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सुशासन, संस्कृति संरक्षण और विश्व मानव कल्याण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को मिलेगा सम्मान

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर सम्राट विक्रमादित्य की गौरवशाली स्मृति में “सम्राट विक्रमादित्य अंतर्राष्ट्रीय सम्मान” स्थापित किया गया है। यह सम्मान सम्राट विक्रमादित्य के शौर्य, न्यायप्रियता, सुशासन, दानशीलता, प्रजावत्सलता एवं भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ, उज्जैन द्वारा संस्कृति विभाग के सहयोग से स्थापित सम्राट विक्रमादित्य अंतर्राष्ट्रीय सम्मान की राशि 1 करोड़ 1 लाख रुपये निर्धारित की गई है। इसके साथ ही 21 लाख रुपये का राष्ट्रीय सम्मान और पाँच-पाँच लाख रुपये के तीन शिखर सम्मान भी स्थापित किए गए हैं। यह सम्मान भारत की सांस्कृतिक गरिमा को विश्व मंच पर नई पहचान प्रदान करेगा। इच्छुक संस्थाएं एवं व्यक्ति 20 मई, 2026 तक सम्मान के लिए नामांकन भर सकते है। महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक  राम तिवारी ने बताया कि सम्मान के लिए आवेदन एवं नामांकन प्रक्रिया शोधपीठ की आधिकारिक वेबसाइट https://awards.mvspujjain.com पर प्रारंभ कर दी गई है। वेबसाइट पर सम्मान से संबंधित दिशा-निर्देश, पात्रता, चयन प्रक्रिया एवं विभिन्न श्रेणियों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई गई है। अंतर्राष्ट्रीय सम्मान,राष्ट्रीय सम्मान एवं शिखर सम्मान के लिए एक “स्पीड रीड” सारांश भी उपलब्ध है। इसमे हर पुरस्कार के अर्हताओं का उल्लेख है। सम्राट विक्रमादित्य अंतर्राष्ट्रीय सम्मान सम्राट विक्रमादित्य अंतर्राष्ट्रीय सम्मान विश्व स्तर पर सक्रिय उन विशिष्ट व्यक्तित्वों एवं संस्थाओं को प्रदान किया जाएगा, जिन्होंने सम्राट विक्रमादित्य के आदर्शों जैसे सुशासन, न्यायप्रियता, प्रज्ञा, दानवीरता, संस्कृति-प्रेम, विज्ञान बोध एवं लोक कल्याण को अपने कार्यों के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया हो। इस सम्मान की राशि 1 करोड़ 1 लाख रुपये निर्धारित की गई है। सम्मान के लिए न्याय, दानवीरता, सुशासन, खगोल एवं ज्योतिष विज्ञान, कला, शौर्य, राजनय, आध्यात्म, विश्व मानव कल्याण, समाज अभ्युदय, अंतर्राष्ट्रीय भाईचारा, भारतीय संस्कृति के उत्थान, सामाजिक नवाचार, भारतीय दर्शन एवं वेदांत के प्रचार-प्रसार सहित जनकल्याणकारी कार्यों के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले भारत सहित विश्वभर के व्यक्ति अथवा संस्थाएँ आवेदन कर सकती हैं । राष्ट्रीय सम्मान राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को 21 लाख रुपये की राशि के राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान न्याय, दानवीरता, वीरता, सुशासन, खगोल एवं ज्योतिष विज्ञान, कला, शौर्य, प्राच्य वाङ्मय, राजनय, आध्यात्मिक क्षेत्र तथा रचनात्मक एवं जनकल्याणकारी कार्यों में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया जाएगा। शिखर सम्मान इन पुरूस्कारों के अतिरिक्त पाँच-पाँच लाख रुपये के तीन शिखर सम्मान भी स्थापित किए गए हैं।यह सम्मान सम्राट विक्रमादित्य के बहुविध गुणों न्याय विधि, खगोल एवं ज्योतिष विज्ञान, कला, शौर्य, प्राच्य वाङ्मय, राजनय, आध्यात्मिक क्षेत्र एवं रचनात्मक जनकल्याणकारी कार्यों में विशिष्ट योगदान देने वाले भारत के सक्रिय व्यक्तियों अथवा संस्थाओं को प्रदान किए जाएंगे। सम्मान के लिए पात्रता सम्मान युग निर्माण, विश्व मानव कल्याण, समाज अभ्युदय, अंतर्राष्ट्रीय भाईचारा, सर्वधर्म समन्वय, भारतीय संस्कृति के उत्थान, सामाजिक नवाचार, भारतीय दर्शन, धर्म, न्याय, परंपरा एवं वेदांत के प्रचार-प्रसार में उत्कृष्ट योगदान देने वाले साधनारत व्यक्ति अथवा संस्थाओं को प्रदान किया जाएगा। सम्मान के लिए देश-विदेश के व्यक्तियों, संस्थाओं, समाजशास्त्रियों, बुद्धिजीवियों, लेखकों, समीक्षकों, पत्रकारों एवं विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों से नामांकन एवं अनुशंसाएँ आमंत्रित की गई हैं। चयन प्रक्रिया सम्मान चयन के लिए प्रति वर्ष उच्च स्तरीय निर्णायक मंडल का गठन किया जाएगा। निर्णायक मंडल में मुख्यमंत्री अध्यक्ष के रूप में एवं केन्द्रीय संस्कृति मंत्री और मुख्य सचिव, मध्यप्रदेश स्थायी सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे। इसके अतिरिक्त समाजसेवियों, बुद्धिजीवियों, समाजशास्त्रियों, लेखकों, पत्रकारों, उद्योगपतियों, न्यायविदों, पुरातत्वविदों, चिकित्सकों एवं विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएगा। चयन प्रक्रिया में संबंधित क्षेत्र में उच्च कोटि की सृजनात्मकता, विशिष्ट उपलब्धि, निरंतर साधना एवं योगदान को आधार बनाया जाएगा। चयन के समय संबंधित व्यक्ति अथवा संस्था का सक्रिय एवं सतत कार्यरत होना अनिवार्य होगा। निर्णायक मंडल के समक्ष प्रस्तुत अनुशंसाओं के अतिरिक्त मंडल स्वविवेक से अन्य नामों पर भी विचार कर सकेगा। एक बार सम्मान प्राप्त कर चुके व्यक्ति अथवा संस्था को पुनः यह सम्मान प्रदान नहीं किया जाएगा। निर्णायक मंडल द्वारा सर्वसम्मति से की गई अनुशंसा राज्य शासन को भेजी जाएगी और शासन की स्वीकृति के बाद ही सम्मान की औपचारिक घोषणा की जाएगी।  

अड़ेंगा शिविर ग्रामीणों के लिए रहा लाभकारी

रायपुर  सुशासन तिहार अंतर्गत आज शुक्रवार को कोंडागांव जिले के केशकाल विकासखंड अंतर्गत ग्राम अड़ेंगा में आयोजित शिविर में जिले के प्रभारी मंत्री एवं प्रदेश के उद्योग, वाणिज्य आबकारी व श्रम विभाग मंत्रीलखनलाल देवांगन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। प्रभारी मंत्री ने शिविर में शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत विभिन्न हितग्राहियों को सामग्री वितरित किए और लगभग 01 करोड़ 06 लाख रूपए की लागत के विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन भी किया। इस अवसर पर कांकेर सांसदभोजराज नाग, केशकाल विधायकनीलकंठ टेकाम सहित कलेक्टर श्रीमती नुपूर राशि पन्ना और स्थानीय जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।  शिविर में विभिन्न मांगों एवं समस्याओं को लेकर कुल 210 आवेदन प्राप्त हुए। प्रभारी मंत्री ने 31 बच्चों को जाति प्रमाण पत्र प्रदाय किया और दसवीं बारहवीं के 05 मेधावी विद्यार्थियों क़ो सम्मानित किया। साथ ही 12 श्रम पंजीयन कार्ड, 30 आधार कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 25 हितग्राहियों को चाबी, 15 जॉब कार्ड, 17 जाति प्रमाण पत्र, 30 लखपति दीदी प्रमाण पत्र, 06 किसान क्रेडिट कार्ड, 24 आयुष्मान कार्ड, 10 जन्म प्रमाण पत्र, 20 डिजिटल किसान कार्ड, राजस्व विभाग द्वारा 15 जाति प्रमाण पत्र और 10 निवासी प्रमाण पत्र, 11 राशन कार्ड, उद्यानिकी विभाग द्वारा 200 पौधों का वितरण, समाज कल्याण विभाग द्वारा 04 मोटराईज्ड सायकल, मत्स्य पालन विभाग द्वारा 01 मत्स्य जाल, 04 जन्म प्रमाण पत्र, राष्ट्रीय परिवार सहायता पेंशन 03 को और क्रेडा विभाग द्वारा 01 हितग्राही को सौर सुजला योजना से लाभान्वित किया गया। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग द्वारा 128 व्यक्तियों की स्वास्थ्य जांच की गई।  शिविर को संबोधित करते हुए मंत्रीदेवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय के नेतृत्व में इन दो वर्षों में जन समस्याओं के समाधान हेतु सुशासन तिहार का आयोजन किया जा रहा है। राज्य सरकार ने मोदी की गारंटी को अल्प समय में पूरा किया। महतारी वंदन योजना, कृषि उन्नति योजना जैसे जनमानस के कल्याण हेतु कई योजनाएं संचालित की जा रही है। केंद्र और राज्य सरकार की कई योजनाएं शिविर के माध्यम से आपके द्वार तक पहुंच रही है। नागरिकों के समस्याओं का त्वरित निराकरण का प्रयास किया जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकार ने बस्तर क्षेत्र में शांति बहाल कर विकास के मार्ग में आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है।  सांसदभोजराज नाग ने कहा कि मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय सुशासन तिहार अंतर्गत गांव गांव में आयोजित शिविर में जाकर जनता से संवाद कर उनकी समस्याएं और मांगो को सुन रहे हैं और त्वरित निराकरण भी की जा रही है। प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी ने विकसित भारत की और मुख्यमंत्री ने विकसित छत्तीसगढ़ की संकल्पना की है इसमें सभी की सहभागिता जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिविर में ज़रूरतमंद हितग्राही को अधिक से अधिक लाभ उठाएं।  विधायकनीलकंठ टेकाम ने कहा कि प्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय गांव, महिला, किसान और गरीब परिवार के हित की चिंता करती है और उनके विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा क्षेत्र के सुदूर गांवों में सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है, जिससे यहां विकास के साथ साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान से गांव गांव तक स्वास्थ्य सेवा पहुंच रही है। सुशासन तिहार के माध्यम योजना गांव गांव तक पहुंच रहा है और शिविर में आवेदनों का निराकरण किया जा रहा है। कार्यक्रम में पूर्व विधायकसेवकराम नेताम ने भी संबोधित किया।  इस अवसर पर जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नंदनी पोटाई, नगर पंचायत अध्यक्षबिहारी लाल शोरी,धीरेन्द्र बघेल,राजकिशोर राठी,लंबोदर सलाम सहित सरपंचभूपेन्द्र ध्रुव, जिला पंचायत सीईओअविनाश भोई, एसडीएम सुश्री आकांक्षा नायक, तहसीलदारगणेश सिदार उपस्थित रहे।

बेटियां पढ़ें-आगे बढ़ें, संदेश के साथ नीतीश सरकार की साइकिल योजना को नया रूप

पटना  वर्ष 2006 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना शुरू की थी। इसका लक्ष्य यह था कि नौवीं कक्षा के बाद लड़कियां स्कूल नहीं छोड़ें। ड्रापआउट को रोकने को ध्यान में रख इस योजना ने बिहार में लड़कियों के बीच नौवीं से आगे की पढ़ाई में एक बड़ा परिवर्तन लाया। गांव-गांव लड़कियां झुंड में साइकिल पर दिखने लगी। इस योजना के बारे में नीतीश कुमार ने तब लिखा था- यह योजना मेरे दिल के करीब (क्लोज टू माइ हार्ट) है। अब सरकार इस योजना में एक प्रतीकात्मक परिवर्तन करने जा रही है। मुख्यमंत्री साइकिल योजना के तहत साइकिल फैक्ट्री वाले जो साइकिल देंगे उसके हैंडल के आगे मोनोग्राम की शक्ल में एक प्लेट लगा होगा जिस पर लिखा होगा- 'बेटियां पढ़ें-आगे बढ़ें'। इस स्लोगन के साथ ही मुख्यमंत्री की तस्वीर भी लगी होगी। इस बारे में सरकार ने साइकिल बनाने वाली कंपनियों से बात कर ली है। 75 प्रतिशत उपस्थिति के आधार पर मिलती है साइकिल के लिए राशि साइकिल दिए जाने की योजना अब लड़कों के लिए भी है। इस मद में तीन हजार रुपए की राशि डीबीटी के माध्यम से विद्यार्थियों काे दी जाती है। वर्ष 2024-25 और 2025-26 के आंकड़े के अनुसार बिहार में 1.15 करोड़ से अधिक छात्र-छात्राएं साइकिल योजना के लिए पात्र हैं। हर साल आठ से दस लाख छात्राएं इस योजना से जुड़ती हैं। साइकिल योजना का असर मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना का असर यह हुआ है कि इसके आरंभ होने से पहले 2005 में 1.87 लाख छात्राएं मैट्रिक परीक्षा में शामिल हुई थीं। अब यह संख्या 8.7 लाख हो गयी है। पोशाक योजना पर भी नजर सरकार की नजर मु्ख्यमंत्री बालिका पोशाक योजना पर भी है। इसके तहत कक्षा से 12 वी तक की छात्राओं को स्कूल ड्रेस के लिए राशि दी जाती है। सरकार अब यह रिपोर्ट बनवा रही है कि कहां-कहां छात्राएं ड्रेस में नहीं आ रहीं।  

आम आदमी को कम खर्च में आवास उपलब्ध कराने के लिए कार्य करें हाउसिंग बोर्ड और विकास प्राधिकरण

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेशवासियों के विकास, उनके जीवन स्तर में सुधार करना और जन-जन के कल्याण के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से योजनाओं और कार्यक्रमों का क्रियावयन सुनिश्चित करते हुए सभी विभाग अपनी सार्थकता को स्थापित करें। विभाग अपने कार्य क्षेत्र की कठिनाइयों और चुनौतियों को चिन्हित करते हुए, सकारात्मक भाव से उनका निराकरण करें। विभाग और जिले जिन क्षेत्रों में पीछे हैं, उनमें सुधार के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं। मध्यप्रदेश को सभी क्षेत्रों में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करना हमारा प्रयास हो। जनहित में किए जाने वाले सभी नवाचारों को राज्य सरकार प्रोत्साहित करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न शासकीय कार्यक्रमों और योजनाओं के क्रियावयन के संबंध में शुक्रवार को मंत्रालय में आयोजित नोडल विभागों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। बैठक में मुख्य सचिवअनुराग जैन सहित अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।     स्वामित्व योजना में महिलाओं के नाम से कराई जाए रजिस्ट्री मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि की नि:शुल्क रजिस्ट्री के कार्य का लाभ प्रदेश के सभी ग्रामवासियों को दिलवाने के लिये अभियान के स्वरूप में संचालित किया जाए। लोकहित के  इस  कार्य में जनप्रतिनिधियों- पंचायत प्रतिनिधियों की सहभागिता आवश्यक रूप से सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वामित्व योजना में महिलाओं के नाम रजिस्ट्री कराई जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र हितग्राहियों को जमीन के नि:शुल्क पट्टे वितरित किए जाने पर विशेष ध्यान दिया जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि घोषित करने की प्रक्रिया को सरल बनाना आवश्यक है। कलेक्टर समय सीमा निर्धारित करते हुए पूरी संवेदनाशीलता और सक्रियता से कार्य करें। इससे ग्रामीण क्षेत्र से शहरों में हो रहे पलायन को कम करने में भी मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शहरी क्षेत्र से सटे गांवों के लिए प्रक्रिया का क्रियान्वयन क्षेत्र का नियोजन कर किया जाए। इससे क्षेत्र के सौंदर्यीकरण में मदद मिलेगी और स्थानीय निवासियों को स्कूल, खेल के मैदान, मूलभूत आवश्यकताओं की दुकानों और धर्मशालाओं जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा सकेंगी। नर्मदा समग्र मिशन से जुड़े सभी कार्यों की समीक्षा के लिए माह के पहले सोमवार को होगी बैठक मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बैठक में बताया गया कि नर्मदा समग्र मिशन की स्थापना के संबंध में नोडल विभाग/स्पेशल सेल के गठन की प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर स्थानीय लोगों को जागरूक कर नर्मदा समग्र अभियान से जोड़ा जाए। जीवनदायिनी मां नर्मदा मध्यप्रदेश की लाइफलाइन है। अमरकंटक स्थित नर्मदा उद्गम स्थल सहित सभी प्रमुख नदियों के उद्गम स्थलों को संरक्षित करने की आवश्यकता है। यहां प्राकृतिक सौंर्दय बना रहे और सीमेंट क्रांकीट के पक्के निर्माण कम हो, इसके लिए उद्गम स्थलों से दूर सुव्यवस्थित सैटेलाइट टाउनशिप विकसित की जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नर्मदा समग्र मिशन से जुड़े सभी कार्यों की प्रगति की समीक्षा के लिए सभी विभागों के अधिकारियों को माह के पहले सोमवार को बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नर्मदा परिक्रमा यात्रियों की सुविधा के लिए पर्याप्त व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए। पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर पर की जाए समीक्षा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रीष्मकाल में नगरीय निकाय एवं ग्राम पंचायतों में पेयजल व्यवस्था की समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गर्मी के मौसम में सभी को पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर पर समीक्षा की जाए। जल संरक्षण के लिए कार्य करने मे जन सामान्य को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा कि अपने ग्राम और वार्ड की बेहतरी के लिए कार्य करने के इच्छुक व्यक्तियों को ''जन्मभूमि से कर्मभूमि तक'' का अभियान चलाये और उन्हें जल संरक्षण गतिविधियों से जोड़ा जाए। जनप्रतिनिधियों के सहयोग से जल संरक्षण गतिविधियों को अभियान का रूप दिया जाए। बैठक में पीएचई, नगरीय विकास और ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को ग्रीष्मकाल में विभाग की तैयारियां वॉटरशेड मिशन की जानकारी दी। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के किसी बसाहट में वर्तमान में जल परिवहन की आवश्यकता नहीं है। नगरीय विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए विभाग नलजल योजना पर तेजी से कार्य कर रहा है। प्रदेश भर में अमृत-1 और अमृत-2 योजना के अंतर्गत पानी और सीवरेज प्रबंधन के लिए कार्य निरंतर प्रगति पर है।   उत्तर प्रदेश सरकार के साथ चित्रकूट धाम के समग्र विकास के लिए होगी संयुक्त बैठक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि चित्रकूट धाम के समग्र विकास के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के साथ संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी। चित्रकूट धाम की मंदाकिनी नदी में पानी की धारा को अविरल रखने की योजना पर कार्य किया जाएगा। देश में विरासत से विकास के मॉडल के साथ धार्मिक पर्यटन का इकोसिस्टम तैयार किया गया है। ओंकारेश्वर के ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के महातम्य से जन-जन को अवगत कराना जरूरी है। ममलेश्वर के विकास से भविष्य में भीड़ प्रबंधन में भी मदद मिलेगी। उन्होंने श्रीराम वन गमन पथ,कृष्ण पाथेय और चित्रकूट धाम में जारी विकास कार्यों को समय सीमा में पूरा करने के दिशा निर्देश दिए। होमगार्ड बल का क्षमता संवर्धन होगा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महाकाल महालोक के प्रबंधन के लिए मंदिर समिति द्वारा होमगार्ड की व्यवस्था की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने प्रदेश के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थानों पर भी होमगार्ड के माध्यम से व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे होमगार्ड बल का क्षमता संबर्धन भी होगा, जिसका उपयोग प्रदेश में अन्य स्थानों पर भी किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिला पर्यटन परिषदों को भी जिला स्तर पर पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने में सहभागी बनाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विभिन्न समाजों और संस्थाओं द्वारा बनाई जाने वाली धर्मशालाओं में राज्य शासन सहयोग प्रदान करें, इससे धार्मिक पर्यटन के लिए आने वाले गरीब वर्ग को राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ:2028 के दृष्टिगत उज्जैन के दताना मताना हवाई पट्टी के स्थान पर 2700 मीटर लंबी नवीन … Read more

पंचायत भूमि के कथित गलत पंजीकरण पर हाईकोर्ट ने जांच के दिए आदेश

चंडीगढ़  हरियाणा के कैथल जिले के गांव खरोड़ी की पंचायत भूमि को लेकर ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ (एमएफएमबी) योजना में कथित फर्जीवाड़े का मामला पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट पहुंच गया, जहां अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, कैथल के डिप्टी डायरेक्टर को पूरे प्रकरण की जांच कर उचित कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस जगमोहन बंसल की अदालत में गुरमीत सिंह द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया कि गांव की पंचायत भूमि, जिसमें चरागाह भूमि भी शामिल है, को कुछ लोगों ने फर्जी तरीके से अपने नाम पर ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल में पंजीकृत करवा लिया। फर्जी काश्तकारों ने किया योजना का दुरुपयोग याचिकाकर्ता के अनुसार यह योजना किसानों की वास्तविक पहचान सुनिश्चित करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सहित सरकारी लाभ देने के लिए बनाई गई थी, लेकिन गांव में इस व्यवस्था का दुरुपयोग कर फर्जी काश्तकार खड़े कर दिए गए। याचिका में कहा गया कि कई प्रतिवादी ने पंचायत की बड़ी भूमि, खासकर चरागाह क्षेत्र, पर अवैध पंजीकरण कराया। शिकायतकर्ता ने इस संबंध में सीएम विंडो और जिला प्रशासन सहित विभिन्न अधिकारियों को शिकायत दीं, लेकिन संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई। अदालत में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से 21 अप्रैल 2026 की जांच रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें बताया गया कि मामले की जांच की जा चुकी है और कुछ सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं। पंचायत भूमि को लीज पर नहीं दी गई हालांकि, याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि रिपोर्ट के बावजूद खेवट नंबर 685, 686 और 690 की पंचायत भूमि को लीज पर नहीं दी गई थी और न ही किसी द्वारा वैध रूप से उपयोग की गई, फिर भी कथित रूप से फर्जी फसल दर्शाकर दूसरे राज्यों से प्राप्त वास्तविक उपज के समायोजन के जरिए राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया। इन तथ्यों के मद्देनजर हाई कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए डिप्टी डायरेक्टर, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, कैथल को निर्देश दिया कि वह शिकायतकर्ता द्वारा उठाए गए मुद्दों की गहन जांच करें और कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।

अम्बेडकरनगर ने रचा इतिहास, प्रदेश में बना मिसाल

अम्बेडकरनगर  योगी सरकार के पर्यावरण संरक्षण और जन-जागरूकता मिशन को नई ऊंचाई मिली है। अम्बेडकरनगर जनपद में शुक्रवार को सभी 899 ग्राम पंचायतों ने एक साथ ग्रीन चौपाल का आयोजन कर इतिहास रच दिया गया। सुबह 9 से 10 बजे तक चले इस कार्यक्रम में पेट्रोल-डीजल की खपत घटाने, हरित परिवहन को बढ़ावा देने व पर्यावरण संरक्षण के व्यापक प्रस्ताव पारित किए गए। अम्बेडकरनगर का यह सामूहिक प्रयास पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आह्वान के परिप्रेक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में ईंधन व ऊर्जा बचत, पर्यावरण संरक्षण तथा स्वच्छता अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया। जिलाधिकारी ईशा प्रिया के निर्देशन में इस आयोजन में ग्राम प्रधानों ने सक्रिय भूमिका निभाई। सभी पंचायतों में एक ही समय पर लगाई गई ग्रीन चौपाल में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने हिस्सा लिया। ग्राम प्रधानों ने पेट्रोल-डीजल की खपत घटाने का बीड़ा उठाते हुए सार्वजनिक परिवहन, कार पूलिंग, इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग और हरित परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने का सामूहिक प्रण लिया। इस दौरान पौधरोपण, जल संरक्षण, गो-संरक्षण, स्वच्छता, जैविक खेती, सौर ऊर्जा, पराली न जलाने और कचरा प्रबंधन जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। मानसून को देखते हुए 30 जून तक प्री-प्लांटेशन की तैयारियां पूरी करने की कार्ययोजना भी बनाई गई। जिलाधिकारी ने बताया कि इस आयोजन के माध्यम से जनपद ने दो महत्वपूर्ण कीर्तिमान स्थापित किए हैं। पहला, अधिकतम ग्राम पंचायतों द्वारा एक साथ एक समय में आयोजन करना। दूसरा, सबसे कम समय में इतने वृह्द जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन। सभी ग्राम पंचायतों में आयोजित ग्रीन चौपालों में आगामी पौधरोपण महोत्सव पर हर परिवार द्वारा कम से कम पांच पौधे लगाने और उनकी देखभाल सुनिश्चित करने की बात कही गई। इसके अलावा जल संरक्षण, गो–संरक्षण, स्वच्छता, हरित एवं जैविक खेती, मृदा संरक्षण ऊर्जा संरक्षण, सौर ऊर्जा, पर्यावरण व शिक्षा के लिए जागरूकता अभियान चलाने पर भी सहमति दर्ज की गई।  प्रभारी मंत्री ने पहल को सराहा प्रभारी मंत्री गिरीश चंद्र यादव ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि योगी सरकार के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन द्वारा किया गया यह अभिनव प्रयास पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। प्रधानमंत्री तथा मुख्यमंत्री के आह्वान पर ग्रामीण क्षेत्रों तक ऊर्जा बचत और हरित परिवहन का संदेश पहुंचाना सराहनीय है। मंत्री ने जनता से अपील की कि हर नागरिक व्यक्तिगत स्तर पर पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने का संकल्प ले और आवश्यकता अनुसार ही वाहन का उपयोग करे।

10 लाख से अधिक आवास हुए स्वीकृत

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में हर जरूरतमंद परिवार को पक्का घर उपलब्ध कराने के संकल्प को साकार करते हुए मध्यप्रदेश ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के क्रियान्वयन में देशभर में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में 10 लाख से अधिक आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिससे आवास निर्माण एवं हितग्राहियों को आवास उपलब्ध कराने में देश के अग्रणी राज्यों में मध्यप्रदेश ने अपनी मजबूत पहचान बनाई है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्तसंकेत भोंडवे ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) अंतर्गत मध्यप्रदेश ने आवासों की ग्राउंडिंग में देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश में 98.04 प्रतिशत आवासों की ग्राउंडिंग पूर्ण हो चुकी है। यह प्रभावी क्रियान्वयन, सतत मॉनिटरिंग एवं समयबद्ध कार्यप्रणाली का परिणाम है। वहीं 9 लाख से अधिक आवार्सी का निर्माण पूर्ण कर पात्र हितग्राहियों को सौंपा जा चुका है। योजना के माध्यम से हजारों परिवारों का अपने पक्के घर का सपना साकार हुआ है, जिससे उनके जीवन स्तर, सामाजिक सुरक्षा एवं सम्मान में सकारात्मक बदलाव आया है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) का उद्‌देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, निम्न आय वर्ग एवं मध्यम आय वर्ग के शहरी परिवारों को सुरक्षित एवं सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना है। योजना अंतर्गत हितग्राहियों को आवास निर्माण हेतु आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जिससे वे मूलभूत सुविधाओं से युक्त पक्के घर में जीवन यापन कर सकें। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश शासन द्वारा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, सतत मॉनिटरिंग एवं समयबद्ध निर्माण कार्यों के चलते प्रदेश लगातार राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है।भोंडवे ने बताया कि नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्रत्येक पात्र शहरी परिवार को आवास योजना का लाभ समय पर प्राप्त हो सके। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के माध्यम से प्रदेश में न केवल आवास निर्माण को गति मिली है, बल्कि शहरी क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विकास, रोजगार सृजन एवं सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिला है। राज्य शासन द्वारा भविष्य में भी योजना के प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन हेतु निरंतर प्रयास किए जाते रहेंगे।  

अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस पर यूपी सरकार की पहल, 3000 साल पुरानी वस्तुएं आम लोगों के लिए फ्री

लखनऊ उत्तर प्रदेश राज्य संग्रहालय में संरक्षित तीन हजार वर्ष पुरानी मूर्तियां, पांडुलीपि और प्राचीन सिक्के को पर्यटन निःशुल्क देख सकेंगे। अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति विभाग ने सभी पर्यटकों और दर्शकों को 30 जून तक यह छूट दी है। 18 मई को अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस है। इस मौके पर राजधानी सहित प्रदेश के सभी राजकीय संग्रहालयों में हमारा संग्रहालय, हमारी धरोहर के तहत कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं।  इसी के तहत राज्य संग्रहालय के सहयोग से सभी शिक्षण संस्थानों में निबंध एवं प्रश्नोत्तरी व पेंटिग प्रतियोगिता प्रतियोगिताएं हो रही हैं। राज्य पुरातत्व निदेशालय की निदेशक रेनू द्विवेदी ने बताया कि निदेशालय की ओर से लखनऊ विश्वविद्यालय में उत्तर प्रदेश सभ्यता से संस्कृति विषय पर छायाचित्र प्रदर्शनी लगाई जाएगी। राज्य संग्रहालय के निदेशक विनय कुमार सिंह ने बताया कि संग्रहालय में करीब 1.5 लाख से अधिक ऐतिहासिक, पुरातात्विक और सांस्कृतिक वस्तुएं संरक्षित हैं। यहां तीन हजार वर्ष पुरानी मिस्र की ममी और लकड़ी का ताबूत, भगवान बुद्ध की मूर्तिया, 5वीं सदी के शिव, नृत्य करते नटराज, और 6वीं सदी की सूर्य प्रतिमा, प्राचीन सिक्के, जिनमें पंचाल, अयोध्या, इंडो-ग्रीक और गुप्त काल के सिक्के शामिल हैं। मुगल और पहाड़ी शैली के लघु चित्र, जैन कल्प सूत्र पांडुलिपियां, 16वीं से 19वीं सदी के तलवारें, कवच, जेड की वस्तुएं, हाथी दांत की नक्काशी और बिदरी शिल्प के बर्तन, ऐतिहासिक वस्तुएं संरक्षित हैं। दर्शक 30 जून तक इसे निःशुल्क देख सकेंगे।  

75 जिलों की सभी गोशालाओं में होगी कृषि सखियों की तैनाती

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में गो संरक्षण को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पहली बार इतने बड़े स्तर पर व्यापक और संगठित मॉडल पर काम शुरू होने जा रहा है। योगी सरकार अब गो संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तीकरण और जैविक खेती से जोड़कर नए रोजगार मॉडल के रूप में विकसित करने जा रही है। इसके लिए योगी सरकार ने मास्टर प्लान तैयार किया है, जिसके तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों की साढ़े सात हजार से अधिक गोशालाओं में कृषि सखियों की तैनाती की जाएगी। इस पूरी योजना में उत्तर प्रदेश आजीविका मिशन की महिलाओं को विशेष भूमिका सौंपी जा रही है। योगी सरकार की योजना है कि ग्रामीण क्षेत्र की माताएं और बहनें गो संरक्षण में भी सहभागी बनें और गोशालाओं को आत्मनिर्भरता व समृद्धि के केंद्र के रूप में विकसित करें। इसके लिए प्रदेश स्तर पर महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण देकर मास्टर ट्रेनर बनाया जाएगा, जो आगे गांव-गांव में अन्य महिलाओं को प्रशिक्षित करेंगी। गोशालाओं से निकलेगा समृद्धि का रास्ता उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि योगी सरकार की रणनीति के अनुसार प्रदेश की सभी गोशालाओं को रोजगार और जैविक कृषि के मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। गोशालाओं से निकलने वाले गोबर का उपयोग बड़े पैमाने पर जैविक खाद तैयार करने में होगा। इसके लिए महिलाओं के माध्यम से खाद निर्माण इकाइयां संचालित की जाएंगी।  इससे एक ओर जहां गो संरक्षण को मजबूती मिलेगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। खासतौर पर महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह अभियान मील का पत्थर साबित हो सकता है। बदलेगी गांवों की तस्वीर, खेती की लागत घटेगी और मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होगी योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जैविक खाद के बड़े स्तर पर उत्पादन से किसानों को रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। इससे खेती की लागत घटेगी और मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होगी। जैविक खाद के उपयोग से किसानों की आय बढ़ेगी और प्रदेशवासियों को स्वास्थ्य के लिहाज से सुरक्षित एवं बेहतर खाद्यान्न उपलब्ध हो सकेगा। यही कारण है कि इस पूरी योजना को गांव, किसान, महिला और गो संरक्षण को एक साथ जोड़ने वाले गो समृद्धि अभियान के रूप में देखा जा रहा है। महिलाओं की बड़ी भागीदारी से मजबूत होगा अभियान उत्तर प्रदेश आजीविका मिशन से जुड़ी कृषि सखियां इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत बनेंगी। योगी सरकार का उद्देश्य है कि गो संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए इसे स्थायी आर्थिक गतिविधि के रूप में विकसित किया जाए। यही वजह है कि इस अभियान में महिलाओं की भूमिका केवल सहयोगी नहीं बल्कि नेतृत्वकारी होगी। उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि गोशालाओं से निकला यह नया मॉडल आने वाले समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल सकता है और उत्तर प्रदेश को जैविक खेती एवं गो आधारित अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में नई पहचान दिला सकता है।

मुख्यमंत्री श्विष्णु देव साय ने उच्च स्तरीय बैठक लेकर तैयारियों की समीक्षा की

रायपुर मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में बस्तर में आयोजित होने वाली मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक की तैयारियों को लेकर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। यह महत्वपूर्ण बैठक केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित होगी, जिसमें मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री शामिल होंगे।  बैठक के दौरान अधिकारियों ने प्रस्तुतीकरण (पीपीटी) के माध्यम से राज्य सरकार द्वारा परिषद की बैठक में उठाए जाने वाले विभिन्न विषयों की जानकारी मुख्यमंत्री को दी। मुख्यमंत्री ने सभी बिंदुओं की विस्तार से समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्रीसाय ने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपते हुए निर्देश दिए कि आयोजन की तैयारियों में किसी प्रकार की कमी न रहे और सभी व्यवस्थाएं गंभीरता एवं समन्वय के साथ सुनिश्चित की जाएं।       मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में मध्य क्षेत्रीय परिषद के राज्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह परिषद देश की ऐसी क्षेत्रीय परिषद है जहां सदस्य राज्यों के बीच किसी प्रकार का विवाद नहीं है, जो आपसी सहयोग और समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय परिषदें राज्यों तथा केंद्र और राज्यों के बीच विभिन्न विषयों पर संवाद, सहयोग और समन्वय को मजबूत करने का प्रभावी मंच बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि “मजबूत राज्य ही मजबूत राष्ट्र का निर्माण करते हैं” और इसी भावना के साथ क्षेत्रीय परिषदें विकास, प्रशासनिक समन्वय और राष्ट्रीय एकता को नई दिशा प्रदान कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में इन परिषदों ने राज्यों के बीच स्वस्थ सहयोग और विकासोन्मुखी सोच को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।                  मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि बस्तर में इस महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति स्थापना के बाद इस स्तर की राष्ट्रीय बैठक का आयोजन यह दर्शाता है कि राज्य सरकार क्षेत्र के विकास और नई संभावनाओं को लेकर पूरी तरह संकल्पित है। मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्रीअमित शाह के नेतृत्व में नक्सल उन्मूलन से क्षेत्र में शांति स्थापित हुई है तथा अब बस्तर विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि इंद्रावती की गोद से बस्तर विकास की नई गाथा लिखेगा और मध्य क्षेत्रीय परिषद की यह बैठक क्षेत्र के विकास को नई गति प्रदान करेगी।