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ऊर्जा सुरक्षा पर भारत एक्टिव: रूस से भरोसा मिला तो अमेरिका से की खास अपील

 नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और पर्शियन गल्फ में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अमेरिका से रूस से तेल खरीद पर दी गई छूट को आगे बढ़ाने की अपील की है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, नई दिल्ली ने वॉशिंगटन से कहा है कि मौजूदा हालात में ऊर्जा सप्लाई बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि तेल बाजार में जारी अस्थिरता का असर सीधे भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर पड़ सकता है।  अमेरिका ने पहली बार मार्च में भारत और अन्य मुल्कों को रूसी तेल खरीदने के लिए विशेष छूट दी थी. इसके बाद इसे बढ़ाकर 16 मई 2026 तक कर दिया गया. इस छूट की वजह से भारत रियायती दरों पर रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीद पा रहा है।  हालांकि, यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका लगातार भारत पर दबाव बनाता रहा है कि वह रूस से तेल खरीद कम करे ताकि मॉस्को पर आर्थिक दबाव बढ़ाया जा सके. लेकिन अब ईरान युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिससे भारत की चिंता बढ़ गई है।  इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय अधिकारियों ने अमेरिकी पक्ष से कहा है कि अगर तेल बाजार में उथल-पुथल जारी रहती है तो इसके गंभीर सामाजिक और आर्थिक असर हो सकते हैं. खासतौर पर भारत जैसे देश में, जहां 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतें काफी बड़ी हैं और पहले से ही कुकिंग गैस की कमी जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं. भारत के तेल मंत्रालय और विदेश मंत्रालय ने फिलहाल इस मामले पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है. वहीं अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की तरफ से भी कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है।  रूस का एनर्जी सप्लाई पूरा करने का वादा नई दिल्ली में होने वाली ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने से पहले ब्रॉडकास्टर आरटी इंडिया से बातचीत में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि रूस यह सुनिश्चित करेगा कि भारत के ऊर्जा हित पूरी तरह सुरक्षित रहें. उन्होंने कहा, "मैं गारंटी दे सकता हूं कि रूसी ऊर्जा सप्लाई से जुड़े भारत के हित प्रभावित नहीं होंगे. हम हरसंभव कोशिश करेंगे कि यह अनुचित कंपटीशन हमारे समझौतों को नुकसान न पहुंचाए।  रूसी विदेश मंत्री लावरोव ने जोर देकर कहा कि रूस ने ऊर्जा क्षेत्र में कभी भी भारत या किसी अन्य साझेदार के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में विफलता नहीं दिखाई है. उन्होंने तमिलनाडु स्थित कुडनकुलम न्यूक्लियर एनर्जी प्लांट को भारत-रूस सहयोग का प्रमुख उदाहरण बताया और कहा कि नए पावर यूनिट्स पर काम जारी है. उन्होंने कहा, "भारत को और ऊर्जा की जरूरत है. हम गैस, तेल और कोयले जैसे हाइड्रोकार्बन की सप्लाई लगातार जारी रखे हुए हैं।  इस बीच भारत ने मई महीने में रिकॉर्ड स्तर पर रूसी तेल आयात किया है. इकोनॉमिक टाइम्स ने डेटा फर्म क्लेपेर के हवाले से बताया कि, मई में भारत रोजाना करीब 23 लाख बैरल रूसी तेल आयात कर रहा है. अनुमान है कि पूरे महीने का औसत करीब 19 लाख बैरल प्रतिदिन रह सकता है, जो अब भी बेहद बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है।  विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में संघर्ष लंबा खिंचने की स्थिति में भारत रूस से सस्ते तेल पर अपनी निर्भरता और बढ़ा सकता है, क्योंकि इससे घरेलू ईंधन कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। 

वैश्विक आर्थिक संकट की आहट! जानिए मंदी की चेतावनी के बीच भारत की स्थिति कैसी

नई दिल्ली  दुनिया की सबसे बड़ी वित्तीय संस्थाओं और जाने-माने अर्थशास्त्रियों ने पिछले एक हफ्ते में वैश्विक आर्थिक मंदी को लेकर गंभीर चेतावनियां जारी की हैं. इसके पीछे मुख्य वजहें हैं अमेरिका की आक्रामक टैरिफ पॉलिसी, ट्रेड वॉर का बढ़ता असर, कमजोर होता उपभोक्ता खर्च और AI निवेश में बने बुलबुले के फटने का डर. मुख्य तौर पर अमेरिका में इसका सबसे ज्यादा रिस्क है, मगर भारत समेत दुनिया के बाकी देश भी इससे अधूते नहीं रहने वाले।  सबसे बड़ी चेतावनी मेरिल लिंच (Merrill Lynch) के दिग्गज फोरकास्टर गैरी शिलिंग (Gary Shilling) की तरफ से आई है. ये वही शख्स हैं, जिन्होंने 1969-70 के दौर की आर्थिक मंदी की सटीक भविष्यवाणी की थी और इनका नाम हर किसी को याद हो गया था. हाल ही में बिजनेस इनसाइड को दिए इंटरव्यू में शिलिंग ने कहा कि 2026 के अंत तक अमेरिकी मंदी ‘लगभग तय’ है. उनके मुताबिक तीन बड़े खतरे हैं. पहला एक फ्रीज हो चुका हाउसिंग मार्केट, जहां खरीदार और विक्रेता दोनों सुस्त पड़े हैं, दूसरा कॉर्पोरेट कैपेक्स में तेज गिरावट, और कमजोर होता उपभोक्ता वर्ग. शिलिंग ने कहा, “शेयर बाजार बहुत महंगा है और जल्द ही बड़ा करेक्शन आने की पूरी आशंका है।  उनके अलावा, बिलेनियर निवेशक लियोन कूपरमैन (Leon Cooperman) भी शिलिंग के सुर में सुर मिला चुके हैं. फॉक्स बिजनेस पर उन्होंने कहा, “बाजार बहुत ऊंचे मूल्यांकन पर है और कई समस्याएं एक साथ मुंह बाए खड़ी हैं।  जेपी मॉर्गन (JP Morgan) ने पहले वैश्विक मंदी की 60 फीसदी संभावना जताई थी, जिसे अब घटाकर 40 फीसदी किया है. लेकिन साथ ही यह भी कहा कि “काफी डाउनसाइड रिस्क अभी भी बना हुआ है।  मैकिंजी (McKinsey) के ताजा ग्लोबल सर्वे का नतीजा और भी चौंकाने वाला है. करीब 70% बिजनेस एग्जीक्युटिव्स ने मंदी के किसी न किसी सीन को सबसे संभावित माना. इनमें से 61 प्रतिशत ने डिमांड से पैदा होने वाली मंदी की बात कही. यानी बढ़ती अनिश्चितता से उपभोक्ताओं का भरोसा टूट सकता है, जो मंदी तक ले जाने के लिए काफी होगा।  मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) के चीफ ग्लोबल इकॉनमिस्ट सेथ कारपेंटर (Seth Carpenter) ने कहा, “आर्थिक नुकसान शुरू हो चुका है. अगर टैरिफ अप्रैल के पीक पर वापस जाते हैं तो अमेरिका और पूरी दुनिया मंदी में चली जाएगी.” IMF ने भी ग्लोबल ग्रोथ 2024 के 3.3% से घटकर 2026 में 3.1% रहने का अनुमान जताया है और कहा है कि जोखिम नीचे की तरफ झुके हुए हैं।  भारत पर क्या होगा असर? भारत की अर्थव्यवस्था मुख्यतः घरेलू मांग पर टिकी है, इसीलिए विशेषज्ञ मानते हैं कि देश वैश्विक मंदी की सीधी चपेट में नहीं आएगा. डेलॉयट इंडिया (Deloitte India) के अनुसार भारत 2026 में 6.5 से 7 फीसदी की दर से बढ़ता रह सकता है और वह दुनिया की सबसे तेज बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा. लेकिन बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) के चीफ इकॉनमिस्ट मदन सबनवीस (Madan Sabnavis) की चेतावनी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उनके मुताबिक भारत रुपये की तेज अस्थिरता से जरूर प्रभावित होगा. जब अमेरिका और यूरोप जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में मंदी आती है, तो निवेशक उभरते बाजारों से पूंजी खींच लेते हैं, परिमाणस्वरूप रुपया कमजोर पड़ता है, शेयर बाजार में उठापटक होती है और आयात होने वाले कच्चे माल महंगे हो जाते हैं. भारत कच्चे तेल का बड़ा इम्पोर्टर है, इसलिए वैश्विक ऊर्जा बाजार में कोई भी उथलपुथल सीधे महंगाई को हवा दे सकती है।  IT सेक्टर पर बड़ा खतरा एक बड़ा सेक्टोरल खतरा आईटी इंडस्ट्री के सामने है. नैस्कॉम (NASSCOM) की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय आईटी सेक्टर की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से अमेरिका और यूरोप जैसे पश्चिमी बाजारों पर टिकी हुई है. यदि इन देशों की आर्थिक स्थिति कमजोर होती है और वहां सेवाओं की मांग घटती है, तो इसका सीधा असर भारत पर पड़ेगा. नए प्रोजेकट्स मिलना कम हो जाएंगे, कंपनियां अपने बजट में कटौती करेंगी और युवाओं के लिए नई नौकरियों के अवसर भी सिमट सकते हैं।  आईटी के अलावा कपड़ा, टेक्सटाइल और मैन्युफैक्चरिंग जैसे वे तमाम उद्योग भी दबाव महसूस करेंगे, जो अपना माल विदेशों में बेचते हैं. हालांकि, भारत के पास इस संभावित संकट से लड़ने के मजबूत साधन भी मौजूद हैं. सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) पर किया जा रहा भारी निवेश और भारतीय रिजर्व बैंक की संभली हुई नीतियां एक सुरक्षा कवच का काम करेंगी. इसके बावजूद, यदि वैश्विक आर्थिक हालात और अधिक बिगड़ते हैं, तो भारत की कुल विकास दर (GDP) में 0.3% से 0.5% तक की गिरावट देखने को मिल सकती है। 

नरेंद्र मोदी पर शिवराज सिंह चौहान की अनोखी प्रस्तुति, किताब में दिखा ‘अपनापन’ का जिक्र

भोपाल केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संबंधों पर एक किताब लिखी है। किताब का नाम ' अपनापन ' है। इसका लोकार्पण 26 मई को नई दिल्ली में है। शिवराज सिंह चौहान ने खुद इसकी जानकारी दी है। किताब की कहानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शिवराज सिंह चौहान के अनुभवों पर है। पीएम के साथ अनुभवों को किताब में लिखा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक्स पर लिखा कि तीन दशकों से अधिक के सार्वजनिक जीवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अनेक भूमिकाओं और विभिन्न दायित्वों में कार्य करते हुए मुझे उनके व्यक्तित्व, नेतृत्व, सेवा, संगठन, सुशासन और राष्ट्र समर्पण के अनेक दुष्टिकोणों से देखने समझने का अवसर मिला है। इन्हीं अनुभवों, भावनाओं, प्रेरणाओं और जीवन-मूल्यों को मैंने अपनी पुस्तक 'अपनापन' में संजोने का विनम्र प्रयास किया है। 26 मई को किताब का लोकार्पण शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मेरी इस कृति 'अपनापन' का लोकार्पण 26 मई 2026 को सुबह साढ़े दस बजे, एनएएससी कॉम्प्लेक्स, पूसा, नई दिल्ली में होगा। मेरा विश्वास है कि यह पुस्तक सभी पाठकों को, विशेषकर हमारे युवा मित्रों को, सेवा, संवेदना, राष्ट्रभक्ति और जनकल्याण के विचारों के साथ विकसित भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने की प्रेरणा देगी। पुस्तक का लोकार्पण पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा करेंगे। प्रधानमंत्री के साथ करीब से जिया है उन्होंने कहा कि मेरे लिए 'अपनापन' केवल एक पुस्तक नहीं है, यह उन तैंतीस वर्षों को शब्दों में उतारने का प्रयास है, जिनको मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बहुत करीब से जिया है। लोगों ने मंचों से उन्हें भाषण करते हुए देखा है, लेकिन मैंने उनमें उस व्यक्ति को देखा है, जो दिन भर देर रात तक काम करने के बाद भी अगली सुबह उसी ऊर्जा के साथ देश के लिए खड़ा होता है। लोग उनके निर्णय को देखते हैं, लेकिन मैंने देखा है कि कैसे उनका दिल हर गरीब, हर किसान, मां, बहन-बेटी और हर कार्यकर्ता के लिए धड़कता है। 1991 की एकता यात्रा का जिक्र शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मुझे आज भी 1991 की एकता यात्रा याद है। तब कई लोग उसे राजनीतिक यात्रा के रूप में देखते थे, लेकिन मोदी जी ने उसे राष्ट्रीय चेतना का अभियान बना दिया। उनकी सोच स्पष्ट थी कि तिरंगा श्रीनगर के लाल चौक तक ही नहीं, देश के हर युवा के दिल तक पहुंचना चाहिए। और तब मैंने पहली बार महसूस किया कि नेतृत्व सिर्फ भाषण से नहीं आता, नेतृत्व तपस्या से आता है, नेतृत्व अनुशासन से आता है, नेतृत्व समर्पण से आता है और सबसे ज़्यादा नेतृत्व अपनेपन से आता है। क्यों लिखा 'अपनापन' उन्होंने कहा कि उन अनुभवों को यादों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि एक पुस्तक के रूप में जनता तक पहुंचाना चाहिए और इसी सोच ने मुझे लेखक बना दिया। 'अपनापन' यह पुस्तक आपके सामने है। इस पुस्तक में संगठन और सार्वजनिक जीवन में काम करने वाले लोग यह देखेंगे कि बड़े लक्ष्य केवल भाषण से पूरे नहीं होते। बड़े लक्ष्य अनुशासन, समर्पण, तपस्या और सामूहिक प्रयासों से पूरे किए जा सकते हैं। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस पुस्तक में युवा देखेंगे कि कैसे जनता से जुड़कर, उनकी समस्या जानकर और उनको साथ लेकर मेहनत करके बदलाव लाया जा सकता है। वे लोग, जो भारत में सामाजिक और राजनीतिक बदलाव को देख रहे हैं, इस पुस्तक में एक ऐसी झलक देखेंगे कि छोटे-छोटे प्रयासों से बड़े राष्ट्रीय परिवर्तन का वातावरण बनाया जा सकता है। और दुनिया में वे लोग, जो नरेंद्र भाई के नेतृत्व को देख रहे हैं, उनको इस पुस्तक में उनके व्यक्तित्व को ज़्यादा निकटता से समझने का अवसर मिलेगा। पुस्तक से देश बदलने का साहस मिलेगा इस पुस्तक 'अपनापन' में आपको सिर्फ घटनाएं नहीं, वह सोच मिलेगी जिसने देश को बदलने का साहस किया। वह अनुशासन मिलेगा, जिसने सपनों को सिद्धि में बदल दिया और वह अनुभव मिलेंगे, जो नेतृत्व को देखने के आपके नजरिये को बदल देंगे। इस पुस्तक को पढ़ते समय अगर आपने यह महसूस किया कि देश बदलने के लिए बड़े पद नहीं, बड़े संकल्प की जरूरत होती है, तो मैं मानूँगा कि मेरा प्रयास सार्थक हुआ।  

आम आदमी को झटका: सांची ने फिर बढ़ाए दूध के दाम, आज से लागू हुई नई दरें

भोपाल  लगातार बढ़ती महंगाई के बीच आम जनता को एक और बड़ा झटका लगा है. दरअसल रसोई गैस, सब्जियों और रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के बाद अब दूध भी महंगा हो गया है. देशभर में अमूल और मदर डेयरी द्वारा दूध की कीमतों में बढ़ोतरी के ऐलान के बाद अब मध्य प्रदेश के प्रमुख सहकारी दुग्ध ब्रांड सांची ने भी दूध के दाम बढ़ाने की घोषणा कर दी है. सांची की नई दरें आज  15 मई 2026 से लागू होंगी, जबकि अमूल और मदर डेयरी की नई कीमतें 14 मई से प्रभावी हो जाएंगी. कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब उपभोक्ताओं को प्रति लीटर दूध पर 2 रुपये अधिक चुकाने होंगे।  2 रुपए प्रति लीटर बढ़ा सांची दूध का दाम जानकारी के अनुसार सांची ने दूध के सभी प्रमुख पैकेटों की कीमत में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है. इसके तहत अब तक 34 रुपये में मिलने वाला आधा लीटर दूध पैकेट 35 रुपये में मिलेगा, जबकि 68 रुपये वाला एक लीटर पैकेट अब 70 रुपये में मिलेगा. डेयरी प्रबंधन का कहना है कि दुग्ध उत्पादन लागत, पशु आहार, पैकेजिंग और परिवहन खर्च में लगातार वृद्धि होने के कारण यह फैसला लिया गया है।  अमूल ने भी पूरे देश में बढ़ाया दाम अमूल ने भी पूरे देश में दूध के दाम बढ़ाने का ऐलान किया है. कंपनी ने अलग-अलग दूध उत्पादों की कीमतों में 1 से 3 रुपये तक की बढ़ोतरी की है. अमूल के अनुसार यह वृद्धि पशुओं के चारे, ईंधन और पैकेजिंग सामग्री की बढ़ती लागत के कारण की गई है. गुजरात कोआपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन ने बयान जारी कर कहा है कि कीमतों में यह बढ़ोतरी किसानों और डेयरी संचालन पर बढ़ते आर्थिक दबाव को संतुलित करने के लिए जरूरी थी. नई दरें 14 मई 2026 से लागू होंगी।  मदर डेयरी ने 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी मदर डेयरी ने भी अपने टोकन, फुल क्रीम और टोंड दूध समेत सभी प्रमुख वेरिएंट्स के दाम में 2 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की है. कंपनी ने बढ़ती उत्पादन लागत और परिवहन खर्च को इसकी मुख्य वजह बताया है. दूध की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला है।