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धनबाद CSIR विवाद,1 लाख से 16 लाख किराया बिल, हाईकोर्ट ने पुनर्मूल्यांकन का आदेश

रांची झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की अदालत में सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ माइनिंग एंड फ्यूल रिसर्च (सीएसआइआर), धनबाद के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी के सरकारी आवास के किराया बिल में छह माह के भीतर एक लाख रुपये से बढ़कर 16 लाख रुपये हो जाने के मामले सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने कड़ी नाराजगी जताते हुए CSIR के निदेशक से पूछा कि आखिर इतनी कम अवधि में हाउस रेंट की राशि में इतना बढ़ोतरी कैसे हो गई। खंडपीठ ने CSIR के निदेशक को निर्देश दिया कि सेवानिवृत्त कर्मी गोपाल चंद्र लोहार के 16 लाख रुपये के हाउस रेंट बिल का पुनर्मूल्यांकन कर नए सिरे से गणना की जाए। मामले की अगली सुनवाई एक मई को निर्धारित की गई है। सुनवाई के दौरान कोर्ट के पूर्व आदेश के अनुपालन में सीएसआइआर के निदेशक, सेक्शन अफसर और प्रशासनिक अधिकारी अदालत में उपस्थित हुए। अदालत ने अगली सुनवाई में निदेशक को व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दे दी, लेकिन सेक्शन अफसर और प्रशासनिक अधिकारी को उपस्थित रहने का निर्देश दिया। प्रार्थी गोपाल चंद्र लोहार वर्ष 1989 में सीएसआइआर धनबाद में टेक्नीशियन पद पर नियुक्त हुए थे। वह 31 दिसंबर 2021 को सेवानिवृत्त हुए। आरोप है कि सेवानिवृत्ति के बाद करीब आठ माह तक उन्हें सेवानिवृत्ति लाभ का भुगतान नहीं किया गया। संस्थान की ओर से उन्हें पत्र देकर सूचित किया गया था कि सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें आवंटित आवास का किराया 9,995 रुपये प्रतिमाह देना होगा। 17 अप्रैल 2023 को संस्थान ने उन्हें आवास किराया का बकाया 1,06,403 रुपये बताया। इसके बाद नवंबर 2023 में उन्होंने आवास खाली कर दिया। बाद में संस्थान ने आवास किराया बकाया राशि बढ़ाकर 16,11,163 रुपये बता दिया। प्रार्थी का आरोप है कि ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट मद में बकाया लगभग 23 लाख रुपये में से 16 लाख रुपये काटने की मंशा से यह राशि बढ़ाई गई। ट्रिब्यूनल के आदेश पर भी सवाल प्रार्थी ने सरकारी क्वार्टर के किराया एवं दंडात्मक शुल्क की गणना को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। उनका कहना है कि ट्रिब्यूनल ने बिना उचित कारण बताए उनकी याचिका खारिज कर दी और आदेश अत्यंत संक्षिप्त दिया। हाई कोर्ट ने पूर्व की सुनवाई में टिप्पणी करते हुए था कि 17 अप्रैल 2023 को 1,06,403 रुपये और 22 अप्रैल 2024 को 16,11,163 रुपये की गणना के बीच भारी अंतर है, जबकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इतनी वृद्धि किस आधार पर हुई। अदालत ने यह भी कहा था कि पहली गणना प्रशासनिक अधिकारी ने की थी, जबकि बाद की गणना उससे निम्न स्तर के सेक्शन अफसर द्वारा की गई। ट्रिब्यूनल ने बिना जवाब मांगे ही मामले का निपटारा कर दिया, जो प्रथम दृष्टया उचित नहीं प्रतीत होता।

₹46,660 करोड़ निवेश से बदलेगी तस्वीर, गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित होगा इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग हब

594 किमी लंबे गंगा एक्सप्रेसवे को इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर के रूप में विकसित कर रही योगी सरकार पूरे एक्सप्रेसवे के किनारे 12 आईएमएलसी नोड्स विकसित किए गए, 6507 एकड़ भूमि भी की गई चिन्हित मेरठ से प्रयागराज तक रणनीतिक रूप से स्थापित होंगे आईएमएलसी, क्षेत्रीय संतुलित विकास सुनिश्चित होगा अब तक मिले 987 निवेश प्रस्ताव, लगभग ₹47 हजार करोड़ के संभावित निवेश का लक्ष्य निर्धारित मैन्युफैक्चरिंग, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए बड़ा केंद्र बनेगा कॉरिडोर, 12 जिलों में फैलेगा विकास लखनऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अप्रैल को हरदोई में गंगा एक्सप्रेसवे को देशवासियों को समर्पित करेंगे। योगी सरकार इस परियोजना को “एक्सप्रेसवे सह इंडस्ट्रियल कॉरिडोर” मॉडल के रूप में आगे बढ़ा रही है। सरकार ने उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे को औद्योगिक विकास से जोड़ते हुए गंगा एक्सप्रेसवे को इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (आईएमएलसी) के रूप में विकसित किया है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण की इस योजना के तहत 594 किमी लंबे एक्सप्रेसवे के किनारे 12 औद्योगिक नोड्स विकसित किए जा रहे हैं, जिनके लिए 6,507 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है। अब तक 987 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, जिनके जरिए लगभग ₹47 हजार करोड़ के निवेश का लक्ष्य तय किया गया है। यह पूरी योजना 12 जिलों में औद्योगिक विकास का नया नेटवर्क खड़ा करेगी।  594 किमी एक्सप्रेसवे, 12 नोड्स और 6,507 एकड़ का इंडस्ट्रियल नेटवर्क आईएमएलसी योजना के तहत पूरे एक्सप्रेसवे कॉरिडोर में सभी 12 जिलों में 12 नोड्स बनाए गए हैं। इन नोड्स के लिए कुल 6,507 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है। प्रत्येक नोड को उसकी भौगोलिक स्थिति और औद्योगिक संभावनाओं के आधार पर डिजाइन किया गया है, ताकि मैन्युफैक्चरिंग, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को एकीकृत रूप से बढ़ावा मिल सके। मेरठ से प्रयागराज तक हर नोड का लोकेशन और एरिया तय कर लिया गया है। इन नोड्स की यह स्ट्रैटेजिक प्लानिंग पूरे एक्सप्रेसवे को एक “इकोनॉमिक ग्रोथ बेल्ट” में बदल देगी। 987 निवेश प्रस्ताव, ₹46,660 करोड़ के निवेश की संभावनाएं आईएमएलसी योजना को निवेशकों से जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है। अब तक 987 ‘इंटेंट्स ऑफ इन्वेस्टमेंट’ (ईओआई) प्राप्त हुए हैं, जिनके जरिए ₹46,660 करोड़ के निवेश की संभावना है। यह निवेश मुख्य रूप से मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउसिंग, ई-कॉमर्स सप्लाई चेन और एग्री-प्रोसेसिंग सेक्टर में आएगा। एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित होने वाले आईएमएलसी नोड्स माल परिवहन को तेज और सस्ता बनाएंगे, जिससे उद्योगों की लागत घटेगी और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। 12 जिलों में संतुलित विकास, हरदोई बनेगा प्रमुख केंद्र यह कॉरिडोर 12 जिलों को सीधे जोड़ेगा, जिससे क्षेत्रीय असमानता कम होगी। खासतौर पर हरदोई, उन्नाव, रायबरेली और प्रतापगढ़ जैसे जिलों में औद्योगिक गतिविधियां तेजी से बढ़ेंगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में बड़ा इजाफा होगा। योगी सरकार का फोकस अब केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे औद्योगिक विकास से जोड़कर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देना है। गंगा एक्सप्रेसवे के साथ विकसित हो रहा आईएमएलसी मॉडल इस विजन का प्रमुख हिस्सा है, जो उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स हब बनाने की दिशा में मजबूत कदम है। गंगा एक्सप्रेसवे पर प्रस्तावित नोड्स का विस्तृत विवरण मेरठ : 10 किमी पर, 529 एकड़ हापुड़ : 54 किमी पर, 304 एकड़ बुलंदशहर : 2,798 एकड़ (सबसे बड़ा क्लस्टर) अमरोहा : 74 किमी पर, 348 एकड़ संभल : 100 किमी पर, 591 एकड़ बदायूं : 189 किमी पर, 269 एकड़ शाहजहांपुर : 255 किमी पर, 252 एकड़ हरदोई : 282 किमी पर, 335 एकड़ उन्नाव : 422 किमी पर, 333 एकड़ रायबरेली : 517 किमी पर, 232 एकड़ प्रतापगढ़ : 555 किमी पर, 263 एकड़ प्रयागराज : 601 किमी पर, 251 एकड़

स्थानीय विलुप्ति से लेकर लगभग 200 की संख्या तक पहुँचे काले हिरण : ‘मन की बात’ में मिली राष्ट्रीय पहचान

रायपुर यह छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के आज के प्रसारण में छत्तीसगढ़ के काले हिरण के संरक्षण प्रयासों का उल्लेख करते हुए  सराहना की। इसने न केवल छत्तीसगढ़ की पहचान को सुदृढ़ किया है, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे लोगों का मनोबल भी बढ़ाया है। इस उल्लेख से राज्य की पर्यावरणीय पहल राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से सामने आई हैं और बारनवापारा अभयारण्य को नई पहचान मिली है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर के भाटागांव स्थित विनायक सिटी में 'मन की बात' कार्यक्रम की 133वी कड़ी के श्रवण के बाद यह बात कही। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में स्थित, लगभग 245 वर्ग किलोमीटर में फैला बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य आज वन्यजीव संरक्षण की एक महत्वपूर्ण सफलता के रूप में उभरा है। एक समय ऐसा था जब यह अभयारण्य अपने प्रमुख वन्यजीव – काले हिरण – से लगभग खाली हो चुका था। लेकिन अब यही क्षेत्र करीब 200 काले हिरणों (ब्लैकबक) का सुरक्षित आवास बन गया है। यह उपलब्धि योजनाबद्ध प्रयास, वैज्ञानिक प्रबंधन और निरंतर निगरानी का परिणाम है। बारनवापारा के खुले घास के मैदानों में काले हिरणों (Antilope cervicapra) की सक्रिय मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि लंबे समय बाद भी किसी प्रजाति को उसके प्राकृतिक परिवेश में पुनर्स्थापित किया जा सकता है। जो क्षेत्र कभी सूना हो गया था, वह अब पुनर्जीवन की एक सशक्त कहानी प्रस्तुत कर रहा है। छत्तीसगढ़ में इस उपलब्धि तक पहुंचने की प्रक्रिया लंबी और चुनौतीपूर्ण रही है। 1970 के दशक के बाद अतिक्रमण और प्राकृतिक आवास के नुकसान के कारण काले हिरण इस क्षेत्र से लगभग समाप्त हो गए थे और करीब पांच दशकों तक यहां स्थानीय रूप से विलुप्त रहे। अप्रैल 2018 में आयोजित राज्य वन्यजीव बोर्ड की नौवीं बैठक में पुनर्स्थापन योजना को स्वीकृति मिलने के बाद स्थिति में बदलाव आया। इसके बाद एक सुविचारित योजना के तहत काले हिरणों को फिर से बसाने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसी प्रयास के परिणामस्वरूप उनकी संख्या बढ़कर लगभग 200 तक पहुंची और इस सफलता को रविवार को प्रधानमंत्री मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी उल्लेखित किया गया। संरक्षण के शुरुआती चरण में कई चुनौतियां सामने आईं। वन अधिकारियों के अनुसार, निमोनिया के कारण लगभग आठ काले हिरणों की मृत्यु हुई, जिसके बाद प्रबंधन प्रणाली में सुधार किए गए। बाड़ों में मजबूत सतह के लिए रेत की परत बिछाई गई, जलभराव रोकने के लिए उचित निकासी व्यवस्था विकसित की गई, अपशिष्ट प्रबंधन को बेहतर बनाया गया और एक समर्पित पशु चिकित्सक की नियुक्ति की गई। इन सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप काले हिरणों की आबादी पहले स्थिर हुई और फिर धीरे-धीरे बढ़ने लगी। बेहतर पोषण, नियमित निगरानी और अनुकूल वातावरण के कारण आज इनकी संख्या लगभग 200 तक पहुंच चुकी है। यह इस बात का संकेत है कि ये अपने नए परिवेश में सफलतापूर्वक अनुकूलित हो चुके हैं और भविष्य में इन्हें खुले जंगल में छोड़ने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण आधार तैयार करता है। काले हिरण के बारे में: काला हिरण (ब्लैकबक) भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाने वाला एक संकटग्रस्त मृग है। नर काले हिरण का रंग गहरा भूरा से काला होता है, उसके लंबे सर्पिलाकार सींग होते हैं और शरीर का निचला भाग सफेद होता है। मादा काले हिरण हल्के भूरे रंग की होती हैं और सामान्यतः उनके सींग नहीं होते। यह प्रजाति खुले घास के मैदानों में पाई जाती है और दिन के समय सक्रिय रहती है। इसका मुख्य आहार घास और छोटे पौधे होते हैं। इनकी ऊंचाई लगभग 74 से 84 सेंटीमीटर होती है। नर का वजन 20 से 57 किलोग्राम के बीच और मादाओं का 20 से 33 किलोग्राम तक होता है। नर काले हिरण की सर्पिलाकार सींगें, जो लगभग 75 सेंटीमीटर तक लंबी हो सकती हैं, इन्हें आसानी से पहचानने योग्य बनाती हैं।

सकारात्मक व्यक्तित्व को अपनाने निरंतर प्रयासरत रहें : मुख्य न्यायाधिपति संजीव सचदेवा

भोपाल मध्यप्रदेश की जेलों में 26 अप्रैल को आयोजित विशेष जेल लोक अदालतों में 7 बंदियों की रिहाई के आदेश जारी हुए। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति व मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक न्यायमूर्ति  संजीव सचदेवा ने केन्द्रीय जेल, ग्वालियर में ऑनलाइन शुभारंभ किया गया। जेल लोक अदालतों का आयोजन म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर द्वारा किया गया था। बंदीगण को संबोधित करते हुये मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण मुख्य संरक्षक न्यायमूर्ति  संजीव सचदेवा ने उन्हें सकारात्मक व्यक्तित्व निर्माण की दिशा में प्रयासरत रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इससे बंदीगण समाज की मुख्यधारा में जुड सकेंगे। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खण्डपीठ-ग्वालियर के प्रशासनिक न्यायाधिपति न्यायमूर्ति  आनंद पाठक ने बंदीगण से कहा कि पक्षकार इस कल्याणकारी जेल लोक अदालत के माध्यम से न्यायालय स्वयं पक्षकार के पास आया है और लाभान्वित होने का एक मौका दे रहा है। लोक अदालत का मूल उद्देश्य अपराध या विवाद को समाप्त करना नहीं है बल्कि अपराध या विवाद के कारणों को उजागर कर उसे समाप्त करने का मौका देना है। उन्होंने कहा कि हम सभी को यह प्रयास करना चाहिये कि वर्ष 2047 तक हम एक विवाद विहीन समाज की स्थापना कर सके। मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण एक विवाद विहीन समाज की स्थापना की नींव रख रहा है। केन्द्रीय जेल, ग्वालियर में हुई लोक अदालत में निराकरण हेतु कुल 60 प्रकरण चिन्हित किये गये और उनके निराकरण के लिए कुल 3 खण्डपीठों का गठन किया गया। लोक अदालत की प्रक्रिया अनुसार किये गये प्रयासों के फलस्वरूप 6 प्रकरण का प्ली-बारगेनिंग (अपराध स्वीकारोक्ति के आधार पर) तथा 12 आपराधिक प्रकृति के प्रकरणों में उभयपक्ष के मध्य आपसी सहमति के आधार पर समझौता हो जाने से कुल 18 प्रकरणों का निराकरण किया गया। इनमें से 7 बंदियों के रिहाई आदेश लोक अदालत खण्डपीठ के पीठासीन अधिकारी द्वारा जारी किये गये। वर्ष-2016 से लंबित एक मामले में शिकायतकर्ता स्वयं जेल परिसर में आये ताकि वे आरोपी के साथ आपसी सुलह एवं समझौता कर सकें। पीठासीन अधिकारी मती स्वाति शर्मा की खण्डपीठ क्रमांक 02 द्वारा इस समझौते को दर्ज किया और प्रक्रिया अनुसार आदेश पारित करते हुये आरोपी को तुरंत रिहा करने का आदेश जारी किया गया। इस प्रकार लगभग एक दशक से लंबित प्रकरण को मौके पर ही निराकृत कर जेल लोक अदालत की प्रभावशीलता को दर्शाया। एक अन्य मामले में, जहां आरोपी और शिकायतकर्ता दोनों ही ग्वालियर के केन्द्रीय जेल में निरूद्ध थे, उन्हें समझौता वार्ता की सुविधा प्रदान की गई। उन्हें लोक अदालत खण्डपीठ द्वारा इस आयोजन के महत्व व निराकरण से लाभों को बताते हुये राजीनामा के लिये प्रोत्साहित किया, जिन प्रयासों के फलस्वरूप उभयपक्ष समझौता हेतु स्वेच्छा से सहमत हुये और प्रकरण का निराकरण लोक अदालत में किया जाकर आरोपी को आरोपो से बरी किया गया। कार्यक्रम में न्यायमूर्ति  जी. एस. अहलूवालिया, न्यायमूर्ति  मिलिंद रमेश फडके, न्यायमूर्ति  आशीष श्रोती, न्यायमूर्ति  अमित सेठ, न्यायमूर्ति  आनंद सिंह बहरावत, न्यायमूर्ति  राजेश कुमार गुप्ता सहित मध्यप्रदेश जेल विभाग के विषेश महानिदेशक  अखेतो सेमा, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल  धरमिंदर सिंह, ग्वालियर के प्रधान जिला न्यायाधीश  ललित किशोर, जिला न्यायाधीश (निरीक्षण)  जाकिर हुसैन, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव सु सुमन वास्तव, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खण्डपीठ-ग्वालियर के प्रिंसिपल रजिस्ट्रार  राजीव के पाल व रजिस्ट्रार  नवीन कुमार शर्मा, अतिरिक्त सचिव  अरविंद वास्तव, ग्वालियर कलेक्टर मती रूचिका चौहान व पुलिस अधीक्षक  धर्मवीर सिंह, केन्द्रीय जेल-ग्वालियर के जेल अधीक्षक  विदित सिरवैया एवं अन्य न्यायाधीशगण व जेल प्रशासन के अधिकारी सम्मिलित हुये।  

रोहित गोदारा गैंग पर शिकंजा, मोस्ट वांटेड कृष्ण सिंह दबोचा गया

जयपुर राजस्थान में संगठित अपराध और गैंगस्टरों के खिलाफ प्रदेश की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) ने एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है. एडीजी दिनेश एम एन के कड़े निर्देशन में काम कर रही टीम ने सुजानगढ़ के बहुचर्चित 'जेडीजे ज्वैलर्स' फायरिंग मामले के मुख्य आरोपी कृष्ण सिंह को गिरफ्तार कर लिया है. वह पिछले 3 सालों से पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहा था. रोहित गोदारा गैंग का सक्रिय मोहरा गिरफ्तार पकड़ा गया आरोपी कृष्ण सिंह कुख्यात अपराधी रोहित गोदारा और वीरेन्द्र चारण गैंग का बेहद सक्रिय सदस्य है. कृष्ण सिंह पर रंगदारी वसूलने के लिए फायरिंग करने और हत्या जैसे कई गंभीर मामले दर्ज हैं. पुलिस लंबे समय से इसकी तलाश में जुटी थी. एजीटीएफ की पैनी नजर और सटीक मुखबिरी के चलते इस मोस्ट वांटेड अपराधी को सलाखों के पीछे भेजा जा सका है. 27 मुकदमों का अपराधी लक्ष्मण सिंह भी दबोचा गया इस कार्रवाई में टास्क फोर्स ने केवल कृष्ण सिंह को ही नहीं बल्कि एक और आदतन अपराधी लक्ष्मण सिंह को भी दबोचने में सफलता पाई है. लक्ष्मण सिंह के खिलाफ अलग-अलग थानों में 27 मुकदमे दर्ज हैं. वह वैशाली नगर और मकराना पुलिस के लिए लंबे समय से सिरदर्द बना हुआ था. इन दोनों की गिरफ्तारी से गैंग के नेटवर्क को तगड़ा झटका लगा है. इन जांबाज पुलिसकर्मियों की रही अहम भूमिका इस सफल ऑपरेशन में टीम प्रभारी सोहन सिंह और हेड कांस्टेबल महेश सोमरा के नेतृत्व में पूरी टीम ने जी-जान लगा दी. टीम के सदस्य होशियार सिंह, प्रवीण कुमार, जुगन सिंह, महावीर सिंह और कांस्टेबल मोहित महला, जगदीप, जितेंद्र कुमार व सुरेंद्र कुमार ने अपनी विशेष भूमिका निभाई.

24 घंटे में 41.75 करोड़ की शराब बिकी छत्तीसगढ़ में, राजस्व में 23% की जबरदस्त बढ़ोतरी

रायपुर नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही आबकारी विभाग के खजाने में धनवर्षा हो रही है। बढ़ती गर्मी और उमस के बीच प्रदेश में शराब की खपत ने पिछले सभी रिकार्ड ध्वस्त कर दिए हैं। हाल ही में जारी आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार बीते 22 अप्रैल को प्रदेशवासियों ने महज 24 घंटे के भीतर 41 करोड़ 75 लाख रुपए से अधिक की शराब खाली कर दी। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में 23.3 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्शाता है। बिक्री के आंकड़ों में राजधानी रायपुर एक बार फिर शीर्ष पर रहा है। अकेले रायपुर जिले में एक दिन में 7.39 करोड़ रुपए की शराब बिकी। औद्योगिक नगरी दुर्ग 5.09 करोड़ रुपए के साथ दूसरे और न्यायधानी बिलासपुर 3.71 करोड़ रुपए की खपत के साथ तीसरे स्थान पर रही। बड़े शहरों में शराब की यह मांग लंबे समय से बरकरार है, लेकिन इस साल के आंकड़ों ने विशेषज्ञों को भी चौंका दिया है। कोरिया और सुकमा में रिकार्ड बढ़ोत्तरी रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू छोटे और दूरस्थ जिलों से सामने आया है। विकास की दौड़ में पीछे माने जाने वाले इन जिलों में शराब की खपत की रफ्तार मेट्रो शहरों से भी तेज है। कोरिया जिले में पिछले वर्ष की तुलना में 78.4 प्रतिशत की सर्वाधिक वृद्धि हुई है। वहीं, माओवाद प्रभावित क्षेत्र होने के बावजूद सुकमा में 74 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी और सूरजपुर में बिक्री में 65.9 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया है। हालांकि, नारायणपुर और बीजापुर जैसे अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्रों में पहुंच सीमित होने के कारण बिक्री में गिरावट देखी गई है। अप्रैल में आठ अरब के पार पहुंचा कारोबार नया वित्तीय वर्ष शुरू हुए अभी एक महीना भी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन 22 अप्रैल तक के आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में आठ अरब 66 करोड़ रुपए से अधिक की शराब बेची जा चुकी है। यह भी पढ़ें- छत्तीसगढ़ में अब घर खरीदना हुआ सस्ता, रजिस्ट्री पर लगने वाला सेस खत्म, मंगलवार से लागू होंगी नई दरें बिक्री बढ़ने के मुख्य कारण  एक अप्रैल से दुकानों पर कई नए विदेशी और देशी ब्रांड उपलब्ध कराए गए हैं। भीषण गर्मी को भी बीयर और शराब की बढ़ती मांग का एक बड़ा कारण माना जा रहा है। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन ने भी खपत को बल दिया है। आबकारी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही प्रवृत्ति जारी रही, तो चालू वित्तीय वर्ष के अंत तक राजस्व प्राप्ति के सभी पुराने कीर्तिमान धराशायी हो सकते हैं।  

मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी, 43 डिग्री तक पहुंचा तापमान; इंदौर-उज्जैन में सबसे गर्म रातें दर्ज

इंदौर रात के तापमान में पिछले 24 घंटे में 6.4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी देखने को मिली। वहीं उज्जैन में न्यूनतम तापमान 26.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से 5.1 डिग्री सेल्सियस अधिक था। उज्जैन में पिछले 24 घंटे में 4.1 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी देखने को मिली है। सोमवार को दिन व रात के तापमान का दिखेगा उच्च स्तर सोमवार को इंदौर में दिन का पारा 43 डिग्री के आसपास रहेगा। दोपहर तक धूप की तपिश बरकरार रहेगी। दोपहर बाद बादल छाएंगे। रविवार दोपहर से रात तक बादल छाए रहने के कारण रविवार की रात भी सबसे गर्म रात रहने की संभावना है। इस वजह सोमवार को न्यूनतम तापमान 28 डिग्री के आसपास ही रहेगा। अरब सागर से आई नमी ने बदला मौसम का मिजाज वर्तमान में पूर्वी उत्तर प्रदेश पर एक चक्रवाती हवाओं का घेरा बना हुआ है। वही मप्र के मध्य क्षेत्र के ऊपर 1.5 किलोमीटर पर चारों दिशाओं से हवाएं आकर एक चक्रवाती हवाओं का घेरा बना रही है। ऐसे में अरब सागर से आ रही नमी के कारण इंदौर में दोपहर बाद मौसम का मिजाज बदला और बादल व वर्षा की स्थितियां दिखाई दी। आज प्रदेश का 50 फीसद हिस्सा होगा लू की चपेट में रविवार को प्रदेश में सिर्फ खजुराहों में लू चली। सोमवार को प्रदेश के 25 जिलों में लू चलने की संभावना जताई गई है। इनमें भोपाल,विदिशा, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, धार, इंदौर, रतलाम, उज्जैन, देवास, शाजापुर, आगर-मालवा, दतिया, भिंड, सतना, उमरिया, छिदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी शामिल है। प्रदेश में सबसे अधिकतम तापमान     खजुराहो : 45     नौगांव : 44.6     नर्मदापुरम : 44.4     सागर : 44.4     दमोह : 44.2 नोट: तापमान डिग्री सेल्सियस में एचएस पांडे, मौसम विज्ञानी, मौसम केंद्र भोपाल की राय सवाल: क्यों गर्म हो रहा शबे मालवा? जवाब: सड़क, फ्लायओवर व सीमेंट कांक्रीट की इमारतों का निर्माण, विकास कार्यो के लिए पेड़ों की अंधाधुंध कटाई। सवाल : इंदौर व उज्जैन में रातें प्रदेश में सबसे गर्म क्यों? जवाब: दिन में सूरज की किरणें जो जमीन पर आई। रात में इन दोनों शहरों में बादल छाने के कारण गर्मी वापस वायुमंडल में लौट नहीं पाई। ग्रीन हाउस इफैक्ट बना। बादलों के प्रभाव से गर्मी दोनों शहरों में थम गई। इस वजह से रात का पारा बढ़ा। सवाल : इंदौर में पानी क्यों बरसा? जवाब: गर्मी के मौसम जब कभी 43 व 44 डिग्री सेल्सियस तक तापमान बढ़ जाता है, तो शुष्क हवाएं नमी खींचती है। बादल छाते है और वर्षा की गतिविधि गरज-चमक के साथ दिखाई देती है।  

फिनायल पीकर भर्ती हुई महिला ने अस्पताल में मचाया हंगामा, छत पर चढ़ने से मचा हड़कंप

छिंदवाड़ा जिला अस्पताल में रविवार को उस समय अफरातफरी मच गई, जब उपचाररत एक युवती प्रेम प्रसंग में उपजे तनाव के चलते पांचवीं मंजिल के छज्जे पर पहुंच गई। युवती नीचे कूदने की बात कह रही थी, जिसे देख अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों में दहशत फैल गई। मिली जानकारी के अनुसार, युवती ने घरेलू विवाद या प्रेम प्रसंग के चलते फिनायल का सेवन किया था। अस्पताल में इलाज के दौरान वह युवक से संपर्क करने की कोशिश कर रही थी। संपर्क न होने पर उसने यह आत्मघाती कदम उठाने का प्रयास किया। गनीमत रही कि स्वजनों और स्टाफ की 15 मिनट की समझाइश के बाद युवती सुरक्षित नीचे उतर आई। वार्ड से निकलकर छज्जे तक कैसे पहुंची मरीज? इस घटना ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा घेरे पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। कोतवाली पुलिस का कहना है कि वर्तमान में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है। घटना का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो गया है। इस घटनाक्रम ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं कि एक मरीज इतनी आसानी से ऊपरी मंजिल तक कैसे पहुंच गया। वहीं, अस्पताल प्रबंधन की ओर से भी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया आंखों देखा हाल प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, युवती अचानक वार्ड से बाहर निकली और पांचवीं मंजिल पर पहुंच गई। कुछ ही देर में वह छज्जे पर खड़ी नजर आई। नीचे मौजूद लोगों ने यह देखा तो हड़कंप मच गया। युवती की स्थिति को देखते हुए मौके पर मौजूद लोगों में चिंता बढ़ गई। 15 मिनट तक चले इस घटनाक्रम के बाद जब युवती को सुरक्षित बचा लिया गया, तब जाकर अस्पताल प्रशासन और वहां मौजूद लोगों ने राहत की सा  

असरगंज में जनसभ,सम्राट चौधरी बोले—बिहार में 5 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य

 मुंगेर  तारापुर विधानसभा के असरगंज पहुंचे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जनसभा को संबोधित करते हुए विकास और निवेश को लेकर बड़ा विजन पेश किया। मन की बात कार्यक्रम के बाद आयोजित सभा में उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि जिस धरती पर उनका जन्म हुआ, वहीं पहली बार मुख्यमंत्री के रूप में सेवा करने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि यह अवसर जनता के प्यार और समर्थन का परिणाम है और अब क्षेत्र के हर अधूरे सपने को पूरा करना उनकी प्राथमिकता होगी। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार विकास कार्यों में कोई कमी नहीं छोड़ेगी। नीतीश के काम को आगे बढ़ाने की बात मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय तक नीतीश कुमार ने बिहार को संवारने का काम किया है। अब उसे समृद्धि की ओर ले जाना एक बड़ी चुनौती है, जिस पर सरकार ने काम शुरू कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों के लिए वित्त की कोई कमी नहीं है। सभी लंबित योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा और नई योजनाओं को भी तेजी से जमीन पर उतारा जाएगा। महिलाओं, युवाओं और शिक्षा पर फोकस सम्राट चौधरी ने कहा कि महिलाओं को उद्योग से जोड़ना, बच्चियों की शिक्षा को मजबूत करना और युवाओं को रोजगार से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। उन्होंने जीविका योजना के तहत महिलाओं को सहायता राशि जल्द उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया। साथ ही युवाओं को राज्य में ही रोजगार के अवसर देने की दिशा में तेजी से काम करने की बात कही। प्रशासनिक व्यवस्था होगी मजबूत मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सीएमओ स्तर से लेकर ब्लाक, अंचल और थाना तक की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। हर माह दो दिन विशेष अभियान चलाकर लंबित मामलों का निपटारा किया जाएगा। एक माह से अधिक आवेदन लंबित रखने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इको-टूरिज्म से बढ़ेगा पर्यटन असरगंज में ढोल पहाड़ी पर 12.49 करोड़ रुपये की लागत से इको-टूरिज्म परियोजना की आधारशिला रखी गई। मुख्यमंत्री ने इसे प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र को फोरलेन सड़क से जोड़कर सुल्तानगंज तक सीधी कनेक्टिविटी दी जाएगी, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। देवघरा पहाड़ के विकास को मंजूरी मुख्यमंत्री ने देवघरा पहाड़ के विकास के लिए 26 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी दी। उन्होंने कहा कि इस तरह की परियोजनाएं क्षेत्रीय विकास को नई दिशा देंगी और पर्यटन के जरिए आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। 2026 तक 5 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार ने 2026 तक पांच लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य तय किया है। उन्होंने बताया कि पीरपैंती पावर प्लांट में ही 1.36 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस निवेश से राज्य में उद्योगों का विस्तार होगा और युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा। सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण पर जोर मुख्यमंत्री ने कहा कि मरीन ड्राइव परियोजना के जरिए गंगा के पानी को नियंत्रित किया जाएगा। इससे बाढ़ की समस्या में कमी आएगी और सिंचाई व्यवस्था मजबूत होगी। हनुमाना डैम, खड़गपुर झील और फूलीडूमर तक पानी पहुंचाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है, जिससे किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा। सोलर ऊर्जा और बिजली पर फोकस उन्होंने कहा कि सोलर ऊर्जा के माध्यम से हर घर को एक किलोवाट बिजली उपलब्ध कराने की योजना है। इससे ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और लोगों को सस्ती बिजली मिल सकेगी। जमीन अधिग्रहण पर सख्त रुख मुख्यमंत्री ने जमीन अधिग्रहण को लेकर स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के लिए जमीन की जरूरत होती है और इसमें किसी तरह की बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी। सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं होगा और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी। कुल मिलाकर, असरगंज की सभा में मुख्यमंत्री ने विकास, निवेश और प्रशासनिक सुधार को लेकर सरकार का स्पष्ट रोडमैप सामने रखा और क्षेत्र के लोगों को तेजी से बदलाव का भरोसा दिलाया।  

नामी स्कूलों तक पहुंचा एमडी ड्रग्स का नेटवर्क, किशोर हो रहे निशाना

इंदौर यदि आपके बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव, देर रात तक जागना, पढ़ाई से दूरी बनाना, नए दोस्त बनाना, फोन छिपाना, पैसों की जरूरत बढ़ना, भूख और वजन में बदलाव, परिवार से दूरी बनाने जैसे लक्षण नजर आ रहे हैं तो सतर्क होने की आवश्यकता है। इन सभी का एक कारण आपके बच्चे में एमडी ड्रग्स की लत भी हो सकती है। एमडी ड्रग्स जैसी खतरनाक लत इंदौर में कम उम्र के बच्चे अब एमडी ड्रग्स जैसी खतरनाक लत का शिकार हो रहे हैं। नामी स्कूलों में पढ़ने वाले 12 से 16 वर्ष तक के विद्यार्थी इस नशे की गिरफ्त में आते जा रहे हैं, जिससे अभिभावकों और शिक्षकों की चिंता बढ़ गई है। एमडी ड्रग्स की लत छुड़वाने के लिए बड़ी संख्या में माता-पिता बच्चों को लेकर मनोचिकित्सकों के पास पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक बच्चों में नशे की शुरुआत अक्सर जिज्ञासा, दोस्तों के दबाव या एक बार ट्राय करने से होती है, लेकिन बहुत जल्दी यह आदत लत में बदल जाती है। बच्चों को इस लत का शिकार यह कहकर बनाया जाता है कि इससे फोकस बढ़ता है और तनाव कम होता है। पुलिस कार्रवाई में कई ऐसे तस्कर भी पकड़े जा चुके हैं, जो स्कूलों में एमडी ड्रग्स की आपूर्ति करते हैं। दिमाग पर असर, सोचने-समझने की क्षमता होती है कम विशेषज्ञों ने बताया कि एमडी ड्रग्स का असर सीधे बच्चों के दिमाग पर पड़ता है, जिससे उनकी सोचने-समझने की क्षमता, याददाश्त और व्यवहार प्रभावित होता है। इससे बच्चों में याददाश्त कमजोर होना, चिड़चिड़ापन, नींद की कमी और डिप्रेशन जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। पढ़ाई में होनहार बच्चे भी बन रहे शिकार विजयनगर क्षेत्र के एक कारोबारी का 14 वर्षीय बेटा पढ़ाई में काफी होशियार था, लेकिन अचानक उसने पढ़ाई से दूरी बना ली। वह देर रात तक जागने लगा और उसकी आंखें लाल रहने लगीं। काउंसलिंग में सामने आया कि वह एमडी ड्रग्स लेने लगा था। उसने बताया कि साथ पढ़ने वाले दोस्त ने उसे इसकी आदत लगवाई। दोस्तों के साथ पार्टी में पड़ी लत पलासिया क्षेत्र की 15 वर्षीय छात्रा दोस्तों के साथ पार्टियों में जाने लगी थी। कुछ माह बाद उसका वजन कम होने लगा, नींद घट गई और वह अकेले रहने लगी। काउंसलिंग में उसने स्वीकार किया कि दोस्तों के दबाव में उसने ड्रग्स लेना शुरू किया था। स्कूल बैग से मिला एमडी ड्रग्स निजी स्कूल में पढ़ने वाले 13 वर्षीय छात्र के बैग से पाउडर का पैकेट मिला। पूछने पर उसने बताया कि यह फोकस बढ़ाने के लिए है। जांच में सामने आया कि वह एमडी ड्रग्स का सेवन कर रहा था। घर से पैसे होने लगे गायब भंवरकुआं क्षेत्र के 16 वर्षीय छात्र के घर से पैसे गायब होने लगे। सख्ती के बाद उसने कबूल किया कि वह दोस्तों के साथ नशा करता है और उसी के लिए पैसे लेता था। काउंसलिंग के बाद अब उसकी स्थिति में सुधार है। मध्य प्रदेश में भी बन रहा एमडी ड्रग्स बताया जा रहा है कि एमडी ड्रग्स का निर्माण प्रदेश के मंदसौर, नीमच और जावरा में हो रहा है, जबकि इंदौर, रतलाम, देवास और उज्जैन में इसकी तस्करी की जा रही है। इन संकेतों पर दें ध्यान बच्चे का अचानक चुप या आक्रामक हो जाना पढ़ाई और पुराने शौकों से दूरी आंखों का लाल होना, नींद में बदलाव घर से पैसे या सामान का गायब होना नए संदिग्ध दोस्तों का साथ एक्सपर्ट का क्या कहना     शहर के नामी स्कूलों के विद्यार्थी अब एमडी ड्रग्स की लत में पड़ रहे हैं। हर माह पांच से छह बच्चों को माता-पिता काउंसलिंग के लिए लेकर आ रहे हैं। काउंसलिंग में सामने आता है कि बच्चे गुलाबी रंग की पुड़िया में एमडी ड्रग्स रखते हैं और स्कूल में लंच के समय भी इसका सेवन कर लेते हैं। बड़े घरों के इन बच्चों की पार्टी शाम पांच बजे शुरू होती है, जहां पहले शराब और बाद में ड्रग्स का सेवन किया जाता है। घर लौटने के बाद ये देर तक सोते रहते हैं, जिसे परिवार सामान्य थकान समझ लेता है।     – डॉ. कौस्तुभ बागुल, मनोचिकित्सक यह भी पढ़ें- 'मेरी मौत की जिम्मेदार पत्नी है…', भोपाल के पति ने होटल में लगाई फांसी, युवक के आखिरी वीडियो ने मचाया हड़कंप