  सफलता को परिभाषित करती है। उन्होंने कहा, "हम इन गांवों के साथ मिलकर काम करेंगे ताकि उन्हें आत्मनिर्भर बस्तियों में बदला जा सके जो विकसित भारत की भावना को दर्शाती हैं।“ एनएमडीसी की बैलाडीला खदानों के आस-पास के ग्रामीणों ने बेहतर पानी, सड़कों और स्वास्थ्य देखभाल जैसी सुविधाओं पर हुई चर्चा पर प्रसन्नता व्यक्त की। स्थानीय पंचायत के एक प्रतिनिधि ने कहा, "वरिष्ठ निदेशकों ने हमसे आमने-सामने बातचीत की और वास्तव में हमारी परेशानियों को सुना।“ कंपनी के वरिष्ठ निदेशकों की इस प्रत्यक्ष पहुंच ने ठोस बदलाव के लिए नई उम्मीद जगाई है। श्री कृष्ण कुमार ठाकुर, निदेशक (कार्मिक) ने आश्वासन दिया कि एनएमडीसी स्थानीय समुदायों के साथ निरंतर संवाद करता रहेगा और इस बातचीत में साझा की गई समस्याओं से आगामी विकास पहलों को दिशा मिलेगी। बैलाडीला में 1968 में परिचालन शुरू करने के बाद से, एनएमडीसी ने अपने बचेली और किरंदुल परिसरों के माध्यम से औद्योगिक विकास और क्षेत्रीय प्रगति दोनों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन वर्षों में कंपनी दंतेवाड़ा में आर्थिक और बुनियादी ढांचे के विकास के उत्प्रेरक के रूप में उभरी है। भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक के रूप में एनएमडीसी का दंतेवाड़ा में 68 वर्षों से गहन विश्वास सहज रूप से पनपा है। एनएमडीसी ने पेयजल परियोजनाएं, सड़कें, खेल के मैदान, क्लीनिक जैसे बड़े बदलाव किए हैं। आज जमीनी स्तर पर हुई बातचीत और आदिवासियों की मूलभूत समस्याओं के आलोक में कमियों को दूर करते हुए इन कार्यों को और आगे बढ़ाया जाएगा।

प्रशासनिक एक्शन: राजस्व विभाग में 106 पटवारियों का ट्रांसफर, लंबे समय से एक ही जगह थे तैनात

सूरजपुर. जिले के राजस्व विभाग में बड़ा फेरबदल करते हुए 106 पटवारियों का एक साथ तबादला किया गया है। जानकारी के अनुसार, कई वर्षों से एक ही ब्लॉक और तहसीलों में पदस्थ पटवारियों को अब अन्य ब्लॉकों में भेजा गया है। लंबे समय से जमे कर्मचारियों को हटाकर प्रशासन ने पारदर्शिता और कार्यप्रणाली में सुधार की दिशा में यह कदम उठाया है। बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में राजस्व विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों पर एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) की बढ़ती कार्रवाई को देखते हुए यह सख्त फैसला लिया गया है। कलेक्टर एस. जयवर्धन के निर्देश पर जारी इस तबादला सूची को राजस्व विभाग में ऐतिहासिक माना जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि इस कदम से कार्यप्रणाली में सुधार आएगा और भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगेगा। ACB की कार्रवाई से मचा था हड़कंप प्रतापपुर तहसील में तैनात पटवारी सौरभ गोस्वामी को ACB ने 25 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था. शिकायत सामने आने के बाद ACB ने पहले सत्यापन किया और फिर ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया. आरोप है कि पटवारी ने नामांतरण और नौकरी से जुड़े प्रतिवेदन के बदले घूस की मांग की थी. इस कार्रवाई ने एक बार फिर जिले के राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में ला खड़ा किया. अगले ही दिन बड़े पैमाने पर तबादले ACB की कार्रवाई के महज एक दिन बाद कलेक्टर एस. जयवर्धन ने राजस्व विभाग में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी करते हुए 106 पटवारियों और 9 राजस्व निरीक्षकों (RI) के तबादले का आदेश जारी कर दिया. एक साथ इतनी बड़ी संख्या में तबादला सूची जारी होना अपने आप में असामान्य माना जा रहा है. आदेश जारी होते ही यह सवाल उठने लगे कि क्या यह महज संयोग है या फिर भ्रष्टाचार के बाद उठाया गया त्वरित प्रशासनिक कदम.

नितिन नवीन का यूपी विधानसभा चुनाव पर बड़ा बयान: ‘योगी आदित्यनाथ ही होंगे पार्टी के चेहरे’

लखनऊ / नई दिल्ली उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसे लेकर अभी से ही सियासत गर्मा गई है. सपा ने पश्चिमी यूपी के दादरी से मिशन-2027 का आगाज किया तो बीजेपी ने भी अपने पत्ते खोल दिए हैं. बीजेपी ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपना चेहरा तय कर लिया है, जिसके अगुवाई में चुनाव लड़ने की प्लानिंग की है. बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने यूपी चुनाव को लेकर बड़ा बयान दिया है।  बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने एक हिंदी न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में साफ-साफ शब्दों में कहा कि देखिए योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री हैं. उनके नेतृत्व सरकार चल रही है. ऐसे में हम निश्चित रूप से वही चेहरा होंगे।  नितिन नवीन ने सीएम योगी आदित्यनाथ के नाम पर मुहर लगा दी है और उनके ही चेहरे पर बीजेपी ने 2027 के विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है. यूपी में सत्ता की हैट्रिक लगने की उम्मीद नितिन नवीन ने जतायी है।  सीएम योगी के चेहरे पर बीजेपी लड़ेगी चुनाव बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन से इंटरव्यू में पूछा गया कि क्या यूपी और उत्तराखंड में सीएम योगी और सीएम धामी ही चेहरा होंगे? इसके सवाल के जवाब में नितिन नवीन ने कहा कि देखिए वे हमारे मुख्यमंत्री हैं और उनके नेतृत्व में सरकार चला रहे हैं. तो निश्चित रूप से चेहरे वही होंगे.' इसके साथ ही यूपी के मुद्दे पर जवाब देते हुए कहा कि पहले जिस यूपी को वसूली और अपराध के लिए जाना जाता था, उसी यूपी को आज बेहतर कानून व्यवस्था और एक्सप्रेसवे के लिए जाना जाता है।  उत्तर प्रदेश के संबंध में पूछे गए सवाल के जवाब में नितिन नवीन ने कहा, 'देखिए उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री जी और मुख्यमंत्री जी जिस प्रकार से उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहे हैं. एक समय जिस उत्तर प्रदेश को अपराध के लिए जाना जाता था, वसूली के लिए जाना जाता था. कास्ट के आधार पर भ्रमित किया जाता था. आज उसी उत्तर प्रदेश का विकास के लिए जाना जा रहा है, एक्सप्रेसवे के लिए जाना जा रहा है. लॉ एंड ऑर्डर के लिए जाना जा रहा है।  योगी के यूएसपी से बीजेपी की लगेगी हैट्रिक उन्होंन् कहा कि निश्ति रूप से आप आवाम की जिन चीजों की पहली आवश्यकता होती है,गुड गवर्नेंस, डेवलपमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों के जैसे काम कर रहा है. तो आम जनमानस इसको देखकर वोट करता है. अगर हमने गरीब की चिंता की. चाहे वो प्रधानमंत्री अन्न योजना से लेकर पूरी तरह से सरकार की योजनाओं को एकदम नीचे तक क्रियानवन किया. वहीं हमने इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ भी दिखाया. हम इन्वेस्टमेंट भी उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर ला रहे हैं।  नितिन नवीन ने कहा कि यूपी में लॉ एंड ऑर्डर का जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यूएसपी है, वो भी जमीन पर दिख रहा है. तो मैं मानता हूं कि आज उत्तर प्रदेश के कई शहर विकसित शहर के रूप में दिख रहे हैं. तो ये सब चीजें हमारे लिए स्पष्ट रूप से हमारे तीसरे सरकार बनाने के लिए, हैट्रिक लगाने के लिए काफी है।  

भारत करेगा ₹75,272 करोड़ की बड़ी डिफेंस डील, जर्मनी से आएगी दुनिया की सबसे साइलेंट सबमरीन टेक्नोलॉजी

नई दिल्ली/बर्लिन भारत और जर्मनी के बीच रक्षा क्षेत्र में एक बहुत बड़ी डील होने जा रही है. यह डील 8 अरब डॉलर (करीब 75,272 करोड़ रुपये) की है और अगले 90 दिनों के अंदर इस पर फाइनल मुहर लग सकती है. जर्मन रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने बुधवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ बातचीत के बाद इसकी जानकारी दी है. इस प्रोजेक्ट के तहत भारत में छह एडवांस सबमरीन बनाई जाएंगी. भारत सरकार वर्तमान में इस एग्रीमेंट को अंतिम रूप देने के लिए जरूरी कदम उठा रही है. राजनाथ सिंह इस समय जर्मनी की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं।  भारत और जर्मनी की सबसे बड़ी डिफेंस डील क्या है? भारत और जर्मनी के बीच होने वाला यह समझौता डिफेंस सेक्टर में एक नया इतिहास रचने जा रहा है. 8 अरब डॉलर यानी करीब 75 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की यह डील सबमरीन के निर्माण से जुड़ी है. जर्मन रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने कील शहर में राजनाथ सिंह से मुलाकात के बाद भरोसा जताया कि अगले तीन महीनों में इस पर हस्ताक्षर हो जाएंगे. यह पहली बार होगा जब जर्मनी अपनी सबमरीन प्रोडक्शन टेक्नोलॉजी किसी गैर-यूरोपीय देश को ट्रांसफर करेगा. इस डील के लिए जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच पहले ही चर्चा हो चुकी है।  भारतीय नौसेना की ताकत कैसे बढ़ेगी? इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत कुल छह सबमरीन का निर्माण भारत में ही किया जाएगा. इसके लिए जर्मनी की दिग्गज कंपनी थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) और भारत की सरकारी कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड साथ मिलकर काम करेंगी. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने खुद कील में स्थित TKMS की शिपयार्ड फैसिलिटी का दौरा किया. वहां उन्होंने टाइप 212 क्लास की सबमरीन की वर्किंग और उसकी क्षमताओं का जायजा लिया. यह सबमरीन अपनी साइलेंट ऑपरेटिंग क्षमता और मारक क्षमता के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. इनके आने से भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत कई गुना बढ़ जाएगी।  डिफेंस रोडमैप से दोनों देशों को क्या मिलेगा? सिर्फ सबमरीन ही नहीं, बल्कि दोनों देशों ने डिफेंस इंडस्ट्रियल कोऑपरेशन रोडमैप पर भी साइन किए हैं. इस रोडमैप का मुख्य उद्देश्य डिफेंस इक्विपमेंट का साथ मिलकर विकास और प्रोडक्शन करना है. भारत और जर्मनी अब हाई-टेक टेक्नोलॉजी पर मिलकर काम करेंगे. इसमें संयुक्त ट्रेनिंग और कैपेसिटी बिल्डिंग जैसे अहम हिस्से भी शामिल हैं. इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन की ट्रेनिंग के लिए भी एक समझौता हुआ है. राजनाथ सिंह ने बर्लिन में पिस्टोरियस के साथ क्षेत्रीय और ग्लोबल सुरक्षा चुनौतियों पर भी विस्तार से चर्चा की है।  क्या यह डील चीन और पाकिस्तान के लिए चुनौती है? हिंद महासागर में बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए भारत के लिए अपनी अंडरवाटर ताकत बढ़ाना बहुत जरूरी है. वर्तमान में भारत की सबमरीन फ्लीट को अपडेट करने की जरूरत है. जर्मनी के साथ यह डील इसी कमी को पूरा करेगी. यह समझौता न केवल भारत की सुरक्षा को पुख्ता करेगा, बल्कि डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में ‘मेक इन इंडिया’ को भी बढ़ावा देगा. दोनों देशों ने सैन्य संबंधों को अपनी रणनीतिक साझेदारी का मुख्य आधार बताया है. इससे भविष्य में भारत की निर्भरता अन्य देशों से कम होगी और अपनी टेक्नोलॉजी विकसित करने में मदद मिलेगी।