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बिहार में बड़ा ट्रैफिक संकट, टूटे विक्रमशिला सेतु पर बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन की तैनाती

  भागलपुर बिहार की सिल्क सिटी भागलपुर की लाइफ लाइन कहलाने वाली विक्रमशिला सेतु पर आवागमन ठप हो जाने से कई जिलों में परेशानी बड़ गई है। इस सेतु को फिर से दुरुस्त करने और इस पर आवागमन चालू करने को लेकर युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। कहा जा रहा है कि पुल से यातायात सुचारु होने में तीन माह का वक्त लगेगा। आम जनों की पेशानी को देखते हुए बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन को तैनात किया गया। बीआरओ उत्तर बिहार को भागलपुर समेत अन्य कई जिलों से जोड़ने वाले इस पुल से आंशिक आवागमन की व्यवस्था बहाल करने के लिए काम शुरू हो ह गया है। बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन की मदद से बेली ब्रिज का निर्माण कराया जा रहा है। लोगों को हो रही असुविधा को देखते हुए तकनीकी विशेषज्ञों और अधिकारियों ने विक्रमशिला सेतु की मरम्मत के लिए एक्शन प्लान तैयार किया है। बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन की सहायता से शीघ्र ही एक बेली ब्रिज का निर्माण किया जाएगा। इसको लेकर युद्धस्तर पर कार्य किया जा रहा है। इसका उद्देश्य आंशिक रूप से यातायात को तुरंत बहाल करना, ताकि जनता को हो रही असुविधा कम हो सके। उन्होंने कहा कि विक्रमशिला सेतु भागलपुर एवं आसपास के जिलों के लोगों के लिए लाइफलाइन है। इसलिए बेली ब्रिज का निर्माण कर आंशिक रूप से यातायात शुरू किया जाएगा। क्या है बेली ब्रिज? बेली ब्रिज एक इमरजेंसी तकनीक है जिसका इस्तेमाल द्वितीय विश्व युद्ध के समय किया गया था। बेली ब्रिज एक प्रकार का पोर्टेबल, प्री कास्टेड स्टील ट्रस ब्रिज है। इसे युद्ध या आपदा के समय तेजी से और आसानी से ट्रस को एक दूसरे को जोड़कर बनाया जाता है। यह मॉड्यूलर डिज़ाइन पर आधारित है। सका आविष्कार द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1940-41 में ब्रिटिश इंजीनियर डोनाल्ड कोलमैन बेली ने किया था। इसमें भारी उपकरणों की आवश्यकता नहीं होती और यह अस्थायी या स्थायी दोनों तरह से काम आ सकता है। सेना और सीमा सड़क संगठन इसका उपयोग दूरदराज के क्षेत्रों या बाढ़, भूस्खलन अन्य आपदा की स्थिति में संपर्क बहाल करने के लिए करते हैं। यह ट्रस नामक त्रिकोणीय स्टील स्ट्रक्चर से बनता है, जिन्हें पिन और बेल्ट की सहायता से आसानी से जोड़ा जा सकता है। रविवार आधी रात को टूटा था पुल यह घटना रविवार रात लगभग 12.30 बजे की है। पहले सेतु पर 133 नंबर पोल के पास कुछ हिस्सा धंस गया। उसी वक्त आवागमन रोक दिया गया। लेकिन कुछ ही देर बाद वह हिस्सा टूट गया। एसएसपी प्रमोद कुमार यादव ने रात 1.15 बजे इसकी सूचना दी और लोगों से विक्रमशिला सेतु की ओर न जाने की अपील की है। पुलिस की सतर्कता से जानमाल का कोई नुकसान नहीं हुआ। घटना के समय सीएम सम्राट चौधरी दिल्ली में थे। हालांकि उन्होंने पटना पहुंचते ही उच्च स्तरीय बैठक बुलाकर जल्द से जल्द आवागमन सुचारु कराने के आदेश अधिकारियों को दिया। इस मामले में लापरवाही के आरोप कार्यपालक अभियंता को सस्पेंड कर दिया गया।

वीडियो वायरल होने के बाद बढ़ा विवाद, सामान्य शव वाहन में ले जाए गए मोर पर सवाल

रतलाम  सैलाना नगर के कुमावतपुरा क्षेत्र में गुरुवार सुबह राष्ट्रीय पक्षी मोर की करंट लगने से मौत हो गई। मामले में वन विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। वन्यजीव नियमों के अनुसार मोर की मृत्यु होने पर पोस्टमार्टम कराना अनिवार्य होता है, लेकिन विभाग ने बगैर पोस्टमार्टम कराए ही मोर का अंतिम संस्कार कर दिया। विभाग की ओर से मोर के शव का क्षत–विक्षत होने का हवाला दिया जा रहा है, लेकिन घटना के बाद जो वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए उनमें मोर का शव सामान्य देखा जा सकता है। जानकारी के अनुसार कुमावतपुरा के मुख्य मार्ग पर एक मोर उड़कर एक स्थान से दूसरे स्थान जा रहा था। इसी दौरान वह विद्युत तारों में उलझ गया और करंट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। स्थानीय नागरिकों ने सड़क पर मृत अवस्था में पड़े मोर को देखा तो वन विभाग को सूचना दी। करीब एक घंटे बाद वन विभाग का कर्मचारी मौके पर पहुंचा और मोर को वहां से उठाकर ले गया। बाद में अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। अंतिम संस्कार के दौरान वन परिक्षेत्र अधिकारी राधेश्याम जोशी, वनपाल नारायण कटारा, कार्यवाहक वनपाल रघुवीर सिंह चुंडावत एवं सुरक्षा चौकीदार कालू मौजूद रहे। दरअसल वन्यजीव कानून के तहत राष्ट्रीय पक्षी की मौत होने पर अंतिम संस्कार से पहले पोस्टमार्टम कराना आवश्यक होता है, ताकि मृत्यु के कारणों की आधिकारिक पुष्टि हो सके। इसके बावजूद विभाग ने नियमों का पालन नहीं किया। वन परिक्षेत्र अधिकारी राधेश्याम जोशी ने बताया कि मोर का शव क्षत–विक्षत हो चुका था, इसलिए पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। वहीं पशु चिकित्सक बीएल पाटीदार ने कहा कि मोर की मौत के 24 घंटे के भीतर किसी भी स्थिति में पोस्टमार्टम किया जा सकता है। वन विभाग की ओर से पोस्टमार्टम कराने संबंधी कोई पत्र उन्हें प्राप्त नहीं हुआ।  

अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ प्लान, MEA की कार्रवाई से हड़कंप

नई दिल्ली  भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों पर गाज गिरने वाली है. विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस मामले में रुख एकदम साफ कर दिया है. MEA ने बांग्लादेश सरकार को कड़ी चेतावनी दी है. भारत ने कहा है कि अवैध प्रवासियों की वापसी प्रक्रिया में तेजी लाई जाए. भारत से अवैध नागरिकों की वापसी का यह बड़ा मुद्दा है. इसके लिए बांग्लादेश सरकार का सपोर्ट बहुत जरूरी है।  नेशनलिटी वेरिफिकेशन से जुड़े 2862 से ज्यादा मामले बांग्लादेश के पास पेंडिंग हैं. इनमें से कई मामले पिछले पांच साल से भी ज्यादा समय से लटके हुए हैं. भारत की पॉलिसी अवैध विदेशियों को वापस भेजने को लेकर एकदम स्पष्ट है. MEA के इस भारी बयान से अवैध घुसपैठियों में दहशत मच गई है।  ‘2862 मामले सरेआम लटके’ विदेश मंत्रालय ने पेंडिंग मामलों पर अपना भारी गुस्सा एकदम जाहिर किया है. नेशनलिटी वेरिफिकेशन के 2862 मामले सरेआम बहुत लंबे समय से पेंडिंग हैं. इनमें से कई मामले पिछले पांच साल से लटके हुए हैं।  MEA ने बांग्लादेश से इस प्रोसेस में तेजी लाने की उम्मीद जताई है. वेरिफिकेशन में तेजी से प्रवासियों की वापसी आसानी से हो सकेगी. भारत सरकार का यह कड़ा स्टेप एकदम माना जा रहा है।  ‘अवैध नागरिकों को भेजा जाएगा वापस’ भारत ने अपनी लीगल पॉलिसी को लेकर ऐलान कर दिया है. MEA ने साफ कहा कि भारत में अवैध रहने वालों पर गाज गिरेगी. सभी अवैध विदेशी नागरिकों को कानून के तहत वापस भेजा जाएगा. इसके लिए निर्धारित लीगल प्रोसेस और बायलेटरल व्यवस्थाओं का पालन होगा. अवैध नागरिक वापसी के इस मुद्दे पर बांग्लादेश का सपोर्ट जरूरी है. सरकार की इस कड़ी चेतावनी से घुसपैठियों में हाहाकार मचा है।  बांग्लादेशी सरकार ने बॉर्डर पर कड़ी की सुरक्षा पश्चिम बंगाल में चुनाव संपन्न हो चुके हैं. भाजपा ने चुनावों में बड़ी जीत हासिल की है. बंगाल में भाजपा की जीत ने बांग्लादेश सरकार की नींद उड़ा दी है. बांग्लादेशी सरकार को आशंका है कि लोगों को जबरन भारत से निकाला जा सकता है. बांग्लादेश के गृहमंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने मामले में एक बयान भी जारी किया है. उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि भारत से लोगों को जबरन सीमा पार भेजने यानी 'पुशबैक' की घटनाएं नहीं बढ़ेंगी।  बांग्लादेशी विदेश मंत्री ने दी चेतावनी सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि वे नहीं चाहते हैं कि किसी को अवैध प्रवासी बताकर भारत से बांग्लादेश की ओर धकेल दिया जाए. इसी वजह से हमने बांग्लादेश की बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स को अलर्ट रहने के लिए कहा गया है. बांग्लादेशी विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने इससे पहले कहा था कि अगर भारत की ओर से पुशबैक की घटनाएं सामने आती हैं तो बांग्लादेश कड़ी कार्रवाई करेगा. हम कड़ी कार्रवाई करने सेे हिचकेंगे नहीं।  क्या होता है पुशबैक बता दें, पुशबैक का मतलब होता है कि किसी व्यक्ति को जबरन सीमा के पार भेज देना. पिछले कुछ वक्त में भारत और बांग्लादेश की सीमा से ऐसे मामले सामने आते रहे हैं।  घुसपैठ पर निशाना साध चुकी है भाजपा दरअसल, बंगाल चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित से लेकर भाजपा के विभिन्न बड़े नेताओं ने घुसपैठ का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था. भाजपा नेतृत्व ने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार पर आरोप लगाया था कि उन्होंने बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों को शरण दे रखी है।  पीएम मोदी ने घुसपैठ के खिलाफ दिया था कड़ा संदेश प्रधानमंत्री मोदी ने चुनावी रैलियों से साफ कह दिया था कि जो लोग भारत में अवैध रूप से घुसे हैं. यहां फर्जी दस्तावेजों के साथ रह रहे हैं, उनको देश से निकाला जाएगा. पीएम मोदी ने कहा था कि सिर्फ घुसपैठियों को ही नहीं बल्कि उन लोगों का भी हिसाब किया जाएगा, जिन्होंने घुसपैठियों की मदद की थी. पीएम मोदी ने एक रैली में तो पीएम मोदी ने घुसपैठियों को साफ संदेश दे दिया था कि वह अपना बोरिया बिस्तर बांध लें. प्रधानमंत्री मोदी ने ने आरोप लगाया था कि TMC सरकार अपने 'वोट बैंक' को सुरक्षित करने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा की कीमत पर घुसपैठ करवा रही है।  बांग्लादेश की सत्ताधारी पार्टी के नेता ने BJP को बधाई दी इसके अलावा, बांग्लादेशी सत्तारूढ़ पार्टी बीएनपी के सूचना सचिव अजीजुल बारी हेलाल ने भाजपा को जीत की बधाई दी. उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश के रिश्ते इससे मजबूत हो सकते हैं. उन्होंने बंगाल की निर्वतमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर आरोप लगाया कि उनकी वजह से तीस्ता जल समझौते में देरी हो रही है. हेलाल ने दावा किया कि तीस्ता जल समझौता भारत और बांग्लादेश की सरकार चाहती है। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव: भोपाल नगर निगम का नया भवन सुशासन का प्रतीक बनेगा

भोपाल नगर निगम का नवीन भवन बनेगा सुशासन का प्रतीक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भवन से नागरिकों को सभी सुविधाएं एक ही स्थान पर होंगी उपलब्ध ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट पर आधारित है नवीन भवन ऊर्जा में आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण का अद्भुत उदाहरण है नगर निगम का नवीन भवन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नगर पालिक निगम भोपाल के नवीन मुख्यालय भवन का किया लोकार्पण नीमच के सौर ऊर्जा प्लांट का भी रिमोट से किया लोकार्पण भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपालवासियों को भोपाल नगर निगम के नवीन मुख्यालय भवन की बधाई देते हुए कहा कि देश की क्लीन और ग्रीन कैपिटल, झीलों की नगरी भोपाल के नगर निगम का यह भवन सुशासन का प्रतीक बनेगा। भारत रत्न से सम्मानित पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेई ने जन सेवा को शासन का आधार माना था। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी के नाम पर स्थापित अटल भवन सुलभ, सुव्यवस्थित और पारदर्शी सेवाओं का केंद्र होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल नगर पालिक निगम के नवनिर्मित मुख्यालय "अटल भवन" के लोकार्पण अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि यह आधुनिक भवन शहर में सुशासन, बेहतर नागरिक सुविधाओं और विकास के नए संकल्प का प्रतीक बनेगा। स्वच्छता शपथ पटल पर लिखा संदेश- 'भोपाल रहेगा स्वच्छता में नंबर-वन' मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नगर पालिक निगम भोपाल के नवनिर्मित भवन में फीता खोलकर भवन का लोकार्पण किया। उन्होंने भवन की शिलापट्टिका का अनावरण भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नवनिर्मित भवन का अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वच्छता शपथ पटल पर लिखा कि 'भोपाल स्वच्छता में रहेगा नंबर-वन'। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल नगर पालिक निगम द्वारा नीमच जिले के देवरी में लगभग 14 करोड़ रूपए की लागत से पीपीपी मोड पर विकसित की गई सौर ऊर्जा परियोजना का भी रिमोट का बटन दबाकर लोकार्पण किया। लोकार्पण समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अंगवस्त्रम् तथा प्रतीक चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भवन लोकार्पण अवसर पर शहनाई वादन कर रहे कल्लू भाई और उनके साथियों को प्रोत्साहन स्वरूप 5-5 हजार रूपए प्रदान करने के निर्देश भी दिए। इस अवसर पर भोपाल के प्रभारी तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य काश्यप, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री श्रीमती कृष्णा गौर, नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, भोपाल महापौर श्रीमती मालती राय, विधायकगण रामेश्वर शर्मा, भगवानदास सबनानी, विष्णु खत्री तथा अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। भोपाल को मेट्रोपॉलिटिन सिटी के रूप में किया जा रहा है विकसित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल नगर पालिक निगम का यह भवन ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट पर आधारित है। इस भवन का आकल्पन नागरिकों को सभी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया है। भवन में सूर्य के प्रकाश और वेंटीलेशन की पर्याप्त व्यवस्था है, जो ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित भारतीय वास्तुकला के सिद्धांतों के अनुरूप है। यह भवन अपनी ऊर्जा की आवश्यकताओं की पूर्ति स्वयं करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज नगर पालिक निगम भोपाल द्वारा नीमच के ग्राम देवरी में स्थापित 10.5 मेगावॉट की सौर ऊर्जा परियोजना का लोकार्पण भी किया है। इस भवन की बिजली आपूर्ति ओपन एक्सेस से नीमच के संयंत्र से की जाएगी। परिसर की पार्किंग में भी सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। यह भवन ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण का अद्भुत उदाहरण है। प्रदेश की राजधानी भोपाल का गौरव दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। भोपाल को मेट्रोपॉलिटिन सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। रायसेन, सीहोर, विदिशा, राजगढ़ को भोपाल से जोड़ते हुए यह क्षेत्र विकास के नए सोपान तय करेगा। नगरीय निकाय जनता के लिए शासन प्रणाली का महत्वपूर्ण स्तंभ है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकतंत्र में केन्द्र सरकार, राज्य सरकार और नगरीय निकाय नागरिकों की भावनाओं की अभिव्यक्ति और जनता का-जनता द्वारा-जनता के लिए शासन प्रणाली के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश, प्रदेश के साथ-साथ नगरीय और ग्राम स्तर पर भी सकारात्मक बदलाव हो रहे हैं। राज्य सरकार विकास और जनकल्याणकारी गतिविधियों से प्रदेशवासियों की बेहतरी के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ‍विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश भारत विश्व के समक्ष आदर्श प्रस्तुत कर रहा है। कई अन्य देशों में उनके अस्तित्व को लेकर ही चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां विद्यमान हैं। इन विषम परिस्थितियों में भी भारत प्रगति के नए आयाम स्थापित कर रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी द्वारा आरंभ की गई विकास की गतिविधियों को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आगे बढ़ाया है। प्रधानमंत्री मोदी के निर्णयों से आम भारतीय का विश्वास बढ़ा है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में धर्म-संस्कृति के गौरव का काल चल रहा है। अयोध्या में भगवान श्रीराम के धाम की स्थापना हो या नारी शक्ति वंदन अधिनियम या फिर पड़ोसी देशों के कुत्सित इरादों के विरूद्ध की गई कार्यवाही, प्रधानमंत्री मोदी के निर्णयों से आम भारतीय का विश्वास बढ़ा है। धारा 370 के बाद कश्मीर में बदलाव आया है और अब कश्मीर के लोग भी भारत के साथ कदम से कदम मिलाकर देश के दुश्मनों का मुकाबला करने के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार कृषक कल्याण वर्ष के अंतर्गत किसानों की बेहतरी के लिए हरसंभव कदम उठा रही है। सफाई मित्रों को पीपीई किट प्रदान किए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में सफाई मित्रों को पीपीई किट प्रदान किए। पीपीई किट में रेनकोट, फुल बॉडी ड्रेस, हेलमेट, ग्लव्स, मास्क और रिफ्लेक्शन जैकेट शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत श्रीमती लक्ष्मी बाई एवं काजल सटोरिया को आवंटन आदेश पत्र और मकान की चाबी प्रदान की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पीएम स्वनिधि योजना अंतर्गत दिनेश मौर्य को 50 हजार रूपए की ऋण राशि का चैक प्रदान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पीएम स्वनिधि योजना अंतर्गत सुपूजा गिरी गोस्वामी को स्व-सहायता समूह के लिए 2 लाख रूपए से अधिक की ऋण राशि का चैक प्रदान किया। नगर निगम से संबंधित सभी विभाग एक ही छत के नीचे एक साथ कार्य करेंगे प्रभारी मंत्री चेतन काश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार सभी क्षेत्रों में विकास और जनकल्याण की गतिविधियों में नए … Read more

देवघर एयरपोर्ट से गुवाहाटी, हैदराबाद और सूरत के लिए नई उड़ानें जल्द

 देवघर  गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने गुरुवार को देवघर में कहा कि अक्टूबर-नवंबर में देवघर में बिहार-झारखंड का पहला वीजा फेसिलटी सेंटर शुरू होगा। अभी तक लोग वीजा बनवाने दिल्ली या कोलकाता जाते थे। अब यह सुविधा देवघर में मिलेगी। जानकारी हो कि मध्य प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़ में भी यह सुविधा नहीं है। अभी छोटे देश जाने के लिए वीजा बनना शुरू होगा। पर्यटन या पढ़ाई के लिए सिंगापुर, दुबई, थाइलैंड, मलेशिया, बैंकॉक जाने वालों को देवघर वीजा केंद्र से वह सुविधा मिलने लगेगी। देवघर एक बड़ा केंद्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि दो न्यूक्लियर प्लांट भी इस क्षेत्र को मिल रहा है। एक देवघर के पुनासी डैम और दूसरा बिहार के बांका में होगा। देवघर से हैदराबाद, गुवाहाटी, सूरत की चलेगी फ्लाइट सांसद ने बताया किया कि देवघर एयरपोर्ट का विस्तार होगा। जिसके लिए 450 करोड़ रुपये स्वीकृत हो चुका है। शीघ्र ही निविदा होगी। जल्द ही देवघर एयरपोर्ट से नई उड़ान शुरू होगी। देवघर से गुवाहाटी, हैदराबाद और सूरत की विमान सेवा शुरू होगी। वहीं, मुंबई और कोलकाता के लिए अब प्रतिदिन फ्लाइट हो जाएगी। जानकारी हो कि अभी दिल्ली, बेंगलुर की प्रतिदिन यात्री विमान है। मुंबई के लिए सप्ताह में तीन दिन है। जो प्रतिदिन हो जाएगी। गोड्डा से गुजरात और कोटा की सीधी ट्रेन देवघर और गोड्डा से लगातार नई ट्रेन नए गंतव्य के लिए चल रही है। एक नहीं कई ट्रेनें हो गई हैं। इस बीच सांसद ने एलान किया कि जल्द ही गोड्डा से गुजरात और कोटा की सीधी ट्रेन चलेगी। दिसंबर 2027 तक गोड्डा-महगामा रेल लाइन का काम पूरा हो जाएगा और महगामा तक ट्रेन चलने लगेगी। वहीं, 28 जून 2028 तक देवघर से पीरपैंती रेल लाइन पूरी हो जाएगी। उसके बाद सीधी ट्रेन चलेगी। गोड्डा-पाकुड़ के बीच भी रेल लाइन बिछेगी। यह पीपीपी मोड पर होगा। साहिबगंज-पाकुड़ को मिलेगी वंदे भारत डॉ. निशिकांत ने कहा कि भागलपुर से कोलकाता के बीच एक वंदे भारत जल्द शुरू होगी। इससे साहिबगंज और पाकुड़ के लोगों को फायदा होगा। साहिबगंज और पाकुड़ में इसका ठहराव होगा। वंदे भारत सुबह भागलपुर से चलेगी और शाम में कोलकाता से भागलपुर के लिए वापस होगी। यह वाया साहिबगंज और पाकुड़ होगी। बता दें कि पाकुड़ सबसे अधिक राजस्व देने वाला इलाका है।  

2819 अभ्यर्थियों को राहत नहीं, 8 और 9 मई को होगी पेपर-2 की परीक्षा

 रांची झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने माध्यमिक आचार्य नियुक्ति विवाद में महत्वपूर्ण सुनवाई की। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रार्थी और अन्य सभी 2819 अभ्यर्थी अगर चाहें तो 8 और 9 मई को होने वाली पेपर-2 की पुनर्परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। अदालत ने फिलहाल पुनर्परीक्षा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हाई कोर्ट में माध्यमिक आचार्य नियुक्ति विवाद से संबंधित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई के दौरान प्रार्थियों ने पुनर्परीक्षा पर रोक लगाने का आग्रह किया था। लेकिन अदालत ने उन्हें अंतरिम राहत नहीं दी। अदालत ने कहा कि परीक्षार्थी चाहें तो उक्त परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। ऐसे में अब प्रार्थियों सहित सभी 2819 अभ्यर्थी आठ और नौ मई को प्रस्तावित पेपर-2 की पुनर्परीक्षा में शामिल होना होगा। सुनवाई के दौरान सरकार और जेएसएससी की ओर से अदालत को बताया गया कि परीक्षा में 24 हजार परीक्षार्थी शामिल हुए, यह परीक्षा कंप्यूटर आधारित थी। 2819 अभ्यर्थी के आइपी एड्रेस में हैकिंग पाई गई थी, जिसके कारण जेएसएससी ने इनकी पुनर्परीक्षा आठ व नौ मई को लिए जाने का निर्देश दिया। इन सभी अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड भी जारी कर दिया गया। अदालत ने प्रार्थियों के पुनर्परीक्षा पर रोक से संबंधित मांग को अस्वीकार करते हुए प्रार्थियों को निर्देश दिया कि वह चाहें तो पुनर्परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। अदालत ने राज्य सरकार और जेएसएससी को इस वर्ष जून माह तक परिणाम जारी करने का निर्देश भी दिया है। इस संबंध में अर्चना कुमारी और अन्य की ओर से मामले में याचिका दायर की है। जिसमें जेएसएससी को माडल आंसर दिखाने का आदेश देने का मूल आग्रह किया है ताकि वह माडल आंसर के विरुद्ध आपत्ति दे सकें। लेकिन संशोधन याचिका के माध्यम से प्रार्थियों ने जेएसएससी द्वारा जारी 23 अप्रैल 2026 को जारी नोटिस को चुनौती दी है। नोटिस के जरिए जेएसएससी ने 2819 अभ्यर्थियों, जिनमें 20 प्रार्थी भी शामिल हैं, को आठ मई 2026 को प्रस्तावित पेपर-2 की पुनर्परीक्षा में शामिल होने का निर्देश दिया है। उनकी ओर से कोर्ट को बताया गया था कि बिना परीक्षा केंद्र के अधिकृत व्यक्तियों की पहचान किए और बिना दोषी अभ्यर्थियों को चिह्नित किए सभी 2819 अभ्यर्थियों को एक साथ पुनर्परीक्षा के लिए बाध्य करना अवैध और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है। प्रार्थी किसी भी प्रकार के अनुचित साधनों में शामिल नहीं रहे हैं, लेकिन उन्हें भी दंडात्मक कार्रवाई के दायरे में लाया जा रहा है। आयोग को पहले कथित अनियमितताओं में शामिल परीक्षा केंद्र के अधिकृत व्यक्तियों और संबंधित अभ्यर्थियों की पहचान कर उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, न कि सभी अभ्यर्थियों को समान रूप से परेशान करना चाहिए

“उपयोगित जल प्रबंधन” कार्यशाला का हुआ आयोजन

भोपाल  आयुक्त  संकेत भोंडवे ने कहा कि सीवरेज प्रबंधन के लिए एसबीआर और बायोनेस्ट जैसी अत्याधुनिक एवं सक्षम तकनीकों का समावेश उपयोगित जल प्रबंधन के लिए अत्यंत लाभदायक हैं। कम लागत वाली टिकाऊ प्रणालियों के माध्यम से मलजल शोधन संयंत्रों (एसटीपी) से निकलने वाले उपचारित जल का अनिवार्य रूप से पुनरुपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए । उन्होंने कहा कि नगरों की स्वच्छता और समग्र सौंदर्य के लिए नाला टैपिंग की भूमिका अत्यंत प्रासंगिक है, उच्च तकनीक और प्रकृति के सामंजस्य से इस क्षेत्र में प्रगति करना विभाग का प्राथमिक ध्येय है। उन्होंने संयंत्र परिसरों में वायु और पर्यावरण शुद्धि के लिए पीपल जैसे प्राकृतिक शोधक पौधों के रोपण तथा प्रकृति आधारित (नेचर-बेस्ड) तकनीकों को अपनाने पर भी विशेष बल दिया। आयुक्त  भोंडवे ने निर्देश दिए कि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और इससे जुड़े विभिन्न तकनीकी घटकों की डिजाइन एवं ड्रॉइंग संबंधी विषयों का त्वरित और दक्षतापूर्ण समाधान किया जाए। स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के अंतर्गत प्रदेश के नगरों को पर्यावरण के अनुकूल और पूर्णतः स्वच्छ बनाने की दिशा में नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा होटल पलाश में "उपयोगित जल प्रबंधन" विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। अपर आयुक्त  शिशिर गेमावत ने कहा कि मध्यप्रदेश स्वच्छ भारत मिशन के विविध सोपानों पर सराहनीय और अनुकरणीय कार्य कर रहा है। उन्होंने उपयोगित जल प्रबंधन की परिकल्पना को मूर्त रूप देने के लिए निर्माण की डिजाइन और ड्रॉइंग की सटीकता को अत्यंत आवश्यक बताया। नगरीय निकायों की तकनीकी समस्याओं के त्वरित निराकरण के ध्येय से ही इस कार्यशाला का आयोजन किया गया है, जिसमें विषय-विशेषज्ञों के साथ एक प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने पर गहन विमर्श किया जा रहा है। प्रमुख अभियंता  प्रदीप मिश्रा ने कहा कि मलजल शोधन संयंत्र से प्रवाहित होने वाले जल की शुद्धता एवं गुणवत्ता बनाए रखना अपरिहार्य है, जिससे उपयोगित जल प्रबंधन का मूल उद्देश्य अपनी सार्थकता को प्राप्त कर सके। तकनीकी सत्रों में वैज्ञानिक एवं विषय विशेषज्ञ प्रोफेसर  राजेश विनिवाल ने उपयोगित जल प्रबंधन के सूक्ष्म पहलुओं पर अपना सारगर्भित प्रस्तुतीकरण दिया।  कार्तिकेय तिवारी ने "पॉल्यूटेड नाला टू क्लीन वॉटर" (प्रदूषित नाले से स्वच्छ जल तक) विषय पर नवीन तकनीकें साझा कीं। कार्यशाला में 136 नगरीय निकायों के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तथा इंटरसेप्शन एवं डाइवर्जन से जुड़े विविध घटकों की रूपरेखा पर व्यापक मंथन किया गया। कार्यशाला में संभागीय कार्यपालन यंत्री, संभागीय संयुक्त संचालक, पीडीएमसी टीम के सदस्य, डिजाइनर्स, कॉन्ट्रैक्टर्स और विभिन्न तकनीकी प्रदाता उपस्थित रहे। कार्यशाला का संचालन उप संचालक  नीलेश दुबे द्वारा किया गया।  

मध्यप्रदेश सरकार समग्र विकास के लिए संकल्पित

भोपाल आदर्श जिला बनाने के लिए सभी समन्वित रूप से प्रयास करें, जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में निर्माण कार्यों का भूमि-पूजन, लोकार्पण करें। प्रदेश सरकार समग्र विकास के लिए संकल्पित है। सागर रिंग रोड, बायपास का कार्य शीघ्रता से करें, साथ ही क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत का कार्य तत्काल शुरू करें। उक्त विचार उप मुख्यमंत्री एवं प्रभारी मंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने सागर में आयोजित जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक में व्यक्त किए। उप मुख्यमंत्री मंत्री  शुक्ल ने निर्देश दिए कि सागर को आदर्श जिला बनाने के लिए सभी समन्वयक रूप से कार्य करें। स्मार्ट सिटी के माध्यम से सागर में अन्य शहरों की अपेक्षा बहुत अच्छे कार्य हुए है। जिससे सागर अपनी नयी पहचान बनाने में सफल हुआ है। उन्होंने कहा कि सागर शहर को जोड़ने वाले रिंग रोड एवं भोपाल, जबलपुर, नरसिंहपुर को जोड़ने वाले वाईपास का कार्य शीघ्र गति से पूरा करें जिससे जिलेवासियों के साथ अन्य व्यक्तियों को इसका लाभ प्राप्त हो सके। उन्होंने निर्देश दिए कि बीना रिफाईनरी के परिक्षेत्र में सड़कों का निरीक्षण करें एवं मरम्मत के लिए डीपीआर तैयार कराएं। इसी प्रकार प्रधानमंत्री सड़क के प्रस्ताव विधानसभावार तैयार कर सूची उपलब्ध कराएं। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी प्रकार के निर्माण कार्यों की स्वीकृति भूमि-पूजन, लोकापर्ण जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी के माध्यम से सागर में विधायक  भूपेन्द्र सिंह, विधायक  शैलेन्द्र जैन के मार्गदर्शन में बहुत अच्छे कार्य हुए हैं जिसके माध्यम प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की परिकल्पना पूरी हो रही है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि सागर नगर की ट्राफिक व्यवस्था सुधारने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करें साथ ही ट्रांसपोर्ट नगर में शिफ्टिंग का कार्य एवं राजघाट चौराहे से धर्म तक सड़कों से खंभे हटाने का कार्य शीघ्र गति से करें। विधायक एवं पूर्व मंत्री  भूपेंद्र सिंह, विधायक  शैलेन्द्र जैन, विधायक  प्रदीप लारिया, बीना विधायक मती निर्मला सप्रे, जिला पंचायत अक्ष्यक्ष  हीरा सिंह राजपूत ने विभिन्न विषयों में विचार व्यक्त किये। बैठक में कलेक्टर मती प्रतिभा पाल, पुलिस अधीक्षक  अनुराग सुजानिया, जिला पंचायत सीईओ  विवेक केवी सहित अन्य जनप्रतिनिधि, समिति सदस्य एवं अधिकारी मौजूद थे।  

बांग्लादेश ले जाने की साजिश नाकाम, आरोपी ट्रेन से कोलकाता जा रहा था

 झालावाड़ राजस्थान में नाबालिग लड़की के अपहरण के मामले में झालावाड़ पुलिस ने कुछ ही घंटों में कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और नाबालिग लड़की को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से सुरक्षित बरामद कर लिया. मामले को लेकर SP अमित कुमार ने बताया कि 2 मई 2026 को परिजनों के जरिए थाना झालरापाटन में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी. जिसमें बताया गया था कि उनकी नाबालिग बेटी(14) का बहला-फुसलाकर अपहरण कर लिया गया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत टीमों का गठन कर विभिन्न स्थानों रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, संभावित ठिकानों और रिश्तेदारों के यहां तलाशी शुरू की. ट्रेन के जरिए कोलकाता लेकर जा रहा था आरोपी जांच के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी नाबालिग को ट्रेन के जरिए कोलकाता लेकर जा रहा है, जहां से उसे बांग्लादेश ले जाने की योजना थी. इस पर पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए प्रयागराज रेलवे स्टेशन पर घेराबंदी कर 5 मई को बालिका को दस्तयाब कर आरोपी को हिरासत में ले लिया. पूछताछ में हुआ बड़ा खुलासा पुलिस ने आगे बताया कि आरोपी ने पूछताछ में अपना नाम आदित्य उर्फ बादल विश्वास बताया. उसने पहले झालावाड़ के सलोतिया क्षेत्र में रहने की जानकारी दी, लेकिन सख्ती से पूछताछ के दौरान उसे सारी सच्चाई को आसानी से कबूल कर लिया. उसने पूछताछ में जानकारी दी की वह मूल रूप से बांग्लादेश का निवासी है. साल 2024 में टूरिस्ट वीजा पर आया था भारत पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी वर्ष 2024 में टूरिस्ट वीजा पर भारत आया था, लेकिन वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी अवैध रूप से यहीं रह रहा था। उसने पहचान छिपाने के लिए स्थानीय स्तर पर दस्तावेज तैयार करवा लिए थे और निवास भी बदल लिया था. नाबालिग को बहलाकर रच रहा था साजिश पुलिस के अनुसार आरोपी नाबालिग से फोन पर संपर्क में था और कई बार उससे मिला भी था. उसने सुनियोजित तरीके से नाबालिग को अपने जाल में फंसाया और उसे लेकर भाग गया. उसकी योजना कोलकाता के रास्ते बांग्लादेश ले जाने की थी. पकड़ने के लिए की थी 25 हजार रुपये के इनाम की घोषणा   इस पूरे मामले में पुलिस की तत्परता और तकनीकी जांच की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस अधीक्षक ने टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए टीम को 25 हजार रुपये के इनाम की घोषणा की है. आगे की कार्रवाई जारी फिलहाल पुलिस आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है और फर्जी दस्तावेज तैयार करने में शामिल अन्य लोगों की भी तलाश की जा रही है। मामले में विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई जारी है.

4 मौतों के पीछे जहरीला सच, बिरयानी-तरबूज में मिला रैट पॉइजन

 नई दिल्ली साउथ मुंबई में पिछले महीने एक ही परिवार के चार लोगों की मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। शुरुआती जांच में इसे तरबूज खाने से हुई फूड पॉइजनिंग माना जा रहा था, लेकिन अब फॉरेंसिक जांच में पता चला है कि मौत जिंक फॉस्फाइड नाम के जहरीले रसायन से हुई। यह रसायन आमतौर पर चूहे मारने की दवा में इस्तेमाल किया जाता है। मृतकों में अब्दुल्ला दोकाडिया, उनकी पत्नी नसरीन और उनकी दो बेटियां जैनब और आयशा शामिल थीं। पुलिस के मुताबिक परिवार ने 25 अप्रैल को अपने घर पर रिश्तेदारों को खाने पर बुलाया था। सभी ने मटन पुलाव खाया था और रिश्तेदार रात करीब 10 से 10.30 बजे के बीच वहां से चले गए थे। इसके बाद परिवार ने रात करीब 1 बजे तरबूज खाया। सुबह 5 से 6 बजे के बीच सभी की तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें उल्टी और दस्त की शिकायत हुई, जिसके बाद अस्पताल ले जाया गया, लेकिन कुछ ही घंटों में चारों की मौत हो गई। फॉरेंसिक जांच में हुआ बड़ा खुलासा शुरुआती जांच में पुलिस ने अस्वाभाविक मौत का मामला दर्ज किया था। पोस्टमार्टम के दौरान शवों से सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए थे। बाद में फॉरेंसिक जांच में चारों के शरीर में जिंक फॉस्फाइड के अंश मिले। जांच एजेंसियों को तरबूज के सैंपल में भी यही जहरीला रसायन मिला है। अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह जहर गलती से तरबूज में पहुंचा या फिर जानबूझकर उसमें मिलाया गया था। इससे पहले जे जे अस्पताल के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया था कि मृतकों के शरीर में किसी तरह का बैक्टीरियल इंफेक्शन नहीं मिला। उनके खून में भी कोई बैक्टीरिया नहीं पाया गया था, जिससे फूड इंफेक्शन की आशंका कमजोर पड़ गई थी। शरीर के अंगों का रंग भी बदला मिला फॉरेंसिक जांच में यह भी सामने आया कि मृतकों के कुछ अंगों जैसे दिमाग, दिल और आंतों का रंग हरा पड़ गया था। डॉक्टरों के मुताबिक यह जहरीले पदार्थ के असर का संकेत हो सकता है। जांच में अब्दुल्ला दोकाडिया के शरीर में मॉर्फिन के अंश भी मिले थे। मॉर्फिन एक तेज दर्द निवारक दवा होती है, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर मेडिकल निगरानी में किया जाता है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह दवा शरीर में कैसे पहुंची। पुलिस ने परिवार के उन रिश्तेदारों के बयान भी दर्ज किए हैं, जिन्होंने उसी रात मटन पुलाव खाया था। हालांकि उनकी तबीयत पर कोई असर नहीं पड़ा। अब अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिससे मौत की पूरी वजह साफ हो सकेगी।