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युजवेंद्र चहल का हवाई जहाज में वायरल VIDEO, ई-सिगरेट पीते पकड़े गए

मुंबई  पंजाब किंग्स (पीबीकेएस) के अनुभवी स्पिनर युजवेंद्र चहल आईपीएल 2026 के बीच विवादों में घिर गए हैं। चहल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा, जिसमें दावा किया जा रहा कि स्पिनर हवाई जहाज में ई-सिगरेट पीते हुए पकड़ा गया। यह वीडियो अहमदाबाद से हैदराबाद जाने के दौरान का है। पंजाब की बुधवार को सनराइजर्स हैदराबाद से टक्कर हुई, जिसमें उसे 33 रनों से हार का सामना करना पड़ा। चहल जिस वक्त वीडियो में दिखे, तब तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह पंजाब टीम के खिलाड़ियों से बातचीत कर रहे थे। हालांकि, वेपिंग (ई-सिगरेट का इस्तेमाल करना) के दावे को लेकर अभी तक चहल, अर्शदीप, पीबीकीएस या आईपीएल की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। लपेटे में आए थे रियान पराग फ्लाइट के अंदर धूम्रपान या ई-सिगरेट का इस्तेमाल करना मना है। भारत में ई-सिगरेट पर प्रतिबंध है। बता दें कि कुछ दिन पहले राजस्थान रॉयल्स के कप्तान रियान पराग मैच के दौरान ड्रेसिंग रूम में वेपिंग करते हुए टीवी कैमरों में कैद हुए थे। भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीआई) ने पराग के खिलाफ एक्शन लिया था और उनपर खेल की छवि को नुकसान पहुंचाने के आरोप में लगाया गया। पराग पर ना सिर्फ मैच फीस का 25 प्रतिशत जुर्माना ठोका गया बल्कि उनके खाते में एक डिमेरिट अंक भी जोड़ा गया। भारत सरकार ने साल 2019 में ई-सिगरेट पर बैन लगा दिया था। कानून के अनुसार पहली बार अपराध करने पर दोषी को एक साल तक की जेल और/या एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। ई-सिगरेट निषेध अधिनियम (पीईसीए) 2019 के अनुसार, ''कोई भी व्यक्ति प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ई-सिगरेट का उत्पादन या निर्माण या आयात या निर्यात या परिवहन या बिक्री या वितरण नहीं करेगा और ई-सिगरेट का विज्ञापन नहीं करेगा या किसी ऐसे विज्ञापन में भाग नहीं लेगा जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ई-सिगरेट के उपयोग को बढ़ावा देता हो।'' ई-सिगरेट स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मानी जाती है। जॉन हॉपकिंस मेडिसिन के अनुसार, ''ई-सिगरेट का इस्तेमाल करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, हालांकि यह सिगरेट पीने जितना हानिकारक नहीं हो सकता है।'' उसके अनुसार, ''निकोटिन नियमित सिगरेट और ई-सिगरेट का मुख्य घटक है और इससे लत लग जाती है। इससे धूम्रपान की तीव्र इच्छा पैदा होती।'' जॉन हॉपकिंस मेडिसिन की वेबसाइट पर एक विशेषज्ञ के लेख में कहा गया है, ''निकोटिन एक जहरीला पदार्थ है। यह रक्तचाप और एड्रेनालाईन का स्तर बढ़ाता है, जिससे हृदय गति बढ़ जाती है और दिल का दौरा पड़ने की संभावना बढ़ जाती है।''

वन भूमि पर जल संरक्षण का बड़ा कदम, भूजल रिचार्ज के लिए बनाए जाएंगे चेकडैम

 रांची  वन भूमि पर जल स्तर बरकरार रखने के लिए करीब छह हजार कच्चे चेकडैम बनाए जाएंगे। पहाड़ियों से उतरने वाली नलिकाओं को जगह-जगह बांधकर ये चेकडैम तैयार किए जाएंगे। इससे भूमि के ऊपर तो जल मौजूद रहेगा ही, भूगर्भ जल भी रिचार्ज होगा। बांधवगढ़ वन क्षेत्र में यह प्रयोग करने वाले केंद्रीय पर्यावरण विशेषज्ञ दिनेश त्रिवेदी ने बताया कि गर्मी में वन्यजीवों के लिए यह आसानी से उपलब्ध होने वाला जलस्रोत होगा। मिट्टी में नमी रहने से हरियाली बढ़ेगी और राज्य के जंगलों में बायोमास की वृद्धि दर्ज की जाएगी। बरसात से पहले ये चेकडैम तैयार कर लिए जाएंगे। त्रिवेदी ने बताया कि राज्य के वन क्षेत्र में पहले से हजारों की संख्या में ऐसे चेकडैम बने हुए हैं। इनकी पहचान कर मरम्मत भी कराई जाएगी। एक लाख मिलियन जल भंडार बढ़ेगा पर्यावरणविद और रांची विश्वविद्यालय में भूगर्भ शास्त्र के अध्यापक नीतिश प्रियदर्शी ने बताया कि राज्य में इस तरह के प्रयोग से एक लाख मिलियन लीटर जल की उपलब्धता बढ़ेगी। वाटर रिचार्ज की वजह से यह जल स्थायी तौर पर जमीन के ऊपर मौजूद रहेगा। नीतिश प्रियदर्शी ने कहा कि जंगलों की प्राकृतिक वाटर रिचार्ज संरचना अतिक्रमण या वृक्ष कटाई की वजह से नष्ट हो गई है। नए तरीके से कच्चे चेकडैम बनाकर इस कमी को पूरा किया जा सकता है। आजीविका का भी बनेगा साधन जंगलों में बने ये वाटर रिचार्ज पिट मछली पालन के लिए भी उपयोगी होंगे। इससे ग्राम समितियों को जोड़कर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। वन क्षेत्र में पहले से बड़े बांध बने हुए हैं और वहां मछली पालन हो रहा है। अब कच्चे चेकडैम में भी जल्द विकसित होने वाली मछली की प्रजाति डाली जाएगी।  

रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर आपदा से निपटने के लिए DRDO का नया सेंटर, बुराड़ी में हुआ उद्घाटन

नई दिल्ली रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर इमरजेंसी के लिए तैयारी को बेहतर बनाने के मकसद से, डीआरडीओ ने दिल्ली के बुराड़ी मैदान में खास सेंटर खोला है। डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) ने केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर (CBRN) फील्ड ट्रेनिंग और डेमोंस्ट्रेशन सेंटर खोला। डीआरडीओ के चेयरमैन समीर वी. कामत ने इसका उद्घाटन किया। यह ट्रेनिंग और डेमोंस्ट्रेशन सेंटर, DRDO का एक अनोखा CBRN सेंटर ऑफ एक्सीलेंस होगा, जिसमें कई अत्याधुनिक सुविधाएं मौजूद होंगी। डीआरडीओ का ये सेंटर क्यों है खास     इस सेंटर में एक खास रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर टेस्ट-बेड सुविधा और हेवी-आयन रिसर्च सुविधाएं शामिल हैं।     इसके साथ ही इमरजेंसी मेडिकल रिस्पॉन्स और रियल-टाइम फील्ड रिस्पॉन्स यूनिट्स भी हैं।     रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर टेस्ट-बेड सुविधा एक खास, नियंत्रित माहौल होता है।     इसे न्यूक्लियर एनर्जी, रेडिएशन का पता लगाने और खतरनाक पदार्थों के मैनेजमेंट से जुड़ी टेक्नोलॉजी को टेस्ट करने, उनकी पुष्टि करने और उन्हें प्रदर्शित करने के लिए डिजाइन किया गया है।     ऐसी सुविधाएं न्यूक्लियर साइंस, मटीरियल टेस्टिंग और इमरजेंसी रिस्पॉन्स ट्रेनिंग में R&D के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराती हैं।     ये सुविधा, गैर-पारंपरिक खतरों से निपटने के लिए जरूरी सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक ट्रेनिंग के बीच के अंतर को पाटती है।     यह सेंटर, इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसेज (INMAS) के तहत बनने वाले CBRN सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का एक हिस्सा है। इसलिए खास है ये सेंट्रर, दी जाएगी प्रभावी ट्रेनिंग यह सेंटर, रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय, NDMA और CBRN इमरजेंसी की तैयारी और संकट से निपटने के काम में शामिल अन्य विभिन्न एजेंसियों के रिस्पॉन्डर्स को प्रभावी ट्रेनिंग देने के लिए समर्पित है। ट्रेनिंग और वर्कशॉप के जरिए, INMAS विशेषज्ञों की अगली पीढ़ी को तैयार करेगा, ताकि वे इस काम को फ्रंटलाइन तक आगे बढ़ा सकें और नई तकनीकों और टेक्नोलॉजी को अपनाकर इस क्षेत्र को और समृद्ध बना सकें।  

योगी सरकार की पहल: ओबीसी युवाओं को फ्री कंप्यूटर ट्रेनिंग, बदल रही जिंदगी

योगी सरकार में ओबीसी युवाओं को मिल रही फ्री कम्प्यूटर ट्रेनिंग, बदल रही जिंदगी साल 2025-26 में 29 हजार से ज्यादा युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया आर्थिक कमजोर परिवारों के इंटर पास युवाओं को मिल रहा प्रशिक्षण का अवसर   लाभार्थी का चयन जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति कर रही योजना का उद्देश्य गरीब व पिछड़े वर्ग के युवाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाना लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश के युवाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। इसी क्रम में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के युवक-युवतियों के लिए कम्प्यूटर प्रशिक्षण योजना एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभरी है। इस योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में 29 हजार से ज्यादा युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। डिजिटल युग में यह योजना आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है। सबसे ज्यादा 22,407 युवाओं ने ओ लेवल कोर्स किया इस योजना के तहत इंटरमीडिएट पास ओबीसी वर्ग के ऐसे युवक-युवतियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिनके माता-पिता या अभिभावकों की वार्षिक आय 1 लाख रुपये या उससे कम है। सरकार द्वारा यह प्रशिक्षण भारत सरकार की नीलिट से मान्यता प्राप्त संस्थानों के माध्यम से कराया जाता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस योजना के अंतर्गत कुल 29,191 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। इनमें 22,407 युवाओं ने ओ लेवल और 6,784 युवाओं ने सीसीसी कोर्स पूरा किया है। ये आंकड़े इस योजना की सफलता और युवाओं में इसकी बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाते हैं। सरकार कर रही प्रशिक्षण शुल्क का भुगतान, लाभार्थियों को बड़ी राहत प्रदेश में वर्तमान समय में कुल 299 संस्थाएं इस योजना के तहत चयनित हैं। इनमें 52 संस्थान केवल ओ लेवल, 43 संस्थान केवल सीसीसी और 204 संस्थान दोनों कोर्स संचालित कर रहे हैं। यह व्यापक नेटवर्क राज्य के विभिन्न जिलों में युवाओं को आसानी से प्रशिक्षण उपलब्ध कराने में सहायक है। ओ लेवल कोर्स की अवधि एक वर्ष होती है, जबकि सीसीसी कोर्स मात्र तीन महीने में पूरा होता है। ओ लेवल प्रशिक्षण के लिए सरकार अधिकतम 15,000 रुपये प्रति प्रशिक्षार्थी और सीसीसी कोर्स के लिए 3,500 रुपये तक की राशि सीधे संस्थान को भुगतान करती है।  जिला स्तर पर समिति के जरिए होता है लाभार्थियों का चयन अगर कोई लाभार्थी पहले ही फीस जमा कर देता है, तो सत्यापन के बाद यह राशि सीधे उसके खाते में भेज दी जाती है। यह व्यवस्था योजना को और अधिक पारदर्शी और लाभार्थी-हितैषी बनाती है। प्रशिक्षण के लिए इच्छुक अभ्यर्थी और संस्थाएं निर्धारित वेबसाइट https://obcoomputertraining. upsdc.gov.in के माध्यम से आवेदन करते हैं, जिससे चयन प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहती है। वहीं संस्थाओं के चयन की प्रक्रिया भी व्यवस्थित और पारदर्शी है। प्रशिक्षण संस्थानों का चयन निदेशक की अध्यक्षता में किया जाता है, जबकि लाभार्थियों का चयन जनपद स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा किया जाता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि योजना का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचे। पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित की जा रही योजनाः निदेशक पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के निदेशक उमेश प्रताप सिंह ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यह योजना पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में चयनित संस्थानों के माध्यम से युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है और हर साल बड़ी संख्या में युवक-युवतियां इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वह इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाकर अपने भविष्य को मजबूत बनाएं और डिजिटल युग में अपनी पहचान स्थापित करें।

गर्मी में एनर्जी और ठंडक देने वाला सत्तू शरबत, सोशल मीडिया पर बना ट्रेंड

भारत में पुराने जमाने से ही गर्मी में सत्तू का सेवन किया जाता रहा है. लेकिन जब से सोशल मीडिया पर इंफ्ल्यूएंसर्स और सेलिब्रिटीज ने इसके फायदे बताने शुरू किए हैं, तब से सत्तू इंटरनेट पर गर्मी से राहत दिलाने और एनर्जी देने के तौर पर खूब ट्रेंड कर रहा है. भुने हुए चने से तैयार होने वाले सत्तू की तासीर ठंडी होती है जो चिलचिलाती गर्मी में पेट की जलन और एसिडिटी को कम करने में मदद करता है. सत्तू के फायदे सत्तू में फाइबर की भरपूर मात्रा होती है जो पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है और लंबे समय तक भूख नहीं लगने देता जिससे यह वजन घटाने में भी सहायक है. यह आयरन, मैग्नीशियम और प्रोटीन का एक प्राकृतिक स्रोत है जो शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है. बिना चीनी और अधिक मसालों के बना यह शरबत डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए भी एक सुरक्षित और अच्छा विकल्प है. सत्तू का खट्टा-मीठा ठंडा शरबत सत्तू दही गुड़ नींबू का रस – 1 बड़ा चम्मच काला नमक और सफेद नमक चाट मसाला, काली मिर्च पाउडर भुना हुआ जीरा पाउडर लाल मिर्च पाउडर ठंडा पानी – 2 गिलास हरे धनिए की ताजी पत्तियां बर्फ के टुकड़े बनाने का तरीका एक बड़े बर्तन या जग में 4 चम्मच सत्तू डालें. इसमें थोड़ा सा ठंडा दही और फिर स्वादानुसार गुड़ डालें. अब पानी डालकर मिक्सर में ग्राइंड कर लें. अब इसमें काला नमक, सफेद नमक, चाट मसाला, काली मिर्च पाउडर, भुना हुआ जीरा पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, नींबू का रस और नींबू का रस डालें. इसके बाद इसे अच्छी तरह मिक्स कर लें. अब गिलास में सत्तू का शरबत डालें, इसमें बर्फ के टुकड़े डालें और ऊपर से कटा हुआ ताजा हरा धनिया डालकर ठंडा-ठंडा सर्व करें.

आलमगीर आलम कमीशन घोटाला: ईडी ने इंजीनियरों पर कसा शिकंजा, संपत्ति जांच तेज

रांची  ग्रामीण कार्य विभाग के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम से जुड़े टेंडर आवंटन में कमीशन घोटाला केस में ईडी अब मार्च महीने में चार्जशीटेड इंजीनियरों की भी चल-अचल संपत्ति जब्त करेगी। इनपर ग्रामीण कार्य विभाग में टेंडर आवंटन के बदले में कमीशन वसूलने व उस राशि के बंटवारे में शामिल होने का आरोप है। आरोपितों में सेवानिवृत्त मुख्य इंजीनियर, कार्यपालक अभियंता व सहायक अभियंता स्तर के इंजीनियर शामिल हैं। पीएमएल अधिनियम के तहत जांच में ईडी ने जानकारी जुटाई है कि इंजीनियरों ने कमीशन की वसूली कर अपने से ऊपर के अधिकारियों व विभागीय मंत्री तक पहुंचाया। ये टेंडर झारखंड सरकार के ग्रामीण कार्य विभाग, ग्रामीण विकास विशेष क्षेत्र व झारखंड राज्य ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण से संबंधित थे, जिससे ये सभी इंजीनियर जुड़े हुए थे ईडी ने इन 14 इंजीनियर, पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, उनके आप्त सचिव संजीव लाल, पूर्व मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम सहित कुल 36 आरोपितों के विरुद्ध अब तक चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। एसीबी जमशेदपुर में 2019 में दर्ज कांड के आधार पर ईडी ने ईसीआइआर किया था। पूरा मामला जूनियर इंजीनियर सुरेश प्रसाद वर्मा की दस हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार होने से संबंधित था। इसके बाद एसीबी जमशेदपुर ने ही तत्कालीन मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम के ठिकाने से 2.67 करोड़ रुपये की नकदी की बरामदगी की थी। ईडी ने उक्त केस में ईसीआइआर करने के बाद वीरेंद्र राम को गिरफ्तार किया और टेंडर आवंटन में कमीशन घोटाले के एक बड़े रैकेट का खुलासा किया। जांच के क्रम में तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम व उनके निजी सचिव संजीव कुमार लाल सहित अन्य आरोपित पकड़े गए थे। पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, उनके निजी सचिव संजीव कुमार लाल सहित कई आरोपित अब भी जेल में हैं। ईडी अब तक 44 करोड़ रुपये की संपत्ति व 38 करोड़ रुपये नकदी जब्त कर चुकी है। अब इंजीनियरों की संपत्ति जब्ती की तैयारी है। ये हैं 14 इंजीनियर, जिनकी चल-अचल संपत्ति खंगाल रही है ईडी सेवानिवृत्त मुख्य इंजीनियर सिंगराई टुटी, राजीव लोचन, सुरेंद्र कुमार व प्रमोद कुमार, कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार, अजय कुमार, अजय तिर्की, राज कुमार टोप्पो, अशोक कुमार गुप्ता, सिद्धांत कुमार व अनिल कुमार (सेवानिवृत्त), सहायक अभियंता राम पुकार राम व रमेश ओझा (दोनों सेवानिवृत्त) और पूर्व अधीक्षण अभियंता/मुख्य अभियंता उमेश कुमार (सेवानिवृत्त)। कमीशन की राशि से अर्जित की है संपत्ति ईडी ने जांच में पाया है कि ग्रामीण विकास विभाग से जुड़ी इकाइयों में कमीशन व रिश्वत का एक संगठित गिरोह सक्रिय था। इसमें ठेका लेने वाले ठेकेदारों को कुल टेंडर मूल्य का तीन प्रतिशत कमीशन देना पड़ता था। इस कमीशन का बंटवारा भी होता था, जिसमें 1.35 प्रतिशत राशि तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम तक उनके निजी सचिव संजीव लाल के माध्यम से जाता था। वहीं, 0.65 प्रतिशत से एक प्रतिशत राशि विभागीय सचिव व शेष राशि मुख्य इंजीनियरों तथा उनके नीचे के अभियंताओं तक पहुंचती थी।

सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी, माओवादियों के ठिकाने से करोड़ों रुपये और सोना मिला

जगदलपुर. बस्तर में माओवादी नेटवर्क के कमजोर पड़ने के साथ अब उनके आर्थिक ढांचे की परतें खुलने लगी है। सुरक्षा बलों की लगातार सर्चिंग में ऐसे डंप सामने आ रहे हैं, जो इस बात की गवाही दे रहे हैं कि संगठन सिर्फ बंदूक के दम पर नहीं बल्कि मजबूत आर्थिक जाल पर भी टिका था। बीते तीन महीनों में जवानों ने करीब 6 करोड़ 75 लाख रुपए नगद और 8 किलो सोना बरामद किया है, जो इस छिपे खजाने की एक झलक भर है। आईजी सुंदरराज पी के मुताबिक, यह बरामदगी अंदरूनी इलाकों में छिपाकर रखे गए डंप से हुई है, जिनकी तलाश अभी भी जारी है। जानकार बताते हैं कि नोटबंदी के बाद माओवादियों ने रणनीति बदली और नगद की जगह सोने में निवेश करना शुरू किया, ताकि जोखिम कम रहे। बरामद 8 किलो सोने की कीमत ही करीब 13 करोड़ रुपए आंकी गई है, जिससे संगठन की आर्थिक ताकत का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह पैसा तेंदूपत्ता संग्राहकों, ठेकेदारों और विकास कार्यों में लगे लोगों से लेवी के रूप में वसूला जाता था, जो साल दर साल करोड़ों में पहुंचता था। 50 करोड़ से ज्यादा हो सकती है माओवादियों की छिपी पूंजी वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र तिवारी मानते हैं कि अब तक मिली रकम सिर्फ सतह है, असल में बस्तर में ही माओवादियों की छिपी पूंजी 50 करोड़ से ज्यादा हो सकती है। यानी जैसे-जैसे माओवादी नेटवर्क खत्म हो रहा है, वैसे-वैसे उनका आर्थिक साम्राज्य भी उजागर हो रहा है। हालांकि खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है, क्योंकि जंगलों में छिपे ऐसे कई डंप अब भी सुरक्षा बलों के निशाने पर हैं। फिलहाल बस्तर में जारी सर्च ऑपरेशन सिर्फ हथियारों की तलाश नहीं, बल्कि माओवादियों की उस आर्थिक रीढ़ को तोड़ने की कोशिश भी है, जिस पर उनका पूरा नेटवर्क खड़ा था।

सैफ अली खान की ‘कर्तव्य’ का दमदार ट्रेलर रिलीज, पुलिसवाले के रोल में दिखा नया अंदाज

धर्म करते हैं कर्म छूटता है, कर्म करते हैं धर्म छूटता है, कतर्व्‍य तक को बात ही नहीं पहुंचती सर!' सैफ अली खान की नई क्राइम ड्रामा फिल्‍म 'कर्तव्‍य' के ट्रेलर की शुरुआत इसी एक डायलॉग से होती है। इसके बाद अगले सवा 2 मिनट में हम एक पुलिसवाले के द्वंद्व, पावर और पॉल‍िटिक्‍स के बीच झूलते सिस्‍टम और एक वर्दीवाले की निजी जिंदगी में मची उथल-पुथल की वो झलक देखते हैं, जो इस फिल्‍म के लिए उत्‍सुकता बढ़ा देती है। गौरी खान और शाहरुख खान की रेड चिलीज एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी 'कतर्व्‍य' उन फिल्‍मों में से है, जिसका लंबे समय से इंतजार है। तीन साल पहले इस फिल्‍म का ऐलान हुआ था। यह फिल्‍म OTT पर रिलीज होने वाली है। डिजिटल स्‍क्रीन पर 'सेक्रेड गेम्‍स' के 7 साल बाद सैफ अली खान एक बार फिर से वर्दी में नजर आने वाले हैं। जबकि उनके साथ संजय मिश्रा, रसिका दुग्‍गल और सौरभ द्व‍िवेदी भी प्रमुख भूम‍िकाओं में हैं। 'कर्तव्‍य' का डायरेक्‍शन 'भक्षक' और 'बोस: डेड/अलाइव' से सुर्ख‍ियां बटोर चुके पुलकित ने किया है। कहानी हमें एक छोटे शहर के देसी परिवेश में ले जाती है, जहां झामली कोतवाली में पवन एक ऐसा पुलिसवाला है, जो अपने धर्म, कर्म और कर्तव्‍य के बीच फंसा हुआ है। पवन जहां सच का साथ देना चाहता है, वहीं महकमे में उसकी नाकामी पर उसे सीनियर अध‍िकारी (मनीष चौधरी) का तंज झेलना पड़ता है। पवन से कहा जाता है- आठ साल में तो आम का पेड़ भी फल देने लगता है, तेरे में तो कैरी भी ना फूट रही। यहां देख‍िए, 'कर्तव्‍य' का ट्रेलर कर्म, धर्म और कतर्व्‍य के बीच एक पुलिसवाले की नैतिक दुविधा 'ओमकारा' जैसी फ‍िल्मों और 'सेक्रेड गेम्स' से लेकर 'तांडव' जैसी वेब सीरीज में अपनी दमदार अदाकारी से दिल जीतने वाले सैफ अली खान यहां भी असर दिखाते हैं। आज की दुनिया में, जहां हर फैसले की कोई न कोई कीमत चुकानी पड़ती है, 'कर्तव्य' हमें एक ऐसे नैतिक दुविधा भरे सफर पर ले जाती है, जहां फर्ज और उसके नतीजों के बीच टकराव है। 'कर्तव्‍य' फिल्‍म की कहानी पुलकित के डायरेक्‍शन में बनी इस क्राइम-ड्रामा की कहानी के केंद्र में पवन है। वह एक पुलिस अफसर है, जिस पर महकमे की कड़ी कार्रवाई की तलवार लटक रही है। उसे एक पत्रकार की सुरक्षा का जिम्‍मा सौंपा गया था, लेकिन वह उसकी जान बचाने में नाकाम रहता है। उस महिला पत्रकार को सरेराह गोली मार दी जाती है। जैसे-जैसे सीनियर अफसरों का दबाव बढ़ता है, पवन उस हमलावर को पकड़ने के लिए मुहिम में जुट जाता है। यह जांच पवन का सामना आनंद श्री (सौरभ द्व‍िवेदी) से करवाती है, जो अपनी रसूख और ताकत का इस्‍तेमाल नाबालिग बच्‍चों से गलत काम करवाने के लिए करता है। इधर, पवन की निजी जिंदगी में भी उथल-पुथल मची हुई है। उसके भाई से जुड़े एक विवाद के कारण परिवार को धमकियां मिल रही हैं। पवन को सिस्टम के भीतर और घर, दोनों ही जगहों पर मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। जैसे-जैसे यह मामला और गहराता है, पवन खुद को फर्ज और परिवार के बीच फंसा हुआ पाता है। इस बीच जब पवन आनंद श्री के ख‍िलाफ मोर्चा खोलता है तो उसे चेतावनी मिलती है। लेकिन यहां हमें उसके किरदार का सबसे बोल्‍ड अंदाज देखने को मिलता है। पवन कहता है- महादेव का भक्‍त हूं और ऊपर से पुलिसवाला, मैं भी देखता हूं क्‍या फाड़ लेगा! 'कतर्व्‍य' OTT रिलीज: कब और कहां देखें 'कतर्व्‍य' का ट्रेलर गुरुवार को रिलीज हुआ है। लेकिन इसके प्रोड्यूसर शाहरुख खान ने बीते महीने 30 अप्रैल को ही इसकी रिलीज डेट का ऐलान कर दिया था। सैफ अली खान की यह ड्रामा फिल्‍म 15 मई 2026 को Netflix पर रिलीज होगी। शाहरुख ने रिलीज की तारीख का ऐलान करते हुए लिखा था, 'कर्तव्य के इस चक्रव्‍यूह में, हर फैसला एक इम्‍त‍िहान होगा।' 'कतर्व्‍य' की कास्‍ट फिल्‍म में सैफ अली खान जहां पुलिसवाले पवन के लीड रोल में हैं, वहीं उनकी पत्‍नी के किरदार में रसिका दुग्‍गल हैं। संजय मिश्रा ने सैफ अली खान के सहयोगी पुलिसवाले और मनीष चौधरी ने सीनियर अध‍िकारी की भूमिका निभाई है। सौरभ द्व‍िवेदी इसमें विलेन आनंद श्री के रोल में हैं। जबकि साथ में जाकिर हुसैन भी अहम भूमिका में हैं।  

बीजेपी विधायक पर महिला उत्पीड़न का आरोप लगाने पर महिला कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष को 10 करोड़ का नोटिस

रतलाम  विधायक ने अपने वकील के माध्यम से रीना बोरासी को 10 करोड़ रुपए का मानहानि नोटिस दिया है। रीना बोरासी द्वारा मीडिया में दिए गए उन बयानों को लेकर यह नोटिस भेजा गया है जिनमें बोरासी ने विधायक पर यौन शोषण और अवैध कब्जे जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। विधायक ने एक स्थानीय चैनल को भी लीगल नोटिस भेजा है। राज्यपाल से की थी शिकायत रीना बोरासी ने कुछ दिन पहले राज्यपाल मंगुभाई पटेल से लोकभवन भोपाल में मुलाकात के बाद मीडिया को बयान दिया था। जिसमें उन्होंने विधायक पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने एक महिला को लेकर कहा था कि उस महिला ने मुझे एफिडेविट के साथ सुबूत दिए हैं। वही राज्यपाल को देने आई हूं। मप्र का एक नेता, विधायक और पूर्व सांसद इस तरह से महिलाओं पर अत्याचार करेगा। उनका योन शोषण करेगा, उसके घर और पैतृक जमीन पर कब्जा करेगा। अपने 25-30 गुंडों काे भिजवाकर यशटर तोड़े, 70 साल की महिला पर अत्यावार किया। मेरी सरकार और राज्यपाल से मांग है कि संबंधित की विधायकीर रद्द की जाए। विधायक से चुनावी रंजिश रखती हैं रीना नोटिस में विधायक की ओर से कहा गया है कि वे एक उच्च शिक्षित जनप्रतिनिधि हैं और समाज में उनकी प्रतिष्ठा है। रीना बोरासी ने बिना किसी ठोस प्रमाण के केवल चुनावी रंजिश और राजनीतिक द्वेष के चलते उनकी छवि धूमिल करने के उद्देश्य से ये झूठे आरोप लगाए हैं। विधायक का तर्क है कि 'पृथ्वीचक्र' चैनल और सोशल मीडिया पर प्रसारित यह इंटरव्यू पूरी तरह से षड्यंत्र का हिस्सा है। 7 दिन की मोहलत और कानूनी चेतावनी एडवोकेट शेखर श्रीवास्तव द्वारा भेजे गए इस नोटिस में रीना बोरासी को 7 दिन का समय दिया गया है। इन 7 दिनों के भीतर उन्हें उन सभी दस्तावेजों और साक्ष्यों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध करानी होंगी, जिनके आधार पर उन्होंने ये आरोप लगाए हैं। यदि वे ऐसा करने में विफल रहती हैं, तो उनके विरुद्ध 10 करोड़ रुपए की क्षतिपूर्ति का दीवानी मामला और आपराधिक मानहानि का केस दर्ज किया जाएगा। मध्यप्रदेश में महिलाओं के साथ हो रहे कथित शोषण और प्रताड़ना के मामलों को लेकर सियासत गर्मा गई है। महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रीना बोरासी ने भाजपा के आलोट विधायक और पूर्व सांसद चिंतामणि मालवीय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने गुरुवार को राज्यपाल से मुलाकात कर विधायक पर गंभीर आरोप लगाए और उन पर तुरंत कार्रवाई की मांग की है। रीना बोरासी का कहना है कि विधायक के रसूख के आगे पीड़ित महिलाओं की सुनवाई नहीं हो रही है और प्रशासन मौन बना हुआ है। 

स्कूल में खाना खाते ही बिगड़ी बच्चों की तबीयत, स्वास्थ्य केंद्र में मचा हड़कंप

 सहरसा बिहार के सहरसा जिले में गुरुवार को एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। जिले के महिषी प्रखंड स्थित राजकीय मध्य विद्यालय बलुआहा में मिड-डे मील खाने के बाद 250 से अधिक बच्चे अचानक बीमार पड़ गए। खाना खाने के कुछ देर बाद ही बच्चों ने पेट दर्द, उल्टी, चक्कर और बेचैनी की शिकायत की, जिसके बाद स्कूल परिसर में भारी हड़कंप मच गया। आनन-फानन में सभी बीमार बच्चों को इलाज के लिए महिषी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में बीमार बच्चों के पहुंचने से स्वास्थ्य केंद्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और भीड़ जमा हो गई। डॉक्टरों की टीम लगातार बच्चों की जांच और उपचार में जुटी हुई है। छात्रों ने बताई आपबीती पांचवीं कक्षा के छात्र रोहित कुमार ने बताया कि सुबह करीब 10 बजे स्कूल में भोजन में चावल-दाल दिया गया था। इसे खाने के कुछ ही देर बाद तबीयत खराब होने लगी। पेट में तेज दर्द के साथ उल्टी और चक्कर आने लगे। वहीं, सातवीं कक्षा की छात्रा शिवानी ने भी बताया कि भोजन के तुरंत बाद एक-एक कर कई बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी थी। कई बच्चे सदर अस्पताल रेफर घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। सहरसा के सिविल सर्जन डॉ. राजनारायण प्रसाद स्वास्थ्य अधिकारियों की टीम के साथ तुरंत महिषी पहुंचे और बच्चों के इलाज की व्यवस्था का जायजा लिया। सिविल सर्जन डॉ. राजनारायण प्रसाद ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह फूड प्वाइजनिंग का मामला लग रहा है। सभी बच्चों का तुरंत इलाज किया जा रहा है। एहतियात के तौर पर जिन बच्चों की तबीयत ज्यादा खराब थी, उन्हें सहरसा सदर अस्पताल रेफर किया गया है। उन्होंने बताया कि फिलहाल सभी बच्चों का उपचार जारी है। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और सभी बच्चे खतरे से बाहर हैं। घबराने की कोई बात नहीं है। लैब भेजे जाएंगे खाने के नमूने इस घटना के बाद से स्कूली बच्चों के अभिभावकों में प्रशासन और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ काफी आक्रोश देखा जा रहा है। जिला प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि मिड-डे मील के भोजन के नमूने इकट्ठा कर लिए गए हैं और उन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।