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कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक ने गुरदासपुर अनाज मंडी में गेहूं खरीद के इंतज़ामों का निरीक्षण किया

गुरदासपुर पंजाब के फ़ूड और सिविल सप्लाई मंत्री लाल चंद कटारूचक ने आज गुरदासपुर अनाज मंडी का दौरा किया और गेहूं खरीद प्रोसेस और इंतज़ामों का जायज़ा लिया। इस मौके पर उनके साथ लोकल एडमिनिस्ट्रेटिव अफ़सर और हलका इंचार्ज भी मौजूद थे। रिपोर्टर्स से बात करते हुए, मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की लीडरशिप में पंजाब सरकार गेहूं का एक-एक दाना खरीदने के लिए पूरी तरह कमिटेड है। उन्होंने कहा कि अब तक पूरे राज्य में 57 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है और किसानों को 7109 करोड़ रुपये का पेमेंट किया जा चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि कुल 61 लाख मीट्रिक टन फ़सल मंडियों में पहुँच चुकी है। मंत्री ने कहा कि गेहूं की आवक लगातार बढ़ रही है और हर दिन बड़ी मात्रा में फ़सल मंडियों में आ रही है। उन्होंने कहा कि कल एक ही दिन में रिकॉर्ड 12 लाख मीट्रिक टन गेहूं मंडियों में पहुँचा था। उन्होंने कहा कि किसानों की सुविधा के लिए मंडियों में सुचारू व्यवस्था की गई है और किसी को भी किसी तरह की परेशानी नहीं आने दी जाएगी। कटारूचक ने कहा कि इस सीजन के लिए राज्य में 122 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने मंडी में मौजूद किसानों और आढ़तियों से बातचीत की और उनकी समस्याएं भी सुनीं। मंडी में आए गांव बाहिया के किसान हरजिंदर सिंह ने कहा कि वह सुबह अपना गेहूं लेकर आए थे और उसी दिन उनकी फसल खरीद ली गई। उन्होंने कहा कि 24 घंटे के अंदर पेमेंट मिल रही है, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिली है। दौरे के दौरान मंत्री ने मंडियों में बारदाने की उपलब्धता, लिफ्टिंग प्रक्रिया, सफाई और पीने के पानी और अन्य सुविधाओं का भी जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को लिफ्टिंग के काम में तेजी लाने और किसानों को किसी भी तरह की परेशानी न होने देने का आदेश दिया। उल्लेखनीय है कि गुरदासपुर जिले में 21 अप्रैल तक 1.69 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की जा चुकी है और किसानों को 267.60 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।

कुर्बानी विरोधी कानून पर बड़ा सम्मान: Kultar Singh Sandhwan को मिला सम्मान, Punjab में निभाई अहम भूमिका

चंडीगढ़. गुरुद्वारा साहिब पातशाही दसवीं कोटकपूरा के निहंग सिंहों के मुख्य सेवक बाबा कुलवंत सिंह चाणक्य ने आज कोटकपूरा में पंजाब विधानसभा के स्पीकर स. कुलतार सिंह संधवान को सम्मानित किया और कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान और पंजाब विधानसभा स्पीकर स. कुलतार सिंह संधवान की सच्ची कोशिशों से जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (अमेंडमेंट) बिल 2026 लागू हुआ है, जिससे पूरी दुनिया में संगत खुश है। सुखमनी साहिब के पाठ, नितनेम बानियों, अरदास और पवित्र हुक्मनामा के बाद बाबा कुलवंत सिंह चाणक्य ने कहा कि स्पीकर संधवान की शख्सियत और विनम्र स्वभाव ने सभी को बहुत प्रभावित किया है। स्पीकर संधवान ने जत्थेदार बाबा कुलवंत सिंह चाणक्य समेत पूरी संगत का धन्यवाद किया और कहा कि यह सब संगत के सहयोग और गुरु जी के आशीर्वाद से ही मुमकिन हुआ है। उन्होंने दावा किया कि अलग-अलग पुरानी पार्टियों के नेता और असरदार संगठनों के नुमाइंदे सत्ता में होने के बाद भी यह काम नहीं कर पाए। अब वे बेबुनियाद और गैर-ज़रूरी बयान देकर समाज में कन्फ्यूजन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। स्पीकर संधवान ने कहा कि इस सख्त सज़ा वाले कानून के लागू होने से अब कोई भी इंसान जघन्य अपराध करने से बचेगा। इस मौके पर शहर के अलग-अलग इलाकों से इकट्ठा हुई संगत ने इस अच्छे काम के लिए पंजाब सरकार, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और स्पीकर सरदार कुलतार सिंह संधवान का धन्यवाद किया।

Atal Pension Yojana में बिहारी महिलाओं का जलवा: 46 लाख ने कराया रजिस्ट्रेशन

पटना. अटल पेंशन योजना (एपीवाई) में निम्न आय-वर्ग के लोगों की अभिरुचि इस कदर है कि इसकी अवधि वित्तीय वर्ष 2030-2031 तक बढ़ाई जा चुकी है। बिहार ने इस योजना को सिर-आंखों पर लिया और अब तक 80 लाख लोग इसमें पंजीकरण करा चुके हैं। पंजीकृत लोगों में 46 लाख से अधिक महिलाएं हैं। इस संख्या के साथ एपीवाई में बिहार देश में दूसरे स्थान पर है। इससे आगे एकमात्र उत्तर प्रदेश है, जिसकी जनसंख्या बिहार से लगभग दोगुनी अधिक है। एपीवाई से निम्न आय-वर्ग और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए वृद्धावस्था में निश्चित आय का उपाय किया गया है। सरकार मानती है कि इसके जरिये एक पेंशन आधारित समाज बनाया जा सकता है, जो कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्यों को पूरा करने में सहायक होगा। विकसित भारत की तर्ज पर बिहार भी विकास की अवधारणा रखता है और उसके लिए एपीवाई जैसे छोटे-छोटे प्रयासों को बेहद कारगर माना जा रहा है। बहरहाल बिहार में एपीवाई के अंतर्गत हुए पंजीकरण में महिलाओं की संख्या 58 प्रतिशत के लगभग है। इससे स्पष्ट है कि राज्य में महिला सशक्तीकरण की पहल नियोजित तरीके से आगे बढ़ रही है। उल्लेखनीय है कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिक, जैसे कि किसान, सब्जी विक्रेता, ऑटो चालक और छोटे व्यवसायी इस योजना के मुख्य ग्राहक हैं। अगले पांच वर्षों के लिए अवधि-विस्तार के बाद इसमें और पंजीकरण की आशा है। पेंशन लाभ 2035 से प्राप्त होने की आशा है। पेंशन और आश्रित के लिए प्रविधान एपीवाई की शुरुआत नौ मई, 2015 को हुई थी। इसके अंतर्गत 60 वर्ष की आयु के बाद एक से पांच हजार रुपये न्यूनतम पेंशन की गारंटी है। पेंशन की यह राशि लाभार्थी द्वारा किए गए निवेश की मात्रा पर निर्भर करती है। मृत्यु या गंभीर बीमारी की स्थिति में समय पूर्व निकासी हो सकती है। एक अक्टूबर, 2022 से आयकर-दाताओं को इस योजना से बाहर कर दिया गया। इसके अलावा पंजीकृत व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात पति/पत्नी को भी पेंशन का प्रविधान है। दोनों की मृत्यु के बाद उत्तराधिकारी यानी नामिनी को जमा राशि वापस मिल जाती है। एपीवाई के अंतर्गत पंजीकरण एपीवाई (APY) के अंतर्गत पंजीकरण क्षेत्र               कुल संख्या     महिलाएं बिहार     79,69,799     46,06,393 भारत     8,71,74,743     4,25,13,682

परिवारिक विवाद बढ़ा: Jalandhar में रितु ने बहनों और जीजा पर लगाए गंभीर आरोप, पुलिस जांच शुरू

जालंधर. मशहूर सूफी गायक गुलशन मीर की सेहत और उनके इलाज के लिए जुटाए जा रहे फंड को लेकर नूरां परिवार में विवाद हो गया है। रितु नूरां ने अपनी बहनों (नूरां सिस्टर्स) के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। निजी किडनी अस्पताल में गुलशन मीर उपचार के लिए भर्ती हैं। उनका किडनी ट्रांसप्लांट होना है। इसके लिए रितु नूरां ने हाल ही में इंटरनेट मीडिया पर एक वीडियो शेयर और क्यूआर शेयर कर लोगों से आर्थिक मदद की अपील की थी। रितु का कहना है कि उनके पैसे इलाज पर खर्च हो चुके है। उनकी इस अपील के बाद कई पंजाबी गायक मदद के लिए आगे भी आए हैं। इसी बीच रितु नूरां और उनकी बहनों (नूरां सिस्टर्स) के बीच तल्खी बढ़ गई है। नूरां सिस्टर्स ने लोगों को स्कैनर भेजकर मदद मांगने पर आपत्ति जाहिर की। इसके बाद रितु नूरां शिकायत लेकर थाने पहुंच गईं। उसका आरोप है कि बहनें पिछले कई सालों से नाम और पैसा कमा रही हैं, लेकिन इस मुश्किल घड़ी में पिता का साथ नहीं दे रही हैं। उनकी बहनों की पहचान भी उनके पिता की बदौलत ही है। वह काफी समय से शांत थीं, लेकिन अब उनके भाई साहिल मीर को फोन करके परेशान किया जा रहा है। इसको लेकर ज्योति नूरा के पति उस्मान के खिलाफ पुलिस को शिकायत दी है। आरोप है कि साहिल मीर के खिलाफ इंटरनेट मीडिया पर कुछ पोस्ट डाली गई है। रितु का कहना है कि किसी की पर्सनल लाइफ को इस तरह सार्वजनिक करना गलत है। रितु नूरां के मुताबिक, वह पिछले चार महीनों से अपनी बहनों को फोन कर रही हैं और पिता का हाल जानने के लिए बुला रही हैं। हालांकि, उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। वहीं, मां ने कहा कि थाने में पुलिस को दी शिकायत में कहा कि अगर उसके बेटे को कुछ हो गया तो दोनों बेटियां और दामाद जिम्मेदार होंगे। मां ने कहा कि बेटी सुल्ताना रात को पिता से मिलने के लिए आई थी। फिलहाल पुलिस ने शिकायत दर्ज कर ली है और जल्द ही दूसरे पक्ष (उस्मान) को पूछताछ के लिए बुला सकती है।

बाल विवाह पर सख्ती: Manendragarh में प्रशासन ने तीन शादियां रुकवाईं, परिवारों को चेतावनी

मनेन्द्रगढ़. जिले में बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ प्रशासन ने एक बार फिर त्वरित कार्रवाई करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर प्राप्त सूचना के आधार पर ग्राम कोडांगी (थाना खड़गवां), ग्राम पंचायत केलुआ एवं ग्राम पंचायत दुगला थाना केल्हारी में होने वाले बाल विवाह को समय रहते रोका गया। सूचना मिलते ही कलेक्टर डी. राहुल वेंकट के निर्देश एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी आदित्य शर्मा के मार्गदर्शन में जिला बाल संरक्षण अधिकारी ने तत्काल संयुक्त टीम का गठन किया। ब्लॉक परियोजना अधिकारी के नेतृत्व में गठित इस टीम में सेक्टर सुपरवाइजर, जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड हेल्पलाइन, थाना केल्हारी एवं थाना खड़गवां का पुलिस बल, विधिक सेवा प्राधिकरण बैकुंठपुर के सदस्य, सरपंच और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता शामिल रहे। बाल विवाह पर जानिए क्या है सजा का प्रावधान टीम ने तीनों स्थानों पर पहुंचकर बाल विवाह की प्रक्रिया को रुकवाया और संबंधित परिवारों को समझाइश दी। अधिकारियों ने मौके पर ही बाल विवाह के दुष्परिणामों और इसके कानूनी पहलुओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक और कानूनी अपराध है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत जानकारी देते हुए बताया गया कि इस प्रकार के विवाह में शामिल किसी भी व्यक्ति जैसे पंडित, पुरोहित, टेंट संचालक, रिश्तेदार या अन्य सहयोगी को 2 वर्ष तक की सजा और 1 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही यह भी बताया गया कि विवाह की वैधानिक आयु बालक के लिए 21 वर्ष और बालिका के लिए 18 वर्ष निर्धारित की गई है। बाल विवाह हाेने पर टोल फ्री नंबर 1098 पर दें सूचना कार्रवाई के दौरान संबंधित प्रकरणों में पंचनामा एवं प्रतिवेदन भी तैयार किया गया। प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे बाल विवाह जैसी कुप्रथा को रोकने में सक्रिय भूमिका निभाएं और ऐसी किसी भी सूचना को तत्काल टोल फ्री नंबर 1098 पर साझा करें। इस त्वरित और प्रभावी कार्रवाई ने न केवल तीन बाल विवाहों को रोककर नाबालिगों के भविष्य को सुरक्षित किया है, बल्कि समाज में एक सशक्त संदेश भी दिया है कि कानून के विरुद्ध किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

‘झालमुड़ी खाई, मिर्ची TMC को लगी…’, पश्चिम बंगाल में बोले पीएम मोदी, तंज कसते हुए

कृष्णानगर  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर में एक जनसभा को संबोधित किया. यहां हुई विजय संकल्प सभा में पीएम मोदी ने टीएमसी सरकार और सीएम ममता बनर्जी पर हमला बोला और उनकी सरकार की नीतियों-नियमों की आलोचना की. जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने चुनावी माहौल पर बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि झालमुड़ी मैंने खाई है, पर मिर्ची टीएमसी को लग रही है।  टीएमसी पर पीएम मोदी का निशाना असल में अभी हाल ही में पीएम मोदी ने पश्चिम बंगाल में झालमुड़ी खाई थी, जो चर्चा का विषय बन गई थी. इसी पर सीएम ममता ने पीएम पर निशाना साधते हुए कहा था कि 'यह कोरा नाटक था, झालमुड़ी की दुकान में माइक लगा दिया, फिर एसपीजी से झालमुड़ी बनवाई ताकि एक ड्रामा रचा जा सके! कभी चुनाव के समय वह गुफा में चले जाते हैं, कभी खुद को चायवाला बताते हैं! उन्होंने 10 रुपये निकालकर झालमुड़ी खाई, जरा सोचिए. वह झालमुड़ी पहले से ही उनके लिए तैयार की गई थी. अगर ऐसा नहीं था, तो दुकान के अंदर कैमरा क्यों लगाया गया था? उनसे पूछिए. सब ड्रामा है!' चार मई को मिठाई भी बंटेगी और झालमुड़ी भी पीएम मोदी ने ऐसी ही बयानों पर हमला बोलते हुए कहा कि चार मई को मिठाई भी बंटेगी और झालमुड़ी भी बांटी जाएगी. पीएम मोदी ने कहा कि, राज्य में पहले चरण की वोटिंग चल रही है और वह सभी मतदाताओं का अभिनंदन करते हैं. प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील की कि इस बार मतदान का नया रिकॉर्ड बनाया जाना चाहिए।  पीएम मोदी ने चुनावी हिंसा के मुद्दे पर भी बात की. उन्होंने कहा कि पिछले 50 वर्षों में यह पहला चुनाव है, जिसमें हिंसा काफी कम देखने को मिली है. उन्होंने इसे चुनाव आयोग की बड़ी सफलता बताया।  अपने भाषण के दौरान पीएम मोदी ने स्थानीय संस्कृति का भी जिक्र किया और ‘झालमुरी’ को लेकर तंज कसते हुए कहा कि 4 मई को बंगाल में बीजेपी की जीत का जश्न मनाया जाएगा, जिसमें मिठाई भी बांटी जाएगी और झालमुरी भी. उन्होंने कहा कि “मैंने सुना है कि झालमुरी ने कुछ लोगों को झन्नाटेदार झटका दिया है. मैंने झालमुरी खाई है, लेकिन ‘झाल’ टीएमसी को लगा है।  प्रधानमंत्री के इस बयान को तृणमूल कांग्रेस पर सीधा हमला माना जा रहा है. रैली के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और पीएम मोदी ने एक बार फिर बंगाल में सत्ता परिवर्तन का भरोसा जताया। 

पंजाब की पॉलिटिक्स में बड़ी हलचल! SAD पुनर सुरजीत ने जारी किया विज़न डॉक्यूमेंट

चंडीगढ़ 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में पॉलिटिकल पार्टियां पूरी तरह एक्टिव हो गई हैं। इसी सिलसिले में आज चंडीगढ़ में शिरोमणि अकाली दल पुनर सुरजीत ने ज्ञानी हरप्रीत सिंह की लीडरशिप में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान शिरोमणि अकाली दल पुनर सुरजीत का विज़न डॉक्यूमेंट जारी किया गया। इस दौरान ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने डॉक्यूमेंट जारी करते हुए इसे पंथ, पंजाब और भविष्य के लिए एक विज़न बताया। इस मौके पर ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि यह डॉक्यूमेंट सरदार इकबाल सिंह झुंडा की लीडरशिप वाली कमेटी और जानकारों की मेहनत से तैयार किया गया है। प्रोफेसर पूरन सिंह के शब्दों में, 'पंजाब वसदा गुरु दे नात ते' टाइटल से जारी इस घोषणा में पंजाब के आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक मुद्दों को एड्रेस किया गया है। ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने साफ किया कि पंजाब से पंथ को नकारा नहीं जा सकता, इसलिए पार्टी पंथिक मुद्दों को प्राथमिकता देगी। पंजाब की मौजूदा आर्थिक हालत पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि राज्य कर्ज के बोझ तले दबा है और मौजूदा सरकार कर्ज मुक्ति के अपने वादे पूरे करने में नाकाम रही है। महिलाओं और युवाओं के लिए आरक्षण युवाओं की हालत पर चिंता जताते हुए ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि पंजाब का युवा दिशाहीन होता जा रहा है। इसी तरह, युवाओं को दिशाहीनता और ड्रग्स से बचाने के लिए पार्टी में 40 परसेंट रिप्रेजेंटेशन देने का फैसला किया गया है। उन्होंने कहा कि युवाओं को सोशल मीडिया से बड़े पैमाने पर जानकारी मिल रही है, जिसमें से ज्यादातर फेक होती है और इससे उनके विचारों पर असर पड़ रहा है। उन्होंने बेरोजगारी और ड्रग्स के बढ़ते असर को भी गंभीर समस्या बताया। उन्होंने कहा कि सरकारें इस मुद्दे को हल करने में नाकाम रही हैं। पार्टी युवाओं को रोजगार के मौके देने और उन्हें सही दिशा में ले जाने के लिए खास प्लान बनाएगी। महिलाओं के अधिकारों के बारे में उन्होंने कहा कि समाज की तरक्की में महिलाओं का अहम योगदान है। उन्होंने कहा कि जहां 33 परसेंट रिजर्वेशन की बात हो रही है, वहीं वे इससे भी ज़्यादा, 35 परसेंट रिजर्वेशन देने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि इस कदम से महिलाओं की भागीदारी और मज़बूत होगी। हेल्थ, एजुकेशन और एनवायरनमेंट ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि घोषणापत्र में हेल्थ और एजुकेशन को राज्य के दो अहम पिलर माना गया है और इन्हें बेहतर बनाने की बात कही गई है। एनवायरनमेंट कंजर्वेशन, खासकर जंगलों का एरिया बढ़ाना और मत्तेवाड़ा जैसे जंगलों की रक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है। सोशल जस्टिस के तहत S. C, S. T, O. B. C. और जनरल कैटेगरी के गरीब तबके के लोगों का जीवन स्तर ऊपर उठाने का वादा किया गया है। ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि यह मैनिफेस्टो आनंदपुर साहिब प्रस्ताव की रोशनी में तैयार किया गया है, जिसमें राज्यों को ज़्यादा अधिकार देने की वकालत की गई है। केंद्र सरकार पर राज्यों की शक्तियां छीनने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि वे केंद्र से जुड़े मुद्दों को हल करने के लिए पक्के इरादे वाले हैं। उन्होंने कहा कि यह मैनिफेस्टो पूरी तरह से 'ओपन' है और पंजाब की बेहतरी के लिए दूसरे सुझाव भी इसमें शामिल किए जाएंगे। माइनॉरिटीज़ के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि देश और पंजाब दोनों में माइनॉरिटी सेक्शन की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा करना पार्टी की ज़िम्मेदारी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी सेक्शन के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा और सभी को बराबर अधिकार मिलेंगे। ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि पार्टी का यह मैनिफेस्टो पंजाब के हर सेक्शन को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा, जिसका मकसद राज्य को आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरण के लिहाज़ से मज़बूत बनाना है। ज्ञानी रघबीर सिंह ने SGPC के रवैये पर उठाए सवाल, श्री दरबार साहिब निवास से सामान ले जाना शुरू किया अमृतपाल सिंह, पंजाबी जागरण, अमृतसर: श्री हरमंदिर साहिब के पूर्व हेड ग्रंथी ज्ञानी रघबीर सिंह ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रशासनिक रवैये पर गंभीर सवाल उठाए हैं और कमेटी पर उन्हें मानसिक रूप से परेशान करने और उनके व्यक्तिगत सम्मान को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया है। ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा कि हाल ही में जब वह अपने श्री दरबार साहिब निवास से अपना सामान शिफ्ट करवा रहे थे, तो गेट पर तैनात सेवादारों ने उनसे लिखित में साइन करवाने के बाद सामान ले जाने दिया। ज्ञानी रघबीर सिंह ने इस कार्रवाई को बेहद बुरा बताया और कहा कि लंबे समय से गुरु घर की सेवा कर रहे सेवादार के निजी सामान की तलाशी लेना बेहद अपमानजनक है। उन्होंने कहा कि किसी भी गैर-कानूनी चीज के शक पर ही तलाशी ली जाती है, लेकिन यहां जानबूझकर नीचा दिखाने की कोशिश की गई है। अपनी रिटायरमेंट के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी दो साल से ज्यादा की सर्विस बाकी थी, लेकिन उन्हें 26 फरवरी को जबरदस्ती रिटायर कर दिया गया, जबकि वह मेडिकल लीव पर थे। उन्होंने कहा कि उनके घर आने-जाने वाले लोगों पर जासूसी की जा रही है और कर्मचारियों द्वारा निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि वह घर खाली करने के लिए तैयार हैं, लेकिन नए घर के रेनोवेशन के कारण उन्होंने 10-12 दिन और मांगे थे। फंड के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि उन्होंने 36 साल श्री गुरु रामदास जी के घर की सेवा की है, अगर कमेटी फंड जारी करती है तो ठीक है, वरना वह भरोसे के गुरु हैं। उन्होंने मैनेजमेंट से अपील की कि मैनेजमेंट में नैतिकता और शालीनता बनाए रखी जानी चाहिए। इस बारे में मैनेजर भगवंत सिंह धंगेरा ने कहा कि श्री दरबार साहिब के हर गेट पर सेवक तैनात हैं। कोई भी सामान बाहर ले जाने के लिए गेट पास होना जरूरी है, गेट पर तैनात सेवक ने हमेशा की तरह अपनी ड्यूटी निभाई है। सेवकों को बताया गया है कि सिंह साहिब ज्ञानी रघबीर सिंह जो भी सामान बाहर ले जाते हैं, उसके लिए किसी गेट पास या इंस्पेक्शन की जरूरत नहीं है। अगर सिंह साहब ने पहले ही किसी एडमिनिस्ट्रेटर से संपर्क किया होता तो ऐसा नहीं होता, जब मुझे पता चला तो मैंने तुरंत नौकरों … Read more

इंदौर में 6 हजार से अधिक ई-रिक्शाओं के रजिस्ट्रेशन, जोन के हिसाब से कलर करवा रहे संचालक, नई व्यवस्था लागू

इंदौर  इंदौर में ट्रैफिक पुलिस ने 6 हजार से ज्यादा ई-रिक्शाओं के रजिस्ट्रेशन करा लिए हैं। इन ई-रिक्शाओं का संचालन अलग-अलग जोन में किया जाएगा, जिसके लिए इन पर कलर कराए जा रहे। पिछले दिनों ट्रैफिक पुलिस ने अलग-अलग जोन में अलग-अलग कलर कोड तैयार किया था, जिसके आधार पर इन पर कलर कराए जा रहे हैं, आगामी 15 दिनों में ये व्यवस्था शुरू हो जाएगी। डीसीपी राजेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि शहर को चार जोन में बांटा गया था। जिसमें अलग-अलग कलर कोड की ई-रिक्शाओं का संचालन किया जाएगा। एक महीने ट्रैफिक पुलिस ने संचालकों के साथ बैठक कर यह निर्णय ले लिया था। इसके बाद संचालकों को रिक्शाओं का थाने पर रजिस्ट्रेशन कराने के लिए कहा था। इसके लिए उन्हें समय भी दिया था। उन्होंने बताया कि अब तक 6 हजार से ज्यादा ई-रिक्शाओं के रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं, जिनके नहीं हुए हैं, उनके भी रजिस्ट्रेशन किए जा रहे हैं। कौन सी रिक्शा किस जोन में चलेगी उसके अनुसार उन पर कलर रोड किया जा रहा है, ताकि वह आसानी से पहचान में आ सके। शहर का जोनवार बाटा, कलर कोड भी ई-रिक्शा संचालन को व्यवस्थित करने के लिए शहर को संबंधित ट्रैफिक के 4 जोन के आधार पर 4 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। इसमें जोन 1 में ब्लू, जोन 2 में येलो, जोन 3 में रेड और जोन 4 में व्हाइट कलर कोड की ई-रिक्शाओं का संचालन किया जाएगा। बता दें कि इसके पीछे का उद्देश्य है यह है कि शहर में बेहतर ट्रैफिक व्यवस्था बन सके। जोनवार व्यवस्था होने से संबंधित जोन की ई-रिक्शा उसी जोन में चलेगी। अगर वह दूसरे जोन में संचालित होगी तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। .

विदेश में गूंजा पंजाब का विज़न: भगवंत मान ने NRI समुदाय से किया निवेश का आह्वान

चंडीगढ़.  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान इन दिनों फिनलैंड दौरे पर हैं, जहां उन्होंने प्रवासी पंजाबियों से सीधा संवाद स्थापित कर राज्य के विकास में उनकी भागीदारी का आह्वान किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि दुनियाभर में बसे पंजाबियों के पास अनुभव, संसाधन और तकनीकी समझ है, जो पंजाब की आर्थिक प्रगति को नई गति दे सकती है। मुख्यमंत्री ने प्रवासी समुदाय को संबोधित करते हुए उन्हें राज्य में निवेश और नवाचार से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। पंजाब सरकार उद्योग, कृषि और शिक्षा के क्षेत्रों में नए अवसर पैदा कर रही है, जिसमें प्रवासी पंजाबियों की भूमिका बेहद अहम हो सकती है। उन्होंने विशेष रूप से डेयरी, पशुपालन और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में फिनलैंड के साथ सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। दौरे के दौरान हेलसिंकी स्थित हेलसिंकी यूनिवर्सिटी के साथ शिक्षा, रिसर्च और इनोवेशन के क्षेत्र में साझेदारी की पहल भी की गई। इस सहयोग के तहत छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए संयुक्त रिसर्च प्रोजेक्ट और एक्सचेंज प्रोग्राम शुरू करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे पंजाब के युवाओं को वैश्विक स्तर पर सीखने और आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। इसके अलावा, उन्होंने कृषि और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर भी जोर दिया। अनाज भंडारण और कीट नियंत्रण के लिए पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को लागू करने की दिशा में फिनलैंड के साथ सहयोग की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। उन्होंने “सोलिन प्रोटीन” को मिड-डे मील और आंगनवाड़ी पोषण योजनाओं में शामिल करने पर भी विचार व्यक्त किया, जिससे बच्चों और महिलाओं के पोषण स्तर में सुधार लाया जा सके। दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने फिनलैंड में भारतीय राजदूत से भी मुलाकात की और द्विपक्षीय व्यापार व निवेश को बढ़ाने के मुद्दों पर चर्चा की। यह दौरा पंजाब और फिनलैंड के बीच सहयोग को नई दिशा देने और आर्थिक, शैक्षणिक व तकनीकी संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वहीं, इससे पहले सीएम भगवंत मान ने फिनलैंड में भारत के राजदूत, हेमंत एच. कोटालवार के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बातचीत के दौरान, हमने पंजाब और फिनलैंड के बीच आपसी सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों को तलाशने पर विस्तार से चर्चा की थी।

BJP विधायक समेत 6 लोगों को बंगला खाली करने का नोटिस, विधायक ने CM के पदचिह्नों पर चलने की बात की

उज्जैन  मध्यप्रदेश के उज्जैन में सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में बंगलों से कब्जा हटाने की कार्रवाई शुरू होते ही विवाद गहरा गया है। विवि प्रशासन ने आलोट से बीजेपी विधायक डॉ. चिंतामणि मालवीय सहित 6 लोगों को सरकारी आवास खाली करने के नोटिस थमाए हैं। नोटिस मिलने के बाद बीजेपी विधायक ने आवास को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जिससे सियासत गर्मा गई है। विपक्ष को भी हमला करने का मौका मिल गया है। विवि का अवैध कब्जाधारियों को नोटिस विश्वविद्यालय की हाल ही में हुई कार्यपरिषद (EC) की बैठक में निर्णय लिया गया कि जिन लोगों का यूनिवर्सिटी से कोई संबंध नहीं है, उनसे आवास खाली कराया जाएगा। बताते हैं करीब आधा दर्जन आवासों पर बाहरी लोगों का कब्जा है, जिनमें बीजेपी विधायक, पूर्व एडिशनल एसपी, असिस्टेंट प्रोफेसर, लेक्चरर सहित कई लोग शामिल हैं। बाहरी कब्जों के कारण विश्वविद्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों को आवास नहीं मिल पा रहे हैं। उन्हें परेशानी हो रही है। वर्तमान में 50 से अधिक कर्मचारी आवास के लिए आवेदन कर चुके हैं। प्रशासन अब प्रभाव का इस्तेमाल कर वर्षों से कब्जा जमाए लोगों को हटाने की तैयारी कर रहा है। विधायक ने उठाया गंभीर सवाल आलोट विधायक डॉ. चिंतामणि मालवीय को वर्ष 2009 में विश्वविद्यालय का ई-4 बंगला आवंटित हुआ था, जिसका मासिक किराया 1620 रुपए है। उन्होंने अक्टूबर 2023 में विधानसभा चुनाव से पहले एक ही दिन में 9.09 लाख रुपए जमा कराए थे, हालांकि इसके बाद से किराया जमा नहीं किया। विधायक ने यह भी कहा नोटिस के बाद विधायक चिंतामणि ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिससे सियासत गर्मा गई है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय से उनका कुछ बकाया हिसाब है। उन्होंने चुनाव से पहले करीब 10 लाख रुपए जमा किए थे। उनका दावा है कि 2010 में उनका प्रमोशन होना था, जो 4 साल लंबित रहा, जिससे उनका भुगतान बाकी है। विधायक ने कहा कि वे कई बार विश्वविद्यालय से हिसाब करने का अनुरोध कर चुके हैं और हिसाब होने पर वे आवास खाली कर देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इस विषय में गहराई से जांच होगी तो मामला लंबा हो सकता है। एक महीने में आवास खाली करने का नोटिस विक्रमादित्य विवि के कुलगुरु अर्पण भारद्वाज ने बताया कि कार्यपरिषद के निर्णय के अनुसार विश्वविद्यालय के आवास केवल कर्मचारियों के लिए सुरक्षित रखे जाएंगे। जिन लोगों को नोटिस दिया गया है, उन्हें एक महीने का समय दिया गया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कई कर्मचारी जर्जर भवनों में रहने को मजबूर हैं, जबकि कुछ क्वार्टरों पर बाहरी लोगों का कब्जा है। आवास खाली होने के बाद इन्हें कर्मचारियों को आवंटित किया जाएगा और जर्जर हो चुके 21 भवनों को हटाने की भी योजना है। विधायक बोले- हिसाब होने पर आवास खाली कर देंगे आलोट विधायक डॉ. चिंतामणि मालवीय को 2009 में विश्वविद्यालय का ई-4 आवास आवंटित हुआ था, जिसका मासिक किराया 1620 रुपए है। उन्होंने अक्टूबर 2023 में विधानसभा चुनाव से पहले एक दिन में 9.09 लाख रुपए जमा किए थे। इसके बाद से किराया जमा नहीं किया गया है। नोटिस के बाद विधायक ने कहा- नैतिक सवाल यह भी है कि मुख्यमंत्री ने कुलपति का बंगला ले रखा है, जो एक लैंडमार्क और ऐतिहासिक भवन होता है। हम उन्हीं के पदचिह्नों पर हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय से उनका कुछ बकाया हिसाब है। उन्होंने चुनाव से पहले करीब 10 लाख रुपए जमा किए थे। उनका दावा है कि 2010 में उनका प्रमोशन होना था, जो 4 साल लंबित रहा, जिससे भुगतान बाकी है। वे कई बार विश्वविद्यालय से हिसाब करने का अनुरोध कर चुके हैं। उन्होंने कहा है कि हिसाब होने पर वे आवास खाली कर देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जांच गहराई से होगी तो मामला लंबा हो सकता है। आवास केवल कर्मचारियों के लिए सुरक्षित रखे जाएंगे कुलगुरु अर्पण भारद्वाज ने बताया कि कार्यपरिषद के निर्णय के अनुसार विश्वविद्यालय के आवास केवल कर्मचारियों के लिए सुरक्षित रखे जाएंगे। जिन लोगों को नोटिस दिया गया है, उन्हें एक माह का समय दिया गया है। उन्होंने कहा कि कई कर्मचारी जर्जर भवनों में रहने को मजबूर हैं, जबकि कुछ आवासों पर बाहरी कब्जा है। आवास खाली होने के बाद इन्हें कर्मचारियों को दिया जाएगा। जर्जर 21 भवनों को हटाने की योजना भी है। सीएम को मिला कुलपति का बंगला मुख्यमंत्री बनने के बाद डॉ. मोहन यादव के लिए उज्जैन के देवास रोड स्थित कुलपति का बंगला खाली कराया गया था। इसके बाद उसका नवीनीकरण हुआ। ये करीब डेढ़ साल पहले तैयार किया गया। वर्तमान में मुख्यमंत्री उज्जैन प्रवास के दौरान अधिकतर इसी बंगले में रात्रि विश्राम करते हैं। इसी मुद्दे पर विधायक ने विश्वविद्यालय के नोटिस पर प्रतिक्रिया दी है।