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सम्राट चौधरी सरकार का बड़ा फैसला, शिक्षा समेत कई विभागों के सचिव बदले गए

 पटना बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार ने एक बार फिर बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल किया है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 15 सीनियर अधिकारियों का शुक्रवार को एक साथ ट्रांसफर कर दिया गया। कई विभागों के सचिव और अपर मुख्य सचिव बदले गए हैं। वहीं, कुछ प्रमंडलों के आयुक्त को भी इधर-उधर किया गया है। बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल शिक्षा विभाग के नए सचिव होंगे। 1996 बैच के आईएएस सैंथिल कुमार को श्रम संसाधन विभाग का अपर मुख्य सचिव बनाया गया है। वह पिछड़ा और अति पिछड़ा कल्याण विभाग के भी अपर मुख्य सचिव के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे। वह पहले गन्ना उद्योग विभाग के एसीएस थे। नई व्यवस्था में एचआर श्रीनिवास को पिछड़ा एवं अति पिछड़ा कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया गया है। कोसी और पूर्णिया के प्रमंडलीय आयुक्त का ट्रांसफर मुंगेर प्रमंडल के आयुक्त प्रेम सिंह मीणा को भागलपुर प्रमंडल के आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है। कोसी (सहरसा) और पूर्णिया के प्रमंडलीय आयुक्त राजेश कुमार का पटना ट्रांसफर कर लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग का प्रधान सचिव बना गया है। पंकज पाल पथ निर्माण विभाग के नए सचिव पीएचईडी विभाग के पंकज कुमार पाल सचिव को पथ निर्माण विभाग का सचिव बना दिया गया है। वहीं, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह को सूचना प्रावैधिकी विभाग में तबादला कर दिया गया है। उनके पास बेल्ट्रॉन के प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार रहेगा धर्मेंद्र गन्ना उद्योग विभाग के सचिव सहकारिता विभाग के सचिव आईएएस धर्मेंद्र सिंह का गन्ना उद्योग विभाग में ट्रांसफर कर दिया गया है। इसी तरह, दीपक आनंद को श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग से हटाकर खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग में तैनात किया गया है। विनोद सिंह गुंजियाल शिक्षा विभाग के नए सचिव, बी राजेंदर को हटाया बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल को शिक्षा विभाग का सचिव बना दिया गया है, वह विभाग के संपूर्ण प्रभार में रहेंगे। इसके अतिरिक्त वह खेल विभाग में भी सचिव का पद संभालेंगे। दोनों विभागों के वे अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे। साथ ही, बी राजेंदर को शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया गया है। वह सामान्य प्रशासन विभाग के एसीएस हैं। भागलपुर के प्रमंडलीय आयुक्त का ट्रांसफर भागलपुर के प्रमंडलीय आयुक्त अवनीश कुमार सिंह का पटना ट्रांसफर कर दिया गया है। वह खान एवं भूतत्व विभाग का सचिव बनाए गए हैं। दरभंगा के प्रमंडलीय आयुक्त हिमांशु कुमार राय को कोसी प्रमंडल का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है। जीविका के सीईओ हिमांशु शर्मा को विज्ञान प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग का प्रभारी सचिव नियुक्त किया गया है। उनके पास जीविका का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा। पूर्णिया के डीएम के पास प्रमंडलीय आयुक्त का भी प्रभार पूर्णिया के डीएम अंशुल कुमार को पूर्णिया के प्रमंडलीय आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। श्रीकांत कुंडलिक खांडेकर को सीएम सचिवालय में संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है। भोजपुर और नालंदा के उप विकास आयुक्त का ट्रांसफर भोजपुर जिला परिषद की मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी गुजंन सिंह को सीएम सचिवालय में संयुक्त सचिव की पोस्ट मिली है। नालंदा के उप विकास आयुक्त को पटना का उप विकास आयुक्त सह जिला परिषद का मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी नियुक्त किया गया है

यूपी में मेट्रो कनेक्टिविटी होगी मजबूत, 21 स्टेशनों से चलेंगी इलेक्ट्रिक सिटी बसें

लखनऊ यूपी के लखनऊ, कानपुर और आगरा में मेट्रो यात्रियों की संख्या बढ़ाने और सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुगम बनाने की दिशा में शासन ने बड़े कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मण्डलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में हुई बैठक में कनेक्टिविटी और सुविधाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। यात्रियों की सबसे बड़ी समस्या ‘लास्ट माइल कनेक्टिविटी’ (अंतिम मील संपर्क) को दूर करने के लिए लखनऊ में 29, कानपुर में 50 और आगरा में 27 नए ऑटो एवं टेम्पो सर्कुलर रूट तय किए गए हैं। इन रूटों पर नए स्टॉपेज भी बनाए जाएंगे ताकि यात्रियों को स्टेशन तक पहुंचने में भटकना न पड़े। इसके अतिरिक्त, मेट्रो स्टेशनों के पास वाहनों को खड़ा करने की समस्या को हल करने के लिए लखनऊ में 71, कानपुर में 24 और आगरा में 19 नए पार्किंग स्थलों को अंतिम रूप दिया गया है, जिनके लिए नगर निगम जल्द ही निविदा प्रक्रिया शुरू करेगा। शटल बस सेवा और डिजिटल मोबिलिटी सरकारी कर्मचारियों और आम नागरिकों की सुविधा के लिए प्रमुख आवासीय कॉलोनियों और कार्यालयों को नजदीकी मेट्रो स्टेशनों से जोड़ने के लिए चरणबद्ध तरीके से शटल बस सेवाएं शुरू की जाएंगी। यूपीएमआरसी ऐप-आधारित सेवाओं जैसे यूटीयू मोबिलिटी के साथ-साथ ओला, उबर और रैपिडो के साथ भी समन्वय बढ़ा रहा है ताकि यात्रियों को घर से स्टेशन तक निर्बाध परिवहन मिले। पार्किंग और कनेक्टिविटी अनिवार्य बैठक में यूपीएमआरसी के एमडी सुशील कुमार ने स्पष्ट किया कि मेट्रो को जन-जन तक पहुंचाने के लिए पार्किंग और कनेक्टिविटी अनिवार्य है। मण्डलायुक्त ने निर्देश दिए कि सार्वजनिक परिवहन के लाभों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए डिजिटल बोर्ड और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक अभियान चलाया जाए। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ इन योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की सख्त हिदायत दी है। इस पहल से न केवल ट्रैफिक जाम कम होगा, बल्कि प्रदूषण पर भी लगाम लगेगी। मेट्रो के 21 स्टेशनों के सामने से गुजरेंगी इलेक्ट्रिक सिटी बसें वहीं लखनऊ में निजी वाहनों का लोग कम इस्तेमाल करें। ताकि ईधन की बचत की जा सकें। इसी मकसद से मेट्रो के 21 स्टेशनों को ई सिटी बसों से लिंक किया जाएगा। ताकि लखनऊ शहर में ज्यादा से ज्यादा लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट से सफर कर सकें, इसके लिए मेट्रो के 21 स्टेशनों से एसी इलेक्ट्रिक सिटी बसों को संचालित किया जाएगा। यानी सिटी बसों का संचालन ऐसे रूटों पर किया जाए कि हर मेट्रो स्टेशन के सामने से सिटी बसों का आवागमन हो, जिससे दैनिक यात्री निजी वाहनों को छोड़कर सिटी बसें या मेट्रो से सफर कर सकें।

कुचाई शिव मंदिर में हठभक्ति का अद्भुत नजारा, महिलाओं समेत सैकड़ों भक्तों ने आग पर चलकर निभाई आस्था

 सरायकेला वैशाख महीने की तपती गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच सरायकेला-खरसावां जिले के कुचाई स्थित प्रसिद्ध शिव मंदिर में शुक्रवार को आस्था, तपस्या और हठभक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला. वैशाख संक्रांति के अवसर पर सैकड़ों शिवभक्तों ने दहकते अंगारों पर नंगे पांव चलकर अपनी श्रद्धा और भक्ति का परिचय दिया. मंदिर परिसर में सुबह से ही धार्मिक माहौल बना रहा और ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना में लीन दिखे. मन्नत पूरी होने पर अंगारों पर चले श्रद्धालु वैशाख संक्रांति के मौके पर शिवभक्तों ने गुरुवार से ही उपवास और व्रत रखकर पूजा-अर्चना शुरू कर दी थी. भक्तों ने मंदिर परिसर में भैरवनाथ की विशेष पूजा की और भगवान शिव से मांगी गई मन्नत पूरी होने की खुशी में जलते अंगारों पर चलकर अपनी हठभक्ति का प्रदर्शन किया. भक्तों का मानना है कि शरीर को कष्ट देकर वे अपने आराध्य देव महादेव के प्रति समर्पण और विश्वास व्यक्त करते हैं. अंगारों पर चलते समय श्रद्धालुओं के चेहरे पर न डर दिखाई दिया और न ही दर्द का कोई भाव. ढोल और नगाड़ों की थाप के बीच भक्त पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ आग पर चलते रहे. महिलाओं ने भी निभाई आस्था की परंपरा हठभक्ति की इस परंपरा में महिलाओं की भागीदारी भी काफी बड़ी रही. माथे पर जल से भरा कलश लेकर महिलाएं स्थानीय जलाशयों से मंदिर परिसर तक पहुंचीं. इसके बाद उन्होंने सबसे पहले जलते अंगारों पर चलकर अपनी आस्था प्रकट की और फिर मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक किया. ढोल-नगाड़ों की धुन पर महिलाएं भी पूरे उत्साह के साथ इस धार्मिक अनुष्ठान में शामिल हुईं. बताया गया कि इस वर्ष सौ से अधिक महिलाओं ने अंगारों पर चलकर अपनी मन्नत पूरी होने की खुशी जाहिर की. श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान शिव के प्रति अटूट विश्वास ही उन्हें यह शक्ति प्रदान करता है. हजारों श्रद्धालुओं ने देखा भक्ति का अनोखा दृश्य कुचाई शिव मंदिर में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान को देखने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे. मंदिर परिसर और आसपास का इलाका सुबह से ही भक्तिमय माहौल में डूबा रहा. श्रद्धालु पूरे आयोजन के दौरान भगवान भोलेनाथ के जयकारे लगाते रहे. इस अवसर पर पुजारी गोपाल चंद्र तिवारी ने विधिवत पूजा-अर्चना कराई. वहीं गोपी राम सोय, दिनेश महतो, विष्णु महतो, लाल बिहारी महतो, लुदरी हेंब्रम, रेखा दास, विष्णु सोय, गोपी सोय, अक्षय महतो और सामु सोय समेत दर्जनों भोक्ताओं ने आग पर चलकर हठभक्ति की परंपरा निभाई. 209 वर्षों से निभाई जा रही है परंपरा कुचाई स्थित शिव मंदिर में आग पर चलने की यह परंपरा करीब 209 वर्षों से लगातार निभाई जा रही है. बताया जाता है कि 13 मई 1817 में मंदिर की स्थापना के बाद से हर वर्ष वैशाख संक्रांति के अवसर पर यह धार्मिक आयोजन किया जाता है. स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार यह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति अटूट विश्वास और समर्पण का प्रतीक है. पीढ़ी दर पीढ़ी लोग इस अनुष्ठान में शामिल होकर अपनी श्रद्धा व्यक्त करते आ रहे हैं. शरीर को कष्ट देकर मिलती है आत्मिक शांति हठभक्ति में शामिल भक्तों का कहना है कि शरीर को कष्ट देकर उन्हें मानसिक और आत्मिक शांति मिलती है. उनका मानना है कि यह पूरी प्रक्रिया भगवान शिव को समर्पित है और उनकी कृपा से ही भक्त बिना किसी नुकसान के आग पर चल पाते हैं. भोक्ताओं के अनुसार वर्षों से इस परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है, लेकिन आज तक किसी भक्त को आग पर चलने से कोई गंभीर नुकसान नहीं हुआ. श्रद्धालुओं का कहना है कि न तो किसी को गंभीर जलन की समस्या हुई और न ही किसी को इलाज की जरूरत पड़ी. भक्त इसे भगवान की महिमा और आस्था की शक्ति मानते हैं. श्रद्धालुओं ने साझा किया अनुभव श्रद्धालु सुजन सिंह सोय ने बताया कि वैशाख संक्रांति के अवसर पर कुचाई शिव मंदिर में पिछले 209 वर्षों से आग पर चलने की परंपरा निभाई जा रही है. उन्होंने कहा कि हर वर्ष सैकड़ों श्रद्धालु इस धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेते हैं और भगवान शिव से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. वहीं भोक्ता दिनेश महतो ने बताया कि वे पिछले 18 वर्षों से इस परंपरा का हिस्सा बन रहे हैं. उन्होंने कहा कि भगवान शिव के प्रति उनकी आस्था ही उन्हें हर वर्ष अंगारों पर चलने की शक्ति देती है. श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया यह अनुष्ठान उनके जीवन में आत्मिक संतोष और शांति प्रदान करता है.

घर पर बनाएं शाही राजभोग कुल्फी, केसर और ड्रायफ्रूट्स से भरपूर मलाईदार स्वाद

 गर्मियों में ठंडी-ठंडी आइसक्रीम खाने का मन भला किसका नहीं करता लेकिन बाहर की आइसक्रीम और कुल्फी में बहुत ज्यादा चीनी और प्रिर्जेवेटिव्स का डर रहता है. ऐसे में क्यों ना इस गर्मी में आप घर पर ही राजभोग कुल्फी बनाएं. यह एक ऐसी ही शाही और पारंपरिक मलाईदार डेजर्ट है जो ड्रायफ्रूट्स, केसर और मावे के लाजवाब स्वाद से भरपूर होती है जो बच्चों को खासतौर पर खूब पसंद होती है. यहां हम आपको इसकी आसान रेसिपी बता रहे हैं जिसकी मदद से आप बिना किसी झंझट के बाजार से भी गाढ़ी, दानेदार और मलाईदार राजभोग कुल्फी घर पर ही तैयार कर सकते हैं जिसे खाते ही बच्चे और बड़े सभी इसके दीवाने हो जाएंगे. शाही राजभोग कुल्फी रेसिपी सामग्री फुल क्रीम दूध: 1 लीटर सम्बंधित ख़बरें मावा (खोया) या मिल्क पाउडर चीनी (स्वादानुसार) केसर के धागे 15-20 (2 चम्मच गुनगुने दूध में भीगे हुए) काजू, बादाम और पिस्ता (बारीक कटे हुए) हरी इलायची पाउडर 1 चम्मच कॉर्नफ्लोर (2 चम्मच ठंडे दूध में घुला हुआ कुल्फी को गाढ़ा करने के लिए है. आप चाहें तो स्किप कर सकते हैं) कुल्फी बनाने का तरीका दूध उबालें: एक भारी तले की कड़ाही में दूध डालकर तेज आंच पर उबालें. जब दूध में उबाल आ जाए, तो गैस की आंच धीमी कर दें. दूध को गाढ़ा करें: दूध को धीमी आंच पर तब तक पकाएं जब तक कि वह अपनी मूल मात्रा का आधा न रह जाए. कड़ाही के किनारों पर जमने वाली मलाई को खुरचकर दूध में ही मिलाते रहें, इससे कुल्फी दानेदार बनेगी. मावा और चीनी मिलाएं: जब दूध आधा रह जाए, तो इसमें कद्दूकस किया हुआ मावा (या मिल्क पाउडर) और चीनी डालकर अच्छी तरह मिलाएं. इसे 5 मिनट तक और पकाएं ताकि मावा और चीनी दूध में पूरी तरह घुल जाएं. फ्लेवर और कॉर्नफ्लोर डालें: अब इसमें केसर वाला दूध, इलायची पाउडर और बारीक कटे हुए ड्रायफ्रूट्स (थोड़े से ड्रायफ्रूट्स गार्निशिंग के लिए बचा लें) डालें. इसके बाद, कॉर्नफ्लोर का घोल धीरे-धीरे डालते हुए दूध को लगातार चलाते रहें ताकि गुठलियां न बनें. दूध को 3-4 मिनट और पकाएं, मिश्रण काफी गाढ़ा और मलाईदार हो जाएगा. ठंडा करें: गैस बंद कर दें और कुल्फी के इस गाढ़े मिश्रण को पूरी तरह से ठंडा होने दें. ठंडा होने के बाद इसे कुल्फी मोल्ड (सांचे) या पेपर कप में डालें. ऊपर से बचे हुए कटे हुए ड्रायफ्रूट्स डालें. फ्रीज करें: मोल्ड को एल्युमिनियम फॉयल से ढक दें (ताकि बर्फ के क्रिस्टल न जमने पाएं) और बीच में एक कट लगाकर कुल्फी स्टिक लगा दें. इसे 7-8 घंटे या पूरी रात के लिए डीप फ्रीजर में जमने के लिए रख दें. आपकी ठंडी-ठंडी, मलाईदार राजभोग कुल्फी तैयार है! सांचे को कुछ सेकंड पानी में डिपोकर कुल्फी बाहर निकालें और सर्व करें.

फीफा वर्ल्ड कप 2026 का ऑफिशियल एंथम ‘दाई दाई’ रिलीज, शकीरा-बर्ना बॉय की जोड़ी ने मचाया धमाल

16 साल बाद शकीरा एक बार फिर अपने गाने से वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने को तैयार हैं। 2010 के फीफा वर्ल्ड कप का एंथम ‘वाका वाका’ से दुनिया हिलाने वाली शकीरा अब फीफा विश्व कप 2026 के एंथम ‘दाई दाई’ के साथ वापस लौटी हैं। बीते दिनों गाने का टीजर जारी होने के बाद से फैंस इसका बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, अब फीफा वर्ल्ड कप 2026 का ऑफिशियल एंथम ‘दाई दाई’ रिलीज कर दिया गया है। इसे शकीरा ने नाइजीरियन अफ्रोबीट्स के दिग्गज बर्ना बॉय के साथ मिलकर बनाया है। गाने में ये है खास ‘दाई दाई’ लगभग चार मिनट का गाना है, जिसमें अफ्रोबीट्स, डांस-पॉप, वर्ल्ड बीट्स और रेगेटन की भरपूर झलक देखने को मिलती है। ये इस गाने को और भी शानदार बनाती है। गाने के बोल फुटबॉल की भावना को पूरी तरह से दिखाते हैं और खिलाड़ियों व फैंस को उत्साहित करने वाला संदेश भी देते हैं। गाने में फुटबॉल के दिग्गजों का नाम भी लेते हैं, जिनमें माराडोना, माल्डिनी, रोमारियो, क्रिस्टियानो रोनाल्डो, बेकहम, काका और मेस्सी के नाम शामिल हैं। इसके अलावा गाने में इस साल फीफा में भाग लेने वाले देशों जैसे ब्राजील, अर्जेंटीना, कोलंबिया, संयुक्त राज्य अमेरिका और नीदरलैंड्स के नाम भी सुनने को मिलते हैं। ‘वाका वाका’ के बाद फीफा में शकीरा की वापसी ‘दाई दाई’ के जरिए शकीरा ने दूसरी बार फीफा का ऑफिशियल एंथम तैयार किया है। इससे पहले उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में 2010 के फीफा विश्व कप के लिए आइकॉनिक गीत ‘वाका वाका (दिस टाइम फॉर अफ्रीका)’ बनाया था। इसने काफी पॉपुलर्टी पाई थी। जुलाई 2010 में ‘वाका वाका’ बिलबोर्ड हॉट लैटिन सॉन्ग्स, लैटिन एयरप्ले और लैटिन पॉप एयरप्ले चार्ट पर दूसरे नंबर पर पहुंचा। लैटिन रिदम एयरप्ले पर यह आठवें नंबर पर रहा और इसी दौरान बिलबोर्ड हॉट 100 पर 38वें नंबर तक पहुंचा। लैटिन डिजिटल सॉन्ग सेल्स चार्ट पर भी यह 42 हफ्तों तक पहले नंबर पर रहा, जो शाक का उस चार्ट पर सबसे लंबे समय तक रहने वाला गाना है। 11 जून से होगी फीफा 2026 की शुरुआत 2026 फीफा विश्व कप 11 जून को मैक्सिको सिटी के एस्टाडियो एज्टेका स्टेडियम में शुरू होगा। 19 जुलाई को न्यू जर्सी के मेटलाइफ स्टेडियम में इसका फाइनल होगा। जिसका नाम खेलों के लिए बदलकर न्यूयॉर्क न्यू जर्सी स्टेडियम कर दिया गया है। फाइनल में शकीरा, मैडोना और बीटीएस फीफा फाइनल के पहले हाफटाइम शो में जबरदस्त परफॉर्मेंस भी देंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले- गुरुदेव की कृपा से जीवन में सत्य और संस्कारों की प्रेरणा मिलती है

गुरुदेव के आशीर्वाद से ही सनातन और सत्य मार्ग का अनुसरण करने की प्रेरणा मिलती है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन में जय गुरुदेव आश्रम में गुरुदेव से की भेंट गुरुदेव के अमृत प्रवचन का श्रवण किया मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लाखों अनुयायियों को संबोधित किया मुख्यमंत्री डॉ. यादव लोक कल्याणकारी कार्यों से अब जनता के हो गए है लाडले : गुरुदेव उमाकांत महाराज जय गुरुदेव आश्रम उज्जैन में सिंहस्थ जैसा नजारा, स्व अनुशासन से अनुशासित लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में जय गुरुदेव आश्रम में गुरुदेव महाराज से भेंट कर आशीर्वाद लिया और उनके अमृत प्रवचनों का श्रवण किया। गुरुदेव उमाकांत जी महाराज ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को आशीर्वाद देते हुए कहा कि सदा ऐसे ही समाज की सेवा में लगे रहे और सत्य, सनातन, अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए जन सेवा करते रहें। आज आप अपने कार्यों से जनता के प्यारे बन गए है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुदेव के निर्देश पर मंच से ही गुरुदेव के अनुयायियों को संबोधित करते हुए कहा कि बाबा गुरुदेव की उज्जैन में आना हमारे लिए सौभाग्य की बात है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गुरुवर को देखकर ऐसा लगता है कि स्वयं ईश्वर को देख लिया हो, यह आश्रम परमात्मा का घर है, परमात्मा का आशीर्वाद है कि हमें गुरुवर का आशीर्वाद उनके स्वरूप में मिल रहा है और जीवन में सत्य कार्य करने का जो मार्गदर्शन हमें गुरुवर के चरणों से मिलता है उसे जीवन जीने का नया मार्ग हमें प्राप्त होता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महाराज जी का आशीर्वाद चिर काल तक हम सभी को मिलता रहे और आनंद के साथ जीवन का यापन करें। सनातन धर्म में मान्यता है कि 84 लाख योनियों के बाद हमें यह मानव जीवन मिलता है। इस मानव जीवन को सही तरीके से जीने का जो मार्ग आपके द्वारा बताया जाता है उससे जीवन सरल और संयमित होकर जीने का मार्ग मिल जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा की महाराज जी की कृपा से हमने प्रदेश में गौशालाओं को बनाने और संरक्षण देने का काम कर रहे हैं। उज्जैन सहित अन्य धार्मिक नगरों में भी शराब बंदी के लागू की है और प्रदेश में उज्जैन ओंकारेश्वर, महेश्वर दतिया, पीतांबरा पीठ, सलकनपुर, ओरछा, चित्रकूट सहित 19 नगर में शराबबंदी का आदेश भगवत कृपा से ही हो पाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ-2028 में उज्जैन को हम मेट्रो सिटी के साथ-साथ आध्यात्मिक, सांस्कृतिक नगरी के रूप में भी स्थापित कर पाएंगे। उज्जैन अब धार्मिक नगरी के साथ उत्सव की नगरी भी हो गई है गुरुदेव की कृपा से अब हम हर जिले में गीता भवन बना रहे हैं, जहां पर भगवान श्रीकृष्ण के उपदेशों का वाचन और आध्यात्मिक अध्ययन भी हो सकेगा। भगवान श्रीकृष्ण के अनुयायी होते हुए हम सब गोपालन को भी अपना रहे हैं और गोपालक परिवारों को आर्थिक सहायता भी दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के साथ देश के अलग अलग जगहों से आए भक्त जय गुरुदेव आश्रम के माध्यम से भक्ति मार्ग की ओर आगे बढ़ रहे हैं। गुरुदेव के आशीर्वाद से ही हम प्रदेश की जनता की समर्पित भाव से सेवा में लगे हैं। महाराज गुरुदेव का आशीर्वाद और उनका मार्गदर्शन सदैव मिलता है।  

ब्रिक्स समिट में मतभेद, 60 एजेंडों पर सहमति लेकिन ईरान मुद्दे पर विवाद

नई दिल्ली ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में कोई साझा बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि विदेश मंत्रियों के बीच ईरान के मसले को लेकर कोई आम सहमति नहीं बन सकी। ऐसी स्थिति में साझा बयान जारी नहीं किया गया। इसकी बजाय एक आउटकम स्टेटमेंट ही जारी किया गया है। जानकारी मिली है कि ईरान के मसले पर भले ही ब्रिक्स देशों के बीच कोई आम सहमति नहीं बन सकी, लेकिन कुल 60 एजेंडों पर सभी ने विचार साझा किए। सभी देशों के इन एजेंडों पर एक जैसे विचार रहे। इन एजेंडों में ऊर्जा सहयोग, डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, व्यापार, क्लाइमेट ऐक्शन, फाइनेंशियल कनेक्टिविटी आदि शामिल हैं। दिल्ली में आयोजित विदेश मंत्रियों की इस समिट में ईरान के मसले को लेकर मतभेद हो गए। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ब्रिक्स देशों से मांग की कि वे बयान में ईरान और इजरायल के हमलों की निंदा करें। उन्होंने कहा कि इन दोनों देशों ने ईरान पर जो हमले किए, वह गलत थे और अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ थे। लेकिन ज्यादातर इस पर सहमत नहीं दिखे। इसकी वजह यह है कि भारत समेत ज्यादातर देश चाहते थे कि ईरान के साथ ही अमेरिका और इजरायल के साथ भी संतुलन बनाकर रखा जाए। इसी को लेकर मीटिंग में मतभेद पैदा हो गए और अंत में साझा बयान जारी न करने पर ही सहमति बनी। गुरुवार को इस समिट की शुरुआत हुई थी। अपने शुरुआती भाषण में भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोले जाने की वकालत की थी। उनका कहना था कि समुद्र में संचालन सुरक्षित और निरंतर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी जंग में अंतरराष्ट्रीय सीमा के तहत आने वाले समुद्री क्षेत्र में किसी तरह की बंदी नहीं होनी चाहिए। वहीं ईरान के विदेश मंत्री ने ब्रिक्स देशों से अपील करते हुए कहा कि आप सभी अमेरिका और इजरायल की ओर से हमारे ऊपर हमले की निंदा करें। इस पर सहमति ही नहीं बन पाई। कुछ देश इसके लिए तैयार थे, लेकिन कुछ मुल्कों ने इस पर सहमति नहीं जताई। जयशंकर और अराघची के बीच समिट से इतर क्या हुई बात ब्रिक्स समिट के इतर जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अराघची के बीच बातचीत हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने इजराय और ईरान के बीच चल रही जंग को लेकर बात की। वहीं जयशंकर ने होर्मुज से जहाजों की आवाजाही होने देने की मांग की। एस. जयशंकर ने कहा कि हमने दोनों देशों के हितों को लेकर बात की। हमारी इस बात को लेकर सहमति है कि जरूरी मुद्दों को बातचीत से हल किया जाए। हमारी क्षेत्रीय स्थिरता और हालातों को लेकर भी बात हुई।

जहां मोबाइल और दस्तावेज रखना था मना, उसी अबूझमाड़ से पहली बार लाइसेंस के लिए पहुंचे ग्रामीण

नारायणपुर. कभी नक्सलियों की दहशत, बंदूक की छाया और बाहरी दुनिया से कटे रहने के लिए पहचाना जाने वाला अबूझमाड़ अब धीरे-धीरे बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। जिन गांवों में वर्षों तक मोबाइल रखना, सरकारी दस्तावेज बनवाना और प्रशासन से संपर्क रखना तक गुनाह माना जाता था, वहां अब ग्रामीण खुद आगे बढ़कर ड्राइविंग लाइसेंस बनवा रहे हैं। नारायणपुर पुलिस द्वारा चलाए जा रहे माड़ मैत्री अभियान के तहत जिला मुख्यालय में आयोजित ड्राइविंग लाइसेंस शिविर में यह बदलाव साफ तौर पर देखने को मिला। शिविर में 300 से अधिक ग्रामीण पहुंचे, जिनमें अबूझमाड़ के दूरस्थ गांवों के लोग और आत्मसमर्पित नक्सली भी शामिल रहे। शिविर की सबसे खास तस्वीर तब सामने आई, जब अबूझमाड़ के पदमकोट गांव से युवा गजानंद वड्डे लाइसेंस बनवाने पहुंचा। गजानंद ने बताया कि उसके गांव में वर्षों तक नक्सलियों का प्रभाव इतना गहरा था कि लोग सरकारी योजनाओं से दूर रहते थे। गांव में मोबाइल रखने, पहचान पत्र बनवाने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में शामिल होने पर नक्सलीयों द्वारा रोक जैसी स्थिति थी। गजानंद ने बताया कि गांव में पुलिस कैंप खुलने के बाद हालात बदलने लगे हैं। अब ग्रामीणों में डर कम हुआ है और लोग सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आगे आने लगे हैं। उन्होंने कहा कि वह अपने गांव का पहला युवा है, जिसके पास मोटरसाइकिल है और अब वह उसका वैध ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने जिला मुख्यालय पहुंचा है। लाइसेंस बनवाने आत्मसमर्पित नक्सली भी पहुंचे शिविर शिविर में एक और भावुक तस्वीर तब देखने को मिली, जब 10 से अधिक आत्मसमर्पित नक्सली भी लाइसेंस बनवाने पहुंचे। इनमें आत्मसमर्पित नक्सली अरब भी शामिल था। उन्होंने बताया कि शासन की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर उसने हथियार छोड़ मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। पहले जंगल और हिंसा की जिंदगी के अलावा कोई रास्ता नजर नहीं आता था, लेकिन आत्मसमर्पण के बाद शासन की योजनाओं का लाभ मिलने लगा। उसे रोजगार उपलब्ध कराया गया, जिससे उसने मोटरसाइकिल खरीदी और अब वह कानूनी रूप से वाहन चलाने के लिए लाइसेंस बनवा रहा है। अलग-अलग इलाकों में लगाए जाएंगे शिविर : एसपी एक समय ऐसा था जब नक्सली संगठन युवाओं के हाथों में हथियार थमाते थे, लेकिन अब वही युवा रोजगार, पहचान और सामान्य जीवन की ओर लौटते दिखाई दे रहे हैं। नारायणपुर एसपी रॉबिंसन गुड़िया ने बताया कि माड़ मैत्री अभियान के तहत लगातार अलग-अलग क्षेत्रों में शिविर लगाए जा रहे हैं। जिला मुख्यालय में आयोजित इस शिविर में अबूझमाड़ के कई गांवों से ग्रामीण पहुंचे हैं। 300 से अधिक लोग ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने आए हैं। एसपी ने कहा कि कई ऐसे ग्रामीण भी शिविर में पहुंचे हैं, जिनके गांव में पहली बार किसी व्यक्ति का ड्राइविंग लाइसेंस बनने जा रहा है। आने वाले समय में भी ऐसे शिविर अलग-अलग इलाकों में लगाए जाएंगे, ताकि दूरस्थ गांवों के लोग शासन की सुविधाओं और कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़ सकें।

वाहन चालकों पर बढ़ा बोझ, मांडर टोल पर फिर बढ़े नए रेट

 मांडर एनएच में मांडर टोल प्लाजा में एक महीने में दूसरी बार टोल टैक्स के दर में भारी बढ़ोतरी वाहन मालिक पर बोझ बनते जा रहा है। बताया जा रहा है कि यहां एक अप्रैल को ही टोल टैक्स के दरों में प्रति वाहन 5 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। उसके बाद फिर एक माह पूरा होते ही दूसरी बार एक मई से प्रति वाहन 40 से 275 रुपये तक टोल टैक्स बढ़ा दिया गया है। मांडर टोल प्लाजा के मैनेजर अभिषेक साहू के अनुसार पूर्व में कार, जीप, वैन अन्य लाइट वाहन का सिंगल जर्नी में टोल टैक्स 80 रुपये और उसी दिन रिटर्न जर्नी पर 115 रुपये लगता था। जो अब बढ़कर 120 व 180 रुपये हो गया है। सेम डे के रिटर्न जर्नी बढ़कर 405 व 610 इसी तरह कमर्शियल व्हीकल व लाइट गुड्स व्हीकल में पूर्व में टोल टैक्स का दर सिंगल जर्नी में 125 व रिटर्न जर्नी पर 190 रुपये थे जो अब बढ़कर 195 व 290 रुपये हो गया है। बस व ट्रक में पहले सिंगल जर्नी में 265 व सेम डे के रिटर्न जर्नी में 395 रुपये लगता था जो अब बढ़कर 405 व 610 हो गया है। थ्री एक्सल कमर्शियल व्हीकल में पूर्व में सिंगल जर्नी में 285 व रिटर्न जर्नी में 430 रुपये लगता था जो अब बढ़कर 445 व 665 हो गया है। चार से छह एक्सल वाले व्हीकल में पूर्व में सिंगल जर्नी पर 410 व रिटर्न जर्नी पर 620 रुपये लगता था जो अब बढ़कर 635 व 955 हो गया है। फास्टटैग लेन देन ऑटोमेटिक मोड से होगा इसके अलावा ओवरसाइज व्हीकल में पूर्व में सिंगल जर्नी पर 500 व सेम डे रिटर्न जर्नी पर 755 रुपये लगते थे जो अब बढ़कर 775 के 1165 रुपया हो गया है। इसके अलावा सभी प्रकार के वाहनों के मासिक पास के दर में भी भारी बढ़ोतरी की गई है। साथ ही टोल प्लाजा में अब एक मई से सौ प्रतिशत फास्टटैग लेन देन ऑटोमेटिक मोड से होगा। वाहन का नंबर डालकर मैनुअल मोड की व्यवस्था बंद हो गई है. मैनेजर अभिषेक साहू ने बताया की टॉल टैक्स दर मे बढ़ोतरी मांडर के अलावा रांची गुमला मार्ग पतराचौली टॉल प्लाजा मे दरों की बढ़ोतरी हुई है।  

राजस्थान में ग्रीन एनर्जी पर जोर: एनर्जी कॉन्क्लेव में इलेक्ट्रिक व्हीकल से पहुंचे मुख्यमंत्री

जयपुर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने ईधन बचाने को लेकर एक बार फिर अलग संदेश देने की कोशिश की है. हाल ही में अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या कम करने के बाद शुक्रवार (15 मई) को मुख्यमंत्री जयपुर में आयोजित एनर्जी कॉन्क्लेव में इलेक्ट्रिक व्हीकल यानी ईवी से पहुंचे. मुख्यमंत्री का ईवी से कार्यक्रम स्थल पहुंचना पूरे आयोजन में चर्चा का विषय बना रहा. इसे सरकार की ग्रीन एनर्जी, पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने की पहल के तौर पर देखा जा रहा है. सरकार का ग्रीन एनर्जी पर फोकस उनके इस कदम को प्रतीकात्मक होने के साथ-साथ एक बड़े संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है कि सरकार अब पारंपरिक ईंधन के विकल्पों को बढ़ावा देना चाहती है. राजस्थान सरकार पिछले कुछ समय से सौर ऊर्जा, ग्रीन एनर्जी और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को लेकर लगातार फोकस कर रही है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा कई बार मंच से यह कह चुके हैं कि प्रदेश आने वाले वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा. काफिला कर चुके हैं सीएम मुख्यमंत्री ने हाल ही में अपने काफिले में शामिल वाहनों की संख्या कम कर दी थी. ताकि आम लोगों को कम परेशानी हो, ट्रैफिक बाधित न हो और सरकारी खर्चों में भी कटौती की जा सके. अब ईवी से कार्यक्रम में पहुंचकर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा बचत का संदेश देने की कोशिश की है. कई जिलों में सोलर पार्क प्रोजेक्ट विकसित करने पर जोर जयपुर में आयोजित एनर्जी कॉन्क्लेव में ग्रीन एनर्जी निवेश, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, सोलर और विंड एनर्जी सेक्टर की संभावनाओं पर चर्चा हुई. राजस्थान पहले से ही देश में सोलर एनर्जी उत्पादन का बड़ा केंद्र बनकर उभरा है. राज्य के कई जिलों में बड़े स्तर पर सोलर पार्क और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट विकसित किए जा रहे हैं. सरकार का फोकस अब पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के साथ-साथ स्वच्छ और वैकल्पिक ऊर्जा के विस्तार पर भी है.