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भोपाल, नर्मदापुरम और रायसेन के चयनित अभ्यर्थियों को वितरित की किट

भोपाल पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  कृष्णा गौर ने शुक्रवार को अपेक्स बैंक परिसर के समन्वय भवन में 'शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना' का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में भोपाल महापौर  मालती राय, मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया और विधायक श्री भगवानदास सबनानी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में योजना के अंतर्गत भोपाल, नर्मदापुरम और रायसेन जिले के चयनित अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया, जिन्हें राज्यमंत्री  गौर ने प्रशिक्षण किट वितरित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। राज्यमंत्री  गौर ने युवाओं का स्वागत करते हुए इसे अपने राजनीतिक जीवन का एक ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में हमने यह प्रण लिया था कि पिछड़ा वर्ग के युवाओं का जीवन बेहतर बनाने के लिए हम कुछ ठोस करेंगे और यह योजना युवाओं को सशक्त बनाने का एक बड़ा अभियान है। राज्यमंत्री  गौर ने बताया कि 45 दिन तक चलने वाली यह विभाग की पहली ऐसी रोजगार परक प्रशिक्षण योजना है, जो ओबीसी अभ्यर्थियों को ट्रेनिंग के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, शौर्य, समर्पण और संकल्प का ज्ञान भी देगी। हमारी योजना का नाम ही 'शौर्य और संकल्प' है, जो अपने आप में एक प्रेरणा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नियत किए गए विकास के 4 स्तंभों में युवाओं को एक अहम स्तंभ बताते हुए मंत्री  गौर ने युवा शक्ति का आह्वान किया कि वे किसी के भ्रम में न आएं। हमारी केंद्र और राज्य सरकार कौशल, संकल्प और प्रेरणा के जरिए युवाओं को निखारने का काम कर रही है, जो राष्ट्रसेवा की सशक्त राह पर आगे बढ़ाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त करते हुए मंत्री  गौर ने विभागीय उपलब्धियां भी साझा कीं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के इतिहास में पहली बार ओबीसी हॉस्टल में 'मेस' की सुविधा शुरू होने जा रही है, जहां विद्यार्थियों को निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की संवेदनशीलता है कि 'दिल्ली छात्रगृह योजना' की सहायता राशि को 1,550 रुपए से बढ़ाकर सीधे 10 हजार रुपए प्रतिमाह कर दिया गया है। इसके अलावा छात्राओं को बेहतर वातावरण देने के लिए 31 कन्या छात्रावासों को 'आदर्श छात्रावास' के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पूरे देश में मध्यप्रदेश पहला राज्य और हमारा विभाग पहला विभाग है, जो 'सोशल इंपैक्ट बॉन्ड' के माध्यम से युवाओं को ट्रेनिंग देकर विदेश भेजने की तैयारी कर रहा है। 'सरदार पटेल कोचिंग योजना' के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर ओबीसी विद्यार्थियों को नीट, क्लैट और जेईई जैसी परीक्षाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने का संकल्प हमारी सरकार ने किया है। कार्यक्रम में महापौर  मालती राय ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार मानते हुए कहा कि राज्यमंत्री  गौर ने ओबीसी वर्ग के छात्रों की बेहतरी के लिए एक शानदार योजना को जमीन पर उतार दिया है। मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने कहा कि राज्यमंत्री  गौर के प्रयासों से ही आज यह ऐतिहासिक योजना मूर्त रूप ले रही है। विधायक श्री भगवानदास सबनानी ने कहा कि 'शौर्य संकल्प प्रशिक्षण' जैसी योजना देशभर में केवल मध्यप्रदेश सरकार ने ही शुरू की है। इससे प्रतीक होता है कि सरकार सभी वर्गों के विकास के प्रति कितनी संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ रही है। आयुक्त पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण श्री सौरभ सुमन ने बताया कि इस योजना के लिए कुल 6,687 आवेदन प्राप्त हुए थे। पारदर्शी स्क्रीनिंग के बाद 3,664 अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण के लिए अंतिम रूप से चयनित किया गया है, जिनमें 2,030 छात्र और शेष छात्राएं शामिल हैं। इन चयनित अभ्यर्थियों को सैद्धांतिक और प्रैक्टिकल शिक्षा दी जाएगी। इसके अलावा, आधुनिक तरीके से तैयारी करने के लिए 'ऐप बेस्ड ट्रेनिंग मटेरियल' भी उपलब्ध रहेगा। आयुक्त श्री सुमन ने छात्रों को विश्वास दिलाया कि योजना की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए अगर आवश्यकता हुई तो मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्री के अनुमोदन के बाद अन्य जिलों तक इस योजना का विस्तार किया जाएगा और सीटों की संख्या में भी विस्तार किया जाएगा।

सीएम योगी के निर्देश पर 100 निजी अस्पतालों का रोका भुगतान, 100 अस्पताल योजना से निलंबित

लखनऊ योगी सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण और जवाबदेह बनाने की दिशा में लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी क्रम में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत निर्धारित मानकों का पालन नहीं करने वाले निजी चिकित्सालयों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश हैं कि योजना के लाभार्थियों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराने में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अस्पतालों की सूचीबद्धता और गुणवत्ता परीक्षण की प्रक्रिया को किया गया और अधिक सख्त  साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना देश के आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्गों को निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की एक महत्वपूर्ण योजना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश में इसे अधिक प्रभावी, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए समय-समय पर सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। इसी दिशा में अस्पतालों की सूचीबद्धता और गुणवत्ता परीक्षण की प्रक्रिया को और अधिक सख्त बनाया गया है। योगी सरकार द्वारा अस्पताल इम्पैनलमेंट मॉड्यूल (एचईएम) पोर्टल के माध्यम से सूचीबद्ध अस्पतालों का सत्यापन निर्धारित मानकों के आधार पर किया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत अस्पतालों के लिए 35 महत्वपूर्ण मानकों को पूरा करना अनिवार्य किया गया है। इनमें अस्पताल का पंजीकरण प्रमाणपत्र, फायर सेफ्टी एनओसी, आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर, चिकित्सकों की शैक्षणिक योग्यता, एचएफआर पंजीकरण सहित अन्य जरूरी दस्तावेज और व्यवस्थाएं शामिल हैं। 200 निजी चिकित्सालयों ने मानकों के अनुरूप नहीं पूरी की प्रक्रिया  सीईओ ने बताया कि नेशनल हेल्थ अथॉरिटी और स्टेट हेल्थ एजेंसी की ओर से ई-मेल, दूरभाष, संदेश, पत्राचार और वर्चुअल बैठकों के माध्यम से अस्पतालों को हर स्तर पर सहायता दी गई। इसका सकारात्मक परिणाम यह रहा कि अब तक 95 प्रतिशत से अधिक अस्पताल सफलतापूर्वक एचईएम 2.0 पोर्टल पर माइग्रेट हो चुके हैं। हालांकि, कुछ निजी अस्पतालों ने निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी नहीं की। योगी सरकार की ओर से उन्हें कई बार अवसर दिए गए, लेकिन इसके बावजूद करीब 200 निजी चिकित्सालयों ने मानकों के अनुरूप प्रक्रिया पूरी नहीं की। इनमें आगरा, अलीगढ़, प्रयागराज, अमेठी, अमरोहा, आजमगढ़, बागपत, बांदा, बाराबंकी, बरेली, बस्ती, बिजनौर, बुलंदशहर, चंदौली, चित्रकूट, देवरिया, फर्रुखाबाद, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, हाथरस, जौनपुर, झांसी, कन्नौज, कानपुर नगर, कुशीनगर, ललितपुर, लखनऊ, मथुरा, मऊ, मेरठ, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, प्रतापगढ़, संतकबीरनगर, सुल्तानपुर, वाराणसी, शाहजहांपुर, जालौन, मिर्जापुर, अंबेडकरनगर, रामपुर और सोनभद्र सहित कई जिलों के अस्पताल शामिल हैं। 100 निजी अस्पतालों का रोका गया भुगतान सीएम योगी के निर्देश पर ऐसे अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए 100 अस्पतालों का भुगतान रोक दिया गया है, जबकि करीब 100 अन्य अस्पतालों को योजना से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई यह सुनिश्चित करने के लिए की गई है कि आयुष्मान योजना के लाभार्थियों को केवल मानक आधारित और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं ही प्राप्त हों। बता दें कि योगी सरकार ने सभी सूचीबद्ध अस्पतालों को एनएबीएच गुणवत्ता प्रमाणन प्राप्त करने के लिए भी निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही राज्य और जिला स्तर पर अस्पतालों की नियमित ऑडिट और मॉनिटरिंग भी कराई जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता को समय रहते रोका जा सके। सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक के अधिकतम उपयोग पर भी विशेष जोर दे रही है। अस्पतालों में डिजिटल माध्यम से मरीजों के निस्तारण को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने के लिए एबीडीएम सक्षम एचएमआईएस प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।  इसके अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड (ईएचआर) प्रणाली को भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। इससे मरीजों का स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा और इलाज की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और तेज होगी। राज्य स्तर से अस्पतालों को पोर्टल संचालन और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही ऐसे मामलों पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है, जिनमें चिकित्सकों की डिग्री अथवा विवरण के अनुचित उपयोग की शिकायतें प्राप्त हुई हैं। ऐसे मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

नदियां हमारी प्रत्यक्ष शक्तियां हैं : दादा गुरू

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में पानी को बचाने और सहेजने के लिए सरकार के साथ ही आम नागरिक भी सजग और सक्रिय हैं। इसी कारण मध्यप्रदेश केन्द्र सरकार द्वारा करवाए गए जल संरक्षण और जन संचयन के कार्यों में अग्रणी राज्य है। नर्मदा मिशन जैसी संस्थाएं जल संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक करने का सराहनीय कार्य कर रही हैं। मध्यप्रदेश में सभी शासकीय विभाग पानी बचाने और लोगों को जल स्त्रोतों के जीर्णोद्धार के लिए मिलकर कार्य करने की भूमिका निभा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और अन्य अतिथियों ने परिसर स्थल में देशी उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। बाल चित्रकार श्री विक्रम लोधी ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को मां नर्मदा का चित्र भेंट किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को रवीन्द्र भवन में नर्मदा चिंतन बौद्धिक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर श्री दादा गुरु भगवान ने प्रवचन द्वारा मार्गदर्शन दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और दादा गुरु ने स्मित अपराजिता की पुस्तक "समर्थ दृष्टि: साधना के शिखर" का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में विभिन्न श्रेष्ठ सामाजिक कार्य करने वाले व्यक्तियों को समर्थ नर्मदा अलंकरण प्रदान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में कुंए, बावड़ियां, पोखर, नहर और अन्य जल स्त्रोतों एवं जल संरचनाओं के संरक्षण के कार्य चल रहे हैं। गुड़ी पड़वा से प्रारंभ हुए जल गंगा संवर्धन अभियान की गतिविधियां आगामी 30 जून तक निरंतर चलेंगी। इतनी लंबी अवधि के इस अभियान का उद्देश्य जल संरचनाओं को उपयोगी बनाना और पानी के प्रति जन जागृति बढ़ाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संवर्धन अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिला है। प्रदेश में अनेक त्यौहार भी शासन-प्रशासन के साथ मिलकर मनाए गए हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकास और विरासत के संरक्षण के आहवान पर मध्यप्रदेश अमल कर रहा है। पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि नदियों के उद्गम स्थलों के अवलोकन और उन्हें उपयोगी बनाए रखने की दिशा में पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग कार्य कर रहा है। ऐसे प्रयासों में सराहनीय जनभागीदारी मिल रही है। वरिष्ठ राष्ट्रवादी विचारक श्री गोपाल आर्य ने कहा कि हमारे देश में अमृता देवी जैसी महिलाएं हुई हैं, जो वृक्षों को बचाने के लिए बलिदान से भी पीछे नहीं हटी। साधक और शासक जब समाज के बीच में रह कर कार्य करते हैं तो श्रेष्ठ परिणाम सामने आते हैं। कार्यक्रम में दादा गुरू ने कहा कि भारत की संस्कृति ने दुनिया को दर्शन दिया है। हमारी प्रकृति यह संकेत दे रही है कि हम सभी मिलकर पर्यावरण की चिंता करें। हमारी नदियां हमारी शक्ति है। गंगा-यमुना-नर्मदा जल के रूप में प्रवाहित होने वाली प्रत्यक्ष शक्तियां हैं। नर्मदा पथ व्यक्तित्व निर्माण का पथ है। दादा गुरू ने मध्यप्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान में हो रहे कार्य की प्रशंसा की। मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद के उपाध्यक्ष श्री मोहन नागर ने प्रदेश में जनसहयोग से जल संरचनाओं के संरक्षण के कार्यों का विवरण दिया। कार्यक्रम में खेल मंत्री श्री विश्वास सारंग, राज्यसभा सदस्य  माया नारोलिया, विधायक श्री भगवानदास सबनानी और अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।  

11.54 लाख किसानों से 80.90 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का हुआ उपार्जन : खाद्य मंत्री राजपूत

भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया है कि अभी तक 11 लाख 54 हजार 593 किसानों से 80 लाख 90 हजार 864 मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। उन्होंने बताया है की तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक तथा देयक जारी करने का समय रात 12 तक कर दिया गया है। गेहूँ का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन सोमवार से शनिवार तक किया जा रहा है। मंत्री  राजपूत ने बताया है कि किसानों के हित में गेहूँ उपार्जन की अवधि 9 मई से बढ़ाकर 23 मई 2026 तक की गई। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल कांटों की संख्या में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिए जाने का निर्णय लिया गया। साथ ही एनआईसी सर्वर की क्षमता एवं संख्या में वृद्धि कराई गई। खाद्य विभाग द्वारा प्रति घंटा उपार्जन की मॉनिटरिंग की जा रही है। मंत्री  राजपूत ने बताया कि किसानों को 9522.92 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। उपार्जित गेहूँ में से 69 लाख 12 हजार 735 मीट्रिक टन का परिवहन किया जा चुका है। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। भोपाल संभाग में 22 लाख 86 हजार 653, उज्जैन संभाग में 18 लाख 92 हजार 792, नर्मदापुरम संभाग में 6 लाख 43 हजार 490, जबलपुर संभाग में 8 लाख 96 हजार 187, सागर संभाग में 6 लाख 67 हजार 881, ग्वालियर संभाग में 3 लाख 32 हजार 94, रीवा संभाग में 4 लाख 77 हजार 510, इंदौर संभाग में 6 लाख 59 हजार 985, चंबल संभाग में एक लाख 77 हजार 589 और शहडोल संभाग में 5 लाख 66 हजार 83 मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन हुआ है।  

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने निर्माणाधीन कार्यों का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति की समीक्षा की

रायपुर  लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने आज संभागीय मुख्यालय दुर्ग में लोक निर्माण विभाग के दुर्ग परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता तथा कार्यपालन अभियंताओं की बैठक लेकर भवनों, सड़कों और पुलों के निर्माण की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने दुर्ग और पाटन में तीन कार्यस्थलों पर जाकर कार्यों का निरीक्षण भी किया। श्री बंसल ने बैठक में अधिकारियों को भविष्य की जरुरतों के अनुरूप सभी सड़क खंडों पर फ्लाई-ओवर्स की समग्र योजनाओं के साथ काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने दुर्ग परिक्षेत्र के लोक निर्माण विभाग के सभी संभागों में प्रगतिरत कार्यों में तेजी लाते हुए समय-सीमा में काम पूर्ण करने को कहा। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री वी.के. भतपहरी भी बैठक में मौजूद थे। लोक निर्माण विभाग के सचिव ने निविदा प्रक्रिया पूर्ण होने के 15 दिनों के भीतर चयनित एजेंसी से अनुबंध की कार्यवाही पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता और समय-सीमा में काम सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। विभागीय अधिकारी अपने सुव्यवस्थित और समयबद्ध कार्यों से नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के बीच विभाग की अच्छी छवि बनाएं। सभी कार्यों को पूरी जवाबदेही, सक्रियता और गंभीरता से अंजाम दें। सचिव श्री बंसल ने सभी अधिकारियों को मुख्यालय में रहकर निर्माणाधीन कार्यों की पुख्ता और नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को अपने कार्यक्षेत्र के सड़कों की स्थिति की पूरी जानकारी रखते हुए परफार्मेंस गारंटी वाली सड़कों में सुधार की जरूरत पर संबंधित ठेकेदारों से तत्काल मरम्मत कराने को कहा। उन्होंने मैदानी स्तर पर भू-अर्जन में आ रही बाधाओं से वरिष्ठ कार्यालयों को अवगत कराने को कहा, ताकि निराकरण की कार्यवाही उच्च स्तर पर यथासमय की जा सके। उन्होंने इनके निराकरण में किसी भी प्रकार की देरी नहीं करने को कहा। लोक निर्माण विभाग के सचिव ने शासकीय भवनों के निर्माण के लिए भूमि की उपलब्धता एवं उपयोगिता के अनुरूप हॉरिजांटल की जगह वर्टिकल निर्माण को बढ़ावा देते हुए आधुनिक डिजाइनों और नई तकनीकों से निर्माण की कार्ययोजना बनाने पर जोर दिया। उन्होंने भवनों के निर्माण के दौरान निर्माण सामग्री से लेकर टाइल्स, पुट्टी और पेंट अच्छी गुणवत्ता का उपयोग करने को कहा। उन्होंने भूजल स्तर को रिचार्ज करने सभी भवनों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग की भी व्यवस्था के निर्देश दिए। कार्यस्थलों का दौरा कर कार्यों की देखी प्रगति  लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने दुर्ग के साइंस कॉलेज में बन रहे 750 सीटर आडिटोरियम के कार्यों का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यों में तेजी लाते हुए जल्द इसका निर्माण पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने जेल तिराहा से मिनीमाता चौक पुलगांव तक के सड़क चौड़ीकरण कार्य का भी अवलोकन किया और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। लोक निर्माण विभाग के सचिव ने पाटन शासकीय कॉलेज के निर्माणाधीन भवन के कार्यों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने यहां नए भवन में क्लास-रुम, लैब, शौचालय इत्यादि का अवलोकन किया। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को कॉलेज प्रबंधन से मिलकर विद्यार्थियों की जरूरतों और उपयोगिता के मुताबिक सभी कार्यों को संपादित करने के निर्देश दिए। उन्होंने पूरे कॉलेज परिसर को हरा-भरा, सुंदर और सुव्यवस्थित करने को कहा।

‘कमाई से 5 गुना ज्यादा खर्च कैसे?’ राहुल गांधी की फंडिंग को लेकर BJP ने घेरा

नई दिल्ली राहुल गांधी की विदेश यात्राओं पर खुलासा करते हुए BJP ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं। BJP सांसद संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पिछले 22 साल में किए अपने 54 दौरों पर राहुल गांधी ने करीब 60 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यह उनकी इनकम के 5 गुना से भी ज्यादा है। संबित पात्रा के मुताबिक, राहुल गांधी करीब 22 साल से निर्वाचित पद पर हैं। उन्होंने इन वर्षों में कई बार विदेश दौरे किए हैं। उन्होंने आधिकारिक तौर पर 54 विदेश यात्राएं की हैं। ये यात्राएं सार्वजनिक हैं, लेकिन इनका खर्च पब्लिक नहीं है। राहुल गांधी की हर विदेश यात्रा पर करीब 3-4 लोग उनके साथ गए और उनकी विदेश यात्राओं का कुल खर्च 60 करोड़ रुपये है। राहुल गांधी ने विदेश यात्राओं पर इनकम से 5 गुना कैसे किया खर्च? उन्होंने आगे कहा कि हमारे पास 2013-14 से 2022-23 तक राहुल गांधी की इनकम का विवरण है। इस दौरान, 10 साल में राहुल गांधी की इनकम 11 करोड़ रुपये थी। 11 करोड़ रुपये की इनकम वाले राहुल गांधी ने 60 करोड़ रुपये सिर्फ अपने विदेश दौरों पर खर्च किए हैं। ये कैसे मुमकिन है। उनको कौन फंड कर रहा है। क्या किसी विदेशी कंपनी ने फंड किया तो क्या राहुल गांधी ने नियमों का पालन किया। विदेशी दौरों पर खर्च 60 करोड़ संबित पात्रा ने आंकड़ों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि साल 2004 से 2026 के बीच राहुल गांधी ने 54 व्यक्तिगत (निजी) विदेश यात्राएं की हैं। उन्होंने दावा किया कि इन यात्राओं पर लगभग 60 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जिसमें कोई भी आधिकारिक सरकारी या संसदीय दौरा शामिल नहीं है। पात्रा ने राहुल गांधी के चुनावी हलफनामों का जिक्र करते हुए कहा कि आकलन वर्ष 2013-14 से 2022-23 तक फॉर्म 26 के हलफनामों में उनके द्वारा घोषित आय के विवरण के आधार पर, 10 वर्षों में उनकी कुल घोषित आय 11 करोड़ रुपये थी। ऐसे में सवाल उठता है कि जब आय 11 करोड़ रुपये थी, तो विदेशी यात्राओं पर 60 करोड़ रुपये कैसे खर्च किए गए? किस साल में राहुल गांधी ने कितने पैसे कमाए और कितने खर्च किए? संबित पात्रा बोले कि राहुल गांधी ने 2014-15 में अपनी विदेश यात्रा पर 4.5 करोड़ रुपये खर्च किए थे। वहीं, 2017-18 में राहुल गांधी ने 1.20 करोड़ रुपये कमाए थे और 6 करोड़ रुपये विदेश यात्रा में खर्च किए थे। वहीं, 2019-20 में राहुल गांधी ने 1.39 करोड़ रुपये कमाए थे और उन्होंने विदेश दौरे पर 4.6 करोड़ खर्च कर दिए थे। इसके बाद, 2018-19 में राहुल गांधी की इनकम 1.22 करोड़ थी और उन्होंने अपनी विदेश दौरे पर 3.9 करोड़ रुपये खर्च कर दिए। इसके बाद 2021-22 में राहुल गांधी ने 1.03 करोड़ रुपये कमाए और विदेश यात्रा पर 2.6 करोड़ रुपये खर्च किए। 20 साल में कितनी बढ़ी राहुल गांधी की संपत्ति? बीजेपी सांसद ने ये भी बताया कि 2004 में राहुल गांधी ने जब पहली बार चुनाव लड़ा था, तब उनके चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामे के मुताबिक, उनकी संपत्ति 55.58 लाख थी। वहीं, 2024 में जब आखिरी बार उन्होंने चुनाव आयोग को हलफनामा दिया तो अपनी संपत्ति करीब 21 करोड़ रुपये की बताई थी। ये कैसे मुमकिन है कि राहुल गांधी अपनी इनकम से कई गुना ज्यादा पैसे विदेश दौरों पर खर्च भी करते रहे और उनकी इनकम लगातार बढ़ती गई।  संबिता पात्रा को मंत्री बनने के लिए करना होगा कुछ काम बीजेपी के आरोपों के बारे में पूछे जाने पर रमेश ने कहा कि विश्वगुरु' होने के उनके दावे पूरी तरह से विफल हो गए हैं। वह दिन-ब-दिन चीन के सामने घुटने टेक रहे हैं। इसलिए यहां से ध्यान हटाने के लिए यह सब किया जा रहा है। राहुल गांधी की अतीत की विदेश यात्राओं के बारे में बात करने के बजाय, पात्रा को मंत्री पद पर दावा करने के लिए बेहतर विषय ढूंढने चाहिए। बीजेपी को देश को देना चाहिए जवाब कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर ने कहा कि देश नौकरियों, किसानों, मणिपुर और चीन पर जवाब चाहता है। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया बीजेपी को विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ दुष्प्रचार वाला अभियान चलाने के बजाय बेरोजगारी, महंगाई, गिरती खपत, विदेश नीति में विफलताओं और कमजोर अर्थव्यवस्था पर सवालों का जवाब देना चाहिए।

SIR मुद्दे पर कांग्रेस का हमला, Sukhjinder Singh Randhawa ने दी आंदोलन की चेतावनी

चंडीगढ़. पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री और गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने विधानसभा चुनावों से पहले राज्य में शुरू किए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव से महज कुछ महीने पहले इस प्रक्रिया को लागू करना लोकतांत्रिक व्यवस्था पर संदेह खड़ा करता है। पूर्व उप-मुख्यमंत्री रंधावा ने जारी बयान में कहा कि पंजाब में विधानसभा चुनावों के लिए दस महीने से भी कम समय बचा है। ऐसे में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू करने के पीछे केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि जब पंजाब और उत्तर प्रदेश में चुनाव लगभग एक ही समय पर होने हैं तो SIR पंजाब में अब क्यों लागू किया जा रहा है। चुनाव के बाद SIR की मांग उन्होंने कहा कि यदि चुनाव आयोग का उद्देश्य मतदाता सूचियों को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है तो यह प्रक्रिया चुनाव के बाद भी करवाई जा सकती थी। चुनावों से ठीक पहले इस कदम से लोगों में राजनीतिक मंशा को लेकर शंका पैदा होना स्वाभाविक है। रंधावा ने आरोप लगाया कि भाजपा केंद्र सरकार के प्रभाव में चुनावी प्रक्रियाओं का इस्तेमाल अपने राजनीतिक हितों के लिए करना चाहती है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं को नजर रखने को कहा उन्होंने कहा कि बिहार और पश्चिम बंगाल में भी मतदाता सूचियों को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आई थीं। पंजाब में किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम सूची से हटाने या उसे मतदान से वंचित करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस गांव-गांव और शहर-शहर अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से निगरानी करेगी ताकि कोई भी पात्र मतदाता अपने अधिकार से वंचित न रहे। साथ ही उन्होंने सभी विपक्षी दलों से भी मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की।

Aadi Utsav is a wonderful confluence of tribal pride, culture, and entrepreneurship: Chief Minister Dr. Yadav

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ''आदि उत्सव'' जैसे आयोजन प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी विरासत से विकास के संकल्प को पूरा करने का माध्यम भी हैं। जनजातीय संस्कृति से जुड़ी वैभवशाली परम्पराओं के प्रदर्शन और संरक्षण में ऐसे उत्सवों का विशेष महत्व है। पिछले एक दशक से यह आयोजन जनजातीय समाज की गौरवशाली परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि यह उत्सव हमारी प्राकृतिक, सांस्कृतिक और वैभवशाली विरासत को सहेजने के साथ आधुनिक उद्यमिता के माध्यम से उसे नए आयाम देने का सशक्त मंच बन रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह उत्सव ऐसा प्रतीत हो रहा है, मानो होली और दीपावली एक साथ आ गई हों। उन्होंने मंडला, डिंडोरी, बालाघाट, सिवनी, उमरिया और छिंदवाड़ा अंचल से पहुंचे गोंड एवं बैगा समाज के भाई-बहनों का स्वागत करते हुए आयोजन की भव्यता की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंडला जिले में रामनगर में हुए ''आदि उत्सव'' को मंत्रालय से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मंडला का गोंड आर्ट, कर्मा, सैला और रीना नृत्य तथा बैगा समाज का परधोनी नृत्य जनजातीय संस्कृति की सुंदर अभिव्यक्ति हैं। इन परंपराओं को संरक्षित करने के लिए गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने कोदो-कुटकी सहित अन्य मोटे अनाजों के संरक्षण और प्रोत्साहन के लिए विशेष अभियान चलाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह उत्सव जनजातीय महापुरुषों और वीर नायकों बिरसामुंडा, रानी दुर्गावती, टंट्याभील, राजा शंकरशाह, कुंवर रघुनाथशाह, दलपतशाह की शौर्य गाथाओं का स्मरण कराने वाला प्रेरणादायी मंच भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अपनी जड़ों से जुड़ने और जनजातीय महापुरुषों के वंशजों का सम्मान करने का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है। यह आयोजन जनजातीय अस्मिता, संस्कृति और स्वाभिमान को नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है। आदि उत्सव में हुआ है शिल्पियों का संगम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गत एक दशक से आदि उत्सव का आयोजन हो रहा है जो प्रशंसनीय है। आदि उत्सव में बैगा ही नहीं गौंड और अन्य जनजातीय बंधु हिस्सा ले रहे हैं। आदि शिल्प में उद्यमियों और शिल्पियों का संगम भी हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजाति बोली और परंपराओं को हमें अगली पीढ़ी तक ले जाना है। जनजातीय संस्कृति को संरक्षित करने के लिए पारंपरिक वाद्य यंत्र भी यहां उपयोग में लाए गए हैं। साथ ही कर्मा सेला, लोक नृत्य की छटा बिखरी है। अन्न का उत्सव भी मनाया जा रहा है। प्रदेश में कोदो कुटकी के उत्पादन को प्रोत्साहन दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजाति समाज के नायक भगवान बिरसा मुंडा, रानी दुर्गावती, टंट्या मामा, रघुनाथ शाह, भभूत सिंह आदि के सम्मान के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं। इनमें ऐसे जनजाति नायकों के जन्म स्थल और कर्म स्थल पर कैबिनेट बैठक और अन्य आयोजन किए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मंडला के मेडिकल कॉलेज का नाम राजा ह्दय शाह के नाम पर करने की पहल की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आदि उत्सव के अवसर पर मेगा स्वास्थ्य शिविर के आयोजन की प्रशंसा की। जनजातियों के लिए बढ़ाया है बजट मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजाति वर्ग के कल्याण के लिए 47 हजार 425 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया। तेंदूपत्ता संग्रह कार्य का लाभ जनजाति समाज को मिल रहा है। पीएम जनमन और धरती आबा अभियान से जनजातियों का हित संवर्धन हुआ है। वन धन केंद्रों के माध्यम से भी जनजातीय वर्ग लाभान्वित हो रहा है। अधोसंरचना विकास के कई कार्य किए जा रहे हैं। आकांक्षा योजना के क्रियान्वयन और सांदीपनि एवं एकलव्य विद्यालयों से जनजाति समाज के विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। सिकल सेल जैसे रोगों के नियंत्रण की पहल भी की गई है। गोंडवाना गौरव को नई पहचान दे रहा ‘आदि उत्सव’: केन्द्रीय मंत्रीओरांव केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रीजुएल ओरांव ने कहा कि गोंडवाना राजवंश के इस ऐतिहासिक महल का जीर्णोद्धार कराने के बाद वर्ष 2016 से लगातार यह आदि उत्सव आयोजित किया जा रहा है। जनजातीय गौरव को सम्मान देने की पहल सबसे पहले पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी, जब 1999 में उन्होंने पहली बार जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन किया। मंडला के इस महल के जीर्णोद्धार के लिए मंत्रालय ने 1.97 करोड़ रुपये स्वीकृत किये। आज प्रधानमंत्रीमोदी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान, प्रधानमंत्री जनमन, आहार अनुदान, विभिन्न छात्रवृत्तियाँ, जनजातीय बच्चों की उच्च शिक्षा जैसे अनेक काम जनजातीय समाज के कल्याण के लिए किये जा रहे हैं। आदि उत्सव राष्ट्रीय स्तर पर बना रहा विशिष्ट पहचान : मंत्री  उइके लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री  सम्पतिया उइके ने कहा कि रामनगर का ‘आदि उत्सव’ अब केवल क्षेत्रीय आयोजन नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर जनजातीय अस्मिता, संस्कृति और गौरव के प्रतीक के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत गोंडी बोली में करते हुए जनजातीय समाज की भाषा, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का संदेश दिया। आज यह आयोजन एक बड़े उत्सव के रूप में स्थापित हो चुका है, जिसमें जनजातीय संस्कृति, लोक कला, परंपराओं और इतिहास का भव्य प्रदर्शन किया जा रहा है। आदि उत्सव भावी पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम : सांसदकुलस्ते सांसदफग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि यह आयोजन जनजातीय समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और गौरवशाली इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम बन रहा है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम की शुरुआत से लेकर आज तक राज परिवार, पंडा, पुजारी एवं भूमका समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जिन्होंने जनजातीय विरासत और सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाई है। इस अवसर पर प्रदेश तथा देश के अन्य हिस्सों से आए विभिन्न राज परिवार के सदस्य, जनजातीय गौरव की जानी-मानी हस्तियाँ सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी एवं विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे जनजातीय वर्ग के लोग भी मौजूद रहे।    

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में जल जीवन मिशन बना ग्रामीण बदलाव का आधार

भोपाल  कभी पानी के लिए घंटों इंतजार, हैंडपंपों पर लंबी कतारें और दूर-दूर तक बर्तनों के साथ पानी की तलाश में जाती महिलाएं ग्राम कंधारी की पहचान हुआ करती थीं। गर्मी का मौसम आते ही गांव में पेयजल संकट और गहरा जाता था। कई परिवारों का पूरा दिन पानी की व्यवस्था करने में ही बीत जाता था। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती थी और महिलाओं की दिनचर्या ही बदल जाती थी। आज वही ग्राम कंधारी बदलती ग्रामीण तस्वीर का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है, जहां घर-घर पहुंचता शुद्ध पेयजल लोगों के जीवन में सहजता, सम्मान और विश्वास लेकर आया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ग्रामीण अधोसंरचना को जनजीवन से जोड़ते हुए ऐसी योजनाओं को प्राथमिकता दे रही है, जिनका सीधा प्रभाव आम नागरिकों के जीवन पर दिखाई दे। जल जीवन मिशन अंतर्गत लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा संचालित बसई समूह जल प्रदाय योजना ने दतिया जिले के ग्राम कंधारी सहित क्षेत्र के अनेक गांवों में इसी परिवर्तन को वास्तविक रूप दिया है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री  संपतिया उइके के सतत मार्गदर्शन और नियमित मॉनिटरिंग के कारण योजना का लाभ अंतिम छोर तक रहने वाले परिवारों तक पहुंच रहा है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री  उइके ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में हर परिवार तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा योजनाओं की गुणवत्ता और नियमित संचालन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि ग्रामीणों को दीर्घकालिक लाभ मिल सके। मंत्री  उइके ने कहा कि जल जीवन मिशन महिलाओं के जीवन में सबसे बड़ा सकारात्मक बदलाव लेकर आया है और इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं स्वच्छता की स्थिति मजबूत हुई है। बसई समूह जल प्रदाय योजना लगभग 52.26 करोड़ रूपये की लागत से विकसित की गई। योजना के माध्यम से दतिया एवं भांडेर क्षेत्र के 32 गांवों तक शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। योजना के क्रियान्वयन के बाद ग्राम कंधारी में हर घर नल कनेक्शन के जरिए नियमित जल आपूर्ति शुरू हुई, जिससे ग्रामीण जीवन की पूरी तस्वीर बदल गई। करीब 352 परिवारों वाले ग्राम कंधारी में पहले पेयजल की समस्या सबसे बड़ी चुनौती थी। गांव में सीमित हैंडपंप होने के कारण लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता था। कई बार महिलाओं और बच्चों को दूरस्थ स्थानों तक जाकर पानी लाना पड़ता था। पानी की गुणवत्ता भी बेहतर नहीं थी, जिससे स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बनी रहती थीं। गांव के लोगों के लिए पानी केवल जरूरत नहीं, बल्कि रोजाना संघर्ष का विषय था। योजना शुरू होने के बाद गांव में बड़ा सामाजिक बदलाव देखने को मिला। अब घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचने से महिलाओं को सबसे अधिक राहत मिली है। पहले जहां दिन का अधिकतम समय पानी जुटाने में निकल जाता था, वहीं अब वे परिवार और अन्य कार्यों के लिए पर्याप्त समय दे पा रही हैं। बच्चों को भी राहत मिली है और उनको पढ़ाई के लिए समय मिलने लगा है। गांव में स्वच्छता की स्थिति बेहतर हुई है तथा जलजनित बीमारियों में कमी आई है। ग्रामीणों के जीवन स्तर में यह बदलाव स्पष्ट रूप से महसूस किया जा रहा है। ग्राम कंधारी की यह कहानी केवल एक गांव की कहानी नहीं, बल्कि उस बदलते मध्यप्रदेश की तस्वीर है, जहां विकास योजनाएं आंकड़ों से आगे बढ़कर लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला रही हैं। जल जीवन मिशन के माध्यम से गांवों तक पहुंच रहा शुद्ध पेयजल अब ग्रामीण सम्मान, स्वास्थ्य सुरक्षा और बेहतर भविष्य की नई पहचान बन चुका है।

भक्तों की मेहनत से मिली शनिदेव की मूर्ति, अंगूरी बाग से पुलिस ने की बरामदगी

नई दिल्ली  चांदनी चौक इलाके में अंग्रेजों के जमाने के मंदिर से चोरी हुई शनिदेव की अष्टधातु की मूर्ति मिल गई है। चोर ने मूर्ति को लाल के किले के पास स्थित अंगूरी बाग इलाके में महज चार हजार रुपये में बेच दिया था। मामले का खुलासा मंदिर के ही एक भक्त की वजह से हो सका। वह खुद आरोपी की तलाश कर रहे थे। संदेह होने पर पुलिस को बुलाया गया और कल देर रात मूर्ति को बरामद कर लिया गया। अब कल यानी शनि जयंती के अवसर पर निकलने वाली पारंपरिक नवगृह परिक्रमा हर ‌वर्ष की तरह धूम धाम से निकल सकेगी। परिक्रमा में मूर्ति को भी ले जाया जाता है। यही डर मंदिर के पुजारी को सता रहा था कि परिक्रमा तक मूर्ति मिलेगी या नहीं। अब मूर्ति मिलने पर उन्होंने राहत की सांस ली है। भक्त ने ढूंढे भगवान चांदनी चौक मेट्रो स्टेशन गेट नंबर 5 के पास स्थित श्री शिव नवगृह के मंदिर के पुजारी मुकेश शर्मा ने बताया, हमें शुरू से शक था कि यह मूर्ति बिकने के लिए अंगूरी बाग इलाके में ही जाएगी। इस कारण मंदिर में आने वाले एक भक्त वहां चोर की फोटो लेकर घूम रहे थे और आरोपी के बारे में पता कर रहे थे। कल कुछ सूचना के आधार पर संदेह हुआ कि मूर्ति वहां दुकान चलाने वाली महिला की दुकान में है। इसके बारे में पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर दुकान की तलाशी ली, जिसमें मूर्ति बरामद हो गई। महिला ने चार हजार रुपये में मूर्ति खरीदने का खुलासा किया है। फिलहाल मूर्ति को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है। कोर्ट के जरिए वापस लेंगे मूर्ति पुजारी ने बताया कि वह आज कोर्ट जाकर कानूनी प्रक्रिया के तहत मूर्ति को वापस अपने कब्जे में लेंगे। इसके बाद मूर्ति को मंदिर में स्थापित किया जाएगा। कल सुबह अभिषेक होगा, महालड्डू भोग लगेगा, फिर प्रसाद बंटेगा और शाम चार बजे शोभा यात्रा निकाली जाएगी। जो आस-पास के कई स्थानों से निकलेगी।